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नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार की विजयपुर और बुधनी के मतदाताओं से अपील: 13 नवंबर को करें मतदान

Leader of Opposition Umang Singhar’s appeal to the voters of Vijaypur and Budhni: Vote on 13th November and strengthen democracy. भोपाल ! मध्य प्रदेश में 13 नवंबर को श्योपुर जिले की विजयपुर और सीहोर जिले की बुधनी विधानसभा सीट के उपचुनाव होने जा रहे हैं। इस उपचुनाव में न केवल इन दो विधानसभा क्षेत्रों का भविष्य तय होगा, बल्कि यह मध्य प्रदेश सरकार के पिछले 10 महीने के कार्यकाल का भी महत्वपूर्ण मूल्यांकन का अवसर होगा। कांग्रेस नेता उमंग सिंघार ने विजयपुर और बुधनी के मतदाताओं से एक अपील की है, जिसमें उन्होंने कहा कि यह चुनाव सिर्फ उम्मीदवारों का चुनाव नहीं है, बल्कि यह लोकतंत्र की ताकत को मजबूत करने और प्रदेश सरकार की नीतियों और कार्यों पर आम जनता की राय जानने का भी मौका है। उमंग सिंघार ने मतदाताओं से अपील करते हुए कहा, “आपका एक-एक वोट प्रदेश की दिशा तय करेगा। यह सिर्फ विधानसभा चुनाव नहीं है, बल्कि यह हमारी सरकार की जवाबदेही और पारदर्शिता का मापदंड भी है। आपके मतदान से यह संदेश जाएगा कि आप किस प्रकार के नेतृत्व और नीतियों को अपने क्षेत्र और प्रदेश में देखना चाहते हैं।” उन्होंने आगे कहा कि 10 महीने पहले सत्ता में आई प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली, वादों की पूर्ति और जनता की सेवा के हिसाब से इस उपचुनाव में मतदाताओं को अपना फैसला लेना है। यह एक बड़ा मौका है जहां जनता को यह तय करना है कि क्या सरकार अपने वादों को पूरा करने में सफल रही है या नहीं।“आपका मतदान ही यह तय करेगा कि आने वाले दिनों में प्रदेश की विकास यात्रा किस दिशा में आगे बढ़ेगी। विजयपुर और बुधनी के मतदाता लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत हैं, और हम आपसे आग्रह करते हैं कि आप 13 नवंबर को अपने मतदान का अधिकार अवश्य उपयोग करें,” उमंग सिंघार ने कहा। यह उपचुनाव न केवल इन दो विधानसभा क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि पूरे मध्य प्रदेश में चुनाव परिणामों से यह संकेत मिलेगा कि राज्य के नागरिक आगामी विधानसभा चुनावों में किस दिशा में अपना समर्थन देंगे।

बाल विवाह कराने या सहयोग करने वालों को होगी जेल , देवउठनी एकादशी पर बाल विवाह रोकने के लिए प्रशासन की सख्ती

Those who organize or support child marriage will be jailed, administration’s strictness to stop child marriage on Devuthani Ekadashi भोपाल ! प्रदेश सरकार ने आगामी देवउठनी एकादशी पर बाल विवाह की रोकथाम के लिए कड़ी तैयारी शुरू कर दी है। इस दिन होने वाले सामूहिक विवाह कार्यक्रमों में बाल विवाह के मामलों को रोकने के लिए प्रशासन ने विशेष कदम उठाए हैं। सामूहिक विवाह आयोजकों से यह शपथ पत्र लिया जाएगा कि उनके कार्यक्रमों में किसी भी रूप में बाल विवाह नहीं होगा। प्रशासन ने इस मुद्दे पर सख्त रुख अपनाया है और बाल विवाह करने या इसे प्रोत्साहित करने वालों को दो साल तक की सजा का प्रावधान किया है। इसके साथ ही, प्रशासन ने एक जाँच व्यवस्था बनाई है, जिसमें 10 विशेष टीमें तैनात की जाएंगी, जो सामूहिक विवाह कार्यक्रमों पर निगरानी रखेंगी। इन टीमों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कहीं भी बाल विवाह ना हो और सभी विवाह नियमों के तहत ही संपन्न हों।साथ ही, प्रशासन ने आयोजन से जुड़े सभी विभिन्न सेक्टरों को भी निर्देशित किया है। प्रिंटिंग प्रेस, हलवाई, कैटरिंग सेवाएं, बैंड, घोड़ी वाले और ट्रांसपोर्ट सेवा के संचालकों को भी बाल विवाह को रोकने में सहयोग देने के लिए कहा गया है। धर्मगुरु और समाज के प्रमुखों से भी यह उम्मीद की जा रही है कि वे इस अभियान में प्रशासन का साथ देंगे और समाज में बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता फैलाएंगे। इस कदम से प्रशासन का मुख्य उद्देश्य समाज में बाल विवाह की कुरीति को समाप्त करना है और इसे रोकने के लिए हर संभव प्रयास करना है।सभी की सक्रिय भागीदारी से उम्मीद की जा रही है कि देवउठनी एकादशी पर आयोजित होने वाले सामूहिक विवाह कार्यक्रम सुरक्षित और कानूनी रूप से सही तरीके से संपन्न होंगे, जिससे प्रदेश में बाल विवाह की घटनाओं में कमी आएगी। यहां करें शिकायतबाल विवाह की सूचना चाइल्ड लाइन के दूरभाष नंबर 1098 पर दे सकते हैं। इसके अलावा एसडीएम, तहसीलदार, थाना प्रभारी, परियोजना अधिकारी महिला एवं बाल विकास और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को दे सकते हैं। शिकायतकर्ता का नाम गोपनीय रखा जाएगा।

