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मध्य प्रदेश की सड़कों पर फिर दिखेंगी जल्द सरकारी बसें फर्राटे भरते

Government buses will soon be seen again on the roads of Madhya Pradesh. मध्य प्रदेश की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था एकदम से चरमरा गई है। दो दशक पहले जहां सड़कों पर राज्य परिवहन निगम की बसें फर्राटे भरती दिखाई देती थी वहीं अब निजी बसों का बोलबाला है। तनाकुलित तथा स्लीपर कोच बसें तक प्रदेश की सड़कों पर दौड़ रही है। राज्य परिवहन की बसें प्रदेश के विभिन्न शहरों को जोड़ने के अलावा दूर दराज के ग्रामीण क्षेत्रों तक यात्रियों को लाती ले जाती थी। भोपाल। राज्य परिवहन निगम की इन बसों में जहां किराया वाजिब था तो वहीं विशिष्ट जनों व पत्रकारों के लिए पास की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाती थी। राज्य परिवहन निगम के संचालक मंडल में पहले नेताओं को रखा जाता था और अध्यक्ष का पद नौकरशाहों के जिम्में में होता था। एक बार का दिलचस्प वाकया है तब राज्य परिवहन निगम के अध्यक्ष एक नौकरशाह थे किसी पत्रकार ने अनौपचारिक चर्चा में उनसे पूछ लिया कि आपने बसों में यात्रा कब से नहीं की तो उन्होंने बड़ी मासूमियत से जवाब दिया था की आखिरी बस यात्रा 15 साल पहले की थी, इस चर्चा के बाद अध्यक्ष महोदय ने समस्त डिपो प्रबंधकों को यह निर्देश दिया कि वह महीने में दो बार बसों में यात्रा करें और यात्रियों से फीडबैक ले कर व्यवस्था सुचारू करें। इसके साथ ही अध्यक्ष ने स्वयं भी हर महीने बस में सफर करना शुरू कर दिया बाद में राज्य परिवहन निगम के अध्यक्ष पद पर नेताओं को पदस्थ किया जाने लगा और यही से पूरे सिस्टम में दीमक लगना शुरू हो गया। जिन डिपो प्रबंधकों को राज्य परिवहन निगम अध्यक्ष अथवा उपाध्यक्ष से अच्छी सेटिंग होती थी वहां मनमानियां करने लगे। दूसरे राज्यों में जाने वाली बसों में उन्ही ड्राइवर व कंडक्टरों को भेजा जाने लगा जो वापसी पर अच्छी खासी रकम उनको भेंट कर सके क्योंकि राज्य की सीमा पार करने के बाद टिकट चेकिंग का कोई डर नहीं, लोकल सवारियों लो और अपनी जेब गर्म करो वाला सिद्धांत चलता था। दूसरे राज्यों में स्थित राज्य परिवहन निगम के डिपो प्रबंधकों के रोस्टर पर अपने नाते रिश्तेदारों को रख लिया जो केवल वेतन लेते थे काम नहीं करते थे। राज्य परिवहन निगम के एक उपाध्यक्ष ने जब विधानसभा का चुनाव लड़ा तो डिपो प्रबंधकों ने उनके चुनावी खर्च में हिस्सेदारी की, किसी डिपो प्रबंधक ने पोस्टर का खर्च उठाया तो किसी ने विज्ञापनों के लिये भुगतान किया। इस तरह की व्यवस्था ने तथा भ्रष्टाचार ने राज्य परिवहन निगम को खोखला करने में कोई कसर नहीं छोड़ी और आखिरकार 2005 में राज्य परिवहन निगम को बंद करना पड़ा हालांकि इसकी अधिसूचना जारी नहीं की गई थी। राज्य परिवहन निगम बंद होने का फायदा निजी बस मालिकों ने उठाना शुरू किया यह वह समय था जब दिग्विजय सिंह की सरकार का दूसरा कार्यकाल चल रहा था। दिग्गी सरकार घाटा बताती रही और भाजपा सरकार ने राज्य परिवहन निगम पर ही ताला लगा दिया और कुछ कर्मचारियों को वीआरएस देकर घर बैठा दिया तो कुछ कर्मचारियों को दूसरे विभागों में स्थानांतरित कर दिया गया। खैर यह तो राज्य परिवहन निगम का हाल हुआ उधर निजी बस ऑपरेटर की मनमानी बढ़ने लगी। बस में क्षमता से अधिक यात्री भरना निर्धारित किराए से ज्यादा वसूलना, सवाल करने पर यात्रियों से बदसलूकी करना, यहां तक की मारपीट की नौबत आना इत्यादि। शहरी इलाकों में तो फिर भी ठीक-ठाक मगर ग्रामीण क्षेत्रों में हालत ज्यादा खराब हो गए और लोग परेशान हो गए। राज्य परिवहन निगम बंद हो जाने के बाद भी जिन राज्यों से अंतर राज्य समझौता था उनकी बसे एमपी में आती रही। निजी ऑपरेटर इनका भी विरोध करने लगे। बहरहाल अब मोहन यादव की सरकार ने लोगों की परेशानियों को देखते हुए सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को 19 साल बाद फिर से शुरू करने का संकेत दिया है तदनुसार लोक परिवहन सेवा का प्रारूप तैयार कर कैबिनेट में पेश किया जाएगा फिर उस पर अमल होना शुरू होगा वैसे अभी यह तय नहीं है कि लोक परिवहन का संचालन किस तरह होगा महाराष्ट्र का मॉडल अपनाया जाए या पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मोड पर अमल किया जाए यह फैसला भी हो जाएगा।

