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सीतारमण ने खोल दिया खजाना, पीएम मोदी अपने भाषणों में अकसर 4 जातियों का जिक्र करते रहे हैं, बजट में हुई बम-बम

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने भाषणों में अकसर 4 जातियों का जिक्र करते रहे हैं। विपक्ष की ओर से जातिगत जनगणना कराने की मांग को लेकर पीएम नरेंद्र मोदी कई बार कह चुके हैं कि देश में किसान, गरीब, महिला और युवा जैसी 4 ही जातियां हैं। यदि इन वर्गों का कल्याण कर दिया जाए तो फिर देश का तेजी से विकास होगा। आम बजट में उनकी इस बात का पूरा ख्याल रखा गया है और गरीब, किसान, महिला एवं युवा पर फोकस किया गया है। सबसे पहले किसान की बात करें तो उनके लिए प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना का ऐलान हुआ है। इसके तहत देश के 100 जिलों के 1.7 करोड़ किसान परिवारों को कवर किया जाएगा। इसके अलावा कपास उत्पादन में जुटे किसानों के लिए भी 5 साल तक मिशन चलाने का ऐलान किया गया है। सरकार का कहना है कि कपास का उत्पादन और गुणवत्ता बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। किसानों के लिए कर्ज में भी बड़ी राहत का ऐलान हुआ है। देश के 7.7 करोड़ क्रेडिट कार्ड धारक किसानों को अब 5 लाख रुपये तक का लोन मिल सकेगा। अभी तक यह लिमिट 3 लाख रुपये की ही थी। इसके तहत किसानों, मछुआरों, डेरी फार्मिंग में जुटे लोगों को बड़ी सुविधा होगी। इसके अलावा बीजों की गुणवत्ता सुधारने के लिए भी य़ोजना का ऐलान हुआ है। बिहार में मखाना बोर्ड का गठन किया जाएगा। दालों के उत्पादन पर सरकार का जोर रहेगा और अगले 6 साल तक इसके लिए मिशन चलाया जाएगा। खासतौर पर मसूर, तूर और उड़द की दाल के उत्पादन पर जोर रहेगा। पीएम स्वनिधि स्कीम के तहत ग्रामीणों को उनके मकानों आदि पर लोन मिल सकेगा। युवा, मजदूर और महिलाओं को बजट में क्या मिला अब युवाओं की बात करें तो उनके लिए सेंटर ऑफ एक्सिलेंस इन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस फॉर एजुकेशन का भी ऐलान किया गया है। इस पर कुल 500 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। सरकारी स्कूलों में 50 हजार लैब तैयार की जाएंगी। देश भर में 5 नेशनल सेंटर ऑफ एक्सलेंस फॉर स्किलिंग भी स्थापित होंगे। भारतीय भाषा पुस्तक स्कीम भी लॉन्च होगी, जिससे स्कूल और उच्च शिक्षा की पुस्तकें छात्रों को डिजिटल माध्यम पर मिलेंगी। सभी स्कूलों और प्राइमरी हेल्थ सेंटरों में ब्रॉडबैंड लगेगा। वहीं मजदूरों के लिए भी सरकार ने अहम ऐलान किया है और उन्हें ई-श्रम पोर्टल पर रजिस्टर किया जाएगा। पीएम जन आरोग्य योजना के तहत भी इन सभी लोगों को लाभ मिलेगा। अब महिलाओं के लिए बात करें तो सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण स्कीम का दूसरा राउंड चलेगा।

1 फरवरी को 19 किलोग्राम वाले कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में कटौती की

 नई दिल्ली आज देश का आम बजट (Union Budget 2025) आने वाला है और इससे ऐन पहले एलपीजी सिलेंडर सस्ता हो गया है. ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने 1 फरवरी 2025 को 19 किलोग्राम वाले कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में कटौती (LPG Cylinder Price Cut) की है. इस सिलेंडर का दाम 7 रुपये तक घटाया गया है और इसके बाद राजधानी दिल्ली में एक कॉमर्शियल गैस सिलेंडर बजट वाले दिन से 1804 रुपये से घटकर 1797 रुपये रह गया है. हालांकि, घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है. दिल्ली से मुंबई तक LPG सस्ती इंडियन ऑयल की वेबसाइट पर देखें, तो ऑयल मार्केटिंग कंपनी ने 19 किलोग्राम वाले कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की नई कीमतें (LPG Cylinder New Price) जारी कर दिए हैं और इन्हें आज 1 फरवरी 2025 से ही लागू कर दिया गया है. देश के चार महानगरों की बात करें, तो जहां दिल्ली में ये कम होकर (Delhi LPG Price) 1797 रुपये रह गया है. तो वहीं कोलकाता में इसका दाम (Kolkata LPG Cylinder Price) 1911 रुपये से कम होकर 1907 रुपये का रह गया है. मुंबई में ये अब 1756 रुपये की जगह 1749.50 रुपये में मिलेगा और चेन्न्ई में इस कीमत 1966 रुपये से घटकर 1959.50 रुपये रह गई है. साल 2025 की ये दूसरी कटौती इससे पहले साल 2025 की शुरुआत यानी 1 जनवरी को भी एलपीजी सिलेंडर की कीमतें घटी थीं. नए साल के मौके पर ऑयल एंड गैस मार्केटिंग कंपनियों ने एलपीजी सिलेंडर के दाम में दिल्ली से मुंबई तक 14-16 रुपये तक की कटौती की थी. जबकि बीते साल के आखिरी दिसंबर महीने में 19 किलो वाले गैस सिलेंडर की कीमतों में तगड़ा इजाफा किया गया था. 1 दिसंबर को देश की राजधानी दिल्ली में 19 किलो वाला एलपीजी सिलेंडर (Delhi LPG Cylinder Price) 1818.50 रुपये का हो गया है, जो कि नवंबर में 1802 रुपये का था. कोलकाता में ये 1911.50 रुपये से 1927 रुपये का, Mumbai में 1754.50 रुपये से 1771 रुपये और चेन्नई में 1964.50 रुपये से 1980.50 रुपये का हो गया था. घरेलू LPG गैस सिलेंडर के दाम स्थिर लंबे समय से 19 किलोग्राम वाले कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में बदलाव देखने को मिल रहा है, लेकिन 14 किलो वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम में कोई चेंज नहीं दिखा है. 1 फरवरी को भी इसकी कीमतें स्थिर रखी गई हैं और ये 1 अगस्त 2024 वाले रेट पर ही मिल रहा है. दिल्ली में इसकी कीमत 803 रुपये, कोलकाता में 829 रुपये, मुंबई में 802.50 और चेन्नई में 818.50 रुपये पर यथावत बनी हुई है.  

