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झारखंड : कांग्रेस सांसद धीरज साहू व बौध डिस्टलरीज प्राइवेट लिमिटेड के ठिकानों से नोट, देखकर इनकम टैक्स अधिकारियों की आंखें भी चौंधिया गईं.

In Jharkhand, Congress MP Dhiraj Sahu and addresses of Baudh Distilleries Private Limited left Income Tax officials astonished upon inspection of notes. कांग्रेस सांसद के आवास के अलावा उनसे जुड़े लोगों पर भी कार्रवाई हो रही है. इसमें सबसे बड़ी सफलता बौध स्थित बौध डिस्टलरीज प्राइवेट लिमिटेड के ठिकानों से मिली है. झारखंड से कांग्रेस के राज्यसभा सांसद धीरज साहू के ठिकानों पर तीसरे दिन भी इनकम टैक्स की छापेमारी जारी है. रांची के रेडियम रोड स्थित सुशीला निकेतन में तीसरे दिन भी आयकर विभाग की टीम रेड डालने में लगी है. बता दें कि इस छापेमारी में जितनी बड़ी मात्रा में नोटों के बंडल बरामद हुए हैं उसके बारे में जानकर सभी आश्चर्यचकित हो गए हैं. यहां नोटों की गिनती करने में मशीन भी खराब हो गए. जानकारी के अनुसार रांची के अलावा लोहरदगा और उड़ीसा के संबलपुर राउरकेला बोलांगीर और बौद्ध समेत आधा दर्जन ठिकानों को आयकर विभाग खंगाल रही है. कांग्रेस सांसद के आवास के अलावा उनसे जुड़े लोगों पर भी कार्रवाई हो रही है. इसमें सबसे बड़ी सफलता बौध स्थित बौध डिस्टलरीज प्राइवेट लिमिटेड के ठिकानों से मिली है. ओडिशा और झारखंड में कंपनी के कई ठिकानों पर आईटी की रेड हुई. जहां 150 करोड़ से भी अधिक कैश बरामद हुआ है. यह कंपनी बलदेव साहू के नाम पर रजिस्टर्ड है. तमाम खबरों के बीच छानबीन जारी है. आयकर विभाग की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया गया है. तीसरी बार के सांसद हैं धीरज साहू झारखंड के लोहरदगा के रहने वाले धीरज साहू कांग्रेस के पुराने नेता हैं. 1977 में छात्र नेता के रूप में राजनीति की शुरुआत करने वाले धीरज साहू तीसरी बार के राज्यसभा सांसद हैं. इससे पहले वह 2010-2016 तक भी कांग्रेस के राज्यसभा सांसद रहे. 2018 में उन्होंने झारखंड में विपक्ष के साझा उम्मीदवार के तौर पर जीत हासिल की थी. साहू 2003-05 तक प्रदेश कांग्रेस कमिटी के सदस्य भी रहे हैं.

विधानसभा की हार पर कांग्रेस का चिंतन, समीक्षा बैठक मे होगा कारणों पर मंथन.

