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महाराष्ट्र में चुनाव नतीजों के बाद राज ठाकरे को करारा झटका लगा, अब सिंबल और दर्जे पर तलवार

 मुंबई महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के नेता राज ठाकरे चुनाव नतीजों से पहले खुद को किंगमेकर के तौर पर देख रहे थे। उनका कहना था कि इलेक्शन के बाद भाजपा सरकार बनाएगी और देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री होंगे। इसके साथ ही हम भी राज्य की सरकार में किंगमेकर की भूमिका में रहेंगे। इसे उनकी महत्वाकांक्षा के तौर पर देखा गया था, लेकिन नतीजे आए तो राज ठाकरे को करारा झटका लगा। उनकी पार्टी को राज्य के चुनाव में एक भी सीट नहीं मिल सकी है। यह उनके लिए करारे झटके की तरह है और यहां तक कि क्षेत्रीय दल की मान्यता और पार्टी का सिंबल भी उनके हाथ से जा सकता है। उनकी पार्टी का सिंबल रेल इंजन रहा है, जो बीते तीन चुनावों में फेल साबित हुआ है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना जब नई बनी थी, तब उसने 2009 में हुए अपने पहले विधानसभा इलेक्शन में 13 सीटें हासिल की थीं। इसके बाद 2014 और 2019 में एक ही विधायक मनसे से चुना गया, लेकिन इस बार तो पार्टी का खाता भी नहीं खुला। राज ठाकरे के बेटे अमित ठाकरे खुद माहिम विधानसभा सीट से बुरी तरह हार गए। वह तीसरे नंबर पर आए हैं। पहले ही चुनाव में अमित ठाकरे को हार का सामना करना पड़ा। इस हार से राज ठाकरे भी सकते में हैं और नतीजों के बाद उन्होंने कहा भी यह मेरे लिए करारे झटके की तरह है। यही नहीं अब पार्टी के सामने वजूद का ही संकट खड़ा हो गया है। मनसे को राज्य के इलेक्शन में महज 1.55 फीसदी वोट ही मिल सका। नियम के जानकारों का कहना है कि अब मनसे का इलेक्शन सिंबल छिन जाएगा और उसे निर्दलियों को आवंटित होने वाले चिह्नों में से ही कोई चुनना होगा। नियम के अनुसार यदि किसी को दल को शून्य या एक सीट ही मिलती है और वोट 8 फीसदी रहता है तो उसे क्षेत्रीय दल का मिलता है। इसके साथ ही 2 सीट और 6 फीसदी वोट का नियम है। इसके अलावा तीन सीट पाने पर तीन फीसदी वोट को भी क्षेत्रीय दल की मान्यता के लिए आधार माना गया है। मनसे बीते तीन चुनावों में इनमें से किसी भी पैमाने पर खरी नहीं उतरी है।

महाराष्ट्र विधानसभा में करारी हार के बाद कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले का इस्तीफा

मुंबई महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में महा विकास अघाड़ी की हार के बाद नाना पटोले ने कथित तौर पर महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है। मौजूदा महायुति ने महाराष्ट्र चुनावों में 235 सीटें और 49.6 फीसदी वोट शेयर हासिल करते हुए बंपर जीत दर्ज की थी। वहीं महाविकास अघाड़ी 49 सीटों और 35.3 फीसदी वोटों के साथ बहुत पीछे रह गई। नाना पटोले सकोली विधानसभा सीट से महज 208 वोटों के अंतर से जीत पाए। इससे पहले नाना पटोले ने रविवार को कहा था कि वो यह सुनिश्चित करेंगे कि नवनिर्वाचित महायुति सरकार अपने चुनावी घोषणा-पत्र और भाषणों में राज्य की जनता से किए गए वादों को पूरा करे. कांग्रेस नेता ने यहां संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा था कि महायुति को मुख्यमंत्री मांझी लाडकी बहिन योजना के तहत महिलाओं के लिए मासिक भत्ता 1,500 रुपये से बढ़ाकर 2,100 रुपये करने का अपना वादा तुरंत पूरा करना चाहिए. कांग्रेस नेताओं का कहना है कि हम हार पर मंथन करेंगे। इस बीच पटोले ने इस्तीफा ही दे दिया है। कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि पार्टी में अंतर्कलह भी जारी है। यहां तक कि चुनाव में हारे पृथ्वीराज चव्हाण ने तो शनिवार को ही कह दिया था कि भाजपा और उसके सहयोगी दलों को लड़की बहिन योजना, आरएसएस के साथ और नेताओं की मेहनत का फायदा मिला है। वहीं अपनी लीडरशिप पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा था कि हमारा नेतृत्व ही कमजोर रहा। वहीं नाना पटोले ने कहा कि भले ही हमें विपक्ष में बैठने का जनादेश मिला है, लेकिन हम पूरी मेहनत से काम करेंगे। पटोले ने कहा कि हम सरकार को उसके वादे याद दिलाते रहेंगे कि जनता को फायदा मिले। महायुति ने राज्य विधानसभा चुनाव में 288 में से 230 सीट पर जीत दर्ज की है.  महायुति में शामिल भाजपा को 132, शिवसेना को 57 और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) को 41 सीट पर जीत मिली. दूसरी ओर, एमवीए को करारी हार मिली, जिसने कुल मिलाकर महज 46 सीट जीती हैं. एमवीए में शामिल राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) को 10, कांग्रेस को 16 और शिवसेना (यूबीटी) को 20 सीट पर जीत मिली. पटोले खुद भंडारा जिले के साकोली विधानसभा क्षेत्र से 208 मतों के अंतर से जीते. पटोले ने कहा था, ‘‘हम यह सुनिश्चित करेंगे कि महायुति सरकार चुनाव के दौरान किसानों से किए गए अपने वादों को पूरा करे.”

