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देश के ‘दिल’ में आज निवेश की दरियादिली, पीएम करेंगे ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट का शुभारंभ

Global Investors Summit : देश के ‘दिल’ में बसे प्रदेश में सोमवार को निवेशक दरियादिली दिखाएंगे। पहली बार भोपाल में हो रही 8वीं ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (जीआइएस) की थीम ‘अनंत संभावनाएं’ रखी गई हैं। राजधानी के मानव संग्रहालय में करीब सुबह 10.30 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जीआइएस का शुभारंभ करेंगे। वे एक घंटा जीआइएस में रहेंगे। इस दौरान वे उद्योगपतियों को संबोधित भी करेंगे। इससे पहले मप्र की औद्योगिक व निवेश क्षमता को प्रदर्शित करने वाली 5 मिनट की वीडियो फिल्म दिखाई जाएगी। शुभारंभ कार्यक्रम के बाद सीएम डॉ. मोहन यादव उद्योगपतियों से वन-टू-वन चर्चा करेंगे। नवीकरणीय ऊर्जा और आइटी समिट में शामिल होंगे। शाम में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ डिनर होगा। दो दिन की समिट में 34 देशों के राजनयिक और वाणिज्य दूतों के साथ अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी, बिड़ला समूह के चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला, आइटीसी के सीएमडी संजीव पुरी समेत देश-विदेश के उद्योग जगत की प्रमुख हस्तियां शामिल होंगी। समिट में 30 हजार प्रतिभागी शामिल होंगे। इनमें उद्योग जगत के 3,903 विशेष आमंत्रित व 8,046 डेलीगेट्स हैं। 300 से अधिक गेस्ट ऑफ ऑनर, 133 अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागी, 3398 स्टार्टअप्स प्रतिनिधि, 562 एनआरआइ व मप्र के प्रवासी, समेत 10,491 प्रतिभागी आएंगे। समापन मंगलवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में शाम 4.30 से 6 बजे तक होगा।निवेश प्रदेश बनेगा एमपी बच्चों की परीक्षा, इसलिए 15 मिनट देर से जाएंगे कार्यक्रम मेंप्रधानमंत्री मोदी ने भोपालवासियों का दिल जीत लिया। उन्होंने स्कूली बच्चों की परीक्षा देख जीआइएस के शुभारंभ कार्यक्रम का समय 15 मिनट बढ़ा दिया। अब वे सोमवार सुबह 9.45 बजे राजभवन से निकलेंगे। 10.15 बजे मानव संग्रहालय पहुंचेंगे। 10.30 बजे जीआइएस का शुभारंभ करेंगे। पहले उन्हें सुबह 10.15 बजे शुभारंभ करना था। उन्हें पता चला कि सीबीएसई 12वीं की परीक्षा सुबह 9.30 बजे से है। ट्रैफिक में हुए बदलाव से बच्चों को परेशानी होगी। यह देखकर उन्होंने समय में तब्दीली कराई।बड़े उद्योगपतियों से बड़े निवेश की आसयूनिकॉर्न के एमडी-सीईओ भी: 15 से अधिक यूनिकॉर्न बने स्टार्टअप के एमडी-सीईओ भी आ रहे हैं। बोट के को-फाउंडर अमन गुप्ता, अपना के बिजनेस हेड कौशिक बनर्जी, फॉर आई के सीईओ गौतम कुमार, ईज माय ट्रिप के को-फाउंडर निशांत पिट्टी, जेरोधा के दिनेश पाई समेत अन्य भी शामिल होंगे।7 विभागीय समिट और 10 थीमेटिक सेशन: समिट में विभिन्न क्षेत्रों में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए 7 विभागीय सम्मेलन और 10 विशिष्ट थीमेटिक सत्र होंगे। प्रमुख सत्रों में फार्मा, मेडिकल डिवाइस, परिवहन-लॉजिस्टिक, कपड़ा उद्योग, खाद्य प्रसंस्करण, कौशल विकास, सूचना प्रौद्योगिकी, अक्षय ऊर्जा, पर्यटन, खनन, एमएसएमई, शहरी विकास और प्रवासी मध्यप्रदेश शामिल हैं।अंतरराष्ट्रीय राजनयिक और वाणिज्य दूत करेंगे भागीदारीजीआइएस में 34 देशों के राजनयिक प्रतिनिधि, उच्चायुक्त, काउंसल जनरल और अन्तर्राष्ट्रीय संगठनों के वरिष्ठ अफसर भी रहेंगे। प्रमुख भागीदार देशों में जापान, जर्मनी, इंग्लैंड, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया और सिंगापुर है। समिट में टॉप कंपनियों के 300 से अधिक अध्यक्ष, एमडी, सीईओ शामिल होंगे। इनमें सीएमडी जेके टायर, बालकृष्ण गोयनका अध्यक्ष, वेल्सपेन वर्ल्ड, एमके अग्रवाल, एमडी ग्रासिम, कैलाश झंवर, एमडी अल्ट्राटेक, सुचिता ओसवाल जैन, उपाध्यक्ष वर्धमान, रंजिदर गुप्ता ट्राइडेंट, सीएमडी ब्लू स्टार, पार्थ प्रतिम सेन गुप्ता, एमडी बंधन बैंक आदि शामिल हैं।

छिंदवाड़ा वन मंडल में चहेतों के लिए टेंडर में गड़बड़झाला

Tender irregularities for favourites in Chhindwara forest division भोपाल। ऑनलाइन टेंडर के नाम पर वन विभाग में बड़ा खेल खेला गया है। चहेते ठेकेदार को करोड़ो की सप्लाई देने के लिए दस्तावेजों का गोलमाल किया गया है। टेंडर प्रक्रिया का यह मामला अब तक भले ही कम्पयुटरों में कैद था लेकिन बाहर आने के बाद दस्तावेज मुहैया कराने में अफसरों की सांसे फूल रही है। खास बात यह कि इस मामले में शिकवा शिकायतों का दौर शुरू होने के बाद भी अफसरों ने टेंडर निरस्त करने के स्थान पर बिना सप्लाई के ही सप्लायर को एक बड़ी राशि का भुगतान भी कर दिया है। दरअसल यह पूरा मामला पूर्व वनमंडल और दक्षिण वनमंडल से जुड़ा है जिसमें चार निविदाकारों में उस फर्म को ठेका दिया गया है जिसने निविदा के नियम और शर्तों का पालन तक नहीं किया है। सूत्रों की माने तो मंडला जिले की इस फर्म को केवल इस बिना पर टेंडर दिया गया है कि वह एक विभागीय अधिकारी से करीबी रखता है जिसके कारण टेंडर प्रक्रिया में उपयोगी दस्तावेजों की कमी को भी नजर अंदाज किया गया और उसे संबंधित फर्म को टेंडर दे दिया गया।  लैब टेस्ट कराने फीस ली कैश निविदा शर्तों के तहत टेंडर भरने वाले निविदाकार को सप्लाई की जाने वाली सामग्री का पहले सेम्पल देना होता है। सेम्पल की गुणवत्ता को परखने केलिए इंदौर की लैब में भेजा जाता है। इसके लिए निविदाकार से ऑन लाइन ही राशि जमा कराई जाती है। लेकिन टेंडर प्रक्रिया में गोलमाल का चक्रव्यूह रचने वालों ने राशि कैश में जमा करा ली। जबकि यह बात अन्य किसी भी निविदा कार को पता नहीं हैकि किस लैब में जांच की गई और उसकी रिपोर्ट वया है। 6 टेंडरों में एक ही शपथ पत्र अलग-अलग तिथि और माह में एक ही फर्म को दिए गए टेंडरों में ऑनलाइन अपलोड होने वाले शपथ फत्र में एक ही शपथ पत्र को सभी टेंडरों में अपलोड किया गया है। इसे भी दबाए रखने का काफी प्रयास किया गया लेकिन जब आरटीआई के माध्यम से दस्तावेजों की मांग की गई तो विभागीय अधिकारियों द्वारा टेंडर से संबंधित दस्तावेजों की जानकारी आरटीआईकर्ता को समय सीमा के बाद भी जानकारी नहीं दी प्रदान की गई जिसके बाद जानकारी के लिए प्रथम अपील लगाई गई है।

