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मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री बने डॉ. मोहन यादव, राजेंद्र शुक्ला और जगदीश देवड़ा बने उप मुख्यमंत्री।

संतोष सिंह तोमर भोपाल। मध्य प्रदेश में आठ दिन से मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रहा सस्पेंस खत्म हो गया है। सभी अनुमानों को धता बताते हुए डॉ. मोहन यादव मध्य प्रदेश के नए सीएम चुने गए हैं। राजधानी भोपाल के भारतीय जनता पार्टी कार्यालय में तीनों पर्यवेक्षकों की मौजूदगी में हुई भाजपा के विधायक दल की पहली बैठक में डॉ. मोहन यादव के नाम का ऐलान किया गया। श्री यादव उज्जैन दक्षिण सीट से विधायक हैं। इसके साथ ही मध्य प्रदेश में दो उप मुख्यमंत्रियों के नाम का भी ऐलान किया गया है। गौरतलब है कि मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनाव 2023 में भाजपा को 163 सीटों के साथ प्रचंड बहुमत मिला है। कांग्रेस को 66 सीटें और 1 सीट भारतीय आदिवासी पार्टी को मिली है। विधायक दल की बैठक में मोहन यादव के नाम का ऐलान मध्य प्रदेश में आज विधायक दल की बैठक में दल का नेता चुना गया। इस बैठक के बाद मध्य प्रदेश के अगले मुख्यमंत्री पद को लेकर सस्पेंस खत्म हो गया है। इस बैठक में नए मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा की गई। मध्य प्रदेश का नया मुख्यमंत्री उज्जैन दक्षिण से निर्वाचित विधायक डॉ. मोहन यादव को बनाया गया है। यहां गौरतलब है कि बीजेपी ने इस बार का विधानसभा चुनाव अपने मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के बिना ही लड़ा था। जिसके कारण मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री पद को लेकर तमामबात अटकलें लगाई जा रही हैं कि अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। मुख्यमंत्री पद की रेस में थे कई नाम, 9 दिन तक चला मंथन एमपी सीएम पद की रेस में कई दिग्गज नाम शामिल थे। जिसमें प्रह्लाद पटेल, नरेंद्र सिंह तोमर, वीडी शर्मा, ज्योतिरादित्य सिंधिया, कैलाश विजयवर्गीय जैसे कई नाम शामिल थे। जिसमें केंद्रिय मंत्रियों ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। बीजेपी ने सबको चौंकाते हुए मोहन यादव को नया मुख्यमंत्री बनाया गया है। उज्जैन के दक्षिण सीट से मोहन यादव ने जीत हासिल की है। बता दें कि मोहन यादव शिवराज सरकार में उच्च शिक्षा मंत्री रह चुके हैं। ये लगातार तीसरी बार चुनाव जीतकर उज्जैन दक्षिण सीट पर कब्जा किया है। बता दें कि बीजेपी ने 9 दिन मंथन करने के बाद सबको चौंका दिया है। बीजेपी के भोपाल दफ्तर में नवनिर्वाचित विधायकों ने नए मुख्यमंत्री के नाम पर मोहर लगा दी। उत्तर प्रदेश की तर्ज पर मध्य प्रदेश को भी मिले दो उप मुख्यमंत्री राज्य के नए मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान होने के साथ ही मध्य प्रदेश सरकार का काम काज संभालने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार की तर्ज पर दो उप मुख्यमंत्रियों के नाम की भी घोषणा की गई है। घोषणा के अनुसार विधायक राजेंद्र शुक्ला और जगदीश देवड़ा को मध्य प्रदेश का उपमुख्यमंत्री बनाया गया है। जगदीश देवड़ा मंदसौर जिले की मल्हारगढ़ सीट से विधायक हैं। वह एससी वर्ग से आते हैं वहीं ब्राह्मण वर्ग से आने वाले राजेन्द्र शुक्ला रीवा सीट से विधायक हैं और विंध्य क्षेत्र का बड़ा ब्राह्मण चेहरा होकर कद्दावर नेता माने जाते हैं। 2013 में पहली बार बने विधायक, शिवराज सरकार में रहे उच्च शिक्षा मंत्री 58 साल के डॉक्टर मोहन यादव पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान की सरकार में उच्च शिक्षा मंत्री रह चुके हैं। साल 2013 में वह पहली बार उज्जैन दक्षिण सीट से विधायक चुने गए थे। इसके बाद साल 2018 में वह एक भार फिर दक्षिण उज्जैन की सीट से विधायक चुने गए थे। साल 2023 मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में मोहन यादव ने उज्जैन दक्षिण विधानसभा सीट से कांग्रेस के चेतन प्रेमनारायण यादव को 12941 वोटों से हराकरलगातार तीसरी बार विजयश्री प्राप्त की है। विधायक दल की बैठक में हरियाणा के सीएम और मध्य प्रदेश के पर्यवेक्षक मनोहर लाल खट्टर ने प्रदेश के नए मुख्यमंत्री के रूप में डॉ. मोहन यादव के नाम का ऐलान किया जबकि श्री यादव के नाम का प्रस्ताव वर्तमान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रखा था।

जानिए मुख्यमंत्री मोहन यादव के बारे में.

Learn about Chief Minister Mohan Yadav. भोपाल! मोहन यादव उज्जैन दक्षिण से विधायक हैं। वे एमपी के सीएम होंगे। मध्यप्रदेश के अगले मुख्यमंत्री मोहन यादव होंगे। मोहन यादव उज्जैन दक्षिण से विधायक हैं। भोपाल स्थित ‌BJP के प्रदेश कार्यालय में पार्टी के विधायक दल की बैठक में उनके नाम पर मुहर लगी है। मोहन यादव ओबीसी वर्ग से आते हैं। बैठक में पर्यवेक्षक मनोहर लाल खट्‌टर (CM हरियाणा), डॉ. के. लक्ष्मण (राष्ट्रीय अध्यक्ष, BJP OBC मोर्चा) और आशा लकड़ा (राष्ट्रीय सचिव भाजपा) मौजूद रहे। विधायक दल की बैठक से पहले भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की बैठक हुई। मध्यप्रदेश के अगले मुख्यमंत्री मोहन यादव होंगे उज्जैन दक्षिण सीट से विधायक हैं मोहन यादव उम्र – 58 वर्ष, शैक्षणिक योग्यता – बी.एस.सी., एल-एल.बी., एम.ए.(राज.विज्ञान), एम.बी.ए., पी.एच.डी. व्यवसाय – अभिभाषक, व्‍यापार, कृषिस्थायी पता – 180, रविन्‍द्रनाथ टैगोर मार्ग, अब्‍दालपुरा, जिला-उज्‍जैन राजनीतिक कॅरियर – सन 1982 में माधव विज्ञान महाविद्यालय छात्र संघ के सह-सचिव, 1984 में अध्‍यक्ष

मोहन यादव होंगे मध्‍य प्रदेश के नए मुख्‍यमंत्री, भाजपा विधायक दल का निर्णय.