MVA में अस्थिरता बनी हुई है, छह विधायक अगले चार महीने में महायुति में शामिल होंगे

मुंबई महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में महायुति गठबंधन की प्रचंड जीत के बाद मुख्यमंत्री के नाम पर सस्पेंस बना हुआ है. इस बीच एनसीपी (अजित पवार) गुट के चीफ व्हिप ने दावा किया है कि विपक्षी महाविकास अघाड़ी गठबंधन में इस समय हलचल मची हुई है और अगले चार महीनों में कई विधायक पाला बदल सकते हैं. एनसीपी चीफ व्हिप अनिल पाटिल ने दावा किया है कि महाविकास अघाड़ी (MVA) में अस्थिरता बनी हुई है और इनके  पांच से छह विधायक अगले चार महीने में महायुति में शामिल हो सकते हैं. पाटिल ने कहा कि विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज कर चुके एनसीपी (शरद पवार) कांग्रेस और शिवसेना (उद्धव ठाकरे) के विधायक इस समय असमंजस की स्थिति में है. जिन विधायकों के हमारे साथ अच्छे संबंध हैं, उन्होंने महाविकास अघाड़ी की हार पर चिंता जताई है. अगर कोई विधायक अपने निर्वाचन क्षेत्र में विकास चाहता है तो उसका सत्ता पक्ष के साथ रहना अच्छा है. बता दें कि MVA में कांग्रेस, शरद पवार की एनसीपी, शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) शामिल है. विधानसभा चुनाव में इस खेमे को बड़ा झटका लगा है. 288 सदस्यीय वाली विधानसभा में गठबंधन सिर्फ 46 सीटें ही जीत सकी है. इसके विपरीत बीजेपी की अगुवाई में महायुति गठबंधन 230 सीटें जीतने में कामयाब रही है. महायुति में बीजेपी, एकनाथ शिंदे की शिवसेना और अजीत पवार की एनसीपी शामिल है.  

एनसीपी पार्टी ने 58 निर्वाचन क्षेत्रों में चुनाव लड़ने के बाद रिकॉर्ड 41 सीटें जीती, विधायक दल के नेता चुने गए अजित पवार

मुंबई राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) ने रविवार को अपने अध्यक्ष अजित पवार को महाराष्ट्र विधानसभा में पार्टी का नेता चुना है। पार्टी ने 58 निर्वाचन क्षेत्रों में चुनाव लड़ने के बाद रिकॉर्ड 41 सीटें जीती हैं। पिछले साल जुलाई महीने में अपने चाचा शरद पवार से अलग होने वाले अजित पवार के लिए यह चुनाव किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है। चुनाव परिणाम सामने आने के बाद यह बात साफ हो चुकी है कि एनसीपी के ज्यादातर समर्थक अजित पवार के साथ खड़े हैं। अजित पवार ने आज (24 नवंबर) दक्षिण मुंबई में नवनिर्वाचित विधायकों का स्वागत किया और विधानसभा चुनाव में पार्टी के शानदार प्रदर्शन की समीक्षा की। हर पल महाराष्ट्र की जनता के लिए काम करेगी पार्टी अजित पवार ने पार्टी की सफलता का श्रेय लाडकी बहीण योजना और मुफ्त बिजली सहित कई कल्याणकारी और विकास योजनाओं को दिया। उन्होंने विधायकों से कहा कि मतदाताओं द्वारा दिए गए भारी जनादेश के कारण महायुति सरकार 100 प्रतिशत स्थिर सरकार होगी। उन्होंने यह भी कहा कि उनका ध्यान राज्य भर में संगठन को और मजबूत करने और एनसीपी के लिए राष्ट्रीय दर्जा वापस हासिल करने पर होगा। उन्होंने पार्टी विधायकों से राज्य में राकांपा को मजबूत करने में बड़े पैमाने पर योगदान देने का आह्वान किया। सीएम पद को लेकर खींचातान बता दें कि अजित पवार के समर्थक चाहते हैं कि उन्हें मुख्यमंत्री बनाया जाए। हालांकि, शनिवार को देवेंद्र फडणवीस ने दो टूक कहा था कि सीएम पद का चुनाव विधायकों के साथ बैठकर ही की जाएगी। वहीं, एकनाथ शिंदे भी यह बात कहा है कि जरूरी नहीं कि जिस पार्टी के पास सबसे ज्यादा सीटें हैं, उसी पार्टी का नेता सीएम बने।

भुजबल ने कहा, ‘तीनों दल एक साथ बैठेंगे और तय किया जाएगा कि हमारा नेता कौन होगा, कहा-अजित पवार भी सीएम बन सकते हैं

