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75 करोड़ सम्पत्ति के मालिक हैं शिवराज सिंह के चाहते सीहोर विधायक सुदेश राय

Shivraj Singh Chouhan’s favourite Sehore MLA Sudesh Rai owns property worth crores भोपाल। Sehore MLA Sudesh Rai साल 2023 में हुए विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज करने वाले 230 विधायकों में 205 करोड़पति हैं। विधायकों की संपत्ति साल दर साल बड़ी है। मध्य प्रदेश के सबसे अमीर विधायकों की सीरीज में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के गृह जिला सीहोर के विधायकों की सम्पत्ति कई गुना बड़ी है। Sehore MLA Sudesh Rai 74.71 करोड़ रुपये की संपत्ति के मालिक हैं, जो सीहोर सीट से 3 बार चुनाव जीत चुके हैं। 2023 के विधानसभा चुनाव में चुनाव आयोग को दिए हलफनामे में सुदेश राय ने अपनी संपत्ति 74 करोड़ 71 लाख 38 हजार 89 रुपये बताई थी, जबकि उनकी देनदारी 2 करोड़ 75 लाख 7 हजार 785 रुपये थी। राय की संपत्ति 5 साल में 7.20 करोड़ रुपये बढ़ गई है। साल 2018 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने अपनी संपत्ति 67 करोड़ 51 लाख 29 हजार 525 रुपये बताई थी। चुनावी हलफनामे के अनुसार, सुदेश राय के नाम पर 24.17 करोड़ रुपये की 59.125 एकड़ खेतीहर जमीन है, जबकि उनकी पत्नी के नाम भी 4.04 करोड़ रुपये की कृषि भूमि है। इसके अलावा उनके पास 21.33 करोड़ रुपये और उनकी पत्नी के नाम पर 96.42 लाख की नॉन-एग्रीकल्चर जमीन है। सुदेश राय के नाम पर सीहोर में 1.09 करोड़ रुपये का एक घर है, जो 3472 स्क्वायर फीट में बना है। उनके पास सीहोर में इंदौर-भोपाल रोड पर एक कमर्शियल बिल्डिंग भी है, जिसकी कीमत उन्होंने एफिडेविट में 10.51 करोड़ रुपये बताई थी। सुदेश राय को महंगी कार का भी शौक है। चुनावी हलफनामे में उन्होंने 2 कारों का जिक्र किया था। इसमें 21.74 लाख रुपये की कीमत की फोर्ड एंडेवर और 1.29 करोड़ रुपये की मर्सडीज शामिल है। सुदेश राय के पास 200 ग्राम सोना है, जिसकी कीमत 2023 में उन्होंने 11 लाख रुपये बताई थी। उनकी पत्नी के पास 500 ग्राम सोना है, जिसकी कीमत 27.5 लाख रुपये बताई थी। उनकी पत्नी के पास 2 किलो 70 ग्राम चांदी भी है, जिसकी कीमत साल 2023 में 1.5 लाख रुपये थी। Sehore MLA Sudesh Rai ने 2013 में पहली बार निर्दलीय चुनाव लड़ा था और जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। इसके बाद 2018 और 2023 में बीजेपी के टिकट पर चुनाव जीत चुके हैं।

Bjp अध्यक्ष ने अपनी ही पार्टी के पार्षदों को PIC से किया बाहर ,भाजपा आपसी खींचतान के चलते

The BJP president expelled councillors from his own party from the PIC due to internal infighting within the BJP. मध्य प्रदेश के गुना में भाजपा आपसी खींचतान खुलकर सामने आई। नपा परिषद अध्यक्ष ने अपनी ही पार्टी के पार्षदों को सबक सिखाते हुए पीआईसी से बाहर किया और जातीय समीकरण साधते हुए नए सदस्य जोड़े। BJP Faction War: गुना नगरपालिका परिषद (Guna Municipal Council) में भाजपा पार्षदों की आपसी खींचतान कम होने का नाम नहीं ले रही है। पिछले दिनों भाजपा के अधिकतर पार्षदों ने अपनी ही नगरपालिका अध्यक्ष द्वारा रखे गए प्रस्ताव विपक्ष के साथ मिलकर गिरा दिए थे। आठ पार्षद केवल नगर पालिका अध्यक्ष के साथ थे। इसके बाद् भाजपा पार्षदों में रार बढ़ गई। इसके चलते नगरपालिका अध्यक्ष ने उन पार्षदों को सबक सिखाने के लिए प्रेसीडेंट इन काउंसिल (पीआइसी) से छुट्टी कर दी है। इसमें पीआइसी के सदस्य रहे दिनेश शर्मा, अलका कोरी, अजब बाई लोधा और सुमन लोधा को हटाया गया है। उनकी जगह विनोद लोधा, राजकुमारी जाटव, अनीता कुशवाह, कीर्ति सरवैया को पीआइसी में प्रभारी के रूप में शामिल किया है। पीआइसी सदस्यों के बदले गए विभागनई पीआइसी में कई सदस्यों के भी विभाग बदल दिए हैं। पीआइसी की किसी भी समिति या विभाग में कांग्रेस की पार्षद रश्मि शर्मा को शामिल नहीं किया है। पार्षदों के बीच यह चर्चा है कि पीआइसी के फेरबदल का मामला स्थानीय संगठन के साथ-साथ भाजपा प्रदेश संगठन के पास भेजा जा सकता है। वहीं अध्यक्ष इस फेरबदल का कारण भाजपा के रीति-नीति के अनुसार जातिगत समीकरण और महिलाओं का प्रतिनिधित्व देने वाला बता रही है। गुटबाजी के चलते किया गया बदलावनपा अध्यक्ष के अनुसार स्वास्थ्य समिति के प्रभारी दिनेश शर्मा, सामान्य प्रशासन समिति की प्रभारी अलका कोरी, शहरी गरीबी उपशमन विभाग की प्रभारी सुमन लोधा और यातायात परिवहन एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की प्रभारी अजब बाई लोधा को अध्यक्ष ने पीआइसी सदस्य बनाया था। लेकिन लगातार विवाद और गुटबाजी चलते बदलाव किया गया है। विरोध के चलते पास नहीं हो पाए थे कई प्रस्तावपिछले दिनों हुई नगरपालिका परिषद की बैठक में रेलवे को पानी दिए जाने, शहर की मुख्य सड़कों के डामरीकरण किए जाने आदि प्रस्ताव को भाजपा पार्षद दल की आपसी गुटबाजी के चलते स्वीकृति नहीं मिल पाई थी। ऐसे ही पूर्व में 19 सितंबर को होने वाली नगरपालिका परिषद की बैठक आपसी सहमति न बनने और विवाद होने के कारण स्थगित कर दी थी। भाजपा कई पार्षद विवाद के बाद शिकायत करने पुलिस थाने भी पहुंच गए थे। अब ये है नई पीआइसी नई पीआईसी में राजकुमारी जाटव, राजू ओझा, अनीता कुशवाह, कैलाश धाकड़, विनोद लोधा, कीर्ति सरवैया, बबीता साहू को शामिल किया है।सामान्य प्रशासन विभाग समिति की प्रभारी राजकुमारी जाटव होंगी, तथा सदस्य के रूप में बबीता साहू, अनीता कुशवाह, अलका कोरी. राजू ओझा. नीता कुशवाह, कैलाश धाकड़, विनोद लोधा होंगे। जल कार्य एवं सीवरेज विभाग के प्रभारी राजू ओझा को बनाया है। सदस्य के रूप में सुशीला कुशवाह. संध्या सोनी, ओमप्रकाश कुशवाह. फूलबाई ओझा, राममूर्ति कुशवाह, तरुण सेन, नीता कुशवाह है।लोक निर्माण एवं उद्यान, विद्युत एवं यांत्रिकी विभाग का प्रभारी अनीता कुशवाह हैं। इसमें सदस्य के रूप में अलका कोरी. सुमन लोधा, राधाबाई कुशवाह, संध्या सोनी. राजकुमारी जाटव, सुनीता शर्मा, तरुण मालवीय हैं।राजस्व, वित्त एवं लेखा विभाग के प्रभारी कैलाश धाकड़ होंगे। सदस्य के रूप में महेश कुशवाह, ओमप्रकाश कुशवाह, कीर्ति सरवैया, नीता कुशवाह, रमेश भील, दिनेश शर्मा, विनोद लोधा शामिल हैं। स्वच्छता एवं ठोस अपशिष्ठ प्रबर्धन विभाग के प्रभारी विनोद लोधा होंगे, सदस्य के रूप में ममता तोमर, तरन्नुम खान, कृष्णा मौर्या, फूलबाई ओझा, संध्या सोनी, ओमप्रकाश कुशवाह, अनीता कुशवाह शामिल रहेंगे।योजना यातायात परिवहन एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की प्रभारी कीर्ति सरवैया को बनाया गया है। इनके साथ सदस्य के रूप में शेखर वशिष्ठ, बृजेश राठौर, सचिन धूरिया, राजू ओझा, नीता कुशवाह. सुशीला कुशवाह, बबीता साहू शामिल हैं।शहरी गरीबी उपशमन विभाग में बबीता साहू प्रभारी रहेंगी। इसमें अजब बाई लोधा, सुनीता रघुवंशी, हलीम गाजी, रामवीर जाटव, अनीता कुशवाह, नीता कुशवाह को शामिल किया गया है। ठोस अपशिष्ठ प्रबर्धन विभाग के प्रभारी विनोद लोधा होंगे, सदस्य के रूप में ममता तोमर, तरन्नुम खान, कृष्णा मौर्या, फूलबाई ओझा, संध्या सोनी, ओमप्रकाश कुशवाह, अनीता कुशवाह शामिल रहेंगे।योजना यातायात परिवहन एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की प्रभारी कीर्ति सरवैया को बनाया गया है। इनके साथ सदस्य के रूप में शेखर वशिष्ठ, बृजेश राठौर, सचिन धूरिया, राजू ओझा, नीता कुशवाह. सुशीला कुशवाह, बबीता साहू शामिल हैं।शहरी गरीबी उपशमन विभाग में बबीता साहू प्रभारी रहेंगी। इसमें अजब बाई लोधा, सुनीता रघुवंशी, हलीम गाजी, रामवीर जाटव, अनीता कुशवाह, नीता कुशवाह को शामिल किया गया है।

