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5 हजार करोड़ का फिर कर्ज लेगी मोहन यादव सरकार, 11 महीने में 40 हजार 500 करोड़ का लोन ले चुकी

Mohan Yadav government will again take a loan of Rs 5 thousand crores, has already taken a loan of Rs 40 thousand 500 crores in 11 months भोपाल। मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार एक बार फिर 5 हजार करोड़ रुपए का कर्ज लेने जा रही है। यह ऋण 26 नवंबर को ई ऑक्शन के जरिए स्टाक गिरवी रखकर लिया जाएगा। लोन की यह राशि दो अलग-अलग कर्ज के रूप में ली जा रही है, जो 2500-2500 करोड़ रुपए की है। 27 नवंबर को सरकार के खाते में लोन की यह रकम पहुंच जाएगी। जानकारी के मुताबिक मोहन सरकार की 20 साल के लिए 2500 करोड़ और 14 साल के लिए 2500 करोड़ लेने की तैयारी है। पिछले 11 महीने में सरकार 40 हजार 500 करोड़ रुपए का कर्ज ले चुकी है है। मध्यप्रदेश की जनता पर 3 लाख 90 हजार करोड़ का कर्ज का बोझ हो चुका है। राज्य सरकार भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के माध्यम से यह कर्ज उठाएगी। इसके लिए सरकारी बांड या स्टॉक को गिरवी रखकर धनराशि जुटाई जाएगी। ई-ऑक्शन प्रक्रिया पूरी होने के बाद 27 नवंबर को यह रकम राज्य सरकार के खजाने में आ जाएगी। 11 महीने में 40,500 करोड़ का कर्जसरकार के वित्तीय रिकॉर्ड पर नजर डालें तो यह इस साल का नया बड़ा कर्ज होगा। पिछले 11 महीनों में, राज्य सरकार ने 40,500 करोड़ रुपये का कर्ज लिया है। यह धनराशि राज्य की विकास योजनाओं और अन्य खर्चों के लिए इस्तेमाल की गई है। मध्य प्रदेश की जनता पर कर्ज का भार लगातार बढ़ता जा रहा है। वर्तमान में राज्य पर कुल कर्ज 3 लाख 90 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह राज्य की वित्तीय स्थिरता के लिए एक गंभीर मुद्दा है।

निर्मला सप्रे की सदस्यता पर फैसला अगले हफ्ते

Decision on Nirmala Sapre’s membership next week भोपाल। रामनिवास रावत के साथ लोकसभा चुनाव में भाजपा का समर्थन करने वाली बीना विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे की सदस्यता पर निर्णय अगले सप्ताह होगा। विधानसभा सचिवालय ने उन्हें अपनी बात रखने का अंतिम अवसर दिया है। वहीं, सप्रे ने कहा है कि वे विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के समक्ष उपस्थित होकर अपनी बात रखेंगी। उधर, कांग्रेस विधायक दल ने विधानसभा अध्यक्ष तोमर से मांग की है कि 16 दिसंबर से विधानसभा का शीतकालीन सत्र है। इसलिए आवेदन का निराकरण शीघ्र करें। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने लोकसभा चुनाव के समय भाजपा में शामिल होने की घोषणा करके पार्टी प्रत्याशी के विरुद्ध काम करने वाली बीना से विधायक निर्मला सप्रे की सदस्यता समाप्त करने का आवेदन दिया है। सदस्यता त्यागने का निर्णय नहीं कर पा रहीं सप्रे आवेदन में सप्रे के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ मंच साझा करने के साथ भाजपा का हाथ थामने की घोषणा करते हुए वीडियो, विभिन्न समाचार पत्रों में प्रकाशित खबर आदि दस्तावेज लगाए हैं। साथ ही भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित बैठक में उनके शामिल होने के फोटो भी फिर से दिए आवेदन के साथ लगाए हैं। उधर, सप्रे सदस्यता त्यागने को लेकर निर्णय नहीं कर पा रही हैं। यही कारण है कि उन्होंने पहले दो बार के नोटिस पर विभिन्न कारण बताते हुए समय मांगा और फिर कहा कि वे अध्यक्ष के समक्ष प्रत्यक्ष उपस्थित होकर अपनी बात रखेंगी। अनाश्यक खींचा जा रहा मामला- उपनेता प्रतिपक्ष सूत्रों का कहना है कि इस मामले में निर्णय अध्यक्ष को ही करना है, इसलिए अगले सप्ताह सप्रे की बात सुनकर प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। वहीं, विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे का कहना है कि इस मामले को अनाश्यक खींचा जा रहा है। दस्तावेज गुम होने की बात कहते हुए दोबारा आवेदन मांगा गया, जबकि स्थितियां बिलकुल स्पष्ट हैं। सभी प्रमाण विधानसभा सचिवालय को उपलब्ध कराए जा चुके हैं। यदि विधानसभा के शीतकालीन सत्र के पहले सप्रे की सदस्यता पर निर्णय नहीं लिया गया, तो हम न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे। उधर, विधानसभा के प्रमुख सचिव एपी सिंह का कहना है कि सप्रे ने अध्यक्ष से भेंट करके अपनी बात रखने का कहा है। जल्द ही इस पर फैसला हो जाएगा। टल सकता है निर्मला का मामला सूत्रों का कहना है कि रामनिवास रावत के उपचुनाव हारने के बाद अब निर्मला सप्रे का मामला टल भी सकता है। दरअसल, सप्रे बीना को जिला बनाने की मांग कर रही थीं। सरकार के स्तर पर इसकी तैयारी भी हो गई थी, पर खुरई में विरोध होने के कारण मामला टल गया। खुरई से विधायक पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह कह चुके हैं कि भले ही पार्टी कांग्रेस से आए लोगों को स्वीकार कर ले, पर वे नहीं करेंगे। सागर जिले में पार्टी के अधिकतर नेता व कार्यकर्ताओं के बीच सप्रे को लेने पर एकराय नहीं है।

MP में इज्तिमा की तैयारियां अंतिम चरण में, इस बार भी प्लास्टिक-फ्री भी होगा आयोजन

