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अतिक्रमणकारियों का मुकाबला फ्रंट में नहीं बल्कि समुदाय विरुद्ध समुदाय के जरिए करें

Confront the encroachers not from the front but through community against community भोपाल। आईएफएस अफसरों की दो दिन चली मंथन का समापन शनिवार को हो गया। मंथन में अपर मुख्य सचिव वन अशोक वर्णवाल ने फील्ड के अवसरों को दो मूल मंत्र बताएं। पहला यह कि अतिक्रमणकारियों का मुकाबला फ्रंट में रहकर नहीं करे, बल्कि उसे समुदाय वर्सेस समुदाय को आगे कर करें। जंगल बचाने वाले समुदाय का सपोर्ट करें और उन्हें ताकतवर बनाएं। दूसरा मंत्र टीम भावना से काम करने का दिया।  अपैक्स भवन में दो दिन चली मैराथन मंथन में फील्ड के अफसरों ने जितने भी प्रेजेंटेशन दिए, वे सभी प्रस्तुति एसीएस वर्णवाल के मानक पर खरे नहीं उतरे। शनिवार को सतना डीएफओ मयंक चांडीवाल ने वन अधिकार अधिनियम को लेकर प्रेजेंटेशन प्रस्तुत किया। चांडीवाल ने बताया कि अधिनियम में दो गवाह के आधार मानकर पट्टा देने की अनुशंसा कर दिया जाता है। जबकि दो साक्ष्य के आधार पर हो, जिसमें एक सैटलाइट इमेजरी होना चाहिए। इस पर एसीएस वर्णवाल बोले कि आप अपने ढंग से अधिनियम के प्रावधानों का प्रजेंटेशन करेंगे। अधिनियम का इंटरप्रिटेशन अपने हिसाब से ना करें। वर्णवाल ने यह भी कहा कि यदि आप सहमत नहीं है तो अपनी आपत्ति लिखित में कलेक्टर के समक्ष दर्ज कराएं। आपकी आपत्ति को कलेक्टर इग्नोर नहीं कर सकता। इसी मसले पर एपीसीसीएफ भी कुछ कहना चाहते थे किन्तु एसीएस ने उन्हें बोलने नहीं दिया। पन्ना नेशनल पार्क की फील्ड डायरेक्टर अंजना तिर्की ने एसीएस के समक्ष जानवर मुआवजा का अधिकार फॉरेस्ट अफसर को देने की बात रखी। इस पर वर्णवाल ने कहा कि राजस्व अधिकारी को अधिकार इसलिए दिया गया है क्योंकि उनके पास मुआवजा आकलन करने का अनुभव है। उन्होंने यह भी कहा कि शाजापुर जैसे वन मंडलों में स्टाफ की कमी होती है तो मुआवजा का काम कैसे कर पाएंगे।  टीम भावना से करें काम एसीएस वर्णवाल ने दो दशक पहले देवास जिले के मेहंदीखेड़ा में हुई गोलीचालन को लेकर एक रिपोर्ट केस स्टडी के रूप में फॉरेस्ट अफसर के बीच वितरित की। तब वर्णवाल देवास के कलेक्टर थे। फॉरेस्ट के अफसर से सवाल किया कि इसमें आप बताएं क्या किया जा सकता था? इसके बाद उन्होंने अफसर के समक्ष कहा कि इस गोलीचालन में चार लोगों की मौत हुई थी। इसकी मजिस्टिकल जांच हुई थी। तब देवास में डीएफओ महेंद्र धाकड़ थे। उन्होंने बताया कि मजिस्ट्रियल जांच में कलेक्टर एसपी और डीएफओ के बयान एक जैसे ही थे। हम लोगों ने टीम भावना के साथ घटना और मजिस्ट्रियल जांच का सामना किया। इसलिए डीएफओ कलेक्टर और एसपी के साथ मिलकर काम करें।  नए अफसरों को परोसा झूठ एसीएस वर्णवाल ने देवास के मेहंदीखेड़ा गोलीकांड के मामले में कुछ झूठ भी परोसा है। बड़वाल ने एनजीओ तक का नाम नहीं बताया जबकि आदिवासी मुक्ति संगठन के नाम से जनता को वर्ग लाया जा रहा था और इसके संचालक राहुल बनर्जी और माधुरी बेन थे, जो आज भी सक्रिय है। वर्णवाल ने फील्ड से आए अफसर से यह बताया कि इस घटना को लेकर विधानसभा क्वेश्चन तक नहीं हुई। जबकि गोली कांड को लेकर सदन में खूब हंगामा हुआ स्थगन लाये गए थे और विधानसभा की कार्रवाई बाधित भी हुई। इसके चलते सरकार को कलेक्टर, एसपी और डीएफओ को हटाना भी पड़ा था। इस पूरी घटना को लेकर तत्कालीन पीसीसीएफ आरडी शर्मा के कहने पर मैंने ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की थी। मैंने दैनिक नई दुनिया में तीन दिन तक रिपोर्टिंग का एपिसोड चलाया। अपनी रिपोर्टिंग में मैंने यह  स्पष्ट कर दिया था कि तत्कालीन प्रमुख सचिव वन बनर्जी और एनजीओ संचालक कर्ता राहुल बनर्जी के बीच दोस्ताना संबंध रहे और उनमें टेलिफोनिक बातचीत भी होती रही। राहुल पुलिस की नजरों में फरार था पर वल्लभ भवन में अधिकारियों से मिलता जुलता रहा। मेरे द्वारा खबर प्रकाशित करने के बाद वन विभाग प्रमुख सचिव से बनर्जी को हटा दिया गया था। तत्कालीन पीसीएफ आरडी शर्मा आज भी जीवित है।

