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प्रदेश अध्यक्ष की लिस्ट में सबसे आगे नरोत्तम मिश्रा, वीडी शर्मा को रिपीट करने की कम है संभावना

भोपाल  मध्यप्रदेश बीजेपी में नए प्रदेश अध्यक्ष को लेकर सरगर्मी तेज हो गई है। केंद्रीय मंत्री अमित शाह और कैलाश विजयवर्गीय के बीच हुई गुप्त बैठक के बाद यह चर्चा और तेज हो गई है। यह बैठक भोपाल स्टेट हैंगर पर हुई। चर्चा है कि मार्च के पहले हफ्ते में मध्य प्रदेश बीजेपी के नए अध्यक्ष की घोषणा हो सकती है। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव भी 20 मार्च तक होने की संभावना है। इसके लिए आधे राज्यों में प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव होना जरूरी है। वीडी शर्मा के वापस आने का चांस कम वीडी शर्मा को संसद की याचिका समिति में जगह मिलने से उनके दोबारा अध्यक्ष बनने की संभावना कम हो गई है। बीजेपी के अंदरूनी सूत्रों का मानना है कि पार्टी ने शर्मा को यह पद देकर उन्हें अध्यक्ष पद से दूर रखने का संकेत दे दिया है। ऐसे में नरोत्तम मिश्रा की दावेदारी सबसे मजबूत मानी जा रही है। वे इस रेस में सबसे आगे चल रहे हैं। प्रदेश अध्यक्ष बनने की लिस्ट में ये भी आगे अब लिस्ट में सबसे आगे नरोत्तम मिश्रा और कैलाश विजयवर्गीय के अलावा फग्गन सिंह कुलस्ते, सुमेर सिंह सोलंकी, हिमाद्री सिंह, दुर्गादास उइके, हेमंत खंडेलवाल, अर्चना चिटनिस, रामेश्वर शर्मा और आलोक शर्मा जैसे कई नेताओं के नाम भी चर्चा में हैं। अंतिम चरण में है तलाश मध्यप्रदेश बीजेपी में नए कप्तान की तलाश अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है। कई दिनों से टल रहे इस चुनाव को लेकर अब तेजी आ गई है। इसका सबसे बड़ा कारण केंद्रीय मंत्री अमित शाह और बीजेपी के वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय के बीच हुई एक गुप्त बैठक है। यह बैठक भोपाल के स्टेट हैंगर पर हुई, जहां शाह ने विजयवर्गीय को फ़ोन करके बुलाया था। इसके बाद से ही राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है। माना जा रहा है कि इस बैठक में नए प्रदेश अध्यक्ष के नाम पर मंथन हुआ है। हालांकि, इस बात की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। सबसे ज्यादा चर्चा में नरोत्तम मिश्रा इस गुप्त बैठक के बाद से ही पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का नाम सबसे ज़्यादा चर्चा में है। सूत्रों की मानें तो विजयवर्गीय ने शाह के सामने नरोत्तम मिश्रा के नाम का प्रस्ताव रखा है। ऐसी भी खबरें हैं कि पार्टी कैलाश विजयवर्गीय को भी यह मौका दे सकती है। मार्च के पहले हफ्ते तक प्रदेश बीजेपी को नया अध्यक्ष मिल सकता है। राष्ट्रीय अध्यक्ष का भी होना है चुनाव बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव भी 20 मार्च तक होने की संभावना है। देश के लगभग 12 राज्यों में प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव हो चुके हैं। अभी भी 6 राज्यों में यह प्रक्रिया पूरी होनी बाकी है। इन्हीं चुनावों के बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया शुरू होगी। देश में कुल 18 राज्य हैं, जहां बीजेपी की सरकार है या फिर प्रमुख विपक्षी दल है। इसलिए 9 राज्यों में चुनाव पूरा होना अनिवार्य है।

भाजपा नेतृत्व अन्य राज्यों के अध्यक्षों के सामाजिक समीकरणों को देखकर मध्य प्रदेश में फैसला लेगा

नईदिल्ली भाजपा के संगठन चुनावों में राज्यों के चुनाव की प्रक्रिया के दौरान लगभग आधा दर्जन राज्यों में पार्टी को कुछ नेताओं को लेकर मुखर विरोध के साथ सामाजिक व राजनीतिक समीकरणों को लेकर काफी पसीना बहाना पड़ रहा है। पार्टी संविधान के अनुसार राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव तभी हो सकता है, जबकि पचास फीसदी यानी आधे राज्यों के चुनाव हो जाएं। भाजपा के संगठन के 38 प्रदेश हैं और अभी लगभग 10 राज्यों के चुनाव ही पूरे हुए हैं। भाजपा को संगठन चुनावों में कर्नाटक में मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष विजयेंद्र को बरकरार रखने के लिए राज्य के नेताओं के एक समूह के मुखर विरोध का सामना करना पड़ रहा है। तमिलनाडु, केरल व पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव को अब एक साल बचा है। ऐसे में वहां बदलाव किया जाए या नहीं और किया जाए तो किसे नेतृत्व दिया जाए, इस पर फैसला नहीं हो पा रहा। उत्तर प्रदेश में नए नेता की तलाश उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनाव नतीजों के बाद ही प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी ने पद छोड़ने की पेशकश कर दी थी। चूंकि, संगठन चुनाव होने थे, इसलिए बदलाव नहीं किया गया था। सूत्रों का कहना है कि होली के बाद ही नए अध्यक्ष का फैसला हो पाएगा। सामाजिक व क्षेत्रीय समीकरणों के हिसाब से नया अध्यक्ष चुना जाएगा। मध्य प्रदेश में दलित व आदिवासी चेहरे पर विचार मध्य प्रदेश में मौजूदा अध्यक्ष वीडी शर्मा को पांच वर्ष हो गए हैं। वहां राजपूत, ब्राह्मण के साथ दलित व आदिवासी नेताओं के नाम पर भी विचार किया गया है। भाजपा नेतृत्व अन्य राज्यों के अध्यक्षों के सामाजिक समीकरणों को देखकर फैसला लेगा। तेलंगाना-गुजरात में अहम हैं सामाजिक समीकरण तेलंगाना और गुजरात के प्रदेश अध्यक्ष केंद्र सरकार में मंत्री भी हैं। दोनों राज्यों में अभी चुनाव नहीं हैं, ऐसे में वहां पर भविष्य की चुनौती व संभावनाओं को देखते हुए बदलाव किए जाने हैं। दोनों ही राज्यों में सामाजिक समीकरण काफी अहम हैं। हालांकि, पार्टी में कुछ नेता इस बात की कोशिश कर रहे हैं कि एक व्यक्ति, एक पद को लेकर भाजपा अपने रुख में कुछ लचीलापन रखे और कुछ राज्यों को इसका अपवाद बनाकर रखा जाए। हालांकि, केंद्रीय नेतृत्व इसके पक्ष में नहीं दिख रहा।

गुजरात में नगरपालिका चुनावों में कुल 210 निर्विरोध चुने गए मुस्लिम उम्मीदवारों में 10% बीजेपी के

