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Indian Railwayने चीन और जर्मनी को छोड़ा पीछे, कर दिखाया कुछ ऐसा कि बड़े-बड़े देश छूट गए पीछे, जानें क्या है पूरा मामला?

नई दिल्ली क्या नई बनी कारों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने में सड़क परिवहन का दबदबा कम हो रहा है? क्या अब ज्यादा कारें रेल से जा रही हैं? जवाब है, हां। पिछले 11 सालों में भारतीय रेलवे ने कारों को ढोने में जबरदस्त तरक्की की है। वित्त वर्ष 2013-14 में जितनी कारें बनती थीं, उनमें से सिर्फ 1.5% ही रेल से जाती थीं। लेकिन 2024-25 में यह आंकड़ा बढ़कर 24% से भी ज्यादा हो गया है। इस मामले में भारतीय रेलवे ने कई बड़े-बड़े देशों को पीछे छोड़ दिया है। टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक रेलवे के अधिकारियों ने बताया कि पिछले वित्तीय वर्ष में देश में कुल 50.6 लाख कारें बनीं। इनमें से लगभग 12.5 लाख कारों को ट्रेनों से भेजा गया। एक बड़े रेलवे अधिकारी ने कहा, ‘सिर्फ पिछले चार सालों में, ट्रेनों से जाने वाली कारों की संख्या 14.7% से बढ़कर लगभग 24.5% हो गई है। हमें उम्मीद है कि यह सिलसिला जारी रहेगा। क्योंकि कार बनाने वाली कंपनियों को रेल ज्यादा सुविधाजनक, किफायती और पर्यावरण के लिए बेहतर लगती है।’ सिर्फ एक देश है आगे ट्रेन के जरिए कार ढोने के मामले में भारत ने चीन और जर्मनी समेत दुनिया के कई बड़े-बड़े देशों को पीछे छोड़ दिया है। पूरी दुनिया में ट्रेनों से कारों को ढोने के मामले में भारत दूसरे नंबर पर है। पहले नंबर पर अमेरिका है, जहां लगभग 75 लाख कारें रेल से जाती हैं। जर्मनी लगभग 6 लाख कारों के साथ तीसरे नंबर पर है। कितना पड़ा फर्क? उद्योग के सूत्रों का कहना है कि ट्रकों से 600 किमी से ज्यादा दूर जाने वाली कारों की संख्या लगभग आधी हो गई है। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि रेलवे इस काम में ज्यादा हिस्सा पाना चाहता है। एक लॉजिस्टिक्स कंपनी के बड़े अधिकारी ने कहा कि इससे सड़क परिवहन उद्योग को बहुत नुकसान हुआ है, जो ज्यादा लोगों को नौकरी देता है। रेलवे ज्यादा रैक उपलब्ध करा रहा है और कारोबार बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन भी दे रहा है। कैसे आया उछाल? रेल मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि ट्रेनों से कारों को ढोने में यह उछाल लगातार कोशिशों की वजह से आया है। 2013-14 में इस काम के लिए सिर्फ 10 रैक थे। साल 2021 तक इनकी संख्या 29 हो गई और अब यह 170 है। उन्होंने बताया कि 2024-25 में कारों को ढोने के लिए कुल 7,578 चक्कर लगाए गए। एसयूवी भी हुई शामिल दो साल पहले रेलवे ने वैगनों (wagons) को इस तरह से डिजाइन किया कि उनमें SUV जैसी बड़ी गाड़ियां भी दोनों डेक पर आ सकें। पहले एक रैक में 27 वैगन होते थे, जिनमें सिर्फ 135 एसयूवी आ पाती थीं। लेकिन अब इनकी संख्या दोगुनी होकर 270 हो गई है। इससे रेलवे एक बार में ज्यादा गाड़ियां ले जा पाता है। रेलवे की इस तरक्की से सड़क परिवहन कंपनियों को जरूर थोड़ी परेशानी हो रही होगी। लेकिन इससे पर्यावरण को फायदा हो रहा है, क्योंकि ट्रेनें ट्रकों के मुकाबले कम प्रदूषण करती हैं। साथ ही कार बनाने वाली कंपनियों को भी गाड़ियां भेजने का एक सस्ता और आसान तरीका मिल गया है।

सेंसेक्स-निफ्टी में थमी लगातार दो दिन की गिरावट , 16 जून को इन अहम स्तरों पर रहेगी बाजार की नजर

मुंबई  इजरायल-ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष (Israel-Iran Conflict) के बीच भी भारतीय शेयर बाजार (Indian Stock Market) में तेजी के साथ कारोबार हो रहा है. सुस्ती के साथ खुले बाजार में कुछ ही मिनटों में बीते सप्ताह की गिरावट पर ब्रेक लगा नजर आया. मार्केट ओपन होने के कुछ मिनटों बाद ही बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स (Sensex) 270 अंक तक उछल गया, तो वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी (Nifty) भी ग्रीन जोन में कारोबार करता दिखाई दिया. इस बीच PowerGrid, Bharti Airtel समेत कई दिग्गज कंपनियों के शेयर बढ़त में कारोबार करते नजर आए.    सुस्त शुरुआत के बाद भागे इंडेक्स मिले-जुले ग्लोबल संकेतों के बीच सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को शेयर बाजार की सुस्त शुरुआत हुई. BSE Sensex अपने पिछले बंद 81,118.60 की तुलना में टूटकर 81,034.45 पर ओपन हुआ, लेकिन कुछ ही देर में इसकी गिरावट तेजी में तब्दील हो गई और ये उछलकर 81,409.06 पर कारोबार करता नजर आया. NSE Nifty की अगर बात करें, तो इसने अपने पिछले बंद 24,718.60 के लेवल से मामूली बढ़त लेते हुए 24,732.35 पर कारोबार शुरू किया और फिर कुछ ही देर में 24,817.65 के लेवल पर जा पहुंचा.  290 ग्रीन में, 430 शेयर रेड जोन में खुले Israel-Iran Conflict के बीच एशियाई शेयर बाजारों में ज्यादातर में ग्रीन जोन में कारोबार होता नजर आया था. हालांकि, कई दबाव में भी दिखाई दिए. ऐसे में भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत में करीब 290 कंपनियों के शेयरों में पिछले बंद के मुकाबले तेजी के साथ कारोबार की शुरुआत हुई, जबकि 430 कंपनियों के शेयर ऐसे थे, जो गिरावट के साथ रेड जोन में ओपन हुए. इसके अलावा 83 कंपनियों के स्टॉक्स में किसी भी तरह का कोई बदलाव देखने को नहीं मिला. शुरुआती कारोबार में Cipla, L&T, Shriram Finance, Bajaj Finance और Asian Paints के शेयर तेजी के साथ कारोबार कर रहे थे और सबसे ज्यादा भागने वाले शेयरों में शामिल थे. तो वहीं दूसरी ओर Dr Reddy’s Labs, Kotak Mahindra Bank, Jio Financial और Axis Bank के शेयर में गिरावट के साथ कारोबार शुरू हुआ.  

