LATEST NEWS

मुकेश अंबानी नेटवर्थ 1 लाख करोड़ रुपये घटी, दुनिया के अमीरों की लिस्ट में टॉप-10 से हुए बाहर

नई दिल्ली  बिजनेस की दुनिया में बड़ा फेरबदल देखने को मिला है। देश की सबसे मूल्यवान कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी अब दुनिया के टॉप 10 सबसे अमीर लोगों में नहीं रहे। उनकी नेटवर्थ में पिछले साल के मुकाबले 1 लाख करोड़ रुपये की कमी आई है। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि उन पर कर्ज बढ़ गया है। यह जानकारी Hurun Global Rich List 2025 में दी गई है। टेस्ला (Tesla) के CEO एलन मस्क दुनिया के सबसे अमीर आदमी बन गए हैं। उनकी संपत्ति में 82% की बढ़ोतरी हुई है। अब उनके पास कुल 420 बिलियन डॉलर की संपत्ति है। इस बीच आईटी कंपनी HCL की रोशनी नादर दुनिया की पांचवीं सबसे अमीर महिला बन गई हैं। उनके पास 3.5 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति है। रोशनी नाडर पहली भारतीय महिला हैं जो दुनिया की टॉप 10 महिलाओं में शामिल हुई हैं। उनके पिता शिव नाडर ने HCL में अपनी 47% हिस्सेदारी उन्हें दे दी है। मुकेश अंबानी अभी भी भारत और एशिया के सबसे अमीर आदमी हैं। अंबानी परिवार के पास 8.6 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति है। हालांकि पिछले साल के मुकाबले उनकी संपत्ति में करीब 13 फीसदी यानी 1 लाख करोड़ रुपये की कमी आई है। गौतम अडानी और उनके परिवार की संपत्ति में 13% की बढ़ोतरी हुई है। पिछले एक साल में उनकी नेटवर्थ में 1 लाख करोड़ रुपये की तेजी आई है। वह 8.4 लाख करोड़ रुपये की नेटवर्थ के साथ भारतीय अमीरों की लिस्ट में दूसरे नंबर पर हैं। रोशनी नाडर और उनका परिवार इस लिस्ट में तीसरे नंबर पर है। उन्हें पहली बार इस लिस्ट में जगह मिली है। कौन-कौन है टॉप 10 में सन फार्मा के दिलीप सांघवी की संपत्ति में 21% की बढ़ोतरी हुई है। अब उनके पास 2.5 लाख करोड़ रुपये हैं और वह इस लिस्ट में चौथे स्थान पर आ गए हैं। विप्रो के अजीम प्रेमजी 2.2 लाख करोड़ रुपये के साथ पांचवें, कुमार मंगलम बिड़ला 2 लाख करोड़ रुपये के साथ छठे नंबर पर हैं। साइरस पूनावाला 2 लाख करोड़ रुपये की नेटवर्थ के साथ संयुक्त छठे नंबर पर हैं। पिछले एक साल में उनकी नेटवर्थ में 8 फीसदी गिरावट आई है। बजाज ऑटो वाले नीरज बजाज 1.6 लाख करोड़ रुपये के साथ आठवें नंबर पर हैं जबकि रवि जयपुरिया और राधाकिशन दमानी 1.4 लाख करोड़ रुपये के साथ संयुक्त रूप से नौवें नंबर पर हैं। मुंबई में सबसे ज्यादा अरबपति हैं। टॉप 10 में से पांच अरबपति मुंबई से हैं। नई दिल्ली में दो अरबपति हैं। बेंगलुरु,अहमदाबाद और पुणे में एक-एक अरबपति हैं।

साल की पहली तिमाही के दौरान हाउसिंग रियल एस्टेट का बाजार सुस्त हो गया

नई दिल्ली बीते कुछ साल में मकानों की कीमत (House Price) आसमान को छूने को बेताब है। इधर, जियो-पोलिटिकल टेंशन और शेयर बाजार में गिरावट के बीच निवेशकों का सेंटिमेंट बिगड़ गया है। तभी तो इस साल की पहली तिमाही के दौरान हाउसिंग रियल एस्टेट का बाजार सुस्त हो गया है। तभी तो इस दौरान मकानों की बिक्री में 28 फीसदी की गिरावट आई है। रिपोर्ट से हुआ है खुलासा रियल एस्टेट कंसल्टेंट एनारॉक (Anarock) का कहना है कि आवासीय संपत्तियों की आसमान छूती कीमतों और भू-राजनीतिक तनावों के कारण Q1, 2025 में भारतीय आवास बाजार की तेजी धीमी हो गई है। उसकी वजह से घरों की बिक्री में कमी आ रही है। इसकी एक रिपोर्ट के मुताबिक इस साल जनवरी से मार्च के दौरान करीब 93,280 यूनिट्स की बिक्री हुई है। पिछले साल इसी समय में 1,30,170 यूनिट्स की बिक्री हुई थी। इस हिसाब से इस साल 28% की गिरावट दिख रही है। दिल्ली एनसीआर में बिक्री 20 फीसदी घटी दिल्ली-NCR में बिक्री 20% तक घटी है। यहां इस साल पहली तिमाही के दौरान करीब 12,520 यूनिट्स की बिक्री हुई है। जबकि पिछले साल इसी दौरान 15,650 यूनिट्स की बिक्री हुई थी। मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) में आवासीय संपत्तियों की बिक्री 26% तक गिरी है। वहां इस साल करीब 31,610 यूनिट्स की बिक्री हुई है, जबकि पिछले साल 42,920 यूनिट्स की बिक्री हुई थी। मकानों (इकाइयों में) की बिक्री में साल-दर-साल % परिवर्तन   शहरों के नाम Q1-2025 Q1-2024 % परिवर्तन (Q1-2024 बनाम Q1-2025) एनसीआर 12,520 15,650 -20% एमएमआर 31,610 42,920 -26% बैंगलोर 15,000 17,790 -16% पुणे 16,100 22,990 -30% हैदराबाद 10,100 19,660 -49% चेन्नई 4,050 5,510 -26% कोलकाता 3,900 5,650 -31% कुल 93,280 1,30,170 -28% स्रोत: एनारॉक रिसर्च   बेंगलुरु-हैदराबाद में भी घटी बिक्री इस अविध के दौरान बेंगलुरु में मकानों की बिक्री 16% तक गिरी है। वहां इस साल की करीब 15,000 यूनिट्स की बिक्री होने की संभावना है, जबकि पिछले साल 17,790 यूनिट्स की बिक्री हुई थी। पुणे में बिक्री 30% तक गिर सकती है। यहां 16,100 यूनिट्स की बिक्री होने का अनुमान है, जबकि पिछले साल 22,990 यूनिट्स की बिक्री हुई थी। हैदराबाद में घरों की बिक्री 49% तक गिर सकती है। यहां 10,100 यूनिट्स की बिक्री होने की संभावना है, जबकि पिछले साल 19,660 यूनिट्स की बिक्री हुई थी। चेन्नई में बिक्री 26% तक गिर सकती है। यहां 4,050 यूनिट्स की बिक्री होने का अनुमान है, जबकि पिछले साल 5,510 यूनिट्स की बिक्री हुई थी। कोलकाता में आवासीय संपत्तियों की बिक्री इस साल जनवरी-मार्च में 31% तक कम हो सकती है। यहां 3,900 यूनिट्स की बिक्री होने का अनुमान है, जबकि पिछले साल इसी समय में 5,650 यूनिट्स की बिक्री हुई थी। अर्थव्यवस्था ठीक तब भी गिरावट एनारॉक के चेयरमैन अनुज पुरी का कहना है कि भारत का समग्र आर्थिक परिदृश्य इस समय सकारात्मक बना हुआ है। GDP विकास दर वैश्विक स्तर पर सबसे अधिक रहने और मुद्रास्फीति भी नियंत्रण में रहने का अनुमान है। लेकिन, तब भी मकानों की बिक्री में गिरावट आ रही है। उन्होंने कहा “हालांकि, मकानों की बढ़ती कीमतों और वैश्विक तनावों जैसे चल रहे भू-राजनीतिक तनाव और एक कमजोर वैश्विक अर्थव्यवस्था ने भारत के आवासीय बाजार की गतिविधि पर असर डाला है। इन कारकों का असर Q1 2025 में आवास बाजार पर पड़ा है।”