महाराष्ट्र महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में शानदार जीत दर्ज करने के बाद महायुति गठबंधन के भीतर मुख्यमंत्री को लेकर चर्चा गरम है। अभी तक यह साफ नहीं है कि राज्य में सीएम की कुर्सी शिवसेना, भाजपा या एनसीपी नेता को मिलेगी। इस बीच, एनसीपी लीडर छगन भुजबल के बयान ने हलचल फिर बढ़ा दी है। उन्होंने कहा कि अजित पवार भी सीएम बन सकते हैं। भुजबल ने कहा, ‘तीनों दल एक साथ बैठेंगे और तय किया जाएगा कि हमारा नेता कौन होगा। हम तीनों दल एकसाथ बैठेंगे और तय करेंगे कि मुख्यमंत्री कौन बनेगा। अजित पवार भी सीएम बन सकते हैं। उनका स्ट्राइक रेट बहुत अच्छा है।’ छगन भुजबल ने कहा कि आज हमारे सभी विधायक बैठक में आए। कई विधान परिषद सदस्य भी आए थे। इस दौरान सभी ने तय किया कि विधानसभा में हमारा नेतृत्व अजित पवार करेंगे, लेकिन सीएम कौन होगा, ये हम तीनों दल मिलकर तय करेंगे। वहीं, एनसीपी के पुणे अध्यक्ष दीपक मानकर ने भी अजित पवार के समर्थन में बयान दिया। उन्होंने कहा, ‘NCP के कार्यकर्ता चाहते हैं कि अगर दादा (अजित पवार) होंगे, तो महाराष्ट्र को एक अच्छी दिशा मिलेगी। दादा में काम करने की क्षमता है। हम जानते हैं कि पिछले 2.5 वर्षों में उन्होंने महाराष्ट्र में उपमुख्यमंत्री के रूप में किस तरह का काम किया।’ ‘पीएम मोदी और अमित शाह लेंगे फैसला’ दीपक मानकर ने कहा कि महायुति सबको साथ लेकर चल रही है। पीएम मोदी और अमित शाह फैसला लेंगे, सभी साथ बैठेंगे। फडणवीस, शिंदे और दादा (अजित पवार) तीनों ही सक्षम हैं। वहीं, भाजपा की महाराष्ट्र इकाई के प्रमुख चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि महायुति नेता और भाजपा नेतृत्व यह तय करेंगे कि राज्य का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। महायुति गठबंधन ने 288 सदस्यीय महाराष्ट्र विधानसभा के लिए हुए चुनाव में 230 सीट जीतकर सत्ता बरकरार रखी। चुनाव परिणाम शनिवार को घोषित किए गए। महायुति गठबंधन में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना और उपमुख्यमंत्री अजित पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी भी शामिल है।

‘महा’ हार पर कांग्रेस नेता का बड़ा आरोप- शरद पवार, उद्धव ठाकरे गुट चुनाव प्रचार में योजनाबद्ध तरीके से सक्रिय नहीं रह पाई

मुंबई महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और महा विकास अघाड़ी (MVA) को करारी हार का सामना करना पड़ा है। कांग्रेस ने 101 सीटों पर चुनाव लड़ा लेकिन केवल 16 सीटों पर जीत हासिल की, जो पार्टी का राज्य में अब तक का सबसे खराब प्रदर्शन है। महाराष्ट्र हार के बाद अब कांग्रेस नेता ने महा विकास अघाड़ी के साथियों पर बड़ा आरोप लगाया है। कर्नाटक के मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जी. परमेश्वर ने हार की वजहों पर चर्चा करते हुए कहा कि गठबंधन सहयोगी शरद पवार की एनसीपी (एसपी) और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) चुनाव प्रचार में “योजनाबद्ध तरीके से” सक्रिय नहीं रह पाई। परमेश्वर महाराष्ट्र चुनाव के लिए ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) के पर्यवेक्षक थे। गठबंधन में तालमेल की कमी और अंतिम समय की घोषणाएं परमेश्वर ने कहा, “हमने विदर्भ क्षेत्र में कम से कम 50 सीटों की उम्मीद की थी। लेकिन गठबंधन सहयोगियों के बीच तालमेल नहीं था और हमने अंतिम समय में टिकटों की घोषणा की, जिससे पार्टी में भ्रम की स्थिति पैदा हो गई।” ईवीएम हैकिंग के आरोप उन्होंने ईवीएम पर सवाल उठाते हुए कहा, “हमने महाराष्ट्र में बैठकर चुनाव परिणामों का विश्लेषण किया। हमें ऐसी जानकारी मिली है कि कुछ क्षेत्रों में ईवीएम को हैक किया गया। यह हर जगह नहीं, लेकिन चुनिंदा क्षेत्रों में हुआ है।” BJP का भारी बहुमत बीजेपी-नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन ने 288 सीटों में से 230 पर जीत दर्ज कर सत्ता में अपनी पकड़ मजबूत की है। महाराष्ट्र बीजेपी अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा, “इस बार महाराष्ट्र में विपक्ष का नेता (LoP) नहीं होगा। यह कांग्रेस और विपक्ष के गलत कार्यों का नतीजा है। लोकसभा चुनावों में इन्होंने फर्जी नैरेटिव फैलाए थे और जनता ने विधानसभा चुनाव में उन्हें जवाब दे दिया।” इतिहास में कांग्रेस का सबसे खराब प्रदर्शन पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने बताया कि 1977 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस को महाराष्ट्र में 48 में से 20 सीटें मिली थीं, जो अब तक की सबसे कम थीं। लेकिन इस बार का प्रदर्शन उससे भी खराब रहा। इस करारी हार के बाद कांग्रेस और महा विकास अघाड़ी के नेताओं के बीच आत्ममंथन शुरू हो चुका है।

राउत ने दावा किया अयोग्यता याचिकाओं पर निर्णय नहीं करके चंद्रचूड़ ने दलबदल के लिए दरवाजे और खिड़कियां खुली रखीं