निर्मला सीतारमण ने कहा- हमारी अर्थव्यवस्था विश्वास-आधारित शासन के साथ नई ऊंचाइयों को छू सकती है

नई दिल्ली  वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के तहत पिछले 11 वर्षों में स्ट्रक्चरल सुधारों ने भारत के व्यापक आर्थिक बुनियादी ढांचे को नया आकार दिया है। वित्त मंत्री ने एक मीडिया आर्टिकल में लिखा कि भारत का सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में उभरना कई अनुकूल कारकों पर आधारित है। साथ ही यह अर्थव्यवस्था के प्रमुख क्षेत्रों जैसे बैंकों, कॉरपोरेट्स, परिवारों, सरकार और एक्सटर्नल सेक्टर की बैलेंस शीट को मजबूत करने के साथ निकटता से जुड़ा हुआ है। वित्त मंत्री सीतारमण ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, “पिछले 11 वर्षों में भारतीय अर्थव्यवस्था का ‘ट्विन डेफिसिट प्रॉब्लम से फाइव-बैलेंस शीट लाभ’ तक परिवर्तन पीएम मोदी के नेतृत्व में ठोस नीतिगत प्रयासों का परिणाम है।” उन्होंने आगे कहा कि “जब हम 2014 में सत्ता में आए तो हमारी सबसे पहली प्राथमिकता विकास को पुनर्जीवित करना था। जीएसटी, आईबीसी, आरईआरए और महामारी के वर्षों के दौरान, पीएलआई योजना और ईसीएलजीएस जैसे संरचनात्मक सुधार पेश किए गए, ताकि क्रेडिट-योग्य एमएसएमई को कोरोना से उबरने में मदद मिल सके।” वित्त मंत्री ने अपने आर्टिकल में बताया कि वित्त वर्ष 2013-14 में पूंजी निवेश जीडीपी के 1.7 प्रतिशत से बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में 3.2 प्रतिशत हो गया। 11 वर्षों में, 88 हवाई अड्डों का संचालन किया गया, 31,000 किलोमीटर रेल पटरियां बिछाई गईं, मेट्रो नेटवर्क का चार गुना से अधिक विस्तार किया गया, बंदरगाह की क्षमता दोगुनी हो गई और राष्ट्रीय राजमार्ग की लंबाई 60 प्रतिशत बढ़ गई। वित्त मंत्री ने अपने आर्टिकल में भारत की गरीबी उन्मूलन में महत्वपूर्ण प्रगति को लेकर भी जानकारी दी। उन्होंने विश्व बैंक के लेटेस्ट आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि भारत ने पिछले दशक में अपनी अत्यधिक गरीबी दर को कम करने में प्रगति की है और देश में अत्यधिक गरीबी दर 2011-12 में 27.1 प्रतिशत से घटकर 2022-23 में 5.3 प्रतिशत दर्ज की गई है। वित्त मंत्री के अनुसार, यूपीआई द्वारा शुरू की गई डिजिटल भुगतान क्रांति से लेकर मुद्रा ऋण द्वारा प्रकट उद्यमशीलता की लालसा तक, पिछले 11 वर्षों ने दिखाया है कि जब हम विश्वास-आधारित शासन को नियामक बोझ में कमी और सार्वजनिक वस्तुओं के विस्तार के साथ जोड़ते हैं तो हमारी अर्थव्यवस्था नई ऊंचाइयों को छू सकती है।

अब निवेशकों को इस स्कीम के तहत डिपॉजिट पर पहले के मुकाबले कम ब्याज मिलेगा, SBI ने निवेशकों को दिया झटका

मुंबई  देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने एफडी वाले निवेशकों को बड़ा झटका दिया है। एसबीआई ने अपनी स्पेशल एफडी “अमृत वृष्टि” योजना पर ब्याज दर घटा दी है। नई ब्याज दर 15 जून, 2025 से प्रभावी है। इसका मतलब है कि अब निवेशकों को इस स्कीम के तहत डिपॉजिट पर पहले के मुकाबले कम ब्याज मिलेगा। हालांकि, एसबीआई ने अन्य नियमित एफडी ब्याज दरों में किसी तरह के बदलाव नहीं किए हैं। कितनी हुई है कटौती अमृत वृष्टि योजना के तहत ब्याज दरों में 25 आधार अंकों (बीपीएस) की कटौती की गई है। सामान्य नागरिकों के लिए ब्याज दर अब 444 दिनों की अवधि पर 6.6% प्रति वर्ष है, जबकि पहले यह दर 6.85% प्रति वर्ष थी। सीनियर सिटीजन और सुपर सीनियर सिटीजन ब्याज दर में अपने अतिरिक्त लाभ के लिए पात्र हैं। सीनियर सिटीजन को अब एसबीआई की विशेष एफडी योजना पर 7.10% प्रति वर्ष की ब्याज दर की पेशकश की जाती है। वरिष्ठ नागरिकों (80 वर्ष और उससे अधिक) के लिए लागू ब्याज दर के अलावा 10 बीपीएस का अतिरिक्त लाभ लागू है। संशोधन के बाद सुपर सीनियर सिटीजंस (80 वर्ष और उससे अधिक आयु) को अब प्रति वर्ष 7.20% की ब्याज दर की पेशकश की जाती है। समय से पहले निकासी पर जुर्माना 5 लाख रुपये तक की रिटेल एफडी के लिए समय से पहले निकासी (सभी अवधियों में) के लिए 0.50% का जुर्माना लागू होगा। 5 लाख रुपये से अधिक लेकिन 3 करोड़ रुपये से कम की रिटेल एफडी के लिए समय से पहले निकासी को लागू जुर्माना 1% (सभी अवधियों में) होगा। बता दें कि पिछले सप्ताह आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक और केनरा बैंक सहित अधिकांश बैंकों ने अपनी सावधि जमा ब्याज दरों में कटौती की, क्योंकि भारतीय रिजर्व बैंक ने अपनी जून की मौद्रिक नीति बैठक में रेपो दर में 50 आधार अंकों की कटौती की थी।  

म्यूजिशियन से शादी करने जा रहीं IPL सेंसेशन Kavya Maran? रजनीकांत से जुड़ा है कनेक्शन