भोपाल भोपाल के ईंटखेड़ी स्थित घासीपुरा में शुक्रवार 29 नवंबर से शुरू होने वाले आलमी तब्लीगी इज्तिमा में इस बार 100 एकड़ क्षेत्र में पंडाल लगाया गया है, जहां प्रदेश सहित देशभर से आने वाली जमातों को ठहराया जाएगा। इधर, भारी तादाद में आने वाले वाहनों को व्यवस्थित खड़े करने और ट्रैफिक जाम से बचाने के लिए दो हजार वालेंटियर्स तैयार किए गए हैं। इन वालेंटियर्स की अलग-अलग जगहों पर तैनाती की जाएगी। यह वालेंटियर्स रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और शहर के प्रमुख चौराहों पर ट्रैफिक का संचालन करेंगे। इधर, इज्तिमा स्थल पर अलग-अलग कामों के लिए 25 हजार वालेंटियर्स को तैनात किया जा रहा है। इज्तिमा में शिरकत के लिए अमेरिका, इंग्लैंड, तुर्की सहित 100 से अधिक देशों की जमातों के शामिल होने की उम्मीद है। दो महीने से चल रही तैयारियां 29 नवंबर से शुरू होने वाले इज्तिमा की तैयारियां दो महीने पहले शुरू हो गई थीं। पिछले साल हुए इज्तिमा को क्लीन, ग्रीन और डस्ट मुक्त इज्तिमा का नाम दिया गया था। इस बार इसे प्लास्टिक मुक्त इज्तिमा के नाम से जाना जाएगा। इंतेजामिया कमेटी के प्रवक्ता उमर हफीज खान ने बताया कि इस बार इज्तिमागाह पर धूल वाले क्षेत्रों में पानी का छिड़काव किया जाएगा। इस बार भी फूड जोन में पॉलीथिन और तंबाकू उत्पादों की बिक्री पर रोक रहेगी। प्लास्टिक पर पूरी तरह से रोक रहेगी। पानी की बोतलों को एकत्रित कर डिस्पोज किया जाएगा। शनिवार को संभागायुक्त संजीव सिंह ने इज्तिमा के इंतजामों का जायजा लिया। इस मौके पर उन्होंने नगर निगम, बिजली, पीएचई, पीडब्ल्यूडी, स्वास्थ्य सहित अन्य सरकारी विभागों के अधिकारियों को समन्वय से काम करने की हिदायत दी। 100 एकड़ में पंडाल, 65 पार्किंग इज्तिमा में आने वाले बंदों की तादाद को देखते हुए इस बार 100 एकड़ क्षेत्र में पंडाल लगाया गया है। जमातियों की तादाद को देखते हुए इसे बढ़ाया भी जा सकता है। इधर, अलग-अलग क्षेत्रों से आने वाले जमातियों के वाहनों के लिए 65 पार्किंग बनाई गई हैं। चालीस फूड और 25 नाश्ते के जोन रहेंगे, जहां रियायती दरों में खाद्य सामग्री बेची जा सकेगी। इमरजेंसी कॉरिडोर रहेगा आरक्षित चार दिनी इज्तिमा के आयोजन को लेकर इस बार भी इमरजेंसी कॉरिडोर बनाया गया है, जहां फायर ब्रिगेड और एंबुलेंस आसानी से पहुंच सकेगी। इस रास्ते पर किसी अन्य को जाने की इजाजत नहीं रहेगी। यहां पानी लाने वाले टैंकर भी आसानी से जा सकेंगे। अलर्ट रहेंगी बुलेट स्ट्रेचर एंबुलेंस इज्तिमा में सात से दस लाख तक बंदों की तादाद को देखते हुए इंतेजामिया कमेटी ने बुलेट स्ट्रेचर एंबुलेंस तैयार की है, जिससे अचानक से किसी की भी तबीयत बिगड़ने पर बुलेट एंबुलेंस से उसे बाहर तक आसानी से लाया जा सकेगा। यहां से एंबुलेंस की मदद से अस्पताल तक भेजा जाएगा। हालांकि, प्राथमिक उपचार के लिए 20 से अधिक निजी अस्पताल और सरकारी अस्पतालों के डॉक्टर मौजूद रहेंगे।

