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मिट्टी से मेहनत तक की कहानी: पूजा माहौरे ने प्राकृतिक खेती से बनाई नई पहचान

भोपाल  कहते हैं मेहनत और सही दिशा में उठाया गया कदम जिंदगी की तस्वीर बदल देता है। छिंदवाड़ा जिले के ग्राम रोहनाकला की महिला किसान पूजा माहौरे की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। कभी बढ़ती लागत और घटती पैदावार से चिंतित रहने वाली पूजा आज प्राकृतिक खेती और पशुपालन के माध्यम से आत्मनिर्भर बन चुकी हैं और हर महीने लगभग 40 हजार रुपये की अतिरिक्त आय अर्जित कर रही हैं। पति तरुण माहौरे के साथ मिलकर उन्होंने खेती को नया स्वरूप दिया और आज वे अपने क्षेत्र की महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई हैं। जब खेती बनी चिंता का कारण पूजा माहौरे के पास लगभग 10 एकड़ कृषि भूमि है। पहले वे पारंपरिक तरीके से रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग कर खेती करती थीं। लेकिन समय के साथ खेती की लागत बढ़ने लगी और मिट्टी की उर्वरता भी कम होने लगी। इससे खेती का लाभ घटता गया और भविष्य को लेकर चिंता बढ़ने लगी। प्रशिक्षण ने बदली सोच इसी बीच कृषि विभाग की आत्मा परियोजना के अंतर्गत उन्हें कृषि सखी के रूप में कार्य करने का अवसर मिला। यहां उन्हें नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग के तहत प्रशिक्षण प्राप्त हुआ। प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने बीजामृत, जीवामृत, पंचगव्य, निर्मास्त्र और ब्रह्मास्त्र जैसे जैविक घोल तैयार करना और उनका उपयोग करना सीखा। प्रशिक्षण से मिली जानकारी को उन्होंने अपने खेतों में लागू किया और धीरे-धीरे प्राकृतिक खेती की ओर कदम बढ़ा दिए। प्राकृतिक खेती से बढ़ी आमदनी आज पूजा माहौरे अपने खेत के लगभग एक एकड़ क्षेत्र में रसायन मुक्त सब्जियों की खेती कर रही हैं। उनकी सब्जियां पूरी तरह प्राकृतिक होने के कारण बाजार में उनकी मांग अधिक है। वे अपने उत्पाद प्राकृतिक जैविक हाट बाजार में बेचती हैं, जहां उन्हें अच्छा मूल्य मिलता है। सब्जियों की बिक्री से उन्हें लगभग 10 हजार रुपये प्रतिमाह शुद्ध लाभ प्राप्त हो रहा है। पशुपालन बना आय का मजबूत आधार प्राकृतिक खेती के साथ-साथ पूजा माहौरे ने देसी गिर और साहीवाल नस्ल की 10 गायों का पालन भी शुरू किया। इन गायों के दूध की बिक्री से उन्हें लगभग 30 हजार रुपये प्रतिमाह शुद्ध आय प्राप्त हो रही है। इस तरह खेती और पशुपालन के समन्वय से उनकी कुल अतिरिक्त आय लगभग 40 हजार रुपये प्रतिमाह हो गई है। मेहनत को मिला सम्मान कृषक कल्याण वर्ष 2026 के अंतर्गत आयोजित जिला स्तरीय मिलेट मेले में पूजा माहौरे ने प्राकृतिक और जैविक सब्जियों की दुकान लगाई, जिसे लोगों ने खूब सराहा। उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए उन्हें संयुक्त संचालक कृषि और उपसंचालक कृषि द्वारा प्रमाण पत्र देकर सम्मानित भी किया गया। महिलाओं के लिए प्रेरणा आज पूजा माहौरे अपने अनुभव साझा करते हुए आसपास के किसानों और महिलाओं को भी प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं। उनकी सफलता यह साबित करती है कि यदि किसान कम लागत वाली प्राकृतिक खेती और पशुपालन को अपनाएं तो खेती को लाभकारी बनाया जा सकता है।  

सख्ती के बाद भी नहीं थमी नकल: MP बोर्ड परीक्षा में मुरैना बना ‘चीटिंग हॉटस्पॉट’, भोपाल दूसरे नंबर पर

