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सुशांत केस : जेल से रिहा हुईं रिया, ड्रग्स केस में 30 दिन बाद जेल से बाह, शर्तों के साथ जमानत

मुंबई . ड्रग्स मामले में गिरफ्तार एक्ट्रेस रिया चक्रवर्ती को बॉम्बे हाईकोर्ट से बुधवार को जमानत मिल गई। इसके बाद रिया शाम करीब साढ़े पांच बजे भायखला जेल से बाहर आईं। इससे पहले, सेशन कोर्ट ने मंगलवार को रिया की ज्यूडिशियल कस्टडी 14 दिन और यानी 20 अक्टूबर तक बढ़ा दी थी। एक महीने से जेल में बंद रिया ने लोअर कोर्ट से 2 बार अर्जी खारिज होने के बाद हाईकोर्ट में अपील की थी। हाईकोर्ट ने कहा कि रिया ड्रग डीलर्स का हिस्सा नहीं हैं। उन्होंने अपने या किसी और के फायदे के लिए किसी भी तरह से ड्रग्स को आगे नहीं बढ़ाया है। फिलहाल ऐसा कोई प्रमाण नहीं है, जिसके आधार पर यह माना जाए कि जमानत मिलने के बाद वह कोई अपराध कर सकती हैं। हालांकि, रिया के भाई शोविक चक्रवर्ती और एक अन्य आरोपी अब्दुल बासित को जमानत नहीं दी गई है। फिलहाल उन्हें जेल में ही रहना होगा। वहीं, सैम्युल मिरांडा और दीपेश सावंत को जमानत मिल गई है। सुशांत सिंह राजपूत की मौत की जांच के सिलसिले में सामने आए ड्रग्स कनेक्शन में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने 8 सितंबर को रिया को गिरफ्तार किया था। NCB ने दावा किया कि ‘सुशांत सिंह राजपूत की मौत के पूरे मामले को देखने में यह सामने आता है कि रिया यह बात जानती थी कि सुशांत ड्रग्स का सेवन करते थे और इस दौरान न केवल उन्हें ऐसा करने के लिए बढ़ावा दिया गया बल्कि उनसे पूरी बात भी छिपाई गई।’ NCB ने रिया को शातिर अपराधी मानते हुए उसकी जमानत याचिका का विरोध किया और कहा कि उनके खिलाफ ऐसे कई सबूत मिले हैं, जिनसे पता चलता है कि वह ड्रग्स ट्रैफिकिंग में शामिल रही हैं। NCB ने यह स्पष्ट कर दिया है कि एक आपराधिक साजिश के तहत रिया ने ड्रग्स के लेन-देन के लिए अन्य आरोपियों का समर्थन किया, उन्हें ऐसा करने के लिए बढ़ावा दिया और पैसे से भी उनकी मदद कीं। रिया ने माना- मिरांडा और सावंत को ड्रग्स के पैसे दिए NCB के जोनल निदेशक समीर वानखेड़े द्वारा बॉम्बे हाईकोर्ट में दायर हलफनामे में यह कहा है कि रिया ने एक बयान में कहा है कि उन्होंने सैम्युल मिरांडा और दीपेश सावंत को ड्रग्स के पैसे चुकाए हैं, जो बाद में सुशांत को दी गई। यह साफ है कि जिन ड्रग्स के लिए पैसे चुकाए गए थे, वे निजी उपयोग के लिए नहीं थे बल्कि ऐसा किसी और को इनकी आपूर्ति कराए जाने के लिए गया और यह एनडीपीएस 1985 की धारा 27A के तहत आता है। रिया छूटी तो सबूत नष्ट होंगे: NCB NCB ने एक हलफनामे में यह भी कहा था कि जांच महत्वपूर्ण चरण में है और अगर इस वक्त रिया को जमानत मिल जाती है, तो इससे छानबीन बाधित होगी। NCB ने यह भी कहा कि रिया मादक पदार्थों की तस्करी में शामिल रही है, यह साबित करने के लिए कई सबूत हैं। वह ड्रग पहुंचाने के काम में न सिर्फ मदद देती थीं बल्कि क्रेडिट कार्ड, नकद और ऐसे ही कई माध्यमों से इनका भुगतान भी करती थीं। रिया के वकील की दलील- सुशांत पहले से ड्रग्स लेते थे वहीं, एक्ट्रेस के वकील सतीश मानशिंदे ने अदालत में कहा था कि रिया के सुशांत की लाइफ में आने से पहले से ही वे ड्रग्स लेते थे। सुशांत को ड्रग्स की लत थी। यह बात 3 एक्ट्रेस कह चुकी हैं। रिया की तरह ही श्रद्धा कपूर और सारा अली खान ने भी कहा है कि सुशांत 2019 से पहले से ड्रग्स लिया करते थे। बेंच ने इन शर्तों पर रिया को जमानत दी। – रिया को जेल से रिहा होने के बाद 10 दिन तक करीबी पुलिस स्टेशन में हर रोज सुबह 11 बजे हाजिरी देनी होगी। – एक लाख रुपए मुचलका देना होगा। – पासपोर्ट जमा करवाना होगा। – कोर्ट की अनुमति के बिना विदेश यात्रा नहीं कर सकेंगी। – यदि वे ग्रेटर मुंबई से भी बाहर जाती हैं, तो उन्हें जांच अधिकारी को इस बारे में पहले सूचना देनी होगी। – महीने के पहले सोमवार को रिया को एनसीबी के दफ्तर में भी हाजिरी देनी होगी। यह छह महीने तक करना होगा। – इस केस से जुड़े किसी भी गवाह से मिलने की अनुमति नहीं होगी। – अदालत की हर सुनवाई पर रिया को हर हाल में मौजूद रहना होगा। – वे किसी भी तरह से जांच प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास नहीं करेंगी।