Congress party is contemplating its defeat in the legislative assembly, and a review meeting will be held to analyze the reasons.  उदित नारायण  नई दिल्ली। हाल मे सम्पन हुए 5 राज्यों के विधानसभा चुनावों मे तेलंगाना को छोड़ 4 राज्यों मे करारी हार के बाद कांग्रेस के मिशन 2024 को करारा झटका लगा है, कांग्रेस नेता राहुल गाँधी, महासचिव प्रियंका गाँधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के साथ पार्टी नेता आज से 2 दिन हार की समीक्षा करेंगे लेकिन वर्ष 2014 से लगातार चुनाव दर चुनाव हारने पर समीक्षा बैठक करने के बावजूद भी कांग्रेस अपने संगठन मे कोई मूलभूत परिवर्तन नहीं कर पाई है पार्टी मे दूसरी श्रेणी के नेताओं की भारी कमी है ऐसा नही है कि पार्टी मे अच्छे नेताओं की कमी है लेकिन पार्टी मे उनकी कोई सुनवाई नहीं होती कारण कांग्रेस नेतृत्व के आस पास मौजूद मण्डली प्रभावशाली और योग्य लोगो को नेतृत्व के पास फटकने नहीं देते ना ही उनके सुझाव पार्टी नेतृत्व तक पहुंच पाते है एक तरफ जहाँ भाजपा मे जमीनी कार्यकर्ताओं के साथ अनेक सामाजिक और आर्थिक मामलो के जानकारों को सलाहकार नियुक्त किया जाता है वही कांग्रेस मे यह योग्यता विदेश मे पढ़ा होना और कुछ खास लोगों का कृपापात्र होना मात्र है, वर्ष 2004 मे इंडिया शाइनिंग नारे के बावजूद बाजपेई सरकार से सत्ता छीनने वाली कांग्रेस कांग्रेस को लगता है कि वह आज भी मोदी सरकार से ऊबकर सत्ता उनको सौप देगी लेकिन अब वक्त बदल चुका है डिजिटल युग मे आम जनमानस तक सरकारी योजनाओं और एक प्रान्त से दूसरे प्रान्त और विश्व पटल तक की जानकारी प्राप्त कर रहा है, बिगत 10 सालों मे कांग्रेस ने चुनाव कि अपनी पिच तैयार करने मे नाकायाब रही है वह वैसे खेल रही है जैसे भाजपा उन्हें खिलाना चाह रही है, कांग्रेस को हार के मंथन मे कुछ बातों पर आत्म चिंतन कि आवश्यकता है जैसे – *बाहर से आने वालों पर मूल कैडर से ज्यादा भरोसा* दशकों से कांग्रेस पार्टी मे बाहर व दूसरी पार्टियों से आने वालों को संगठन मे बड़े पदों पर जिम्मेदारी दे दी जाती रही है जबकि मूल कैडर के कार्यकर्त्ता जस के तस रह जाते हैँ. *सालाहकारों के चयन, कार्यप्रणाली और अति निर्भरता* एक तरफ जहाँ और पार्टियों मे पार्टी के छोटे तथा जमीनी कार्यकर्त्ताओं की बातों को सुना व समझा जाता है वहीँ आज भी कांग्रेस मे विदेश से मैनेजमेंट पास आउट जमीनी हकीकत से दूर और स्वार्थी सालाहकारों की भरमार है वह नहीं चाहते कि नेतृत्व कोई ऐसा व्यक्ति पहुंचे जिससे उनकी कोई बात आलाकमान तक पहुंचे वो पार्टी से ज्यादा अपनी कुर्सी बचाने की जुगत मे लगे रहते हैँ राहुल गाँधी की अमेठी मे हार उनके प्रतिनिधियों और क्वार्डिनेटरों की कार्यशैली का ही परिणाम था. *हिंदी भाषी नेताओं की कमी* कांग्रेस मे ज्यादातर निर्णय दक्षिण भारत के नेताओं और सालाहकारों की सलाह से लिए जाते है जबकि हिंदी भाषी क्षेत्रो की राजनैतिक भूमि, परिस्थिति दक्षिण से बिलकुल अलग है दक्षिण मे जहाँ स्थानीय मुद्दे हावी रहते है मध्य, उत्तर और पूर्वी भारत मे स्थानीय के साथ साथ राष्ट्रीय मुद्दे ज्यादा प्रभावी रहते हैँ. *कमजोर संगठन* हिंदी भाषी क्षेत्रों मे कांग्रेस का संगठन बेहद कमजोर है राज्य से लेकर जिला और बूथ लेबल तक समर्पित कार्यकर्त्ता नहीं हैँ जहाँ भाजपा और स्वयंसेवक के कार्यकर्त्ता और सिमितियाँ बूथ तक मौजूद और सक्रिय है वही कांग्रेस मे पार्टी पदाधिकारी के अलावा कार्यकर्त्ता ही नहीं है कार्यकर्ताओ का सम्मान ना मिलना उनको हतोत्साहित करता रहा है. *दोहरी राजनैतिक शैली* इस दौर मे जहाँ भाजपा अपनी स्पष्ट नीति पर काम कर रही है वही कांग्रेस जनमानस तक अपनी कोई नीति पहुंचाने मे नाकायाब रहती है वजह है एजेंडा क्लियर ना होना पार्टी किसके साथ है और किसके खिलाफ जनता को यह स्थिति साफ नहीं हो पाती कांग्रेस को जरुरत है बेहतर रणनीतिकार की जो नेतृत्व और पार्टी को बिना अपना स्वार्थ देखे बेहतर रणनीति पर अग्रसर कर सके *संघर्षो मे कमी* विपक्ष मे बैठी कांग्रेस मे संघर्ष की कमी साफ झलकती है जनहित के मुद्दों पर पार्टी के कुछ नेता टेलीविज़न और संसद मे अवश्य बोलते देखे जाते है लेकिन सडक पर और जनता के बीच संघर्षो मे पीछे रहते है कारण पार्टी मे संघर्ष शील कार्यकर्त्ता कम चरणवन्दन और कुर्ताधारी नेताओं की बहुतायत होना है, *एक ही मुद्दे पर अटके रहना और स्थिति का अध्यन ना होना* कांग्रेस के ज्यादातर नेता निजी और संवेदनशील बयान और एक ही मुद्दे पर अटके रहते हैँ जमीनी स्तर पर कार्य ना करने के कारण जन भावना और जमीनी मुद्दों तथा जनता के मन की बात की बात विरोध और सहयोग की जानकारी ही नहीं रहती *संचार माध्यमो के उपयोग की कमी और ओवर कॉन्फिडेंस तथा आत्मनिर्भरता की कमी* संचार युग का आरम्भ करने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी जी के विचारों की पार्टी आज संचार माध्यम और डिजिटल मीडिया मे फिसड्डी साबित हो रही है जहाँ भाजपा मे बूथ लेबल तक के कार्यकर्त्ता डिजिटल माध्यमो से जुड़े और सक्रिय हैँ वही कांग्रेस के ज्यादातर ज़िलों मण्डलों और उनके सहयोगी संगठन के सोशल मीडिया अकाउंट तक नहीं हैँ कांग्रेस के नेता सिर्फ फेसबुक और ट्विटर पर पोस्ट डालने को डिजिटल मार्केट समझते है एक ओर जहाँ अन्य पार्टियों मे डिजिटल के प्रति आकर्षित होकर जनता से जुड़ रही है वही कांग्रेस आज भी पुराने कार्यशैली पर लगी है जहाँ भाजपा व अन्य ज्यादातर प्रचार डिजिटल एजेंसी और संचार माध्यम से कर रही हैँ वही कांग्रेस नेता हाथ पर हाथ धरे या अपने खास को काम दिला मौज मे रहते हैँ *चुनावी तैयारियों मे देरी* विना बेहतर प्रवंधन कोई लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता कठोर निर्णय लेने मे नेतृत्व सक्षम प्रतीत नहीं होता जहाँ भाजपा एक चुनाव के बाद तुरंत दूसरे चुनाव की तैयारी मे लग जाती है वही कांग्रेस नेता टिकट बितरण का इंतज़ार करते हैँ जहाँ जहाँ अन्य पार्टियों इलेक्शन मोड पर सक्रिय रहती हैँ वही कांग्रेस नेता और पार्टी रेस्ट मोड पर, ऐसे ही युवा और जुझारू नेताओं की कमी और नेतृत्व द्वारा उन्हें आगे ना बढ़ा कर पुराने और दरबारी नेताओ पर भरोसा तथा कमजोर आत्म विश्वास पार्टी को नीचे की तरफ ले जा रहा हैँ राहुल गाँधी जैसे सारीखे नेता को वयनाड जैसी … Read more