मुंबई   IPL सेंसेशन कही जाने वालीं सनराइजर्स हैदराबाद की मालकिन काव्या मारन (Kavya Maran) आईपीएल के सीजन में काफी चर्चा में रहती हैं। मगर इन दिनों वह अपने आईपीएल नहीं बल्कि किसी और वजह से सुर्खियां बटोर रही हैं। 33 साल की काव्या की शादी की खबरें इस वक्त सोशल मीडिया पर टॉक ऑफ द टाउन बना हुआ है। उनका नाम जिस शख्स से जुड़ा रहा है, वो इस वक्त भारत का सबसे अमीर म्यूजिशियन है। यह म्यूजिशियन कोई और नहीं बल्कि आरआरआर और मास्टर समेत कई सुपरहिट फिल्मों के हिट ट्रैक बना चुके अनिरुद्ध रविचंदर (Anirudh Ravichander) हैं। लेटेस्ट रूमर्स के मुताबिक, काव्या और अनिरुद्ध जल्द ही एक-दूसरे के साथ शादी रचाने वाले हैं। काव्या मारन की म्यूजिशियन से हो रही शादी? अनिरुद्ध रविचंदर म्यूजिक इंडस्ट्री का बड़ा नाम हैं। वह हमेशा अपने हिट ट्रैक के लिए चर्चा में रहे हैं, लेकिन इस वक्त काव्या के साथ अफेयर को लेकर लाइमलाइट में आ गए हैं। रजनीकांत के भतीजे अनिरुद्ध को लेकर खबर आ रही है कि वे काव्या को डेट कर रहे हैं। काव्या मारन की अनुमानित नेटवर्थ लगभग 409 करोड़ बताई जाती है. वो सन टीवी नेटवर्क लिमिटेड की कार्यकारी निदेशक और सनराइजर्स हैदराबाद (आईपीएल) और सनराइजर्स ईस्टर्न केप (एसए20) की सह-मालकिन और प्रमुख हैं. हाल ही में एक रेडिट यूजर ने एक पोस्ट में दावा करते हुए लिखा है, “यह अनुमान लगाया जा रहा है कि संगीतकार अनिरुद्ध रविचंदर और सन टीवी के कलानिधि मारन की बेटी और सनराइजर्स हैदराबाद आईपीएल टीम की मालकिन काव्या मारन रिलेशनशिप में हैं। रिपोर्ट्स बताती हैं कि सुपरस्टार रजनीकांत ने कलानिधि मारन से उनके रिश्ते के बारे में पर्सनली बात की है, जिससे उम्मीद है कि यह जोड़ा जल्द ही शादी के बंधन में बंध सकता है।” इस पोस्ट पर एक यूजर ने दावा किया है कि उसने काव्या और अनिरुद्ध को लास वेगास में साथ देखा था। यूजर ने कमेंट किया, “मैंने खुद उन्हें एक साल पहले लास वेगास में देखा था, वे वेगास स्ट्रिप पर टहलते हुए अच्छा समय बिता रहे थे।” एक यूजर ने कहा, “मैं अनिरुद्ध का एक पुराना इंटरव्यू देख रहा था जिसमें टैरो रीडर उसकी लव लाइफ के बारे में भविष्यवाणी कर रही है और वह कहती है कि वह किसी ऐसे व्यक्ति से शादी करेंगे जो बहुत एजुकेटेड है और जो दूरसंचार प्रसारण उद्योग में है। अगर यह सच है तो यह वाकई क्रेजी है।” खैर, अभी तक काव्या या फिर अनिरुद्ध की तरफ से इन अफवाहों को लेकर कोई बयान सामने नहीं आया है। 

एयर इंडिया हादसे और युद्ध संकट से बीमा प्रीमियम में भारी उछाल की आशंका, इंडिगो को लग सकता है अरबों का झटका

नई दिल्ली  भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन कंपनी इंडिगो के लिए आने वाला महीना आर्थिक मोर्चे पर चुनौतीपूर्ण हो सकता है. सूत्रों के अनुसार, कंपनी के एविएशन बीमा प्रीमियम में अचानक 30% से 50% तक की वृद्धि संभव है. इसका कारण एयर इंडिया विमान हादसे से जुड़े भारी-भरकम बीमा दावों और ईरान-इज़राइल जैसे युद्ध संकट से उपजा वैश्विक बीमा दबाव है. यह सिर्फ एक कंपनी की आंतरिक वित्तीय चुनौती नहीं है, बल्कि पूरे भारतीय एविएशन क्षेत्र के लिए एक गंभीर चेतावनी है. इंडिगो का 20 अरब डॉलर का बीमा दायरा मार्च 2025 तक इंडिगो के पास 437 विमानों का बेड़ा था, जिनमें मुख्य रूप से Airbus A320 और A321 जैसे नैरो-बॉडी विमान शामिल हैं.     हर विमान की बीमा वैल्यू: $30–$45 मिलियन     कुल बीमा कवरेज: लगभग $20 बिलियन     वार्षिक बीमा प्रीमियम: $14–15 मिलियन यह बीमा न्यू इंडिया एश्योरेंस के नेतृत्व में तैयार किया गया था, जिसमें ICICI लोम्बार्ड जैसी घरेलू कंपनियां शामिल थीं. पुनर्बीमा लंदन के बाजार में कराया गया था. एयर इंडिया हादसे ने बदल दिया समीकरण हाल ही में अहमदाबाद में हुए एयर इंडिया विमान हादसे ने पूरे इंश्योरेंस सिस्टम को हिला दिया है.     हुल (Hull) और लायबिलिटी क्लेम्स की अनुमानित सीमा: $120–200 मिलियन     यह भारत के इतिहास का सबसे बड़ा एविएशन इंश्योरेंस पेआउट बन सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह क्लेम वैश्विक बीमाकर्ताओं तक जाता है, तो वे भारत जैसे उभरते बाजारों में जोखिम मूल्यांकन और प्रीमियम दरों को ऊंचा कर सकते हैं. भूराजनीति से वॉर रिस्क बीमा पर असर बीमा प्रीमियम बढ़ने का दूसरा बड़ा कारण ईरान-इज़राइल संघर्ष जैसे भू-राजनीतिक तनाव हैं.     ईरानी एयरस्पेस के बंद होने से कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानें डायवर्ट करनी पड़ीं.     बीमाकर्ता ऐसे समय में “वॉर रिस्क रेट्स” स्वत: ही बढ़ा देते हैं.     वॉर बीमा में केवल 7 दिन की कैंसलेशन क्लॉज़ होती है, जिससे बीमा किसी भी समय रद्द किया जा सकता है. इन स्थितियों के कारण भारत में संचालित हर एयरलाइन को अपने विमानों के लिए अतिरिक्त सुरक्षा लागत चुकानी पड़ सकती है. यात्री दावे, कानूनी मामले और बीमा उद्योग का दबाव हाउडेन इंडिया इंश्योरेंस के CEO अमित अग्रवाल के अनुसार, एयर इंडिया हादसे के यात्रियों को मुआवज़ा मॉन्ट्रियल कन्वेंशन के अनुसार मिलेगा, लेकिन यह प्रक्रिया यात्रियों की राष्ट्रीयता और मुकदमों की प्रकृति पर निर्भर करेगी. GIC Re के चेयरमैन एन. रामास्वामी ने कहा कि इतने बड़े क्लेम से रीइंश्योरेंस कंपनियों की रेटिंग और क्षमता दोनों प्रभावित होंगी. इससे संकेत मिलता है कि भविष्य में बीमा कवर प्राप्त करना कठिन या महंगा हो सकता है. अब इंडिगो क्या कर सकती है?     प्रीमियम पर पुनः बातचीत:     इंडिगो को लंदन मार्केट में नई शर्तों पर बीमा रिन्यू करना होगा.     बेड़े में बदलाव:     पुराने विमानों को हटाकर बीमा लागत कम की जा सकती है.     युद्ध क्षेत्र से बचाव:     ऐसे रूट्स को अस्थायी रूप से निलंबित किया जा सकता है जहां वॉर रिस्क अधिक है. एक हादसा और पूरा सिस्टम संकट में एयर इंडिया हादसा केवल एक तकनीकी चूक नहीं था, इसका प्रभाव पूरे भारतीय एविएशन सेक्टर की बीमा नीति और वित्तीय स्थिरता पर पड़ रहा है. इंडिगो, जो कम लागत वाले संचालन के लिए जानी जाती है, इस बीमा प्रीमियम वृद्धि से आर्थिक दबाव में आ सकती है. यदि युद्ध संकट और वैश्विक बीमा बाजार की सख्ती बनी रही, तो आने वाले समय में एयर टिकट की कीमतें, विमानों की उड़ान क्षमता और यात्रियों की सुरक्षा लागत – सब कुछ प्रभावित हो सकता है.