भोपाल माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिम) की ओर से आयोजित कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षा (MP Board Exam) शनिवार को प्रदेशभर में शांतिपूर्ण ढंग से समाप्त हो गई। इस परीक्षा में मध्यप्रदेश के करीब सात लाख विद्यार्थियों ने भाग लिया। परीक्षा समाप्त होने के बाद अब विद्यार्थियों की निगाहें परिणाम घोषणा पर टिक गई हैं। अंतिम दिन हिंदी पेपर में नौ नकल प्रकरण परीक्षा के अंतिम दिन हिंदी विषय का पेपर आयोजित किया गया। इस दौरान प्रदेशभर में कुल नौ नकल प्रकरण दर्ज किए गए। इनमें छिंदवाड़ा जिले में सबसे अधिक चार मामले सामने आए। इसके अलावा भोपाल और मुरैना में दो-दो तथा इंदौर में एक छात्र नकल करते हुए पकड़ा गया।   उड़नदस्तों की निगरानी में हुई कार्रवाई परीक्षा केंद्रों पर तैनात उड़नदस्तों और केंद्राध्यक्षों ने लगातार निगरानी रखी। संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखते हुए कई स्थानों पर कार्रवाई भी की गई। मंडल ने इस वर्ष नकल रोकने के लिए विशेष सतर्कता बरती। परीक्षा केंद्रों पर कड़ी निगरानी, सीसीटीवी कैमरे और उड़नदस्तों की नियमित जांच के कारण नकल के मामलों पर काफी हद तक नियंत्रण रहा। पूरे परीक्षा सत्र के दौरान प्रदेशभर में कुल 71 नकल प्रकरण दर्ज किए गए। विद्यार्थियों ने बताया हिंदी पेपर आसान परीक्षा देकर बाहर निकले विद्यार्थियों ने बताया कि हिंदी का प्रश्नपत्र अपेक्षाकृत सरल था। अधिकांश प्रश्न पाठ्यक्रम से ही पूछे गए थे। छात्रों के अनुसार अच्छी तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए पेपर काफी आसान रहा। मुरैना में दो नकलची और पकड़े गए, 831 अनुपस्थित मुरैना जिले में बोर्ड परीक्षाओं के दौरान नकल के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। ग्वालियर-चंबल संभाग में 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं में सबसे अधिक नकल प्रकरण मुरैना में दर्ज किए गए हैं। शनिवार को आयोजित हिंदी पेपर में भी दो नकलची पकड़े गए। जिला शिक्षा अधिकारी बीएस इंदौलिया के अनुसार जिले के 54 केंद्रों पर परीक्षा आयोजित हुई। इसमें 23,844 परीक्षार्थी पंजीकृत थे, जिनमें से 23,013 उपस्थित रहे, जबकि 831 परीक्षार्थी परीक्षा देने नहीं पहुंचे। अंबाह के प्राइवेट स्कूल टीसी जैन उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में दो छात्र नकल करते पाए गए, जिनके खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया। इस दौरान जिला पंचायत सीईओ कमलेश कुमार भार्गव ने चार परीक्षा केंद्रों का औचक निरीक्षण भी किया।

रेलवे भर्ती 2026: 5349 पदों पर निकली बंपर वैकेंसी, 10वीं और ITI पास के लिए मौका

भोपाल रेलवे में करियर के अच्छे अवसर की तलाश कर रहे उम्मीदवारों के लिए एक अच्छी खबर है। रेलवे रिक्रूटमेंट सेल ने पश्चिमी रेलवे में बिना किसी रिटर्न एग्जाम पांच हजार से ज्यादा अप्रेंटिस के पदों के लिए नोटिफिकेशन जारी किया है। इसके लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और 23 मार्च तक आवेदन कर सकते हैं। उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट https://www.rrc-wr.com पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। यह ट्रेनिंग सिर्फ एक साल के लिए दी जाएगी। भर्ती से जुड़ी कुछ जरूरी जानकारी     भर्ती बोर्ड- रेलवे रिक्रूटमेंट सेल (आरआरसी)     पद का नाम- अप्रेंटिसशिप     पदों की संख्या- 5349     आफिशियल वेबसाइट- www.rrc-wr.com     आवेदन शुरू होने की तारीख- 21 फरवरी 2026 सुबह 11 बजे से     आवेदन करने की आखिरी तारीख- 23 मार्च 2026 शाम 5 बजे तक     आयु सीमा- 15 वर्ष की उम्र पूरी कर ली हो, लेकिन 24 वर्ष का न हुआ हो।     रिजर्व कैटेगिरी के उम्मीदवारों को नियमानुसार छूट।     स्टाइपेंड- नियमानुसार     ट्रेनिंग की अवधि- एक वर्ष     चयन प्रक्रिया- मेरिट बेस पर शार्ट लिस्टिंग, डाक्यूमेंट वेरिफिकेशन     भर्ती का नोटिफिकेशन- RRC WR Apprentice Recruitment 2026 Notification PDF     आवेदन करने का लिंक- RRC WR Apprentice Vacancy 2026 Apply Online     आवेदन शुल्क-100 रुपये, एससी/एसटीपीडब्ल्यूबीडी/महिला आवेदक निशुल्क अप्लाई कर सकते हैं। भर्ती के लिए जरूरी योग्यता आवेदकों ने मैट्रिकुलेशन (10वीं) कक्षा 10+2 परीक्षा स्कीम के जरिए न्यूनतम 50 प्रतिशत अंकों के साथ पास की हो। साथ में संबंधित ट्रेड फिटर/ वेल्डर/ टर्नर/ मैकेनिस्ट/ वायरमैन/ पाइप फिटर/ प्लंबर/ स्टेनोग्राफर आदि में एनसीवीटी से मान्यता प्राप्त संस्थान से आइटीआइ सर्टिफिकेट प्राप्त किया हो। जो अभ्यर्थी एसएससी या आइटीआइ रिजल्ट का इंतजार कर रहे हैं, वो आवेदन के योग्य नहीं माने जाएंगे। इंजीनियरिंग ग्रेजुएट और डिप्लोमा होल्डर्स भी आवेदन के योग्य नहीं हैं। एजुकेशनल और टेक्निकल क्वालिफिकेशन के साथ उम्मीदवारों ने कम से कम 15 वर्ष की उम्र पूरी कर ली हो, लेकिन 24 वर्ष का न हुआ हो। ऊपरी उम्र में एससी/एसटी को 5 वर्ष, ओबीसी को 3 वर्ष, पीडब्ल्यूडी उम्मीदवारों (दिव्यांगजन) को 10 वर्ष की नियमानुसार छूट मिलेगी। ऐसे करें आवेदन ऑफिशियल वेबसाइट www.rrc-wr.com पर जाएं। होमपेज पर अप्लाई ऑनलाइन के लिंक पर क्लिक करें। न्यू रजिस्ट्रेशन लिंक पर क्लिक करके मांगी गई डिटेल्स दर्ज करें। रजिस्ट्रेशन होने के बाद लाग इन करें। फीस (यदि लागू हो) जमा करें। फॉर्म का प्रिंटआउट निकालकर रख लें। एक्सपर्ट व्यू   तैयारी के लिए जरूरी टिप्सकरियर काउंसलर अभिषेक खरे बताते हैं कि इस अप्रेंटिस के लिए उम्मीदवारों को किसी भी तरह की परीक्षा नहीं देनी है, लेकिन कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है, जो नीचे दी गई हैं। इस भर्ती में कोई लिखित परीक्षा नहीं होती, लेकिन चयन 10वीं आइटीआइ अंकों के औसत (मैरिट लिस्ट) के आधार पर होता है। इसलिए तैयारी का फोकस “पढ़ाई” से ज्यादा “अंक और दस्तावेज” पर होना चाहिए। 10वीं और आइटीआइ के अंक चैक करें। मेरिट इन्हीं अंकों के औसत से बनेगी, जितने ज्यादा अंक, उतनी ज्यादा चयन की संभावना रहती है। 10वीं % आइटीआइ %) ÷ 2 = फाइनल मेरिट प्रतिशत। गलत गणना से भ्रम न रखें। सभी जरूरी दस्तावेज पहले से तैयार रखें। जैसे-10वीं मार्कशीट, आइटीआइ प्रमाणपत्र, आधार कार्ड, जाति प्रमाणपत्र (यदि लागू) और पासपोर्ट साइज फोटो आदि। आवेदन फार्म ध्यान से भरें। नाम, जन्मतिथि, अंक बिल्कुल प्रमाणपत्र के अनुसार भरें। कोई भी गलत जानकारी न दें। डाक्यूमेंट वैरिफिकेशन में छोटी गलती भी रिजेक्शन करा सकती है। सही ट्रेड का चयन करें। जहां सीटें अधिक हों, वहां चयन की संभावना बढ़ सकती है। अंतिम चयन में मेडिकल फिटनेस होता है, इसलिए सामान्य स्वास्थ्य, आंखों की रोशनी आदि ठीक रखें। अंतिम तिथि से पहले आवेदन करें। आखिरी दिन वेबसाइट स्लो हो सकती है। मोबाइल और ईमेल एक्टिव रखें। मेरिट और डीवी की सूचना वहीं आएगी। साफ फोटो और सिग्नेचर अपलोड करें। ब्लर फोटो से आवेदन रिजेक्ट हो सकता है। ओरिजिनल डाक्यूमेंट साथ रखें। वेरिफिकेशन के समय मूल प्रमाणपत्र जरूरी हैं। किसी एजेंट के झांसे में न आएं। चयन पूरी तरह मेरिट आधारित है।

