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राहुल ने कहा भारतीय जनता पार्टी में कोई भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पसंद नहीं करता

अहमदाबाद  कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी अहमदाबाद दौरे पर है। राहुल ने पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा की अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अयोध्या से चुनाव लड़ते तो अयोध्या उनका राजनितिक करियर खत्म कर देती। राहुल ने कहा भारतीय जनता पार्टी में कोई भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पसंद नहीं करता है। विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा, “…भाजपा की पूरी मूवमेंट राम मंदिर, अयोध्या की थी। शुरुआत आडवाणी जी ने की थी, रथयात्रा की थी… कहा जाता है नरेंद्र मोदी जी ने उस रथयात्रा में आडवाणी जी की मदद की थी। मैं संसद में सोच रहा था कि उन्होंने राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा की और प्राण प्रतिष्ठा में अडानी-अंबानी जी दिख गए लेकिन गरीब व्यक्ति नहीं दिखा… संसद में मैंने अयोध्या के सांसद से पूछा कि, ये भाजपा ने अपनी पूरी राजनीति चुनाव के पहले इन्होंने राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा की… लेकिन INDIA गठबंधन अयोध्या में चुनाव जीत गया, यह क्या हुआ? इससे पहले कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ बजरंग दल के विरोध प्रदर्शन किया है। JCP नीरज कुमार बडगुजर ने कहा, यहां पुलिस को तैनात किया गया है और संपूर्ण शांति है…जो कार्यकर्ता(बजरंग दल के) विरोध प्रदर्शन करने निकले थे, उनको पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। गुजरात के कांग्रेस प्रभारी मुकुल वासनिक (Mukul Wasnik) ने राहुल गांधी के दौरे को लेकर कहा कि वह यहां के लोगों को राहत पहुंचाने आए हैं. बता दें कि लोकसभा चुनाव के नतीजे आने और विपक्ष का नेता बनने के बाद से राहुल गांधी ने कई अहम मुद्दे सरकार के सामने उठाए हैं. इसके अलावा वह हाथरस हादसे के पीड़ितों से मिलने भी गए थे. मुकुल वासनिक ने कहा, ”लोकसभा चुनाव के नतीजे के बाद यह माना जा रहा था कि बीजेपी और राज्य सरकार अपने काम करने के तरीके में बदलाव करेगी. लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है. वह नफरत की राजनीति कर रहे हैं. गुजरात में कई घटनाएं हुई हैं जिससे लोग दुखी हैं. राहुल गांधी गुजरात के लोगों को राहत पहुंचाने आए हैं.” हमारी एक दो गलती के कारण वाराणसी से जीते पीएम मोदी – राहुल राहुल गांधी ने अहमदाबाद में कार्य़कर्ताओं को संबोधित करते हुए दावा किया, ”अयोध्या में कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं ने बीजेपी को हराया है. अयोध्या के एमपी ने बताया कि यहां तीन बार सर्वे हुआ था कि नरेंद्र मोदी वाराणसी से नहीं लड़ना चाहते थे. वह अयोध्या से लड़ना चाहते थे, सर्वेयर ने कहा कि अगर आप यहां से लड़ेंगे तो हार जाएंगे. आप अयोध्या में मत लड़िए नहीं तो आपका राजनीतिक करियर अयोध्या में खत्म हो जाएगा. इसलिए अय़ोध्या से नहीं बल्कि वाराणसी से लड़े. हमने एक दो गलती कर दी वर्ना वह वाराणसी से हार जाते.” राहुल गांधी से मिल अपनी बात रखेंगे पीड़ित – शक्ति सिंह बताया जा रहा है कि राहुल मोरबी ब्रिज और राजकोट गेम जोन हादसे के पीड़ितों से मुलाकात करेंगे. राहुल गांधी के गुजरात दौरे को लेकर पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शक्ति सिंह गोहिल ने भी जानकारी दी. उन्होंने बताया कि राहुल गांधी कार्यकर्ताओं से बैठक करेंगे. शक्ति सिंह ने कहा कि राहुल गांधी न्याय के लिए लड़ते हैं. लोगों ने बीजेपी पर भरोसा जताया था लेकिन उन्हें न्याय नहीं मिला. इसलिए वे लोग राहुल गांधीा के सामने अपनी बात रखना चाहते हैं.

दिग्विजय सिंह और कमलनाथ दोनों नेता अपनी गृह क्षेत्र में पराजय का सामना करना पड़ा- : वीडी शर्मा

भोपाल  मध्य प्रदेश बीजेपी के प्रमुख वी.डी. शर्मा ने शुक्रवार को कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह और कमलनाथ पर निशाना साधा है। उन्होंने दोनों कांग्रेस नेताओं की आलोचना करते हुए कहा कि दोनों नेता राजनीतिक जमीन खो चुके हैं। उन्होंने कहा,”दिग्विजय सिंह और कमलनाथ ने मध्य प्रदेश में अपनी राजनीतिक जमीन खो दी है और लोकसभा चुनाव परिणाम ने यह साबित कर दिया है। कांग्रेस उन्हें बड़े नेताओं के रूप में मानती है, लेकिन लोगों ने पार्टी को वास्तविकता का परीक्षण कर दिया है। ये दोनों नेताओं को अपनी गृह क्षेत्र में पराजय का सामना करना पड़ा।” खजुराहो लोकसभा सीट के एक विधानसभा क्षेत्र कटनी में वी.डी. शर्मा पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रहे थे। वीडी शर्मा ने कहा कि जो कांग्रेस नेता लोकसभा चुनाव में अपने गृह क्षेत्र में नहीं जीत सके, वे एनडीए सरकार को गिराने का सपना देख रहे हैं। राहुल गांधी ने हिंदू धर्म पर हमला किया: बीजेपी  उन्होंने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर हिंदू पर उनकी टिप्पणी के लिए भी हमला किया। उन्होंने दावा किया कि लोकसभा चुनाव में हार से निराश कांग्रेस नेता “हिंदू धर्म” पर हमला कर रहे हैं। गौरतलब है कि पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, जिन्होंने अपने गृह जिले राजगढ़ से लोकसभा चुनाव लड़ा था, भाजपा के मौजूदा सांसद रोडमल नागर से हार गए थे। लोकसभा में नौ बार छिंदवाड़ा का प्रतिनिधित्व करने वाले कमलनाथ के बेटे नकुलनाथ इस सीट से भाजपा के विवेक साहू बंटी से हार गए। बता दें कि भाजपा 29 में से 29 लोकसभा सीटें जीतने में कामयाब रही है। 