इंडियन एविएशन सेक्टर का सबसे बड़ा क्लेम, एयर इंडिया का विमान क्रैश, बीमा कम्पनी की निकलेगी धुल

नई दिल्ली गुजरात के अहमदाबाद में गुरुवार को हुए प्लेन हादसे का बीमा दावा भारत के विमानन क्षेत्र का सबसे महंगा बीमा दावा हो सकता है। इस हादसे में 241 यात्री और केबिन क्रू के मेंबर मारे गए थे। एक अनुमान के मुताबिक देनदारियां 211 मिलियन से 280 मिलियन डॉलर के बीच हो सकती है, जो 2400 करोड़ रुपए के बराबर है। लंदन के गैटविक एयरपोर्ट के लिए रवाना हुआ एयर इंडिया का बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर विमान अहमदाबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से दोपहर 1:38 बजे उड़ा। उड़ान भरने के 32 सेकंड के भीतर ही विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। विमान के यात्रियों में 169 भारतीय नागरिक, 53 ब्रिटिश नागरिक, 7 पुर्तगाली नागरिक और एक कनाडाई नागरिक शामिल थे। दुर्घटना में केवल एक ब्रिटिश-भारतीय यात्री विश्वाश कुमार रमेश बच गया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन (जीआईसी) के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक रामास्वामी नारायणन के अनुसार, एयरलाइन की बेड़े की बीमा पॉलिसी आमतौर पर विमान के ढांचे, स्पेयर पार्ट्स, यात्रियों और तीसरे पक्ष के प्रति देयताओं जैसे जोखिमों को कवर करती है। ड्रीमलाइनर दुर्घटना के मामले में दोनों ही धाराओं के तहत दावे किए जाने की उम्मीद है, क्योंकि बोइंग आग के गोले में तब्दील हो गया था। इस हादसे में सैकड़ों लोग मारे गए थे। वहीं, हाउडेन इंडिया के सीईओ और एमडी अमित अग्रवाल ने कहा कि बीमा का मूल्यांकन उम्र, विन्यास और अन्य कारकों पर निर्भर करेगा और यह 211 मिलियन डॉलर से 280 मिलियन डॉलर के बीच होगा। दुर्घटना में शामिल ड्रीमलाइनर (VT-ABN) 2013 मॉडल था और इसका 2021 में लगभग 115 मिलियन डॉलर का बीमा किया गया था। अग्रवाल ने कहा कि चाहे नुकसान आंशिक हो या पूर्ण, नुकसान की भरपाई एयरलाइन द्वारा घोषित मूल्य के आधार पर की जाएगी। यात्रियों के लिए मुआवजा 1999 के मॉन्ट्रियल कन्वेंशन के तहत आएगा, जिस पर भारत ने 2009 में हस्ताक्षर किए थे। मुआवजे की गणना एसडीआर के तहत की जाएगी, जिसका वर्तमान मूल्य 1,28,821 एसडीआर या लगभग 1,71,000 डॉलर है, जो 1.47 करोड़ रुपए है। इसके अलावा, तीसरे पक्ष की संपत्ति नुकसान देयता और दुर्घटना स्थल पर जानमाल के नुकसान को भी गिना जाएगा। टाटा समूह ने गुरुवार को विमान दुर्घटना में जान गंवाने वाले प्रत्येक यात्री के परिवारों को 1 करोड़ रुपए का मुआवजा देने की घोषणा की।

इजरायल-ईरान संघर्ष से सेंसेक्स 573 अंक फिसला, शेयर बाजार लाल निशान में बंद हुआ

मुंबई  भारतीय शेयर बाजार शुक्रवार के कारोबारी सत्र में लाल निशान में बंद हुआ। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 573.38 अंक या 0.70 प्रतिशत की गिरावट के साथ 81,118.60 और निफ्टी 169.60 अंक या 0.68 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 24,718.60 पर था। बाजार में गिरावट का नेतृत्व बैंकिंग शेयरों ने किया। निफ्टी बैंक 555.20 अंक या 0.99 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 55,527.35 पर था। इसके अलावा ऑटो, पीएसयू बैंक, फाइनेंशियल सर्विसेज, फार्मा, एफएमसीजी, मेटल और एनर्जी इंडेक्स लाल निशान में बंद हुए। आईटी, रियल्टी और मीडिया इंडेक्स हरे निशान में थे। लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में भी बिकवाली देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 213 अंक या 0.37 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 58,227.45 पर था। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 90 अंक या 0.49 प्रतिशत के दबाव के साथ 18,374 पर था। सेंसेक्स पैक में टेक महिंद्रा, टीसीएस, मारुति सुजुकी और सन फार्मा टॉप गेनर्स थे। आईसीटी, एसबीआई, इंडसइंड बैंक, एचडीएफसी बैंक, टाइटन, कोटक महिंद्रा बैंक, रिलायंस इंडस्ट्रीज, पावर ग्रिड, बजाज फिनसर्व, इटरनल और हिंदुस्तान यूनिलीवर टॉप लूजर्स थे। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड में रिसर्च प्रमुख विनोद नायर ने कहा, “कमजोर वैश्विक संकेतों और विदेशी संस्थागत निवेशकों की निकासी के कारण भारतीय इक्विटी बेंचमार्क में गिरावट का दबाव देखने को मिला। ईरान पर इजरायल के सैन्य हमले के बाद बढ़े भू-राजनीतिक तनाव से बाजार के सेंटीमेंट पर काफी असर पड़ा है।” उन्होंने आगे कहा, “ब्रेंट क्रूड की कीमतें 76 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं, जो इस साल का उच्चतम स्तर है, जिससे तनाव जारी रहने पर मुद्रास्फीति की आशंका बढ़ गई है। सोने की मांग मजबूत बनी हुई है, जो सुरक्षित-संपत्तियों की ओर बदलाव को दर्शाती है। निकट भविष्य में, भू-राजनीतिक स्थिरता लौटने तक बाजार सेंटीमेंट सतर्क रहने की संभावना है।” भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत गिरावट के साथ हुई थी। सुबह करीब 9.33 बजे, सेंसेक्स 896.5 अंक या 1.10 प्रतिशत की गिरावट के साथ 80,795.44 पर कारोबार कर रहा था, जबकि निफ्टी 278.5 अंक या 1.12 प्रतिशत की गिरावट के साथ 24,609.70 पर कारोबार कर रहा था।

जंग की ‘तपीश ‘ में तपकर चमका कुंदन ! 10 ग्राम का भाव ₹1 लाख के पार, आया सबसे तेज उछाल, तोड़े सारे रिकॉर्ड- आगे क्या?