जंगल महकमे में रिक्त है एमडी से लेकर फील्ड डायरेक्टर तक के पद, खेला जा रहा है प्रभार का खेल

Posts from MD to Field Director are vacant in the forest department, the game of charge is being played. भोपाल। जंगल महकमे में पीसीसीएफ कैम्पा, वन विकास निगम के एमडी से लेकर वन वृत के संरक्षक, डीएफओ और पेंच और कान्हा नेशनल पार्क के फील्ड डायरेक्टर के पद रिक्त है। इन पदों पर पूर्णकालिक पोस्टिंग के बजाय राज्य शासन के शीर्ष अधिकारी प्रभार का खेल खेल रहे हैं। केंद्र की फटकार के बाद ही बांधवगढ़ में साल भर बाद फील्ड डायरेक्टर की पोस्टिंग की गई। पीसीसीएफ कैंपा और वन विकास निगम के एमडी, वन संरक्षक, छतरपुर वन वृत शिवपुरी वन वृत के वन संरक्षक, इंदौर वन वृत में वन संरक्षक, वन मंडल रीवा, सिवनी दक्षिण, शहडोल उत्तर, शाजापुर, राजधानी परियोजना वन मंडल, विदिशा इत्यादि वन मंडलों में डीएफओ के पद रिक्त है। वन मंडलो के अलावा भोपाल और सागर को छोड़कर सभी अनुसंधान एवं विस्तार वन वृत्त में पद खाली पड़े हुए है। इन पदों पर प्रभार देने का खेल खेला जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि इस खेल में मंत्रालय से लेकर मुख्यालय तक के शीर्ष अधिकारी शामिल हैं। वन विभाग ने प्रभार देने का कोई क्राइटेरिया तय नहीं किया गया है। पीपी मोड और शीर्ष अधिकारियों की गणेश परिक्रमा करने वाले आईएफएस अफसरों को ही प्रभार को दिया जा रहा है। मसलन, वन विकास निगम के एमडी का प्रभार इंदौर में पदस्थ एपीसीसीएफ अजय यादव को दिया गया है। पीसीसीएफ कैम्पा का प्रभार देने में मुख्यालय से लेकर मंत्रालय तक कंफ्यूज रहे। कैंपा पीसीसीएफ महेंद्र धाकड़ के रिटायर होने पर पीसीसीएफ संदीप सिंह को केंप का प्रभाव दिया गया। इस आदेश के 24 घंटे भी नहीं बीते थे कि अचानक शासन ने अपने आदेश में संशोधन करते हुए केंप का प्रभार पीसीसीएफ पीके सिंह को दे दिया गया। वर्तमान में पीके सिंह के पास पीसीसीएफ सामाजिक वानिकी के अलावा संरक्षण का भी प्रभार है। कैम्पा का प्रभार आने पर उनके पास महकमे के दो-दो प्रमुख शाखों का प्रभार है। कान्हा का प्रभार डिप्टी डायरेक्टर को दिया एसीएस के ब्लू आई ऑफिसर एवं डिप्टी डायरेक्टर कान्हा नेशनल पार्क पुनीत गोयल को फील्ड डायरेक्टर का भी प्रभार दे दिया गया। ऐसा पहली बार किया गया है, क्योंकि कैडर में फील्ड डायरेक्टर पद सीसीएफ अथवा सीएफ का पद है। अंतरराष्ट्रीय स्तर छवि वाले कान्हा नेशनल पार्क में नक्सली मूवमेंट भी है। ऐसे डिप्टी डायरेक्टर के ऊपर कान्हा टाइगर रिजर्व का प्रबंध छोड़ देना, यह वन मंत्रालय की अक्षमता का परिचायक है। पेंच नेशनल पार्क के बफर जोन का वर्किंग प्लान बनाने वाले आईएफएस अधिकारी जे देवा प्रसाद को पेंच नेशनल पार्क के फील्ड डायरेक्टर के अलावा अनुसंधान विस्तार सिवनी का भी प्रभार दिया गया है। यानि प्रसाद को तीन पदों का प्रभार एक साथ दिया गया है। इंदौर वन वृत का प्रभार मस्तराम बघेल वन संरक्षक उज्जैन, छतरपुर का प्रभार अनिल कुमार सिंह वन संरक्षक सागर को दिया गया है। रिक्त सभी वन मंडलों में डीएफओ का प्रभार भी प्रधान मुख्य वन संरक्षक प्रशासन एक विवेक जैन की विशेष कृपा पर ही दिया गया है। प्रभार देने की खेल के चलते ही हाल ही में 6 आईएफएस अधिकारियों की वर्किंग प्लान बनाने के लिए में पोस्टिंग की गई, जिनमें से केवल देवांशु शेखर को ही सागर अनुसंधान एवं विस्तार का प्रभार दिया गया है। आपदा को अवसर में बदला प्रभार का खेल खेलने में मंत्रालय से लेकर मुख्यालय के शीर्ष अधिकारी ने तो आपदा को अवसर में बदल दिया है। यानी अधिकारियों की कृत्रिम कमी दर्शाकर प्रभार का खेल खेला जा रहा है। उदाहरण के तौर पर बांधवगढ़ नेशनल पार्क में फील्ड डायरेक्टर के पद के लिए बृजेंद्र झा, अनिल शुक्ला, रमेश विश्वकर्मा, रविंद्रमणि त्रिपाठी और नरेश यादव जैसे वाइल्ड लाइफ एक्सपीरियंस होल्डर आईएफएस अधिकारी के होते हुए भी शिवपुरी में पहले से कार्यरत वन संरक्षक अनुपम सहाय को फील्ड डायरेक्टर बनाकर वन संरक्षक शिवपुरी का पद जानबूझकर रिक्त कर दिया गया। ताकि इस पद को मैनेजमेंट कोटे से भरा जा सके। पोस्टिंग के इंतजार में है अफसर प्रभार का खेल खेलने के कारण ही वर्किंग प्लान बना चुके आईएफएस अधिकारियों की पोस्टिंग नहीं की जा रही है। दिलचस्प पहलू यह है कि इस मामले में मुख्यालय के अधिकारी बताते हैं कि प्रस्ताव शासन के पास लंबित है। यानी शासन के स्तर पर पोस्टिंग में कोई दिलचस्पी नहीं ली जा रही है। यही वजह है कि प्रभार का खेल खेलने के लिए मैदान खाली है। धार का वर्किंग प्लान बना चुके आदर्श श्रीवास्तव, जबलपुर में पदस्थ वर्किंग प्लान अधिकारी रमेश विश्वकर्मा, वर्किंग प्लान अधिकारी पीएन मिश्रा, वर्किंग प्लान अधिकारी एचएस मिश्रा जैसे आईएफएस अफसर को अपनी पोस्टिंग का इंतजार है। इनमें से कुछ अधिकारियों की सेवा के 5 महीने बचे हैं तो किसी अफसर के रिटायर होने की साल भर की मियाद बाकी है। अब सीएफ और डीएफओ भी खेलने लगे भोपाल से शुरू हुआ प्रभार देने का खेल अब वन संरक्षक और डीएफओ भी खेलने लगे हैं। धार वन मंडल में तो एक-एक डिप्टी रेंजरों को दो-दो रेंज के अलावा उन्हें एसडीओ का भी प्रभार दिया गया है। धार में इसी वर्ष वनपाल से बने प्रभारी उप वन क्षेत्रपालों को दो रेंजों का प्रभार दे दिया है। जबकि वन मंडल धार में ओरिजिनल उपवन क्षेत्रपाल विक्रम सिंह निनामा एवं कमलेश मिश्रा पदस्थ हैं और वे सीनियर भी हैं किन्तु उन्हें नहीं दिया गया। इसके कारण वन मंडल में असंतोष है और यही कारण है कि धार वन मंडल में अवैध कटाई और अतिक्रमण तेजी से बढ़ रहा है। रीवा वन वृत के अंतर्गत आने वाले रीवा, सीधी, सतना और सिंगरौली, छतरपुर वन वृत्त के अलावा प्रदेश के अधिकांश वन मंडलों में एसडीओ- रेंजर के पद लंबे समय से रिक्त है। इन पदों पर भी प्रभार का खेल खेला जा रहा है।