भोपाल में प्रदर्शन से पहले लेनी होगी पुलिस की इजाजत, रैली-धरना पर दो महीने तक रहेगा नियम लागू

भोपाल भोपाल में अब धरना-प्रदर्शन, जुलूस, रैली और आमसभा आयोजित करने से पहले पुलिस की अनुमति लेना अनिवार्य होगा। बिना अनुमति कार्यक्रम आयोजित करने पर आयोजकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। पुलिस आयुक्त संजय कुमार ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत यह प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया है। यह आदेश अगले दो माह तक प्रभावी रहेगा। अनुमति के बिना आयोजन पर होगी कार्रवाई जारी आदेश के अनुसार किसी भी संगठन, राजनीतिक दल या समूह को धरना, प्रदर्शन, जुलूस, रैली, पदयात्रा, वाहन रैली, पुतला दहन या शासकीय कार्यालय अथवा निवास के घेराव जैसे कार्यक्रम आयोजित करने से पहले पुलिस उपायुक्त (आसूचना एवं सुरक्षा) से अनुमति लेना आवश्यक होगा। बिना अनुमति आयोजित कार्यक्रम के दौरान यदि अव्यवस्था फैलती है या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान होता है, तो उसकी जिम्मेदारी आयोजकों की मानी जाएगी।   हथियार, विस्फोटक और मशाल जुलूस पर रोक पुलिस ने स्पष्ट किया है कि किसी भी रैली या कार्यक्रम में हथियार या विस्फोटक सामग्री लाना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। इसके अलावा मशाल जुलूस निकालने पर भी रोक लगाई गई है। साथ ही किसी समुदाय की धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाले भाषण या प्रकाशन पर भी सख्त प्रतिबंध रहेगा। राजधानी में अक्सर होते हैं प्रदर्शन भोपाल राजधानी होने के कारण यहां कर्मचारी संगठनों, छात्र संगठनों, राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों द्वारा अक्सर विरोध प्रदर्शन किए जाते हैं। सामान्य दिनों में शहर में औसतन प्रतिदिन 3 से 5 छोटे-बड़े धरना-प्रदर्शन होते हैं। इनमें ज्ञापन सौंपना, प्रतीकात्मक प्रदर्शन या धरना शामिल रहता है। बड़े मुद्दों पर बढ़ जाती है संख्या विधानसभा या लोकसभा चुनाव, भर्ती घोटालों या कर्मचारी आंदोलनों जैसे बड़े मुद्दों के दौरान विरोध प्रदर्शनों की संख्या अचानक बढ़ जाती है। ऐसे समय में एक ही दिन में 10 से 15 तक धरना-प्रदर्शन और रैलियां आयोजित होने लगती हैं।

