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प्रदेश के कलाकारों ने अपनी साधना और हुनर से स्थानीय संस्कृति को जीवित रखा हुआ है। यह कलाकार हमारी असली संपत्ति -CM

भोपाल प्रदेश के कलाकारों ने अपनी साधना और हुनर से स्थानीय संस्कृति को जीवित रखा हुआ है। यह कलाकार हमारी असली संपत्ति है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह बात पचमढ़ी के पंचारण्य हाट बाजार में कही। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का स्वागत स्थानीय कलाकारों ने मनमोहक बधाई और राई नृत्य से किया। बांसुरी वादन के अदभुत वादन से प्रभावित होकर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी 10 कलाकारों को 10-10 हजार रुपए प्रोत्साहन राशि देने के निर्देश भी दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कलाकारों के हितों का संरक्षण और संवर्धन सरकार की प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने चाट स्टॉल पर टोमैटो सूप का स्वाद चखा। उन्होंने स्टाल संचालन करने वाले रिंकी और सुनील शर्मा को नकद पुरस्कार भी दिया। उन्होंने प्रदेश की स्थानीय शिल्प और अन्य कला उत्पादों की प्रदर्शनी और स्टॉल का अवलोकन किया। स्वयं मिट्टी के चाक पर हाथ आजमाया और शिल्प के आनंद की अनुभूति ली। बेल मेटल से बने उत्पादों की सराहना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी कलाकारों से कुशलक्षेम पूछी और उनको शुभकामनाएं दी। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने “साउंड एंड लाइट शो” का आनंद उठाया। साथ ही आर्मी बैंड की सुरमई प्रस्तुति का आनंद लिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आर्मी बैंड के टीम मेंबर को 10- 10 हजार रुपए राज्य सरकार की ओर से देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि सेना के इन सभी सदस्यों को परिवार सहित एमपीटी की होटल में तीन दिन रुकने का राज्य सरकार का तोहफा भी सम्मान स्वरूप दिया जा रहा है।  

नीमच सोलर प्रोजेक्ट की यूनिट 3 के लिये शुक्रवार को हुई निविदा

सौर ऊर्जा भविष्य में होगा अर्थव्यवस्था का केन्द्र बिन्दु : मुख्यमंत्री डॉ. यादव नीमच सोलर प्रोजेक्ट के ई-रिवर्स ऑक्शन में दर आई 2 रूपये 15 पैसे प्रति यूनिट : मंत्री शुक्ला नीमच सोलर प्रोजेक्ट की यूनिट 3 के लिये शुक्रवार को हुई निविदा भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा सौर और हरित ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने के संकल्प की दिशा में मध्यप्रदेश भी निरंतर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश लक्ष्य की प्राप्ति के लिये संकल्पबद्ध होकर कार्य कर रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्तमान परिदृश्य में विकास और उद्योगों में ऊर्जा की आवश्यकता को देखते हुए प्रतीत होता है कि सौर ऊर्जा भविष्य में अर्थव्यवस्था का केन्द्र बिन्दु होगा। प्रदेश ने नवकरणीय ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य की प्राप्ति की दिशा में निरंतर बेहतर कार्य किया है। विगत 12 वर्षों में 14 गुना से अधिक की वृद्धि की है। नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला ने बताया कि शुक्रवार को नीमच सोलर प्रोजेक्ट की 170 मेगावाट क्षमता की यूनिट 3 के लिये सम्पन्न हुई निविदा में न्यूनतम रेट आएं हैं। उन्होंने बताया कि ई-रिवर्स ऑक्शन के बाद 2 रूपये 15 पैसे प्रति यूनिट, अब तक की न्यूनतम टैरिफ दर प्राप्त हुई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नीमच सौर प्रोजेक्ट से राज्य को ग्रीन बिजली के साथ-साथ निर्माण एवं संचालन अवधि के दौरान प्रदेश में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार पाने का सुनहरा अवसर प्राप्त होगा। उन्होंने कहा कि परियोजना के विकास से प्रदेश में लगभग 800 करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित होगा और एवं समतुल्य तापीय विद्युत् की तुलना में प्रति वर्ष 3.34 लाख टन CO₂ का उत्सर्जन कम होगा। मध्यप्रदेश सरकार ऊर्जा के स्वच्छ एवं हरित विकल्पों को बढ़ावा देने एवं उपयोग करने के लिये निरंतर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विगत 12 वर्षों में 14 गुना की वृद्धि कर वर्तमान में राज्य की कुल नवकरणीय ऊर्जा क्षमता बढ़कर लगभग 7000 मेगावाट हो गई है, जो राज्य की कुल ऊर्जा क्षमता लगभग 21 प्रतिशत है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में नवाचार करने में भी अग्रणी है। रीवा सौर परियोजना और ओंकारेश्वर फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्टर इसके उत्कृष्ट उदाहरण है। रीवा सौर परियोजना से देश में पहली बार कोयले से बनने वाली बिजली से कम दर पर सौर ऊर्जा मिली है। यहां से राज्य के अतिरिक्त दिल्ली मेट्रो को भी बिजली दी जा रही है। साथ ही प्रदेश के आगर-शाजापुर-नीमच सौर परियोजना से उत्पादित बिजली भारतीय रेलवे को भी दी जा रही है। उन्होंने कहा कि अक्टूबर-2024 में विश्व की सबसे बड़ी फ्लोटिंग सौर परियोजना में 278 मेगावाट ओंकारेश्वर फ्लोटिंग सौर परियोजना को कमीशन किया गया है। नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री शुक्ला ने बताया है कि शुक्रवार 6 दिसम्बर को नीमच परियोजना की 170 मेगावॉट क्षमता की यूनिट 3 के लिए हुई निविदा (ऑक्शन) प्रक्रिया में 10 विकासकों ने भाग लिया। ई-रिवर्स ऑक्शन के पश्चात 2 रूपये 15 पैसा प्रति यूनिट का न्यूनतम टैरिफ प्राप्त कर सौर ऊर्जा के क्षेत्र में उत्कृष्ट सफलता प्राप्त की है। मंत्री शुक्ला ने बताया कि इस वितीय वर्ष में देश के प्रतिष्ठित विभिन्न संस्थानों, द्वारा जारी निविदाओं में न्यूनतम टैरिफ 2 रूपये 48 पैसे प्रति यूनिट SECI की निविदा प्राप्त हुई है। प्रदेश में हुई इस बिड ने एक बार पुनः रिवर्स ऑक्शन के बाद न्यूनतम टैरिफ प्राप्त किया जो SECI के द्वारा प्राप्त टैरिफ से लगभग 33 पैसे कम है। निविदा में प्राप्त दर केंद्र सरकार द्वारा 01 अप्रैल 2024 से ALMM की बाध्यता लागू करने के बाद संपन्न हुई निविदाओं में सबसे कम है। नीमच परियोजना हेतु प्राप्त परिणाम केंद्र अथवा राज्य के संस्थानों की तुलना में लगभग 7.25 प्रतिशत कम हैं। नवकरणीय ऊर्जा मंत्री शुक्ला ने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में बेहतर कार्य कर आम उपभोक्ताओं के किसानों को भी सस्ती बिजली उपलब्ध कराने के लिये तीव्र गति से कार्य किया जा रहा है। जल्द ही इसका लाभ भी मिलने लगेगा।  