नशा युवा पीढ़ी के भविष्य को अंधकार में ले जा रहा है: प्राचार्य कटियार

Drug addiction is taking the future of the young generation into darkness: Principal Katiyar हरिप्रसाद गोहेआमला । नशा मुक्ति अभियान अंतर्गत पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय वायु सेना स्थल आमला में जन जागरूकता अभियान कार्यक्रम का आयोजन आयोजित किया गया । इस मौके पर विद्यालय प्राचार्य मदन मोहन कटियार ने उपस्थित सभी बच्चों को नशा न करने की शपथ दिलाई ,साथ ही उन्होंने नशा के प्रकार, उससे होने वाले दुष्प्रभाव और उससे बचने के तौर तरीकों की चर्चा करते हुए बच्चों से अपील की कि वे समाज के हर व्यक्ति को यह संदेश दें कोई भी व्यक्ति नशा से अपना जीवन बर्बाद ना करें। उन्होंने कहा की नशा युवा पीढ़ी के भविष्य को अंधकार में ले जा रहा है नशे का शिकंजा धीरे-धीरे युवाओं को जकड़ता जा रहा है यह एक धीमे जहर की भांति शरीर को खोखला कर देता है। आज की युवा पीढ़ी सिगरेट, तंबाकू ,शराब चरस ,अफीम ,गांजा जैसे अनेक नशीले पदार्थों के साथ मोबाइल का अंधाधुंध प्रयोग कर रहे हैं जो आने वाले पीढ़ी के लिए अच्छा नहीं है। नशा न केवल व्यक्ति का शारीरिक और मानसिक नुकसान करता है बल्कि पूरे परिवार और समाज को पतन कीओर ढकेल देता है । समाज में अपराध का मुख्य कारण भी नशा ही माना गया है। इसलिए हमें वर्तमान पीढ़ी को इससे बचाना है और देश के निर्माण में सबका योगदान लेना है। विज्ञान शिक्षक सुनील कुमार श्रीवास्तव ने भी बच्चों से अपील की कि सबको नशे की प्रवृत्ति से दूर रहकर अपना ध्यान पढ़ाई लिखाई और माता-पिता की सेवा में लगाना है और नशा करने वालों को रोकना है रोकना है और उन्हें समाज निर्माण के रास्ते पर लाने का प्रयास करना है पहले युवा विद्यालय और कॉलेज में गुटखा सुपारी पान तंबाकू का सेवन शौक और मस्ती में करने लगते हैं लेकिन बाद में इसकी उन्हें लत लग जाती है और वह नशे के साथ-साथ शराब और अन्य मादक पदार्थों का सेवन करने लगते हैं नशा मुक्ति भारत अभियान का उद्देश्य न केवल जनसाधारण को नशे के दुष्प्रभाव से जागृत करना है बल्कि नशे के खिलाफ जन आंदोलन का रूप देना है ताकि नशे के खिलाफ हर आदमी अपना योगदान दे सके सभा में विद्यालय के शिक्षक श्री के , के, साहू, सिनटू बलदेवा, ज्योति परमार, लावण्या ,तनुश्री सरकार, मनीष कुमार, रुपेश चौधरी मीरा झा, चंदा, नर्मदा प्रसाद सोलंकी सहित सभी छात्र छात्राओं की उपस्थिति सराहनीय रही । कार्यक्रम का संचालन श्रीमती कंचन तिवारी और श्रीमती तबस्सुम खान ने किया।