मंत्री के विवादित बयान पर भड़के कांग्रेसी, पुतला फूंक किया उग्र प्रदर्शन

Congress workers enraged by minister’s controversial statement, staged a protest by burning his effigy हरिप्रसाद गोहे  आमला। नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने शाजापुर के मंच से कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के खिलाफ अमर्यादित बयान दिया था। इस बयान को लेकर कांग्रेसियो में आक्रोश फैल गया। उन्होंने इसे भाई-बहन के पवित्र रिश्ते पर कलंक और नवरात्र के पावन अवसर पर देवी स्वरूप महिलाओ का गहरा अपमान बताया। अभद्र, अशोभनीय टिप्पणी के विरोध में शनिवार कांग्रेस कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए। इस दौरान नगर के जनपद चौक आमला पर शाम 4 बजे कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मंत्री विजयवर्गीय का पुतला दहन कर उग्र प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान फायर ब्रिगेड द्वारा पानी डाले जाने से पुलिस और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच जमकर खींचतान भी हुई। ब्लाक कांग्रेस अध्यक्ष मनोज देशमुख ने बताया कि मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने शाजापुर में मंच से राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के खिलाफ अमर्यादित बयान दिया था। इस बयान को लेकर कांग्रेसियो में आक्रोश फैल गया। उन्होंने इसे भाई-बहन के पवित्र रिश्ते पर कलंक और नवरात्र के पावन अवसर पर देवी स्वरूप महिलाओ का गहरा अपमान बताया। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेसियों ने सड़क पर बैठकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी,मुख्यमत्री मोहन यादव ,केबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ,प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ,मुर्दाबाद के जोरदार नारे लगाकर प्रदर्शन किया । बड़ी संख्या में उपस्थित कांग्रेस कार्यकर्ता जिसमे प्रमुख रूप से उपस्थित महिला पार्षदो ने भाजपा नेतृत्व को सीधी चेतावनी दी।  कहा कि भाजपा का असली चेहरा बार-बार महिलाओं के अपमान के रूप में सामने आता है।  अब बहन-बेटियों की गरिमा पर बयानबाज़ी कर रहे हैं। विजयवर्गीय जैसे मंत्री सरेआम महिलाओं पर अमर्यादित टिप्पणिया करते हैं और प्रधानमंत्री चुप्पी साध लेते हैं। ऐसे बिगड़ैल नेताओं को बर्खास्त किया जाना चाहिए,मणिपुर में महिलाओं के साथ दरिंदगी पर सरकार सोती रही, और अब जब राहुल गांधी अपनी बहन प्रियंका के साथ सहज भाव दिखाते हैं तो भाजपा नेता चरित्र हनन करने पर उतर आए हैं।   विरोध प्रदर्शन में प्रमुख रूप से ब्लाक कांग्रेस अध्यक्ष मनोज देशमुख,पूर्व नपा अध्यक्ष मनोज मालवे,नपा अध्यक्ष नितिन गाडरे,नपा उपाध्यक्ष किशोर माथनकर,पार्षद पदमनी भूमरकर,अल्का मानकर, सुनील उईके,सुभाष देशमुख,जितेंद्र शर्मा,इसराइल शाह, पवन यादव, अकरम खान,गणेश ढोमने,विजय पारदी, कुंददु ठाकुर,प्रकाश ठाकुर,अजय सोलंकी,प्रदीप कोकाटे,यशवंत हुडे,वीरेंद्र बर्थ ,राकेश सोने,छोटू बेले,संजय सोलंकी,गणेश वारथे,नितिन सराठकर,अरुण वेश,राशिद खान,सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता उपस्थित रहें।