नई दिल्ली शिवसेना नेता संजय राउत ने पूर्व प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ पर रविवार को जमकर निशाना साधा। राउत ने आरोप लगाया कि उन्होंने महाराष्ट्र में दल-बदल करने वाले नेताओं के मन से कानून का डर खत्म कर दिया था। राउत ने दावा किया कि अयोग्यता याचिकाओं पर निर्णय नहीं करके चंद्रचूड़ ने दलबदल के लिए दरवाजे और खिड़कियां खुली रखीं। शिवसेना (यूपीटी) के नेता राउत का यह बयान राज्य विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी की करारी हार के बाद आया है, जहां महा विकास आघाडी (MVA) के तहत उसने 95 सीट पर चुनाव लड़ा था लेकिन केवल 20 सीट पर ही जीत हासिल कर सकी। एमवीए के अन्य गठबंधन सहयोगियों का प्रदर्शन भी कुछ बेहतर नहीं रहा। कांग्रेस ने 101 में से केवल 16 सीट जीतीं और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) ने 86 सीट में से केवल 10 सीट जीतीं। संजय राउत ने पत्रकारों के साथ बातचीत में आरोप लगाया, ‘चंद्रचूड़ ने दलबदलुओं के मन से कानून का डर खत्म कर दिया। उनका नाम इतिहास में काले अक्षरों में लिखा जाएगा।’ वर्ष 2022 में अविभाजित शिवसेना में विभाजन के बाद, उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले पार्टी के गुट ने एकनाथ शिंदे के साथ दलबदल करने वाले पार्टी विधायकों की अयोग्यता पर उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की। एससी ने अयोग्यता याचिकाओं पर फैसला करने का दायित्व विधानसभा अध्यक्ष पर छोड़ था। विधानसभा अध्यक्ष ने शिंदे के नेतृत्व वाले शिवसेना गुट को ‘असली राजनीतिक दल’ घोषित किया था। राउत ने आरोप लगाया कि विधानसभा चुनाव के नतीजे पहले से तय थे। उन्होंने कहा कि अगर तत्कालीन पूर्व न्यायाधीश ने अयोग्यता याचिकाओं पर समय पर फैसला किया होता, तो परिणाम अलग होते। ICU में हैं अदालतें, बोले संजय राउत संजय राउत ने कहा, ‘हम दुखी हैं, लेकिन निराश नहीं हैं। हम लड़ाई को अधूरा नहीं छोड़ेंगे। मतों का विभाजन भी एक कारक था और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जहरीले अभियान ने हम पर नकारात्मक प्रभाव डाला।’ राउत ने कहा कि नई सरकार का शपथग्रहण समारोह पड़ोसी गुजरात में होना चाहिए। इस बीच, पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ में अपने साप्ताहिक स्तंभ ‘रोखठोक’ में शिवसेना नेता राउत ने दावा किया कि निर्वाचन आयोग के प्रति संवेदना व्यक्त करने का समय आ गया है, जिसने धनबल के इस्तेमाल पर आंखें मूंद लीं। उन्होंने आरोप लगाया कि अदालतें लंबे समय से आईसीयू में हैं।

बावनकुले ने पार्टी के सदस्यता अभियान के लिए आज बैठक की अध्यक्षता की, कहा-‘महाराष्ट्र में विपक्ष का नेता तक नहीं होगा’

महाराष्ट्र महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में महायुति गठबंधन ने शानदार जीत हासिल की है। भाजपा के प्रदर्शन से उत्साहित पार्टी प्रदेश अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले ने रविवार को कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, ‘आलम यह है कि राज्य विधानमंडल में कोई विपक्ष का नेता तक नहीं होगा।’ बावनकुले ने कहा कि महाराष्ट्र में विपक्ष के नेता का नहीं होना कांग्रेस और विपक्षी दलों के गलत कार्यों का नतीजा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव में फर्जी बातें फैलाईं और मतदाताओं को धोखा दिया। विधानसभा चुनाव आते ही लोगों को इसके बारे में पता चल गया और मतदाताओं ने उन्हें बाहर कर दिया, जैसे कि हरियाणा में किया था। भाजपा के सीनियर नेता चंद्रशेखर बावनकुले ने पार्टी के सदस्यता अभियान के लिए आज बैठक की अध्यक्षता की। इसके बाद पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा, ‘महाराष्ट्र में चुनाव के कारण हमारा सदस्यता अभियान रोक दिया गया था। अब हमने महाराष्ट्र में 1.5 करोड़ नए सदस्य बनाने के लक्ष्य के साथ इसे फिर से शुरू किया है। मुंबई में सुनील राणे, पश्चिमी महाराष्ट्र में राजेश पांडे और अन्य नेता सदस्यता अभियान का नेतृत्व करेंगे।’ उन्होंने कहा कि हमने आज 1.51 करोड़ नए सदस्य बनाने का अभियान शुरू किया है, कल हमारी एक और बैठक होगी। अगले कुछ दिनों में संगठनात्मक कार्यों के लिए हमारी कई बैठकें होंगी। हम अपनी पार्टी में नए मतदाताओं को जोड़ना चाहते हैं, नए सदस्यता अभियान का यही हमारा मुख्य उद्देश्य है। नाना पटोले मात्र 200 मतों के अंतर से चुनाव जीते चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि महाराष्ट्र की जनता ने कांग्रेस को खारिज कर दिया है। इसकी प्रदेश इकाई के प्रमुख नाना पटोले मात्र 200 मतों के अंतर से चुनाव जीते हैं। बावनकुले ने कहा कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में समाज के सभी वर्गों ने भाजपा का समर्थन किया। राज्य के अगले मुख्यमंत्री को लेकर उन्होंने कहा कि महायुति नेता और भाजपा नेतृत्व इस पर फैसला करेगा। महायुति गठबंधन ने 288 सदस्यीय महाराष्ट्र विधानसभा के लिए हुए चुनाव में 230 सीट जीतकर सत्ता बरकरार रखी। चुनाव परिणाम शनिवार को घोषित किए गए। महायुति गठबंधन में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना और उपमुख्यमंत्री अजित पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) भी शामिल है। विपक्षी महा विकास आघाड़ी (MVA) सिर्फ 46 सीट ही जीत सका। एमवीए में कांग्रेस, एनसीपी (एसपी) और शिवसेना(यूबीटी) शामिल हैं।

