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भोपाल: मध्यप्रदेश में निगम-मंडलों में नियुक्तियों की चर्चाएं तेज, नेता नियुक्तियों की राह देख रहे

Bhopal: Discussions on appointments in corporations and boards intensify in Madhya Pradesh, leaders are waiting for appointments. भोपाल: मध्यप्रदेश में जल्द ही निगम-मंडलों में नियुक्तियां हो सकती हैं, जिसको लेकर सियासी गलियारों में खूब चर्चा हो रही है। बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही पार्टियों के कई नेता इन पदों के लिए इंतजार कर रहे हैं। इंतजार करें भी क्यों न टिकट कटने के बाद पार्टी उन्हें ‘जरूरी’ मानते हुए किसी न किसी पद पर तो स्थान देगी ही। बस इसी उम्मीद में ‘नेता जी’ आस लगाए बैठे हैं। और पार्टी के फैसले का इंतजार कर रहे हैं। वैसे इसे लेकर पार्टी से भी संकेत मिलने लगे हैं। एमपी के सियासी गलियारों में यह चर्चा पिछले दो तीन महीनों से जोरों शोरों पर है। जब दो महीने पहले सीएम मोहन यादव का दिल्ली दौरा हुआ था तब भी मामले ने जमकर तूल पकड़ा था। कयास लगाए जा रहे थे कि दिल्ली में आलाकमान से मिलने के बाद नेताओं के नाम फाइनल किए जा रहे हैं। इन नेताओं के नाम रेस मेंबीजेपी के विनोद गोटिया, हेमंत खंडेलवाल और राजेंद्र सिंह राजपूत जैसे दिग्गज नेता इन पदों की कतार में आगे हैं। वहीं कांग्रेस से दीपक सक्सेना और गजेंद्र सिंह राजूखेड़ी का नाम भी चर्चा में है। हालांकि, पार्टियों के द्वारा कोई भी निर्णय पब्लिक नहीं किया गया है। इसके कारण कई नेताओं के सब्र का बांध भी भरता जा रहा है। विरोधाभासी रहा इतिहासदिलचस्प बात यह है कि शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाली पिछली बीजेपी सरकार ने इन पदों पर नियुक्तियां की थी। बाद में फरवरी 2024 के समय मोहन सरकार ने निगम मंडल की नियुक्तियां को निरस्त कर दिया था। अब देखना होगा कि किन-किन नेताओं को इन पदों पर जगह मिलती है।

बांधवगढ़ में हाथियों की मौत: मुख्यमंत्री ने लिया एक्शन, फील्ड डायरेक्टर-प्रभारी एसीएफ निलंबित

Death of elephants in Bandhavgarh: Chief Minister took action, field director-in-charge ACF suspended बांधवगढ़ में हुई हाथियों की मौत के मामले में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एक्शन में हैं. सीएम ने बैठक आयोजित की, जिसमें राज्य स्तरीय ‘हाथी टास्क फोर्स’ गठित करने का निर्णय लिया गया. साथ ही सीएम ने बांधवगढ़ फील्ड डायरेक्टर और प्रभारी एसीएफ को निलंबित करने के निर्देश दिए. सीएम मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में उमरिया जिले के वन क्षेत्र में पिछले दिनों 10 हाथियों की अलग-अलग दिन हुई मृत्यु की घटना दुखद एवं दर्दनाक है, जिसे राज्य शासन ने गंभीरता से लिया है. वन राज्य मंत्री सहित वरिष्ठ अधिकारियों के दल ने क्षेत्र का भ्रमण किया है. प्रारंभिक रिपोर्ट में कोई कीटनाशक नहीं पाया गया है. पोस्ट मार्टम की विस्तृत रिपोर्ट आना शेष है. हाथियों के बड़े दल के रूप में आने की घटना गत दो तीन वर्ष में एक नया अनुभव भी है. उमरिया और सीधी जिले में बड़ी संख्या में हाथियों की मौजूदगी दिख रही है. ऐसे में फील्ड डायरेक्टर एवं अन्य अधिकारियों को सतर्क और सजग रहने की जरूरत है. अवकाश पर जाना पड़ा महंगा सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा कि हाथियों की मृत्यु की इतनी बड़ी घटना के समय फील्ड डायरेक्टर का अवकाश से वापस न आना और पूर्व में हाथियों के दल के संदर्भ में जो आवश्यक चिंता की जानी चाहिए, वह नहीं की गई. इस लापरवाही के लिए फील्ड डायरेक्टर गौरव चौधरी को सस्पेंड किया गया. साथ ही प्रभारी एसीएफ फतेह सिंह निनामा को भी निलंबित किया गया. केरल-कर्नाटक-असम जाकर करे अध्ययन सीएम ने कहा कि बांधवगढ़ क्षेत्र एवं अन्य वन क्षेत्रों में हाथियों की रहने की अनुकूल और आकर्षक स्थिति हे. वन क्षेत्रों का प्रबंधन उत्तम होने से हाथियों के दल जो छत्तीसगढ़ एवं अन्य राज्यों से आया करते थे और वापस चले जाते थे वह अब वापस नहीं जा रहे हैं. यहां बड़े पैमाने पर हाथियों द्वारा डेरा डालने की स्थिति देखी जा रही है. यह मध्यप्रदेश की वन विभाग की गतिविधियों का हिस्सा बन गए हैं. ऐसे में हाथियों की आवाजाही को देखते हुए स्वाभाविक रूप से स्थाई प्रबंधन के लिए शासन के स्तर पर हाथी टास्क फोर्स बनाने का निर्णय लिया जा रहा है. हाथियों को अन्य वन्य प्राणियों के साथ किस तरह रहवास की सावधानियां रखना चाहिए, इसके लिए योजना बनाई जा रही है. इसमें कर्नाटक, केरल और असम राज्यों की बेस्ट प्रेक्टिसेस को शामिल किया जाएगा. इन राज्यों में बड़ी संख्या में हाथी रहते हैं. इन राज्यों में मध्यप्रदेश के अधिकारियों को भेजा जाएगा, जिससे सहअस्तित्व की भावना के आधार पर हाथियों के साथ बफर एरिया, कोर एरिया में बाकी का जन जीवन प्रभावित न हो, इसका अध्ययन किया जाएगा. हाथियों की सुरक्षा को खतरा न हो. इस पर हमने गंभीरता से विचार किया है.