केंद्र सरकार ने राज्यों को जारी किए 1.73 लाख करोड़ रुपये, यह आंकड़ा दिसंबर 2024 में जारी किए रुपये के हस्तांतरण से अधिक

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने आज राज्य सरकारों को कर में हिस्सेदारी के रूप में 1,73,030 करोड़ रुपये जारी किए। यह आंकड़ा दिसंबर 2024 में जारी किए 89,086 करोड़ रुपये के हस्तांतरण से अधिक है। वित्त मंत्रालय ने कहा कि इस महीने में किया गया अधिक हस्तांतरित राज्यों को पूंजीगत व्यय में तेजी लाने और विकास एवं कल्याण संबंधी खर्च को फाइनेंस करने में मदद करेगा। शुक्रवार को घोषित पैकेज के तहत 26 राज्यों को पैसे जारी किए गए हैं। इसमें पश्चिम बंगाल के लिए 13,017.06 करोड़ रुपये, आंध्र प्रदेश के लिए 7,002.52 करोड़ रुपये, कर्नाटक के लिए 6,310.40 करोड़ रुपये, असम के लिए 5,412.38 करोड़ रुपये, छत्तीसगढ़ के लिए 5,895.13 करोड़ रुपये, हिमाचल प्रदेश के लिए 1,436.16 करोड़ रुपये, केरल के लिए 3,330.83 करोड़ रुपये, पंजाब के लिए 3,126.65 करोड़ रुपये और तमिलनाडु के लिए 7,057.89 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। अन्य राज्यों में उत्तर प्रदेश को 31,039.84 करोड़ रुपये, महाराष्ट्र को 10,930.31 करोड़ रुपये, गुजरात को 6,017.99 करोड़ रुपये, मध्य प्रदेश को 13,582.86 करोड़ रुपये, मणिपुर को 1,238.9 करोड़ रुपये और मेघालय को 1,327.13 करोड़ रुपये दिए गए हैं। कर हस्तांतरण केंद्र सरकार द्वारा एकत्र किए गए करों की शुद्ध आय को राज्यों को वितरित करने की प्रक्रिया है। केंद्र सरकार वित्त आयोग की सिफारिशों के आधार पर नियमित किस्तों में राज्यों को कर वितरित करती है। वित्त आयोग कॉरपोरेट कर, आयकर और केंद्रीय जीएसटी सहित सभी करों की कुल शुद्ध आय में राज्यों के हिस्से की सिफारिश करता है। 15वें वित्त आयोग ने सिफारिश की थी कि केंद्र सरकार के विभाज्य कर पूल का 41 प्रतिशत 2021-26 की अवधि के लिए राज्यों को आवंटित किया जाए। इसे वर्टिकल हस्तांतरण के रूप में जाना जाता है। इसने राज्यों के बीच धन वितरित करने के लिए मानदंड की भी सिफारिश की थी, जिसे हॉरिजॉन्टल हस्तांतरण के रूप में जाना जाता है।

डीमैट खातों की संख्या पहुंची 185 मिलियन के पार

नई दिल्ली. बीते वर्ष 2024 में देश में डीमैट खातों की संख्या में जबरदस्त उछाल दर्ज हुआ है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस एक वर्ष की अवधि में डीमैट खातों की संख्या में करीब 46 मिलियन की वृद्धि हुई, जो प्रति माह औसतन 3.8 मिलियन खातों की वृद्धि को दर्शाता है। एनएसडीएल और सीडीएसएल के अनुसार, इससे पिछले वर्ष 2023 की तुलना में नए डीमैट खातों में 33 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई, जिससे अब कुल डीमैट खातों की संख्या 185.3 मिलियन हो गई है। कोरोना काल के बाद से ही भारत में डीमैट खातों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी देखी जा रही है। डीमैट खातों की संख्या में उछाल की वजह खाता खोलने की आसान प्रक्रिया, स्मार्टफोन का बढ़ता इस्तेमाल और अनुकूल मार्केट रिटर्न जैसे कारकों को माना जा रहा है। 2019 में 39.3 मिलियन से पिछले पांच वर्षों में डीमैट खातों की संख्या चार गुना से अधिक हो गई है। 2024 के पहले नौ महीनों में सेकेंडरी मार्केट में लाभ और रिकॉर्ड आरंभिक सार्वजनिक पेशकश (आईपीओ) के बीच 36 मिलियन डीमैट खाते जोड़े गए। 2021 से औसतन हर साल 3 करोड़ नए डीमैट खाते खोले गए हैं। एसबीआई रिसर्च के अनुसार, “भारत में 2021 से हर साल कम से कम 3 करोड़ नए डीमैट खाते खोले जा रहे हैं और लगभग हर चार में से एक अब महिला निवेशक है, जो बचत के वित्तीयकरण के चैनल के रूप में पूंजी बाजार का इस्तेमाल करने के बढ़ते प्रचलन को दर्शाता है।” इसके अलावा, पिछले 10 वर्षों में डीमैट खातों की संख्या में जबरदस्त उछाल दर्ज किया गया है। देश में अगस्त 2024 तक 17.10 करोड़ से अधिक डीमैट खाते खोले जा चुके थे। जबकि वित्त वर्ष 2014 में डीमैट खातों की यह संख्या 2.3 करोड़ थी। इस अवधि के दौरान डीमैट खातों की संख्या में 650 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है।