कांग्रेस को भी जनता ने मजबूत जवाब दिया है, यह देश कई लोगों के बलिदान से बना है, ‘दैत्यों के साथ जो होता है वही हुआ’: कंगना

नई दिल्ली भाजपा सांसद कंगना रनौत ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजों को लेकर महायुति गठबंधन पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा, ‘ये हमारी पार्टी के लिए एक ऐतिहासिक जीत है। हम सब कार्यकर्ता बहुत ही ज्यादा उत्साहित हैं और हम महाराष्ट्र व पूरे भारत की जनता के धन्यवादी हैं।’ कंगना से पूछा गया कि उद्धव ठाकरे की इतनी बुरी हार होगी, क्या आपको इसकी उम्मीद थी? इसका जवाब देते हुए उन्होंने कहा, ‘मुझे इसकी उम्मीद थी। इतिहास गवाह है और मेरे कई रील्स भी वायरल हुए हैं। आखिर हम दैत्यों और देवताओं को कैसे पहचानते हैं। जो महिलाओं की इज्जत उतारते हैं, वे दैत्य श्रेणी के ही होते हैं। हमारी पार्टी ने महिलाओं को आरक्षण, अनाज, गैस सिलेंडर और शौचालय आदि दिया है। इससे पता चल जाता है कि कौन दैत्य है और कौन देवता है। दैत्यों का वही हुआ जो हमेशा होता है। उनकी हार हुई है।’ कंगना रनौत ने कहा कि महाभारत में एक ही परिवार था। फिर भी, उनमें फर्क कितना ज्यादा था। उन्होंने कहा, ‘आप देखिए कि मेरा घर तोड़ा गया। मुझे गंदी-गंदी गालियां दी गईं। उन लोगों की बुद्धि भ्रष्ट हो गई थी। कांग्रेस को भी जनता ने मजबूत जवाब दिया है। यह देश कई लोगों के बलिदान से बना है। कुछ मुर्खों के इकट्ठे हो जाने से देश के टुकड़े नहीं हो सकते हैं।’ कंगना से पूछा गया कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के तौर पर आप किसे देखती हैं? इसके जवाब में उन्होंने कहा कि यह फैसला पार्टी आलाकमान को लेना है। हमारे पास नेतृत्व के लिए एक से बढ़कर एक लोग हैं। संभल में पथराव की घटना पर कंगना ने क्या कहा उत्तर प्रदेश के संभल में पथराव की घटना पर भाजपा सांसद कंगना रनौत ने कहा, ‘यह बात किसी से छिपी नहीं है कि सिर्फ संभल ही नहीं बल्कि हमारे देश में बहुत सी ऐसी जगहें हैं जहां हिंदू प्रवेश नहीं कर सकते। ऐसे इलाकों में लोग शरिया कानून लागू करने की कोशिश कर रहे हैं और शरणार्थियों को फर्जी पहचान पत्र दिए जा रहे हैं।’ उन्होंने कहा कि हमारा जो ‘एक हैं तो सेफ हैं’ और ‘बटेंगे तो कटेंगे’ का मंत्र हैं, उसका महत्व हमें साफ-साफ दिखता है। हमें अपने देश में एकजुट रहना होगा।

झारखंड में हार जनादेश को स्वीकार किया जाना चाहिए, क्योंकि लोकतंत्र का यही असल सार: हिमंता शर्मा

रांची झारखंड विधानसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सह-प्रभारी और असम के मुख्यमंत्री हिमंता विश्व शर्मा ने कहा कि राज्य में पार्टी की हार उनके लिए बहुत दुखद है। हालांकि, शर्मा ने कहा कि जनादेश को स्वीकार किया जाना चाहिए, क्योंकि लोकतंत्र का यही असल सार है। शर्मा ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘झारखंड में पार्टी की हार मेरे लिए व्यक्तिगत रूप से बहुत दुखद है, भले ही हमने असम में उपचुनावों में सभी 5 सीट जीत ली हो। ​​मैंने झारखंड में अपने कार्यकर्ताओं के अटूट समर्पण और अथक प्रयासों को देखा है, जिन्होंने इस चुनाव में अपना सब कुछ झोंक दिया था।” शर्मा ने कहा कि भाजपा ने राज्य को ‘घुसपैठ’ से बचाने और छात्रों और युवाओं की आकांक्षाओं को पूरा करते हुए इसे विकास के पथ पर ले जाने की दृष्टि से चुनाव लड़ा। उन्होंने कहा, ‘‘हमें विनम्रतापूर्वक लोगों के जनादेश को स्वीकार करना चाहिए, क्योंकि यही लोकतंत्र का असल सार है। शर्मा ने कहा कि इस चुनौतीपूर्ण समय में हम अपने कार्यकर्ताओं के साथ मजबूती से खड़े रहेंगे, उन्हें अटूट समर्थन और एकजुटता प्रदान करेंगे।” बता दें कि झारखंड में भारी जनादेश के साथ हेमंत सोरेन के झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के नेतृत्व वाला गठबंधन ने दोबारा सत्ता हासिल कर ली है। भाजपा दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, लेकिन उसका प्रदर्शन उम्मीदों से अधिक खराब रहा।  

शहजाद पूनावाला ने कहा- जब भी कांग्रेस चुनाव हारती है, तो वे इसके लिए चुनाव आयोग और ईवीएम को दोषी ठहराते हैं