सुशांत केस को नेताओं-मीडिया ने फायदे के लिए बनाया ‘मर्डर’ : स्‍टडी में खुलासा

मुंबई। बॉलिवुड ऐक्टर सुशांत सिंह राजपूत के मामले में ‘मर्डर थ्योरी’ को कुछ नेताओं, पत्रकारों और मीडिया हाउसेस ने अपने फायदे के लिए इस्तेमाल किया हो सकता है। इस बात का खुलासा ट्वीट्स, यूट्यूब वीडियोज और ट्रेंड्स पर बेस्‍ड एक अनूठी अमेरिका स्टडी में हुआ है। एक मीडिया रिपोर्ट मुताबिक, मिशिगन यूनिवर्सिटी में एक असोसिएट प्रफेसर के नेतृत्व में रिसर्चर्स की एक टीम ने यह स्टडी की है। यह स्टडी दिखाती है कि जो कॉन्‍टेंट बिल्कुल निराधार मर्डर थ्योरीज को प्रमोट कर रहा था, उन्हें सूइसाइड थ्योरी से कहीं ज्यादा ट्रैक्शन मिला। तमाम यूट्यूब वीडियोज और ट्वीट्स का विश्‍लेषण प्री-प्रिंट स्टडी बताती है कि राजनेताओं के अकाउंट्स सुशांत केस में नरेटिव को आत्‍महत्‍या से हत्‍या में बदलने में अहम रहे। रिसर्च टीम ने करीब 7 हजार यूट्यूब वीडियोज और 10 हजार ट्वीट्स का विश्लेषण किया। ये सभी करीब 2 हजार पत्रकारों व मीडिया हाउसेस और 1,200 नेताओं से जुड़े थे। सूइसाइड की जगह मर्डर के तौर पर किया गया पेश स्टडी में इशारा किया गया है कि खासतौर पर राजनेता शुरुआती स्‍टेज में केस को ‘सूइसाइड’ की जगह ‘मर्डर’ के तौर पर पेश कर मामले को अलग मोड़ देने की वजह बने। इसको बाद में मीडिया ने फॉलो किया। स्टडी में भावनात्मक विश्लेषण बताता है कि पॉलिटिकल अकाउंट्स ने जुलाई के मध्य में सीबीआई जांच की मांग को लेकर समन्वित कोशिशें शुरू कीं जबकि पत्रकारों ने अगस्त की शुरुआत में महाराष्ट्र सरकार विरोधी नरेटिव को पूरी ताकत लगाकर आगे बढ़ाया। इन लोगों को बनाया गया निशाना स्टडी में यह भी पाया गया कि रिया चक्रवर्ती, दिशा सालियन और सलमान खान इस पूरे केस में दुष्प्रचार अभियान के सबसे ज्यादा निशाने पर रहे। असोसिएट प्रफेसर जॉयजीत पाल के मुताबिक, इस बात की बहुत कम संभावना थी कि ऑनलाइन एंगेजमेंट ऑर्गेनिक था। पाल ने कहा, ‘पूरे सोशल मीडिया स्पेस को इतने प्रभावी रूप से हथियारबंद किया कि आप किसी भी ऐसे मुद्दे को, जिसमें भावनात्मक पहलू हो, उसे किसी ऐसी बात में बदल सकते हैं जिससे पूरा देश चिपका रहे।’ डेटा को लेकर विसंगतियां पाल ने कहा कि सुशांत केस आज के भारत में एक बहुत ही महत्वपूर्ण कहानी है जो फिल्‍म इंडस्‍ट्री में आउटसाइडर होने की वजह से पैर जमाने के लिए काफी मेहनत करता है। इस कहानी को बहुत सारा ऑर्गेनिक रिस्पॉन्स भी मिला। पाल कहते हैं, ‘डेटा को लेकर बहुत सी विसंगतियां हैं लेकिन उसके भीतर एक पैटर्न है। आंकड़ों की दृष्टि से खासा अंतर है कि कितना एक पार्टी मर्डर के बारे में बात करती है और कितना दूसरी पार्टी थ्योरी के बारे में। डेटा के इतने स्तर पर इसके आर्गेनिक होने की बहुत कम संभावना है।’ मीडिया चैनल्स को मिला आर्थिक लाभ पाल कहते हैं, ‘जब नेताओं या मीडिया हाउसों ने सुशांत के बारे में बात की तो इसे ज्‍यादा एंगेजमेंट मिला। उसकी तुलना में जब उन्होंने किसी और विषय पर बात की तो वैसा एंगेजमेंट देखने को नहीं मिला। मीडिया चैनल्स जिन्होंने सुशांत की स्टोरी का प्रसार किया, उन्हें आर्थिक लाभ भी मिला।’

MP : बीजेपी की फायर ब्रांड नेत्री उमाभारती को जवाब देने साध्वी राम सिया भारती कांग्रेस प्रत्याशी घोषित