बांधवगढ़ पहुंचकर नए विवाद में उलझे वन राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार

State Forest Minister Dilip Ahirwar got embroiled in a new controversy after reaching Bandhavgarh उदित नारायणभोपाल। वन राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार ने स्वयं वन्य प्राणी प्रोटेक्शन एक्ट की धज्जियां उड़ाते नजर आए। वह अपने गनमैन के साथ शनिवार को बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की कुछ स्थल पर पहुंचे, जहां जहरीला पदार्थ खाने से जंगली हाथी दम तोड़ रहे थे। देश का यह पहला मामला है जब बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में तीन दिन में 10 जंगली हाथियों की मौत हो गई।मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देश पर शनिवार को वन राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार विभाग के अपर मुख्य सचिव और वन बल प्रमुख असीम श्रीवास्तव के साथ बांधवगढ़ पहुंचे थे। वन्य प्राणी एक्सपर्ट अधिकारियों की मौजूदगी में वन राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार अपने गनमैन के साथ बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में पहुंच गए। वहां उपस्थित किसी भी अधिकारी ने राज्य मंत्री को यह बताने की कोशिश नहीं की कि वन्य प्राणी प्रोटेक्शन एक्ट के तहत अश्वशास्त्र के साथ टाइगर रिजर्व अथवा सेंचुरी में जाना वर्जित है। वन्य प्राणी प्रोटेक्शन एक्ट की धारा 31के अनुसार – अस्त्र-शस्त्र के साथ अभयारण्य में प्रवेश का निषेध है। इसमें यह भी प्रावधान किया है कि कोई भी व्यक्ति मुख्य वन्य जीव संरक्षक या प्राधिकृत अधिकारी से लिखित पूर्व अनुमति के बिना किसी भी हथियार के साथ अभयारण्य अथवा टाइगर रिजर्व में प्रवेश नहीं करेगा। सूत्रों के अनुसार वनराज्य मंत्री दिलीप अहिरवार ने गनमैन के साथ टाइगर रिजर्व में जाने हेतु पीसीसीएफ वन्य प्राणी वीएन अम्बाड़े से लिखित में पूर्व से अनुमति नहीं ली थी। अब सवाल यह भी उठने लगा है कि क्या फॉरेस्ट के अधिकारी अपने राज्य मंत्री के खिलाफ एक्शन की हिम्मत जुटा सकेंगे..?

जंगलों में अतिक्रमण रोकने पर वन माफिया का कहर, वन अमले पर जानलेवा हमला फिर भी पुलिस ने नहीं किया मामला दर्ज