फार्मर आईडी बनाने जिलों में लगाए जाएंगे शिविर, दस रुपए देगी सरकार

Camps will be organized in the districts for making Farmer ID, the government will give ten rupees भोपाल। राज्यों में कैंप लगाकर किसान आईडी बनाने के लिए केंद्र सरकार राज्यों को इनसेंटिव देगी। इसमें प्रति कैंप 15,000 रुपये तक दिए जाएंगे। इसके अलावा हर आईडी बनाने पर केंद्र की ओर से राज्य सरकार को 10 रुपये दिए जाएंगे। दरअसल कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने राज्यों से किसान पहचान पत्र को तेजी से बनवाने के लिए कैंप लगाने को कहा है। किसान पहचान पत्र या किसान आईडी एक आधार से जुड़ी अनूठी डिजिटल पहचान है, जो राज्य के लैंड रिकॉर्ड से जुड़ी हुई है। इसके अलावा इसमें डेमोग्राफी, बोई गई फसल और जमीन के मालिकाना हक जैसी जानकारी भी होती है। किसान आईडी के माध्यम से बनाए गए डेटाबेस को किसान रजिस्ट्री के रूप में जाना जाएगा। यही वजह है कि केंद्र ने अब राज्यों से किसान आईडी देने के लिए कैंप-मोड अपनाने को कहा है।केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने 27 नवंबर को इस संबंध में मध्यप्रदेश सराकर को एक पत्र भेजा था। केंद्र के पत्र के बाद आयुक्त भू-अभिलेख ने प्रदेश के सभी कलेक्टरों को इस संबंध में मुख्यमंत्री जनकल्याण अभियान के तहत शिविर लगाने के निर्देश दिए हैं। गौरतलब है कि राजधानी सहित प्रदेश भर में करीब 87 लाख 90 हजार किसानों की आईडी जनरेट होनी हैं, जबकि अकेले भोपाल में करीब 65 हजार किसानों की फार्मर आईडी बननी है। आयुक्त भू-अभिलेख अनुभा श्रीवास्तव द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि फार्मर आईडी क्रियेशन के लिए राज्यों को इंसेंटिवाइज करने के लिए भारत सरकार द्वारा स्पेशल सेंट्रल असिस्टेंस स्कीम घोषित की गई है।फार्मर आईडी क्रियेशन कार्य यथाशीघ्र पूर्ण करने की दृष्टि से इसे राजस्व महाअभियान 3.0 में भी शामिल किया गया है। फार्मर आईडी जनरेट करने की कार्रवाई अभियान के रूप में पूर्ण करने के लिए कैम्प आयोजित कर शीघ्र कार्रवाई पूर्ण करने के निर्देश भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने दिए हैं। भारत सरकार द्वारा प्रति कैप राशि 15000 रुपए तीन किश्तों में प्रदान की जाएगी। इसकी प्रक्रिया भी केंद्र सरकार के निर्देश में विहित की गई है। इन कागजों की होगी जरूरत जरूरत इसके लिए आपको आधार कार्ड की कॉपी, जमीन की जानकारी के लिए नकल की कॉपी, फसल के नाम, किस्में, बोनी का समय, बैंक पासबुक की डिटेल देनी होगी। हमेशा ध्यान रखें कि आधार नंबर और मोबाइल नंबर देते समय उसे चेक कर लें। आधार नंबर 12 अंकों का और मोबाइल नंबर 10 अंकों का होना चाहिए। इस तरह से मुहैया कराई जाएगी राशि प्रदेश में फार्मर आईडी बनाने के लिए केंद्र सरकार राज्यों को इनसेंटिव देगी। इसमें प्रति कैंप 15,000 रुपये तक दिए जाएंगे। इसमें गांवों में क्लस्टर से पीएम किसान डाटाबेस अनुसार कम-से-कम 50 फीसदी किसानों को रजिस्टर करना होगा। पहली किश्त 5000 रुपए प्रथम 15 फीसदी किसान आईडी जनरेट करने पर, दूसरी किश्त 5000 रुपए आगामी 15 प्रतिशत आईडी जनरेट करने पर और तीसरी किश्त 5000 आगामी 20 फीसदी फार्मर आईडी जनरेट करने पर प्राप्त होगी। प्रति फार्मर आईडी जनरेशन पर राशि 10 रुपए राज्य को प्राप्त होगी। यह राशि राजस्व महाअभियान 3.0 में फार्मर आईडी व खसरा आधार लिकिंग के लिए नियत कर्मचारी को दी जाएगी। ऐसे बनेंगे किसान आईडी इसके लिए किसानों को खुद का रजिस्ट्रेशन कराना होगा। रजिस्ट्रेशन में गांव के पटवारी या सर्वेयर से किसान संपर्क कर सकते हैं। राजस्व का मैदानी अमला किसानों की किसान पहचान पत्र के लिए रजिस्ट्रेशन में मदद करेंगे। आप चाहें तो यह काम खुद भी कर सकते हैं। यह काम मोबाइल से कम्प्यूटर से भी किया जा सकता है। इसमें दी गई लिंक पर क्लिक करते ही आपके मोबाइल नंबर पर एक ओटीपी आएगा। ओटीपी दर्ज करें और कैप्चा कोड भरना होगा। इसके बाद आपको नया यूजर अकाउंट बनाना होगा। अकाउंट बनने के बाद आपका किसान आईडी के लिए रजिस्ट्रेशन हो जाएगा।

रातापानी टाइगर रिजर्व के संरक्षण के लिए निकाली बाइक रैली, CM ने की शुरुआत, रणदीप हुड्डा भी रहे शामिल

Bike rally taken out for the conservation of Ratapani Tiger Reserve, CM started it, Randeep Hooda also participated रातापानी जंगल के संरक्षण के लिए राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे जागरूकता अभियान के तहत एक विशेष बाइक रैली का आयोजन किया गया। “विरासत से विकास” अभियान के अंतर्गत यह रैली कोलार रोड स्थित गोल जोड़ चौराहे से शुरू हुई। रैली में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ अभिनेता रणदीप हुड्डा ने भी भाग लिया और अभियान की सराहना की। अभियान के दौरान अभिनेता रणदीप हुड्डा ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को उनके कार्यकाल के एक साल पूरे होने पर बधाई दी और कहा कि मैं कुरुक्षेत्र की धरती से आता हूं, जहां भगवान श्री कृष्ण ने अन्याय के खिलाफ संदेश दिया। आज मैं उस प्रदेश में हूं, जहां भगवान ने शिक्षा पाई और जहां जल, जंगल और गायों की सुरक्षा का संदेश दिया गया। रणदीप हुड्डा ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन की भी प्रशंसा करते हुए कहा कि श्री कृष्ण के संदेश को आगे बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री ने जो कार्य किए हैं, वह सराहनीय हैं। विशेषकर जंगलों और वन्य जीवों के संरक्षण के लिए उनकी प्रतिबद्धता प्रशंसा योग्य है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस अवसर पर वीर सावरकर की तारीफ करते हुए कहा कि वीर सावरकर को दो बार कालापानी की सजा हुई, लेकिन वे कभी नहीं झुके। उनका आदर्श आज भी हमें प्रेरणा देता है। रातापानी टाइगर रिजर्व से एक नई इबारत लिखी जाएगी, जहां टाइगर का संरक्षण किया जाएगा। उन्होंने आगे कहा, “जंगल का राजा टाइगर ही होता है, क्योंकि टाइगर अपने पराक्रम से शिकार करता है। टाइगर रिजर्व की स्थापना के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि यह न केवल प्रदेश के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व की बात है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि इस टाइगर रिजर्व के उद्घाटन के लिए बाइक रैली का आयोजन रोजगार और प्रदेश को गौरव देने का एक महत्वपूर्ण कदम है। साथ ही उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भोपाल और आसपास के क्षेत्र में भूगर्भीय परिवर्तन के कारण प्राचीन चित्रकला और अन्य ऐतिहासिक धरोहरें भी पाई जाती हैं। सीएम ने कहा कि भोपाल एक ऐसी राजधानी जिसके आंगन ने अपना टाइगर रिजर्व बना है।