भोपाल। छतरपुर जिले की बड़ामलहरा सीट से कांग्रेस पार्टी ने भारतीय जनता पार्टी की फायर ब्रांड नेता उमा भारती को सीधी चुनौती दी है। कमलनाथ ने इस क्षेत्र में साध्वी राम सिया भारती को कांग्रेस का अधिकृत प्रत्याशी घोषित किया है। बताना जरूरी है कि उमा भारती टीकमगढ़ जिले से आतीं हैं। छतरपुर-टीकमगढ़ जिले में उन्हें निर्विवाद रूप से एकमात्र नेता माना जाता है। मध्यप्रदेश में केवल छतरपुर-टीकमगढ़ जिला ही क्या, आसपास के कई जिलों में उमा भारती को लोधी समाज का सबसे बड़ा नेता माना जाता है। कांग्रेस पार्टी ने साध्वी राम सिया भारती को टिकट देकर लोधी समाज में एक नए नेता का उदय कर दिया है। साध्वी राम सिया भारती भी लोधी समाज से आतीं हैं। पिछले दिनों बड़ामलहरा क्षेत्र में उमा भारती ने एक धार्मिक आयोजन किया था परंतु कार्यक्रम में जनता का उत्साह नजर नहीं आया। कमलनाथ ने अपनी तरफ से कंप्यूटर बाबा को धर्म ध्वजा लेकर भेजा था परंतु वह भी कांग्रेस का झंडा लहराते हुए लौटाए। कुल मिलाकर जनता ने धर्म के नाम पर राजनीति से इनकार कर दिया था, इसके बावजूद कमलनाथ ने साध्वी राम सिया भारती को टिकट दिया है। नतीजा जो भी हो लेकिन चुनावी दंगल में दोनों तरफ भगवा के बीच संघर्ष चर्चा का विषय अवश्य रहेगा।

MP : अशोक गहलोत, सचिन पायलट, भूपेश बघेल और उद्धव ठाकरे आएंगे प्रचार के लिए

भोपाल. मध्य प्रदेश में 28 विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव में बीजेपी को हराने के लिए कमलनाथ ने अब सीएम 11 सीट का प्लान तैयार किया है. कांग्रेस की जीत के लिए तीन राज्यों के नेता मोर्चा संभालेंगे. राजस्थान से अशोक गहलोत और सचिन पायलट, छत्तीसगढ़ से भूपेश बघेल और महाराष्ट्र से उद्धव ठाकरे पार्टी प्रत्याशियों के प्रचार के लिए आएंगे. मध्य प्रदेश विधान सभा उप चुनाव में कांग्रेस पूरे दमखम से उतरने के लिए तैयार है. वो अपनी पार्टी और सहयोगी दलों से भी सहयोग ले रही है. पीसीसी चीफ और पूर्व सीएम कमलनाथ ने प्लान 3 तैयार किया है. इसमें पड़ोसी और दूसरे राज्यों में कांग्रेस और कांग्रेस के समर्थन वाली सरकारों के नेता उसके सहयोग के लिए आ रहे हैं. महाराष्ट सीमा से लगी विधानसभा सीटों पर शिवसेना प्रचार की कमान संभालेगी. महाराष्ट्र में कांग्रेस के गठबंधन वाली उद्धव ठाकरे सरकार के मंत्री नेपानगर सीट पर कांग्रेस की जीत के लिए मोर्चा संभालेंगे. तो वहीं राजस्थान और छत्तीसगढ़ सीमा से लगी विधानसभा सीटों पर राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल प्रचार करेंगे. इन सीटों पर आएंगे पड़ोसी प्रदेश में 28 सीटों पर होने वाले उपचुनाव में से 11 सीटें ऐसी हैं जो मध्य प्रदेश से लगे पड़ोसी राज्यों की सीमा से जुड़ी हुई हैं. इनमें मुरैना की सुमावली और अंबाह सीट, दतिया की भांडेर सीट, शिवपुरी की करेरा और पोहरी, गुना की बमोरी, अशोकनगर की मुंगावली, अनूपपुर की अनूपपुर सीट, आगर मालवा की आगर सीट, बुरहानपुर की नेपानगर सीट और मंदसौर की सुवासरा सीट शामिल है. यही कारण है कांग्रेस पार्टी ने अब कांग्रेस शासित राज्यों के नेताओं या कहें मुख्यमंत्रियों की मदद लेना शुरू कर दिया है. उद्धव,गहलोत, बघेल और सचिन बुरहानपुर की नेपानगर सीट महाराष्ट्र सीमा से लगी हुई है. यहां पर मराठी भाषा बोलने और समझने वालों की संख्या ज्यादा है. ऐसे में कांग्रेस पार्टी का यहां महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार और शिवसेना की मदद से सीट जीतने का प्लान है. वहीं छत्तीसगढ़ राज्य से लगी अनूपपुर विधानसभा सीट पर भी कांग्रेस जीत का फॉर्मूला तलाश रही है. नेपानगर और अनूपपुर दोनों सीटें अभी कांग्रेस के कब्जे में थीं. यहां से कांग्रेस विधायक पार्टी छोड़ बीजेपी से जा मिले. राजस्थान सीमा से लगे सुमावली, पोहरी, बमोरी, आगर और सुवासरा सीट पर अशोक गहलोत चुनावी कमान संभालेंगे. ग्वालियर चंबल इलाके में उत्तर प्रदेश से लगी विधानसभा सीटों पर कांग्रेस सचिन पायलट के जरिए वोटरों को रिझाने की कोशिश करेगी. ये वो इलाका है जहां गुर्जर वोट काफी हैं और सचिन पायलट उन्हें पार्टी के पक्ष में ला सकते हैं.

