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लोकसभा में 105 और राज्यसभा में 100 प्रतिशत हुआ काम, तीसरे कार्यकाल में बुलाए गए संसद के पहले सत्र का दिखा कामकाज

नई दिल्ली केंद्र की मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में बुलाए गए संसद के पहले सत्र के दौरान लोकसभा में 105 और राज्यसभा में 100 प्रतिशत से ज्यादा कामकाज हुआ है। संसदीय कार्य मंत्रालय के मुताबिक, 18वीं लोकसभा के लिए आम चुनाव के पश्चात, लोकसभा का पहला सत्र 24 जून और राज्यसभा का 264 वां सत्र 27 जून से शुरू हुआ। मंगलवार को लोकसभा अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। जबकि, राज्यसभा को बुधवार को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किया गया। लोकसभा में पहले दो दिन विशेष रूप से 18वीं लोकसभा के नवनिर्वाचित सदस्यों का शपथ ग्रहण हुआ। सत्र के दौरान कुल 542 में से 539 नवनिर्वाचित सांसदों ने संसद सदस्यता की शपथ ली। 26 जून को लोकसभा के अध्यक्ष का चुनाव हुआ, जिसमें ओम बिरला को ध्वनिमत से दूसरी बार अध्यक्ष चुना गया। उसी दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में अपने मंत्रिपरिषद का परिचय भी कराया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने परंपरा और संविधान के अनुच्छेद-87 के तहत 27 जून को संसद के दोनों सदनों लोकसभा और राज्यसभा की संयुक्त बैठक को संबोधित किया। अपने संबोधन के दौरान राष्ट्रपति ने मोदी सरकार के 10 वर्षों की उपलब्धियों का जिक्र किया और साथ ही सरकार के भविष्य के एजेंडे को भी सामने रखा। पीएम मोदी ने 27 जून को राज्यसभा में अपने मंत्रिपरिषद का परिचय भी कराया। दोनों सदनों में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा 28 जून से शुरू होनी थी। लेकिन, लोकसभा में हंगामे के कारण इस पर चर्चा 1 जुलाई को शुरू हो पाई। पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने भाजपा की तरफ से लोकसभा में चर्चा की शुरुआत की। बांसुरी स्वराज ने लोकसभा में चर्चा का समर्थन किया। कुल 68 सांसदों ने लोकसभा की चर्चा में हिस्सा लिया। जबकि, 50 से अधिक सांसदों ने सदन के पटल पर अपने भाषण रखे। 2 जुलाई को 18 घंटे से अधिक की चर्चा के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने लोकसभा में चर्चा का जवाब देते हुए विपक्षी दलों द्वारा उठाए गए तमाम सवालों का जवाब भी दिया और साथ ही राहुल गांधी और कांग्रेस पर जमकर निशाना भी साधा। लोकसभा में लगभग 34 घंटे की 7 बैठकें हुईं और एक दिन के हंगामे और व्यवधान के बावजूद लोकसभा में उत्पादकता की दर 105 प्रतिशत रही। वहीं, राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा की शुरुआत 28 जून को भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने की, जिसका समर्थन सांसद कविता पाटीदार ने किया। कुल मिलाकर 76 सांसदों ने 21 घंटे से अधिक की चर्चा में भाग लिया, जिसका जवाब प्रधानमंत्री मोदी ने बुधवार को राज्यसभा में दिया। राज्यसभा में कामकाज की कुल उत्पादकता दर 100 प्रतिशत से ज्यादा रही।

किरेन रिजिजू ने कहा- कांग्रेस ने सदन नहीं चलने देने की नई परंपरा शुरू की है और इस परंपरा को चलने नहीं दिया जा सकता