मध्य प्रदेश भाजपा ने जारी की अध्यक्ष सहित अन्य पदाधिकारी की सूची ,देखे लिस्ट

Madhya Pradesh BJP released the list of president and other officials, see the list भोपाल ! भाजपा ने 19 मंडल अध्यक्षों की घोषणा की, जिला प्रतिनिधियों के नामों पर भी मुहर, लग गई है देखें सूची कई दिनों की मंत्रणा के बाद मध्यप्रदेश प्रदेश के देवास जिले में भाजपा मंडल अध्यक्षों का चुनाव संपन्न हो गया है। इसकी प्रक्रिया अलग-अलग मापदंडों के आधार पर पूरी की गई। जिसके बाद देवास जिले के 5 विधानसभा क्षेत्रों के 19 मंडलों की सूची जारी कर दी गई है। भाजपा के संगठनात्मक चुनाव में मंडल अध्यक्षों की नियुक्ति के बाद चुनाव प्रक्रिया रोचक होगी। जल्द ही एमपी के अन्य जिलों में भी मंडल अध्यक्ष सहित जिला अध्यछ देखने को मिलेंगे । देखे लिस्ट इन्हें मिली नई जिम्मेदारी

ठंड के कारण स्कूलों का समय बदला: सुबह 9 बजे से लगेंगे सभी सरकारी-प्राइवेट स्कूल

School timings changed due to cold: All government and private schools will start from 9 am Bhopal News: भोपाल में कड़ाके की ठंड शुरू हो गई है। इसे देखते हुए जिला प्रशासन ने स्कूलों के टाइमिंग में परिवर्तन करने का निर्णय लिया है। 12 दिसंबर से सभी स्कूल सुबह 9 बजे से शुरू होंगे। भोपाल में कड़ाके की ठंड शुरू हो गई है। इसे देखते हुए जिला प्रशासन ने स्कूलों के टाइमिंग में परिवर्तन करने का निर्णय लिया है। 12 दिसंबर से सभी स्कूल सुबह 9 बजे से शुरू होंगे। डीईओ एनके अहिरवार ने बुधवार को सरकारी-प्राइवेट स्कूलों के लिए यह निर्देश जारी कर दिए। यह निर्देश सीबीएसई, आईसीएसई और एमपी बोर्ड से जुड़े स्कूलों के लिए रहेगा। कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह के आदेश के बाद गुरुवार से स्कूल नए समय पर लगेंगे। पहाड़ों की बर्फबारी का एमपी में असरउत्तर भारत में पहाड़ों की बर्फबारी के कारण राज्य में कड़ाके की ठंड बढ़ गई है। भोपाल में मंगलवार को न्यूनतम तापमान 7.8 डिग्री सेल्यियस दर्ज किया गया। यह इस सीजन में रात्रि का सबसे कम तापमान है। पचमढ़ी ने सर्द रात का रिकॉर्ड बनायाराजधानी में 48 घंटे में रात के तापमान में 4.1 डिग्री की गिरावट हुई है। हिल स्टेशन पचमढ़ी ने सबसे सर्द रात का रिकॉर्ड बनाया। यहां पारा 3.5 डिग्री दर्ज किया गया। मौसम वैज्ञानिक एचएस पांडे के अनुसार, पचमढ़ी देश का दसवां सबसे ठंडा शहर रहा। तीन साल बाद भोपाल में कड़ाके की ठंड पड़ी है। इससे पहले 2021 में दिसंबर में पारा 3.4 डिग्री दर्ज किया गया था। इसके बाद दो साल दिसंबर में तापमान 8 डिग्री से नीचे नहीं रहा। अगले तीन से चार दिन कड़ाके की ठंड की संभावना है। रात का तापमान 10 डिग्री से नीचे रह सकता है।

कमलनाथ ने सरकार पर साधा निशानाः बोले- MP में निवेश तो दूर की बात, केंद्रीय योजनाओं की राशि भी आधी ही मिली

Kamal Nath targeted the government: Leave alone investment in MP, only half the amount of central schemes was received. भोपाल। कांग्रेस नेता एवं पूर्व सीएम कमलनाथ ने मध्यप्रदेश में निवेश को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि- मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव आए दिन प्रदेश में बड़े पैमाने पर निवेश के वादों की चर्चा करते रहते हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि निजी क्षेत्र से आने वाला यह निवेश तो दूर की बात है, केंद्र सरकार से प्रदेश में चल रही विभिन्न योजनाओं के लिए आने वाले पैसे को ही अब तक राज्य सरकार प्राप्त नहीं कर सकी है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक़ मध्य प्रदेश को चालू वित्त वर्ष में केंद्रीय योजनाओं के लिए केंद्र सरकार की ओर से 37,652 करोड़ रुपया मिलने थे लेकिन अब तक सिर्फ़ 16,194 करोड़ रुपये ही मिले हैं। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा- जिन महत्वपूर्ण केंद्रीय योजनाओं के लिए पर्याप्त राशि नहीं मिली है उनमें -आयुष्मान योजना, आदिवासी समुदाय के छात्रों की छात्रवृत्ति, राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना, जल जीवन मिशन जैसी महत्वपूर्ण योजनाएं शामिल हैं। इसके अलावा केंद्रीय सड़क निधि, PM श्री स्कूल और अदालत के भवन निर्माण की राशि भी अटकी हुई है।मुख्यमंत्री यह सारी रकम मध्य प्रदेश की जनता का अधिकार और केंद्र पैसा देकर कोई एहसान नहीं कर रहा है। प्रदेश की जनता अपनी गाढ़ी कमाई से केंद्र सरकार को जो टैक्स देती है, उसी का एक छोटा सा हिस्सा केंद्रीय मदद के रूप में प्रदेश को वापस मिलता है। इसलिए आप दलगत राजनीति से ऊपर उठकर केंद्र सरकार पर प्रदेश को उसका अधिकार देने के लिए दबाव बनाएं।