नई दिल्ली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने रविवार को विपक्षी कांग्रेस पर नए हमले किए, क्योंकि पार्टी ने कहा है कि महाराष्ट्र चुनाव परिणाम ‘अस्वीकार्य’ हैं। उन्होंने कहा, “कांग्रेस की एक ही पहचान, लोकतंत्र और जनता का अपमान करो। पार्टी हमेशा जनता की अंतरात्मा पर सवाल उठाती है। जब भी कांग्रेस चुनाव हारती है, तो वे इसके लिए चुनाव आयोग और ईवीएम को दोषी ठहराते हैं।” शहजाद पूनावाला ने कहा, “उनके अनुसार, झारखंड, जम्मू कश्मीर और वायनाड में यह लोकतंत्र की जीत थी। हालांकि, महाराष्ट्र में, चूंकि वे हार गए, इसलिए लोकतंत्र हार गया। कांग्रेस पार्टी भाई-भतीजावाद को लोकतंत्र से ऊपर रखती है। कांग्रेस पार्टी एक बोझ की तरह है। अगर आप इसे देखें, तो कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ता खुद ही पार्टी को बोझ समझते हैं।” इससे पहले शनिवार को कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने महाराष्ट्र चुनाव के नतीजों पर असंतोष व्यक्त किया था और इसे “अस्वीकार्य” करार दिया था। महाराष्ट्र में चुनाव अस्वीकार्य- कांग्रेस महाराष्ट्र और झारखंड चुनाव के नतीजे घोषित होने के बाद एएनआई से बात करते हुए अल्वी ने कहा कि भारत और लोकतंत्र हार गए हैं। उन्होंने कहा, “जिस तरह से हरियाणा के तुरंत बाद महाराष्ट्र में चुनाव हुए और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लगभग सभी उम्मीदवार जीत गए, ऐसा भारत में कभी नहीं हुआ। भाजपा ने महाराष्ट्र जीत लिया, लेकिन भारत हार गया। लोकतंत्र हार गया। संविधान हार गया।” उन्होंने कहा, ‘‘महाराष्ट्र में चुनाव अस्वीकार्य हैं।’’ महाराष्ट्र में भाजपा ने 132 सीटें जीतीं महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन ने जीत हासिल की। ​​महायुति का नेतृत्व कर रही भाजपा ने अपने सहयोगी दलों शिवसेना और एनसीपी को साथ लेकर शानदार जीत दर्ज की। महाराष्ट्र में भाजपा ने 132 सीटें जीतीं, मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने 57 सीटें जीतीं, और उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी ने 41 सीटें जीतीं। राज्य में 288 विधानसभा सीटें हैं। भाजपा का स्ट्राइक रेट रहा शानदार महा विकास अघाड़ी (एमवीए) के घटकों को करारा झटका लगा, जिसमें उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) को 20 सीटें, कांग्रेस को 16 और शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी (एससीपी) को केवल 10 सीटें मिलीं। महाराष्ट्र में भाजपा ने 148 सीटों पर चुनाव लड़कर 133 सीटें जीतीं, जिससे पार्टी का स्ट्राइक रेट शानदार रहा। पार्टी के सहयोगी दलों शिवसेना और एनसीपी का स्ट्राइक रेट भी बहुत अच्छा रहा। महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव 20 नवंबर को हुए थे। झारखंड में झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के नेतृत्व वाले गठबंधन ने सत्ता बरकरार रखी। झारखंड में विधानसभा चुनाव दो चरणों में हुए। पहला चरण 13 नवंबर को और दूसरा चरण 20 नवंबर को हुआ।  

राज ठाकरे ने बचा ली उद्धव की लाज, आदित्य भी हार जाते, उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) को 20 सीटों पर जीत मिली

महाराष्ट्र महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में भले ही राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) ने शानदार प्रदर्शन न किया हो, लेकिन इस पार्टी ने चुनाव परिणामों पर अहम असर डाला। मुंबई में इसका सबसे अधिक असर देखने को मिला। उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) को 20 सीटों पर जीत मिली, जिनमें से 10 सीटों पर जीत का अंतर MNS उम्मीदवारों द्वारा हासिल किए गए वोटों से कम था। इस कारण से उद्धव की शिवसेना को राजनीतिक रूप से प्रासंगिक बनाए रखने में मदद की। मुंबई की 10 सीटों में से 8 सीटें बेहद करीबी मुकाबलों में शिवसेवा यूबीटी जीत पाई। महिम: राज ठाकरे के बेटे अमित ठाकरे ने इस सीट से चुनाव लड़ा और 33,062 वोट प्राप्त किए। वहीं, उद्धव सेना के महेश सावंत ने महज 1,316 वोटों से जीत दर्ज की और शिवसेना के सदा सर्वंकर को हराया। वर्ली: आदित्य ठाकरे ने शिवसेना के मिलिंद देवरा को 8,801 वोटों से हराया। MNS के उम्मीदवार संदीप देशपांडे को यहां 19,367 वोट मिले। विखरोली: यहां उद्धव सेना के उम्मीदवार ने 15,526 वोटों से जीत हासिल की। उन्हें कुल 66,093 वोट मिले। वहीं, MNS के उम्मीदवार को 16,813 वोट मिले। जोशीवाड़ी ईस्ट: शिवसेना यूबीटी के उम्मीदवार ने 1,541 वोटों से जीत हासिल की। उन्हें इस चुनाव में 77,044 वोट हासिल हुए। एमएनएस इस सीट पर 64,239 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रही। दीआदाची: यहां जीत का अंतर 6,182 वोट का था। शिवसेना यूबीटी उम्मीदवार ने 76,437 वोट हासिल किए। MNS को 20,309 वोट मिले। वर्सोवा: उद्धव के उम्मीदवार ने 1,600 वोटों से जीत हासिल की और 65,396 वोट प्राप्त किए। एमएनएस के उम्मीदवार को 6,752 वोट मिले। कालिना: यहां जीत का अंतर 5,008 वोट का था। उद्धव की पार्टी के उम्मीदवार को 59,820 वोट मिले। राज ठाकरे की एमएनएस को 6,062 वोट मिले। वांद्रा ईस्ट: उद्धव की पार्टी के उम्मीदवार ने 11,365 वोटों से जीत हासिल की। वहीं, एमएनएस उम्मीदवार को 16,074 वोट मिले। वानी: शिवसेना यूबीटी के उम्मीदवार ने 15,560 वोटों से जीत दर्ज की। उन्हें कुल 94,618 वोट हासिल हुए। एमएनएस के उम्मीदवार को 21,977 वोट मिले। गुहागर: यहां शिवसेना यूबीटी उम्मीदवार ने 2,830 वोटों से जीत हासिल की। 71,241 वोट प्राप्त किए। MNS ने 6,712 वोट हासिल किए। इसके बावजूद महाराष्ट्र में भाजपा ने शानदार प्रदर्शन किया और 149 सीटों में से 132 सीटें जीतीं। वहीं एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने 57 सीटों पर जीत हासिल की और अजित पवार की एनसीपी को 41 सीटें मिलीं। कांग्रेस को सिर्फ 16 सीटों पर जीत मिली, जबकि शिवसेना (UBT) ने 20 और NCP(SP) ने 10 सीटें जीतीं। इस प्रकार एमएनएस ने उद्धव सेना के लिए मुंबई में अपनी राजनीतिक स्थिति को बनाए रखने में एक निर्णायक भूमिका निभाई।