Forest mafia wreaked havoc on forest encroachment, deadly attack on forest staff but police did not register a case मध्य प्रदेश में जंगलों में अतिक्रमण करने वाले वन माफिया के हौसले अब इतने बुलंद हो चुके हैं कि वे उन्हें रोकने की कोशिश करने वाले वन अमले पर भी हमला करने से बाज नहीं आ रहे हैं। प्रदेश के निमाड़ क्षेत्र से वन अमले पर इसी तरह से कई प्राण घातक हमले करने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। ताजा मामला निमाड़ के ही खंडवा जिले के गुड़ी वन परीक्षेत्र का है, जहां जंगल में किये जा रहे अतिक्रमण की जानकारी मिलते ही वन अमला हरकत में आया और उसे रोकने पहुंचा था। इस दौरान जंगल की जमीन पर जुताई कर रहा एक ट्रैक्टर चालक वन अमले को देख, उसका कल्टीवेटर जंगल में ही छोड़कर फरार हो गया। वहीं जब वन अमला उस कल्टीवेटर को जब्त कर वापस लौट रहा था। इस बीच करीब 30 से 35 महिलाओं के झुंड ने वन अमले पर लाठी, पत्थरों और डंडों से हमला कर दिया और उन्हें वहां से भाग जानें, नहीं तो जान से मार देने की धमकियां देने लगा। यही नहीं, कुछ महिलाओं ने तो वन अमले के साथ झूमा झटकी कर वन कर्मचारियों की वर्दी तक फाड़ दी। हालांकि इसकी नामजद शिकायत पिपलोद थाना में शुक्रवार को करने के बावजूद भी पुलिस ने इसपर कोई एक्शन नहीं लिया। निमाड़ के जंगलों में लगातार अतिक्रमण बढ़ता जा रहा है और यहां की बेशकीमती वन संपदा का अतिक्रमणकारी जमकर दोहन कर प्रकृति के साथ ही शासन को आर्थिक नुकसान भी पहुंचा रहे हैं। इन वन माफियाओं के खिलाफ पुलिस की पुख्ता कार्रवाई नहीं होने के चलते अब इस तरह की घटनाओं में लगातार इजाफा होते जा रहा है। ऐसा ही मामला गुडी वन परिक्षेत्र में बीते गुरुवार को सामने आया, जब सभी दीपावली पर्व की खुशियां मना रहे थे, तब जिले के गुड़ी रेंज के रेंजर नरेंद्र सिंह और उनकी टीम सूचना मिलने पर अतिक्रमण रोकने बीट भिलाईखेड़ा के कक्ष क्रमांक 749 में नवाड की भूमि पर पहुंची थी। यहां टीम को देख मौके से जुताई कर रहा ट्रैक्टर चालक उसका कल्टीवेटर निकालकर भाग गया। टीम ने मौके से कल्टीवेटर को जब्त कर इस मामले में वन अपराध का प्रकरण दर्ज किया। वन अमले पर इस तरह हुआ हमला बताया गया कि जब्ती कार्रवाई के बाद जब वन अमला दो दलों में वापस लौट रहा था। इस बीच दोपहर करीब 2 बजे सरपंच टांडे की लगभग 30-35 महिलाओं ने पीछे रह गए वन स्टॉफ के परिक्षेत्र सहायक सरमेश्वर के शांतिलाल चौहान, परिक्षेत्र सहायक कोठा के पंजावराव पंडाग्रे, परिक्षेत्र सहायक आराखेडा के कैलाश लोवंशी सहित वन रक्षकों जितेन्द्र पगारे, मनोज तंवर और भरत भूषण मिश्र एवं सुरक्षा श्रमिक गनिया को घेर लिया। यही नहीं, इन महिलाओं के झुंड ने इस वन अमले के साथ मारपीट की एवं धमकी देते हुए कहने लगी कि यहां से भाग जाओ नहीं तो जान से मार देंगे। इस दौरान महिलाओं के हाथों में दराती, पत्थर एवं लाठी डंडे भी थे। महिलाओं ने वन स्टाफ को डंडे से पीटा और वर्दी तक फाड़ दी। इस हमले में जितेन्द्र पगारे वन रक्षक की पीठ पर डंडे से पिटाई के निशान थे, तो वहीं मनोज तंवर के गले मे नाखून के निशान थे, जिसके फोटोग्राफ भी लिए गये। वन अमले ने की थी नामजद शिकायत वहीं इस पूरे मामले में गुड़ी रेंजर नरेंद्र पटेल ने बताया कि अतिक्रमणकारियों को रोकने पहुंचे वन अमले के साथ 31 अक्तूबर को हुई इस घटना की जानकारी एक शिकायत पत्र के जरिए उसी दिन संबंधित पिपलोद थाना पर दी गई थी। इसके बाद अगले दिन वन अमला एक बार फिर से हमला करने वाली महिलाओं की पहचान करने उस जगह पहुंचा था, जहां से कुछ महिलाओं के नाम मालूम चलने पर 1 तारीख को थाने पर उन महिलाओं के नाम बताते हुए इसकी लिखित शिकायत की गई थी। साथ ही पीड़ित स्टाफ के चोट के निशान एवं फटी वर्दी भी थाना प्रभारी पिपलोद को दिखाई गयी थी। जांच के बाद ही हो सकेगा मामला दर्ज इधर पिपलोद थाना प्रभारी एसएन पांडे का कहना है कि वन अमले के साथ महिलाओं के द्वारा मारपीट करने और वर्दी फाड़ने जैसी शिकायत को लेकर उन्हें आवेदन तो मिला है, जोकि अभी जांच में है। इसलिए अब तक इस मामले में किसी तरह की एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। हालांकि जब उनसे पूछा गया कि शासकीय कर्मचारियों के साथ हुई मारपीट को लेकर तीन दिन बाद भी एफआईआर दर्ज नहीं करने का क्या कारण रहा? तब उन्होंने बताया कि अभी जांच जारी है, जिसके बाद ही मामला दर्ज हो पाएगा। वहीं इसको लेकर खंडवा डीएसपी अनिल चौहान ने बताया कि जानकारी मिली है कि फॉरेस्ट टीम पर हमला करने को लेकर शिकायत की गई है। इस मामले में पिपलोद थाने के द्वारा जांच की जा रही है।

15 लोगों ने मिलकर एक को चाकूओं से किया छलनी, युवक की मौत से मातम

15 people together stabbed a man with knives, mourning over the death of the young man जबलपुर ! मध्य प्रदेश के जबलपुर में दिनेश झारिया नाम के एक शख्स की चाकू मारकर हत्या कर दी गई। घटना गढ़ा थाना क्षेत्र की है। बताया जा रहा है कि दिनेश का कुछ लोगों से झगड़ा हुआ था, जिसके बाद 10-15 लोगों ने मिलकर उस पर हमला कर दिया। हमला इतना इतना भयानक था कि इससे दिनेश की मौत हो गई। उसके पेट में कई गहरे घाव मिले हैं। मृतक छुई खदान क्षेत्र का रहने वाला बताया जा रहा है। दिनेश का कुछ लोगों से मामूली विवाद हो गया था। विवाद इतना बढ़ गया कि 10 से 15 लोगों ने मिलकर दिनेश पर चाकू से हमला कर दिया। घटनास्थल पर पहुंची प्रशासन की टीमघटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और आला अधिकारी मौके पर पहुंच गए। गंभीर रूप से घायल दिनेश को तुरंत जिला अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। 15 से ज्यादा लोगों ने किया हमलाइस घटना को अंजाम देने के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, 15 से ज्यादा लोग थे जिन्होंने दिनेश पर हमला किया था। हत्या के कारणों का खुलासा नहीं हुआसीएसपी डीपीएस चौहान ने बताया कि दिनेश झारिया नाम के युवक की चाकुओं से गोदकर हत्या कर दी गई है। फिलहाल हत्या किस वजह से हुई है, इसकी जानकारी नहीं लग पाई है। बताया जा रहा है कि मामूली विवाद में हत्या की गई है। इन आरोपियों के खिलाफ मामला हुआ दर्जउन्होंने आगे बताया कि हत्या का आरोप निहाल केवट, राजू सेन, भुज्जी सेन पर है। पुलिस की कई टीमें आरोपियों को पकड़ने के लिए लगी हुई हैं। जल्द ही हम आरोपियों को गिरफ्तार कर लेंगे। इस घटना से इलाके में दहशत का माहौल है। लोगों का कहना है कि अगर दिनेश को सही समय पर अस्पताल ले जाया जाता तो शायद उसकी जान बच सकती थी।