स्कूल शिक्षा विभाग की नई कवायद 2025-26 सत्र : स्टूडेंट को पढ़ाया जाएगा यातायात के नियमों का पाठ, शिक्षा मंत्री

New exercise of School Education Department 2025-26 session: Students will be taught traffic rules, Education Minister भोपाल। मध्य प्रदेश में बढ़ रहे हैं सड़क दुर्घटना के मामलों के बीच स्कूल शिक्षा विभाग ने एक नई कवायद शुरू की है। जिसमें अब स्कूली छात्रों को यातायात के नियमों का पाठ पढ़ाया जाएगा। इस कवायद को लेकर स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा कि बड़े होने पर कोई चीज़ सीखने से अच्छा है, बचपन से ही छोटे-छोटे पाठ के माध्यम से बच्चों को सीख दी जाए। सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सरकार अब स्कूली विद्यार्थियों को यातायात का पाठ पढ़ाएगी। इसकी शुरुआत आगामी शिक्षा सत्र 2025-26 से होगी। स्कूल शिक्षा विभाग की इस कवायद से बच्चों को यातायात के नियमों के बारे में सही से जानकारी मिलेगी। स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा कि, बड़े होने पर कोई चीज सीखने से अच्छा है बचपन से ही छोटे-छोटे पाठ के माध्यम से बच्चों को सीख दी जाए। बाल मन के समय से ही अगर कोई बात सिखाई जाए तो बेहतर रूप से वह समझ आती है। उन्होंने कब कि, यातायात के नियमों का पालन कैसे होता है और कैसे नियमों का उल्लंघन होता है,इन सभी बातों को बच्चों को सिखाना एक अच्छी बात है। नई शिक्षा नीति भी यही कहती है कि संस्कृति बाल मन में ही बच्चों को कुछ सिखाया जाए, तो वह बिना किसी दबाव के इन सब चीजों को सीख जाते हैं।

गोपाल और भूपेन्द्र जैसे सीनियर लीडर भुलाने को माना गलती, सुधार के साथ बदलाव का मास्टर प्लान हुआ तैयार

Forgetting senior leaders like Gopal and Bhupendra was considered a mistake, master plan for change along with reform was ready. मध्यप्रदेश विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी को मिली प्रचंड जीत के प्रमुख चेहरों को किनारे करके पीछे की कतार को आगे ले जाकर के दुष्परिणाम मंत्रीमंडल विस्तार के बाद दिखाई देना शुरू हो गए । इन बदलावों को लेकर भारतीय जनता पार्टी की अनुभव और ग़ैरनुभव की चूक इस एक वर्ष के दौरान कई बार निकलकर सामने आ चुकी है। सागर ! राजनीति में खेमेबाजी न हो यह संभव नही । बात मध्यप्रदेश की करें तो शिवराज सिंह के मुखिया रहते इसका असर कभी खुलकर सामने नही आने पाया। अब जो हालात बने हैं वो स्प्ष्ट तौर पर प्रदेश में बीजेपी को कमजोर करने का काम कर रहे हैं। शिवराज सरकार में खेमेबाजी देखने को मिली पर उसका प्रभाव इतना नही हो पाया जिससे पार्टी को उसका नुकसान उठाना पड़ा हो। 2023 मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में बीजेपी को मिली प्रचंड जीत से सबके सामने यह सिद्ध हो चुका है। बुंदेलखंड में एक कहावत बहुत प्रसिद्ध है। इसमें लड़की पक्ष्य की शर्त में दूल्हे के साथ बुजुर्गों को आने की मनाही रहती है। जिसके उद्देश्य मे शादी रश्म के दौरान कठिन प्रश्नों को पूँछकर दूल्हा पक्ष्य को निरुत्तर करना होता है। इसके तोड़ के लिए वो होशियारी करके बारात में एक बुजुर्ग को साथ ले जाते हैं। जब वधु पक्ष्य सवाल करना शुरू करता है। बाराती गुप-चुप उस बुजुर्ग से सवालों के जबाब पूंछने लगते हैं। सही जबाब मिलने पर वधु पक्ष्य बगैर तजुर्बेकार के इनका जबाब देना कठिन है समझ जाता है। खोज करने पर बारात में बुजुर्ग के साथ आने की सच्चाई सामने आ जाती है। मोहन सरकार चलाने में दिख रही कमियों मे अनुभव की कमी बताने के लिए यह कहावत सटीक बैठ रही है। कहते हैं सही ज्ञान वहीं है जो जमीन से सीखकर मिला हो। किताबी ज्ञान का इससे कोई मुकाबला नही हो सकता। मध्यप्रदेश में नये को आगे लाकर सरकार चलाने के फार्मूले में हो रही निरंतर ख़ामियों में अनुभव और कुशल राजनेता को दरकिनार कर लिए निर्णय को उसका परिणाम माना जा रहा है। बात सागर जिले की राजनीति की करें तो आपको पूर्व मंत्री वर्तमान रहली विधायक पंडित गोपाल भार्गव और पूर्व गृहमंत्री वर्तमान खुरई विधायक भूपेंद्र सिंह की कमी दिख रही है। पार्टी के अंदर पनपी खेमेबाजी और प्रशासनिक लचरता से स्प्ष्ट है कि मोहन सरकार शिव के राज के करीब तक से होकर भी नही चल पा रही है। पार्टी के सीनियर विधायक की यह नाराजगी एक प्रकार से बीजेपी की भलाई होना माना जा सकता है। इन्होंने भारतीय जनता पार्टी में 1985 से सक्रिय राजनीति, उस दौरान के संघर्ष और अवसरवादी राजनीति से दूर रहकर आखिरी समय तक पार्टी से जुड़े रहने का कई बार संकल्प दोहराया है। आज जो हालात हैं उस पर चिंता जताना जिसमे मध्यप्रदेश में मंत्रीमंडल विस्तार को लेकर एक- एक नाम दिल्ली से फ़ाइनल हुआ मानकर चलें तो बेशक यह निर्णय गलत साबित हुआ है। आलाकमान को लीडरशिप में उन विशेष के बारे में अच्छी जानकारी होनी चाहिए जिनमे सबको साथ लेकर चलने की क्षमता दिखाई देती है। जहाँ वो दूसरों के अधिकारों और स्वतंत्रताओं की रक्षा करना खुद का कर्तव्य मानकर वैसे निर्णय लेते हैं। राजनीति सिद्धान्त के अन्तर्गत इसमें भिन्न- भिन्न पक्षों का अध्ययन किया जाता हैं। शिवराज और उनके मंत्रिमंडल में विभेदों को दूर करने के तरीके होते थे। वो क्रांति की भी वकालत करना जानते थे। राजनीतिक सिद्धांत में, स्वतंत्रता, समानता, न्याय, लोकतंत्र, और धर्मनिरपेक्षता जैसी अवधारणाओं का अर्थ स्पष्ट किया जाता है। साथ ही राजनीतिक सिद्धांत, विचारों और सार्वजनिक जीवन से जुड़ी अवधारणाओं का विश्लेषण किया जाता है। खुद को ताकतवर बनाने के लिए गुटबाजी एक विकल्प हो सकता है। मोहन मंत्रीमंडल में अनुभव की कमी को साफ तौर पर महसूस किया जा सकता है। मुखिया के ताकतवर बनने में जो कमियां पनपी हैं वो विपक्षियों को मजबूत बनाने में सहायक सिद्ध हो रही हैं। भारतीय जनता पार्टी आलाकमान मध्यप्रदेश और राजस्थान में किए इन प्रयोग के दुष्प्रभाव का बारीकी से अध्ययन कर रही है। जो सीनियर और अनुभवी को अभी कमजोर समझकर चल रहे हैं आने वाले कुछ समय बाद उनके सामने आलाकमान द्वारा चौकाने वाला निर्णय देखने को मिल सकता है।