अमेरिकी टैरिफ का बाजार पर नहीं दिखा कोई असर, बढ़त के साथ 16,119.85 पर बंद हुआ

मुंबई अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से लगाए गए नए टैरिफ को दरकिनार करते हुए भारतीय शेयर बाजार गुरुवार को कारोबारी सत्र में हरे निशान में बंद हुआ। बाजार के ज्यादातर सूचकांकों में खरीदारी देखी गई। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 317.93 अंक या 0.41 प्रतिशत की बढ़त के साथ 77,606.43 और निफ्टी 105.10 अंक या 0.45 प्रतिशत की मजबूती के साथ 23,591.95 पर था। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिका में आयात होने वाली सभी कारों पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। हालांकि, बाजार पर इसका कोई खास असर देखने को नहीं मिला। लार्जकैप के साथ मिडकैप इंडेक्स में भी खरीदारी हुई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 193.25 अंक या 0.37 प्रतिशत की तेजी के साथ 51,839.40 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 183.10 अंक या 1.15 प्रतिशत की बढ़त के साथ 16,119.85 पर बंद हुआ। सेक्टोरल आधार पर आईटी, पीएसयू बैंक, फाइनेंशियल सर्विसेज, एफएमसीजी, मेटल, रियल्टी, मीडिया, एनर्जी, प्राइवेट बैंक, इन्फ्रा और कमोडिटीज इंडेक्स हरे निशान में बंद हुए। ऑटो और फार्मा इंडेक्स ही लाल निशान में बंद हुए हैं। सेंसेक्स पैक में बजाज फिनसर्व, इंडसइंड बैंक, एनटीपीसी, एलएंडटी, अल्ट्राटेक सीमेंट, अदाणी पोर्ट्स, बजाज फाइनेंस, पावर ग्रिड, जोमैटो, एसबीआई, एचडीएफसी बैंक, टाइटन और टेक महिंद्रा टॉप गेनर्स थे। टाटा मोटर्स, सन फार्मा, कोटक महिंद्रा बैंक, भारती एयरटेल, एचसीएल टेक, एमएंडएम, टाटा स्टील, एचयूएल और मारुति सुजुकी टॉप लूजर्स थे। जानकारों के मुताबिक, मंथली एक्सपायरी के कारण धीमी शुरुआत के बाद बाजार में रिकवरी देखने को मिली और यह 105.10 अंक बढ़कर 23,591.95 पर बंद हुआ। प्रोग्रेसिव शेयर्स के निदेशक आदित्य गग्गर ने कहा, “ऐसा लगता है कि इंडेक्स का करेक्शन फेस पूरा हो गया है, तेजी के गैप को भर दिया है और पियर्सिंग कैंडलस्टिक पैटर्न बना लिया है। बाजार के लिए रुकावट का स्तर 23,800 पर है और इस स्तर से ऊपर ब्रेकआउट इंडेक्स को 24,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर की ओर ले जा सकता है। हालांकि, सपोर्ट 23,400 पर बना हुआ है।” बाजार की शुरुआत तेजी के साथ हुई थी। सुबह करीब 9.26 बजे, सेंसेक्स 112.96 अंक या 0.15 प्रतिशत बढ़कर 77,401.46 पर कारोबार कर रहा था, जबकि निफ्टी 28.20 अंक या 0.12 प्रतिशत बढ़कर 23,515.05 पर था। विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने 26 मार्च को 2,240.55 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने उसी दिन 696.37 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।

बिरला ओपस पेंट्स ने लखनऊ में पहला विशेष पेंट स्टूडियो लॉन्च किया, जो है पेंटिंग की सभी जरूरतों के लिए एक खास जगह

बिरला ओपस पेंट्स ने लखनऊ में पहला विशेष पेंट स्टूडियो लॉन्च किया, जो है पेंटिंग की सभी जरूरतों के लिए एक खास जगह ग्राहक अनुभव पर केंद्रित डिज़ाईन के साथ यह पेंट स्टूडियो उत्तर प्रदेश में अपनी तरह का पहला कंपनी ओन्ड एवं कंपनी ऑपरेटेड स्टोर है। बिरला ओपस पेंट स्टूडियो इनोवेशन और पर्सनालाईज़ेशन का मिश्रण पेश करता है। यह होम डेकोर के सपनों को साकार करने के लिए विशेषज्ञ मार्गदर्शन एवं आकर्षक स्पेस प्रदान करता है। लखनऊ आदित्य बिरला ग्रुप की ग्रासिम इंडस्ट्रीज़ के तहत आने वाले ब्रांड, बिरला ओपस पेंट्स ने आज लखनऊ में अपना दूसरा बिरला ओपस पेंट स्टूडियो (कंपनी ओन्ड एवं कंपनी ऑपरेटेड स्टोर) शुरू किया। गुरुग्राम में अपने पहले पेंट स्टूडियो की सफल शुरुआत के बाद, यह विस्तार इनोवेशन, प्रीमियम पेशकशों और दिलचस्प ग्राहक अनुभव द्वारा पेंट एवं डेकोर उद्योग में परिवर्तन लाने की ब्रांड की प्रतिबद्धता प्रदर्शित करता है। यह लॉन्च बिरला ओपस पेंट्स की विकास रणनीति का सबसे अहम कदम है, जिसका मकसद पूरे भारत में अपने रिटेल नेटवर्क को फैलाना है। कंपनी आने वाले महीनों में एक्सपीरियंशल रिटेल पर केंद्रित रहते हुए मुंबई, नवी मुंबई, बैंगलोर, हैदराबाद, कोलकाता, जयपुर, अहमदाबाद और सूरत में अपने एक्सपीरियंस सेंटर खोलने की योजना बना रही है। लखनऊ के इस बिरला ओपस पेंट स्टूडियो को बड़ी ही रचनात्मकता से एक प्रेरणा केंद्र के रूप में बनाया गया है, जो पारंपरिक पेंट स्टोर्स से काफी अलग है। यह एक अनुभव केंद्र है, जहां ग्राहक नए आइडिया खोज सकेंगे और साथ ही रंगों को छूकर, महसूस करके उन्हें वास्तविक माहौल में अनुभव कर सकेंगे। ग्राहकों को यहां रंग चयन, टेक्सचर और पेंट लगाने की तकनीकों पर निशुल्क विशेषज्ञ मार्गदर्शन मिलेगा। साथ ही उन्नत विज़ुअलाइज़ेशन टूल्स की मदद से वे अपने चुने हुए रंगों को वास्तविक माहौल में देख सकेंगे। पेंट के अलावा, यह पेंट स्टूडियो वॉलपेपर, डिज़ाइनर फिनिश और खास कोटिंग की सुविधा भी देता है, जिससे यहां आपको संपूर्ण डेकोर समाधान मिलता है। बिरला ओपस पेंट्स के सीईओ, श्री रक्षित हरगवे ने बताया कि, “गुरुग्राम में हमारे पहले बिरला ओपस पेंट स्टूडियो की सफलता के बाद, हमें यह अद्वितीय अनुभव लखनऊ में लाने की बहुत खुशी है। हम पूरे देश में रंगों के अनुभव को नया आयाम देने की दिशा में कार्यरत हैं। भारत में उपभोक्ता अब पेंट खरीदते समय या सेवाएं लेते समय नए और बेहतर विकल्पों को अपनाना पसंद करते हैं। उपभोक्ताओं की इस बदलती दिलचस्पी को समझते हुए, हम बिरला ओपस पेंट्स में ऐसे खास अनुभव केंद्र बना रहे हैं, जो गृहस्वामियों को अपने सपनों का घर बनाने का मौका देते हैं।” उन्होंने कहा, ‘‘यह एक्सपीरियंस सेंटर उत्कृष्टता, इनोवेशन और अतुलनीय गुणवत्ता की हमारी प्रतिबद्धता का प्रमाण है। हमारा विश्वास है कि हर घर को एक व्यक्तिगत स्पर्श मिलना चाहिए। हम इस सेंटर में 170 से अधिक उत्पाद और कुछ अधिक एक्सक्लुसिव विकल्प पेश कर रहे हैं। इसलिए हमारे ग्राहक हमारे पेंट, डिज़ाईनर फिनिश और वॉलपेपर्स का अनुभव बिल्कुल नए और अद्वितीय रूप में ले सकेंगे। हमारा उद्देश्य है कि पेंटिंग एक ऐसी कला बन जाए, जो जगहों को व्यक्तिगत कहानियाँ बयाँ करने में समर्थ बना दे।” नए स्टोर का पता: बिरला ओपस पेंट स्टूडियो, ग्राउंड फ्लोर, पृथ्वी रतन हाइट्स, सीपी 4, विजयंत खंड, फैजाबाद रोड, गोमती नगर, लखनऊ, यू.पी. गोमतीनगर, लखनऊ – 226010 बिरला ओपस पेंट का हर स्टूडियो आर्किटेक्ट्स और इंटीरियर डिज़ाईनर्स के लिए एक केंद्र है, जहाँ उन्हें संसाधनों, नमूनों और विशेषज्ञ सपोर्ट के साथ एक समर्पित कार्यस्थल मिलता है, जहाँ प्रोफेशनल्स सहयोगपूर्वक निर्माण कर सकते हैं।