मध्यप्रदेश का अनोखा जायका: भोपाल की नवाबी रसोई और ‘रसाल’ की मिठास की कहानी

इंदौर पिछली कड़ी में हमने इंदौर के सर्राफा और होलकर विरासत के चटपटे सफर का आनंद लिया था। इस वीकेंड, हम अपनी यात्रा को मध्य प्रदेश के उस हिस्से की ओर मोड़ते हैं जहां हवाओं में नवाबी तहजीब और शाही दस्तरखानों की महक घुली है। यहां पेश है आपके वीकेंड के लिए एक और विशेष स्टोरी। मध्य प्रदेश के खान-पान की जब भी बात होती है, तो भोपाल और उसके आस-पास के शाही घरानों का जिक्र अनिवार्य हो जाता है। यहाँ का जायका सिर्फ पेट नहीं भरता, बल्कि एक बीते हुए दौर की गवाही देता है।   जहानुमा घराना: अफगानी जड़ें और भोपाली पसंदे भोपाल का ‘जहानुमा घराना’ अपनी नवाबी मेहमान-नवाजी के लिए मशहूर है। इनकी रसोइयों का सबसे बड़ा तोहफा है- ‘भोपाली पसंदे’। वैसे तो पसंदे एक मुगलिया डिश है, लेकिन भोपाल में इसे बनाने का अंदाज बिल्कुल जुदा है। उत्तर भारत के विपरीत, यहां के पसंदे बिना करी (ग्रेवी) के बनाए जाते हैं। अंडर-कट मीट को तली हुई प्याज, भुने चने, खोपरा और बादाम के पेस्ट में रात भर मैरिनेट किया जाता है और फिर धीमी आंच पर पकाया जाता है। दाल-गोश्त: जब मजबूरी बनी लजीज परंपरा भोपाल की एक और मशहूर डिश है ‘दाल-गोश्त’। इसके पीछे की कहानी बेहद दिलचस्प है। कहा जाता है कि दिल्ली सल्तनत और मुगलों के दौर में जब गोश्त महंगा होता था और परिवार बड़ा, तब पेट भरने के लिए गोश्त में दाल मिलाई जाती थी। समय के साथ यह ‘जुगाड़’ एक शाही डिश बन गया। मांश या मसूर की दाल के साथ कोयले की आंच पर पका यह गोश्त आज भी भोपाल की रसोइयों की जान है। जमींदार घराना: शाकाहारी विरासत और ‘रसाल’ का जादू इंदौर के करीब ‘जमींदार घराना’ अपने आप में अनोखा है। जहां देश के अधिकतर राजघरानों में मांसाहार का बोलबाला रहा, इस घराने ने 1704 से अपनी शुद्ध शाकाहारी परंपरा को निभाया है। इनकी रसोइयों की सबसे दुर्लभ डिश है ‘रसाल’। ठंड के मौसम में जब गन्ने का ताजा रस निकलता है, तब इसे बड़े कढ़ा में उबाला जाता है। इसमें गलाए हुए चावल डालकर 3-4 घंटे तक इतनी धीमी आंच पर पकाया जाता है कि रस और चावल एक-दूसरे में पूरी तरह समा जाएं। बादाम और पिस्ते से सजी यह डिश मालवा की मिठास का प्रतीक है। रीवा की विरासत: बघेली चिकन और इंदिराहार विंध्य क्षेत्र की ओर बढ़ें तो रीवा रियासत का ‘बघेली चिकन’ अपनी अलग पहचान रखता है। शिकार के शौकीन बघेल राजाओं ने इसे देसी घी और भुने हुए खड़े मसालों के साथ विकसित किया। वहीं, शाकाहारी व्यंजनों में ‘इंदिराहार’ (पांच दालों का मिश्रण) गुजरात और राजस्थान की याद दिलाता है, जिसे फर्मेंट करके बड़ी कुशलता से तैयार किया जाता है।   स्वाद जो कहता है इतिहास चाहे वो भोपाल का यखनी पुलाव हो या जमींदार घराने का रसाल, मध्य प्रदेश का हर निवाला एक कहानी कहता है। यह खाना सिर्फ मसालों का मेल नहीं, बल्कि उन राजाओं, नवाबों और किसानों की विरासत है जिन्होंने इस राज्य को ‘स्वाद का केंद्र’ बनाया।

नगर में परंपरागत निकलने वाले चल समारोह (गेर) को निरंतर बनाए रखने प्रदान की जाएगी सवा लाख रुपए की सहयोग राशि