2025-26 में भारतीय अर्थव्यवस्था में 6.8 प्रतिशत वृद्धि की उम्मीद : रिपोर्ट

नई दिल्ली. एक लेटेस्ट रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारतीय अर्थव्यवस्था में 6.8 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि होने का अनुमान है। यह तेजी मजबूत हाई-फ्रीक्वेंसी इंडिकेटर की वजह से देखी जा रही है। बैंक ऑफ बड़ौदा की रिपोर्ट के अनुसार, अगले वित्त वर्ष के दौरान नोमिनल जीडीपी वृद्धि लगभग 10.5 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। रिपोर्ट में बताया गया है कि इस वृद्धि के प्रमुख संकेतकों में मजबूत हवाई यात्री यातायात, सेवा पीएमआई में वृद्धि और जीएसटी संग्रह में वृद्धि शामिल है। इसके अतिरिक्त, रबी फसल की अधिक बुवाई से कृषि विकास को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, जो अर्थव्यवस्था के लिए एक स्थिर आधार प्रदान करेगा। रिपोर्ट में बताया गया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था ने मजबूत त्योहारी मांग और आर्थिक गतिविधि में लगातार सुधार के कारण लचीलापन दिखाया है। यह लचीलापन हाई-फ्रीक्वेंसी इंडिकेटर के रूप में दिखाई देता है, जिन्होंने वित्त वर्ष 2025 की तीसरी तिमाही में शानदार वृद्धि दिखाई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2024-25 में मंदी तो रहेगी, लेकिन अच्छी बात यह है कि वित्त वर्ष 2025 में निजी और सरकारी खपत में क्रमशः 7.3 प्रतिशत और 4.1 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज होने की उम्मीद है। इसके अलावा, निर्यात वृद्धि में वित्त वर्ष 2024 में 2.6 प्रतिशत की वृद्धि के मुकाबले 5.9 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज होने की संभावना है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 2024-25 की दूसरी छमाही में सरकारी व्यय में तेजी आने की उम्मीद है, जो विकास के लिए अहम होगा। इसके अलावा, कृषि क्षेत्र में उच्च विकास को लेकर आशावाद देखा गया है। हालांकि, रिपोर्ट वैश्विक प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण नकारात्मक जोखिमों के बारे में चेतावनी देती है। रिपोर्ट के अनुसार, टैरिफ वॉर का खतरा मंडरा रहा है क्योंकि अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति ट्रंप के नेतृत्व में आने वाला अमेरिकी प्रशासन संरक्षणवादी व्यापार नीतियों को लागू कर सकता है। इस तरह के उपाय वैश्विक व्यापार को बाधित कर सकते हैं और संभावित रूप से जवाबी कार्रवाई को गति दे सकते हैं, जिससे वैश्विक आर्थिक स्थिरता को खतरा हो सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है, “होने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा टैरिफ नीतियों को लागू करने के बाद कई तरह के आर्थिक और रणनीतिक जोखिम बने हुए हैं। इसका वैश्विक व्यापार पर दूरगामी प्रभाव पड़ सकता है।” रिपोर्ट में कहा गया है कि घरेलू स्तर पर, ध्यान मुख्य आर्थिक घटनाओं पर केंद्रित रहेगा, जिसमें केंद्रीय बजट, तीसरी और चौथी तिमाही में कॉर्पोरेट प्रदर्शन और भारतीय रिजर्व बैंक के मौद्रिक नीति निर्णय शामिल हैं।

डब्ल्यूईएफ ने कहा – फ्यूचर टेक्नोलॉजी अपनाने में भारतीय कंपनियां सबसे आगे

नई दिल्ली. विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) द्वारा प्रकाशित ‘फ्यूचर ऑफ जॉब्स रिपोर्ट 2025’ के अनुसार, भारतीय नियोक्ता प्रमुख तकनीकों को अपनाने में काफी आगे हैं। वो इस क्षेत्र में वैश्विक प्रतिद्वंद्वियों को पीछे छोड़ने की तैयारी में है। 35 प्रतिशत नियोक्ता सेमीकंडक्टर और कंप्यूटिंग तकनीकों को अपनाने की उम्मीद कर रहे हैं, जबकि 21 प्रतिशत नियोक्ता क्वांटम और एन्क्रिप्शन से परिचालन में बदलाव की उम्मीद कर रहे हैं। 20-25 जनवरी को दावोस में होने वाली डब्ल्यूईएफ की वार्षिक बैठक से पहले जारी की गई रिपोर्ट में कहा गया कि वैश्विक स्तर पर 20 प्रतिशत की तुलना में भारत में 35 प्रतिशत नियोक्ता सोचते हैं कि सेमीकंडक्टर और कंप्यूटिंग तकनीकों को अपनाने से उनके परिचालन में बदलाव आएगा। वहीं, वैश्विक स्तर पर 12 प्रतिशत की तुलना में 21 प्रतिशत भारतीय नियोक्ता सोचते हैं क्वांटम और एन्क्रिप्शन तकनीकों को अपनाने से उनके परिचालन में भी बदलाव आएगा। रिपोर्ट में कहा गया है, “भारत के तेजी से बढ़ते जॉब रोल्स में, बिग डेटा स्पेशलिस्ट, एआई-मशीन लर्निंग स्पेशलिस्ट और सिक्योरिटी मैनेजमेंट स्पेशलिस्ट शामिल हैं। जो कि ग्लोबल ट्रेंड से जुड़ा है।” भारत में काम करने वाली 67 प्रतिशत कंपनियों से यह भी अपेक्षा की जाती है कि वे डायवर्स टैलेंट पूल का इस्तेमाल करें और डिग्री आवश्यकताओं को हटाकर स्किल-बेस्ड हायरिंग (कौशल आधारित नौकरी पर रखने) को अपनाएं। रिपोर्ट में कहा गया है कि एआई कौशल की मांग को लेकर विश्व स्तर पर तेजी आई है, जिसमें भारत और अमेरिका सबसे आगे हैं। अमेरिका में, मांग मुख्य रूप से व्यक्तिगत उपयोगकर्ताओं द्वारा संचालित होती है, जबकि भारत में, कॉर्पोरेट स्पॉन्सरशिप जेनएआई ट्रेनिंग को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि डिजिटल एक्सेस में वृद्धि, भू-राजनीतिक तनाव और क्लाइमेट मिटिगेशन प्रयास प्राथमिक ट्रेंड होंगे जो 2030 तक भविष्य की नौकरियों को आकार देंगे। यह रिपोर्ट 1,000 से अधिक कंपनियों के दृष्टिकोणों को एक साथ लाती है, जो सामूहिक रूप से वैश्विक स्तर पर 14 मिलियन से अधिक श्रमिकों को रोजगार देती हैं।