जनता के पैसे से बना हुआ कारखाना बीजेपी नहीं बेच सकती :पंकज उपाध्याय

BJP cannot sell a factory built with public money: Pankaj Upadhyay शक्कर कारखाना चलाओ संघर्ष समिति की जन जागरण यात्रा आज लगभग एक दर्जन गाँव में पहुंची। यात्रा आज शक्कर कारखाने की पुस्तेनी जमीन कुर्रोली से प्रारम्भ होकर लाभकरण, बुद्धगडी, टीकटगड़ी,बिलगांव क्वारी, तोरीका, नयागांव, शेखपुर, भटपुरा, और दीपेरा पहुंची। जहाँ सभी लोगों को कारखाने को बचाने एवं पुनः चालू कराने के लिए अपनी बात रखी। तथा सभी ग्राम वासियों ने एक साथ हाथ उठाकर मुरैना में होने वाली आम सभा में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने का आश्वाशन दिया। यात्रा को जौरा विधायक पंकज उपाध्याय,मध्य प्रदेश किसान सभा के प्रदेश अध्यक्ष श्री अशोक तिवारी जी,कारखाने के पूर्व संचालक श्री गयाराम धाकड़ जी, नीकेराम त्यागी जी, डॉ मुरारी लाल अमर जी आदि ने सम्बोधित किया।विधायक पंकज उपाध्याय ने कहा की यह कारखाना हमारे पूर्वजों ने अपने खून पसीने से सींचा है इसे हम कोड़ियों के भाव नहीं बिकने देंगे 1965 में जब कारखाना बन रहा था तब एक शेयर ₹500 का था और एक तोला सोना ₹65 का आता था आज के हिसाब से वह ₹500 7-8 लाख होता है कारखाने को हमें हर हाल में बिकने से बचाना होगा श्राद्ध पच्छ चल रहा 21सितम्बर को अंतिम श्राद्ध है अगर अपने पित्रों को सच्ची श्रद्धांजलि देनी है तो 21तारीख को सब काम छोड़कर इस आंदोलन में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होना है तभी हमारे पित्रों को सच्ची श्रद्धांजलि मिलेगी।मुरैना में होने वाले जन आंदोलन में किसान सभा के अंतराष्ट्रीय अध्यक्ष किसान नेता राकेश टिकैत साहब,बादल सरोज जी, वृंदा करात जी पूर्व सांसद और मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी जी एवं कई अन्य नेता शामिल होंगे।इस यात्रा में सभी समाज के लोग ,छोटे, बड़े, बुजुर्ग माता बहने एवं जनसंगठन कांग्रेस, माकपा, बसपा, आप, सपा, भीम आर्मी, एवं सभी संगठन शामिल है।

मोदी का विपक्ष पर करारा प्रहार कहा – मैं शिव भक्त हूं, जहर निगल लेता हूं: जनता ही मेरी भगवान, आत्मा की आवाज यहां नहीं तो कहां निकलेगी

Modi’s strong attack on the opposition said – I am a Shiv Bhakt, I swallow poison: The public is my God, if not here, then where will the voice of the soul come out पीएम नरेंद्र मोदी ने असम के दरांग में कहा- जब भारत सरकार ने भूपेन हजारिका को भारत रत्न दिया था, उस दिन कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा था- मोदी, नाचने-गाने वालों को भारत रत्न दे रहा है। मैं भगवान शिव का भक्त हूं, सारा जहर निगल लेता हूं, मुझे कितनी भी गालियां दें। लेकिन बेशर्मी के साथ जब किसी और का अपमान होता है, तो मुझसे रहा नहीं जाता है। पीएम बोले- मेरे लिए तो मेरी जनता ही भगवान है। मेरे भगवान के पास जाकर मेरी आत्मा की आवाज वहां नहीं निकलेगी तो कहां निकलेगी, यही मेरे मालिक हैं, पूजनीय हैं, 140 करोड़ देशवासी मेरा रिमोट कंट्रोल हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिन के असम दौरे पर हैं। रविवार को उन्होंने दरांग मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, जीएनएम स्कूल और बीएससी नर्सिंग कॉलेज का उद्घाटन और शिलान्यास किया। जिसकी लागत 6300 करोड़ है। शनिवार को गुवाहाटी पहुंचे पीएम ने खानापारा में पशु चिकित्सा मैदान में महान गायक भूपेन हजारिका की विशेष श्रद्धांजलि सभा में भी मौजूद रहे।

