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नई दिल्ली में होने वाली बैठक जल्द ही बुलाए जाने की उम्मीद, क्षतिपूर्ति उपकर का मुद्दा भी चर्चा में है

नई दिल्ली जीएसटी परिषद अपनी अगली बैठक में कर की दरों को तर्कसंगत बनाने और क्षतिपूर्ति उपकर के भविष्य पर विचार कर सकती है। इसके साथ ही अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था को सरल बनाने और मौजूदा वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) दर फ्रेमवर्क में विसंगतियों को दूर करने पर ध्यान दिया जा सकता है। नई दिल्ली में होने वाली बैठक जल्द ही बुलाए जाने की उम्मीद है, जिसमें राज्य भी अगले फिस्कल प्लानिंग साइकल से पहले अपने रेवेन्यू आउटलुक पर स्पष्टता के लिए दबाव डाल रहे हैं। मिडिया सूत्रों के हवाले से एक रिपोर्ट के अनुसार, जीएसटी लागू होने के बाद राज्यों के राजस्व घाटे की भरपाई के लिए शुरू किए गए शुल्क, क्षतिपूर्ति उपकर का मुद्दा भी चर्चा में है, खासकर तब जब 2026 से आगे भी इसे जारी रखना बहस का विषय बन गया है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मार्च में कहा था कि जीएसटी दरों में और कमी की जाएगी क्योंकि कर स्लैब को तर्कसंगत बनाने की प्रक्रिया पूरी होने वाली है। जुलाई 2017 में जीएसटी लागू होने के समय रेवेन्यू न्यूट्रल रेट (आरएनआर) 15.8 प्रतिशत थी, जो अब 2023 में घटकर 11.4 प्रतिशत हो गई है और इसमें और कमी आएगी। वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि जीएसटी स्लैब को सरल बनाने का काम लगभग पूरा हो चुका है और जीएसटी परिषद, जिसका नेतृत्व वित्त मंत्री करते हैं और जिसमें राज्य के वित्त मंत्री शामिल हैं, जल्द ही अंतिम निर्णय लेगी। जीएसटी दरों और स्लैब में बदलाव का सुझाव देने के लिए सितंबर 2021 में मंत्री समूह (जीओएम) का गठन किया गया था। इस समिति में छह राज्यों के वित्त मंत्री शामिल हैं। यह समिति टैक्स सिस्टम को अधिक कुशल बनाने पर काम कर रही है। रेशनलाइजेशन प्रक्रिया में कर स्लैब की संख्या कम करना, दरों को सुव्यवस्थित करना और विभिन्न उद्योगों की उठाई गई प्रमुख चिंताओं का समाधान करना शामिल है। केंद्रीय मंत्री ने आगे जोर दिया कि अगली जीएसटी परिषद की बैठक में प्रस्ताव पेश करने से पहले अंतिम समीक्षा चल रही है। अप्रैल में ग्रॉस जीएसटी कलेक्शन 2.36 लाख करोड़ रुपए दर्ज किया गया, जो अप्रैल 2024 में 2.10 लाख करोड़ रुपए के ग्रॉस कलेक्शन से 12.6 प्रतिशत अधिक है। अप्रैल में रिकॉर्ड जीएसटी कलेक्शन भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती और स्थिरता को दर्शाता है।

मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज अब गांव-गांव तक अपनी पहुंच बनाने की तैयारी में

नई दिल्ली  भारत और एशिया के सबसे बड़े रईस मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज अब गांव-गांव तक अपनी पहुंच बनाने की तैयारी में है। रिलायंस की नजर खासकर देश में के तेजी से बढ़ रह एमएफसीजी सेक्टर पर है। इसके लिए कंपनी एक खास रणनीति पर काम कर रही है। कंपनी का फोकस आम लोगों तक अपनी पहुंच बनाने पर है। इसके लिए एफएमसीजी सेक्टर में सस्ते प्रोडक्ट लाना चाहती है। दूसरी तरफ हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड, आईटीसी, नेस्ले और डाबर जैसी ज्यादातर कंपनियां ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए प्रीमियम उत्पादों पर ध्यान दे रही हैं। यानी वे महंगे प्रोडक्ट बेच रही हैं। ऐसे में रिलायंस को इस मार्केट में एक बड़ा मौका दिख रहा है। ईटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड के डायरेक्टर टी कृष्णकुमार ने कहा कि उनकी नजर 60 करोड़ ग्राहकों पर है। कंपनी आस-पड़ोस की दुकानों के साथ मिलकर काम करेगी और उन्हें अच्छा मार्जिन देगी। कृष्णकुमार ने एक इंटरव्यू में कहा कि भारत की आबादी लगभग 1.4 अरब है। इसमें एक बड़ा मध्यम वर्ग है। लगभग 60 करोड़ ऐसे उपभोक्ता हैं, जिनके लिए हम अच्छी क्वालिटी के प्रोडक्ट बनाना चाहते हैं। इस क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर किसी ने भी स्पष्ट दृष्टिकोण के साथ प्रवेश करने की कोशिश नहीं की है। रीजनल और लोकल कंपनियों ने कोशिश की, लेकिन वे टिक नहीं पाईं। कंपनी ने खरीदे 15 ब्रांड्स रिलायंस का कंज्यूमर बिजनस 2022 में रिलायंस रिटेल वेंचर्स की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी के रूप में शुरू हुआ था। तबसे इसने 15 से ज्यादा ब्रांड खरीदे हैं। इनमें कैंपा सॉफ्ट ड्रिंक्स सबसे पहले थी। इसे 2022 में प्योर ड्रिंक्स लिमिटेड से लगभग 22 करोड़ रुपये में खरीदा गया था। फिलहाल ज्यादातर ब्रांड कुछ ही बाजारों में उपलब्ध हैं। कैंपा के अलावा रिलायंस के पोर्टफोलियो में Sil जैम और स्प्रेड, लोटस चॉकलेट, टॉफमैन और रावलगांव जैसे कन्फेक्शनरी ब्रांड, एलन का बगल्स स्नैक्स, वेलवेट शैम्पू और इंडिपेंडेंस स्टेपल्स जैसे खुद के बनाए ब्रांड शामिल हैं। कृष्णकुमार ने कहा कि मार्च 2027 तक इस पोर्टफोलियो को राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ाया जाएगा। कंपनी का फोकस पेय पदार्थ और स्टेपल्स के अलावा कन्फेक्शनरी पर भी है। उन्होंने कहा, ‘जब मैं कहता हूं कि हम स्केल अप कर रहे हैं, तो इसका मतलब कल नहीं है। किसी भी प्रोडक्ट को बड़े पैमाने पर बढ़ाने के लिए 24-30 महीने चाहिए, क्योंकि इससे कम समय में आप ठीक से काम नहीं कर सकते।’ आगे का प्लान FY25 में RCPL ने 11,500 करोड़ रुपये का राजस्व दर्ज किया, जिसमें से 60% से ज्यादा जनरल ट्रेड से आया। कंपनी ने घोषणा की कि कैंपा और इंडिपेंडेंस दोनों ने बिक्री में 1,000 करोड़ रुपये और कुल मिलाकर 10 लाख दुकानों तक पहुंच हासिल की है। कृष्णकुमार ने कहा कि हमें एक सप्लाई चेन बनाने की जरूरत है। पिछले साल के अंत तक पेय पदार्थों और स्टेपल्स में हमारी बाजार हिस्सेदारी लगभग 20% थी। हमें मार्च 2026 तक इसे 60-70% तक ले जाना है। बाकी कैटेगरी में भी हम व्यवस्थित रूप से शुरुआत करेंगे।। सॉफ्ट ड्रिंक्स, चॉकलेट और डिटर्जेंट जैसी कैटेगरी में कंपनी ने सभी उत्पादों की कीमतें कोका-कोला, मोंडेलेज और HUL जैसे प्रतिद्वंद्वियों की तुलना में 20-40% कम रखी हैं। रिलायंस की यह विस्तार योजना ऐसे समय में आई है, जब शहरों में आर्थिक मंदी है। पिछले पांच तिमाहियों में शहरों के उपभोक्ताओं ने बढ़ती खाद्य और ईंधन महंगाई के बीच गैर-जरूरी खर्चों में कटौती की है। कृष्णकुमार ने कहा कि कंपनी ऑर्गेनिक ग्रोथ और एक्विजिशन का मिश्रण जारी रखेगी। लेकिन भारी लागत पर अधिग्रहण नहीं करेगी।