पर्यटकों का स्वर्ग, भारत का आध्यात्मिक हृदय: मध्यप्रदेश

Tourist’s Paradise, Spiritual Heart of India: Madhya Pradesh भोपाल ! मध्यप्रदेश, जिसे “भारत का हृदय” कहा जाता है, धार्मिक और आध्यात्मिक विरासत का एक समृद्ध ताना-बाना है, जिसमें कई ऐसे स्थल हैं जो तीर्थयात्रियों और पर्यटकों को समान रूप से आकर्षित करते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दूरदर्शी नेतृत्व में, राज्य सरकार इन स्थलों को बढ़ाने और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठा रही है, जो राज्य की सांस्कृतिक अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वर्तमान सरकार की पहली वर्षगांठ, 13 दिसंबर के अवसर पर, सरकार मौजूदा धार्मिक स्थलों के जीर्णोद्धार और मध्यप्रदेश को धार्मिक पर्यटन के लिए एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए नए आध्यात्मिक स्थलों के विकास पर ध्यान केंद्रित कर रही है। मध्यप्रदेश के विविध धार्मिक परिदृश्य में हिंदू, जैन, बौद्ध और इस्लाम सभी शामिल हैं, जो आध्यात्मिक साधकों के लिए एक महत्वपूर्ण गंतव्य है। हाल के वर्षों में मध्यप्रदेश में पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है, विशेष रूप से उज्जैन में “महाकाल महालोक” के सफल शुभारंभ के बाद। महाकाल महालोक में आगंतुकों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है, जो आर्थिक विकास और सांस्कृतिक संरक्षण के उत्प्रेरक के रूप में धार्मिक पर्यटन की क्षमता को रेखांकित करता है। डॉ. यादव के मार्गदर्शन में राज्य सरकार ने पूरे राज्य में महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों के जीर्णोद्धार और संवर्धन को प्राथमिकता दी है। इस पहल का उद्देश्य न केवल सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करना है, बल्कि आगंतुकों के अनुभव को बेहतर बनाना भी है। महाकाल महालोक इन प्रयासों का केंद्र बिंदु है, जिसे महाकालेश्वर मंदिर के आसपास एक जीवंत आध्यात्मिक केंद्र के रूप में विकसित किया गया है। यह पुनर्विकास प्रबंधन को बेहतर बनाता है और इस ऐतिहासिक स्थल के आध्यात्मिक वातावरण को समृद्ध करता है। प्रदेश के अनेक धार्मिक स्थलों का उनकी परम्पराओं के अनुरूप विकास किया जा रहा हहै। सलकनपुर में देवी लोक को शक्ति मंदिर स्थल के रूप में विकसित किया गया है, ताकि सुगमता से देवी दर्शन के साथ ही तीर्थयात्रियों के लिए बेहतर पहुँच और सुविधाएँ भी उपलब्ध कराई जाएँ। छिंदवाड़ा में श्रीहनुमान लोक भगवान हनुमान का उत्सव मनाएगा, जिसमें भक्तों और पर्यटकों के लिए एक आकर्षक वातावरण बनाया जाएगा। ओरछा में रामराजा लोक भगवान राम का सम्मान करेगा और अध्यात्म और इतिहास दोनों में रुचि रखने वाले आगंतुकों को आकर्षित करेगा। सागर में संत रविदास लोक के पुनरुद्धार का उद्देश्य संत रविदास की विरासत का सम्मान करना है, ताकि उनके अनुयायियों और उनकी शिक्षाओं में रुचि रखने वाले पर्यटकों को आकर्षित किया जा सके। जबलपुर में रानी दुर्गावती स्मारक और रानी अवंतीबाई स्मारक जैसे ऐतिहासिक स्थलों को भी उनके सांस्कृतिक महत्व को उजागर करते हुए बढ़ाया जा रहा है, साथ ही इतिहास और अध्यात्म दोनों में रुचि रखने वाले आगंतुकों का भी ध्यान रखा जा रहा है। इसके अलावा, अमरकंटक में माँ नर्मदा महालोक में आगंतुकों की सुविधाओं को बढ़ाने और इसकी प्राकृतिक सुंदरता को बढ़ावा देने के लिए सुधार किए जा रहे हैं। सरकार खरगोन में देवी अहिल्याबाई लोक, बड़वानी जिले में नागलवाड़ी लोक जैसे नए आध्यात्मिक स्थलों को विकसित करने पर भी ध्यान केंद्रित कर रही है, जिसमें शांत वातावरण बनाने पर जोर दिया जा रहा है। ग्वालियर में जाम सावंली हनुमान लोक में भगवान हनुमान की शक्ति और भक्ति का पर्व मनाया जाएगा, वहीं जानापाव जिसे भगवान परशुराम की जन्म स्थली के रूप में जाना जाता है, वहां परशुराम लोक विकसित किया जाएगा, जिसमें भगवान परशुराम को समर्पित एक नया मंदिर बनाया जाएगा, जहां आगंतुकों के लिए विभिन्न सुविधाएँ भी होंगी। इस परियोजना में नर्मदा जल को लाना और आसान पहुँच के लिए रोपवे का निर्माण करना भी शामिल है। दतिया में मां पीतांबरा लोक, देवी पीतांबरा को समर्पित एक और महत्वपूर्ण स्थल है। रतनगढ़ में माता मंदिर लोक देवी दुर्गा को समर्पित एक प्रतिष्ठित मंदिर के साथ एक प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थल भी बन जाएगा। अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन की संभावनाओं को पहचानते हुए, मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड विदेशों से पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए वैश्विक बाजारों के साथ सक्रिय रूप से जुड़ रहा है। स्थानीय जनजातियों के लिए सब्सिडी के साथ ग्रामीण होम-स्टे को बढ़ावा देने जैसी पहल प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय पर्यटकों के लिए सुरक्षा बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें अच्छे आवास का अनुभव भी प्रदान करती है। मध्यप्रदेश द्वारा पर्यटन के क्षेत्र में किए गये ये नवाचार जैसे-जैसे समय के साथ आगे बढ़ते हैं, वे न केवल पर्यटन में वृद्धि के माध्यम से आर्थिक विकास का वादा करते हैं, बल्कि भारत की विविध धार्मिक परंपराओं के बीच शांति की तलाश करने वाले आगंतुकों के लिए एक समृद्ध आध्यात्मिक अनुभव भी प्रदान करते हैं। इसमें सरकार की प्रतिबद्धता इस समझ को रेखांकित करती है कि धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने से मध्यप्रदेश में सांस्कृतिक संरक्षण और सामुदायिक विकास दोनों में महत्वपूर्ण योगदान हो सकता है। मध्यप्रदेश सरकार “वृंदावन ग्राम योजना” भी प्रारंभ करने जा रही है, जिसके अंतर्गत चयनित ग्राम पंचायतों को ग्रामीण विकास में बढ़ावा देने वाले आदर्श गांवों में बदला जायेगा है। प्रत्येक चयनित गांव में स्थानीय डेयरी उत्पादन को बढ़ावा देते हुए गायों की सुरक्षा के लिए गौशालाएँ बनाई जाएँगी। शहरी मध्यप्रदेश के आध्यात्मिक परिदृश्य को और समृद्ध बनाने के लिए, सभी शहरी निकायों में गीता भवन केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। ये केंद्र भगवदगीता और अन्य शास्त्रों की शिक्षाओं को फैलाने पर ध्यान केंद्रित करेंगे, साथ ही आध्यात्मिक शिक्षाओं से संबंधित साहित्य तक पहुँच प्रदान करेंगे। लगभग 100 पर्यटन परियोजनाओं में सरकार का लगभग 2,200 करोड़ का निवेश होगा, जो मध्यप्रदेश की धार्मिक पर्यटन को बढ़ाने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

भोपाल के थानों में जल्द बनेगी साइबर हेल्प डेस्क, फरियादी की सहायता के लिए तैनात होंगे दक्ष पुलिसकर्मी

Cyber ​​help desk will soon be set up in Bhopal police stations, skilled policemen will be deployed to assist the complainant. भोपाल। राजधानी की पुलिस साइबर ठगी की रोकथाम, इसका शिकार हुए लोगों की मदद के लिए एक और नवाचार करने जा रही है। अब राजधानी के हर थाने में साइबर हेल्प डेस्क बनाई जाएगी। एक दिसंबर से सभी थानों में साइबर हेल्प डेस्क का संचालन शुरू हो जाएगा। यहां पर पांच लाख रुपये तक की साइबर धोखाधड़ी की शिकायतें दर्ज कराई जा सकेंगी। यह होगा लाभ इससे न सिर्फ साइबर ठगी के पीड़ितों को शिकायत दर्ज कराने में सहूलियत होगी, बल्कि साइबर क्राइम सेल का भार भी कम होगा। साथ ही जल्द शिकायत होने से पीड़ितों की ठगी गई राशि भी साइबर पुलिस त्वरित कार्रवाई कर होल्ड करेगी, जिससे रिफंड होने की संभावना काफी बढ़ जाएगी।थानों की साइबर डेस्क में साइबर अपराध की इस चुनौती से निपटने के लिए शहर के हर थाने से दस पुलिस कर्मियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। पुलिस कंट्रोल रूम में गुरुवार से छह दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू कर दिया गया है। इसके तहत पुलिसकर्मियों को साइबर अपराधों से जुड़ी बारिकीयों की जानकारी दी जा रही है। साइबर विशेषज्ञ अधिकारी दे रहे प्रशिक्षण डीसीपी क्राइम अखिल पटेल ने बताया कि साइबर डेस्क संचालन के लिए तकनीकी ज्ञान की आवश्यकता होती है। फिलहाल छह दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रदेश के 20 साइबर विशेषज्ञ पुलिस अधिकारी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जिसमें पुलिसकर्मियों को राष्ट्रीय पोर्टल एनसीसीआरपी, जेएमआईएस एवं सीईआइआर पर डाटा अपलोड करने के बारे में प्रशिक्षित किया जा रहा है। साथ ही टेलीकॉम कंपनी एवं अन्य तकनीकों का प्रशिक्षण दे रहे हैं। इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम लगातार जारी रहेंगे। बड़े मामले राज्य साइबर पुलिस ही संभालेगीसाइबर अपराध की रोकथाम और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए यह पहल की जा रहा है कि अब 5 लाख रुपय तक ऑनलाइन ठगी की शिकायत थानों में दर्ज कराई जा सकेगी। हालांकि पांच लाख रुपए से अधिक की साइबर धोखाधड़ी की जांच स्टेट साइबर पुलिस ही करेगी। यानी बड़ी साइबर ठगी के शिकार लोगों को भदभदा स्थित राज्य साइबर पुलिस के कार्यालय में ही शिकायत दर्ज करानी होगी।