जनता से 8 साल की देरी का हिसाब कौन देगा? जीएसटी सुधार पर उठे सवाल

How can what was wrong yesterday be right today? What does the Modi government want to hide from the public on the GST controversy? Modi government a GST controversy आखिर 8 साल बाद भी मोदी सरकार माफी क्यों नहीं मांग रही? जनता से क्या छिपाना चाहती है? चिदंबरम ने पूछा – जो कल गलत था, आज सही कैसे?जीएसटी दरों में कमी के बाद भी मोदी सरकार ने जनता से माफी नहीं मांगी। आखिर सरकार क्या छिपाना चाहती है? जानिए 8 साल की देरी, विवाद और सुधार की अधूरी कहानी। यदि टूथपेस्ट, हेयर आयल, मक्खन, शिशु नैपकिन, पेंसिल, नोटबुक, ट्रैक्टर, स्प्रिंकलर आदि पर पांच फीसद जीएसटी आज अच्छा है, तो पिछले आठ वर्षों में यह बुरा क्यों था? लोगों को आठ वर्षों तक अत्यधिक टैक्स क्यों चुकाना पड़ा? आखिरकार केंद्र सरकार को बात समझ में आ गई। तीन सितंबर, 2025 को सरकार ने कई वस्तुओं और सेवाओं पर जीएसटी दरों को तर्कसंगत बना कर कम किया। कर संरचना अब उस अच्छे और सरल कर के करीब है, जिसकी वकालत पिछले आठ वर्षों से कई राजनीतिक दल, व्यवसायी, संस्थान और व्यक्ति (जिनमें मैं भी शामिल हूं) करते रहे हैं। अगस्त, 2016 में जब संसद में संविधान (122वां संशोधन) विधेयक पर बहस हुई थी, तब मैंने राज्यसभा में भाषण दिया था। उसके कुछ अंश इस प्रकार हैं अडिग रुख Modi government a GST controversy‘मुझे खुशी है कि वित्त मंत्री ने स्वीकार किया कि यूपीए सरकार ने ही सबसे पहले आधिकारिक तौर पर जीएसटी लागू करने के अपने इरादे का एलान किया था। 28 फरवरी, 2005 को बजट भाषण के दौरान लोकसभा में इसकी घोषणा की गई थी। ‘महोदय, चार प्रमुख मुद्दे हैं… Modi government a GST controversy‘अब मैं विधेयक के सबसे महत्त्वपूर्ण भाग पर आता हूं… यह कर की दर के बारे में है। मैं अभी मुख्य आर्थिक सलाहकार की रपट के कुछ अंश पढूंगा… कृपया याद रखें कि हम एक अप्रत्यक्ष कर पर विचार कर रहे हैं। अप्रत्यक्ष कर की परिभाषा के अनुसार, यह एक प्रतिगामी कर है। कोई भी अप्रत्यक्ष कर अमीर और गरीब दोनों पर समान रूप से लागू होता है… मुख्य आर्थिक सलाहकार की रपट कहती है: ‘उच्च आय वाले देशों में औसत जीएसटी दर 16.8 फीसद है भारत जैसी उभरती बाजार अर्थव्यवस्थाओं में यह औसत 14.1 फीसद है।’ इस तरह दुनिया भर में 190 से अधिक देशों में किसी न किसी रूप में जीएसटी लागू है। यह 14.1 फीसद से 16.8 फीसद के बीच है।‘हमें करों को कम रखना होगा। साथ ही, हमें केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के मौजूदा राजस्व की रक्षा करनी होगी। …हम ‘राजस्व तटस्थ दर’ यानी आरएनआर के जरिए यह करते हैं। ‘मुख्य आर्थिक सलाहकार राज्य सरकार के प्रतिनिधियों और अन्य विशेषज्ञों के साथ विचार-विमर्श के बाद 15 फीसद से 15.5 फीसद के आरएनआर पर पहुंचे और फिर सुझाव दिया कि मानक दर 18 फीसद होनी चाहिए। कांग्रेस पार्टी ने 18 फीसद कोई हवा से नहीं निकाला है। यह आपकी रपट से निकला है। ‘…किसी को तो जनता के लिए आवाज उठानी ही होगी। जनता की ओर से, मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि इस दर को मुख्य आर्थिक सलाहकार द्वारा अनुशंसित दर पर ही रखें, यानी मानक दर 18 फीसद से अधिक नहीं होनी चाहिए रपट के पैरा 29, 30, 52 और 53 पढ़ें। इसमें स्पष्ट रूप से तर्क दिया गया है… Modi government a GST controversy अठारह फीसद की मानक दर केंद्र और राज्यों के राजस्व की रक्षा करेगी, यह पर्याप्त होगी, मुद्रास्फीति-रोधी होगी, कर चोरी से बचाएगी और भारत के लोगों को स्वीकार्य होगी… यदि आप वस्तुओं और सेवाओं पर 24 फीसद या 26 फीसद कर लगाने जा रहे हैं, तो फिर जीएसटी विधेयक लाने की क्या आवश्यकता है? ‘अंतत: आपको कर विधेयक में एक दर रखनी ही होगी। मैं अपनी पार्टी की ओर से स्पष्ट रूप से मांग करता हूं कि जीएसटी की मानक दर, जो 70 फीसद से अधिक वस्तुओं और सेवाओं पर लागू होती है, वह अठारह फीसद से अधिक नहीं होनी चाहिए और निम्न एवं अन्य दर अठारह फीसद के आधार पर तय की जा सकती है। आठ वर्ष की पीड़ा Modi government a GST controversyवर्ष 2016 में भी मैंने यही बात कही थी, जो आज कह रहा हूं। मुझे खुशी है कि सरकार इस विचार पर सहमत हो गई कि दरों को युक्तिसंगत और कम किया जाना चाहिए। हालांकि, शुरुआत में सरकार का तर्क था कि अठारह फीसद की सीमा से राजस्व का भारी नुकसान होगा, खासकर राज्य सरकारों को। यह चिंता का एक बड़ा कारण था। आज दो कर दरें पांच फीसद और अठारह फीसद हैं! केंद्र के पास कर राजस्व बढ़ाने के कई तरीके हैं; अगर राज्य सरकारों को राजस्व का नुकसान होता है, तो सही कदम यही होगा कि उन्हें मुआवजा दिया जाए पिछले आठ वर्षों में सरकार ने उपभोक्ताओं से ज्यादा से ज्यादा पैसा वसूलने के लिए कई जीएसटी दरों का इस्तेमाल किया। पहले वर्ष (जुलाई 2017 से मार्च 2018) में सरकार ने लगभग 11 लाख करोड़ रुपए एकत्र किए। वर्ष 2024-25 में लगभग 22 लाख करोड़ रुपए संग्रहित किए गए। उपभोक्ताओं द्वारा अपनी मेहनत से कमाया गया पैसा सरकार ने जीएसटी के माध्यम से छीन लिया- इसे सही मायने में और उपहासपूर्वक गब्बर सिंह टैक्स कहा गया। उच्च जीएसटी दरें कम खपत और बढ़ते घरेलू कर्ज के कारणों में से एक थीं। यह बुनियादी अर्थशास्त्र है कि करों में कमी से खपत को बढ़ावा मिलेगा। यदि टूथपेस्ट, हेयर आयल, मक्खन, शिशु नैपकिन, पेंसिल, नोटबुक, ट्रैक्टर, स्प्रिंकलर आदि पर पांच फीसद जीएसटी आज अच्छा है, तो पिछले आठ वर्षों में यह बुरा क्यों था? लोगों को आठ वर्षों तक अत्यधिक कर क्यों चुकाना पड़ा? अभी बहुत कुछ बाकीदरों में कमी तो बस शुरुआत है। अभी और भी बहुत कुछ करना बाकी है। सरकार को चाहिए कि- राज्यों, उत्पादकों और उपभोक्ताओं को एक ही जीएसटी दर (जरूरत पड़ने पर और छूट के साथ) के लिए तैयार करे; अधिनियमों और नियमों की धाराओं के लिए प्रचलित अस्पष्ट भाषा को खत्म करे; उन्हें सरल भाषा में फिर से लिखे; सरल फार्म और रिटर्न निर्धारित करे, फार्म भरने की आवृत्ति में तर्कसंगत कमी करे; कानून के अनुपालन को सरल बनाए: किसी छोटे व्यापारी या दुकानदार … Read more

जो खून बहना था वह बह गया, पैसे से लोगों की सोच बदलने गए मोदी : कांग्रेस नेता

The blood that was to be shed has been shed, Modi went to change people’s thinking with money: Congress leader नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 सितंबर को मणिपुर के दौरे पर हैं। यह उनका 2023 की जातीय हिंसा के बाद पहला दौरा है। इस यात्रा को राज्य में शांति और विकास को मजबूत करने के लिए अहम माना जा रहा है। पीएम मोदी ने चुराचांदपुर और इंफाल में कई परियोजनाओं का उद्घाटन किया। वहीं इस दौरे को लेकर विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।कांग्रेस बोली-बहुत देर हो चुकी हैCongress leader Udit Raj ने बयान में पीएम मोदी के दौरे पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पहले ही कुकी और मैतेई दोनों समूह पीएम के खिलाफ विरोध जता रहे हैं और अब यह यात्रा ‘हीलिंग टचÓ नहीं मानी जाएगी। Congress leader Udit Raj का कहना है कि एक समय था जब पीएम जाकर बहुत कुछ कर सकते थे, लेकिन अब बहुत खून बह चुका है और सिर्फ 3 घंटे की यात्रा से कुछ नहीं होगा। वह भले ही कुछ परियोजनाओं की घोषणा करें लेकिन पैसों से लोगों की सोच नहीं बदली जा सकती। 2023 में भड़की थी जातीय हिंसाबता दें कि 2023 में मणिपुर में जातीय हिंसा भड़की थी, जिसमें कम से कम 260 लोगों की मौत हुई और हजारों लोग विस्थापित हुए थे। इसके बाद से ही राज्य में तनाव और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है. पीएम मोदी का यह दौरा लंबे समय से प्रतीक्षित था और इसे जनता और राजनीतिक दल दोनों करीब से देख रहे हैं। चुराचांदपुर और इंफाल ऐसे इलाके हैं, जहां हिंसा का असर सबसे ज्यादा रहा और अब यहां नए विकास कार्यों के जरिए माहौल को सामान्य करने की कोशिश की जा रही है। दौरे का महत्व और आगे की राहविशेषज्ञों का मानना है कि पीएम मोदी का यह दौरा मणिपुर में शांति और पुनर्निर्माण के लिए एक बड़ा संदेश है। यह सिर्फ परियोजनाओं का उद्घाटन नहीं बल्कि राज्य के लोगों को भरोसा दिलाने की कोशिश भी है. हालांकि विपक्ष इसे ‘बहुत देर से उठाया गया कदम बता रहा है। अब देखना होगा कि इस यात्रा से क्या सकारात्मक असर होता है और क्या यह मणिपुर में स्थायी शांति और विकास