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्राचीन अवंतिका नगरी में सम्राट विक्रमादित्य के शासनकाल के दौरान परंपरागत रूप से सैनिक छावनियों से सैनिक विजयी पताका और चिन्ह लेकर चल समारोह के रूप में नगर में उत्सव मनाते थे। बाद में इस उत्सव को गेर नाम दे दिया। यह प्राचीन परंपरा आज भी कायम है। यह परंपरा हमारे सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रविवार को उज्जैन में सुबह  महाकालेश्वर मंदिर पहुंचकर भगवान  महाकाल का पूजन अभिषेक करने के बाद मंदिर के सभा मंडप में रंगपंचमी के अवसर पर ध्वज चल समारोह में भगवान वीरभद्र जी के ध्वज और  महाकाल ध्वज के साथ ही शस्त्रों का विधि विधान पूर्वक पूजन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ध्वज हाथ में लेकर मंदिर के कुंड परिसर तक गए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर कलेक्टर  रौशन कुमार सिंह को निर्देश दिए कि उज्जैन में परंपरागत रूप से निकलने वाले चल समारोह (गेर) की परंपरा को आगे भी कायम रखने के लिए सवा-सवा लाख रुपए की राशि दी जाए। रंगपंचमी के अवसर पर  महाकालेश्वर मंदिर से परंपरागत रूप से निकलने वाले  महाकालेश्वर ध्वज चल समारोह ( वीरभद्र ध्वज चल समारोह) के पहले सुबह मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने  महाकालेश्वर मंदिर पहुंच कर गर्भगृह में भगवान  महाकाल का पूजन कर देश व प्रदेश की खुशहाली की कामना की। पूजन के बाद नंदी हाल में मंदिर के पुजारी-पुरोहितों द्वारा स्वस्ति वाचन किया गया। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भगवान महाकाल का ध्यान लगाया। इस अवसर पर कलेक्टर  रौशन कुमार सिंह ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को भगवान महाकाल का अंगवस्त्र, भगवान महाकाल का प्रसाद व स्मृति-चिन्ह भेंट कर सम्मान किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रंग पंचमी पर उज्जैन में खेली फूलों की होली ये देश है वीर जवानों का” गाना गाया, सभी को रंग पंचमी की शुभकामनाएं दीं उज्जैनवासियों ने मुख्यमंत्री का किया अभिनंदन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रविवार को रंगपंचमी के पावन अवसर पर टॉवर चौक उज्जैन में आमजन के साथ फूलों की होली खेली। इससे पहले मुख्यमंत्री डॉ. यादव सिंधी कॉलोनी से निकाली गई गेर (चल समारोह) में शामिल हुए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को अपने बीच पाकर नागरिकों ने हर्षोल्लास से रंगपंचमी मनाई और मुख्यमंत्री का अभिवादन किया। टॉवर चौक पर बनाये गये मंच से मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी पर गुलाब के फूल बरसाकर होली खेली। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ये फूल हमें याद दिलाते हैं कि जीवन में रंग भले कितने भी हों, असली रंग तो दिल के रंग होते हैं, जो एक-दूसरे के लिए सम्मान, भाईचारा और देशभक्ति से भरे हों।  रंगपंचमी पर हमारे जीवन में आत्मीयता बढ़े, प्रेम और स्नेह बढ़े यही ईश्वर से प्रार्थना है। इसके बाद मुख्यमंत्री और आम जनता ने मिलकर ‘ये देश है वीर जवानों का, अलबेलों का मस्तानों का’ गाना गाया तो लगा जैसे पूरा उज्जैन, एक सुर में गूंज रहा है। ये गाना उन वीर जवानों के लिए समर्पित था, जो सीमा पर खड़े होकर हमें ये रंग खेलने की आजादी देते हैं। आज टॉवर चौक पर रंगपंचमी पर हजारों लोगों का एक साथ नाचते और गाने में मालवी परंपरा की सोंधी खुशबू भी थी। 

जबलपुर चर्च विवाद: संडे प्रेयर के बीच महिला दिवस कार्यक्रम में पहुंचा निलंबित प्राचार्य, ईसाई समाज ने FIR दर्ज करने की मांग की

जबलपुर क्राइस्टचर्च गर्ल्स स्कूल परिसर में स्थित चर्च में रविवार सुबह आराधना के दौरान हंगामा हो गया। महिला दिवस पर आयोजित महिला सम्मान के विशेष कार्यक्रम में व्यवधान उत्पन्न होने से नाराज ईसाई समुदाय के लोग ओमती थाने पहुंचे। समाज और चर्च के पदाधिकारियों ने थाने में शिकायती आवेदन देकर हंगामा करने वाले के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की मांग की है। पुलिस ने क्या कहा ओमती पुलिस के अनुसार, चर्च पदाधिकारियों ने शिकायत में बताया कि सुबह आराधना चल रही थी, तभी क्राइस्टचर्च बॉयज स्कूल से निष्कासित प्राचार्य लेडली मैथ्यूज वहां पहुंच गए। पवित्र स्थान में पहुंचकर उन्होंने माइक छीन लिया और बेवजह की बातें करने लगे। पदाधिकारियों के साथ धक्का-मुक्की विरोध करने पर मैथ्यूज ने वहां मौजूद लोगों को धमकाया और चर्च पदाधिकारियों के साथ धक्का-मुक्की की। इस घटना से उपस्थित लोग आहत हैं। चर्च में महिला दिवस के अवसर पर महिलाओं के सम्मान का कार्यक्रम रखा गया था, जिसमें उन्होंने व्यवधान उत्पन्न किया। कार्यक्रम में मौजूद महिलाओं के साथ भी अभद्रता किए जाने की शिकायत की गई है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।

इंदौर पुलिस में कार्रवाई: अपराधियों से जन्मदिन पर सम्मान लेने पर हेड कॉन्स्टेबल जीतू सरदार सस्पेंड

इंदौर जन्मदिन पर आपराधिक तत्वों से गुलदस्ता लेने वाले प्रधान आरक्षक जीतू सरदार को जोन-2 के डीसीपी कुमार प्रतिक ने निलंबित कर दिया है। डीसीपी ने उसके खिलाफ जांच भी बैठा दी है। जीतू का स्वागत करवाते हुए इंटरनेट मीडिया पर वीडियो बहुप्रसारित हो गया था। थाना परदेशीपुरा में पदस्थ थे जीतू सरदार एडीसीपी जोन-2 अमरेंद्र सिंह के मुताबिक जीतू सरदार परदेशीपुरा थाना में पदस्थ था। बुधवार को उसके जन्मदिन पर कुछ लोगों ने स्वागत किया था। इसमें संयोगितागंज थाना क्षेत्र का अक्रांत बोयत, आयुष बोयत और विकास शामिल हुआ। स्वागत करने वालों का रहा है आपराधिक रिकॉर्ड तीनों का आपराधिक रिकार्ड है। अक्रांत और आयुष भाई हैं और उनके पिता दीनू का भी आपराधिक रिकार्ड रहा है। वीडियो में आरोपित जीतू को गुलदस्ता देकर स्वागत करते हुए नजर आ रहे हैं। पुलिस आयुक्त के निर्देश पर हुई कार्रवाई पुलिस आयुक्त संतोष कुमार सिंह ने घटना को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई के निर्देश दिए और शनिवार को जीतू को निलंबित कर जांच बैठा दी गई।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पूर्व विधायक स्व. राव राजकुमार सिंह यादव को दी श्रद्धांजलि