सीएम मोहन यादव: कांग्रेस के लोग झूठ बोलकर सरकार बनाते हैं

CM Mohan Yadav: Congress people form government by telling lies मोहन यादव ने कहा कि कांग्रेस के सभी नेताओं को माफी मांगना चाहिए, आमजनता से जिनसे झूठ बोलकर उन्होंने हिमाचल की सरकार बनवाई, कर्नाटक की सरकार बनवाई। झूठ के पहाड़ से आज नहीं तो कल उनका सामना होता ही है, जनता परेशान होती है। मैं उम्मीद करूंगा कि जिस प्रकार के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार काम कर रही है, उससे इस बदलते दौर में महाराष्ट और झारखंड दोनों ही राज्यों में भी भाजपा की सरकारें बनेंगी। तोमर बोले- वन नेशन वन इलेक्शन आदर्श स्थिति मीडिया से चर्चा में विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि वन नेशन वन इलेक्शन इससे ज्यादा आदर्श स्थिति लोकतंत्र के लिए और कोई नहीं हो सकती है। नरेंद्र मोदी देश के ऐसे नेता हैं, जिन्होंने तमाम सारे अवरोधों के बाद भी हिंदुस्तान, श्रेष्ठ हिंदुस्तान बने इसके लिए प्रयासरत हैं। जहां तक प्रतिपक्ष का सवाल है, प्रतिपक्ष पूरी तरह दिवालिया हो चुका है, बिना आधार के इस प्रकार की बातें करके सिर्फ विरोध करता है। गोरस आए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मीडिया से संक्षिप्त चर्चा में कांग्रेस पर निशाना साधा और कहा कि कांग्रेस के लोग झूठ बोलकर सरकार बनाते हैं, मल्लिकार्जुन खरगे ने खुद ने स्वीकार किया है। ऐसे झूठ बोल-बोल के सरकार बनाना उनके लिए भी शर्म की बात है। ये वही बात थी, जो चुनाव के पहले भाजपा कहती रही है कि चुनाव के पहले कांग्रेस जितने गलत काम कर सकती है वह सब करती है।

डिंडोरी अस्पताल में अमानवीयता की हद: पति की मृत्यु के बाद गर्भवती पत्नी से कराया बेड साफ़, प्रशासन पर उठे सवाल

The height of inhumanity in Dindori Hospital: After the death of the husband, the pregnant wife was made to clean the bed, questions raised on the administration मध्यप्रदेश के डिंडोरी जिले के सरकारी अस्पताल में एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जिसमें एक व्यक्ति की मृत्यु के तुरंत बाद उसकी पाँच महीने की गर्भवती पत्नी को बेड की सफाई करने के लिए मजबूर किया गया। जिस महिला ने अभी-अभी अपने पति को खोया था और दुःख में डूबी हुई थी, उसे प्रशासन द्वारा इस तरह का काम सौंपा गया, जो मानवीय संवेदनाओं की पूरी तरह अनदेखी को दर्शाता है। घटना ने उठाए प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल यह घटना प्रशासनिक संवेदनहीनता की ओर इशारा करती है। सवाल उठ रहा है कि क्या सरकारी अस्पताल में सफाई व्यवस्था इतनी लचर है कि एक शोकाकुल गर्भवती महिला से ही सफाई कराई जाए। अस्पताल प्रशासन के इस रवैये को लेकर आम जनता में आक्रोश है। इस घटना ने सरकारी अस्पतालों की लापरवाही और गरीब मरीजों के प्रति संवेदनहीनता की पोल खोल दी है। मुख्यमंत्री से कार्रवाई की माँग घटना के सामने आने के बाद प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग की जा रही है। ऐसे अमानवीय कृत्यों के प्रति शासन की अनदेखी से लोगों में आक्रोश बढ़ रहा है। कई लोगों ने यह भी सवाल उठाया है कि क्या गरीब तबके के लोगों के प्रति सरकारी अस्पतालों में मानवीय व्यवहार की उम्मीद नहीं की जा सकती? स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार की आवश्यकता यह घटना इस बात को दर्शाती है कि प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में केवल चिकित्सा सुविधाओं में ही नहीं, बल्कि कर्मचारियों के संवेदनशीलता और प्रशिक्षण पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है। आम जनता यह आशा करती है कि शासन ऐसी घटनाओं से सबक ले और अस्पतालों में मानवीयता और संवेदनशीलता को सर्वोपरि रखा जाए। अस्पताल प्रशासन की ऐसी घटनाएँ स्वास्थ्य सेवाओं पर प्रश्न चिह्न लगाती हैं और गरीब परिवारों के प्रति संवेदनशीलता की कमी को उजागर करती हैं। मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य विभाग से उम्मीद है कि वे इस मामले में गंभीरता से कदम उठाएँगे, ताकि भविष्य में कोई गरीब परिवार ऐसी अमानवीयता का शिकार न हो।

बांधवगढ़ में हाथियों की मौत पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने लिया सरकार को लिया आड़े-हाथ