वन विभाग में बड़े ट्रांसफर, प्रधान मुख्य वन संरक्षक को हटाया

Major transfers in the forest department, Principal Chief Forest Conservator removed भोपाल। मध्यप्रदेश शासन ने गुरुवार रात वन विभाग के दो बड़े अधिकारियों का तबादला कर दिया है. इस ट्रांसफर ऑर्डर को भी बांधवगढ़ मामले से जाेड़कर देखा जा रहा है. दरअसल, बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में 10 हाथियों की मौत के मामले के बाद लगातार अधिकारियों के तबादले हो रहे हैं. वहीं अब मोहन यादव सरकार ने भारतीय वन सेवा के दो अधिकारियों को प्रशासकीय हित का हवाला देते हुए स्थानांतरित किया है. किन IFS के हुए ट्रांसफर मध्य प्रदेश शासन ने गुरुवार को एक आदेश जारी किया है, जिसमें प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) मुख्यालय भोपाल वीएन अम्बाड़े का ट्रांसफर कर दिया गया है. उनकी जगह वित्त एवं बजट शाखा के प्रधान मुख्य वन संरक्षक शुभरंजन सेन को प्रदेश का नया प्रधान मुख्य वन संरक्षक नियुक्त किया गया है. वहीं वीएन अम्बाड़े को वन राज विकास निगम भोपाल में प्रबंध संचालक बनाकर भेजा गया गया है. हाथियों की मौत के बाद प्रशासनिक सर्जरी गौरतलब है कि बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व कुछ दिन पहले एक-एक करके 11 हाथियों की मौत हो गई थी. घटना के कुछ समय बाद ही बांधवगढ़ के दो अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया गया था. वहीं अब वाइल्डलाइफ वार्डन को भी हटा दिया गया है, और उन्हें नई जिम्मेदारी सौंप दी गई है.

RGPV में घोटाला: स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के नाम पर बड़ा घपला, छात्रों ने उच्च शिक्षा मंत्री को सौंपा ज्ञापन

Scam in RGPV: Big scam in the name of sports complex, ABVP students submitted memorandum to Higher Education Minister भोपाल। राजधानी भोपाल का राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (RGPV) एक बार फिर सुर्ख़ियों में आ गया है। अब यहां स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के नाम पर बड़ा घोटाला किया गया है। जिसकी शिकायत अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार को ज्ञापन सौंपकर की है। साथ ही इस मामले की जांच कर कार्रवाई की मांग की है। ABVP के छात्रों ने आरोप लगाते हुए कहा कि RGPV यूनिवर्सिटी में स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के नाम पर करोड़ों का भ्रष्टाचार हुआ है। उन्होंने कहा कि 2015 में विश्वविद्यालय द्वारा आउटडोर-इनडोर स्पोर्ट्स कांप्लेक्स के निर्माण के लिए 16 करोड़ 50 लाख की राशि स्वीकृत की गई थी। साल 2019 में इस राशि को बढ़ाकर 19 करोड़ 16 लाख रुपए कर दिया गया। इसके निर्माण की जिम्मेदारी सीपीए को दी गई थी। वह निर्माण कार्य आज भी चल रहा है। ABVP के छात्रों का कहना है कि कोटेशन में दिखाए गए 10 एग्जॉस्ट फैन के स्थान पर एक भी एग्जॉस्ट फैन नहीं लगाया गया। वुडन फ्लोरिंग मे भी खराब प्लास्टिक का उपयोग किया गया है। उच्च शिक्षा मंत्री को ज्ञापन सौंपकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने पूरे मामले की जांच करने की मांग की है।