Mohan Yadav will be the new Chief Minister of Madhya Pradesh, as decided by the BJP legislative party. राजधानी में भाजपा विधायक दल की बैठक में नया सीएम चुना गया। मप्र भाजपा विधायक दल की बैठक से पहले हलचल रही। In the capital, a new Chief Minister was elected during the BJP legislative party meeting. There was anticipation and excitement before the meeting of the Madhya Pradesh BJP legislative party. भोपाल। मध्‍य प्रदेश विधानसभा चुनाव 2023 में भाजपा की शानदार जीत के बाद पार्टी ने मुख्‍यमंत्री भी चुन लि‍या है। इसके लिए आज राजधानी में भाजपा विधायक दल की बैठक बुलाई गई थी। मप्र भाजपा विधायक दल की बैठक से पहले खासी हलचल रही। मोहन यादव मप्र के मुख्‍यमंत्री होंगे।इससे पहले विधायक प्रहलाद पटेल के बंगले पर उनके समर्थकों का जमावड़ा होने की सूचना है। खबर मिली है कि पटेल के बंंगले पर पुलिस सुरक्षा भी बढ़ा दी गई थी। श‍िवराज के समर्थकों ने भी खूब नारेबाजी की।

अशोक स‍िंह बने चेयरमैन ,प्रदेश कांग्रेस की अनुशासन सम‍ित‍ि का पुनर्गठन.

Ashok Singh has been appointed as the Chairman, overseeing the restructuring of the Pradesh Congress Discipline Committee. आठ सदस्‍यीय सम‍ित‍ि में वर‍िष्‍ठ लोगों को स्‍थान द‍िया गया। मप्र कांग्रेस के अध्‍यक्ष कमल नाथ के न‍िर्देशानुसार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्‍यक्ष अशोक सिंह की अध्‍यक्षता में प्रदेश कांग्रेस की अनुशासन सम‍ित‍ि का पुनर्गठन क‍िया गया है। प्रदेश कांग्रेस के उपाध्‍यक्ष अशोक सिंह को चेयरमैन बनाया गया है। इसके अलावा पूर्व मंत्री सज्‍जन सिंह वर्मा, पूर्व मंत्री पीसी शर्मा, पूर्व मंत्री हर्ष यादव, पूर्व मंत्री सईद अहमद, पूर्व सांसद गजेंद्र स‍िंह राजूखेड़ी, पूर्व विधायक नेहा स‍िंह व पूर्व व‍िधायक प्रताप लोधी को सदस्‍य बनाया गया है।

विधान सभा में प्रचंड बहुमत के बाद भी भाजपा को लोक सभा में खतरा.

Despite a sweeping majority in the legislative assembly, BJP faces a threat in the Lok Sabha. प्रदेश में हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में भले ही भाजपा को अविश्वसनीय प्रचंड जीत मिली है, लेकिन इसके बाद भी खतरे की घंटी भी बजी है। दरअसल इस जीत के बाद भी दस लोकसभा सीटें ऐसी हैं, जहां पर कांग्रेस को भाजपा की अपेक्षा अधिक मत मिले हैं, जिसकी वजह से भाजपा के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है। खास बात यह है कि इन दस में से नौ पर अभी भाजपा के सांसद हैं। ऐसे में इन सीटों पर भाजपा को अगले साल के शुरुआती महीनों में होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा को अतिरिक्त मेहनत करने की चुनौती मिल गई है। दरअसल मई माह में लोकसभा के चुनाव प्रस्तावित हैं। भाजपा के लिए छिंदवाड़ा सीट तो पहले से ही चुनौती बनी हुई थी , ऐसे में उसके सामने नौ नई सीटों की भी चुनौती दिखना शुरु हो गई है। हालांकि इसी तरह के कुछ आसार बीते विधानसभा चुनाव में भी बने थे , लेकिन लोकसभा परिणाम भाजपा के पक्ष में ही आए थे। इसको देखते हुए माना जा रहा है कि इस बार भी कुछ इसी तरह के परिणाम आ सकते हैं। दरअसल इस बार अगर विधानसभा चुनाव के परिणामों पर नज़र डालें तो , प्रदेश की 10 लोकसभा सीटें ऐसी हैं, जहां पर कांग्रेस जीती है। इनमें छिंदवाड़ा लोकसभा क्षेत्र में आने वाली सभी सातों विधानसभा सीटें भी शामिल हैं। इन सीटों पर पिछले चुनाव में भी कांग्रेस को ही जीत मिली थी। इसी तरह मुरैना की पांच, भिंड की चार, ग्वालियर की चार, टीकमगढ़ की तीन, मंडला की पांच, बालाघाट की चार, रतलाम की चार, धार की पांच और खरगोन लोकसभा क्षेत्र की आठ विधानसभा सीटों में से पांच पर भी भाजपा को हार का सामना करना पड़ा है। अहम बात यह है कि इसके बाद भी प्रदेश की पांच लोकसभा सीटें ऐसी हैं, जिनके परिणाम बताते हैं कि वे भाजपा के लिए बेहद सुरक्षित हैं। इसकी वजह है, इन सीटों की सभी विधानसभा सीटों पर भाजपा को ही जीत मिली है और वह भी बड़े अंतर से। इनमें खजुराहो, होशंगाबाद, देवास, इंदौर और खंडवा लोकसभा की सीटें शामिल हैं। इनके अलावा सागर, दमोह, रीवा, सीधी, जबलपुर, विदिशा और मंदसौर लोकसभा क्षेत्र में केवल एक-एक विधानसभा सीट पर ही भाजपा को हार का सामना करना पड़ा है। इस हिसाब से देखें तो यह सीटें भी भाजपा के लिए पूरी तरह से अनुकूल हैं। दरअसल गुना में बामोरी और अशोकनगर सीट पर कांग्रेस को जीत मिली है , जबकि शेष सीटों पर भाजपा की जीत हुई है। इसी तरह सागर में एक बीना पर कांग्रेस, दमोह में एक मलहरा पर कांग्रेस, सतना में दो सीट सतना और अमरपाटन पर कांग्रेस, रीवा में एक सेमरिया सीट पर कांग्रेस, सीधी में एक चुरहट पर कांग्रेस, शहडोल में एक पुष्पराजगढ़ पर कांग्रेस, जबलपुर में एक जबलपुर पूर्व पर कांग्रेस, विदिशा में एक सिलवानी पर कांग्रेस, भोपाल में दो भोपाल उत्तर, भोपाल मध्य पर कांग्रेस, राजगढ़ में दो राघोगढ़, सुसनेर पर कांग्रेस, उज्जैन में दो महिदपुर, तराना पर कांग्रेस, मंदसौर में एक मंदसौर पर कांग्रेस, बैतूल में दो सीटें टिमरनी और हरदा पर कांग्रेस विजयी हुई है। वहीं शेष सीटों पर भाजपा जीती है।यह हैं चुनौती वाली सीटों का गणितजिन सीटों पर चुनौती दिख रही है उनमें लोकसभा सीट मुरैना भी शामिल है। इस सीट के तहत आने वाले आठ विधानसभा क्षेत्रों में से पांच पर कांग्रेस को जीत मिल है। इन सीटों में श्योपुर, विजयपुर, जौरा, मुरैना और अम्बाह है, जबकि भाजपा को सबलगढ़, सुमावली और दिमनी में जीत मिली है। इस सीट पर मिले मतों को देखें तो कांग्रेस को 5,00666 और भाजपा को 4,11601 मत मिले। इसी तरह से लोकसभा सीट भिंड की बत की जाए तो इस सीट के तहत आने वाली आठ विस सीटों में से चार पर कांग्रेस व चार पर भाजपा को जीत मिली है। इनमें अटेर, गोहद, भांडेर और दतिया में कांग्रेस, तो सेवड़ा, भिंड, लहार और मेहगांव में भाजपा को जीत मिली है। इस सीट पर भी मतों के मामले में कांग्रेस आगे रही है। कांग्रेस को 532146 और भाजपा को 525252 वोट मिले हैं। लोकसभा सीट पर भी भिंड की ही तरह कांग्रेस ने ग्वालियर ग्रामीण, ग्वालियर पूर्व, डबरा, पोहरी पर जो भाजपा ने ग्वालियर, करैरा, ग्वालियर दक्षिण और भितरवार पर जीत दर्ज की है। इसी तरह से कांग्रेस को 700861 और भाजपा को 677611 वोट मिले हैं। लोकसभा सीट टीकमगढ़ में तीन सीटों पर कांग्रेस जीती है। इनमें टीकमगढ़, पृथ्वीपुर और खरगापुर शामिल है, जबकि भाजपा को जतारा, निवाड़ी,महाराजपुर, छतरपुर और बिजावरमें जीत मिली है। मतों की बात की जाए तो कांग्रेस को 531464 और भाजपा को 606817 मत मिले हैं। इसी तरह से मंडला लोक सभा सीट पर कांग्रेस को डिंडोरी, बिछिया, निवास, कैवलारी, लखनादौन सीटों पर , जबकि भाजपा को शहपुरा, मंडला, गोटेगांव में जीत मिली है। इसी तरह से कांग्रेस को 740509 और भाजपा को 628529 मत मिले हैं। लोकसभा सीट बालाघाट के तहत आने वाली आठ विस सीटों में से कांग्रेस को चार बैहर, परसवाड़ा, बालाघाट, वारासिवनी में जबकि भाजपा को लांजी, कटंगी, बरघाट और सिवनी सीट पर जीत मिली है। इस सीट के तहत आने वाली विस सीटों पर कांग्रेस को 735122 और भाजपा को 649037 मत मिले हैं।