राजधानी भोपाल में इन लोकेशन्स पर आसमान छूएंगे प्रॉपर्टी के दाम, नई कलेक्टर गाइडलाइन के लिए शेड्यूल जारी

भोपाल  शहर में डेढ़ हजार से अधिक स्थानों पर बढ़ीं हुई दरों पर रजिस्ट्रियां हुई हैं। इन पर प्रापर्टी के दाम बढ़ाए जा सकते हैं। दरअसल पंजीयन और राजस्व विभाग के अधिकारियों के द्वारा एआई की मदद से सर्वे किया जा रहा है। इस सर्वे के आधार पर ही कलेक्टर गाइडलाइन 2025-26 के प्रस्ताव को तैयार किया जाएगा। पंजीयन विभाग के सूत्रों के अनुसार,वित्तीय वर्ष 2024-25 में दो हजार से अधिक स्थानों पर सर्वाधिक रजिस्ट्रियां हुई हैं। इनमें से शहरी क्षेत्र में एक हजार 500 और ग्रामीण क्षेत्र करीब 500 स्थान शामिल हैं। बता दें कि पिछले साल दूसरी बार प्रापर्टी के दाम बढ़ाने के लिए प्रस्ताव तैयार किया गया था लेकिन बिल्डर और जनप्रतिनिधियों द्वारा किए गए विरोध के चलते इस पर रोक लग गई थी लेकिन अब नये सिरे से गाइडलाइन तैयार की जा रही है। नगर निगम क्षेत्र में बढ़ेंगे सबसे अधिक रेट राजस्व अधिकारियों ने बताया कि कलेक्टर गाइडलाइन को लेकर भोपाल जिले का 3 हिस्सों में सर्वे किया जा रहा है. इसमें नगर निगम क्षेत्र, प्लानिंग एरिया और नान प्लानिंग एरिया शामिल हैं. इनमें सबसे अधिक रेट नगर निगम सीमा में आने वाली जमीनों के बढ़ेंगे. इसके साथ प्लानिंग और नान प्लानिंग एरिया की करीब 100 लोकेशन को नगर निगम में भी शामिल किया जाएगा. जमीनों के दो आधार पर बढ़ेंगे रेट कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने बताया कि “अभी कई लोकेशन ऐसी हैं, जहां कलेक्टर गाइड लाइन से अधिक दामों पर रजिस्ट्रियां हो रही हैं. ऐसे स्थानों को राजस्व अधिकारी चिंहित कर रहे हैं. इसके बाद इन क्षेत्रों में प्रापर्टी के रेट बढ़ेंगे. कलेक्टर सिंह ने बताया कि दूसरे ऐसे क्षेत्र, जहां अधिक मात्रा में रजिस्ट्रियां हो रही हैं. इनमें भी नई कलेक्टर गाइड लाइन में जमीनों के दाम बढ़ेंगे.” एआई और संपदा साफ्टवेयर से हो रहा सर्वे अधिकारियों ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में 1443 स्थानों पर कलेक्टर गाइड लाइन के रेट बढ़ाए गए थे. इस बार 2 हजार से अधिक लोकेशन में दाम बढ़ सकते हैं. जिन इलाकों में कलेक्टर गाइड लाइन में दरें बढ़नी हैं, उनका सर्वे संपदा 2.0 साफ्टवेयर और एआई के माध्यम से किया जा रहा है. इसके साथ ही राजस्व विभाग के अधिकारी ग्राहक बनकर भी किसान और बिलडरों से जमीनों के रेट की जानकारी ले रहे हैं. अधिकारियों ने ग्राहक बनकर किया निरीक्षण इन इलाकों में रेट बढ़ने के पीछे मुख्य कारण ये है कि यहां रजिस्ट्री बहुत ज्यादा दरों पर हुई हैं। दूसरा ऐसे इलाके, जहां बहुत ज्यादा रजिस्ट्री हुई हैं। अधिकारियों ने इन दोनों इलाकों का ग्राहक बनकर निरीक्षण किया और रेट के बारे में जानकारी जुटाई। इसके अलावा, सोशल मीडिया और ब्रोशर के विज्ञापनों का भी अध्ययन किया गया। अधिकारियों के अनुसार कई इलाकों में कलेक्टर गाइडलाइन के आसपास लेकिन रजिस्ट्री ज्यादा संख्या में हुईं। यहां गाइडलाइन से मार्केट रेट काफी ज्यादा है, इसलिए इन्हें शामिल किया। इन स्थानों पर बढ़ सकते हैं जमीनों के रेट बागली, सेवनिया गौंड, रापड़िया, नीलबड़, झागरिया, बर्रई, बावड़िया कल्याण, मिसरोद, कटारा, लांबाखेड़ा, बागमुगालिया, रायसेन रोड, होशंगाबाद रोड, मुबारकपुर, बिशनखेड़ी, रतनपुर, अयोध्या बायपास, बैरागढ़ चीचली, दामखेड़ा, छापड़िया, अरवलिया, एयरपोर्ट रोड, लाउखेड़ी, परवलिया, गोलखेड़ी, देवलखेड़ी, लहारपुर, तारासेवनिया, रातीबड़ और चांदपुर समेत अन्य लोकेशन पर जमीनों के दाम बढ़ने की संभावना है.