संघर्ष से शिखर तक : हेमंत खंडेलवाल का राजनीतिक सफर

From struggle to peak: Hemant Khandelwal’s political journey भोपाल ! BJP President Hemant Khandelwal मध्य प्रदेश की राजनीति में कभी-कभी ऐसे चेहरे सामने आते हैं, जिनकी चमक न तो पोस्टरों से आती है और न ही बड़ी-बड़ी रैलियों की भीड़ से। हेमंत खंडेलवाल ऐसा ही एक नाम हैं—जो बिना ढोल-नगाड़े, बिना सत्ता का शोर मचाए आज भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी तक पहुँच गए। सवाल यह है कि क्या यह सफर केवल सादगी और संघर्ष का है, या फिर संगठन की राजनीतिक गणित का भी खेल? हेमंत खंडेलवाल सिर्फ भाजपा के अध्यक्ष नहीं, बल्कि संघर्ष, सादगी और संगठन के उस दर्शन का चेहरा हैं जो राजनीति को जनसेवा का सच्चा माध्यम बनाता है। BJP President Hemant Khandelwal 3 सितंबर 1964 को मथुरा में जन्मे हेमंत खंडेलवाल ने बैतूल में पढ़ाई की और धीरे-धीरे राजनीति में कदम रखा। पिता विजय कुमार खंडेलवाल चार बार सांसद रहे, इसलिए राजनीतिक माहौल घर में मौजूद था। लेकिन यहाँ भी दिलचस्प मोड़ यह है कि हेमंत ने विरासत की मलाई खाने के बजाय खुद को संघर्ष के रास्ते में झोंक दिया। वरना आजकल तो नेता जी का बेटा सीधे ‘उत्तराधिकारी’ घोषित हो जाता है। 2008 में पिता के निधन के बाद बैतूल उपचुनाव से सांसद बने। यही वह पल था जब उन्हें राष्ट्रीय राजनीति की रोशनी मिली। लेकिन उनके साथ विडंबना यह रही कि वे लंबे समय तक सत्ता की गाड़ी के इंजन से दूर रहे—कभी विधायक, कभी जिला अध्यक्ष, कभी कोषाध्यक्ष, और कभी प्रवासी प्रभारी। कहते हैं, उन्होंने राजनीति को ‘करियर’ नहीं, बल्कि ‘धैर्य की परीक्षा’ मान लिया था। BJP President Hemant Khandelwal की सबसे बड़ी पूंजी उनकी सादगी है। सुना है, कार्यकर्ताओं को शर्ट तक दे दी और कभी स्कूटर तक। अब सोचिए, जिस दौर में नेता जी चुनाव में नोटों की बारिश कर रहे हों, उसमें कोई नेता अपनी शर्ट उतारकर कार्यकर्ता को दे दे—ये दृश्य राजनीति की किताब में दुर्लभ ही है। लेकिन राजनीति केवल सादगी से नहीं चलती। 2020 की सत्ता पलट की पटकथा में उनकी भूमिका किसी पर्दे के पीछे के निर्देशक जैसी रही। कमलनाथ सरकार जब गिर रही थी, तब खंडेलवाल ने सिंधिया खेमे और भाजपा के बीच पुल का काम किया। और कहते हैं, यही पुल उन्हें प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी तक ले आया। राजनीति में ऐसे मौके हर किसी को नहीं मिलते—यह किस्मत और कौशल का संगम है। अब वे प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हैं। सवाल यह है कि क्या वे भाजपा को बूथ स्तर तक और मजबूत बना पाएंगे, या फिर संगठनात्मक जोड़-तोड़ में ही उलझ जाएंगे? याद रखिए, प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी केवल शोभा की वस्तु नहीं है; यह वह कुर्सी है जिस पर बैठकर पार्टी का भविष्य तय होता है। एक और दिलचस्प पहलू यह है कि 31 साल बाद वैश्य समाज से किसी नेता को यह जिम्मेदारी मिली है। तो क्या यह केवल जातीय संतुलन साधने की कोशिश है, या फिर सचमुच संगठन के ‘सच्चे सेवक’ को उसकी मेहनत का इनाम? जनता तो यही देख रही है कि सियासी समीकरणों में जनता का हिस्सा कितना है। BJP President Hemant Khandelwal के पास अब मौका है कि वे यह साबित करें कि राजनीति सिर्फ ‘सत्ता का गणित’ नहीं, बल्कि सेवा और संघर्ष का भी नाम है। क्योंकि अगर वे भी बाकी नेताओं की तरह महंगे काफिलों और बेतहाशा पोस्टरों में उलझ गए, तो जनता उन्हें भी उसी भीड़ में गुम कर देगी, जहाँ नेता बदलते रहते हैं, लेकिन जनता की उम्मीदें वही की वही रहती हैं। हेमंत खंडेलवाल का नया अध्याय केवल भाजपा के संगठन का नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश की राजनीति का भी इम्तिहान है। देखना दिलचस्प होगा कि वे अपनी सादगी और संघर्ष को कायम रखते हैं या फिर सत्ता के गलियारों की चकाचौंध उन्हें भी उसी रंग में रंग देती है, जिसमें बाकी नेता डूब चुके हैं।

कांग्रेस का बड़ा सियासी धमाका, बीजेपी-बीएसपी के नेताओं ने जीतू पटवारी कि मौजूदगी में कांग्रेस का दामन थाम