धार जिले के कांग्रेस के पूर्व विधायक पांचीलाल मेड़ा की मुश्किलें बढ़ीं.

The challenges for Panchilal Meena, former Congress MLA of Dhar district, have increased. एक महिला ने मेड़ा समेत 6 लोगों पर दर्ज कराया गंभीर केस चुनाव संपन्न होते ही अब आरोपों का दौर भी चल पड़ा है। हालही में सीहोर जिले से एक मुस्िलम महिला द्वारा भाजपा को वोट देने पर पिटाई का मामला सामने आया था। अब धार जिले से भी एक मामला आ गया है। एक महिला ने कांग्रेस नेता एवं धरमपुरी के पूर्व विधायक पांचीलाल मेड़ा समेत 6 अन्य लोगों के खिलाफ गंभीर मामला दर्ज कराया है। महिला का आरोप है कि इन लोगों ने उसे जान से मारने की धमकी दी है। भोपाल। मध्य प्रदेश के धरमपुरी के कांग्रेस के पूर्व विधायक पांचीलाल मेड़ा की मुश्किलें बढ़ गई हैं। धामनोद थाना पुलिस ने एक महिला की शिकायत पर पूर्व विधायक पांचीलाल मेड़ा सहित 6 लोगों पर विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज किया है। रिपोर्ट दर्ज कराने वाली महिला धामनोद की रहने वाली महिला बताई जा रही है। उसने धामनोद थाने में कांग्रेस के पूर्व विधायक पांचीलाल मेड़ा सहित उनके समर्थकों पर जान से मारने की धमकी देने की शिकायत की थी। उसके आधार पर धामनोद पुलिस ने प्रकरण दर्ज किया है।धामनोद थाना प्रभारी समीर पाटीदार ने बताया कि 29 नवंबर को धामनोद के शासकीय अस्पताल से जानकारी मिली थी एक महिला ने पूर्व विधायक पांचीलाल मेडा के नाम से जहर खा लिया। उसका धामनोद के अस्पताल में उपचार चल रहा था। इस पर धामनोद थाना पुलिस ने महिला के बयान लिए। उसके आधार पर पूर्व विधायक पांचीलाल मेड़ा सहित 6 लोगों पर विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज किया गया है। बहरहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है। मीडिया के सामने फूट-फूटकर रोए थे मेड़ाउल्लेखनीय है कि पांचीलाल मेड़ा पूर्व में कई बार सुर्खियों में रह चुके हैं। बीते वर्ष मानसून सत्र के दौरान विधानसभा में मीडिया के सामने वे फूट-फूटकर रोए भी थे। तब भी उनके ये वीडियो काफी चर्चा में रहे थे। मेडा का आरोप था कि विधानसभा में पुलिस वालों ने उनसे मारपीट की। यही नहीं उन्होंने बीजेपी के एक विधायक पर गला दबाने का आरोप भी लगाया था। उसके बाद कहा था कि उनकी जान को खतरा है। इस दौरान कांग्रेस विधायक जीतू पटवारी ने उनकी आंसू पोंछे थे। विधानसभा अध्यक्ष ने उनके आरोपों को खारिज कर दिया थामेड़ा ने कहा था कि वे सदन में अपने इलाके के आदिवासियों की समस्या को उठाना चाह रहे थे। लेकिन बीजेपी विधायकों ने उनके साथ धक्का मुक्की की। उनका कुर्ता फाड़ दिया। उन्होंने इस मामले को लेकर विधानसभा अध्यक्ष को शिकायत भी दर्ज कराई थी। लेकिन विधानसभा अध्यक्ष ने उनके आरोपों को खारिज कर दिया था।

कोलार 6 लेन निर्माण के लिए कांग्रेस पूर्व पार्षद का तोड़ा अतिक्रमण.