वन विभाग के दागी अफसरों पर मेहरबान है शीर्ष अफसर

The top officers are kind to the tainted officers of the forest department उदिता नारायण  भोपाल। जंगल महकमे के शीर्ष अधिकारी कुछ चहेते अत- फसरों को बचाने के लिए पूरी ताकत लगाते आ रहें है। शीर्ष अधिकारी गंभीर वित्तीय मामले में घिरे आईएफएस अधिकारियों को बचाने के लिए आरोप पत्र  जारी करने के बजाय शो कॉज थमा कर उन्हें बचाया जा रहा हैं। विभाग के रसूखदार आईएफएस अजय पाण्डेय, गौरव चौधरी, अनुराग कुमार, प्रशांत कुमार, अमित निकम समेत एक दर्जन के खिलाफ आरोप पत्र जारी भी कर दिए गए हैं, किन्तु उनके विरुद्ध आगे की कार्यवाही पेंडिंग कर दी गई है। विभाग के शीर्ष अधिकारियों की ढुलमुल रवैया के कारण आरोपित अधिकारी प्राइम पोस्टिंग पार्टी जा रहे हैं और इनमें से कुछ अधिकारी धीरे-धीरे रिटायर भी होते जा रहें है। इसी कड़ी में पीसीसीएफ संरक्षण डॉक्टर दिलीप कुमार के खिलाफ 22 लाख रुपए की रिकवरी है और वह रिटायर हो गए हैं। दिलचस्प पहलू यह है कि विभाग सेवानिवृत्त अधिकारियों पर सद्भावना दिखाते हुए पेंशन भी स्वीकृत कर रहा है। मसलन, एम काली दुर्रई, देवेंद्र कुमार पालीवाल, प्रभात कुमार वर्मा जांच कार्यवाही के लंबित रहते हुए सेवानिवृत्त हो गए और अब उनके समस्त देयकों के भुगतान करने पर उदारता बरती गई । दागी अफसरों को बचाने के लिए शीर्ष अधिकारियों ने क्यों उदारता बरती, शोध का विषय है। इन अफसरों को अभयदान देने के प्रयास एपीएस सेंगर: बालाघाट सर्किल में पदस्थ सीएफ एपीएस सेंगर के खिलाफ 24 अगस्त 2022 को आरोप पत्र जारी हुआ। मामला तब का है, जब वे टीकमगढ़ के डीएफओ हुआ करते थे। इन पर आरोप है कि भंडार क्रय नियमों का पालन नहीं किया। खरीदी में गड़बड़ी हुई। इनके खिलाफ आरोपपत्र भी बन गया परंतु  प्रशासन-1 शाखा ने उदारता दिखाते हुए शो कॉज नोटिस जारी कर उन्हें न केवल बालाघाट सर्किल में प्राइम पोस्टिंग दे दी, बल्कि क्लीनचिट भी दे दी। दुर्भाग्यजनक पहलू यह है कि विभाग ने इनके खिलाफ कार्रवाई करने की अद्यतन स्थिति से शासन को अवगत नहीं कराया है। बृजेंद्र श्रीवास्तव: छिंदवाड़ा पूर्व में पदस्थ डीएफओ बृजेंद्र श्रीवास्तव के खिलाफ 21 जुलाई 2022 को नियम दस के तहत आरोप पत्र जारी किया गया था। इन पर आरोप है कि स्थानांतरण नीति के विरुद्ध जाकर कर्मचारियों के तबादले किए। आरोप पत्र का जवाब अभी तक नहीं दिया गया है।  भारत सिंह बघेल: भोपाल मुख्यालय में पदस्थ भारत सिंह बघेल को आरोप पत्र 22 मई 2006 को जारी किया गया था। बघेल ने अपने प्रभाव अवधि के दौरान पूर्व लांजी क्षेत्र में प्रभार अवधि में राहत कार्य अंतर्गत कार्यों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की थी। इनके खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा कर मामला संघ लोक सेवा आयोग को भेजा गया है। शासन को संघ लोक सेवा आयोग के उत्तर की अपेक्षा है। नवीन गर्ग: बहुउद्देशीय परियोजना के डूब क्षेत्र में आई वन भूमि के बदले में गैर वनभूमि और बिगड़े वन में पौधारोपण कराने में करोड़ों के वनीकरण क्षतिपूर्ति घोटाले में शामिल आईएफएस नवीन गर्ग को डीएफओ दक्षिण सागर (सामान्य) वनमंडल से मप्र ईको टूरिज्म डेवलपमेंट बोर्ड में प्रतिनियुक्ति पर भेजा गया है। यही नहीं, ट्रांसफर के बाद भी उन्हें दक्षिण सागर वन मंडल से कई महीनों तक हटाया नहीं गया था। दिलचस्प पहलू यह है कि वन मंत्री विजय शाह ने बीते विधानसभा सत्र में दक्षिण सागर डीएफओ रहे नवीन गर्ग को निलंबित करके ईओडब्ल्यू से जांच कराने की घोषणा की थी। सदन में की गई घोषणा हवा हो गई. उनकी पोस्टिंग इको पर्यटन बोर्ड में है किंतु वह वन्य प्राणी शाखा में काम कर रहे हैं। प्रशांत कुमार: खंडवा में डीएफओ के पद पर पदस्थ प्रशांत कुमार को आरोप पत्र 4 सितंबर 2020 को जारी किया गया था। प्रशांत कुमार डीएफओ पश्चिम बैतूल वन मंडल में अनियमितता के मामले में जांच हुई थी जिसमें उन्हें दोषी पाया गया। विभाग ने एक वेतन वृद्धि असंचयी प्रभाव से रोके जाने का दंड आरोपित कर अंतिम निर्णय के लिए संघ लोक सेवा आयोग भेजा है। आयोग से अभी तक अभिमत नहीं आ पाया है। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि इस गड़बड़ी में तत्कालीन उप वन मंडल अधिकारी आईएस गडरिया संलिप्त रहे हैं। आरपी राय: खंडवा सर्किल में पदस्थ सीसीएफ आर पी राय के खिलाफ 10 जून 2019 को आरोप पत्र जारी हुआ था। आरोप था कि वन मंडल इंदौर के अंतर्गत वन परीक्षेत्र चोरल में बड़े पैमाने पर अवैध कटाई हुई थी। जांच के दौरान राय अपने दायित्वों का निर्वहन करने में असफल रहे। इसके कारण 6 लाख 93 हजार 361 रुपए की राजस्व हानि हुई थी। अभी इनसे वसूली नहीं हुई है। मामला विभाग में ही ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। राय अगले मई महीने सेवानिवृत्त हो गए। यही नहीं, विभागीय मंत्री की विशेष कृपा होने के कारण इनसे छह लाख 93 हजार की वसूली नहीं हो पाई। एम काली दुर्रई:  1996 बैच के आईएफएस अधिकारी एम काली दुर्रई प्रतिनियुक्ति पर हॉर्टिकल्चर में पदस्थ रहे। यहां पदस्थ रहते हुए दुर्रई ने किसानों की सब्सिडी देने के मामले में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की। इसके चलते उन्हें कमिश्नर हॉर्टिकल्चर पद से हटाया गया। मूल विभाग वन विभाग में लौटते ही उनके खिलाफ  विभागीय जांच शुरू की गई। प्रधान मुख्य वन संरक्षक स्तर के जांच अफसर सीके पाटिल को जांच के लिए 2 साल का पर्याप्त समय मिलने के बाद भी विभागीय जांच कंप्लीट नहीं कर पाए और वे रिटायर हो गए। राजनीतिक दबाव के चलते विभाग के अफसर उनके खिलाफ कोई बड़ी कार्यवाही नहीं कर पाए। सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले देयकों का भुगतान भी उदारता से किया जा रहा है।  डीके पालीवाल: सीसीएफ शिवपुरी के पद से रिटायर हुए हैं। इनके पेंशन के भुगतान पर आपत्ति की गई है, क्योंकि धार और फिर गुना डीएफओ पद रहते हुए आर्थिक गड़बड़ी कर शासन को नुकसान पहुंचाया है। धार में पदस्थ रहते हुए पालीवाल ने एक रेंजर का समयमान वेतनमान का फिक्सेशन अधिक कर दिया। जब मामला संज्ञान में आया, तब तक पालीवाल वहां से स्थानांतरित हो गए थे। विभाग ने अतिरिक्त भुगतान के गए राशि वसूलने के नोटिस सेवानिवृत्त रेंजर को भेजा तो कोर्ट ने उस के पक्ष में फैसला देते हुए फिक्सेशन करने वाले अफसर पालीवाल से ₹300000 की वसूली करने … Read more