भारतीय शेयर बाजार हफ्ते के पहले कारोबारी दिन बड़ी गिरावट, सेंसेक्स 1,258 अंक टूटा

मुंबई भारतीय शेयर बाजार हफ्ते के पहले कारोबारी दिन सोमवार को वैश्विक अनिश्चितताओं और ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस (एचएमपीवी) को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच भारी गिरावट के साथ बंद हुए। घरेलू बेंचमार्क सूचकांक 1.5 प्रतिशत से अधिक गिर गए। निफ्टी पर पीएसयू बैंक सेक्टर में भारी बिकवाली देखने को मिली। पीएसयू बैंक सेक्टर में 4 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा रियलिटी, मेटल, एनर्जी, पीएसई और कमोडिटी सेक्टर में भी 3 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स 1,258.12 अंक या 1.59 प्रतिशत की गिरावट के साथ 77,964.99 पर और निफ्टी 388.70 अंक या 1.62 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,616.05 पर बंद हुआ। सेंसेक्स का इंट्राडे लो 77,781.62 रहा, जबकि निफ्टी का इंट्राडे लो 23,551.90 रहा। निफ्टी बैंक 1,066.80 अंक या 2.09 प्रतिशत की गिरावट के साथ 49,922 पर बंद हुआ। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 1,564.10 अंक या 2.70 प्रतिशत की गिरावट के साथ 56,366.9 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 608.45 अंक या 3.20 प्रतिशत की गिरावट के साथ 18,425.25 पर बंद हुआ। बाजार के जानकारों के अनुसार, घरेलू बाजार में तेज बिकवाली का मुख्य कारण एचएमपीवी को लेकर चिंता है। जानकारों ने कहा, “नई अमेरिकी आर्थिक नीतियों, भविष्य में ब्याज दरों में कटौती पर फेड के आक्रामक रुख, वर्ष 2025 में मुद्रास्फीति में संभावित वृद्धि और डॉलर में मजबूती के कारण उभरते बाजारों में कंसोलिडेशन हो रहा है, जो सभी मार्केट सेंटीमेंट को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर रहा है।” बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) पर 657 शेयर हरे और 3,472 शेयर लाल निशान में बंद हुए, जबकि 115 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ। सेक्टोरल फ्रंट पर, सभी सेक्टर लाल निशान में बंद हुए। सेंसेक्स में टाटा स्टील, एनटीपीसी, कोटक महिंद्रा बैंक, पावरग्रिड, जोमैटो, इंडसइंड बैंक, एशियन पेंट्स, रिलायंस, एमएंडएम, अल्ट्राटेक सीमेंट, एचडीएफसी बैंक, नेस्ले इंडिया और एसबीआई टॉप लूजर्स रहे। टाइटन, एचसीएल टेक और सन फार्मा टॉप गेनर्स रहे। क्वांटेस रिसर्च के संस्थापक और सीईओ कार्तिक जोनागदला के अनुसार, निफ्टी अपने क्रिटिकल 200-डे एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (200 डीईएमए) 23,650 से नीचे बंद हुआ है। उन्होंने कहा, “हम सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखते हैं और निकट भविष्य में निफ्टी इंडेक्स के लिए 5-6 प्रतिशत की बढ़त की उम्मीद करते हैं, अगर प्रमुख स्तरों को फिर से हासिल किया जाता है और बाजार की हालत में जल्द सुधार होता है।”

भारत वैश्विक खिलौना निर्यातक के रूप में उभर रहा, खिलौना उद्योग में सफलता की नई ऊंचाईयों को छुआ, निर्यात में 239% की वृद्धि

नई दिल्ली भारतीय खिलौना उद्योग ने पिछले कुछ वर्षों में बहुत बड़ी प्रगति की है। एक नए अध्ययन के अनुसार, वित्त वर्ष 2022-23 में भारतीय खिलौना उद्योग ने वित्त वर्ष 2015 के मुकाबले आयात में 52% की गिरावट और निर्यात में 239% की वृद्धि देखी है। यह रिपोर्ट “भारत में निर्मित खिलौनों की सफलता की कहानी” पर आधारित है, जिसे भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) लखनऊ ने उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआईआईटी) के निर्देश पर तैयार किया। सरकारी प्रयासों से बेहतर हुआ विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र रिपोर्ट में बताया गया है कि सरकार के प्रयासों से भारतीय खिलौना उद्योग के लिए एक बेहतर और अनुकूल विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण हुआ है। इसके परिणामस्वरूप, 2014 से 2020 तक, छह वर्षों के भीतर विनिर्माण इकाइयों की संख्या दोगुनी हो गई। इसके साथ ही आयातित इनपुट पर निर्भरता 33% से घटकर 12% हो गई और सकल बिक्री मूल्य में 10% की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) से वृद्धि हुई। इस सबका परिणाम यह हुआ कि श्रम उत्पादकता भी बढ़ी है। भारत वैश्विक खिलौना निर्यातक के रूप में उभर रहा रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत अब वैश्विक खिलौना मूल्य श्रृंखला में एक प्रमुख निर्यातक के रूप में उभर रहा है। भारत को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में शून्य-शुल्क बाजार पहुंच भी प्राप्त है। इससे भारतीय खिलौनों को इन देशों में एक मजबूत स्थान मिल रहा है। हालांकि, रिपोर्ट ने यह भी कहा कि भारत को चीन और वियतनाम जैसे खिलौना केंद्रों के मुकाबले एक व्यवहार्य विकल्प के रूप में स्थापित करने के लिए खिलौना उद्योग और सरकार के बीच निरंतर सहयोग की आवश्यकता है। आवश्यक कदम और प्रयास रिपोर्ट में यह भी सुझाव दिया गया है कि भारत में खिलौना उद्योग को और भी सशक्त बनाने के लिए कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाए जाने चाहिए। इनमें प्रौद्योगिकी में प्रगति, ई-कॉमर्स का अधिकतम उपयोग, साझेदारी को बढ़ावा देना, निर्यात को बढ़ावा देना, ब्रांड निर्माण में निवेश करना, बच्चों के साथ संवाद स्थापित करने के लिए शिक्षकों और अभिभावकों को जोड़ना, सांस्कृतिक विविधता को बढ़ावा देना और क्षेत्रीय कारीगरों के साथ सहयोग करना शामिल है।  