हफ्ते के आखिरी कारोबार दिन सेंसेक्स 803 अंक चढ़कर 81,755 के स्तर पर कारोबार कर रहा

मुंबई हफ्ते के आखिरी कारोबार दिन शुक्रवार (23 मई) को सेंसेक्स करीब 803 अंक चढ़कर 81,755 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। निफ्टी में भी 261 अंक की तेजी है, ये 24,871 के स्तर पर है। बिजनेस डेस्कः हफ्ते के आखिरी कारोबार दिन शुक्रवार (23 मई) को सेंसेक्स करीब 803 अंक चढ़कर 81,755 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। निफ्टी में भी 261 अंक की तेजी है, ये 24,871 के स्तर पर है।   सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 29 में तेजी, जबकि 1 में गिरावट है। टेक महिंद्रा, इंफोसिस और जोमैटो के शेयर 3% चढ़े हैं। सनफार्मा 3% गिरा है। ITC, HCL टेक सहित 8 शेयरों में 1% की तेजी है। एशियाई बाजारों का क्या हाल? एशियाई बाजार शुक्रवार को ऊंचे स्तर पर खुले। निवेशकों ने क्षेत्रभर से आए आर्थिक आंकड़ों की समीक्षा की। जापान के निक्केई इंडेक्स में 0.80 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। जबकि व्यापक टॉपिक्स सूचकांक 0.71 प्रतिशत ऊपर रहा। कोस्पी 0.12 प्रतिशत बढ़ा और ASX 200 में 0.36 प्रतिशत की हल्की बढ़त दर्ज की गई। जापान में अप्रैल महीने में मुख्य मुद्रास्फीति (कोर इन्फ्लेशन) 3.5 प्रतिशत तक बढ़ गई। इसकी एक बड़ी वजह चावल की कीमतों में तेज़ी रही। यह आंकड़ा सरकार की तरफ से शुक्रवार को जारी किया गया। यह डेटा बैंक ऑफ जापान की मौद्रिक नीति को और जटिल बना सकता है। वह मौजूदा अमेरिकी टैरिफ के प्रभावों के बीच दरों में संभावित विराम पर विचार कर रहा है।

आज शेयर बाजार में ​फिर मचा कोहराम? शेयर बाजार में भारी गिरावट

मुंबई शेयर बाजार में एक बार फिर बड़ी गिरावट (Stock Market Crash) आई है. बीते कारोबारी दिन अमेरिकी शेयर मार्केट्स में मचे हाहाकार का असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिला है. सेंसेक्स-निफ्टी दोनों इंडेक्स खुलते ही धड़ाम नजर आए. एक ओर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला Sensex रेड जोन में ओपन होने के बाद कुछ ही देर में 800 अंक का गोता लगा गया, तो वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का Nifty ने भी 250 अंक तक फिसलकर कारोबार शुरू किया. इससे पहले बीते कारोबारी दिन बुधवार को सेंसेक्स-निफ्टी जोरदार तेजी लेकर बंद हुए थे. खुलते ही धड़ाम हो गए सेंसेक्स-निफ्टी शेयर मार्केट में कारोबार की शुरुआत बड़ी गिरावट के साथ हुई और बीएसई का इंडेक्स सेंसेक्स (BSE Sensex) अपने पिछले बंद 81,596.63 की तुलना में फिसलकर 81,323.05 पर ओपन हुआ और फिर अचानक कुछ ही मिनटों में 810 अंक फिसलकर 80,786 के स्तर पर आ गया. सेंसेक्स की तरह ही एनएसई का निफ्टी (NSE Nifty) भी अपने पिछले बंद 24,813.45 की तुलना में टूटकर 24,733.95 पर खुला और कुछ ही मिनट के कारोबार के दौरान 250 अंक फिसलकर 24,541 पर ट्रेड करता नजर आया. ये 10 शेयर हुए धराशायी बाजार में आई इस बड़ी गिरावट के बीच लार्जकैप कंपनियों में शामिल Tech Mahindra Share (2.50%), PowerGrid Share (2.14%), HCL Tech Share (2%) और Infosys Share भी करीब 2 फीसदी फिसलकर कारोबार कर रहा था. तो वहीं मिडकैप कंपनियों में Oil India Share (4%), Ashok Leyland Share (2.50%), Dixon Share (2.40%), Uno Minda Share (2.38%) और Emami Ltd Share (2%) फिसलकर ट्रेड कर रहा था. स्मॉलकैप कंपनियों में सबसे तेज गिरावट Paras Cabels Share में आई, जो खुलते ही 10 फीसदी फिसल गया. यहां से मिले थे गिरावट के संकेत शेयर मार्केट में ये बड़ी गिरावट दरअसल, बुधवार को अमेरिकी शेयर बाजार में देखी गई बड़ी गिरावट के बाद आई है.  US बॉन्ड यील्ड में तेजी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के टैक्स कट बिल को लेकर US Markets में चिंता है. इसके चलते  Dow Jones Industrial Average 817 अंक यानी 1.9% गिरकर बंद हुआ, तो वहीं S&P 500 में 1.6% और Nasdaq में 1.4% तक फिसला था. इसका असर गुरुवार को एशियाई बाजारों पर भी दिखा और गिफ्ट निफ्टी इंडेक्स करीब 150 अंक से ज्यादा फिसल गया. इसके अवाला जापान का निक्केई 355 अंक, तो हांगकांग का हैंगसेंग 131 अंक फिसलकर कारोबार करता नजर आया.