मध्यप्रदेश: जनपद पंचायत के लेखापाल को रिश्वत लेते लोकायुक्त ने रंगे हाथों पकड़ा

Madhya Pradesh: Lokayukta caught the Accountant of District Panchayat red handed taking bribe in Dhar district धार। मध्यप्रदेश के धार जिले के गंधवानी जनपद पंचायत के लेखापाल मनोज कुमार बैरागी को रिश्वत लेते हुए लोकायुक्त ने रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। ग्राम पंचायत बलवारी कला के सरपंच प्रतिनिधि गुलाब सिंह अजनारे की शिकायत पर कार्रवाई हुई है। ग्राम पंचायत में 10 लाख रुपये की राशि से सीसी रोड का निर्माण के लिए ₹3 लाख की पहली किस्त पंचायत के खाते में जारी हो चुकी थी। शेष राशि को जारी करने लेखापाल की ओर से एक मांग पत्र जिला पंचायत कार्यालय को भेजा जाना था। आवेदक गुलाब सिंह का आरोप है कि उक्त मांग पत्र को जिला पंचायत कार्यालय भेजने के एवज में लेखापाल मनोज बैरागी ने ₹50,000 की रिश्वत मांगी। इस राशि की मांग से परेशान होकर उसने पुलिस अधीक्षक लोकायुक्त राजेश सहाय को शिकायत की। लोकायुक्त द्वारा शिकायत की सत्यता की जांच में सही पाया गया। लोकायुक्त इंदौर इकाई ने आज 9 नवंबर 2024 को जनपद पंचायत कार्यालय गंधवानी में आवेदक गुलाब सिंह ने तय राशि में से ₹40,000 की राशि लेखापाल को दी, जिसे मनोज बैरागी ने जैसे ही लिया, लोकायुक्त टीम ने उसे रंगे हाथों पकड़ लिया। उसके खिलाफ धारा 7 के तहत मामला दर्ज किया गया है। कानूनी कार्यवाही जारी है। लोकायुक्त टीम मामले की बारीकी से जांच कर रही है, और आरोपी से अन्य संभावित भ्रष्टाचार के मामलों की भी पूछताछ की जा रही है।

मध्य प्रदेश नर्सिंग कॉलेज घोटाला: सीबीआई जांच में 500 कॉलेजों के संचालन योग्य न होने का खुलासा

Madhya Pradesh Nursing College Scam: CBI investigation reveals that 500 colleges are not fit for operation. मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश पर हुई CBI जांच में खुलासा हुआ है कि सूबे में चल रहे 700 में से 500 नर्सिंग कॉलेज संचालन योग्य ही नहीं है। ग्वालियर कोर्ट में चल रहे मामे भी जबलपुर हाईकोर्ट ट्रांसफर होंगे। मध्य प्रदेश में संचालित बहुचर्चित नर्सिंग कॉलेजेस के घोटाले के मामलों में चल रही सीबीआई जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। नर्सिंग कॉलेजों को लेकर सीबीआई द्वारा की जा रही जांच में पता चला है कि प्रदेशभर में चल रहे 700 नर्सिंग कॉलेजेस में से 500 कॉलेज संचालन योग्य ही नहीं हैं। आपको बता दें कि, इसके पहले हुई सीबीआई जांच में सामने आया था कि, प्रदेश में संचालित सभी कॉलेजों में से महज 169 नर्सिंग कॉलेज ही योग्य थे। हालांकि, हाईकोर्ट ने सीबीआई द्वारा कराई उस जांच को एक बार फिर से बारीकी के साथ जांच करने के निर्देश दिए थे। जांच में 73 कॉलेज ही योग्य माने गए है। ग्वालियर बेंच से भी जबलपुर ट्रांसफर होंगे केस नर्सिंग कॉलेजेस से संबंधित चल रहे मामले ग्वालियर बेंच से भी जबलपुर हाईकोर्ट ही ट्रांसफर किए जाएंगे। जिन नर्सिंग कॉलेजों की सीबीआई जांच पर सवाल उठे हैं, उनमें एक और नया खुलासा हुआ है। जिन कॉलेजों में नर्सिंग काउंसिल की तरफ से पत्र भेजा गया है, उसमें से 8 डिफिशिएंट की सूची में हैं, जबकि 8 अनसूटेबल कैटेगरी में आ रहे हैं। नर्सिंग काउंसिल ने सभी 66 अनसूटेबल पाए गए नर्सिंग कॉलेज की सभी सत्रों और पाठ्यक्रमों की मान्यता निरस्त कर दिया है।

मध्यप्रदेश में बीजेपी नेताओं को खुली छूट, पुलिस को जहां चाहो वहां पीटो”, जीतू पटवारी का तंज