शक्कर कारखाने को चलाने के लिए संघर्ष समिति का अनिश्चितकालीन धरना शुरू

Sangharsh Samiti begins indefinite strike to run sugar factory मुरैना ! जिले के सबसे बड़े उद्योग दी मुरैना मंडल सहकारी कारखाने को चलाने के लिए, कर्मचारी किसानों का बकाया भुगतान करने के लिए ,मुख्यमंत्री की घोषणाओं पर अमल करने के लिए, कारखाने की परिसंपत्तियों को नहीं बेची जाने और नीलामी रोकने के लिए एवं शासन से विशेष अनुदान के लिए की मांगों के लिए रोजगार विशाल धरना कैलारस शक्कर कारखाने पर प्रारंभ हुआ जौरा विधानसभा के प्रत्येक गांव से किसान अपने साथ आटा सब्जी लेकर आ रहे हैं  किसानों की यह मंशा है कैलारस का कारखाना फिर से शुरू होना चाहिए   इस धरने में कांग्रेस पार्टी के साथ कम्युनिस्ट पार्टी बहुजन समाज पार्टी आम आदमी पार्टी के नेता भी धरने पर  बैठे हैं, अपने सम्बोधन में अशोक तिवारी ने कहा कि शक्कर कारखाना सहकारिता की धरोहर है इसमें किसानों की हिस्सेदारी है, तिवारी ने कहा जिस प्रकार सरकार अन्य कारखानों को चालू करने के लिए रुपया दे रही है तो कैलारस  के कारखाने को भी चालू करने के लिए पैसा देना चाहिए, पूर्व विधायक रबीन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि इस कारखाने से हज़ारों किसान मजदूरों दुकानदारों को बहुत लाभ था, आज यहां का युवा बाहर अन्य प्रान्तों में मजदूरी करने जा रहे हैं, बसपा के नंदलाल खरे ने कहा कि सरकार की मंशा है कि इस कारखाने की को अपने लोगों को देना चाहती है  ,लेकिन हम शक्कर कारखाने की जमीन को  बेचने नहीं देंगे और हमारी पार्टी के नेता भी इस धरने में सम्मलित होंगे, पिछड़ा वर्ग कांग्रेस के अध्यक्ष राजेश राठौर ने कहा कि सरकार कितनी भी ताकत लगा ले पंकज उपाध्याय के साथ हजारों सिपाही साथ हैं  जिला कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष राजेंद्र यादव ने कहा जिस प्रकार मुरैना का बस स्टेंड खरीदा इसी तरह कैलारस शक्कर कारख़ाने को खरीदना चाहते हैं, इस क्षेत्र की जनता चाहती है कि कारखाना चलाना चाहिए पार्टी और क्षेत्र की जनता आपके साथ हैं, कॉंग्रेस के अशोक सिंह सिकरवार में कहा कि नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि तुम मुझे सांसद बना दो फिर में शक्कर कारखाने को चलाएंगे, सांसद बन गए फिर भी कारखाना नहीं चला, चुनाव में शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि बीजेपी की सरकार बनेगी तो में कैलारस में केबिनेट मीटिंग कराऊंगा, सरकार बनी पर कारख़ाना नही चला ,जिला कॉंग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष विष्णु अग्रवाल ने कहा कि शक्कर कारखाना अगर चालू होगा तो सबको फायदा होगा,  अगर कारखाना चालू होता है तो सबको लाभ होगा, कॉंग्रेस के महासचिव जसवीर सिंह गुर्जर ने कहा कि  शक्कर कारखाने जब चलता था तब पूरे क्षेत्र का गन्ना यहां आता था किसानों की आवाज को बीजेपी दबाना चाहती है बीजेपी के नेताओं को भी समझना चाहिए कि क्षेत्र की जनता बहुत परेशान हैं उन्हें भी जनता का दर्द समझना चाहिए, अभी समय है सबको जागना पड़ेगा, सरकार लोगों की आवाज को दबाना चाहती है, एक धरना जिले और भोपाल में भी होना चाहिये, जिससे पूरे प्रदेश की जनता दिखेगी ,मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व महासचिव रामलखन डंडौतिया  ने कहा कि बीजेपी सरकार की नीति और नीयत में खोट है  ,पहले  पोरसा और मुरैना का बस स्टेंड खरीदा ऐसे ही ये शक्कर कारखाने को अपने नुमाइंदों को दिलवाना चाहती है, पंकज उपाध्याय ने कारखाने को बचाने के लिए जो बीड़ा उठाया है हम सबको उनका साथ देना चाहिए, सबकी जिम्मेदारी है कारखाने को बचाना है जब तक मोहन सरकार नीलामी नहीं रोकती तब तक धरना प्रदर्शन चलता- रहेगा, पूर्व विधायक महेशदत्त मिश्रा ने कहा कि सरकार तुमने मील को बंद करा दिया लेकिन पहले तुमने चालू करने की कहा था केंद और प्रदेश में तुम्हारी सरकार है  दस हजार की जरूरत थी कारखाना चलाने की पर तुमने कारखाना को चालू कराना उचित नहीसमझ, cpm के गयाराम  धाकड ने कहा कि मैं भी एक किसान हूं मैंने भी इस कारखाने में गन्ना दिया था, पूरे क्षेत्र में गन्ना की डिपो थी  अब सब बंद हैं, मेने कई बार कहा कि कारखाने की मशीन खराब थी पर हमारी किसी ने सुनवाई नही की  जान बुझ कर कारखाने को बंद कराया गया, हमने कहा कारखाने में चोरी हो रही हैं पर हमारी बातों को नहीं सुना धरने मैं मुख्य रूप से राजवीर धाकड़ राजेश गुप्ता सुरेंद्र शाक्य नंदलाल खरे बदनसिंह जी आम आदमी पार्टी से डॉक्टर मुरारी लाल अमर विनोद दुबे राम इत्यागी ओम प्रकाश शाक्य डॉ शम्मा कुरेशी शराफत अली खान जगदीश प्रजापति ओम प्रकाश शर्मा संतोष सोलंकी धर्मेंद्र सिंह सिकरवार आदिराम जाटव प्रमोद शर्मा पवन शर्मा राजकुमार सिकरवार मुरारी लाल धाकड़ सुरेश उपाध्याय जगदीश शुक्ला विष्णु अग्रवाल अशोक  सिकरवार राजेश राठौर बृजकिशोर सखवार शैलेंद्र बौहरे राजेंद्र सिंह जादौन के साथ बड़ी संख्या में किसान एवं युवा  मौजूद रहे।

शहडोल में 7वां रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव, सीएम यादव पहुंचे, 30 हजार करोड़ के प्रस्तावों पर चर्चा होगी