MP : कांग्रेस में कलह, पूर्व मंत्री व वरिष्ठ नेता डॉ गोविंद सिंह ने पार्टी की कार्यशैली पर सवाल उठाया

भोपाल. कांग्रेस पार्टी गोविंद सिंह ने एक बार फिर पार्टी की कार्यशैली पर सवाल उठाया है. पूर्व मंत्री और कांग्रेस विधायक डॉ गोविंद सिंह ने कहा कि पार्टी के अंदर लोकतंत्र नहीं है. डॉक्टर गोविंद सिंह ने कहा कि कई सालों से देख रहा हूं कि कभी चुनाव समिति की बैठक होती ही नहीं है. पार्टी के मुद्दों को लेकर किसी बैठक में बड़े फैसले नहीं होते. पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के पास ही सभी तरीके के अधिकार होते हैं. और वही अपने स्तर पर फैसला लेते हैं. उम्मीदवारों के चयन को लेकर मचा है घमासान दरअसल कांग्रेस पार्टी के अंदर 28 विधानसभा सीटों पर उम्मीदवारों के चयन को लेकर घमासान मचा हुआ है. सबसे ज्यादा मुश्किल मुरैना और मेहगांव सीट को लेकर है. बताया जा रहा है कि मेहगांव सीट से डॉक्टर गोविंद सिंह के भांजे राहुल सिंह की दावेदारी के कारण सीट पर फैसला नहीं हो पा रहा है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमल नाथ यह साफ कर चुके हैं कि निजी एजेंसी से कराए गए सर्वे के आधार पर ही जिताऊ उम्मीदवार को चुनाव में टिकट दिया जा रहा है. और पार्टी की इस नई व्यवस्था पर ही डॉक्टर गोविंद सिंह ने आपत्ति जता दी है. डॉक्टर गोविंद सिंह ने उम्मीदवार के चयन की प्रक्रिया के लिए हुए सर्वे की रिपोर्ट पर भी सवाल खड़े किए हैं. डॉक्टर गोविंद सिंह के मुताबिक उम्मीदवारों के चयन को लेकर पार्टी के कराए गए सर्वे औपचारिक हैं, जबकि इसमें स्थानीय नेता और कार्यकर्ताओं की राय ली जाना चाहिए. बीजेपी ने मिलाया सुर वहीं गोविंद सिंह के सवाल उठाने पर बीजेपी बिना देरी किए पूर्व मंत्री के समर्थन में आगे आ गई. मंत्री भूपेंद्र सिंह ने कहा कि कांग्रेस पार्टी के अंदर राष्ट्रीय स्तर से लेकर प्रदेश इकाई तक में लोकतंत्र को खत्म कर दिया गया है. और व्यक्ति विशेष पार्टी के सभी बड़े फैसले करते हैं. डॉक्टर गोविंद सिंह का बयान यह साफ जाहिर करता है कि कांग्रेस पार्टी के अंदर आंतरिक लोकतंत्र पूरी तरीके से खत्म हो गया है.

जो MP : सरकारी अधिकारी-कर्मचारियों गड़बड़ कर रहे हैं, उन्हें सबक सिखाएंगे : जीतू पटवारी

इंदौर। कांग्रेस विधायक जीतू पटवारी, सांवेर से प्रत्याशी प्रेमचंद गुड्डू डीआईजी से मिलने पहुंचे। उनका आरोप था कि भाजपा द्वारा कहीं ना कहीं उपचुनाव को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। प्रशासन सरकार की पूरी तरह मदद कर रहा है। हम उन सभी सरकारी अधिकारी-कर्मचारियों के नाम लिख रहे हैं जो गड़बड़ कर रहे हैं, इन सभी को एक-एक कर सजा मिलेगी। पटवारी का कहना है कि सरकारी तंत्र नाैकराें की तरह काम कर रहा है। उनका कहना है कि उक्त मेडिकल काॅलेज कई मामलों में संदिग्ध है। उनके ऑनर कई बार जेल जा चुके हैं। कोविड को लेकर भी कई शिकायतें मिली हैं। जिसमें वे अवैध तरीके से मरीजों को भर्ती करते हैं और सरकारी लाभ लेते हैं। इसमें स्थानीय मंत्री की भी मिलीभगत है। हमारे पास इसके पूरे सबूत हैं। इस चुनाव में सरकारी तंत्र का पूरी तरह से गलत इस्तेमाल हो रहा है। रविवार को जो सरकारी तंत्र वहां इस काम के लिए बैठा था, हमने मामले में एफआईआर दर्ज करवाने आए हैं। पटवारी ने चेतावनी देते हुए कहा कि मैं सरकारी कर्मचारियों को फिर से आगाह करना चाहता हूं कि एक भी गलत काम करते पकड़ाया तो उसे बख्शा नहीं जाएगा। हम सबके नाम लिखे जा रहे हैं। जो अपनी नौकरी और संविधान के विपरीत काम करेगा, उसे सजा मिलेगी। सरकार तो बनेगी, पर कोर्ट से भी सजा दिलाने में प्रेमचंद गुड्डू सक्षम हैं। सिलावट फिर कोई चुनाव नहीं लड़ पाएंगे पटवारी का कहना है कि भाजपा के पास कुछ कहने को है नहीं। उन्होंने लोकतंत्र की हत्या, वोट बेचकर सरकार गिराई और दूसरे की बनाई। जो रुपए उन्होंने लिए हैं, उसे बांटकर चुनाव जीतना चाहते हैं। जहां-जहां गड़बड़ कर रहे हैं, वहां हम दो-दो हाथ करेंगे। जनता सब जान चुकी है। तुलसी सिलावट आगे कोई चुनाव नहीं लड़ पाएंगे, जनता उनकी ऐसी हालत करके छोड़ देगी। वहीं, गुड्डू ने यह भी कहा कि भाजपा के कई वीडियो हमारे पास हैं, जो समय आने पर वायरल हो हो जाएंगे। यह है मामला रविवार को कांग्रेस प्रत्याशी प्रेमचंद गुड्डू निजी मेडिकल कॉलेज पंहुचे। कांग्रेस ने दावा किया कि यहां सांवेर विधानसभा क्षेत्र के बीएलओ, आरआई और पटवारी बैठकर मतदाता सूची में छह हजार फर्जी नाम जोड़ रहे थे। यहां मतदाता सूची में जोड़े जाने वाले नामों का फर्जी सत्यापन चल रहा था। दावा है कि गुड्डू को यह सूचना सुबह मिली। इसके बाद वे अपने साथियों के साथ कॉलेज पहुंच गए। यहां एक हॉल में 20 बीएलओ, आरआई और पटवारी बैठे थे। इसके साथ ही यहां करीब छह हजार मतदाता सूची में नाम जोड़ने के आवेदन भी पाए गए।