दूरसंचार कंपनियां भविष्य में नियमित रूप से टैरिफ बढ़ाने की योजना बना रही, रिपोर्ट में हुआ खुलासा

नई दिल्ली भारत में दूरसंचार सेवाओं की कीमतें आने वाले समय में और बढ़ सकती हैं। दूरसंचार कंपनियां भविष्य में नियमित रूप से टैरिफ बढ़ाने की योजना बना रही हैं ताकि वे अपने राजस्व में सुधार कर सकें। कंपनियां पहले भी टैरिफ में वृद्धि कर चुकी हैं जैसे दिसंबर 2019 नवंबर 2021 और जुलाई 2024 में। राजस्व वृद्धि की योजना रिपोर्ट के अनुसार दूरसंचार कंपनियां प्रति उपयोगकर्ता औसत राजस्व (एआरपीयू) को बढ़ाने के लिए कीमतों में वृद्धि करेंगी। इसका मतलब है कि उपभोक्ता प्रीमियम प्लान की ओर रुख करेंगे जिससे कंपनियों के राजस्व में वृद्धि होगी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारतीय दूरसंचार क्षेत्र वर्तमान में एक महत्वपूर्ण चरण से गुजर रहा है जहां प्रतिस्पर्धा कम हो गई है और कंपनियां अब अधिक बार टैरिफ बढ़ाने की योजना बना रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार उद्योग में निवेश और ग्राहकों के डाटा खपत को देखते हुए रिटर्न अभी भी कम है इसलिए कंपनियां आने वाले वर्षों में अधिक बार टैरिफ बढ़ाएंगी। कंपनियों का राजस्व हुआ दोगुना रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पिछले पांच सालों में दूरसंचार कंपनियों का राजस्व लगभग दोगुना हो गया है। उनकी लाभप्रदता में भी सुधार हो रहा है परिचालन लागत स्थिर हो रही है और मार्जिन मजबूत हो रहे हैं। 5जी सेवाओं के आने के बाद कंपनियों ने अपने पूंजीगत खर्च में कमी की है जिससे वित्त वर्ष 2025-26 और 2026-27 में मुक्त नकदी प्रवाह में बढ़ोतरी हो सकती है। 2जी ग्राहकों की संख्या में गिरावट रिपोर्ट के अनुसार 4जी और 5जी सेवाओं के बढ़ते इस्तेमाल के साथ भारत में 2जी ग्राहकों की संख्या में लगातार कमी आ रही है। अगले पांच से छह वर्षों में 2जी ग्राहकों की संख्या नगण्य हो सकती है। वर्तमान में 25 करोड़ ग्राहक 2जी सेवाओं का उपयोग कर रहे हैं और इनमें से वोडाफोन आइडिया के पास 40 प्रतिशत 2जी ग्राहक हैं जबकि एयरटेल के पास 23 प्रतिशत 2जी ग्राहक हैं। महंगे डाटा प्लान की ओर रुझान दूरसंचार ग्राहक अब 2जी से 4जी सेवाओं की ओर बढ़ रहे हैं और पोस्टपेड ग्राहकों की संख्या में भी वृद्धि हो रही है। इसके कारण प्रति उपयोगकर्ता समग्र राजस्व में सुधार हो रहा है। इसके अलावा डाटा की खपत भी बढ़ रही है और ग्राहक अब अधिक कीमत वाले डाटा प्लान चुन रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय रोमिंग और ओटीटी सब्सक्रिप्शन जैसी सेवाओं की मांग में भी वृद्धि हो रही है। स्टारलिंक के लिए चुनौतीपूर्ण होगा भारत में विस्तार एलन मस्क की सैटेलाइट इंटरनेट कंपनी स्टारलिंक अब भारत में अपनी सेवाओं का विस्तार करना चाहती है। एयरटेल और रिलायंस जियो के साथ समझौता करने के बाद स्टारलिंक वोडाफोन आइडिया से भी बातचीत कर रही है। हालांकि रिपोर्ट में कहा गया है कि स्टारलिंक को भारत में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। भारत में नियामकीय बाधाएं, उच्च आयात कर और सस्ते ब्रॉडबैंड सेवाओं के कारण स्टारलिंक के लिए कीमतों का सही निर्धारण करना मुश्किल हो सकता है। उपग्रह संचार क्षेत्र का विस्तार भारत का उपग्रह संचार क्षेत्र भी तेजी से बढ़ रहा है। सरकार की पहल जैसे कि दूरसंचार प्रौद्योगिकी विकास निधि योजना और दूरसंचार अधिनियम-2023 ने इस क्षेत्र को बढ़ावा दिया है। ओपन एफडीआई नीतियां, क्वांटम सैटेलाइट तकनीक में प्रगति और वीसैट नेटवर्क का विस्तार इस क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा दे रहे हैं। इस प्रकार भारत का दूरसंचार क्षेत्र भविष्य में और अधिक महंगा हो सकता है लेकिन इसके साथ ही इसमें कई नई तकनीकी और व्यापारिक पहल भी सामने आ सकती हैं।  

RBI ने किया स्पष्ट, छोटे ऋण पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं, नए नियम 1 अप्रैल 2025 से बदल जाएंगे

मुंबई भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने प्राथमिकता वाले क्षेत्रों (प्रायोरिटी सेक्टर लेंडिंग – PSL) में ऋण देने के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। नए दिशा-निर्देश 1 अप्रैल 2025 से लागू होंगे। इन बदलावों का उद्देश्य छोटे उधारकर्ताओं को राहत देना और बैंकों को अधिक पारदर्शिता के साथ काम करने के लिए प्रेरित करना है। आइए जानते हैं नए नियमों के मुख्य बिंदु: छोटे ऋण पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं RBI ने स्पष्ट कर दिया है कि 50,000 रुपये तक के छोटे ऋण पर बैंक किसी भी प्रकार का सेवा शुल्क या निरीक्षण शुल्क नहीं लगा सकेंगे। इसका उद्देश्य छोटे उधारकर्ताओं को अनावश्यक वित्तीय बोझ से बचाना है। यह कदम छोटे व्यवसायियों, किसानों और कम आय वाले लोगों के लिए बड़ी राहत साबित होगा। होम लोन की लिमिट बढ़ाई गई RBI ने प्राथमिकता वाले क्षेत्र के तहत होम लोन की सीमा बढ़ा दी है। नए नियमों के अनुसार:     50 लाख या उससे अधिक आबादी वाले शहरों में अब 50 लाख रुपये तक का होम लोन PSL के तहत आएगा, जो पहले 35 लाख था।          मकान की कीमत 63 लाख रुपये तक हो सकती है, जो पहले 45 लाख रुपये थी।     10 लाख या उससे अधिक आबादी वाले केंद्रों में अब 45 लाख रुपये तक का होम लोन मिलेगा।     10 लाख से कम आबादी वाले क्षेत्रों में 35 लाख रुपये तक का होम लोन PSL के तहत आएगा।     व्यक्तिगत परिवारों के लिए कर्ज सीमा प्रति उधारकर्ता 10 लाख रुपये निर्धारित की गई है। बैंकों को देनी होगी तिमाही और वार्षिक रिपोर्ट नए दिशा-निर्देशों के तहत, बैंकों को अब तिमाही और वार्षिक आधार पर अपने प्राथमिकता वाले ऋणों की विस्तृत जानकारी जमा करनी होगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि PSL के तहत दिए गए ऋण सही क्षेत्रों तक पहुंचे और पारदर्शिता बनी रहे। गोल्ड लोन PSL के तहत नहीं आएगा RBI ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि बैंकों द्वारा गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) से खरीदे गए सोने के आभूषणों के बदले दिए गए ऋणों को प्राथमिकता क्षेत्र ऋण के रूप में नहीं गिना जाएगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के लिए निर्धारित फंड वास्तव में जरूरतमंद क्षेत्रों तक पहुंचे, जैसे कृषि, छोटे व्यवसाय और कमजोर वर्ग। प्रायोरिटी सेक्टर लेंडिंग (PSL) क्या है? प्रायोरिटी सेक्टर लेंडिंग RBI की एक नियामक नीति है, जिसके तहत बैंकों को अपने कुल ऋण का एक निश्चित हिस्सा समाज के कुछ महत्वपूर्ण क्षेत्रों को देना आवश्यक होता है। इसमें निम्नलिखित शामिल हैं: छोटे और मध्यम उद्यम निम्न-आय वर्ग के लिए आवासीय ऋण शिक्षा ऋण समाज के कमजोर और पिछड़े वर्गों के लिए ऋण बदलाव से क्या होगा फायदा? छोटे उधारकर्ताओं को राहत: 50,000 रुपये तक के लोन पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगेगा। घर खरीदना हुआ आसान: होम लोन की सीमा बढ़ने से मध्यम वर्ग को राहत मिलेगी।     पारदर्शिता बढ़ेगी: बैंकों को तिमाही और वार्षिक डेटा देना होगा, जिससे PSL का सही उपयोग सुनिश्चित होगा।     गोल्ड लोन PSL के तहत नहीं: इससे प्राथमिकता क्षेत्र के लिए आवंटित फंड सही जगह पर पहुंचेगा।  