जून 2026 तक 1 लाख का हो जाएगा सेंसेक्स- मॉर्गन स्टेनली

मुंबई भारतीय शेयर बाजार में आज बुधवार को जबरदस्त खरीदारी देखी गई। सेंसेक्स और निफ्टी में पिछले सेशन में भारी गिरावट के बाद बुधवार को शुरुआती सौदों के बाद इनमें तेजी देखने को मिली। बीएसई सेंसेक्स कारोबार के दौरान 800 से अंकों तक उछल गया था। इस बीच, ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म मॉर्गन स्टेनली की दिल खुश करने वाली एक रिपोर्ट सामने आई है। मॉर्गन स्टेनली ने की लेटेस्ट रिपोर्ट के मुताबिक, अगले एक साल में सेंसेक्स 1 लाख के एतिहासिक आंकड़े को टच कर सकता है। जून 2026 तक 1 लाख का हो जाएगा सेंसेक्स! मॉर्गन स्टेनली की रिपोर्ट के अनुसार, शेयर बाजार हाल में आई की गिरावट लंबी अवधि में निवेश करने का एक आकर्षक अवसर लेकर आया है। मॉर्गन स्टेनली ने जून 2026 के लिए अपने बेस केस सेंसेक्स टारगेट को रिवाइज किया है। लेटेस्ट रिपोर्ट में ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म ने भविष्यवाणी की है कि बुल केस आउटलुक के तहत इंडेक्स 1,00,000 अंक तक पहुंच जाएगा। जून 2026 तक सेंसेक्स बेस केस टारगेट 89,000 तय किया है, जो वर्तमान स्तरों से 8% की बढ़ोतरी को दिखाता है। ब्रोकरेज फर्म ने क्या कहा? बुल केस में मॉर्गन स्टेनली ने अधिक अनुकूल मैक्रो और नीतिगत माहौल की कल्पना की है, जिससे जून 2026 तक सेंसेक्स 1,00,000 तक पहुंच जाएगा। वहीं, बेस केस आउटलुक में, ब्रोकरेज का अनुमान है कि जून 2026 तक सेंसेक्स 89,000 तक पहुंच जाएगा।मॉर्गन स्टेनली के इक्विटी स्ट्रैटेजिस्ट रिधम देसाई और नयनत पारेख ने कहा, “सेंसेक्स के लिए हमारा नया टारगेट जून 2026 तक 89,000 (8% अपसाइड) है, जो हमारे नए आय अनुमानों में शामिल है और दिसंबर 2025 के टारगेट 82,000 से भी आगे है।” यह स्तर बताता है कि बीएसई सेंसेक्स 23.5x के ट्रेलिंग पी/ई मल्टीपल पर कारोबार करेगा, जो 25 साल के औसत 21x से आगे है। 70,000 तक गिरेगा बाजार? इसके अलावा, मॉर्गन स्टेनली ने अपने मंदी के मामले में 20% संभावना बताई है, जिसमें जून 2026 तक सेंसेक्स 70,000 तक गिर जाएगा। इस आउटलुक में कच्चे तेल की कीमतों में 100 डॉलर प्रति बैरल से अधिक की तेज बढ़ोतरी मानी गई है, जिसके कारण आरबीआई द्वारा आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के लिए मौद्रिक सख्ती की जाएगी। इसमें अमेरिका में मंदी सहित वैश्विक विकास में महत्वपूर्ण मंदी को भी शामिल किया गया है। इन परिस्थितियों में, वित्त वर्ष 28 तक आय वृद्धि में सालाना 15% की कमी आने की उम्मीद है, जिसमें वित्त वर्ष 26 में गिरावट आएगी। बिगड़ते मैक्रो फंडामेंटल के जवाब में इक्विटी वैल्यूएशन में भी कमी आने की संभावना है।

Stock Market मेंआज लगा ब्रेक और सेंसेक्स-निफ्टी दोनों इंडेक्स ने खुलते ही दौड़ लगाई

मुंबई शेयर बाजार (Stock Market) में बीते तीन कारोबारी दिनों से जारी गिरावट पर बुधवार को ब्रेक लग गया और सेंसेक्स-निफ्टी दोनों इंडेक्स खुलते ही दौड़ लगाते हुए नजर आए. एक ओर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला Sensex ग्रीन जोन में ओपन होने के बाद कुछ ही देर में 516 अंकों से ज्यादा उछल गया, तो वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का Nifty भी 100 अंक से ज्यादा चढ़कर कारोबार करता नजर आया. इस दौरान शुरुआती कारोबार में सनफार्मा (Sunpharma Share), एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank Share) से लेकर टाटा मोटर्स (Tata Motors Share) तक तेज रफ्तार के साथ भागे. सेंसेक्स-निफ्टी की तेज शुरुआत बुधवार को शेयर मार्केट (Share Market) में कारोबार शुरू होने पर बीएसई का सेंसेक्स (BSE Sensex) अपने पिछले बंद 81,186.44 की तुलना में बढ़त लेते हुए 81,327.61 के लेवल पर ओपन हुआ और कुछ ही मिनटों के कारोबार के दौरान ये इंडेक्स 516 अंक चढ़कर 81,698 के लेवल पर कारोबार करता हुआ नजर आया. सेंसेक्स की तरह ही निफ्टी ने भी अपने पिछले बंद 24,683.90 से उछलते हुए 24,744.25 पर कारोबार शुरू किया और अचानक 150 अंकों की तेजी लेकर 24,834 पर ट्रेड करता हुआ नजर आया. इन 10 शेयरों ने किया बाजार को सपोर्ट मिले-जुले ग्लोबल संकेतों के बीच शेयर बाजार में तेजी देखने को मिली है. इस दौरान शुरुआती कारोबार में कुछ बड़ी कंपनियों के स्टॉक्स ने बाजार को जबरदस्त सपोर्ट दिया. इनमें Sunpharma Share (2.30%), M&M Share (1.50%), HDFC Bank Share (1.40%) और Tata Motors Share (1.25%) की उछाल के साथ कारोबार कर रहे थे. मिडकैप कैटेगरी में शामिल कंपनियों में Glaxo Share (7.04%), Gland Pharma (4.27%), TorntPharma Share (2.71%) चढ़कर कारोबार कर रहा था. स्मॉलकैप में देखें तो HLE Glascote Share 10.13%, Banco India Share 7.50% और BMW Share 5.35% की तेजी लेकर ट्रेड कर रहे थे. Pharma शेयरों ने दिखाया दम शेयर बाजार में तेजी के साथ कारोबार के दौरान तमाम फार्मा कंपनियों के स्टॉक्स जोरदार तेजी लेकर कारोबार करते हुए नजर आए. एक ओर जहां सनफार्मा, ग्लैक्सो, ग्लैंडफार्मा और टोरंट फार्मा के शेयर गदर मचाते दिखे, तो वहीं इसके अलावा Emcure Pharma Share (2.21%), Alkem Share (2.10%), Ajanta Pharma (2.19%), Lupin Share (2.08%), Aurobindo Pharma Share (1.90%) की उछाल लेकर कारोबार करते हुए दिखाई दिए. कल निवेशकों के डूबे थे 5 लाख करोड़ इससे पहले बीते कारोबारी दिन मंगलवार को शेयरों बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली थी. दोपहर के बाद अचानक बाजार का मूड बदला था और अंत तक गिरावट जारी रही. इस दौरान Nifty 261 अंकों से ज्‍यादा टूट गया. वहीं सेंसेक्‍स में 872 अंकों की गिरावट आई. Nifty 24683 और Sensex 81186 पर क्‍लोज हुआ था. शेयर बाजार में इस गिरावट के कई कारण हैं, लेकिन कुछ निवेशक इसे भारत में कोविड की आहट से भी जोड़ रहे हैं. शेयर बाजार में आई इस गिरावट के चलके निवेशकों की दौलत में बड़ी कमी देखने को मिली थी. दरअसल, बीएसई मार्केट कैपिटलाइजेशन (BSE Market Cap) एक दिन 443.67 लाख करोड़ रुपये फिसलकर 438.03 लाख करोड़ रुपये पर आ गया. यानी निवेशकों के वैल्‍यूवेशन में 5.64 लाख करोड़ रुपये की कमी आई है.