Big political by Congress, BJP-BSP leaders joined Congress in the presence of Jeetu Patwari ग्वालियर। Big political by Congress ग्वालियर-चंबल अंचल की राजनीति में नए समीकरण बनने लगे हैं। रविवार को ग्वालियर ग्रामीण से बीजेपी और बीएसपी के कई नेता व कार्यकर्ता कांग्रेस में शामिल हुए। इस कदम ने कांग्रेस के संगठन को नई ताकत और सियासी परिदृश्य को नया मोड़ दिया है। ग्वालियर ग्रामीण विधानसभा की राजनीति ने रविवार को नया मोड़ ले लिया। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) से जुड़े कई नेताओं और कार्यकर्ताओं ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी की मौजूदगी में कांग्रेस का दामन थाम लिया। इस मौके पर पटवारी ने कहा – कांग्रेस परिवार में सभी का स्वागत और हृदय से अभिनंदन करता हूं। लोकतंत्र और संविधान बचाने की लड़ाई, हम सब मिलकर लड़ेंगे। ग्वालियर-चंबल: सत्ता की कुंजी वाला क्षेत्र Big political by Congress मध्यप्रदेश की राजनीति में ग्वालियर-चंबल अंचल हमेशा निर्णायक रहा है। यहाँ की दिशा ही कई बार सत्ता की दशा तय करती आई है। बीजेपी और बीएसपी से कांग्रेस में हुआ यह जुड़ाव स्थानीय और राज्य स्तरीय समीकरणों को गहराई से प्रभावित करेगा। लोकतंत्र बनाम सत्ता की राजनीति Big political by Congress पटवारी का वक्तव्य यह स्पष्ट करता है कि कांग्रेस केवल सत्ता की लड़ाई नहीं लड़ रही, बल्कि लोकतंत्र और संविधान को बचाने के लिए संघर्षरत है। मौजूदा हालात में जब विपक्ष पर दबाव और संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं, कांग्रेस ने खुद को लोकतांत्रिक मूल्यों का संरक्षक बताने की कोशिश की है। नए कार्यकर्ता, नई ऊर्जा Big political by Congress किसी भी राजनीतिक दल की ताकत उसके कार्यकर्ता होते हैं। बीजेपी और बीएसपी छोड़कर कांग्रेस में आए इन कार्यकर्ताओं से न केवल संगठन को मजबूती मिलेगी बल्कि गांव-गांव में कांग्रेस का जनाधार भी और गहराएगा। यह बदलाव कार्यकर्ताओं की नाराजगी और जनता की नई उम्मीदों दोनों को दर्शाता है। बीजेपी और बीएसपी को झटका Big political by Congress ग्वालियर ग्रामीण में यह घटना बीजेपी और बीएसपी के लिए बड़ा झटका है। यहाँ के जातीय और सामाजिक समीकरण अक्सर चुनावी नतीजों को प्रभावित करते हैं। कांग्रेस में हुए इस जुड़ाव से विपक्षी दलों का परंपरागत वोट बैंक प्रभावित होना तय माना जा रहा है। जनता की प्राथमिकताएँ बदल रही हैं Big political by Congress महंगाई, बेरोजगारी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों से जूझती जनता अब ऐसे नेतृत्व की तलाश में है, जो सच्चे अर्थों में उनकी आवाज बने। कांग्रेस में शामिल हुए नए नेता और कार्यकर्ता इस उम्मीद को मजबूत कर सकते हैं। राजनीतिक संदेश स्पष्ट Big political by Congress यह सदस्यता अभियान केवल दल-बदल की औपचारिकता नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक संदेश है जनता बदलाव चाहती है। ग्वालियर ग्रामीण की यह तस्वीर प्रदेश में नई राजनीति की पृष्ठभूमि तैयार करती दिख रही है। ग्वालियर ग्रामीण का यह घटनाक्रम कांग्रेस के लिए नई ऊर्जा लेकर आया है। वहीं बीजेपी और बीएसपी के लिए यह चेतावनी है कि जनता अब उनके पारंपरिक वादों से आगे बढ़कर लोकतांत्रिक मूल्यों और वास्तविक मुद्दों को प्राथमिकता दे रही है।कांग्रेस का बढ़ता परिवार प्रदेश की राजनीति में नई करवट का संकेत है—बदलाव अब सिर्फ शुरुआत है, असली लड़ाई आगे है। ग्वालियर-चंबल अंचल की राजनीति में हलचल, जब बीजेपी और बीएसपी के कई नेताओं ने कांग्रेस का दामन थामा। जीतू पटवारी ने कहा – लोकतंत्र और संविधान की रक्षा ही अब असली राजनीति है।

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा- जीएसटी में कटौती से किसानों को ट्रैक्टर खरीदने में होगी 65 हजार रुपये की बचत

Union Agriculture Minister Shivraj Singh Chouhan भोपाल। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जीएसटी में हुई कटौती से किसानों सहित आम लोगों को होने वाले फायदे बताए। भोपाल में आज मीडिया से चर्चा के दौरान उन्होंने कहा कि कृषि उपकरणों में जीएसटी घटाकर पांच प्रतिशत की गई है जो किसानों के लिए वरदान साबित होगी। किसान अगर ट्रैक्टर खरीदेगा तो 65 हजार रुपये को बचत होगी। हम इंट्रीगेटेड फार्मिंग की कोशिश कर रहे है। जीएसटी घटने से दुग्ध उत्पादन में बड़ी संख्या में काम कर रहे महिलाओं के ग्रुप और लखपति दीदी को बड़ी ताकत मिलेगी। दुग्ध उत्पादकों को लाभ होगा दूध, घी मक्खन पर भी जीएसटी घटाया गया है। डेयरी क्षेत्र आगे बढ़ेगा तो कहीं न कहीं किसान ही लाभान्वित होंगे। उन्होंने कहा कि हमारे यहां लैंड होल्फिंग कम है, इसलिए किसान महंगे उपकरण नहीं खरीद सकता। जीएसटी घटने से छोटे उपकरण खरीद सकेगा। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मछली उत्पादक किसान को भी इससे लाभ होगा। समुद्र ही नहीं अब तो खेतों में तालाब बनाकर मछली पालन हो रहा है, उन्हें भी लाभ होगा। ऊर्जा आधारित उपकरणों पर 12 से घटाकर 5% जीएसटी से भी बड़ा लाभ होगा। सौर ऊर्जा को प्रोत्साहन मिलेगा। सीमेंट लोहे पर जीएसटी कम होने से पीएम आवास बनाना आसान होगा। देश कई चुनौतियों का सामना कर रहा है हमे अपनी अर्थ व्यवस्था को मजबूत करना है। दाम घटेंगे तो उत्पादन बढ़ेगा, हमारी अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। कई टैक्टर कंपनियों ने अभी से रेट कम कर दिए हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जहां फसल का नुकसान हुआ है, कलेक्टरों को कहा गया है की निरीक्षण कराकर नुकसान का मुआवजा दें। फार्टिलाइजर की कमी नही है, कमी है तो केवल वितरण व्यवस्था की। उन्होंने कहा- कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई करेंगे। बिहार चुनाव के लिए जीएसटी घटाने के सवाल पर कहा कांग्रेस ने तो बच्चो की टाफी और खिलौनों पर भी टैक्स लगाया था। ट्रंप की मेहरबानी से जीएसटी घटाने के सवाल पर कहा कि विपक्ष तो हर कार्य में ट्रंप दिख रहा है। मध्य प्रदेश में किसानों की संख्या घटने के सवाल पर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि खेती के अलावा बाकी कामों की तरफ भी बढ़ना पड़ेगा। किसानों की संख्या में ज्यादा असर नहीं पड़ा है।

जनगणना से पहले कांग्रेस ने फिर आदिवासियों को बनाया मुद्दा, गैर हिंदू बताने का प्रयास