MP: खाद्य मंत्री बिसाहूलाल सिंह का लोगों को 100-100 के नोट बांटते वीडियो वायरल

उपचुनाव जीतने के लिए रुपए बांटते हुए BJP नेता की तस्‍वीर वायरल, सियासत गर्मायी भोपाल. भारतीय जनता पार्टी के एक नेता की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है. तस्वीर में बीजेपी नेता को रुपए के बंडलों के साथ देखा जा सकता ह। कांग्रेस ने कहा कि चुनाव को प्रभावित करने के लिए मंत्री बिसाहूलाल सिंह नोट बांट रहे हैं. उन्होंने चुनाव आयोग से इस पूरे मामले को संज्ञान में लेकर कार्रवाई करने की मांग की है. साथ ही कांग्रेस पार्टी ने बिसाहूलाल सिंह को मंत्रिमंडल मंत्री पद से हटाने की मांग की है. कांग्रेस ने कहा है कि चुनाव आयोग को वायरल फोटो की पूरी निष्पक्ष जांच करा कर जरूरी कार्रवाई करना चाहिए. दरअसल, प्रदेश के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री बिसाहूलाल सिंह का एक फोटो वायरल हो रहा है, जिसमें मंत्री जी हाथ में 100 के नोट की गड्डी के साथ दिख रहे हैं. खास बात यह है कि वे सौ रुपए बांटते हुए नजर भी आ रहे हैं. प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने वायरल फोटो को फेक करार दिया है. नरोत्तम मिश्रा ने कहा है कि कांग्रेस एडिटेड फोटो और वीडियो के सहारे नेताओं की छवि खराब करने की कोशिश में है. गृह मंत्री के मुताबिक, लंबे समय से राजनीति कर रहे और विधायक रह चुके मंत्री बिसाहूलाल सिंह की छवि साफ है, लेकिन उनकी छवि को खराब करने के लिए इस तरीके से एडिटेड फोटो बनाकर वायरल कराए जा रहे हैं. मंत्री बिसाहूलाल सिंह के वायरल फोटो को लेकर प्रदेश की सियासत चरम पर है, जिसके जल्द थमने के आसार नहीं हैं.

MP : लैपटॉप योजना में भ्रष्टाचार के आरोप, 20 हजार का लैपटॉप 50 हजार रुपए में खरीदेगी शिवराज सरकार

भोपाल। कांग्रेस ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के मीडिया समन्वयक ने एक बयान में कहा कि अब लैपटॉप के नाम पर शिवराज सरकार बड़ा फर्जीवाड़ा करने जा रही है। इसकी खरीदी प्रक्रिया में जमकर अनियमितता है और इसको लेकर अजीबो-गरीब शर्त रखी गई है। सरकार 10 साल पुराने लैपटॉप खरीदने जा रही है। इनकी कीमत 20 हजार रुपए है, लेकिन सरकार यह 50 हजार रुपए में खरीदेगी। प्रदेश के सभी पटवारियों को सरकार ने लैपटाॅप देने की योजना बनाई है। जिसके तहत कुछ शर्तें भी तय की गई हैं। बाकायदा विभागीय आदेश जारी कर निर्देश दिया गया है कि 6वें जेनरेशन के प्रोसेसर वाला खरीदी लैपटॉप मान्य होगा। आश्चर्य की बात यह है कि इसकी अनुमानित कीमत सिर्फ 20 हजार है और सरकार इसके लिए 50 हजार का भुगतान करेगी। वर्ष 2012-2013 में इस जेनरेशन के लैपटॉप बनते थे। अब यह लैपटॉप कंपनियों ने बनाना बंद कर दिया है। राजस्व विभाग ने टेंडर जारी किए 29 सितंबर को राजस्व विभाग ने आदेश जारी कर लैपटाॅप खरीदी की शर्तें तय की हैं। जिसमें कहा गया है कि 6वें जेनरेशन के प्रोसेसर वाला लैपटाॅप या इसके समकक्ष मान्य है, जो अब बंद हो चुके हैं। मजे की बात है कि 8-10 साल पुराने लैपटाॅप की देखरेख भी 7 साल तय की गई है। यानि वर्षों पुराने प्रोसेसर के लैपटाॅप वर्ष 2020 में खरीदे जाएंगे और उनकी उम्र 7 सात तक वैध रहेगी। जबकि मौजूदा समय पर आई-9 प्रोसेसर के लैपटॉप बाजार में बिक रहे हैं। खास बात है कि जैम के जरिए लैपटॉप खरीदा जाना था। मगर सरकार ने पटवारियों को खुद ही खरीदने के लिए कहा है। जानकारों का कहना है कि आई-5 के लैपटाप बाजार में उपलब्ध नहीं है। ऐसे में पुराने ही लैपटॉप की खरीदी होगी और भुगतान 50 हजार का।