जिंदल की JSW Steel बनी दुनिया की सबसे मूल्यवान स्टील कंपनी, अमेरिका की Nucor Corp को पछाड़ा दिया

नई दिल्ली  सज्जन जिंदल की अगुवाई वाली कंपनी जेएसडब्ल्यू स्टील दुनिया की सबसे वैल्यूएबल स्टील कंपनी बन गई है। मंगलवार को BSE पर इसके शेयर की कीमत 1,074.15 रुपये के रेकॉर्ड तक पहुंच गई। इसके साथ ही कंपनी का मार्केट कैप $30 अरब से ज्यादा हो गया। पिछले एक महीने में इस शेयर में लगभग 11% और पिछले एक हफ्ते में 4% से ज्यादा तेजी आई है। JSW स्टील ने अमेरिका की Nucor Corp को पछाड़कर दुनिया की सबसे वैल्यूएबल स्टील कंपनी बनने का गौरव हासिल किया। Nucor Corp का मार्केट कैप $29.92 अरब है। यूरोप की ArcelorMittal, जापान की Nippon Steel Corp और चीन की Baoshan Iron जैसी बड़ी स्टील कंपनियों का मार्केट कैप $21 अरब से $27 अरब के बीच है। JSW स्टील की वैल्यू दूसरी भारतीय कंपनियों जैसे टाटा स्टील, जिंदल स्टील एंड पावर और स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAIL) से भी ज्यादा है। टाटा स्टील भारत की दूसरी और दुनिया की पांचवीं सबसे वैल्यूएबल स्टील कंपनी है, जिसका मार्केट कैप लगभग $23.09 अरब है। जिंदल स्टील का मार्केट कैप $10.81 अरब है जबकि सरकारी कंपनी SAIL का मार्केट कैप $5.5 अरब है। पिछले एक हफ्ते में टाटा स्टील और SAIL के शेयरों में 1 से 5% तक तेजी आई है जबकि जिंदल स्टील एंड पावर के शेयर गिरे हैं। शेयर की कीमत सरकार ने कुछ समय पहले सस्ते स्टील के इम्पोर्ट को रोकने के लिए कुछ कदम उठाने की बात कही थी। इससे भारतीय स्टील कंपनियों को फायदा हुआ है। इन्वेस्टेक के एनालिस्ट रितेश शाह का कहना है कि JSW स्टील हमारी पसंदीदा कंपनी है। कंपनी ने लगातार अच्छी ग्रोथ की है और EBITDA भी अच्छा रहा है। इसका 52 हफ्ते का उच्चतम स्तर 1,074.15 रुपये और न्यूनतम स्तर 815.70 रुपये है। बुधवार को कंपनी का शेयर फ्लैट ट्रेड कर रहा है। सुबह 11 बजे यह 0.03% की गिरावट के साथ 1061.50 रुपये पर था। अब बाजार पूंजीकरण के हिसाब से यह दुनिया की सबसे मूल्यवान स्टील कंपनी बन गई है। इस मामले में कंपनी ने आर्सेलर मित्तल और निप्पॉन स्टील जैसी दिग्गज कंपनियों को पीछे छोड़ दिया है। बता दें कि JSW स्टील के शेयरों में 2025 में अब तक 18% की वृद्धि हुई है। यह शेयर साल 2025 में अब तक निफ्टी 50 इंडेक्स पर सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वालों में से एक है। शेयर का भाव सप्ताह के दूसरे दिन मंगलवार को JSW स्टील के शेयर 1074.15 रुपये पर पहुंच गए थे। यह भाव शेयर के 52 हफ्ते का हाई भी है। इस शेयर की क्लोजिंग 1061.85 रुपये पर हुई थी। इस कंपनी के मार्केट कैप की बात करें तो ₹2.6 लाख करोड़ है। JSW स्टील का बाजार पूंजीकरण भारत में अपने प्रतिस्पर्धी जैसे टाटा स्टील (₹1.95 लाख करोड़) और अन्य की तुलना में भी अधिक है। शेयर का टारगेट प्राइस ब्रोकरेज फर्म इन्वेस्टेक ने JSW स्टील को ₹1100 प्रति शेयर के टारगेट प्राइस के साथ “खरीदें” रेटिंग दी है। JSW स्टील अपनी विकास संभावनाओं, रिटर्न रेश्यो प्रोफाइल, सैटलमेंट आदि के कारण इन्वेस्टेक की पसंदीदा कंपनी है। कंपनी ने पिछले कुछ वर्षों के दौरान क्षमता में स्थिर वृद्धि और एबिटा से पहले की आय के कारण आकर्षक शेयरधारक रिटर्न दिया है। एक अन्य ब्रोकरेज आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के मुताबिक शेयर 1230 रुपये तक जा सकता है। 22 करोड़ से अधिक शेयर बेचने का ऐलान इस बीच, JSW स्टील ने कहा कि वह प्रस्तावित बाय-बैक ऑफर के तहत अपनी सहायक कंपनी पियोम्बिनो स्टील लिमिटेड (पीएसएल) में 22 करोड़ से अधिक शेयर बेचेगी। यह शेयर 1,676.45 करोड़ रुपये में बेचे जाएंगे। जेएसडब्ल्यू स्टील ने कहा कि उसके पास पीएसएल में 508 करोड़ इक्विटी शेयर हैं, जो पीएसएल की कुल इक्विटी शेयरधारिता का 83.28 प्रतिशत है। निदेशक मंडल ने प्रस्तावित बाय-बैक ऑफर के तहत 75.30 रुपये प्रति इक्विटी शेयर की कीमत पर पीएसएल में रखे गए 22,26,36,000 इक्विटी शेयरों की निविदा को मंजूरी दे दी है। जेएसडब्ल्यू स्टील ने कहा कि इस कदम से कंपनी को अपनी बैलेंस शीट को और मजबूत करने में मदद मिलेगी।

बैंकों में पड़े अनक्लेम्ड अमाउंट को हासिल करना और आसान हो जाएगा, बैंक जल्द ही एक आसान जनरल फॉर्मेट पेश करेंगे