शेयर मार्केट गिरावट के ट्रैक पर तेजी से भाग रहा, सेंसेक्स 873 अंक टूटकर हुआ बंद, निफ्टी भी धड़ाम

मुंबई कोरोना की आहट से भारतीय शेयर बाजार में हाहाकार मचा हुआ है। सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन सेंसेक्स 872.98 अंक टूटकर 81,186.44 अंक पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी की बात करें तो 261.55 अंक फिसलकर 24,683.90 अंक पर रहा। शेयर मार्केट अब बड़ी गिरावट की ओर बढ़ चला है। सेंसेक्स 489 अंकों के नुकसान के साथ 81570 पर आ गया है। निफ्टी गिरावट का शतक लगाकर 135 अंक नीचे 24810 पर है। एनएसई पर 2780 स्टॉक्स ट्रेड कर रहे हैं। इनमें 1039 हरे और 1664 लाल हैं। गिरावट के बावजूद 108 स्टॉक्स में अपर सर्किट लगा है और 44 एक साल के हाई पर पहुंच गए हैं। शेयर मार्केट गिरावट के ट्रैक पर तेजी से भाग रहा है। सेंसेक्स 277 अंकों के नुकसान के साथ 81781 पर आ गया है। निफ्टी 75 अंक नीचे 24870 पर है। सेंसेक्स में इटर्नल, एचडीएफसी बैंक, महिंद्रा एंड महिंद्रा, मारुति, बजाज फिनसर्व टॉप लूजर हैं। वहीं, टाटा स्टील, आईटीसी, इन्फोसिस, एनटीपीसी, इंडसइंड बैंक टॉप गेनर्स की लिस्ट में हैं। शेयर मार्केट अच्छी शुरुआत के बाद लड़खड़ाने लगा है। सेंसेक्स 200 से अधिक अंकों की गिरावट के साथ 81804 पर आ गया है। निफ्टी भी 25000 के नीचे ट्रेड कर रहा है। इसमें 61 अंकों की गिरावट है और 24884 के लेवल पर आ गया है। शेयर मार्केट की शुरुआत आज हरे रंग से हुई है। बीएसई का 30 शेयरों वाला बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स 56 अंकों की बढ़त के साथ 82116 पर खुला। जबकि, एनएसई का 50 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक निफ्टी तेजी के अर्धशतक के साथ 50 अंक ऊपर 24996 के लेवल से मंगलवार के कारोबार की शुरुआत की। एशियाई बाजारों से सकारात्मक संकेतों पर घरेलू शेयर मार्केट के बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी 50 की ग्रीन ओपनिंग की उम्मीद है। एशियाई शेयर चार सत्रों में पहली बार चढ़ गए। इससे पहले सोमवार को सेंसेक्स और निफ्टी 50 लाल निशान पर बंद हुए। सेंसेक्स 271 अंक (0.33 प्रतिशत) गिरकर 82,059.42 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 75 अंक (0.30 प्रतिशत) फिसलकर 24,944.45 पर बंद हुआ। सेंसेक्स के लिए प्रमुख ग्लोबल संकेत एशियाई शेयरों में चार सत्रों में पहली बार तेजी आई। जापान का निक्केई 0.50 पर्सेंट ऊपर 37686 के लेवल पर बंद हुआ। कोरिया का कोस्पी भी बढ़त पर रहा। गिफ्ट निफ्टी टुडे गिफ्ट निफ्टी 25,076 के स्तर के आसपास कारोबार कर रहा था, जो निफ्टी फ्यूचर्स के पिछले बंद से लगभग 85 अंक की बढ़त के साथ भारतीय शेयर बाजार सूचकांकों के लिए सकारात्मक शुरुआत का संकेत दे रहा था। वॉल स्ट्रीट का हाल नैस्डैक कंपोजिट 0.02 प्रतिशत ऊपर 19,215.46 पर और डॉऊ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 137.33 अंक या 0.32 प्रतिशत चढ़कर 42,792.07 पर बंद हुआ। वहीं, एसएंडपी भी मामूली बढ़त के साथ 5963 के लेवल पर बंद हुआ। मंगलवार के लिए ट्रेड सेटअप LKP सिक्योरिटीज के रुपक डे के मुताबिक निफ्टी 25,000 का स्तर पार नहीं होने तक दबाव बना रहेगा। अगर निफ्टी 24,750 से नीचे टूटा, तो गहरी गिरावट संभव है। वहीं, 25,000 के ऊपर बढ़त से 25,250-25,350 का टार्गेट मुमकिन। बजाज ब्रोकिंग के अनुसार, इमीडिएट सपोर्ट 54,800 है।