बागियों का कमाल: भाजपा- कांग्रेस को गंवाना पड़ गईं कई विधानसभा सीटें.

Several assembly seats were lost by both the BJP and Congress. – पार्टी में बगावत के बावजूद कई सीटें जीती भाजपा – कांग्रेस को दोनों दलों के बागियों से हुआ नुकसान -अरविंद, गोविंद, लक्ष्मण, एनपी, चौधरी जैसे दिग्गज हारे   *उदित नारायण*  भोपाल। हर बार की तरह विधानसभा के इस चुनाव में भी भाजपा-कांग्रेस को बागियों के कारण कई सीटें गंवाना पड़ गईं। खास बात यह कि भाजपा के पक्ष में ऐसी आंधी चली कि वह वे सीटें भी जीत गई, जहां उसके मजबूत बागी मैदान में थे। इसके विपरीत कांग्रेस को अपनी पार्टी के साथ भाजपा के बागियों से भी नुकसान हुआ। चार सीटें ही ऐसी थीं जहां भाजपा को पार्टी के से बगावत कर मैदान में उतरे प्रत्याशियों के कारण पराजय का सामना करना पड़ा। बगावत की वजह से अरविंद भदौरिया, डॉ गोविंद सिंह, लक्ष्मण िसंह, एनपी प्रजापति और चौधरी राकेश सिंह जैसे दिग्गजों को हार का सामना करना पड़ा।अटेर सहित चार जगह हुआ भाजपा को नुकसानभाजपा को जहां पार्टी के बागियों के कारण पराजय का सामना करना पड़ा, उनमें अटेर, टीकमगढ़, मुरैना और महिदपुर शामिल हैं। अटेर में पार्टी के बागी मुन्ना सिंह भदौरिया के मैदान में होने के कारण प्रदेश के सहकारिता मंत्री अरविंद भदौरिया हार गए। टीकमगढ़ में केके श्रीवास्तव ने निर्दलीय लड़कर भाजपा के राकेश गिरि को हरवा दिया। अटेर में कांग्रेस के हेमंत कटारे और टीकमगढ़ में यादवेंद्र सिंह चुनाव जीत गए। इसी प्रकार मुरैना में पूर्व मंत्री रुस्तम सिंह ने अपने बेटे राकेश को चुनाव लड़ा दिया। उन्होंने 37 हजार से ज्यादा वोट लेकर भाजपा को हरा दिया और कांग्रेस के दिनेश गुर्जर चुनाव जीत गए।  महिदपुर में भाजपा के प्रताप सिंह बगावत कर चुनाव लड़ रहे थे। वे 20 हजार से ज्यादा वोट ले गए और भाजपा के बहादुर सिंह 290 वोट के अंतर से चुनाव हार गए।बगावत के बावजूद यहां जीत गई भाजपाप्रदेश की आधा दर्जन से ज्यादा सीटें ऐसी हैं, जहां भाजपा में बगावत हुई। मजबूत नेता मैदान में उतर गए, फिर भी भाजपा ने सीट में कब्जा किया। इनमें सुमावली, भिंड, लहार, चाचौड़ा और होशंगाबाद जैसी सीटें शामिल हैं। सुमावली में भाजपा के बागी कुलदीप सिंह सिकरवार के मैदान में होने के बावजूद भाजपा जीत गई और कांग्रेस तीसरे नंबर पर खिसक गई। भिंड में संजीव सिंह की बगावत के बावजूद भाजपा जीती और कांग्रेस के चौधरी राकेश सिंह चुनाव हार गए। लहार में भाजपा के बागी रसाल सिंह ने बगावत की फिर भी भाजपा जीती और नेता प्रतिपक्ष डॉ गोविंद सिंह को हार का सामना करना पड़ा।  चाचौड़ा में भाजपा की पूर्व विधायक ममता मीणा आप से चुनाव लड़ गईं फिर भी भाजपा जीती और कांग्रेस के लक्ष्मण सिंह हार गए। होशंगाबाद में भगवती चौरे भाजपा से बगावत कर चुनाव लड़ गए लेकिन यहां भाजपा ही जीती और कांग्रेस तीसरे नंबर पर खिसक गई।कांग्रेस के बागियों के कारण पार्टी की हुई हार कांग्रेस में भी बागियों ने कई जगह कमाल दिखाए। भाजपा से फर्क यह है कि बागियों के होने के कारण कांग्रेस सिर्फ हारी, उसे एक भी सीट में जीत नसीब नहीं हुई। गोटेगांव में कांग्रेस ने शेखर चौधरी काे टिकट देकर काट दिया था। वे नाराज होकर निर्दलीय चुनाव लड़ गए। उन्हें 47 हजार से ज्यादा वोट मिले और कांग्रेस के एनपी प्रजापति बुरी तरह हारे।  देपालपुर में कांग्रेस के बागी राजेंद्र चौधरी लगभग 38 हजार वोट ले गए और कांग्रेस विधायक विशाल पटेल 13 हजार से ज्यादा वोटों से हार गए। बड़नगर में भी कांग्रेस ने राजेंद्र सोलंकी को टिकट देकर काट दिया था। वे निर्दलीय चुनाव लड़कर 31 हजार से ज्यादा वोट ले गए और कांग्रेस विधायक मुरली मोरवाल को बड़ी पराजय का सामना करना पड़ा। आलोट में प्रेमचंद गुड्डू बगावत कर मैदान में थे। उन्हें 37 हजार से ज्यादा वोट मिले और विधायक मनोज चावला को पराजय का सामना करना पड़ा। इसी प्रकार महू में अंतर सिंह दरबार बगावत कर निर्दलीय लड़े तो कांग्रेस प्रत्याशी तीसरे नंबर पर पहुंच गए और भाजपा की ऊषा ठाकुर बड़े अंतर से चुनाव जीत गईं।