फिर चली प्रदेश सरकार की तबादला एक्सप्रेस, 15 आईएएस के तबादले

State government’s transfer express runs again, 15 IAS transferred भोपाल ! राज्य सरकार ने रविवार रात को कई अधिकारियों को इधर से उधर कर दिया है. राज्य सरकार ने एसटीएफ के स्पेशल डीजे पंकज कुमार श्रीवास्तव को नक्सल विरोधी अभियान की कमान भी सौंप दी है. वे एसटीएफ के साथ नक्सल विरोधी अभियान की भी कमान संभालेंगे. इसके अलावा 2021 बैच के आईपीएस अधिकारी आदर्श कांत शुक्ला को नक्सल विरोधी अभियान में प्रभारी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बनाया गया है. उधर राज्य सरकार ने लोक निर्माण विभाग के अपर मुख्य सचिव केसी गुप्ता को लोक निर्माण विभाग से हटा दिया है. उनको राज भवन में अपर मुख्य सचिव बनाया गया है. इसके साथ ही राज्य सरकार ने 15 आईएएस अधिकारियों के तबादले कर दिए हैं. इन अधिकारियों को बदला गया

किसान खाद के लिए परेशान, लंदन में डायनासोर के अंडे देख रहे मोहन यादव, उमंग सिंगार