Seventh Regional Industry Conclave of Madhya Pradesh मध्य प्रदेश का सातवां रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव आज गुरुवार को शहडोल जिले में आयोजित हो रहा है। कॉन्क्लेव में शामिल होने के लिए सीएम मोहन यादव भी पहुंच गए हैं। इस कॉन्क्लेव में शामिल होने के लिए पांच हजार निवेशकों ने ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराया है। मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तरप्रदेश और महाराष्ट्र से लगभग 40 से ज्यादा बड़े उद्योगपति शहडोल पहुंच चुके हैं। इनके अलावा बड़ी संख्या में स्थानीय निवेशक भी पहुंचे हैं। शहडोल के इंजीनियरिंग कॉलेज में आयोजित हो रहे इस कॉन्क्लेव में विशेष रूप से खनिज उद्योग, सौर ऊर्जा और पर्यटन क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा होगी। साथ ही एसीसी सीमेंट, अल्ट्राटेक सीमेंट और रिलायंस इंडस्ट्री के प्रतिनिधि शामिल इसमें शामिल होंगे। कॉन्क्लेव में 30 हजार करोड़ के निवेश प्रस्तावों पर चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है। कॉन्क्लेव में शामिल होने से पहले सीएम यादव ने की गौ सेवारीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव का लेकर सीएम मोहन यादव ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी। उन्होंने एक्स कर लिखा- भारतीय संस्कृति में किसी भी शुभ कार्य से पूर्व गौ माता के पूजन का विशिष्ट महत्व होता है। आज शहडोल में आयोजित “रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव” में सहभागिता से पूर्व निवास स्थित गौशाला में जगतजननी गौ माता की सेवा कर प्रदेशवासियों के कल्याण की प्रार्थना की। मैया के आशीर्वाद से अनंत संभावनाओं वाले मध्यप्रदेश में निवेश की वर्षा हो और विकसित मध्यप्रदेश के संकल्प सिद्धि का पथ प्रदर्शित हो, यही प्रार्थना है। यह प्रस्ताव मिलेरीजनल इंडस्ट्री कान्क्लेव में ग्राम पटासी में ऐथेनॉल प्लांट के लिए 140 करोड़ रुपए, ग्राम मुदरिया में खाद्य प्रसंस्करण के लिए 3.5 करोड़ रुपए तथा ग्राम छतवई में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में 5 करोड़ रुपए के प्रस्ताव मिले है। औद्योगिक विकास के लिए शहडोल जिले के दियापीपर में 51.135 हेक्टेयर, तथा ग्राम चन्नौड़ी में 2.023 हेक्टेयर जमीन चिन्हित की गई है। उमरिया जिले में आद्योगिक क्षेत्र बड़वार में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के लिए 5 करोड़ रुपए , बड़वार में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के लिए 2 करोड़ रूपये, ग्राम रोहनिया में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के लिए 2.5 करोड़ के प्रस्ताव मिले हैं।

मप्र में 7 साल बाद भी कैंपा प्राधिकरण का गठन नहीं, केंद्र को दिखाया ठेंगा

Even after 7 years, CAMPA authority has not been formed in Madhya Pradesh, showing contempt to the Centre. भोपाल। केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु मंत्रालय ने अगस्त 2018 को सभी राज्यों में प्रतिपूरक वनीकरण कोष एवं योजना प्राधिकरण कैपा गठन के निर्देश दिए थे। 7 साल बीत जाने के बाद भी मप्र में कैंपा प्राधिकरण का गठन नहीं हो पाया। जबकि केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु मंत्रालय सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन के आधार पर प्राधिकरण के गठन के आदेश दिए थे। यानी मप्र में सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन की भी हो रही है।प्राप्त जानकारी के अनुसार केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु मंत्रालय के निर्देश पर देश के अन्य राज्यों में कैंपा प्राधिकरण का गठन हो गया है। जबकि मप्र में अभी तक पीसीसीएफ का एक पद बचाने के लिए गठन नहीं किया गया। मौजूदा काल में राज्य कैडर में पीसीसीएफ के पद भी कम हो गए हैं। बावजूद इसके प्राधिकरण का गठन करने को लेकर शीर्ष अफसरों द्वारा न केवल आना-कानी की जा रही है, बल्कि मुख्य सचिव से लेकर मुख्यमंत्री तक गलत तथ्य प्रस्तुत किए जा रहे हैं। विभाग में स्थितियां है कि पीसीसीएफ कैंपा का पद हथियाने के लिए वरिष्ठ आईएफएस अधिकारी एड़ी से चोटी तक का जोर लगा रहे हैं। अब तक जितने भी पीसीसीएफ कैंपा के पद पर पदस्थ रहे आईएफएस अफसरों की मुख्यमंत्री हाउस तक सीधी पहुंच रही है। फिलहाल मौजूदा स्थिति में पीसीसीएफ कैम्पा पद पर पीके सिंह है, जो 31 जनवरी को सेवामुक्त हो रहें हैं। अब तो बना दिया जाना चाहिए कैंपा प्राधिकरण लंबे समय तक केंद्र में अपनी प्रशासनिक क्षमता का लोहा मनवाने वाले अनुराग जैन के मुख्य सचिव बनने के बाद कैंपा प्राधिकरण के गठन की संभावनाएं बढ़ गई है। कैंपा प्राधिकरण के गठन होने पर पीसीसीएफ कैंपा का पद समाप्त हो जाएगा, क्योंकि इसमें मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) पद का प्रावधान है। इस पद पर एवीसीसीएफ स्तर के अधिकारी को ही सीईओ पदस्थ जा सकता है। नाथ सरकार ने नहीं दिया प्राधिकरण पूर्ववर्ती कमलनाथ सरकार के कार्यकाल bमें तत्कालीन अपर मुख्य सचिव एपी श्रीवास्तव ने केंद्र के निर्देश पर राज्य में कैथा प्राधिकरण के गठन की पहल शुरू की। प्राधिकरण के गठन की प्रक्रिया शुरू होते ही तत्कालीन पीसीसीएफ पद पर विराजे एबी गुप्ता छिंदवाड़ा की दौड़ लगा दीथी। तत्कालीन मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव अशोक वर्णवाल ने गुप्ता की मुलाकात कमलनाथ से कराई। इस मुलाकात में कैंपा पीसीसीएफ गुप्ता के बाद नाथ के निर्देश पर कैंपा प्राधिकरण के गठन पर विराम लग गया। कमलनाथ के बाद शिवराज सरकार ने भी प्राधिकरण के गठन पर पहल नहीं की। इसकी वजह भी स्पष्ट थी कि तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को अपने करीबी रिश्तेदार महेंद्र सिंह धाकड़ को पीसीसीएफ कैंपा के पद पर उपकृत करना था। केंद्र से नहीं मिली कैंपा पीसीसीएफ की मंजूरी केंद्र सरकार ने कैपा पीसीसीएफ का पद अस्थाई तौर पर 3 साल के लिए स्वीकृत किया था, जिसकी मियाद जनवरी 2019 को समाप्त हो गई। यानी 2019 के बाद से अब तक पीसीसीएफ कैंपा का पद कैडर में स्वीकृत न होने के बाद भी पोस्टिंग होती चली आ रही है। अपर मुख्य सचिव वन अशोक वर्णवाल कैंपा प्राधिकरण संबंधित प्रस्ताव को मुख्यमंत्री के समक्ष मूव करना चाहिए। मौजूदा मुख्यमंत्री मोहन यादव के अधीन वन विभाग भी है। यानी सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन और केंद्र सरकार केंद्र सरकार के निर्देश के 7 साल बाद तो मप्र प्राधिकरण का गठन कर दिया जाना चाहिए। फैक्ट फाइल