मुंबई  इजरायल का ईरान की राजधानी तेहरान पर अटैक के बाद Gold की कीमत में भारी उछाल दिखाई दे रहा है. MCX पर सोना 1 लाख रुपये के पार पहुंच चुका है. इस उछाल के साथ ही Gold ने इतिहास बना दिया है. MCX पर सोने की कीमत पहली बार ₹1,00,000 प्रति 10 ग्राम के पार पहुंची है. इस लेवल पर पहुंचने में गोल्‍ड को सिर्फ 74 दिन का वक्‍त लगा है.  यह अब‍तक की सबसे तेज उछाल है. गोल्‍ड ने इस साल निवेशकों को मार्केट से भी ज्‍यादा रिटर्न बनाकर दिया है, जिसने यह साबित किया है कि Gold आज भी मुसीबत में काम वाला असेट है. इसके अलावा, चांदी का भाव भी रिकॉर्ड बना रहा है. MCX पर चांदी का भाव 1 लाख 6 हजार प्रति किलो के पार है, जो कुछ दिन पहले 96 हजार के करीब था.  22 अप्रैल का रिकॉर्ड फिर टूटा इससे पहले 22 अप्रैल को भी गोल्ड फ्यूचर्स 2,048 रुपये की तेजी के साथ 1,00,000 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंचा था. अब एक बार फिर सोने की कीमत ने इस लेवल को पार करते हुए नया रिकॉर्ड बना दिया है. मिडिल ईस्ट में तनाव और कमजोर रुपया बना वजह एक्सपर्ट्स का कहना है कि इजराइल और ईरान के बीच तनाव (Israel-Iran conflict) की वजह से मिडिल ईस्ट में हालात गंभीर(Middle East Tensions) हो गए हैं. इसके चलते ग्लोबल इन्वेस्टर्स ने सेफ इनवेस्टमेंट ऑप्शन यानी सोने की तरफ रुख किया है. साथ ही, भारतीय रुपये में कमजोरी भी सोने की कीमतों (Gold Rate In India) में तेजी का बड़ा कारण बना. इस वक्त रुपया 56 पैसे टूटकर 86.08 पर पहुंच गया है, जो डॉलर के मुकाबले भारी गिरावट है. ग्लोबल लेवल पर भी सोना चमका न सिर्फ भारत, बल्कि ग्लोबल मार्केट में भी सोना चमक रहा है. इंटरनेशनल मार्केट में गोल्ड फ्यूचर्स 41.62 डॉलर प्रति औंस यानी 1.22% चढ़कर 3,444.02 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया. यूएस डेटा और फेड की पॉलिसी भी फैक्टर एक्सपर्ट के अनुसार, अमेरिका के प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (PPI) और कोर PPI के डेटा से ये साफ हुआ है कि अमेरिका में महंगाई थोड़ी कम हो रही है. इससे इन्वेस्टर्स को उम्मीद है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व आगे चलकर अपनी मौद्रिक नीति थोड़ी आसान कर सकता है. इसका असर भी सोने की कीमतों (Gold Prices) पर पड़ा है. अक्टूबर डिलीवरी वाला सोना भी रिकॉर्ड हाई पर MCX पर अक्टूबर डिलीवरी वाला सोना भी 1,970 रुपये चढ़कर 1,01,295 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया, जो अभी तक का सबसे ऊंचा स्तर है. सोना-चांदी के भाव में क्‍यों आई इतनी तेजी?      ईरान पर इजरायल के हमले से जियोपॉलिटिकल टेंशन बढ़ चुका है. जिस कारण निवेशक अब गोल्‍ड में निवेश की ओर रुख कर रहे हैं. ऐसे में सोने के दाम में जबरदस्‍त उछाल देखी जा रही है.      वहीं क्रूड ऑयल के दाम में 13 फीसदी तक की उछाल आई है. जिससे दुनियाभर में आर्थिक संकट गहरा गया है. इसके अलावा, डॉलर इंडेक्‍स में भी लगातार कमजोरी देखी जा रही है.      दुनिया के ज्‍यादातर देश फिर से गोल्‍ड को स्‍टोर करने लगे हैं. चीन और भारत में सोने की खरीदारी खूब हो रही है, जिस कारण गोल्‍ड प्राइस के दाम में तेजी आई है.      ETF जैसे निवेश विकल्‍प में खरीदारी तेज हुई है, जिस कारण Gold-Silver प्राइस प्रभावित हुआ है.  MCX पर गोल्‍ड प्राइस  आज एमसीएक्‍स पर रिकॉर्ड तोड़ते हुए 5 अगस्‍त वायदा के लिए सोना 1742 महंगा होकर 100154 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया. जबकि चांदी के दाम में 533 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई, जिससे यह 1 लाख 6 हजार रुपये के पार पहुंच गया.  सर्राफा बाजार में सोना  सर्राफा बाजार में भी सोने की कीमत में बढ़ोतरी देखी जा रही है. 24 कैरेट गोल्‍ड सर्राफा बाजार में 97460 रुपये प्रति 10 ग्राम पर है. 23 कैरेट का भाव 97070 रुपये और 22 कैरेट का भाव 89270 रुपये प्रति 10 ग्राम था. इसके अलावा, 18 कैरेट गोल्‍ड प्राइस 73090 रुपये प्रति 10 ग्राम पर था. चांदी का भाव आज सर्राफा बाजार में 1 लाख 6 हजार रुपये प्रति किलो पर है.   

ईरान पर इजराइल का बड़ा हमला, शेयर बाजार भरभरा के गिरा

मुंबई  13 जून को भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिली. सेंसेक्स 1,264 अंकों की गिरावट के साथ 80,427 पर खुला, जबकि निफ्टी 415 अंकों की गिरावट के साथ 24,473 के स्तर पर पहुंच गया. प्री-ओपनिंग सेशन में ही भारी गिरावट देखने को मिली, जिससे निवेशकों में चिंता का माहौल बन गया है.  शुरुआती कारोबार में 9:16 बजे सेंसेक्स 1,136.88 अंक (1.55%) टूटकर 80,555.09 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 332.95 अंक (1.67%) गिरकर 24,555.25 पर ट्रेड करता दिखा.यह गिरावट इजराइल-ईरान हमले के चलते ग्लोबल मार्केट में बने दबाव का असर है. शेयर बाजार में गिरावट की वजह  इजराइल की ओर से ईरान पर एयरस्ट्राइक किए जाने की खबर के बाद ग्लोबल मार्केट में तनाव बढ़ गया, जिसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा. मार्केट पर ग्लोबल जियोपॉलिटिकल टेंशन का सीधा असर साफ नजर आ रहा है. सभी सेक्टोरल इंडक्स लाल निशान में कारोबार कर रहे हैं, जिनमें मेटल, ऑयल एवं गैस, फार्मा, ऑटो, पीएसयू बैंक, आईटी 1-1.5 प्रतिशत लुढ़के हैं. इंडिगो और स्पाइसजेट के शेयर करीब 5% टूटे इस बीच, एयर इंडिया के अहमदाबाद में हुए विमान हादसे (Ahmedabad Plane Crash) का असर एविएशन सेक्टर की कंपनियों पर भी दिखा. इंटरग्लोब एविएशन (इंडिगो) और स्पाइसजेट दोनों के शेयरों में शुरुआती कारोबार में लगभग 5 फीसदी तक की गिरावट देखने को मिली. गुरुवार को हुए इस हादसे में 242 में से करीब सभी लोगों की मौत हो गई, जो पिछले 10 सालों का सबसे बड़ा विमान हादसा बताया जा रहा है. इससे फ्लाइट सेफ्टी को लेकर चिंता और बढ़ गई है. टाटा ग्रुप की कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट एयर इंडिया के अहमदाबाद में हुए भीषण विमान हादसे का असर 9Ahmedabad plane crash impact) टाटा ग्रुप की कंपनियों के शेयरों पर भी देखने को मिला. चूंकि एयर इंडिया अब टाटा ग्रुप का हिस्सा है, इसलिए बाजार में हादसे के बाद निवेशकों की चिंता बढ़ गई. इसके चलते शुक्रवार, 13 जून को टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स, टाटा स्टील, टाटा मोटर्स, टीसीएस (TCS), टाइटन, टाटा पावर, इंडियन होटल्स, टाटा टेक्नोलॉजीज, टाटा कम्युनिकेशंस और टाटा एलेक्सी जैसी बड़ी टाटा ग्रुप कंपनियों के शेयरों में गिरावट देखी गई. एयर इंडिया विमान हादसे ने ना सिर्फ एविएशन सेक्टर बल्कि टाटा ग्रुप के ब्रांड इमेज और निवेशक सेंटिमेंट पर भी असर डाला है.