नई दिल्ली  बैंकों में पड़े अनक्लेम्ड अमाउंट यानी लावारिस रकम को हासिल करना और आसान हो जाएगा. ईटी की रिपोर्ट के अनुसार, इस संबंध में सरकारी और प्राइवेट बैंक जल्द ही एक आसान जनरल फॉर्मेट पेश करेंगे, जिससे खाताधारकों या उनके नामांकित व्यक्तियों को 78,213 करोड़ रुपये से अधिक की लावारिस जमा राशि वापस मिल सकेगी. इस मामले से वाकिफ लोगों ने इस बात की जानकारी दी है. इस सिस्टम में सामान्य आवेदन और डिक्लरेशन फॉर्म के अलावा लावारिस जमा राशियों को फिर से प्राप्त करने के लिए जरूरी स्टैंडर्ड डॉक्युमेंट्स की सूची भी शामिल होगी. वर्किंग ग्रुप ने तैयार किया मसौदा एक सरकारी बैंक के एक्जीक्यूटिव ने बताया कि आवेदन के साथ नाम, मोबाइल नंबर और पता जैसी डिटेल देनी होगी, जिन्हें वेरिफिकेशन के बाद संबंधित बैंक शाखा द्वारा प्रोसेस्ड किया जाएगा. एक अन्य बैंक अधिकारी ने कहा, “अनक्लेम्ड डिपॉजिट के मुद्दे पर विचार करने के लिए गठित वर्किंग ग्रुप की सिफारिशों को स्वीकार कर लिया गया है. ऐसे में वित्त वर्ष 2026 से, ‘ऑनलाइन रिट्रीवल मैकेनिज्म’ पूरी तरह से चालू हो जाएगा.” दरअसल, पिछले साल भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), सरकार और अन्य हितधारकों के साथ चर्चा के बाद, सरकारी बैंकों के वरिष्ठ बैंकरों का एक कार्य समूह बनाया गया था, जिसे बैंकों में लावारिस पड़ी रकम के सेटलमेंट में तेजी लाने के तरीकों की सिफारिश करने को कहा गया था. 78000 करोड़ की लावारिस रकम बैंक खातों में जमा वह राशि, जो 10 वर्ष या उससे अधिक अवधि से पड़ी है, उसे RBI के जमाकर्ता शिक्षा और जागरूकता (DEA) कोष में ट्रांसफर कर दिया जाता है. मार्च 2024 तक इस फंड में ₹78,213 करोड़ जमा थे, जो पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में 26% की वृद्धि दर्शाता है. इस रकम को खाताधारक या उनकी मृत्यु होने की दशा में संबंधित उत्तराधिकारी एक नियम के तहत प्राप्त कर सकते हैं. बैंकों में अनक्लेम्ड अमाउंट के मामले ज्यादातर नॉमिनी के रजिस्टर्ड नहीं होने से देखने को मिलते हैं.  

1 अप्रैल से 6% वाला गूगल टैक्स खत्म करेगा भारत?

मुंबई भारत सरकार 1 अप्रैल से उन विदेशी कंपनियों से “गूगल टैक्स” हटा देगी, जो डिजिटल विज्ञापनों के जरिए पैसा कमाती हैं। इसका मतलब यह है कि अब कंपनियों जैसे Google और Meta को भारतीय बाजार में अपनी सेवाओं पर कम टैक्स देना पड़ेगा। इस बदलाव से इन कंपनियों को बड़ा फायदा होगा, क्योंकि अब उन्हें पहले से कम टैक्स देना होगा, जिससे वे अपने कारोबार को और बढ़ा सकेंगी। Equalisation Levy क्या था? भारत सरकार ने इस टैक्स को “इक्वलाइजेशन लेवी” कहा था, जिसे 2016 में लागू किया गया था। यह टैक्स विदेशी कंपनियों पर लगाया जाता था जो भारतीय यूजर्स को ऑनलाइन सेवाएं देती थीं, जैसे विज्ञापन, शॉपिंग, और क्लाउड सेवाएं। इससे यह सुनिश्चित किया जाता था कि विदेशी कंपनियां भारतीय टैक्स सिस्टम का हिस्सा बने और भारत में उनके द्वारा किए गए कारोबार पर टैक्स लिया जाए। कैसे होगा इन कंपनियों को फायदा? अब इस 6% टैक्स को हटा दिया जाएगा, जिससे कंपनियों को भारतीय बाजार में अपनी सेवाओं की कीमतें और ज्यादा फ्लेक्सिबल बनाने का मौका मिलेगा। इससे इन कंपनियों को भारत में अपने ऑपरेशंस को और बढ़ाने का अवसर मिलेगा और वे भारतीय बाजार में अपनी स्थिति को मजबूत कर सकेंगी। इन कंपनियों को अब भारत में अपनी डिजिटल सर्विसेस से होने वाली इनकम पर कम टैक्स देना होगा। इससे उनका कुल टैक्स बिल कम होगा और वे अपनी इनकम का ज्यादा हिस्सा अपने इन्वेस्टमेंट या ग्रोथ के लिए यूज कर सकेंगी। यह टैक्स कटौती अमेरिकी कंपनियों जैसे Google और Meta के लिए एक बड़ी राहत है, और इससे भारतीय डिजिटल मार्केट में और निवेश और विकास की संभावना बढ़ सकती है। EY के वरिष्ठ सलाहकार सुधीर कपाड़िया ने रॉयटर्स से कहा कि ये शुल्क हटाना सरकार का एक स्मार्ट कदम है, क्योंकि कलेक्‍शन बहुत अधिक नहीं था और यह अमेरिकी सरकार के लिए चिंता का विषय था. इस कदम को आगे के व्यापार विवादों को रोकने और एक स्थिर व्यापारिक माहौल बनाए रखने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है.   गूगल और मेटा जैसे प्‍लेटफॉर्म पर विज्ञापन लागत कम करने से भारतीय व्यवसायों द्वारा डिजिटल विज्ञापन पर अधिक खर्च करने को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, जिसके परिणामस्वरूप इन प्लैटफॉर्म पर अधिक विज्ञापनदाता आकर्षित होंगे और उनके राजस्व में वृद्धि होगी. इसके अलावा, इस कदम से इन तकनीकी कंपनियों के लिए प्रॉफिट में सुधार होने की संभावना है. इस फैसले से भारत के डिजिटल क्षेत्र में और अधिक विदेशी निवेश आने की भी उम्मीद है. डिजिटल विज्ञापन को सस्ता बनाकर सरकार डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने और विकास और नवाचार के अवसर प्रदान करने की उम्मीद करती है. टैक्‍स हटाने के साथ-साथ सरकार विदेशी टेक कंपनियों को पहले से उपलब्ध कुछ टैक्‍स छूट को भी कैंसिल करने की योजना बना रही है. हालांकि टैक्‍स हटा दिया जाएगा, लेकिन इन कंपनियों पर अभी भी अन्य प्रावधानों के तहत टैक्‍स लगाया जा सकता है, जिससे एक संतुलित टैक्‍स बना रहेगा.

भारतीय शेयर बाजार में लगातार तेजी जारी, सेंसेक्स 78,000 स्तर के ऊपर हरे निशान में खुला

मुंबई शेयर बाजार (Indian Stock Market) में तेजी का सिलसिला जारी है. बीते कारोबारी दिन सोमवार को आई तूफानी तेजी, मंगलवार को भी जारी है और खुलने के साथ ही सेंसेक्स-निफ्टी दौड़ लगाते हुए नजर आए हैं. एक ओर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला Sensex इंडेक्स खुलने के साथ ही 78000 के पार निकल गया, तो वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का Nifty-50 ने भी करीब 100 अंक की तेजी के साथ कारोबार की शुरुआत की. शुरुआती कारोबार में TCS, HCL से लेकर Infosys के शेयर उछाल मारते हुए नजर आए. सेंसेक्स-निफ्टी की तेज शुरुआत मंगलवार को शेयर मार्केट में कारोबार की शुरुआत होने पर बीएसई का सेंसेक्स (BSE Sensex) अपने पिछले बंद 77,984.38 के लेवल से छलांग लगाते हुए सीधे 78,000 के पार निकल गया और 78,296.28 पर ओपन हुआ. इसके बाद इसकी रफ्तार कुछ ही मिनटों में और बढ़ गई और ये इंडेक्स 78,402.92 के लेवल पर कारोबार करता नजर आया. बात NSE Nifty की करें, तो इस इंडेक्स ने अपने पिछले बंद 23,658.35 के लेवल से चढ़कर 23,751.50 पर कारोबार शुरू किया और फिर 23,766 तक उछला. हालांकि, जोरदार ओपनिंग के बाद शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स-निफ्टी की रफ्तार कुछ कम होती नजर जरूर आई और दोनों इंडेक्स अपने शुरुआती तेजी को गवांते हुए दिखे, लेकिन अचानक फिर Sensex-Nifty ने चाल तेज कर दी. 1845 शेयर ग्रीन जोन में ओपन शुरुआती कारोबार में शेयर मार्केट (Share Market) में मौजूद करीब 1845 कंपनियों के शेयरों ने तेजी के साथ ग्रीन जोन में कारोबार की शुरुआत की, तो वहीं 471 कंपनियों के शेयर ऐसे थे, जो गिरावट के साथ रेड जोन में खुले. इसके अलावा 123 शेयरों की स्थिति में कोई बदलाव देखने को नहीं मिला. एलएंडटी (L&T), टीसीएस (TCS), एक्सिस बैंक (Axis Bank), टाटा मोटर्स (Tata Motors), टेक महिंद्रा (Tech Mahindra) और HCL Tech के शेयरों ने खुलते ही दौड़ लगा दी. वहीं गिरावट वाले शेयरों पर नजर डालें, तो Dr Reddy’s Labs, Britannia, Tata Steel, SBI Life Insurance के शेयर शुरुआती कारोबार में सबसे ज्यादा टूटे. इन 10 शेयरों में सबसे ज्यादा उछाल मंगलवार को शेयर मार्केट में कारोबार शुरू होते ही जिन 10 शेयरों में सबसे ज्यादा उछाल देखने को मिला. उनमें लार्जकैप कंपनियों में शामिल Infosys Share (2.20%), HCL Tech Share (2.10%), TCS Share (1.90%) की बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे. वहीं मिडकैप कंपनियों में शामिल PSB Share (7.36%), IREDA Share (3.18%), Tata Tech Share (2.74%) और Paytm Share (2.10%) की तेजी साथ ट्रेड कर रहे थे. स्मॉलकैप शेयरों को देखें, तो खबर लिखे जाने तक SG Fin Share (16.18%), BMW Share (7.26%) और Exicom Share (4.43%) चढ़कर कारोबार कर रहे थे.