केन्द्र सरकार ने दी मंजूरी, एमपी के 10 शहरों में ‘कचरे’ से बनेगी ‘बिजली’

electricity will be produced from waste in 10 urban bodies of mp नगरीय विकास विभाग ने घरेलू कचरे के निस्तारण के मामले में बड़े जुर्माने से बचने के लिए प्रयास शुरू किए हैं। इसके तहत कहीं कचरे से सीएनजी बनाने के प्लांट लगाए जा रहे हैं तो कहीं कंपोस्टिंग के प्लांट लग रहे हैं। इसी सिलसिले में अब मध्यप्रदेश के 10 शहरों में कचरे से बिजली बनाने के प्लांट लगाए जा रहे हैं। इन्हें केन्द्र से अनुमति मिल गई है। यह वर्ष 2026 तक शुरू होने की संभावना है। सरकार ने प्रदेश में नगरीय निकायों को वर्ष 2027 तक कचरा प्रबंधन में आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य तय किया है। यहां पहले से बनाई जा रहीरीवा, जबलपुर में कचरे से बिजली बनाने की यूनिट संचालित हैं। प्रतिदिन 950 टन कचरे का प्र-संस्करण कर 18 मेगावॉट बिजली पैदा की जा रही है। लीगेसी वेस्ट खत्म करने में मिलेगी मदद एनजीटी ने 2022 में सॉलिड वेस्ट प्रबंधन में लापरवाही के लिए 3 हजार करोड़ का जुर्माना लगाया था। तत्कालीन सीएस ने छह माह में प्रबंधन करने का शपथ-पत्र दिया था। इसके बाद जुर्माना स्थगित किया गया, लेकिन अब भी निकायों की डंपिंग साइट पर 25 लाख टन से ज्यादा लीगेसी वेस्ट जमा है। बिजली प्लांट बनने से वेस्ट भी खत्म करने में मदद मिलेगी। जुर्माने से बचा जा सकेगा। हाल ही में गीले कचरे की कंपोस्टिंग के लिए कटनी, सागर में स्वचालित यूनिट लगाई गई हैं। इन 10 नई इकाइयों को अनुमति 10 नगरीय निकायों के लिए क्लस्टर आधार पर 1018.85 टन प्रतिदिन क्षमता की इकाइयों के लिए मंजूरी मिली है। इन निकायों में सांची, हरदा, नया हरसूद, शाहगंज, आलीराजपुर, देपालपुर, उन्हेल, बाबई, धारकोटि और इंदौर शामिल हैं। इनमें आसपास के स्थानों को भी जोड़ा गया है। जहां कचरा कम निकलता है वहां समीपस्थ अन्य शहरों को जोड़ा गया है। इंदौर-उज्जैन को मिलाकर 607 टन कचरे से बिजली बनाने की यूनिट्स का काम प्रस्तावित है। इसके शुरू होने से 12.15 मेगावाट बिजली बन सकेगी।

नेता प्रतिपक्ष सिंघार बोले-बिहार चुनाव को ध्यान में रखते हुए बनाया गया बजट,वहां कई विशेष पैकेज दिए

Leader of Opposition Singhar said – The budget was made keeping in mind the Bihar elections, many special packages were given there. मध्य प्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने केंद्रीय बजट को लेकर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ये केंद्रीय बजट बिहार चुनाव को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है, वहां कई विशेष पैकेज दिए गए। उन्होंने कहा नीतीश कुमार के भरोसे भाजपा की सरकार चल रही है इसलिए उनपर ही मेहरबानी की गई है। एमएसपी कानून की गारंटी पर कोई बात नहींनेता प्रतिपक्ष ने कहा कि प्रधानमंत्री जी शायद भूल गए हैं कि देश का बजट पूरे देश के लिए होता है। उन्होंने कहा इस बजट में किसानों की एमएसपी कानून की गारंटी पर कोई बात नहीं की गई। प्रधानमंत्री आवाज योजना 13670 करोड़ कर दी गयी। जल जीवन मिशन 70 हजार करोड़ था अब 22694 करोड़ कर दिया। एससी एसटी ओबीसी की योजनाओं में भी कटौती की गई है। एससी एसटी और गरीबों के लिए कुछ नहींनेता प्रतिपक्ष ने कहा कि ये बजट भाजपा सरकार ने एक राज्य में चुनाव जीतने के हिसाब से बनाया गया है। उमंग सिंघार ने कहा कि किसानों के एमएसपी, आवास योजना, एससी एसटी और गरीबों के लिए कुछ नहीं किया गया है, उनकी योजनाओं को लेकर कटौती की गई है। उमंग सिंघार ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री जी आप इन्हीं लोगों के कारण प्रधानमंत्री बने हैं और उन्हीं को आज भूल गए। ये देश का बजट है देश के हिसाब से होना

कंसोटिया बने गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव: तीन आईएएस की जिम्मेदारी बदली; मुखर्जी को बनाया राजस्व मंडल का अध्यक्ष

भोपाल । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के जापान दौर से लौटने से पहले तीन सीनियर आईएएस अफसरों की जिम्मेदारी में बदलाव किया गया है। जेएन कंसोटिया को गृह विभाग को अपर मुख्य सचिव बनाया है। वहीं दो दिन पहले एसीएस बनाए गए अनिरुद्ध मुखर्जी को राजस्व मंडल का अध्यक्ष बनाया गया है। राजस्व मंडल में प्रशासकीय सदस्य और प्रमुख सचिव सचिन सिन्हा को ग्वालियर से भोपाल लाया है। सिन्हा को प्रशासन अकादमी का महानिदेशक बनाया है। बता दें कि एसीएस एसएन मिश्रा शुक्रवार को रिटायर हो गए। जिसके बाद कंसोटिया की उनके पद पर नियुक्ति की गई। वे मोहन सरकार में करीब 1 साल बाद बड़े विभाग की जिम्मेदारी संभालेंगे। कंसोटिया अभी प्रशासन अकादमी के डीजी की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। शमी को आवासीय आयुक्त नई दिल्ली का अति. प्रभार अनिरुद्ध मुखर्जी को दो दिन पहले एसीएस बनाकर आवासीय आयुक्त नई दिल्ली की जिम्मेदारी दी गई थी। उन्हें लोक परिसंपत्ति विभाग का जिम्मा भी सौंपा था। अब उनके पास लोक परिसंपत्ति विभाग की जिम्मेदारी यथावत रखी है। वहीं आवासीय आयुक्त नई दिल्ली का अतिरिक्त प्रभार खाद्य और नागरिक आपूर्ति विभाग की प्रमुख सचिव रश्मि अरुण शमी को सौंपा गया है। परिवहन और जेल विभाग की जिम्मेदारी किसी को नहीं परिवहन और जेल विभाग की जिम्मेदारी अभी किसी को नहीं दी गई है। रिटायर एसीएस एसएन मिश्रा के पास गृह विभाग के एसीएस के साथ परिवहन और जेल विभाग का अतिरिक्त प्रभार था।