ओयो ने अपने पार्टनर होटल्स के लिए नई चेक-इन पॉलिसी लॉन्च की, जिसके अंतर्गत अनमैरिड कपल्स को अब रूम

नई दिल्ली ओयो के जरिए होटल्स रूम बुकिंग के नियमों में बड़ा बदलाव देखने को मिलने जा रहा है। कंपनी अपने पार्टनर होटल्स के लिए नई चेक-इन पॉलिसी लॉन्च की है। नई पॉलिसी के अनुसार अनमैरिड कपल्स (अविवाहित जोड़े) को कमरा नहीं दिया जाएग। फिलहाल यह नया नियम उत्तर प्रदेश के मेरठ में लागू किया गया है। लेकिन आने वाले समय में इसे अन्य शहरों में भी लागू किया जा सकता है। क्या है ओयो की नई चेक इन पॉलिसी? इस नई पॉलिसी में अविवाहित जोड़े को वैलिड प्रूफ दिखाना होगा। जिससे वो कपल्स साबित हो सकें। यह नियम ऑनलाइन बुकिंग के लिए भी लागू रहेगा। ओयो ने अपने बयान में कहा है कि पार्टनर होटल्स को सामजिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कपल्स बुकिंग को कैंसल करने का अधिकार दिया गया है। सबसे पहले मेरठ में लागू हुआ नियम ओयो ने मेरठ स्थित अपने पार्टनर होटल्स को यह नई पॉलिसी को तत्काल प्रभाव से लागू करने का निर्देश दिया है। कंपनी मेरठ के अनुभवों के आधार पर आने वाले शहरों में भी इस नियम को लागू कर सकती है। मामले की जानकारी रखने वाले व्यक्ति के अनुसार “मेरठ में कई सामाजिक संस्थाओं ने कंपनी के सामने इस मुद्दे को उठाया था। इसके अलावा कई अन्य शहरों में अनमैरिड कपल्स को कमरा ना देने को लेकर पिटीशन दाखिल की गई थी।” इसी कारण कंपनी को ये फैसला लेना पड़ा। ओयो के अधिकारी का क्या कहना है? कंपनी के नॉर्थ इंडिया के रीजन के हेड पवास शर्मा ने पीटीआई को बताया, “ओयो सुरक्षित और जिम्मेदारी के साथ काम करने के प्रति प्रतिबध्द है। जहां एक तरफ हम व्यक्तिगत स्वतंत्रता का सम्मान करते हैं। तो वहीं कानून के दायरे में काम करने को लेकर और सामाजिक संस्थाओं की बातों को भी जिम्मेदारी पूर्वक सुन रहे हैं। हम इस पॉलिसी के प्रभाव और नियमों को समय-समय पर रिव्यू करते रहेंगे।’ ओयो का कहना है कि यह प्रोग्राम कंपनी के प्रति पुरानी धारणाओं को बदलना और परिवार, स्टूडेंट्स, बिजनेस, धार्मिक और अकेले यात्रियों को सुरक्षित अनुभव देने वाले ब्रांड में पेश करना है। कंपनी ने कहा इसके जरिए लोगों को ज्यादा से ज्यादा रूम बुक करने के लिए भी प्रोत्साहित करना है।

कोटक, एयू स्मॉल और कैपिटल स्मॉल बैंक की 9.5% तक हिस्सेदारी खरीदेगा HDFC Bank

नई दिल्ली  नए साल में बैंकिंग सेक्टर में बड़ी हलचल देखने को मिल रही है। देश के सबसे बड़े प्राइवेट बैंक एचडीएफसी बैंक तीन बैंकों में 9.5% तक हिस्सेदारी खरीदने जा रहा है। इसके लिए उसे आरबीआई से हरी झंडी मिल गई है। इनमें कोटक महिंद्रा बैंक, एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक और कैपिटल स्मॉल फाइनेंस बैंक शामिल हैं। एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक ने आज एक एक्सचेंज फाइलिंग में बताया कि उसे आरबीआई की तरफ से एक पत्र मिला है। इसमें कहा गया है कि एचडीएफसी बैंक और ग्रुप की अन्य कंपनियों एचडीएफसी म्यूचुअल फंड, एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस, एचडीएफसी पेंशन मैनेजमेंट, एचडीएफसी अर्गो जनरल इंश्योरेंस और एचडीएफसी सिक्योरिटीज को एयू स्मॉल फाइनेंस में 9.50% तक हिस्सेदारी खरीदने की मंजूरी मिल गई है। एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक एक शेड्यूल्ट कमर्शियल बैंक है जो बीएसई 100 इंडेक्स में लिस्टेड है। इसका मार्केट कैप 42,678.04 करोड़ रुपये है। एचडीएफसी बैंक का मार्केट कैप 13,37,919.84 करोड़ है। यह मार्केट कैप के लिहाज से रिलायंस इंडस्ट्रीज और टीसीएस के बाद देश की तीसरी बड़ी कंपनी है। एचडीएफसी बैंक ने भी एक्सचेंज को दी जानकारी में कहा कि उसे कोटक महिंद्रा बैंक और कैपिटल स्मॉल फाइनेंस बैंक में 9.5 फीसदी एग्रीगेट होल्डिंग खरीदने के लिए आरबीआई की मंजूरी मिल गई है। एक साल की वैलिडिटी एचडीएफसी बैंक को इन बैंकों में यह हिस्सेदारी खरीदने के लिए मिली मंजूरी एक साल तक वैलिड रहेगी। साथ ही एचडीएफसी बैंक को एग्रीगेट होल्डिंग सुनिश्चित करनी होगी। यानी इन बैंकों में एचडीएफसी बैंक और ग्रुप की अन्य कंपनियों की होल्डिंग उन बैंकों की चुकता शेयर पूंजी या वोटिंग राइट्स के 9.5 फीसदी से अधिक नहीं होना चाहिए। आरबीआई के 2023 के दिशानिर्देशों के मुताबिक एग्रीगेट होल्डिंग में बैंक के शेयर, उसकी सहयोगी कंपनियां, म्यूचुअल फंड्स, ट्रस्टीज और प्रमोटर ग्रुप एंटिटीज शामिल हैं। एचडीएफसी बैंक की इन बैंकों में निवेश की योजना नहीं है लेकिन ग्रुप की एग्रीगेट होल्डिंग 5% की लिमिट से अधिक हो सकती है। इसलिए एचडीएफसी बैंक ने इनवेस्टमेंट लिमिट बढ़ाने के लिए आरबीआई से मंजूरी मांगी थी।  