रेवंत रेड्डी ने तेलंगाना के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली

तेलंगाना ! भट्टी विक्रमार्क डिप्टी सीएम, 11 मंत्री भी शपथ ले रहे; सोनिया, राहुल और प्रियंका मौजूद कांग्रेस नेता रेवंत रेड्डी ने 7 दिसंबर को तेलंगाना के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। भट्टी विक्रमार्क डिप्टी सीएम बनाए गए हैं। 11 मंत्री भी शपथ ले रहे हैं। शपथ ग्रहण कार्यक्रम एलबी स्टेडियम में हो रहा है। इसमें सोनिया गांधी, राहुल, प्रियंका गांधी वाड्रा और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे शामिल हुए। तेलंगाना कैबिनेट में मंत्री पद पाने वाले नेताओं की लिस्ट… 1) कोंडा सुरेखा 2) कोमाटी रेड्डी वेंकट रेड्डी 3) जुपल्ली कृष्णा राव 4) भट्टी विक्रमार्क 5) उत्तम कुमार रेड्डी 6) पोन्नम प्रभाकर 7) सीताक्का 8) श्रीधर बाबू 9) थुम्मला नागेश्वर राव 10) पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी 11) दामोदर राजनरसिम्हा राहुल ने लगाई थी रेवंत के नाम पर मुहर तेलंगाना में कांग्रेस की जीत के बाद 5 दिसंबर को दिल्ली में पार्टी नेताओं की बैठक हुई। इसमें राहुल गांधी, पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल सहित कई सीनियर नेता मौजूद थे। बैठक में राहुल गांधी ने रेवंत रेड्डी के नाम पर मुहर लगी थी। रेवंत तेलंगाना कांग्रेस के अध्यक्ष हैं।

कमलेश्वर डोडियार ने बाइक से घूमकर लड़ा चुनाव, उसी बाइक पर विधायक लिखवाकर पहुंचे भोपाल

अब विधानसभा में सुनाई देगी आदिवासी की आवाज भारत आदिवासी पार्टी के विधायक डोडियार विधानसभा में देंगे अपनी आमद 12 लाख रुपए का कर्ज लेकर लड़ा चुनाव, भाजपा और कांग्रेस को किया चित्त भोपाल। भारत आदिवासी पार्टी ने हाल ही के विधानसभा चुनाव में अपना परचम लहराते हुए एक विधायक को विधानसभा भेजने में कामयाब हुई है। पार्टी ने कमलेश्वर डोडियार को सैलाना से टिकट दिया और वे विधायक चुने गए। सैलाना सीट मध्य प्रदेश की वह एकमात्र सीट है जिसे बीजेपी और कांग्रेस के अलावा किसी अन्य दल ने जीता हो। कमलेश्वर के विधायक बनने से आदिवासी वर्ग के लोगों को उम्मीद है कि वे आदिवासी वर्ग की समस्याओं को विधानसभा में रखेंगे। बता दें, विधायक डोडियार कांग्रेस के गढ़ में सेंध लगाकर भारत आदिवासी पार्टी से विधायक बनकर चर्चाओं में हैं। उन्होंने अपनी बाइक में बाकायदे एमएलए भी लिखवाया है। चुनाव के पहले पुलिस ने भेजा था जेल, एक सप्ताह में छूटेडोडियार चुनाव से पहले उस वक्त सुर्खियों में आए थ्ो, जब पुलिस ने उन्हें िगरफ्तार कर जेल भेज दिया था। नामांकन के एक सप्ताह पहले ही वे जेल से छूटकर बाहर आए थे और 12 लाख रुपए का कर्ज लेकर चुनाव लड़े और चुनाव जीत गए। रतलाम जिले की सैलाना सीट से जीते विधायक डोडियार ने बाइक से ही प्रचार किया था। सड़क पर बैठकर खाना खाया था और अब विधायक बनने के बाद अपने दस्तावेज जमा करने के लिए बाइक से भोपाल के लिए निकल पड़े। बाइक पर लिखवाया एमएलए, उसी से पहुंचे भोपाल विधायक डोडियार ने कहा कि आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। दोस्तों और साथियों से उधार लेकर चुनाव लड़ा हूं। अब बाइक से भोपाल भी जा रहे हैं। डोडियार का मानना है कि जल्दी ही विधायक की सैलरी से कार खरीद लेंगे, लेकिन अभी हमें बाइक से ही सफर करना होगा। पार्टी के इकलौते चर्चित विधायक कमलेश्वर डोडियार बुधवार को विधायक चुने जाने के बाद भोपाल पहुंच गए हैं। हालांकि वे अभी विधानसभा नहीं पहुंचे हैं। संभवत: गुरूवार को विधानसभा पहुंचकर अपने जीत का प्रमाणपत्र देंगे और बाकायदे अपनी आमद देने के साथ ही अपना परिचयपत्र जारी करवाएंगे।