एक रेलवे स्टाफ का कहना है कि वह राहुल गांधी के निरीक्षण को फिल्म की शुटिंग समझकर देखने वहां पहुंचा था

नई दिल्ली कांग्रेस सांसद और नेता विपक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर जाकर करीब 50 लोको पायलट्स से मुलाकात की और उनकी परेशानियों को जाना. राहुल के रेलव स्टेशन के दौरे को लेकर भी अब सवाल खड़े हो रहे हैं. उत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी दीपक कुमार ने दावा किया कि राहुल गांधी ने जिन लोको पायलटों से मुलाकात की, वे कहीं और से लाए गए थे और वे भारतीय रेलवे लॉबी से नहीं थे. रेलवे के मुताबिक, राहुल गांधी 8 कैमरामैन के साथ नई दिल्ली स्टेशन पहुंचे थे. रेलवे के मुताबिक, ऐसा लग रहा था कि वे स्टेशन पर फिल्म या रील बना रहे हैं. उत्तर रेलवे के मुख्य पीआरओ दीपक कुमार ने कहा कि रेलवे द्वारा एक वीडियो भी जारी किया गया है, जिसमें दावा किया गया है कि राहुल अपने साथ कुछ कैमरामैन लेकर आए थे और रील बनाते हुए देखे गए हैं. वहीं एक स्टाफ का कहना है कि वह राहुल गांधी के निरीक्षण को फिल्म की शुटिंग समझकर देखने वहां पहुंचा था. बीजेपी ने साधा निशाना वहीं बीजेपी नेता अमित मालवीय ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, ‘ऐसा लगता है कि तीसरी बार असफल हुए राहुल गांधी दोपहर में लोको पायलटों से मिलने गए, उनके साथ आठ कैमरामैन और एक निर्देशक भी थे.आप उनकी गिनती कर सकते हैं…इससे भी ज़्यादा अजीब बात यह है कि वे रियल लोको पायलटों से नहीं मिले. पूरी संभावना है कि वे पेशेवर अभिनेता थे, जिन्हें उनकी टीम ने बुलाया था.’ राहुल गांधी ने की थी लोको पायलटों से मुलाकात इससे पहले राहुल गांधी ने अपनी इस मुलाकात को लेकर कहा था, ‘नई दिल्ली में देश भर से आए 50 लोको पायलटों से मुलाकात की. प्रतिदिन हज़ारों ट्रेन यात्रियों की ज़िम्मेदारी होती है इनके कंधों पर है मगर, देश के यातायात की ये रीढ़ सरकार की उपेक्षा और अन्याय का शिकार हैं. बिना उचित आराम और सम्मान के काम करने पर विवश हैं. उनकी समस्याएं सुन कर उनकी आवाज़ बुलंद करने का आश्वासन दिया – पहले भी किया है, और न्याय मिलने तक करता रहूंगा.’ कांग्रेस ने साधा था सरकार पर निशाना कांग्रेस ने कहा कि लोको पायलट 46 घंटे के बाद साप्ताहिक आराम मांगते हैं. इसका मतलब है कि शुक्रवार दोपहर को घर लौटने वाला ट्रेन चालक रविवार सुबह से पहले ड्यूटी पर नहीं लौटेगा. विमान के पायलटों को भी आमतौर पर इतना ही आराम मिलता है. लोको पायलट्स ने ये भी मांग की कि लगातार दो रातों की ड्यूटी के बाद एक रात का आराम मिलना चाहिए और ट्रेनों में ड्राइवरों के लिए बुनियादी सुविधाएं होनी चाहिए. आराम की कमी की वजह कर्मचारियों की कमी है, क्योंकि सरकार ने लोको पायलटों की सभी भर्तियां रोक दी हैं. कांग्रेस ने कहा कि पिछले 4 सालों में रेलवे भर्ती बोर्ड ने हजारों पदों पर रिक्तियों के बावजूद एक भी लोको पायलट की भर्ती नहीं की है. पायलटों ने आशंका जताई कि यह जानबूझकर उठाया गया कदम मोदी सरकार द्वारा रेलवे का निजीकरण करने की योजना है. पार्टी ने कहा कि राहुल गांधी ने लोको पायलटों को आश्वासन दिया कि वे रेलवे के निजीकरण और भर्ती की कमी का मुद्दा लगातार उठाते रहे हैं. उन्होंने उनकी चिंताओं को सुना और पर्याप्त आराम की उनकी मांग का पूरा समर्थन किया. साथ ही उम्मीद जताई कि इससे हादसों में काफी कमी आएगी.  

उद्धव ठाकरे और संजय राउत दो मुंह की पराकाष्ठा हैं, सोनिया गांधी के इशारे पर विष वमन कर रही नकली शिवसेना : प्रेम शुक्ला

मुंबई भाजपा नेता प्रेम शुक्ला ने शुक्रवार को शिवसेना (यूबीटी) नेता उद्धव ठाकरे पर जोरदार जुबानी हमला बोला। उद्धव ठाकरे की पार्टी को नकली शिवसेना बताते हुए उन्होंने सोनिया गांधी के इशारे पर चलने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उद्धव ठाकरे और संजय राउत दो मुंह की पराकाष्ठा हैं। जिस सोनिया गांधी को बाला साहेब ठाकरे ‘इटली वाली बाई’ कहते थे, उनके चरण पखारने में उनको कोई संकोच नहीं है। लेकिन, अगर टीम इंडिया के विजय उत्सव में गुजरात की बस का इस्तेमाल हो जाए तो इनको अत्यंत पीड़ा है। उन्होंने कहा कि अच्छा हुआ कि संजय राउत ने इस बात पर आपत्ति नहीं जताई कि हार्दिक पांड्या की गेंद पर कैच पकड़ने के लिए सूर्य कुमार यादव क्यों लपक पड़े? ‘इटली वाली बाई’ के इशारे पर जिस तरह से विष-वमन नकली शिवसेना के नेता कर रहे हैं, वह विभाजनकारी कांग्रेस की सोच का परिचय दे रहा है। दरअसल, भारतीय क्रिकेट टीम का मुंबई के मरीन ड्राइव पर विजय जुलूस निकला था। इस विजय जुलूस में गुजरात की बस का इस्तेमाल किया गया था। विजय जुलूस में ‘बेस्ट’ (बृहन्मुंबई इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई एंड ट्रांसपोर्ट) की बस का इस्तेमाल नहीं किए जाने पर राजनीति शुरू हो गई है। महाराष्ट्र कांग्रेस प्रवक्ता सचिन सावंत ने कहा था कि 2007 में टी-20 विश्व कप जीतने के बाद भारतीय टीम के विजय जुलूस में ‘बेस्ट’ की बस का इस्तेमाल किया गया था। लेकिन, इस बार गुजरात से बस मंगाई गई। क्या यह महाराष्ट्र का अपमान नहीं है? क्या इसका मतलब यह है कि मुंबई में गुणवत्तापूर्ण बसें नहीं बनतीं? मुख्यमंत्री क्यों चुप हैं?