सिंहस्थ में संत-महंत व श्रध्दालुओं का स्नान क्षिप्रा के जल से ही होगा – मुख्यमंत्री डॉ.यादव

प्रदेश की सबसे अलग अनोखी कान्ह डायवर्शन व अन्य एकीकृत परियोजनाओं से क्षिप्रा होगी स्वच्छ, अविरल व प्रवाहमान – मुख्यमंत्री डॉ.यादव सिंहस्थ-2028 के पहले पूर्ण होंगी सभी परियोजनाएँ – मुख्यमंत्री डॉ.यादव सिंहस्थ में संत-महंत व श्रध्दालुओं का स्नान क्षिप्रा के जल से ही होगा – मुख्यमंत्री डॉ.यादव मुख्यमंत्री ने की सिंहस्थ-2028 की जल आपूर्ति कार्ययोजना एवं प्रगति की समीक्षा भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सिंहस्थ-2028 एवं आने वाले सिंहस्थों में संत-महंत और श्रध्दालु क्षिप्रा के जल से ही स्नान करेंगे। इसके लिए कान्ह डायवर्शन क्लोज डक्ट परियोजना, सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी मध्यम परियोजना और हरियाखेड़ी परियोजना के कार्य पूर्ण होने पर ये परियोजनाएं एकीकृत रूप से कार्य करेंगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इन परियोजनाओं से तीन लक्ष्यों को एक साथ प्राप्त किया जाएगा। इन परियोजनाओं से पावन नदी क्षिप्रा स्वच्छ एवं प्रवाहमान होगी और इससे जिले को पेयजल भी निरंतर उपलब्ध होता रहेगा। यह देश-प्रदेश की पहली ऐसी परियोजना हैं, इसके संबंध में केन्द्र सरकार को भी अवगत कराया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शुक्रवार को उज्जैन में सिंहस्थ-2028 की जल आपूर्ति की कार्ययोजना एवं उनकी प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को कार्यों की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने और सभी कार्य समय-सीमा में पूर्ण करवाने के निर्देश दिए। बैठक में क्षिप्रा को स्वच्छ, अविरल, प्रवाहमान बनाने एवं क्षिप्रा नदी से जिले को पेयजल उपलब्ध कराने की कार्ययोजना की विस्तृत चर्चा की गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह एकीकृत परियोजनाओं की कार्ययोजना वर्ष 2055 तक की जनसंख्या को दृष्टिगत रखते हुए बनाई गई है। कान्ह डायवर्शन क्लोज डक्ट परियोजना के माध्यम से कान्ह नदी का अस्वच्छ पानी को ट्रीटमेंट कर स्वच्छ पानी गंभीर डाउनस्ट्रीम में छोड़ा जाएगा। सिलारखेड़ी-सेवरखेड़ी बैराज से क्षिप्रा में जल की आपूर्ति निरंतर होती रहेगी, जिससे क्षिप्रा अविरल और प्रवाहमान रहेगी। हरियाखेड़ी परियोजना त्रिवेणी के अपस्ट्रीम में होने के कारण यहां से क्षिप्रा नदी का शुध्द जल प्राप्त होगा, जिससे जिले को निरंतर पेयजल प्रदाय किया जाएगा। कलेक्टर नीरज कुमार सिंह ने जानकारी दी कि कान्ह डायवर्शन क्लॉज डक्ट परियोजना में क्लोज डक्ट 12 किलोमीटर लंबी टनल एवं 18.15 किलोमीटर क्लोज डक्ट से क्षिप्रा नदी को स्वच्छ करने का कार्य कान्ह नदी के पानी को अलग कर किया जाएगा। सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी परियोजना में बैराज निर्माण, बैलेंसिंग टैंक आदि निर्माण कार्य कर सिलारखेड़ी टैंक से त्रिवेणी घाट पाइपलाइन से ग्रेवेटी के माध्यम से क्षिप्रा में जल की सालभर उपलब्धता होगी, जिससे क्षिप्रा प्रवाहमान एवं अविरल रहेगी। हरियाखेड़ी वाटर ट्रीटमेंट प्लांट व बैराज परियोजना से जिले को निर्बाध रूप से पेयजल उपलब्ध निरंतर होता रहेगा। बैठक में उज्जैन के प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल, संभागायुक्त संजय गुप्ता, एडीजीपी उमेश जोगा, डीआईजी नवनीत भसीन, पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा, जनप्रतिनिधि विवेक जोशी, बहादुरसिंह बोरमुण्डला आदि उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने स्व. अन्नपूर्णा देवी यादव के देवलोक गमन पर पुष्पचक्र अर्पित कर श्रध्दांजलि दी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार दोपहर गीता कॉलोनी स्थित निज निवास पहुंचकर समाजसेवी एवं उनकी काकी स्व. श्रीमती अन्नपूर्णा देवी का स्वर्गवास होने पर उनके पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर श्रध्दांजलि दी।  

पीएम सूर्य घर योजना में मिलेगी तीन किलोवॉट के सौर संयन्त्र लगाने पर 78 हजार की सब्सिडी