थाना टीलाजमालपुरा पुलिस ने चंद घंटों में किया नकबजनी का पर्दा-फाश

Police station Tilajamalpura exposed Nakbajani in a few hours भोपाल ! पुलिस आयुक्त महोदय नगरीय पुलिस भोपाल श्रीमान हरिनारायण चारी (भा.पु.से.), अतिरिक्त पुलिस आयुक्त(का.व्य.) महोदय नगरीय पुलिस जिला भोपाल श्रीमान अवधेश कुमार गोस्वामी (भा.पु.से.) , पुलिस उपायुक्त महोदय जोन 03 भोपाल श्रीमान रियाज इकबाल(भा.पु.से.), अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त महोदय जोन 03 भोपाल श्रीमति शालिनी दीक्षित (रा.पु.से.), सहायक पुलिस आयुक्त महोदय शाह.बाद संभाग भोपाल श्रीमान निहित उपाध्याय (रा.पु.से.) के मार्गदर्शन मे अपराधो की रोकथाम एवं चोरी/नकबजनी/वाहन चोरो की धडपकड का अभियान चलाया जा रहा है ।घटना का विवरण :- दिनांक 18/11/24 को फरियादिया श्रीमती लता सिरमोरिया पति मनोज सिरमोरिया उम 36 साल निवासी म.न. 365 गली न. 04 कबीटपुरा थाना टीलाजमालपुरा भोपाल ने थाना उपस्थित आकर रिपोर्ट किया कि वह दिनाँक 17/11/2024 के रात्री नौ बजे मैं अपने पति के साथ घर के दरवाजे मे ताला लगाकर अपने अपने पति के साथ रिश्तेदार के यहाँ शादी में छोला भोपाल गऐ थे दिनांक 18/11/2024 को सुबह 06/00 बजे घर आए तो देखा की लगा हुआ दरवाजे पर ताला नही था दरवाजे खुले थे अन्दर जा कर देखा तो गोदरेज की अलमारी के लॉकर टूटा हुआ था लाकर में रखे हुए सोने चाँदी के नये व इस्तेमाली आभूषण कीमती करीबन 5,00,000/- रूपये कोई अज्ञात चोर चौरी करके ले गया है। कि रिपोर्ट पर थाना टीलाजमालपुरा में असल अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया। एवं सूचना से वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया गया जिनके मार्गदर्शन में टीम घठित कर अज्ञात चोरो की तलाश मुखविर तंत्र विकसित कर निगरानी गुण्डा बदमाशो की चैकिंग व पूछताछ की गयी। संदेहियों (1)अजहर अली पिता अनवर अली, (2)सरवर अली पिता अनवर अली को अभिरक्षा मे लेकर ‍हिकमतअमली व सख़्ती से पूछताछ करने पर संदेहियों के द्वारा उक्त चोरी नकबजनी की घटना कारित करना स्वीकार किए। आरोपीगणों से चोरी गये सोने चांदी के आभूषण व नगदी रूपये कुल कीमती 5,00,000/- रूपये बरामद किये गये।नकबजनों से बरामद नगदी व आभूषण –(01) मगलंसूत्र बडा लोकेट 06 चपटे मोती वाला (10 ग्राम करीबन)(02) मंगलसूत्र मिडियम लोकेट 06 चावल मोती 06 छोटे गोल मोती वाला। (6 ग्राम करीबन)(03) एक छोटे लोकेट वाला मंगलसूत्र 06 चावल दाने लगे है। (2 ग्राम करीबन)(04) 4 सोने के कडे (25 ग्राम करीबन)(05) सोने के एक जोड झुमकी (7 ग्राम करीबन)(06) सोने के एक जोड झुमकी (6 ग्राम करीबन)(07) सोने के एक जोड टॉप्स (4 ग्राम करीबन)(08) सोने के एक जोड टॉप्स (3 ग्राम करीबन)(09) दो लोकेट सोने के गणेश जी के छोटे बडे । (1 ग्राम करीबन)(10) नाक की चार नत्थ छोटी एक नाक की लोंग सोने की नग लगे हुए। (1 ग्राम करीबन)(11) एक मोती ढोलक सोने की परत चढी हुई । (1 ग्राम करीबन)(12) एक सोने की चेन (06 ग्राम करीबन)(13) एक सोनी हाय चंद्रमा लोकेट चार सोने की मोती छोटे । (1 ग्राम करीबन)(14) बडी पायल एक जोड (250 ग्राम करीबन)(15) मझौली पायल एक जोड (125 ग्राम करीबन)(16) छोटी पायल एक जोड (150 ग्राम करीबन)(17) एक जोड चाँदी के कढे एक जोड बडे एक जोड नग लगे (60 ग्राम करीबन)(18) एक जोड चाँदी के कढे एक जोड बडे एक जोड नग लगे (40 ग्राम करीबन)(19) चार चूडी पतली (20 ग्राम करीबन)(20) बच्चो के कडे 08 (50 ग्राम करीबन)(21) 01 हाफ करधन (250 ग्राम करीबन)(22) 01 पतला चाँदी का फुल करधन (50 ग्राम करीबन)(23) 01 जोड हाथ फुल (40 ग्राम करीबन)(24) 01 कमर गुच्छा चाँदी का (100 ग्राम करीबन)(25) 02 चाँदी की चेन (20 ग्राम करीबन)(26) 04 चाँदी की अंगुठी (10 ग्राम करीबन)(27) 11 जोड बिछिया (70 ग्राम करीबन)(28) 02 ब्रेसलेट चाँदी के बच्चो के (20 ग्राम करीबन)(29) 02 चाँदी के सिक्के (20 ग्राम करीबन)(30) 02 बच्चो के कंमर डोरा (50 ग्राम करीबन)(31) 5000/- रूपये नकदी (पांच हजार रूपये)(32) कुल कीमती 5,00,000/- रुपये (पांच लाख रूपये) का माल बरामद किया गया । गिरफ्तारशुदा आरोपी- सराहनीय भूमिका – थाना प्रभारी निरीक्षक सरिता बर्मन, उनि बी पी विश्वकर्मा, सउनि अमर सिंह, प्रआर 749 लोकेश जोशी, आर 4599 जितेन्द्र पाल, आर 1295 हरिओम, की सराहनीय भूमिका रही।

शादी कैंसिल होने पर मैरिज गार्डन संचालक लौटाएंगे पूरी राशि : ‘आगे एडजस्ट कर लेंगे’ कह कर पैसे नहीं रख सकते; कंज्यूमर आयोग का फैसला

Marriage garden operators will return the entire amount if the wedding is cancelled: They cannot keep the money saying ‘we will adjust it later’; Consumer Commission’s decision भोपाल। अगर आप शादी हॉल या मैरिज गार्डन बुक करते हैं और किसी कारणवश कार्यक्रम कैंसिल हो जाए, तो मैरिज गार्डन या शादी हॉल संचालक को बुकिंग कैंसिल होने के तुरंत बाद रकम लौटानी होगी। संचालक एडवांस राशि वापस करने से यह कहकर इनकार नहीं कर सकते कि ‘आगे एडजस्ट कर लेंगे’ या ‘जब कार्यक्रम होगा, तब एडजस्ट कर लेंगे’। दरअसल, भोपाल कंज्यूमर आयोग की बेंच-1 ने ऐसा ही एक फैसला सुनाया हैं। आयोग ने कहा कि विपक्षी द्वारा बुकिंग राशि वापस न करना सेवा में कमी के तहत आता है। यह फैसला अध्यक्ष योगेश दत्त शुक्ल ने सुनाया। कोलार के वैभव मैरिज गार्डन के खिलाफ सुनाया फैसला शिवाजी नगर निवासी राजरूप पटेल ने अपनी बेटी की शादी के लिए नवंबर 2022 में कार्यक्रम रखा था। इसके लिए उन्होंने जून 2022 में 21 हजार रुपये में कोलार स्थित वैभव मैरिज गार्डन बुक किया। बाद में विवाह कैंसिल हो गया, और उन्होंने जुलाई 2022 में बुकिंग निरस्त कर दी। उन्होंने बार-बार गार्डन प्रबंधन से जमा राशि वापस करने की गुजारिश की। गार्डन प्रबंधन ने कहा कि भविष्य में होने वाले विवाह के समय राशि एडजस्ट कर दी जाएगी। इसके बावजूद लगभग दो वर्ष बीत गए, और विवाह गार्डन में आयोजित नहीं हुआ। इसके बाद भी गार्डन प्रबंधन ने राशि वापस करने से इनकार कर दिया। दूसरी तरफ नोटिस जारी होने के बाद भी गार्डन प्रबंधन की ओर से कोई भी आयोग में उपस्थित नहीं हुआ। आयोग ने उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाया उपभोक्ता ने 21 हजार रुपये एडवांस के तौर पर दिए थे। मामले में विपक्षी ने बुकिंग राशि वापस करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया। नोटिस के बावजूद विपक्षी ने न तो आयोग में उपस्थिति दर्ज कराई और न ही कोई दस्तावेज प्रस्तुत किए। आयोग ने कहा कि बुकिंग राशि वापस न करना सेवा में कमी का प्रमाण है। अब देना होगी ब्याज सहित राशि आयोग ने आदेश दिया कि विपक्षी, आदेश की प्रति प्राप्ति दिनांक से 2 माह के भीतर परिवादी को 21,000 रुपये की राशि 9% वार्षिक ब्याज सहित अदा करे। साथ ही, मानसिक कष्ट के लिए 5,000 रुपये और परिवाद व्यय के लिए 3,000 रुपये भी अदा किए जाएं। यदि राशि तय समय पर अदा नहीं की जाती, तो परिवाद प्रस्तुति दिनांक से अदायगी दिनांक तक 9% वार्षिक ब्याज देय होगा।

