LATEST NEWS

MP में टेंडर लेने की शर्तें होगी कठिन, 80 प्रतिशत से कम दर भरी तो देना होगी दो गुनी परफार्मेंस सिक्योरिटी की एफडी

Conditions for taking tender in MP will be difficult, if less than 80 percent rate is paid then double the performance security FD will have to be paid. भोपाल। अव्यावहारिक दरें डालकर टेंडर प्राप्त करने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाने के लिए 80 प्रतिशत से कम दरें डालने वाले निविदाकर्ताओ से अंतर की दोगुनी परफार्मेंस गारंटी ली जाएगी। इसके साथ ही बैंक गारंटी के स्थान पर फिक्स्ड डिपॉजिट रिसिप्ट के माध्यम से परफार्मेंस सिक्योरिटी लिए जाने पर भी लोक निर्माण विभाग विचार कर रहा है। पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह ने प्रशासनिक अकादमी में निर्माण क्षेत्र में नवीन तकनीकों पर आधारित एक दिवसीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि महाराष्ट्र, तेलंगाना और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण भेज कर तीन अध्ययन दल से निविदा शर्तों का अध्ययन कराया गया। इन दलों से प्राप्त सुझावों को इस कार्यशाला में सम्मिलित करते हुए इन पर विस्तार से चर्चा की गई। अब इसी आधार पर निविदा शर्तों को ऐसा बनाया जाएगा कि सभी तरह के निर्माण कार्यों की गुणवत्ता में कोई गड़बड़ी न हो। इससे निर्माण कार्यों को और अधिक पारदर्शी, गुणवत्तापूर्ण एवं अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। ठेके लेने की प्रवृत्ति पर लगेगा अंकुश सिंह ने कहा कि प्रस्तावित नई निविदा नीति से क्षमता से अधिक कार्यों के ठेके लेने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाने के लिए बिड कैपेसिटी संबंधी शर्तों को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। निविदाकर्ता के पास बैच मिक्स प्लांट, डब्लू एम एम मिक्स प्लांट एवं अन्य आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता संबंधी शर्त जोड़ने का सुझाव मिला है। दस्तावेज में सुधारों की गुंजाइश उल्लेखनीय है कि सभी निर्माण विभागों के लिए एक मानक निविदा दस्तावेज वर्ष 2014 में तैयार किया गया था। कालांतर में हुए तकनीकी विकास और नियमों में परिवर्तन के कारण इस दस्तावेज में अनेक सुधारों की गुंजाइश है। इस दौरान अपर मुख्य सचिव केसी गुप्ता एमडी एमपीआरडीसी अविनाश लावनिया,एमडी एमपीबीडीसी डॉ पंकज जैन,ईएनसी पीडब्ल्यूडी केपीएस राणा, ईएनसी (भवन) एसआर बघेल एवं ईएनसी भवन विकास निगम अनिल श्रीवास्तव सहित विभाग के अन्य सभी मुख्य अभियंता, वरिष्ठ अधिकारी एवं इंजीनियर उपस्थित रहे। क्या-क्या हो सकते हैं बदलाव दो करोड़ से अधिक लागत वाली सभी निविदाओं में प्री क्वालिफिकेशन शर्तें लागू की जाएं पूर्व में यह सीमा पांच करोड़ थी।अनुमानित लागत के 20 प्रतिशत के बराबर के तीन कार्यों के अनुभव के स्थान पर 40 प्रतिशत के तीन कार्यों को रखा जाए।निविदाकर्ता के पास उपलब्ध मानव संसाधन और उपकरणों के लिए न्यूनतम शर्तें जोड़ी जाएं।दो करोड़ से अधिक के सड़क निर्माण कार्यों के लिए निर्माण स्थल पर गुणवत्ता परीक्षण लेब की स्थापना अनिवार्य की जाए।गुणवत्ता नियंत्रण के लिए समय-समय पर किए जाने वाले परीक्षणों, डामर की गुणवत्ता आदि से संबंधित शर्तें भी जोड़ी जाए।

कलेक्टर का बाप या सर्वर का सेवक: पटवारी की नई पहचान

Collector’s father or server’s servant: Patwari’s new identity कमलेश अहिरवार ( विशेष संवाददाता सहारा समाचार )भोपाल ! मध्य प्रदेश में राजस्व महाभियान 3.0 जोर-शोर से चल रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। योजना के 20 दिन बीत चुके हैं, लेकिन सर्वर की लचर हालत ने पटवारी और किसान दोनों को असहाय बना दिया है। एक ओर किसान फॉर्मर आईडी और पीएम किसान जैसी योजनाओं के लिए पटवारी से उम्मीद लगाए बैठा है, वहीं दूसरी ओर पटवारी सर्वर की कृपा पाने के लिए लोकसेवा केंद्र और CSC सेंटर के चक्कर काट रहा है। पटवारी की पहचान अब सरकारी कर्मचारी से ज्यादा सर्वर का सेवक बन गई है। फॉर्मर आईडी जैसे कार्यों के लिए उन्हें घंटों इंतजार करना पड़ता है। अगर किस्मत अच्छी हो, तो दिनभर में एक या दो आईडी बन जाएं, वरना पूरे दिन की मेहनत बेकार। छः महीने पहले शुरू हुई यह प्रक्रिया आज भी अधूरी है। किसान और पटवारी दोनों इस त्रासदी को नियति मानकर चल रहे हैं। हालत यह है कि किसान की झल्लाहट का पहला शिकार पटवारी ही बनता है। किसान जब अपनी फसल के काम छोड़कर पटवारी से बार-बार एक ही सवाल करता है—”मेरी आईडी क्यों नहीं बनी?”—तो पटवारी के पास जवाब में सिर्फ एक लाइन होती है, “सर्वर नहीं चल रहा।” लेकिन यह जवाब न किसान को संतुष्ट करता है और न ही अधिकारियों को। जब पटवारी अपनी समस्याएं लेकर अधिकारियों के पास जाता है, तो उन्हें आश्वासन मिलता है कि सर्वर पर काम हो रहा है। लेकिन यह “काम हो रहा है” कब “काम हो गया” में बदलेगा, इसका जवाब किसी के पास नहीं। दूसरी तरफ, मंचों पर अधिकारी और नेता सर्वर की असफलताओं का ठीकरा खुलेआम पटवारियों के सिर फोड़ते हैं। “कलेक्टर का बाप” जैसे तमगे देकर वे यह भूल जाते हैं कि पटवारी सिर्फ एक माध्यम है, जो सरकार और किसान के बीच पुल बनाने का काम करता है। योजनाओं की स्थिति और खराब हो जाती है, जब किसान का दो साल पुराना पंजीयन भी पूरा नहीं होता। सम्मान निधि योजना के तहत पैसा तो दूर, किसानों की पीएम किसान आईडी तक नहीं बन पाई। और इन सबका दोष, जैसा कि हमेशा होता है, पटवारी पर डाल दिया जाता है। पटवारी इस पूरे तंत्र को समझ चुका है और अब इसे अपनी नियति मानकर काम कर रहा है। चाय के कप और सर्वर के इंतजार के बीच, वह यह सोचता है कि उसकी मेहनत और धैर्य का अंत कब होगा। लेकिन सर्वर के इस शासन में, पटवारी और किसान की आवाज शायद ही किसी तक पहुंचे। पटवारी, जो कभी अपने अधिकारों और कर्तव्यों का राजा था, अब सर्वर का सेवक बनकर रह गया है।