अब 30 दिन में पोस्‍टपेड से प्रीपेड और प्रीपेड से पोस्‍टपेड में कर सकेंगे स्विच, बदला नियम

नई दिल्ली देश के करोड़ों मोबाइल सब्‍सक्राइबर्स के सिम कार्ड से जुड़ा अहम नियम बदल गया है। लोगों के लिए अब पोस्‍टपेड से प्रीपेड और प्रीपेड से पोस्‍टपेड में स्विच करना आसान हो गया है। दूरसंचार विभाग ने प्रक्र‍िया में बदलाव करते हुए 30 दिन में दोबारा कन्‍वर्जन की मंजूरी दी है। इसका मतलब है कि आप चंद दिनों में ही अपना मोबाइल कनेक्‍शन प्रीपेड से पोस्‍टपेड या पोस्‍टपेड से प्रीपेड में करा सकेंगे। पहले यह लिमिट 90 दिनों की थी। नियम के अनुसार, पहली बार कनेक्‍शन में स्विच करने के बाद दोबारा 30 दिन के अंदर प्रीपेड से पोस्‍टपेड या पोस्‍टपेड से प्रीपेड में चेंज किया जा सकेगा। हालांकि उसके बाद फ‍िर 90 दिन वाली लिमिट लागू हो जाएगी यानी बार-बार ऐसा नहीं किया जा सकेगा। ओटीपी की प्रक्र‍िया का करना होगा पालन सीएनबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, जो ग्राहक 30 या 90 दिन की लिमिट से पहले अपना कनेक्‍शन बदलवाना चाहेंगे, उन्‍हें ओटीपी की प्रक्र‍िया का पालन करना होगा। अममून देखने में आता है कि कई लोग प्रीपेड से पोस्‍टपेड में स्विच करवा लेते हैं, लेकिन उन्‍हें प्‍लान महंगा लगने लगता है। सर्विस से संतुष्‍ट नहीं होते। वह पोस्‍टपेड से प्रीपेड दोबारा से कराने में झंझट महसूस करते हैं, क्‍योंकि 90 दिनों का लॉक-इन पीरियड होता है। दूरसंचार विभाग ने इस मुश्किल को आसान बना दिया है। रिपोर्ट के अनुसार अब 30 दिनों में कनेक्‍शन स्विच किया जा सकेगा या पोस्‍टपेड से प्रीपेड या प्रीपेड से पोस्‍टपेड में बदला जा सकेगा। आसान भाषा में समझ‍िए नए नियम को मान लीजिए आपने अपना सिम प्रीपेड से पोस्‍टपेड कराया लेकिन सर्विस में मजा नहीं आया या आपको प्‍लान महंगा लगा कि खर्चा ज्‍यादा होगा तो आप 30 दिन के अंदर ही दोबारा प्रीपेड कनेक्‍शन करवा सकेंगे। पहले यह लिमिट 90 दिनों की थी। लेकिन इसके बाद फ‍िर आपका मूड बदला कि नहीं यार पोस्‍टपेड ही करवा लेते हैं तो यह काम 30 दिन में नहीं होगा। बार-बार बदलाव करने पर 90 दिनों का गैप होना जरूरी है। तो जरूरत होगी फ्रेश केवाईसी की रिपोर्ट के अनुसार, एक बार 30 दिन के अंदर कनेक्‍शन स्विच करने बाद फ‍िर 90 दिन से पहले कनेक्‍शन स्विच नहीं किया जा सकेगा, लेकिन कोई मजबूरी आ जाती है जैसे प्‍लान पसंद नहीं आ रहा या कुछ और। तो कस्‍टमर को फ्रेश केवाईसी कराना होगा और इसके लिए सीएसई सेंटर या पीओएस केंद्र में जाना पड़ेगा। जब भी आप प्रीपेड से पोस्‍टपेड में या पोस्‍टपेड से प्रीपेड में बदलेंगे तो कंपनी की तरफ से बता दिय जाएगा कि अगली बार कितने दिनों में कनेक्‍शन स्विच कर पाएंगे।