अहमदाबाद  ना दूरी है ना खाई है, मोदी हमारा भाई है… पिछले लोकसभा चुनावों में बीजेपी ने यह नारा दिया था। तब गुजरात में 29 प्रतिशत मुस्लिम मतदाता बीजेपी के साथ आ गए थे। सर्वे एजेंसी सीएसडीएस-लोकनीति ने यह दावा किया था। अब गुजरात के निकाय चुनावों के परिणाम बता रहे हैं कि 2024 लोकसभा चुनाव को लेकर सर्वे एजेंसी के अनुमान में काफी दम है। गुजरात में बीजेपी ने नगर निकाय के 82 मुस्लिम उम्मीदवारों को जिताकर इतिहास रच दिया है। ये जीत 66 नगरपालिका चुनावों में हुई है। इससे उत्साहित बीजेपी के अंदर इस बात पर गंभीरता से मंथन शुरू हो गया कि क्या विधानसभा चुनावों में भी मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिए जाएं। ऐसा हुआ तो गुजरात में किसी अल्पसंख्यक उम्मीदवार को चुनाव मैदान में नहीं उतारने की बीजेपी की परंपरा टूट सकती है। पसमांदा मुसलानों से जुड़ने की पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2023 की भाजपा राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में पसमांदा मुसलमानों से संपर्क की जरूरत बताई थी। उसी वर्ष भोपाल की एक रैली में प्रधानमंत्री ने कहा कि कैसे अगड़े मुसलमान अपने ही समुदाय के पिछड़े मुसलमानों यानी पसमांदाओं का शोषण करते हैं और उन्हें उनके अधिकारों से वंचित रखते हैं। सरकारी संस्था नेशनल सैंपल सर्वे ऑर्गेनाइजेशन (एनएसएसओ) के अनुसार मुस्लिमों में ओबीसी जनसंख्या 40.7 प्रतिशत है। देश के कुल पिछड़े समुदाय की जनसंख्या में पसमांदा मुसलमानों की हिस्सेदारी 15.7 प्रतिशत है। कहां-कहां मुस्लिम मतदाताओं का दबदबा? विभिन्न सर्वे और रिपोर्ट बताते हैं कि लोकसभा की 65 सीटों पर 30 प्रतिशत से ज्यादा मुस्लिम वोटर हैं और प्रत्याशियों की किस्मत तय करने में बड़ी भूमिका निभाते हैं। आंकड़े बताते हैं कि 92 सीटों पर 20 प्रतिशत से ज्यादा मुस्लिम मतदाता हैं। इनमें 41 सीटों पर 21 से 30 प्रतिशत, 11 सीटों पर 41 से 50 प्रतिशत, 24 सीटों पर 31 से 40 प्रतिशत और 16 सीटों पर 50 प्रतिशत से ज्यादा मुस्लिम मतदाता हैं। उत्तर प्रदेश, बिहार, बंगाल, कर्नाटक, असम जैसे राज्यों में मुस्लिम मतदाता काफी असरदार माने जाते हैं। ये नतीजे दिखाते हैं कि अल्पसंख्यक आबादी अब बीजेपी के साथ मजबूती से खड़ी है। विपक्ष ने समान नागरिक संहिता, तीन तलाक और वक्फ जैसे मुद्दों पर हंगामा खड़ा करने की कोशिश की, लेकिन इसका कोई असर नहीं हुआ। मुसलमानों से संपर्क की चौतरफा पहल प्रधानमंत्री की अपील पर भाजपा ने 2024 के लोकसभा चुनावों में मुसलमान मतदाताओं से संपर्क साधने की बहुस्तरीय योजना बनाई। पार्टी ने हजारों ‘स्नेह संवाद’ कार्यक्रम किए जिनमें बीजेपी के अल्पसंख्यक मोर्चा ने देशभर में करीब 1.5 हजार विधानसभा क्षेत्रों को कवर किया। इन कार्यकर्मों के जरिए 50 लाख से ज्यादा मुसलमानों से बातचीत की गई। दूसरी तरफ, सभी 543 लोकसभा क्षेत्रों के मुसलमानों को ‘मोदी मित्र’ बनाने की पहल हुई। इस पहल के तहत हर सीट पर 2,000 से ज्यादा मुस्लिम मोदी मित्र बनाए गए। फिर बूथ मैनेजमेंट में मुसलमानों की भागीदारी बढ़ाई गई। ‘ना दूरी है ना खाई है, मोदी हमारा भाई है’ के नारे से मुसलमानों को बीजेपी के करीब लाने का प्रयास किया गया। मुसलमानों से बीजेपी की बातचीत बीजेपी ने इन सभी कार्यक्रमों में मुसलमानों को बताया कि कैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में भाजपा सरकार ने मुस्लिम समुदाय का चौतरफा कल्याण किया है। मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक से आजादी दिलाने के लिए कानून बनाना हो या गरीब कल्याण की योजनाओं में बिना भेदभाव के मुस्लिम आबादी से ज्यादा हिस्सेदारी देना, मोदी सरकार ने मुस्लिम समुदाय के उत्थान की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं। मुसलमानों को यह भी बताया गया कि कांग्रेस शासन के लंबे वक्त में मुसलमानों की कैसी दुर्दशा हुई, इसका प्रमाण कांग्रेस सरकार में बनी सच्चर कमिटी की रिपोर्ट में ही मिला है। मुसलमान और बीजेपी: क्या कहते हैं आंकड़े? ऐसा नहीं है कि मुसलमान बीजेपी को वोट करते ही नहीं हैं। सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसायटी (सीएसडीएस) के मुताबिक 2014 के चुनाव में राष्ट्रीय स्तर पर करीब 8.5 प्रतिशत मुस्लिम वोट भाजपा के पक्ष में गया था। भाजपा को इससे पहले मुसलमानों का इतना ज्यादा समर्थन कभी नहीं मिला था। 2014 से पहले भाजपा को सबसे ज्यादा सात प्रतिशत मुस्लिमों का समर्थन 2004 में मिला था। रिपोर्ट के मुताबिक, 2009 में बीजेपी को तीन प्रतिशत मुस्लिमों ने वोट किया था। 1998 को लोकसभा चुनावों में 5 प्रतिशत जबकि 1999 में 6 प्रतिशत मुसलमानों ने बीजेपी का पक्ष लिया था। मुस्लिम वोट बैंक का आकर्षण भारतीय राजनीति में मुसलमान हमेशा के आकर्षक वोट बैंक बने रहे हैं। वर्ष 1980 तक यह वोट बैंक कांग्रेस के साथ मजबूती से खड़ा रहा था। फिर यह कांग्रेस से छिटका तो राज्य स्तर पर क्षेत्रीय दलों का दामन थामता चला गया। मंडल-कमंडल की राजनीति के बाद उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का उभार हुआ तो मुस्लिम मतदाता उनके साथ जुड़ गए। इसी तरह, बिहार में राष्ट्रीय जनता दल (राजद), बंगाल में तृणमूल कांग्रेस, कर्नाटक में कभी कांग्रेस तो कभी जनता दल (सेकुलर) का दामन थाम लिया। मुसलमानों में बीजेपी को हराने की जिद फिर चुनाव दर चुनाव यह धारणा पुष्ट होती चली गई कि मुसलमान किसी का सगा नहीं है, बस उसके जेहन में एक ही बात कौंधती रहती है कि बीजेपी को कौन परास्त कर सकता है। जिस पार्टी और उम्मीदवार में बीजेपी को हराने की ताकत दिखी, मुसलमानों ने उसका पक्ष लिया। लेकिन पिछले वर्ष उत्तर प्रदेश विधानसभा के उपचुनाव में मुस्लिम मतदाताओं के दबदबे वाली कुंदरकी सीट पर बीजेपी प्रत्याशी के विजय ने बड़ा संकेत दिया। यह इसलिए लोकसभा चुनावों में बीजेपी को उत्तर प्रदेश के सिर्फ 2 प्रतिशत मुस्लिम मतदाताओं ने भाजपा का समर्थन किया था। अब गुजरात निकाय चुनावों में बीजेपी के मुस्लिम उम्मीदवारों की बड़ी सफलता ने कुंदरकी विधानसभा सीट से मिले संदेश को संभवतः और स्पष्ट कर दिया है। इस प्रदर्शन को देखते हुए, भविष्य में बीजेपी में अल्पसंख्यक समुदाय के लिए चीजें बदल सकती हैं। हां, पार्टी उन सीटों पर मुस्लिम उम्मीदवारों को उतार सकती है जहां मुस्लिम मतदाताओं का दबदबा है। कुछ सीटें ऐसी हैं जहां भविष्य में मुस्लिम उम्मीदवार उतारे जा सकते हैं।

राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु पहुंचीं बागेश्वर धाम, 251 बेटियों के विवाह समारोह में हुईं शामिल