Leader of Opposition Umang Singhar took the government to task over the death of elephants in Bandhavgarh. Umang Singhar News: मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ में 10 हाथियों की मौत के मामले को लेकर विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा है कि सरकार इस घटना पर चुप क्यों है. मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ में 10 हाथियों की मौत के मामले को लेकर विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने निशाना साधा है. उन्होंने एमपी सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार इस घटना पर चुप क्यों है, जबकि हम हाथियों की भगवान गणेश के रूप में पूजा करते हैं. सरकार को इस मामले में तत्काल संज्ञान लेना चाहिए. उमंग सिंघार ने कहा कि एक तरफ हम हाथियों की यानी गणेशजी की पूजा कर रहे हैं और दूसरी तरफ सरकार हाथियों की सुरक्षा नहीं कर पा रहे हैं और वहीं वन मंत्री वोट मांग रहे हैं. नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि वन्य प्राणियों के साथ में आदिवासियों का गहरा नाता और ताना-बना है. इस घटना में आदिवासियों का कोई दोष नहीं है. जल जंगल जमीन आदिवासियों का अधिकार है और सरकार को आदिवासियों की सुरक्षा के साथ-साथ वन्य प्राणियों की भी सुरक्षा करनी चाहिए. करीब 4 साल से हाथी झारखंड और कर्नाटक से आते रहे हैं. इस बीच में क्या सरकार ने उन वन समितियां से कोई चर्चा की या उन आदिवासियों से चर्चा की या उनके साथ कोई बैठक की या हाथियों के विस्थापन की बात कही. हाथियों का किस तरह से विस्थापन करना है. उनकी सुरक्षा को लेकर सरकार ने किसी भी तरह की कोई प्लान नहीं बनाया. नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सरकार को तत्काल इस मामले में संज्ञान लेते हुए वन्य समितियों के साथ और आदिवासियों के साथ चर्चा करनी चाहिए. नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इल्जाम लगाते हुए कहा कि सरकार वन्य प्राणी और आदिवासी विरोधी सरकार है. सरकार को संज्ञान लेते हुए उन लोगों पर कार्रवाई करनी चाहिए फिर चाहे वह अधिकारी हो या उसका कुप्रबंध हो. इस मामले में आदिवासियों की कोई जिम्मेदार नहीं है. सामाजिक कार्यकर्ता अजय दुबे ने भी हाथियों की मौत पर सवाल खड़े किए हैं.उमरिया-बांधवगढ टाइगर रिजर्व के खितौली परिक्षेत्र के सलखनियां के जंगल में 10 हाथियों की मौत हुई है. 10 हाथियों की मौत के बाद बांधवगढ पार्क प्रबंधन अपनी इस गलती को छिपाने में जुटा है. किसानों की कोदो की फसल को मौत का जिम्मेदार मानते हुए फसल को नष्ट कराया. NTCA दिल्ली की टीम पूरे मामले की जांच कर रही है. हाथियों के पीएम रिपोर्ट आने के बाद खुलासा होगा.

10 हाथियों की मौत से पार्क प्रबंधन पर उठे कई सवाल खड़े…?

Death of 10 elephants raises many questions on park management…? भोपाल। बांधवगाढ़ टाइगर रिज़र्व में 10 जंगली हथियो की मौत ने देश में हड़कंप मचा दिया पर प्रदेश सरकार गंभीर नहीं दिखाई नहीं देती नजर आ रही है। अपर मुख्य सचिव की अपने-पराए के आधार पर पोस्टिंग से लेकर वन सुरक्षा और इको समितिओं की निष्क्रिता पर सवाल उठने लगे हैं। अगर वन विभाग ने 26 अक्टूबर को छत्तीसगढ़ में हुई हाथियों की मौत की घटना को गंभीरता से ले लिया होता तो शायद हाथियों को बचाया जा सकता था। हाथियों की मौत को लेकर सेवा निवृत मुख्य वन संरक्षक डॉ एसपीएस तिवारी पार्क प्रबंधन की कार्य शैली पर सवाल उठाते हुए लिखा है कि बान्धवगढ़ में जंगली हाथी झारखंड के पलामू के जंगलों से कुसमी होते हुए संजय टाइगर रिज़र्व जो सीधी, सिंगरौली और छत्तीश गाढ़ में फैला है, बान्धवगढ़ में आये है और अनुकूल परिस्थियाँ पाकार स्थायी रूप से यहाँ स्थापित हो गए। वास्तव में पलामू से बान्धवगढ़ तक ग्रीन कॉरिडोर भी है। आज के स्थिति में 80 से 90 जंगली हाथी बांधव गढ़ में रह रहे है। बांधव गढ़ के पनपथा बफर जोन अंतर्गत ग्राम बकेली सलखनिया गांव के पास हाथियों की मौत के कारण का पता लगाने में पार्क प्रबंधन और वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट एवं डॉक्टर्स की टीम व्यस्त है। कारण जो भी हो, 10 जंगली हथियो की मौत ने पार्क प्रबंधन पर कई सवाल खड़े कर रहें है। डॉ तिवारी ने लिखा है कि मैं 1990 से 1995 तक उपवनमंडलाधिकारी मानपुर के हैसियत से पदस्थ था। तब पनपथा रेंज क्षेत्रीय रेंज था। तब भी यहां बाघों की अच्छी संख्या थी। पातौर ताला से मात्र 7 किमी की दूरी पर है। सलखनिया पातौर से लगा हुआ आदिवासी बाहुल्य गांव है , जहां मुख्यतया बैगा आदिवासी निवास करते है। पातौर और सलखनिया में वनसुरक्षा समिति गठित थी, जो बहुत ही सक्रिय थी और वन और वन्यप्राणी अपराधों को रोकने में सक्रिय भूमिका अदा करती थी । कोई छोटे-मोटे वन अपराध होने पर, गांव के लोग समिति की मीटिंग बुलाकर मावज़ा और अपराधी को सामाजिक रूप से बहिष्कृत भी करते थे। बैगा आदिवासी बहुत अंतर्मुखी होते है और वो तभी बाहरी व्यक्ति से खुल कर बात करते है जब वो समझ जाते है की ये अपने वाले है और हमारी भलाई के लिए है। अब यह सारा क्षेत्र अब बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व में आ गया है अतः अब ये समितिया ईको समिति के रूप में परिवर्तित हो गई है। पातौर वन समिति तो वन सुरक्षा में इतनी सक्रिय थी कि तत्कालीन कलेक्टर शहडोल एसपीएस परिहार स्वयं कई बार समिति की मीटिंग में आये और बहुत सरे ग्राम विकास के कार्य भी करवाये। आख़िर ऐसा क्या हुआ कि 10 जंगली हाथी की मौत हो गई और पार्क प्रबंधन को पूर्व से हथियों के एक्टिविटी के बारे में जानकारी नहीं हो सकी। मौत का कारण तो अभी निश्चित नहीं हो पाया है परंतु यह बात प्रारंभिक रूप से मालूम हो रही है कि ज़हरीला पदार्थ खाने से मृत्यु हुई है। ऐसी भी आशंका जतायी जा रही है कि धान की फसल मी माहुर रोग लग गया था, उसके बचाव हेतु धान फसल में रसायन का छिड़काव किया गाया था, जिसे खाने से मृत्यु हुई होगी। अन्यथा जहर खुरानी की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता है। सवाल यह है कि क्या इकोसमितिया निष्क्रिय हो गई..? क्या अधिकारी और कर्मचारी वहां के स्थानीय लोगों से संपर्क तोड़ चुके है। यदि इको समितियां सक्रिय होती तो गांव के लोग लोकल बीटगार्ड को ज़रूर बतलाते कि हाथी बीमार दिख रहे है। और शायद समय रहते इनका उपचार होता और 10 हाथी नहीं मरते। मुखबिर तंत्र का ह्रास एवं वन समितियों का निष्क्रिय होना ही इस असामयिक मृत्यु का मुख्य कारण समझ में आ रहा है। जनता को प्रबंधन से नहीं जोड़ा गयाप्रदेश में लगभग 15608 वन समितियों का गठन संयुक्त वन प्रबंधन के तहत हुआ है। 1051 इकोसमितियाँ है। इन समितियों की निरंतर बैठक एवं विकास तथा सुरक्षा राशि का इनके खाते में डाल कर स्थानीय जनता को रोज़गार देने का प्रावधान भी है परंतु कालांतर में इस विषय को ज़्यादा ध्यान नहीं दिया गया है। अज प्रदेश में 8 जंगली हथियो के मरने से वन एवं वन्य प्राणी प्रबंधन पर सवालिया निशान खड़ा होता है। ज़रूरत है, मृत्यु के कारण के तह तक जा कर इसे उजागर करे और भविष्य के लिए सीख ले। ताकि ऐसी घटना दोबारा ना घटे। जंगलों में जनता की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए संयुक्त वन प्रबंधन को मज़बूत कर वनसमितियों को सक्रिय करे।डॉ एस पी एस तिवारी आईएफ़एससेवा निवृत मुख्य वन संरक्षक एमपी भोपाल