राहुल गांधी ने झारखंड में INDIA गठबंधन की जीत के लिए लोगों को दिया धन्यवाद, JMM और कांग्रेस कार्यकर्ताओं को दी बधाई

रांची कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष एवं लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बीते झारखंड में इंडिया गठबंधन की जीत के लिए लोगों को धन्यवाद दिया और झारखंड मुक्ति मोर्चा तथा कांग्रेस कार्यकर्ताओं को जीत की शुभकामनाएं दी। कांग्रेस नेता ने महाराष्ट्र विधानसभा के चुनाव परिणामों को अप्रत्याशित बताया और कहा कि बाद में गठबंधन के हार के कारणों की समीक्षा की जाएगी।  गांधी ने कहा, ‘झारखंड के लोगों का इंडिया गठबंधन को विशाल जनादेश देने के लिए दिल से धन्यवाद। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जी, कांग्रेस और झामुमो के सभी कार्यकर्ताओं को इस विजय के लिए हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं। राहुल गांधी ने कहा कि प्रदेश में गठबंधन की यह जीत संविधान के साथ जल-जंगल-जमीन की रक्षा की जीत है।’ उन्होंने महाराष्ट्र विधानसभा के चुनाव परिणाम को चौंकाने वाला बताया और कहा, ‘महाराष्ट्र के नतीजे अप्रत्याशित हैं और इनका हम विस्तार से विश्लेषण करेंगे। प्रदेश के सभी मतदाता भाई-बहनों को उनके समर्थन और सभी कार्यकर्ताओं को उनकी मेहनत के लिए धन्यवाद।’  