कार डीलरों के पास 53 दिनों का स्टॉक, इनकी कीमत 52,000 करोड़ रुपये

नई दिल्ली भारत में कार डीलरों के सामने एक बड़ी समस्या आ रही है। उनके पास बहुत सारी गाड़ियां बिना बिके पड़ी हैं। इनकी कीमत 52,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। यानी अरबों रुपये की रकम फंसी हुई है। यह अब तक की सबसे बड़ी रकम है। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि कंपनियां लगातार गाड़ियां बना रही हैं और उन्हें बाजार में भेज रही हैं। जबकि लोग अभी गाड़ियां खरीदने में ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। यह समस्या पिछले एक साल से चल रही है।  अनुसार आमतौर पर डीलरों के पास 34 से 38 दिनों का स्टॉक रहता है। अगर गाड़ियों की संख्या में देखें तो यह लगभग 440,000 यूनिट है। मई तक का यह आंकड़ा पिछले साल दिवाली से पहले के स्टॉक से थोड़ा कम है। दिवाली से पहले डीलरों के पास 40 से 45 दिनों का स्टॉक जमा हो गया था। लेकिन इस बार गाड़ियों की कीमत बढ़ने और स्टॉक जमा होने की वजह से कुल वैल्यू बहुत ज्यादा हो गई है। यह जानकारी इंडस्ट्री के कुछ अधिकारियों ने दी है। 50 दिन से ज्यादा का स्टॉक जमा फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशंस (FADA) का कहना है कि डीलरों के पास 52 से 53 दिनों का स्टॉक पड़ा हुआ है। FADA इस बात को लेकर चिंतित है कि डीलरों पर काम करने के लिए पैसे का दबाव बढ़ रहा है। क्योंकि कंपनियां तो गाड़ियां भेज रही हैं, लेकिन डीलर उन्हें बेच नहीं पा रहे हैं। डीलरों के पास गाड़ियां 50 दिनों से ज्यादा समय से खड़ी हैं। जबकि पहले यह समय 21 दिन होता था। सच्चाई कुछ और है… कार बनाने वाली कंपनियों का कहना है कि उनके पास स्टॉक सही मात्रा में है। लेकिन सच्चाई यह है कि गाड़ियों की बिक्री की रफ्तार धीमी हो गई है। यह पिछले आठ महीनों में सबसे धीमी रफ्तार है। इस साल में यह पहली बार है जब इतनी कम गाड़ियां बिकी हैं। जितनी गाड़ियां डीलरों को भेजी गईं, उससे कम गाड़ियां लोगों ने खरीदीं। मई के महीने में कुल 302,214 गाड़ियां बिकीं। यह पिछले साल के मुकाबले 3.14% कम है। इन डीलर के पास ज्यादा स्टॉक नहीं कई डीलरों के पास बहुत ज्यादा स्टॉक जमा हो गया है, जो कि चिंता का विषय है। हालांकि Hyundai और Maruti के अधिकारियों का कहना है कि उनके डीलरों के पास स्टॉक सही मात्रा में है। हुंडई मोटर इंडिया के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर तरुण गर्ग का कहना है कि उनके डीलरों के पास लगभग चार हफ्तों का स्टॉक है। यह इंडस्ट्री के नियमों के हिसाब से सही है। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले साल भी उनके पास इतना ही स्टॉक था। वहीं, मारुति सुजुकी इंडिया के हेड ऑफ सेल्स एंड मार्केटिंग पार्थो बनर्जी ने कहा कि उनके स्टॉक का स्तर पिछले साल से बेहतर है। यह स्टॉक करीब 35 दिनों का है। कब सुधरेंगे हालात? तरुण गर्ग ने माना कि बाजार में अभी भी मांग कम है। उन्हें उम्मीद है कि सरकार द्वारा ब्याज दरों में कटौती और इनकम टैक्स में छूट देने से लोगों को गाड़ियां खरीदने में मदद मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि CRR में कटौती से डीलरों को स्टॉक रखने में कम खर्चा आएगा। एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का असर साल के दूसरे भाग में दिखाई देगा।

अडानी एयरपोर्ट होल्डिंग्स लिमिटेड पहली बार विदेशी निवेशकों से इक्विटी जुटाने की योजना बना रही

नई दिल्ली अडानी ग्रुप की कंपनी अडानी एयरपोर्ट होल्डिंग्स लिमिटेड (AAHL) करीब 1 अरब डॉलर की इक्विटी जुटाने की सोच रही है। यह पैसा विदेशी निवेशकों से आएगा। कंपनी इस पैसे का इस्तेमाल अपने विकास योजनाओं और नए एयरपोर्ट खरीदने के लिए कर सकती है। इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार यह जानकारी अडानी ग्रुप के सीएफओ जुगेशिंदर सिंह ने दी है। यह पहली बार होगा जब अडानी का एयरपोर्ट कारोबार बाहर के निवेशकों से पैसा लेगा। अभी तक यह काम अडानी ग्रुप ही करता आया है। अडानी ग्रीन एनर्जी के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर सागर अडानी ने कहा, ‘हर कोई हमारे साथ एयरपोर्ट कारोबार करना चाहता है। अमेरिका, मध्य पूर्व और ऑस्ट्रेलिया के निवेशकों ने इस कारोबार में पैसा लगाने की इच्छा जताई है।’ सागर अडानी, ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी के भतीजे भी हैं। क्या है कंपनी की स्थिति? सूत्रों के अनुसार, अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड के पास एयरपोर्ट यूनिट का पूरा मालिकाना हक है। इसकी वैल्यू लगभग 20 अरब डॉलर आंकी गई है। यह GMR एयरपोर्ट्स से भी ज्यादा है, जिसका मार्केट कैप 10.4 अरब डॉलर है। GMR दिल्ली, हैदराबाद, गोवा और नागपुर जैसे शहरों में एयरपोर्ट चलाती है। और बढ़ेगी यात्रियों की संख्या डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) के अनुसार, भारत में घरेलू हवाई यात्रियों की संख्या में FY25 में 10.35% की वृद्धि हुई है। इसका मतलब है कि पिछले साल के मुकाबले इस साल ज्यादा लोगों ने हवाई यात्रा की है। हवाई यात्रा करने वालों की संख्या बढ़ रही है। एयरलाइंस ने कुल 14.54 मिलियन यात्रियों को यात्रा कराई। केयरएज रेटिंग्स का अनुमान है कि भारत में हवाई यात्रियों की संख्या FY25 से FY27 के बीच 9% की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) से बढ़ेगी। इसका मतलब है कि अगले कुछ सालों में हवाई यात्रा करने वालों की संख्या तेजी से बढ़ेगी और यह 485 मिलियन तक पहुंच सकती है। CAGR का मतलब है कि हर साल औसतन 9% की वृद्धि होगी। डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में घरेलू हवाई यात्रियों की संख्या में 10.35% की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई। कुल 14.54 करोड़ यात्रियों ने उड़ान भरी। CareEdge Ratings के अनुसार, FY25 से FY27 के बीच भारत में हवाई यात्री यातायात में 9% की CAGR से वृद्धि की उम्मीद है, जिससे यह संख्या 485 मिलियन तक पहुंच सकती है। अडानी एयरपोर्ट होल्डिंग्स, जो इस समय भारत का सबसे बड़ा प्राइवेट एयरपोर्ट ऑपरेटर है, वर्तमान में मुंबई, अहमदाबाद, लखनऊ, मंगलुरु, जयपुर, गुवाहाटी और तिरुवनंतपुरम जैसे 7 एयरपोर्ट्स का संचालन कर रहा है। कंपनी नवी मुंबई एयरपोर्ट को अगस्त तक शुरू करने की तैयारी में भी है। कंपनी अगले डेढ़ दशक में अपनी कैपेसिटी को तीन गुना करने की योजना बना रही है। जुगेशिंदर सिंह ने आगे बताया कि AAHL को अगले 2–3 वर्षों में एक स्वतंत्र सब्सिडियरी के रूप में हाइव ऑफ किया जाएगा और इसके बाद इसका आईपीओ लाने की योजना है। उन्होंने यह भी कहा कि कंपनी भारत और विदेशों में अधिग्रहण के अवसरों के लिए तैयार है। विशेष रूप से ऐसे अंतरराष्ट्रीय शहरों में, जहां भारतीय प्रवासी बड़ी संख्या में जाते हैं। यदि ऐसे किसी एयरपोर्ट पर निवेश का मौका आता है, तो कंपनी उस दिशा में कदम बढ़ाएगी। जनवरी में GMR ग्रुप ने अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी (ADIA) से 6,300 करोड़ रुपये का निवेश प्राप्त किया था जिससे उनके प्रमोटर एंटिटी GMR इंटरप्राइजेज का कर्ज कम किया जा सके। अडाणी एयरपोर्ट होल्डिंग्स ने FY25 में कुल 94 मिलियन यात्रियों को सेवा दी, जो FY24 की तुलना में 7% अधिक है। अडानी के पास कितने एयरपोर्ट? AAHL के पास मुंबई-नवी मुंबई और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों पर एयरपोर्ट हैं। कंपनी अगले 15 सालों में अपनी क्षमता को तीन गुना करने का लक्ष्य लेकर चल रही है। इसका मतलब है कि कंपनी ज्यादा से ज्यादा यात्रियों को संभालने के लिए तैयार रहना चाहती है। AAHL भारत की सबसे बड़ी प्राइवेट एयरपोर्ट ऑपरेटर है। यह वर्तमान में सात एयरपोर्ट मुंबई, अहमदाबाद, लखनऊ, मंगलुरु, जयपुर, गुवाहाटी और तिरुवनंतपुरम चलाती है। इसके अलावा, नवी मुंबई में एक और एयरपोर्ट बन रहा है, जो अगस्त में खुलने वाला है। कंपनी के पास अभी पर्याप्त पैसा है, लेकिन बाजार की स्थिति और जरूरत के हिसाब से वह और भी पैसा जुटा सकती है। शेयर मार्केट में आ सकती है कंपनी जुगेशिंदर सिंह, ‘हम भारत और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिग्रहण के लिए खुले हैं। अंतरराष्ट्रीय सौदों के लिए यह एक अंतरराष्ट्रीय शहर जोड़ी होनी चाहिए जो भारतीय प्रवासियों को पूरा करती हो। यदि किसी विशेष शहर में किसी अन्य शहर में किसी विशिष्ट हवाई अड्डे पर बहुत सारे भारतीय यात्री जा रहे हैं और यदि वह अवसर आता है, तो हम उस पर विचार करेंगे।’ एयरपोर्ट कारोबार को अगले दो-तीन वर्षों में एक अलग सहायक कंपनी के रूप में अलग कर दिया जाएगा, जिसके बाद लिस्टिंग होगी। इसका मतलब है कि भविष्य में AAHL शेयर बाजार में लिस्ट हो सकती है। AAHL ने FY25 में 94 मिलियन यात्रियों को सेवा दी, जो FY24 से 7% अधिक है। इससे पता चलता है कि कंपनी का कारोबार लगातार बढ़ रहा है।