कांग्रेस का विजयपुर उपचुनाव में रिटर्निंग ऑफिसर के खिलाफ मोर्चा, हटाने की मांग

Congress protests in Vijaypur by-election, demands removal of returning officer भोपाल। मध्य प्रदेश की दो विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होना है। इससे पहले कांग्रेस ने विजयपुर के रिटर्निंग ऑफिसर के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उपनेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे ने रिटर्निंग अधिकारी पर गंभीर आरोप लगाए है। साथ ही उन्होंने अफसर को हटाने की भी मांग की है। उपनेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे ने रिटर्निंग अधिकारी उदय सिंह सिकरवार को लेकर चुनाव आयोग से शिकायत की है। उन्होंने कहा कि एसडीएम सिकरवार पहले भी बीजेपी के लिए काम करते है। 2017-18 में हुए उपचुनाव में भी सिकरवार ने रिटरिंग ऑफिस रहते हुए भी इनकी शिकायत की थी। शिकायत के आधार पर इन्हे हटाया गया था। रिटर्निंग ऑफिसर को हटाने की मांगहेमंत काटरे ने कहा कि अब एक बार फिर उदय सिंह सिकरवार को ही विजयपुर उपचुनाव कराने की जिम्मेदारी दी गई। आखिर क्यों हर बार इन्हे ही रिटर्निंग ऑफिसर बनाया जाता है। हम निर्वाचन आयोग से मांग करते है की उदय सिंह को चुनावी प्रक्रिया से हटाया जाए। जब एक बार चुनावी प्रक्रिया से इन्हे हटाया गया था, तो दोबारा क्यों चुनाव अधिकारी बनाया गया। कुल इतने प्रत्याशी मैदान मेंनामांकन संवीक्षा में विजयपुर में 12 और बुधनी में 23 अभ्यर्थियों के नाम निर्देशन-पत्र विधिमान्य पाए गये। वहीं विजयपुर में 3 और बुधनी में 2 अभ्यर्थियों के नाम-निर्देशन पत्र विधिमान्य नहीं पाये गये। जिसके चलते उनके नामांकन खारिज कर दिए गए हैं। 13 नवंबर को होगा उपचुनावमध्य प्रदेश में 18 अक्टूबर से नामांकन की प्रक्रिया शुरू हुई। 25 अक्टूबर तक निर्देशन पत्र जमा किए गए। 28 अक्टूबर को स्क्रूटनी की गई। अभ्यर्थी 30 अक्टूबर तक अपना नाम वापस ले सकेंगे। 13 नवंबर को चुनाव होगा। वहीं 23 नवंबर को मतगणना होगी।

आज से एकादशी तक छोटे व्यापारियों और ठेले वालों से नहीं ली जाएगी मार्केट फीस’, CM मोहन यादव का निर्देश

‘Market fees will not be taken from small traders and street vendors from today till Ekadashi’, instructions from CM Mohan Yadav CM Mohan Yadav Directed Departments: दीपावली पर्व को ध्यान में रखते हुए धनतेरस से देवउठनी एकादशी तक सभी शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष व्यवस्था करने के लिए संबंधित विभागों को सीएम साय ने निर्देश दिया। प्रदेश में वोकल फॉर लोकल को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा है कि दीपावली पर्व पर स्थानीय विक्रेताओं से सामग्री की खरीदी को प्रोत्साहित किया जाये। धनतेरस से एकादशी तक सभी शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे व्यापारियों और हाथ ठेला वालों से बाजार शुल्क न लिया जाए। सभी नगरीय निकाय स्थानीय स्तर पर साफ-सफाई की व्यवस्था सुनिश्चित करने विशेष अभियान चलायें। साथ ही प्रदेश में रोशनी के पर्व दीपावली पर विद्युत की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करें। मुख्यमंत्री यादव मंत्रालय में समाधान ऑनलाइन कार्यक्रम के पहले प्रदेशवासियों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने दीपावली और मध्य प्रदेश के स्थापना दिवस पर सभी को शुभकामनाएं दी।