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अशोकनगर जिले के ईसागढ़ के ग्राम महुअन पहुंचकर चंदेरी विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक  राव राजकुमार सिंह यादव के निधन पर श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्व. यादव के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया तथा परिजन से मुलाकात कर ढांढस बंधाया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्व. राव राजकुमार सिंह यादव समर्पित जनप्रतिनिधि और समाजसेवी थे। अपने जीवनकाल में उन्होंने कई समाज सेवा के कार्य किए। जनकल्याण के लिए सक्रियता पूर्वक कार्य किया। उनका योगदान स्मरणीय रहेगा। 

MP की धान को GI टैग दिलाने की मांग, दिग्विजय सिंह का केंद्र को अल्टीमेटम; अनशन की चेतावनी

भोपाल पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने मध्य प्रदेश की धान को अब तक जीआई टैग नहीं मिलने का मुद्दा उठाया है। उन्होंने कहा कि यदि धान को जल्द जीआई टैग नहीं दिया गया तो वे अनशन का रास्ता अपनाएंगे। उन्होंने कहा कि किसानों के साथ हो रहे इस अन्याय को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। किसानों को नहीं मिलता दाम दिग्विजय सिंह के अनुसार प्रदेश में एक लाख से अधिक किसान बासमती धान की खेती करते हैं। उन्होंने कहा कि आज अमेरिका सहित कई देशों में बासमती चावल करीब 300 रुपये प्रति किलो के भाव से बिक रहा है, जबकि मध्य प्रदेश के किसानों को इसके लिए सिर्फ 35 से 40 रुपये प्रति किलो ही मिल रहे हैं।   किसानों को उचित लाभ नहीं उन्होंने कहा कि कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का क्षेत्र भी बासमती उत्पादक किसानों का बड़ा इलाका है, लेकिन इसके बावजूद किसानों को उचित लाभ नहीं मिल पा रहा है। इस संबंध में उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर जीआई टैग देने की मांग भी की है।

किसानों के लिए अच्छी खबर, प्रदेश में उड़द की खेती को बढ़ावा दे रही सरकार: मंत्री कंषाना

भोपाल  किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री  एदल सिंह कंषाना ने कहा है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ किसानों के साथ खड़ी है और उनके हितों की रक्षा के लिए लगातार कार्य कर रही है। प्रदेश में उड़द की खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है। राज्य सरकार द्वारा उड़द खरीदी पर 600 रुपए प्रति क्विंटल बोनस देने की घोषणा की गई है। किसानों से अपील है कि वे अधिक से अधिक उड़द की खेती करें, ताकि उन्हें इस बोनस का लाभ मिले और अगली फसल की तैयारी भी समय पर हो सके। कृषि मंत्री  कंषाना ने कहा कि राज्य सरकार किसानों के कल्याण और उनकी आय बढ़ाने के लिए लगातार महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। इस वर्ष गेहूं खरीदी पर किसानों को 40 रुपए प्रति क्विंटल बोनस प्रदान किया जाएगा। इससे प्रदेश के लाखों किसानों को सीधा लाभ मिलेगा और उनकी आय में वृद्धि होगी। कृषि मंत्री  कंषाना ने कहा कि गेहूं खरीदी के लिए किसानों के पंजीयन की अंतिम तिथि पहले 7 मार्च निर्धारित थी, जिसे अब बढ़ाकर 10 मार्च कर दिया गया है, जिससे अधिक से अधिक किसान अपना पंजीयन कराकर शासन की योजना का लाभ प्राप्त कर सकें। किसानों को सिंचाई के लिए दिन के समय बिजली उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है। इससे किसानों को रात में सिंचाई के दौरान होने वाली परेशानियों और जोखिमों से राहत मिलेगी।  

राजवाड़ा पर रंगों की बौछार: इंदौर रंगपंचमी 2026 में कोई जनप्रतिनिधि नहीं, सिर्फ उत्साह और उत्सव