सिर्फ कागजों में देश कि सबसे स्वच्छ राजधानी भोपाल: ज़मीनी हकीकत कुछ और, बस स्टैंड बदहाल, कीचड़-गंदगी से भरे पड़े ,,,

Bhopal is the cleanest capital of the country only on paper: Ground reality is different, bus stand is in bad condition, filled with mud and dirt,,, भोपाल । राजधानी भोपाल के नादरा बस स्टैंड और आईएसबीटी की हालत बदहाल है। दोनों बस स्टैंड पर गंदगी पसरी है। पीने के साफ पानी और स्वच्छ शौचालय की कोई व्यवस्था नहीं है। नादरा बस स्टैंड रात के समय नशे का अड्डा बन जाता है। यहां चोरी और लड़ाई की घटनाएं भी आम हैं। बता दें कि नादरा बस स्टैंड से रोजाना करीब 5 हजार से अधिक यात्री सागर, बीना, विदिशा, अशोकनगर, गुना, शिवपुरी, आदि शहरों के लिए जाते हैं। वहीं आईएसबीटी से रोजाना करीब 6 हजार यात्री होशंगाबाद, इटारसी, बैतूल आदि जैसे शहरों के लिए निकलते हैं, इसके अलावा अन्य राज्यों जैसे राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश आदि के लिए भी बसें यहां से रवाना होती हैं। खुले में शौच से स्थानीय दुकानदार और यात्री परेशाननादरा बस स्टैंड पर एजेंट का काम करने वाले दयाल सिंह गुर्जर ने बताया कि पानी निकासी की सही व्यवस्था न होने के चलते बस स्टैंड कीचड़ से भरा है। लोग यहां खुले में शौच करते है। इससे पूरे इलाके में बदबू बनी रहती है. जिसकी वजह से स्थानीय दुकानदार और यात्री परेशान रहते हैं। नगर निगम भी हमारे आवाज उठाने पर ही सफाई करवाता है। मुफ्त शौचालय का बोर्ड लगा, फिर भी मांगे जाते हैं पैसेदुकानदार मोहम्मद सईद ने बताया कि वह पिछले 40 सालों से बस स्टैंड पर दुकान चलाते हैं। यहां शौचालय का कोई बोर्ड या निशान नहीं लगा है। इसके चलते विशेषकर महिलाओं को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। यहां बाहर बने शौचालय में महिलाओं के लिए मुफ्त लिखे होने पर भी उनसे पैसे मांगे जाते हैं। जब महिलाएं इस बात को लेकर आवाज उठाती हैं, तो उन्हें शौचालय में काम चलने की दलील दी जाती है। बस स्टैंड पर गुंडे लोगों की वजह से मनमाने तरीके से काम हो रहा है। कम से कम रात के समय प्रशासन को एक आदमी की ड्यूटी लगानी चाहिए जो निगरानी कर सके। रात होते ही नशे का अड्डा बन जाता है नादरा बस स्टैंडऑटो ड्राइवर शेराज ने बताया कि यहां देर रात अक्सर लोगों के साथ चोरी की घटनाएं होती रहती है। लोगों के बैठने और पीने के पानी की भी व्यवस्था नहीं है। हालांकि बस स्टैंड पर 2-3 पानी की टंकी लगी हैं, लेकिन सब सालों पुरानी है। जिनकी सफाई होते हुए हमने नहीं देखा। स्थानीय दुकानदारों ने बताया कि रात होते ही बस स्टैंड नशे का अड्डा बन जाता है। जिससे आए दिन यहां लड़ाई-झगड़ा भी होता रहता है। अतिक्रमण की वजह से बस निकालने में दिक्कत बस ड्राइवर जुम्मा खान ने बताया कि नादरा बस स्टैंड शिफ्ट होने की बात कही जा रही है, लेकिन कब तक होगा इसका अनुमान नहीं है। बस स्टैंड की जगह सही से नहीं बनी हुई है, साथ ही अतिक्रमण भी फैला रहता है। इसके चलते यहां से बस निकालने में बहुत परेशानी होती है। आईएसबीटी की हालत भी बदहाल शहर के आईएसबीटी की हालत भी बदहाल है। एक स्थानीय दुकानदार ने बताया कि बस स्टैंड में सीवर लाइन चोक होने की वजह से परिसर में गंदा पानी भरा रहता है। इसके अलावा ड्राइवर बूथ पर लगाकर ही बसे धोते हैं, जिससे कीचड़ फैलता है। बस स्टैंड पर पीने के साफ पानी व्यवस्था नहीं है और शौचालय भी साफ नहीं है। ज्यादातर बस ड्राइवर बस स्टैंड के बाहर मुख्य सड़क पर ही बसे खड़ी करते हैं। इससे सवारियों दिक्कत होती है। इस संबंध में निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी का कहना है कि स्वच्छ सर्वेक्षण को लेकर निगम अच्छे प्रयास कर रहा है। दिन-रात सफाई हो रही है। जहां खामी होगी, वहां सुधार करेंगे। बस स्टैंड पर भी विशेष सफाई करवाई जाएगी। शहर के दोनों बस स्टैंडों से कहां जाती हैं बसें आईएसबीटी : होशंगाबाद, इटारसी, बैतूल, मुलताई की ओर बसें जाती हैं। नादरा बस स्टैंड : सागर, बीना, विदिशा, अशोकनगर, गुना, शिवपुरी, ग्वालियर की बसें जाती हैं।

प्रदेश में विशेष परिस्थिति में मंत्री कर सकेंगे ट्रांसफर, GAD ने स्थानांतरण नीति (संशोधन)-2025 जारी