President Draupadi Murmu reached Bageshwar Dham, attended the marriage ceremony of 251 daughters छतरपुर। बागेश्वर धाम पर आयोजित होने वाले कन्या विवाह समारोह की घड़ी आ गई है। आज महाशिवरात्रि पर्व पर 251 बेटियां परिणय सूत्र में बंधेंगी और उनको आशीर्वाद देने के लिए राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु पहुंचीं। समूचा बागेश्वर धाम आज जनकपुर जैसा लग रहा है। बागेश्वर धाम में राष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय परंपरा में संतों ने सदियों से अपने कर्म और वाणी से जनमानस को राह दिखाई है। उन्होंने समाज में फैले अंधविश्वासों के बारे में लोगों को जागरूक किया है, छुआ-छूत और ऊंच-नीच के भेद-भाव को दूर करने की सीख दी है। आज जब हमारा देश वूमन डेवलपमेंट से वूमन लीड डेवलपमेंट की ओर अग्रसर है तब समाज के सभी लोगों का कर्तव्य बनता है कि वे बेटियों और बहनों को सबल और सक्षम बनाने में अपना योगदान दें। बेटियों के विवाह की खुशियां फैलीचारों तरफ बेटियों के विवाह की खुशियां फैली हैं। बागेश्वर धाम सज धज कर अपने 251 दूल्हों के स्वागत के लिए आतुर है। बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर महाराज धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री अपने सभी जमाइयों को घोड़े पर बैठाकर उनकी बरात निकलवाएंगे। महाराज श्री का संकल्प है कि किसी के बीच जाति पांति और ऊंच नीच का भेदभाव न हो। मंगलवार को केन्द्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत, महाराष्ट्र के मंत्री सतेन्द्र सिंह राठौर ने आकर महाराजश्री का आशीर्वाद लिया। फाइट कराकर ग्रेट खली ने दिया नशा न करने का संदेशअमेरिका की सुख सुविधा त्याग कर ग्रेट खली अपने देश के युवाओं को खेलों के प्रति प्रेरित कर रहे हैं। ग्रेट खली का कहना है कि यदि युवा नशा त्यागेंगे और खेलों की ओर आकर्षित होंगे तो न केवल देश का मान बढ़ेगा बल्कि देश खेलों में सशक्त होगा। ग्रेट खली ने बीती रात अपने शागिर्दों से जो खलबली मचाई वह देखने लायक थी। बागेश्वर धाम के लिए यह एक अनोखा प्रदर्शन रहा। महिला पहलवानों में रुचिका,दया कौर, तानिया सहित सभी 6 महिलाए जालंधर पंजाब एकेडमी की स्टूडेंट हैं। वहीं पुरुष वर्ग में जेटी बाबा, माजा,सहित 14 पहलवानों ने अपने दांवपेच दिखाए। राष्ट्र चेतना के उत्थान में आगे बढ़ें : ऋतंभरा22 फरवरी से 25 फरवरी तक बागेश्वर धाम में साध्वी ऋतंभरा दीदी मां के मंगल प्रवचन सुनने का लोगों को अवसर मिला। यहां आए लाखों लोगों को दीदी मां ने संदेश दिया कि राष्ट्र चेतना के उत्थान में हम सब अपना योगदान दें। दीदी मां ने कहा कि जब राष्ट्र का उत्थान होगा तभी हिन्दू राष्ट्र बनेगा। बीते दो दिनों से बागेश्वर धाम में देश के प्रख्यात संतों का आगमन जारी है। विगत रोज जगतगुरू स्वामी रामानंदाचार्य महाराज के अलावा अंतर्राष्ट्रीय कथावाचक चिन्मयानंद बापू जी, राज राजेश्वरानंद महाराज लंदन, डॉ. हनुमान ददरूआ सरकार, इंद्रेश उपाध्याय, राजूदास महाराज हनुमानगढ़ी अयोध्या, गीता मनीषी जी शामिल हैं। धाम के कार्यक्रमों को देखकर अभिभूत हूं : विष्णुदेव सायछत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय मंगलवार को बागेश्वर धाम पहुंचे। उन्होंने बालाजी के दर्शन करने के बाद बागेश्वर महाराज का आशीर्वाद लिया। उन्होंने कहा कि यह अत्यंत पावन और पुनीत अवसर है कि हमें भी यहां आने का सौभाग्य मिला। उन्होंने बताया कि उनके साथ उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, अन्य साथी रामप्रताप सिंह व उनके पुत्र दर्शन करने आए हैं।

महाराणा प्रताप की वीरता जन जन तक पहुंचे यही प्रयास:जसपाल सिंह सिसोदिया।

This is the effort to spread the bravery of Maharana Pratap to the masses: Jaspal Singh Sisodia. वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की प्रतिमा के अनावरण के संबंध में बैठक का हुआ आयोजन । हरिप्रसाद गोहेआमला । वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की प्रतिमा अनावरण की तैयारियों को लेकर महाराणा प्रताप स्मारक समिति की बैठक का आयोजन सरस्वती शिशु मंदिर आमला के सभाकक्ष मे रखा गया था । आयोजित बैठक में प्रमुख रूप से आयोजन समिति के प्रमुख जसपाल सिंह सिसोदिया उपस्थित थे वहीं कार्यक्रम की अध्यक्षता अनिल सिंह सोलंकी ने की। बैठक में जसपाल सिंह सिसोदिया ने बताया आगामी 5 मार्च को मुलताई विकासखंड के ग्राम बाड़े गांव में वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की स्थापित प्रतिमा का अनावरण किया जाएगा । आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर, विशेष अतिथि केंद्रीय राज्य मंत्री दुर्गा दास उईके, विशिष्ट अतिथि मुलताई विधायक चंद्रशेखर देशमुख, बैतूल विधायक हेमंत खंडेलवाल, आमला विधायक डॉ. योगेश पंडाग्रे, विधायक सोहागपुर विजयपाल सिंह, पूर्व मंत्री ब्रजेंद्र प्रताप सिंह, सेवा भारती संगठन मंत्री सुरेंद्र सिंह सोलंकी एवं अभा क्षत्रिय महासभा अरविंद सिंह भदोरिया प्रमुख रूप से मौजूद रहेगे। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर महाराणा प्रताप की प्रतिमा का अनावरण करेंगे। प्रतिमा अनावरण कार्यक्रम के दौरान समिति द्वारा मेधावी विद्यार्थियों, खेल, पर्यावरण, सांस्कृतिक और सामाजिक क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वालों का सम्मान भी किया जाएगा।इस अवसर पर अपने विचार रखते हुए अनिल सिंह कुशवाह ने कहा कि आने वाली पीढ़ी और वर्तमान पीढ़ी शूरवीर महाराणा प्रताप की वीरता से परिचित हो इनकी वीरता जन जन तक पहुंचे इस हेतु यह अनावरण का कार्यक्रम रखा गया है आप सभी अधिक से अधिक संख्या में इस आयोजन को सफल बनाने हेतु पहुंचे यही आग्रह है। बैठक को प्रमुख रूप से आयोजन समिति से जुड़ी मुक्ता ढोलेकर और मनोज विश्वकर्मा ने भी संबोधित किया।बैठक में जसपाल सिंह सिसोदिया,अनिल सिंह कुशवाहा,मुक्ता ढोलेकर,मनोज विश्वकर्मा, अनीता पाटिल,घनीराम गढ़ेकर सहित अन्य लोग उपस्थित थे ।

पीएम मोदी ने किया बागेश्वर धाम में कैंसर अस्पताल का भूमिपूजन, बोले- ‘कुछ ताकतें देश और धर्म को कमजोर करने में लगीं हैं’