Congress former councilor accused of trespassing for the construction of the Kolar 6-lane project. भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव खत्म होते ही राजधानी भोपाल में सिक्स लेन का निर्माण कार्य तेज हो गया है। इसके बीच में आ रहे कच्चे-पक्के मकान, दुकान लगातार 3 दिन से तोड़े जा रहे हैं। इसी बीच अतिक्रमण हटाने को लेकर भेदभाव के आप भी लग रहे हैं। वार्ड क्रमांक 84 से कांग्रेस के पूर्व पार्षद मंजीत मरण की दुकान भी तोड़ी गई। पूर्व पार्षद के अलावा इस मार्ग को बनने में बाधा बन रहे 30 बड़े अतिक्रमण को भी तोड़ा गया है। दो सप्ताह पहले प्रशासन ने सभी निर्माण पर नीले निशान लगाए थे इसके बाद यह कार्रवाई की गई है चुनाव के दौरान बीच में कुछ समय के लिए इस काम को धीमा कर दिया गया था। लेकिन प्रदेश में भाजपा की बंपर जीत के बाद यहां पर तेजी से काम शुरू हो गया है।गौरतलब है कि कोलार सिक्स लेन गोल से लेकर सर्वधर्म कॉलोनी तक 3 लेन सड़क का काम हो चुका है। दूसरी लाइन के लिए जगह निकलने के लिए आलोकधाम से लेकर बीमाकुंज तक अतिक्रमण हटाने का काम किया जा रहा है। हाल ही में कलेक्टर ने सिक्स लेन के कार्य का निरीक्षण भी किया था, PWD के अधिकारियों ने काम में देरी के लिए अतिक्रमण को वजह बताया था।बता दे कोलार हुजूर विधानसभा क्षेत्र में आता है और यहां से मौजूदा विधायक रामेश्वर शर्मा ने विधानसभा चुनाव में भाजपा से बड़ी जीत हासिल की है। उन्होंने कांग्रेस के नरेश ज्ञानचंदानी को करीब 97000 से ज्यादा मतों से हराया है। इसके बाद से इस क्षेत्र में विधायक रामेश्वर शर्मा का अधिकारियों के बीच भौकाल देखने को मिल रहा है।3 दिन में 30 अवैध कब्जों पर चला बुलडोजर कोलार सिक्स लेन रोड के निर्माण में बाधा बन रहे कोलार के आलोक धाम से थाना परिसर तक लगभग 30 अतिक्रमण पर प्रशासन का बुलडोजर चला है। जिससे रोड निर्माण के लिए रास्ता साफ हो गया है एक तरफ सर्वधर्म कॉलोनी से लेकर गोल तिराहे तक रोड का निर्माण हो चुका है अब दूसरी तरफ रोड का निर्माण किया जा रहा है। कार्रवाई के दौरान लोगों ने विरोध जताया, लेकिन उसका असर नहीं हुआ। दुकानदारों ने आरोप लगाया कि अतिक्रमण अमले ने समान निकालना तक का समय नहीं दिया। बता दे 222 करोड़ रुपए के इस प्रोजेक्ट का काम पूरा करने के लिए सितंबर 2023 तक की समय सीमा तय की गई थी, लेकिन अब तक यह काम पूरा नहीं हो सका।

कौन हैं मायावती के उत्तराधिकारी आकाश आनंद, लोकसभा चुनाव में BSP के लिए करेंगे कमाल?

Who is Mayawati’s successor Akash Anand, set to make a mark for BSP in the Lok Sabha elections? बसपा सुप्रीमो मायावती ने रविवार को लखनऊ में हुई बैठक में पार्टी के नेशनल कोआर्डिनेटर आकाश आनंद को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया है। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले मायावती के इस एलान के बाद यूपी की सियासत में एक बार फिर हलचल शुरू हो गई है। चर्चा तेज हो गई है कि आखिर आकाश आनंद कौन हैं? लखनऊ। बसपा सुप्रीमो मायावती ने रविवार को लखनऊ में हुई बैठक में पार्टी के नेशनल कोआर्डिनेटर आकाश आनंद को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया है। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले मायावती के इस एलान के बाद यूपी की सियासत में एक बार फिर हलचल शुरू हो गई है। चर्चा तेज हो गई है कि आखिर आकाश आनंद कौन हैं? आकाश आनंद, बसपा सुप्रीमो मायावती के छोटे भाई आनंद कुमार के बेटे हैं। आकाश ने लंदन के बड़े कॉलेज से एमबीए की डिग्री हासिल की है। आकाश पिछले कई सालों से पार्टी में एक्टिव थे, यूथ को जोड़ने के लिए आकाश ने हाल में हुए तीन राज्यों के विधासनभा चुनाव की जिम्मेदारी संभाली थी। साल 2017 में हुई थी एंट्रीबता दें मायावती के उत्तराधिकारी आकाश आनंद की अचानक एंट्री नहीं हुई है। साल 2017 में यूपी विधानसभा चुनाव हारने के बाद बसपा सुप्रीमो ने उन्हें जनता के सामने पेश किया था। साल 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान पार्टी ने आकाश को स्टार प्रचारकों की सूची में शामिल किया था। इसी समय बसपा का सपा के साथ गठबंधन टूट गया था और आकाश आनंद को पार्टी का नेशनल कॉर्डिनेटर घोषित किया गया है। मायावती ने घोषित किया उत्तराधिकारीइसके बाद साल 2022 में हुए हिलाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए बसपा के स्टार प्रचारकों की सूची जारी की गई, जिसमें आकाश का नाम मायावती के बाद दूसरे नंबर पर था। उन्हें विभिन्न राज्यों में आगामी विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी कैडर को तैयार करने का काम भी सौंपा गया था। अब मायावती ने उन्हें अपना उत्तराधिकारी घोषित किया है। हालांकि उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में मायावती ही पार्टी की जिम्मेदारी संभालेंगी, जबकि अन्य राज्यों में आकाश आनंद पार्टी का नेतृत्व करेंगे। बसपा के लिए करेंगे कमाल?सोशल इंजीनियरिंग के फार्मूले पर बसपा को बढ़ाने वाले आकाश आनंद परंपरागत राजनीति से इतर, हर मोर्चे पर पार्टी की विचारधारा को आगे बढ़ाने में कामयाब रहे हैं। सोशल मीडिया पर आकाश का अकाउंट काफी एक्टिव रहता है और वह युवा पीढ़ी को जोड़ने के लिए काफी कोशिशें भी कर रहे हैं। एक प्रश्न लगातार उठ रहा है कि क्या मायावती के उत्तराधिकारी आकाश आनंद लोकसभा चुनाव 2024 में बसपा के लिए कुछ कमाल करेंगे?

मध्यप्रदेश विधानसभा में 20 साल बाद भगवा रंग बिखेरेंगी, कांग्रेस विधायक रामसिया भारती.