तेलंगाना के नए मुख्यमंत्री होंगे रेवंत रेड्डी, 7 दिसंबर को लेंगे शपथ कांग्रेस आलाकमान ने लगाई नाम पर मुहर.

The new Chief Minister of Telangana will be Revanth Reddy, who will take the oath on December 7. The Congress high command has stamped approval on the name तेलंगाना । कांग्रेस के महासचिव केसी वेणुगोपाल ने बैठक में बताया कि रेवंत रेड्डी तेलंगाना के नए मुख्यमंत्री होंगे. वह अनुभवी हैं, उन्होंने सभी के साथ काम किया है और वह पहले ही तेलंगाना के लोगों को वादा कर चुके हैं कि वह उनके लिए काम करेंगे.तेलंगाना के अगले मुख्यमंत्री के लिए कांग्रेस के रेवंत रेड्डी के नाम पर मुहर लग गई है. वह राज्य के नए मुख्यमंत्री होंगे और सात दिसंबर को पद की शपथ लेंगे. कांग्रेस ने मंगलवार शाम को इसका आधिकारिक ऐलान कर दिया. कांग्रेस के महासचिव केसी वेणुगोपाल ने बैठक में बताया कि रेवंत रेड्डी तेलंगाना के नए मुख्यमंत्री होंगे. वह अनुभवी हैं, उन्होंने सभी के साथ काम किया है और वह पहले ही तेलंगाना के लोगों को वादा कर चुके हैं कि उनके लिए काम करेंगे. उन्होंने बताया कि रेवंत रेड्डी सात दिसंबर को पथ की शपथ लेंगे.तेलंगाना विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 64 सीटें जीतकर बीआरएस को सत्ता से बाहर कर दिया था. बीआरएस को 39 सीटों से ही संतोष करना पड़ा था जबकि बीजेपी को यहां आठ ही सीटें मिली थीं. तेलंगाना में जीत का सबसे ज्यादा श्रेय रेवंत रेड्डी को मिल रहा है. यही वजह है कि सीएम पद के लिए सबसे ज्यादा चर्चा रेवंत रेड्डी की है. रेवंत रेड्डी तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हैं. रेड्डी तेलंगाना में कांग्रेस के उन तीन लोकसभा सांसदों में शामिल हैं, जिन्होंने 2019 में जीत हासिल की थी. इस चुनाव में भी रेवंत तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव के सामने कामारेड्डी विधानसभा सीट से चुनाव लड़े, हालांकि, बीजेपी उम्मीदवार ने दोनों को मात दे दी.

सदन में दिखेगी इस बार नारी शक्ति, जनता ने चुनीं 26 महिला विधायक.

This time, women power will be visible in the assembly; the public has elected 26 female legislators. 5 जगह थीं आमने-सामने, 2018 के मुकाबले 2 फीसदी बढ़ा महिलाओं का मतदान भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में इस बार बीजेपी की प्रचंड जीत के साथ एक और खास बात हुई। इस बार मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में पहले के मुकाबले ज्यादा महिलाएं जीत कर सदन में पहुंचीं। सदन में इस बार 26 महिला विधायक पहुंचेंगी। इस बार महिला मतदाताओं का वोट परसेंटेज भी 2 फीसदी बढ़ा। 26 महिलाएं सदन में पहुंचीं मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में इस बार कुल 26 महिलाएं चुनी गई। इनमें भाजपा से 21 और कांग्रेस से 5 महिला विधायक हैं। इस बार कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव में 29 और भाजपा ने 27 महिलाओं को टिकिट दिया था। प्रदेश में पांच सीट ऐसी थीं जहां बीजेपी औऱ कांग्रेस दोनों दलों से महिला प्रत्याशी आमने सामने थीं। यानि महिला का मुकाबला महिला से था। महिलाओं के वोट प्रतिशत में इजाफा इस बार विधानसभा चुनाव में ये बात भी खास रही कि पहले के मुकाबले ज्यादा महिलाओं ने मतदान किया। 2018 में 74.03 फीसदी महिलाओं ने मतदान किया था। 2023 में ये 76.03 फीसदी रहा। इस बार प्रदेश की 34 सीटें महिला मतदाता बहुल थीं।5 सीटों पर सीधा मुकाबला1-नेपानगर – भाजपा की मंजू दादू ने कांग्रेस की गेंदा बाई को हराया2-भीकनगांव में कांग्रेस की झूमा सोलंकी ने भाजपा की नंदा ब्राहणे को हराया3-धार में भाजपा की नीना वर्मा ने कांग्रेस की प्रभा गौतम को हराया4-पंधाना में भाजपा की छाया मोड़ ने कांग्रेस की रुपाली नंदू को हराया5-रैगाँव में भाजपा की प्रतिमा बागरी ने कांग्रेस की कल्पना वर्मा को हराया