BJP leaders in Madhya Pradesh have a free hand, beat the police wherever they want”, Jitu Patwari. मध्यप्रदेश कांग्रेस ने पुलिस पर हो रहे हमलों को लेकर सरकार को आईना दिखाने का अनोखा तरीका निकाला है. भोपाल। कटनी जिले के एक थाने में पुलिस कर्मियों के साथ गालीगलौच किए जाने और हंगामे का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. वीडियो में हंगामा करने वाले खुद को बीजेपी पदाधिकारी बता रहे हैं. ये लोग वीडियो में पुलिस अधिकारियों को वर्दी उतारने की धमकी दे रहे हैं. वीडियो वायरल होने के बाद अब कांग्रेस ने सरकार पर निशाना साधा है. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आरोप लगाया “बीजेपी कार्यकर्ताओं को खुली छूट दी गई है कि पुलिस को पीटो. कांग्रेस जल्द ही प्रदेश में पुलिस पिटाई की पूरी सीरीज निकालने जा रही है.” कांग्रेस बोली – अपराध न रोकें, इसलिए पिटती है पुलिसपुलिस से गालीगालौच का वीडिया समाजवादी पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता यश भारतीय ने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट किया है. उन्होंने लिखा “बीजेपी नेता पुलिस से गालीगलौच कर थाना परिसर से अपने साथी को छुड़ा ले गए.” पुलिस से बदसलूकी को लेकर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने बीजेपी पर जमकर हमला बोला. उन्होंने आरोप लगाया “पुलिस की कैसे पिटाई होती है, मध्यप्रदेश इसका ज्वलंत उदाहरण है. बीजेपी कार्यकर्ताओं को खुली छूट है कि पुलिस को पीटो. पुलिस को इसलिए मारो कि वे अपराधों को न रोकें.” कांग्रेस पार्टी पुलिस पिटाई की सीरीज निकालेगीजीतू पटवारी का कहना है “मोहन यादव सरकार में कितने पुलिसकर्मियों की पिटाई हुई है, हर जिले, तहसील में रोज पुलिस पिटती है, इस पर पूरी सीरीज निकाली जाएगी, इसे तैयार किया जा रहा है.” पटवारी ने कहा कि बीजेपी ने मोदी की गारंटी दी थी कि बहनों को 3 हजार रुपए महीना दिया जाएगा. क्या यह मिलने लगे हैं ? लाडली बहना के नाम पर भ्रमित किया गया. इसी तरह किसानों को 2700 रुपए में गेहूं खरीदा जाएगा. बीजेपी बताए यह सच है या झूठ. सरकार ने गरीबों की योजनाएं बंद कर दी. एससी,एसटी, ओबीसी की छात्रवृत्ति बंद कर दी. 33 विभागों के पास पैसा नहीं है,. बीजेपी झूठ के पैरों पर खड़ी है. अगर कांग्रेस झूठ बोल रही है तो सरकार बताए सच क्या है ?

सचिन पायलट : भोपाल सचिवालय में जमे है माफिया, 400 पार के अहंकार को जनता ने दिया करारा जवाब

Sachin Pilot: Mafia is established in Bhopal Secretariat, public gave a befitting reply to the arrogance of Rs 400 भोपाल। MP by election 2024: मध्यप्रदेश पहुंचे कांग्रेसी नेता सचिन पायलट ने बड़ा बयान दिया है। कहा कि- हम सब आज उपचुनाव में प्रचार करेंगे। जनता ने जिन उम्मीदों को लेकर वोट डाले थे उस पर सरकार खरा नहीं उतरी। हर क्षेत्र में सिर्फ प्रचार, प्रसार, फोटो छप रही हैं। भोपाल सचिवालय में माफिया जमे है। 400 पार के अहंकार को जनता ने करारा जवाब दिया है। भाजपा ने दो बैसाखियों पर सरकार बनाई है। राहुल गांधी के नेता प्रतिपक्ष बनने के बाद सरकार की जवाबदारी तय की है।केंद्र की सरकार आज भी कांग्रेस को दोष दे रही है। चिन्हित लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए नीतियां बन रही हैं। बीजेपी का ग्राफ देशभर में डाउन हो रहा है। झारखंड और महाराष्ट्र में इंडिया गठबंधन की सरकार बनेगी। झारखंड में इंडिया गठबंधन की सरकार बनाने की हवा चल रही है। हर मुद्दे पर सार्थक चर्चा करेंगे एमपी में मजबूत विपक्ष के रूप में सरकार काम कर रही है। उपचुनाव में हम अच्छा करेंगे, एक नए बदलाव की शुरुआत होगी। प्रियंका वायनाड से चुनाव लड़ रही हैं, सुखद परिणाम हर जगह कांग्रेस के लिए है।भारत की सीमाओं का संरक्षण किसकी जिम्मेदारी है। गौ माता, भगवान राम के नाम पर वोट बटोरते हैं, विपक्षी सरकारों को बजट नहीं देते, बहुत सारे नेता पार्टी छोड़ते हैं, हमारे यहां पूरी पार्टी चुनाव लड़ती है। फ्री बीज को लेकर बोले – कांग्रेस सरकार अगर गरीबों को मदद करना चाहे तो उसे फ्री बीज कहते हैं, हमने जहां जो कहा वह करके दिखाया है। झूठ बोलना, कांग्रेस को कोसना कब तक करेंगे। शिवराज की योजना इतनी अच्छी थी तो उन्हें हटाया क्यों। हमारा संख्या बल अब बहुत बेहतर है, हम हर मुद्दे पर सार्थक चर्चा करेंगे। जम्मू कश्मीर को फुल स्टेट का दर्जा मिले यह हम चाहते हैं। पढ़ेंगे और बढ़ेंगे अभियान पायलट ने कहा कि- बाटेंगे और काटेंगे के खिलाफ कांग्रेस का नया प्लान। पढ़ेंगे और बढ़ेंगे अभियान पर कांग्रेस काम करेगी।लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने कहा था कि कांग्रेस अगर आई तो मंगलसूत्र छीन ले जाएंगे। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री काटेंगे की बात करते हैं। हम सकारात्मक राजनीति करेंगे। पढ़ेंगे और बढ़ेंगे। बीजेपी का काम है कि ध्रुवीकरण करना, धार्मिक भावना राजनीतिक आक्रमण करना, विपक्ष की आवाज दबाने के लिए सत्ता का दुरुपयोग करना। अब एक तरफा हवा चल रही है गठबंधन की सरकार बनाने के लिए लोग उठ चुके हैं। नेताओं की बयानबाजी और नाराजगी बहुत सारे नेता छोड़ते हैं तो आते हैं। कांग्रेस पार्टी अपने-अपने संगठन अपने विचारधारा पर काम कर रही है। हम एकजुटता से काम कर रहे हैं। शिवराज के बयान पर कहा कि वे कितने साल से काम कर रहे थे। मजबूरन उन्होंने जाना क्यों पड़ा, इसका जवाब दें। रेवाड़ी की राजनीति करते हैं। हम लोग काम करते हैं तो दिक्कत और हम अगर अनुदान देना चाहे तो समस्या, और खुद 80 करोड लोगों को फ्री भोजन कर रहे हैं. आप अन्नदाता है हम कोई घोषणा करें तो हम पाप कर रहे हैं.. सीजी में उपराष्ट्रपति के बयान पर छत्तीसगढ़ के प्रदेश प्रभारी सचिन पायलट बोल- कानून के बारे में रहकर कानून का काम करना चाहिए। चुनाव से पहले इस प्रकार की बातें करना और धार्मिक बातें बोलकर वोट बटोरना ठीक बात नहीं है। विकास की बात करनी चाहिए। कभी गौ माता, कभी नागरिक संहिता, कभी मंदिर की बात सिर्फ चुनाव के लिए करते हैं। ऐसी राजनीति को जनता भी स्वीकार नहीं कर रही है

