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बीजेपी अब जिम्मेदार पदों पर बैठे नेताओं को सार्वजनिक जीवन में मंचों से बोलने का प्रशिक्षण देने की करेगा शुरुआत

भोपाल  भाजपा के दिग्गज नेताओं, मंत्रियों, विधायकों की सार्वजनिक बयानबाजी से पार्टी की धूमिल होती छवि के चलते अगले महीने से भाजपा का स्पीकिंग कोर्स शुरू हो सकता है। मध्य प्रदेश भाजपा में जिस तरीके से पार्टी के दिग्गज नेताओं, मंत्रियों के विवादास्पद बयान सामने आ रहे हैं, उसके चलते न केवल पार्टी बल्कि सरकार की भी छवि धूमिल होती जा रही है। यही वजह है कि भारतीय जनता पार्टी अब जिम्मेदार पदों पर बैठे अपने तमाम नेताओं को सार्वजनिक जीवन में मंचों से बोलने का प्रशिक्षण देने की शुरुआत करने जा रही है। माना जा रहा है कि बीजेपी जून से यह प्रशिक्षण शिविर मध्य प्रदेश में शुरू कर सकती है। माना जा रहा है कि जिस तरह विधानसभा सत्र से पहले भाजपा अपने विधायक दल की बैठक में तय कर लेती है कि किस तरीके से विधानसभा में सरकार का पक्ष रखना है, कैसे विपक्ष को घेरना है, ऐसी बयानबाजी से बचाना है जिसके चलते विधानसभा सत्र के दौरान सरकार पर सवाल ना उठे। इसके साथ ही जैसे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कार्यकर्ताओं का प्रशिक्षण वर्ग आयोजित कर उन्हें हर मुद्दे पर बोलने से सार्वजनिक बयान बाजी से, रोकने के गुण सिखाता है उसी तर्ज पर भाजपा प्रशिक्षण शिविर का आयोजन करने की शुरुआत करेगी। इसमें बाकायदा भाजपा मीडिया प्रबंधन के प्रोफेशनल एक्सपर्ट के जरिए सार्वजनिक मंचों पर कैसे बोला जाए, विवादित मुद्दों से कैसे बचा जाए, सरकार पर विपक्ष के हमले का कैसे जवाब दिया जाए, इसका प्रशिक्षण दिया जाएगा। दरअसल बीते दिनों जिस तरीके से मंत्री विजय शाह की ऑपरेशन सिंदूर की आइकॉन बनी कर्नल सोफिया कुरैशी पर दिए गए बयान के चलते भाजपा की और सरकार की अंतरराष्ट्रीय किरकिरी हुई, उसके बाद डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा के सेना पर दिए गए अपमानजनक बयान के बाद भाजपा और सरकार हाशिये पर आई भाजपा ने तय कर लिया है कि मंत्री, सांसदों, विधायक जैसे तमाम दिग्गज नेताओं को सार्वजनिक जीवन में बोलने का प्रशिक्षण दिया जाना जरूरी है। किन बयानों के चलते हुई सरकार और पार्टी की किरकिरी?     मंत्री विजय शाह के ऑपरेशन सिंदूर की आइकॉन कर्नल सोफिया कुरैशी पर की गई बदजुबानी     डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा का बयान     मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल द्वारा 2024 में अपने बेटे के मारपीट के मामले में भोपाल के थाने में हंगामा किए जाने के मामले के बाद ग्वालियर के होटल में छापामार कार्रवाई से हुआ विवाद     मंत्री प्रहलाद पटेल द्वारा सार्वजनिक कार्यक्रम में आवेदन लेकर आने वाली जनता को भिखारी बताना     विधायक भूपेंद्र सिंह और मंत्री गोविंद सिंह के बीच सार्वजनिक बयानबाजी के चलते पार्टी की छवि धूमिल होना     मंत्री नगर सिंह द्वारा अपना वन विभाग का मंत्री पद छिनने के बाद सरकार और पार्टी के खिलाफ बयानबाजी  

शशि थरूर पाक के आतंकी चेहरे को बेनकाब करेंगे, भारतीय डेलिगेशन को लीड कर सकते हैं, कांग्रेस का आया रिएक्शन

नई दिल्ली सरकार पहलगाम में आतंकवादी हमले के जवाब में चलाए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद आक्रामक राजनयिक अभियान शुरू करने का फैसला किया है। इसके तहत वैश्विक मंच पर भारत के पक्ष को मजबूती से रखने और पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद को बेनकाब किया जाएगा। खास बात है कि इस काम के लिए मोदी सरकार ने नरसिम्हा राव की कूटनीति के रास्ते पर चलने का फैसला लिया है। अगले सप्ताह से विभिन्न देशों में कई बहुदलीय प्रतिनिधिमंडल भेजेगी। यह ठीक उसी तर्ज पर जब नरसिम्हा राव ने यूएन में कश्मीर मुद्दे पर भारत का पक्ष रखने के लिए विपक्ष के नेता अटल बिहारी वाजयपेयी के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल भेजा था। तब यूएन में गिर गया था पाकिस्तान का प्रस्ताव 1994 में तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिंह राव ने जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार से जुड़े सत्र में एक प्रतिनिधि मंडल भेजने का फैसला किया था। इसका उद्देश्य कश्मीर समस्या पर भारत का पक्ष रखना और पाकिस्तान द्वारा समर्थित एक प्रस्ताव को विफल करना था, जिसमें नई दिल्ली की निंदा की जाती। उस समय यह प्रयास बहुत सफल रहा था। वाजपेयी के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल के हस्तक्षेप के कारण पाकिस्तान का प्रस्ताव गिर गया था। वाजपेयी की टीम में कौन-कौन थे शामिल पीवी नरसिम्हाराव ने विदेश नीति के धुरंधर माने जाने वाले विपक्ष के नेता अटल बिहारी वाजपेयी को प्रतिनिधि मंडल का प्रमुख नियुक्त किया था। उनके साथ कश्मीर के फारूक अब्दुल्ला और राव सरकार के विदेश राज्य मंत्री सलमान खुर्शीद भी थे। संयुक्त राष्ट्र के बारे में गहन जानकारी के साथ प्रतिनिधिमंडल को मजबूत करने के लिए, संयुक्त राष्ट्र में भारत के तत्कालीन राजदूत हामिद अंसारी को भी शामिल किया गया था। राव के कदम से परेशान थे खुर्शीद? अटल बिहारी वाजपेयी ने अपने छह दशक से अधिक के राजनीतिक करियर में हमेशा व्यक्तिगत समीकरणों पर भरोसा किया। उन्होंने पार्टी लाइन से हटकर मैत्रीपूर्ण संबंध बनाए। पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव के साथ उनकी नजदीकी हमेशा उनके संबंधित राजनीतिक दलों में उत्सुकता भरी चर्चा का विषय रही। राव की तरफ से वाजपेयी को यूएन में भेजने के कदम को उनकी पार्टी के भीतर अच्छी प्रतिक्रिया नहीं मिली। तत्कालीन विदेश राज्य मंत्री सलमान खुर्शीद जिनेवा में वाजपेयी के अधीन काम करने से विशेष रूप से परेशान थे। वापस लौटने पर हुआ था शानदार स्वागत जब जेनेवा से जीत हासिल कर भारतीय प्रतिनिधिमंडल राजधानी लौटा तो उसका वैसे ही शानदार स्वागत हुआ जैसा कि आमतौर पर विजयी क्रिकेट टीमों का होता है। राव की इस कूटनीति के तह भारत ने आखिरकार दुनिया को दिखा दिया कि कश्मीर मुद्दे पर उसका इरादा गंभीर है। इस सफलता के तुरंत बाद जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के प्रमुख जावेद मीर को पकड़ लिया गया, जिससे आतंकवादियों के मनोबल को भी गहरा धक्का लगा था। शशि थरूर पाक के आतंकी चेहरे को बेनकाब करेंगे भारत सरकार ने एक सात सदस्यीय सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल का गठन किया है, जो प्रमुख विदेशी सरकारों को हालिया भारत-पाकिस्तान संघर्ष और इस मुद्दे पर भारत के रुख से अवगत कराने के लिए उन देशों का दौरा करेगा. इस प्रतिनिधिमंडल में वरिष्ठ कांग्रेस नेता शशि थरूर को भी शामिल किया गया है. संसदीय कार्य मंत्रालय ने घोषणा की है कि तिरुवनंतपुरम से चार बार के सांसद शशि थरूर इस सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे. नामित अन्य सदस्यों में भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद और बैजयंत पांडा, जनता दल (यूनाइटेड) के सांसद संजय कुमार झा, डीएमके की कनिमोझी करुणानिधि, राकांपा (शरद पवार गुट) की नेता सुप्रिया सुले और शिवसेना (शिंदे गुट) के सांसद श्रीकांत शिंदे शामिल हैं. मजे की बात ये है कि इस सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल में शामिल करने के लिए कांग्रेस ने अपने जिन 4 सांसदों के नाम सरकार को सुझाए थे, उनमें से किसी को नहीं चुना गया. कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश के अनुसार, केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने 16 मई की सुबह कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोक सभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से फोन पर बात की थी और उनसे अनुरोध किया था कि वे पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद पर भारत की स्थिति स्पष्ट करने के लिए विदेश भेजे जा रहे प्रतिनिधिमंडल में शामिल करने के लिए चार नाम सुझाएं. कल 16 मई को दोपहर तक, लोक सभा में विपक्ष के नेता ने संसदीय कार्य मंत्री को पत्र लिखकर कांग्रेस की ओर से आनंद शर्मा, गौरव गोगोई, डॉ. सैयद नसीर हुसैन और राजा बरार के नाम दिए. लेकिन केंद्र ने इन चारों को छोड़कर शशि थरूर पर विश्वास जताया. भारत सरकार का यह सात सदस्यीय सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल 23 मई से 10 दिवसीय राजनयिक मिशन पर रवाना होगा. वाशिंगटन, लंदन, अबू धाबी, प्रिटोरिया और टोक्यो जैसी प्रमुख राजधानियों का दौरा करके यह सर्वदलीय टीम आतंकवाद पर भारत की जीरो टॉलरेंस पॉलिसी और ऑपरेशन सिंदूर के तहत हाल के घटनाक्रमों के बारे में विदेशी सरकारों को जानकारी देगी. बता दें कि 22 अप्रैल को पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में भारत ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था. इस आतंकी हमले में 26 लोग मारे गए थे. इसके जवाब में भारत ने पाकिस्तान और उसके कब्जे वाले कश्मीर में जैश, लश्कर और हिजबुल के 9 आतंकी​ ठिकानों पर एयर स्ट्राइक की थी, जिसमें 100 से ज्यादा आतंकी मारे गए थे.