छतरपुर(PM Modi Bageshwar Dham Visit)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बागेश्वर धाम में कैंसर अस्पताल का भूमि पूजन किया। इसके पहले उन्होंने बालाजी मंदिर में पूजन किया। इस दौरान आयोजित सभा में बुंदेलखंड के छतरपुर-टीकमगढ़ के अलावा निवाड़ी, सागर, झांसी आदि जिलों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे हैं। पीएम बोले- इस बार बालाजी का बुलावा आया हैप्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सभा में बुंदेली में सभी को राम-राम कर अपने भाषण की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि बहुत ही कम दिनों में मुझे वीरों की इस धरती पर आने का सौभाग्य मिला। इस बार तो बालाजी का बुलावा आया है। यह हनुमान जी की कृपा है कि आस्था का यह केंद्र आरोग्य का केंद्र भी बनने जा रहा है। कुछ नेता धर्म का मजाक उड़ाते हैंउन्होंने कहा कि नेताओं का एक वर्ग ऐसा है जो धर्म का मजाक उड़ाता है। बहुत बार विदेशी ताकतें भी इन लोगों का साथ देकर देश और धर्म को कमजोर करने की कोशिश करती दिखती है। हिंदू आस्था से नफरत करने वाले ये लोग सदियों से किसी ना किसी वेश में रहते रहे हैं। धीरेंद्र शास्त्री ने एकता का मंत्र दियाये लोग हमारे मत, मान्यताओं और मंदिर पर, हमारे संत और संस्कृति पर हमला करते रहते हैं। ये लोग हमारी परंपराओं और प्रथाओं को गाली देते हैं। हमारे समाज को बांटना, उसकी एकता को तोड़ना ही इनका एजेंडा है। इस माहौल में मेरे छोटे भाई धीरेंद्र शास्त्री एकता के मंत्र को लेकर लोगों को जागरुक कर रहे हैं। पीएम ने कहा कि अब उन्होंने मानवता को लेकर एक और संकल्प लिया है। अब बागेश्वर धाम में भजन, भोजन और निरोगी जीवन तीनों का आशीर्वाद मिलेगा। हमारे मंदिर, हमारे मठ ये एक ओर पूजन और साधना के केंद्र रहे हैं। तो दूसरी ओर विज्ञान और सामाजिक चेतना के केंद्र रहे हैं। महाकुंभ की हर तरफ चर्चापीएम ने कहा कि महाकुंभ की हर तरफ चर्चा हो रही है। अब तक करोड़ों लोग वहां पहुंच चुके हैं। उन्होंने आस्था की डुबकी लगाई है और संतों के दर्शन किए हैं। यह एकता का महाकुंभ है। आने वाली सदियों तक 144 वर्ष के बाद हुआ महाकुंभ, एकता के महाकुंभ के रूप से प्रेरणा देता रहेगा।

पेपर पर आ रहे इन्वेस्टमेंट… कांग्रेस ने निवेश के दावों पर उठाए सवाल, एमपी जीआईएस को लेकर गरमाई सियासत

Investments coming on paper… Congress raises questions on investment claims भोपाल ! कांग्रेस ने शुक्रवार को मध्य प्रदेश में भाजपा सरकार द्वारा आयोजित छह ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (GIS) पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस का आरोप है कि इन आयोजनों में बड़ी-बड़ी घोषणाएं तो हुईं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। कांग्रेस ने दावा किया कि इन समिट में राज्य का पैसा पानी की तरह बहाया गया, लेकिन निवेश नाममात्र का ही आया। भाजपा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि उनकी सरकार में ही मध्य प्रदेश ने बीमारू राज्य का ठप्पा छोड़ा है और अब सभी क्षेत्रों में तरक्की कर रहा है। यह बहस मोहन यादव सरकार के पहले जीआईएस के ठीक पहले छिड़ी है, जिसका उद्घाटन 24 और 25 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। कांग्रेस ने जारी किए आंकड़ेकांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में ‘मध्य प्रदेश निवेश सम्मेलन: वादे, दावे और हकीकत’ नामक एक दस्तावेज भी जारी किया। इस दस्तावेज में कांग्रेस ने आंकड़ों के साथ अपने दावों को पुख्ता करने की कोशिश की है। क्या बोले जीतू पटवारीजीतू पटवारी ने कहा कि मोहन यादव की सरकार में खूब खर्चा हो रहा है। पिछले छह सम्मेलनों की तरह इस बार भी करोड़ों रुपये खर्च करके उद्योगपतियों और निवेशकों की मेहमाननवाजी की जा रही है। सरकारी खजाना ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के नाम पर खाली किया जा रहा है। नेता प्रतिपक्ष ने भी साधा निशानाउमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि सरकार हर महीने 5000 करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज लेती है। जीआईएस पर बेतहाशा पैसा खर्च कर रही है। सिंघार ने कहा कि लेकिन अगर हम 2003 से अब तक के 6 ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट का रिकॉर्ड देखें, तो जमीनी स्तर पर सफलता दर शून्य प्रतीत होती है। उन्होंने आगे कहा कि 2003 से 2016 तक पहले पांच निवेशक सम्मेलनों में 17.50 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्तावों का दावा किया गया था। इसके बाद 2023 में इंदौर में हुए ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में शिवराज सिंह चौहान सरकार ने लगभग 15.40 लाख करोड़ रुपये के निवेश का दावा किया। यानी लगभग 32 लाख करोड़ रुपये का निवेश मध्य प्रदेश की धरती पर आने का दावा किया गया। जबकि हकीकत यह है कि 2003 से 2023 तक केवल 3.47 लाख करोड़ रुपये ही आए, जो सरकार द्वारा प्राप्त कुल निवेश प्रस्तावों का केवल 10% है।

दिल्ली के नए सीएम का नाम सभी जानना चाहते, 15 नाम तय किए जा चुके हैं, 9 मंत्री बनेंगे

नई दिल्ली दिल्ली के नए सीएम के लिए लगातार कयासों का दौर जारी है. बीजेपी में बैठकों का दौर जारी है. पीएम मोदी विदेश दौरे पर थे. वे अब भारत लौट आए हैं. अब विधायक दल के लिए पर्यवेक्षक की नियुक्ति की जा सकती है. इसके बाद ही नए मुख्यमंत्री के नाम का फैसला होगा. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार को बीजेपी के बैठक में 48 विधायकों में से 15 विधायकों की एक लिस्ट तैयार की गई है. इस लिस्ट से 9 विधायकों को सलेक्ट किया जाएगा, जो दिल्ली के मुख्यमंत्री और मंत्री होंगे. मुख्यमंत्री बनने के रेस में कौन-कौन? सूत्रों के हवाले से मीडिया में खबर है कि दिल्ली के सीएम रेस में रेखा गुप्ता का नाम सबसे आगे है. वो एक महिला विधायक है. इनके अलावा आशीष सूद, जितेंद्र महाजन और राजकुमार भाटिया बीजेपी के पुराने पंजाबी चेहरे हैं. ब्राह्मण और संगठन के पुराने व्यक्ति में पवन शर्मा और सतीश उपाध्याय हैं. प्रवेश वर्मा जाट चेहरा हैं. विजेंद्र गुप्ता और मोहन सिंह बिष्ट के स्पीकर के लिए चुने की संभावना है. खबर है कि दिल्ली में 19 या 20 फरवरी को शपथग्रहण हो सकता है. आज 15 जनवरी है. इसका मतलब ये कि दिल्ली को 5 दिनों के अंदर नया मुख्यमंत्री मिल जाने की पूरी पूरी संभावना है. जानकारी ये भी है कि 17 या 18 फरवरी को बीजेपी विधायक दल की बैठक हो सकती है, उसमें सीएम के नाम पर मुहर लग सकती है. सूत्रों से खबर है कि 48 में से 15 विधायकों के नाम छांटे गए हैं, उसमें से 9 नाम शॉर्ट लिस्ट किए जाएंगे. फिर उन 9 में से ही मुख्यमंत्री, मंत्री और स्पीकर का नाम तय किया जाएगा. इन नामों की चर्चा तेज फिलहाल जिन नामों की चर्चा मुख्यमंत्री को लेकर हो रही है… उनमें रेखा गुप्ता, शिखा राय, प्रवेश वर्मा, मोहन सिंह बिष्ट, विजेंद्र गुप्ता, सतीश उपाध्याय, आशीष सूद और पवन शर्मा जैसे नाम शामिल हैं… पहले बात रेखा गुप्ता और शिखा राय की… रेखा गुप्ता आरएसएस के बैकग्राउंड से हैं. वो शालीमार बाग सीट से पहली बार विधायक बनीं हैं. दिल्ली नगर निगम में तीन बार की पार्षद हैं. वहीं एक और नाम है शिखा राय का.. जो तीन बार से विधायक हैं. इस बार उन्होंने ग्रेटर कैलाश सीट से कैबिनेट मंत्री सौरभ भारद्वाज को हराया है. प्रवेश वर्मा भी रेस में दिल्ली की लड़ाई में इस बार सबसे अहम चेहरा रहे प्रवेश वर्मा भी रेस में हैं. नई दिल्ली सीट से उन्होंने केजरीवाल को चुनाव में हराया है. 2 बार के विधायक और 2 बार सांसद रह चुके हैं. दिल्ली के पूर्व सीएम साहिब सिंह वर्मा के बेटे हैं. 6 बार के विधायक हैं मोहन सिंह विष्ट एक नाम मोहन सिंह बिष्ट का है जो 6 बार के विधायक हैं. मूल रुप से उत्तराखंड के रहने वाले बिष्ट छात्र जीवन में ही आरएसएस से जुड़ गए थे. विजेंदर गुप्ता का नाम भी… दिल्ली बीजेपी का बड़ा चेहरा माने जाने वाले विजेंदर गुप्ता भी रेस में हैं. वो लगातार 3 बार के विधायक हैं. दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष रह चुके हैं. बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य भी हैं. कौन हैं सतीश उपाध्याय वहीं, सतीश उपाध्याय भी दावेदारों में हैं. वो ब्राह्मण चेहरा होने के साथ इस बार चुनाव भी जीता है. पहले वो दिल्ली बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं. इसके अलावा एक नाम आशीष सूद का है जो पहली बार विधायक बने हैं. फिलहाल वे गोवा बीजेपी के प्रभारी हैं और जम्मू-कश्मीर में बीजेपी के सह-प्रभारी हैं. नवनिर्वाचित विधायक पवन शर्मा का नाम भी सामने आ रहा है. वो इस बार उत्तम नगर से विधायक चुने गए हैं. दरअसल, दिल्ली में बीजेपी का सीएम कौन होगा, ये चर्चा इसलिए भी हो रही है, क्योंकि चुनाव के वक्त बीजेपी ने कोई चेहरा घोषित नहीं किया था. और आम आदमी पार्टी बार-बार बीजेपी पर सीएम के चेहरे को लेकर प्रहार कर रही थी. बीजेपी ने 48 सीट जीती दिल्ली की 70 सदस्यीय विधानसभा के लिए हुए चुनाव में बीजेपी ने 48 सीट पर जीत दर्ज की. जबकि आम आदमी पार्टी (आप) को 22 सीट से संतोष करना पड़ा. वहीं, कांग्रेस 2015 और 2020 के बाद एक बार फिर अपना खाता नहीं खोल पाई.