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में छात्रों को ले जा रही बस से ट्रक टकराया, एक की मौत; कई घायल

A truck collides with a bus carrying students in Bhopal, the capital of Madhya Pradesh, one dead; many injured मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में शुक्रवार को एक भीषण हादसा हो गया जिसमें छात्र-छात्राएं घायल हो गए हैं. हादसे में 6 बच्चों की हालत गंभीर बताई जा रही है. वहीं एक की मौत हो गई है. कई और बच्चों को चोटें आई हैं. बच्चों और बस ड्राइवर समेत अन्य घायलों को इलाज के लिए हॉस्पिटल में भर्ती किया गया है. बच्चों का इलाज किया जा रहा है. यह सड़क हादसा शहर के भोरी बायपास के पास हुआ है. पुलिस भी मौके पर पहुंची और सभी घायलों को हॉस्पिटल पहुंचाने में मदद की. जानकारी के मुताबिक यह हादसा भौरी बाईपास पर हुआ है, जहां छात्रों से भरी हुई बस जा रही थी और सामने से तेज रफ्तार ट्रक ने बस को टक्कर मार दी. बस का सामने का हिस्सा कचूमर बन चुका है. हादसे के बाद स्थानीय लोग तुरंत मदद के लिए दौड़ा और छात्रों को बस से निकालना शुरू किया. इसी बीच पुलिस को भी जानकारी दी गई. पुलिस भी मौके पर पहुंची और घायल बच्चों को हॉस्पिटल में भर्ती करवाया. घायलों का चल रहा इलाजघायलों के इलाज की व्यवस्था की जा रही है. सभी छात्र-छात्राएं पीपुल्स स्कूल ऑफ रिसर्च एंड टेक्नोलॉजी के इजीनियरिंग के छात्र हैं. सभी छात्र आईसर कंपनी के प्लांट पर विजिट के लिए गए थे. हादसे में 6 बच्चों की हालत नाजुक बताई जा रही है. फिलहाल डॉक्टर्स की टीम बच्चों का इलाज करने में जुटी हुई है. पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक जिस वक्त छात्र-छात्राएं विजिट से वापस लौट रहे थे उसी वक्त बस दुर्घटनाग्रस्त हुई है. एक छात्र की मौतबिरसिंहपुर पाली के रहने वाले छात्र विनीत साहू की हादसे के बाद मौत हो गई है. उसे गंभीर हालत में हॉस्पिटल ले जाया गया था. वहीं छात्र विमल यादव और छात्र शिवम लोधी गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं. उनका क्रिटिकल केयर में इलाज किया जा रहा है. बस के अंदर बैठे बाकी छात्र-छात्राओं को यानी करीब 29 छात्रों को मामूली चोटें आई हैं. सभी छात्रों को हादसे के बाद पीपुल्स हॉस्पिटल शिफ्ट किया गया है.

नहीं आएगी जिला अध्यक्षों की सूची, भाजपा में घमासान के चलते बदला नियुक्ति का फार्मुला

bjp sangathan election bjp sangathan election list of district president will not be released due to tussle in mp bjp BJP Sangathan Election: भाजपा में जिला अध्यक्षों की सूची की राह देख रहे पार्टी कार्यकर्ताओं का इंतजार अब खत्म हो गया है। क्योंकि दिल्ली में दो दिन तक चली मंत्रणा के बाद अब नया फॉर्मूले पर सहमति बनी है। दरअसल, भाजपा नेताओं के बीच आपसी विवाद इतना गहराया कि संगठन ने घोषणा का तरीका ही बदल दिया। सूत्रों के मुताबिक संगठन सूची जारी कर विवाद से बचना चाह रहा है। इसलिए चुनाव अधिकारियों को जिला अध्यक्षों के घोषणा की जिम्मेदारी दे गई है। अब जिला निर्वाचन अधिकारी ऊपर से बताए गए नाम पर सभी की सहमति बनाकर जिला अध्यक्षों की घोषणा करेंगे और वहां उपजे विवाद को भी संभालेंगे।विवाद के बीच संगठन की नसीहतसूची के इंतजार के बीच गुरुवार सुबह प्रदेश संगठन के नेताओं की वर्चुअल बैठक बुलाई गई। जिसमें प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा ने दो टूक नसीहत देते हुए कहा है कि जिला अध्यक्ष बनने के बाद उनके चहेते नेता के घर के बजाय पार्टी कार्यालय में स्वागत सत्कार का कार्यक्रम होना चाहिए।वहीं बैठक में जुड़े प्रदेश प्रभारी महेंद्र सिंह ने सभी नेताओं को नए जिला अध्यक्ष मिलने से पहले बधाई दी। कहा कि सभी को साथ मिलकर संगठन के कार्यों को धरातल पर उतारना है। बता दें बैठक में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा के साथ सभी जिला निर्वाचन अधिकारी भी मौजूद रहे।पर्यवेक्षक बताएंगे जिलाध्यक्षों के नामसंगठन ने इतने विवाद के बाद भी लोकतांत्रित व्यवस्था का फॉर्मूला बरकरार रखा है। राष्ट्रीय संगठन की ओर से तय की गई अंतिम सूची के नामों को प्रदेश संगठन द्वारा पर्यवेक्षकों को बताया जाएगा। फिर पर्यवेक्षक जिला निर्वाचन अधिकारी को उन नामों के बारे में बताएंगे। जहां से घोषणा की जाएगी। सूत्रों के मुताबिक तय होने वाले नाम को सीधे मैसेज कर पार्टी कार्यालय बुलाया जाएगा। इस दौरान वर्तमान जिला अध्यक्ष और निवर्तमान जिला अध्यक्ष को भी पूरी जानकारी दी जाएगी।

लेडी कांस्टेबल सहित दो पुलिस वालों ने की वसूली, भोपाल में 15 स्पा सेंटर्स से पकड़े गए थे लड़के-लड़कियां