हर जिले में साइबर थाना, हर थाने में हेल्प डेस्क… फ्रॉड करने वालों की खैर नहीं

CM Mohan Yadav’s action plan: Cyber ​​police station in every district, help desk in every police station… fraudsters are in trouble मध्य प्रदेश के हर जिले में अब साइबर पुलिस स्टेशन खुलेंगे और हर थाने में हेल्प डेस्क बनेगी। अब तक यह सुविधा सिर्फ भोपाल में थी। अन्य जिलों में पुलिस थानों में साइबर ठगी की शिकायतें लिखी जाती थीं। मुख्यमंत्री मोहन यादव के आदेश के बाद यह फैसला लिया गया है। भोपाल ! मध्य प्रदेश में साइबर क्राइम के बढ़ते मामलों को देखते हुए राज्य सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। अब हर जिले में एक साइबर थाना और हर थाने में एक साइबर हेल्प डेस्क होगी।यह फैसला इसलिए लिया गया है क्योंकि इस साल जनवरी से अब तक 250 करोड़ रुपये की साइबर ठगी हो चुकी है। अभी तक सिर्फ भोपाल में ही एक साइबर थाना था, बाकी जिलों में साइबर क्राइम के मामले क्राइम ब्रांच में दर्ज होते थे। एक साल पहले आ गया था प्रपोजल साइबर हेल्प डेस्क बनाने का प्रस्ताव तो एक साल पहले ही आ गया था, लेकिन बजट नहीं होने की वजह से इस पर काम नहीं हो पाया था। अब राज्य साइबर मुख्यालय ने इसके लिए शासन से बजट की मांग की है और उम्मीद है कि जल्द ही यह सुविधा सभी जिलों में शुरू हो जाएगी। पुलिसकर्मियों को मिलेगी ट्रेनिंग पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों ने बताया कि साइबर हेल्प डेस्क में एक पुलिसकर्मी को साइबर क्राइम की जांच के लिए ट्रेनिंग देकर तैनात किया जाएगा। यह पुलिसकर्मी लोगों की शिकायतें सुनेगा और जरूरत पड़ने पर उन्हें साइबर थाने भेजेगा। इस साल में 250 करोड़ की ठगी साइबर क्राइम के मामलों में पिछले कुछ सालों में काफी तेजी आई है। पिछले पांच सालों में साइबर क्राइम की शिकायतें पांच हजार से बढ़कर तीन लाख से ज़्यादा हो गई हैं। साइबर पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों के मुताबिक, इस साल जनवरी से अब तक 250 करोड़ रुपये की साइबर ठगी हो चुकी है। दूसरे देशों से ठगी कर लेते हैं लोग साइबर पुलिस के मुताबिक, दूसरे देशों में बैठे लोग भी इस तरह के अपराध में शामिल हैं। साइबर थाने बनने से साइबर कानून के जानकार पुलिसकर्मी तैनात किए जा सकेंगे। इससे अपराध की घटनाओं पर कार्यवाई में तेजी आएगी। जांच से लेकर कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल करने तक का काम समय पर और अच्छी तरह से हो सकेगा। मध्य प्रदेश में बढ़े हैं ऐसे मामले मध्य प्रदेश में साइबर अपराध के मामलों में लगातार इज़ाफ़ा हो रहा है, इसलिए हर जिले में एक अलग साइबर थाने की सख्त ज़रूरत है। उम्मीद है कि इससे साइबर अपराध पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी और लोग साइबर ठगी से बच सकेंगे।

मध्यप्रदेश-राजस्थान ने चीता संरक्षण और कॉरिडोर विकास के लिए संयुक्त प्रबंधन समिति बनाई