राहुल गांधी ने लोको पायलट से मुलाकात की, विश्वास दिलाया कि वह ‘रेलवे के निजीकरण’ और भर्तियों की कमी का मुद्दा उठाएंगे

नई दिल्ली लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को रेलगाड़ियां चलाने वाले लोको पायलटों से मुलाकात की और उन्हें विश्वास दिलाया कि वह ‘रेलवे के निजीकरण’ और भर्तियों की कमी का मुद्दा उठाएंगे। कांग्रेस के अनुसार, उसके पूर्व अध्यक्ष दोपहर के समय नयी दिल्ली रेलवे स्टेशन पर पूरे भारत के लगभग 50 लोको पायलट से मिले। इस मुलाकात के दौरान लोको पायलटों ने बताया कि उन्हें आराम करने का पूरा समय नहीं मिलता। कांग्रेस ने इस मुलाकात का वीडियो एवं तस्वीर भी जारी की। पार्टी के अनुसार, लोको पायलटों की शिकायत है कि वे लंबी दूरी की रेलगाड़ियां चलाते हैं और अक्सर पर्याप्त विराम के बिना उन्हें फिर ड्यूटी पर भेज दिया जाता है। उन्होंने कहा कि इससे अत्यधिक तनाव होता है और एकाग्रता में कमी आती है जो दुर्घटनाओं का एक प्रमुख कारण है। कांग्रेस ने कहा कि विशाखापत्तनम में दुर्घटना की हालिया जांच सहित कई रिपोर्ट में इस बात को रेलवे द्वारा स्वीकार किया गया है। पार्टी ने कहा, ‘‘लोको पायलटों की मांग है कि उन्हें साप्ताह में 46 घंटे का आराम मिले। इसका मतलब यह है कि शुक्रवार दोपहर को घर लौटने वाला ट्रेन चालक रविवार की सुबह से पहले ड्यूटी पर लौट आएगा। रेलवे अधिनियम 1989 और अन्य नियमों में पहले से ही प्रति सप्ताह 30 जमा 16 घंटे आराम का प्रावधान है, जिसे लागू नहीं किया जा रहा है। हवाई जहाज के पायलटों को भी आम तौर पर इतनी ही छूट मिलती है।” कांग्रेस का कहना है कि लोको पायलट की यह भी मांग है कि लगातार दो रात की ड्यूटी के बाद एक रात का आराम होना चाहिए और ट्रेनों में चालकों के लिए बुनियादी सुविधाएं होनी चाहिए। राहुल गांधी और लोको पायलट की इस मुलाकात के दौरान यह मुद्दा भी उठा कि ‘‘सरकार द्वारा लोको पायलटों की सभी भर्ती रोक देने के और कर्मचारियों की कमी के कारण (उन्हें) कम आराम मिल पात है।” कांग्रेस ने कहा, ‘‘पिछले चार वर्ष में, रेलवे भर्ती बोर्ड ने हजारों रिक्तियों के बावजूद एक भी लोको पायलट की भर्ती नहीं की। पायलटों ने आशंका जताई कि यह जानबूझकर उठाया गया कदम मोदी सरकार की रेलवे का निजीकरण करने की योजना है।” राहुल गांधी ने लोको पायलटों को बताया कि वह रेलवे के निजीकरण और भर्ती की कमी का मुद्दा लगातार उठाते रहे हैं। कांग्रेस ने कहा, ‘‘राहुल गांधी ने उनकी चिंताओं को सुना और पर्याप्त आराम की उनकी मांग का पूरा समर्थन किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि इससे दुर्घटनाओं में काफी कमी आएगी। उनकी मांगों को सरकार के समक्ष उठाने का विपक्ष के नेता के रूप में उन्होंने वादा किया।”

भाजपा ने 23 प्रमुख राज्यों के प्रभारी घोषित किए, संबित पात्रा को मिली बड़ी जिम्मेदारी, जाने किस राज्य में कौन