भोपाल मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध संचालक क्षितिज सिंघल ने प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना से संबंधित कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने रजिस्टर्ड उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना में ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन उपरांत विद्युत वितरण कंपनी में रजिस्टर्ड अधिकृत वेंडर से ही सौर ऊर्जा संयंत्र लगवाएं। उन्होंने बताया कि देश के करोड़ों घरों को मुफ्त बिजली उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पीएम सूर्य घर योजना प्रारंभ की गई है। लोगों को इस योजना का लाभ मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा प्रदान किया जा रहा है। इस योजना के तहत एक किलोवाट सोलर संयन्त्र लगाने पर 30 हजार रूपये, दो किलोवाट सोलर संयन्त्र लगाने पर 60 हजार रुपए तथा तीन किलोवाट या उससे ऊपर 10 किलोवॉट तक के सोलर संयन्त्र स्थापना पर 78 हजार रुपए की सब्सिडी केन्द्र सरकार द्वारा दी जा रही है। प्रबंध संचालक ने समीक्षा बैठक के दौरान कहा कि उपभोक्ताओं को समय पर सब्सिडी मिले इसके लिए वेंडर और उपभोक्ता दोनों को ध्यान रखना होगा कि उनके बैंक खाते में नाम, आधार कार्ड में नाम तथा बिजली बिल में नाम एक समान होना चाहिए। समीक्षा के दौरान स्मार्ट मीटर की उपलब्धता की जानकारी भी प्रदान की गई। उन्होंने निर्देशित किया कि अब 1 दिसंबर 2024 से स्थापित होने वाले प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के अंतर्गत सौर संयंत्रों में केवल स्मार्ट मीटर ही लगाए जाएंगे, जो कि मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा एस.ओ.आर. रेट पर उपभोक्ता को प्रदान किए जाएंगे जिससे उपभोक्ताओं द्वारा सोलर वेंडर को किए जाने वाले भुगतान में लगभग 6 से 8 हजार रूपये तक की कमी आयेगी। 10 किलोवॉट तक के सोलर प्लांट संयंत्र स्थापना हेतु समस्त अधिकार अब वितरण केन्द्र में पदस्थ प्रबंधक एवं सहायक प्रबंधक को दे दिए गए हैं, जिससे सोलर प्लांट स्थापना में लगने वाले समय में कमी आयेगी। इन प्रिंसिपल ग्रिड कनेक्टीविटी के आवेदन अब ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से लिए जाएंगे। जिसके लिए उपभोक्ता https://rooftop.mpcz.in/gcp/registration लिंक पर जाकर आवेदन कर सकता है। प्रबंध संचालक ने समीक्षा के दौरान यह भी निर्देश दिए कि जिन रूफटॉप सोलर प्लांट में नेट मीटर के साथ मोडेम व सिम लगे होने के बाद भी अगर डाटा कम्युनिकेशन का अभाव है तो संबंधित सोलर वेंडर को नोटिस जारी किया जाए और कम्युनिकेशन फिर भी स्थापित न होने की अवस्था में वेंडर पर सख्त कार्रवाई की जाए। गौरतलब है कि मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा अपने क्षेत्रान्तर्गत आने वाले भोपाल, नर्मदापुरम्, ग्वालियर एवं चंबल संभाग के 16 जिलों में पीएम सूर्यघर योजना शुभारंभ दिवस 13 फरवरी 2024 से अब तक 6 हजार 377 से अधिक बिजली उपभोक्ताओं को योजना से जोड़ा गया है। आवेदन के लिए पीएम सूर्य घर योजना की वेबसाइट https://www.pmsuryaghar.gov.in पर जाकर आवेदन किया जा सकता है। इसके अलावा अधिक जानकारी के लिए कंपनी की वेबसाइट http://www.portal.mpcz.inअथवा उपाय एप, वॉट्सएप चेटबॉट व टोल फ्री नं, 1912 पर भी संपर्क किया जा सकता है।  

प्राइम टेबल टेनिस लीग में टेबल टेनिस के प्रति अपने जुनून और कौशल का प्रदर्शन करेंगे आठ टीमों के 56 सितारे

इंदौर प्राइम टेबल टेनिस लीग (पीटीटीएल) का बहुप्रतीक्षित आगाज़ मध्य प्रदेश के इंदौर में 13 दिसंबर, 2024 से होने जा रहा है, जो कि 15 दिसंबर, 2024 तक चलेगा। यह रोमांचक प्रतियोगिता इंदौर के प्रसिद्ध अभय प्रशाल क्लब में आयोजित की जाएगी। इस लीग में 11 से 60 वर्ष की उम्र के 56 खिलाड़ी, 8 कोच और 8 मैनेजर हिस्सा ले रहे हैं, जो टेबल टेनिस के प्रति अपने जुनून और कौशल का प्रदर्शन करेंगे। पीटीटीएल के इस संस्करण में इंदौर के स्थानीय सितारे अनुषा कुटुम्बले, वियान राजीव, अनुज सोनी, संतोष खिरवाडकर, भाग्यश्री दवे, कार्तिकेय कौशिक, हिया पटेल, शिवम सोलंकी, हिमानी चतुर्वेदी और ज़ाकिया सुल्तान शामिल हैं। यह मुकाबला आठ धमाकेदार टीमों के बीच होगा, जो तीन दिनों तक रोमांचक मैचों का वादा करता है। इन टीमों में क्लिपर्स, निंजा, सेंसाटेशन, स्पार्टन्स, थंडरबोल्ट, योद्धा, लायन वॉरियर और किंग पोंग के नाम शामिल हैं। मध्य प्रदेश टेबल टेनिस एसोसिएशन (एमपीटीटीए) के अध्यक्ष ओम सोनी ने लीग के महत्व के बारे में बताते हुए कहा, “इंदौर में खेल प्रतिभा को प्रोत्साहित करने की हमेशा से ही परंपरा रही है। प्राइम टेबल टेनिस लीग की मेजबानी करना हमारी यात्रा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह आयोजन सिर्फ एक प्रतियोगिता तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह खेल के प्रति जुनून, समर्पण और कौशल का शानदार उत्सव भी है। हम उम्मीद करते हैं कि इससे कई बच्चों और परिवारों को खेलों को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने का मौका मिलेगा। प्रशंसकों को पेशेवर टेबल टेनिस का रोमांच अनुभव करने के लिए आमंत्रित किया जाता है। इंटरैक्टिव गतिविधियों, आकर्षक वर्कशॉप्स और लाइव मैचों के साथ, यह आयोजन परिवारों और खेल प्रेमियों के लिए एक विशेष अनुभव होने का वादा करता है। बच्चों का खेलों के प्रति रुझान बढ़ाने के उद्देश्य से एक विशेष पहल भी की जाएगी, ताकि वे टेबल टेनिस को अपनी स्वस्थ जीवनशैली का हिस्सा बनाएँ और इसके प्रति प्रेरित हों।  

केन्द्रीय मंत्रि-मंडलीय समिति ने मध्यप्रदेश के लिये स्वीकृत किये 11 केन्द्रीय विद्यालय

केन्द्रीय मंत्रि-मंडलीय समिति ने मध्यप्रदेश के लिये स्वीकृत किये 11 केन्द्रीय विद्यालय मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री मोदी का माना आभार भोपाल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रि-मंडलीय समिति ने 85 केन्द्रीय विद्यालय (केवी) स्थापित करने को मंजूरी दी है। इसमें 11 केन्द्रीय विद्यालय मध्यप्रदेश के हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रधानमंत्री मोदी द्वारा मध्यप्रदेश के लिये 11 केन्द्रीय विद्यालय की सौगात देने पर आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा दी गई यह सौगात मध्यप्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र को नई ऊंचाई देगी। मध्यप्रदेश को मिले 11 केन्द्रीय विद्यालयों में अशोक नगर जिला अशोक नगर , नागदा जिला उज्जैन, मैहर जिला सतना, तिरोड़ी जिला बालाघाट, बरघाट जिला सिवनी, निवाड़ी जिला निवाड़ी, खजुराहो जिला छतरपुर, झिनझारी जिला कटनी, सबलगढ़ जिला मुरैना, नरसिंहगढ़ जिला राजगढ़ और सेन्ट्रल अकादमी पुलिस अकादमी कान्हासैया जिला भोपाल हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 अनुसार सभी केन्द्रीय विद्यालयों को पीएमस्कूल के रूप में नामित किया गया है, जो एनईपी-2020 के कार्यान्वयन को रेखांकित करता है और अन्य के लिए अनुकरणीय स्कूल के रूप में कार्य करता है। केन्द्रीय विद्यालय अपने गुणवत्तापूर्ण शिक्षण, अभिवन शिक्षण पद्धति और अद्यतन अवसंरचना के कारण उन स्कूलों में से एक है, जिनकी सबसे अधिक मांग है। हर साल केवी के कक्षा 1 में प्रवेश के लिए आवेदन वाले छात्रों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है और सीबीएसई द्वारा आयोजित बोर्ड परीक्षाओं में केन्द्रीय विद्यालयों के छात्रों का प्रदर्शन सभी शैक्षणिक प्रणालियों में लगातार सर्वश्रेष्ठ रहा है।  