 भोपाल। छह साल बाद स्पा सेंटरों पर हुई भोपाल पुलिस की ताबड़तोड़ कार्रवाई ने पुलिसकर्मियों की पोल खोलना शुरू कर दी है। छापामार कार्रवाई के दौरान पुलिस ने जिन आरोपितों को पकड़ा था, उन पर पीटा (प्रीवेंशन आफ इम्मोरल ट्रैफिकिंग एक्ट) के अतंर्गत कार्रवाई की गई थी। जानकारी के अनुसार सभी आरोपितों को मुचलके पर छोड़ा जाना था, लेकिन महिला थाने में पदस्थ आरक्षक खुशबू सिंह चंदेल और क्राइम ब्रांच के आरक्षक सुनील चंदेल ने स्पा सेंटर में पकड़े गए युवक-युवतियों को जेल जाने का डर दिखाकर वसूली कर ली। दोनों आरक्षकों को निलंबित कर दिया गया जिसके बाद उच्च अधिकारियों ने जांच करते हुए दोनों आरक्षकों पर निलंबन की कार्रवाई की। बता दें शनिवार को क्राइम ब्रांच ने शहर के अलग-अलग इलाकों के 15 स्पा सेंटर में रेड की थी। जिसमें 68 युवक-युवतियां पकड़ी गई थीं, जिनके विरूद्ध अलग-अलग थाने में प्रकरण दर्ज किए गए थे। एक को नकद, दूसरे को ऑनलाइन भेजे गए थे 20 हजार शनिवार को छापेमार कार्रवाई के बाद जब पुलिस ने आरोपितों को मुचलके पर छोड़ने में देरी की तो पकड़े गए आरोपितों ने हंगामा शुरू कर दिया। आरोपितों ने कहा कि छोड़े जाने उन्होंने आरक्षक खुशबू को रुपये दिए थे, फिर जमानत में देरी क्यों हो रही है। यह बात अधिकारियों तक पहुंची तो दोनों आरक्षकों की जांच कराई गई। जिसमें खुशबू और चंदेल की डील का खुलासा हुआ। आरोपितों ने खुशबू को नकद राशि दी थी और चंदेल को 20 हजार रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर किए थे। संदिग्ध पुलिसकर्मियां की जांच जारी विभिन्न थाना क्षेत्रों में संचालित जिन स्पा सेंटरों में अनैतिक गतिविधियां जारी हैं, उच्च अधिकारी उनमें पुलिस के संरक्षण को लेकर जांच कर रही है। डीसीपी श्रद्धा तिवारी ने बताया कि स्पा सेंटरों में पुलिसकर्मियों की लिप्तता को लेकर जांच की जा रही है। दो आरक्षकों पर कार्रवाई हुई है। आगे भी यदि कोई किसी तरह से दोषी पाया जाता है तो उनपर भी कड़ी कार्रवाई होगी। वहीं एमपी नगर जोन-2 में संचालित मिकाशो फैमली स्पा सेंटर व पंचकर्म में पकड़ी गई युगांडा की युवती को लेकर भी पुलिस जांच में जुटी है। दो स्पा संचालकों पर एफआईआर इधर एमपीनगर थाने में स्पा संचालकों पर एफआईआर दर्ज की गई है। संचालकों ने स्पा सेंटर में काम करने वाले कर्मचारियों की जानकारी पुलिस को नहीं दी थी, जिसके बाद यह कार्रवाई हुई है। पुलिस के अनुसार आलोक दुबे क्षेत्र में स्पा सेंटर चलाते हैं, उन्होंने सेंटर में काम करने वाले कर्मचारियों की जानकारी नहीं दी थी। साथ ही एक अन्य स्पा सेंटर के संचालक संतोष कुमार व मयंक वर्मा पर भी एफआईआर दर्ज की गई है।

‘जीतू और जय’ की जोड़ी के पीछे है दिग्विजय सिंह का माइंडगेम! कमलनाथ होते जा रहे हैं साइड

digvijay singh mind game behind new pairing of jeetu patwari and jai vardhan singh in mp congress भोपाल ! किसी बड़े टास्क या मिशन को पूरा करने के लिए पार्टनरशिप या कहे तो जोड़ी जरूरी होती है। खासकर कांग्रेस के अंदर की जोड़ी हमेशा चर्चा में रहती है। विधानसभा चुनाव के दौरान इस बार कमलनाथ और दिग्विजय सिंह की जोड़ी थी। सियासी गलियारों में इसे जय-वीरू की जोड़ी कहा जाता था लेकिन यह खास कमाल नहीं कर पाई है। इन दिनों एमपी कांग्रेस में नई जोड़ी की चर्चा है, यह जोड़ी जीतू और जय की है। यानी जीतू पटवारी और जयवर्धन सिंह की। साथ आने के बाद इस जोड़ी ने कमाल भी शुरू कर दिया है। एमपी उपचुनाव में जीतू और जय की जोड़ी ने मिलकर श्योपुर में कमाल किया। कहा जा रहा है कि इस जोड़ी को आगे बढ़ाने में पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह का माइंडगेम है। इसकी वजह से कमलनाथ जैसे दिग्गज नेता असहज होने लगे हैं। पार्टी के दिग्गज नेता भी इशारों इशारों में कह चुके हैं कि इन सबके पीछे दिग्विजय सिंह ही हैं। दिग्गी राजा तैयार कर रहे मैदान दिग्गी राजा राजनीति से रिटायर्ड होने से पहले अपने बेटे के लिए मैदान तैयार करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। इसके लिए समय समय पर जयवर्धन सिंह को जिम्मेदारियां भी सौंपी गई हैं। जिसे लेकर दूसरे नेता और कार्यकर्ताओं में असंतोष भी दिखा है। वहीं जयवर्धन सिंह और जीतू पटवारी ने खुद को साबित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। इसके सबसे अच्छा एग्जांपल श्योपुर विधानसभा उपचुनाव हैं। इस चुनाव में जयवर्धन सिंह को प्रभारी बनाया गया था। इस दौरान जीतू और जयवर्धन ने जनमत साधने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। और उसका परिणाम जीत को तौर पर कांग्रेस पार्टी को मिला भी है। सीनियर नेता ने खड़े किए सवाल कांग्रेस में चल रहे इस माइंडगेम पर उनकी पार्टी के वरिष्ठ नेता सवाल खड़े कर चुके हैं। पूर्व नेता प्रतिपक्ष रह चुके कांग्रेस के दिग्गज नेता अजय सिंह जीतू पटवारी की अध्यक्षता वाली एमपी कांग्रेस की नई कार्यकारिणी पर भी निशाना साधा था। इसे दौरान उन्होंने बयान देते हुए यह भी कहा था कि कांग्रेस का भगवान ही मालिक है। पर्दें के पीछे वालों पर तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस को बर्बाद करने वाले लोग आज भी पार्टी को पीछे से चला रहे हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हुआ पोस्ट दोनों की एक मुलाकात से जुड़ा हुई वीडियो भी सामने आया है। जिसमें जीतू पटवारी और जयवर्धन सिंह हंसी खुशी एक दूसरे से बात करते नजर आ रहे हैं। इसे दौरान मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी चलते चलते उनका हाथ थामते भी नजर आ रहे हैं। ये वीडियो इंटरनेट पर खूब वायरल हो रहा है। जिस पर लोग अपनी अपनी प्रतिक्रिया भी देते नजर आ रहे हैं। ऐसे ही एक लाला यादव नामक यूजर से लिखा कि आने वाले विधानसभा चुनाव में ये जोड़ी बहुमत के साथ सरकार बनाएगी। अब देखना होगी कि आने वाले समय में क्या होता हैं।