बीजेपी ने नागपुर महानगर की जिम्मेदारी दयाशंकर तिवारी को सौंपी, कौन बनेगा मुंबई बीजेपी चीफ?

मुंबई महाराष्ट्र बीजेपी संगठन चुनावों को गति देते हुए मुंबई समेत 58 जिला अध्यक्षों का ऐलान कर दिया है। बीजेपी ने नागपुर महानगर की जिम्मेदारी दयाशंकर तिवारी को सौंपी है। इसी प्रकार पार्टी ने मीरा भाईंदर में दिलीप जैन को पार्टी की कमान दी है। पार्टी ने कल्याण में नंदु परब और उल्लासनगर में राजेश वधारिया को अध्यक्ष बनाया है। पुणे शहर में जिला अध्यक्ष का पद धिरज घाटे को दिया है। महाराष्ट्र में प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी अभी राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले के पास है। पार्टी ने पूर्व मंत्री रवींद्र चव्हाण को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया है। उन्हें ही बावनकुले के उत्तराधिकारी के तौर पर देखा जा रहा है। महाराष्ट्र बीजेपी के 58 जिला अध्यक्षों की लिस्ट देखें। कौन बनेगा मुंबई बीजेपी चीफ? जिला अध्यक्षों के ऐलान के बाद अब मुंबई अध्यक्ष को लेकर चर्चा शुरू हो गई है क्यों प्रदेश प्रमुख बावनकुले की तरह ही आशीष शेलार अब मंत्री है। ऐसे में एक व्यक्ति-एक पद के हिसाब से किसी नए व्यक्ति को कमान सौंपेगी। ऐसे में जब आगे बीएमसी के चुनाव होने हैं तब मुंबई प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव काफी अहम माना जा रहा है। राजनीतिक और क्रिकेट प्रशासक के तौर पर सक्रिय आशीष शेलार अगस्त, 2022 में मुंबई बीजेपी के अध्यक्ष बने थे। आशीष शेलार ने तब मंगल प्रभात लोढ़ा को रिप्लेस किया था। मंगल प्रभात लोढ़ा भी महायुति 2.0 सरकार में मंत्री हैं। क्या संजय उपाध्याय बनेंगे चीफ? कांग्रेस में मुंबई प्रदेश अध्यक्ष की कमान डॉ. वर्षा गायकवाड़ के हाथों में है। पार्टी ने अभी तक वर्षा गायकवाड़ को हटाने के संकेत नहीं दिए हैं। अब देखना यह है कि बीजेपी बीएमसी चुनावों से पहले कौन सा दांव खेलती है? राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि संजय उपाध्याय को भी फडणवीस अध्यक्ष की जिम्मेदारी दे सकते हैं। संजय उपाध्याय पूर्व में मुंबई बीजेपी से महासचिव भी रह चुके हैं। इसके अलावा अमित साटम, अतुल भातखलकर और पराग अलवानी के नाम चर्चा में हैं। देवेंद्र फडणवीस के सीएम बनने के बाद बीजेपी की नजर मुंबई में अपना मेयर बनाने पर है। बीजेपी ने विधानसभा चुनावों में 132 सीटें जीती थीं।

रानी अहिल्याबाई की 300 वीं जयंती के मौके पर शुरू होगा नया अभियान 21 से 31 मई के बीच चलाया जाएगा