MP : डबरा में बीजेपी कार्यकर्ता मंत्री इमरती देवी से खफा, न प्रचार करेंगे और न वोट देंगे

ग्वालियर। डबरा विधानसभा में सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल किया गया है। इस वीडियो में शिवराज सिंह सरकार के राज्य मंत्री कुछ भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ बातचीत करते हुए दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता डबरा सीट से भाजपा के प्रत्याशी इमरती देवी का विरोध करते हुए नजर आ रहे हैं। वीडियो सही है या नहीं, कब का है और कहां का है, ये स्पष्ट नहीं हुआ था परंतु वायरल वीडियो में कार्यकर्ता कह रहे हैं कि आप इमरती देवी के लिए प्रचार करने आए हैं, लेकिन हम उन्हें वोट नहीं देंगे क्योंकि इमरती देवी पैसे लेकर मंत्री बन गई, उन्हें जनता से कोई लेना-देना नहीं है। मध्यप्रदेश विधानसभा उपचुनाव 2020 में मंत्री इमरती देवी के कई वीडियो वायरल हो चुके हैं। एक वीडियो में वह लोगों से कह रही है कि यदि मुझे अच्छे वोटों से जीता दिया तो मैं उप मुख्यमंत्री बन जाऊंगी। एक अन्य वीडियो में जातिवाद की बात करती हुई नजर आ रही है। तीसरे वीडियो में बता रही है कि यदि मैं चुनाव हार भी गई तभी मंत्री बनी रहूंगी।

Mp : कैलाश विजयवर्गीय बोले – सिंधिया के भाजपा में शामिल होने पर भाजपा कार्यकर्ताओं में था असंतोष

भोपाल। अपने बेबाक बयानों के लिए चर्चा में रहने वाले भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बड़ा बयान दिया है। विजयवर्गीय ने माना है, कि ज्योतिरादित्य सिंधिया के भाजपा में शामिल होने पर भाजपा कार्यकर्ताओं में असंतोष था। लेकिन लंबा वक्त मिलने की वजह से अब ये अंसतोष, संतोष में बदल में चुका है। वहीं,विजयवर्गीय ने पूर्व मंत्री दीपक जोशी के भोपाल में किए गए शक्ती प्रदर्शन पर चुटकी लेते हुए कहा कि उन्हें संगठन ने ही कहा था कि वे अपने समर्थकों के साथ भोपाल जाए। क्योंकि ये पार्टी के हित में था। पश्चिम बंगाल में भाजपा के प्रभारी की भी भूमिका रहे विजयवर्गीय ने दावा किया है, कि ममता बैनर्जी सरकार आगामी चुनाव में 100 से ज्यादा सीट नहीं जीत पाएंगी। क्योंकि भाजपा के लिए पहले देश आता बाद में दल। लेकिन अन्य दल पहले खुद का सोचते और बाद में देश का। अकाली दल भी इसी दबाव की वजह के एनडीए से अलग हुआ है। कृषि बिल पर केवल भ्रम फैलाया जा रहा है। इसके अलावा भाजपा महामंत्री ने हाथरस में घटना को लेकर खेद जताया है। हालाकि,विजयवर्गीय ने योगी सरकार की पैरवी करते हुए कहा कि शासन और प्रशासन दोनों अलग अलग चीजें है। योगी शासन दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए कटीबद्ध है। लेकिन कभी कभी प्रशासन गलती कर देता है, प्रशासन की गतलियों की वजह से योगी सरकार के शासन को बदनाम करना गलत है। अब ये मामला सीबीआई के पास जाने वाला है।

MP : सिंधिया के सिपाह सलाहकार ही उपचुनाव में बढ़ाएंगे मुश्किलें, जानें क्यों ?