After 20 years, the saffron color will adorn the Madhya Pradesh Legislative Assembly, Congress MLA Ramsiya Bharti to lead. उमा की मलहरा सीट से जीतीं कांग्रेस की रामसिया; भगवा पहने विपक्ष में दिखेंगी भोपाल! मध्यप्रदेश विधानसभा में 20 साल बाद भगवा कपड़े पहने एक और साध्वी नजर आने वाली हैं। फर्क इतना है कि इस बार ये साध्वी भाजपा से नहीं बल्कि कांग्रेस से हैं। हम बात कर रहे हैं, छतरपुर जिले की मलहरा विधानसभा सीट से जीत दर्ज करने वाली कांग्रेस की रामसिया भारती की। रामसिया भारती ने भाजपा प्रत्याशी प्रद्युम्न सिंह लोधी को मात दी है। 2003 में उमा भारती इसी सीट से चुनाव जीतकर मध्यप्रदेश की मुख्यमंत्री बनी थीं। खास बात यह है कि रामसिया भारती ने अपना पूरा चुनाव भाजपा की स्टाइल में ही लड़ा। भाजपा के हिंदुत्व का जवाब अपने तरीके से दिया। उमा भारती की ही तरह रामसिया भारती ने भागवत कथाओं से अपनी सियासी जमीन मजबूत की और आस्था की डोर को थामे मतदाताओं तक पहुंचीं। चुनावी भाषण भी प्रवचन के अंदाज में दिया। उमा की तरह टीकमगढ़ जन्मभूमि, छतरपुर को बनाया कर्मभूमि माथे पर लाल तिलक के साथ भगवा वस्त्र पहने, रामचरितमानस और भागवत कथा में पारंगत रामसिया भारती की कहानी भी कम रोचक नहीं है। उमा भारती की तरह रामसिया भारती भी टीकमगढ़ की रहने वाली हैं। दोनों ने ही राजनीति की शुरूआत छतरपुर जिले की मलहरा विधानसभा सीट से की। दूसरी समानता यह है कि दोनों ने ही बचपन से प्रवचन देना शुरू कर दिया था। इतनी समानता होने के बाद रामसिया भारती ने कांग्रेस की बजाए बीजेपी को क्यों नहीं चुना? इस सवाल का जवाब देते हुए वे कहती हैं- दादाजी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। पिता भी लंबे समय से कांग्रेस से जुड़े रहे। फिर मेरी राह कैसे जुदा हो सकती थी? रामसिया ने कहा- कांग्रेस का आइडिया ऑफ नेशन, बीजेपी के हिंदुत्व से कहीं ज्यादा बेहतर है। भाजपा को उसके ही प्रचार की शैली में दी मात चुनाव प्रचार के दौरान रामसिया भारती भाजपा के आक्रामक हिंदुत्व का जवाब, उसकी ही शैली में देती नजर आईं। भारती अपने भाषण की शुरूआत भारत माता की जय, भगवान श्री राम की जय, हनुमान जी महाराज की जय जैसे नारे लगाकर करतीं और अंत में केवल ‘कांग्रेस पार्टी जिंदाबाद’ कहती थीं। वे अपनी रैलियों की शुरुआत भगवान राम के नाम और महाकाव्य रामचरितमानस के छंदों से करतीं, फिर हनुमान और कांग्रेस पार्टी के नेताओं की ओर बढ़ती थीं।रामसिया भारती ने विपक्षी भाजपा नेताओं की तुलना राक्षस पात्रों से करते हुए मतदाताओं को लुभाने का हर हथकंडा अपनाया। वे भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहती थीं कि बीजेपी धर्म, राम, गाय के नाम पर वोट मांगती हैं लेकिन भारतीयों के बीच वैमनस्य पैदा करती है। यह हिंदू धर्म के खिलाफ है और मैं इसे बदलने के लिए यहां आई हूं। उन्होंने पूरे चुनाव प्रचार के दौरान बेरोजगारी, विकास और दलबदल का मुद्दा उठाया। ये भी कहा, ‘मैं यहां विश्वासघात का बदला लेने आई हूं।’ रामसिया भारती के राजनीतिक कौशल का ही कमाल था कि मतदान से एक दिन पहले बसपा प्रत्याशी लखन अहिरवार ने अपना समर्थन उन्हें दे दिया। इसी का नतीजा रहा कि भाजपा की तमाम कोशिशों के बावजूद रामसिया भारती ये चुनाव जीतने में सफल रहीं। मध्यप्रदेश की राजनीति में रामसिया भारती तीसरी साध्वी 12वीं पास 36 वर्षीय रामसिया भारती मध्यप्रदेश की राजनीति की तीसरी साध्वी हैं। प्रदेश की राजनीति में 20 साल पहले उमा भारती के रूप में साध्वी की एंट्री हुई थी। 2003 में उमा भारती इस सीट से चुनाव जीत गई थीं लेकिन 2008 के चुनाव में मलहरा की जनता ने उन्हें हरा दिया। दरअसल, उमा ने भाजपा छोड़कर भारतीय जनशक्ति पार्टी बना ली थी और वे इसी पार्टी से चुनाव लड़ी थीं। उमा भारती की बीजेपी में वापसी हुई मगर वे उत्तर प्रदेश में सक्रिय रहीं। मध्यप्रदेश की सियासत में दूसरी साध्वी के तौर पर प्रज्ञा ठाकुर की एंट्री हुई। मालेगांव बम ब्लास्ट मामले में आरोपी बनाई गईं प्रज्ञा ठाकुर को भाजपा ने भोपाल से लोकसभा का टिकट दिया। उन्होंने पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह को मात दी। अब रामसिया भारती के तौर पर तीसरी साध्वी राजनीति में आई हैं।

मध्य प्रदेश को नया आयम देने मोदी की गारंटी”

Modi’s guarantee to give Madhya Pradesh a new dimension. संपादकीय, उदित नारायण, Sahara Samachaarभोपाल। मध्य प्रदेश में चुनाव से पहले कांग्रेस का अहम मुद्दा भ्रष्ट सरकार ,भाजपा की छवि को सुधारने हेतु प्रधानमंत्री और अमित शाह ने मिलकर जो रणनीति बनाई उससे कांग्रेस के पास आती प्रतीत हो रही सत्ता हाथ से फिसल गई और आगामी लोकसभा चुनाव से पूर्व मध्य प्रदेश मे केंद्रीय नेतृत्व ने एक साफ सुथरी छवि का मुख्य मंत्री बनाने की कवायद तेज कर दी है, कल विधायक दल की बैठक के बाद निर्णय हो जायेगा कि जाएगा कि मोदी के विकसित भारत बनाने की गारंटी का जिम्मा मध्य प्रदेश मे किसके हाथ होगा, राजनैतिक विश्लेषकों की राय में तो मध्य प्रदेश में भाजपा की प्रचंड बहुमत से जीत के बाद मुख्य मंत्री तय करना कठिन हो गया है। लेकिन प्रधानमंत्री, अमित शाह और पार्टी अध्यक्ष ने शायद अपना निर्णय मध्य प्रदेश इकाई को बता दिया है अब कुछ औपचारिकता ही शेष बची है !शिवराज और उनकी “मैनेजमैंट पॉलिटिक्स” लाख इस तथ्य को छुपाने ,दबाने का प्रयास करती रही पर इस कटु सत्य को नरेन्द्र मोदी और अमित शाह से छुपने का कोई प्रश्न ही नही था ,और इसलिए मध्य प्रदेश का चुनाव “मोदी“ के चेहरे पर लड़े जाने का निर्णय लिया गया और तभी यह तय हो गया था कि मध्य प्रदेश में “शिवराज सरकार “का अंत समीप है ! शिवराज सिंह चौहान और उनके चाटुकार नौकरशाह और मीडिया मैनेजर गर्व से “लाड़ली बहना” का नाम लेते है ! सब जानते है यदि मोदी का चेहरा और “ ब्रॉड मोदी “की गॉरंटी नही होती तो मध्य प्रदेश की “लाडली बहनाये ““कमलनाथ से इस योजना का लाभ लेना पसंद करती ! महिला वोटर को 1250 रुपये के लिए शिवराज के वादों को भुलाने का कड़वा घूँट पीना पडा. यथार्थ यह है कि 18 साल में मध्य प्रदेश गरीबी के उस पड़ाव पर पहुंच गया जहाँ महिला वोटर को 1250 रुपये के लिए शिवराज के वादों को भुलाने का कड़वा घूँट पीना पडा. ! यदि मोदी की गॉरंटी नही होती तो शिवराज सिंह की भाजपा मध्य प्रदेश मे 80 सीटों पर सिमट जाती !मध्यप्रदेश के जानकार जानते है “लाडली बहना “ शिवराज की “मनी मैनेजमैंट “का उदाहरण है ! मध्य प्रदेश 3.85 लाख करोड के कर्जे मे है ! अपने भृष्टाचार और घोटालो को दबाने के लिए कर्जे उठाकर चुनाव के पहले गरीब लाचार बेरोजगार महिलाओ को 1200 रूपये प्रतिमाह की रिश्वत दी गई है ! नोट के बदले लाचार बेरोजगार कराह रही “बहनाओ “के वोट खरीदने के लिए यह योजना लाई गई थी ! यदि मोदी ने गॉरंटी न दी होती तो बहनाये सरकार के बहकावे में आने वाली नही थी ! देखा जाए तो भाजपा की नई सरकार को मध्यप्रदेश के कर्ज चुकाने हेतु 3.85 लाख करोड़ के “ मोदी पैकेज “की जरूरत पडेगी नही तो प्रदेश के दीवालिया होने का खतरा है !मजे की बात यह है शिवराज सिंह अभी भी खुद को “हीरो “बताकर मुख्य मंत्री बनने के सपने देख रहे थे ! वे चाहते थे कि लोग उन्हे मध्यप्रदेश की जीत का श्रेय दें। इसीलिए वो दिल्ली ना आकर मध्य प्रदेश से भावनात्मक बयान दे जनता और प्रधानमंत्री को सन्देश दे रहे है, बेशक संघ और संगठन के कृपापात्र शिवराज अब भी संगठन पर निगाहें जमाये है लेकिन भ्रष्टाचार और भावना मे चुनावी नुकसान मोल लेने मे संगठन भी साथ नहीं आएगा!तीन राज्यो की “जीत के शिल्पकार “अमित शाह को हर अंधकार को समाप्त करने की मोदी की गॉरंटी याद है इसलिए शिवराज का पुनःमुख्यमंत्री बनना सिर्फ उनकी खुली ऑखो का सपना है क्योकि अमित शाह इतने भोले नही हैं कि शिवराज सिंह पुनः मुख्य मंत्री बनाए। मध्यप्रदेश के 3.85 लाख करोड़ के शिवराज काल के कर्जो को चुकाने केन्द्र से पैकेज देते रहें और शिवराज सिंह को बीजेपी का राजनीतिक शिखर सौप दें ! इसलिए शिवराज सिंह को जाना होगा ! यकीन मानिए जो भी मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री होगा उसका कद और किरदार इतना ऊंचा और उज्जवल होगा मध्य प्रदेश मोदी की पसंद पर नाज कर सकेगा ! सोमवार को 18 साल के तिमिर के छंटने और नए सूर्योदय का इंतजार कीजिए !