SBI, HDFC Bank के ग्राहकों को होगा फायदा, FD पर इतना बढ़कर मिलेगा ब्याज

नई दिल्ली  फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में निवेश करने वालों के लिए अच्छी खबर है। देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई और सबसे बड़े प्राइवेट बैंक एचडीएफसी ने कुछ डिपॉजिटर्स के लिए एफडी पर ब्याज बढ़ाने की घोषणा की है। एसबीआई ने 80 वर्ष से अधिक आयु के सुपर सीनियर सिटीजंस की एक नई कैटगरी शुरू की है। ऐसे डिपॉजिटर्स को सीनियर सिटीजंस की तुलना में 10 आधार अंक ज्यादा ब्याज मिलेगा। वहीं एचडीएफसी बैंक ने बल्क डिपॉजिट (5 करोड़ रुपये और उससे अधिक) पर रिटर्न को 5-10 आधार अंकों तक संशोधित किया है। एसबीआई का रिवीजन सेविंग्स के बड़े हिस्से को हासिल करने के लिए डिपॉजिट पर इनोवेशन करने की रणनीति का हिस्सा है। बैंक 80 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों के लिए ज्यादा ब्याज देने के अलावा ने अपनी स्कीम को रिस्ट्रक्चर किया है। इनके तहत ग्राहक अपने बचत लक्ष्य तय कर सकते हैं और उसके अनुसार रिकरिंग डिपॉजिट के लिए साइन अप कर सकते हैं। बैंक में ब्याज दरों में ऐसे समय संशोधन किया है जब ग्रोथ को बढ़ावा देने के लिए आरबीआई से नीतिगत दरों में कटौती की मांग की जा रही है। आरबीआई के आंकड़ों से पता चला है कि बैंक जमा और बैंक ऋण दिसंबर के मध्य तक 11.5% की समान गति से बढ़ रहे थे। दूसरे बैंक भी बढ़ाएंगे ब्याज? एसबीआई और एचडीएफसी बैंक के ब्याज दरों में बढ़ोतरी के बाद दूसरे बैंक भी ऐसा कर सकते हैं। हालांकि सूत्रों ने कहा कि एचडीएफसी बैंक ने दूसरे बैंकों के बराबर आने के लिए ब्याज दरों में बदलाव किया है। उच्च जमा दरें भी उधार दरों की सीमांत लागत में संशोधन के कारण उच्च उधार लागत में तब्दील हो जाती हैं, जो सीधे जमा की लागत से जुड़ी होती हैं। दिसंबर 2024 को समाप्त तिमाही के लिए व्यावसायिक आंकड़ों की घोषणा करने वाला पहला बड़ा बैंक बैंक ऑफ बड़ौदा है। उसका कहना है कि उसके ग्लोबल एडवांसेज और ग्लोबल डिपॉजिट में क्रमशः 11.7% और 11.8% की बढ़ोतरी हुई है।

भारत में डिजिटल भुगतान प्रणाली लगातार लोकप्रिय हो रही है, 8% बढ़कर 16.73 अरब के नए स्तर पर पहुंचा

नई दिल्ली भारत में डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ने एक और ऐतिहासिक मील का पत्थर हासिल किया है। दिसंबर 2024 में UPI ने लेन-देन की संख्या और वैल्यू दोनों में नया रिकॉर्ड बनाया जिससे यह साबित होता है कि डिजिटल भुगतान प्रणाली लगातार लोकप्रिय हो रही है। UPI लेन-देन में 8 प्रतिशत की बढ़ोतरी दिसंबर 2024 में UPI के जरिए लेन-देन की संख्या 16.73 बिलियन (1.67 अरब) तक पहुंच गई जो अप्रैल 2016 में इसकी शुरुआत के बाद से सबसे ज्यादा है। इस दौरान UPI का लेन-देन वैल्यू भी 8 प्रतिशत बढ़कर 23.25 ट्रिलियन रुपये तक पहुंच गया जबकि नवंबर 2024 में यह वैल्यू 21.55 ट्रिलियन रुपये थी। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024 के दौरान UPI ट्रांजेक्शन की कुल संख्या 172 बिलियन (17.2 अरब) तक पहुंची जो 2023 के 118 बिलियन की तुलना में 46 प्रतिशत अधिक है। दिसंबर 2024 में दैनिक लेन-देन में बढ़ोतरी नवंबर की तुलना में दिसंबर 2024 में दैनिक लेन-देन की संख्या भी बढ़कर 540 मिलियन (54 करोड़) हो गई जो नवंबर में 516 मिलियन (51.6 करोड़) थी। इसके साथ ही दिसंबर में दैनिक लेन-देन की वैल्यू भी 74,990 करोड़ रुपये हो गई जो नवंबर के 71,840 करोड़ रुपये से अधिक है। दिसंबर 2023 से तुलना करने पर दिसंबर 2024 में UPI के लेन-देन की संख्या में 39 प्रतिशत और वैल्यू में 28 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई। यह UPI की बढ़ती लोकप्रियता और उपयोगकर्ता आधार का संकेत है। फास्टैग ट्रांजेक्शन में भी बढ़ोतरी दिसंबर 2024 में न केवल UPI ट्रांजेक्शन में बढ़ोतरी हुई बल्कि फास्टैग ट्रांजेक्शन में भी सुधार देखा गया। फास्टैग ट्रांजेक्शन की संख्या 6 प्रतिशत बढ़कर 382 मिलियन (38.2 करोड़) हो गई जबकि नवंबर में यह संख्या 359 मिलियन (35.9 करोड़) थी। इसके अलावा फास्टैग ट्रांजेक्शन का वैल्यू भी 9 प्रतिशत बढ़कर 6,642 करोड़ रुपये हो गया। अगर दिसंबर 2023 से तुलना करें तो फास्टैग ट्रांजेक्शन की संख्या में 10 प्रतिशत और वैल्यू में 13 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। आधार-बेस्ड लेन-देन में भी मामूली बढ़ोतरी इसके अलावा आधार-बेस्ड लेन-देन में भी मामूली 1 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। नवंबर में जहां यह संख्या 92 मिलियन (9.2 करोड़) थी, वहीं दिसंबर में यह बढ़कर 93 मिलियन (9.3 करोड़) हो गई। UPI की शुरुआत और विस्तार यूपीआई की शुरुआत 2016 में भारत में की गई थी और अब यह देशभर में व्यापक रूप से इस्तेमाल हो रही है। वहीं UPI की सफलता ने इसे अन्य देशों में भी प्रवेश दिलवाया है। भारत के अलावा UPI अब फ्रांस, संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, श्रीलंका, मॉरीशस, भूटान और नेपाल में भी स्वीकार किया जा रहा है। बता दें कि UPI की बढ़ती लोकप्रियता और डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में इसकी बढ़ती उपस्थिति यह साबित करती है कि भारत डिजिटल ट्रांजेक्शन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। दिसंबर 2024 के आंकड़े यह संकेत देते हैं कि आने वाले समय में और भी अधिक लोग UPI का उपयोग करेंगे जिससे डिजिटल भुगतान प्रणाली का विस्तार होगा और यह पूरी दुनिया में भारतीय तकनीकी सफलता का प्रतीक बनेगा।