भारत के सिर्फ एक कदम से बांग्लादेश को 770 मिलियन डॉलर का नुकसान होने वाला ……

नई दिल्ली पहलगाम आतंकी हमले के बाद (Pahalgam Terror Attack) के बाद भारत लगातार एक्शन मोड में है. पाकिस्तान को करारा सबक सिखाने के बाद अब सरकार के निशाने पर Pakistan का समर्थन करने वाले देश और उनसे नजदीकी रखने वाले मुल्क हैं. इनमें जहां तुर्की और अजरबैजान (Turkey-Azerbaijan) शामिल हैं, तो वहीं चीन के साथ गहरी दोस्ती निभाने वाला बांग्लादेश (Bangladesh) भी भारतीय राडार पर है. दरअसल, मोहम्मद युनूस द्वारा बीते दिनों चीन में भारत के लिए विवादित टिप्पणियां की गईं और अब वो इसकी बड़ी कीमत चुकाने वाला है. भारत के सिर्फ एक कदम से ही ड्रैगन के इस दोस्त को 770 मिलियन डॉलर या करीब 6581 करोड़ रुपये (लगभग 9,367 करोड़ बांग्लादेशी टका) का नुकसान होने वाला है. आइए समझते हैं कैसे… बांग्लादेश के लिए भारत के लैंड पोर्ट बैन सबसे पहले बात करते हैं भारत की ओर से बांग्लादेश के खिलाफ की गई इकोनॉमिक स्ट्राइक के बारे में, तो बता दें कि भारत ने बांग्लादेश के कई सामानों के लिए भारतीय लैंड पोर्ट्स को बैन (India Bans Land Port For Bangladesh) कर दिया है. भारत की ओर से यह कदम बीते 9 अप्रैल को भारत द्वारा 2020 में दी गई ट्रांसशिपमेंट सुविधा को वापस लेने के बाद उठाया गया है, जिसने बांग्लादेश को भारतीय बंदरगाहों और यहां तक ​​कि दिल्ली हवाई अड्डे के माध्यम से मध्य पूर्व और यूरोप को निर्यात करने की अनुमति दी थी. बीते शनिवार 17 मई को बांग्लादेश से आयातित कई तरह के सामानों को इन बंदरगाहों पर प्रतिबंधित कर दिया गया है, जिनमें रेडीमेड गारमेंट और प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट समेत अन्य सामान शामिल हैं. विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) द्वारा शनिवार को जारी नोटिफिकेशन को देखें, तो इसमें कहा गया है कि बांग्लादेश से रेडीमेड कपड़ों का आयात अब केवल सिर्फ दो बंदरगाहों न्हावा शेवा और कोलकाता पोर्ट तक ही सीमित रहेगा, जबकि अन्य सभी लैंड पोर्ट्स से आयात प्रतिबंधित रहेगा. मतलब साफ है कि अब Bangladesh लैंड पोर्ट की बजाए सी पोर्ट के जरिए ही निर्यात कर पाएगा. GTRI ने बताया बांग्लादेश को कितना नुकसान यह कदम डायरेक्टर जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) के निर्देश के बाद उठाया गया है, जिसमें भारत सरकार ने बांग्लादेशी सामानों को लैंड पोर्ट्स पर तत्काल प्रतिबंधित कर दिया है और सिर्फ दो समुद्री-पोर्ट (Sea Ports) तक सीमित किया है. भारत की ओर से लिए गए इस एक्शन से बांग्लादेश को कितना नुकसान होने वाला है, इसे ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) ने एक रिपोर्ट जारी कर समझाया है. इसमें कहा गया है कि लैंड पोर्ट के माध्यम से बांग्लादेशी आयात बैन करने के भारत के फैसले से पड़ोसी मुल्क के 770 मिलियन डॉलर (लगभग 9,367 करोड़ बांग्लादेशी टका) मूल्य के सामानों पर प्रभाव दिख सकता है और ये आंकड़ा कुल द्विपक्षीय आयात (Bilateral Imports) का करीब 42 फीसदी होता है. GTRI के मुताबिक, रेडीमेड गारमेंट, प्रोसेस्ड फूड और प्लास्टिक प्रोडक्ट प्रभावित होने वाले प्रमुख सामानों में सबसे ऊपर हैं. अकेले गारमेंट्स की अगर बात करें, तो इनकी वैल्यू सालाना 618 मिलियन डॉलर है और भारतीय प्रतिबंधों के बाद ये अब केवल कोलकाता और न्हावा शेवा बंदरगाहों से होकर ही भारत में एंट्री कर सकते हैं. यानी बांग्लादेश की महत्वपूर्ण लैंड ट्रेड कॉरिडोर्स तक पहुंच कट गई है. जीटीआरआई के मुताबिक, भारत के फैसले से Bangladesh के सबसे प्रॉफिटेबल एक्सपोर्ट रूट पर गंभीर असर पड़ने वाला है. निर्यात की लागत में होगा इजाफा भारत के इस कदम से बांग्लादेश को बड़ी आर्थिक चोट कैसे लगने वाली है, इसे आसान शब्दों में इस तरह समझ सकते है कि बांग्लादेश और भारत के बीच अब तक जो भी व्यापार होता था, उसका करीब 93 फीसदी लैंड पोर्ट्स के जरिए ही होता था, लेकिन अब इन Land Ports को बंद किए जाने के बाद बांग्लादेशी प्रोडक्ट्स कोलकाता या फिर महाराष्ट्र के न्हावा शेवा बंदरगाह के जरिए ही आ सकेंगे और इसका सीधा असर बांग्लादेशी निर्यात की लागत में बढ़ोतरी के रूप में दिखेगा, जो उसके लिए भारी नुकसानदायक साबित होगा. आखिर क्यों भारत के निशाने पर बांग्लादेश बता दें कि बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस (Muhammad Yunus) द्वारा की गई विवादास्पद टिप्पणियों के बाद भारत और बांग्लादेश के बीच संबंधों में ये तनाव देखने को मिला है और खास बात ये है कि उन्होंने ये टिप्पणियां चीन में जाकर की हैं. हाल ही में चीन के इशारे पर नाच रहे यूनुस ने वहां का दौरा किया और इस दौरान दावा किया था कि भारत के पूर्वोत्तर राज्य भूमि से घिरे हुए हैं और समुद्र तक पहुंच के लिए बांग्लादेश पर निर्भर हैं. उन्होंने बांग्लादेश को इस क्षेत्र में हिंद महासागर का एकमात्र संरक्षक बताते हुए China को अपने व्यापार मार्गों का उपयोग करने का निमंत्रण दिया. ऐसे में इसके जवाब में भारत की ओर से बांग्लादेशी सामानों के आयात के लिए पोर्ट्स बैन करने का कदम उसकी हेकड़ी निकालने की दिशा में उठाया गया. इसके अलावा अन्य कारण भी हैं, जिनके चलते भारत ने ये बड़ा एक्शन बांग्लादेश के खिलाफ लिया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले महीने ढाका द्वारा कुछ भारतीय उत्पादों पर लगाए गए इसी प्रकार के प्रतिबंधों के जवाब में ये कदम उठाया गया है. बीते साल 2024 के अंत से ही बांग्लादेश ने भारतीय सामनों पर व्यापार प्रतिबंधों को बढ़ाना शुरू कर दिया था और पिछले महीने अप्रैल 2025 में बांग्लादेश ने 5 प्रमुख लैंड पोर्ट्स के जरिए भारतीय धागे के आयात पर बैन लगाया था और इसके साथ ही दर्जनों अन्य सामानों को भी प्रतिबंधित किया था. यही नहीं ढाका द्वारा भारतीय कार्गो पर प्रति टन प्रति किलोमीटर 1.8 टका की ट्रांसिट फीस लगाने से मामला और भी जटिल हो गया था.  