मध्यप्रदेश: 10 हाथियों के मरने की वजह आई सामने, मिलेट का फंगी कनेक्शन

Madhya Pradesh: Reason for death of 10 elephants revealed, understand the fungal connection of millet भोपाल: मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में पिछले महीने 10 हाथियों की मौत का कारण कोदो में फफूंद संक्रमण बताया जा रहा है। हैदराबाद के ICRISAT के वैज्ञानिकों ने यह जानकारी राज्य सरकार को दी है। वन अधिकारियों का कहना है कि ICRISAT की फाइनल रिपोर्ट का इंतजार है। तीन तरह के फंगस मिले ICRISAT ने शुरुआती जांच में कोदो के नमूनों में तीन तरह के फफूंद – एस्परजिलस फ्लेवस, एस्परजिलस पैरासिटिकस और पेनिसिलियम साइक्लोपियम की मौजूदगी की पुष्टि की है। इन फफूंदों से साइक्लोपिआज़ोनिक एसिड नामक जहरीला पदार्थ पैदा होता है, जिसके सेवन से हाथियों की मौत होने की आशंका है। फाइनल रिपोर्ट का इंतजार वन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि हमें ICRISAT की फाइनल रिपोर्ट का इंतजार है। उन्होंने पुष्टि की है कि हाथियों द्वारा खाए गए कोदो में ये फफूंद मौजूद थे। घटना की जांच के लिए, एमपी के अधिकारियों ने ICRISAT सहित पूरे भारत में 10 प्रयोगशालाओं में नमूने भेजे थे। ICRISAT, हैदराबाद स्थित एक गैर-लाभकारी अनुसंधान संगठन है, जो विशेष रूप से अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में कृषि प्रणालियों को बेहतर बनाने में माहिर हैं। बरेली से आ गई है रिपोर्ट बरेली स्थित भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI) ने भी अपनी विषाक्तता परीक्षा रिपोर्ट में पुष्टि की है कि कोदो में फफूंद विषाक्त पदार्थों, विशेष रूप से साइक्लोपिआज़ोनिक एसिड के कारण हाथियों की मौत हुई। जहर की नहीं हुई थी पुष्टि हाथियों के लीवर, किडनी, तिल्ली और आंतों सहित विभिन्न अंगों के नमूने विश्लेषण के लिए IVRI भेजे गए थे। परीक्षणों में साइनाइड, भारी धातुओं, या ऑर्गनोफॉस्फेट या पाइरेथ्रोइड जैसे सामान्य कीटनाशकों का कोई निशान नहीं पाया गया। हालांकि, सभी नमूनों में साइक्लोपिआज़ोनिक एसिड पाया गया, जिसकी सांद्रता 100 पार्ट्स प्रति बिलियन (ppb) से अधिक थी। सात एकड़ में कोदो की खेती हाथियों ने जिस कोदो की फसल को खाया था वह बांधवगढ़ के अंदर 7 एकड़ जमीन पर थी। असामान्य फफूंद वृद्धि के संकेतों के बावजूद, जांचकर्ताओं को इस बात का कोई सबूत नहीं मिला कि उस क्षेत्र में कीटनाशकों का उपयोग किया गया था। स्थानीय किसानों ने भी ऐसे किसी भी रसायन के उपयोग से इनकार किया है। हाथियों की मौत 29 अक्टूबर, 2024 को शुरू हुई थी। शुरुआत में फफूंद संक्रमण पर ही संदेह जताया गया था। अधिकारी अभी भी इस मामले की जांच कर रहे हैं, ताकि फंगस की पूरी सीमा और क्षेत्र के वन्यजीवों पर इसके प्रभाव को समझा जा सके।

छिंदवाड़ा, शहडोल और सिंगरौली के एसपी बदले: 10 आईपीएस अधिकारियों के ट्रांसफर

SP of Chhindwara, Shahdol and Singrauli changed: 10 IPS officers transferred भोपाल ! मध्यप्रदेश शासन ने सोमवार को 10 आईपीएस अधिकारियों की तबादला सूची जारी की। साथ ही राज्य पुलिस सेवा के भी दो अधिकारियों के ट्रांसफर किए गए हैं। देखिए लिस्ट

एनसीएल की बड़ी योजना: सिंगरौली में बस्ती का पुनर्वास और 60 करोड़ टन कोयला खनन का लक्ष्य