Stock Market में जोरदार गिरावट, सेंसेक्स 500 से ज्यादा अंक लुढ़का; IT और Banking स्टॉक्स पर दबाव

मुंबई सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन यानी शुक्रवार को शेयर बाजार में जबरदस्त गिरावट देखने को मिल रही है. बाजार की शुरुआत ही लाल निशान के साथ हुई. उसके बाद बाजार के दोनों प्रमुख इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी जूझते हुए नजर आए. जबकि बैंक निफ्टी में भी आज भारी गिरावट देखी जी रही है. सबसे ज्यादा बुरा हाल आईटी, फार्मा, हेल्थ और फाइनेंस सेक्टर का है. जिनमें सबसे ज्यादा गिरावट बनी हुई है. सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट जारी दरअसल, मिलेजुले वैश्विक संकेतों और वॉल स्ट्रीट पर रात भर गिरावट के बीच भारतीय बाजार में कारोबारी सप्ताह के आखिरी दिन गिरावट बनी हुई है. शुक्रवार सुबह 10 बजे, बीएसई सेंसेक्स 480 अंक यानी 0.60 प्रतिशत की गिरावट के साथ 79,463 पर आ गया. इसके कुछ देर बाद इसमें 500 अंक से ज्यादा की गिरावट देकने को मिली. इसके साथ ही निफ्टी 50 में भी इस दौरान 123 अंक यानी 0.51 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली और ये गिरकर 4,065.40 अंक पर आ गया. इन शेयरों में दिख रही सबसे ज्यादा गिरावट बाजार की ओपनिंग के साथ ही सेंसेक्स के 30 में से आधे से ज्यादा स्टॉक्स में गिरावट देखने को मिली. सबसे ज्यादा गिरने वाले शेयरों में टीसीएस 0.71 प्रतिशत की गिरावट के साथ अग्रणी रहा. जबकि इसके बाद आईटीसी, इंफोसिस, एशियन पेंट और कोटक महिंद्रा बैंक के शेयरों में भी गिरावट देखने को मिली. वहीं जिन शेयरों में आज तेजी देखी जा रही है उनमें एचसीएलटेक में 1.04 प्रतिशत सबसे ज्यादा तेजी वाला शेयर रहा. इसके बाद एसबीआई, अदानी पोर्ट्स एंड एसईजेड, मारुति सुजुकी इंडिया और महिंद्रा एंड महिंद्रा रहे. निफ्टी 50 के शेयरों का हाल अगर बात करें निफ्टी 50 के शेयरों की तो इसके 50 में से 27 शेयरों में आज तेजी देखने को मिल रही है. इसमें ओएनजीसी (3.14 फीसदी) की बढ़त के साथ सबसे ज्यादा तेजी वाला शेयर रहा.  जबकि इसके बाद एसबीआई, एचसीएलटेक, इंडसइंड बैंक और एसआई लाइफ का स्थान रहा. वहीं जबकि हीरो मोटोको में आज 2.07 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई. इसके बाद टीसीएस, इंफोसिस, विप्रो और सिप्ला में भी जबरदस्त गिरावट देखी गई.

भारत और एशिया के सबसे बड़े रईस मुकेश अंबानी देश का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ लाने की तैयारी में