आज फिर शेयर बाजार रेड जोन में रहा, सेंसेक्स 271 अंक टूटा, निफ्टी 24945 पर बंद हुआ

मुंबई शेयर बाजार (Stock Market) में सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिली. शुरुआत से ही सेंसेक्स-निफ्टी दोनों इंडेक्स कभी रेड, तो कभी ग्रीन जोन में कारोबार करते हुए निवेशकों को हैरान करते रहे. लेकिन बाजार में आखिरी कारोबारी घंटे में गिरावट बढ़ी और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स (BSE Sensex) 271 अंक फिसलकर 82,059 पर, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी (NSE Nifty) 74 अंकों की गिरावट लेकर 24,945 के लेवल पर क्लोज हुआ. इस बीच इंफोसिस और टीसीएस जैसे दिग्गज आईटी स्टॉक्स गिरावट के साथ रेड जोन में बंद हुए. दिनभर सेंसेक्स-निफ्टी की बदलती रही चाल सोमवार को शेयर मार्केट में शुरुआती कारोबार के दौरान बीएसई का सेंसेक्स 82,354.92 के लेवल पर ओपन हुआ औऱ मिनटों में ये 82,116 तक फिसल गया था, लेकिन महज कुछ मिनट के कारोबार के बाद ये फिर अचानक चढ़कर 82,380.08 के लेवल पर कारोबार करता हुआ नजर आने लगा. दिभर सेंसेक्स की चाल बदलती हुई नजर आई. इसी तरह एनएसई Nifty ने अपने पिछले बंद 25,019 से मामूली गिरावट के साथ 25,005.35 के लेवल पर ओपनिंग की थी और सेंसेक्स के कदम से कदम मिलाकर ये भी कभी ग्रीन, तो कभी रेड जोन में कारोबार करता हुआ नजर आया. ये 10 शेयर धराशायी मार्केट क्लोज होने पर जो शेयर सबसे ज्यादा गिरावट लेकर बंद हुए, उनमें लार्जकैप कैटेगरी में शामिल Eternal Share (3.15%), Infosys Share (1.92%), TCS Share (1.23%) और Reliance Share (1.03%) की गिरावट लेकर क्लोज हुए. इसके अलावा मिडकैप कैटेगरी में GMR Airports Share (4.03%), Policy Bazar Share (3.74%) और Mazgaon Dock Share (3.26%) की गिरावट लेकर बंद हुआ. इसके अलावा LIC Housing Finance Share (3.16%), Patanjali Share (3.00%) और Nykaa Share (2.70%) टूटकर बंद हुए.

इलेक्ट्रिक वाहन पर बड़ा दांव लगाने की तैयारी में टाटा मोटर्स , कई नए मॉडल उतारेगी

नई दिल्ली, टाटा मोटर्स का लक्ष्य घरेलू यात्री वाहन बाजार में इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) को मुख्यधारा में लाने का है। अपनी इस योजना के तहत कंपनी ईवी श्रृंखला को मजबूत करने और साथ ही मौजूदा मॉडल के लिए मूल्य को बढ़ाने का प्रयास कर रही है। मुंबई की यह प्रमुख वाहन कंपनी चालू वित्त वर्ष में हैरियर.ईवी और उसके बाद सिएरा.ईवी उतारने की तैयारी कर रही है। साथ ही कंपनी अपने मौजूदा मॉडल में भी कई तरह के सुधार करने की योजना बना रही है। टाटा मोटर्स ने 2024-25 में करीब 65,000 इलेक्ट्रिक वाहन बेचे हैं। यह आंकड़ा 2023-24 की तुलना में 10 प्रतिशत कम है। तिमाही नतीजों के बाद निवेशक प्रस्तुतीकरण में कंपनी ने कहा, ”हम नए मॉडल के साथ ईवी पोर्टफोलियो को मजबूत करने जा रहे हैं। साथ ही मौजूदा मॉडल के लिए भी मूल्य बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं।” कंपनी का इरादा इलेक्ट्रिक वाहनों को मुख्यधारा में लाने है। इसके लिए कंपनी बाजार विकास और पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करेगी। आंतरिक दहन इंजन यानी परंपरागत वाहन खंड पर, कंपनी ने कहा कि उसका लक्ष्य हैच और एसयूवी में उत्पाद में सुधार के साथ अपने सबसे मजबूत और सबसे नए पोर्टफोलियो का लाभ उठाना है।” कंपनी का लक्ष्य व्यापक विपणन अभियान और ब्रांड जुड़ाव के माध्यम से ब्रांड के विचार को बढ़ाना है, ताकि ग्राहक अनुभव को बेहतर बनाया जा सके। टाटा मोटर्स ने कहा कि वह प्रमुख बाजारों में अपने बिक्री नेटवर्क का विस्तार करने की भी योजना बना रही है। इसके तहत बड़े आकार के फॉर्मेट स्टोर पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इसके अलावा कंपनी कठिन माहौल में प्रतिस्पर्धात्मकता और लाभप्रदता सुनिश्चित करने के लिए लागत में कमी की दिशा में भी काम कर रही है। वाणिज्यिक वाहन कारोबार के बारे में कंपनी ने कहा कि उसे बेड़े के उपयोग में सुधार और बेहद वृहद आर्थिक संकेतकों के साथ एक स्थिर धारणा की उम्मीद है। कंपनी ने कहा, ”हम वैश्विक बाधाओं के बावजूद निरंतर वद्धि की उम्मीद कर रहे हैं।” चालू वित्त वर्ष में कंपनी का ध्यान मूल्य सृजन के साथ-साथ ट्रक में एसी के विनियमन की ओर सुचारू तरीके से बदलाव सुनिश्चित करने पर है।  

जल्द ही 20 रुपये के नए नोट जारी करेगा आरबीआई, इन नोटों पर नए आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा के हस्ताक्षर होंगे

