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कौन बनेगा दिल्ली का मुख्यमंत्री? रेस में Manoj Tiwari समेत ये नाम आगे..

नई दिल्ली दिल्ली में 26 साल बाद सत्ता में लौटी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) मुख्यमंत्री किसे बनाएगी? यह सवाल अब भी कायम है। भाजपा की ओर से इसको लेकर किसी तरह का संकेत नहीं दिया गया है। लेकिन कई नाम मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बने हुए हैं। अटकलें इस बात की भी तेज है कि इस बार भाजपा दिल्ली में एक पूर्वांचली को मुख्यमंत्री बना सकती है। खासकर किसी ऐसे नेता को यह जिम्मेदारी दी जा सकती है जिनकी जड़ें बिहार में हैं। ऐसा करके भाजपा एक एक साथ दो निशाने साध सकती है। पूर्वांचलियों को रिटर्न गिफ्ट दिल्ली में पूर्वांचली वोटर्स की एक बड़ी आबादी है। इस बार बड़ी संख्या में पूर्वांचली वोटर्स ने भाजपा का साथ दिया है, जो पिछले 2-3 चुनावों में आम आदमी पार्टी के साथ रुख कर चुके थे। भाजपा ने इस बार झुग्गी और कच्ची कॉलोनियों में बेहतर प्रदर्शन किया है, जहां पूर्वांचली वोटर्स की संख्या ज्यादा है। झुग्गी बस्ती की बहुलता वाले 18 विधानसभा में से 10 पर भाजपा ने जीत हासिल की है। वहीं 10 सीटों पर कच्ची कॉलोनियों के वोटर्स हार जीत तय करते हैं और इनमें से 7 पर कमल खिला है। इस हिसाब से देखें तो 17 सीटें जितवाने में पूर्वांचलियों ने भाजपा की मदद की है। इसके अलावा अन्य सीटों पर भी उनकी कम या ज्यादा मौजूदगी है। ऐसे में भाजपा किसी पूर्वांचली को सीएम बनाकर रिटर्न गिफ्ट दे सकती है और आगे के चुनावों के लिए भी अपना बेस मजबूत कर सकती है। दिल्ली से बिहार को साध सकती है भाजपा कुछ जानकारों का मानना है कि भाजपा जिस तरह महीन राजनीति करती है और एक चुनाव के खत्म होते ही दूसरे चुनाव की तैयारी में जुट जाती है, उसको देखते संभव है कि दिल्ली से ही वह बिहार को साधने की कोशिश करे, जहां कुछ महीने बाद विधानसभा चुनाव होने जा रहा है। सूत्रों की मानें तो भाजपा राजधानी दिल्ली में बिहार के किसी नेता को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बिठाकर ना सिर्फ दिल्ली में मौजूद पूर्वांचलियों को खुश कर सकती है बल्कि इसका असर 1000 किलोमीटर दूर भी होने की उम्मीद है। भाजपा को आगामी बिहार चुनाव में इसका फायदा मिल सकता है। बिहार से बड़ी संख्या में लोग दिल्ली में रोजगार और बेहतर शिक्षा, इलाज की तलाश में दिल्ली आते जाते रहे हैं। बिहार में ऐसे कम ही परिवार आपको मिलेंगे जिसका कोई सदस्य दिल्ली में ना रहता हो। ऐसे में यदि दिल्ली में किसी बिहारी को सीएम बनाया जाता है तो एक सकारात्मक संदेश बिहार के हर परिवार तक पहुंचेगा। बिहारी बना सीएम तो किनका लग सकता है दांव? दिल्ली में भाजपा में पूर्वांचल खासकर बिहार से आने वाले कई बड़े नेता हैं। लेकिन संभव है कि जीते हुए किसी विधायक में से ही पार्टी मुख्यमंत्री बनाएगी। ऐसा होने पर अभय वर्मा, डॉ. पंकज कुमार सिंह और चंदन कुमार चौधरी की लॉटरी लग सकती है। इनमें सबसे मजबूत दावेदार अभय वर्मा को माना जा रहा है जो मूलरूप से दरभंगा के रहने वाले हैं। पेशे से वकील अभय वर्मा दिल्ली भाजपा के उपाध्यक्ष भी हैं। वह आप की लहर में भी लक्ष्मी नगर विधानसभा से चुनाव जीतने में कामयाब रहे थे। इस बार उन्होंने बीबी त्यागी को 11542 वोटों से मात दी है। वहीं, खगड़िया के रहने वाले चंदन चौधरी ने संगम विहार से जीत हिसाल की है। उन्होंने यहां आम आदमी पार्टी के दिनेश मोहनिया को मात दी है। पक्सर से आने वाले डॉ. पंकज कुमार सिंह ने विकासपुरी विधानसभा क्षेत्र से जीत हासिल की है। उन्होंने पहली बार यहां कमल खिलाया है। पंकज के पिता बाबू राज मोहन सिंह दिल्ली में एडिशनल कमिश्नर रह चुके हैं।

दिल्ली के मुख्यमंत्री के पद को लेकर महिला विधायक को भी मौका दिया जा सकता

नई दिल्ली  दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा को मिली प्रचंड जीत के बाद सीएम फेस को लेकर मंथन जारी है। दिल्ली के मुख्यमंत्री को लेकर जिन नामों की सबसे ज्यादा चर्चा है उनमें प्रवेश साहिब सिंह वर्मा, विजेंद्र गुप्ता और सतीश उपाध्याय जैसे नाम शामिल है। हालांकि इस बीच खबर यह भी आ रही है कि इस पद के लिए महिला विधायक को भी मौका दिया जा सकता है। दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 70 में से 48 सीटों पर जीत दर्ज कर सत्ता की चाबी हासिल की है। भाजपा ने बिना मुख्यमंत्री के चेहरे के दिल्ली में चुनाव लड़ा था। ऐसे में अब चुनाव जीतने के बाद अगला मुख्यमंत्री कौन होगा, इसको लेकर चर्चा जोरों पर हैं। इंडिया टुडे के रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में अगला मुख्यमंत्री नवनिर्वाचित 48 विधायकों में से ही चुना जाएगा। सूत्रों की मानें तो मुख्यमंत्री पद के लिए महिला विधायक को मौका दिया जा सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में डिप्टी सीएम भी बनाया जा सकता है और मंत्रिमंडल में भी दलितों और महिलाओं की भागीदारी का खास ध्यान रखा जा सकता है। बता दें, भाजपा की तरफ से इस बार 4 महिलाएं दिल्ली की विधायक बनी हैं। इनमें रेखा गुप्ता, शिखा राय, पूनम शर्मा और नीलम पहलवान के नाम शामिल हैं। रेखा गुप्ता ने शालीमार बाग से , शिखा रॉय ने ग्रेटर कैलाश से, पूनम शर्मा ने वजीपुर और नीलम पहलवान ने नजफगढ़ विधानसभा सीट से जीत दर्ज की है। हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने मुलाकात की थी जिसमें दिल्ली सरकार के स्वरूप को लेकर चर्चा हुई। भाजपा नेताओं के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अगले सप्ताह विदेश दौरे से लौटने के बाद भाजपा सरकार बनाने का दावा पेश कर सकती है और उसके बाद शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जाएगा।