कमलनाथ के नेतृत्व में ऐतिहासिक हार ने ,कांग्रेस को उप्र की तरह रसातल में धकेल दिया

भोपाल। मप्र में कांग्रेस नेता जमीनी नब्ज से बेखबर कैबिनेट बना रहे थे. पीसीसी पर बधाई के होर्डिग लगा रहे थे. नकुलनाथ चुनावी अभियान में 7 दिसंबर को उनके पिता कमलनाथ के मुख्यमंत्री की शपथ समारोह के लिए निमंत्रण बांट रहे थे। कांग्रेस नेताओं में इतनी गलतफहमी कैसे आई, इस पर शोध की जरूरत है। कमलनाथ ने मध्यप्रदेश की कांग्रेस को यूपी के रास्ते पर डाल दिया है. यह ढलान उत्तर भारत में कांग्रेस के रहे-सहे वजूद को भी रसातल पर पहुंचा देगा। बुढ़ापे में CM की कुर्सी से प्यार कमलनाथ और कांग्रेस को ही ले डूबा। अगर किसी युवा को नेतृत्व का मौका दिया गया होता तो इतनी शर्मनाक हार शायद नहीं होती। कमलनाथ के इर्द-गिर्द सलाहकारों और दिग्विजय सिंह और सुरेश पचौरी जैसे चूके हुए नेताओं की प्रवीणता का ऐसा जाल बन गया था कि कमलनाथ को सच्चाई दिखाई ही नहीं पड़ रही थी। सपनों का महल ऐसा बना लिया गया था कि ‘जय जय कमलनाथ’ के अलावा कांग्रेसी विचारधारा के लोग भी नाशुक्रे लगने लगे थे। कमलनाथ की छिंदवाड़ा से जो राजनीति शुरू हुई थी, वह राजनीति छिंदवाड़ा से ही खत्म होती दिखाई पड़ रही है। अभी भी वक्त है। उम्र के आखिरी पड़ाव पर अगर सच्चाई स्वीकार कर ली जाएगी तो जिंदगी का आखिरी दौर सुकून से बीत सकेगा अन्यथा चाटुकारों और सलाहकारों की गलतफहमी तो सब कुछ समाप्त ही कर देती है। कांग्रेस की हार ने यह भी साबित कर दिया है कि 2018 में कांग्रेस को जो भी बहुमत मिला था उसमें ज्योतिरादित्य सिंधिया का योगदान था। पार्टी की नहीं, कमलनाथ -दिग्विजय की हार बीजेपी के 18 साल की सरकार के बाद भी कांग्रेस की पराजय नहीं बल्कि कमलनाथ- दिग्विजय सिंह जोड़ी की ही हार है. मध्यप्रदेश को लेकर दो दिन पहले जब एग्जिट पोल आए थे, तब सबसे ज्यादा विवाद कांग्रेस द्वारा पैदा किया गया था। एग्जिट पोल वाली एजेंसी और उनके मालिकों को ऐसा साबित कर दिया गया था कि जैसे उन्होंने सरकार से पैसा लेकर एग्जिट पोल बीजेपी के पक्ष में दिखाया है। सोशल मीडिया में तो यहां तक लिखा गया कि एग्जिट पोल में बीजेपी की प्रचंड जीत दिखाने वाली एजेंसियों को सरकार के जनसंपर्क विभाग द्वारा करोड़ों रुपए की मदद दी गई है। विभाग के नाम पर चैनल की एक सूची भी सोशल मीडिया पर वायरल की गई। कांग्रेस और कांग्रेस समर्थित मीडिया से जुड़े लोग इस हद तक एक तरफा निर्णय सुना रहे थे कि जनसंपर्क के कुशल अधिकारियों की कार्य पद्धति को भी सवालों में खड़ा कर दिया था।

कटनी जिले की चारो विधानसभा सीटों से कांग्रेस का सूपड़ा साफ, भाजपा का कब्जा लहराया जीत का परचम.