Farmers worried about fertilizer, Mohan Yadav, Umang Singar looking at dinosaur eggs in London रीवा ! मध्य प्रदेश के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार 2 दिवसीय प्रवास पर रीवा आए. उमंग सिंघार ने राज निवास भवन में अयोजित पत्रकार वार्ता में केंद्र और प्रदेश सरकार पर जमकर निशाना साधा. नेता प्रतिपक्ष ने सिंगरौली जिले में बढ़ते प्रदूषण को लेकर चिंता व्यक्त की. इसके साथ ही उन्होंने खाद की समस्या पर भी प्रदेश सरकार को घेरा. प्रदेश के प्रशानिक अधिकारियों पर सवाल खड़े करते हुऐ उमंग सिंघार ने बड़ा बयान दे दिया. उन्होंने कहा कि यहां पर अधिकारी जिस प्रकार से भाजपा नेताओं की गुलामी कर रहे उन्हें तेल ले लेना चाहिए और भाजपा नेताओं के लगाना चाहिए. देश के नक्शे में सिंगरौली सबसे ज्यादा प्रदूषण वाला जिला पत्रकारवार्ता को संबोधित करते हुए मध्य प्रदेश के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने केंद्र और प्रदेश सरकार पर जमकर हमला बोला. नेता प्रतिपक्ष ने कहा, “सिंगरौली जिला देश के नक्शे में सबसे ज्यादा प्रदूषण वाला जिला बनता जा रहा है. सिंगरौली मध्य प्रदेश की ऊर्जाधानी कहलाता है. प्रदूषण के मामले में दिल्ली के बाद सिंगरौली दूसरे नंबर पर है. भविष्य में यह जगह वहां पर निवासरत लोगों के लिए बड़ी मुश्किल वाली जगह होगी. लगता है वहां पर सिर्फ खदाने ही रह जाएगी और लोगों को वहां से विस्थापित होना पड़ेगा. निजी कंपनियों की कोल माइंस ने वहां पर अपनी अपनी नीतियां बनाई है. उमंग सिंघार ने प्रदेश और केंद्र सरकार को घेरा नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा, “वहां पर पुलिस और एसएएफ की बटालियन लगाकर लोगों के घर तोड़ दिए गए. ऐसा लगता है की मोहन यादव की सरकार दबाव में काम कर रही है. मुझे लगता है कि देश के अंदर मोदी के साथ अडानी सेफ है और प्रदेश के अंदर मोहन यादव के साथ अडानी सेफ है. झारखंड से कोल डस्ट सिंगरौली आती है. इसके बाद उसे कोयले में मिलाकर अन्य जगहों पर भेजा जाता है. इस तरह से कई प्रकार के घोटाले हैं, जो देखने को मिले हैं. इन सभी मुद्दों को विधानसभा में उठाने के साथ ही अगर पार्टी को जरुरत पड़ी, तो आने वाले समय में आंदोलन भी करेंगे.” किसान खाद को लेकर परेशान नेता प्रतिपक्ष ने कहा, “रीवा जिले में 50% भी बोवनी नहीं हो पाई. किसानों को खाद नहीं मिली. इनके तो कृषि मंत्री को पता ही नहीं है कि खाद कौन देता है. सरकार पिछले 4 सालों से बहाना बना रही है कि रसिया यूक्रेन में युद्ध चल रहा है, लेकिन मैं सरकार से जानना चाहता हूं. भारत सरकार और मध्य प्रदेश सरकार ने कई बार चाइना, अमेरिका और मोरक्को सहित कई ऐसे देश है, जहां से खाद को इंपोर्ट किया, तो अब क्या दिक्कत है. क्या सरकार के पास पैसे नहीं है, किसानों के लिए, मुख्यमंत्री लंदन में घूम रहे थे, उसके पहले शिवराज गए थे, तब वह अमेरिका की सड़कों को चिकने गालों की तरह बता रहे थे. मोहन यादव लंदन में डायनासोर के अंडे देख रहे थे.” उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल पर साधा निशाना उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला पर निशाना साधते हुए नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि उप मुख्यमंत्री अस्पतालों के बातें करते हैं, लेकिन अस्पतालों की स्थिति ऐसी है की मरीजों को दवाईयां नहीं मिल पा रही है. प्रदेश के उपमुख्यमंत्री हैं, लेकिन अपने ही जिले में मरीजों को दवाई उपलब्ध नहीं कर पा रही है. उमंग सिंघार ने कहा कि अगर उपमुख्यमंत्री से प्रदेश नहीं संभल रहा तो वह अपना जिला ही संभाल ले. स्वास्थ्य विभाग में जो घोटाले चल रहे हैं, जांचों के नाम पर पूरे प्रदेश के अंदर 200 – 300 करोड़ रुपए ब्लड टेस्ट के नाम से जिन कंपनियों को कम दिया जा रहा है, क्या वह कंपनियां सही जांच कर रही है या फिर फर्जी तरीके से सेंपल के नाम पर उनसे पैसे निकाले जा रहे हैं. अधिकारी हो गए भाजपा नेताओं के गुलाम कई आधिकारी तो ऐसे हो गए है, जो भारतीय जनता पार्टी के नेताओं की गुलाम हो गए है. ऐसे अधिकारी जो भारतीय जनता पार्टी के नाम से माला जप रहे हैं. इनके लिए कांग्रेस को एक अभियान शुरू करना पड़ेगा कि इन्हें एक तेल की सीसी दें. यह भारतीय जनता पार्टी के नेताओं को तेल लगाएं. क्योंकि ये तो जानता के काम नहीं कर रहे. 16 दिसंबर को हम जन हितैसी मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने का प्रयास करेंगे. बीजेपी जिलाध्यक्ष ने नेता प्रतिपक्ष पर किया पलटवार नेता प्रतिपक्ष के तीखे प्रहार पर पलटवार करते हुए भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष अजय सिंह ने कहा, “कांग्रेस के नेताओं को किसी भी मुद्दे में सरकार के बारे में बोलने का कोई अधिकार नहीं है. 2003 के पहले की स्थिति मध्य प्रदेश की जनता अब तक नहीं भूली है. मैंने भी देखा है, सब ने देखा है कि कैसे खाद के लिए किसानों को तीन से चार दिन तक लाईन में लगना पड़ता था और डंडे भी खाने पड़ते थे. अभी तो खबर बनती है, लाइट जाने की तब खबर बनती थी. सिगरौली के सड़क बन रही है. दुनिया की सर्वाधिक कृषि प्रगति दर अगर कहीं है, तो वह मध्य प्रदेश में है. कांग्रेस मुद्दा विहीन है कांग्रेस को जनता समझ भी चुकी है और जवाब भी दे चुकी है. बहुत जल्द हमारा प्रदेश और देश कांग्रेस मुक्त राष्ट्र होगा.

चुनावी प्रक्रिया पर शिवराज सिंह ने उठाए सवाल, बोले- चुनावों से देश हो रहा बर्बाद

Shivraj Singh raised questions on the electoral process, said – the country is being ruined by elections. विदिशा ! केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान शनिवार को विदिशा पहुंचे. जहां उन्होंने विदिशा को कृषि और बागवानी का मॉडल बनाने की बात कही. वहीं देश में बार-बार होने वाले चुनावों को लेकर शिवराज सिंह ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि देश में लगातार चुनाव होने के कारण समय, ऊर्जा और धन की बर्बादी होती है. देश में एक चुनाव खत्म होता है, तो दूसरा शुरू हो जाता है. प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्री सभी चुनाव प्रचार में व्यस्त हो जाते हैं, जिससे विकास कार्य प्रभावित होता है. विदिशा की जनता ने दिया समर्थन शिवराज सिंह ने “एक देश एक चुनाव” अभियान की शुरुआत करते हुए विदिशा की जनता से इस विचार का समर्थन करने की अपील. कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने उनके साथ हाथ उठाकर इस अभियान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई. चौहान ने संविधान में संशोधन की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि एक बार में चुनाव हो ताकि बाकी समय देश के विकास पर ध्यान दिया जा सके. प्राकृतिक खेती अपनाने पर जोर शिवराज सिंह चौहान ने अपने संबोधन में प्राकृतिक खेती को अपनाने की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला. उन्होंने कहा, “केमिकल फर्टिलाइजर और पेस्टिसाइड्स के अत्यधिक उपयोग ने जमीन की उपजाऊ क्षमता को खत्म कर दिया है. इससे न केवल इंसान बल्कि पशु-पक्षी भी प्रभावित हो रहे हैं. कई उपयोगी कीट-पतंगे जैसे केंचुए, जो धरती के डॉक्टर कहे जाते थे आज विलुप्त होने की कगार पर हैं.” शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि वे विदिशा जिले से प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए एक विशेष अभियान शुरू करेंगे. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्राकृतिक खेती नहीं अपनाई गई, तो आने वाली पीढ़ियां धरती पर रहने लायक परिस्थितियां नहीं पाएंगी.”