रोरबैंक रुपे क्रेडिट कार्ड में 62 दिन तक का इंटरेस्ट-फ्री पीरियड मिलेगा.

नई दिल्ली  देश में बड़े शहरों से लेकर छोटे शहरों तक में क्रेडिट कार्ड की पॉपुलरिटी बढ़ती जा रही है. इसके जरिए लोग खूब शॉपिंग करते हैं और फिर बाद में बिल चुकाते हैं. क्रेडिट कार्ड के इस्तेमाल का सबसे बड़ा फायदा इसमें मिलने वाला इंटरेस्ट फ्री पीरियड है. भारत में क्रेडिट कार्ड पर आमतौर पर 45-55 दिन तक का इंटरेस्ट-फ्री पीरियड मिलता है. हालांकि अब आपको 62 दिन तक का इंटरेस्ट-फ्री पीरियड मिलने वाला है. दरअसल, मार्केट में एक नया क्रेडिट कार्ड आने वाला है, जिसमें आपको पैसे चुकाने के लिए 62 दिन तक का समय मिलेगा. हम जिस क्रेडिट कार्ड की बात कर रहे हैं, उसका नाम रोरबैंक रुपे क्रेडिट कार्ड (Roarbank RuPay Credit Card) है. इस कार्ड को यूनिटी स्मॉल फाइनेंस बैंक (Unity Small Finance Bank) ने लॉन्च करने जा रहा है. फिलहाल इसके लिए अप्लाई प्रोसेस शुरू नहीं हुआ है लेकिन आप वेटलिस्ट ज्वाइन कर सकते हैं. क्रेडिट कार्ड से मिलेगी UPI पेमेंट की सुविधा यह क्रेडिट कार्ड एनपीसीआई के रुपे नेटवर्क पर आ रहा है और इसे उन सभी ऑनलाइन वेबसाइट्स और मर्चेंट आउटलेट्स में इस्तेमाल किया जा सकता है, जो रुपे कार्ड स्वीकार करते हैं. इसके जरिए आप यूपीआई सुविधा का भी लाभ उठा सकते हैं. इस क्रेडिट कार्ड को यूपीआई ऐप्स से लिंक कर सकते हैं और पड़ोस की छोटी दुकानों पर लगे मर्चेंट यूपीआई क्यूआर कोड को स्कैन कर पेमेंट कर सकते हैं. इसके अलावा आप इस कार्ड के जरिए ऑनलाइन मर्चेंट्स को भी यूपीआई पेमेंट्स कर सकते हैं. रोरबैंक रुपे क्रेडिट कार्ड के फीचर्स     यह लाइफ टाइम फ्री क्रेडिट कार्ड है. इसका मतलब हुआ कि इस कार्ड में कोई जॉइनिंग या एनुअल चार्ज नहीं देना होगा.     इस क्रेडिट कार्ड में 62 दिन तक का इंटरेस्ट-फ्री पीरियड मिलने वाला है.     हर महीने चुनी गई कैटेगरीज पर 20 फीसदी तक कैशबैक मिलेगा.     अपने नजदीक खड़े दोस्तों को फोन हिलाकर तुरंत पैसे भेज सकते हैं. कार्ड नंबर या फोन डिटेल्स की जरूरत नहीं होगी.  

रूसी तेल पर अमेरिकी बैन बेअसर, रूस के तेल का भारत में फिर से आयात बढ़ गया

नई दिल्ली रूसी तेल पर अमेरिकी बैन बेअसर नजर आ रहा है। भारत ने रूस से तेल खरीदना फिर से तेज कर दिया है। जनवरी और फरवरी के मुकाबले मार्च में इसमें तेजी आई है। जनवरी में अमेरिका ने रूस पर कुछ बैन लगाए थे। इसमें भारत और चीन बेचे जाने वाला कच्चा तेल भी शामिल था। यह बैन जो बाइडेन के प्रशासन ने लगाए थे। डोनाल्ड ट्रंप के सत्ता संभालने के बाद भी ये बैन लगे हुए हैं। हालांकि रूस ने मार्च में तेल बेचने की रफ्तार बढ़ाई है। इंडियन एक्सप्रेस की एक खबर के मुताबिक भारत ने मार्च में रूस से काफी मात्रा में तेल खरीदा है। इसकी वजह ये है कि रूस का तेल आसानी से मिल रहा है। वहीं ज्यादातर तेल 60 डॉलर प्रति बैरल से कम कीमत पर मिल रहा है। इससे भारत को तेल लाने के लिए बिना पाबंदी वाले जहाज आसानी से मिल जा रहे हैं। रूस के पास तेल ज्यादा होने की एक बड़ी वजह ये भी है कि यूक्रेन ने रूस के तेल कारखानों पर ड्रोन से हमले किए हैं। इससे रूस में तेल की खपत कम हो गई है और वो तेल बाहर बेचने को मजबूर है। कितना खरीदा तेल? तेल बाजार पर नजर रखने वाली कंपनी केप्लर (Kpler) ने कुछ आंकड़े जारी किए हैं। इन आंकड़ों के अनुसार मार्च के पहले 21 दिनों में भारत ने रूस से हर दिन औसतन 1.85 मिलियन बैरल तेल खरीदा है। फरवरी में ये आंकड़ा 1.47 मिलियन बैरल प्रतिदिन (bpd) था। वहीं जनवरी में यह 1.64 मिलियन bpd था। इसका मतलब है कि भारत ने मार्च में रूस से ज्यादा तेल खरीदा है। मार्च में भारत ने जितना भी तेल खरीदा है, उसमें से रूस की हिस्सेदारी 35 फीसदी से ज्यादा रही है। फरवरी में ये हिस्सेदारी 31% और जनवरी में 33% थी। भारत और चीन सबसे आगे जनवरी से मार्च के महीने में भारत ने रूस से हर दिन औसतन 1.75 मिलियन bpd तेल खरीदा है। पिछले दो सालों में भी भारत ने लगभग इतना ही तेल खरीदा था। रूस ने फरवरी 2022 में यूक्रेन पर हमला कर दिया था। इसके बाद पश्चिमी देशों ने रूस से तेल खरीदना कम कर दिया। तब से भारत और चीन, रूस से सबसे ज्यादा तेल खरीदने वाले देश बन गए हैं। बाइडेन प्रशासन ने लगाया था बैन रूसी तेल पर जनवरी में जो बाइडेन प्रशासन ने बैन लगाया था। बाइडेन ने यह फैसला डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति पद संभालने से कुछ दिनों पहले ही लिया था। इस दौरान बाइडेन प्रशासन ने 183 जहाजों पर भी बैन लगाया था। ये जहाज रूस से तेल लाने-ले जाने का काम करते थे। इसके अलावा उन्होंने रूस की दो बड़ी तेल कंपनियों और बीमा कंपनियों पर भी पाबंदी लगाई थी। जब बैन तो फिर क्यों आई तेजी? अब सवाल है कि जब अमेरिका ने रूसी तेल पर बैन लगाया है तो फिर ऐसे में रूस तेल क्यों बेच रहा है। दरअसल बैन के कारण भारत के तेल कारखानों को रूस से तेल लाने में थोड़ी दिक्कत हो रही थी। वे ऐसे जहाजों और बीमा कंपनियों के साथ काम नहीं करना चाहते थे, जिन पर पाबंदी लगी हुई थी। लेकिन अब रूस के तेल की कीमत 60 डॉलर प्रति बैरल से कम हो गई है। ऐसे में जहाजों और बीमा की दिक्कत दूर हो गई। G7 देशों और उनके साथियों ने एक नियम बनाया है कि अगर रूस के तेल की कीमत 60 डॉलर से कम है तो पश्चिमी देशों के जहाज और बीमा कंपनियां रूस से तेल लाने-ले जाने में मदद कर सकती हैं। Kpler के डेटाबेस के अनुसार रूस से भारत आने वाले सभी जहाज बिना पाबंदी वाले हैं।