6 जनवरी एफआईआर दर्ज, 7 को एपीसीसीएफ मीना एक और शाखा का प्रभार

FIR registered on 6th January, charge of another branch of APCCF Meena on 7th भोपाल। जंगल महकमे के इतिहास में यह पहला प्रकरण है कि महिला प्रताड़ना को लेकर जिस एपीसीसीएफ मोहन मीणा के विरुद्ध उसी अफसर को अगले दिन 7 जनवरी को अनुसंधान विस्तार एवं लोकवानिकी शाखा का अतिरिक्त प्रभार दे दिया गया। मौजूदा तौर पर मीणा नीति विश्लेषण मूल्यांकन शाखा में पदस्थ है। पीसीसीएफ प्रशासन एक विवेक जैन के आदेश पर महकमे के अधिकारी हतप्रभ हैं।विभाग में एपीसीसीएफ स्तर के अधिकारियों के कमी के चलते प्रभार दिया जा रहा है। ऐसे में एपीसीसीएफ मीणा को भी नीति विश्लेषण मूल्यांकन शाखा के अलावा अनुसंधान विस्तार एवं लोकवानिकी शाखा का अतिरिक्त प्रभार देने का आदेश पीसीसीएफ विवेक जैन ने जारी कर दिया है। पीसीसीएफ जैन के आदेश जारी करने की टाइमिंग पर सवाल उठ रहे हैं। आखिरकार फिर दर्ज होने के पहले तक मीणा को प्रभार क्यों नहीं दिया गया? तब भी कैंपा सहित अन्य शाखाओं के प्रभार अन्य एपीसीसीएफ को प्रभार दिए गए थे। पीसीसीएफ जैन के आदेश पर विभाग के शीर्ष अधिकारियों से बातचीत की। बातचीत के दौरान नाम न छापने की शर्त पर अपने – अपने कमैंट्स दिए। किसी ने कहा कि एफआईआर दर्ज होने पर उनके हौसले को बरकरार रखने के लिए अतिरिक्त प्रभार दिया गया। अन्यथा लंबे समय से विभाग में मीणा की उपेक्षा की जा रही थी। उन्हें पहले भी दिया जा सकता था। एक शीर्ष अधिकारी ने कहा कि समझ से परे है। एक अधिकारी ने कहा कि पुलिस प्रशासन को चुनौती है और महिलाओं के प्रति उनकी संवेदनहीनता को दर्शाता है। एक म्यान में दो तलवार नहीं रह सकती है। इस कहावत के पीछे उनकी धारणा है कि पीसीसीएफ पी धीमान और एपीसीसीएफ मोहन मीणा के बीच 36 का आंकड़ा है। काम करने में उनमें टकराहट की खबरें सुनाई देने लगेंगे। एक अफसर ने व्यंग्य कसते हुए कहा कि योग्यता के आधार पर प्रभार दिया गया है। उल्लेखनीय है कि 6 जनवरी को बैतूल के गंज पुलिस स्टेशन में कार्यस्थल पर महिला प्रताड़ना को लेकर एपीसीसीएफ मीणा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है। एफआईआर दर्ज करने से पहले जिला न्यायालय के प्रथम व्यवहार न्यायधीश के समक्ष पीड़ता ने 164 में बयान दर्ज कराए। यह मामला 2021 का है। तब एपीसीसीएफ मोहन मीणा बैतूल वन वृत में पदेन सीसीएफ के रूप में पदस्थ थे।

भोपाल के तहसीलदार और नायब तहसीलदारों को समयबद्ध कार्यवाही के निर्देश: मंत्री करण सिंह वर्मा

Instructions to Tehsildars and Naib Tehsildars of Bhopal for timely action: Minister Karan Singh Verma भोपाल । मध्यप्रदेश सरकार ने राजस्व प्रकरणों के शीघ्र और समयबद्ध निराकरण पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया है। राजस्व मामलों को अनावश्यक रूप से लंबित रखने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की चेतावनी देते हुए राजस्व मंत्री श्री करण सिंह वर्मा ने सभी तहसीलदार और नायब तहसीलदारों को अपने कार्यों में तत्परता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कहा है। समयबद्धता पर जोर मंत्री करण सिंह वर्मा ने स्पष्ट किया कि लंबित राजस्व प्रकरणों के समाधान में किसी भी प्रकार की देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी प्रकरणों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर निपटाने की प्रक्रिया अपनाएं।उन्होंने कहा, “राजस्व प्रकरणों का समयबद्ध समाधान जनता के प्रति हमारी जवाबदेही को दर्शाता है। किसी भी प्रकार की लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा।” अनावश्यक विलंब नहीं होगा स्वीकार वर्मा ने सभी अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि किसी भी मामले को अनावश्यक रूप से न रोका जाए। उन्होंने कहा कि राजस्व विभाग में पारदर्शिता और कुशलता सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिकता है। कठोर कार्यवाही की चेतावनी कार्य में लापरवाही करने वाले अधिकारियों के खिलाफ मंत्री ने कठोर कार्यवाही की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि ऐसे अधिकारी जो अपने कर्तव्यों में चूक करेंगे या जानबूझकर प्रकरणों को लंबित रखेंगे, उन्हें अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। जनता का विश्वास बढ़ाने की पहल इस निर्देश का उद्देश्य राजस्व विभाग में जनता का विश्वास बढ़ाना और प्रशासनिक कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाना है। मंत्री वर्मा ने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि जनता को उनके प्रकरणों का शीघ्र समाधान मिले और उन्हें कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। समर्पित अधिकारी बने मिसाल मंत्री ने अच्छे प्रदर्शन वाले अधिकारियों की सराहना की और सभी अधिकारियों को उनके उदाहरण का अनुसरण करने की सलाह दी। यह पहल प्रदेश में राजस्व मामलों में पारदर्शिता और दक्षता लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उम्मीद है कि इन निर्देशों से भोपाल के राजस्व विभाग में सुधार और जनता के लिए सुविधाजनक सेवाएं सुनिश्चित होंगी।

शक्कर कारखाना कैलारस की भूमि बेचना किसानों के साथ धोखा नहीं बिकने देंगे जमीन : उपाध्याय