प्रदेश में इंजीनियरिंग कॉलेजों की 45 फीसदी सीटें खाली, छात्रों को फार्मेसी में दिलचस्पी

45 percent seats of engineering colleges in the state are vacant, students are interested in pharmacy भोपाल ! मध्य प्रदेश के तकनीकी कॉलेजों में एडमिशन कराने की तमाम कोशिशों के बाद भी प्रदेश में 45 फीसदी से ज्यादा सीटें खाली रह गई. इन सीटों को भरने के लिए तकनीकी शिक्षा विभाग ने दो राउंड की काउंसलिंग कराई. इसके बाद भी सीटें नहीं भरी, तो दो बार कॉलेज लेवल काउंसलिंग (सीएलसी) भी कराई गई. इसके बाद भी 1 लाख 10 लाख सीटों पर स्टूडेंट्स ही नहीं मिले. प्रदेश में कुल 2 लाख 60 हजार सीटों पर काउंसलिंग कराई गई थी. जिसमें से सिर्फ डेढ़ लाख सीटों पर ही एडमिशन हुए हैं. फार्मेसी की स्टूडेंट्स में बढ़ी डिमांड तकनीकी कॉलेजों में एडमिशन के लिए अक्टूबर माह में काउंसलिंग खत्म होने के बाद अब फॉर्मेसी कोर्सेस में एडमिशन के लिए काउंसलिंग खत्म हो गई है. सुप्रीम कोर्ट ने इसके लिए समय सीमा निर्धारित की थी. विभाग ने इसके लिए दो राउंड की काउंसलिंग और दो सीएलसी भी कराई. फार्मेसी कोर्स की 30 हजार सीटों में से 24 हजार सीटों पर एडमिशन हो गए. हालांकि, 6 हजार सीटें खाली रह गई हैं. बीफार्मा कोर्स में सबसे ज्यादा एडमिशन हुए हैं. बीफार्मा की कुल 16340 सीटें थी, जिसमें से 15386 सीटें फुल हो गई. वहीं डी-फार्मा कोर्स की पांच हजार से ज्यादा सीटें खाली रह गई हैं. 8 बी-फार्मा और डी-फार्मा कॉलेजों को एक भी नया स्टूडेंट नहीं मिला. प्रदेश में एडमिशन प्रक्रिया पूरी हो गई है. अब खाली रह गई सीटों पर प्रवेश नहीं हो सकेंगे. इंजीनियरिंग की 30 हजार सीटें खाली उधर बीफार्म कोर्सेस के साथ ही प्रदेश में काउंसलिंग प्रक्रिया खत्म हो गई है. प्रदेश में एमबीए और इंजीनियरिंग कॉलेजों की करीबन 30-30 हजार सीटें खाली रह गईं. प्रदेश में 62 हजार एमबीए सीटों में से 36 हजार 858 पर ही एडमिशन हो सके. वहीं इंजीनियरिंग की 73 हजार 500 सीटों में से 42 हजार 858 सीटों पर एडमिशन हुए हैं. बीफार्मा की 16340 सीटों में से 15386 एडमिशन हुए हैं. एमसीए सीटों पर 6 हजार सीटों में से 3668 सीटें भर पाई. इसी तरह बीई डिप्लोमा की 33 हजार 225 सीटों में से 20 हजार सीटें खाली रह गई. उधर तकनीकी विभाग के असिस्टेंट डायरेक्टर लक्ष्मीनारायण रेड्डी कहते हैं कि हर साल छात्रों का सब्जेक्ट्स को लेकर रूझान बदलता रहता है. कई बार छात्र इंजीनियरिंग की किसी खास ब्रांच में एडमिशन ज्यादा लेते हैं, तो किसी साल सिविल ब्रांच में इस बार फार्मेसी को लेकर छात्रों का रूझान ज्यादा देखने को मिला है.

भविष्य की अर्थव्यवस्था का केन्द्र बिन्दु होगी सोलर एनर्जी’, नीमच निविदा में बोले CM मोहन यादव

‘Solar energy will be the center point of future economy’, CM Mohan Yadav said in Neemuch tender भोपाल ! मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव बीते दिन नीमच सोलर प्रोजेक्ट की यूनिट 3 के लिए हुई निविदा में शामिल हुए। यहां उन्होंने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीएम मोहन यादव ने सोलर एनर्जी की मांग और जरुरत को भविष्य की अर्थव्यवस्था का केन्द्र बिन्दु बताया। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश तेजी से लगातार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा सोलर और ग्रीन एनर्जी के उपयोग को बढ़ावा देने के संकल्प की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने आगे कहा कि आज के जरिए से औद्योगिक विकास को देखें तो, उससे ऐसा प्रतीत होता है कि सोलर एनर्जी ही भविष्य में अर्थव्यवस्था का केन्द्र बिन्दु होगा। 14 गुना बढ़ी रिन्यूएबल एनर्जी की क्षमता सीएम मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश ने रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता के लक्ष्य को हासिल करने के लिए लगातार बेहतर काम कर रहे है। पिछवले 12 सालों में रिन्यूएबल एनर्जी की क्षमता में 14 गुना से ज्यादा की वृद्धि की है। उन्होंने कहा कि नीमच सौर प्रोजेक्ट से ग्रीन बिजली के साथ-साथ निर्माण और संचालन अवधि के दौरान राज्य के युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पाने का सुनहरा मौका मिलेगा। उन्होंने आगे कहा कि प्रोजेक्ट के विकास राज्य में करीब 800 करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित होगा। साथ ही समतुल्य तापीय विद्युत् की तुलना में हर साल 3.34 लाख टन CO₂ का उत्सर्जन कम होगा। वर्तमान में राज्य की कुल रिन्यूएबल एनर्जी की क्षमता बढ़कर 7000 मेगावाट हो गई है। इनोवेशन में सबसे आगे मध्य प्रदेश सीएम मोहन यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में इनोवेशन करने में भी सबसे आगे है। इसका बेस्ट उदाहरण रीवा के सोलर प्रोजेक्ट और ओंकारेश्वर फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्टर है। रीवा सोलर प्रोजेक्ट से देश में पहली बार कोयले से बनने वाली बिजली से कम कीमत पर सोलर एनर्जी मिली है। इस प्रोजेक्ट के जरिए प्रदेश के अलावा दिल्ली मेट्रो को भी बिजली दी जा रही है। इसके साथ ही प्रदेश के आगर-शाजापुर-नीमच सोलर प्रोजेक्ट से प्रोड्यूस होने वाली बिजली भारतीय रेलवे को दी जा रही है।