नई दिल्ली केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने ससंद सत्र के दौरान विपक्ष खासकर कांग्रेस के रवैये की आलोचना करते हुए कहा कि कांग्रेस ने सदन नहीं चलने देने की नई परंपरा शुरू की है और इस परंपरा को चलने नहीं दिया जा सकता है। आखिर किसी को जबरदस्ती सदन की कार्यवाही को कैसे रोकने दिया जा सकता है। बुधवार को राज्यसभा के अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो जाने के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए किरेन रिजिजू ने कहा कि पहले जब नए सांसद चुनकर सदन में आते थे, उन्हें अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, मुलायम सिंह यादव और प्रणब मुखर्जी जैसे वरिष्ठ नेताओं के भाषण और वाद-विवाद से काफी कुछ सीखने को मिलता था। लेकिन, कांग्रेस तो अब संसद शुरू होने से पहले ही नए सांसदों को हंगामा करना सिखा रही है। राहुल गांधी पर सदन में झूठ बोलने और गुमराह करने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि नियम-115 के तहत शिकायत की गई है। इसके तहत या तो राहुल गांधी को अपनी बात को सत्यापित करना पड़ेगा या फिर माफी मांगनी होगी और अगर ये ऐसा नहीं करते हैं तो स्पीकर मामले को विशेषाधिकार कमेटी को भेज सकते हैं। इस पर अंतिम फैसला लोकसभा स्पीकर को ही करना है। हम कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार नियम और प्रक्रियाओं से सदन भी चलाएगी और सरकार भी चलाएगी। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर राज्यसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए जा रहे जवाब के दौरान विपक्षी दलों के हंगामे और वॉकआउट की आलोचना करते हुए किरेन रिजिजू ने कहा कि आज जब प्रधानमंत्री राज्यसभा में जवाब दे रहे थे तो उस समय भी विपक्ष ने कुछ देर बाद हंगामा करना शुरू कर दिया, 15-20 मिनट हंगामा किया और फिर वॉकआउट करके बाहर चले गए। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने सदन के नियमों की अवहेलना की है और संविधान का मजाक उड़ाया है। केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि कल लोकसभा में भी जैसे ही प्रधानमंत्री ने बोलना शुरू किया, कांग्रेस और उसके साथियों ने वहां जबरदस्त हंगामा शुरू कर दिया। विपक्ष ने पीएम के पूरे भाषण के दौरान डिस्टर्ब किया, पूरे भाषण के दौरान हो-हल्ला करते रहे और ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था। कांग्रेस को सोचना होगा कि प्रधानमंत्री पद की गरिमा का ध्यान रखना हम सबकी खासतौर से सांसदों की जिम्मेदारी होती है क्योंकि हम सबने शपथ ली है और नियमों से बंधे हुए हैं। उन्होंने कहा कि सदन की शुरुआत के साथ ही एक प्रोटेम स्पीकर और 5 वरिष्ठ सांसदों के चयन में सरकार ने विपक्ष का भी ध्यान रखा। तीन एनडीए से तय किए गए और तीन विपक्षी दलों की तरफ से, लेकिन विपक्ष के लोगों ने सहयोग नहीं किया, जबकि यह व्यवस्था शपथ ग्रहण के लिए की गई थी। सरकार ने बार-बार अपील की। लेकिन, उसके बावजूद विपक्षी दलों का जो रवैया रहा, वे उसका खंडन करते हैं। कोई आदमी देश और संविधान से बड़ा नहीं है। असदुद्दीन ओवैसी द्वारा लोकसभा में संसद सदस्यता की शपथ लेने के बाद लगाए गए ‘जय फिलिस्तीन’ के नारे पर कार्रवाई के लिए पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि लोकसभा स्पीकर ने कमेटी बना दी है, जो नियमों को तय करेगी ताकि भविष्य में फिर से ऐसा न हो। विपक्ष से बात करने के सवाल पर उन्होंने कहा कि इस सत्र से पहले भी वो विपक्षी नेताओं से मिले थे और अगला बजट सत्र शुरू होने से पहले भी राहुल गांधी समेत सभी दलों के फ्लोर लीडर्स से मुलाकात करेंगे। राहुल गांधी विशेष परिवार से आए हैं, इस वजह से उन्हें कोई प्रिविलेज नहीं दिया जा सकता। प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के जवाब के दौरान नीट और मणिपुर सहित हर मुद्दे पर समग्रता से जवाब दिया। राज्यसभा में मल्लिकार्जुन खड़गे और विपक्ष के रवैये पर सवाल खड़ा करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी मंशा पीएम मोदी के भाषण को रोकना था, जो ठीक नहीं था इसलिए चेयरमैन ने सही किया। वहीं, केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने विपक्षी दलों की एकता पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोकसभा में कल कांग्रेस और कुछ अन्य दल वेल में थे, लेकिन सपा और टीएमसी के सांसद वेल में नहीं थे और ऐसे दृश्य आगे भी देखने को मिलेंगे।

मोदी जब लोकसभा में अपना संबोधन दे रहे थे, उसी समय विपक्ष की ओर से सदन में जमकर हंगामा किया जा रहा था: भाजपा

नई दिल्ली जो लोकतांत्रिक सिद्धांतों में विश्वास करते हैं, उनके लिए मंगलवार को संसद में जो हुआ, उस पर विश्वास कर पाना मुश्किल हो गया है। जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब दे रहे थे तो नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी इस दौरान विपक्ष के नेताओं को उकसा रहे थे। वीडियो में भी ये साफ नजर आ रहा है। प्रधानमंत्री मोदी जब लोकसभा में अपना संबोधन दे रहे थे, उसी समय विपक्ष की ओर से सदन में जमकर हंगामा किया जा रहा था और पीएम मोदी और उनकी सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की जा रही थी। भाजपा की तरफ से इसको लेकर वीडियो जारी किया गया और इसके जरिए राहुल गांधी पर निशाना साधा गया। भाजपा ने आरोप लगाया कि विपक्षी सांसदों को राहुल गांधी ने उकसाया, जिसके कारण सदन में अशोभनीय घटना घटी। राहुल गांधी के उकसाने के बाद विपक्षी सांसदों ने वेल में आकर नारेबाजी शुरू कर दी और वह प्रधानमंत्री मोदी के भाषण के दौरान बाधा डालने की कोशिश करते नजर आए। अब भाजपा की तरफ से 2012 का भी एक वीडियो जारी किया गया है और साथ ही राहुल गांधी का भी वीडियो जारी कर यह लिखा गया है कि मां सोनिया गांधी की तरह ही राहुल गांधी ने भी संसद की कार्यवाही को बाधित करने की कोशिश की। भाजपा की तरफ से जारी वीडियो में दिख रहा है कि राहुल गांधी विपक्षी सांसदों को इशारा कर रहे हैं कि वह जोर से नारेबाजी करें, वह वेल में जाएं। वह तब हो रहा था, जब प्रधानमंत्री मोदी सदन में अपनी बात रख रहे थे। भाजपा की तरफ से जारी इस वीडियो में बताया गया है कि राहुल गांधी ने मंगलवार को जो किया, वह न तो आश्चर्यजनक है और न ही नया। राहुल गांधी की मां सोनिया गांधी ने भी पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार को घेरने के लिए ऐसा ही किया था और वह सदन में यह ऐसा व्यवहार कई बार करती थीं। वहीं, भाजपा ने इस पूरी घटना का एक और वीडियो जारी कर लिखा कि जहां एक तरफ राहुल गांधी विपक्ष के नेताओं को वेल में जाकर सदन की कार्यवाही में बाधा डालने के लिए उकसा रहे थे, वहीं दूसरी तरफ नरेंद्र मोदी वेल में नारेबाजी कर रहे सांसद को भी पानी पिलाते नजर आए। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी राहुल गांधी की इस हरकत के लिए उन्हें फटकार लगाई थी और उन पर सदन के वेल में जाकर विरोध करने के लिए विपक्षी सदस्यों को उकसाने का आरोप लगाया था। बिरला ने तब राहुल गांधी का नाम लेकर कहा था कि विपक्ष के नेता के रूप में यह आपको शोभा नहीं देता। मैंने आपको सदस्यों को वेल में जाने के लिए कहते हुए देखा है। यह व्यवहार कहीं से भी उचित नहीं है।

राहुल गांधी ने भाजपा और मोदी-शाह के हिंदु्त्व वाले मुखौटे को उतार दिया: उद्धव ठाकरे