भोपाल  मध्यप्रदेश में बीजेपी नया अभियान शुरू करने जा रही है। यह नया अभियान रानी अहिल्याबाई की 300 वीं जयंती के मौके पर शुरू होगा। नया अभियान 21 से 31 मई के बीच चलाया जाएगा। इसी कड़ी में 31 मई को अहिल्याबाई की 300 वीं जयंती प्रदेश भर में मनाई जाएगी। दरअसल बीजेपी के नेता रानी अहिल्याबाई के जीवन मूल्य और वीरता के साथ उनके दूरदर्शी शासन, सामाजिक सुधार, समावेशी शासन और मंदिरों के जीर्णोद्धार के जरिए सांस्कृतिक पुनर्जागरण के बारे में जनता के बीच जाकर चर्चा करेंगे। बीजेपी सरकार के सामाजिक सुधार, समावेशी विकास और ‘विकास भी और विरासत भी’ के संकल्प को जनता के बीच बताएगी। 14 मई को भोपाल में बड़ा वर्कशॉप का आयोजन होगा। कार्यशाला बीजेपी प्रदेश कार्यालय में होगी। वर्कशॉप में बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष, संगठन महामंत्री के साथ ही विधायक, संसद, जिला अध्यक्ष और प्रदेश पदाधिकारी मौजूद रहेंगे। इस दौरान बीजेपी के नेता और कार्यकर्ता अहिल्याबाई के जीवन मूल्य और वीरता के साथ उनके दूरदर्शी शासन, सामाजिक सुधार, समावेशी शासन और मंदिरों के जीर्णोद्धार के जरिए सांस्कृतिक पुनर्जागरण के बारे में जनता के बीच जाकर चर्चा करेंगे। अहिल्याबाई के साथ ही बीजेपी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के सामाजिक सुधार, समावेशी विकास और ‘विकास भी और विरासत भी’ के संकल्प को जनता के बीच बताएगी। अभियान का उद्देश्य अहिल्या की विरासत- बीजेपी के इस अभियान का उद्देश्य महारानी अहिल्याबाई होल्कर के प्रेरणादाई जीवन को समाज के सामने लाना है। बीजेपी उनके सुशासन की विरासत का प्रचार करेगी। धार्मिक और सांस्कृतिक उत्थान के लिए किए गए कामों को समाज के बीच पहुंचाएगी। बीजेपी के समावेशी सुशासन का प्रचार- समावेशी एवं मूल्य आधारित शासन के प्रति बीजेपी की प्रतिबद्धता को बताएंगे। केन्द्र और मप्र की भाजपा सरकार द्वारा महिला सशक्तिकरण और जनकल्याण के कामों को बताएंगे। पिछड़े, एससी, एसटी वर्ग के लोगों के कल्याण के साथ ही गृह एवं कुटीर उद्योग के प्रोत्साहन में भाजपा की उपलब्धियों को सामने लाया जाएगा। 14 को भोपाल में बड़ी वर्कशॉप बीजेपी ने अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जन्म जयंती के अभियान का जो कैलेंडर बनाया है उसके तहत 14 मई को भोपाल में बीजेपी प्रदेश कार्यालय में कार्यशाला होगी। इस वर्कशॉप में बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष, संगठन महामंत्री के साथ ही विधायक, जिला अध्यक्ष और प्रदेश पदाधिकारी मौजूद रहेंगे। अभियान में होने वाले कार्यक्रमों की टाइमलाइन     कार्यक्रम की प्लानिंग से जुड़ी बैठकें- 16 से 18 मई     प्रदेश वक्ताओं की कार्यशालाएं- 14 से 14 मई     अभियान का क्रियान्वयन– 21 से 31 मई अभियान के क्रियान्वयन के लिए समितियां बनेंगी इस अभियान के क्रियान्वयन के लिए प्रदेश और जिला स्तर पर समितियां बनेंगी। प्रदेश की समिति में एक प्रदेश पदाधिकारी संयोजक होगा। महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष सह संयोजक के साथ 3 सदस्य और रहेंगे। जिला स्तरीय समिति में एक संयोजक के साथ महिला मोर्चा की जिला अध्यक्ष और एक सदस्य के साथ कार्यक्रमों के प्रमुख शामिल रहेंगे। अभियान में ये कार्यक्रम होंगे     21 से 31 मई के बीच राजधानी भोपाल सहित सभी जिलों में कॉलेजों, विश्वविद्यालयों में प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी।     नगरीय निकायों, महिला एनजीओ के जरिए कार्यक्रम आयोजित कराए जाएंगे।     अहिल्याबाई होल्कर के जीवन, सुधारों और सांस्कृतिक योगदान को दर्शाने वाली पुस्तिकाएं, पैम्फलेट्स, सहित अन्य सामग्री पब्लिक के बीच वितरित की जाएगी।     कार्यक्रमों में निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधियों को आयोजन और कार्यक्रमों में बोलने के लिए सक्रिय और प्रत्यक्ष भूमिका दी जाएगी। शोभा यात्राओं में दिखेगी अहिल्याबाई की विरासत अहिल्याबाई की विरासत और भाजपा के सामाजिक सुधार और सुशासन के प्रति संकल्प को कार्यक्रमों में दिखाया जाएगा। उनके सांस्कृतिक और आध्यात्मिक योगदान का उत्सव समारोह मनाते हुए भव्य शोभा यात्रा निकाली जाएंगी। बुनकरों, मंदिरों के अर्चक के साथ विशेष संपर्क किया जाएगा। पत्रकारों और बुद्धिजीवियों के साथ बैठकें की जाएगी। महेश्वरी साड़ी की प्रदर्शनी और हथकरघा हाट भी लगेंगी अहिल्याबाई के जीवन और विरासत से जुड़ी प्रेरणादायक घटनाओं पर आधारित नाटक का प्रदर्शन किया जाएगा। स्वदेशी बुनाई परंपराओं के पुनर्जीवन और कला संस्कृति के प्रचार में अहिल्याबाई की विरासत को लोकप्रिय बनाने के लिए महेश्वरी साड़ी प्रदर्शनी और हथकरघा हाट के आयोजन किए जाएंगे। मंदिरों और घाटों पर सफाई अभियान चलाकर आरती और पूजा की जाएगी। इस दौरान अहिल्याबाई के जीवन से जुडे़ स्थानों को विशेष रूप से चिह्नित करके वहां कार्यक्रम किए जाएंगे। अभियान में युवा और महिलाओं पर फोकस महिला- बीजेपी की महिला नेत्रियों के नेतृत्व में वॉकेथॉन और विशेष दौड के आयोजन होंगे। महिला जनप्रतिनिधियों के सम्मेलन आयोजित कर भाजपा की सरकार में महिला नेतृत्व को मिले प्रोत्साहन को बताया जाएगा। युवा- शैक्षणिक संस्थानों में सेमिनार और पारस्परिक संवाद सत्र आयोजित करके छात्रों को अहिल्याबाई होल्कर की विरासत और नेतृत्व, सामाजिक सुधार के साथ राष्ट्र निर्माण में उसकी प्रासंगिकता से रुबरू कराया जाएगा। प्रश्नोत्तरी, निबंध लेखन, भाषण जैसी प्रतियोगिताओं के माध्यम से छात्रों को अहिल्याबाई की विरासत से परिचित कराया जाएगा। ज्ञान संचालित देशभक्ति पर बीजेपी के जोर पर प्रकाश डाला जाएगा।

कैलाश विजयवर्गीय और सांसद शंकर लालवानी सहित अन्य जनप्रतिनिधियों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली

इंदौर बीजेपी के वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय और सांसद शंकर लालवानी सहित अन्य जनप्रतिनिधियों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने 23 साल पुराने मामले में दर्ज निजी परिवाद को खारिज कर दिया है। मामला इंदौर के पीपल्याहाना तालाब को विकसित करने से जुड़ा था, जिसमें इन नेताओं पर अनियमितताओं के आरोप लगाए गए थे। यह था मामला यह मामला 2001-2002 का है, जब कैलाश विजयवर्गीय इंदौर के महापौर थे, और शंकर लालवानी, रमेश मेंदोला, मधु वर्मा और उमाशशि शर्मा महापौर परिषद के सदस्य थे। आरोप था कि होलकर घराने की कुछ जमीन का अधिग्रहण कर नवरतनबाग में कीमती जमीन दी गई, जिससे सरकारी खजाने को नुकसान हुआ। मामले में निजी परिवाद दर्ज करने वाले अधिवक्ता आनंद अग्रवाल ने इन जनप्रतिनिधियों के खिलाफ आरोप लगाए थे। मामला पहले जिला न्यायालय में चला और फिर हाईकोर्ट पहुंचा, जहां हाईकोर्ट ने पूर्व महापौर उमाशशि शर्मा के खिलाफ आदेश को बरकरार रखा। मामले में अब कोई कानूनी कार्रवाई नहीं इसके बाद परिवादी ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर की। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जनप्रतिनिधियों पर मुकदमा चलाने के लिए सरकार की मंजूरी जरूरी है। कोर्ट ने निचली अदालतों के फैसले में किसी भी गलती को नहीं पाया और परिवाद को खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से कैलाश विजयवर्गीय, शंकर लालवानी, रमेश मेंदोला और अन्य जनप्रतिनिधियों को बड़ी राहत मिली है। 23 साल पुराने इस मामले में अब कोई कानूनी कार्रवाई नहीं हो सकेगी।

सर्वदलीय बैठक में सभी दलों ने एयरस्ट्राइक की सराहना की और सरकार के हर निर्णय, सेना की हर कार्रवाई में साथ देने की बात कही