प्रदेश में खोले जाएंगे 11 केन्द्रीय विद्यालय; CM मोहन यादव ने जताया PM मोदी का आभार

11 Kendriya Vidyalayas will be opened in the state; CM Mohan Yadav expressed gratitude to PM Modi भोपाल ! मध्य प्रदेश की केंद्र सरकार की तरफ से 11 केन्द्रीय विद्यालयों की बड़ी सौगात मिली है। दरअसल, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की आर्थिक मामलों की मंत्रि-मंडलीय समिति ने बीते दिन एक बैठक में देश भर में 85 नए केन्द्रीय विद्यालय (KV) स्थापना को स्वीकृति दे दी है। इन 85 नए केन्द्रीय विद्यालय में से 11 विद्यालय मध्य प्रदेश में स्थापित होंगे। इसके लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पीएम मोदी का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी से मिली इस सौगात के साथ मध्य प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र को नई ऊंचाई मिलेगी। यहां स्थापित होंगे 11 केन्द्रीय विद्यालय केंद्र सरकार से मिले 11 केन्द्रीय विद्यालयों को मध्य प्रदेश के अशोक नगर जिले के अशोक नगर, उज्जैन के नागदा जिला, सतना के मैहर, बालाघाट के तिरोड़ी, सिवनी के बरघाट, निवाड़ी जिले के निवाड़ी क्षेत्र, छतरपुर के खजुराहो, कटनी के झिनझारी, मुरैना के सबलगढ़, राजगढ़ के नरसिंहगढ़ और भोपाल के सेन्ट्रल अकादमी पुलिस अकादमी कान्हासैया क्षेत्र में स्थापित किए जाएंगे। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 से होगी पढ़ाई इन सभी केन्द्रीय विद्यालयों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 अनुसार पीएमश्री स्कूल के रूप में नामित किया गया है। ये स्कूल एनईपी-2020 के इम्प्लीमेंटेशन को अंडरलाइन करता है। साथ ही बाकी के लिए आदर्श स्कूल के रूप में काम करता है। केन्द्रीय विद्यालय अपने क्वालिटी टीचिंग, इनोवेटिव टीचिंग मेथेड और अपडेट इंफ्रास्ट्रक्चर की उन स्कूलों में से एक है, जिसकी सबसे ज्यादा मांग है। हर साल केन्द्रीय विद्यालय के कक्षा 1 में प्रवेश के लिए अप्लाए वाले छात्रों की संख्या में लगातार बढ़ती जा रही है। CBSE की तरफ से आयोजित बोर्ड परीक्षाओं में केन्द्रीय विद्यालयों के छात्रों का प्रदर्शन हमेशा अच्छी रहता है।

प्रदेश में नए कॉलेज नहीं खुलेंगे, सरकार ने सुनवाई के दौरान कोर्ट से कही ये बात

New colleges will not be opened in the state, the government told this to the court during the hearing. जबलपुर ! मप्र हाईकोर्ट में प्रदेश के बहुचर्चित नर्सिंग कॉलेज फर्जीवाड़े की सुनवाई चल रही है. शुक्रवार को सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से हाईकोर्ट को बताया गया कि सत्र 2024-25 में एक भी नया नर्सिंग कॉलेज नहीं खोला जाएगा, सिर्फ पुराने और सीबीआई जांच में पात्र पाए गए कॉलेजों को मान्यता दी जाएगी. जस्टिस संजय द्विवेदी व जस्टिस एके पालीवाल की युगलपीठ ने नर्सिंग काउंसिल की रजिस्ट्रार के खिलाफ कार्रवाई की रिपोर्ट पेश करने के निर्देश देते हुए अगली अगली सुनवाई 12 दिसंबर को निर्धारित की है. क्या है पूरा मामला? गौरतलब है कि लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विशाल बघेल की ओर से नर्सिंग कॉलेज फर्जीवाड़े को लेकर याचिका दायर की गई थी. इसमें प्रदेश में फर्जी नर्सिंग कॉलेज संचालित किए जाने का मामला उठाया गया था. याचिका की सुनवाई के दौरान द विजन एजुकेशन एंड रूरल डेवलपमेंट सोसाइटी छतरपुर ने भी हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर मध्यप्रदेश सरकार के उस निर्णय को चुनौती दी, जिसमें इस सत्र में नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता के लिए सिर्फ पुराने कॉलेजों के रिन्यूल के लिए पोर्टल खोला गया. याचिका में कहा गया कि नियम अनुसार मान्यता प्राप्त करने नए व पुराने संचालित सभी कॉलेजों को बराबर अवसर मिलना चाहिए. सरकार ने दिया ये जवाब सरकार की ओर से कहा गया, ” क्योंकि नर्सिंग कॉलेजों का मामला दो साल से हाईकोर्ट की मॉनिटरिंग में सीबीआई जांच में है, इस कारण इस साल केवल मान्यता नवीनीकरण हेतु पोर्टल खोला गया है. सीबीआई जांच में पात्र पाए गए कालेजों को नवीनीकरण की मान्यता दी जाएगी. वहीं याचिकाकर्ता विशाल बघेल ने शासन के उस निर्णय को चुनौती दी जिसमें नर्सिंग घोटाले की अनियमितता में लिप्त एक इंस्पेक्टर अनीता चांद को ही नर्सिंग काउंसिल का रजिस्ट्रार बना दिया गया. हाईकोर्ट ने प्रकरण में की गई कार्रवाई की रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं. अगल सुनवाई 12 दिसंबर को होगी.

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