कैबिनेट बैठक के बीच 2 बड़े IPS अफसरों के तबादले

भोपाल ! मध्य प्रदेश में एक तरफ मोहन यादव की कैबिनेट की मीटिंग पर सभी की नजर थी, बीच में दो बड़े IPS अफसरों के तबादले की खबर आ गई. बता दें अजय कुमार शर्मा को EOW महानिदेशक पद से हटा दिया है. उन्हें अध्यक्ष पुलिस हाऊसिंग बना दिया है. इसके अलावा उपेंद्र कुमार जैन आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ के महानिदेशक बनाये गए. कैलाश मकवाना के DGP बनने के बाद अध्यक्ष पुलिस हाऊसिंग का पद खाली था

प्रदेश में अब मनमानी नहीं कर पाएंगे प्राइवेट अस्पताल, सरकार ने जारी किए ये जरूरी निर्देश

Now private hospitals will not be able to act arbitrarily in the state, the government has issued these important instructions मध्य प्रदेश में प्राइवेट अस्पतालों में इलाज और जांच के नाम पर हमेशा मनमानी राशि लेने के आरोप लगते रहे हैं. लेकिन, अब इन पर लगाम लगाने का मध्य प्रदेश सरकार ने मन बना लिया है. अब एमपी के निजी अस्पताल प्रबंधन अपनी मनमानी नहीं कर पाएंगे, क्योंकि अब सरकार ने निजी प्राइवेट अस्पताल को ट्रीटमेंट और जांच की रेट लिस्ट लगाने के निर्देश दिए हैं. प्राइवेट अस्पतालों में रेट लिस्ट लगाने के निर्देश स्वास्थ्य विभाग के आयुक्त की ओर स दिए गए हैं. मरीजों के अधिकार और हितों का संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया है. स्वास्थ्य विभाग ने जारी किया आदेश स्वास्थ्य विभाग आयुक्त तरुण राठी ने आदेश जारी किया है. उन्होंने जारी किए गए आदेश में कहा कि सभी चिकित्सकीय सेवाओं की दर सूची रेट लिस्ट प्रमुखता से प्रदर्शित करें. स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा आयुक्त तरुण राठी ने साफ कहा है कि अस्पताल में काउंटर पर रेट लिस्ट लगाना अनिवार्य है. स्वास्थ्य आयुक्त के अनुसार रोगी या उनके परिजनों द्वारा मांगे जाने पर अस्पताल मैनेजमेंट को रेट सूची दिखाना होगा. किसी अस्पताल को यदि रेट लिस्ट में संशोधन करना हो, तो इसकी सूचना मुख्य चिकित्सा और स्वास्थ्य अधिकारी सीएमएचओ को देना होगा. संशोधित रेट लिस्ट को भी प्रमुखता से प्रदर्शित करना होगा. रेट लिस्ट नहीं तो होगी कार्रवाई आयुक्त की ओर से अपने निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि रेट लिस्ट के बिना अतिरिक्त शुल्क लेना नियमों का उल्लंघन है. अस्पतालों की ओर से मनमाने रेट वसूलने की घटनाओं को रोकने के लिए आयुक्त ने सीएमएचओ को लगातार निरीक्षण करने के भी निर्देश दिए हैं. आयुक्त ने स्पष्ट किया है कि जिन प्राइवेट अस्पतालों में रेट लिस्ट नहीं होगी उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.

Mohan Cabinet Decision: एमपी में शराब नीति को लेकर कमेटी करेगी काम, मोहन सरकार ने लिए कई बड़े फैसले

Mohan Cabinet Decision: Committee will work on liquor policy in MP, Mohan government took many big decisions भोपाल। मध्य प्रदेश में मोहन कैबिनेट की बैठक खत्म हो गई है। जिसमें कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है। 25 करोड़ के निवेश वाले थर्मल पावर प्लांट से हजारों लोगों को रोजगार मिलेगा। वहीं शराब नीति को लेकर कमेटी काम करेगी।बुधवार को मंत्रालय में सीएम डॉ मोहन की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक हुई है। जिसमें कई प्रस्तावों पर मुहर लगी है। कैबिनेट मीटिंग के फैसलों की जानकारी देते हुए मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बताया कि प्रदेश में 11 से 26 दिसंबर तक जनकल्याण पर्व मनाया जाएगा। 25 करोड़ के निवेश वाले थर्मल पावर प्लांट से हजारों लोग रोजगार मिलेगा। केंद्र ने मंजूरी मिली है।वहीं शराब नीति को लेकर कमेटी काम करेगी। उज्जैन सिंहस्थ बाईपास को फोरलेन किया जा रहा है। फोरलेन से पीथमपुर का औद्योगिक विकास भी होगा। नवीनीकरण ऊर्जा में लगने वाले उपकरण के पार्क के लिए मप्र का चयन हुआ है। इसके लिए केंद्र सरकार 300 करोड़ की राशि देगी। इसके अलावा नर्मदापुरम के बाबई में मेगा औद्योगिक पार्क बनाया जाएगा।

किसानों पर मेहरबान प्रदेश सरकार, करेगी पैसों की बारिश, जल्द खातों में आएगी इतनी राशि