Congress faced a clean sweep in all four assembly seats of Katni district, as the BJP waved the victory flag, securing control. भाजपा के संजय सत्येंद्र पाठक, संदीप जायसवाल, प्रणव पांडे व धीरेंद्र सिंह विजयी हुए कटनी। जिले चारों विधानसभा सीटों पर भाजपा का कब्जा ,जिले की चारों विधानसभा में भाजपा की प्रचण्ड विजय निश्चित हुई है। विजयराघवगढ़ से भाजपा प्रत्याशी संजय सत्येंद्र पाठक ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी नीरज सिंह बघेल से 24 हजार 346 मतों से विजय पाई। यहां भाजपा को 98010 मत तो कांग्रेस को 73654 मत प्राप्त हुए। बहोरीबंद से भाजपा के प्रणय पांडे को 98817 मत मिले तो कांग्रेस के सौरभ सिंह को 71195 मत मिले इस प्रकार भाजपा के प्रणय 23 हजार 622 मतों से विजयी हुए। बड़वारा से भाजपा के धीरेंद्र सिंह को 112916, तो कांग्रेस के बसंत सिंह को 61923 मत प्राप्त हुए। इस विधानसभा में भाजपा प्रत्याशी रिकार्ड 50 हजार 993 मतों से विजयी हुए। मुड़वारा विधानसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी को 89061 मत तो कांग्रेस प्रत्याशी मिथलेश जैन को 64 हजार 105 मत प्राप्त हुए इस प्रकार भाजपा प्रत्याशी संदीप जायसवाल 24 हजार 956 मतों से विजयी घोषित हुए।

ईव्हीएम एवं और मतगणना अभिलेखों का सीलिंग कार्य संपन्न

कलेक्टर जिला पंचायत सीईओ अन्य अधिकारियों ने किया चाय नाश्ता, संपूर्ण हुए शांतिपूर्ण मतदान ”विशेष संवाददाता कटनी” कटनी। जिला निर्वाचन अधिकारी एवं कलेक्टर अवि प्रसाद के कुशल मार्गदर्शन और नेतृत्व में संपन्न हुए शांतिपूर्ण, मतगणना कार्य के उपरांत परिणाम घोषणा के तत्काल बाद ही जिले की सभी चारों विधानसभा क्षेत्र की ईवीएम मशीनों और मतगणना अभिलेखों का रात भर चला सीलिंग कार्य 4 दिसंबर की सुबह 7:30 बजे पूरा हुआ। इसके बाद कलेक्टर सहित सभी अधिकारियों ने झंडा बाजार पहुंच कर एक दुकान में जलपान किया। यहां अधिकारियों ने गरमागरम आलूबंडा और पोहा का नाश्ता किया। इस दौरान जिला पंचायत सीईओ शिशिर गेमावत, उपजिला निर्वाचन अधिकारी एवं अपर कलेक्टर साधना परस्ते, डिप्टी कलेक्टर प्रमोद कुमार चतुर्वेदी सहित रिटर्निंग अधिकारी मुड़वारा राकेश कुमार चौरसिया, रिटर्निंग अधिकारी बहोरीबंद प्रदीप मिश्रा और विजयराघवगढ के रिटर्निंग अधिकारी महेश मंडलोई सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

मप्र में कांग्रेस की हार के जिम्मेदार कमलनाथ, तीन राज्यों में हार के बाद बोले संजय राउत.

In Madhya Pradesh, Kamal Nath spoke after the losses in three states, said Sanjay Raut. कांग्रेस को इस पर आत्म मंथन करना चाहिए चुनाव से पहले महिलाओं को सीधे लाभ देने वाली योजनाओं से बीजेपी को फायदा हुआ मुंबई। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में कांग्रेस की हार हो चुकी है। सिर्फ तेलंगाना ही ऐसा राज्य है जहां कांग्रेस की सरकार बनने जा रही है। कांग्रेस की हार पर विभिन्न नेताओं और राजनीतिक पंडितों के बयान सामने आ रहे हैं। इसी क्रम में शिवसेना नेता और सांसद संजय राउत का भी बयान सामने आया है। हार पर कांग्रेस को आत्मनिरीक्षण करना चाहिए संजय राउत ने मध्य प्रदेश में कांग्रेस की हार का जिम्मेदार कमलनाथ को बताया है। उन्होंने आगे कहा कि तेलंगाना में एआईएमआईएम फैक्टर और केसीआर काम नहीं आए। जहां तक राजस्थान की बात है, ये पारंपरिक चलन है। वहां हर 5 साल के बाद सरकार बदल जाती है। छत्तीसगढ़ की हार को लेकर संजय राउत ने कहा कि कांग्रेस को इस बात पर आत्मनिरीक्षण करना चाहिए। मध्यप्रदेश में बीजेपी की जीत का श्रेय संजय राउत ने शिवराज सिंह चौहान को दिया है। उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले महिलाओं को सीधे लाभ देने वाली योजनाओं से बीजेपी को बहुत फायदा हुआ। कांग्रेस ने चुनाव में क्षेत्रीय पार्टियों को किया नजर अंदाज सं‌‌जय राउत ने इस चुनाव में क्षेत्रीय पार्टियों की भूमिका पर कहा कि अगर कांग्रेस इंडिया अलायंस के साथियों को साथ लेकर लड़ती तो स्थिति कुछ बेहतर होती। सिर्फ राहुल गांधी और प्रियंका गांधी जैसे लोगों के प्रचार करने से कुछ नहीं होगा। क्षेत्रीय पार्टियों को नजरअंदाज कर आप देश में राजनीति नहीं कर पाएंगे। पनौती शब्द को लेकर संजय राउत ने कहा कि अगर पनौती शब्द राहुल गांधी पर उल्टा पड़ा होता तो तेलंगाना में ऐसा कुछ क्यों नहीं हुआ। भाजपा का हश्र टीम इंडिया की तरह ही होगा संजय राउत ने बताया कि 6 दिसंबर को इंडिया एलायंस की बैठक बुलाई गई है। जहां कई बातों पर चर्चा की जाएगी। इंडिया एलायंस मजबूत है। जिस तरह से वर्ल्ड कप के दौरान टीम इंडिया ने लगातार 10 मुकाबले जीते लेकिन फाइनल में मुकाबला टीम इंडिया हार गई वैसा ही हश्र 2024 के चुनाव में भाजपा का होगा।

भारतीय जनता पार्टी की अभी तक 17 सीटों पर जीत कांग्रेस के पाले में सिर्फ 6 सीटें आयी और भारत आदिवासी पार्टी के खाते  में 1 सीट आयी.