PM की अमेरिका यात्रा के बाद दिल्ली में जल्द होगा मुख्यमंत्री शपथ ग्रहण समारोह

दिल्ली भारतीय जनता पार्टी (BJP) 27 साल के लंबे सूखे को समाप्त करते हुए राष्ट्रीय राजधानी में सरकार बनाने के लिए तैयार है. माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा के बाद दिल्ली के नए मुख्यमंत्री का शपथ ग्रहण समारोह 13 फरवरी के बाद होने की संभावना है. सूत्रों ने रविवार को कहा, बीजेपी राष्ट्रीय राजधानी में अगली सरकार का नेतृत्व करने के लिए अपने नेता को खोजने के लिए विचार-विमर्श कर रही है. दिल्ली में शनिवार (8 फरवरी) को वोटों की गिनती के बाद बीजेपी ने 70 सदस्यीय विधानसभा में 48 सीटें हासिल कर अपना 27 साल का लंबा इंतजार खत्म करते हुए दिल्ली की सत्ता में वापसी की. एक दशक से शहर पर शासन कर रही आप 22 सीटें जीतने में सफल रही, जबकि पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसौदिया समेत उसके प्रमुख नेताओं को हार का सामना करना पड़ा. कौन बन सकता है दिल्ली का CM मुख्यमंत्री पद के चेहरे की घोषणा किए बिना चुनाव लड़ने वाली बीजेपी ने सरकार का मुखिया तय करने के लिए उच्च स्तरीय बैठकें शुरू कर दी हैं, जिसमें पांच नेता प्रमुख दावेदारों के रूप में उभर रहे हैं. नई दिल्ली सीट पर केजरीवाल को हराकर एक बड़े हत्यारे के रूप में उभरे परवेश वर्मा दिल्ली में संभावित मुख्यमंत्री चेहरों की सूची में सबसे आगे हैं. इसके अलावा विजेंदर गुप्ता, एक वरिष्ठ बीजेपी नेता, जो दिल्ली विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में कार्य कर चुके हैं, एक प्रमुख ब्राह्मण चेहरा सतीश उपाध्याय, जो पहले प्रदेश अध्यक्ष के रूप में कार्य कर चुके हैं, दिल्ली बीजेपी के महासचिव आशीष सूद, जिनके केंद्रीय नेताओं के साथ घनिष्ठ संबंध हैं, और वैश्य समुदाय से आरएसएस के एक मजबूत सदस्य जितेंद्र महाजन अन्य दावेदार हैं. PM मोदी का अमेरिकी दौरा पीएम मोदी अपने दूसरे कार्यकाल में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ पहली मुलाकात के लिए 12-13 फरवरी को संयुक्त राज्य अमेरिका का दौरा करने वाले हैं. सूत्रों ने कहा कि अगले हफ्ते पीएम के विदेश से लौटने के बाद पार्टी सत्ता पर दावा पेश कर सकती है और उसके बाद शपथ ग्रहण होने की संभावना है. दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि मुख्यमंत्री चुनने का निर्णय पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व करेगा, उन्होंने शीर्ष पद पर किसी नए चेहरे के आने की संभावना भी जताई. पार्टी ने अपने राष्ट्रीय नेतृत्व द्वारा दिल्ली के मुख्यमंत्री पद के लिए किसी महिला उम्मीदवार पर दांव लगाने की संभावना से भी इनकार नहीं किया.

बजट में मोदी सरकार का टैक्स छूट वाला दांव दिल्ली चुनाव में मास्टरस्ट्रोक हुआ साबित

नई दिल्ली  दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 का रिजल्ट लगभग आ चुका है। बीजेपी दिल्ली में सरकार बनाती हुई साफ दिखाई दे रही है। इसकी सिर्फ औपचारिकता ही बाकी है। आम आदमी पार्टी की करारी हार हो चुकी है। बीजेपी राष्ट्रीय राजधानी में 27 साल बाद सरकार बनाएगी। 8वें वेतन आयोग और 12 लाख रुपये तक की इनकम टैक्स फ्री करने की घोषणा, ये दो ऐसे कारण रहे जिनसे बीजेपी को फायदा हुआ। दिल्ली में ऐसे काफी लोग हैं जिनकी सैलरी 12 लाख रुपये सालाना है। इतनी सैलरी इनकम टैक्स फ्री करने से ऐसे लोगों को फायदा होगा। वहीं दिल्ली में रहने वाले केंद्र सरकार के रिटायर कर्मचारियों की संख्या भी काफी है। केंद्र सरकार ने 8वें वेतन आयोग के गठन को मंजूरी दे दी है। इन दो कारणों से भी दिल्ली का मिडिल क्लास वोटर बीजेपी के पक्ष में जाता नजर आया है। 8वां वेतन आयोग केंद्र सरकार ने 8वें वेतन आयोग को बनाने की घोषणा की है। इससे करीब 50 लाख केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों को बढ़ी हुई सैलरी मिलेगी। 8वां वेतन आयोग लागू होने से न केवल केंद्र सरकार के कर्मचारियों के वेतन में बढ़ोतरी होगी, बल्कि महंगाई भत्ता (डीए) भी बढ़ेगा। इसके अलावा 8वें वेतन आयोग से करीब 65 लाख रिटायर्ड केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों की पेंशन और भत्ते में भी बढ़ोतरी होगी। केंद्रीय कर्मचारियों की दिल्ली में अच्छी खासी संख्या है। वहीं यहां काफी रिटायर्ड कर्मचारी भी रहते हैं। ऐसे में उन्हें बीजेपी में एक उम्मीद दिखाई दी और इनका अधिकतर वोट बीजेपी के पक्ष में जाता दिखाई दिया। इनकम टैक्स में कटौती इस महीने एक फरवरी को केंद्रीय बजट आया था। इसमें सरकार ने सालाना 12 लाख रुपये तक की सैलरी वालों का इनकम टैक्स जीरो कर दिया है। दिल्ली में ऐसे लोगों की संख्या काफी है जिनकी सालाना सैलरी 12 लाख रुपये तक है। वहीं दूसरी ओर सरकार ने इनकम टैक्स की नई व्यवस्था को भी संशोधित किया है। इसके स्लैब में बदलाव होने से लोगों को अब कम इनकम टैक्स चुकाना होगा। इनकम टैक्स में हुए इन बदलावों को देखते हुए हाई सैलरीड क्लास वर्ग भी बीजेपी के पक्ष में नजर आया। इसके अलावा इनकम टैक्स में राहत से मिडिल क्लास भी काफी खुश नजर आया और उनसे भी बीजेपी की जीत में अपना योगदान दिया।

दुष्यंत गौतम भी सीएम पद की रेस में साथ ही मनजिंदर सिंह सिरसा, विजेंद्र गुप्ता के नाम पर भी चर्चा

नई दिल्ली दिल्ली विधानसभा चुनावों के नतीजे जारी हो रहे हैं। अब तक के नतीजों और रुझानों से ये साफ हो गया है कि दिल्ली में बीजेपी सरकार बनाने जा रही है। आम आदमी पार्टी के कई बड़े नेता चुनाव हार गए हैं। इसी के साथ दिल्ली के नए मुख्यमंत्री की कवायद शुरू हो गई है। सीएम पद की रेस में बीजेपी के कई बड़े चेहरे शामिल हैं। लेकिन बीजेपी नेतृत्व किस पर भरोसा जताएगी, ये देखना दिलचस्प होगा। प्रवेश वर्मा का नाम चल रहा आगे नई दिल्ली से अरविंद केजरीवाल को हराने वाले प्रवेश वर्मा का नाम रेस में सबसे आगे माना जा रहा है। प्रवेश वर्मा पूर्व मुख्यमंत्री साहिब सिंह वर्मा के बेटे हैं। वे नई दिल्ली सीट से सांसद भी रह चुके हैं। लेकिन इस बार पार्टी ने उन्हें लोकसभा में टिकट नहीं दिया। विधानसभा चुनाव में प्रवेश वर्मा ने केजरीवाल को हराकर पार्टी का भरोसा फिर से जीत लिया है। दुष्यंत गौतम के नाम की भी चर्चा दिल्ली के करोल बाग विधानसभा चुनाव से बीजेपी उम्मीदवार और वरिष्ठ नेता दुष्यंत कुमार गौतम का नाम भी सीएम रेस में चल रहा है। इस सीट पर उनका मुकाबला आम आदमी पार्टी के विशेष रवि और कांग्रेस के राहुल धानक से था। चुनावों के नतीजों के बीच गौतम ने कहा, ‘हम एक विधायक के तौर पर हम शपथ लेगें। मुख्यमंत्री या मंत्री बनने का फैसला पार्टी लेगी। पार्टी जो जिम्मेदारी देगी उसको निभायेगें।” मनजिंदर सिंह सिरसा के नाम की चर्चा इसके अलावा बीजेपी के सीनियर नेता मनजिंदर सिंह सिरसा के नाम की भी चर्चा सीएम पद की रेस में है। उन्हें पार्टी ने राजौरी गार्डन से उम्मीदवार बनाया था। जहां उन्होंने 1800 वोटों से आम आदमी पार्टी की धनवती चन्दीला को हराया। राजौरी गार्डन पंजाबी बहुल सीट है। विजेंद्र गुप्ता भी हो सकते हैं दावेदार बीजेपी के विधायक विजेंद्र गुप्ता भी दिल्ली में मुख्यमंत्री पद के दावेदार हो सकते हैं। गुप्ता दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। उन्होंने पिछले चुनाव में भी जीत हासिल की थी। विजेंद्र गुप्ता विधानसभा में मुखर होकर पार्टी की बात रखते हैं।