उज्जैन में बिजली खंभा लगाने के नाम पर रिश्वत: लाइनमैन रंगे हाथ पकड़ा गया

Bribe in the name of installing electric pole in Ujjain: Lineman caught red handed उज्जैन। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के गृह जिले उज्जैन में बिजली विभाग के एक कर्मचारी द्वारा खंभा लगाने के लिए आठ हजार रुपये रिश्वत मांगने का मामला सामने आया है। पवन सागित्रा नामक किसान ने खाचरोद तहसील के घिनौदा चौपाटी में खंभा लगाने के लिए लाइनमैन रामचंद्र धाकड़ को चार हजार रुपये रिश्वत देने के बाद लोकायुक्त पुलिस से शिकायत की, जिसके आधार पर लोकायुक्त पुलिस ने उसे रंगे हाथों पकड़ा। लोकायुक्त डीएसपी बसंत श्रीवास्तव के अनुसार, रामचंद्र धाकड़, जो विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड में लाइनमैन के पद पर कार्यरत हैं, को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया है। किसान ने आरोप लगाया कि उनके खेत में ट्रैक्टर चलाते समय गलती से खंभे से टकराकर खंभा गिर गया था। इसे दोबारा खड़ा करने के लिए लाइनमैन ने पुलिस में शिकायत न करने और खंभा लगाने के नाम पर आठ हजार रुपये की रिश्वत मांगी। पहला मामला, सफाई में बताया बिजली बिल लाइनमैन ने अपनी सफाई में कहा कि उसने पैसे बिजली का बिल भरने के नाम पर लिए थे। हालांकि, लोकायुक्त पुलिस ने इसे रिश्वतखोरी का मामला मानते हुए तुरंत कार्रवाई की। विद्युत पोल लगाने के नाम पर रिश्वत लेने का यह पहला मामला बताया जा रहा है, जिसमें शिकायत के बाद पुलिस ने जांच कर कार्रवाई की।

भोपाल में बजरंग दल का पोस्टर विवाद: दिवाली पर ‘हिन्दू दुकानदारों’ से खरीदारी की अपील, कांग्रेस ने जताई आपत्ति

Controversy over Bajrang Dal poster in Bhopal: Appeal to do Diwali shopping from ‘Hindu shopkeepers’, Congress expressed displeasure भोपाल। दीपावली के बीच भोपाल में बजरंग दल के एक पोस्टर ने विवाद खड़ा कर दिया है। बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने शहर में पोस्टर लगाए हैं, जिनमें लोगों से दिवाली की खरीदारी केवल हिन्दू दुकानदारों से करने की अपील की गई है और अन्य धर्म के व्यापारियों से सामान न खरीदने का अनुरोध किया गया है। इन पोस्टरों पर लिखा गया है, “अपना त्योहार, अपनों से व्यवहार। दीपावली की खरीदी उनसे करें, जो आपकी खरीदी से दीपावली मना सकें।” विश्व हिंदू परिषद का समर्थन विश्व हिंदू परिषद (VHP) के प्रांत प्रचार-प्रसार प्रमुख जितेंद्र सिंह चौहान ने इस अपील का समर्थन करते हुए कहा कि दीपावली सनातनियों का बड़ा त्योहार है और लोगों को अपने ही समुदाय से खरीदारी करनी चाहिए ताकि हर हिन्दू परिवार भी इस पर्व को मना सके। उनका मानना है कि यह त्योहार श्रीराम के अयोध्या आगमन की खुशी में मनाया जाता है और इसे समुदायिक स्तर पर समर्थन मिलना चाहिए। बीजेपी की प्रतिक्रिया इस मामले पर बीजेपी प्रवक्ता अजय सिंह यादव ने भी प्रतिक्रिया दी। उनका कहना है कि कुछ मामलों में सनातन धर्म की भावनाओं को आहत करने की कोशिश की जाती रही है, और ऐसे में धार्मिक संगठनों द्वारा इस तरह की अपील स्वाभाविक है। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह सनातन धर्म का विरोध करने वालों के साथ खड़ी रहती है और कहा कि देश में स्वदेशी को बढ़ावा देना जरूरी है। कांग्रेस की कड़ी आलोचना दूसरी ओर, कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता अवनीश बुंदेला ने बजरंग दल की इस अपील को शर्मनाक बताते हुए इसकी निंदा की है। उन्होंने इसे विभाजनकारी राजनीति करार दिया और कहा कि फूलों और सब्जियों का कारोबार करने वाले अधिकतर लोग दूसरे धर्म के हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इस सोच के तहत भगवान को फूल चढ़ाना भी बंद कर देना चाहिए। कांग्रेस ने इसे ‘घटिया सोच’ का परिणाम बताते हुए मुख्यमंत्री से बजरंग दल के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। भोपाल में लगे इन पोस्टरों ने फिर से धार्मिक भावनाओं और सामाजिक एकता पर सवाल खड़े किए हैं।

मुख्यमंत्री मोहन यादव का एक्शन मोड: देर रात समीक्षा बैठक में 11 अधिकारी-कर्मचारी निलंबित, तीन कलेक्टरों पर नाराजगी