केजरीवाल को झटके पर झटका, तीन मौजूदा पार्षद बीजेपी में शामिल हुए, अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने पार्टी की सदस्यता दिलवाई

नई दिल्ली दिल्ली विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की जीत के बाद, पार्टी ने राजधानी में ‘ट्रिपल इंजन’ सरकार स्थापित करने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। इस प्रयास के तहत, आम आदमी पार्टी (AAP) के तीन मौजूदा पार्षदों ने बीजेपी की सदस्यता ग्रहण की है। दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने इन पार्षदों का पार्टी में स्वागत किया। दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने इन तीनों पार्षदों को औपचारिक रूप से पार्टी की सदस्यता दिलाई। यह घटनाक्रम दिल्ली की राजनीति में बड़े बदलाव की ओर इशारा कर रहा है, जिससे एमसीडी (नगर निगम) में भी बीजेपी के प्रभाव को मजबूती मिल सकती है। बीजेपी में शामिल हुए आम आदमी पार्टी के जो पार्षद में एंड्रयूज गंज से पार्षद अनीता बसोया, आरके पुरम से पार्षद धर्मवीर और चपराना वार्ड 152 से पार्षद निखिल शामिल हैं। दिल्ली विधानसभा में जीत के बाद अब बीजेपी की नजर एमसीडी चुनाव पर भी हैं। बता दें कि इसी साल अप्रैल में दिल्ली नगर निगम के मेयर का चुनाव होना है। दिल्ली विधानसभा चुनाव में जीत के बाद अब एमसीडी में भी बीजेपी का पलड़ा भारी होगा. विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 48 सीटें हासिल की हैं तो वहीं AAP के खाते में 22 सीटें आई हैं। अब एमसीडी पर बीजेपी की नजरें आम आदमी पार्टी के जो पार्षद बीजेपी में शामिल हुए हैं उनमें एंड्रयूज गंज से पार्षद अनीता बसोया, आरके पुरम से पार्षद धर्मवीर और चपराना वार्ड 152 से पार्षद निखिल शामिल हैं. दिल्ली विधानसभा में प्रचंड जीत के बाद अब बीजेपी की नजरें एमसीडी पर भी हैं. इसी साल अप्रैल में दिल्ली नगर निगम के मेयर का चुनाव होना है. दिल्ली विधानसभा चुनाव में जीत के बाद अब एमसीडी में भी बीजेपी का पलड़ा भारी होगा. विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 48 सीटें हासिल की हैं तो वहीं AAP के खाते में 22 सीटें आई हैं. नवंबर 2024 में हुआ था मेयर का पिछला चुनाव मेयर का पिछला चुनाव नवंबर 2024 में हुआ था लेकिन कार्यकाल केवल पांच महीने का है. तब AAP के महेश खिंची बीजेपी के किशन लाल से केवल तीन वोटों से ही जीत पाए थे. मेयर चुनाव में कुल 263 वोट डाले गए थे जिनमें महेश खिंची को 133 और किशन लाल को 130 वोट मिले थे जबकि दो वोट अवैध हो गए थे. चुनाव से पहले बीजेपी में शामिल हुए 8 AAP विधायक दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी छोड़ने वाले 8 विधायक भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए थे. इन विधायकों ने आम आदमी पार्टी से इस्तीफा दिया था और अगले ही दिन सभी ने बीजेपी का दामन थाम लिया है. दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा और प्रदेश प्रभारी बैजयंत पांडा की मौजूदगी में 8 विधायकों ने पार्टी जॉइन की थी.

भूपेश बघेल का गढ़ माना जाता है पाटन, बीजेपी ने कांग्रेस उम्मीदवार को चुनाव हारा दिया, अमलेश्वर में भी कांग्रेस की हार हुई

दुर्ग  छत्तीसगढ़ नगरीय निकाय चुनावों के रिजल्ट आज घोषित हो रहे हैं। दुर्ग नगर निगम में बीजेपी बड़ी जीत की तरफ आगे बढ़ रही है। वहीं, पूर्व सीएम भूपेश बघेल को बड़ा झटका लगा है। भूपेश बघेल की नगर पंचायत पाटन में कांग्रेस उम्मीदवार की हार हुई है। भूपेश बघेल, दुर्ग जिले की पाटन विधानसभा सीट से विधायक हैं। ऐसे यहां कांग्रेस की हार के बाद एक बार फिर से संगठन पर सवाल खड़े हो रहे हैं। पाटन नगर पंचायत में भाजपा प्रत्याशी योगेश निक्की भाले ने 601 वोटों से जीत दर्ज की है। कांग्रेस की हार की वजह आपसी गुटबाजी और बागी उम्मीदवारों का चुनाव मैदान में उतरना बताया जा रहा है। वहीं, दूसरी तरफ अमलेश्वर नगर पंचायत में भी बीजेपी को जीत मिली है। अमलेश्वर नगर पंचायत में पहली बार चुनाव हुए थे। इससे पहले यह ग्राम पंचायत थी। भूपेश बघेल के कार्यकाल में ही अमलेश्वर को नगर पंचायत घोषित किया गया था। भूपेश बघेल को झटका पाटन नगर पंचायत में कांग्रेस की हार पूर्व सीएम भूपेश बघेल के लिए बड़ा झटका है। यहां कांग्रेस के कई सीनियर नेताओं ने चुनाव प्रचार किया था। पाटन नगर पंचायत में बीजेपी की जीत से कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर है। यहां जीत का जश्न मनाया जा रहा है। अमलेश्वर में भी बीजेपी जीती अमलेश्वर नगर पंचायत में भी बीजेपी ने जीत दर्ज की है। अमलेश्वर नगर पंचायत भी पाटन विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है। यहां से बीजेपी उम्मीदवार दयानंद सोनकर 319 मतों से अपना चुनाव जीत गए हैं। वहीं, नगर निगम की बात करें तो बीजेपी सभी 10 नगर निगम में बड़ी बढ़त के साथ आगे चल रह है। महासचिव बने हैं भूपेश बघेल नगरीय निकाय चुनाव के रिजल्ट के एक दिन पहले ही कांग्रेस ने भूपेश बघेल को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। भूपेश बघेल को कांग्रेस का राष्ट्रीय महासचिव घोषित किया गया है। भूपेश बघेल को पंजाब राज्य का प्रभार भी सौंपा गया है।