दिल्ली विधानसभा चुनाव में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मध्य प्रदेश के नेताओं के ही हाथ में रहेगी: कांग्रेस

भोपाल अगले वर्ष होने वाले दिल्ली विधानसभा के चुनाव में कांग्रेस की कमान मध्य प्रदेश के नेता संभालेंगे। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने टिकट वितरण से लेकर चुनाव की कार्ययोजना बनाने का दायित्व पार्टी ने प्रदेश के नेताओं को दिया है। टिकट के लिए नाम प्रस्तावित करने गठित स्क्रीनिंग कमेटी का अध्यक्ष पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन को बनाया है तो वार रूम की जिम्मेदारी पूर्व मंत्री प्रियव्रत सिंह को दी गई है। अभी हाल ही में हुए महाराष्ट्र, झारखंड और उसके पहले जम्मू कश्मीर व हरियाणा विधानसभा के चुनाव में मध्य प्रदेश के नेताओं को भेजा गया था। यहां प्रदेश के नेता सहयोगी की भूमिका में थे लेकिन दिल्ली विधानसभा चुनाव में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी प्रदेश के नेताओं के ही हाथ में रहेगी। टिकट दावेदारों की कुंडली तैयार करना इसमें सबसे महत्वपूर्ण काम टिकट के लिए संभावित दावेदारों का गुण-दोष के आधार पर आकलन करके नाम प्रस्तावित करना है। यह दायित्व पूर्व सांसद और संगठन में विभिन्न पदों पर काम कर चुकीं मीनाक्षी नटराजन को दिया गया है। उन्हें गांधी परिवार का भरोसेमंद माना जाता है। भारत जोड़ो यात्रा में वे पूरे राहुल गांधी के साथ रहीं। पार्टी ने उन्हें तेलंगाना विधानसभा चुनाव के लिए पर्यवेक्षक बनाकर भी भेजा था। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी की राजनीतिक मामलों की समिति और कार्यकारी समिति की सदस्य हैं। निर्विवादित होने के कारण संगठन ने उन्हें प्रत्याशी चयन का काम दिया है। वार रूम का चेयरमैन प्रियव्रत सिंह वहीं, कमल नाथ सरकार में मंत्री रहे प्रियव्रत सिंह को वार रूम का चेयरमैन बनाया गया है। उन्हें चुनाव लड़ने और लड़वाने दोनों का पर्याप्त अनुभव है। युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय पदाधिकारी से लेकर प्रदेश युवा कांग्रेस अध्यक्ष रह चुके हैं। पार्टी ने उन्हें अलग-अलग राज्यों के चुनावों में विभिन्न जिम्मेदारी दे चुकी है। चुनाव की रणनीति बनाने के साथ उसके अमल की पूरी जवाबदारी प्रियव्रत की होगी। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के मीडिया सलाहकार केके मिश्रा का कहना है कि पार्टी युवा नेतृत्व को आगे करने की दिशा में काम कर रही है। यही कारण है कि प्रदेश के दो युवा नेताओं को दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई हैं। दोनों को ही संगठन और चुनाव से जुड़े कामों का पर्याप्त अनुभव है। इसका लाभ चुनाव में मिलेगा। जीतू पटवारी, उमंग सिंघार, कुणाल चौधरी भी संभाल चुके हैं दायित्व प्रदेश के युवा नेताओं पर संगठन को भरोसा है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी को गुजरात, उमंग सिंघार को झारखंड और कुणाल चौधरी को महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए अलग-अलग दायित्व देकर भेजा जा चुका है।

‘भविष्य का नर्मदापुरम् होगा विकसित’ रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव के लिये 4 हजार से अधिक रजिस्ट्रेशन हुए

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश के हर क्षेत्र में संतुलित और सामान विकास के संकल्प को सकार करने के लिये पूरे प्रदेश में रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में 6वीं रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव आज  7 दिसंबर को नर्मदापुरम में होगी, जिसकी तैयारी जोरों है। नर्मदापुम् राष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय उद्योगपतियों के स्वागत के लिये तैयार है। इसके माध्यम से स्थानीय निवेशकों और उद्योगपतियों को भी प्रदेश की औद्योगिक रणनीतियों से जोड़ा जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नर्मदापुरम में आयोजित होने वाले इंडस्ट्री कॉन्क्लेव में नर्मदापुरम और आस-पास के क्षेत्र के औद्योगिक विकास और निवेश संभावनाओं के लिहाज से एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इसमें उद्योग जगत के प्रमुख प्रतिनिधि और विशेषज्ञ शामिल होंगे, जो मध्यप्रदेश में निवेश के अवसरों, विकासात्मक योजनाओं और विभिन्न उद्योगों की संभावनाओं पर चर्चा करेंगे। विकास कार्यों का भूमि-पूजन और लोकार्पण भी होगा क्षेत्रीय इंडस्ट्री कॉन्क्लेव में क्षेत्रीय उद्योगों से संबंधित प्रदर्शनी लगाई जाएगी। व्यापार संवर्धन केंद्र भी खुले रहेंगे, जहां निवेशक मध्यप्रदेश के औद्योगिक परिदृश्य को देख सकेंगे और संभावनाओं पर चर्चा कर सकेंगे। यह सम्मेलन न केवल राज्य में उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि राज्य को एक प्रमुख निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में भी एक अहम कदम साबित होगा। कॉन्क्लेव में निवेश के अवसर विषय पर विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा प्रस्तुतियाँ दी जाएंगी। इसमें सूचना प्रौद्योगिकी, आईटीईएस और ईएसडीएम, माइनिंग, पर्यटन, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम क्षेत्र शामिल हैं। इसके बाद दोहपर 12 बजे प्रमुख उद्योगपतियों द्वारा राज्य के व्यवसायिक माहौल पर अपने विचार साझा किए जाएंगे। राज्य की विकासात्मक संभावनाओं पर एक शार्ट फिल्म का प्रजेंटेशन भी किया जायेगा। कॉन्क्लेव में विभिन्न विकास कार्यों का भूमि-पूजन और लोकार्पण भी होगा। 6वीं रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव का महत्व नर्मदापुरम का यह आयोजन राज्य की औद्योगिक नीति, निवेश प्रोत्साहन और एमएसएमई के लिए नई संभावनाओं पर ध्यान केंद्रित करेगा। 75 प्रमुख निवेशक और 5 देशों के प्रतिनिधि यहां उद्योग और रोजगार के लिए नए रास्ते खोजने का प्रयास करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव विभिन्न औद्योगिक परियोजनाओं का वर्चुअल भूमिपूजन और उद्घाटन करेंगे, और निवेशकों के साथ वन-टू-वन मीटिंग करेंगे। नर्मदापुरम की नई पहचान     नर्मदापुरम, जो पहले अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर के लिए जाना जाता था, अब एक उभरते हुए औद्योगिक केंद्र के रूप में अपनी पहचान बना रहा है। इस कॉन्क्लेव का मुख्य उद्देश्य कृषि, डेयरी, खाद्य प्रसंस्करण, नवकरणीय ऊर्जा, पर्यटन और वस्त्र क्षेत्रों में नए अवसरों का पता लगाना है। इस आयोजन की थीम नए क्षितिज, नई संभावनाएं है। स्थानीय उत्पादों की प्रदर्शनी कॉन्क्लेव में 60 से अधिक स्टॉल लगाए जा रहे हैं, जहां एमएसएमई, पर्यटन, हस्तशिल्प विकास निगम और ओडीओपी (ODOP) उत्पादों का प्रदर्शन होगा। यह प्रदर्शनी स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने और उनका प्रचार करने का एक महत्वपूर्ण मंच साबित होगी। इसमें निवेशकों के साथ साझेदारी के अवसर भी मिलेंगे। उद्योग और रोजगार के लिए नया कदम कॉन्क्लेव का उद्देश्य नर्मदापुरम को औद्योगिक मानचित्र पर स्थापित करना और सरकार तथा निवेशकों के बीच सहयोग को सशक्त बनाना है। यह आयोजन नर्मदापुरम को क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाएगा और प्रदेश के हर क्षेत्र को औद्योगिक और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में मदद करेगा। इस कॉन्क्लेव की थीम क्या है? नर्मदापुरम, जो अपनी धार्मिक, प्राकृतिक और सांस्कृतिक धरोहर के लिए जाना जाता है, अब एक उभरते औद्योगिक केंद्र के रूप में भी अपनी पहचान बना रहा है. ‘नए क्षितिज, नई संभावनाएँ’ थीम के अंतर्गत इस कार्यक्रम में कृषि, डेयरी, खाद्य प्रसंस्करण, नवकरणीय ऊर्जा, पर्यटन और वस्त्र जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया है. उद्योग और रोजगार के लिए नई राह ‘उद्योग वर्ष 2025’ अंतर्गत आयोजित इस कॉन्क्लेव का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के हर क्षेत्र को औद्योगिक और आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है. उज्जैन, जबलपुर, ग्वालियर, सागर और रीवा में आयोजित सफल कार्यक्रमों की श्रृंखला में नर्मदापुरम का यह आयोजन क्षेत्रीय संभावनाओं को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत करने का एक और महत्वपूर्ण कदम है. इस कॉन्क्लेव से नर्मदापुरम क्षेत्र को औद्योगिक मानचित्र पर स्थापित करने के साथ-साथ निवेशकों और सरकार के बीच आपसी सहयोग को और सुदृढ़ करने में मदद मिलेगी.