नई दिल्ली भाजपा ने हरियाणा, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और ओडिशा जैसे बड़े राज्यों समेत देश भर के 23 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अपने प्रभारी और सह-प्रभारी घोषित कर दिए हैं। हाल ही में सांसद बने संबित पात्रा को भी इसमें बड़ी जिम्मेदारी मिली है और उन्हें पूर्वोत्तर का समन्वयक बनाया गया है। भाजपा ने जिन प्रमुख राज्यों के प्रभारी घोषित किए हैं, उनमें से बिहार में विनोद तावड़े को जिम्मेदारी मिली है। उनके साथ सह-प्रभारी के तौर पर दीपक प्रकाश रहेंगे, जो सांसद भी हैं। विनोद तावड़े फिलहाल राष्ट्रीय महासिचव हैं और संगठन में उनका बड़ा कद है। अरुणाचल प्रदेश में विधायक अशोक सिंघल को प्रभारी बनाया गया है। इसके अलावा अंडमान निकोबार का प्रभारी रघुनाथ कुलकर्णी को बनाया गया है। छत्तीसगढ़ के प्रभारी विधायक नितिन नबीन बनाए गए हैं। दादरा एवं नागर हवेली का प्रभारी दुष्यंत पटेल को बनाया गया है। गोवा की जिम्मेदारी आशीष सूद को मिली है। हरियाणा में राजस्थान के नेता को मिला प्रभार, यूपी के नेता बने सहप्रभारी हरियाणा में डॉ. सतीश पूनिया को प्रभारी बनाया गया है। वहीं सुरेंद्र सिंह नागर को सह-प्रभारी के तौर पर जिम्मा मिला है। वह राज्यसभा के सांसद भी हैं। हिमाचल प्रदेश का प्रभारी श्रीकांत शर्मा को बनाया गया है और उनके साथ संजय टंडन सह-प्रभारी के तौर पर रहेंगे। जम्मू-कश्मीर में तरुण चुग प्रभारी होंगे और उनके साथ आशीष सूद सह-प्रभारी बने हैं। झारखंड के प्रभारी होंगे लक्ष्मीकांत वाजपेयी, कर्नाटक में कौन उत्तर प्रदेश में भाजपा के वरिष्ठ नेता रहे लक्ष्मीकांत वाजपेयी को झारखंड का प्रभारी बनाया गया है। कर्नाटक में डॉ. राधामोहन दास अग्रवाल प्रभारी होंगे और उनके साथ सुधाकर रेड्डी को भी जिम्मा मिला है। केरल का प्रभारी प्रकाश जावड़ेकर को बनाया गया है। उनके साथ अपराजिता सारंगी सह-प्रभारी होंगी। मध्य प्रदेश के प्रभारी बने यूपी के ये नेता, दिल्ली से कौन अब मध्य प्रदेश की बात करें तो यहां विधान परिषद सदस्य महेंद्र सिंह को कमान मिली है, जो यूपी के हैं। उनके साथ दिल्ली के पूर्व अध्यक्ष सतीश उपाध्याय होंगे। मणिपुर में सांसद अजीत गोपछड़े और अनिल एंटनी को भेजा गया है। इसके अलावा मिजोरम का प्रभार देवेश कुमार को मिला है। नागालैंड का प्रभार अनिल एंटनी को दिया गया है। ओडिशा में विजयपाल सिंह तोमर और लता उसेंडी को प्रभार मिला है। पुदुचेरी में निर्मला कुमार सुराना प्रभारी होंगे। पंजाब के प्रभारी गुजरात के पूर्व सीएम विजय रूपानी होंगे और उनके साथ नरेंद्र सिंह होंगे। पूर्वोत्तर में संबित पात्रा समेत इन दो नेताओं को मिला जिम्मा इसके अलावा सिक्किम का प्रभारी दिलीप जायसवाल को बनाया गया है। उत्तराखंड के प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम और रेखा वर्मा रहेंगे। सबसे अहम यह है कि भाजपा ने पूर्वोत्तर राज्यों के लिए समन्वयक का भी ऐलान किया है। यह जिम्मेदारी संबित पात्रा को दी गई है, जबकि वी. मुरलीधरण सह-संयोजक होंगे।  

BJP के कार्यकर्ताओं में शिथिलता, अपने मूल समर्थक वर्ग को नहीं संभाला गया तो 2027 के विधानसभा चुनाव में काफी मुश्किल – सूत्र

नई दिल्ली लोकसभा चुनाव नतीजों के बाद हो रही विभिन्न राज्यों की समीक्षा बैठकों में भाजपा के मौजूदा सांसदों और विधायकों के खिलाफ आवाज उठी है। संगठन के तौर तरीकों, मंत्रियों के व्यवहार और टिकट वितरण को भी प्रतिकूल नतीजों की वजह बताई गई है। दूसरे दलों से आए नेताओं को ज्यादा तरजीह देने से मूल काडर की नाराजगी भी जाहिर हुई है। ऐसे में पार्टी के भीतर बड़े बदलावों को लेकर दबाव बढ़ने लगा है। बीते दो लोकसभा चुनावों में अपने दम पर स्पष्ट बहुमत हासिल कर रही भाजपा को इस बार सहयोगी दलों के सहारे बहुमत के आंकड़े तक पहुंचना पड़ा है। भाजपा का अपना प्रदर्शन खराब रहा और उसकी 63 सीटें घट गईं। सबसे ज्यादा झटका उत्तर प्रदेश में लगा, जहां उसकी सीटों और वोटों में भारी गिरावट आई है। भाजपा का वोट पिछले चुनाव के 49.98 फीसद से घटकर 41.37 फीसद रह गया है, वहीं सीटें 62 से घटकर 33 रह गईं। सूत्रों के अनुसार, उत्तर प्रदेश की समीक्षा बैठक में पार्टी के कई नेताओं ने राज्य से लेकर केंद्र तक की कई खामियों को उजागर किया है। साथ ही तत्काल प्रभावी कदम उठाने का आग्रह किया है। मूल काडर की उपेक्षा की बात आई सामने सूत्रों के अनुसार, प्रदेश के एक प्रमुख नेता ने कहा है कि हार के कारण साफ हैं। समीक्षा में ज्यादा समय गंवाने के बजाय अभी से उन कमियों को सुधारा जाना चाहिए, जिनसे प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। 2027 के लिए अभी से कार्यकर्ताओं से लेकर ऊपर तक काफी काम करना होगा। इसमें यह भी देखना होगा कि दूसरे दलों से आए नेताओं को तरजीह देने में मूल काडर की उपेक्षा न हो। सूत्रों के अनुसार, पार्टी में एक बात यह भी उभर रही है कि केंद्र सरकार में उत्तर प्रदेश से शामिल 11 मंत्रियों में केवल तीन ही मूल काडर से हैं। सहयोगी दलों से दो मंत्री हैं। बाकी छह मूल काडर से बाहर के हैं। ऐसे में राज्य में कार्यकर्ताओं में शिथिलता आना स्वाभाविक है। सूत्रों का यह भी कहना है कि अभी कार्यकर्ताओं में ही शिथिलता है और आगे सामाजिक समीकरणों में अपने मूल समर्थक वर्ग को नहीं संभाला गया तो 2027 के विधानसभा चुनाव में काफी मुश्किल हो सकती है। उत्तर प्रदेश की तरह ही हरियाणा, महाराष्ट्र एवं राजस्थान की समीक्षा रिपोर्ट भी भाजपा के लिए अच्छी नहीं है। पू्र्वोत्तर के विभिन्न घटनाओं को ठीक तरह से हल न कर पाने से वहां पर भी नुकसान हुआ है। पश्चिम बंगाल में तृणमूल से पीड़ित कार्यकर्ताओं की चिंता न हो पाने की भी बात उभरी है। राज्यों में सरकार के स्तर पर भी बदलाव संभव संकेत हैं कि पार्टी सभी राज्यों की समीक्षा रिपोर्ट आने के बाद बड़े बदलाव कर सकती है। यह बदलाव संगठन के स्तर पर तो होंगे ही, राज्यों में सरकार के स्तर पर भी हो सकते हैं। दूसरे दलों से या नौकरशाही से आने वाले नेताओं को लेकर भी पार्टी सतर्कता बरत सकती है। खासकर, उन राज्यों में जहां वह मजबूत है और उसे गठबंधन की भी जरूरत नहीं है। सामाजिक आधार पर अपने समर्थक वर्ग को भी साधना होगा। सबसे ज्यादा काम कार्यकर्ताओं की नाराजगी को दूर करने का होगा और उनकी बात को संगठन तथा सरकार के स्तर पर सुना जाए।  