The state government is kind to the farmers, it will rain money, this much amount will come into the accounts soon भोपाल : प्रदेश में कोदो-कुटकी जैसे मिलेट्स की पैदावार करने वाले किसानों को मोहन सरकार बोनस देने की तैयारी कर रही है. बोनस के रूप में सरकार किसानों को 40 करोड़ रुपए का बोनस देगी. किसानों को प्रति हेक्टेयर 3900 रुपए का बोनस दिया जाएगा. हालांकि, धान खरीदी के साथ सरकार ने मक्का और बाजरा की खरीदी तो शुरू कर दी, लेकिन इसके साथ कोदो-कुटकी की खरीदी शुरू नहीं की जा सकी है. ऐसी फसलों को बिना खरीदे ही किसानों को राहत देने की तैयारी की जा रही है. बिना खरीदे किसानों को राहत देगी सरकार प्रदेश की मोहन सरकार ने मिलेट्स के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए मिलेट्स की खरीदी का निर्णय लिया था. लेकिन तमाम प्रयासों के बाद भी मिलेट्स की खरीदी नहीं कराई जा सकी. ऐसे में किसानों को कोदो-कुटकी की खेती के लिए प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार ने किसानों को 3900 रुपए प्रति हेक्टेयर का बोनस देने का निर्णय लिया है. इसलिए नहीं हो पाई मिलेट्स की खरीदी गौरतलब है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में रानी दुर्गावती श्री अन्न प्रोत्साहन योजना को मंजूरी दी गई थी. सरकार ने निर्णय लिया था कि प्रदेश में कोदो को 20 रुपए और कुटकी को 30 रुपए प्रति किलो के हिसाब से खरीदा जाएगा. किसानों को प्रति किलो 10 रुपए प्रोत्साहन राशि दिए जाने का भी निर्णय लिया गया था. राज्य सरकार ने मिलेट्स की खरीदी से लेकर इसके प्रसंस्करण, ब्रांडिंग और मार्केटिंग के लिए मिलेट्स फेडरेशन का भी गठन किया था लेकिन फेडरेशन के गठन में देरी, खरीदी, परिवहन और स्टोरेज की व्यवस्था को लेकर सरकार इस साल मिलेट्स की खरीदी नहीं कर सकी. अधिकारी बोले- जल्द जारी होगी राशि कृषि विभाग के सचिव एम.सेलवेंद्रन के मुताबिक, ” किसानों को बोनस की राशि जल्द ही जारी की जाएगी. इसे लेकर तैयारियां चल रही हैं. प्रदेश में करीबन 1 लाख हेक्टेयर में कोदो-कुटकी की बुआई की गई है. प्रदेश में आमतौर पर मंडला-डिंडोरी और जबलपुर इलाके में ही अधिकतर कुटकी का उत्पादन होता है.”

घर में मिली तीन पेटी बाइबिल, भोपाल में प्रार्थना सभा की आड़ में मतांतरण का खेल

भोपाल. धर्म स्वातंत्र्य कानून में कड़े प्रविधानों के बाद भी शहर में मतांतरण का क्रम जारी है। रविवार को बागसेवनिया थाने के अमराई संजय नगर में ऐसा ही प्रकरण सामने आया। वहां प्रार्थना सभा की आड़ में मतांतरण की कोशिश चल रही थी। बजरंग दल के हंगामे के बाद पुलिस ने मतांतरण कराने के आरोप में चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। बताया जा रहा है कि रविवार को संजय नगर में रहने वाले शिवकुमार झरवड़े के घर पर करीब 40 आदिवासी महिला-पुरुष और बच्चे इकट्ठा होकर प्रार्थना कर रहे थे। उसी समय विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के 60-70 कार्यकर्ता और पदाधिकारी वहां पहुंचकर नारेबाजी करने लगे। उस समय घर का मुख्य द्वार बंद था। बंद कमरे में मतातंरण आवाज देने पर भी जब किसी ने दरवाजा नहीं खोला तो उन्होंने पुलिस को सूचना देकर बुला लिया। पुलिस कर्मियों ने वहां पहुंचकर जैसे ही दरवाजा खोला, बजरंग दल के कार्यकर्ता झरवड़े के घर में घुस गए। वहां महिला-पुरुष प्रार्थना करते हुए मिले। अचानक घर में इतने लोगों के घुसने से बौखलाए लोगों ने विहिप-बजरंग दल कार्यकर्ताओं से धक्का मुक्की भी की। तीन पेटी बाइबिल मिली विहिप के जिला मंत्री सोनू दुबे ने बताया कि शिवकुमार के घर में तीन पेटी बाइबिल मिली हैं। वहां आए लोगों के लिए मांसाहार पकाया जा रहा था। वहां लोगों को मतांतरण के लिए बहलाया-फुसलाया जा रहा था। वहां हंगामा बढ़ता देखकर पुलिस दोनों पक्षों को थाने ले आई। देर शाम पुलिस ने शिवकुमार झरवड़े, रचना गोस्वामी, प्रियंका पिल्लई और प्रतिभा मरावी के खिलाफ धार्मिक स्वातंत्र्य अधिनियम की धारा 3, 5 के तहत मामला दर्ज कर लिया है। प्रार्थना कर रहे लोगों ने कहा- अपनी मर्जी से आए प्रार्थना सभा में मौजूद महिलाओं-पुरुषों का कहना था कि उन पर मतांतरण के लिए किसी ने दबाव नहीं डाला था। वे लोग अपनी मर्जी से आए थे। एक महिला ने कहा कि जब उनके बच्चे बिगड़ रहे थे, तब कोई मदद को आगे नहीं आया। अब जब उन लोगों ने सही राह पकड़ी है तो लोग रोकने आ रहे हैं। एक बार पहले भी पकड़ा जा चुका विहिप के जिला मंत्री सोनू दुबे ने बताया कि शिवकुमार झरवड़े एक वर्ष पहले भी मतांतरण कराने के लिए पकड़ा गया था। पुलिस को भी शिकायत की थी। वह नर्मदापुरम रोड स्थित एक कालेज में प्रोफेसर है। पत्नी अस्पताल में नर्स है।