नई दिल्ली जम्मू कश्मीर के पहलगाम में पर्यटकों पर हुए आतंकी हमले के जवाब में भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ लॉन्च कर पाकिस्तान में आतंकियों के नौ ठिकानों को नेस्तनाबूद कर दिया था. सरकार ने ऑपरेशन सिंदूर के बाद सर्वदलीय बैठक बुलाई थी. इस बैठक में सभी दलों के नेताओं ने एयरस्ट्राइक की सराहना की और सरकार के हर निर्णय, सेना की हर कार्रवाई में साथ देने की बात कही. ऑपरेशन सिंदूर के बाद हुई इस बैठक में मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस बैठक में शामिल नहीं होने का मुद्दा उठाया. खड़गे ने बैठक में यह भी कहा कि जो काम कर रहे हैं, करते रहिए. हम आपके साथ हैं. उन्होंने बैठक में राफेल मार गिराने के पाकिस्तानी दावे का भी जिक्र किया, लेकिन किसी ने भी इस विषय पर सरकार से जवाब देने को नहीं कहा. सर्वदलीय बैठक के बाद बाहर आए कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि हमें जो बताया गया, हमने वह सुन लिया. हमने सरकार को समर्थन दिया है. उन्होंने कहा कि हम इस घड़ी में सरकार के साथ खड़े हैं. पीएम को शायद लगता है कि वह संसद से ऊपर हैं. जब वक्त आएगा, तब बात करेंगे लेकिन अभी इस घड़ी में हम किसी की आलोचना नहीं करेंगे. यह समय एकजुटता का- राहुल गांधी मल्लिकार्जुन खड़गे ने यह भी कहा कि हमने कहा है कि देशहित में सरकार के साथ रहेंगे. लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा कि हम एकजुट हैं और शुरुआत से ही सरकार के साथ हैं. उन्होंने यह भी कहा कि हां, कुछ चिंताएं हैं लेकिन ठीक है. यह समय एकजुटता का है. बैठक के बाद राहुल गांधी ने बाहर आकर कहा कि हम सभी ने सरकार को समर्थन दिया है. सभी दलों के नेताओं को बोलने के लिए 4 से 5 मिनट का समय दिया गया. कांग्रेस के साथ ही समाजवादी पार्टी ने भी सर्वदलीय बैठक से प्रधानमंत्री की गैरमौजूदगी का मुद्दा उठाया. ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) की सांसद सुप्रिया सुले ने बठिंडा में फाइटर जेट मार गिराए जाने वाले दावे से संबंधित सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट का मुद्दा उठाया. बैठक की शुरुआत में सरकार की ओर से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर के संबंध में जानकारी दी. हालांकि, रक्षा मंत्री ने इस बैठक में ऑपरेशनल डिटेल नहीं दी. सभी पार्टियों के नेताओं ने सरकार के साथ एकजुटता व्यक्त करते हुए कहा कि हम साथ हैं. बैठक के बाद बाहर आए संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इसे अच्छा बताया. किरेन रिजिजू ने कहा कि यह ऑपरेशन अभी जारी है, इसलिए इस पर अलग से ब्रीफिंग नहीं हुई है. उन्होंने कहा कि यह बहुत संवेदनशील विषय है और सभी ने पूरी गंभीरता से अपनी बातों को रखा है. किरेन रिजिजू ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर को लेकर पूरे देश की राजनीतिक पार्टियों के एक लाइन पर बयान आ रहे हैं. यह भी बहुत अच्छी बात है. उन्होंने कहा कि सभी राजनीतिक दलों ने परिपक्वता दिखाई है. हमारे देश के राजनीतिक दलों ने दिखाया है कि भारत एक परिपक्व लोकतंत्र है. किरेन रिजिजू ने यह भी कहा कि जब हम ऐसे विषयों पर बात करते हैं, तब इसमें राजनीति का महत्व नहीं है. उन्होंने सभी विपक्षी पार्टियों को धन्यवाद दिया और यह भी कहा कि फेक न्यूज से एकता प्रभावित होती है. PAK पर कार्रवाई दुरुस्त, चीन-तुर्की को भी नसीहत… ओवैसी  इस बैठक के बाद ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल-मुस्लिमीन के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने पूरी जानकारी दी.ओवैसी ने कहा कि सर्वदलीय बैठक में मैंने हमारी सेना की तारीफ की. उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम दिया. मैंने बैठक में कहा कि हमें टीआरएफ के खिलाफ इंटरनेशनल कैंपेन चलाना चाहिए, खासतौर से सिक्योरिटी काउंसिल इसका ऐलान करें. ओवैसी ने कहा कि हमें अमेरिका को बताना है कि वो अपने ही मुल्क में टीआरएफ को आतंकी संगठन घोषित करें.  उन्होंने कहा कि फरवरी 2025 में हाफिज सईद के बेटे ने एक स्पीच में कहा था कि हम 2025 में जिहाद करेंगे. ये जिहाद का नाम लेकर भारत में कत्ल करना चाहते हैं. आतंक फैलाना चाहते हैं. हम संयुक्त राष्ट्र से आग्रह करते हैं कि टीआरएफ को आतंकी संगठन घोषित करे. पाकिस्तान को FATF की ग्रे लिस्ट में रखा जाए. ओवैसी ने कहा कि हमने ब्रिटेन के साथ ट्रेड डील भी की है. ऐसे में हम उनसे भी कहेंगे कि टीआरएफ को बैन करे. ब्रिटेन का वित्त मंत्रालय पाकिस्तान पर प्रतिबंध लगाए. हमारी अमेरिका से ट्रेड डील होने जा रही है तो ऐसे में अमेरिका से भी कहेंगे कि पाकिस्तान को आतंकी सूची में डाले.  

नागरिकता विवाद में राहुल गांधी को राहत: हाईकोर्ट ने याचिका खारिज की, केंद्र पर उठाए सवाल

Relief to Rahul Gandhi in citizenship dispute: High Court dismisses petition, raises questions on Centre लखनऊ। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की नागरिकता को चुनौती देने वाली याचिका को लखनऊ हाईकोर्ट ने सोमवार को खारिज कर दिया। कोर्ट ने केंद्र सरकार की ओर से अस्पष्ट जवाब दिए जाने पर नाराजगी जताई और कहा कि जब तक केंद्र कोई स्पष्ट स्थिति नहीं रखता, तब तक याचिका को लंबित रखने का कोई औचित्य नहीं है। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता को अन्य कानूनी रास्ते अपनाने की स्वतंत्रता दी है। यह मामला पिछले कुछ वर्षों से सुर्खियों में बना हुआ था, जिसमें राहुल गांधी पर ब्रिटेन की एक कंपनी के डायरेक्टर पद पर रहते हुए खुद को “ब्रिटिश नागरिक” बताने का आरोप लगाया गया था। याचिकाकर्ता एस विग्नेश शिशिर, जो कर्नाटक के निवासी और भाजपा से जुड़े हैं, ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में याचिका दाखिल की थी। याचिका में कहा गया कि यदि राहुल गांधी ने स्वयं को ब्रिटिश नागरिक बताया है, तो भारतीय नागरिकता कानून 1955 के अनुसार उनकी नागरिकता रद्द की जानी चाहिए और वे जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत चुनाव लड़ने के अयोग्य घोषित किए जाएं। हाईकोर्ट की टिप्पणी और केंद्र की भूमिका कोर्ट की खंडपीठ जिसमें न्यायमूर्ति एआर मसूदी और न्यायमूर्ति राजीव सिंह शामिल थे, ने कहा कि केंद्र सरकार याचिकाकर्ता की शिकायत के निपटारे के लिए कोई समयसीमा नहीं दे पा रही है। ऐसे में याचिका पर विचार जारी रखना व्यर्थ होगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता इस मामले में अन्य वैकल्पिक विधिक उपायों के लिए स्वतंत्र है। इससे पहले 21 अप्रैल को हुई सुनवाई में कोर्ट ने केंद्र सरकार को फटकार लगाते हुए कहा था कि यह मामला राष्ट्रीय महत्व का है, और इसमें देरी नहीं की जा सकती। कोर्ट ने केंद्र से पूछा था कि क्या राहुल गांधी भारतीय नागरिक हैं या नहीं—और 10 दिन के भीतर स्थिति स्पष्ट करने को कहा था। लेकिन 10 दिन की समयसीमा बीतने के बाद भी सरकार की ओर से ठोस जवाब नहीं आया। एडिशनल सॉलिसिटर जनरल सूर्यभान पांडेय ने कोर्ट में केंद्र की ओर से स्थिति रिपोर्ट पेश की थी, जिसे कोर्ट ने अपर्याप्त” बताया था। इसके बाद कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि केंद्र सरकार ही मामले की गंभीरता को नहीं समझ रही, तो कोर्ट के पास याचिका खारिज करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता। याचिकाकर्ता के आरोप क्या थे? याचिकाकर्ता एस विग्नेश शिशिर ने दावा किया था कि राहुल गांधी ने वर्ष 2005-2006 में ब्रिटेन की एक कंपनी, ‘BackOps Limited’ में डायरेक्टर के रूप में खुद को “British citizen” बताया था। उन्होंने ब्रिटिश सरकार के 2022 के एक गोपनीय मेल का भी हवाला दिया और कहा कि राहुल गांधी की नागरिकता संदिग्ध है। याचिका में यह भी कहा गया कि यदि राहुल गांधी वास्तव में ब्रिटिश नागरिक रहे हैं या दोहरी नागरिकता रखते हैं, तो भारतीय कानून के अनुसार उन्हें संसद सदस्य बने रहने और चुनाव लड़ने का अधिकार नहीं है। भारतीय नागरिकता अधिनियम की धारा 9(2) के तहत याचिकाकर्ता ने राहुल गांधी की नागरिकता को समाप्त करने की मांग की थी। Read More: मध्यप्रदेश में मंजूरी के 4 दिन बाद तबादला नीति जारी: आधी रात के बाद आदेश; जिनकी परफॉर्मेंस खराब, उनको पहले बदलेंगे पिछली सुनवाइयों का विवरण Rahul Gandhi in citizenship dispute मामले की सुनवाई कई चरणों में हुई। 24 मार्च को कोर्ट ने राज्य सरकार को चार सप्ताह में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा था, लेकिन सरकार ने आठ सप्ताह का समय मांगा। 19 दिसंबर 2024 को जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला की बेंच ने केंद्र सरकार को यूके सरकार से संपर्क कर स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया था। इसके बाद गृह मंत्रालय ने कोर्ट को सूचित किया कि उन्होंने ब्रिटिश सरकार को पत्र लिखा है और जांच जारी है। राहुल गांधी की ओर से चुप्पी Rahul Gandhi in citizenship dispute इस पूरे मामले के दौरान कोर्ट में राहुल गांधी की ओर से कोई अधिवक्ता उपस्थित नहीं हुआ, जिससे कई सवाल खड़े हुए। हालांकि, कांग्रेस पार्टी या राहुल गांधी की ओर से सार्वजनिक रूप से इस याचिका पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। इससे मामले की संवेदनशीलता और राजनीतिक प्रकृति और भी गहरी हो जाती है। क्या आगे की कार्रवाई होगी? हालांकि हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी है, लेकिन यह मामला यहीं खत्म नहीं हुआ है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि याचिकाकर्ता अन्य वैधानिक विकल्पों के लिए स्वतंत्र हैं। इसका अर्थ यह है कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट या किसी अन्य मंच पर चुनौती के रूप में फिर से उठाया जा सकता है। राहुल गांधी की नागरिकता को लेकर उठे सवाल और कोर्ट की टिप्पणी दोनों ही भारतीय राजनीति में संवेदनशील और अहम हैं। हाईकोर्ट ने फिलहाल याचिका खारिज कर एक स्पष्ट संकेत दिया है कि जब तक केंद्र खुद ठोस जानकारी नहीं देता, तब तक न्यायपालिका इस पर कोई अंतिम निर्णय नहीं दे सकती। अब देखना होगा कि क्या याचिकाकर्ता इस मामले को सुप्रीम कोर्ट लेकर जाते हैं या केंद्र सरकार इस पर कोई नई स्थिति स्पष्ट करती है।