Before the census, Congress again made tribals an issue, tried to declare them non-Hindus भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति में आदिवासी समुदाय की अपनी अलग भूमिका और महत्व होने से कांग्रेस और भाजपा के बीच उन्हें लुभाने की जंग नई नहीं है। यह समुदाय जिसके साथ चलता है, सत्ता उसी को मिलती है। पिछले दो दशक से आदिवासी समुदाय भाजपा के साथ है, अलबत्ता 2018 में कांग्रेस की ओर आदिवासी समाज का झुकाव होने से कमल नाथ को सरकार में आने का मौका जरूर मिल गया था। यही वजह है कि 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले शुरू हो रही जनगणना को लेकर कांग्रेस सक्रिय हो गई है। कांग्रेस ने आदिवासी समुदाय से अपील की है कि जनगणना में धर्म के कालम में वह स्वयं को हिंदू न बताएं। इधर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इसे हिंदुओं का अपमान बताया है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के बयान ‘गर्व से कहो हम आदिवासी हैं, हिंदू नहीं’ के बाद प्रदेश का सियासी माहौल गरमा गया है। भाजपा के आदिवासी नेताओं ने सिंघार के बयान को आदिवासी विरोधी बताया है। उन्होंने राहुल गांधी के बयानों को आधार बनाकर कहा कि कांग्रेस की संस्कृति ही सनातन धर्म के विरोध की रही है। अब जनगणना के बहाने कांग्रेस हिंदू ही नहीं, बल्कि समाज का बंटवारा करना चाहती है। यह बयान हिंदू समाज के साथ ही आदिवासी समुदाय को भी कमजोर बनाने की साजिश है। 2028 चुनाव को ध्यान में रखकर छेड़ी बहसबता दें कि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को किसी एसटी आरक्षित सीट पर जीत नहीं मिली। कांग्रेस ने आदिवासी बनाम हिंदू बहस ही वर्ष 2028 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर छेड़ी है, ताकि उसे राजनीतिक लाभ मिल सके। उमंग सिंघार का बयान ऐसे समय पर आया है, जब सुप्रीम कोर्ट में लंबित ओबीसी आरक्षण के मामले में कांग्रेस ने सरकार का साथ देकर एक तरह से अपने हथियार डाल दिए हैं। उसने ओबीसी आरक्षण के मामले में सफलता और असफलता का अनुमान लगाए बिना यह कदम उठाकर बड़ा जोखिम ले लिया है। कांग्रेस की कोशिश बन सकती है राजनीतिक जोखिमजनगणना में आदिवासी समुदाय को अलग से पहचान दिलाने की कांग्रेस की यह कोशिश भी राजनीतिक जोखिम बन सकती है। कांग्रेस के पास आदिवासी समुदाय के बीच जाकर बताने के लिए फिलहाल कुछ खास नहीं है, वहीं द्रौपदी मुर्मु को राष्ट्रपति पद तक पहुंचाने का श्रेय भाजपा अपने खाते में रखती है। साथ ही पेसा एक्ट जैसी कवायद भी भाजपा सरकार कर चुकी है। देश के विभिन्न राज्यों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा के अनुषांगिक संगठन आदिवासी समुदायों के बीच मतांतरण रोकने के साथ उनके कल्याण के लिए कार्यक्रमों को लगातार जारी रखे हुए हैं। संघ की कोशिश आदिवासियों को मुख्य धारा में लाने कीसंघ की कोशिश है कि रामायण और महाभारत काल के तमाम उदाहरण के माध्यम से आदिवासियों को उनके हिंदू होने का बोध कराते हुए मुख्य धारा में लाया जाए। इधर कांग्रेस के बयान इन कोशिशों के लिए चुनौती खड़ी करते हैं। मामला संघ के प्रयासों से जुड़ा है और सीधे सत्ता के समीकरणों को प्रभावित कर सकता है, इसलिए भाजपा इस मुद्दे पर कांग्रेस को कड़ी टक्कर देने की तैयारी कर रही है।

राहुल को नाना, दादा-दादी, पिता के पास चले जाना चाहिए:सीएम मोहन यादव

CM Mohan Yadav’s strange statement: Rahul should go to his maternal grandfather, grandparents, father मुरैना। मुरैना जिले में 101 हेक्टेयर का एक नया औद्योगिक पार्क बनाया जा रहा है, जो विकास का प्रतीक है। दूसरी ओर, नादान विपक्ष और राहुल गांधी तरह-तरह के प्रपंच रच रहे हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि उनकी पार्टी लगातार चुनाव हार रही है, और वे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की माँ के लिए गलत बयान दे रहे हैं। राहुल गांधी को अगर इतनी ही परेशानी है, तो उन्हें अपने नाना, दादा, दादी, पिता के पास चले जाना चाहिए, क्योंकि इस जगत में रहने का उन्हें कोई हक नहीं है।यह बात मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने मुरैना में हाइड्रोजन इकाई का भूमि पूजन करने के बाद आमसभा में कही। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी से सीखना चाहिए, जिन्होंने कई मंत्रियों और नेता विपक्ष के साथ काम किया था कि विपक्ष में कैसे रहा जाता है। कांग्रेस को माफी मांगनी होगी। राहुल गांधी ने सर्जिकल स्ट्राइक पर सवाल उठाए। अगर कोई शंका थी, तो उन्हें वहां चले जाना चाहिए था। बम के नीचे, तो सब पता चल जाता। अब वे चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहे हैं।मुख्यमंत्री ने कहा- पिपरसेवा में 157.5 करोड़ की लागत से 500 मेगावाट उत्पादन क्षमता वाला सोलर प्लांट वर्ष 2030 तक तैयार होगा। इसका भूमिपूजन सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कभी मुरैना-चंबल में उद्योगपति आते ही नहीं थे, क्योंकि कांग्रेसियों ने यहां डाकुओं को जमीन दे रखी थी। लेकिन अब मुरैना में बहुत संभावना है। यहां चंबल मैया और गजक अद्भुत हैं। अब अनुराग जैन जैसे उद्योगपति यहां इन्वेस्ट कर रहे हैं। शनि देव की कृपा से शनि लोक भी बनेगा। यहां सड़कों का चौड़ीकरण किया जाएगा और 300 करोड़ के इन्वेस्ट हो रहे हैं। मुरैना की अब काया बदल रही है। आमसभा में विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर, प्रदेश के कृषि मंत्री एंदल सिंह कंसाना एवं सांसद शिवमंगल सिंह तोमर भी मौजूद थे।