दुआए खास के साथ खत्म हुआ 4 दिवसीय इज्तिमा, सड़कों पर लगा लंबा जाम

4 day Ijtima ended with special prayers, long jam on roads भोपाल ! राजधानी भोपाल के ईंटखेड़ी में आयोजित चार दिवसीय आलमी तब्लीगी इज्तिमा का आज समापन हो गया है. सुबह सबसे पहले फजर की नमाज हुई इसके बाद मौला सआद के खास बयान और फिर सुबह 9 बजे दुआ के साथ इज्तिमा का समापन हुआ. बता दें इज्तिमा के समापन के साथ ही अब सभी जमातें अपने-अपने शहरों को जाने लगी है, जिसकी वजह से भोपाल की सडक़, रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड, एयरपोर्ट सहित सभी जगह भीड़ ही भीड़ नजर आ रही है. मालूम हो कि इज्तिमा में करीब 2000 से जमाते अलग-अलग राज्य और देशों से हिस्सा लेने के लिए आई हुईं थी. भोपाल की इन सडक़ों पर ट्रैफिकइज्तिमा के समापन के साथ ही आज भोपाल की सड़कों पर लोग ही लोग नजर आ रहे हैं. लाम्बाखेड़ा से करोंद, मुबारकपुर से पटेल नगर, गांधी नगर से अयोध्या नगर बायपास, रत्नागिरी, भोपाल टॉकीज, पीरगेट, मोती मस्जिद, रॉयल मार्केट, लालघाटी चौराहा, नादरा बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, अल्पना तिराहा, भारत टॉकीज, बोगदा पुल आदि क्षेत्रों में जमकर ट्रैफिक उमड़ रहा है. रेलवे ने किए ये इंतजामइज्तिमा को लेकर रेलवे ने भी विशेष इंतजाम किए हैं. भोपाल स्टेशन पर आज 4 टिकट काउंटर बढ़ाए गए हैं, जबकि गाड़ी संख्या 11272 भोपाल-इटारसी एक्सप्रेस में 2 और 3 दिसंबर को अतिरिक्त जनरल कोच लगाए गए हैं. इसी तरह गाड़ी संख्या 14814 भोपाल-जोधपुर एक्सप्रेस में 2 और 3 दिसंबर को अतिरिक्त जनरल कोच की व्यवस्था है. इज्तिमा में क्या व्यवस्था थीभोपाल में आयोजित इज्तिमा के कार्यक्रम बड़े स्तर पर किया गया था. सभी जगहों से आए आलमी तब्लीगी जमातों के लिए 500 से ज्यादा चार्जिंग प्वाइंट के अलावा 2 हजार से ज्यादा लोगों के लिए खाने-पीने और सोने की अच्छी व्यवस्था की गई थी. इस आयोजन को लेकर भोपाल प्रशासन ने पहले से ही सभी तैयारियां कर ली थी, ताकि किसी को भी परेशानी का सामना न करना पड़े.

प्रदेश में समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी आज,एमएसपी 2300 रुपए प्रति क्विंटल, शिकायत के लिए नंबर जारी

Paddy purchased today at support price in the state, MSP Rs 2300 per quintal, number issued for complaints प्रदेश में खरीफ विपणन मौसम 2024-25 के लिये धान की खरीदी सोमवार से शुरू होगी। धान कॉमन का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2300 और धान ग्रेड-ए का 2320 रुपये प्रति क्विंटल है। किसानों की एफएक्यू गुणवत्ता की उपज इन्हीं दरों पर उपार्जित की जायेगी। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया है कि धान का उपार्जन 2 दिसम्बर से 20 जनवरी 2025 तक किया जायेगा। उपार्जन प्रत्येक सप्ताह के सोमवार से शुक्रवार तक होगा। 45 लाख मीट्रिक टन होगी धान की खरीदी केन्द्र सरकार द्वारा निर्धारित मात्रा के अनुसार समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी 45 लाख मीट्रिक टन की जायेगी। गोदाम स्तर पर खाद्यान्न की गुणवत्ता का परीक्षण उपार्जन एजेंसी के गुणवत्ता सर्वेयर द्वारा स्टेक लगाने के पहले किया जायेगा। परिवहनकर्ता द्वारा उपार्जित खाद्यान्न का परिवहन समय-सीमा में नहीं करने पर पेनाल्टी की व्यवस्था साप्ताहिक रूप से की जायेगी। समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी के बाद भुगतान, कृषक पंजीयन के दौरान आधार नम्बर से लिंक बैंक खाते में किया जायेगा। धान उपार्जन अवधि के दौरान पड़ोसी राज्यों से उपार्जन केन्द्र पर लायी जाने वाली उपज की अवैध बिक्री को रोकने के लिये समुचित कार्रवाई के निर्देश कलेक्टर्स को दिये गये हैं। समस्याओं के समाधान के लिए तकनीकी सेल का गठन पंजीयन एवं उपार्जन में आने वाली तकनीकी समस्याओं के समाधान के लिये जिले में और राज्य स्तर पर भी तकनीकी सेल का गठन किया गया है। जिला स्तरीय समिति उपार्जन संबंधी सभी विवादों का अंतिम निराकरण तथा उपार्जित खाद्यान्न की गुणवत्ता की निगरानी करेगी। राज्य स्तर पर एक कंट्रोल-रूम भी स्थापित किया गया है। इसका दूरभाष नम्बर 0755-2551471 है, जो उपार्जन अवधि में सुबह 9 से रात 7 बजे तक संचालित रहेगा।

सपनों को हकीकत में बदलने की बानगी है “बुरहानपुर का बनाना पावडर”

“Burhanpur’s Banana Powder” is a symbol of turning dreams into reality. मध्यप्रदेश का एक छोटा सा जिला बुरहानपुर बरसों से अपनी ऐतिहासिक धरोहरों और हरे-भरे खेतों के लिए प्रसिद्ध है। अब यह जिला “एक जिला-एक उत्पाद” पहल के तहत सफलता के नये आयाम गढ़ रहा है। केले की फसल, जो इस जिले की मूल पहचान है, अब न केवल किसानों की आय बढ़ा रही है, बल्कि एक नई उद्यम क्रांति का प्रतीक भी बन गई है। इसी साल फरवरी में हुए “बनाना फेस्टिवल” में यहां के उद्यमियों और किसानों के बीच संवाद का परिणाम अब धरातल पर नजर आ रहा है। इसी प्रेरणा से बुरहानपुर के उद्यमी श्री रितिश अग्रवाल ने “बनाना पाउडर” बनाने की यूनिट स्थापित की हैं। यह यूनिट जिला प्रशासन और उद्यानिकी विभाग के सहयोग से खकनार के धाबा गांव में संचालित की जा रही है। “बनानीफाय” ब्रांड के नाम से तैयार किया जा रहा यह बनाना पाउडर शारीरिक पोषण से भरपूर है। यह बच्चों और बड़ों सभी के लिए ऊर्जा और सेहत का खजाना है। इस यूनिट में केले से तीन प्रकार का पाउडर तैयार किया जा रहा है। खाने योग्य पाउडर (केले के गूदे से), जो शुद्ध और बेहद उच्च गुणवत्ता वाला है। सादा पाउडर (केले के छिलके सहित), जो खाने योग्य है और फाइबर से भी भरपूर है। केले के छिलके से तैयार पाउडर को खाद (मैन्योर) के रूप में उपयोग किया जाएगा। इसके उपयोग से सभी प्रकार की फसलों की गुणवत्ता एवं उत्पादन मात्रा में भी सुधार होगा। इस प्रोजेक्ट को “प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना” के तहत 10 लाख रुपये की सब्सिडी प्राप्त हुई। कुल 75 लाख रुपये पूंजी निवेश से बनी यह यूनिट एक मिसाल बन गई है। इसमें अहमदाबाद से लाई गई आधुनिक मशीनों का उपयोग किया जा रहा है, जो उत्पादन प्रक्रिया को तेज और कुशल बनाती हैं। “बनानीफाय” ब्रांड के उत्पादों को न केवल मध्यप्रदेश बल्कि महाराष्ट्र, हरियाणा, पंजाब, और दिल्ली जैसे राज्यों में भी भेजा जा रहा है। इसके 250 ग्राम और 500 ग्राम पैकेट क्रमशः 280 रुपये और 480 रुपये की कीमत पर उपलब्ध हैं। यूनिट की खासियत यह है कि यहां केले के छिलके को भी व्यर्थ नहीं जाने दिया जाता। छिलकों से बना पाउडर नर्सरियों और उद्यानिकी फसलों में खाद के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। यह पर्यावरणीय संरक्षण और कृषि उत्पादकता बढ़ाने का एक बेहतरीन उदाहरण है। नेपानगर की विधायिका सुश्री मंजू दादू और कलेक्टर बुरहानपुर सुश्री भव्या मित्तल द्वारा शुभारंभ की गई यह यूनिट अब न केवल बुरहानपुर के किसानों और उद्यमियों के लिए प्रेरणा बन गई है। यह यूनिट “एक जिला-एक उत्पाद” योजना की वास्तविक सफलता का प्रतीक बन गई है। “बनानीफाय” का बनाना पावडर न केवल आर्थिक समृद्धि ला रहा है, बल्कि यह एक उदाहरण है कि सही दिशा में किए गए प्रयास किस तरह से छोटे जिलों को भी अंतर्राष्ट्रीय पहचान दिला सकते हैं। बुरहानपुर के मस्त केले अब सबकी जुबां पर मिठास घोल रहे हैं।

मोहन यादव ने IAS अनुपम राजन को सौंपी बड़ी जिम्मेदार, शिक्षा विभाग में लाएंगे क्रांति

Mohan Yadav handed over big responsibility to IAS Anupam Rajan, will bring revolution in education department भोपाल ! मध्य प्रदेश उच्च शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव अनुपम राजन को शासन ने पदोन्नत करते हुए अपर मुख्य सचिव यानी एसीएस के पद पर नियुक्त किया है. वे 1 दिसंबर को पदभार ग्रहण करेंगे. वहीं अब उन्हें प्रदेश के मुख्य सचिव के बराबर वेतन मिलेगा. सामान्य प्रशासन विभाग ने शुक्रवार को आदेश जारी कर जानकारी साझा की है. बता दें कि आदेश में लिखा गया है कि अनुपम राजन के पास उच्च शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी रहेगी. साथ ही अनुपम राजन के पास उद्यानिकी और खाद्य प्रसंस्करण विभाग का अतिरिक्त प्रभार भी रहेगा. 20 अगस्त को राजन की फील्ड में हुई वापसीअनुपम राजन 1993 बैच के आईएएस अधिकारी है. मध्यप्रदेश में करीब 3 साल तक अनुपम राजन मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी रहे हैं. हाल में ही 20 अगस्त को उनकी फील्ड में वापसी हुई थी. जिसके बाद उन्हें उच्च शिक्षा विभाग का प्रमुख सचिव बनाया गया था. इसके साथ ही उद्यानिकी और खाद्य प्रसंस्करण विभाग का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया था. इससे पहले अनुपम राजन कई जिलों में कलेक्टर व विभिन्न विभागों में सेवाएं दे चुके हैं. उनके साथ एक विवाद भी जुड़ा हुआ है. जिसका मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है. आज रिटायर होंगे डीजीपी सक्सेना और एसीएस मलय श्रीवास्तवमध्य प्रदेश के पुलिस महानिदेशक सुधीर सक्सेना 30 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं. उनकी जगह प्रदेश का नया डीजीपी आईपीएस कैलाश मकवाना को बनाया गया है. इसके साथ ही अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक पंकज श्रीवास्तव को विशेष महानिदेशक पद पर पदोन्नत किया गया है. वहीं 1992 बैच के आईएएस अधिकारी मलय श्रीवास्तव भी 30 नवंबर को रिटयर हो जाएंगे. शनिवार को सेवानिवृत्त हो रहे सुधीर सक्सेना और मलय श्रीवास्तव को शुक्रवार को मंत्रालय में विदाई दी गई.

प्रशासन या राजतंत्र? आगर-मालवा में कर्मचारियों की नौकरी पर खतरा?

Administration or monarchy? Threat to employees’ jobs in Agar-Malwa? त्वरित टिप्पणी विशेष संवाददाता: उदित नारायण आगर-मालवा का प्रशासन इन दिनों कर्मचारियों के लिए डर और तनाव का केंद्र बनता जा रहा है। हाल ही में सहायक ग्रेड-03 सुरेश चौहान को नौकरी से बाहर करने का मामला सामने आया है, जिसने पूरे जिले में चर्चा को जन्म दे दिया है। यह कोई नया मामला नहीं है, इससे पहले भी तीन पटवारियों को नौकरी से निकाला गया था। हैरानी की बात यह है कि जब इन पटवारियों ने हाई कोर्ट का रुख किया, तो अदालत ने कलेक्टर के निर्णय को त्रुटिपूर्ण बताते हुए कर्मचारियों को बहाल करने का आदेश दिया। परंतु, कलेक्टर साहब ने आदेश को नजरअंदाज कर दिया। उनके इस रवैये ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वे न तो किसी का जवाब सुनने को तैयार हैं और न ही अदालत के आदेश को मानने को। इसी बीच, एक नए विवाद ने आग में घी डालने का काम किया है। सूत्रों के अनुसार, मुआवजे से जुड़े एक प्रकरण में लगभग 5 करोड़ रुपये की राशि गलत तरीके से वितरित की गई। जब यह मामला उजागर हुआ, तो गलती छुपाने के लिए साहब ने पटवारियों और राजस्व निरीक्षकों को निलंबित कर दिया और एक आदेश जारी कर दिया कि किसी भी तरह से यह पैसा वापस जमा कराया जाए। यह फरमान कर्मचारियों पर अप्रत्यक्ष दबाव बनाने का प्रतीक है, जबकि गलती का असली स्रोत कहीं और है। कर्मचारियों के बीच माहौल बेहद तनावपूर्ण है। उनका कहना है कि यहां किसी की भी नौकरी कब चली जाए, इसका कोई भरोसा नहीं। एक कर्मचारी ने व्यंग्यात्मक स्वर में कहा, “साहब को तो बस दूसरों की गलतियां पकड़ने का शौक है। अपनी गलतियों पर कोई सफाई नहीं देते। और अगर गलती दिखा दो, तो सीधे नौकरी से निकाल देते हैं।” अब सवाल उठता है कि क्या कलेक्टर साहब की यह “राजशाही” कभी समाप्त होगी या हाई कोर्ट के आदेशों को अनदेखा करना, अपनी गलतियों का ठीकरा कर्मचारियों पर फोड़ना और तनावपूर्ण माहौल बनाना क्या प्रशासनिक आदर्श का हिस्सा है या राजतंत्र

एमएफपी पार्क में अनुभवहीन सीईओ की पदस्थापना से बर्बाद होता विंध्या हर्बल्स

Vindhya Herbals gets ruined due to appointment of inexperienced CEO in MFP Park उदित नारायण भोपाल। लघुवनोपज संघ की इकाई लघु वनोपज प्रसंस्करण केंद्र बरखेड़ा पठानी में सीईओ के पद पर को सीनियर आईएफएस को दरकिनार कर अनुभवहीन और जूनियर की पदस्थापना से विंध्या हर्बल” नाम से आयुर्वेदिक उत्पादों के उत्पादन में निरंतरता गिरावट आ रही है। वहीं प्रबन्ध संचालक विभाष ठाकुर की प्रशासनिक मनमानी से प्रशासनिक अराजकता का माहौल बनता जा रहा है।एक वर्ष में तीन सीईओ (आईएफएस) और तीन उत्पादन प्रबंधक (एसडीओ) बदलने का खेल से एमएफपी पार्क में पूरे उत्पादन प्रक्रिया को चरमरा कर रख दिया। लघु वनोपज संघ के प्रबंध संचालक बिभाष ठाकुर के कार्यकाल में अब तक सीईओ एवं सीसीएफ पीजी फुलजले, प्रमोटी डीएफओ अर्चना पटेल और अब जूनियर आईएफएस गीतांजलि जे की सीईओ के पद पर पदस्थापना हुई है। इसी प्रकार गड़बड़ियों के नाम पर उत्पादन प्रबंधक एसडीओ बी पिल्लई को 12 जनवरी 24 को हटाया पर जिन कारणों से हटाया गया, उसका निराकरण आज तक नहीं हुआ है। पिल्लई के हटने के बाद रेंजर सुनीता अहिरवार को एसडीओ का प्रभार देते हुए उत्पादन उप प्रबंधक बनाया। इनके कार्यकाल में रॉ मटेरियल की खरीदी से लेकर गुणवत्ताहीन दवाइयों के उत्पाद के मामले प्रकाश में आने लगे। इसकी वजह से एमएफपी पार्क की साख गिरी। सितंबर 24 में अहिरवार को हटाने के बाद एमडी ठाकुर ने एसडीओ मणिशंकर मिश्रा को उत्पादन उप प्रबंधक के पद पर पदस्थ किया। मिश्रा को आयुष विभाग द्वारा एक करोड़ 70 लख रुपए की आयुर्वेदिक उत्पाद तैयार कर सप्लाई का लक्ष्य दिया गया। मिश्रा ने एमडी द्वारा निर्धारित लक्ष्य के 90% ऐसा पूरा कर लिया इस बीच एमडी ने मिश्रा की जगह रेंजर प्रियंका बाथम को एसडीओ का प्रभार देते हुए उत्पादन उप प्रबंधक बनाने का फरमान जारी किया। एमडी के बार-बार बदलते निर्णय की वजह से एमएफपी पार्क मैं प्रशासनिक अस्थिरता हुई बल्कि इसका असर उत्पादन पर भी पड़ रहा है।bदिलचस्प पहलू यह है कि जिन अधिकारियों को हटाया उनके भ्रष्टाचार की जांच नहीं रिपोर्ट तक नहीं आई। आयुष 1.8 करोड़ के ऑर्डर को सप्लाई नहीं करने और गुगुल खरीदी में भ्रष्टाचार करने वाली सुनीता अहीरवार की जांच आज तक तक शुरू नहीं हुई। उत्पादन मिश्रा से वापस लिया डीडीओ प्रभार वर्तमान एसडीओ उत्पादन प्रबंधक ने एक महीने में आयुष 1.8 करोड़ के ऑर्डर को 90 प्रतिशत सप्लाई कर दिया और ११ करोड़ का नया ऑर्डर भी आया लेकिन वो भी एसीएस और एमडी की आपसी श्रेष्ठता की लड़ाई में फंस गये। उनसे डीडीओ प्रभार ले लिया और तो और अभी तक ११ करोड़ के ऑर्डर का काम भी चालू नहीं हो पया है। रेंजर प्रियंका को प्रभार देना चाहती है सीईओ एसडीओ मिश्रा से डीडीओ प्रभार लेने के बाद अब नये एसडीओ की पोस्टिंग कराने के लिये पत्र भी लिख दिया है।एसडीओ की नई पोस्टिंग से पहले ही रेंजर प्रियंका बाथम को उत्पादन शाखा में कार्य शुरू करने के आदेश दिये है। एसडीओ मिश्रा के समय हुये कार्यों की समीक्षा के नाम पर रेंजर प्रियंका ने भुगतान रोका। रेंजर प्रियंका बाथम को रिटेल का प्रभार दिया गया था लेकिन रिटेल में कार्य ना कर उत्पादन में हस्तक्षेप करना शुरू है। यहाँ तक की फाइलों में ख़ुद को असिस्टेंट मैनेजर की जगह डिप्टी मैनेजर लिखती है और एसडीओ का चार्ज लेने की जुगाड़ में मिश्रा द्वारा आयुष ऑर्डर सप्लाई करने के दौरान किये गये कार्यो के भुगतान रोक कर रखा है जिससे नये ऑर्डर सप्लाई में कोई काम नहीं हो रहा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव का निवेश को लेकर गंभीर दृष्टिकोण: यूके में निवेशकों को किया आमंत्रित