दिल्ली की जीत पर एमपी भाजपा में जश्न, कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर जीत की बधाई दी

भोपाल दिल्ली चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को स्पष्ट बहुमत मिलता दिख रहा है, जिससे 27 साल बाद भाजपा सरकार बनाने जा रही है। रुझानों में भाजपा की जीत के संकेत मिलते ही भोपाल स्थित प्रदेश भाजपा कार्यालय में जश्न का माहौल बन गया। दिल्ली की जीत पर एमपी भाजपा में जश्न प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा, संगठन मंत्री हितानंद शर्मा सहित अन्य कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर जीत की बधाई दी। इस मौके पर भाजपा कार्यालय में ढोल-नगाड़े बजाए गए और कार्यकर्ताओं ने जश्न मनाया। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा ने कहा कि दिल्ली की यह जीत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों की जीत है। उन्होंने कहा, “इस चुनाव में बड़ी संख्या में अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों ने भी भाजपा पर भरोसा जताया है।” दिल्ली चुनाव में कई बड़े नेताओं की हार पर प्रतिक्रिया देते हुए वीडी शर्मा ने कहा, “उन्हें तो हराया ही जाना था, क्योंकि यही लोग दिल्ली को आपदा की स्थिति में लेकर गए थे, और अब वे खुद आपदा में चले गए हैं। कांग्रेस लगातार गिरावट की ओर बढ़ रही है।” दिल्ली चुनाव में एमपी के नेताओं की अहम भूमिका दिल्ली चुनाव में मध्यप्रदेश के नेताओं की भूमिका पर बोलते हुए वीडी शर्मा ने कहा, “हम भाजपा के कार्यकर्ता हैं और जहां भी हमें जिम्मेदारी दी जाती है, उसे पूरी शिद्दत के साथ निभाते हैं।” भोपाल भाजपा कार्यालय में जश्न का माहौल दिल्ली में भाजपा को बहुमत मिलने के बाद भोपाल के भाजपा कार्यालय में जश्न मनाया गया। इस दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं ने मिठाइयां बांटी और एक-दूसरे को बधाई दी। कार्यालय में ढोल-नगाड़ों के साथ उत्सव का माहौल रहा। बीजेपी प्रदेश कार्यालय में जमकर आतिशबाजी की गई। इस मौके पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा, संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा, प्रदेश महामंत्री शरदेंदु तिवारी, पूर्व मंत्री एवं विधायक बृजेंद्र प्रताप सिंह, राज्यसभा सांसद सुमित्रा वाल्मीकि, विधायक भगवानदास सबनानी, प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल, भाजपा शहर अध्यक्ष रविंद्र यति, अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष कैलाश जाटव सहित कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे।

जय पांडा ने कहा कि दिल्ली में अब ‘डबल इंजन’ की सरकार होगी, जिसमें केंद्र और राज्य मिलकर विकास कार्यों को गति देंगे

नई दिल्ली दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार बनने के बाद अब मुख्यमंत्री पद को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं. पार्टी के वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बैजयंत जय पांडा ने कहा है कि अगले 10 से 15 दिनों में दिल्ली को नया मुख्यमंत्री मिल जाएगा. जय पांडा ने कहा, “हमारे पास सामूहिक नेतृत्व है और मुख्यमंत्री का चयन एक प्रक्रिया के तहत किया जाएगा.” उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि दिल्ली में अब ‘ड्रामा पॉलिटिक्स’ नहीं चलेगी और सरकार विकास के एजेंडे पर काम करेगी. उन्होंने दावा किया कि दो महीने पहले ही पार्टी को फीडबैक मिल गया था कि BJP दो-तिहाई बहुमत से जीत दर्ज करेगी. उन्होंने कहा, “मैंने पहले ही कहा था कि हम दो-तिहाई बहुमत से जीतेंगे, क्योंकि हमारा आकलन यही था.” यमुना को लेकर बड़ा फैसला जल्द जय पांडा ने यह भी संकेत दिया कि नई सरकार बनने के बाद पहली कैबिनेट बैठक में यमुना की सफाई और प्रदूषण पर महत्वपूर्ण निर्णय लिया जाएगा. उन्होंने कहा कि दिल्ली में अब ‘डबल इंजन’ की सरकार होगी, जिसमें केंद्र और राज्य मिलकर विकास कार्यों को गति देंगे. BJP नेताओं का मानना है कि अरविंद केजरीवाल की रणनीति अब कारगर नहीं होगी और जनता ने ‘ड्रामा पॉलिटिक्स’ को नकार दिया है. पार्टी के सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री पद के लिए कई नामों पर मंथन चल रहा है और जल्द ही इसका ऐलान किया जाएगा.  

आम आदमी पार्टी और कांग्रेस की असलियत जनता जान गई, इनका झूठ तिनके की तरह बिखर गया: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

भोपाल दिल्ली विधानसभा चुनाव परिणामों पर मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का जनता के साथ जुड़ाव, भाजपा कार्यकर्ताओं की मेहनत और देश के बदलते मिजाज के चलते हमें दिल्ली में जीत मिल रही है। टुकड़े-टुकड़े गैंग और छोटी मानसिकता वाले लोग जो अब तक गुमराह करते आए थे उनकी हार हुई हैं। अपने सोशल मिडिया अकांउट पर उन्होंने लिखा कि आप-दा से मुक्त हुआ दिल्ली। सीएम ने दिल्ली विधानसभा की 11 सीटों पर प्रचार किया था। इनमें त्रिनगर सीट पर भाजपा जीत चुकी है। नजफगढ, विकासपुरी, नंगलोई जाट, उत्तम नगर समेत कई सीटों पर भाजपा आगे चल रही है। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने इन रुझानों पर प्रसन्नता व्यक्त की और कहा कि मुझे इस बात का संतोष है कि जहां प्रचार करने का मौका मिला वहां पार्टी जीत रही है। भाजपा का अश्वमेध का घोड़ा निर्बाध दौड़ रहा प्रयागराज में महाकुंभ स्नान से पहले मीडिया से बातचीत में सीएम डॉ यादव ने कहा कि सत्य कभी पराजित नहीं होता। उन्होंने कहा पीएम मोदी जिस तरह लोककल्याण की भावना से काम कर रहे हैं इसीलिए दिल्ली वासियों ने हम पर भरोसा जताया। सीएम डॉ मोहन यादव ने पीएम मोदी, राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को बधाई देते हुए कहा कि भाजपा के अश्वमेध यज्ञ का घोड़ा निर्बाध गति से दौड़ रहा है। कांग्रेस का हर हथकंडा फेल जिस तरह पहले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने हर हथकंडा अपनाकर झूठ बोला, फिर महाराष्ट्र हरियाणा के चुनाव में भी उसने गुमराह करने की कोशिश की लेकिन उसका झूठ तिनके की तरह बिखर गया। जनता इन दोनों दलों की असलियत जान चुकी है। इन दोनों दलों को अब अपने भीतर झांकना चाहिए। ये जो कीचड़ उन्होंने फैलाया था उसमें कमल खिल गया।  अपने सोशल मिडिया अकांउट पर उन्होंने लिखा कि आप-दा से मुक्त हुआ दिल्ली। सीएम ने दिल्ली विधानसभा की 11 सीटों पर प्रचार किया था। इनमें त्रिनगर सीट पर भाजपा जीत चुकी है। नजफगढ, विकासपुरी, नंगलोई जाट, उत्तम नगर समेत कई सीटों पर भाजपा आगे चल रही है। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने इन रुझानों पर प्रसन्नता व्यक्त की और कहा कि मुझे इस बात का संतोष है कि जहां प्रचार करने का मौका मिला वहां पार्टी जीत रही है।