भोपाल. मध्य प्रदेश के 28 विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव को लेकर रण सज चुका है. कांग्रेस के 24 तो बीजेपी के अनौपचारिक तरीके से 25 उम्मीदवार घोषित हो चुके हैं. लेकिन सबसे दिलचस्प मुकाबला ग्वालियर चंबल की 16 विधानसभा सीट पर होने वाला है. मुकाबला इस लिहाज से भी दिलचस्प होगा कि इस बार आठ विधानसभा सीटों पर सिंधिया समर्थक आमने-सामने होंगे. दरअसल, कांग्रेस पार्टी ने ग्वालियर चंबल की जिन सीटों पर अब तक अपने उम्मीदवारों के नाम का ऐलान किया है, उनमें से आठ चेहरे ऐसे हैं जो कभी सिंधिया के कट्टर समर्थक थे. लेकिन सिंधिया के दल बदलने के बाद सिंधिया के यह समर्थक कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में नहीं गए, जिसके इनाम पर कमलनाथ ने आठ सीटों पर सिंधिया समर्थक को ही कांग्रेस का उम्मीदवार घोषित कर दिया है. कांग्रेस में जिन 8 सीटों पर सिंधिया समर्थकों को चुनाव मैदान में उतारा है, उनमें दिमनी से रविंद्र सिंह तोमर, अंबाह से सत्य प्रकाश सखवार, ग्वालियर से सुनील शर्मा, डबरा से सुरेश राजे, अशोकनगर से आशा दोहरे, जोरा से पंकज उपाध्याय, पोहरी से हरीवल्लभ शुक्ला और मुंगावली से कन्हैया राम लोधी शामिल हैं. बीजेपी ने कसा तंज वहीं, ग्वालियर चंबल की 8 सीटों पर सिंधिया समर्थकों को चुनाव मैदान में उतारने के कांग्रेस के ऐलान पर बीजेपी ने तंज कसा है. प्रदेश के कैबिनेट मिनिस्टर अरविंद सिंह भदोरिया ने कहा है कि कांग्रेस के पास उपचुनाव में उतारने के लिए उम्मीदवार नहीं है और यही कारण है कि इधर-उधर से तलाश कर कांग्रेस प्रत्याशी तय कर रही है. वहीं, आठ सीटों पर सिंधिया समर्थकों को चुनाव मैदान में उतारने पर कांग्रेस ने कहा है कि जिनका डीएनए कांग्रेस का है, उन्हे ही कांग्रेस का उम्मीदवार घोषित किया गया है. सिंधिया का साथ नहीं देने का फैसला किया पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने कहा है कि सिंधिया ने दल बदल कर बीजेपी का भगवा रंग ओड़ा है, लेकिन कांग्रेस की मूल विचारधारा से जुड़े लोगों ने सिंधिया का साथ नहीं देने का फैसला किया और मूल कांग्रेसियों को ही उपचुनाव में पार्टी ने टिकट देने का काम किया है. बहरहाल, इस बार का उपचुनाव बेहद दिलचस्प रहने वाला है. कभी ग्वालियर, चंबल इलाके में सिंधिया के समर्थन में कांग्रेस का झंडा उठाने वाले चेहरे अब सिंधिया के खिलाफ उपचुनाव में मैदान में हैं. यानी कि ग्वालियर चंबल की 8 सीटों पर सिंधिया के पुराने कांग्रेसी समर्थक और सिंधिया के मौजूदा भाजपाई समर्थकों के बीच मुकाबला होगा.

कांग्रेस से भाजपा में आए नारायण पटेल बोले- वोट डालते समय केवल पंजा दिखना चाहिए

खंडवा। मध्यप्रदेश खंडवा के मंधाता से संभावित भाजपा विधानसभा प्रत्याशी नारायण पटेल की जुबान फिसल गई। एक सभा को संबोधित करते उनसे निकल गया कि कांग्रेस को दिल खोलकर वोट दें। वोट देते समय कांग्रेस का पंजा दिखना चाहिए। यह सुनते ही सभा में जमकर ठहाके लगने लगे। हालांकि उन्हें तत्काल ही अपनी गलती का एहसास हो गया और उन्होंने भूल सुधार कर ली, लेकिन कैमरों में पकड़े गए। उसके बाद से उनका यह वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। बोले- अरे माफी चाहता हूं हाथ का पंजा दिखाते हुए बोले- जैसे ही आप मतदान करने जाएं, तो उसमें सीधे पंजा ही दिखना चाहिए। कांग्रेस को ही वोट डालना है। लोग जोर-जोर से हंसने लगे। इतना कहते ही उन्हें अपनी गलती का एहसास हो गया और उन्होंने बगल में बैठक एक व्यक्ति से बात की। अरे पंजा नहीं फूल दिखना चाहिए। वह भी हंसते हुए बोले अरे अरे माफी चाहता हूं। गलती हो गई। पंजा नहीं फूल दिखना चाहिए। उन्होंने अपने दिमाग की तरफ हाथ करते हुए कहा अरे कंप्यूटर में फिट है क्या करें।

इंदौर में वोटर लिस्ट में फर्जीवाड़ा:इंडेक्स अस्पताल में बीएलओ फर्जी मतदाताओं के नाम सूची में जोड़ रहे थे, प्रेमचंद गुड्डू ने पकड़ा

इंदौर. मध्य प्रदेश में सभी उपचुनाव वाले जिलों में आदर्श आचार संहिता लगा दी गई है। दोनों ही दल प्रचार में लगे हैं। उप चुनाव में सबसे महत्वपूर्ण सीट इंदौर जिले की सांवेर विधानसभा मानी जा रही है। ऐसे में कांग्रेस प्रत्याशी प्रेमचंद गुड्डू भी पूरी ताकत से चुनाव में उतर गए हैं। प्रेमचंद गुड्डू ने रविवार को इंडेक्स मेडिकल काॅलेज पहुंचकर प्रशासनिक अधिकारी और बीजेपी के नेताओं पर नकली मतदाताओं के नाम सूची में जोड़ने का आरोप लगाया। गुड्डू ने कहा कि पटवारी और बीएलओ द्वारा चुनाव में बीजेपी को फायदा पहुंचाने के लिए करीब 850 फर्जी मतदाताओं को जोड़ने का काम कर रहे थे, जिन्हें उन्होंने रंगे हाथ पकड़ा है। पूरे मामले की शिकायत खुड़ैल थाने में की गई है। गुड्डू का आरोप है कि इंडेक्स हॉस्पिटल के अंदर फर्जी मतदाताओं को जोड़ने का काम चल रहा था। बीएलओ करीब दो हजार फर्जी मतदाताओं के नाम सूची में जोड़ रहे थे। गुड्डू ने बताया कि हमने उन्हें इंडेक्स कॉलेज में रंगे हाथों पकड़ा। उन्होंने बीजेपी और प्रशासन पर मतदाता सूची में हेरफेर करने का आरोप लगाया है। दरअसल, प्रेमचंद गुड्डू को सूचना मिली थी कि कॉलेज में अधिकारियों के साथ बैठकर बीजेपी नेता मतदाता सूची में फर्जी नाम जोड़ रहे हैं। गुड्डू ने मामले की शिकायत चुनाव आयोग और जिले के मुख्य निर्वाचन अधिकारी से करने की बात कही है।