कांग्रेस ने कहा- टेलिकॉम कंपनियों द्वारा बढ़ाए गए प्लान्स के दामों को लेकर केंद्र सरकार पर साधा निशाना

नई दिल्ली कांग्रेस ने शुक्रवार को टेलिकॉम कंपनियों द्वारा बढ़ाए गए प्लान्स के दामों को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस ने दावा किया है कि प्राइवेट टेलिकॉम कंपनियों ने वार्षिक शुल्क बढ़ाकर जनता की जेब से 34,834 करोड़ रुपये वसूले हैं। इसके अलावा, मोदी 3.0 में प्राइवेट टेलिकॉम कंपनियों की एक बार फिर से मुनाफाखोरी बढ़ने का आरोप लगाया। कांग्रेस ने सवाल किया है कि आखिर क्यों मोदी सरकार ने अपनी आंखें बंद कर रखी हैं? कांग्रेस सांसद व महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि तीन जुलाई से देश की प्राइवेट सेलफोन कंपनियों यानी कि रिलायंस जियो, भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया ने एक साथ अपना टैरिफ औसतन 15 फीसदी बढ़ा दिया है। इन तीनों प्राइवेट कंपनियों का मार्केट शेयर 91.6 फीसदी है यानी कि 119 करोड़ यूजर्स में से 109 करोड़ यूजर्स इन्हीं तीन कंपनियों के हैं। कांग्रेस ने कहा कि 23 अप्रैल को पेश की गई ट्राई रिपोर्ट के अनुसार, देश में सेलफोन इस्तेमाल करने वाले प्रति ग्राहक से प्रतिमाह औसत कमाई 152 रुपये की है। तीन जुलाई से रिलायंस जियो ने अपने यूजर्स के लिए शुल्क 12 फीसदी से बढ़ाकर 27 फीसदी तक बढ़ा दिया। वहीं, एयरटेल ने भी 11 फीसदी से 21 फीसदी तक की वृद्धि की है। वोडाफोन इंडिया ने 10 फीसदी से 24 फीसदी तक कीमतें बढ़ा दीं। इससे साफ है कि कीमतें बढ़ाने की तारीख तीनों कंपनियों ने आपस में मिलकर तय की। मोदी सरकार से सवाल करते हुए कांग्रेस ने कहा है कि बिना रेगुलेशन, नियम या निगरानी के बिना प्राइवेट कंपनियों को एकतरफा मर्जी व मनमानी से कीमतें बढ़ाने की अनुमति क्यों दी? क्या सरकार ने कीमतों में होने वाली वृद्धि को चुनाव पूरा होने तक रोक कर नहीं रखा था, ताकि उनसे अतिरिक्त वसूली के लिए जवाब न मांगा जाए? ऐसा कैसे हो सकता है कि सभी निजीी कंपनियां अपना औसत टैरिफ समान रूप से 15-16 फीसदी बढ़ाएं, जबकि उनकी प्रॉफिटेबिलिटी, निवेश, कैपेक्स की जरूरत अलग-अलग हैं। फिर भी मोदी सरकार ने इस पर अपनी आंखें क्यों मूंद रखी हैं।  

मध्य प्रदेश में प्रभारी बदले, मुरलीधर राव को हटाकर उत्तर प्रदेश से एमएलसी महेंद्र सिंह को बनाया एमपी का प्रभारी

  भोपाल बीजेपी प्रदेश कार्य समिति की बैठक से पहले भारतीय जनता पार्टी के संगठन में बड़ा बदलाव किया गया है। मध्य प्रदेश में प्रभारी बदले गए हैं। मुरलीधर राव को हटाकर उत्तर प्रदेश से एमएलसी महेंद्र सिंह को एमपी का प्रभारी बनाया गया हैं। वहीं सतीश उपाध्याय को फिर से सह प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह नियुक्ति बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने की है। इस संबंध में राष्ट्रीय महासचिव व मुख्यालय प्रभारी अरुण सिंह ने आदेश जारी किया है। यूपी विधानमंडल के सदस्य रहे डॉ.महेंद्र सिंह को मप्र बीजेपी का प्रभारी व दिल्ली भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रहे सतीश उपाध्याय को सह प्रभारी बनाया गया है। दोनों ही नेताओं को पहले मप्र में लोकसभा चुनाव में प्रभारी बनाया गया था। जबकि विधानसभा चुनाव में यह भूमिका भूपेंद्र यादव व अश्विनी वैष्णव ने अदा की थी। डॉ. महेंद्र सिंह यूपी सरकार में जल शक्ति मंत्री भी रहे हैं। इसके अलावा बीजेपी के पूर्व राष्ट्रीय सचिव, असम के पूर्व प्रभारी और त्रिपुरा में बीजेपी के चुनाव प्रभारी भी रह चुके हैं।

पीएम नरेंद्र मोदी के सामने नायडू ने मांग रखी कि आंध्र प्रदेश के लिए अलग से बजट आवंटित किया जाए