नई दिल्ली लोकसभा में दिए राहुल गांधी के भाषण की उद्धव ठाकरे वाली शिवसेना ने खूब तारीफ की है। मुखपत्र ‘सामना’ में लिखे आर्टिकल में उद्धव सेना ने कहा कि राहुल गांधी अकेले ही नरेंद्र मोदी और अमित शाह पर भारी पड़ गए। अखबार ने लिखा कि राहुल गांधी ने भाजपा और मोदी-शाह के हिंदु्त्व वाले मुखौटे को उतार दिया। उन्होंने उन लोगों को हिंदू धर्म का सही अर्थ समझाया है। अखबार ने लिखा, ‘राहुल गांधी ने साफ किया कि भाजपा हिंदू और हिंदुत्व का प्रतिनिधित्व नहीं करती। उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी और अमित शाह के हिंदुत्व वाले मुखौटे को उतार फेंका। राहुल गांधी इसके लिए तारीफ के हकदार हैं।’ राहुल गांधी ने यह बताया कि भाजपा के लोग हिंदुत्व के नाम पर हिंसा फैलाने की बात करते हैं। वे नफरत फैला रहे हैं। उन्होंने भाजपा वालों को बताया कि असली हिंदुत्व सहिष्णुता में है और बिना किसी डर के सच को उजागर किया है। उद्धव सेना ने कहा, ‘राहुल गांधी की टिप्पणी ऐसी थी कि पीएम को भी खड़ा होना पड़ा। वह राहुल गांधी पर हिंदुओं के अपमान का आरोप लगाने लगे। राहुल गांधी ने इस पर जवाब भी दिया और कहा कि आप हिंदुत्व का अर्थ नहीं समझते। भाजपा ही हिंदुत्व नहीं है।’ उद्धव सेना का मुखपत्र लिखता है, ‘बीते 10 सालों में अब तक किसी भी नेता ने इस तरह से अमित शाह और नरेंद्र मोदी को चैलेंज नहीं किया था। उनके चेहरे देखने लायक थे।’ अखबार ने लिखा कि बीते 10 सालों से भाजपा की सरकार विपक्ष को हाशिये पर रख रही थी। लेकिन अब राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्ष आगे बढ़ रहा है। संसद में विपक्ष ने आवाज उठाई है। पहली बार इन लोगों को हिंदुत्व के नाम पर ही चुनौती मिली है। ‘एक अकेला मोदी-शाह पर भारी’ शीर्षक से लिखे आर्टिकल में उद्धव सेना ने कहा कि उन्होंने पूरी सरकार को अकेले ही नाको चने चबवा दिए। एक तरफ पीएम मोदी, अमित शाह, राजनाथ सिंह, रविशंकर प्रसाद, किरेन रिजिजू, भूपेंद्र यादव थे तो वहीं दूसरी तरफ अकेले राहुल गांधी थे। उन्होंने सीधे मोदी और शाह के अहंकार पर चोट की है।  

सूत्र के अनुशार हेमंत सोरेन फिर बनेंगे झारखंड के मुख्यमंत्री, इस्तीफे के बाद चंपाई को नई जिम्मेदारी

रांची हेमंत सोरेन एक बार फिर झारखंड के मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं। झारखंड मुक्ति मोर्चा, कांग्रेस और आरजेडी के विधायक दल की बैठक में हेमंत सोरेन को एक बार फिर सरकार का मुखिया चुन लिया गया है। आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी है। कथित जमीन घोटाले में सोरेन की गिरफ्तारी के बाद सीएम बने चंपाई सोरेन इस्तीफा देंगे। उन्हें झामुमो का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया जा सकता है। अभी हेमंत सोरेन सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के कार्यकारी अध्यक्ष हैं। हेमंत सोरेन को भूमि घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में हाई कोर्ट से जमानत मिलने के बाद 28 जून को जेल से रिहा किया गया था। हेमंत सोरेन ने गिरफ्तारी के बाद मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद उनके करीबी सहयोगी और मंत्री चंपाई सोरेन राज्य की बागडोर सौंपी गई थी। चंपई ने 2 फरवरी को राज्य के 12वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। सोरेन की रिहाई के बाद से ही अटकलें लगाईं जा रहीं थीं कि वह एक बार फिर कु्र्सी संभाल सकते हैं। 1,500 चयनित शिक्षकों को नियुक्ति पत्र वितरित करने सहित मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन के सभी महत्वपूर्ण कार्यक्रमों को अचानक रद्द किए जाने से अटकलों को बल मिला था कि कोई बड़ा फैसला लिया जा सकता है। मंगलवार को भी उनके सभी सार्वजनिक कार्यक्रम रद्द कर दिए गए थे।   राज्य में नेतृत्व परिवर्तन ऐसे समय पर किया जा रहा है जब कुछ ही महीने बाद विधानसभा चुनाव होना है। हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव में गठबंधन ने अच्छा प्रदर्शन किया है। जेल से रिहाई के बाद हेमंत सोरेन भाजपा पर आक्रामक हैं और माना जा रहा है कि ‘विक्टिम कार्ड’ खेलते हुए वह आगमी चुनाव में भाजपा को शिकस्त देने की कोशिश करेंगे।  

लोकसभा में मोदी पर हमला करने वालों में टीएमसी और समाजवादी पार्टी आगे, PM ने उन्हें बख्शा