Madhya Pradesh-Rajasthan form joint management committee for cheetah conservation and corridor development मध्यप्रदेश और राजस्थान के बीच चीता संरक्षण परियोजना को सुचारू रूप से संचालित करने और चीता कॉरिडोर के विकास के लिए दोनों राज्यों ने एक संयुक्त प्रबंधन समिति का गठन किया है। यह समिति चीता के संरक्षण, पर्यटन संभावनाओं और क्षेत्रों के विकास के लिए विस्तृत योजना बनाएगी। साथ ही, यह हर तीन माह में अपनी रिपोर्ट दोनों राज्यों की सरकारों को सौंपेगी। इस समिति के संयुक्त अध्यक्ष मध्यप्रदेश और राजस्थान के प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य वन्य-जीव अभिरक्षक होंगे। अन्य सदस्य के रूप में चीता प्रोजेक्ट के निदेशक, क्षेत्र संचालक/संचालक, वन्य-प्राणी विशेषज्ञ, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के प्रतिनिधि और भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून द्वारा नामांकित प्रतिनिधि होंगे। समिति मध्यप्रदेश और राजस्थान के बीच चीता परियोजना कॉरिडोर के लिए एमओयू का मसौदा तैयार करेगी। यह कॉरिडोर चीतों के सुरक्षित भ्रमण और उनके संरक्षण के लिए विकसित किया जाएगा। समिति कूनो और रणथंबौर क्षेत्रों को जोड़ने वाले राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य क्षेत्र में पर्यटन के लिए नए मार्गों का मूल्यांकन करेगी। यह पर्यटन के अवसरों को बढ़ावा देने के साथ-साथ चीतों के संरक्षण में भी सहायक होगा। समिति उन अधिकारियों और फ्रंट-लाइन कर्मचारियों के क्षमता निर्माण पर भी ध्यान देगी, जो कूनो से राजस्थान तक मौजूदा कॉरिडोर में चीतों की निगरानी और गश्त में शामिल हैं। इससे चीतों की सुरक्षा और संरक्षण में सुधार आएगा। कूनो और गांधी सागर अभ्यारण्य क्षेत्रों से चीतों के भविष्य के माइग्रेशन के लिए उपयुक्त क्षेत्रों का विकास भी समिति के कार्यक्षेत्र में शामिल रहेगा। इसके लिए प्रि-औगमेंटेशन बेस तैयार कर सुधारात्मक उपाय किए जाएंगे।

नवनियुक्त उप पुलिस अधीक्षकों की पदस्थापना, जानिए किन्हें मिली कहां की जिम्मेदारी

Posting of newly appointed Deputy Superintendents of Police, know who got the responsibility and where भोपाल। गृह विभाग के लिए आयोजित उप पुलिस अधीक्षक (रेडियो) चयन परीक्षा 2021 में चयनित 11 नवनियुक्त DSP की पोस्टिंग कर दी गई है। अरुण कुमार द्विवेदी और मयंक राय भोपाल पुलिस रेडियो मुख्यालय में सेवाएं देंगे। जितेंद्र पाटीदार मुरैना पुलिस रेडियो रेंज में पदस्थ किए गए हैं। वहीं संजय कुमार भोपाल पुलिस रेडियो रेंज में रहेंगे। लोकेश कुमार जाटव को इंदौर पुलिस रेडियो प्रशिक्षण शाला में पदस्थ किया गया है।

भोपाल: लोकायुक्त की कार्रवाई, नगर निगम कर्मचारी को 3 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार

Lokayukta raid in Bhopal: Municipal Corporation employee arrested red handed taking bribe of Rs 3 thousand भोपाल। राजधानी भोपाल (Bhopal) में लोकायुक्त (Lokayukta Raid) ने छापामार कार्रवाई की है। माता मंदिर स्थित नगर निगम (Municipal council) कार्यालय में पदस्थ कर्मचारी को 3 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। आरोपी ने पेंशन प्रकरण में नाम ट्रांसफर करने के एवज में घूस मांगी थी। दरअसल, आवेदक के पिता की पिछले महीने मृत्यु हो गई थी। जिसके बाद उसने पेंशन विभाग में इसे मां के नाम ट्रांसफर करवाने के लिए आवेदन दिया था।काम करने के बदले में कर्मचारी दौलत कुमार घोसले ने 5 हजार रुपए रिश्वत की मांग की थी। जिसके बाद दोनों के बीच 3 हजार रुपए में सौदा तय हो गया। आवेदक ने 4 नंबर को इसकी शिकायत लोकायुक्त में कर दी। जिसके बाद प्लान बनाकर युवक को घूस के पैसे देने के लिए भेजा गया। जैसे ही उसने 3 हजार रुपए दिए, टीम ने दबिश देकर आरोपी को रंगे हाथ पकड़ लिया। फिलहाल कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।

भोपाल: साइबर ठगों ने पुलिस कमिश्नर के नाम से फर्जी अकाउंट बनाकर ठगी की कोशिश, क्राइम ब्रांच को सौंपी गई जांच

Bhopal: Cyber ​​​​thugs tried to cheat by creating a fake account in the name of Police Commissioner, investigation handed over to Crime Branch. भोपाल: राजधानी में साइबर ठगों ने हद ही पार कर दी। भोपाल के पुलिस कमिश्नर हरिनारायणचारी मिश्रा के नाम से फर्जी फेसबुक अकाउंट बनाकर साइबर ठगों ने लोगों से पैसे ऐंठने की कोशिश की। ठग फर्जी अकाउंट से लोगों को रिक्वेस्ट भेज रहे हैं और एक्सेप्ट होने पर पैसे मांगने लगते हैं। खुद पुलिस कमिश्नर तक पहुंचा मामलामामला अब खुद पुलिस कमिश्नर तक पहुंच गया है। मामले की जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी है और आरोपियों पर सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है। यह पहली बार नहीं है जब पुलिस कमिश्नर मिश्रा को निशाना बनाया गया है। जब वह इंदौर के पुलिस कमिश्नर थे, तब भी उनके नाम से फर्जी अकाउंट बनाया गया था। तब इंदौर क्राइम ब्रांच ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उस अकाउंट को बंद करवा दिया था। क्या करते हैं ठगठग लोगों से उनका मोबाइल नंबर मांगते हैं और कहते हैं कि उनका कोई परिचित उन्हें कॉल करेगा। फिर वो व्हाट्सएप पर सस्ते फर्नीचर और इलेक्ट्रॉनिक सामान बेचने का झांसा देकर ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर करने को कहते हैं। क्राइम ब्रांच देख रही मामलापुलिस कमिश्नर मिश्रा ने कहा, ‘यह मामला मेरे संज्ञान में आ गया है। क्राइम ब्रांच आईपी एड्रेस के जरिए आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।’ लोगों की बढ़ी चिंतासाइबर ठग अब पुलिस अधिकारियों को भी निशाना बनाने से नहीं चूकते। पहले जहां आम लोगों के फर्जी अकाउंट बनाकर ठगी की जाती थी, वहीं अब ये अपराधी पुलिस अधिकारियों के नाम का इस्तेमाल करके लोगों को चूना लगा रहे हैं। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर किसी भी अनजान व्यक्ति को अपना निजी नंबर या कोई भी जानकारी न दें। ऑनलाइन खरीदारी करते समय भी सावधानी बरतें और किसी भी अनजान वेबसाइट या लिंक पर अपनी बैंकिंग जानकारी शेयर न करें।