INDIA गठबंधन’ का अहम मुद्दा बनेगा चुनावी पारदर्शिता.

The formation of the ‘INDIA Alliance’ will become a crucial issue for electoral transparency. जबलपुर में राज्य सभा सांसद विवेक तन्खा का बड़ा बयान Special Correspondent, Sahara Samachaar, Jabalpur. भोपाल। जबलपुर पहुचे कांग्रेस के राज्यसभा सांसद विवेक तंखा ने कहा चुनाव में पारदर्शिता के मुद्दे को लेकर संसद, कोर्ट, चुनाव और जनता के बीच जाने का रास्ता खुला है। चुनाव में जो पारदर्शिता होनी चाहिए वह इस चुनाव में नहीं दिखी , चुनाव के पहले ग्राउंड में बदलाव का माहौल दिख रहा था । चुनावी नतीजों के बाद लोगों में आक्रोश दिख रहा है। विवेक तंखा ने कहा कि देश में ऐसी व्यवस्था हो जिससे चुनाव निष्पक्ष रूप से हो संपन्न सकें, चुनाव में पारदर्शिता का मुद्दा INDIA गठबंधन का अहम विषय होगा । विपक्ष के अस्तित्व के लिए जरूरी है कि सब मिलकर लड़ाई लड़ें। पीसीसी अध्यक्ष कमलनाथ के इस्तीफे की अटकलों को बताया कमलनाथ और हाई कमान के बीच का मामला है। प्रदेश में मुख्यमंत्री के चेहरे पर फैसला न होने को लेकर विवेक तन्खा का कहना है कि मुख्यमंत्री के चयन को भाजपा की आंतरिक रणनीति का हिस्सा बतया है।

आंखों में आए आंसू… बोले- सिर कटा सकता हूं लेकिन झुका नहीं सकता.

Tears welled up in the eyes… He said, “I can lose my head, but I cannot bow down. हार के बाद छलका चंदेरी के कांग्रेस प्रत्याशी गोपाल सिंह चौहान का दर्द Special Correspondent, Sahara Samachaar, Ashoknagar. अशोकनगर। मध्यप्रदेश में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में जहां बीजेपी को पूर्ण बहुमत मिला है वहीं, कांग्रेस पार्टी को निराशा हाथ लगी है। ऐसे में जिले की तीन विधानसभा सीटों पर जहां मुंगावली और चंदेरी में बीजेपी तो अशोकनगर में कांग्रेस को जीत मिली है। ऐसे में कांग्रेस के विधायक हरी बाबू राय की धन्यवाद सभा में चंदेरी के कांग्रेस प्रत्याशी गोपाल सिंह चौहान अपनी चुनाव में हार के दर्द को छुपा नहीं पाए। मंच से भावुक होते हुए कहा कि सिर कटा सकता हूं लेकिन सिर झुका नहीं सकता।दरअसल, मामला मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले का है। यहां रसीला चौराहे पर कांग्रेस के जीते हुए कैंडिडेट के समर्थन में धन्यवाद सभा का आयोजन किया गया। इस दौरान मुंगावली के कांग्रेस प्रत्याशी तो शामिल ही नहीं हुए। वहीं, चंदेरी से कांग्रेस के हारे हुए प्रत्याशी गोपाल सिंह चौहान मंच पर भाषण देते हुए भावुक हो गए। नहीं छुपा पाए हार का दर्दचंदेरी के हारे विधायक ने अशोकनगर की जनता से कहा कि उन्होंने बहुत सही निर्णय लिया है। लोग कहते थे 40 हजार और 50 हजार से कांग्रेस की जीत होगी। लेकिन कहीं न कहीं जो भी खेल है कुछ तो खेल है। इस शंका से मना नही किया जा सकता। 2003 में जब पूरे प्रदेश में 38 विधायक चुने गए थे उस समय मुंगावली की जनता ने विपरीत परिस्थिति में मुझे चुनाव जिताया था। टीवी चैनलों पर आपने देखा होगा ईवीएम का नाटक। मैं यह इसलिए नहीं कह रहा कि में चुनाव हार गया। मुझे हारने जीतने की कोई तमन्ना नहीं है। मैं किसी के सामने सिर झुक नहीं सकता सिर कटा सकता हूं जीवन में मृत्यु कटु सत्य है जो आएगी। किसी के सामने झुक जाना जीते जी मर जाने से भी बेकार है। हार जीत होती है संघर्ष करूंगा लेकिन झुकूंगा नहीं। महाराणा प्रताप का वंशज हूं। उन्होंने घास की रोटी खाई लेकिन किसी के सामने झुके नहीं। मुझे मौत से डर नहीं लगता और जिसे मौत से डर नहीं लगता उसे व्यक्ति से क्या डर लगेगा।

केपी सिंह की हार की खुशी में बुजुर्ग ने कराया मुंडन.