अखिलेश यादव के सफल पीडीए राजनीति को लग रहा झटका, अवधेश प्रसाद के आंसुओं के बाद भी नहीं पिघले मतदाता

अयोध्या उत्तर प्रदेश के मिल्कीपुर विधानसभा उपचुनाव के शुरूआती रुझान सामने आ गए हैं। इन रुझानों में भारतीय जनता पार्टी, समाजवादी पार्टी पर बढ़त बनाती दिख रही है। भारतीय जनता पार्टी ने इस सीट पर चंद्रभानु पासवान को उम्मीदवार बनाया था। वहीं, समाजवादी पार्टी फैजाबाद-अयोध्या सांसद अवधेश प्रसाद के बेटे अजीत प्रसाद पर दांव लगती दिखाई दी। भारतीय जनता पार्टी ने इस सीट पर परिवारवाद की राजनीति का मुद्दा उठाते हुए पासी समाज से ही आने वाले चंद्रभानु पासवान के पक्ष में माहौल बनाया। अखिलेश यादव इस सीट पर पीडीए पॉलिटिक्स के सफल होने की उम्मीद कर रहे हैं। हालांकि, प्रारंभिक रुझान उनकी उम्मीदों को झटका देते दिख रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी की आक्रामक रणनीति के कारण मिल्कीपुर उपचुनाव समाजवादी पार्टी के लिए प्रतिष्ठा का विषय बन गया। पूरे मुलायम कुनबा को मिल्कीपुर में उतर दिया गया। मैनपुरी सांसद डिंपल यादव, आजमगढ़ सांसद धर्मेंद्र यादव के बाद सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव भी प्रचार मैदान में उतरे। अखिलेश चुनाव प्रचार खत्म होने के दिन मिल्कीपुर पहुंचे और भाजपा के खिलाफ अपनी पिछड़ा दलित अल्पसंख्यक यानी पीडीए पॉलिटिक्स को साधने का प्रयास किया। वहीं, यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ ने मिल्कीपुर विधानसभा उपचुनाव की कमान अपने हाथ में संभाल रखी थी। शुरुआती रुझान योगी आदित्यनाथ को बढ़त दिलाते दिख रहे हैं। पहले चरण से ही बनाई बढ़त मिल्कीपुर उपचुनाव परिणाम में पहले ही चरण से भारतीय जनता पार्टी उम्मीदवार चंद्रभानु पासवान ने बढ़त बना ली। वह लगातार आगे चलते दिख रहे हैं। पहले चरण के वोटों की गिनती के बाद चंद्रभानु पासवान 3995 वोटों से आगे चल रहे थे। दूसरे चरण की वोटों की गिनती पूरी हुई तो चंद्रभानु पासवान साढ़े छह हजार वोटों से आगे निकल गए। वहीं, तीसरे चरण के वोटों की गिनती पूरी होने के बाद भाजपा और समाजवादी पार्टी उम्मीदवार के बीच का अंतर 10 हजार के पार कर गया। अखिलेश ने बताया था महत्वपूर्ण वोटों के लगातार बढ़ रहे अंतर ने समाजवादी पार्टी समर्थकों के चेहरों को लटका दिया है। मिल्कीपुर उपचुनाव से पहले अखिलेश यादव ने इसे महत्वपूर्ण करार दिया था। सांसद अवधेश प्रसाद को सामने लाकर लोकसभा चुनाव में भाजपा की अयोध्या में हार को देशभर में समाजवादी पार्टी हिंदुत्व की राजनीति पर चोट करार देती रही। अखिलेश इस सीट पर जीत दर्ज कर दलित-पिछड़ों के बीच अपनी पैठ को बढ़ाने का दावा करते दिख रहे थे। वहीं, भारतीय जनता पार्टी लगातार कह रही थी कि लोकसभा चुनाव में अयोध्या में भाजपा की हार और समाजवादी पार्टी की जीत एक तुक्का थी। मिल्कीपुर उपचुनाव में भाजपा ने जिस प्रकार से जोर लगाया और ग्रास रूट लेवल पर काम किया, वह अब वह वोटों की गिनती में दिख रहा है।

एमपी बीजेपी अध्यक्ष के लिए पार्टी अपने पुराने और आजमाए हुए फॉर्मूले पर ही भरोसा करेगी