Selling the land of sugar factory Kailaras, will not let the farmers be cheated by selling the land: Upadhyay जौरा विधायक पंकज उपाध्याय ने सरकार को सख्त चेतावनी देते हुए मुख्यमंत्री सहकारिता मंत्री एवं कलेक्टर को पत्र लिखकर कहा कि 21 जनवरी को होने वाली नीलामी अगर सरकार नहीं रोकती तो उग्र आंदोलन किया जाएगा मीडिया के माध्यम से ज्ञात हुआ है कि उपयुक्त सहकारिता अनुभा सुद ने कर्मचारियों की देनदारी चुकाने के लिए 21 जनवरी को तहसील कैलारस में शक्कर कारखाने की जमीन नीलाम करने का आदेश दिया है विधायक पंकज उपाध्याय ने कहा कि एक तरफ सरकार प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं आला अधिकारी कह रहे हैं की शक्कर  कारखाना प्रारंभ किया जाएगा और दूसरी तरफ किसानों को धोखा देने की नीयत से शक्कर कारखाने के जमीन नीलाम करने का आदेश जारी किया है अगर सात दिवस के अंदर नीलामी की घोषणा वापस नही ली जाती तो सड़कों पर उतरकर आंदोलन किया जाएगा जिसकी जवाबदारी शासन प्रशासन एवं सरकार की रहेगी । जोरा ही नहीं संपूर्ण अंचल का किसान शक्कर कारखाना प्रारंभ होने की घोषणा से उत्साहित है लगभग 5000 से ज्यादा किसानों ने अपने खेतों में गाना उगाने के लिए अपने शपथ पत्र तक दिए हैं अगर धोखा जारी रहा तो  प्रदेश स्तरीय आंदोलन होगा।

मोहन सरकार की देर रात आपात बैठक, यूनियन कार्बाइड के कचरे पर बड़ा फैसला

Late night emergency meeting of Mohan government, big decision on Union Carbide waste भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार देर रात यूनियन कार्बाइड के कचरे और पीथमपुर की घटना को लेकर आपात बैठक बुलाई. दरअसल, पीथमपुर में विषैला कचरा जलाए जाने के विरोध में शुक्रवार को व्यापक बंद का ऐलान किया गया. इस दौरान दो प्रदर्शनकारियों ने आत्मदाह की कोशिश की जिससे माहौल बिगड़ गया. देर रात आपात बैठक के दौरान सीएम मोहन यादव ने कहा, ” जनता का किसी भी प्रकार अहित हो, यह बर्दाश्त नहीं करेंगे. हम ये मामला कोर्ट के सामने लाएंगे और कोर्ट के आदेश के बाद ही अब आगे बढ़ेंगे. राज्य सरकार जनता के साथ खड़ी है और उनकी भावनाओं की कद्र करती है. ” मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इसके साथ ही पीथमपुर के नागरिकों से अपील की है कि वे यूनियन कार्बाइड से जुड़ी झूठी अफवाहों पर विश्वास न करें और न ही ऐसी अफवाहों को आगे बढ़ने दें. सरकार कोई भी ऐसा कदम नहीं उठा सकती, जिससे लोगों का जीवन खतरे में पड़े. ख्यमंत्री निवास पर बुलाई गई आपात बैठकयूनियन कार्बाइड के कचरे के निष्पादन और पीथमपुर की घटना को लेकर मुख्यमंत्री ने शुक्रवार देर रात अपने निवास पर एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई. इस दौरान बैठक में मुख्यमंत्री ने उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा और राजेंद्र शुक्ल, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा, नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से चर्चा की. इस दौरान मुख्य सचिव अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा, पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना, प्रमुख सचिव विधि सहित कई वरिष्ठ प्रशासनिक व पुलिस अधिकारी उपस्थित रहे. कोर्ट ने दी थी 4 जनवरी की डेडलाइन : सीएममुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा, ” मध्यप्रदेश सरकार जनता के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने वाली सरकार है. हम हमेशा जनता के हित को लेकर आगे बढ़े हैं. यूनियन कार्बाइड के वेस्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और हाईकोर्ट के आदेश का हमने परिपालन किया था. कोर्ट ने इसके लिए 4 जनवरी तक कचरा निर्धारित स्थान तक पहुंचाने और 6 जनवरी को रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा था.” मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में जनता तक यह विषय पहुंचना चाहिए. पीथमपुर में नहीं जलेगा यूनियन कार्बाइड का कचरा?मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संकेत दिए हैं कि फिलहाल पीथमपुर में यूनियन कार्बाइड का कचरा आगे नहीं जलेगा. उन्होंने कहा, ” यूनियन कार्बाइड के कचरे को लेकर सुरक्षा के मापदंडों पर किसी प्रकार से कोई खतरा या कोई डर का भाव जनता के बीच आया है तो राज्य सरकार जनता की भावना को ध्यान में रखकर कार्य करेगी. मध्यप्रदेश सरकार प्रयास करेगी कि माननीय न्यायालय के सामने यह विषय लाया जाए, इसके बाद ही हम आगे बढ़ेंगे. माननीय कोर्ट जैसा आदेश देगा, हम उसका पालन करने के लिए तत्पर रहेंगे. हम तब तक आगे नहीं बढ़ेंगे, जब तक न्यायालय कोई निर्देश जारी नहीं करता.”