इंदौर इंदौर की रंग-रंगीली रंगपंचमी का उल्लास शुरू हो चुका है। टोरी कॉर्नर सहित अन्य इलाकों से निकली गेर रंगों की बौछार करते हुए आगे बढ़ी। अपनेपन और उमंग के रंगों में डूबने के लिए हजारों लोग यहां जुटे। रंगपंचमी की गेर में भगीरथपुरा की घटना का असर दिखा, इस बार इंदौर की गेर नेताओं के बग़ैर रही। इसमें कोई भी जनप्रतिनिधि नजर नहीं आया। शहर की दशकों पुरानी परंपरा एक बार फिर सजीव हो उठी। 77 वर्षों से चली आ रही गेर (Indore Rang Panchami Ger 2026) की परंपरा को निभाने के लिए शहर की प्रतिष्ठित संस्थाएं अपने-अपने बैनर तले गेर निकाली। इंदौर नगर निगम ने टैंक की गेर निकाली है, इस पर ऑपरेशन सिंदूर लिखा है। यह गेर राजवाड़ा से सीतलामाता बाजार लौटी। रसिया कार्नर, टोरी कार्नर, मारल क्लब और संगम कार्नर की गेर के साथ ही नगर निगम तथा हिंद रक्षक संगठन की फागयात्रा रंगों की इस अनूठी यात्रा को आगे बढ़ा रही है। चार किलोमीटर लंबे मार्ग पर जब रंग और गुलाल की बौछारों के बीच कारवां आगे बढ़ा। ढोल-नगाड़ों की थाप, उत्साह से झूमती भीड़ और हवा में उड़ते रंग-गुलाल के बीच इंदौर की रंगपंचमी (Rang Panchami 2026) का यह दृश्य सचमुच देखने लायक है। देशभक्ति के रंग हर चेहरा रंगा हुआ है और हर दिल उत्सव के रंग में डूबा नजर आ रहा है। गेर (Rang Panchami Indore) में धार्मिक-सामाजिक के साथ ही देशभक्ति के रंग नजर आ रहे हैं । हिंद रक्षक की फाग यात्रा में महाकाल मंदिर की प्रतिकृति तो संगम कार्नर की गेर में महाकाल की जटा से गंगाजी के अवतरित होने का दृश्य नजर आ रहा है। शहर की हृदय स्थली दोपहर तीन बजे तक टैंकरों, बोरिंग मशीन, मिसाइलों के साथ ही विभिन्न उपकरणों से लाल-गुलाबी, हरे, पीले, नीले रंग उत्साह से उड़ाकर धरती के साथ आसमान भी रंगों से सराबोर होती रहेगी।   गेर देखने के लिए तीन इमारतों पर बैठक व्यवस्था स्मार्ट सिटी कंपनी द्वारा रंगपंचमी पर इंदौर में निकलने वाली पारंपरिक गेर को निहारने के लिए तीन इमारतों की छतों पर बैठक व्यवस्था की गई है। इसमें गौराकुंड के पास पृथ्वी लोक होटल की दो इमारत व बालाजी टावर पर यह बैठक व्यवस्था है। यहां की छतों पर तिरपाल लगाई गई है और दर्शकों के लिए पेयजल व सुविधाघर की व्यवस्था भी है।  

बिजुरी पुलिस की पहल से गुम हुए 14 मोबाइल बरामद

अनूपपुर पुलिस अधीक्षक अनूपपुर  मोती उर रहमान के आदेशानुसार थाना बिजुरी पुलिस द्वारा गुम हुए मोबाइलों की तलाश हेतु विशेष अभियान चलाया गया। अभियान के दौरान थाना बिजुरी पुलिस ने विभिन्न स्थानों से गुम हुए 14 मोबाइल फोन बरामद कर उनके वास्तविक मालिकों को वापस किए, जिससे मोबाइल मालिकों के चेहरे पर खुशी लौट आई। बरामद मोबाइलों का विवरण इस प्रकार है —     1.    अजय कुमार द्विवेदी पिता संतोष कुमार द्विवेदी निवासी माइनस— मोबाइल कीमत ₹22,999     2.    संस्कार मिश्रा पिता अजय मिश्रा, निवासी माइनस — मोबाइल कीमत ₹10,000     3.    रामखेलावन जायसवाल पिता रामसजीवन जायसवाल, निवासी कपिलधारा कॉलोनी — मोबाइल कीमत ₹8000     4.    अब्दुल हक सिद्दीकी पिता अब्दुल गफ्फार सिद्दीकी  निवासी भालूमाड़ा— मोबाइल Vivo कीमत ₹11000     5.    राकेश सेन  निवासी मोहड़ा दफ़ाई— मोबाइल redmi कीमत ₹6000     6.    पीयूष शुक्ला  पिता रामकुमार शुक्ला, निवासी कपिलधारा— मोबाइल iphone X कीमत ₹97000     7.    बृहस्पति सिंह   , निवासी डोला — मोबाइल Oppo कीमत ₹13499     8.    सागर मिश्रा  पिता जमुना मिश्रा  — मोबाइल  OPPO कीमत ₹12000     9.    संदीप कुशवाह पिता शंकर कुशवाह, निवासी बिजुरी  — मोबाइल realme c 35, कीमत ₹12800     10.    महेंद्र जायसवाल पिता स्व चंदीराम जायसवाल, निवासी थानगांव — मोबाइल vivo y 100a कीमत ₹21,999     11.    सुनीता अगरिया पति  सूरज अगरिया — मोबाइल Redmi 9 कीमत ₹10,000 12. अमित यादव पिता खेमराज यादव नि. लोहसरा मोबाइल.Redmi 12  कीमत 12,999 13. भोला प्रसाद केवट निवासी- नगाराबांध        मोबाइल oppo a 17   कीमत 8,000 14.डिंपल सिंह पिता जय सिंह नि. बेलियाछोट मोबाइल realme कीमत 11,000 बरामद मोबाइलों की कुल कीमत 257,200/ रु है। इस कार्यवाही में थाना प्रभारी बिजुरी विकास सिंह आरक्षक आनंद कुमार ,रवि सिंह ,सुशील यादव  लक्ष्मण डांगी एवं साइबर सेल से पंकज मिश्रा का सराहनीय योगदान रहा।