भोपाल मध्यप्रदेश भारतीय जनता पार्टी में नए प्रदेश अध्यक्ष का नाम तय होना है. जिसके लिए प्रक्रिया तो जारी है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल लगातार हो रही देरी से उठ रहा है. क्योंकि काफी मशक्कत के बाद बीजेपी ने जिला अध्यक्षों की घोषणा तो कर दी लेकिन प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव में देरी क्यों हो रही है. हालांकि, बीजेपी का कहना है कि फिलहाल पार्टी की प्राथमिकता दिल्ली विधानसभा चुनाव है, जिसके तुरंत बाद प्रदेश भाजपा अध्यक्ष चुन लिया जाएगा. अब सवाल यह है कि पार्टी इस बार अध्यक्ष पद के लिए क्या फॉर्मूला तय करती है? बीजेपी से जुड़े सूत्रों की मानें तो एमपी बीजेपी अध्यक्ष के लिए पार्टी अपने पुराने और आजमाए हुए फॉर्मूले पर ही भरोसा करने वाली है. क्या है पुराना फॉर्मूला? आपको बता दें कि मध्यप्रदेश में बीजेपी ने साल 2003 के विधानसभा चुनाव में 10 सालों की कांग्रेस सरकार को हटाकर प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाई थी. तब जिस फॉर्मूले पर भारतीय जनता पार्टी ने काम किया, उसने बीजेपी को मध्यप्रदेश में बेहद मजबूत स्थिति में लाकर खड़ा कर दिया. यह फॉर्मूला था ओबीसी मुख्यमंत्री और सवर्ण प्रदेश अध्यक्ष का. 2003 में उमा भारती को मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया गया था जो ओबीसी वर्ग से आती हैं. उमा भारती के बाद बाबूलाल गौर, शिवराज सिंह चौहान और अब मोहन यादव एमपी के मुख्यमंत्री बने और यह चारों ओबीसी वर्ग से आते हैं. वहीं, इन सभी मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल में बीजेपी के संगठन की जिम्मेदारी यानी प्रदेश अध्यक्ष का जिम्मा कैलाश जोशी, नरेंद्र सिंह तोमर, प्रभात झा, नंदकुमार सिंह चौहान, राकेश सिंह और वीडी शर्मा को मिला जो सभी सवर्ण वर्ग से आते हैं.  जातिगत फैक्टर हो सकता है टर्निंग पॉइंट  ओबीसी सीएम वाली सरकार और सामान्य वर्ग वाला प्रदेश अध्यक्ष बनाकर 2003 से बीजेपी ने सत्ता और संगठन में जो संतुलन बनाया, उसने एमपी बीजेपी को देश का सबसे मजबूत संगठन बना दिया और माना जा रहा है कि बीजेपी इसी फॉर्मूले पर इस बार भी भरोसा करने जा रही है. ऐसे में यह जानना जरूरी है कि जातिगत समीकरण किस वर्ग के लिए सटीक बैठने की संभावना है.  ब्राह्मण बीजेपी के मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा जो ब्राह्मण वर्ग से आते हैं, उनका कार्यकाल पूरा हो चुका है. सियासी गलियारों की मानें तो वीडी शर्मा को कोई नई जिम्मेदारी देकर एमपी में वीडी शर्मा की जगह नया प्रदेश अध्यक्ष बनाया जा सकता है. ऐसे में ब्राह्मण वर्ग से जो नाम रेस में हैं- उनमें पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा, डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला और विधायक रामेश्वर शर्मा का नाम सामने आ रहा है. जातिगत समीकरणों की बात करें तो फिलहाल मोहन कैबिनेट में सबसे कम भागीदारी ब्राह्मण वर्ग की है, जिसमें सिर्फ दो मंत्री शामिल हैं. राजेंद्र शुक्ला और राकेश शुक्ला. विधानसभा चुनाव के नतीजे आए थे तो बीजेपी के 27 ब्राह्मण विधायक चुनाव जीते थे लेकिन सरकार में भागीदारी के मामले में यह वर्ग पीछे रह गया. अब जब 2027 में उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं तो पड़ोसी राज्य में ब्राह्मण को एक बार फिर से प्रदेश अध्यक्ष बनाकर बीजेपी एमपी और यूपी के सवर्णों को खुश करने की कोशिश कर सकती है. दूसरी तरफ, सरकार में ब्राह्मणों की कम भागीदारी से सवर्णों की नाराजगी का जो डर बीजेपी की सता रहा है, उससे भी उसे छुटकारा मिल सकता है.  क्षत्रिय 2003 के बाद से लंबे समय तक प्रदेश अध्यक्ष बनने की जिम्मेदारी एमपी बीजेपी के क्षत्रिय वर्ग से आने वाले नेताओं को ही मिली है. नरेंद्र सिंह तोमर, नंदकुमार सिंह चौहान और राकेश सिंह. वर्तमान में मोहन कैबिनेट की बात करें तो इसमें 4 मंत्री क्षत्रिय वर्ग से आते हैं- जिनमें राकेश सिंह, उदय प्रताप सिंह, गोविंद सिंह राजपूत और प्रद्युम्न सिंह तोमर शामिल हैं. वहीं, विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर हैं जो क्षत्रिय वर्ग से आते हैं. पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ में बीजेपी ने किरण देव सिंह को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर एमपी में संदेश लगभग साफ कर दिया है कि यहां इस वर्ग से प्रदेश अध्यक्ष नहीं बनेगा.  वैश्य बीते कुछ दिनों में जो नाम तेजी से प्रदेश अध्यक्ष की दावेदारी के रूप में उभरा है- उनमें हेमंत खंडेलवाल का नाम है जो वैश्य समाज से आते हैं. मोहन कैबिनेट में फिलहाल 2 वैश्य वर्ग से आने वाले मंत्री हैं- कैलाश विजयवर्गीय और चेतन कश्यप. ऐसे में देखना यह है कि क्या सीएम की पसंद कहे जा रहे हेमंत खंडेलवाल को जिम्मेदारी मिलती है या नहीं? अनुसूचित जाति मोहन कैबिनेट में अनुसूचित जाति के मंत्रियों की संख्या 4 है और एक डिप्टी सीएम हैं- जगदीश देवड़ा. जाहिर है सरकार में इस वर्ग की भागीदारी बेहतर है, इसलिए 2003 फॉर्मूले में यह वर्ग फिट नहीं बैठता. हालांकि, जिस तरह से अंबेडकर के नाम पर इन दिनों सियासी माहौल बना हुआ है, माना जा रहा है कि बीजेपी एससी वर्ग को अपने पाले में करने के लिए किसी एससी वर्ग के नेता को प्रदेश अध्यक्ष बनाने का दांव चल सकती है. अगर ऐसा होता है तो लाल सिंह आर्य का नाम सबसे ऊपर आ जाएगा जो बीजेपी एससी प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं.  ओबीसी मध्यप्रदेश में 2003 के बाद से ही बीजेपी ने ओबीसी वर्ग से ही मुख्यमंत्री बनाया है और वर्तमान में ओबीसी वर्ग से आने वाले मोहन यादव सीएम हैं. वहीं, दूसरी तरफ उनकी कैबिनेट में 8 से ज्यादा मंत्री ओबीसी वर्ग से आते हैं. दूसरी तरफ, 2003 के फॉर्मूले को देखें तो ओबीसी सीएम और सामान्य वर्ग से प्रदेश अध्यक्ष बनाने का नियम रहा है, ऐसे में अगला प्रदेश अध्यक्ष ओबीसी वर्ग से बनने के आसार न के बराबर हैं.  अनुसूचित जनजाति वर्तमान में मोहन कैबिनेट में अनुसूचित जनजाति वर्ग से 5 मंत्री बने हुए हैं. एमपी में 47 एसटी सीटें हैं, जबकि दो दर्जन से ज्यादा सीटों पर अनुसूचित जाति ही हार या जीत का फैसला करती है. जाहिर है यह एक बड़ा वोट बैंक है और इसे साधने के लिए बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष के लिए एसटी चेहरे पर भी दांव चल सकती है. अगर ऐसा होता है तो सुमेर सिंह सोलंकी, दुर्गादास उइके (मोदी कैबिनेट में मंत्री)और गजेंद्र पटेल का नाम ऊपर आ सकता है.  जातिगत समीकरण और अनुभव को दी जाएगी तवज्जो मध्यप्रदेश बीजेपी … Read more

महापौर प्रत्याशी मिनल चौबे ने अपने चुनाव प्रचार की शुरूआत रायपुर उत्तर विधानसभा अंतर्गत कालीमाता वॉर्ड शक्तिनगर से की

रायपुर  भारतीय जनता पार्टी की महापौर प्रत्याशी मिनल चौबे ने गुरुवार अपने चुनाव प्रचार की शुरूआत रायपुर उत्तर विधानसभा अंतर्गत  कालीमाता वॉर्ड शक्तिनगर से की। वे लगातार  चुनाव प्रचार करने विभिन्न वार्डों का दौरा कर रही हैं इस दौरान उनके साथ प्रत्येक वॉर्ड  के पार्षद प्रत्याशी भी जनता से लगातार आशीर्वाद मांग रहे हैं नगर निगम चुनाव में भाजपा महापौर प्रत्याशी सहित सभी पार्षद प्रत्याशियों को जनता का अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है भाजपा की योजनाओं को लेकर भाजपा कार्यकर्ता भी लगातार जनता के बीच पहुंचकर जनता से समर्थन जुटा रहे हैं , आज उत्तर विधानसभा में रैली के दौरान उनके साथ विधायक पुरंदर मिश्रा ने भी प्रत्याशी मीनल चौबे के लिए जनता से मतदान की अपील की । रायपुर निगम में भाजपा का महापौर बनने से बहेगी विकास की त्रिवेणी:- मीनल चौबे भाजपा प्रत्याशी मीनल चौबे ने आज अपने चुनाव प्रचार के दौरान कई स्थानों पर  जनता से संवाद भी स्थापित किया उन्होंने  कहा कि आप सभी से मिल रहे स्नेह और आशीर्वाद ही मेरे ऊर्जा का स्त्रोत है । समय कम होने के कारण दुगना परिश्रम है परन्तु जनता से मिल रहे अपार स्नेह और वरिष्ठ जनों से मिल रहे आशीर्वाद से अलग ही ऊर्जा प्राप्त होती है । उन्होंने कहा मै जनता के अपार स्नेह की ऋणी हूं और यह संकल्प लेती हूं कि  रायपुर नगर निगम को सर्वश्रेष्ठ नगर निगम बना कर जन समस्यायों का निवारण को प्राथमिकता में रखूंगी ।  उन्होंने कहा केंद्र में भाजपा सरकार के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी और प्रदेश में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय जी के साथ रायपुर नगर निगम में भाजपा महापौर का चयन होने से रायपुर नगर निगम में विकास की त्रिवेणी बहेगी और निश्चित तौर पर तीनों जगह भाजपा की सत्ता होने से नगर निगम के विकास को गुणात्मक गति मिलेगी । नगर निगम रायपुर को कांग्रेस ने दलाली का अड्डा बना दिया :- पुरंदर मिश्रा रायपुर उत्तर विधानसभा के विधायक पुरंदर मिश्रा ने महापौर प्रत्याशी मिनल चौबे और रायपुर उत्तर विधानसभा के 7 वार्डों के प्रत्याशियों के लिए उत्तर की जनता से मतदान स्वरूप आशीर्वाद मांगा इस दौरान उन्होंने कहा कि रायपुर उत्तर की जनता ने मुझे अपने अपरिमित स्नेह सहयोग और आशीर्वाद प्रदान कर विधायक बनाया है भाजपा के मजबूत कार्यकर्ताओं और रायपुर उत्तर की श्रेष्ठकर जनता के बल पर हमने विधानसभा चुनाव में 20 हजार से अधिक मतों की बड़ी जीत हासिल की उसके पश्चात लोकसभा चुनाव में  हमने भाजपा को बड़ी लीड दिलवाई थी। आप सभी के सहयोग और प्रेम के बल से मै आश्वस्त हूं कि रायपुर नगर निगम चुनाव में महापौर के रूप में मीनल चौबे और सभी वार्डों में भाजपा प्रत्याशियों को बड़ी मतांतर से जीत दिलवाएंगे । उत्तर विधायक पुरंदर मिश्रा ने कहा कांग्रेस के नेताओं ने नगर निगम को दलाली का अड्डा बना दिया है जनता की सुविधाओं के हर काम के लिए घुस की धनराशि तय है और निगम के सारे ठेकों में गुणवत्ता आधार नहीं है अपितु आप किस कांग्रेस नेता के करीबी हो यह आधार रह गया है । भाजपा प्रत्याशी मीनल चौबे ने  आज 7 वार्डों में जनसंपर्क रैली निकालकर जनता से आशीर्वाद मांगा शक्ति नगर से शुरू हुई चुनाव प्रचार रैली में मिनल चौबे के साथ भाजपा के वार्ड पार्षद प्रत्याशी साधना साहू के साथ प्रचार रैली वॉर्ड के मुख्य चौक चौराहों और मोहल्लों से होते हुए आगे बढ़ी इस दौरान जगह जगह महापौर प्रत्याशी मिनल चौबे सहित भाजपा पार्षद प्रत्याशियों का स्थानीय जनता ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया अनेक स्थानों पर रैली का भव्य स्वागत किया गया जहां प्रत्याशियों को स्थानीय नागरिकों ने पुष्पमाला पहना कर स्वागत किया शक्ति नगर से होते हुए वे शंकर नगर वॉर्ड में भाजपा प्रत्याशी राजेश गुप्ता के साथ वार्ड में जनसंपर्क रैली करते हुए , गुरुगोविंद सिंग वॉर्ड में कैलाश बेहरा , पं.रविशंकर शुक्ल वॉर्ड ज्ञानचंद चौधरी , हवलदार अब्दुल हमिद वॉर्ड में ज्ञानचंद चौधरी , इंदिरा गांधी वॉर्ड में अवतार बागल और मौलाना अब्दुल रऊफ वॉर्ड में घनश्याम रक्सेल के साथ क्षेत्र में रैली की शक्ल में जनसंपर्क करते हुए भाजपा की महापौर प्रत्याशी मिनल चौबे और पार्षद प्रत्याशी के लिए जन आशीर्वाद मांगा ।इस दौरान मिनल चौबे और भाजपा पार्षद प्रत्याशियों ने स्थानीय गणमान्य नागरिकों से भेंट भी की श्रीमती चौबे के  जनसंपर्क रैली में आज उनके साथ चुनाव प्रचार में बड़ी संख्या में भाजपा , महिला मोर्चा और युवा मोर्चा कार्यकर्ता उपस्थित थे ।

‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ चाहने वाली सरकार का बजट

बजट विशेष  नीरज मनजीत इस बार के बजट में केन्द्र सरकार ने मिडिल क्लास को दिल खोलकर जैसा तोहफ़ा दिया है, वह अभूतपूर्व और ऐतिहासिक है। भारत का मिडिल क्लास हर साल उत्सव की तरह बजट की प्रतीक्षा करता है। उसकी पहली नज़र इनकम टैक्स के स्लैब पर लगी होती है, कि सरकार ने कितनी राहत दी है। कभी उसे निराशा हाथ लगती है, तो कभी ‘ऊंट के मुंह में जीरा’ जैसी छूट हासिल हो भी जाती है। पिछले कुछ वर्षों से हम देख रहे हैं कि देश का मिडिल क्लास फ्रस्ट्रेशन का शिकार होता चला जा रहा है। वोट हासिल करने की होड़ में राजनीतिक पार्टियों को अनाप-शनाप रेवड़ियां बाँटते देखकर इस फ्रस्ट्रेशन में साल-दर-साल बढ़ोतरी हो रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पिछले दिनों दिल्ली की एक जनसभा में इस बात के संकेत दिए थे कि देश के 50-60 करोड़ के विशाल मध्यवर्ग को राहत देना उनकी प्राथमिकता है। इसलिए वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट के आख़िर में जैसे ही टैक्स छूट का ऐलान किया, सत्ता पक्ष के सांसद एक मिनट तक मेजें थपथपाकर स्वागत करते रहे। वैसे नितांत तटस्थ भाव से समीक्षा की जाए, तो यह बड़ी राहत अगले वर्षों में काफी दूरदर्शी क़दम साबित हो सकती है। वित्तमंत्री सीतारमण का कहना है कि नए टैक्स स्लैब से सरकार को तक़रीबन एक लाख करोड़ रुपए का वित्तीय घाटा होगा, मगर भविष्य में इसके बहुत से फ़ायदे भी होंगे। इस छूट का तार्किक विश्लेषण करते हुए उन्होंने कहा कि इससे मंझोले कारोबारियों और नौकरीपेशा लोगों की जेब में अतिरिक्त पैसा आएगा, उनकी क्रयशक्ति बढ़ेगी, पैसा बाज़ार में ख़र्च होगा, जिससे देश की अर्थव्यवस्था के पहिए को तेज गति मिलेगी। पिछले कुछ दशकों से देखा गया है कि मध्यवर्ग के लोग कमाई का एक बड़ा हिस्सा उपभोक्ता वस्तुओं की ख़रीद, सैर-सपाटे और तीज-त्योहारों में दिलेरी से ख़र्च करने लगे हैं। इसे फ़िजूलखर्ची नहीं बल्कि इनकम मैनेजमेंट कहा जाना चाहिए। थोड़ी बहुत बचत का भाव भी उनके अंदर रहता है। बचत का पैसा भी बैंकों अथवा शेयर मार्केट में आएगा। अंततः इसका फ़ायदा भी देश की इकोनॉमी को ही होगा। जैसी कि परंपरा रही है, विपक्ष ने अपने-अपने तरीक़ों से इस बजट की आलोचना की है। अखिलेश यादव के नेतृत्व में विपक्ष के कुछ सांसदों ने तो बजट का ही बहिष्कार कर दिया। हालांकि बाद में कुछ सांसद अपनी सीटों पर लौट आए। अखिलेश चाहते थे कि पहले महाकुंभ के हादसे पर चर्चा होनी चाहिए। जैसे ही सीतारमण ने बजट भाषण शुरू किया, अखिलेश और कुछ विपक्षी संसद हंगामा करने लगे। अखिलेश के इस रवैये को क़तई ठीक नहीं कहा जा सकता, क्योंकि पीएम मोदी ने सत्र से पहले ही कह दिया था कि वे महाकुंभ हादसे पर संसद में चर्चा कराने के लिए तैयार हैं। बजट के पहले दिन तो यह संभव नहीं था। ऐसे में अखिलेश के बहिष्कार अगर कोई मतलब था तो सिर्फ़ यही के वे इस मुद्दे को सुर्ख़ियों में रखना चाहते थे। महाकुंभ के हादसे पर बेशक योगी सरकार से सवाल पूछे जाने चाहिए, मगर जिस तरह से एक तबका अफ़वाहें फ़ैलाने में लगा हुआ है, वह तो बहुत ही ख़तरनाक है। क्या ऐसे लोग चाहते हैं कि कोई बड़ा हादसा हो जाए? बजट पर राहुल गांधी ने बड़ी ही रोचक टिप्पणी करते हुए कहा कि यह बजट “बुलेट इंजरी पर बैंड-एड” यानी “गोली के जख़्म पर पट्टी” लगाने जैसा है। हालांकि राहुल का यह कथन एक रस्म अदायगी के अलावा और कुछ नहीं है, मगर यदि इसे सही मान भी लिया जाए, तो भाजपा और निर्मला सीतारमण ने कम-से-कम मिडिल क्लास के जख़्मों पर मरहम पट्टी लगाने की कोशिश तो की। 2014 से पहले कांग्रेस की सरकारें किस क़दर मध्यवर्ग की उपेक्षा करती थीं, यह भी हमने अच्छी तरह देखा है। मिसाल के तौर पर हम यहाँ 2011, 2012 और 2013 के बजट के इनकम टैक्स के आंकड़े पेश कर रहे हैं। 2011 से पहले कांग्रेस सरकार में 1 लाख 60 हजार तक की इनकम टैक्स फ्री थी। इस वर्ष वित्तमंत्री प्रणव मुखर्जी ने इसमें 20 हजार की बढ़ोतरी करते हुए 1 लाख 80 हजार तक कर दिया था। 2012 में पी चिदंबरम ने इसे बढ़ाकर 2 लाख की इनकम टैक्स फ्री कर दी। 2013 में कांग्रेस सरकार ने कोई बढ़ोतरी नहीं की थी। अलबत्ता 2 से 5 लाख के स्लैब में 2 हजार रुपये की छूट दी गई थी। ज़ाहिर है कि मिडिल क्लास के घावों पर तरीक़े का फ़ाहा रखना भी कांग्रेस की प्राथमिकता में नहीं था। 2014 में भाजपा सरकार के आते ही वित्तमंत्री अरुण जेटली ने टैक्स फ्री इनकम में एकमुश्त 50 हजार की बढ़ोतरी करके ढाई लाख कर दी थी। इसके बाद तक़रीबन हर साल टैक्स स्लैब में मिडिल क्लास को कुछ-न ₹-कुछ राहत दी गई है। 2020 में तो एक बार फिर एकमुश्त छूट देते हुए 5 लाख तक की इनकम टैक्स फ्री कर दी गई। वित्तमंत्री थीं निर्मला सीतारमण। 2023 में और इस साल तो मोदी सरकार ने कमाल ही कर दिया। 2023 में 7 लाख की आय और इस बार सीधे 5 लाख की छलांग और 12 लाख की इनकम टैक्स फ्री कर दी गई। निःसंदेह इसका श्रेय पीएम मोदी और वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण को दिया जाएगा। इस छलांग के अलावा भी इस बजट में बहुत कुछ है। सच तो यह है कि यह बजट गरीब, किसान, लोअर मिडिल क्लास, मंझोले व्यापारियों, बेरोजगार युवाओं, महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों का भला चाहने वाली “सर्वे भवन्तु सुखिनः” के सिद्धांत पर चलने वाली सरकार का सर्वांगीण बजट है। बजट में युवाओं के स्टार्टअप और महिला उद्यमियों के लिए बड़ी रक़म रखी गई है। ‘मेक इन इंडिया एंड मेक फ़ॉर वर्ल्ड’ के विचार को आगे बढ़ाने के लिए व्यापारियों के लिए लोन गारंटी लिमिट 5 से 10 करोड़ की गई है। साथ में 72 लाख नौकरियां पैदा करने का संकल्प है। भारतीय जनता पार्टी और पीएम मोदी पिछले दस वर्षों से भारत को मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने का सपना साकार करने की कोशिश कर रहे हैं। इसीलिए हर युवा को वे संदेश देते हैं कि वे बजाए सरकारी नौकरियों के पीछे दौड़ने के, किसी स्टार्टअप का मालिक बनें और अपने साथ अपने गाँव के युवाओं को भी रोजगार देकर आगे … Read more