वोडाफोन आइडिया को सरकार से फिर मदद की दरकार, राहत के लिए लगाई गुहार

मुंबई वोडाफोन आइडिया एक बार फिर सरकार से मदद की गुहार लगाते हुए कहा कि कंपनी अपने एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू को लेकर काफी मुश्किलों का सामना कर रही है और उन्हें अपने पुराने स्पेक्ट्रम का भी पेमेंट चुकाना है, जिसे लेकर उन्हें काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इस मुश्किल का सामना करने के लिए उन्होंने केंद्र सरकार से राहत की मांग की है। कंपनी की ओर से टेलीकॉम सेक्रेटरी नीरज मित्तल ने 11 मार्च को केंद्र सरकार को एक लेटर लिखा, जिसमें उन्होंने सरकार से अपने कर्ज के एक बड़े हिस्से को इक्विटी में बदलने के लिए गुहार लगाई। यदि यह प्रस्ताव सरकार द्वारा मान ली गयी , तो सरकार की वोडाफोन आइडिया में मौजूद हिस्सेदारी, जो कि 22.6% है, से बढ़कर लगभग 49% हो जाएगी। इससे कंपनी को जो अपने फाइनेंशियल कंडीशन को लेकर जो समस्याओ का सामना करना पड़ रहा है, उसमें कंपनी को कुछ राहत मिलेगी। रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी के ऊपर कुल बकाया लगभग 36,950 करोड़ रुपए है, जिसमें से कंपनी को 13,089 करोड़ रुपए आने वाले कुछ ही हफ्तों में देना होगा। सरकार के मानने पर 52,000 करोड़ रुपए तक की मिल सकती है राहत यदि केंद्र सरकार वोडाफोन आइडिया द्वारा मांगी गई इस सहायता को स्वीकार कर लेती है, तो वोडाफोन आइडिया को तकरीबन 52,000 करोड़ रुपए की राहत मिल सकती है। हालांकि, मीडिया की कुछ खबरों के अनुसार, यह भी वक्त आया गया है कि सरकार बकाया राशि में किसी भी तरह की छूट देने के मूड में नहीं है। वोडाफोन आइडिया द्वारा देखा जा रहा यह मुश्किल समय सिर्फ उनके लिए ही नहीं, बल्कि उनके ग्राहकों और टेलीकॉम सेक्टर के लिए भी हानिकारक साबित हो सकता है। यदि वोडाफोन आइडिया अपने फाइनेंशियल में जल्द ही सुधार नहीं करती है, तो टेलीकॉम सेक्टर में कॉम्पिटिशन कम हो सकता है। इस कम होती हुई कॉम्पिटेटिव चुनौती की वजह से टेलीकॉम सेक्टर में मौजूद अन्य कंपनियां ग्राहकों से अपनी मनमानी भी कर सकती हैं। कंपनी ने 2021 टेलीकॉम राहत पैकेज के तहत सहायता मांगी रिपोर्ट के मुताबिक, वोडाफोन-आइडिया 36,950 करोड़ रुपए के AGR और स्पेक्ट्रम बकाया के लिए राहत की मांग कर रही है। इसमें आने वाले हफ्तों में 13,089 करोड़ रुपए का तत्काल भुगतान भी शामिल है। फाइनेंशियल दिक्कतों से जूझ रही VI ने संकेत दिया है कि उसके पास इन पेमेंट्स को पूरा करने की क्षमता नहीं है। वोडाफोन आइडिया ने 2021 टेलीकॉम राहत पैकेज के तहत सहायता मांगी है। इस मामले में कंपनी की तरफ से अब तक कोई बयान सामने नहीं आया है। VI को 52 हजार करोड़ रुपए की राहत मिल सकती है वोडाफोन-आइडिया ने ऐसे समय में रिक्वेस्ट की है कि जब मीडिया रिपोर्ट्स के दावे के मुताबिक सरकार ने टेलीकॉम कंपनियों को एजीआर बकाए में कोई भी राहत देने से इनकार कर दिया है। अगर कंपनी की रिक्वेस्ट को सरकार मान लेती है तो एनालिस्ट्स का अनुमान है कि VI को 52 हजार करोड़ रुपए की राहत मिल सकती है, जो इसके आउटस्टैंडिंग AGR लायबिलिटी का करीब 75% घटा देगा और टोटल कर्ज का 25% कम हो जाएगा। सितंबर 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने कंपनी की याचिका खारिज की थी वोडाफोन आइडिया ने पिछले साल जुलाई 2024 में सुप्रीम कोर्ट में एक क्यूरेटिव याचिका दायर कर AGR के बकाए के कैलकुलेशन को चुनौती दी थी। जिसमें नॉन-कोर रेवेन्यू को भी शामिल किया गया था और कंपनी इसके खिलाफ थी। हालांकि, सितंबर 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने टेलीकॉम ऑपरेटर की याचिका खारिज कर दी थी। तीसरी तिमाही में वोडाफोन-आइडिया को ₹6,609 करोड़ का लॉस वोडाफोन-आइडिया को वित्त वर्ष 2024-25 की तीसरी तिमाही में 6,609 करोड़ रुपए घाटा (कॉन्सोलिडेटेड नेट लॉस) हुआ है। एक साल पहले की समान तिमाही में कंपनी को 6,986 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ था। सालाना आधार पर कंपनी का घाटा 5.40% कम हुआ है। टेलीकॉम सेक्टर में तीन ही बड़ी कंपनियां हैं आपको बता दें कि हाल-फिलहाल टेलीकॉम सेक्टर में तीन ही बड़ी कंपनियां हैं, जिनका नाम है रिलायंस जिओ, भारतीय एयरटेल और वोडाफोन आइडिया। अगर वोडाफोन आइडिया अपनी फाइनेंशियल स्थिति को सुधार नहीं पाती है, तो भारतीय टेलीकॉम सेक्टर में एक बहुत बड़ी मुश्किल पैदा हो सकती है। वोडाफोन आइडिया ने सुप्रीम कोर्ट में पिछले एक क्यूरेटिव पेटिशन दायर कर के एजीआर की गणना में गैर कोर राजस्व को शामिल करने पर विरोध जताया गया था. लेकिन, सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को खारिज करते हुए कंपनी को एक बड़ा झटका दिया.