नईदिल्ली आंध्र प्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू दो दिनों के दिल्ली दौरे पर हैं। इस दौरान उन्होंने गुरुवार को पीएम नरेंद्र मोदी से 20 मिनट की मुलाकात की। मीटिंग का वक्त भले ही कम था, लेकिन चंद्रबाबू नायडू की डिमांड लिस्ट बहुत लंबी थी। उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी के सामने मांग रखी कि आंध्र प्रदेश के लिए अलग से बजट आवंटित किया जाए। इसके अलावा अलग-अलग मंत्रालय भी अपनी परियोजनाओं में आंध्र प्रदेश को प्राथमिकता दें। इसी के तहत उन्होंने सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी, कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान समेत कई मंत्रियों से मुलाकात की। केंद्र की एनडीए सरकार में बड़ी हिस्सेदारी रखने वाले चंद्रबाबू नायडू इस बात का अहसास है कि आंध्र को विशेष राज्य का दर्जा नहीं मिल सकता। ऐसे में उनकी मांग स्पेशल पैकेज पर आ गई है। सूत्रों का कहना है कि उन्होंने पीएम मोदी से आंध्र पर 13 लाख करोड़ रुपये के कर्ज का मुद्दा उठाया। नायडू ने कहा कि ऐसी स्थिति पहले की जगन मोहन रेड्डी सरकार के दौर में बनी, जबकि राज्य में कोई इन्फ्रास्ट्रक्चर भी तैयार नहीं हुआ है। नायडू ने इस मीटिंग में लंबी डिमांड लिस्ट रखते हुए कहा कि पोलावरम सिंचाई परियोजना के लिए भी मोदी सरकार रुके हुए फंड को जारी करे। उनकी एक बड़ी मांग यह भी थी कि अमरावती को राजधानी के तौर पर तैयार करना है। उसके लिए फंड की कमी है। इसलिए मोदी सरकार की ओर से यदि मदद मिल जाए तो यह काम तेजी से पूरा हो सकेगा। इसके अलावा राज्य में सड़कों, बांध, पुलों, सिंचाई परियोजनाओं के तेजी से विकास के लिए उन्होंने अलग से पैकेज की मांग की है। उनका कहना था कि बुंदेलखंड के लिए सरकार ने जिस तरह से अलग परियोजना तैयार की और स्पेशल पैकेज जारी किया गया। उसी तरह आंध्र प्रदेश को लेकर भी विचार किया जाए। गडकरी शिवराज को भी सौंप दिया मांग पत्र पीएम नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद नायडू ने सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से भी मीटिंग की। इस दौरान उन्होंने राज्य में हाईवेज के विकास के लिए फंड की मांग की। कई परियोजनाओं का खाका भी नितिन गडकरी के सामने पेश किया। यही नहीं इसके बाद उन्होंने कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से भी बात की। कहा जा रहा है कि शुक्रवार को वह कुछ और मंत्रियों से भी मुलाकात करेंगे। इस दौरान वह मांग करेंगे कि मंत्रालयों की ओर से आंध्र के लिए भी स्पेशल योजनाएं तैयार की जाएं।  

इंदौर के सांसद शंकर लालवानी ने कुल पड़े वोटों का 78.54 फीसदी वोट मिला

नई दिल्ली हाल ही में हुए लोकसभा चुनावों में मात्र सात सांसद ऐसे हैं जो 70 फीसदी वोट पाकर संसद पहुंचे हैं। बड़ी बात ये है कि ये सभी सांसद सत्तारूढ़ भाजपा से हैं। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) और नेशनल इलेक्शन वॉच (NEW) की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि 18वीं लोकसभा में केवल सात सांसद ही 70 फीसदी वोटों से जीतकर आए हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इसके उलट कांग्रेस के तीन सांसद ऐसे हैं जो 30 फीसदी से भी कम वोट पाकर संसद पहुंचे हैं। ADR और NEW ने कुल 543 लोकसभा सीटों में से 542 के वोट शेयर का विश्लेषण किया है। एक सीट सूरत से भाजपा के सांसद निर्विरोध चुने गए थे। रिपोर्ट में कहा गया है कि 542 में से आधे से अधिक यानी 279 सांसद 50 फीसदी से ज्यादा वोटों से जीतकर संसद पहुंचे हैं, जबकि 263 सांसद 50 फीसदी से कम वोट पाकर जीतने में कामयाब रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि भाजपा के सभी 239 सांसदों में से 75 यानी 31 फीसदी सांसदों ने 50 फीसदी से कम वोट से जीत हासिल की है। वहीं कांग्रेस के कुल 99 सांसदों में से  57, सपा के कुल 37 सांसदों में से 32, तृणमूल कांग्रेस के 29 में से 21 और डीएमके के 22 में से 14 सांसद अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में 50 फीसदी से भी कम वोट पाकर जीते हैं। 50 फीसदी वोट से ऊपर हासिल कर जीतने वालों में भाजपा के 164 और कांग्रेस के 42 सांसद ही 50 फीसदी से ज्यादा वोट प्राप्त कर जीत दर्ज कर सके हैं। भाजपा के जिन सात शख्सियतों ने 70 फीसदी से ज्यादा वोट हासिल कर बड़ी जीत दर्ज की है, उनमें इंदौर के सांसद शंकर लालवानी प्रमुख हैं, जिन्हें कुल पड़े वोटों का 78.54 फीसदी मिला है। यानी वो अपने निर्वाचन क्षेत्र में 78.54% वोट हासिल कर लोकसभा पहुंचे हैं। दूसरे नंबर पर नवासारी के सांसद सीआर पाटिल हैं, जिन्हें 77 फीसदी से ज्यादा वोट मिले हैं। विदिशा से जीतने वाले केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को भी 77 फीसदी वोट मिले हैं, जबकि गांधीनगर सीट पर अमित शाह को 76.5 फीसदी, त्रिपुरा वेस्ट सीट पर बिप्लब कुमार देव को 72.85 फीसदी, वडोदरा के सांसद हेमांग जोशी को 72.04 फीसदी और पंचमहल से सांसद राजपाल सिंह महेंद्रसिंह जादव को 70.22 फीसदी वोट मिले हैं। 70 फीसदी से ज्यादा वोट शेयर से जीतने वाले सभी सात सांसदों में से गुजरात से चार, मध्य प्रदेश से दो और त्रिपुरा से एक हैं।  

लोकसभा में बीजेपी को खुली चुनौती देने के बाद राहुल गांधी जल्द गुजरात में अपनी सक्रियता बढ़ा सकते है