CM Mohan Yadav’s action mode: 11 officers suspended in late night review meeting, three collectors reprimanded भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बीती रात समाधान ऑनलाइन हेल्पलाइन की समीक्षा बैठक में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों पर कड़ा रुख अपनाते हुए बिजली वितरण कंपनी के जीएम सहित 11 अधिकारी-कर्मचारियों को निलंबित कर दिया। बैठक के दौरान विभिन्न शिकायतों पर ध्यान देते हुए मुख्यमंत्री ने तीन जिला कलेक्टरों पर भी नाराजगी जताई। बैठक में रायसेन जिले के एक व्यक्ति की बिजली बिल में गड़बड़ी की शिकायत पर बिजली वितरण कंपनी के जनरल मैनेजर को निलंबित कर दिया गया, जबकि खंडवा में एक लापता लड़की की रिपोर्ट दर्ज न होने पर संबंधित उपनिरीक्षक पर भी कार्रवाई की गई। इसके अलावा, झाबुआ जिले में कपिलधारा कूप निर्माण योजना में भुगतान में देरी पर पंचायत सचिव को निलंबित कर सीईओ और लेखाधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। तीन कलेक्टरों पर नाराजगी समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने तीन कलेक्टरों पर भी असंतोष जताया। अशोकनगर के कलेक्टर को छात्रवृत्ति वितरण में देरी पर फटकार लगाई, जबकि आलीराजपुर कलेक्टर से नि:शक्त जन मामलों की धीमी प्रगति पर नाराजगी जताई। बालाघाट कलेक्टर को बैठक में आईटी और डीआईजी के बीच बैठने पर निर्देशित किया गया कि प्रशासनिक अधिकारियों का सम्मान करते हुए वे सही जगह पर बैठें। कर्मचारियों को जिम्मेदारी का संदेश मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सरकारी कार्यों में देरी और लापरवाही को अस्वीकार्य बताया और कहा कि समाज के प्रति सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने चेतावनी दी कि लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, जबकि बेहतर प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों को पुरस्कार और प्रमोशन से प्रोत्साहित किया जाएगा। मुख्यमंत्री के इस कड़े रुख से प्रशासनिक कार्यों में तेजी लाने का संदेश स्पष्ट है।

भोपाल बस स्टैंड से 16 क्विंटल मावा जब्त, ग्वालियर से भोपाल लाया जा रहा था मावा

16 quintal mawa seized from Bhopal bus stand, mawa was being brought from Gwalior to Bhopal. राजधानी भोपाल के आईएसबीटी बस स्टैंड से खाद्य विभाग की टीम ने 16 क्विंटल मावा जब्त किया है. बताया जा रहा है यह मावा ग्वालियर से लाया गया था. बता दें कि दीपावली पर्व के चलते बड़ी संख्या में राजधानी भोपाल में ग्वालियर-चंबल के रास्ते मिलावटी मावा लाया जा रहा है. दो दिन पहले भी भोपाल रेलवे स्टेशन से 9 क्विंटल मावा जब्त किया गया था. दीपावली पर्व के दौरान बड़ी संख्या में मिठाईयों की खपत होती है. इसके लिए भोपाल में आगरा-ग्वालियर सहित अन्य शहरों से नकली मावा मंगाया जाता है. भोपाल में मिलावटी नकली मावा को लेकर पुलिस व खाद्य विभाग की टीम भी अलर्ट है. रेलवे स्टेशन व बस स्टेशनों पर विशेष नजर रखी जा रही है. महज चार दिन में ही पुलिस व खाद्य विभाग की टीम ने कार्रवाई करते हुए 25 क्वीटंल मावा जब्त किया है. दुकानों से जांच के लिए सैंपल रविवार (27 अक्टूबर) को राजधानी भोपाल में खाद्य विभाग की टीम ने 9 दुकानों से सैंपल लिए. वरिष्ठ अधिकारी देवेन्द्र वर्मा के अनुसार टीम द्वारा हमीदिया रोड, न्यू मार्केट और बैरागढ़ सहित नेहरू नगर स्थित मंगलम स्वीट्स से पिस्ता बर्फी तथा मिल्क केक, मंगलम रेस्टोरेंट से काजू कतली, आशा फूड जोन से मलाई टिकिया तथा मलाई बर्फी के सैंपल लिए गए. 14 दिन में आएगी जांच की रिपोर्ट न्यू मार्केट स्थित बृजवासी स्वीट्स से मिल्क केक तथा मलाई बर्फी और भोपाल रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म क्रमांक-1 के सामने स्थित मां शारदा स्वाद संसार से मिल्क रोल तथा मलाई बर्फी के सैंपल लिए गए हैं. पंजाब डेयरी उद्योग से मावा तथा घी के सैंपल लिए गए हैं. खाद्य अधिकारियों के अनुसार लिए गए सैंपल प्रयोगशाला भेजे गए, जिनकी रिपोर्ट 14 दिन में आएगी, अनियमितताएं मिलने पर प्रकरण दर्ज किए जाएंगे. दो दिन पहले भी जब्त हुआ था मावा दीपावली पर्व को लेकर राजधानी भोपाल में अन्य शहरों से बड़ी संख्या में दूषित मावा आ रहा है. दो दिन पहले भी भोपाल रेलवे स्टेशन के बाहर लोडिंग ऑटो में 9.20 क्विंटल मावा जब्त किया गया था. बताया जा रहा है कि यह मावा आगरा स्टेशन से लाया गया था. वहीं 6 दिन पहले नर्मदापुरम से भी 300 क्विंटल मावा जब्त किया गया था. खाद्य अधिकारी देवेंद्र सिंह ने कहा कि “हमें सूचना मिली थी ग्वालियर से मिलावटी मावा बस से भोपाल लाया जा रहा है हमारी टीम ने सुबह बस स्टैंड पहुंचकर बस में रखा मावा को जव्त कर लिया है बस ड्राइवर से पूछताछ की जा रही है साथ ही मावे के सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा जाएगा.”

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