नई दिल्ली सोमवार को कांग्रेस नेता और लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान भारतीय जनता पार्टी को जमकर घेरा था. मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उसका जवाब देना था. देशवासी मंगलवार को सुबह से ही पीएम नरेंद्र मोदी का स्पीच सुनने के लिए बेकरार थे. क्योंकि पीएम मोदी लोकसभा में जब बोलते हैं तो कांग्रेस और विपक्ष को कुंडली खोल कर रख देते रहे हैं. जाहिर है कि कयास लगाए जा रहे थे कि आज पीएम मोदी कांग्रेस की जमकर धुलाई करेंगे. मोदी राहुल गांधी के जवाब में खूब बोले, करीब 2 घंटे से ऊपर (करीब 2 घंटा 17 मिनट) बोलते रहे. उन्होंने कांग्रेस , कांग्रेस नेताओं, नेहरू और इंदिरा गांधी और राजीव गांधी तक के बारे में बोला. राहुल गांधी ने जिन खास बातों की चर्चा की थी उनमें से कुछ एक को छोड़कर अधिकतर मुद्दों पर उन्होंने अपने भाषण में शामिल किया. जाहिर अब इस बात पर बहस होगी कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी में किसने बेहतर बोला. आइए देखते हैं कि पीएम मोदी ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को जवाब देने कितना सफल साबित हुए. साथ ही पीएम मोदी के भाषण के मायने क्या रहे? मोदी का मेन फोकस पर कांग्रेस पर रहा, अखिलेश और ममता की चर्चा तक नहीं पीएम नरेंद्र मोदी ने आज पूरी स्पीच के दौरान राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी को ही टार्गेट पर रखा. जबकि कल से ही उन पर टार्गेट करने वालों में तृणमूल कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के नेता भी शामिल थे. पर पीएम मोदी का फोकस कहीं और नहीं था. उन्होंने नेहरू, इंदिरा गांधी यहां तक राजीव गांधी की भी चर्चा की. मोदी की कोशिश यह साबित करने पर रही कि कांग्रेस अपने सहयोगी दलों के लिए परजीवी की तरह है. शायद उन्हें लगता है कि उनकी स्पीच से समाजवादी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस आदि कांग्रेस से सजग होंगी.  मोदी ने कहा कि मुझे नहीं पता कि कांग्रेस के जो साथी दल हैं, उन्होंने इस चुनाव का विश्लेषण किया है कि नहीं किया है. ये चुनाव इन साथियों के लिए भी एक संदेश है. अब कांग्रेस पार्टी 2024 से एक परजीवी कांग्रेस के रूप में जानी जाएगी. 2024 से जो कांग्रेस है, वो परजीवी कांग्रेस है और परजीवी वो होता है जो जिस शरीर के साथ रहता है, उसी को खाता है. कांग्रेस भी जिस पार्टी के साथ गठबंधन करती है, उसी के वोट खा जाती है और अपनी सहयोगी पार्टी की कीमत पर वो फलती-फूलती है और इसीलिए कांग्रेस, परजीवी कांग्रेस बन चुकी है. यह तथ्यों के आधार पर कह रहा हूं. आपके माध्यम से सदन और सदन के माध्यम से देश के सामने कुछ आंकड़े रखना चाहता हूं. जहां-जहां बीजेपी-कांग्रेस की सीधी फाइट थी, जहां कांग्रेस मेजर पार्टी थी, वहां कांग्रेस का स्ट्राइक रेट सिर्फ 26 परसेंट है. लेकिन जहां वो किसी का पल्लू पकड़ के चलते थे, ऐसे राज्यों में उनका स्ट्राइक रेट 50 परसेंट है. कांग्रेस की 99 सीटों में से ज्यादातर सीटें उनके सहयोगियों ने जिताया है और इसलिए कह रहा हूं कि परजीवी कांग्रेस है. 16 राज्यों में कांग्रेस जहां अकेले लड़ी, वोट शेयर गिर चुका है. गुजरात, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश, तीन राज्यों में जहां कांग्रेस अपने दम पर लड़ी और 64 में से सिर्फ दो सीट जीत पाई है. इसका साफ मतलब है कि इस चुनाव में कांग्रेस पूरी तरह परजीवी बन चुकी और अपने सहयोगी दलों के कंधे पर चढ़कर के सीटों का आंकड़ा बढ़ाया है. कांग्रेस ने अपने सहयोगियों के जो वोट खाए हैं, न खाए होते तो लोकसभा में उनके लिए इतनी सीटें जीत पाना भी बहुत मुश्किल था. राहुल गांधी पर पर्सनल अटैक, पप्पू की जगह ली बालक बुद्धि ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज भाषण के दौरान एक बार कहा कि अब जैसे को तैसा जवाब दिया जाएगा. राहुल गांधी ने जिस तरह अपने भाषण में कई बार पीएम पर पर्सनल अटैक किया उसका जवाब आज पीएम मोदी ने भी उससे भी कड़े अंदाज में दिया. अब तक राहुल गांधी के विरोधी उन्हें पप्पू कहकर संबोधित करते रहे हैं. पर आज पीएम ने अपने स्पीच के दौरान नाम लिये बिना कई बार उनका बालक बुद्धि कह कर मजाक उड़ाया. मोदी ने कहा कि जब उन पर बालक बुद्धि पूरी तरह सवार हो जाती है तो ये किसी के भी गले पड़ जाते हैं. ये हजारो करोड़ रुपये की हेराफेरी के मामले में जमानत पर हैं, ओबीसी पर टिप्पणी के मामले में सजा पा चुके हैं. सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर टिप्पणी को लेकर माफी मांगनी पड़ी है. इन पर वीर सावरकर के अपमान का मुकदमा है. इन पर देश की सबसे बड़ी पार्टी के अध्यक्ष को हत्यारा कहने का मुकदमा है. इन पर कई अदालतों में झूठ बोलने के केस हैं. बालक बुद्धि में न बोलने का ठिकाना होता है ना व्यवहार का ठिकाना होता है. बालक बुद्धि जब पूरी तरह से सवार हो जाती है तो ये सदन में भी किसी के गले पड़ जाते हैं. सदन में बैठकर भी आंखें मारते हैं. इनकी सच्चाई पूरा देश समझ गया है. इसलिए देश इनसे कह रहा है- तुमसे नहीं हो पाएगा. तुलसी दासजी कह गए हैं- जुठई लेना, जुठई देना, जुठई भोजन, जुठई चबेना. कांग्रेस ने जूठ को राजनीति का हथियार बनाया. कांग्रेस के मुंह जूठ लग गया है जैसे वो आदमखोर एनिमल होता है न जिसके मुंह पर लहु लग जाता है. वैसे कांग्रेस के मुंह जूठ का खून लग गया है. देश ने कल एक जुलाई को खटाखट दिवस भी मनाया है. मोदी ने कहा कि आजकल सिम्पैथी गेन करने के लिए एक नई ड्रामेबाजी शुरू की गई है. नया खेल खेला जा रहा है. एक किस्सा सुनाता हूं. एक बच्चा स्कूल से आया और जोर-जोर से रोने लगा. उसकी मां भी डर गई क्या हो गया. वह कहने लगा मां मुझे स्कूल में मारा गया. आज उसने मारा, इसने मारा और रोने लगा. मां ने बात पूछी तो बता नहीं रहा था. बच्चा ये नहीं बता रहा था कि उस बच्चे ने किसी बच्चे को मां की गाली दी थी, किताबें फाड़ दी थी, टीचर … Read more