कछरवार की रहने वाली गुड्डी बाई के लिए अनुग्रह सहायता राशि बनी वरदान

भोपाल जीवन में कई बार विपरीत परिस्थितियाँ आकर हमें तोड़ने की कोशिश करती हैं, लेकिन सही समय पर मिला सहारा नई राह दिखा सकता है। ऐसी ही एक कहानी है, उमरिया जिले के गांव कछरवार की रहने वाली गुड्डी बाई की, जिनके परिवार को मुख्यमंत्री जनकल्याण (संबल) योजना ने न केवल सहारा दिया, बल्कि उनके बच्चों के भविष्य को भी सुरक्षित किया। गुड्डी बाई के जीवन में पहली चुनौती 15 साल पहले आई जब उनके पति हेतराम का निधन हुआ। परिवार का सहारा बनने की जिम्मेदारी उनके बड़े बेटे प्रभाकर रजक ने संभाली। प्रभाकर ने इलेक्ट्रिशियन का काम शुरू किया और घर-परिवार को आर्थिक रूप से स्थिरता दी। लेकिन किस्मत ने एक और परीक्षा ली, प्रभाकर की एक दुर्घटना में मृत्यु हो गई। इस घटना ने परिवार को आर्थिक और भावनात्मक रूप से तोड़ दिया। जीविकोपार्जन के लिए छोटे बेटे सुधाकर ने इलेक्ट्रिशियन का काम सीखना शुरू किया और बड़े बेटे दिवाकर ने खेती-बाड़ी का जिम्मा संभाला। संबल योजना ने दी नई ऊर्जा प्रभाकर का नाम मुख्यमंत्री जन कल्याण (संबल) योजना 2.0 में पंजीकृत था। उनकी मृत्यु के बाद योजना के तहत मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सिंगल क्लिक से 4 लाख रुपये की अनुग्रह सहायता राशि गुड्डी बाई के खाते में जमा कराई। इस राशि ने न केवल परिवार को आर्थिक संकट से उबारा, बल्कि उनके बच्चों के भविष्य को संवारने का अवसर भी दिया। गुड्डी बाई कहती हैं, “यह राशि हमारे लिए किसी वरदान से कम नहीं है। अब मैं अपने बच्चों की पढ़ाई और उनके काम-धंधे को बेहतर तरीके से आगे बढ़ा सकती हूँ। यह सहायता हमें फिर से जीने की ताकत दे रही है।” गुड्डी बाई ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस योजना ने उनके जैसे असहाय परिवारों को फिर से अपने पैरों पर खड़े होने का मौका दिया है। संबल योजना से न केवल आर्थिक सहायता दी, बल्कि एक टूटे हुए परिवार को फिर से खड़ा करने की प्रेरणा दी।  

राज्य सरकार प्रदेश के विशेष रूप से पिछड़े जनजातीय समूह के स्वास्थ्य सुधार के प्रति संवेदनशील होकर प्रतिबद्ध प्रयास

भोपाल राज्य सरकार प्रदेश के विशेष रूप से पिछड़े जनजातीय समूह (पीवीटीजी) के स्वास्थ्य सुधार के प्रति संवेदनशील होकर प्रतिबद्ध प्रयास कर रही है। स्वास्थ्य सेवाओं को सुदूर क्षेत्रों तक पहुंचाने के उद्देश्य से सरकार की पीवीटीजी बहुल 21 जिलों के दूरस्थ गांवों की 1270 बसाहटों तक मोबाइल मेडिकल यूनिट्स (एमएमयू) संचालित करने की योजना है। प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम जन-मन) योजना के तहत सरकार द्वारा कुल 74 मोबाइल मेडिकल यूनिट्स चलाई जाएंगी, जिन पर तीन वर्षों में लगभग 50 करोड़ 31 लाख 18 हजार रुपये व्यय किए जाएंगे। इस महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य स्वास्थ्य सुविधाओं को पीवीटीजी समुदाय के लोगों के घर-घर तक पहुंचाना है। योजना के तहत अब तक तेजी से काम किया गया है। कुल 74 मोबाइल मेडिकल यूनिट्स में से आगामी 15 दिसंबर 2024 तक 66 मोबाइल मेडिकल यूनिट्स संचालित कर दी जायेंगी। सरकार की यह पहल विशेष रूप से सुदूर और दुर्गम क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करेगी। सरकार के इन प्रयासों से पीवीटीजी समुदाय के स्वास्थ्य में सुधार होगा और उन्हें समय पर चिकित्सा सुविधाएं भी उपलब्ध हो सकेंगी। राज्य सरकार द्वारा मोबाइल मेडिकल यूनिट के लिये पीवीटीजी बहुल जिले भी चिन्हित कर लिये गये हैं। सरकार द्वारा शिवपुरी जिले के लिये 11, शहडोल जिले के लिये 10, बालाघाट एवं सीधी के लिये 6-6, डिंडोरी, गुना, ग्वालियर एवं मंडला के लिये 5-5, अशोकनगर 4, अनूपपुर 3, दतिया, मुरैना एवं श्योपुर के लिये 2-2 तथा छिंदवाड़ा, कटनी, नरसिंहपुर, सतना, जबलपुर, रायसेन, उमरिया एवं विदिशा जिले के पीवीटीजी बहुल क्षेत्रों के लिये 1-1 मोबाइल मेडिकल यूनिट की गई है। पीएम जन-मन में पीवीटीजी के लिये मंजूर 74 में से 66 मोबाइल मेडिकल यूनिट्स जल्द ही संचालित हो जायेंगी। शेष 8 मोबाइल मेडिकल यूनिट के लिये टेंडर प्रक्रिया की जा रही है। वर्तमान में इन जिलों के पीवीटीजी बहुल क्षेत्रों में वैकल्पिक तौर पर राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के माध्यम से 74 मोबाइल मेडिकल यूनिट्स चलाई जा रही हैं।  

नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने तैयार की 2875 करोड़ रुपये की योजना

प्रदेश के 413 नगरीय निकायों में बनेंगे गीता भवन प्रदेश में नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने 413 नगरीय निकायों में गीता भवन बनाने का निर्णय लिया नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने तैयार की 2875 करोड़ रुपये की योजना भोपाल प्रदेश में धार्मिक ग्रंथों, साहित्य और वैज्ञानिक अनुसंधानों के सुलभ अध्ययन के लिये नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने 413 नगरीय निकायों में गीता भवन बनाने का निर्णय लिया है। इसके लिये विभाग ने 2 हजार 875 करोड़ रुपये की योजना तैयार की है। यह योजना आगामी 3 वर्षों में पूरी की जायेगी। नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बताया कि 5 लाख से अधिक जनसंख्या वाले 5 नगर निगमों में 1500 बैठक क्षमता और 5 लाख से कम जनसंख्या वाले नगर निगमों में एक हजार बैठक क्षमता वाले एक-एक गीता भवन तैयार किये जायेंगे। प्रदेश की 99 नगरपालिका परिषद और 298 नगर परिषद क्षेत्र में क्रमश 500 एवं 250 बैठक क्षमता के एक-एक गीता भवन तैयार किये जायेंगे। उन्होंने बताया कि गीता भवन का निर्माण राज्य शासन द्वारा कराया जायेगा। नगरीय निकाय पीपीपी मोड पर भी गीता भवन का निर्माण कर सकेंगे। नगरीय विकास मंत्री ने बताया कि प्रत्येक गीता भवन में एक पुस्तकालय होगा। इनमें 3 रीडिंग रूम की व्यवस्था होगी। गीता भवन में ई-लायब्रेरी कक्ष की व्यवस्था भी प्रस्तावित की गयी है। गीता भवन में साहित्य सामग्री बिक्री केन्द्र भी प्रस्तावित किया गया है। उन्होंने बताया कि गीता भवन में कैफेटेरिया-स्वल्पाहार गृह की सुविधा भी विकसित कर सकेंगे। गीता भवन केन्द्रों को आत्म-निर्भर बनाने के होंगे प्रयास नगरीय विकास मंत्री विजयवर्गीय ने बताया कि प्रदेश में बनाये जा रहे गीता भवन केन्द्रों को आत्म-निर्भर बनाने के लिये नगरीय निकाय समुचित स्थान पर व्यावसायिक उपयोग कर सकेंगे। जिन नगरीय निकायों में पूर्व से भवन हैं, उनका विस्तार कर गीता भवन के रूप में उपयोग किया जा सकेगा। नगरीय निकायों में बनाये जाने वाले गीता भवनों में ऑडिटोरियम का भी प्रावधान रखा गया है। इन ऑडिटोरियम में नगरीय निकायों की आबादी के मान से सभागार की बैठक क्षमता निर्धारित रहेगी। गीता भवन में चार पहिया और दो पहिया की सुलभ पॉर्किंग व्यवस्था का भी प्रावधान रखा गया है। गीता भवन का निर्माण ऐसे स्थान पर किया जायेगा, जहाँ नागरिकों की पहुँच आसान हो। मंत्री विजयवर्गीय ने बताया कि नगरीय निकाय ‘सुराज’ योजना की भूमि पर भी गीता भवन बना सकेंगे। प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों में गीता भवन संचालनालय नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा स्वीकृत नक्शे के अनुसार निर्मित किये जायेंगे। गीता भवन की डिजाइन इस प्रकार की होगी कि जिसमें मध्यप्रदेश के विशेष ऑर्किटेक्चर की झलक देखने को मिले।  