मुंबई  भारत और एशिया के सबसे बड़े रईस मुकेश अंबानी देश का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ लाने की तैयारी में हैं। हिंदू बिजनसलाइन की एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि अंबानी ने रिलायंस जियो के आईपीओ की तैयारियां शुरू कर दी है। कंपनी का आईपीओ 35,000 से 40,000 करोड़ रुपये का हो सकता है। सूत्रों के मुताबिक इसमें ऑफर ऑफ सेल के साथ-साथ ताजा शेयर भी जारी किए जाएंगे। यह आईपीओ साल की दूसरी छमाही में आ सकता है। हुंडई मोटर इंडिया पिछले साल 27,870.16 करोड़ रुपये का आईपीओ लाई थी जो देश में अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ है। सूत्रों के मुताबिक रिलायंस जियो के आईपीओ के लिए प्री-आईपीओ प्लेसमेंट पर शुरुआती बातचीत पहले ही शुरू हो चुकी है। इनवेस्टमेंट बैंकर्स का कहना है कि यह इश्यू बड़ा हो सकता है और इसमें सब्सक्रिप्शन की दिक्कत नहीं होनी चाहिए। प्री-प्लेसमेंट की राशि इस बात पर निर्भर करेगी कि इसमें फ्रेश इश्यू का साइज क्या होगा। ओएफएस और फ्रेश इश्यू का हिस्सा कितना होगा, इस पर अभी फैसला नहीं हुआ है। इस बारे में रिलायंस को भेजे ईमेल का कोई जबाव नहीं आया। किस-किस की है हिस्सेदारी सूत्रों का कहना है कि रिलायंस जियो के आईपीओ में ओएफएस कंपोनेंट अहम होगा क्योंकि इससे कई मौजूदा निवेशकों को अपनी हिस्सेदारी बेचने का मौका मिलेगा। कंपनी में विदेशी निवेशकों की 33 फीसदी हिस्सेदारी है। रिलायंस ने साल 2020 में अबू धाबी इनवेस्टमेंट फंड, केकेआर, मुबादला और सिल्वर लेक जैसे विदेशी फंड्स से 18 अरब डॉलर जुटाए थे। कई ब्रोकरेज का कहना है कि रिलायंस जियो की वैल्यूएशन 100 अरब डॉलर हो सकती है। लेकिन सूत्रों का कहना है कि कंपनी की नजर 120 अरब डॉलर की वैल्यूएशन पर है। अंबानी एआई सेक्टर में भी बड़ा दांव खेल रहे हैं। एआई लेंग्वेज मॉडल विकसित करने के लिए जियो प्लेटफॉर्म्स ने हाल ही में एनवीडिया से हाथ मिलाया है। टेक के साथ-साथ एआई पुश से रिलायंस जियो दूसरी स्टार्टअप कंपनियों से आगे निकल सकती है। कंपनी को सैटेलाइट इंटरनेट सर्विसेज शुरू करने के लिए भी रेगुलेटरी मंजूरी मिल गई है। रिलायंस ने अपने टेलीकॉम, इंटरनेट और डिजिटल बिजनस को मजबूत करने के लिए पिछले पांच साल में अधिग्रहण पर 3 अरब डॉलर खर्च किए हैं। रिलायंस जियो देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम ऑपरेटर है। अक्टूबर के अंत तक कंपनी के 46 करोड़ सब्सक्राइबर थे। पिछले साल जून में कंपनी ने टैरिफ बढ़ाया था जिसके कारण उसके सब्सक्राइबर्स की संख्या में गिरावट आई है। लेकिन इसके बावजूद वह नंबर 1 बनी हुई है। टैरिफ बढ़ाने से सितंबर तिमाही में कंपनी के मुनाफे में काफी तेजी आई है। इसे लिस्टिंग से पहले 5जी सर्विसेज को मॉनीटाइज करने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।

चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही के हाई फ्रीक्वेंसी इंडिकेटर्स के मुताबिक 2025 में तेजी से बढ़ेगी भारतीय अर्थव्यवस्था

नई दिल्ली वर्ष 2025 की शुरुआत के साथ ही अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यभार संभालने से पहले दुनिया में अस्थिरता की स्थिति बनी हुई है, लेकिन, चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही के हाई फ्रीक्वेंसी इंडिकेटर्स के मुताबिक, भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही है। यह जानकारी गुरुवार को जारी एक रिपोर्ट में दी गई। बैंक ऑफ बड़ौदा की रिपोर्ट में बताया गया कि जीएसटी संग्रह, सर्विस परचेसिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई), एयर पैसेंजर ग्रोथ और वाहनों का पंजीकरण में वित्त वर्ष 25 की दूसरी तिमाही की तुलना में वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में मजबूत वद्धि देखने को मिली है। वहीं, दूसरी तरफ चीन के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की रफ्तार धीमी होती जा रही है और प्रशासन के लिए घरेलू खपत बढ़ाना और रियल एस्टेट सेक्टर को फिर से वृद्धि की ओर ले जाना एक चुनौती बन गया है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था विकास के बारे में मिश्रित संकेत दे रही है। श्रम बाजार में नरमी दिख रही है और मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियां कमजोर बनी हुई हैं। खुदरा बिक्री, आवास बिक्री और सेवा क्षेत्र अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। यूरोप में मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों ने अभी तक गति नहीं पकड़ी है। वहीं सेवा क्षेत्र फिर से अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। भारत में चालू खाता घाटा (सीएडी) वित्त वर्ष 2025 की दूसरी तिमाही में जीडीपी का 1.2 प्रतिशत तक कम हो गया, जबकि वित्त वर्ष 2024 की दूसरी तिमाही में यह जीडीपी के 1.3 प्रतिशत के बराबर था। बैंक ऑफ बड़ौदा की अर्थशास्त्री सोनल बधान ने कहा, ” पिछले वर्ष व्यापार घाटा अधिक था, सेवाओं के निर्यात में तेजी के साथ-साथ रेमिटेंस में निरंतर मजबूती ने चालू खाते घाटे को कम किया है। हमारे साल के अंत के बाजार विश्लेषण से पता चलता है कि सेंसेक्स और निफ्टी 50 दोनों ने कैलेंडर वर्ष 24 में 8.7 प्रतिशत और 9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। सेंसेक्स ने इस साल का नया ऑल टाइम हाई बनाया और 85,500 का आंकड़ा पार कर गया।” 2024 में रियल एस्टेट, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और आईटी का प्रदर्शन सबसे अच्छा रहा। इस दौरान भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 2.8 प्रतिशत घटा, लेकिन इसका प्रदर्शन बाकी अन्य विदेशी मुद्राओं के मुकाबले काफी अच्छा था। रिपोर्ट के अनुसार, हाई फ्रीक्वेंसी इंडिकेटर्स ने अक्टूबर-दिसंबर 2024 की अवधि में मजबूत सुधार दिखाया है। जीएसटी संग्रह तीसरी तिमाही में 8.3 प्रतिशत (सालाना आधार पर) बढ़कर 5.5 लाख करोड़ रुपये हो गया है, और यह दूसरी तिमाही के 5.3 लाख करोड़ रुपये से भी अधिक है, जो उपभोग पैटर्न में और सुधार का संकेत देता है। इसके अलावा त्योहारी मांग के कारण शहरी उपभोग के अन्य संकेतकों में भी सुधार हुआ है। हवाई यात्रा में तीसरी तिमाही में 11.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि दूसरी तिमाही में यह 7.8 प्रतिशत थी। सेवा पीएमआई तीसरी तिमाही में 59.2 रही, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 58.1 थी। बधान ने कहा, “हमें उम्मीद है कि कॉर्पोरेट्स के नतीजे भी तीसरी तिमाही में बेहतर रहने की उम्मीद है।” रिपोर्ट में आगे कहा गया कि दूसरी छमाही में सरकारी खर्च में तेजी आने और उसके बाद सरकारी और निजी निवेश दोनों में सुधार की उम्मीद से आईआईपी वृद्धि वित्त वर्ष 2025 की पहली छमाही की तुलना में दूसरी छमाही में बेहतर रहेगी।

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