गरीब हों या धीरूभाई अंबानी के पिता, सभी को इलाज – मंत्री का अजीबोगरीब बयान वायरल

Union Minister’s controversial statement: Ambani’s father is also getting treatment under Ayushman Yojana’ मध्यप्रदेश के खंडवा जिले में केंद्रीय मंत्री दुर्गादास उईके का दिया गया एक बयान इन दिनों जमकर चर्चा का विषय बना हुआ है। शनिवार को हरसूद विधानसभा के रोशनी क्षेत्र में आयोजित मेगा स्वास्थ्य शिविर में आयुष्मान भारत योजना का बखान करते हुए उन्होंने मंच से ऐसा बयान दे दिया, जिसने न केवल लोगों को हैरान कर दिया बल्कि सोशल मीडिया पर मजाक और मीम्स का सिलसिला भी शुरू कर दिया। स्वास्थ्य शिविर में आयुष्मान योजना की बड़ाईकेंद्रीय मंत्री और बैतूल सांसद दुर्गादास उईके ने कार्यक्रम के दौरान कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई आयुष्मान भारत योजना देश के करोड़ों गरीब परिवारों के लिए वरदान साबित हो रही है। उन्होंने बताया कि गरीब से गरीब व्यक्ति भी इस योजना के तहत बड़े शहरों के नामी प्राइवेट अस्पतालों में इलाज करवा सकता है। आयुष्मान कार्ड की मदद से एक साल में 5 लाख रुपये तक का उपचार निशुल्क उपलब्ध है। ‘चाहे गरीब हो या धीरूभाई अंबानी के पिता’इसी दौरान अपने संबोधन में उन्होंने ऐसा बयान दे दिया, जिसने पूरे कार्यक्रम का फोकस खींच लिया। उन्होंने कहा कि 70 साल से ऊपर के हर व्यक्ति को 5 लाख तक का मुफ्त इलाज मिल रहा है, चाहे वो गरीब इंसान हों या धीरूभाई अंबानी के पिता। उनके इस बयान का वीडियो देखते ही देखते वायरल हो गया और सोशल मीडिया पर लोग इसे लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं देने लगे। सोशल मीडिया पर मजाक और मीम्स की बाढ़मंत्री उईके के इस बयान के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर मजाकिया पोस्ट और मीम्स बनाए जा रहे हैं। लोग इसे आयुष्मान योजना की ‘अनोखी व्याख्या’ बताते हुए मंत्री के भाषण शैली पर तंज कस रहे हैं। वहीं राजनीतिक हलकों में भी यह बयान चर्चा का मुद्दा बन गया है। योग और स्वस्थ जीवन शैली पर भी दिया जोरहालांकि अपने भाषण के दूसरे हिस्से में मंत्री उईके ने योग और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की भी अपील की। उन्होंने कहा कि अगर लोग नियमित रूप से योग करें और स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं तो बीमारियों से काफी हद तक बचा जा सकता है। साथ ही उन्होंने ग्रामीणों से आग्रह किया कि वे मेगा स्वास्थ्य शिविर का अधिक से अधिक लाभ उठाएं और अपने परिवार की बीमारियों का निशुल्क उपचार कराएं।

झंडा विवाद से भड़की राजनीति: बैतूल में कांग्रेस का पुलिस प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन

Politics flared up due to flag controversy: Congress protested against police administration in Betul हरिप्रसाद गोहेआमला ! ज़िला कांग्रेस कमेटी बैतूल के बैनर तले कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शनिवार जिला उपाध्यक्ष कांग्रेस छन्नू बेले की अगुवाई में थाना आमला पहुंच जिला पुलिस अधीक्षक बैतूल के नाम थाना प्रभारी आमला को ज्ञापन सौंपा सौंपे ज्ञापन के माध्यम से बताया गया जिला कांग्रेस कमेटी नवागत अध्यक्ष निलय डागा के जुलूस में लगाए जा रहे झंडे लगाने को लेकर भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा कांग्रेस कार्यकर्ता के साथ मार पिटाई की गई थी पुलिस प्रशाशन द्वारा शिकायत करने के बाद भी मोनू बड़ोनिया तथा अन्य भाजपा कार्यकर्ताओं पर मामला दर्ज न करते हुए उल्टे जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष निलय डागा एवं अन्य कांग्रेसी कार्यकर्ताओं पर बिना विवेचना किए मामला दर्ज कर दिया है। जिसे लेकर बैतूल जिले के कांग्रेसी कार्यकर्ता एवं आम जन में आक्रोश देख जा रहा है। जिला उपाध्यक्ष कांग्रेस छन्नू बेले ने बताया सत्ताधारी भाजपा द्वारा सत्ता का दुरुपयोग करते हुए कांग्रेसी कार्यकर्ताओं पर मामला दर्ज किए जा रहे हैं। उन्होंने मांग की है की शीघ्र ही कोतवाली थाना बैतूल में जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष निलय डागा सहित अन्य कार्यकर्ताओं पर लगाया गया झूठा प्रकरण वापस लिया जाए अन्यथा बाध्य होकर संपूर्ण जिले में आंदोलन करने बाध्य होना पड़ेगा। जिससे होने वाली संभावित क्षति के लिए शासन प्रशासन जवाबदार रहेगा। ज्ञापन सौंपते समय प्रमुख रूप से कांग्रेस नेता छन्नू बेले ,नासीर खान, चन्द्र शेखर सिंह चंदेल,जितेंद्र शर्मा सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे।

मप्र विधानसभा अध्यक्ष का सरकारी बंगला बना तालाब, बारिश के कारण बंगले में भर पानी

The official bungalow of the Speaker of Madhya Pradesh Legislative Assembly became a pond, the bungalow was filled with water due to rain ऊपर दिए वीडियो में स्विमिंग पूल जैसा जो दृश्य नजर आ रहा है, वह प्रदेश के विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के शासकीय बंगले का है। जहां बारिश का पानी भरा हुआ है, यह न केवल नगर निगम की कार्यप्रणाली की पोल खोल रहा है, बल्कि जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही को भी उजागर कर रहा है। इसे देखकर सहज अनुमान लगाया जा सकता है कि जब ‘माननीय’ के बंगले की यह स्थिति है, तो आम लोगों के घरों और शहर की हालत आप समझ ही सकते हैं। दरअसल, ग्वालियर शहर में लगातार हो रही बारिश के कारण सड़कों पर जलभराव और घरों में पानी भरने की कई शिकायतें सामने आ रही हैं। इसी क्रम में विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के ग्वालियर स्थित सरकारी आवास में भी बारिश का पानी घुस गया। स्थिति बिगड़ते ही नगर निगम की टीम अपनी विफलता छिपाने के लिए मौके पर पहुंची, जबकि उस समय तोमर बंगले में मौजूद नहीं थे। नगर निगम ने पंपिंग सेट की मदद से पानी निकालने की कोशिश की, लेकिन लगातार बारिश के कारण जल निकासी में काफी परेशानी आई। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर ऐसी स्थिति बनी ही क्यों? इसका कारण साफ है कि वर्षा से पहले नगर निगम द्वारा नालों और जल निकासी व्यवस्था की सफाई और तैयारी समय पर नहीं की गई, जिससे यह संकट खड़ा हुआ। बारिश के चलते ग्वालियर कलेक्टर रुचिका चौहान ने एहतियातन 26 जुलाई को जिले के सभी शासकीय एवं अशासकीय विद्यालयों में अवकाश घोषित किया है। आदेश में कहा गया है कि भारी वर्षा के कारण विद्यालय आने वाले विद्यार्थियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही, यह निर्देश भी दिए गए हैं कि यदि किसी विद्यालय में मासिक परीक्षा या टेस्ट चल रहे हों, तो उन्हें आगामी दिनों में दोबारा आयोजित किया जाए। यह सुनिश्चित किया जाए कि विद्यार्थियों की शैक्षणिक हानि न हो।

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