नई दिल्ली भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक अहम घोषणा की है। आरबीआई जल्द ही 20 रुपये के नए नोट जारी करेगा। खास बात यह है कि इन नोटों पर नए आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा के हस्ताक्षर होंगे। हालांकि आम जनता को चिंता करने की जरूरत नहीं है क्योंकि पहले से प्रचलन में मौजूद 20 रुपये के सभी नोट पहले की तरह चलन में बने रहेंगे। कैसा होगा नया नोट? आरबीआई ने साफ किया है कि नए 20 रुपये के नोट महात्मा गांधी (नई) सीरीज के ही होंगे। इनका डिजाइन भी मौजूदा 20 रुपये के नोट जैसा ही रहेगा। केवल एक बदलाव होगा — नोटों पर अब गवर्नर संजय मल्होत्रा के हस्ताक्षर होंगे। पुराने नोटों का क्या होगा? कई लोगों को यह चिंता हो सकती है कि क्या पुराने 20 रुपये के नोट चलन से बाहर हो जाएंगे? इस पर आरबीआई ने स्थिति साफ कर दी है। आरबीआई ने कहा है कि पहले जारी किए गए 20 रुपये के सभी नोट पूरी तरह वैध रहेंगे। इसका मतलब है कि आप पुराने नोटों से पहले की तरह खरीदारी कर सकते हैं और उन्हें कहीं भी इस्तेमाल किया जा सकता है। गवर्नर के बदलाव पर होती है यह प्रक्रिया नए गवर्नर के कार्यभार संभालने के बाद नए हस्ताक्षरों के साथ नोट जारी करना एक सामान्य प्रक्रिया है। इससे बाजार में मौजूद पुराने नोटों पर कोई असर नहीं पड़ता और न ही यह किसी नोट को अमान्य बनाता है।

अमेरिका में ‘रेमिटेंस’ पर कर की योजना से भारतीय परिवारों, रुपये पर असर की आशंका: जीटीआरआई

नई दिल्ली, अमेरिका में गैर-नागरिकों के विदेश में धन भेजने (रेमिटेंस) पर पांच प्रतिशत का कर लगाने के प्रस्ताव को लेकर भारत में चिंता बढ़ रही है। आर्थिक शोध संस्थान ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) ने रविवार को कहा कि इससे भारतीय परिवारों और रुपये को नुकसान पहुंच सकता है। एक अनुमान के मुताबिक, इस कर की वजह से अमेरिका में रहने वाले भारतीयों पर सालाना 1.6 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक का बोझ पड़ सकता है। यह प्रावधान 12 मई को अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में पेश किए गए ‘द वन बिग ब्यूटीफुल बिल’ नामक व्यापक विधायी पैकेज का हिस्सा है। यह ग्रीन कार्ड और एच1बी वीजा रखने वालों सहित चार करोड़ से अधिक लोगों को प्रभावित करेगा। प्रस्तावित शुल्क अमेरिकी नागरिकों पर लागू नहीं होगा। जीटीआरआई ने कहा, ”अमेरिका में गैर-नागरिकों के विदेश में धन भेजने पर कर लगाने के प्रस्ताव से भारत में चिंता बढ़ रही है, क्योंकि अगर यह योजना कानून बन जाती है, तो भारत को सालाना विदेशी मुद्रा प्रवाह में अरबों डॉलर का नुकसान होगा।” जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा, ”पांच प्रतिशत कर से रेमिटेंस की लागत में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। अगर धन प्रेषण में सालाना 10-15 प्रतिशत की गिरावट हुई तो भारत को 12-18 अरब डॉलर का नुकसान होगा।” उन्होंने कहा कि इस नुकसान से भारत के विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर की आपूर्ति कम हो जाएगी, जिससे रुपये पर गिरावट का दबाव बनेगा। श्रीवास्तव ने कहा, ”भारतीय रिजर्व बैंक को मुद्रा को स्थिर करने के लिए अधिक बार हस्तक्षेप करना पड़ सकता है। इस वजह से रुपया 1-1.5 रुपये प्रति अमेरिकी डॉलर तक कमजोर हो सकता है।” भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के मार्च बुलेटिन में प्रकाशित एक लेख के अनुसार, 2023-24 में भारत को अमेरिका से कुल 32.9 अरब डॉलर का रेमिटेंस मिला। इसका पांच प्रतिशत 1.64 अरब डॉलर होगा। आरबीआई के लेख में कहा गया कि धन प्रेषण से मिली राशि का इस्तेमाल मुख्य रूप से परिवार के भरण-पोषण के लिए होता है, इसलिए इसकी लागत बढ़ने का सामाजिक-आर्थिक प्रभाव होता है। इस लागत को कम करना वैश्विक स्तर पर एक महत्वपूर्ण नीतिगत एजेंडा रहा है।  

पेट्रोलियम नियामक ने एलएनजी टर्मिनल के लिए पंजीकरण अनिवार्य किया

नई दिल्ली,  पेट्रोलियम नियामक ने नए तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) आयात टर्मिनल स्थापित करने या मौजूदा टर्मिनल का विस्तार करने की योजना बनाने वाली कंपनियों के लिए पूर्व-मंजूरी को अनिवार्य कर दिया है। इसके साथ ही तीसरे पक्ष की पहुंच के लिए टर्मिनल क्षमता का एक हिस्सा आरक्षित करने की आवश्यकता को खत्म कर दिया गया है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस विनियामक बोर्ड (पीएनजीआरबी) ने तरलीकृत प्राकृतिक गैस टर्मिनलो की स्थापना एवं संचालन के लिए पंजीकरण विनियम, 2025 को अधिसूचित किया है। विनियामक ने कहा, ”ये विनियम एलएनजी टर्मिनल के पंजीकरण एवं निरीक्षण, (तथा) इकाइयों के बीच प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने तथा निष्फल निवेश की रोकथाम पर आधारित एक मजबूत ढांचा तैयार करते हैं।” पीएनजीआरबी ने कहा कि ये नियम 2030 तक ऊर्जा मिश्रण में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी को 15 प्रतिशत तक बढ़ाने के मकसद से लाए गए हैं। यह मानदंड देशभर में समान एवं पर्याप्त रूप से प्राकृतिक गैस की उपलब्धता सुनिश्चित करेंगेय़ एलएनजी टर्मिनल बनाने की इच्छुक इकाई को अंतिम निवेश निर्णय (एफआईडी) लेने से पहले पीएनजीआरबी को इस बारे में बताना होगा। मौजूदा एलएनजी टर्मिनल की क्षमता का विस्तार करने के लिए भी यही नियम लागू होगा।  