भाजपा: प्रदेश एवं जिला अध्यक्षों का नाम तय, दिनभर चली बैठक ,अध्यक्ष का ऐलान

BJP: Names of state and district presidents decided, announcement of district president on January 5 and state president on January 15 भोपाल। केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान मध्य प्रदेश के चुनाव अधिकारी नियुक्त किए गए हैं। वे मध्य प्रदेश के नए प्रदेश अध्यक्ष का चयन करेंगे। 15 जनवरी तक भाजपा प्रदेश अध्यक्ष का चयन कर लिया जाएगा। इसको लेकर प्रक्रिया शुरू कर दी है। वहीं प्रदेश प्रभारी डॉ महेंद्र सिंह और सह प्रभारी सतीश उपाध्याय की भूमिका भी नए प्रदेश अध्यक्ष के चयन में महत्वपूर्ण होगी।पांच जनवरी तक जिला अध्यक्षों के नामों की घोषणा के बाद मध्य प्रदेश के नए प्रदेश अध्यक्ष के चयन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। धर्मेंद्र प्रधान मध्य प्रदेश से राज्य सभा सदस्य रहे हैं। अब वे ओडिशा की संबलपुर लोकसभा सीट से सांसद हैं। मध्य प्रदेश से राज्य सभा रहने के कारण उनका प्रदेश से जुड़ाव रहा है । जिला अध्यक्ष के लिए पांच-पांच नामों का पैनल तैयार भाजपा संगठन चुनाव के तहत नए जिला अध्यक्षों के नामों के चयन की प्रक्रिया लगभग पूरी कर ली गई है। गुरुवार को दिनभर चली बैठकों में प्रदेश के चुनाव अधिकारियों के साथ अलग-अलग जिलों के जिला चुनाव अधिकारी और पर्यवेक्षकों से साथ वन-टू-वन चर्चा की गई। नामों का पैनल फाइनल कर केंद्रीय नेतृत्व के समक्ष दिल्ली भेजा जाएगा प्रत्येक जिले के लिए प्रस्तावित पांच नामों का पैनल तैयार किया गया है। इनमें दो नामों के अलावा एससी, एसटी और महिला का एक-एक नाम शामिल हैं। कुल पांच नामों का पैनल तैयार किया गया है। शुक्रवार को इन नामों का पैनल फाइनल कर केंद्रीय नेतृत्व के समक्ष दिल्ली भेजा जाएगा। दिल्ली से नामों पर अंतिम निर्णय के बाद पांच जनवरी को जिला अध्यक्षों की घोषणा की जा सकती है। दिनभर चली बैठक गुरुवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में दिनभर चली बैठक में भाजपा के राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश, पार्टी की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व संगठन पर्व की केंद्रीय पर्यवेक्षक सरोज पांडेय, प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा, प्रदेश प्रभारी डॉ. महेंद्र सिंह, प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद एवं प्रदेश चुनाव अधिकारी विवेक नारायण शेजवलकर ने जिला अध्यक्ष के नामों पर विचार विमर्श कर फाइनल पैनल तैयार किया। बताया जा रहा है कि 15 मौजूदा युवा जिला अध्यक्षों को रिपीट किया जा सकता है। हालांकि पार्टी यह भी सुनिश्चित करेगी कि इन जिला अध्यक्षों का कार्यकाल निर्विवाद रहा हो। चार साल से अधिक समय से जिला अध्यक्ष रहने वाले रिपीट नहीं किए जाएंगे। पार्टी ने इस बार जिला अध्यक्ष के महिलाओं को भी प्राथमिकता में रखा है। पैनल में महिला नेत्रियों का नाम शामिल है।

बिजली उपभोक्ताओं के लिए खुशखबरी: एक क्लिक में नया बिजली कनेक्शन

Good news for electricity consumers: New electricity connection in one click भोपाल। नए साल में मध्य प्रदेश के लोगों को बिजली विभाग की ओर से बड़ी सौगात मिली है। अब उपभोक्ता एमपी ऑनलाइन के माध्यम से भी नए बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन कर सकेंगे। ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने जानकारी दी कि मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने अपने कार्यक्षेत्र के 16 जिलों के उपभोक्ताओं के लिए यह सुविधा शुरू की है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने एमपी ऑनलाइन के साथ अनुबंध किया है, जिससे उपभोक्ताओं को जनवरी के अंतिम सप्ताह से यह सुविधा उपलब्ध होगी। इस सेवा के तहत उपभोक्ता न केवल नए बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन कर सकेंगे, बल्कि गैर-कृषि उपभोक्ताओं का ईकेवाईसी, पीएम-सीएम किसान सम्मान निधि लाभार्थियों का सत्यापन, भार वृद्धि, और नाम परिवर्तन जैसे कार्य भी ऑनलाइन ही करवा सकेंगे। यह अनुबंध कंपनी मुख्यालय में प्रबंध संचालक क्षितिज सिंघल, निदेशक (वाणिज्य) सुधीर कुमार श्रीवास्तव, मुख्य महाप्रबंधक (वाणिज्य) स्वाति सिंह, और एमपी ऑनलाइन के बिजनेस हेड संदीप राजपाल की उपस्थिति में संपन्न हुआ। इस नई सुविधा के साथ बिजली उपभोक्ताओं के काम और भी सरल हो जाएंगे। ऊर्जा मंत्री ने इसे डिजिटल युग में उपभोक्ताओं की सहूलियत के लिए एक बड़ा कदम बताया है।

प्रदेश के दो पूर्व मुख्यमंत्री मुख्यमंत्रियों ने जो किया वही करने जा रहे हैं, सीएम मोहन

CM Mohan is going to do what the two former Chief Ministers of the state did. भोपाल ! मध्य प्रदेश के सीएम मोहन यादव नए साल में नया प्रयोग करने जा रहे हैं। सीएम मोहन यादव, पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह और उमा भारती की तरह सीएम आवास पर जनता दरबार लगाएंगे। सीएम मोहन यादव लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनेंगे और उसका समाधान करेंगे। सीएम आवास पर पहले जनता दरबार का आयोजन 6 जनवरी को होगा। इसके लिए प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। मोहन यादव से पहले राज्य के दो पूर्व सीएम उमा भारती और दिग्विजय सिंह जनता दरबार लगा चुके हैं। हालांकि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस संबंध में कभी पहल नहीं की। सूत्रों के अनुसार, पहला जनता दरबार 6 जनवरी को सुबह 10 से 12 बजे तक होगा। सीएम हाउस पहुंचे लोगों से मुख्यमंत्री मोहन यादव खुद मुलाकात करेंगे और उनकी समस्याओं को सुनेंगे। लोगों की समस्या के समाधान के लिए अलग-अलग विभाग के अधिकारी भी मौजूद करेंगे जो लोगों की समस्या का तुरंत समाधान करेंगे। बताया जा रहा है कि जनता दरबार में ट्रांसफर और पोस्टिंग जैसे मुद्दों की कोई सुनवाई नहीं होगी। यहां केवल केवल बीमारी और जरूरतमंदों के आवेदनों पर ही सुनवाई होगी। ग्रामीण इलाके के लोगों को प्राथमिकता बताया जा रहा है कि जनता दरबार में ग्रामीण इलाके से आए लोगों को प्राथमिकता मिलेगी। सीएम खुद उन लोगों की समस्या को सुनेंगे। पहले जनता दरबार में 500 से भी ज्यादा लोगों के शामिल होने की संभावना है। इसके लिए विभाग स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। ये सीएम भी लगा चुके हैं जनता दरबार मोहन यादव से पहले पूर्व सीएम उमा भारती भी जनता दरबार लगा चुकी हैं। पूर्व सीएम उमा भारती 2003 में राज्य की मुख्यमंत्री बनीं थी। वह लोगों की समस्या सुनकर उसका समाधान करती थीं। कहा जाता है कि जनता दरबार में बड़ी संख्या में लोग अपनी शिकायत लेकर पहुंचते थे जिस कारण से इसे बंद करना पड़ा था। मध्य प्रदेश में सबसे पहले दिग्विजय सिंह ने जनता दरबार लगाने की शुरुआत की थी। दिग्विजय सिंह 1993 से 2003 तक लोगों की समस्या सीएम आवास पर खुद सुनते थे।

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