चिराग पासवान की सांसदी को दिल्ली हाईकोर्ट में दी चुनौती, अब इस चुनाव याचिका पर सुनवाई 28 अगस्त को होगी

नई दिल्ली बिहार के हाजीपुर लोकसभा सीट से सांसद और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान की सांसदी को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। इस दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि आपको यह याचिका पटना हाईकोर्ट में दायर की जानी चाहिए। अब इस चुनाव याचिका पर सुनवाई 28 अगस्त को होगी। न्यायमूर्ति विकास महाजन ने याचिकाकर्ता के वकील से कहा कि इस हाईकोर्ट में यह कैसे स्वीकार्य है? निर्वाचन क्षेत्र बिहार राज्य में है। बेहतर होगा कि आप याचिका वापस ले लें और अधिकार क्षेत्र वाले उच्च न्यायालय में जाएं। न्यायाधीश ने सुनवाई के दौरान मौखिक रूप से कहा कि इस न्यायालय के पास अधिकार क्षेत्र नहीं होगा। यौन उत्पीड़न का है मामला याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में दावा किया कि प्रिंस राज, उसके सहयोगियों ने उसका यौन उत्पीड़न किया गया, जिसमें चिराग पासवान भी शामिल थे। उन्होंने लोकसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करते समय इस “आपराधिक पृष्ठभूमि” का खुलासा नहीं किया था। बता दें कि प्रिंस राज चिराग पासवान का चचेरा भाई है। 2021 में दर्ज कराई प्राथमिकी याचिका में कहा है कि कथित यौन उत्पीड़न के संबंध में 2021 में ही दिल्ली में एक प्राथमिकी दर्ज की गई थी। याचिका में कहा गया है कि आपराधिक मामलों के संबंध में झूठा हलफनामा दाखिल करना या हलफनामे में कोई भी जानकारी छिपाना जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 125ए का उल्लंघन है और इसके लिए छह महीने की सजा हो सकती है। याचिकाकर्ता नहीं दे सकता चुनौती चुनाव आयोग के वकील सिद्धांत कुमार ने कहा कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत चुनाव याचिका यहां विचारणीय नहीं है, क्योंकि चुनाव बिहार में हुए थे। केंद्र की ओर से मामले में पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने आगे तर्क दिया कि कानून के तहत, केवल निर्वाचन क्षेत्र का मतदाता या उम्मीदवार ही चुनाव को चुनौती देने के लिए चुनाव याचिका दायर कर सकता है और याचिकाकर्ता दोनों में से किसी भी श्रेणी में नहीं आता है। उन्होंने कहा, अधिनियम स्पष्ट है। उसका अधिकार क्षेत्र सवालों के घेरे में है। आपको निर्वाचन क्षेत्र का मतदाता होना चाहिए या आपको उम्मीदवार होना चाहिए। योग्यता बाद में आएगी, पहले याचिकाकर्ता को बाधा पार करनी होगी। याचिकाकर्ता के वकील ने अगली सुनवाई पर याचिका पर विचार करने के लिए हाईकोर्ट के अधिकार क्षेत्र के मुद्दे पर आगे चर्चा करने के लिए से समय मांगा।

मैं ‘नीट’ पर संसद में चर्चा का अनुरोध करते हुए यह पत्र लिख रहा हूं, NEET पर कल चर्चा करने का किया अनुरोध: राहुल गांधी

नई दिल्ली लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर आग्रह किया कि मेडिकल प्रवेश परीक्षा ‘नीट’ में कथित अनियमितता के मुद्दे पर सदन में चर्चा कराई जाए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) पर चर्चा कराने के विपक्ष के अनुरोध को गत 28 जून और बीते सोमवार को ठुकरा दिया गया था, लेकिन लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विपक्ष को आश्वासन दिया था कि वह सरकार के साथ इस मामले पर चर्चा करेंगे। एकमात्र चिंता 24 लाख ‘NEET’ उम्मीदवारों का कल्याण गांधी ने मंगलवार को प्रधानमंत्री को लिखे अपने पत्र में कहा, ‘‘मैं ‘नीट’ पर संसद में चर्चा का अनुरोध करते हुए यह पत्र लिख रहा हूं।” उन्होंने कहा, ‘‘ इस समय, हमारी एकमात्र चिंता पूरे भारत में लगभग 24 लाख ‘नीट’ उम्मीदवारों का कल्याण है।” कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘‘नीट’ परीक्षा तत्काल ध्यान देने योग्य है, क्योंकि इसने हमारी उच्च शिक्षा प्रणाली में गहरी समस्या को उजागर किया है। पिछले सात वर्षों में 70 से अधिक पेपर लीक हुए हैं, जिससे 2 करोड़ से अधिक छात्र प्रभावित हुए हैं।” उन्होंने कहा, ‘‘हमारे छात्रों को जवाब मिलना चाहिए। संसद में चर्चा उनके विश्वास को बहाल करने की दिशा में पहला कदम होगा।”

विपक्ष असत्य, डर, निराशावादी मानसिकता का शिकार हो गया, वह सत्य को असत्य बनाने की कोशिश कर रहा है: निशिकांत दुबे

Our aim is to create a favorable environment for industries in the state: Chief Minister Dr. Yadav