बीजेपी के जाति जनगणना कराने का ऐलान, जिसका लक्ष्य सामाजिक समीकरणों को साधना और चुनावी रणनीति को मजबूत करना

नई दिल्ली  बीजेपी ने एक बार फिर अपनी राजनीतिक चतुराई का परिचय देते हुए राष्ट्रीय स्तर पर जाति जनगणना करवाने की घोषणा की है। यह फैसला सिर्फ आंकड़ें जुटाने के लिए नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से सामाजिक इंजीनियरिंग, चुनावी रणनीति और वैचारिक संतुलन का भी समीकरण बिठाने का प्रयास किया जा रहा है। यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है, जब देश की राजनीति में ‘मंडल-कमंडल’ की बहस को फिर से हवा देने की कोशिश हो रही थी। ऐसे में यह समझना चुनावी और राजनीतिक रणनीति को देखते हुए बहुत जरूरी है कि नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली केंद्र की एनडीए सरकार ने यह कदम अचानक किन 5 प्रमुख वजहों से लिया है और कैसे यह उसके लिए एक ‘गेमचेंजर’ साबित हो सकता है। 2024 के लोकसभा चुनाव का नतीजा 2014 में नरेंद्र मोदी के पहले लोकसभा चुनाव से लेकर 2019 तक उनके कार्यकाल के दूसरे चुनाव तक बीजेपी ने ओबीसी (OBC),अति-पिछड़ी जातियों (EBC) और अनूसूचित जातियों (SC) को जोड़कर एक मजबूत सामाजिक समीकरण खड़ा किया था। लेकिन, 2024 के लोकसभा चुनावों में भाजपा का यह वोट बैंक बिखर गया और इन वर्गों का एक बड़ा हिस्सा कांग्रेस और INDIA ब्लॉक की ओर झुक गया, जिससे बीजेपी के 400 पार वाला सपना चकनाचूर हो गया। बीजेपी और एनडीए को इसके चलते खासकर यूपी,राजस्थान, महाराष्ट्र और हरियाणा जैसे बड़े राज्यों में तगड़ा झटका लगा। ऐसे में जाति जनगणना वाला दांव इन जातियों की उन उपेक्षित भावनाओं पर मरहम लगाने का प्रयास है। ओबीसी को सीधा संदेश देने का प्रयास बीजेपी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ओबीसी होने वाले तथ्य को अबतक विपक्ष के पिछड़े वाले दांव को कुंद करने के लिए इस्तेमाल करती रही है। जब बिहार में जातिगत सर्वे करवाया गया था, तब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनकी जेडीयू एनडीए में नहीं थे। अलबत्ता तब भी बीजेपी ने आधिकारिक रूप से उस जातिगत सर्वे का समर्थन किया था। अब मोदी सरकार देशभर में जाति जनगणना का दांव चलकर प्रधानमंत्री और बिहार के सीएम नीतीश के पिछड़ा पृष्टभूमि को और मजबूती से भुनाने की कोशिश कर रही है। वैसे भी मोदी सरकार राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देने के अपने फैसले का हमेशा जिक्र करती रही है। अब इस फैसले से उसका काम और आसान हो सकता है कि असल में पीएम मोदी खुद पिछड़े समाज से तो हैं ही, वह ओबीसी समाज के मसीहा के तौर पर भी काम कर रहे हैं। राज्यों की राजनीति पर भारी पड़ने की कोशिश बीजेपी को मालूम पड़ चुका था कि अगर केंद्र जाति जनगणना को लेकर सुस्त रहा, तो विपक्ष शासित राज्य सरकारें इसे अपने-अपने ढंग से लागू करके सामाजिक समीकरणों को अपने पक्ष में मोड़ने की कोशिश सकती हैं। तेलंगाना पहले ही इस दिशा में सक्रिय हो चुका है। कर्नाटक में कांग्रेस सरकार भी अपने दांव लगाने की कोशिशों में जुटी है और झारखंड में भी ‘सरना कोड’ की मांग जोर पकड़ रही है। ऐसे में केंद्र की ओर से इसे राष्ट्रीय स्तर पर करवाने का एलान करके, बीजेपी सरकार ने विपक्ष की राजनीति पर बढ़त बनाने वाली चाल चल दी है। नया प्रयोग करने की कोशिश 2014 में जब से मोदी सरकार आई है, उसकी अनेकों कल्याणकारी योजनाएं, सामाजिक ताने-बाने को भी मजबूत करने के लिए बनाई गई हैं। ईडब्ल्यूएस कोटा और विश्वकर्मा योजना इसका सबसे बेहतरी उदाहरण है। इसी तरह से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजातियों के लिए भी अनेकों योजनाएं चल रही हैं, जिनके माध्यम से इन वर्गों के उत्थान का भी काम हो रहा है, वहीं इसके माध्यम से सरकार इन वर्गों के बीच पहुंच भी पहुंची है। लेकिन, जाति जनगणना के माध्यम से पार्टी जातियों में बंटे भारतीय समाज को सीधे तौर पर साधने की कोशिश कर रही है, जिसे अब सहेज कर रखना उसके लिए बहुत बड़ी चुनौती बन चुकी थी। क्योंकि, उज्जवला योजना, जनधन योजना जैसी अनेकों ऐसी योजनाएं हैं, जिनके माध्यम से भाजपा सरकार ने खुद को समाज के विशेष वर्गों के नजदीक पहुंचाया है, लेकिन अब उसमें भी जातियों के आधार पर दिक्कतें बढ़ने लगी थीं, जिसके लिए नया कार्ड चलना जरूरी लग रहा था। हिंदुत्व की सियासत पर जाति की चाशनी बीजेपी की राजनीति लंबे समय से हिंदुत्व के इर्द-गिर्द घूमती रही है। लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव परिणामों ने यह स्पष्ट कर दिया कि सिर्फ धार्मिक ध्रुवीकरण अब पार्टी के लिए पर्याप्त नहीं है। इसलिए अब पार्टी हिंदुत्व पर भी सामाजिक न्याय और पिछड़ों की चुनावी चाशनी लगाने की कोशिश कर रही है। इसका मकसद एक ऐसे व्यापक सामाजिक समीकरण को तैयार करना है, जिसमें धार्मिक और जातिगत दोनों स्तरों पर समर्थन हासिल हो सके। हालांकि, बीजेपी की यह सोच समझी रणनीति चुनावी फ्रंट पर कितना काम करती है, यह इस समय का सबसे बड़ा सवाल है।