इंदौर हादसा: टोकन मिस्टेक की वजह से अस्थियों का गलत परिवार को पहुंचना

इंदौर शनिवार को पंचकुइया मुक्तिधाम पर अस्थियां गायब होने को लेकर हंगामा हो गया। मुक्तिधाम से एक ही नंबर के टोकन तीन मृतकों के स्वजन को दे दिया गया, उसके चलते यह स्थिति बनी। मदनलाल विश्वकर्मा (55) निवासी गौरी शंकर नगर का शुक्रवार को निधन हुआ था। शनिवार को स्वजन अस्थियां संग्रह के लिए पहुंचे तो उन्हें अस्थियां नहीं मिलीं। मुक्तिधाम में तैनात कर्मचारियों से पूछताछ की तो उन्होंने रजिस्टर खंगाला। इससे पता चला कि 13 नवंबर वाला टोकन तीन अलग-अलग मृतकों के स्वजन को दे दिया गया था। ऐसे में दूसरा परिवार स्व. विश्वकर्मा की अस्थियां लेकर चला गया। बाद में उस परिवार को फोन लगाया तो वे भी पशोपेश में पड़ गए। उन्होंने बताया कि टोकन नंबर देखकर वे अस्थि ले गए थे। करीब तीन घंटे बाद वे अस्थियां लेकर लौटे और विश्वकर्मा परिवार को सौंपी। बताया कि वे अस्थि विसर्जन करने निकल गए थे। फोन आने के बाद रास्ते से पलटे और वापस मुक्तिधाम आए। बिना सोचे उस जगह से अस्थियां लेकर चले गए सुनील चौबे (65) निवासी नगीन नगर का पांच मार्च को निधन हो गया था। पंचकुइया मुक्तिधाम पर उनका भी अंतिम संस्कार किया था। उनका भी शनिवार को अस्थि संचय था। सुबह बेटे अजय परिवार के साथ मुक्तिधाम पहुंचे और 13 नंबर टोकन दिया तो निगमकर्मियों ने उन्हें संबंधित स्थान से अस्थियां संग्रह करने के लिए कहा। नंबर के अनुसार वे भी बिना सोचे उस जगह से अस्थियां लेकर चले गए। कर्मचारी से गलती हो गई परिवार ने कहा कि निगमकर्मियों ने जिस जगह का कहा था, वहीं से अस्थियां संचय की गई हैं। मामले में पंचकुइया मोक्ष विकास समिति के अध्यक्ष वैभव बाहेती ने कहा कि जिस कर्मचारी से गलती हुई है, वह 35 सालों से मुक्तिधाम में सेवाएं दे रहा है। कोरोना जैसे संक्रमण में उसका सबसे अहम योगदान रहा। उसने भूलवश 12 की बजाय 13 नंबर के टोकन दे दिए, जिससे गड़बड़ी हुई। इसके साथ ही कर्मचारी को समझाइश के साथ चेतावनी भी दी है कि आगे ऐसी गलती न हो।

कुख्यात पशु तस्कर बल्लू उर्फ अब्दुल रहमान को कोतमा पुलिस द्वारा सतना से किया गया गिरफ्तार

अनूपपुर         पुलिस अधीक्षक महोदय अनूपपुर  मोती उर रहमान के निर्देशन में थाना कोतमा के पशु तस्करी एवं अवैध हथियार रखने के अपराध में लम्बे समय से फराऱ चल रहे पशु तस्करी के सरगना बल्लू उर्फ अब्दुल रहमान को थाना कोतमा पुलिस टीम ने दिनांक 07.3.26 को सतना जिले से गिरफ्तार किया है।          मामले का संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है कि दिनांक 31.01.2026 को मुखबिर सूचना पर कोतमा हाईवे जंगल चौकी के पास से ट्रक क्रमांक सीजी 04 एन एक्स 5617  में परिवहन किये जा रहे 22 नग मवेशी भैंस पड़ा जप्त किये गये थे तथा उक्त ट्रक से ही 315 बोर का एक देशी कट्टा तथा 02 नग जिन्दा कारतूस भी बरामद किया गया था । उक्त प्रकरण में आरोपी उमेश केवट पिता स्व. दीनदयाल केवट निवासी पुरानी बस्ती कोतमा एवं अंकित द्विवेदी पिता रमेश कुमार द्विवेदी निवासी ग्राम झाली थाना कोठी जिला सतना (म.प्र.) , एवं वाहन मालिक  संजय पटेल उर्फ प्रभु दयाल पटेला गढिया टोला सतना को गिरफ्तार किया जा चुका है । इसी अपराध में लम्बे समय से फरार चल रहे पशु तस्करी के सरगना बल्लू उर्फ अब्दुल रहमान निवासी मवेशी बाजार कोतमा मूल निवासी ग्राम उमरपुर थाना बुढ़ाना जिला मुजफ्फरनगर (उ.प्र.) को कल दिनांक 07.3.26 को जिला सतना से गिरफ्तार किया गया है ।  आरोपी बल्लू उर्फ अब्दुल रहमान के विरूध्द थाना कोतमा एवं अन्य थानों  तथा शहडोल जिले में कुल  11 अपराध पशु तस्करी संबंधी तथा अन्य धाराओं के पंजीबध्द हैं । साथ ही उक्त अपराधी का  जिला बदर का प्रकरण भी प्रचलन में है ।                उक्त कार्य़वाही में निरी. रत्नाम्बर शुक्ल थाना प्रभारी कोतमा के साथ  सउनि सुखीनंद यादव , प्र0आर0  दिनेश राठौर , आर. स्वदेश सिंह  , आर. जितेन्द्र मंडलोई , प्र.आर. राजेन्द्र अहिरवार (सायबर सेल) एवं नगर रक्षा समिति सदस्य नीरज सोनी की महत्वपूर्ण  भुमिका रही ।

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