Ministers will be able to transfer in special circumstances in the state मध्य प्रदेश में अभी राज्य और जिला स्तर पर स्थानांतरण पर प्रतिबंध है। शासन ने 24 जून 2021 को राज्य एवं जिला स्तर पर ट्रांसफर नीति जारी की थी। सरकार ने कार्य की सुविधा से उपरोक्त नीति की कण्डिका 9 में संशोधन किया है। इसमें विभाग के मंत्री विशेष परिस्थिति में ट्रांसफर कर सकेंगे। बुधवार को साामन्य प्रशासन विभाग की तरफ से स्थानांतरण नीति (संशोधन)-2025 जारी कर दी गई। बता दें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षा में महेश्वर में हुई कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई थी। वहीं, मुख्यमंत्री कार्यालय से प्राप्त उच्च प्राथमिकता के प्रकरणों में सचिव प्राशसकीय अनुमोदन प्राप्त कर आदेश जारी कर सकेंगे। साथ ही ऐसे ट्रांसफर प्रकरण जिनको करने में विभाग नीति के अनुरूप नहीं पाता है तो ऐसे प्रकरण विभागीय सचिव, विभागीय मंत्री के अनुमोदन के बाद कारण समेत अपर मुख्य सचिव/ प्रमुख सचिव, मुख्यमंत्री कार्यालय को दोबारा प्रस्तुत कर अग्रिम आदेश प्राप्त करेंगे। इसके अलावा ट्रांसफर नीति के तहत ट्रांसफर करते हुए यह भी सुनिश्चित करना होगा कि जिस स्थान से ट्रांसफर किया जा रहा है, उस स्थान पर रिक्त पदों का प्रतिशत ट्रांसफर किए जा रहे स्थान से अधिक तो नहीं हो रहा है। ऐसी स्थिति में ट्रांसफर नहीं किया जाएगा। सामान्य प्रशासन विभाग ने कुछ शर्तों के तहत शासकीय कर्मचारियों के ट्रांसफर (स्थानांतरण) के लिए एक नीति जारी की है। इस नीति के अनुसार, सामान्य रूप से ट्रांसफर केवल विशेष परिस्थितियों में ही किए जा सकते हैं। इन परिस्थितियों में शामिल हैं- स्वास्थ्य कारण- जैसे गंभीर बीमारियां (कैंसर, लकवा, दिल का दौरा आदि) के कारण तत्काल स्थानांतरण की आवश्यकता हो।न्यायालय के आदेश- यदि किसी न्यायालय का आदेश हो और उस आदेश का पालन करना आवश्यक हो, लेकिन स्थानांतरण के दौरान कर्मचारी पर कोई विभागीय कार्रवाई लंबित न हो।गंभीर शिकायत या अनियमितता- यदि शासकीय कर्मचारी के खिलाफ गंभीर शिकायत या लापरवाही हो और विभाग ने उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की हो।आपसी अपराध मामला- यदि लोकायुक्त या पुलिस ने कर्मचारी के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया हो और जांच में कोई रुकावट न हो, तो इस कारण भी स्थानांतरण किया जा सकता है।रिक्त पदों की पूर्ति- यदि किसी कर्मचारी के निलंबन, त्यागपत्र, सेवानिवृत्ति या मृत्यु के कारण पद खाली हो और विभाग को लगे कि उस पद को भरना जरूरी है, तो भी स्थानांतरण किया जा सकता है।

मध्य प्रदेश का राज भवन घूमने का सुनहरा अवसर , जाने नियम

Golden opportunity to visit Raj Bhavan of Madhya Pradesh, know the rules MP News: मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगू भाई पटेल के निर्देश पर गणतंत्र दिवस के अवसर पर तीन दिनों के लिए राजभवन के दरवाजे आम लोगों के लिए खुले रहेंगे. राजभवन में कई ऐसे दर्शनीय स्थान है जो इतिहास से जुड़े हुए हैं. इनका भ्रमण और अवलोकन आम लोगों द्वारा किया जा सकता है. राजभवन के अपर मुख्य सचिव के सी गुप्ता ने बताया कि राज्यपाल मंगू भाई पटेल के निर्देश पर राजभवन को आम लोगों के अवलोकन के लिए तीन दिनों तक खोला जाएगा. उन्होंने बताया कि आम नागरिक 25 से 27 जनवरी 2025 तक की निर्धारित समय अवधि में राजभवन देख सकते हैं. इसके लिए समय भी तय किया गया है. आम लोगों के लिए दोपहर 2:00 बजे से शाम 7:00 बजे तक राजभवन खुला रहेगा. इसी प्रकार 26 जनवरी को प्रातः 11 से दोपहर 2:00 बजे तक राजभवन का भ्रमण किया जा सकेगा. संभावना जुटाए जा रही है कि तीन दिन की अवधि में हजारों की संख्या में लोग राजभवन को देखने के लिए जा सकते हैं. उन्हें गेट नंबर 2 से आवागमन की अनुमति मिलेगी. इतिहास को संजोए हुए है राजभवनराजभवन राज्यपाल का निवास होने के साथ-साथ इतिहास को अपने आप में संजोए हुए हैं. यहां पर तोप, आकर्षक प्राचीन‌ वस्तुओं के साथ-साथ एक विशाल वेंकट हाल भी है, जो कि काफी पुराना है. राजभवन की कई प्राचीन वस्तुएं आम लोगों को अपनी और आकर्षित करती है. इसके अलावा प्राचीन समय के लगे हुए झूमर भी राजभवन की खूबसूरती के साथ-साथ लोगों के आकर्षण का केंद्र माने जाते हैं. जिस क्षेत्र में राजभवन स्थित है वह 1880 तक एक सैन्य छावनी क्षेत्र था. इस क्षेत्र में किसी भी निजी निर्माण की अनुमति नहीं थी. 1880 में वर्तमान राजभवन का निर्माण भोपाल की नवाब शाहजहां बेगम ने ब्रिटिश अधिकारियों के ठहरने के लिए किया था. इसे शुरू में लाल कोठी नाम दिया गया था. 1880 के बाद से लाल कोठी भोपाल में तैनात ब्रिटिश राजनीतिक एजेंटों का आधिकारिक निवास बन गया.

उज्जैन में शराबबंदी के बाद उठा सवाल…काल भैरव को भोग में कैसे चढ़ेगी शराब? संतों ने कही ये बात

After prohibition of liquor in Ujjain, question arose…how will liquor be offered to Kaal Bhairav? The saints said this मध्यप्रदेश के उज्जैन में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की ओर से शराबबंदी का एलान करने के बाद बाबा महाकाल के सेनापति भगवान कालभैरव मंदिर, जहां भगवान को श्रद्धालु शराब का भोग लगाते हैं, इस परंपरा के चलते मंदिर के बाहर आबकारी विभाग की दो सरकारी शराब दुकानें संचालित होती हैं। इन दुकानों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु शराब खरीदकर भगवान को अर्पित करते हैं और कई लोग इसे प्रसाद के रूप में भी ग्रहण करते हैं। लेकिन अब इस नई नीति से यह दोनो दुकाने बंद हो जाएगी। 17 दुकानों पर लग जाएगा तालाउज्जैन कलेक्टर नीरज सिंह ने कहा कि इस मुद्दे पर फिलहाल कोई निर्णय नहीं लिया गया है। आदेश आने के बाद नई आबकारी नीति के अनुसार ही निर्णय लिया जाएगा। वहीं उज्जैन शहर के नगर निगम क्षेत्र में 17 शराब की दुकान आती हैं, जिससे आबकारी विभाग को 242 करोड़ रुपए का रेवेन्यू मिलता है, लेकिन अब मोहन सरकार कैबिनेट के फैसले के बाद इन 17 दुकानों पर ताला लग जाएगा और 242 करोड़ रुपए का नुकसान आबकारी विभाग को होगा। कलेक्टर नीरज सिंह ने बताया कि कालभैरव के इस मुद्दे पर फैसला अभी बाकी है और जब आदेश जारी होगा, तब काल भैरव मंदिर के आसपास शराब बंदी के आदेश पर विचार किया जाएगा। इन 17 शहरों में लगा बैनमोहन यादव सरकार ने मध्य प्रदेश के 17 शहरों में शराबबंदी का फैसला किया। इन शहरों में उज्जैन, ओंकारेश्वर, मैहर, खजुराहो, महेश्वर, ओरछा, सांची, नलखेड़ा, सलकनपुर, जबलपुर, मंदसौर सहित अन्य जिलों का नाम शामिल है। सीएम मोहन ने कहा कि ये सभी क्षेत्र हमारी धार्मिक आस्था के केंद्र हैं। इसी नीति के आधार पर इन सभी क्षेत्रों में सरकार ने शराबबंदी का निर्णय लिया है। खास बात ये है कि, शराबबंदी वाले क्षेत्रों से हटाई जाने वाली सभी शराब दुकानों को अन्य किसी स्थानों या शहरों में विस्थापित भी नहीं किया जाएगा। यानी ये सभी दुकानें पूरी तरह से बंद होंगी। महाकाल के सेनापति है काल भैरवधार्मिक मान्यताओं के अनुसार काल भैरव बाबा महाकाल के सेनापति है। महाकाल दर्शन से पहले काल भैरव मंदिर में दर्शन किए जाते हैं। भगवान काल भैरव को आदिकाल से ही शराब का भोग लगाकर सबके सामने पिलाई जाती है। यही वजह है कि मंदिर के पास दो शराब की दुकानें हैं, जहां से प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु करीब 5 लाख रुपए की शराब लेते है। उज्जैन में शराब बंदी को लेकर सवाल उठ रहा है कि काल भैरव मंदिर में दर्शन करने आने वाले भक्तों को शराब चढ़ाने के लिए शराब कहां से मिलेगी….? ऐसे में यहां शराब बंदी के आदेश को कैसे लागू किया जाएगा? संतों ने कहा लोगों को सीमित मात्रा में ही मिलेउज्जैन अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रामेश्वर दास जी महाराज ने कहा कि सरकार शराब बंदी लागू करे, लेकिन काल भैरव मंदिर में ख़ास ध्यान देकर नई नीति बनाए, ताकि लोग इसे सिर्फ चढ़ाने के उद्देश्य से ही खरीद सके। साथ ही भक्तों को दुकान से शराब सीमित मात्रा में ही मिले।