रायपुर में पूर्व मेयर एजाज ढेबर भी 1500 वोट से हारे, जीत के बाद बीजेपी में जश्न का माहौल

रायपुर छत्तीसगढ़ के 5 नगर निगम में भाजपा ने कब्जा कर लिया है। रायगढ़ में जीववर्धन चौहान ने जानकी काटजू को 36,365 वोट से हरा दिया है। राजनांदगांव में बीजेपी के मधुसूदन यादव ने निखिल द्विवेदी को हराया है। जगदलपुर में भाजपा के संजय पांडेय ने मलकीत सिंह गैदू को किया पराजित। रायपुर में पूर्व मेयर एजाज ढेबर भी 1500 वोट से पार्षद चुनाव हार गए हैं। भाजपा प्रत्याशियों की जीत के बाद बीजेपी में जश्न का माहौल है। लोरमी में भाजपा की जीत के बाद डिप्टी सीएम साव कार्यकर्ताओं संग जमकर थिरके, रायपुर में राजेश मूणत कार्यकर्ताओं संग झूमे। बता दें कि 5 निगम में बीजेपी लीड कर रही है। मंत्री श्यामबिहार जायसवाल की बहू चुनाव हार गईं हैं। कांग्रेस की रीमा ने चंपा जायसवाल को 44 वोट से हराया है। रायपुर में मीनल चौबे 1,01,439 वोट से बढ़त बनाई हुई हैं। 10 निगम, 49 पालिका और 113 नगर पंचायत में मेयर पार्षद और अध्यक्ष पदों के लिए वोटों की गिनती जारी है।   नगर निगम बीजेपी कांग्रेस कौन आगे/ जीते रायपुर मीनल चौबे दीप्ति दुबे मीनल चौबे (बीजेपी) 1,01,439 वोट से आगे दुर्ग अलका बाघमार प्रेमलता पोषण साहू अलका बाघमार (बीजेपी) 15,000 वोट से आगे राजनांदगांव मधुसूदन यादव निखिल द्विवेदी मधुसूदन यादव (बीजेपी) 43,500 वोट से जीते बिलासपुर पूजा विधानी प्रमोद नायक पूजा विधानी (बीजेपी) 20,000 वोट से आगे अंबिकापुर मंजूषा भगत अजय तिर्की मंजूषा भगत (बीजेपी) 11,063 वोट से जीतीं चिरमिरी रामनरेश राय विनय जायसवाल रामनरेश राय (बीजेपी) 4000 वोट से जीते जगदलपुर संजय पांडेय मलकीत सिंह गैदू संजय पांडेय (बीजेपी) जीते रायगढ़ जीववर्धन चौहान जानकी काटजू जीववर्धन चौहान (बीजेपी) 34,365 वोट से जीते कोरबा संजू देवी राजपूत उषा तिवारी संजू देवी राजपूत (बीजेपी) आगे धमतरी जगदीश रामू मेहरा — (कांग्रेस प्रत्याशी का नामांकन रद्द हो चुका है) बीजेपी

देश में पहली बार 21 राज्यों में भगवा, 92 करोड़ लोगों पर एनडीए का सीधा शासन… मैप में भारत की सियासी तस्वीर

नईदिल्ली लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री मोदी रिकॉर्ड तीसरी बार प्रधानमंत्री बने, लेकिन इस बार बीजेपी अपने दम पर पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने में सफल नहीं हुई। लेकिन इस जीत के बाद कांग्रेस के साथ विपक्ष ने माना की अब मोदी लहर खत्म हो रही है लेकिन तीसरे कार्याकल के बाद हुए विधानसभा चुनावों के परिणाम देखकर इस बात को नकारा नहीं जा सकता की मोदी लहर अभी खत्म नहीं हुई है। मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने 8 राज्यों- आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, ओडिशा, जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, महाराष्ट्र और झारखंड में चुनाव लड़ा। इसमें आंध्र प्रदेश, अरुणाचल, ओडिशा, हरियाणा और महाराष्ट्र में भाजपा या गठबंधन की सरकार बनी है। 21 राज्यों में NDA की सरकार दिल्ली: दिल्ली चुनाव में भाजपा ने 26 साल बाद सत्ता में वापसी की है। पार्टी ने 70 में से 48 सीटों पर जीत दर्ज करी है और अब सीएम के नाम का ऐलान करने की तैयारी शुरू हो गई है। हरियाणा: हरियाणा विधानसभा चुनाव में 90 सीटों में से भाजपा ने 48 सीटों पर दर्ज की थी। हरियाणा में भाजपा की तीसरी बार सरकार बनी है। नायब सिंह सैनी हरियाणा के 19वें मुख्यमंत्री हैं। उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री हैं। वे 2017 में पहली बार और 2022 में दूसरी बार यूपी के सीएम बने थे। अब अगला विधानसभा चुनाव 2027 में है। उत्तराखंड: उत्तराखंड विधानसभा चुनावों में 70 सीटों में से भाजपा को 47 सीटों पर जीत मिली। पुष्कर सिंह धामी मुख्यमंत्री हैं। अगला विधानसभा चुनाव 2027 में है। बिहार: बिहार में NDA सरकार है और नीतीश कुमार मुख्यमंत्री हैं। ओडिशा: 2024 में ओडिशा की 147 विधानसभा सीटों में से भाजपा ने 78 सीटों पर जीत दर्ज की। ओडिशा के वर्तमान मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी हैं। राजस्थान: राजस्थान में भाजपा ने 200 सीटों में से 115 सीटों पर जीत दर्ज की थी। भजनलाल शर्मा राजस्थान के वर्तमान मुख्यमंत्री हैं। गुजरात: गुजरात में 182 सीटों में से 156 पर भाजपा ने जीत दर्ज की थी। भूपेंद्र पटेल मौजूदा मुख्यमंत्री हैं। महाराष्ट्र: महाराष्ट्र में 288 सीटों में भाजपा को 132 सीटों पर जीत मिली। देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री हैं। शिंदे और अजित पवार को डिप्टी सीएम है। गोवा: 40 विधानसभा सीटों वाले गोवा में भाजपा को 26 सीटे मिली और प्रमोद सावंत NDA के मुख्यमंत्री हैं। मध्य प्रदेश: मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा को 230 में से 163 सीटों पर जीत मिली थी। मोहन यादव वर्तमान मुख्यमंत्री हैं। छत्तीसगढ़: छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 90 विधानसभा सीटों में 54 सीटों पर जीत दर्ज की। मौजूदा मुख्यमंत्री विष्णु देव साय हैं। आंध्र प्रदेश: आंध्र प्रदेश में NDA की सरकार है और चंद्रबाबू नायडू मुख्यमंत्री हैं। असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर और त्रिपुरा में बीजेपी की सरकार है। मेघालय, सिक्किम और नगालैंड में एनडीए गठबंधन की सरकारें हैं। 3 साल में 21 राज्यों में चुनाव 2026 में पश्चिम बंगाल, असम, पुडुचेरी, तमिलनाडु और केरल में चुनाव होंगे। 2027 में गुजरात, पंजाब, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर के विधानसभा चुनाव है। 2 2028 में नगालैंड, त्रिपुरा, कर्नाटक, तेलंगाना, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, मेघालय, मिजोरम, छत्तीसगढ़ और राजस्थान शामिल हैं। मध्य और पश्चिमी भारत में एनडीए का दबदबा मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के साथ-साथ महाराष्ट्र और गुजरात में भी बीजेपी की सरकार है. 2022 में गुजरात और 2023 में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में बीजेपी ने जीत हासिल की थी. महाराष्ट्र में नवंबर 2024 में बीजेपी नीत एनडीए ने जीत हासिल की थी. इसी तरह उत्तर भारत के बिहार और उत्तर प्रदेश में एनडीए का कब्जा है. झारखंड और पश्चिम बंगाल में इंडिया की सरकार है. दक्षिण भारत की 5 में से 4 राज्यों में इंडिया की सरकार है. केरल, तेलंगाना, कर्नाटक और तमिलनाडु में इंडिया तो आंध्र में एनडीए की सरकार है. 140 करोड़ आबादी, 92 पर NDA का शासन देश की आबादी अभी 140 करोड़ के आसपास है. दिल्ली में जीत के बाद एनडीए का शासन 92 करोड़ लोगों पर हो गया है. 10 करोड़ से ज्यादा आबादी वाले उत्तर प्रदेश (24 करोड़), महाराष्ट्र (12 करोड़) और बिहार (12 करोड़) में एनडीए का ही शासन है. 10 करोड़ या उससे ज्यादा की आबादी वाले किसी भी राज्य में इंडिया की सरकार नहीं है. 5 करोड़ से ज्यादा आबादी वाले 7 में से 4 राज्यों में एनडीए की सरकार है. वहीं तीन राज्यों में इंडिया की सरकार है. 5 करोड़ से ज्यादा आबादी वाले पश्चिम बंगाल (9 करोड़), तमिलनाडु (7 करोड़) और कर्नाटक (6 करोड़) में इंडिया गठबंधन की सरकार है. इसी तरह आंध्र प्रदेश (5 करोड़), गुजरात (6 करोड़), मध्य प्रदेश (8 करोड़) और राजस्थान (8 करोड़) में एनडीए की सरकार है. वहीं 1-5 करोड़ आबादी वाले राज्यों की बात की जाए तो 10 राज्यों में से 6 में एनडीए और 4 में इंडिया की सरकार है. असम (3.5 करोड़), छत्तीसगढ़ (3 करोड़), दिल्ली (1.87 करोड़), हरियाणा (2.8 करोड़) जैसे राज्यों में एनडीए की सरकार है. मेघालय में 33 लाख के आसपास आबादी है. यहां किसी भी गठबंधन की सरकार नहीं है. पहली बार 21 राज्यों में एनडीए की सरकार साल 2018 के मध्य में बीजेपी सत्ता के शीर्ष पर थी. उस वक्त पार्टी के पास 20 राज्यों की सरकार थी. इनमें पूर्वोंत्तर के सभी 7 राज्यों के अलावा उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल, गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, हरियाणा और महाराष्ट्र की सरकार शामिल थी. इसके बाद बीजेपी का परफॉर्मेंस लगातार गिरता ही रहा. 7 साल बाद अब बीजेपी ने अपने 20 राज्यों वाला रिकॉर्ड को तोड़ दिया है. भगवा लहर में AAP के दिग्गज धराशायी भगवा लहर में आप के राष्ट्रीय संयोजक व पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, मंत्री सौरभ भारद्वाज, पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन सहित पार्टी के कई बड़े नेता चुनाव हार गए। मुख्यमंत्री आतिशी को भी कड़े मुकाबले का सामना करना पड़ा, लेकिन वह लगभग 3,500 मतों से चुनाव जीतने में सफल रहीं। कांग्रेस को फायदा, मत फीसद बढ़ा कांग्रेस के प्रदर्शन में सुधार हुआ है। उसका मत प्रतिशत बढ़ा है, लेकिन लगातार तीसरे चुनाव में भी उसका खाता नहीं खुल सका। AAP के वोटरों में BJP ने ऐसे लगाई सेंध वर्ष 2014 व वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में दिल्ली की सभी सातों सीटें … Read more