स्टार की करारी हार, 56 लाख फॉलोवर्स वाले Ajaz Khan को मिले महज 153 वोट

मुंबई महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 के नतीजे सामने आ रहे हैं। महायुति एक बार फिर से सत्ता में वापसी कर रही है। इस बीच महाराष्ट्र की ‘वर्सोवा’ सीट भी बेहद चर्चा में है। इस सीट से बिग बॉस के एक्स कंटेस्टेंट और अभिनेता एजाज खान भी चुनावी मैदान में थे। हालांकि, चुनावी नतीजे देखकर लग रहा है कि एजाज का ये फैसला गलत निकला है क्योंकि अगर वोटिंग रिजल्ट देखा जाए, तो एक्टर का करारी हार का सामना करना पड़ा है। ‘वर्सोवा’ सीट पर मतगणना जारी महाराष्ट्र की ‘वर्सोवा’ सीट सबसे ज्यादा चर्चा में इसलिए है क्योंकि इस सीट से एजाज खान चुनावी रणभूमि में थे। एजाज ने नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद की पार्टी आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के टिकट पर नामांकन किया था। अभी भी ‘वर्सोवा’ सीट मतगणना जारी है और एजाज को अब तक महज 153 वोट मिले हैं। बता दें कि 10वें राउंड तक एजाज खान को सिर्फ 79 वोट मिले थे। हालांकि, दसवें राउंड के बाद हारूण 32,499 वोट 6,856 मतों से आगे चल रहे थे। वहीं, अगर बीजेपी की भारती की बात करें तो उन्हें 25,643 वोट मिले थे। इंस्टाग्राम पर एजाज की तगड़ी फैन फॉलोइंग गौरतलब है कि एजाज खान को सोशल मीडिया पर लोग खूब पसंद करते हैं। एजाज की इंस्टाग्राम पर तगड़ी फैन फॉलोइंग है। अगर एजाज के इंस्टाग्राम फॉलोअर्स की बात करें तो उन्हें करीब 5.6 मिलियन लोग इंस्टा पर फॉलो करते हैं, इसके बाद भी उन्हें इतने कम वोट मिलना अपने आपमें ही हैरानी की बात है। ‘वर्सोवा’ सीट से एजाज की हार की वजह से अब चारों ओर उनकी बातें हो रही हैं और लोग इस पर तरह-तरह का रिएक्शन दे रहे हैं। एजाज को नहीं मिले वोट जैसे ही महाराष्ट्र चुनाव के नतीजे आने लगे तो सोशल मीडिया पर चुनावी नतीजों की चर्चा होने लगी और इसी के साथ एजाज को ट्रोल किया जाने लगा। लोगों ने कहा कि जिस शख्स को इंस्टाग्राम पर 5 मिलियन से भी ज्यादा लोग फॉलो करते हैं उसे 150 वोटों के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है, तो बेहद बड़ी बात है। बता दें कि महाराष्ट्र विधानभा में कुल 288 सीटें हैं और महायुति गठबंधन को 220 से ज्यादा सीटें मिलती दिख रही हैं, लेकिन इस हार की वजह से एजाज को खूब ट्रोल किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर हो रहे ट्रोल हालांकि ये पहली बार नहीं है जब एजाज चुनाव हार गए हों। हर मामले में अपना रिएक्शन देने वाले एजाज का अभी तक रिएक्शन सामने नहीं आया है। मतगणना को देखते हुए सोशल मीडिया पर उन्हें ट्रोल भी किया जाने लगा है। लोग उन्हें बोल रहे हैं कि ये आदमी सोशल मीडिया में खूब हीरो बनता है, लेकिन असल में सच्चाई दिख गई। वहीं, कुछ लोग उन्हें छपरी भी बता रहे हैं। एजाज के 56 लाख फॉलोअर्स हैं सोशल मीडिया पेज खुरपेंच ने अपनी पोस्ट में लिखा, संसद और विधायिका में लगभग हर वर्ग से लोग चुनकर जाते हैं , लेकिन आज तक छपरी समाज से वहां तक कोई नहीं पहुंच पाया , एजाज खान जी ने कोशिश की लेकिन उनको सिर्फ 103 वोट ही प्राप्त हुए हैं। ये सिर्फ छपरी समाज की हार नहीं है बल्कि समाज के तौर पर हमारी और लोकतंत्र की हार है। बता दें, सोशल मीडिया पर एजाज को 5.6 मिलियन लोग फॉलो करते हैं।

महाराष्ट्र में महायुति की प्रचंड जीत में कांग्रेस को गुजरात वाली चोट मिली, कांग्रेस नहीं बचा पाई नेता विपक्ष की कुर्सी

मुंबई महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में बीजेपी के अगुवाई वाले महायुति की प्रचंड जीत में कांग्रेस को गुजरात वाली चोट मिली है। 2022 के गुजरात विधानसभा चुनावों कांग्रेस सिर्फ 17 सीटें जीत पाई थी। इसके बाद राज्य की सत्ता में 25 साल से बाहर कांग्रेस के हाथों से नेता विपक्ष का पद भी चला गया था। महाराष्ट्र चुनाव के नतीजों में भी कुछ ऐसी स्थिति उभरी है। विपक्ष गठबंधन महाविकास आघाड़ी (एमवीए) को कोई भी घटक जरूरी 29 सीटों के आसपास पहुंचता नहीं दिख रहा है। नियमानुसार संसद और विधानसभा में नेता विपक्ष के लिए 10 फीसदी सीटों का होना आवश्यक है। महाराष्ट्र में कम से 29 सीटों होनी चाहिए। कांग्रेस को 25 सीटों के अंदर सिमटती गई है। ऐसे में सवाल खड़ हो गया है कि जिस महाविकास आघाड़ी में सीएम बनने के लिए लड़ाई थी। उसके घटक दल नेता विपक्ष की हैसियत भी नहीं रख पाए। गुजरात को बनाया था मुद्दा महाविकास आघाड़ी के नेताओं ने विधानसभा चुनावों में महाराष्ट्र से गुजरात की तरफ निवेश, कारखाने और नौकरियां जानें को चुनावी मुद्दा बनाया था, लेकिन एमवीए का यह दांव उल्टा पड़ा। महायुति को 220 से अधिक सीटें मिलती दिख रही है तो वहीं एमवीए 50 के आसपास सिमट गया है। राहुल गांधी लोकसभा चुनावों में कांग्रेस के 99 सीटें हासिल करने के बाद नेता विपक्ष बन पाए थे। लोकसभा में 13 सीटें जीतने वाली कांग्रेस की यह दुर्गति होगी यह शायद किसी ने नहीं सोचा था। गुजरात के बाद कांग्रेस महाराष्ट्र में भी कमजोर स्थिति में पहुंच गई है। महाराष्ट्र में कांग्रेस ने 102 सीटों पर चुनाव लड़ा था। आखिर में कांग्रेस को मिला था पद 2019 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी सबसे बड़ी बनी थी। से 105 सीटों पर जीत मिली थी। दूसरे नंबर पर उद्धव ठाकरे की शिवसेना और फिर तीसरी नंबर पर एनसीपी रही थी। शिवसेना और एनसीपी के टूटने के बाद कांग्रेस को राज्य में नेता विपक्ष का पता मिला था। जब राज्य में शिंदे सीएम बने थे तो पहले संख्याबल के हिसाब से एनसीपी को यह पद मिला था और अजित पवार नेता विपक्ष बने थे। एनसीपी के टूटने के बाद कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी हो गई थी। तब विजय वडेट्टीवार नेता विपक्ष बने थे। वह 1 साल 112 दिनों तक नेता विपक्ष रहे। 2024 के चुनावों में कांग्रेस का प्रदर्शन इतना खराब रहा कि वह नेता विपक्ष की कुर्सी भी नहीं बचा पाई।

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