NCL’s big plan: rehabilitation of settlement in Singrauli and target of mining 60 crore tonnes of coal सिंगरौली  । कोल इंडिया की शाखा एनसीएल एक बड़ी पुनर्वास और पुनर्स्थापन (आरएंडआर) परियोजना की योजना बना रही है। कंपनी के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक (सीएमडी) बी साईराम ने कहा कि इसके तहत मध्य प्रदेश के सिंगरौली में एक बस्ती के निवासियों को स्थानांतरित करने की तैयारी की जा रही है, जिसके नीचे 60 करोड़ टन खनन योग्य कोयला है। उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा कि मध्य प्रदेश के सिंगरौली में मोरवा बस्ती 927 हेक्टेयर में फैली हुई है। यह एक बड़ी परियोजना है, जिसमें नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एनसीएल) की मोरवा बस्ती को पूरी तरह स्थानांतरित किया जाएगा। साईराम ने कहा, अच्छी बात यह है कि इस अधिग्रहण में लोग पुनर्वास के लिए तैयार हैं। इसलिए आधी समस्या हल हो गई है, क्योंकि पहला प्रतिरोध लोगों की तरफ से ही आता है। उन्होंने कहा कि अब केवल मुआवजे की दरों और आरएंडआर लाभ को अंतिम रूप देना बाकी है। पिछले छह महीनों से एनसीएल पुनर्वास और पुनर्स्थापन पर लोगों के साथ नियमित रूप से बातचीत कर रही है। उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन एनसीएल की मदद कर रहा है और पुनर्वास के पहले चरण का ब्यौरा तैयार किया जाना है। सीएमडी ने कहा, मई से हम मुआवजे का पहला चेक देना शुरू कर देंगे। उन्होंने बताया कि पहले चरण में 572.5 हेक्टेयर कृषि भूमि खाली कराई जानी है। सूत्रों के अनुसार कंपनी अभी भी योजना के विवरणों पर काम कर रही है, जिसमें वित्तीय पक्ष भी शामिल हैं। मोरवा बस्ती पुनर्वास और पुनर्स्थापन परियोजना बहुत बड़ी होगी और इस पर 20,000 करोड़ रुपये से अधिक का अनुमानित व्यय होने का अनुमान है। इस परियोजना से 30 हजार परिवार प्रभावित होंगे और इसमें 22 हजार घरों, संरचनाओं का स्थानांतरण शामिल होगा।

भोपाल को झुग्गी मुक्त करने कलस्टरों में विभाजित करने की योजना, पीपीपी माेड के तहत बनाए जाएंगे पक्के मकान

भोपाल  राजधानी को झुग्गी मुक्त बनाने के लिए जिला प्रशासन ने तैयारियां शुरू कर दी हैं।दरअसल मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव के निर्देश पर शहर को नौ कलस्टरों में विभाजित करने की योजना बनाई है।इसके तहत सभी झुग्गी क्षेत्रों का सर्वे कर चिह्नांकन किया जाएगा और कुल कितनी शासकीय भूमि पर झुग्गी बनी हुई हैं इसकी रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इस रिपोर्ट के आधार पर डीपीआर तैयार कर शासन को भेजी जाएगी। इन सभी विषयों पर चर्चा करने के लिए कलेक्ट्रेट में गुरुवार को कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने बैठक ली। जिसमें नगर निगम आयुक्त हरेंद्र नारायन सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे। जिसमें तय किया गया कि झुग्गी हटाने के पहले चरण की शुरूआत मंत्रालय वल्लभ भवन से की जाएगी। यहां करीब 39 हेक्टेयर भूमि में बनी नौ झुग्गी बस्तियों को हटाया जाएगा और रहवासियों को पीपीपी मोड (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) के तहत पक्के मकान बनाकर दिए जाएंगे। बता दें कि नवदुनिया ने पूर्व में शासकीय भूमि पर झुग्गियों से संबंधित खबरें प्रकाशित की हैं। 12 हेक्टेयर में बनाए जाएंगे पक्के मकान पहले कलस्टर के प्रथम चरण में मंत्रालय के पास बनी नौ झुग्गी बस्तियों को चिह्नित किया गया है।इनमें ओम नगर, वल्लभ नगर, भीम नगर, दुर्गा नगर, अशोक सम्राट नगर, कुम्हार पुरा, झदा कॉलोनी और वल्लभ नगर दो के छह हजार 534 परिवारों को पक्के मकानों में शिफ्ट किया जाना है। इसके लिए अधिकारियों सर्वे पूरा कर लिया है और अब इसके आधार पर ही डीपीआर, डिजाइन, प्लानिंग पालिसी, एस्टीमेट और टेंडर तैयार किए जाएंगे। यह काम अधिकारियों को एक सप्ताह में पूरा करना है।यहां स्थित 39 हेक्टेयर भूमि में से 12 हेक्टेयर पर झुग्गीवासियों के लिए पीपीपी मोड पर पक्के मकान बनाए जाएंगे। बाकि 27 हेक्टेयर शासकीय भूमि पर सुराज अभियान और रिडेंसीफिकेशन नीति के तहत आवासीय परियोजनाओं में माल, व्यवसायिक कांप्लेक्स, प्राइम डेवलेपमेंट कार्य भी किए जाएंगे। दो महीने में करना है पूरी तैयारी जिले में साढ़े चार लाख मकान हैं,जिनमें से डेढ़ लाख झुग्गियां है।इन डेढ़ लाख झुग्गियों को शासकीय भूमि से हटाने के लिए दो महीने में पूरी तैयारी करनी है।इस दौरान अधिकारियों के द्वारा सर्वे कर रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इसी सर्वे रिपोर्ट के आधार पर नौ कलस्टर के तहत झुग्गी हटाने की कार्ययोजना तैयार की जाएगी। जिसे पहले सरकार को दिखाया जाएगा। सरकार से अनुमति मिलते ही इस पर काम शुरू कर दिया जाएगा। पांच वर्ष का रखा गया है लक्ष्य शहर को झुग्गी मुक्त बनाने के लिए पांच वर्ष का लक्ष्य रखा गया है।अगले एक वर्ष में करीब 25 हजार झुग्गी हटाने का प्रयास जिला प्रशासन, नगर निगम द्वारा किया जा रहा है।अधिकारियों ने दावा किया है कि दो महीने बाद ही पहले कलस्टर पर काम शुरू कर दिया जाएगा।इसके तहत झुग्गी पुनर्वास कार्यक्रम के तहत भी पक्के मकान लोगों को दिए जाएंगे। फैक्ट फाइल शहर में कुल मकान – 450000 शहर में कुल झुग्गियां – 150000 हटाने के लिए बनाए कलस्टर – 09

सर्दियों में जंगल सफारी: बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में प्रकृति और वन्यजीवों का अद्भुत संगम