सरकार बेच रही गली गली शराब, अवैध दुकानों की भरमार :पंकज उपाध्याय

The government is selling liquor in every street, there are many illegal shops: Pankaj Upadhyay आज जौरा विधायक पंकज उपाध्याय ने सरकार एवं मुरैना प्रशासन पर बड़ा हमला करते हुए कहा कि जब से शासन ने नए ठेके दिए हैं तब से शराब की बिक्री लगभग चौगुनी हो गई है प्रत्येक गांव के हर नुक्कड़ चौराहे पर एक शराब का ठेला रख दिया गया है गली-गली में शराब बिक रही है जौरा क्षेत्र के कई स्वयंसेवी संस्थाओं स्कूल के बच्चों युवाओं एवं माता बहनों ने बार-बार आकर कहा है कि हमारी गली मोहल्ले में शराब की बिक्री बहुत ज्यादा  बढ़ गई है अवैध दुकानों की अंबार आ गया है ग्राम परसोटा में एक धार्मिक आयोजन में ग्राम वासियों ने पंकज उपाध्याय से शिकायत की की जैन तीर्थ टिकटोली दमदार के मुख्य मार्ग पर शराब ठेकेदारों ने शराब की दुकान खोल रखी है जिससे जैन श्रद्धालु आसपास के महिलाएं बच्चे बहुत परेशान होते हैं शराबी बीच रोड पर शराब पीते हैं शराब की दुकान के सामने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र आंगनबाड़ी पंचायत भवन जैसी संस्थाएं हैं तब भी शासन प्रशासन की नजर इस गोरख धंधे पर नहीं पड़ रही विधायक ने चेतावनी देते हुए प्रशासन से कहा कि अगर 8 दिन में अवैध शराब की दुकान एवं धार्मिक स्थलों बस स्टैंड और मुख्य मार्गो से शराब की दुकान नहीं हटाई गई तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा जिसकी समस्त जवाबदारी शासन प्रशासन की रहेगी

इंदौर में एक कांग्रेस पार्षद प्रदर्शन करके विवादों में, बीजेपी विधायक ने दर्ज कराई एफआईआर

इंदौर  एमपी के इंदौर में एक कांग्रेस पार्षद प्रदर्शन करके विवादों में आ गए हैं। उनके प्रदर्शन के दौरान ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगे। इस पर भारतीय जनता पार्टी ने सख्त आपत्ति जताई है। बीजेपी विधायक ने इस मामले में एफआईआर भी दर्ज कराई है। पार्षद अनवर कादरी ने पहलगाम हमले के विरोध में यह प्रदर्शन किया था। प्रदर्शन में आतंकवाद का पुतला जलाया गया और नारे लगाए गए। इसी दौरान ‘पाक जिंदाबाद’ किया गया। दरअसल, कांग्रेस पार्षद अनवर कादरी द्वारा पहलगाम आतंकी हमले के विरोध में बड़वाली चौकी पर प्रदर्शन किया जा रहा था। इसमें कांग्रेसी कार्यकर्ता और उनके समर्थक भारी संख्या में शामिल हुए थे। प्रदर्शन के दौरान आतंकवाद का पुतला जलाया गया। आरोप है कि इसी दौरान ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे भी लगाए गए। प्रदर्शन में कई महिलाएं भी मौजूद थीं। बीजेपी विधायक ने दर्ज कराई एफआईआर विवाद तब और बढ़ गया जब इसे लेकर सोशल मीडिया पर कुछ वीडियोज वायरल हुए। इस पर एक्शन लेते हुए इंदौर के तीन नंबर विधानसभा क्षेत्र के बीजेपी विधायक गोलू शुक्ला सदर बाजार थाने पहुंचे। उन्होंने इस मामले में एफआईआर दर्ज कराई। उन्होंने पाक के पक्ष में नारे लगाने को देशद्रोह बताया। कांग्रेस में वरिष्ठ पार्षद है कादरी वहीं पार्षद अनवर कादरी का कहना है कि उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ प्रदर्शन किया था। अनवर कादरी कांग्रेस के वरिष्ठ पार्षद हैं। इस घटना से इंदौर में राजनीतिक माहौल गरमा गया है। बीजेपी इस मामले को लेकर कांग्रेस को घेरती हुई नजर आ रही है। वहीं कांग्रेस अपने बचाव में सफाई दे रही है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुने जाने का फैसला टलने का फायदा एमपी को भी

भोपाल भारतीय जनता पार्टी अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष के चयन में काफी वक्त लगा रही है। इसके साथ ही कई राज्यों के अध्यक्षों के निर्वाचन भी अटक गए हैं। इस बीच देश में जो दुखद घटना हुई है। ऐसे हालातों में पार्टी ने चुनाव टालने का फैसला लिया है। इस खबर के सामने आने के बाद मध्यप्रदेश की राजनीतिक सरगर्मी को और बढ़ा दिया है। बता दें कि बीजेपी ने फिलहाल अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव को टाल दिया है। पहलगाम में हुए हमले के बाद देश में मौजूदा हालात को देखते हुए भाजपा ने यह निर्णय लिया है। अब साफ हो गया है कि अध्यक्ष जगत प्रकाश (जेपी) नड्डा फिलहाल अपने पद पर बने रहेंगे। पार्टी के इस निर्णय का असर एमपी बीजेपी पर भी पड़ेगा। पद पर बने रहेंगे वीडी शर्मा अध्यक्ष पद का चुनाव टलने के फैसला टलने के बाद अब राजनीतिक विश्लेषक यह कयास लगा रहे हैं कि एमपी बीजेपी के अध्यक्ष वीडी शर्मा भी अपने पद पर बने रहेंगे। जब तक राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव नहीं हो जाता, तब तक राज्यों को लेकर निर्णय होना आसान नहीं है। इस फैसले के बाद बीजेपी के नए प्रदेश अध्यक्ष का इंतजार और लंबा हो जाएगा। मौजूदा हालात में लिया फैसला गौरतलब है कि जेपी नड्डा वर्ष 2019 से अध्यक्ष पद पर काबिज हैं और उनका कार्यकाल पहले भी बढ़ाया गया था। भाजपा का मानना है कि इस समय संगठन की स्थिरता और सरकार की नीति को मजबूती से आगे बढ़ाना जरूरी है। ऐसे में पार्टी के आंतरिक चुनाव को फिलहाल प्राथमिकता नहीं दी जा रही है। जेपी नड्डा के चुनाव टलने का फायदा एमपी बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा को भी मिल सकता है। शर्मा के पास 2019 से है कमान वीडी भी वर्ष 2019 से प्रदेश अध्यक्ष हैं। अब संभव है कि चुनाव टलने के बाद मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष एमपी बीजेपी के मुखिया बने रहेंगे। हालांकि अब चुनाव टलने के बाद नए नेतृत्व को लेकर सस्पेंस और गहरा हो गया है। भारतीय जनता पार्टी के इतिहास को देखें तो अब तक सभी अध्यक्ष आपसी सहमति से ही चुने गए हैं। फिलहाल बीजेपी ने नए अध्यक्ष की घोषणा को लेकर कोई ऑफिशियल बयान नहीं दिया है।  