सरकार ने एमएसएमई में निवेश और टर्नओवर की सीमा बढ़ाई, इस कदम से छोटे उद्योगों को मिलेगा बड़ा फायदा

नई दिल्ली  अगर आप कोई छोटा कारोबार शुरू करने जा रहे हैं तो MSME (माइक्रो, स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज) से जुड़े नए नियम जरूर जान लें। सरकार ने MSME की परिभाषा बदल दी है। अब निवेश और टर्नओवर के आधार पर तय किया जाएगा कि कौन सा बिजनेस माइक्रो की कैटेगरी में आएगा और कौन सा स्मॉल व मीडियम की कैटेगरी में। ये नए नियम 1 अप्रैल 2025 से लागू होंगे। सरकार ने 1 फरवरी को पेश किए बजट में एमएसएमई के नए नियम के बारे में घोषणा की थी। इन नए नियमों के लागू होने के बाद अब एमएसएमई को नए तरीके से पहचाना जाएगा। इससे छोटे उद्योगों को आगे बढ़ने में मदद मिलेगी। सरकार ने एमएसएमई के लिए निवेश और कारोबार की सीमा बढ़ा दी है। पहले के मुकाबले अब ज्यादा निवेश और कारोबार करने वाले उद्योग भी एमएसएमई में शामिल हो सकेंगे। क्या हुआ बदलाव? अब एमएसएमई को पहचानने के लिए उनके निवेश और कारोबार की सीमा को बढ़ाया गया है। निवेश की सीमा को 2.5 गुना और कारोबार की सीमा को 2 गुना कर दिया गया है। इससे ज्यादा एमएसएमई सरकार की योजनाओं का फायदा उठा पाएंगे।     अगर किसी कंपनी ने 2.5 करोड़ रुपये तक का निवेश किया है तो उसे माइक्रो एंटरप्राइजेज माना जाएगा। पहले यह सीमा 1 करोड़ रुपये थी।     इसी तरह 25 करोड़ रुपये तक के निवेश वाली कंपनियों को स्मॉल एंटरप्राइजेज कहा जाएगा। पहले यह सीमा 10 करोड़ रुपये थी।     अगर किसी एमएसएमई ने 125 करोड़ रुपये तक का निवेश किया है तो उसे मीडियम एंटरप्राइजेज माना जाएगा। पहले यह सीमा 50 करोड़ रुपये थी। टर्नओवर के मामले में नए नियम     अगर किसी माइक्रो एंटरप्राइजेज का टर्नओवर 10 करोड़ रुपये तक है तो उसे माइक्रो एंटरप्राइजेज माना जाएगा। पहले यह सीमा 5 करोड़ रुपये थी।     स्मॉल एंटरप्राइजेज के लिए टर्नओवर की सीमा 50 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 100 करोड़ रुपये कर दी गई है।     मीडियम एंटरप्राइजेज के लिए भी सीमा बढ़ाई गई है। इसे बढ़ाकर 500 करोड़ रुपये कर दिया गया है। पहले यह सीमा 250 करोड़ रुपये थी। क्यों लिया यह फैसला? एक फरवरी को बजट के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था, ‘आजकल 1 करोड़ से ज्यादा एमएसएमई रजिस्टर्ड हैं। ये 7.5 करोड़ लोगों को नौकरी देते हैं और हमारे देश के मैन्युफैक्चरिंग का 36% हिस्सा हैं। ये एमएसएमई अच्छी क्वालिटी के प्रोडक्ट बनाते हैं और हमारे एक्सपोर्ट का 45% हिस्सा इन्हीं का है। इनको और बेहतर बनाने के लिए, टेक्नोलॉजी में आगे बढ़ाने के लिए और आसानी से पैसे मिल सके, इसलिए हमने इनके निवेश और टर्नओवर की सीमा को बढ़ाया है। इससे उन्हें आगे बढ़ने और युवाओं को नौकरी देने का हौसला मिलेगा।’ क्या मिलेगा फायदा? इन बदलावों से एमएसएमई यानी छोटे उद्योगों को बड़ा फायदा होगा। वे अब बिना किसी डर के अपना कारोबार बढ़ा सकेंगे। सरकार का यह कदम एमएसएमई सेक्टर को मजबूत करने और देश की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में मदद करेगा। छोटे कारोबारियों को अब ज्यादा मौके मिलेंगे और वे देश के विकास में और भी ज्यादा योगदान दे पाएंगे।

17 साल बाद बीएसएनएल ने दर्ज किया 262 करोड़ का मुनाफा, केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने जताई खुशी

नई दिल्ली केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने 17 साल बाद बीएसएनएल द्वारा 262 करोड़ का नेट प्रॉफिट हासिल करने पर खुशी जाहिर की है। इसके अलावा उन्होंने राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल और कनार्टक के उपमुख्यमंत्री के बयानों पर भी तीखा पलटवार किया है। केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने बढ़ते BSNL को लेकर कहा कि 17 सालों के बाद अक्टूबर दिसंबर के क्वार्टर में बीएसएनएल ने 262 करोड़ का मुनाफा यानी नेट प्रॉफिट कमाया है। यह एक ऐतिहासिक परिवर्तन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में संभव हो पाया है। बीएसएनएल अब अपनी सर्विस के साथ पर्याप्त रूप से उपभोक्ताओं को सेवा दे पा रही है। सिंधिया ने कहा कि अभी हमारा 4G की 1 लाख साइट्स बनाने का लक्ष्य है, उसमें से 90000 साइट्स पर हमारे टावर खड़े हो चुके हैं, बाकी 10,000 साइट्स भी मई-जून के महीने तक तैनात हो जाएंगी। जब यह तैयार हो जाएंगे तो हम 4G से 5G में परिवर्तित करने की प्रक्रिया भी शुरू करेंगे। हमें इस बात की भी खुशी है की सालों बाद बीएसएनएल के उपभोक्ताओं में भी एक नई ऊर्जा आई है। 8 करोड़ 65 लाख हमारे उपभोक्ता जून 2024 के महीने तक थे आज वह 9 करोड़ 10 लाख उपभोक्ता हो चुके हैं। ऐसे में 55 लाख उपभोक्ताओं में वृद्धि हुई है। एक-एक ग्रामीण और शहरी उपभोक्ता की सेवा हम कर पाए इस लक्ष्य की पूर्ति के लिए हम काम कर रहे हैं। कपिल सिब्बल के ब्लॉक-अनब्लॉक वाले बयान पर सिंधिया का पलटवार राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल के ब्लॉक- अनब्लॉक वाले बयान पर केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने कहा कि जनता की सेवा में नहीं रहोगे तो जानता ही आपको ब्लॉक कर देती है। आपको बता दे कि राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने विपक्षी गठबंधन INDIA के रवैया और गुट में फूट पर सवाल उठाते हुए कहा था, कि INDIA को सार्वजनिक मंच पर गुट यानी ब्लॉक के रूप मे दिखना चाहिए न कि अनब्लॉक होना चाहिए। गुट में शामिल सभी विपक्षी दलो को एक जुट रहना ही होगा, उन्होंने यह बात दिल्ली विधानसभा चुनाव में कॉंग्रेस और आप द्वारा एक दूसरे पर लगाये आरोपो के बाद मिली हार को लेकर कही थी। कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी शिव कुमार पर साधा निशाना   केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी शिव कुमार के उस बयान पर भी पलटवार किया है जहां उन्होंने कहा है की “मुसलमानों के आरक्षण के लिए  संविधान में संशोधन लाएंगे”। इस पर सिंधिया ने कहा यही कठिनाई है कि जहां इंडी गठबंधन तुष्टिकरण की नीति के साथ चल रही है, वहीं प्रधानमंत्री और भारतीय जनता पार्टी संतुष्टीकरण की नीति के साथ चल रही है और देश के विकास प्रगति को आगे बढ़ाने के संकल्प के साथ काम कर रही है।

slot server thailand super gacor

spaceman slot gacor

slot gacor 777

slot gacor

Nexus Slot Engine

bonus new member

olympus

situs slot bet 200

slot gacor

slot qris

link alternatif ceriabet

slot kamboja

slot 10 ribu

https://mediatamanews.com/

slot88 resmi

slot777

https://sandcastlefunco.com/

slot bet 100

situs judi bola

slot depo 10k

slot88

slot 777

spaceman slot pragmatic

slot bonus

slot gacor deposit pulsa

rtp slot pragmatic tertinggi hari ini

slot mahjong gacor

slot deposit 5000 tanpa potongan

mahjong

spaceman slot

https://www.deschutesjunctionpizzagrill.com/

spbo terlengkap

cmd368

368bet

roulette

ibcbet

clickbet88

clickbet88

clickbet88

bonus new member 100

slot777

https://bit.ly/m/clickbet88

https://vir.jp/clickbet88_login

https://heylink.me/daftar_clickbet88

https://lynk.id/clickbet88_slot

clickbet88

clickbet88

https://www.burgermoods.com/online-ordering/

https://www.wastenotrecycledart.com/cubes/

https://dryogipatelpi.com/contact-us/

spaceman slot gacor

ceriabet link alternatif

ceriabet rtp

ceriabet

ceriabet link alternatif

ceriabet link alternatif

ceriabet login

ceriabet login

cmd368

sicbo online live

Ceriabet Login

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

casino online

clickbet88

login kudahoki88

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet