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किसानों पर मेहरबान प्रदेश सरकार, करेगी पैसों की बारिश, जल्द खातों में आएगी इतनी राशि

The state government is kind to the farmers, it will rain money, this much amount will come into the accounts soon भोपाल : प्रदेश में कोदो-कुटकी जैसे मिलेट्स की पैदावार करने वाले किसानों को मोहन सरकार बोनस देने की तैयारी कर रही है. बोनस के रूप में सरकार किसानों को 40 करोड़ रुपए का बोनस देगी. किसानों को प्रति हेक्टेयर 3900 रुपए का बोनस दिया जाएगा. हालांकि, धान खरीदी के साथ सरकार ने मक्का और बाजरा की खरीदी तो शुरू कर दी, लेकिन इसके साथ कोदो-कुटकी की खरीदी शुरू नहीं की जा सकी है. ऐसी फसलों को बिना खरीदे ही किसानों को राहत देने की तैयारी की जा रही है. बिना खरीदे किसानों को राहत देगी सरकार प्रदेश की मोहन सरकार ने मिलेट्स के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए मिलेट्स की खरीदी का निर्णय लिया था. लेकिन तमाम प्रयासों के बाद भी मिलेट्स की खरीदी नहीं कराई जा सकी. ऐसे में किसानों को कोदो-कुटकी की खेती के लिए प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार ने किसानों को 3900 रुपए प्रति हेक्टेयर का बोनस देने का निर्णय लिया है. इसलिए नहीं हो पाई मिलेट्स की खरीदी गौरतलब है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में रानी दुर्गावती श्री अन्न प्रोत्साहन योजना को मंजूरी दी गई थी. सरकार ने निर्णय लिया था कि प्रदेश में कोदो को 20 रुपए और कुटकी को 30 रुपए प्रति किलो के हिसाब से खरीदा जाएगा. किसानों को प्रति किलो 10 रुपए प्रोत्साहन राशि दिए जाने का भी निर्णय लिया गया था. राज्य सरकार ने मिलेट्स की खरीदी से लेकर इसके प्रसंस्करण, ब्रांडिंग और मार्केटिंग के लिए मिलेट्स फेडरेशन का भी गठन किया था लेकिन फेडरेशन के गठन में देरी, खरीदी, परिवहन और स्टोरेज की व्यवस्था को लेकर सरकार इस साल मिलेट्स की खरीदी नहीं कर सकी. अधिकारी बोले- जल्द जारी होगी राशि कृषि विभाग के सचिव एम.सेलवेंद्रन के मुताबिक, ” किसानों को बोनस की राशि जल्द ही जारी की जाएगी. इसे लेकर तैयारियां चल रही हैं. प्रदेश में करीबन 1 लाख हेक्टेयर में कोदो-कुटकी की बुआई की गई है. प्रदेश में आमतौर पर मंडला-डिंडोरी और जबलपुर इलाके में ही अधिकतर कुटकी का उत्पादन होता है.”

घर में मिली तीन पेटी बाइबिल, भोपाल में प्रार्थना सभा की आड़ में मतांतरण का खेल

भोपाल. धर्म स्वातंत्र्य कानून में कड़े प्रविधानों के बाद भी शहर में मतांतरण का क्रम जारी है। रविवार को बागसेवनिया थाने के अमराई संजय नगर में ऐसा ही प्रकरण सामने आया। वहां प्रार्थना सभा की आड़ में मतांतरण की कोशिश चल रही थी। बजरंग दल के हंगामे के बाद पुलिस ने मतांतरण कराने के आरोप में चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। बताया जा रहा है कि रविवार को संजय नगर में रहने वाले शिवकुमार झरवड़े के घर पर करीब 40 आदिवासी महिला-पुरुष और बच्चे इकट्ठा होकर प्रार्थना कर रहे थे। उसी समय विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के 60-70 कार्यकर्ता और पदाधिकारी वहां पहुंचकर नारेबाजी करने लगे। उस समय घर का मुख्य द्वार बंद था। बंद कमरे में मतातंरण आवाज देने पर भी जब किसी ने दरवाजा नहीं खोला तो उन्होंने पुलिस को सूचना देकर बुला लिया। पुलिस कर्मियों ने वहां पहुंचकर जैसे ही दरवाजा खोला, बजरंग दल के कार्यकर्ता झरवड़े के घर में घुस गए। वहां महिला-पुरुष प्रार्थना करते हुए मिले। अचानक घर में इतने लोगों के घुसने से बौखलाए लोगों ने विहिप-बजरंग दल कार्यकर्ताओं से धक्का मुक्की भी की। तीन पेटी बाइबिल मिली विहिप के जिला मंत्री सोनू दुबे ने बताया कि शिवकुमार के घर में तीन पेटी बाइबिल मिली हैं। वहां आए लोगों के लिए मांसाहार पकाया जा रहा था। वहां लोगों को मतांतरण के लिए बहलाया-फुसलाया जा रहा था। वहां हंगामा बढ़ता देखकर पुलिस दोनों पक्षों को थाने ले आई। देर शाम पुलिस ने शिवकुमार झरवड़े, रचना गोस्वामी, प्रियंका पिल्लई और प्रतिभा मरावी के खिलाफ धार्मिक स्वातंत्र्य अधिनियम की धारा 3, 5 के तहत मामला दर्ज कर लिया है। प्रार्थना कर रहे लोगों ने कहा- अपनी मर्जी से आए प्रार्थना सभा में मौजूद महिलाओं-पुरुषों का कहना था कि उन पर मतांतरण के लिए किसी ने दबाव नहीं डाला था। वे लोग अपनी मर्जी से आए थे। एक महिला ने कहा कि जब उनके बच्चे बिगड़ रहे थे, तब कोई मदद को आगे नहीं आया। अब जब उन लोगों ने सही राह पकड़ी है तो लोग रोकने आ रहे हैं। एक बार पहले भी पकड़ा जा चुका विहिप के जिला मंत्री सोनू दुबे ने बताया कि शिवकुमार झरवड़े एक वर्ष पहले भी मतांतरण कराने के लिए पकड़ा गया था। पुलिस को भी शिकायत की थी। वह नर्मदापुरम रोड स्थित एक कालेज में प्रोफेसर है। पत्नी अस्पताल में नर्स है।

दुआए खास के साथ खत्म हुआ 4 दिवसीय इज्तिमा, सड़कों पर लगा लंबा जाम

4 day Ijtima ended with special prayers, long jam on roads भोपाल ! राजधानी भोपाल के ईंटखेड़ी में आयोजित चार दिवसीय आलमी तब्लीगी इज्तिमा का आज समापन हो गया है. सुबह सबसे पहले फजर की नमाज हुई इसके बाद मौला सआद के खास बयान और फिर सुबह 9 बजे दुआ के साथ इज्तिमा का समापन हुआ. बता दें इज्तिमा के समापन के साथ ही अब सभी जमातें अपने-अपने शहरों को जाने लगी है, जिसकी वजह से भोपाल की सडक़, रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड, एयरपोर्ट सहित सभी जगह भीड़ ही भीड़ नजर आ रही है. मालूम हो कि इज्तिमा में करीब 2000 से जमाते अलग-अलग राज्य और देशों से हिस्सा लेने के लिए आई हुईं थी. भोपाल की इन सडक़ों पर ट्रैफिकइज्तिमा के समापन के साथ ही आज भोपाल की सड़कों पर लोग ही लोग नजर आ रहे हैं. लाम्बाखेड़ा से करोंद, मुबारकपुर से पटेल नगर, गांधी नगर से अयोध्या नगर बायपास, रत्नागिरी, भोपाल टॉकीज, पीरगेट, मोती मस्जिद, रॉयल मार्केट, लालघाटी चौराहा, नादरा बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, अल्पना तिराहा, भारत टॉकीज, बोगदा पुल आदि क्षेत्रों में जमकर ट्रैफिक उमड़ रहा है. रेलवे ने किए ये इंतजामइज्तिमा को लेकर रेलवे ने भी विशेष इंतजाम किए हैं. भोपाल स्टेशन पर आज 4 टिकट काउंटर बढ़ाए गए हैं, जबकि गाड़ी संख्या 11272 भोपाल-इटारसी एक्सप्रेस में 2 और 3 दिसंबर को अतिरिक्त जनरल कोच लगाए गए हैं. इसी तरह गाड़ी संख्या 14814 भोपाल-जोधपुर एक्सप्रेस में 2 और 3 दिसंबर को अतिरिक्त जनरल कोच की व्यवस्था है. इज्तिमा में क्या व्यवस्था थीभोपाल में आयोजित इज्तिमा के कार्यक्रम बड़े स्तर पर किया गया था. सभी जगहों से आए आलमी तब्लीगी जमातों के लिए 500 से ज्यादा चार्जिंग प्वाइंट के अलावा 2 हजार से ज्यादा लोगों के लिए खाने-पीने और सोने की अच्छी व्यवस्था की गई थी. इस आयोजन को लेकर भोपाल प्रशासन ने पहले से ही सभी तैयारियां कर ली थी, ताकि किसी को भी परेशानी का सामना न करना पड़े.

प्रदेश में समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी आज,एमएसपी 2300 रुपए प्रति क्विंटल, शिकायत के लिए नंबर जारी

Paddy purchased today at support price in the state, MSP Rs 2300 per quintal, number issued for complaints प्रदेश में खरीफ विपणन मौसम 2024-25 के लिये धान की खरीदी सोमवार से शुरू होगी। धान कॉमन का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2300 और धान ग्रेड-ए का 2320 रुपये प्रति क्विंटल है। किसानों की एफएक्यू गुणवत्ता की उपज इन्हीं दरों पर उपार्जित की जायेगी। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया है कि धान का उपार्जन 2 दिसम्बर से 20 जनवरी 2025 तक किया जायेगा। उपार्जन प्रत्येक सप्ताह के सोमवार से शुक्रवार तक होगा। 45 लाख मीट्रिक टन होगी धान की खरीदी केन्द्र सरकार द्वारा निर्धारित मात्रा के अनुसार समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी 45 लाख मीट्रिक टन की जायेगी। गोदाम स्तर पर खाद्यान्न की गुणवत्ता का परीक्षण उपार्जन एजेंसी के गुणवत्ता सर्वेयर द्वारा स्टेक लगाने के पहले किया जायेगा। परिवहनकर्ता द्वारा उपार्जित खाद्यान्न का परिवहन समय-सीमा में नहीं करने पर पेनाल्टी की व्यवस्था साप्ताहिक रूप से की जायेगी। समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी के बाद भुगतान, कृषक पंजीयन के दौरान आधार नम्बर से लिंक बैंक खाते में किया जायेगा। धान उपार्जन अवधि के दौरान पड़ोसी राज्यों से उपार्जन केन्द्र पर लायी जाने वाली उपज की अवैध बिक्री को रोकने के लिये समुचित कार्रवाई के निर्देश कलेक्टर्स को दिये गये हैं। समस्याओं के समाधान के लिए तकनीकी सेल का गठन पंजीयन एवं उपार्जन में आने वाली तकनीकी समस्याओं के समाधान के लिये जिले में और राज्य स्तर पर भी तकनीकी सेल का गठन किया गया है। जिला स्तरीय समिति उपार्जन संबंधी सभी विवादों का अंतिम निराकरण तथा उपार्जित खाद्यान्न की गुणवत्ता की निगरानी करेगी। राज्य स्तर पर एक कंट्रोल-रूम भी स्थापित किया गया है। इसका दूरभाष नम्बर 0755-2551471 है, जो उपार्जन अवधि में सुबह 9 से रात 7 बजे तक संचालित रहेगा।

सपनों को हकीकत में बदलने की बानगी है “बुरहानपुर का बनाना पावडर”

“Burhanpur’s Banana Powder” is a symbol of turning dreams into reality. मध्यप्रदेश का एक छोटा सा जिला बुरहानपुर बरसों से अपनी ऐतिहासिक धरोहरों और हरे-भरे खेतों के लिए प्रसिद्ध है। अब यह जिला “एक जिला-एक उत्पाद” पहल के तहत सफलता के नये आयाम गढ़ रहा है। केले की फसल, जो इस जिले की मूल पहचान है, अब न केवल किसानों की आय बढ़ा रही है, बल्कि एक नई उद्यम क्रांति का प्रतीक भी बन गई है। इसी साल फरवरी में हुए “बनाना फेस्टिवल” में यहां के उद्यमियों और किसानों के बीच संवाद का परिणाम अब धरातल पर नजर आ रहा है। इसी प्रेरणा से बुरहानपुर के उद्यमी श्री रितिश अग्रवाल ने “बनाना पाउडर” बनाने की यूनिट स्थापित की हैं। यह यूनिट जिला प्रशासन और उद्यानिकी विभाग के सहयोग से खकनार के धाबा गांव में संचालित की जा रही है। “बनानीफाय” ब्रांड के नाम से तैयार किया जा रहा यह बनाना पाउडर शारीरिक पोषण से भरपूर है। यह बच्चों और बड़ों सभी के लिए ऊर्जा और सेहत का खजाना है। इस यूनिट में केले से तीन प्रकार का पाउडर तैयार किया जा रहा है। खाने योग्य पाउडर (केले के गूदे से), जो शुद्ध और बेहद उच्च गुणवत्ता वाला है। सादा पाउडर (केले के छिलके सहित), जो खाने योग्य है और फाइबर से भी भरपूर है। केले के छिलके से तैयार पाउडर को खाद (मैन्योर) के रूप में उपयोग किया जाएगा। इसके उपयोग से सभी प्रकार की फसलों की गुणवत्ता एवं उत्पादन मात्रा में भी सुधार होगा। इस प्रोजेक्ट को “प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना” के तहत 10 लाख रुपये की सब्सिडी प्राप्त हुई। कुल 75 लाख रुपये पूंजी निवेश से बनी यह यूनिट एक मिसाल बन गई है। इसमें अहमदाबाद से लाई गई आधुनिक मशीनों का उपयोग किया जा रहा है, जो उत्पादन प्रक्रिया को तेज और कुशल बनाती हैं। “बनानीफाय” ब्रांड के उत्पादों को न केवल मध्यप्रदेश बल्कि महाराष्ट्र, हरियाणा, पंजाब, और दिल्ली जैसे राज्यों में भी भेजा जा रहा है। इसके 250 ग्राम और 500 ग्राम पैकेट क्रमशः 280 रुपये और 480 रुपये की कीमत पर उपलब्ध हैं। यूनिट की खासियत यह है कि यहां केले के छिलके को भी व्यर्थ नहीं जाने दिया जाता। छिलकों से बना पाउडर नर्सरियों और उद्यानिकी फसलों में खाद के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। यह पर्यावरणीय संरक्षण और कृषि उत्पादकता बढ़ाने का एक बेहतरीन उदाहरण है। नेपानगर की विधायिका सुश्री मंजू दादू और कलेक्टर बुरहानपुर सुश्री भव्या मित्तल द्वारा शुभारंभ की गई यह यूनिट अब न केवल बुरहानपुर के किसानों और उद्यमियों के लिए प्रेरणा बन गई है। यह यूनिट “एक जिला-एक उत्पाद” योजना की वास्तविक सफलता का प्रतीक बन गई है। “बनानीफाय” का बनाना पावडर न केवल आर्थिक समृद्धि ला रहा है, बल्कि यह एक उदाहरण है कि सही दिशा में किए गए प्रयास किस तरह से छोटे जिलों को भी अंतर्राष्ट्रीय पहचान दिला सकते हैं। बुरहानपुर के मस्त केले अब सबकी जुबां पर मिठास घोल रहे हैं।

मोहन यादव ने IAS अनुपम राजन को सौंपी बड़ी जिम्मेदार, शिक्षा विभाग में लाएंगे क्रांति

Mohan Yadav handed over big responsibility to IAS Anupam Rajan, will bring revolution in education department भोपाल ! मध्य प्रदेश उच्च शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव अनुपम राजन को शासन ने पदोन्नत करते हुए अपर मुख्य सचिव यानी एसीएस के पद पर नियुक्त किया है. वे 1 दिसंबर को पदभार ग्रहण करेंगे. वहीं अब उन्हें प्रदेश के मुख्य सचिव के बराबर वेतन मिलेगा. सामान्य प्रशासन विभाग ने शुक्रवार को आदेश जारी कर जानकारी साझा की है. बता दें कि आदेश में लिखा गया है कि अनुपम राजन के पास उच्च शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी रहेगी. साथ ही अनुपम राजन के पास उद्यानिकी और खाद्य प्रसंस्करण विभाग का अतिरिक्त प्रभार भी रहेगा. 20 अगस्त को राजन की फील्ड में हुई वापसीअनुपम राजन 1993 बैच के आईएएस अधिकारी है. मध्यप्रदेश में करीब 3 साल तक अनुपम राजन मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी रहे हैं. हाल में ही 20 अगस्त को उनकी फील्ड में वापसी हुई थी. जिसके बाद उन्हें उच्च शिक्षा विभाग का प्रमुख सचिव बनाया गया था. इसके साथ ही उद्यानिकी और खाद्य प्रसंस्करण विभाग का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया था. इससे पहले अनुपम राजन कई जिलों में कलेक्टर व विभिन्न विभागों में सेवाएं दे चुके हैं. उनके साथ एक विवाद भी जुड़ा हुआ है. जिसका मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है. आज रिटायर होंगे डीजीपी सक्सेना और एसीएस मलय श्रीवास्तवमध्य प्रदेश के पुलिस महानिदेशक सुधीर सक्सेना 30 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं. उनकी जगह प्रदेश का नया डीजीपी आईपीएस कैलाश मकवाना को बनाया गया है. इसके साथ ही अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक पंकज श्रीवास्तव को विशेष महानिदेशक पद पर पदोन्नत किया गया है. वहीं 1992 बैच के आईएएस अधिकारी मलय श्रीवास्तव भी 30 नवंबर को रिटयर हो जाएंगे. शनिवार को सेवानिवृत्त हो रहे सुधीर सक्सेना और मलय श्रीवास्तव को शुक्रवार को मंत्रालय में विदाई दी गई.

प्रशासन या राजतंत्र? आगर-मालवा में कर्मचारियों की नौकरी पर खतरा?

Administration or monarchy? Threat to employees’ jobs in Agar-Malwa? त्वरित टिप्पणी विशेष संवाददाता: उदित नारायण आगर-मालवा का प्रशासन इन दिनों कर्मचारियों के लिए डर और तनाव का केंद्र बनता जा रहा है। हाल ही में सहायक ग्रेड-03 सुरेश चौहान को नौकरी से बाहर करने का मामला सामने आया है, जिसने पूरे जिले में चर्चा को जन्म दे दिया है। यह कोई नया मामला नहीं है, इससे पहले भी तीन पटवारियों को नौकरी से निकाला गया था। हैरानी की बात यह है कि जब इन पटवारियों ने हाई कोर्ट का रुख किया, तो अदालत ने कलेक्टर के निर्णय को त्रुटिपूर्ण बताते हुए कर्मचारियों को बहाल करने का आदेश दिया। परंतु, कलेक्टर साहब ने आदेश को नजरअंदाज कर दिया। उनके इस रवैये ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वे न तो किसी का जवाब सुनने को तैयार हैं और न ही अदालत के आदेश को मानने को। इसी बीच, एक नए विवाद ने आग में घी डालने का काम किया है। सूत्रों के अनुसार, मुआवजे से जुड़े एक प्रकरण में लगभग 5 करोड़ रुपये की राशि गलत तरीके से वितरित की गई। जब यह मामला उजागर हुआ, तो गलती छुपाने के लिए साहब ने पटवारियों और राजस्व निरीक्षकों को निलंबित कर दिया और एक आदेश जारी कर दिया कि किसी भी तरह से यह पैसा वापस जमा कराया जाए। यह फरमान कर्मचारियों पर अप्रत्यक्ष दबाव बनाने का प्रतीक है, जबकि गलती का असली स्रोत कहीं और है। कर्मचारियों के बीच माहौल बेहद तनावपूर्ण है। उनका कहना है कि यहां किसी की भी नौकरी कब चली जाए, इसका कोई भरोसा नहीं। एक कर्मचारी ने व्यंग्यात्मक स्वर में कहा, “साहब को तो बस दूसरों की गलतियां पकड़ने का शौक है। अपनी गलतियों पर कोई सफाई नहीं देते। और अगर गलती दिखा दो, तो सीधे नौकरी से निकाल देते हैं।” अब सवाल उठता है कि क्या कलेक्टर साहब की यह “राजशाही” कभी समाप्त होगी या हाई कोर्ट के आदेशों को अनदेखा करना, अपनी गलतियों का ठीकरा कर्मचारियों पर फोड़ना और तनावपूर्ण माहौल बनाना क्या प्रशासनिक आदर्श का हिस्सा है या राजतंत्र

एमएफपी पार्क में अनुभवहीन सीईओ की पदस्थापना से बर्बाद होता विंध्या हर्बल्स

Vindhya Herbals gets ruined due to appointment of inexperienced CEO in MFP Park उदित नारायण भोपाल। लघुवनोपज संघ की इकाई लघु वनोपज प्रसंस्करण केंद्र बरखेड़ा पठानी में सीईओ के पद पर को सीनियर आईएफएस को दरकिनार कर अनुभवहीन और जूनियर की पदस्थापना से विंध्या हर्बल” नाम से आयुर्वेदिक उत्पादों के उत्पादन में निरंतरता गिरावट आ रही है। वहीं प्रबन्ध संचालक विभाष ठाकुर की प्रशासनिक मनमानी से प्रशासनिक अराजकता का माहौल बनता जा रहा है।एक वर्ष में तीन सीईओ (आईएफएस) और तीन उत्पादन प्रबंधक (एसडीओ) बदलने का खेल से एमएफपी पार्क में पूरे उत्पादन प्रक्रिया को चरमरा कर रख दिया। लघु वनोपज संघ के प्रबंध संचालक बिभाष ठाकुर के कार्यकाल में अब तक सीईओ एवं सीसीएफ पीजी फुलजले, प्रमोटी डीएफओ अर्चना पटेल और अब जूनियर आईएफएस गीतांजलि जे की सीईओ के पद पर पदस्थापना हुई है। इसी प्रकार गड़बड़ियों के नाम पर उत्पादन प्रबंधक एसडीओ बी पिल्लई को 12 जनवरी 24 को हटाया पर जिन कारणों से हटाया गया, उसका निराकरण आज तक नहीं हुआ है। पिल्लई के हटने के बाद रेंजर सुनीता अहिरवार को एसडीओ का प्रभार देते हुए उत्पादन उप प्रबंधक बनाया। इनके कार्यकाल में रॉ मटेरियल की खरीदी से लेकर गुणवत्ताहीन दवाइयों के उत्पाद के मामले प्रकाश में आने लगे। इसकी वजह से एमएफपी पार्क की साख गिरी। सितंबर 24 में अहिरवार को हटाने के बाद एमडी ठाकुर ने एसडीओ मणिशंकर मिश्रा को उत्पादन उप प्रबंधक के पद पर पदस्थ किया। मिश्रा को आयुष विभाग द्वारा एक करोड़ 70 लख रुपए की आयुर्वेदिक उत्पाद तैयार कर सप्लाई का लक्ष्य दिया गया। मिश्रा ने एमडी द्वारा निर्धारित लक्ष्य के 90% ऐसा पूरा कर लिया इस बीच एमडी ने मिश्रा की जगह रेंजर प्रियंका बाथम को एसडीओ का प्रभार देते हुए उत्पादन उप प्रबंधक बनाने का फरमान जारी किया। एमडी के बार-बार बदलते निर्णय की वजह से एमएफपी पार्क मैं प्रशासनिक अस्थिरता हुई बल्कि इसका असर उत्पादन पर भी पड़ रहा है।bदिलचस्प पहलू यह है कि जिन अधिकारियों को हटाया उनके भ्रष्टाचार की जांच नहीं रिपोर्ट तक नहीं आई। आयुष 1.8 करोड़ के ऑर्डर को सप्लाई नहीं करने और गुगुल खरीदी में भ्रष्टाचार करने वाली सुनीता अहीरवार की जांच आज तक तक शुरू नहीं हुई। उत्पादन मिश्रा से वापस लिया डीडीओ प्रभार वर्तमान एसडीओ उत्पादन प्रबंधक ने एक महीने में आयुष 1.8 करोड़ के ऑर्डर को 90 प्रतिशत सप्लाई कर दिया और ११ करोड़ का नया ऑर्डर भी आया लेकिन वो भी एसीएस और एमडी की आपसी श्रेष्ठता की लड़ाई में फंस गये। उनसे डीडीओ प्रभार ले लिया और तो और अभी तक ११ करोड़ के ऑर्डर का काम भी चालू नहीं हो पया है। रेंजर प्रियंका को प्रभार देना चाहती है सीईओ एसडीओ मिश्रा से डीडीओ प्रभार लेने के बाद अब नये एसडीओ की पोस्टिंग कराने के लिये पत्र भी लिख दिया है।एसडीओ की नई पोस्टिंग से पहले ही रेंजर प्रियंका बाथम को उत्पादन शाखा में कार्य शुरू करने के आदेश दिये है। एसडीओ मिश्रा के समय हुये कार्यों की समीक्षा के नाम पर रेंजर प्रियंका ने भुगतान रोका। रेंजर प्रियंका बाथम को रिटेल का प्रभार दिया गया था लेकिन रिटेल में कार्य ना कर उत्पादन में हस्तक्षेप करना शुरू है। यहाँ तक की फाइलों में ख़ुद को असिस्टेंट मैनेजर की जगह डिप्टी मैनेजर लिखती है और एसडीओ का चार्ज लेने की जुगाड़ में मिश्रा द्वारा आयुष ऑर्डर सप्लाई करने के दौरान किये गये कार्यो के भुगतान रोक कर रखा है जिससे नये ऑर्डर सप्लाई में कोई काम नहीं हो रहा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव का निवेश को लेकर गंभीर दृष्टिकोण: यूके में निवेशकों को किया आमंत्रित

Chief Minister Dr. Yadav’s serious view on investment: Invited investors to UK भोपाल ! मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने यूके यात्रा में मध्यप्रदेश में निवेश बढ़ाने के लिए लंदन के प्रमुख उद्योगपतियों के साथ वन-ऑन-वन मीटिंग कर व्यक्तिगत तौर पर निवेश की संभावनाओं पर चर्चा की। उन्होंने सेक्टर केंद्रित राउंड-टेबल मीटिंग कर निवेश संबंधी विस्तृत चर्चा की। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने वन-ऑन-वन बैठकों में प्रत्येक निवेशक की परियोजना और आवश्यकताओं को ध्यानपूर्वक सुना और मध्यप्रदेश में निवेश के लिए बेहतर अवसर और नीतिगत समर्थन का भरोसा दिलाया। राउंड-टेबल चर्चाओं में इलेक्ट्रिक वाहन, नवकरणीय ऊर्जा, शिक्षा और खाद्य प्रसंस्करण जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर विशेषज्ञों और सरकारी अधिकारियों के साथ विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इंडोरामा ग्रुप, एसआरएएम एंड एमआरएएम ग्रुप, सायनकॉननोड, हाइब्रिड एयर व्हीकल्स लिमिटेड, क्लिनीसप्लाईज, औरोरा एनर्जी रिसर्च, एल्सेवियर, वीडिलीवर, कैपरो, वेबसाइट, द मोंटकैल्म लग्ज़री होटल्स, फाइला अर्थ, एम्पर्जिया लिमिटेड, अयाना कंसल्टिंग, पैंजिया डेटा लिमिटेड, इनवर्जी, बीईएम ग्रुप लिमिटेड, डैक्स फर्स्ट, रैनसैट ग्रुप, कोगो इकोटेक सॉल्यूशंस, एम्पैटी.एआई, मनी फॉर बिजनेस लिमिटेड, डीएएम हेल्थकेयर लिमिटेड और हेलियन जैसी कंपनियों के प्रतिनिधियों से चर्चा की। बैठक में औद्योगिक विकास को गति देने और संभावित सहयोग के अवसरों पर विस्तृत चर्चा हुई। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने निवेशकों को मध्यप्रदेश में अनुकूल व्यावसायिक माहौल और निवेश के लिए उपलब्ध सुविधाओं के बारे में जानकारी दी। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने विभिन्न क्षेत्रों पर केंद्रित राउंड-टेबल परिचर्चाओं में भाग लिया। इन परिचर्चाओं में इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी), ऑटोमोबाइल और नवीकरणीय ऊर्जा, शिक्षा और फूड प्रोसेसिंग जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की यह पहल राज्य को एक वैश्विक निवेश स्थल बनाने और उद्योगपतियों के साथ मजबूत साझेदारी विकसित करने में परिणामोन्मुखी साबित होगी। साथ ही ये बैठकें औद्योगिक विशेषज्ञों और निवेशकों के साथ मध्यप्रदेश के विकास के लिए नई संभावनाओं को आकार देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होंगी।

मप्र से सागवान लकड़ी अवैध कटाई कर नागपुर, राजस्थान, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में हो रहा अवैध कारोबार

Illegal cutting of teak wood from Madhya Pradesh is taking place in Nagpur, Rajasthan, Andhra Pradesh and Telangana. भोपाल। जंगल महकमे मुख्यालय सर्किल और वनमंडलों में कई पद रिक्त पड़े हैं। खासकर सर्किल और वनमंडलों डीएफओ से लेकर डिप्टी रेंजर्स के पास खाली है। मैदानी अवल की बात करें तो वन विभाग में वन और वन्य प्राणियों की सुरक्षा के लिए 25000 के लगभग अमला स्वीकृत है. इनमें से 1900 खाली पड़े हैं. स्वीकृति अमले से 8% फॉरेस्ट गार्ड डीएफओ और पीएफ कार्यालय बाबू गिरी का काम कर रहे हैं तो 4% फॉरेस्ट गार्ड रसूखदार प्रधान मुख्य वन संरक्षक स्तर के अफसरों के कार्यालयों और उनके बंगले पर दरबान दरबान बने हुए हैं. यह स्थिति भोपाल से लेकर 16 सर्किल और 65 वन मंडलों में बनी हुई है। इसका फायदा लकड़ी माफिया से लेकर अतिक्रमण माफिया तक उठा रहे हैं। फील्ड से मिली जानकारी के अनुसार मप्र से सागवान लकड़ी अवैध कटाई कर नागपुर, राजस्थान, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के कई शहरों में अवैध कारोबार हो रहा है। एक अनुमान के अनुसार टिंबर माफिया प्रदेश में सागौन की अवैध कटाई कर 100 करोड़ रूपया से अधिक का कारोबार करता है। फील्ड से मिली जानकारी के अनुसार जबलपुर, बैतूल, छतरपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, शहडोल और उज्जैन वन वृत में सबसे अधिक लकड़ी की अवैध कटाई हो रही है। धार वन मंडल में 40 घनमीटर सागवान की लकड़ी जप्त और देवास वन मंडल में हुई अवैध कटाई इस बात की गवाह है कि प्रदेश में धड़ल्ले से अवैध कटाई हो रही है। लकड़ी की अवैध कटाई और अन्य राज्यों में तस्करी की शिकायत नागपुर टिंबर संगठन के अलावा मध्य प्रदेश के टिंबर संगठन ने बकायदा पीसीसीएफ संरक्षण को की है। इस शिकायत की पुष्टि वन विभाग में अवैध कटाई से संबंधित दर्ज अपराधिक प्रकरण भी करते हैं। इस संबंध में छिंदवाड़ा सर्कल में एक समीक्षा बैठक भी हो चुकी है। इस समीक्षा बैठक में वन वृत और वन मण्डलों में पदस्थ आईएफएस अधिकारियों के साथ-साथ टिंबर संगठनों के पदाधिकारी उपस्थित थे। इस बैठक में दिलचस्प पहलू यह रही कि जंगलों की सुरक्षा की जिम्मेदार अधिकारी टिंबर संगठन के पदाधिकारी से प्रमाण मांगते नजर आ रहे थे। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि छिंदवाड़ा में तो अवैध कटाई और तस्करी से संबंधित समीक्षा हुई किंतु मुख्यालय स्तर पर पूर्णकालिक पीसीसीएफ संरक्षण नहीं होने की वजह से मॉनिटरिंग भी नहीं हो पा रही है। टिंबर संगठन के पदाधिकारी के शिकायत की पुष्टि वन विभाग के अधिकृत आंकड़े भी कर रहें है। विभाग के अधिकृत आंकड़े बताते हैं कि इस वर्ष जबलपुर वन वृत में कुल दर्ज अपराधी प्रकरण 3445 में से 3129 प्रकरण केवल अवैध कटाई से संबंधित हैं। इसी प्रकार छिंदवाड़ा वन वृत्त में दर्ज प्रकरण की संख्या 2302 है तो अवैध कटाई के प्रकरण 2206 दर्ज किए गए हैं। उज्जैन वन वृत 1201 प्रकरण अवैध कटाई से संबंधित हैं। विदिशा वन मंडल के लटेरी और उसके आसपास क्षेत्र में आज भी अवैध कटाई के सिलसिला जारी है। अपर मुख्य सचिव अशोक अग्रवाल ने कलेक्टर एसपी के साथ बैठक की परंतु नतीजा कुछ नहीं निकला। लटेरी में आज भी रेंजर के पद खाली पड़े हैं। मुख्यालय और राज्य शासन स्तर पर कोई प्रयास नहीं किया गया। सुरक्षा में हर साल वनकर्मियों के साथ मारपीट के 20-30 प्रकरण संरक्षण शाखा से एकत्रित आकड़ों के मुताबिक वन एवं वन्य प्राणियों की सुरक्षा में हर साल वनकर्मियों के साथ मारपीट के 20-30 प्रकरण दर्ज हो रहे है। पिछले तीन सालों में जंगलों की सुरक्षा में आधा दर्जन वनकर्मियों को अपनी जान तक गंवाने पड़े है। यही नहीं, विदिशा, रायसेन, गुना, शिवपुरी, मुरैना, भिंड, ग्वालियर, नरसिंहपुर, बालाघाट, बैतूल, छिंदवाड़ा, सागर, दमोह, बुरहानपुर, वन मंडलों में 2 दर्जन से अधिक वन कर्मचारियों पर माफिया प्राणघातक हमला कर चुके हैं। सीआरपीसी की धारा 197 के तहत वन कर्मियों को प्रोटेक्शन दिया गया है कि गोलीबारी की घटना में तब तक एफआईआर दर्ज नहीं होगी जब तक राजपत्रित ऑफिसर की जांच रिपोर्ट न जाए। बुरहानपुर के बाद लटेरी गोलीकांड में वन कर्मियों पर बिना जांच के आईपीसी की धारा 302 और 307 के तहत एफआईआर दर्ज कर दी गई। धार में कछुआ गति से 40 घन मीटर की जांच वन मंडल धार में आरा मशीन मनावर से जब्त 40 घन मीटर अवैध सागवान के मामले में जांच कछुआ गति से चल रही है। बताया जाता है कि जांच में वन अधिकारियों एवं कर्मचारियों के बचाने का प्रयास चल रहा है। 3 सप्ताह बाद भी वन विभाग की टीम या पता लगाने में असफल रही कि 40 घन मीटर सागवान चटपट धार में कहां से आई ? वन विभाग यह भी पता नहीं लगा सकी कि 2 साल से चल रहे गोरख धंधे में किन-किन अधिकारियों एवं कर्मचारियों का इदरीशखान से सांठ-गांठ है। धार वन विभाग की बड़ी कार्यवाही के बाद यह सवाल उठने लगा है कि इतनी बड़ी मात्रा में सागवान इमारती लकड़ी कहां से काट कर आ रही थी? अवैध कटाई और उसके अवैध खरीद-फरोख्त के गोरख धंधे में वन विभाग के कौन-कौन अधिकारी -कर्मचारी शामिल थे? यह सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं क्योंकि तीन दिन पहले ही फॉरेस्ट के कर्मचारियों ने निरीक्षण किया था और सब कुछ ओके पाया था। मनावर एसडीओ और कुक्षी के प्रभारी रेंजर की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।

5 हजार करोड़ का फिर कर्ज लेगी मोहन यादव सरकार, 11 महीने में 40 हजार 500 करोड़ का लोन ले चुकी

Mohan Yadav government will again take a loan of Rs 5 thousand crores, has already taken a loan of Rs 40 thousand 500 crores in 11 months भोपाल। मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार एक बार फिर 5 हजार करोड़ रुपए का कर्ज लेने जा रही है। यह ऋण 26 नवंबर को ई ऑक्शन के जरिए स्टाक गिरवी रखकर लिया जाएगा। लोन की यह राशि दो अलग-अलग कर्ज के रूप में ली जा रही है, जो 2500-2500 करोड़ रुपए की है। 27 नवंबर को सरकार के खाते में लोन की यह रकम पहुंच जाएगी। जानकारी के मुताबिक मोहन सरकार की 20 साल के लिए 2500 करोड़ और 14 साल के लिए 2500 करोड़ लेने की तैयारी है। पिछले 11 महीने में सरकार 40 हजार 500 करोड़ रुपए का कर्ज ले चुकी है है। मध्यप्रदेश की जनता पर 3 लाख 90 हजार करोड़ का कर्ज का बोझ हो चुका है। राज्य सरकार भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के माध्यम से यह कर्ज उठाएगी। इसके लिए सरकारी बांड या स्टॉक को गिरवी रखकर धनराशि जुटाई जाएगी। ई-ऑक्शन प्रक्रिया पूरी होने के बाद 27 नवंबर को यह रकम राज्य सरकार के खजाने में आ जाएगी। 11 महीने में 40,500 करोड़ का कर्जसरकार के वित्तीय रिकॉर्ड पर नजर डालें तो यह इस साल का नया बड़ा कर्ज होगा। पिछले 11 महीनों में, राज्य सरकार ने 40,500 करोड़ रुपये का कर्ज लिया है। यह धनराशि राज्य की विकास योजनाओं और अन्य खर्चों के लिए इस्तेमाल की गई है। मध्य प्रदेश की जनता पर कर्ज का भार लगातार बढ़ता जा रहा है। वर्तमान में राज्य पर कुल कर्ज 3 लाख 90 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह राज्य की वित्तीय स्थिरता के लिए एक गंभीर मुद्दा है।

निर्मला सप्रे की सदस्यता पर फैसला अगले हफ्ते

Decision on Nirmala Sapre’s membership next week भोपाल। रामनिवास रावत के साथ लोकसभा चुनाव में भाजपा का समर्थन करने वाली बीना विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे की सदस्यता पर निर्णय अगले सप्ताह होगा। विधानसभा सचिवालय ने उन्हें अपनी बात रखने का अंतिम अवसर दिया है। वहीं, सप्रे ने कहा है कि वे विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के समक्ष उपस्थित होकर अपनी बात रखेंगी। उधर, कांग्रेस विधायक दल ने विधानसभा अध्यक्ष तोमर से मांग की है कि 16 दिसंबर से विधानसभा का शीतकालीन सत्र है। इसलिए आवेदन का निराकरण शीघ्र करें। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने लोकसभा चुनाव के समय भाजपा में शामिल होने की घोषणा करके पार्टी प्रत्याशी के विरुद्ध काम करने वाली बीना से विधायक निर्मला सप्रे की सदस्यता समाप्त करने का आवेदन दिया है। सदस्यता त्यागने का निर्णय नहीं कर पा रहीं सप्रे आवेदन में सप्रे के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ मंच साझा करने के साथ भाजपा का हाथ थामने की घोषणा करते हुए वीडियो, विभिन्न समाचार पत्रों में प्रकाशित खबर आदि दस्तावेज लगाए हैं। साथ ही भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित बैठक में उनके शामिल होने के फोटो भी फिर से दिए आवेदन के साथ लगाए हैं। उधर, सप्रे सदस्यता त्यागने को लेकर निर्णय नहीं कर पा रही हैं। यही कारण है कि उन्होंने पहले दो बार के नोटिस पर विभिन्न कारण बताते हुए समय मांगा और फिर कहा कि वे अध्यक्ष के समक्ष प्रत्यक्ष उपस्थित होकर अपनी बात रखेंगी। अनाश्यक खींचा जा रहा मामला- उपनेता प्रतिपक्ष सूत्रों का कहना है कि इस मामले में निर्णय अध्यक्ष को ही करना है, इसलिए अगले सप्ताह सप्रे की बात सुनकर प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। वहीं, विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे का कहना है कि इस मामले को अनाश्यक खींचा जा रहा है। दस्तावेज गुम होने की बात कहते हुए दोबारा आवेदन मांगा गया, जबकि स्थितियां बिलकुल स्पष्ट हैं। सभी प्रमाण विधानसभा सचिवालय को उपलब्ध कराए जा चुके हैं। यदि विधानसभा के शीतकालीन सत्र के पहले सप्रे की सदस्यता पर निर्णय नहीं लिया गया, तो हम न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे। उधर, विधानसभा के प्रमुख सचिव एपी सिंह का कहना है कि सप्रे ने अध्यक्ष से भेंट करके अपनी बात रखने का कहा है। जल्द ही इस पर फैसला हो जाएगा। टल सकता है निर्मला का मामला सूत्रों का कहना है कि रामनिवास रावत के उपचुनाव हारने के बाद अब निर्मला सप्रे का मामला टल भी सकता है। दरअसल, सप्रे बीना को जिला बनाने की मांग कर रही थीं। सरकार के स्तर पर इसकी तैयारी भी हो गई थी, पर खुरई में विरोध होने के कारण मामला टल गया। खुरई से विधायक पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह कह चुके हैं कि भले ही पार्टी कांग्रेस से आए लोगों को स्वीकार कर ले, पर वे नहीं करेंगे। सागर जिले में पार्टी के अधिकतर नेता व कार्यकर्ताओं के बीच सप्रे को लेने पर एकराय नहीं है।

MP में इज्तिमा की तैयारियां अंतिम चरण में, इस बार भी प्लास्टिक-फ्री भी होगा आयोजन

भोपाल भोपाल के ईंटखेड़ी स्थित घासीपुरा में शुक्रवार 29 नवंबर से शुरू होने वाले आलमी तब्लीगी इज्तिमा में इस बार 100 एकड़ क्षेत्र में पंडाल लगाया गया है, जहां प्रदेश सहित देशभर से आने वाली जमातों को ठहराया जाएगा। इधर, भारी तादाद में आने वाले वाहनों को व्यवस्थित खड़े करने और ट्रैफिक जाम से बचाने के लिए दो हजार वालेंटियर्स तैयार किए गए हैं। इन वालेंटियर्स की अलग-अलग जगहों पर तैनाती की जाएगी। यह वालेंटियर्स रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और शहर के प्रमुख चौराहों पर ट्रैफिक का संचालन करेंगे। इधर, इज्तिमा स्थल पर अलग-अलग कामों के लिए 25 हजार वालेंटियर्स को तैनात किया जा रहा है। इज्तिमा में शिरकत के लिए अमेरिका, इंग्लैंड, तुर्की सहित 100 से अधिक देशों की जमातों के शामिल होने की उम्मीद है। दो महीने से चल रही तैयारियां 29 नवंबर से शुरू होने वाले इज्तिमा की तैयारियां दो महीने पहले शुरू हो गई थीं। पिछले साल हुए इज्तिमा को क्लीन, ग्रीन और डस्ट मुक्त इज्तिमा का नाम दिया गया था। इस बार इसे प्लास्टिक मुक्त इज्तिमा के नाम से जाना जाएगा। इंतेजामिया कमेटी के प्रवक्ता उमर हफीज खान ने बताया कि इस बार इज्तिमागाह पर धूल वाले क्षेत्रों में पानी का छिड़काव किया जाएगा। इस बार भी फूड जोन में पॉलीथिन और तंबाकू उत्पादों की बिक्री पर रोक रहेगी। प्लास्टिक पर पूरी तरह से रोक रहेगी। पानी की बोतलों को एकत्रित कर डिस्पोज किया जाएगा। शनिवार को संभागायुक्त संजीव सिंह ने इज्तिमा के इंतजामों का जायजा लिया। इस मौके पर उन्होंने नगर निगम, बिजली, पीएचई, पीडब्ल्यूडी, स्वास्थ्य सहित अन्य सरकारी विभागों के अधिकारियों को समन्वय से काम करने की हिदायत दी। 100 एकड़ में पंडाल, 65 पार्किंग इज्तिमा में आने वाले बंदों की तादाद को देखते हुए इस बार 100 एकड़ क्षेत्र में पंडाल लगाया गया है। जमातियों की तादाद को देखते हुए इसे बढ़ाया भी जा सकता है। इधर, अलग-अलग क्षेत्रों से आने वाले जमातियों के वाहनों के लिए 65 पार्किंग बनाई गई हैं। चालीस फूड और 25 नाश्ते के जोन रहेंगे, जहां रियायती दरों में खाद्य सामग्री बेची जा सकेगी। इमरजेंसी कॉरिडोर रहेगा आरक्षित चार दिनी इज्तिमा के आयोजन को लेकर इस बार भी इमरजेंसी कॉरिडोर बनाया गया है, जहां फायर ब्रिगेड और एंबुलेंस आसानी से पहुंच सकेगी। इस रास्ते पर किसी अन्य को जाने की इजाजत नहीं रहेगी। यहां पानी लाने वाले टैंकर भी आसानी से जा सकेंगे। अलर्ट रहेंगी बुलेट स्ट्रेचर एंबुलेंस इज्तिमा में सात से दस लाख तक बंदों की तादाद को देखते हुए इंतेजामिया कमेटी ने बुलेट स्ट्रेचर एंबुलेंस तैयार की है, जिससे अचानक से किसी की भी तबीयत बिगड़ने पर बुलेट एंबुलेंस से उसे बाहर तक आसानी से लाया जा सकेगा। यहां से एंबुलेंस की मदद से अस्पताल तक भेजा जाएगा। हालांकि, प्राथमिक उपचार के लिए 20 से अधिक निजी अस्पताल और सरकारी अस्पतालों के डॉक्टर मौजूद रहेंगे।

पर्यटकों का स्वर्ग, भारत का आध्यात्मिक हृदय: मध्यप्रदेश

Tourist’s Paradise, Spiritual Heart of India: Madhya Pradesh भोपाल ! मध्यप्रदेश, जिसे “भारत का हृदय” कहा जाता है, धार्मिक और आध्यात्मिक विरासत का एक समृद्ध ताना-बाना है, जिसमें कई ऐसे स्थल हैं जो तीर्थयात्रियों और पर्यटकों को समान रूप से आकर्षित करते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दूरदर्शी नेतृत्व में, राज्य सरकार इन स्थलों को बढ़ाने और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठा रही है, जो राज्य की सांस्कृतिक अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वर्तमान सरकार की पहली वर्षगांठ, 13 दिसंबर के अवसर पर, सरकार मौजूदा धार्मिक स्थलों के जीर्णोद्धार और मध्यप्रदेश को धार्मिक पर्यटन के लिए एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए नए आध्यात्मिक स्थलों के विकास पर ध्यान केंद्रित कर रही है। मध्यप्रदेश के विविध धार्मिक परिदृश्य में हिंदू, जैन, बौद्ध और इस्लाम सभी शामिल हैं, जो आध्यात्मिक साधकों के लिए एक महत्वपूर्ण गंतव्य है। हाल के वर्षों में मध्यप्रदेश में पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है, विशेष रूप से उज्जैन में “महाकाल महालोक” के सफल शुभारंभ के बाद। महाकाल महालोक में आगंतुकों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है, जो आर्थिक विकास और सांस्कृतिक संरक्षण के उत्प्रेरक के रूप में धार्मिक पर्यटन की क्षमता को रेखांकित करता है। डॉ. यादव के मार्गदर्शन में राज्य सरकार ने पूरे राज्य में महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों के जीर्णोद्धार और संवर्धन को प्राथमिकता दी है। इस पहल का उद्देश्य न केवल सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करना है, बल्कि आगंतुकों के अनुभव को बेहतर बनाना भी है। महाकाल महालोक इन प्रयासों का केंद्र बिंदु है, जिसे महाकालेश्वर मंदिर के आसपास एक जीवंत आध्यात्मिक केंद्र के रूप में विकसित किया गया है। यह पुनर्विकास प्रबंधन को बेहतर बनाता है और इस ऐतिहासिक स्थल के आध्यात्मिक वातावरण को समृद्ध करता है। प्रदेश के अनेक धार्मिक स्थलों का उनकी परम्पराओं के अनुरूप विकास किया जा रहा हहै। सलकनपुर में देवी लोक को शक्ति मंदिर स्थल के रूप में विकसित किया गया है, ताकि सुगमता से देवी दर्शन के साथ ही तीर्थयात्रियों के लिए बेहतर पहुँच और सुविधाएँ भी उपलब्ध कराई जाएँ। छिंदवाड़ा में श्रीहनुमान लोक भगवान हनुमान का उत्सव मनाएगा, जिसमें भक्तों और पर्यटकों के लिए एक आकर्षक वातावरण बनाया जाएगा। ओरछा में रामराजा लोक भगवान राम का सम्मान करेगा और अध्यात्म और इतिहास दोनों में रुचि रखने वाले आगंतुकों को आकर्षित करेगा। सागर में संत रविदास लोक के पुनरुद्धार का उद्देश्य संत रविदास की विरासत का सम्मान करना है, ताकि उनके अनुयायियों और उनकी शिक्षाओं में रुचि रखने वाले पर्यटकों को आकर्षित किया जा सके। जबलपुर में रानी दुर्गावती स्मारक और रानी अवंतीबाई स्मारक जैसे ऐतिहासिक स्थलों को भी उनके सांस्कृतिक महत्व को उजागर करते हुए बढ़ाया जा रहा है, साथ ही इतिहास और अध्यात्म दोनों में रुचि रखने वाले आगंतुकों का भी ध्यान रखा जा रहा है। इसके अलावा, अमरकंटक में माँ नर्मदा महालोक में आगंतुकों की सुविधाओं को बढ़ाने और इसकी प्राकृतिक सुंदरता को बढ़ावा देने के लिए सुधार किए जा रहे हैं। सरकार खरगोन में देवी अहिल्याबाई लोक, बड़वानी जिले में नागलवाड़ी लोक जैसे नए आध्यात्मिक स्थलों को विकसित करने पर भी ध्यान केंद्रित कर रही है, जिसमें शांत वातावरण बनाने पर जोर दिया जा रहा है। ग्वालियर में जाम सावंली हनुमान लोक में भगवान हनुमान की शक्ति और भक्ति का पर्व मनाया जाएगा, वहीं जानापाव जिसे भगवान परशुराम की जन्म स्थली के रूप में जाना जाता है, वहां परशुराम लोक विकसित किया जाएगा, जिसमें भगवान परशुराम को समर्पित एक नया मंदिर बनाया जाएगा, जहां आगंतुकों के लिए विभिन्न सुविधाएँ भी होंगी। इस परियोजना में नर्मदा जल को लाना और आसान पहुँच के लिए रोपवे का निर्माण करना भी शामिल है। दतिया में मां पीतांबरा लोक, देवी पीतांबरा को समर्पित एक और महत्वपूर्ण स्थल है। रतनगढ़ में माता मंदिर लोक देवी दुर्गा को समर्पित एक प्रतिष्ठित मंदिर के साथ एक प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थल भी बन जाएगा। अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन की संभावनाओं को पहचानते हुए, मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड विदेशों से पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए वैश्विक बाजारों के साथ सक्रिय रूप से जुड़ रहा है। स्थानीय जनजातियों के लिए सब्सिडी के साथ ग्रामीण होम-स्टे को बढ़ावा देने जैसी पहल प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय पर्यटकों के लिए सुरक्षा बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें अच्छे आवास का अनुभव भी प्रदान करती है। मध्यप्रदेश द्वारा पर्यटन के क्षेत्र में किए गये ये नवाचार जैसे-जैसे समय के साथ आगे बढ़ते हैं, वे न केवल पर्यटन में वृद्धि के माध्यम से आर्थिक विकास का वादा करते हैं, बल्कि भारत की विविध धार्मिक परंपराओं के बीच शांति की तलाश करने वाले आगंतुकों के लिए एक समृद्ध आध्यात्मिक अनुभव भी प्रदान करते हैं। इसमें सरकार की प्रतिबद्धता इस समझ को रेखांकित करती है कि धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने से मध्यप्रदेश में सांस्कृतिक संरक्षण और सामुदायिक विकास दोनों में महत्वपूर्ण योगदान हो सकता है। मध्यप्रदेश सरकार “वृंदावन ग्राम योजना” भी प्रारंभ करने जा रही है, जिसके अंतर्गत चयनित ग्राम पंचायतों को ग्रामीण विकास में बढ़ावा देने वाले आदर्श गांवों में बदला जायेगा है। प्रत्येक चयनित गांव में स्थानीय डेयरी उत्पादन को बढ़ावा देते हुए गायों की सुरक्षा के लिए गौशालाएँ बनाई जाएँगी। शहरी मध्यप्रदेश के आध्यात्मिक परिदृश्य को और समृद्ध बनाने के लिए, सभी शहरी निकायों में गीता भवन केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। ये केंद्र भगवदगीता और अन्य शास्त्रों की शिक्षाओं को फैलाने पर ध्यान केंद्रित करेंगे, साथ ही आध्यात्मिक शिक्षाओं से संबंधित साहित्य तक पहुँच प्रदान करेंगे। लगभग 100 पर्यटन परियोजनाओं में सरकार का लगभग 2,200 करोड़ का निवेश होगा, जो मध्यप्रदेश की धार्मिक पर्यटन को बढ़ाने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

भोपाल के थानों में जल्द बनेगी साइबर हेल्प डेस्क, फरियादी की सहायता के लिए तैनात होंगे दक्ष पुलिसकर्मी

Cyber ​​help desk will soon be set up in Bhopal police stations, skilled policemen will be deployed to assist the complainant. भोपाल। राजधानी की पुलिस साइबर ठगी की रोकथाम, इसका शिकार हुए लोगों की मदद के लिए एक और नवाचार करने जा रही है। अब राजधानी के हर थाने में साइबर हेल्प डेस्क बनाई जाएगी। एक दिसंबर से सभी थानों में साइबर हेल्प डेस्क का संचालन शुरू हो जाएगा। यहां पर पांच लाख रुपये तक की साइबर धोखाधड़ी की शिकायतें दर्ज कराई जा सकेंगी। यह होगा लाभ इससे न सिर्फ साइबर ठगी के पीड़ितों को शिकायत दर्ज कराने में सहूलियत होगी, बल्कि साइबर क्राइम सेल का भार भी कम होगा। साथ ही जल्द शिकायत होने से पीड़ितों की ठगी गई राशि भी साइबर पुलिस त्वरित कार्रवाई कर होल्ड करेगी, जिससे रिफंड होने की संभावना काफी बढ़ जाएगी।थानों की साइबर डेस्क में साइबर अपराध की इस चुनौती से निपटने के लिए शहर के हर थाने से दस पुलिस कर्मियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। पुलिस कंट्रोल रूम में गुरुवार से छह दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू कर दिया गया है। इसके तहत पुलिसकर्मियों को साइबर अपराधों से जुड़ी बारिकीयों की जानकारी दी जा रही है। साइबर विशेषज्ञ अधिकारी दे रहे प्रशिक्षण डीसीपी क्राइम अखिल पटेल ने बताया कि साइबर डेस्क संचालन के लिए तकनीकी ज्ञान की आवश्यकता होती है। फिलहाल छह दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रदेश के 20 साइबर विशेषज्ञ पुलिस अधिकारी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जिसमें पुलिसकर्मियों को राष्ट्रीय पोर्टल एनसीसीआरपी, जेएमआईएस एवं सीईआइआर पर डाटा अपलोड करने के बारे में प्रशिक्षित किया जा रहा है। साथ ही टेलीकॉम कंपनी एवं अन्य तकनीकों का प्रशिक्षण दे रहे हैं। इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम लगातार जारी रहेंगे। बड़े मामले राज्य साइबर पुलिस ही संभालेगीसाइबर अपराध की रोकथाम और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए यह पहल की जा रहा है कि अब 5 लाख रुपय तक ऑनलाइन ठगी की शिकायत थानों में दर्ज कराई जा सकेगी। हालांकि पांच लाख रुपए से अधिक की साइबर धोखाधड़ी की जांच स्टेट साइबर पुलिस ही करेगी। यानी बड़ी साइबर ठगी के शिकार लोगों को भदभदा स्थित राज्य साइबर पुलिस के कार्यालय में ही शिकायत दर्ज करानी होगी।

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