2024-25 में प्रदेश के जनजातीय बहुल जिलों में 163 नये निर्माण कार्य मंजूर किये

भोपाल राज्य सरकार प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों के विकास के लिये विशेष प्रयास कर रही है। बीते वर्षों के प्रगतिरत निर्माण कार्यों के अतिरिक्त सरकार ने वर्तमान वित्त वर्ष 2024-25 में प्रदेश के जनजातीय बहुल जिलों में 163 नये निर्माण कार्य मंजूर किये हैं। कुल 404 करोड़ 86 लाख रूपये की लागत से बनने वाले इन सभी 163 निर्माण कार्यों के लिये निविदा की प्रक्रिया प्रचलन में है। जल्द ही सभी कार्य प्रारंभ किये जायेंगे। जनजातीय कार्य लोक परिसम्पत्ति प्रबंधन तथा भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने बताया कि नये निर्माण कार्यों में राज्य शासन द्वारा छात्रावास, आश्रम शालाओं, अप्रोच रोड एवं सामुदायिक भवन आदि मंजूर किये गये हैं। उन्होंने बताया कि केन्द्र सरकार द्वारा संविधान के अनुच्छेद-275(1) के तहत अनुसूचित जनजातियों के कल्याण के लिये राज्यों को भारत की संचित निधि से अनुदान दिया जाता है। संचित निधि से प्राप्त अनुदान से राज्य शासन द्वारा 161 करोड़ रूपये की लागत से 40 नये छात्रावास निर्माण कार्यों को मंजूरी दी गई। प्रत्येक छात्रावास 4 करोड़ 4 लाख रूपये की लागत से बनाया जायेगा। इसी प्रकार 143.22 करोड़ रूपये की लागत से 52 नई आश्रम शालाएं बनाई जायेंगी। प्रत्येक आश्रम शाला 2 करोड 75 लाख 43 हजार रूपये की लागत से बनाइ जायेगी। इसी क्रम में 5 करोड़ 21 लाख रूपये की लागत से 13 छात्रावासों में उन्नयन कार्य, 44 करोड़ 18 लाख रूपये की लागत से 30 एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों में अप्रोच रोड का निर्माण कार्य, 5 करोड़ रूपये से 10 सामुदायिक भवनों का निर्माण (50 लाख प्रति सामुदायिक भवन), 6 करोड़ रूपये से 3 सामुदायिक भवनों का निर्माण (2 करोड़ प्रति सामुदायिक भवन), 11 करोड़ 91 लाख रूपये लागत से आधारताल, जबलपुर में 150 सीटर महाविद्यालयीन बालक छात्रावास निर्माण कार्य एवं 9 करोड़ 21 लाख रूपये की लागत से 8 कन्या शिक्षा परिसरों में अप्रोच रोड का निर्माण कार्य कराया जायेगा। जनजातीय कार्य मंत्री शाह ने बताया कि पीवीटीजी की संस्कृति के संरक्षण के लिये भी सरकार गंभीर होकर प्रयास कर रही है। पीवीटीजी कल्याण (सांस्कृतिक भवन) योजना के तहत 5 करोड़ रूपये लागत से ग्राम टिकटोली जिला श्योपुर में सहरिया जनजातीय सांस्कृतिक केन्द्र भवन निर्माण कार्य, मंडला में 5 करोड़ रूपये की लागत से बैगा जनजातीय सांस्कृतिक केन्द्र भवन निर्माण कार्य, धार में 2 करोड़ 80 लाख रूपये की लागत से भील जनजातीय सांस्कृतिक केन्द्र भवन निर्माण कार्य सहित 1.50 करोड़ लागत से शाहपुर जिला बैतूल के बालक क्रीडा परिसर में बाउंड्री वॉल निर्माण कार्य, ग्राम पंचायत पिपलानी में 24 लाख रूपये की लागत से कोरकू समाज के लिये मंगल भवन का‍निर्माण कार्य तथा ग्राम ईंटखेड़ी जिला रायसेन में 3 करोड़ 98 लाख रूपये की लागत से सीनियर आदिवासी कन्या छात्रावास का निर्माण कार्य कराया जायेगा।

लाड़ली बहनों के खाते में इस दिन आएगी साल की आखिरी किस्त, जाने बडा अपडेट

भोपाल मध्य प्रदेश सरकार लाड़ली बहना योजना के तहत राज्य की बहनों और बेटियों को आर्थिक मदद करती है ताकि वे सशक्त बन सकें। सरकार की ओर से मिलने वाली राशि से बहनों के चेहरे पर खुशी भी देखी जाती है। राज्य सरकार की यह योजना न केवल एमपी में बल्कि पूरे देश में काफी मशहूर है। तो चलिए आपको बताते हैं कि मोहन सरकार लाड़ली बहनों के खातों में कब किस्त की राशि ट्रांसफर कर सकती है। कब जारी होगी 19वीं किस्त?     बता दें कि पिछले कुछ महीनों से महीने की 10 तारीख से पहले ही महिलाओं के खातों में किस्त की रकम आ रही है। खबरों की मानें तो इस बार भी राज्य की मोहन सरकार 19वीं किस्त की राशि महीने की 10 तारीख से पहले महिलाओं के खातों में पैसे ट्रांसफर कर सकती है। ये इस साल की आखिरी किस्त होगी। वहीं संभावना ऐसी भी हैं कि जनवरी 2025 से मोहन सरकार लाड़ली बहनों की किस्त में इजाफा भी कर सकती है बहनों को बेसब्री से है इंतजार मध्य प्रदेश में चलाई जा रही लाड़ली बहना योजना का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। इस स्कीम के तहत सरकार महिलाओं को हर महीने 1250 रुपए की धनराशि देती है ताकि महिलाएं अपना जरूरत की चीजें खरीद सकें। साथ ही सरकार का यह भी उद्देश्य जीवन अच्छे से जी सकें और उन्हें अपने छोटे-मोटे खर्चों के लिए दूसरों पर निर्भर न रहना पड़े। गौरतलब है कि सरकार 18वीं किस्त जारी कर चुकी है और अब प्रदेश की महिलाएं 19वीं किस्त का बेसब्री से इंतजार है। अब देखना होगा कि मोहन सरकार बहन-बेटियों के खाते में कब राशि ट्रांसफर करती है। कब शुरू हुई थी योजना? दरअसल, मुख्यमंत्री लाड़ली बहाना योजना की शुरुआत राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और मौजूदा केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने साल 2023 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले की थी। आपको बता दें कि योजना की पहली चार किस्तों में महिलाओं के खातों में 1-1 हजार रुपए की राशि ट्रांसफर की गई थी। इसके बाद किस्त की राशि बढ़ाकर 1,250 कर दी गई। तब से इस योजना के तहत हर महीने महिलाओं को 1250 रुपए की राशि भेजी जाती है। आपको बता दें कि मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना का लाभ राज्य की करीब 1.29 करोड़ महिलाओं को मिल रहा है।  मध्य प्रदेश में लाड़ली बहनों के लिए खुशियों की घंटी फिर बजने वाली है. प्रदेश की 1 करोड़ 29 लाख बहनों के खाते में लाड़ली बहना योजना की अगली किस्त की राशि आने वाली है. ये इस बरस की आखिरी किस्त है. ऐसी उम्मीद जताई जा रही है कि साल के आखिरी किस्त तय तारीख से पहले भी आ सकती है. माना जा रहा है कि इस बार तय तारीख 10 दिसम्बर के पहले लाड़ली बहनों को इस योजना की 19वी किस्त के रुप में 1250 रुपए की धनराशि भेजी जा सकती हैं. वहीं संभावना ऐसी भी है कि जनवरी 2025 से मोहन सरकार लाड़ली बहनों की किस्त में इजाफा भी कर सकती है. तारीख से पहले आ सकती है लाड़ली बहना की किस्त ! लाड़ली बहना योजना की दिसंबर महीने की किस्त क्या 10 दिसम्बर से पहले भी आ सकती है. ये इस बरस की आखिरी किस्त है. 1250 की ये किस्त समय से पहले भी लाड़ली बहनों के खाते में डाली जा सकती है. ये लाड़ली बहना योजना की 19वी किस्त होगी. त्योहार के समय में जिस तरह से नियत समय से पहले ये राशि लाड़ली बहनों के खाते में डाली गई, क्या इस बार भी ऐसा होगा. हालांकि इस बारे में सरकार की ओर से कोई पुष्टि नहीं की गई है. क्या अगले महीने से बढ़ जाएगी लाड़ली बहना की राशि चर्चा ये भी है कि जनवरी 2025 से लाड़ली बहना योजना की राशि में इजाफा हो सकता है. असल में बुधनी और विजयपुर विधानसभा चुनाव के दौरान सीएम डॉ मोहन यादव ने इस बात के संकेत दिए थे कि वे लाड़ली बहना योजना की राशि में वादे के मुताबिक किस्त की राशि बढ़ाई भी जा सकती है. सीएम डॉ मोहन यादव ने कहा था कि जो वादा किया गया है. लाड़ली बहनों से पूरा किया जाएगा. उसी के बाद से ये अटकलें तेज हो गई कि क्या नए वर्ष की शुरुआत से सरकार लाड़ली बहनों की राशि बढ़ा सकती है. बीजेपी के मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल कहते हैं, “इसमें दो राय नहीं कि लाड़ली बहन-बेटियों के लिए समर्पित है. हमारी सरकार और उनके आर्थिक आत्मनिर्भरता से लेकर उन्हें हर तरह का संबल देने के प्रयास सरकार की ओर से किए जा रहे हैं. सरकार ने लाड़ली बहनों से जो वादा किया है. वो भी पूरे होंगे. बीजेपी की सरकार ने पूर्व में भी अपने वचन पूरे किए हैं और इस बार भी सरकार पूरी तरह से प्रतिबद्ध है.” कब शुरु हुई थी योजना, लाड़ली बहनों का कितना बजट एमपी में लाड़ली बहना अकेली ऐसी योजना है. जिसके लिए सरकार ने बजट में हमेशा विशेष प्रावधान किए हैं. 2023 में शुरु की गई योजना में पहले साल 12 हजार करोड़ का प्रावधान किया गया था. 23 से साठ वर्ष की महिलाओं के लिए हर महीने हजार रुपए की धनराशि का प्रावधान शुरुआत में किया गया, जो बढ़कर 1250 रुपए का प्रावधान कर दिया गया. पांच वर्षों लक्ष्य में इसे 60 हजार करोड़ इसका बजट माना गया था. जब किस्त की धनराशि 1250 कर दी गई, तो बजट में भी प्रावधान किया गया. अब तैयारी ये है कि 2025 के बजट में महिला बाल विकास विभाग के साथ महिलाओं पर केन्द्रित योजनाओं के लिए धनराशि बढ़ाई जाए.  