नई दिल्ली लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान गोड्डा से भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने विपक्ष पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि कल से आज तक सारे विपक्ष के भाषण को सुना। विपक्ष असत्य, डर, निराशावादी मानसिकता का शिकार हो गया है। वह सत्य को असत्य बनाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि मुस्लिमों की राजनीति करने वाला विपक्ष, आज हिंदू-हिंदू चिल्ला रहा है। जिस लोकसभा सीट से अवधेश प्रसाद जीते हैं, उसका नाम फैजाबाद है, लेकिन किसी ने इसका नाम नहीं लिया, सिर्फ अयोध्या नाम लिया। यही प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा की सबसे बड़ी जीत है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर हमला बोलते हुए निशिकांत दुबे ने कहा कि वो संसद में शिवजी की तस्वीर दिखा रहे थे। इतना ही लगाव है, तो मंदिर ही चले जाते। राहुल गांधी को धर्म के बारे में कोई भी जानकारी नहीं है। मैं प्रधानमंत्री मोदी को बधाई देना चाहता हूं कि उन्होंने पूरे देश को संदेश दे दिया कि यह देश हिंदू है, हिंदू राष्ट्र है और मुस्लिमों के नाम पर कोई राजनीति नहीं होगी। निशिकांत दुबे ने कहा कि कहा जाता है कि वर्दी में किसी को प्रणाम नहीं करते हैं। थल सेना प्रमुख की एक फोटो आज के अखबारों में छपी है, इसमें वह वर्दी पहनकर अपनी मां के पैर छू रहे हैं। इससे उनका पावर कम नहीं हो गया। अगर ओम बिरला, पीएम मोदी का पैर छूकर उनको प्रणाम भी कर लेते, तो भी उस कुर्सी की ताकत कम नहीं हो जाती। यही भारतीय संस्कार है। आपसे जो भी बड़ा हैं, उनका अभिवादन करते वक्त पद की मर्यादा की चिंता नहीं करनी चाहिए। राहुल गांधी को भारतीय संस्कृति और सभ्यता के बारे में कुछ नहीं पता है। दरअसल लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अपने भाषण में कहा कि अध्यक्ष ओम बिरला ने शिष्टाचार अभिवादन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को झुककर प्रणाम किया, लेकिन उनसे हाथ मिलाते समय वह मजबूती से खड़े रहे। सोमवार को ओम बिरला ने भी राहुल गांधी की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सदन के नेता हैं। मेरा संस्कार कहता है कि जो बड़े हैं, उनसे झुककर नमस्कार करो और बराबर वालों से सीधे खड़े होकर बात करो।

भाजपा का राहुल गांधी पर बड़ा हमला, वायनाड वालों की खुशी के लिए किया हिंदुओं का अपमान

नई दिल्ली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने लोकसभा में हिंदुओं के लिए कथित तौर पर ‘‘अभद्र भाषा’’ का इस्तेमाल करने के लिए कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधा। भाजपा ने मंगलवार को राहुल की आलोचना करते हुए दावा किया कि उन्होंने संभवत: केरल के वायनाड में मतदाताओं को खुश करने के लिए ऐसा किया जहां से उनकी बहन प्रियंका गांधी वाड्रा लोकसभा उपचुनाव लड़ने की तैयारी कर रही हैं। भाजपा की दिल्ली इकाई के प्रमुख वीरेंद्र सचदेवा और लोकसभा सदस्य मनोज तिवारी ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि राहुल को सोमवार को लोकसभा में अपने ‘‘अमर्यादित’’ व्यवहार और हिंदुओं को ‘‘हिंसक’’ बताने के लिए देश से माफी मांगनी चाहिए। सचदेवा ने कहा, ‘‘राहुल गांधी ने वायनाड लोकसभा सीट छोड़ दी है और प्रियंका गांधी को वहां से उपचुनाव लड़ना है। उन्होंने (राहुल) संभवत: हिंदुओं के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल कर वायनाड के लोगों को खुश करने की कोशिश की है।’’ वायनाड में अच्छी-खासी तादाद मुस्लिम मतदाताओं की है। तिवारी ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने भगवान शिव तथा गुरु नानक देव का अपमान किया है जिनकी तस्वीरें उन्होंने सोमवार को लोकसभा में दिखायी और फिर उन्हें मेज पर रखे एक गिलास के बगल में रखा जिससे वह पानी पी रहे थे। लोकसभा में विपक्ष के नेता के रूप में अपने पहले भाषण में राहुल ने सत्तारूढ़ भाजपा पर तीखा प्रहार करते हुए कहा था कि ‘खुद को हिंदू कहने वाले हर समय हिंसा और नफरत फैलाने’ में लगे हैं। उनकी टिप्पणियों का सत्तापक्ष के सदस्यों ने कड़ा विरोध किया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पूरे हिंदू समाज को हिंसक कहने को गंभीर विषय बताया। बहरहाल, राहुल ने कहा कि वह भाजपा के बारे में बोल रहे थे।  

इन कानूनों से संबंधित मुद्दे शीर्ष अदालत के समक्ष लंबित हैं, इसलिए इनके बारे में नहीं बोलेंगे : सीजेआई

We will fill the country's reserves but will charge the full price Bharatiya Kisan Sangh 