गौशाला से गायों के लापता होने पर संतों में आक्रोश, सिर मुंडवाकर प्रशासन से की कार्रवाई की मांग

Saints are angry over the disappearance of cows from the cowshed, they shave their heads and demand action from the administration खाचरोद स्थित श्री नंदराज गौशाला लेकोड़िया में 498 गौमाताओं के लापता होने का मामला सामने आया है। बगलामुखी शक्तिपीठाधीश्वर संत कृष्णानंद महाराज ने दस दिन पूर्व प्रशासन को इस घटना की जानकारी देते हुए गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने शिकायत में बताया कि गौशाला में एक हजार गौमाताओं के लिए मध्यप्रदेश सरकार 20 रुपये प्रति गौमाता के मान से अनुदान दे रही है। वहीं, सरकारी पशु चिकित्सक की रिपोर्ट में गौशाला में केवल 500 के आसपास गौमाताओं का उल्लेख किया गया है। संत कृष्णानंद महाराज का कहना है कि सरकारी दस्तावेजों के अनुसार गौशाला में एक हजार गौमाताओं के लिए अनुदान मिल रहा है, जबकि पशु चिकित्सक की रिपोर्ट में सैकड़ों गायों के गायब होने का जिक्र है। उनका सवाल है कि ये गायें आखिर कहां हैं? संत के आरोपों के बाद आनन फानन में गौशाला समिति सदस्यों ने अन्य गौशालाओं में गाय भेजने का जिक्र किया था, लेकिन उक्त गौशाला के संचालकों ने स्वामी के सामने आकर दूसरी गौशाला की गाय के यहां पहुंचने से मना कर दिया। स्वामी कृष्णा नंद महाराज ने अपने जन्मदिन के मौके पर स्वागत मंच को गौमाताओं की हत्या के प्रतीक रूप में श्रद्धांजलि में बदल दिया। गया और बाहर से आए कई और साधु संतों, यहां तक कि भक्तों ने गौ माता को श्रद्धांजलि देते हुए अपने सिर के बाल सर मुंडवा दिए। स्वामी यही नहीं रुके और मंच से क्षेत्रीय विधायक तेज बहादुर सिंह चौहान पर बरसते हुए कहा कि अब तो विधायक बन गए हो अगली बार भूल जाना कि तुम विधायक बनोगे और आज के बाद इस आश्रम के दरवाजे तुम्हारे लिए बिल्कुल बंद हैं। वहीं लिंकोडिया गौशाला के संत गंगा गिरी महाराज भी सामने आए उन्होंने भी मीडिया के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए कहा कि मैं तो पिछले कई वर्षों से गौशाला का संचालन करता था। कुछ दिनों के लिए बाहर क्या चला गया इन दुष्टों ने 498 गौ माता को कहा पहुंचा दिया। आप तो मीडिया वाले हैं आप ही सच्चाई बाहर ला सकते हैं और सच्चाई बाहर आनी चाहिए। मैं प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव से आग्रह करता हूं इस विषय पर तुरंत संज्ञान लें और दोषियों को जेल की सलाखों के पीछे भेजें।

कैबिनेट बैठक के लिए महेश्वर तैयार, मंत्रियों को मिलेगा मालवा निमाड़ के व्यंजन

Maheshwar ready for cabinet meeting, ministers will get dishes from Malwa Nimar शुक्रवार को पर्यटन नगरी महेश्वर में होने वाली मंत्रीमंडल बैठक के लिए तैयारियां जोरों पर है। नर्मदा रिट्रीट कैम्पस में एक बड़ा डोम तैयार किया गया है। बैठक में शामिल मंत्रियों को मालवी और निमाड़ी व्यंजन परोसे जाएंगे। दाल बाफले, चूरमा लड्डू, दाल पानिए, बेसन गट्टे की सब्जी सहित अन्य व्यंजन परोसे जाएंगे। माना जा रहा है कि कैबिनेट बैठक में धार्मिक नगरी में शराब बिक्री पर प्रतिबंध के फैसले को मंजूरी दी जाएगी। लोकमाता अहिल्या बाई होलकर का 300 वां जयंती वर्ष मनाया जा रहा है। इस मौके पर महेश्वर में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कैबिनेट बैठक करने का फैसला लिया। मुख्यमंत्री व अन्य मंत्री सुबह साढ़े दस बजे महेश्वर पहुंच जाएंगे। पहले अहिल्या प्रतिमा का पूजन होगा, फिर यहां मंत्रियों का सामूहिक फोटो सेशन होगा। दोपहर 12 बजे बैठक शुरू होगी। जिसमे प्रदेश से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले लिए जाएंगे। मालवी-निमाड़ी अंदाज में सजा परिसर जिस परिसर में बैठक होगी। उसे मालवी निमाड़ी अंदाज में सजाया गया है। दीवारों पर मांडने व संजा सजाए गए है। इसके अलावा रंग-बिरंगी वंदनदार भी सजाई गई है। परिसर के मुख्य गेट पर महेश्वर किले की प्रतिकृति बनाई गई है। महेश्वर में मुख्यमंत्री व मंत्री चार घंटे तक रुकेंगे। इसके बाद मुख्यमंत्री हेलीकाप्टर से भोपाल रवाना हो जाएंगे। परिसर के समीप एक हेलीपेड भी बनाय गया है। पहली बार निमाड़ में आने वाले महेश्वर में यह बैठक हो रही है। इससे पहले हनुमंतिया में भी कैबिनेट बैठक हो चुकी है।