In the joy of K.P. Singh’s victory, the elderly person got a head shave. –शिवपुरी के एक व्यक्ति का अनोखा प्रण कांग्रेस नेता केपी सिंह की हार के बाद बुजुर्ग ने मुंडवाया सिर संवाददाता शिवपुरी शिवपुरी! शिवपुरी जिले के पिछोर में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसमें एक व्यक्ति को कांग्रेस नेता केपी सिंह की हार का इंतजार था। 15 साल से वह इस हार का इंतजार कर रहे थे और जब कांग्रेस नेता केपी सिंह हारे तो उन्होंने अपना यह प्रण अपना सिर मुंडवाकर पूरा किया। शिवपुरी जिले के पिछोर विधानसभा के एक बुजुर्ग ने पिछोर विधायक केपी सिंह कक्काजू के हारने पर अपना सिर मुंडवा लेने का प्रढ 15 साल पहले लिया था। 15 साल पहले लिए गए इस प्रण के बाद जब केपी सिंह शिवपुरी विधानसभा क्षेत्र से मैदान में कूदे और इस विधानसभा क्षेत्र से उन्हें 40 हजार से अधिक मतों से हार मिली तो इसके बाद पिछोर के रहने वाले इस व्यक्ति ने अपना सिर मुंडवा लिया। आरोप- केपी सिंह ने मार दिया था चांटा और फाड़ दिया था आवेदन- शिवपुरी जिले के पिछोर विधानसभा क्षेत्र के जराय गांव के रहने वाले बुजुर्ग गोविन्द सिंह लोधी ने बताया कि साल 2008 की बात है जब मेरे भाई कि एक सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी और मृतक भाई की सम्पत्ति को एक औरत ने अपने नाम करवा लिया था जिसकी फरियाद लेकर मैं पिछोर विधायक केपीसिंह के पास अपनी दरख़ास लेकर डाक बंगला पर पहुंचा जहाँ विधायक ने पूछा कि कहाँ से आया है जब मैंने बताया कि गोविन्द हूँ ज़राय से तो विधायक ने मेरा आवेदन फाड़ते हुए मुझे चाँटा जड़ दिया और भगा दिया था जिसके बाद मैंने उसी दिन प्रण किया था कि विधायक केपीसिंह जिस दिन हारेगा उस दिन ही यह अति का अन्त होगा। अब 2008 से अभी तक मुझे 15 वर्ष तक इंतजार करना पड़ा जिसके बाद मेरा सपना पूरा हुआ तो मैंने अपने दाढ़ी, मूंछ सहित सिर का मुंडन करवाया है अब मेरे दिल को शांति है। छह बार से जीतते आ रहे थे केपी को इस बार मिली हार- केपी सिंह कक्काजू पिछोर विधानसभा से लगातार 6 बार से विधायक रहे हैं और इस बार वह शिवपुरी विधानसभा से चुनाव लड़े थे लेकिन सातवीं बार लड़े चुनाव में उन्हें बड़ी हार का सामना करना पड़ा। इधर एक बुजुर्ग उनकी हार का इंतज़ार कर रहा था जिसके प्रण को पूरा होने में 15 साल लग गए। शिवपुरी विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी केपी सिंह को भाजपा प्रत्याशी देवेंद्र जैन 40 हजार से अधिक मतों से हराया है।

झारखंड : कांग्रेस सांसद धीरज साहू व बौध डिस्टलरीज प्राइवेट लिमिटेड के ठिकानों से नोट, देखकर इनकम टैक्स अधिकारियों की आंखें भी चौंधिया गईं.

In Jharkhand, Congress MP Dhiraj Sahu and addresses of Baudh Distilleries Private Limited left Income Tax officials astonished upon inspection of notes. कांग्रेस सांसद के आवास के अलावा उनसे जुड़े लोगों पर भी कार्रवाई हो रही है. इसमें सबसे बड़ी सफलता बौध स्थित बौध डिस्टलरीज प्राइवेट लिमिटेड के ठिकानों से मिली है. झारखंड से कांग्रेस के राज्यसभा सांसद धीरज साहू के ठिकानों पर तीसरे दिन भी इनकम टैक्स की छापेमारी जारी है. रांची के रेडियम रोड स्थित सुशीला निकेतन में तीसरे दिन भी आयकर विभाग की टीम रेड डालने में लगी है. बता दें कि इस छापेमारी में जितनी बड़ी मात्रा में नोटों के बंडल बरामद हुए हैं उसके बारे में जानकर सभी आश्चर्यचकित हो गए हैं. यहां नोटों की गिनती करने में मशीन भी खराब हो गए. जानकारी के अनुसार रांची के अलावा लोहरदगा और उड़ीसा के संबलपुर राउरकेला बोलांगीर और बौद्ध समेत आधा दर्जन ठिकानों को आयकर विभाग खंगाल रही है. कांग्रेस सांसद के आवास के अलावा उनसे जुड़े लोगों पर भी कार्रवाई हो रही है. इसमें सबसे बड़ी सफलता बौध स्थित बौध डिस्टलरीज प्राइवेट लिमिटेड के ठिकानों से मिली है. ओडिशा और झारखंड में कंपनी के कई ठिकानों पर आईटी की रेड हुई. जहां 150 करोड़ से भी अधिक कैश बरामद हुआ है. यह कंपनी बलदेव साहू के नाम पर रजिस्टर्ड है. तमाम खबरों के बीच छानबीन जारी है. आयकर विभाग की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया गया है. तीसरी बार के सांसद हैं धीरज साहू झारखंड के लोहरदगा के रहने वाले धीरज साहू कांग्रेस के पुराने नेता हैं. 1977 में छात्र नेता के रूप में राजनीति की शुरुआत करने वाले धीरज साहू तीसरी बार के राज्यसभा सांसद हैं. इससे पहले वह 2010-2016 तक भी कांग्रेस के राज्यसभा सांसद रहे. 2018 में उन्होंने झारखंड में विपक्ष के साझा उम्मीदवार के तौर पर जीत हासिल की थी. साहू 2003-05 तक प्रदेश कांग्रेस कमिटी के सदस्य भी रहे हैं.

विधानसभा की हार पर कांग्रेस का चिंतन, समीक्षा बैठक मे होगा कारणों पर मंथन.