नगरीय निकायों का बकाया बिजली बिल चुकाएगी सरकार

Government will pay the outstanding electricity bill भोपाल। मध्य प्रदेश की सरकार ने नगरीय निकायों के करोड़ों रुपये के बकाया बिजली बिल चुकाने का निर्णय लिया है। आर्थिक संकट में फंसे इन निकायों की सहायता के लिए चुंगी क्षतिपूर्ति की राशि का उपयोग किया जाएगा, जिससे उनकी बिजली की देनदारी चुकाई जा सकेगी। 60 करोड़ रुपये की स्वीकृति मप्र नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने इस मद से 60 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है। इसमें से सबसे अधिक 31 करोड़ रुपये पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी को दिए जाएंगे, जिससे इंदौर नगर निगम के 23 करोड़ रुपये का बकाया बिल समायोजित किया जाएगा। इसके अलावा भोपाल नगर निगम के 5 करोड़, जबलपुर के 5.5 करोड़ और ग्वालियर के 2.5 करोड़ रुपये का बिल भी चुकाया जाएगा। वित्तीय स्थिति की चुनौती मध्य प्रदेश के नगरीय निकायों की वित्तीय स्थिति इस कदर बिगड़ चुकी है कि वे अपने बिजली के बिल समय पर चुकाने में असमर्थ हैं। इसके पीछे मुख्य कारण है कि इन निकायों की वसूली बेहद कम है। पेयजल, स्ट्रीट लाइट आदि के लिए विद्युत वितरण कंपनियों से बिजली की आपूर्ति की जाती है, लेकिन स्थानीय निकायों द्वारा रहवासियों से शुल्क की वसूली में कमी आई है। सरकार का निर्णय इस स्थिति को देखते हुए सरकार ने चुंगी क्षतिपूर्ति की राशि का उपयोग बिजली के बकाया बिलों का भुगतान करने का निर्णय लिया है। यह राशि अब मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति के बजाय बिजली बिल चुकाने में खर्च की जाएगी। इससे विद्युत वितरण कंपनियों पर भी दबाव कम होगा और उनकी सेवा में भी कोई बाधा नहीं आएगी।

जिला न्यायालय के सामने दो पक्षों में लाठी-डंडों से मारपीट, आठ लोग घायल

Fighting with sticks between two parties in front of the District Court, eight people injured मुरैना ! जिला न्यायालय के बाहर हुई एक गंभीर घटना ने सभी को चौंका दिया। जिला न्यायालय के सामने दो पक्षों के बीच जमकर लाठी-डंडों से मारपीट हुई, जिसमें आठ लोग घायल हो गए। यह बवाल पति-पत्नी के बीच चल रहे विवाद को लेकर पेशी के दौरान शुरू हुआ। घटना का विवरण घटना उस समय हुई जब दोनों पक्ष न्यायालय में उपस्थित हुए थे। पेशी खत्म होने के बाद, अचानक दोनों पक्षों का आमना-सामना हो गया। एक पल में स्थिति बिगड़ गई, और समर्थकों ने एक-दूसरे पर लाठी-डंडे से हमला कर दिया। इस दौरान अदालत परिसर में अफरातफरी मच गई, और कई लोग केवल तमाशाई बनकर देखते रहे। घायलों की स्थिति मारपीट में घायल हुए लोगों को तुरंत स्थानीय अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। घायलों में से कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है, और चिकित्सक उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। पुलिस कार्रवाई कोतवाली थाना पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत कार्रवाई शुरू की। घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें दोनों पक्षों के लोग एक-दूसरे पर लाठी-डंडों से हमला करते नजर आ रहे हैं। वीडियो में पुलिसकर्मी भी मौजूद थे, लेकिन वे स्थिति को नियंत्रित करने में असफल रहे। पुलिस ने बताया कि घटना के बाद दोनों पक्ष थाने पहुंचे और एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए। अधिकारियों ने कहा कि मामले की जांच की जा रही है और सभी घायलों के बयान दर्ज किए जाएंगे। न्यायालय परिसर की सुरक्षा पर सवाल इस घटना ने न्यायालय परिसर में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। कई लोगों का मानना है कि इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए बेहतर सुरक्षा उपायों की आवश्यकता है। न्यायालय परिसर में उपस्थित लोगों ने कहा कि अगर पुलिस सक्रिय होती, तो यह मारपीट इतनी गंभीर नहीं होती। इस घटना ने मुरैना में एक बार फिर से कानून-व्यवस्था के मुद्दे को उजागर किया है। सभी की निगाहें अब पुलिस की कार्रवाई और न्यायालय परिसर में सुरक्षा उपायों पर हैं। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि वह मामले की गहराई से जांच करेगी और सभी संबंधित लोगों को सजा दिलाने का प्रयास करेगी।

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