अहमदाबाद  कांग्रेस नेता राहुल गांधी जल्द ही गुजरात के मोर्चे पर सक्रिय होंगे। राहुल गांधी ने लोकसभा में नेता विपक्ष के तौर पर बोलते हुए बीजेपी को गुजरात में हराने की चुनौती दी थी। इसके बाद सवाल खड़ा हुआ था कि राहुल गांधी ने बीजेपी को इतनी बड़ी चुनौती कैसे दे दी? अब राहुल गांधी के गुजरात में सक्रिय होने के संकेत मिले हैं। राज्य में हिंदू वाले बयान को लेकर जहां कांग्रेस और बीजेपी आमने-सामने हैं तो वहीं इसी बीच राहुल गांधी गुजरात का पहला दौरा सकते हैं। इसके संकेत पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शक्ति सिंह गोहिल ने दिए हैं। गोहिल ने कहा कि बीजेपी के हमले के दौरान बब्बर शेर की तहत मुकाबला करने वाले कार्यकर्ताओं से मिलने के लिए राहुल गांधी जल्द राज्य का दौरा करेंगे। गोहिल ने कहा कि कांग्रेस दफ्तर के बाहर हुई झड़प के मामले में पुलिस ने एकतरफा कार्रवाई की है। गोहिल ने 6 जुलाई को पूरे राज्य के कार्यकर्ताओं को अहमदाबाद आने की अपील की है। संभावना जताई जा रही है कि अगर अहमदाबद पुलिस बीजेपी कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई नहीं करती है तो राहुल गांधी छह जुलाई को भी अहमदाबाद पहुंच सकते हैं।अहमदाबाद में सात जुलाई को 18 किलोमीटर लंबी भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा निकलनी है। लंबे समय बाद आमना-सामना गुजरात में कांग्रेस तीन दशक से सत्ता से बाहर है, लेकिन राज्य में पिछले कई सालों में ऐसी कोई घटना नहीं हुई। जिसमें दोनों पार्टियों के कार्यकर्ताओं के बीच सीधी झड़प हुई हो। अहमदाबाद में कांग्रेस कार्यालय के बाहर पुलिस की मौजूदगी में पथराव हुआ था। 2013 तक ऐसी घटनाएं दोनों पार्टियों की युवा इकाईयों के बीच छात्र राजनीति में होती थीं। कांग्रेस का कहना है कि राहुल गांधी ने हिंदू धर्म को लेकर जो भी कहा है वह एकदम सही है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष शक्ति सिंह गोहिल को राहुल गांधी का करीबी माना जाता है। लोकसभा में बीजेपी को क्लीन स्वीप से रोकने और राजकोट अग्निकांड हादसे पर पूरे शहर के बंद करके गोहिल ने अपना कद बढ़ाया है। ऐसा माना जा रहा है कि अब राहुल गांधी सीधे तौर पर गुजरात में अपनी सक्रियता बढ़ा सकते हैं। लोकसभा चुनावों नहीं आए थे लोकसभा चुनावों में राहुल गांधी गुजरात के दौरे पर नहीं आए थे। प्रियंका गांधी ने सिर्फ वलसाड और बनासकांठा में सभाएं की थी। गोहिल के बयान को राजनीतिक हलकों में बड़ी तैयारी से जोड़कर देखा जा रहा है। संभावना है कि राहुल गांधी राज्य में पंचायत चुनावों से पहले पूरी तरह से सक्रिय हो सकते हैं। इसी के साथ कांग्रेस पार्टी के राज्य में नए सिरे से संगठन को मजबूत करने की कवायद भी शुरू हो सकती है। कांग्रेस के एक नेता ने कहा कि आने वाले दिनों में राज्य की दो विधानसभा सीटों पर उप चुनाव होना है। पार्टी दोनों सीटों पर मजबूती से लड़ेगी। माणावदर सीट को पार्टी इंडिया अलांयस के तहत आम आदमी पार्टी के लिए छोड़ सकती है। इसी महीने एंट्री संभव राहुल गांधी ने लोकसभा में बीजेपी को सीधी चुनौती फेंकते हुए कहा था कि हम आपको गुजरात में हराएंगे। उनके बयान का मतलब 2027 के चुनावों से था। गुजरात की 182 सदस्यों वाली विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 92 सीटों का है। कांग्रेस ने पिछले चुनावों में 17 सीटें जीती थीं, हालांकि 2017 के चुनावों में पार्टी ने 77 सीटें जीती थीं। तब बीजेपी पिछले दो दशक में पहली बार दो अंकों पर आ गई थी। बीजेपी को 99 सीटें मिली थी। पार्टी को उस चुनाव में 41.44 फीसदी वोट मिले थे। बीजेपी के खाते में 49.05 प्रतिशत वोट गए थे। राहुल गांधी के नेता विपक्ष बनने के बाद प्रदेश इकाई गुजरात में उनकी सक्रियता बढ़ाना चाहती है। इसकी शुरुआत इसी महीने हो सकती है। चर्चा यह भी है कि राहुल गांधी अपने दौरे में राजकोट टीआरपी गेम जोन के पीड़ितों से मिलने के लिए भी जा सकते हैं। राहुल गांधी अपने दौरों में मोरबी ब्रिज हादसे, वडोदरा हरनी नाव हादसे के पीड़ितों से भी मिलने जा सकते हैं। गुजरात प्रदेश कांग्रेस समिति पीड़ितों को न्याय दिलाने को लेकर बड़े कार्ययोजना पर काम कर रही है। सूत्रों की मानें तो पार्टी आने वाले दिनों के इसका ऐलान कर सकती है। टीम राहुल गांधी का हिस्सा जिग्नेश मेवाणी राजकोट में सक्रिय हैं।  

पंजाब CM ने बड़ी उम्मीद से कराया था AAP में शामिल, शाम होते ले लिया यू-टर्न, अकाली दल में वापसी की

चंडीगढ़ पंजाब के जालंधर पश्चिम विधान सभा सीट पर 10 जुलाई को उप चुनाव होने वाले हैं लेकिन उससे पहले शिरोमणि अकाली दल में गुटबाजी चरम पर पहुंच गई है। दो बार की पार्षद रही अकाली नेता सुरजीत कौर ने पार्टी उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल किया। पार्टी ने उन्हें चुनाव चिह्न भी आवंटित कर दिया लेकिन भितरघात के बाद पार्टी ने ऐलान किया कि इस अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित इस सीट पर होने वाले उपचुनाव में आधिकारिक रूप से बसपा उम्मीदवार को समर्थन किया जाएगा।   इसके बाद मंगलवार को सुरजीत कौर ने शिरोमणि अकाली दल छोड़ दी और दोपहर होते-होते राज्य की सत्ताधारी पार्टी आम आदमी पार्टी का झाड़ू थाम लिया। खुद मुख्यमंत्री भगवंत मान ने उनका पार्टी में स्वागत किया। कौर ने ऐलान किया कि वो जालंधर उप चुनाव में आप उम्मीदवार मोहिंदरपाल भगत का समर्थन करेंगी लेकिन शाम होते-होते 60 साल की कौर ने एक बार फिर मन बदल लिया और यू-टर्न लेते हुए फिर से अकाली दल में वापसी कर ली। इस तरह मंगलवार को सुरजीत कौर ने दो बार पार्टी बदली। शाम में घर वापसी करते हुए सुरजीत कौर ने कहा कि वह दिल से अकाली हैं और उन्हें सत्ताधारी पार्टी यानी आप में शामिल होने के लिए मजबूर किया गया था। उन्होंने जोर देकर कहा कि वह अकाली दल के उम्मीदवार के तौर पर ही जालंधर उप चुनाव लड़ेंगी। इस बीच, आप के कार्यकारी अध्यक्ष और बुलढाणा विधायक बुधराम कौर ने सुरजीत कौर की आलोचना की है और कहा है कि उन्होंने दबाव में अपने कदम पीछे खींचे हैं। दरअसल, ऐसे आरोप हैं कि सुरजीत कौर शिरोमणि अकाली दल के बागी गुट के नेताओं के संपर्क में थीं। इसी वजह से पार्टी ने उनकी उम्मीदवारी वापस लेने का ऐलान किया गया था। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (SGPC) पूर्व प्रमुख बीबी जागीर कौर को सुरजीत कौर का समर्थक माना जाता है, जबकि जागीर कौर पार्टी के विद्रोही और बागी गुट की नेता हैं। जागीर कौर के अलावा पूर्व विधायक गुरप्रताप सिंह बडाला ने भी सुरजीत कौर का समर्थन किया था। ये विद्रोही नेता सोमवार को अकाल तख्त के जत्थेदार के सामने पेश हुए थे। इस दौरान उन्होंने 2007 और 2017 के बीच सत्ता में रहने के दौरान पार्टी द्वारा की गई गलतियों के लिए माफी मांगी। दूसरी तरफ  शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के 106 सदस्यों ने शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल का समर्थन किया है।  