शर्मनाक : दलित बच्चियों से रेप के मामले में देश में मध्य प्रदेश नंबर-1, छेड़छाड़ भी सबसे ज्यादा

भोपाल. मध्य प्रदेश के लिए नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के शर्मिंदा करने वाले आंकड़े सामने आए हैं. दलित बच्चियों से रेप , छेड़छाड़ के मामले में एमपी देश में पहले नंबर पर है. एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार दलित बच्चियों के साथ रेप और छेड़छाड़ की घटना में प्रदेश देश में नंबर वन है. ये खुलासा नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के 2019 आंकड़ों में हुआ है. 2019 में मध्य प्रदेश में दलित बच्चियों के साथ रेप की 214 घटनाएं हुई, दूसरे नंबर पर महाराष्ट्र, तीसरे नम्बर पर हरियाणा है. महाराष्ट्र में दलित बच्चियों के साथ रेप की 181 घटनाएं और हरियाणा में 101 घटनाएं हुईं. देशभर में दलित बच्चियों के साथ रेप की कुल 1116 घटनाएं हुईं. दलित बच्चियों से छेड़छाड़ के मामले में भी देश में नंबर वन एमपी है. प्रदेश में 114 दलित बच्चियों के साथ छेड़छाड़ की घटनाएं हुई. यूपी दूसरे, महाराष्ट्र तीसरे नंबर पर है. यूपी में बच्चियों के साथ छेड़छाड़ की घटनाएं 98 औऱ महाराष्ट्र में 81 घटनाएं हुईं. देशभर में दलित बच्चियों के साथ छेड़छाड़ की 437 घटनाएं हुईं. कमलनाथ सरकार ठहराया जिम्मेदार एनसीआरबी के आंकड़ों पर बीजेपी प्रवक्ता राकेश शर्मा का बयान जारी किया है. राकेश शर्मा ने दलित बच्चियों से रेप और छेड़छाड़ के मामलों में कमलनाथ सरकार को दोषी ठहराया है. उन्होंने कहा कि ये रिपोर्ट कमलनाथ सरकार के दौरान की है. सरकार ने दलितों आदिवासियों और किसान के लिए कुछ नहीं किया. कांग्रेस ने रेप की घटना में कमी का किया दावा एनसीआरबी की रिपोर्ट पर कांग्रेस मीडिया सेल के उपाध्यक्ष भूपेंद्र गुप्ता ने कहा कि कांग्रेस सरकार में रेप की घटनाएं 54 प्रतिशत कम हुई. एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार 2018 में रेप की घटना 5433 थी, जबकि 2019 में 2490 हुई। बीजेपी सरकार में महिलाओं पर ज्यादा अत्याचार होते थे, हमारी सरकार ने 15 महीने में इसमें कमी लाई. उन्होंने कहा कि बीजेपी के नेता पूरी रिपोर्ट नहीं पड़ते हैं,सिर्फ रिपोर्ट के एक-दो पन्ने हाथ में लेकर घूमते हैं.

कमलनाथ का शिवराज पर बड़ा हमला, कहा-बड़ा सौदा छिपता नहीं, 15 साल का मांगा हिसाब

हाटपिपल्या। मध्य प्रदेश में उप चुनाव की सरगर्मियाें से गरमाये सियासी पारे को पूर्व मुख्यमंत्री और पीसीसी चीफ कमलनाथ ने शनिवार को और गरमा दिया। कमलनाथ ने हाटपिपल्या में चुनावी सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि ‘ये आम चुनाव नहीं हैं, ये उप चुनाव भी नहीं हैं। …इन उप चुनाव में हम घसीटे गये हैं।’ यही नहीं कमलनाथ ने यहां तक कहा कि, छोटा सौदा तो छिप जाता है लेकिन बड़ा सौदा छिपता नहीं है। आप समझ जाइये कैसे सौदा किया। और शिवराज जी अब आकर मेरे से 15 महीनों को हिसाब मांगते हैं।’ बिकाऊ राजनीति और बड़ा सौदा कमलनाथ ने अपने भाषण में बिकाऊ राजनीति और बड़े सौदे के नाम पर भी बीजेपी सरकार पर जमकर कटाक्ष किये। उन्होंने कहा कि, संविधान में ऐसा प्रावधान नहीं था। प्रावधान था कि कोई सांसद विधायक गुजर जाये तो उपचुनाव होता है। संविधान बनाने वालों ने ऐसा नहीं सोचा था कि इस देश में इस तरह की बिकाऊ राजनीति भी होगी। लेकिन इन उप चुनाव में हम घसीटे गये। छोटो सौदा तो छिप जाता है बड़ा सौदा छिपता नहीं है। आप समझ जाइये कैसे सौदा किया। ‘मैं देता हूं हिसाब, आप 15 साल का हिसाब दीजिये’ उन्होंने कहा, ‘शिवराज जी अब आकर मेरे से 15 महीनों को हिसाब मांगते हैं। मैं हिसाब देने को तैयार हूं। 15 महीने थे मेरे पास? ढाई महीने लोकसभा चुनाव और आचार संहिता में गये। एक महीना इनकी सौदे बाजी में गया। मेरे पास तो साढे़ ग्यारह महीने थे। आइये मैं आपको हिसाब देता हूं, आप 15 साल का हिसाब किताब दीजिये। आप 15 साल की बात नहीं करते मेरे से हिसाब मांगते हैं। उपचुनाव से पहले आरक्षण की मांग पर जल सत्याग्रह, जबलपुर में रजक समाज ने सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा

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