नई दिल्ली भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) डीवाई चंद्रचूड़ ने कल यानी 1 जुलाई 2024 से लागू हुए तीन नए आपराधिक कानूनों के बारे में कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। दरअसल CJI चंद्रचूड़ दिल्ली में कड़कड़डूमा, शास्त्री पार्क और रोहिणी में तीन न्यायालय भवनों के निर्माण के शिलान्यास समारोह में पहुंचे थे। इस दौरान उनसे नए अधिनियमों से संबंधित एक प्रश्न पूछा गया जिस पर उन्होंने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। सीजेआई ने कहा कि इन कानूनों से संबंधित मुद्दे शीर्ष अदालत के समक्ष लंबित हैं, इसलिए वह इनके बारे में नहीं बोलेंगे। सीजेआई ने कहा, “ये ऐसे मुद्दे हैं जो सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष विचाराधीन हैं, और संभवतः अन्य उच्च न्यायालयों के समक्ष भी लंबित हैं। इसलिए, मुझे न्यायालय के समक्ष आने वाली किसी भी बात पर बोलना नहीं चाहिए।” नए आपराधिक कानून सोमवार से देशभर में लागू हो गए। इसी के साथ आपराधिक न्याय प्रणाली में व्यापक बदलाव आ चुका है और औपनिवेशिक काल के कानूनों का अंत हो गया। भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) 2023 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (बीएसए) 2023 सोमवार से पूरे देश में प्रभावी हो गए। इन तीनों कानून ने ब्रिटिश कालीन कानूनों क्रमश: भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) और ‘इंडियन एविडेंस एक्ट’ की जगह ली है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की गई है जिसमें इन आपराधिक कानूनों की व्यवहार्यता का आकलन करने और उनकी पहचान करने के लिए एक विशेषज्ञ समिति गठित करने के निर्देश जारी करने की मांग की गई है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने नए आपराधिक कानूनों को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर विचार करने से इनकार करते हुए कहा था कि ये कानून अभी लागू नहीं हैं। 19 मई को सुप्रीम कोर्ट ने नए आपराधिक कानूनों को चुनौती देने वाली एक और जनहित याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि याचिका को लापरवाही से तैयार किया गया था।  

नवनिर्वाचित विधायक राजभवन के बजाय विधानसभा में शपथ दिलाने की मांग कर रहे, गवर्नर से किस बात पर तकरार

कोलकाता पश्चिम बंगाल में सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस के दो नवनिर्वाचित विधायक पिछले चार दिनों से विधानसभा परिसर में धरने पर बैठे हैं। ये विधायक राजभवन के बजाय विधानसभा में शपथ दिलाने की मांग कर रहे हैं, जबकि पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सी वी आनंद बोस ने उन्हें राजभवन में शपथ ग्रहण करने के लिए पिछले बुधवार को आमंत्रित किया था। बड़ानगर विधायक सायंतिका बंद्योपाध्याय और भागबंगला विधायक रेयात हुसैन सरकार ने राजभवन में शपथ ग्रहण करने से मना कर दिया है। वे दोनों, लोकसभा चुनाव के साथ हुए राज्य विधानसभा उपचुनाव में निर्वाचित हुए थे। उनका धरना चौथे दिन मंगलवार को भी जारी रहा। इससे पहले, वे 27,28 जून और एक जुलाई को धरना पर बैठे थे। उन्होंने विधानसभा परिसर में डॉ भीम राव आंबेडकर की प्रतिमा के सामने अपना धरना फिर से शुरू किया। वे दोनों यह मांग कर रहे हैं कि राज्यपाल बोस उन्हें सदन में शपथ ग्रहण कराएं ताकि वे विधायक के तौर पर अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर सकें। दोनों नवनिर्वाचित विधायकों ने राजभवन में शपथ ग्रहण करने के राज्यपाल का आमंत्रण स्वीकार करने से इनकार करते हुए दावा किया है कि परंपरा के अनुसार उपचुनाव में जीतने वालों के मामले में, राज्यपाल सदन के स्पीकर या डिप्टी स्पीकर को शपथ दिलाने का दायित्व सौंपते हैं।

मालूम हो कि बीजेपी ने लोकसभा चुनाव के वक्त 400 पार का नारा दिया था, मगर वह 230 सीटों पर सिमट गई: टीएमसी नेता

Chandrashekhar became the District President of Unorganized Workers and Employees Congress.

नई दिल्ली तृणमूल कांग्रेस के सासंद कल्याण बनर्जी का लोकसभा में मंगलवार को अलग अंदाज देखने को मिला। उन्होंने अपने अनोखे अंदाज से सबका ध्यान अपनी ओर खींचा। टीएमसी नेता ने बड़े ही मजाकिया अंदाज में भाजपा के 400 पार वाले नारे को लेकर तंज कसा। मालूम हो कि बीजेपी ने लोकसभा चुनाव के वक्त 400 पार का नारा दिया था, मगर वह 230 सीटों पर सिमट गई। इसी 400 पार बाले नारे पर तंज कसते हुए कल्याण बनर्जी कित…कित…कित…कित…कित बोलने लगे। जैसे ही सदन में इस तरह की आवाज गूंजी, महुआ मोइत्रा समेत वहां मौजूद कई दूसरे सांसद जोर-जोर से हंसने लगे। कल्याण बनर्जी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अहंकार, नफरत और बदले की भावना ने उनकी लोकप्रियता को कम कर दिया है। उन्होंने कहा, ‘हमने पिछले 10 साल में प्रधानमंत्री से विपक्ष के लिए कभी कोई नम्रतापूर्ण या मीठे शब्द नहीं सुने। विपक्ष के प्रति उनका रवैया इतना द्वेषपूर्ण क्यों है? प्रधानमंत्री के मुंह से कभी भी गैर-भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की तारीफ नहीं सुनने को मिली। हमारा अनुरोध है कि पीएम विपक्ष की तरफ थोड़े विनम्र हो जाएं। समय आ गया है कि सत्तापक्ष आत्मनिरीक्षण करे। इस अहंकार, इस नफरत, इस बदले की भावना ने मोदी की लोकप्रियता को कम कर दिया है। उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में जनता से किए गए अपने वादे पूरे नहीं किए हैं।’ ‘एनडीए को करीब 48 प्रतिशत वोट मिले’ तृणमूल कांग्रेस सदस्य ने दावा किया कि इस चुनाव में सत्तारूढ़ एनडीए को जहां करीब 48 प्रतिशत वोट मिले, वहीं पूरे विपक्षी गठबंधन इंडिया को 51 प्रतिशत से अधिक वोट मिले हैं। उन्होंने कहा, ‘आज देश में अस्थिर सरकार है लेकिन मजबूत विपक्ष है। सत्तापक्ष को हर दिन, हर पल याद रखना होगा कि हम अस्थिर हैं और इंडिया गठबंधन ज्यादा मजबूत है। हम अब संसद में भी जोरदार तरीके से बोलेंगे और संसद के बाहर भी राजनीतिक लड़ाई चलेगी। महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव होने दीजिए, डेढ़ वर्ष बाद यह सरकार नहीं रहेगी। आपातकाल की अवधि को छोड़ दें तो मौजूदा प्रधानमंत्री के अलावा किसी अन्य प्रधानमंत्री ने विपक्षी नेताओं पर निशाना साधने के लिए जांच एजेंसियों का दुरुपयेाग इस तरह नहीं किया।’