सेज यूनिवर्सिटी और एक्सप्रेस ई कनेक्ट का समझौता: कृषि क्षेत्र में नवाचार

Sage University and Express E Connect tie up: Innovation in agriculture sector भोपाल ! दिनांक 22 जनवरी 2025 को एलसीबी फर्टिलाइजर और एक्सप्रेस ई कनेक्ट के प्रबंध निदेशक उदित नारायण और भोपाल स्थित सेज यूनिवर्सिटी के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता जैव उर्वरकों और अन्य संबंधित उत्पादों के प्रदर्शन, प्रमाणन, निर्माण और व्यवसायीकरण को बढ़ावा देने के लिए किया गया है। इस साझेदारी के तहत शोध और नवाचार को प्रोत्साहित किया जाएगा, जिससे कृषि क्षेत्र में क्रांति आने की उम्मीद है। गौरतलब है कि इस समझौते से पहले भी एलसीबी फर्टिलाइजर और एक्सप्रेस ई कनेक्ट ने मध्य प्रदेश में महत्वपूर्ण पहल की है। 25 दिसंबर 2024 को, अटल जी की जन्म शताब्दी के अवसर पर, पंचायती राज मंत्री माननीय प्रहलाद पटेल जी ने दमोह जिले में एलसीबी फर्टिलाइजर और एक्सप्रेस ई कनेक्ट के साथ मिलकर आत्मनिर्भर गौशाला परियोजना का शुभारंभ किया था। इस पहल का उद्देश्य गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाना और कृषि उत्पादकता में सुधार करना था। इस आत्मनिर्भर गौशाला परियोजना के तहत जैव उर्वरकों का निर्माण गोबर और अन्य जैविक कचरे से किया जाता है। इसका उपयोग खेतों में किया जाने वाला रासायनिक उर्वरकों का स्थान लेने के लिए किया जा रहा है। यह मॉडल न केवल पर्यावरण को सुरक्षित बनाता है, बल्कि किसानों को किफायती और प्रभावी विकल्प भी प्रदान करता है। इस पहल से किसानों के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिली है। Read More: अटल जन्म शताब्दी पर जैविक खेती को बढ़ावा: दमोह में जैविक खाद इकाई का शुभारंभ नए एमओयू के तहत सेज यूनिवर्सिटी शोध और तकनीकी सहयोग में अपनी भूमिका निभाएगी। यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञ किसानों और उद्योग के लिए प्रमाणन प्रक्रियाएं विकसित करेंगे। इसके साथ ही, जैव उर्वरकों और संबंधित उत्पादों के प्रदर्शन के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। यह साझेदारी छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए भी नए अवसर खोलेगी। एलसीबी फर्टिलाइजर और एक्सप्रेस ई कनेक्ट ने इस समझौते के माध्यम से कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाने का संकल्प लिया है। आत्मनिर्भर गौशालाओं को और अधिक व्यापक रूप में स्थापित करने और जैव उर्वरकों के उपयोग को प्रोत्साहित करने की योजना है। साथ ही, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन और पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता दी जाएगी। इस समझौते के माध्यम से मध्य प्रदेश के कृषि क्षेत्र में नवाचार और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा। माननीय प्रहलाद पटेल जी द्वारा शुरू की गई आत्मनिर्भर गौशाला परियोजना और नई साझेदारी के बीच का यह तालमेल राज्य और देश के विकास के लिए मील का पत्थर साबित होगा।

अहिल्या देवी की नगरी महेश्वर में 24 को कैबिनेट की बैठक, बस सेवा शुरू करने का हो सकता है ऐलान

Cabinet meeting on 24th in Ahilya Devi’s city Maheshwar, announcement may be made to start bus service. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में 24 जनवरी को लोकमाता अहिल्या देवी की नगरी महेश्वर में कैबिनेट बैठक आयोजित की जाएगी। इस महत्वपूर्ण बैठक में सरकार द्वारा प्रस्तावित प्रदेश में बस सेवा शुरू करने को मंजूरी मिलने की संभावना है। सरकार इस वर्ष के अंत तक प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में यात्री बस सेवा प्रारंभ करना चाहती है। शुरू में कुछ चयनित रूटों पर बसे चलाई जाएंगी। बैठक के बाद परिवहन विभाग इस प्रस्ताव को लेकर आगे की कार्रवाई तेज करेगा। इसके तहत बस सेवा संचालित करने के लिए एक कंपनी स्थापित की जाएगी, जो प्रदेश में यात्री बसों का संचालन करेगी। इस बैठक को लेकर सभी संबंधित विभाग तैयारियों में जुटे हुए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि वर्ष 2025 मालवा की महारानी पुण्यश्लोका अहिल्या देवी का 300 वां जयंती वर्ष है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार ने देवी अहिल्या माता की 300वीं जयंती मनाने का निर्णय लिया है। इस उपलक्ष्य में हम पूरे वर्ष अलग-अलग कार्यक्रम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कैबिनेट की अगली बैठक मालवा की महारानी लोकमाता अहिल्या देवी को समर्पित की जाएगी। कैबिनेट की बैठक 24 जनवरी को लोकमाता की राजधानी रही धार्मिक नगरी महेश्वर में होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोमवार को जारी अपने संदेश में यह जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकमाता अहिल्या देवी का जीवन धार्मिकता, त्याग और करुणा का प्रतीक था। वे न केवल एक कुशल शासिका थीं, बल्कि एक आदर्श नारी और माता भी थीं। लोकमाता अहिल्या देवी के शासनकाल, उनकी कर्तव्यपरायणता, धर्म परायणता, सुशासन, दानशीलता, धार्मिकता आदि गुणों से हमें सद्मार्ग और सुशासन के जरिए लोक-कल्याण की असीम ऊर्जा और प्रेरणा मिलती है। उनके व्यक्तित्व की आभा से पूरा समाज आज भी उन्हें अत्यंत श्रद्धा से देखता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश की पावन धरा वह स्थान है, जहां रानी दुर्गावती, लोकमाता अहिल्या देवी, सम्राट विक्रमादित्य और राजा भोज जैसे प्रतापी एवं सुशासन लाने वाले शासक हुए हैं। इनके नाम और काम पर मध्यप्रदेश सदैव गौरवान्वित होता आया है। इस संदर्भ में महिला शासिका लोकमाता अहिल्या देवी का नाम भी अजर-अमर है। उनके नाम पर समर्पित मंत्रि-परिषद की बैठक में हम जनकल्याण से जुड़ी कई नवीन योजनाओं को मंजूरी देने जा रहे हैं। उन्होंने प्रदेश की जनता से अपील की कि हम सब मालवा की लोकमाता अहिल्या देवी के पुण्य स्मरण में शामिल हों। वे स्वयं और सभी मंत्रीगण मिलकर अहिल्या माता को समर्पित मंत्रिपरिषद की बैठक के लिए महेश्वर जाएंगे और यही लोकमाता को उनके सद्कार्यों को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

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