दिल्ली में नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह 19 या 20 फरवरी को हो सकता है, सरकार गठन की प्रक्रिया तेज

नई दिल्ली दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद सरकार गठन की प्रक्रिया तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार, दिल्ली में नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह 19 या 20 फरवरी को हो सकता है। वहीं, विधायक दल की बैठक 17 और 18 फरवरी को आयोजित की जाएगी, जिसमें नई सरकार के गठन से संबंधित महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाएंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज रात अमेरिका से दिल्ली पहुंचेंगे। इसके बाद सरकार बनाने को लेकर एक अहम बैठक होगी। पीएम मोदी के साथ केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और पार्टी के अन्य शीर्ष नेता भी मौजूद होंगे। इन नेताओं की बैठक में दिल्ली में सरकार गठन के लिए अंतिम रूप से निर्णय लिया जाएगा। इस दौरान दिल्ली का अगला सीएम कौन होगा, यह भी तय हो जाएगा। भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने दिल्ली में सरकार गठन के लिए पहले ही होमवर्क पूरा कर लिया है। पार्टी ने दिल्ली में सरकार गठन के लिए विधायकों के नामों की एक सूची तैयार की है, जिसमें 48 में से 15 विधायकों के नाम को प्राथमिकता दी गई है। इन 15 विधायकों में से 9 नामों को अंतिम रूप से चुना जाएगा, जिसमें मुख्यमंत्री, मंत्री और स्पीकर के नाम तय किए जाएंगे। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी अध्यक्ष जे.पी. नड्डा ने स्पष्ट किया है कि मुख्यमंत्री निर्वाचित विधायकों में से होगा और इस बारे में निर्णय विधायक दल की बैठक में लिया जाएगा। नड्डा ने यह भी संकेत दिया कि मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण के बाद पहली कैबिनेट बैठक में कुछ महत्वपूर्ण नीतिगत फैसले लिए जाएंगे। एक अन्य महत्वपूर्ण घोषणा यह है कि दिल्ली में नई भाजपा सरकार में कोई उपमुख्यमंत्री नहीं होगा। बता दें कि 8 फरवरी को दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित किए गए। इस चुनाव में भाजपा ने 42 सीटों पर शानदार जीत हासिल की, तो वहीं, आम आदमी पार्टी महज 22 सीटों पर सिमट गई। इस चुनाव में एक बार फिर कांग्रेस का खाता नहीं खुला। दिल्ली विधानसभा का मौजूदा कार्यकाल 26 फरवरी को समाप्त हो रहा है और नई सरकार को उससे पहले कार्यभार संभालना होगा।