धनखड़ ने गुस्से में कहा, आप (खरगे) हर बार आसन पर हमला नहीं कर सकते, धनखड़ और खरगे में तीखी नोकझोंक

नई दिल्ली राज्यसभा में मंगलवार को तीखी नोकझोंक के दौरान, सदन के सभापति जगदीप धनखड़ ने कांग्रेस सांसद मल्लिकार्जुन खरगे को खूब फटकार लगाई। सभापति ने उन पर बार-बार आसन का अनादर करने का आरोप लगाया। धनखड़ ने गुस्से में कहा, “आप (खरगे) हर बार आसन पर हमला नहीं कर सकते। आप हर बार आसन का अनादर नहीं कर सकते… आप अचानक खड़े होकर जो कुछ भी कहना चाहते हैं, बोल देते हैं, बिना यह समझे कि मैं क्या कह रहा हूं।” राज्यसभा के सभापति ने आगे कहा, “इस देश और संसदीय लोकतंत्र और राज्यसभा की कार्यवाही के इतिहास में कभी भी आसन के प्रति ऐसी अवहेलना नहीं हुई, जैसी आप लोगों ने की… आपके लिए आत्मचिंतन का समय है… आपकी गरिमा पर कई बार हमला किया गया है… मैंने हमेशा आपकी गरिमा की रक्षा करने की कोशिश की है।” यह टिप्पणी धनखड़ और खरगे के बीच तीखी नोकझोंक के बीच आई। खरगे राज्यसभा में विपक्ष के नेता (एलओपी) हैं। कार्यवाही के दौरान, जब कांग्रेस के जयराम रमेश कुछ कहने के लिए खड़े हुए, तो धनखड़ ने उन पर भी निशाना साधा। धनखड़ ने कहा, “आप इतने बुद्धिमान, इतने प्रतिभाशाली, इतने प्रतिभावान हैं कि आपको तुरंत आकर खरगे की जगह सीट ले लेनी चाहिए। कुल मिलाकर, आप उनका काम कर रहे हैं, उनका (खरगे का) अपमान कर रहे हैं।” उपराष्ट्रपति को जवाब देते हुए खरगे ने सोनिया गांधी की ओर इशारा करते हुए कहा, “जिसने मुझे बनाया, वह यहां बैठी है। कोई जयराम रमेश मुझे नहीं बना सकता।” खरगे ने कहा, “वर्ण व्यवस्था अभी भी आपके दिमाग में है। इसलिए आप रमेश को बहुत बुद्धिमान और मुझे मूर्ख कह रहे हैं।” एक दिन पहले राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकसभा चुनाव के दौरान दिए गए भाषणों की आलोचना की और सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वैचारिक मातृ संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के खिलाफ भी आरोप लगाए। हालांकि सभापति जगदीप धनखड़ ने उनकी ज्यादातर टिप्पणियों को सदन की कार्यवाही से निकाल दिया। धनखड़ ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का भी बचाव करते हुए इसे राष्ट्र के लिए काम करने वाला संगठन बताया।  

उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य से देवेंद्र फडणवीस की लिफ्ट में हुई मुलाकात, महाराष्ट्र में कयासों का दौर

महारास्ट्र क्या भाजपा और उद्धव ठाकरे सेना के रिश्तों में सुधार आने लगा है? महाराष्ट्र में विधानसभा का सत्र चालू है और इस दौरान जो वाकये देखने को मिल रहे हैं, उससे ऐसे कयास लग रहे हैं। बीते सप्ताह देवेंद्र फडणवीस और उद्धव ठाकरे की लिफ्ट के बाहर मुलाकात हुई थी। दोनों अच्छे से मिले थे और फिर लिफ्ट में भी बतियाते रहे। दोनों नेता सदन में मुस्कुराते हुए पहुंचे थे और फिर जब उद्धव ठाकरे से इस बाबत पूछा गया तो उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि यह सीक्रेट मीटिंग थी। उन्होंने अपनी बात में भाजपा की कोई आलोचना नहीं की और कहा कि भविष्य में हम लिफ्ट में ही सीक्रेट मीटिंग्स किया करेंगे। ऐसा ही एक वाकया मंगलवार को फिर से हुआ। उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य से देवेंद्र फडणवीस की लिफ्ट में मुलाकात हुई। फिर दोनों हंसते हुए बाहर निकले। इसके बाद उन्हें विधानभवन की लॉबी में भी बात करते हुए देखा गया। डिप्टी सीएम और विपक्ष के लीडर की इस मुलाकात पर दोनों दलों ने कुछ नहीं कहा है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि यह औपचारिक ही था कि मिलने के बाद अभिवादन हुआ। इसका कोई अर्थ नहीं निकाला जा सकता। फिर भी राजनीति में कयास तो लगते ही हैं। दरअसल पिछले कुछ दिनों से उद्धव ठाकरे भाजपा को लेकर उतने हमलावर नहीं हैं। इससे भी इस तरह के कयास लगने लगे हैं। वहीं कुछ राजनीतिक जानकारों का कहना है कि विधानसभा चुनाव से पहले यह दबाव की राजनीति भी हो सकती है। एक तरफ उद्धव खेमा भाजपा नेताओं के साथ मुलाकातों के जरिए शरद पवार की एनसीपी और कांग्रेस पर दबाव बनाना चाहता है ताकि सीट बंटवारे में अच्छे से डील की जा सके। वहीं भाजपा को लगता है कि एकनाथ शिंदे और अजित पवार की सीटों की बढ़ती मांगों को कंट्रोल करने के लिए ऐसे ही दबाव बनाया जा सकता है। वह यह संदेश देना चाहती है कि हमारे पास विकल्प खुले हैं और कभी भी उद्धव ठाकरे के साथ फिर से समझौता किया जा सकता है।    

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