राहुल गाँधी बने राजमिस्त्री, श्रमिकों के साथ बनाया मसाला, की चुनाई

नई दिल्ली रायबरेली से सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने दिल्ली में मजदूरों के साथ मुलाकात की। गुरुवार को उन्हें जीटीबी नगर में कुछ श्रमिकों से ना सिर्फ उनका हालचाल जाना बल्कि उनके साथ काम भी किया। राहुल गांधी उनके साथ मसाला बनाते हुए और चिनाई करते हुए दिखे। कांग्रेस पार्टी के आधिकारिक एक्स हैंडल से तस्वीरें साझा करते हुए यह जानकारी दी गई। कांग्रेस पार्टी ने राहुल गांधी की तस्वीरों के साथ लिखा, ‘आज नेता विपक्ष राहुल गांधी ने दिल्ली के GTB नगर में श्रमिकों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। ये मेहनती मजदूर हिंदुस्तान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। इनके जीवन को सरल और भविष्य को सुरक्षित करना हमारी जिम्मेदारी है।’ तस्वीरों में राहुल गांधी रेत-सीमेंट मिलाते हुए और चिनाई करते हुए भी दिख रहे हैं। उन्होंने श्रमिकों के बीच बैठकर बातचीत भी की। राहुल गांधी गुरुवार को जीटीबी नगर के गांव गोपालपुर में अचानक पहुंचे। अपना काफिला छोड़कर वह गलियों से गुजरते हुए एक निर्माणाधीन मकान तक पहुंचे। इस दौरान मौके पर भारी भीड़ जुट गई। पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था के बीच राहुल गांधी उस मकान में दाखिल हुए जहां मजदूर कामकाज में जुटे थे। राहुल गांधी इससे पहले भी अलग-अलग वर्ग के कामगारों से मुलाकात कर चुके हैं। पिछले दिनों वह दिल्ली के आनंद विहार रेलवे स्टेशन पर कुलियों से मिले थे और सिर पर सामाना भी उठाया था। कभी ट्रक चालक के साथ सफर करके उनकी समस्याओं को जाना तो कभी मोटर मैकेनिक के साथ काम करते दिख चुके हैं।  

आगामी विधानसभा चुनावों में भी ‘इंडिया’ गठबंधन बरकरार रहेगा, कहा- ‘यह झारखंड चुनाव के लिए बरकरार रहेगा: रमेश

नई दिल्ली लोकसभा चुनाव में एक दूसरे के साथ लड़े आम आदमी पार्टी और कांग्रेस अब एक दूसरे से लड़ने जा रहे हैं। कांग्रेस ने साफ कर दिया है दिल्ली और हरियाणा के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन की कोई गुंजाइश नहीं है। इंटरव्यू में पार्टी के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश से जब पूछा गया कि क्या दिल्ली और हरियाणा में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच गठबंधन होगा तो उन्होंने कहा, ‘कोई गुंजाइश नहीं है।’ रमेश ने बातचीत में यह भी कहा कि जिन राज्यों में कांग्रेस और सहयोगी दलों के नेता चाहेंगे वहां यह गठबंधन बरकरार रहेगा। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी दोनों ‘इंडिया’ गठबंधन के घटक हैं। लोकसभा चुनाव में दोनों दलों ने दिल्ली एवं हरियाणा में मिलकर चुनाव लड़ा था, लेकिन पंजाब में दोनों अलग अलग मैदान में उतरे थे। महाराष्ट्र, झारखंड, हरियाणा में इसी साल अक्टूबर-नवंबर में विधानसभा चुनाव होने हैं। दिल्ली में अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। यह पूछे जाने पर कि क्या आगामी विधानसभा चुनावों में भी ‘इंडिया’ गठबंधन बरकरार रहेगा, रमेश ने कहा, ‘यह झारखंड के विधानसभा चुनाव के लिए बरकरार रहेगा, महाराष्ट् के विधानसभा चुनाव के लिए बरकरार रहेगा। पंजाब में ‘इंडिया जनबंधन’ नहीं है। हरियाणा में (लोकसभा चुनाव में) एक सीट आम आदमी पार्टी को दी गई थी, मैं नहीं समझता कि वहां (विधानसभा चुनाव में) ‘इंडिया जनबंधन’ बरकरार रहेगा।’ उनका कहना था कि दिल्ली में तो आम आदमी पार्टी की ओर से बयान आ गया है कि विधानसभा चुनाव के लिए ‘इंडिया जनबंधन’ नहीं होगा। रमेश ने कहा, ‘मैंने पश्चिम बंगाल के संदर्भ में कहा था कि ‘इंडिया जनबंधन’ लोकसभा चुनाव के लिए है। जिन जिन राज्यों में हमारे नेता और दूसरी पार्टियों के नेता चाहते हैं कि गठबंधन हो, वहां गठबंधन रहेगा।’ उन्होंने यह भी कहा कि महाराष्ट्र में शिवसेना (यूबीटी) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपर) के साथ गठबंधन है तथा झारखंड में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के साथ गठबंधन है।  

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