दो साल बेमिसाल-आशीष ऊषा अग्रवाल

दो साल बेमिसाल-आशीष ऊषा अग्रवाल सत्येंद्र जैन,स्तंभकार भाजपा के प्रदेश नेतृत्व द्वारा दो साल पूर्व अप्रैल 2023 में प्रदेश मीडिया प्रभारी के पद पर आशीष ऊषा अग्रवाल को नियुक्त किया गया ।इन दो सालों के कार्यकाल में आशीष अग्रवाल ने अपना सर्वस्व अर्पण करते हुए पार्टी के मीडिया विभाग का कुशल नेतृत्व किया है,संचालन किया है।मीडिया विभाग को समुन्नत किया है।भाजपा की प्रवक्ता टीम,मीडिया प्रबंधन टीम की धार को तेज किया है।विधानसभा चुनाव,लोकसभा चुनाव और विधानसभा उपचुनाव में भी मध्य प्रदेश भाजपा ने एतिहासिक स्वर्णिम प्रदर्शन किया है।भाजपा मीडिया  विभाग ने भी इन महानतम उपलब्धियों को अर्जित करने हेतु अविस्मरणीय योगदान दिया है।देश के सभी राजनीतिक दलों में भाजपा संगठन की ही विशेषता है कि कार्यकर्ता की आरती,भारतीय जनता पार्टी ही उतारती है।आशीष अग्रवाल इसका प्रत्यक्ष उदाहरण हैं।मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव,प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा, प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा,प्रदेश संगठन टीम ने इन दो सालों में आशीष अग्रवाल को कसौटी पर कसा है।परखा है। उनकी संगठन कुशलता को देखकर प्रदेश नेतृत्व ने एक देश एक चुनाव की प्रदेश स्तरीय टोली में भी सम्मिलित किया है।उन्होंने संगठन पर्व, सदस्यता अभियान में देवास जिले के बूथ कमेटियों, मंडलों के अध्यक्ष का चुनाव, जिला अध्यक्ष पद के  चुनाव का उत्तरदायित्व, कुशलतापूर्वक संपन्न किया।यह उनकी कुशल संगठन क्षमता का परिचायक है। लोकसभा चुनाव में भाजपा ने 29 की 29 सीट्स पर विजय प्राप्त कर स्वर्णिम कीर्तिमान स्थापित किया है।विधानसभा चुनाव 2023 में भारतीय जनता पार्टी ने लगातार पांचवीं बार मध्य प्रदेश में 163 सीट जीत कर सरकार बनाई है।एंटी इनकंबेंसी टर्मिनोलॉजी को प्रो इनकंबेंसी में रूपांतरण किया है।अमरवाड़ा,बुधनी विधानसभा उपचुनाव में भी पार्टी को विजय श्री प्राप्त हुई है। भाजपा की इस अनवरत महाविजय की यात्रा में प्रदेश मीडिया विभाग का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। राजनीतिक दल के लिए मीडिया विभाग माउथ पीस होता हैं। मुकुट होता है ।भाजपा मीडिया विभाग के सदस्य पार्टी की रीति-नीति, कार्यक्रमों योजनाओं,भाजपा शासन की उपलब्धियां को मीडिया के माध्यम से जनता के समक्ष विभिन्न चैनल्स पर होने वाली परिचर्चा में रखते हैं।मीडिया का समाचार विभाग प्रतिदिन अनेक प्रेस नोट,फोटो, वीडियो तैयार कर,समय पूर्व मीडिया संस्थानों को प्रकाशन हेतु प्रेषित करता है। मीडिया विभाग के प्रमुख को सतत रूप से पार्टी की वैचारिक शक्ति का परिशोधन,संशोधन,संवर्धन एवं प्रदेश के सभी सदस्यों को समयबद्ध अथवा समय पूर्व वितरण नितप्रति करना रहता है।मीडिया संस्थानों से सतत सम्पर्क रखना एवं पत्रकारिता जगत से संबध्द स्वामियों,संपादकों,संवाददाताओं,कैमरामैन के सुख-दुख में सम्मिलित होना भी आवश्यक रहता है। यह सभी अत्यंत ही जटिल कार्य को सम्पन्न करने हेतु भागीरथी परिश्रम करना होता है।यह अखण्ड-प्रचण्ड पुरुषार्थ भूख-प्यास,निद्रा,दिन,रात आदि से परे होता है।इस दुष्कर कार्य को संचालित करने का उत्तरदायित्व उनको दिया गया।मध्य प्रदेश के इतिहास में आशीष अग्रवाल ने सबसे कम आयु में मीडिया प्रभारी के रूप में कीर्तिमान स्थापित किया है।वह अपने नाम के साथ अपनी माँ का नाम ऊषा जोड़कर नवाचार करते हुए समाज में प्रेरणादायक संदेश दे रहे हैं।आशीष अग्रवाल प्रबंधन में स्नातकोत्तर हैं।दूरस्थ शिक्षा एवं सामाजिक कार्य में भी स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त की है। जन आशीर्वाद यात्रा का कुशल मीडिया प्रबंधन भाजपा की 11000 किलोमीटर की जन आशीर्वाद यात्रा में 24 दिन में लगभग 700 रथ सभाओं का आयोजन हुआ।200 से अधिक बड़ी सभाएँ हुईं।215 से अधिक विधानसभा क्षेत्रों में यात्रा पहुँची।इस बृहद यात्रा को  आशीष ऊषा अग्रवाल के कुशल  नेतृत्व में मीडिया विभाग द्वारा कुशलता पूर्वक,निर्विघ्न,निर्विवाद संपन्न किया। उत्कृष्ट चुनाव प्रबंधन भाजपा मीडिया विभाग में आशीष अग्रवाल एक पालक के रूप में सुयोग्य मीडिया प्रभारी सिद्ध हुए हैं।लोकसभा एवं विधानसभा चुनाव हेतु मीडिया सेंटर संचालित किया गया।आशीष अग्रवाल के कुशल मार्गदर्शन, प्रबंधन में प्रदेश कार्यालय, जिला कार्यालयों से लगभग 2000 प्रेस वार्ताएं सम्पन्न हुईं हैं। आशीष अग्रवाल की टीम भावना नेतृत्व क्षमता प्रशंसनीय है। सभी प्रवक्ता गणों से उनकी सर्वोच्च क्षमताओं को भाजपा के हित में उपयोग करने की कला भी उनके अंदर कूट-कूट कर समाहित है।मीडिया विभाग के लिए समय-समय पर विभिन्न विषयों पर आवश्यक जानकारी और तथ्यों को उपलब्ध कराने हेतु भारत के विभिन्न राष्ट्रीय स्तर के नेताओं,मंत्रियों से संपर्क स्थापित कर मीडिया टीम को त्वरित रूप से उपलब्ध कराने का कार्य भी उनके द्वारा कुशलता पूर्वक किया जाता है। आशीष ऊषा अग्रवाल संगठन की कसौटी पर खरे उतरे हैं।संगठन के निखरते युवा रत्न हैं।उनको सफलतम दो वर्ष पूर्ण करने हेतु बधाईयाँ।यही कामना है कि वह निकट भविष्य में कीर्तिमान रचते जाएं। इति श्री।

भाजपा सांसद संतोष पाण्डेय ने पूर्व सीएम बघेल समेत कांग्रेसी नेताओं के बयान का पलटवार किया