Congress party is contemplating its defeat in the legislative assembly, and a review meeting will be held to analyze the reasons.  उदित नारायण  नई दिल्ली। हाल मे सम्पन हुए 5 राज्यों के विधानसभा चुनावों मे तेलंगाना को छोड़ 4 राज्यों मे करारी हार के बाद कांग्रेस के मिशन 2024 को करारा झटका लगा है, कांग्रेस नेता राहुल गाँधी, महासचिव प्रियंका गाँधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के साथ पार्टी नेता आज से 2 दिन हार की समीक्षा करेंगे लेकिन वर्ष 2014 से लगातार चुनाव दर चुनाव हारने पर समीक्षा बैठक करने के बावजूद भी कांग्रेस अपने संगठन मे कोई मूलभूत परिवर्तन नहीं कर पाई है पार्टी मे दूसरी श्रेणी के नेताओं की भारी कमी है ऐसा नही है कि पार्टी मे अच्छे नेताओं की कमी है लेकिन पार्टी मे उनकी कोई सुनवाई नहीं होती कारण कांग्रेस नेतृत्व के आस पास मौजूद मण्डली प्रभावशाली और योग्य लोगो को नेतृत्व के पास फटकने नहीं देते ना ही उनके सुझाव पार्टी नेतृत्व तक पहुंच पाते है एक तरफ जहाँ भाजपा मे जमीनी कार्यकर्ताओं के साथ अनेक सामाजिक और आर्थिक मामलो के जानकारों को सलाहकार नियुक्त किया जाता है वही कांग्रेस मे यह योग्यता विदेश मे पढ़ा होना और कुछ खास लोगों का कृपापात्र होना मात्र है, वर्ष 2004 मे इंडिया शाइनिंग नारे के बावजूद बाजपेई सरकार से सत्ता छीनने वाली कांग्रेस कांग्रेस को लगता है कि वह आज भी मोदी सरकार से ऊबकर सत्ता उनको सौप देगी लेकिन अब वक्त बदल चुका है डिजिटल युग मे आम जनमानस तक सरकारी योजनाओं और एक प्रान्त से दूसरे प्रान्त और विश्व पटल तक की जानकारी प्राप्त कर रहा है, बिगत 10 सालों मे कांग्रेस ने चुनाव कि अपनी पिच तैयार करने मे नाकायाब रही है वह वैसे खेल रही है जैसे भाजपा उन्हें खिलाना चाह रही है, कांग्रेस को हार के मंथन मे कुछ बातों पर आत्म चिंतन कि आवश्यकता है जैसे – *बाहर से आने वालों पर मूल कैडर से ज्यादा भरोसा* दशकों से कांग्रेस पार्टी मे बाहर व दूसरी पार्टियों से आने वालों को संगठन मे बड़े पदों पर जिम्मेदारी दे दी जाती रही है जबकि मूल कैडर के कार्यकर्त्ता जस के तस रह जाते हैँ. *सालाहकारों के चयन, कार्यप्रणाली और अति निर्भरता* एक तरफ जहाँ और पार्टियों मे पार्टी के छोटे तथा जमीनी कार्यकर्त्ताओं की बातों को सुना व समझा जाता है वहीँ आज भी कांग्रेस मे विदेश से मैनेजमेंट पास आउट जमीनी हकीकत से दूर और स्वार्थी सालाहकारों की भरमार है वह नहीं चाहते कि नेतृत्व कोई ऐसा व्यक्ति पहुंचे जिससे उनकी कोई बात आलाकमान तक पहुंचे वो पार्टी से ज्यादा अपनी कुर्सी बचाने की जुगत मे लगे रहते हैँ राहुल गाँधी की अमेठी मे हार उनके प्रतिनिधियों और क्वार्डिनेटरों की कार्यशैली का ही परिणाम था. *हिंदी भाषी नेताओं की कमी* कांग्रेस मे ज्यादातर निर्णय दक्षिण भारत के नेताओं और सालाहकारों की सलाह से लिए जाते है जबकि हिंदी भाषी क्षेत्रो की राजनैतिक भूमि, परिस्थिति दक्षिण से बिलकुल अलग है दक्षिण मे जहाँ स्थानीय मुद्दे हावी रहते है मध्य, उत्तर और पूर्वी भारत मे स्थानीय के साथ साथ राष्ट्रीय मुद्दे ज्यादा प्रभावी रहते हैँ. *कमजोर संगठन* हिंदी भाषी क्षेत्रों मे कांग्रेस का संगठन बेहद कमजोर है राज्य से लेकर जिला और बूथ लेबल तक समर्पित कार्यकर्त्ता नहीं हैँ जहाँ भाजपा और स्वयंसेवक के कार्यकर्त्ता और सिमितियाँ बूथ तक मौजूद और सक्रिय है वही कांग्रेस मे पार्टी पदाधिकारी के अलावा कार्यकर्त्ता ही नहीं है कार्यकर्ताओ का सम्मान ना मिलना उनको हतोत्साहित करता रहा है. *दोहरी राजनैतिक शैली* इस दौर मे जहाँ भाजपा अपनी स्पष्ट नीति पर काम कर रही है वही कांग्रेस जनमानस तक अपनी कोई नीति पहुंचाने मे नाकायाब रहती है वजह है एजेंडा क्लियर ना होना पार्टी किसके साथ है और किसके खिलाफ जनता को यह स्थिति साफ नहीं हो पाती कांग्रेस को जरुरत है बेहतर रणनीतिकार की जो नेतृत्व और पार्टी को बिना अपना स्वार्थ देखे बेहतर रणनीति पर अग्रसर कर सके *संघर्षो मे कमी* विपक्ष मे बैठी कांग्रेस मे संघर्ष की कमी साफ झलकती है जनहित के मुद्दों पर पार्टी के कुछ नेता टेलीविज़न और संसद मे अवश्य बोलते देखे जाते है लेकिन सडक पर और जनता के बीच संघर्षो मे पीछे रहते है कारण पार्टी मे संघर्ष शील कार्यकर्त्ता कम चरणवन्दन और कुर्ताधारी नेताओं की बहुतायत होना है, *एक ही मुद्दे पर अटके रहना और स्थिति का अध्यन ना होना* कांग्रेस के ज्यादातर नेता निजी और संवेदनशील बयान और एक ही मुद्दे पर अटके रहते हैँ जमीनी स्तर पर कार्य ना करने के कारण जन भावना और जमीनी मुद्दों तथा जनता के मन की बात की बात विरोध और सहयोग की जानकारी ही नहीं रहती *संचार माध्यमो के उपयोग की कमी और ओवर कॉन्फिडेंस तथा आत्मनिर्भरता की कमी* संचार युग का आरम्भ करने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी जी के विचारों की पार्टी आज संचार माध्यम और डिजिटल मीडिया मे फिसड्डी साबित हो रही है जहाँ भाजपा मे बूथ लेबल तक के कार्यकर्त्ता डिजिटल माध्यमो से जुड़े और सक्रिय हैँ वही कांग्रेस के ज्यादातर ज़िलों मण्डलों और उनके सहयोगी संगठन के सोशल मीडिया अकाउंट तक नहीं हैँ कांग्रेस के नेता सिर्फ फेसबुक और ट्विटर पर पोस्ट डालने को डिजिटल मार्केट समझते है एक ओर जहाँ अन्य पार्टियों मे डिजिटल के प्रति आकर्षित होकर जनता से जुड़ रही है वही कांग्रेस आज भी पुराने कार्यशैली पर लगी है जहाँ भाजपा व अन्य ज्यादातर प्रचार डिजिटल एजेंसी और संचार माध्यम से कर रही हैँ वही कांग्रेस नेता हाथ पर हाथ धरे या अपने खास को काम दिला मौज मे रहते हैँ *चुनावी तैयारियों मे देरी* विना बेहतर प्रवंधन कोई लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता कठोर निर्णय लेने मे नेतृत्व सक्षम प्रतीत नहीं होता जहाँ भाजपा एक चुनाव के बाद तुरंत दूसरे चुनाव की तैयारी मे लग जाती है वही कांग्रेस नेता टिकट बितरण का इंतज़ार करते हैँ जहाँ जहाँ अन्य पार्टियों इलेक्शन मोड पर सक्रिय रहती हैँ वही कांग्रेस नेता और पार्टी रेस्ट मोड पर, ऐसे ही युवा और जुझारू नेताओं की कमी और नेतृत्व द्वारा उन्हें आगे ना बढ़ा कर पुराने और दरबारी नेताओ पर भरोसा तथा कमजोर आत्म विश्वास पार्टी को नीचे की तरफ ले जा रहा हैँ राहुल गाँधी जैसे सारीखे नेता को वयनाड जैसी … Read more

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