Jungle Safari in Winter: Amazing confluence of nature and wildlife in Bandhavgarh Tiger Reserve Kanha and Bandhavgarh tiger reserve घने वन के बीच घास के लंबे-लंबे मैदान और वन्य जीवों की गतिविधियों के बीच सर्दी के मौसम में जंगल सफारी का आनंद अलग है। अगर आप भी इस सर्दी के मौसम में प्रकृति के निकट कुछ समय व्यतीत करना चाहते हैं तो टाइगर स्टेट कहे जाने वाले मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ कान्हा पेंच और संजय दुबरी टाइगर रिजर्व स्वागत को तैयार हैं। उमरिया। Kanha and Bandhavgarh tiger reserve ऊंचे-ऊंचे साल के वृक्षों के बीच से होकर धरती को चूमती सूर्य रश्मियां, पक्षियों के कलरव, कुलांचे मारते हिरणों के झुंड और उन्मुक्त विचरण करते बाघ। घने वन के बीच घास के लंबे-लंबे मैदान और वन्य जीवों की गतिविधियों के बीच सर्दी के मौसम में जंगल सफारी का आनंद अलग है।अगर आप भी इस सर्दी के मौसम में प्रकृति के निकट कुछ समय व्यतीत करना चाहते हैं तो टाइगर स्टेट कहे जाने वाले मध्य प्रदेश के बांधवगढ़, कान्हा, पेंच और संजय दुबरी टाइगर रिजर्व स्वागत को तैयार हैं।पर्यटकों से संकोच नहीं करते बजरंग और छोटा भीमटाइगर स्टेट में सर्वाधिक बाघों की संख्या वाला बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व है। 165 बाघों वाले इस राष्ट्रीय उद्यान में बजरंग और छोटा भीम नाम के बाघ लोगों को सर्वाधिक आकर्षित करते हैं। यह दोनों पर्यटकों के समक्ष आने में संकोच नहीं करते। बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान पहुंचने वाले पर्यटक एक ही दिन में कम से कम दो टाइगर रिजर्व की सफारी कर सकते हैं। बांधवगढ़ में सुबह की सफारी करने के बाद पर्यटक कान्हा टाइगर रिजर्व, संजय धुबरी टाइगर रिजर्व अथवा मुकुंदपुर टाइगर सफारी का भ्रमण आसानी से कर सकते हैं। इन सभी स्थानों की दूरी चंद घंटों की है। टाइगर स्टेट के टाइगर रिजर्व की बुकिंग के आंकड़ों के अनुसार दिसम्बर के दूसरे पखवाड़ा से जनवरी के पहले पखवाड़ा तक एक लाख से ज्याद पर्यटकों के पहुंचने की संभावना है। अन्य प्रमुख स्थल बांधवगढ़ से कान्हा की दूरी महज 210 किलोमीटर है और सड़क बेहद शानदार है। पर्यटक रास्ते में पड़ने वाले घुघुवा जीवाश्म पार्क का भ्रमण भी कर सकते हैं। बांधवगढ़ आने वाले पर्यटक मुकुंदपुर टाइगर सफारी इसलिए जाना चाहते हैं क्योंकि उन्हें वहां सफेद बाघ की सतवीं-आठवीं पीढ़ी के दर्शन सुगम होते हैं। यहां से 129 किमी की दूरी पर मुकुंदपुर टाइगर सफारी तथा 84 किमी की दूरी पर संजय धुबरी टाइगर रिजर्व है। इस तरह पहुंचे कान्हा, बांधवगढ़, पेंच और दुबरी टाइगर रिजर्व तक पहुंचने के लिए जबलपुर केंद्र बिंदु है। जबलपुर हवाई अड्डे से सभी प्रमुख शहरों की कनेक्टिवटी है। जबलपुर और कटनी रेलवे स्टेशन से भी पर्यटक बांधवगढ़ पहुंच सकते हैं इसके लिए उमरिया स्टेशन उतरना होता है। कान्हा नेशनल पार्क जबलपुर से 160 किमी तथा पेंच पार्क 170 किमी दूर है। वहीं संजय दुबरी टाइगर रिजर्व जबलपुर से 350 किमी की दूरी पर है। ठहरने की व्यवस्था बांधवगढ़, पेंच, कान्हा और संजय दुबरी में रुकने के लिए अच्छे होटल और सर्वसुविधा संपन्न होम स्टे सुविधा है। यहां मध्य प्रदेश टूरिज्म कार्पोरेशन के गेस्ट हाउस भी पर्यटकों की अच्छी आवभगत करता है।

पटवारी: किसानों के सेवक और योजनाओं के आधारस्तंभ, लेकिन सरकार का ‘दुश्मन’?

Patwari: Servant of farmers and pillar of schemes, but ‘enemy’ of the government? मध्यप्रदेश के पटवारी—एक ऐसा अनोखा प्राणी, जिसे देख के किसान को तो राहत मिलती है, लेकिन सरकार की भृकुटियाँ तन जाती हैं। यह वो कर्मचारी है जो कागज़ों में सरकारी योजनाओं को मिट्टी में मिलाने का माद्दा रखता है, ताकि वो असल में किसान की ज़मीन पर उतर सकें। पटवारी, जो सीमांकन से लेकर नामांतरण तक के काम में हर किसान के लिए खड़ा होता है, उसे ही “दुश्मन” का तमगा मिल जाता है! और वेतन? अरे भाई, 5200-20200 ग्रेड पे में तो पटवारी अपनी रोटी-सब्जी और चाय का खर्च भी संभाल लें, यही क्या कम है! बाकी राज्यों में अगर उन्हें मोटी तनख्वाह मिलती है, तो वो बेकार की बात है, आखिर ये तो मप्र के पटवारी हैं। अब 24 सालों से एक ही वेतन पर डटे रहना भी तो एक मिसाल है, न? उनके लिए सिर्फ़ 258 रु का आवास भत्ता और 300 रु का यात्रा भत्ता काफी है। सरकारी योजनाओं की वाहवाही लूटने में भले सरकार आगे हो, पर ज़मीन पर इन्हें लागू करवाने का सारा दायित्व पटवारियों पर है। राजस्व महाअभियान की बात करें, तो पहले और दूसरे चरण में 80 लाख से अधिक मामलों का पटवारियों ने समाधान कर किसानों और आम जनता को राहत दी। लेकिन क्या मजाल कि सरकार ने कभी उनके इस योगदान का ढोल पीटा हो? तीसरे चरण में भी पटवारियों की भूमिका अहम रहेगी, लेकिन शायद फिर भी उनकी मेहनत का श्रेय कोई और ले जाएगा। सरकारी तकनीक की हालत यह है कि ई-बस्ता में काम ऑनलाइन होते हैं, मगर पटवारी के पास उपकरणों की किल्लत ऐसी कि कुछ को 2017 में मोबाइल दिए गए थे, जो अब कबाड़ बन चुके हैं। साफ्टवेयर ऐसे हैं कि जैसे कठिनाइयों की मीनार खड़ी कर दी गई हो। हर रोज़ नए-नए प्रयोगों के बीच पटवारी, किसानों की सेवा में लगा हुआ है, फिर भी उसे “दुश्मन” कहना कितना उचित है? यही तो विरोधाभास है कि किसान हितैषी को दुश्मन कहा जा रहा है। वो पटवारी जो सरकार की रीढ़ है, हर किसान के हक़ में खड़ा है, और जो बिना किसी नाम के सिर्फ़ अपने फर्ज को निभाता है, क्या उसे ये दुश्मनी का तमगा चाहिए?

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