अहमदाबाद हवाई अड्डे पर एयर इंडिया के विमान के उड़ान भरने के दौरान दुर्घटनाग्रस्त, एविएशन शेयरों में हाहाकार

अहमदाबाद सरदार वल्लभभाई पटेल अहमदाबाद हवाई अड्डे पर एयर इंडिया के विमान के उड़ान भरने के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो जाने की दुखद घटना की खबर और बाजार में मंदी के बीच गुरुवार को एविएशन कंपनी के शेयरों में भारी गिरावट देखी गई। बजट एयरलाइन्स इंटरग्लोब एविएशन (इंडिगो) और स्पाइसजेट के शेयरों में 3.4% तक की गिरावट आई। इंडिगो के शेयर आज इंट्राडे में 3.4% गिरकर एनएसई पर 5,437.50 रुपये के दिन के निचले स्तर पर पहुंच गए, जबकि स्पाइसजेट के शेयर 2.6% गिरकर 44.30 पर आ गए। अन्य एविएशन शेयरों में भी गिरावट TAAL Enterprises Ltd के शेयर में आज 4% तक की गिरावट दर्ज की गई और यह शेयर 3,566.60 रुपये पर आ गया था। Taneja Aerospace and Aviation Ltd के शेयरों में 2% तक गिरकर 374.40 रुपये पर आ गए। Hindustan Aeronautics Ltd के शेयर 2% तक टूट गए। AFCOM Holdings Ltd के शेयर 1% तक टूट गए। Unimech Aerospace and Manufacturing Ltd के शेयर में 4% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। एयर इंडिया ने क्या कहा बता दें कि अहमदाबाद से लंदन जा रहा यह विमान उडान भरने के तुरंत बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गया। विमान में चालक दल और यात्रियों को मिलाकर 242 लोग सवार थे। एयर इंडिया के अध्यक्ष एन. चंद्रशेखरन अहमदाबाद से लंदन जा रहे एअर इंडिया की विमान संख्या ए-171 के उड़ान भरते ही दुर्घटनाग्रस्त होने की पुष्टि करते इस दुर्घटना पर गहरा शोक जताते हुए पीड़ित परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है। चंद्रशेखरन एक बयान में कहा “मैं बहुत दुःख के साथ पुष्टि करता हूँ कि अहमदाबाद से लंदन के गैटविक के लिए उड़ान भरने वाली एयर इंडिया की उड़ान संख्या ए-171 आज दुखद दुर्घटना की शिकार हो गई। हमारी शोक संवेदनाएं इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना से प्रभावित सभी लोगों के परिजनों के साथ है। इस समय, हमारा ध्यान प्रभावित लोगों और उनके परिवारों के लोगों को ढांढस बंधाने पर है।”  

शेयर बाजार में जारी तेजी पर ब्रेक, Sensex 823 अंक फिसला

मुंबई  शेयर बाजार में आज भारी गिरावट देखने को मिली। सेंसेक्स 823 अंक की गिरावट के साथ 81,691 के स्तर पर जबकि निफ्टी में भी 253 अंक की गिरावट रही, 24,888 के स्तर पर बंद हुआ। मुंबईः शेयर बाजार में आज भारी गिरावट देखने को मिली। सेंसेक्स 823 अंक की गिरावट के साथ 81,691 के स्तर पर जबकि निफ्टी में भी 253 अंक की गिरावट रही, 24,888 के स्तर पर बंद हुआ। सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 26 में गिरावट और सिर्फ 4 में तेजी रही। आज IT, FMCG, मेटल और ऑटो शेयर्स में ज्यादा गिरावट रही। वहीं फाइनेंस शेयर्स में बढ़त देखने को मिली। ग्लोबल मार्केट में मिलाजुला कारोबार     एशियाई बाजारों में जापान का निक्केई 0.71% नीचे 38,149 पर और हॉन्गकॉन्ग का हैंगसेंग इंडेक्स 0.46% नीचे 24,255 कारोबार कर रहा है।     कोरिया का कोस्पी 0.67% चढ़कर 2,926 पर और चीन का शंघाई कंपोजिट 0.8% बढ़कर 3,405 पर कारोबार कर रहा है।     11 जून को अमेरिका का डाउ जोन्स 42,865 पर फ्लैट बंद हुआ। वहीं नैस्डेक कंपोजिट 0.50% और S&P 0.27% गिरकर बंद हुआ। कल बाजार में रही थी तेजी इससे पहले कल यानी 11 जून को शेयर बाजार में तेजी रही थी। सेंसेक्स 123 अंक बढ़कर 82,515 के स्तर पर बंद हुआ था। वहीं निफ्टी में भी 37 अंक की तेजी रही, ये 25,141 के स्तर पर बंद हुआ था। 

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