Chief Minister Dr. Yadav’s serious view on investment: Invited investors to UK भोपाल ! मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने यूके यात्रा में मध्यप्रदेश में निवेश बढ़ाने के लिए लंदन के प्रमुख उद्योगपतियों के साथ वन-ऑन-वन मीटिंग कर व्यक्तिगत तौर पर निवेश की संभावनाओं पर चर्चा की। उन्होंने सेक्टर केंद्रित राउंड-टेबल मीटिंग कर निवेश संबंधी विस्तृत चर्चा की। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने वन-ऑन-वन बैठकों में प्रत्येक निवेशक की परियोजना और आवश्यकताओं को ध्यानपूर्वक सुना और मध्यप्रदेश में निवेश के लिए बेहतर अवसर और नीतिगत समर्थन का भरोसा दिलाया। राउंड-टेबल चर्चाओं में इलेक्ट्रिक वाहन, नवकरणीय ऊर्जा, शिक्षा और खाद्य प्रसंस्करण जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर विशेषज्ञों और सरकारी अधिकारियों के साथ विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इंडोरामा ग्रुप, एसआरएएम एंड एमआरएएम ग्रुप, सायनकॉननोड, हाइब्रिड एयर व्हीकल्स लिमिटेड, क्लिनीसप्लाईज, औरोरा एनर्जी रिसर्च, एल्सेवियर, वीडिलीवर, कैपरो, वेबसाइट, द मोंटकैल्म लग्ज़री होटल्स, फाइला अर्थ, एम्पर्जिया लिमिटेड, अयाना कंसल्टिंग, पैंजिया डेटा लिमिटेड, इनवर्जी, बीईएम ग्रुप लिमिटेड, डैक्स फर्स्ट, रैनसैट ग्रुप, कोगो इकोटेक सॉल्यूशंस, एम्पैटी.एआई, मनी फॉर बिजनेस लिमिटेड, डीएएम हेल्थकेयर लिमिटेड और हेलियन जैसी कंपनियों के प्रतिनिधियों से चर्चा की। बैठक में औद्योगिक विकास को गति देने और संभावित सहयोग के अवसरों पर विस्तृत चर्चा हुई। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने निवेशकों को मध्यप्रदेश में अनुकूल व्यावसायिक माहौल और निवेश के लिए उपलब्ध सुविधाओं के बारे में जानकारी दी। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने विभिन्न क्षेत्रों पर केंद्रित राउंड-टेबल परिचर्चाओं में भाग लिया। इन परिचर्चाओं में इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी), ऑटोमोबाइल और नवीकरणीय ऊर्जा, शिक्षा और फूड प्रोसेसिंग जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की यह पहल राज्य को एक वैश्विक निवेश स्थल बनाने और उद्योगपतियों के साथ मजबूत साझेदारी विकसित करने में परिणामोन्मुखी साबित होगी। साथ ही ये बैठकें औद्योगिक विशेषज्ञों और निवेशकों के साथ मध्यप्रदेश के विकास के लिए नई संभावनाओं को आकार देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होंगी।

मप्र से सागवान लकड़ी अवैध कटाई कर नागपुर, राजस्थान, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में हो रहा अवैध कारोबार