दिल्ली में कुछ ऐसे नाम हैं जिन्हें कैबिनेट में जगह मिलना लगभग तय माना जा रहा है

नई दिल्ली दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की जीत के बाद से ही नए मुख्यमंत्री और कैबिनेट को लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाईं जा रही हैं। मुख्यमंत्री और मंत्रियों को लेकर कई नामों की चर्चा तेज है। संभव है कि रविवार तक नए मुख्यमंत्री का चुनाव हो जाए और अगले सप्ताह शपथ ग्रहण हो सकता है। दिल्ली में सीएम समेत अधिकतम 7 मंत्री बनाए जा सकते हैं। आम आदमी पार्टी के 10 साल पुराने शासन को खत्म करके भाजपा ने दिल्ली की 70 में से 48 सीटों पर जीत हासिल की है। बहुमत से 12 अधिक सीटें हासिल करने वाली भाजपा ने चुनाव से पहले किसी को मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित नहीं किया था। पीएम मोदी के नाम और उनकी गारंटियों पर बनी सरकार का चेहरा कोई ऐसा शख्स भी हो सकता है, जो अभी तक रेस में नहीं बताया जा रहा है। राजस्थान और मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में भाजपा चौंका चुकी है। हालांकि, कुछ ऐसे नाम हैं जिन्हें कैबिनेट में जगह मिलना लगभग तय माना जा रहा है। ऐसे 8 में से कम से कम 3 विधायकों की कुर्सी पक्की बताई जा रही है। पहले जाट चेहरों की बात, एक केजरीवाल का पुराना साथी पिछले दो चुनावों में भाजपा एक भी जाट बहुल सीट नहीं जीत पाई। लेकिन इस बार जाटों ने खुलकर भगवा पार्टी का साथ दिया। यही वजह है कि भाजपा ने सभी 10 जाट बहुल सीटों मुंडका, नजफगढ़, नांगलोई जाट, मटियाला, बिजवासन, महरौली, बवाना, नरेला, रिठाला और विकासपुरी में जीत दर्ज की। ऐसे में अब जाटों को रिटर्न गिफ्ट भी मिल सकता है। नई दिल्ली सीट पर अरविंद केजरीवाल को हराने वाले प्रवेश वर्मा भी जाट समुदाय से आते हैं। सीएम की रेस में भी वह सबसे आगे बताए जा रहे हैं। पार्टी सूत्रों का कहना है कि यदि नेतृत्व ने सीएम के तौर पर किसी और को भी चुना तो प्रवेश वर्मा को मंत्री पद मिलना लगभग तय है। वहीं, जाट चेहरे के तौर पर पूर्व मंत्री कैलाश गहलोत भी रेस में हैं। गहलोत ने चुनाव से ठीक पहले इस्तीफा देकर आम आदमी पार्टी सरकार को बड़ा झटका दिया था। इस बार वह भाजपा के टिकट पर बिजवासन से विधायक बने हैं। ‘आप’ सरकार में गृह और परिवहन जैसे अहम मंत्रालय संभाल चुके कैलाश गहलोत के अनुभव को देखते हुए उन्हें सरकार में शामिल किया जा सकता है। 3 में से एक सिख नेता को मिल सकता है पद भाजपा के टिकट पर तीन दिग्गज सिख नेता भी चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं। इनमें किसी एक को कैबिनेट में शामिल किया जा सकता है। राजौरी गार्डन से जीत हासिल करने वाले मनजिंदर सिंह सिरसा प्रमुख दावेदार माने जा रहे हैं। शीला दीक्षित सरकार में मंत्री रहे और लोकसभा चुनाव से ठीक पहले दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष का पद छोड़कर भाजपा में शामिल हुए अरविंदर सिंह लवली भी रेस में आगे बताए जा रहे हैं। वहीं, आम आदमी पार्टी के दूसरे सबसे बड़े नेता मनीष सिसोदिया को जंगपुरा जैसी सीट से हराने वाले तरविंदर सिंह मारवाह को भी दांव लग सकता है। इन तीन में से एक सिख नेता का मंत्री बनना लगभग तय बताया जा रहा है। 3 पूर्वांचली नेताओं में भी रेस दिल्ली में इस बार भाजपा ने उन सीटों पर भी शानदार सफलता हासिल की है, जहां पूर्वांचली वोटर्स की अधिकता है। भाजपा ने झुग्गी-झोपड़ी और कच्ची कॉलोनियों वाली 17 सीटों पर जीत हासिल की है। चुनाव के दौरान आम आदमी पार्टी और भाजपा के बीच पूर्वांचली वोटर्स के लिए खूब खींचतान देखने को मिली। दिल्ली की राजनीति में पूर्वांचलियों की अहमियत को देखते हुए कैबिनेट में कम से कम एक पूर्वांचली नेता का शामिल होने की पूरी गुंजाइश है। इस मामले में लक्ष्मी नगर से जीते अभय वर्मा की दावेदारी मजबूत मानी जा रही है तो आप लहर में भी यहां कमल खिलाने में कामयाब रहे थे। अभय मूल रूप से दरभंगा के रहने वाले हैं। अभय वर्मा के अलावा संगम विहार से जीते चंदन चौधरी और विकासपुरी से जीते पंकज कुमार सिंह भी दावेदार हैं।

भाजपा राजधानी को ‘मिनी’ भारत के रूप में दिखाना चाहती ,नए मंत्रिमंडल में दो उपमुख्यमंत्री रखने के विकल्प पर भी विचार कर रही

नई दिल्ली दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी किसे मुख्यमंत्री बनाएगी इसे लेकर तमाम तरह की चर्चा चल रही है। कई लोगों के नाम सीएम रेस में चल रहे हैं। पार्टी ने साफ किया है कि 14 फरवरी के बाद मुख्यमंत्री के नाम पर फैसला लिया जाएगा। जवाहर लाल नेहरू में ग्रैंड शपथग्रहण समारोह होगा। इसी बीच भाजपा राजधानी को ‘मिनी’ भारत के रूप में दिखाना चाहती है। इसके लिए नए मंत्रिमंडल में दो उपमुख्यमंत्री रखने के विकल्प पर भी विचार कर रही है। पार्टी नेताओं ने बुधवार को यह जानकारी दी। विभिन्न जातियों को साधने में मदद मिलेगी पार्टी के कुछ नेताओं ने कहा कि दिल्ली सरकार में दो उपमुख्यमंत्री रखने के कदम से पार्टी को विभिन्न जातियों, समुदायों और क्षेत्रीय पृष्ठभूमि के विधायकों को समायोजित करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा, ‘इसकी बहुत संभावना है क्योंकि ऐसा कई अन्य राज्यों में भी किया गया है, जहां विभिन्न पृष्ठभूमि के नेताओं को समायोजित करने के लिए उपमुख्यमंत्री बनाए गए हैं। पार्टी शासित राज्यों मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में ऐसा किया गया है।’ रविवार को बैठक संभव यह प्रस्ताव राष्ट्रीय नेतृत्व के विचाराधीन है, जो इस पर अंतिम फैसला लेगा, साथ ही मुख्यमंत्री और अन्य मंत्रियों के नामों को भी अंतिम रूप देगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वीकेंड पर विदेश यात्रा से स्वदेश लौटने के बाद भाजपा के सरकार गठन की प्रक्रिया में तेजी आने की संभावना है। पार्टी नेताओं ने बताया कि सदन के नेता का चुनाव करने के लिए भाजपा विधायक दल की बैठक रविवार को होने की संभावना है, जो दिल्ली का अगला मुख्यमंत्री होगा। पीएम ने दिल्ली को कहा था ‘मिनी इंडिया’ दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा की शानदार जीत के बाद भाजपा मुख्यालय में अपने भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली को ‘मिनी भारत’ का प्रतिबिंब बताया था। दिल्ली भाजपा के एक शीर्ष नेता ने कहा, ‘पंजाबी, सिख, पूर्वांचली, उत्तराखंडी, वैश्य, जाट समेत समाज के विभिन्न वर्गों से भाजपा नेता अब विधायक बन गए हैं, जिन्हें हमारी सरकार में प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।’ उन्होंने कहा कि उपमुख्यमंत्री बनाने का विचार पार्टी की इस प्रक्रिया में मदद करेगा। मुख्यमंत्री पद के दावेदारों के रूप में भाजपा विधायकों के कई नाम चर्चा में हैं। पार्टी के एक अन्य वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘अगर भाजपा का मुख्यमंत्री एक समुदाय से होगा, तो उपमुख्यमंत्री के पद का प्रयोग उन अन्य लोगों के दावों को संतुलित करने के लिए किया जा सकता है, जिनके समुदाय जैसे कि महिला, सिख, जाट या बनिया ने पार्टी को दिल्ली में इतनी शानदार जीत दिलाई है।’ रोहिणी के विधायक विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि दिल्ली में भाजपा सरकार जल्द ही छठे दिल्ली वित्त आयोग का गठन करेगी जो चार साल से लंबित है। सीएम रेस में किस-किसके नाम सीएम रेस में कई लोगों के नाम चल रहे हैं। जिनमें प्रवेश वर्मा शामिल हैं जिन्होंने नई दिल्ली सीट से आप सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल को हराया है। इसके अलावा दिल्ली भाजपा के पूर्व प्रमुख विजेंद्र गुप्ता और सतीश उपाध्याय, मनजिंदर सिंह सिरसा, पवन शर्मा, आशीष सूद, रेखा गुप्ता और शिखा राय जैसे वरिष्ठ नेता भी शामिल हैं। पार्टी नेताओं ने करनैल सिंह और राज कुमार भाटिया जैसे कुछ नवनिर्वाचित विधायकों को भी शीर्ष पद का संभावित दावेदार बताया है।

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