शक्कर कारखाना चालू होने तक जारी रहेगा आंदोलन: पंकज उपाध्याय

The movement will continue till the sugar factory becomes operational: Pankaj Upadhyay कैलारस शक्कर कारखाने को लेकर प्रशासन एवं आंदोलनकारीयौ में ठनी हुई है सरकार लगातार किसानों एवं जनता को लगातार गुमराह कर रही है वहीं शक्कर कारखाना चलाओ संघर्ष समिति निरंतर आंदोलन कर रही है विगत 21 जनवरी को कैलारस शक्कर कारखाने की भूमि के निलामी के विरोध में विधायक पंकज उपाध्याय के नेतृत्व में चार दिवसीय धरना दिया गया एवं दिनांक 21 जनवरी को सत्याग्रह एवं जेल भरो आंदोलन किया गया जिसमें हजारों की संख्या में किसानो युवाओं एवं आम जनों ने हिस्सा लेकर अपने गिरफ्तारी दी  प्रशासन ने भारी दबाव के कारण नीलामी टाल दी परंतु दिनांक 7 फरवरी को पुनः शक्कर कारखाने की भूमि की नीलामी निकली है इसके विरोध में एक बार फिर से किसान युवा आंदोलित होकर नीलामी वाले दिन विरोध प्रदर्शन करेंगे संघर्ष समिति ने आह्वान किया है कि शक्कर कारखाने पर एक दिवसीय भूख हड़ताल की जावेगी एवं आमजन अपने-अपने घरों पर काले झंडे लगाकर विरोध दर्ज करें शक्कर कारखाने पर हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया कि आंदोलन निरंतर जारी रखा जाएगा सरकार जब तक कारखाना प्रारंभ करने की मांग नहीं मान लेती एवं नीलामी नहीं रुकती तब तक संघर्ष जारी रहेगा समिति ने जनता जनार्दन से निवेदन किया है कि जौरा कैलारस एवं संपूर्ण मुरैना चंबल के अचल के लोग दिनांक 7 फरवरी को काले कपड़े पहन कर अपना विरोध दर्ज कारण एवं अपने घरों पर काले झंडे लगाए एवं बड़ी संख्या में भूख हड़ताल में पहुंचकर अपना विरोध प्रदर्शित करें बैठक में मुख्य रूप से पूर्व विधायक महेश दत्त मिश्रा किसान संघ के अशोक तिवारी गयाराम धाकड़ Bsp नेता नंदलाल खरे मुरारी लाल अमर नरहरि शर्मा बल्लभ यादव रामहेत जाटव काला जी अशोक जाटव ओम प्रकाश शाक्य परसराम जादौन ध्रुव यादव वीर सिंह कुशवाह सकलेचा जी ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष विनोद दुबे मोहन रसोईया सत्येंद्र सोलंकी संतोष सोलंकी नीरज जाटव मोनू सिकरवार कल्लु सिकरवार सरपंच रिंकू मुद्गल पार्षद मोहित शुक्ला रफीक खान सोनू खान एदल गुर्जर के साथ बड़ी संख्या में किसान एवं आमजन मौजूद थे