Illegal cutting of teak wood from Madhya Pradesh is taking place in Nagpur, Rajasthan, Andhra Pradesh and Telangana. भोपाल। जंगल महकमे मुख्यालय सर्किल और वनमंडलों में कई पद रिक्त पड़े हैं। खासकर सर्किल और वनमंडलों डीएफओ से लेकर डिप्टी रेंजर्स के पास खाली है। मैदानी अवल की बात करें तो वन विभाग में वन और वन्य प्राणियों की सुरक्षा के लिए 25000 के लगभग अमला स्वीकृत है. इनमें से 1900 खाली पड़े हैं. स्वीकृति अमले से 8% फॉरेस्ट गार्ड डीएफओ और पीएफ कार्यालय बाबू गिरी का काम कर रहे हैं तो 4% फॉरेस्ट गार्ड रसूखदार प्रधान मुख्य वन संरक्षक स्तर के अफसरों के कार्यालयों और उनके बंगले पर दरबान दरबान बने हुए हैं. यह स्थिति भोपाल से लेकर 16 सर्किल और 65 वन मंडलों में बनी हुई है। इसका फायदा लकड़ी माफिया से लेकर अतिक्रमण माफिया तक उठा रहे हैं। फील्ड से मिली जानकारी के अनुसार मप्र से सागवान लकड़ी अवैध कटाई कर नागपुर, राजस्थान, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के कई शहरों में अवैध कारोबार हो रहा है। एक अनुमान के अनुसार टिंबर माफिया प्रदेश में सागौन की अवैध कटाई कर 100 करोड़ रूपया से अधिक का कारोबार करता है। फील्ड से मिली जानकारी के अनुसार जबलपुर, बैतूल, छतरपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, शहडोल और उज्जैन वन वृत में सबसे अधिक लकड़ी की अवैध कटाई हो रही है। धार वन मंडल में 40 घनमीटर सागवान की लकड़ी जप्त और देवास वन मंडल में हुई अवैध कटाई इस बात की गवाह है कि प्रदेश में धड़ल्ले से अवैध कटाई हो रही है। लकड़ी की अवैध कटाई और अन्य राज्यों में तस्करी की शिकायत नागपुर टिंबर संगठन के अलावा मध्य प्रदेश के टिंबर संगठन ने बकायदा पीसीसीएफ संरक्षण को की है। इस शिकायत की पुष्टि वन विभाग में अवैध कटाई से संबंधित दर्ज अपराधिक प्रकरण भी करते हैं। इस संबंध में छिंदवाड़ा सर्कल में एक समीक्षा बैठक भी हो चुकी है। इस समीक्षा बैठक में वन वृत और वन मण्डलों में पदस्थ आईएफएस अधिकारियों के साथ-साथ टिंबर संगठनों के पदाधिकारी उपस्थित थे। इस बैठक में दिलचस्प पहलू यह रही कि जंगलों की सुरक्षा की जिम्मेदार अधिकारी टिंबर संगठन के पदाधिकारी से प्रमाण मांगते नजर आ रहे थे। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि छिंदवाड़ा में तो अवैध कटाई और तस्करी से संबंधित समीक्षा हुई किंतु मुख्यालय स्तर पर पूर्णकालिक पीसीसीएफ संरक्षण नहीं होने की वजह से मॉनिटरिंग भी नहीं हो पा रही है। टिंबर संगठन के पदाधिकारी के शिकायत की पुष्टि वन विभाग के अधिकृत आंकड़े भी कर रहें है। विभाग के अधिकृत आंकड़े बताते हैं कि इस वर्ष जबलपुर वन वृत में कुल दर्ज अपराधी प्रकरण 3445 में से 3129 प्रकरण केवल अवैध कटाई से संबंधित हैं। इसी प्रकार छिंदवाड़ा वन वृत्त में दर्ज प्रकरण की संख्या 2302 है तो अवैध कटाई के प्रकरण 2206 दर्ज किए गए हैं। उज्जैन वन वृत 1201 प्रकरण अवैध कटाई से संबंधित हैं। विदिशा वन मंडल के लटेरी और उसके आसपास क्षेत्र में आज भी अवैध कटाई के सिलसिला जारी है। अपर मुख्य सचिव अशोक अग्रवाल ने कलेक्टर एसपी के साथ बैठक की परंतु नतीजा कुछ नहीं निकला। लटेरी में आज भी रेंजर के पद खाली पड़े हैं। मुख्यालय और राज्य शासन स्तर पर कोई प्रयास नहीं किया गया। सुरक्षा में हर साल वनकर्मियों के साथ मारपीट के 20-30 प्रकरण संरक्षण शाखा से एकत्रित आकड़ों के मुताबिक वन एवं वन्य प्राणियों की सुरक्षा में हर साल वनकर्मियों के साथ मारपीट के 20-30 प्रकरण दर्ज हो रहे है। पिछले तीन सालों में जंगलों की सुरक्षा में आधा दर्जन वनकर्मियों को अपनी जान तक गंवाने पड़े है। यही नहीं, विदिशा, रायसेन, गुना, शिवपुरी, मुरैना, भिंड, ग्वालियर, नरसिंहपुर, बालाघाट, बैतूल, छिंदवाड़ा, सागर, दमोह, बुरहानपुर, वन मंडलों में 2 दर्जन से अधिक वन कर्मचारियों पर माफिया प्राणघातक हमला कर चुके हैं। सीआरपीसी की धारा 197 के तहत वन कर्मियों को प्रोटेक्शन दिया गया है कि गोलीबारी की घटना में तब तक एफआईआर दर्ज नहीं होगी जब तक राजपत्रित ऑफिसर की जांच रिपोर्ट न जाए। बुरहानपुर के बाद लटेरी गोलीकांड में वन कर्मियों पर बिना जांच के आईपीसी की धारा 302 और 307 के तहत एफआईआर दर्ज कर दी गई। धार में कछुआ गति से 40 घन मीटर की जांच वन मंडल धार में आरा मशीन मनावर से जब्त 40 घन मीटर अवैध सागवान के मामले में जांच कछुआ गति से चल रही है। बताया जाता है कि जांच में वन अधिकारियों एवं कर्मचारियों के बचाने का प्रयास चल रहा है। 3 सप्ताह बाद भी वन विभाग की टीम या पता लगाने में असफल रही कि 40 घन मीटर सागवान चटपट धार में कहां से आई ? वन विभाग यह भी पता नहीं लगा सकी कि 2 साल से चल रहे गोरख धंधे में किन-किन अधिकारियों एवं कर्मचारियों का इदरीशखान से सांठ-गांठ है। धार वन विभाग की बड़ी कार्यवाही के बाद यह सवाल उठने लगा है कि इतनी बड़ी मात्रा में सागवान इमारती लकड़ी कहां से काट कर आ रही थी? अवैध कटाई और उसके अवैध खरीद-फरोख्त के गोरख धंधे में वन विभाग के कौन-कौन अधिकारी -कर्मचारी शामिल थे? यह सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं क्योंकि तीन दिन पहले ही फॉरेस्ट के कर्मचारियों ने निरीक्षण किया था और सब कुछ ओके पाया था। मनावर एसडीओ और कुक्षी के प्रभारी रेंजर की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।

slot server thailand super gacor

spaceman slot gacor

slot gacor 777

slot gacor

Nexus Slot Engine

bonus new member

olympus

situs slot bet 200

slot gacor

slot qris

link alternatif ceriabet

slot kamboja

slot 10 ribu

https://mediatamanews.com/

slot88 resmi

slot777

https://sandcastlefunco.com/

slot bet 100

situs judi bola

slot depo 10k

slot88

slot 777

spaceman slot pragmatic

slot bonus

slot gacor deposit pulsa

rtp slot pragmatic tertinggi hari ini

slot mahjong gacor

slot deposit 5000 tanpa potongan

mahjong

spaceman slot

https://www.deschutesjunctionpizzagrill.com/

spbo terlengkap

cmd368

368bet

roulette

ibcbet

clickbet88

clickbet88

clickbet88

bonus new member 100

slot777

https://bit.ly/m/clickbet88

https://vir.jp/clickbet88_login

https://heylink.me/daftar_clickbet88

https://lynk.id/clickbet88_slot

clickbet88

clickbet88

https://www.burgermoods.com/online-ordering/

https://www.wastenotrecycledart.com/cubes/

https://dryogipatelpi.com/contact-us/

spaceman slot gacor

ceriabet link alternatif

ceriabet rtp

ceriabet

ceriabet link alternatif

ceriabet link alternatif

ceriabet login

ceriabet login

cmd368

sicbo online live

Ceriabet Login

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

casino online

clickbet88

login kudahoki88

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

slot olympus

sbobet

slot thailand

sbobet