सेंसेक्स की 9 बड़ी कंपनियों का मार्केट कैप 3.35 लाख करोड़ बढ़ा

-रिलायंस, एचडीएफंसी और टीसीएस ने बढ़ाया बाजार में दबदबा मुंबई, बीते सप्ताह सेंसेक्स की टॉप 10 सबसे बड़ी कंपनियों में से 9 के बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) में कुल मिलाकर 3.35 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई। इस वृद्धि में सबसे बड़ा योगदान रिलायंस इंडस्ट्रीज का रहा। रिलायंस इंडस्ट्रीज का बाजार मूल्यांकन 1.06 लाख करोड़ रुपये बढ़कर 19.71 लाख करोड़ रुपये हो गया। यह अब भी देश की सबसे मूल्यवान कंपनी बनी हुई है। आईसीआईसीआई बैंक का मार्केट कैप 46,306.99 करोड़ रुपये की बढ़त के साथ 10.36 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया। टीसीएस ने 43,688.4 करोड़ रुपये जोड़े, जिससे उसका कुल मूल्यांकन 12.89 लाख करोड़ रुपये हो गया। इन्फोसिस का मूल्य 34,281.79 करोड़ रुपये बढ़कर 6.60 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। एचडीएफसी बैंक की हैसियत 34,029.11 करोड़ रुपये की बढ़त के साथ 14.80 लाख करोड़ रुपये पर पहुंची। बजाज फाइनेंस का मार्केट कैप 32,730.72 करोड़ रुपये बढ़कर 5.69 लाख करोड़ रुपये हो गया। आईटीसी को 15,142.09 करोड़ रुपये की बढ़त मिली, जिससे उसका मूल्यांकन 5.45 लाख करोड़ रुपये हो गया। भारतीय स्टेट बैंक की बाजार हैसियत 11,111.15 करोड़ रुपए बढ़कर 7.06 लाख करोड़ रुपये रही। हिंदुस्तान यूनिलीवर का मूल्य 11,054.83 करोड़ रुपये बढ़कर 5.59 लाख करोड़ रुपये हो गया। इन सभी के ‎विपरीत भारती एयरटेल का बाजार मूल्यांकन 19,330.14 करोड़ रुपये घट गया और यह 10.34 लाख करोड़ रुपये रह गया। प्रमुख 10 कंपनियों की रैंकिंग में रिलायंस इंडस्ट्रीज, एचडीएफसी बैंक, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, आईसीआईसीआई बैंक, भारती एयरटेल, भारतीय स्टेट बैंक, इन्फोसिस, बजाज फाइनेंस, हिंदुस्तान यूनिलीवर और आईटीसी रहीं।  

भारत 2024 में लगातार दूसरे साल दुनिया का सबसे बड़ा इलेक्ट्रिक तिपहिया वाहन (3W) बाजार बना रहा: IEA रिपोर्ट

नई दिल्ली भारत इलेक्ट्रिक तिपहिया वाहनों का दुनिया का सबसे बड़ा बाजार बना हुआ है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) की रिपोर्ट के अनुसार, देश में 2024 में इनकी बिक्री 20 फीसदी बढ़कर 7 लाख के करीब पहुंच गई। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) की ग्लोबल EV आउटलुक 2025 रिपोर्ट के अनुसार, भारत 2024 में लगातार दूसरे साल दुनिया का सबसे बड़ा इलेक्ट्रिक तिपहिया वाहन (3W) बाजार बना रहा। इस वर्ष इन वाहनों की बिक्री में लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई और आंकड़ा 7 लाख यूनिट के करीब पहुंच गया। वैश्विक स्तर पर तिपहिया वाहन बाजार में 5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, लेकिन इलेक्ट्रिक सेगमेंट में 10 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी हुई और 10 लाख से ज्यादा यूनिट्स की बिक्री हुई। भारत और चीन मिलकर 90 प्रतिशत से अधिक इलेक्ट्रिक और पारंपरिक तिपहिया वाहनों की बिक्री के लिए जिम्मेदार रहे। खास बात यह रही कि चीन में इलेक्ट्रिक 3W की हिस्सेदारी 15% से नीचे बनी रही, जबकि भारत ने चीन को पछाड़ते हुए इस सेगमेंट में 57% बाजार हिस्सेदारी के साथ शीर्ष स्थान बनाए रखा।   सरकार प्रोत्साहन से बढ़ा ईवी अडॉप्शन भारत सरकार की नई योजना PM ई-DRIVE को इस तेजी से बढ़ते ट्रेंड का बड़ा कारण माना जा रहा है। इस योजना के तहत 2024 में 3 लाख से अधिक इलेक्ट्रिक तिपहिया वाहनों को व्यावसायिक उपयोग के लिए प्रोत्साहन देने हेतु बजट आवंटित किया गया है। IEA के मुताबिक, भारत, चीन और दक्षिण-पूर्व एशिया आज भी दोपहिया और तिपहिया वाहनों (2/3W) के सबसे बड़े बाजार हैं। भारत में 2024 में 220 इलेक्ट्रिक दोपहिया निर्माता सक्रिय रहे, जिनमें से शीर्ष 4 कंपनियों ने कुल बिक्री का 80 प्रतिशत हिस्सा हासिल किया। कुल 13 लाख EV दोपहिया वाहन बिके, जो पूरे बाजार का 6 प्रतिशत है। भारत में बढ़ी ई-वाहन निर्मान क्षमता बढ़ती प्रतिस्पर्धा और सरकारी प्रोत्साहनों के कारण इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की कीमतें अब पारंपरिक वाहनों के करीब पहुंच रही हैं। जैसे ओला ने S1X मॉडल 70,000 रुपये में पेश किया है। सरकार द्वारा दी जा रही सब्सिडी के तहत दोपहिया इलेक्ट्रिक वाहनों पर 5,000 रुपये प्रति kWh तक की सहायता मिल रही है। भारत में EV उत्पादन क्षमता भी तेजी से बढ़ी है। 2024 में 80 प्रमुख निर्माताओं की कुल क्षमता 1 करोड़ यूनिट थी, जो घरेलू बिक्री से आठ गुना ज्यादा थी। यह आने वाले समय में 1.7 करोड़ यूनिट तक जा सकती है। पिछले साल बिकी 1 लाख इलेक्ट्रिक कारें इलेक्ट्रिक कारों की बात करें तो 2024 में इनकी बिक्री 1 लाख यूनिट रही। 2025 की पहली तिमाही में बिक्री 35,000 यूनिट तक पहुंच गई, जो सालाना 45 प्रतिशत की वृद्धि है। भारत में घरेलू कंपनियों द्वारा निर्मित कारें चीन से आयातित मॉडलों की तुलना में सस्ती हैं। इलेक्ट्रिक बसों के मामले में भी भारत ने बड़ी प्रगति की है। 2020 में जहां इनकी संख्या 3,000 से कम थी, 2024 के अंत तक यह 11,500 से अधिक हो गई।  

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