रायपुर  जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले को लेकर देश में सियासत गरमाई हुई है. एक तरफ जहां कांग्रेस सुरक्षा में चूंक और आतंकियों की पहचान को लेकर लगातार केंद्र सरकार को घेरने में लगी है. वहीं भाजपा नेता भी कांग्रेस पर जमकर पलटवार कर रहे हैं. आज भाजपा सांसद संतोष पाण्डेय ने पूर्व सीएम बघेल समेत कांग्रेसी नेताओं के बयान का पलटवार किया है. भाजपा सांसद संतोष पाण्डेय ने कहा कि कांग्रेस नेता बेफिजूल का बयान दे रहे हैं. खरगे, सिद्धरमैया, वाड्रा, भूपेश का बयान देख लीजिए, कांग्रेस नेताओं के बयान को ही पाकिस्तान दोहराता है. भूपेश बघेल के बयान को उठाकर पाकिस्तानी रक्षा मंत्री बयान देते हैं. पाकिस्तानी मंत्री ने छत्तीसगढ़ में आंतरिक आतंकवाद की बात कही है. भूपेश बघेल झीरम और पहलगाम में समानता बताते हैं. आखिर कांग्रेस के नेता बताना क्या चाह रहे हैं ? बता दें, जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए दर्दनाक आतंकी हमले को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने हाल ही में प्रेस वार्ता में कहा था कि इस हमले ने न सिर्फ 26 परिवारों को उजाड़ दिया, बल्कि पूरे देश को शोक में डुबो दिया है. बघेल ने इस आतंकी घटना को ‘झीरम घाटी की घटना’ से जोड़ते हुए केंद्र सरकार की नाकामी पर सवाल उठाए. भूपेश बघेल ने कहा कि झीरम में भी नाम पूछ-पूछ कर मारा गया था. वहां भी 33 लोग मारे गए थे और पहलगाम में भी 26 लोगों की जान गई. पहलगाम में भी पुलिस बल और अर्धसैनिक बल मदद के लिए सामने नहीं आया. इस घटना ने झीरम घाटी की घटना की याद ताज़ा कर दी. हमारे सभी नेताओं ने इस घटना की कड़ी निंदा की, शोक व्यक्त किया और केंद्र सरकार को समर्थन देने की बात कही. लेकिन भाजपा की सोशल मीडिया टीम ने सिर्फ ‘धर्म पूछ-पूछ कर मारा’ को ही मुख्य मुद्दा बना दिया. पूर्व सीएम ने सवाल उठाते हुए कहा कि वहां सहायता क्यों नहीं पहुंची? इसका जिम्मेदार कौन है? इंटेलिजेंस फेलियर का जिम्मेदार कौन है?

मध्य प्रदेश में कई बड़े नेताओं के बीच सहमति नहीं बन पाने के कारण अध्यक्ष का मामला अटका हुआ

भोपाल मध्य प्रदेश में BJP के नए अध्यक्ष का नाम अभी तक तय नहीं हो पाया है। कई बड़े नेताओं के बीच सहमति नहीं बन पाने के कारण यह मामला अटका हुआ है। जनवरी में चुनाव अधिकारी बनाए गए केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का दौरा भी नहीं हो पाया है। माना जा रहा है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष के नाम के साथ ही प्रदेश अध्यक्ष का नाम भी घोषित किया जाएगा। बढ़ता जा रहा इंतजार दिग्गजों के बीच खींचतान और रायशुमारी न हो पाने के कारण यह मामला उलझा हुआ है। मुख्यमंत्री मोहन यादव की सहमति भी इस मामले में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जिलाध्यक्षों के नाम घोषित होने के बाद उम्मीद थी कि प्रदेश को नया अध्यक्ष मिल जाएगा। लेकिन, यह इंतजार बढ़ता ही जा रहा है। जाति, राजनीति और क्षेत्र जैसे कई समीकरणों पर विचार किया जा रहा है। जो नाम सामने आए थे, उन पर भी अब चर्चा नहीं हो रही है। चुनाव अधिकारी बने पर दौरा नहीं कर पाए केंद्रीय मंत्री जनवरी में केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को चुनाव अधिकारी बनाया गया था लेकिन, उनका प्रदेश दौरा नहीं हो पाया। उन्होंने किसी नाम पर सहमति बनाने की कोशिश की हो या रायशुमारी की हो, ऐसा कुछ भी सामने नहीं आया है। पार्टी के नेताओं का मानना है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष के नाम पर सहमति बनने के बाद मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश जैसे कई राज्यों के अध्यक्षों के नाम घोषित किए जाएंगे लेकिन, अभी तक राष्ट्रीय अध्यक्ष का नाम भी तय नहीं हो पाया है। पहली बार हुआ ऐसा यह पहली बार है जब BJP के संगठन चुनाव में बूथ अध्यक्ष, मंडल अध्यक्ष और जिलाध्यक्षों के चुनाव के चार महीने बाद भी प्रदेश अध्यक्ष का पद खाली है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में बड़े नेता कम हैं। इसलिए वहां हाईकमान ने फैसला कर लिया। लेकिन, मध्य प्रदेश में स्थिति अलग है। यहां कई बड़े नेता हैं जिनकी राय लेना जरूरी है। एमपी में बड़े नेताओं से सलाह-मशवरा जरूरी मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान, नरेंद्र सिंह तोमर, जयभान सिंह पवैया, कैलाश विजयवर्गीय और राकेश सिंह जैसे नेताओं की राय को अनदेखा नहीं किया जा सकता है। देरी की एक वजह इन बड़े नेताओं से रायशुमारी न होना भी है। सत्ता और संगठन में बदलाव के बाद पुराने नेता अपनी जगह बचाने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं, नए नेता अपनी जमीन मजबूत करने में लगे हैं। सीएम और केंद्रीय मंत्री अमित शाह के बीच बात पक्की मुख्यमंत्री मोहन यादव की सहमति भी प्रदेश अध्यक्ष के नाम पर बहुत मायने रखती है। पार्टी नेताओं के अनुसार, मुख्यमंत्री यादव और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बीच भी प्रदेश अध्यक्ष को लेकर बातचीत हो चुकी है। पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद यह अनुमान लगाया जा रहा है कि प्रदेश अध्यक्ष या राष्ट्रीय अध्यक्ष का फैसला कुछ समय के लिए टाला जा सकता है।  

एमपी में 2 नेताओं का अश्लील व्हाट्सएप चैट लीक,भाजपा नेता पार्टी से निष्कासित

सतना  सतना जिले में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पूर्व जिलाध्यक्ष सतीश शर्मा को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है। महिला के साथ अश्लील चैट, छेड़खानी और जान से मारने की धमकी के गंभीर आरोप लगने के बाद हाईकमान ने सख्त कार्रवाई की है। यह कार्रवाई पार्टी के उच्च नेतृत्व के आदेश पर की गई है। शर्मा पर लगे आरोपों को लेकर पार्टी की छवि खराब हो रही थी, जिसको देखते हुए हाईकमान ने तत्काल सख्त कदम उठाया। पार्टी ने स्पष्ट कर दिया है कि भाजपा में इस तरह के आचरण के लिए कोई स्थान नहीं है। बताया जा रहा है कि एक महिला ने सतीश शर्मा के खिलाफ गंभीर शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद मामला पार्टी के शीर्ष नेताओं तक पहुंचा। जांच के बाद हाईकमान ने निष्कासन का निर्णय लिया।  दरअसल, शहर कोलगवां थाने में शिकायत की गई थी कि भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष सतीश शर्मा ने चाय पीने के बहाने घर पर आए थे और गलत काम की कोशिश करने लगे। महिला ने पुलिस को वाट्सएप के कुछ स्क्रीन शॉट्स भी सौंपे हैं। कोलगवां थाना प्रभारी सुदीप सोनी ने बताया कि महिला ने आवेदन दिया है, मामले की जांच की जा रही है। इधर, पूर्व जिलाध्यक्ष ने आरोपों को निराधार करार देते हुए कहा था कि महिला ब्लैकमेल कर रही है। दो साल पहले पार्टी कार्यालय में पत्रकारवार्ता में मिली और सेल्फी खींच ली थी। इसके बाद उसने ऑपरेशन की बात कहकर 25 हजार उधार मांगे थे। मैंने दोस्त से दिलवा दिए। कई माह बाद मांगे तो फंसाने की धमकी देने लगी। भाजपा हाईकमान ने किया निष्कासित भाजपा प्रदेश महामंत्री भगवान दास सबनानी ने पत्र जारी करते हुए जानकारी दी कि सतना जिले के पूर्व जिलाध्यक्ष सतीश शर्मा द्वारा अशोभनीय कृत्य किया गया है। जिससे पार्टी की छवि धूमिल हुई है। यह कृत्य असहनीय है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा द्वारा सतीश शर्मा को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से तत्काल प्रभाव से निष्कासित किया जाता है।

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