पहाड़ों पर बर्फबारी एवं बारिश होने से ठंडी हवाएं चलेगी और प्रदेश में तापमान में गिरावट के साथ सर्दी में तेजी आएगी

भोपाल फ़ेंगल तूफान का असर खत्म होने लगा है, ऐसे में 7 दिसंबर को एक पश्चिमी विक्षोभ के उत्तर भारत में पहुंचने से फिर मौसम में बदलाव देखने को मिलेगा। खास करके उत्तर भारत के पहाड़ों पर बर्फबारी एवं बारिश होने से ठंडी हवाएं चलेगी और प्रदेश में तापमान में गिरावट के साथ सर्दी में तेजी आएगी। इस दौरान पूर्वी हिस्से में कहीं कहीं बादल छाने के साथ बूंदाबांदी भी देखने को मिल सकती है। एमपी मौसम विभाग के मुताबिक, तूफान फेंगल के कमजोर होकर लो प्रेशर एरिया में बदलने से तापमान में इजाफा हो रहा है। अगले 48 घंटे तक प्रदेश के तापमान में कोई खास उतार-चढ़ाव नहीं देखने को मिलेगा और मौसम ऐसा ही बना रहेगा।इसके बाद पश्चिमी विक्षोभ के असर से जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग के जिलों में हल्की बारिश के आसार हैं। Madhya Pradesh के मौसम का ताजा हाल एमपी मौसम विभाग के अनुसार, फेंगल तूफान का असर खत्म के बाद पश्चिमी विक्षोभ के कारण पहाड़ों पर बर्फबारी होगी और उत्तर-पश्चिमी हवाओं के आने से ग्वालियर, चंबल और उज्जैन संभाग में रात के तापमान में गिरावट आएगी और तेज ठंड का असर देखने को मिलेगा।पश्चिमी, पूर्वी और दक्षिणी हिस्सों में तापमान में बढ़ोतरी होगी। प्रदेश में कड़ाके की ठंड का दौर 20 दिसंबर से शुरू होगा, जो जनवरी तक बना रहेगा। 40 दिनों में 20 से 22 दिन कोल्ड वेव यानी, सर्द हवाओं की भी स्थिति बन सकती है। वर्तमान में सक्रिय है ये मौसम प्रणालियां वर्तमान में उत्तर भारत के ऊपर जेट स्ट्रीम और पूर्व-मध्य अरब सागर में हवा के ऊपरी भाग में चक्रवात के रूप में मौजूद है।हवाओं का रुख उत्तरी एवं उत्तर-पूर्वी बना हुआ है, जिससे तापमान में उतार-चढ़ाव का सिलसिला जारी है।7 दिसंबर को एक पश्चिमी विक्षोभ के उत्तर भारत में पहुंचने की संभावना है। उसके प्रभाव से उत्तर भारत के पहाड़ों पर बर्फबारी एवं वर्षा होने के आसार हैं। इससे फिर कड़ाके की ठंड का दौर शुरू होने का अनुमान है। उसके पूर्व मौसम का मिजाज इसी तरह बना रहने के आसार हैं।

सीएम 8 दिसम्बर को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से अधिकारियों को जन कल्याण उत्सव के संबंध में निर्देश देंगे

भोपाल मोहन सरकार के एक साल पूरे होने पर प्रदेश में जन कल्याण पर्व मनाया जाएगा। इसके लिए मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव 8 दिसम्बर को शाम 6 बजे से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अधिकारियों को जन कल्याण उत्सव के संबंध में निर्देश देंगे। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से होने वाली बैठक में संभागायुक्त, आईजी, कलेक्टर, एसपी, मंत्रियों के अलावा जिलों में स्थानीय जनप्रतिनिधियों को भी शामिल होने के लिए कहा गया है। मुख्यमंत्री जन कल्याण पर्व के दौरान गरीब, युवा, किसान और महिलाओं को लेकर एक साल में किए गए कार्यक्रमों पर फोकस करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि 11 दिसंबर को भोपाल एवं सभी जिलों में गीता जयंती महोत्सव का भव्य आयोजन किया जाएगा। इसी प्रकार ग्वालियर में 15 से 19 दिसंबर तक तानसेन समारोह आयोजित होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जन कल्याण पर्व के आयोजन के लिए मंत्रियों की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय समितियां बनाई हैं। किसानों के लिए गठित समिति का अध्यक्ष किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री एदल सिंह कंसाना को बनाया गया है। युवाओं से जुड़ी समिति का अध्यक्ष नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को बनाया गया है। गरीब कल्याण से जुड़ी समिति का अध्यक्ष पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल को और महिलाओं से जुड़ी समिति का अध्यक्ष महिला बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया को बनाया गया है। ये सभी मंत्री पूरे प्रदेश में कार्यक्रमों के संबंध में रूपरेखा तैयार कर उसका क्रियान्वयन कराएंगे। 11 से 26 दिसम्बर तक मनाया जाना है जन कल्याण पर्व जन कल्याण उत्सव प्रदेश के सभी जिलों में 11 दिसम्बर से 26 दिसम्बर तक मनाया जाना है। मुख्यमंत्री डॉ यादव वीसी के माध्यम से एक साल का कार्यकाल पूरा होने पर सभी जिलों में महिला, किसान, युवा और गरीब कल्याण सहित विकास से जुड़े अलग-अलग कार्यक्रमों के बारे में अफसरों को निर्देश देंगे।  

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