विश्लेषण: प्रयागराज महाकुम्भ 2025 मेले में हुई त्रासदी के बाद उठ रहे हैं कई सवाल

Analysis: Many questions are being raised after the tragedy at the Prayagraj Maha Kumbh 2025 fair सम्पादकीय लेख भोपाल। यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ के समर्थक चाहे जितनी कोशिश कर लें, कुम्भ मेले में हुई त्रासदी के पीछे उनके प्रशासन की लापरवाही और कुप्रबंधन को छिपाया नहीं जा सकता। जैसे-जैसे नए विवरण सामने आ रहे हैं, हादसे की भयावहता बढ़ती ही जा रही है। यह भी पता चला है कि 29 जनवरी की सुबह पहली भगदड़ के बाद, कुछ ही घंटों के भीतर थोड़ी दूरी पर दूसरी भगदड़ भी हुई थी। इसके अलावा कुम्भ में कुछ मर्तबा आगजनी की घटनाएं भी हुई हैं, जिनमें सरकार द्वारा श्रद्धालुओं के लिए विशेष रूप से बनाए गए दर्जनों आलीशान टेंट जलकर राख हो गए। आधिकारिक तौर पर मृतकों की संख्या 30 बताई गई है। लेकिन मौनी अमावस्या के दिन स्नान के लिए जिस पैमाने पर भीड़ उमड़ी थी, उसके मद्देनजर यह संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है। कपड़ों, जूतों, कम्बलों और अन्य निजी सामानों के अवशेष हर जगह बिखरे पड़े थे, जो इस बात के जीवंत साक्ष्य थे कि भीड़ में कुचलने के भय से श्रद्धालु अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने पर मजबूर हो गए थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस त्रासदी के कुछ ही घंटों के भीतर एक्स पर अपनी शोक संवेदनाएं व्यक्त कर दी थीं, लेकिन उत्तर प्रदेश प्रशासन बहुत समय तक यही दिखावा करता रहा कि कुछ हुआ ही नहीं है। इसके बाद मोदी ने यूपी सीएम से चार बार फोन पर बात की, गृह मंत्री अमित शाह और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी एक्स पर पोस्ट किया, तब जाकर यूपी प्रशासन को अपनी चुप्पी तोड़ने और सच्चाई स्वीकारने के लिए मजबूर होना पड़ा। हादसे के पूरे 17 घंटे बाद, 29 जनवरी को शाम 7 बजे उन्होंने भगदड़ की जिम्मेदारी लेते हुए बयान जारी किया और ऐसी घटना दोबारा होने से रोकने के इंतजाम करने का वादा किया। उसके बाद से, यूपी सरकार ने भीड़ को सफलतापूर्वक प्रबंधित करने का प्रत्यक्ष अनुभव रखने वाले दो वरिष्ठ अधिकारियों को ड्यूटी पर लगाया है, अतिरिक्त बल तैनात किए हैं और वाहनों और श्रद्धालुओं की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए नए सिरे से यातायात योजना बनाई है, लेकिन नुकसान पहले ही हो चुका था। जोशीमठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने हादसे के बाद योगी के इस्तीफे की मांग की है और उन पर इस मामले में देश को गुमराह करने का आरोप लगाया। अन्य प्रमुख संतों और साधुओं ने सार्वजनिक रूप से तो कुछ नहीं कहा, लेकिन माना जा रहा है कि कई लोग मन ही मन शंकराचार्य की भावनाओं को समर्थन करते हैं और वे इस बात से नाराज हैं कि मौनी अमावस्या का पवित्र दिन तीर्थयात्रियों के शवों से दागदार हो गया। शंकराचार्य ने कहा कि अगर उन्हें भगदड़ और उसके परिणामस्वरूप हुई मौतों के बारे में पता होता, तो वे मृतकों के लिए उपवास करते और आनुष्ठानिक रूप से तीर्थस्नान नहीं करते। यूपी के सीएम के रूप में आठ साल के अपने कार्यकाल में योगी ने खुद को हिंदुत्व के एक प्रखर चेहरे के रूप में स्थापित कर दिया है। इससे न केवल उन्हें संघ का समर्थन मिला जिसने लोकसभा चुनावों में यूपी में भाजपा की करारी हार के बावजूद हर परिस्थिति में उनका साथ दिया बल्कि उन्हें खुद को देश भर में एक लोकप्रिय नेता के रूप में स्थापित करने में भी मदद मिली। आज वे मोदी के बाद भाजपा के दूसरे सबसे लोकप्रिय प्रचारक हैं। लेकिन कुम्भ हादसे के बाद एक सक्षम प्रशासक के रूप में उनकी छवि को झटका लगा कुम्भ का निर्बाध आयोजन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की साख को मजबूत कर सकता था। किंतु प्रयागराज में हुए हादसे के बाद अब यूपी प्रशासन से सवाल पूछे जा रहे हैं। यह किसी से छुपा नहीं है कि यूपी की भाजपा में अंतर्कलह है। है। ऐसा इसलिए भी है, क्योंकि वे कुम्भ शुरू होने से पहले और बाद में लगभग हर दूसरे दिन प्रयागराज का दौरा कर रहे थे, वे व्यक्तिगत रूप से वहां की व्यवस्थाओं की निगरानी कर रहे थे और इस पर बारीकी से नजर रखे हुए थे कि कुम्भ के प्रबंधन के लिए जो प्रशासनिक मशीनरी उन्होंने लगाई थी, वह सुचारु रूप से काम कर रही है या नहीं। बीवीआईपी के लिए विशेष व्यवस्था, उनकी गाड़ियों की अनियंत्रित आवाजाही और आम श्रद्धालुओं को नदी तक पहुंचने के लिए 20 किलोमीटर से अधिक पैदल चलना, खाने-पीने की चीजों की ऊंची लागत आदि को लेकर भी अनेक श्रद्धालुओं में गुस्सा है। दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक समागम का निर्बाध आयोजन हिंदुत्व के प्रतीक और कुशल प्रशासक के रूप में योगी की साख को मजबूत करता, किंतु प्रयागराज में अफसरों की लापरवाही से हुए हादसे के बाद अब उनके नेतृत्व वाले प्रशासन से सवाल पूछे जा रहे हैं। यह किसी से छुपा नहीं है कि यूपी की भाजपा में अंतर्कलह है। 26 फरवरी को मेला समाप्त होने के बाद यूपी की राजनीति में बहुत कुछ देखने को मिल सकता है।

प्रदेश अध्यक्ष के लिए कई नाम चर्चा में , रेस में अब सबसे आगे बैतूल से विधायक हेमंत खंडेलवाल का नाम

भोपाल  मध्य प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के सभी 62 जिला अध्यक्षों का चुनाव हो गया है। अब सिर्फ प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव ही बाकी है। पार्टी ने पहले ही केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को प्रदेश अध्यक्ष के चयन के लिए पर्यवेक्षक नियुक्त किया है और उम्मीद जताई जा रही है कि वे जल्द ही मध्य प्रदेश का दौरा करेंगे। प्रदेश अध्यक्ष के लिए कई नाम चर्चा में हैं, लेकिन रेस में अब सबसे आगे बैतूल से विधायक और पूर्व सांसद हेमंत खंडेलवाल का नाम तेजी से आगे आया है। खंडेलवाल को संघ, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और पार्टी के अन्य नेताओं का समर्थन मिल रहा है। हेमंत खंडेलवाल के पिता स्व. विजय खंडेलवाल भी भाजपा के नेता थे, जिससे उनकी राजनीतिक पृष्ठभूमि मजबूत और पार्टी से बहुत गहरा जुड़ाव है। पार्टी सूत्रों के अनुसार हेमंत खंडेलवाल के संघ से जुडे होने और विवादों से दूर रहने के चलते पार्टी अब धीरे धीरे उनके नाम पर सहमति बना रही है। वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा का कार्यकाल पांच साल का हो चुका है और उन्हें फिर से मौका मिलने की संभावना कम है। बताया जा रहा है कि अध्यक्ष पद के लिए हेमंत खंडेलवाल पहली पसंद बन गए हैं। हालांकि, यह भी कहा जा रहा है कि भाजपा अध्यक्ष के चुनाव के लिए भी जातिगत समीकरणों को साधना चाहेगी। ऐसे में संभावना है कि नया अध्यक्ष सामान्य, आदिवासी या महिला वर्ग से हो सकता है, क्योंकि भाजपा ने विधानसभा चुनाव के बाद डिप्टी सीएम और मंत्रियों के लिए भी जातिगत समीकरणों का पूरा ध्यान रखा था। अभी अध्यक्ष पद की रेस में कई सीनियर नेता भी दावेदार हैं। ऐसे में देखना होगा कि भाजपा सीनियर नेता को कमान सौंपती है या फिर किसी नए चहेरे पर दांव लगाती है।   नरोत्तम मिश्रा- पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा की दावेदारी काफी मजबूत मानी जा रही है। वह सवर्ण वर्ग से आते हैं और राज्य की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय हैं। उनकी केंद्रीय नेतृत्व से भी अच्छी ट्यूनिंग मानी जाती है। फग्गन सिंह कुलस्ते- पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता फग्गन सिंह कुलस्ते आदिवासी वर्ग से आते हैं और मध्य प्रदेश में आदिवासी वर्ग की अहमियत को देखते हुए उनकी दावेदारी काफी मजबूत हो सकती है। वीडी शर्मा– वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा का नाम भी रेस में हैं, क्योंकि उनके कार्यकाल में बीजेपी ने विधानसभा और लोकसभा चुनाव में अच्छा प्रदर्शन किया था। पार्टी एक बार फिर उनके नाम पर विचार कर सकती है। अरविंद भदौरिया- पूर्व मंत्री अरविंद भदौरिया संगठन के एक कुशल रणनीतिकार माने जाते हैं। हालांकि, वह 2023 के विधानसभा चुनाव में हार गए थे, लेकिन पार्टी उन्हें एक बार फिर सक्रिय करना चाहती है।    

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