Bhartiya Janta party won 17 seats, Congress 6 and Bharat Adiwasi Party won 1 Seat in Madhya Pradesh Vidhaansabha Elections. Manish Trivedi – Sahara Samachaar.भोपाल,  चुनाव आयोग से प्राप्त जानकारी के अनुसार अभी तक भारतीय जनता पार्टी ने १७ सीटों पर अपनी जीत दर्ज़ की है इसमें पन्ना से बृजेन्द्र प्रताप सिंह, मऊगंज से प्रदीप पटेल, रेवा से राजेंद्र शुक्ला, कोतमा से दिलीप जैस्वाल, अनूपपुर से विसाहु लाल सिंह, सिहोरा से संतोष वरकड़े, होशंगाबाद से सीता सरन शर्मा, बरस्या से विष्णु खत्री, शुजालपुर से इन्दर सिंह परमार, देवास से गायत्री राजे, खातेगांव से आशीष गोविन्द शर्मा, पदारना से छाया मोरे, नेपानगर से मंजू राजेंद्र दाऊ, बुरहानपुर से अर्चना चिटनीस, अलीराजपुर से चौहान नगर सिंह, बड़नगर से जीतेन्द्र उदय सिंह, रतलाम ग्रामीण से मथुरा लाल डामर, जौरा से राजेंद्र पांडेय और आलोट से चिंतामणि मालवीय ने अपनी जीत दर्ज की है. वही कांग्रेस पार्टी से शेओपुर से बाबू जंडेल, बिछिया से नारायण सिंह, निवास से चैनसिंह वरकड़े, अमरवाड़ा से कमलेश प्रताप सहाय, पांढुर्ना से नीलेश पुसाराम उइके और बड़वानी से राजन. मंडलोई. वही अभी तक प्राप्त जानकारी के अनुसार भारतीय आदिवासी पार्टी ने अपना खाता खोलने में सफलता प्राप्त की है. भारतीय आदिवासी पार्टी से सैलाना विधानसभा क्षेत्र से कमलेश्वर डोडियार ने अपनी जीत दर्ज की है. विजयी उम्मदवारो के लिस्ट देखने के लिए यहाँ क्लिक करैं 

लाड़ली बहनों ने कर दी शिवराज भइया की राह आसान।

भाजपा का 150 प्लस का दावा सच साबित होता हुआ नजर आ रहा है।कांग्रेस पार्टी और कमलनाथ के वादों पर जनता ने नहीं किया भरोसा। उदित नारायण भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव की मतगणना जैसे जैसे आगे बढ़ रही है। वैसे ही प्रदेश के चुनाव परिणामों की तस्वीर साफ होती जा रही है। हालांकि अभी पूरी तरह किसी ठोस निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी लेकिन अभी तक की मतगढना के दौरान मिल रहे रुझानों ने भाजपा नेताओं के 150 से अधिक सीटों पर चुनाव जीतने के दावे को सच कर दिया है और मध्य प्रदेश की जनता ने स्पष्ट कर दिया है की मध्य प्रदेश की आम जनता भाजपा के साथ है। इसके साथ ही सीएम शिवराज सिंह चौहान की लाड़ली बहनों ने भी अपने भाई की जीत के लिए मतदान में हिस्सा लिया और चुनाव परिणाम को भाजपा के पक्ष में लाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। मतदान के समय से लेकर बीती रात तक सभी राजनेतिक पार्टियों के नेताओं और कार्यकर्ताओं के अपनी अपनी पार्टी की जीत और सरकार बनाने को लेकर बड़े बड़े दावे किए जा रहे थे। इस चुनाव प्रक्रिया के दौरान नेता अपने समर्थकों का मन समझने में ही मात खा रहे थे, तो जनता का मन पढ़ना तो वैसे भी आसान नहीं था और इसी का परिणाम है कि सभी के दावे रखे रह गए। जनता ने यह साफ कर दिया है कि किसी के भी कहने से कुछ नहीं होता जो कुछ होता है वह आम जनता की इच्छा से होता है और जनता ने भाजपा को अपना मत रूपी आशीर्वाद और समर्थन देकर इस बात को स्पष्ट कर दिया है। अभी तक की मतगणना में यह तो साफ हो गया है कि मध्य प्रदेश में फिर से भाजपा सरकार बनाने के लिए तैयार है बस अब देखना यह है की कुल कितनी सीटें स्पष्ट बहुमत के साथ भाजपा के खाते में आती हैं, वहीं दूसरी बात यह भी ध्यान देने योग्य है की मध्य प्रदेश में भाजपा और कांग्रेस के दिग्गज नेता जो चुनाव मैदान में उतरे थे उनमें से किसे जनता का आशीर्वाद मिलेगा और कौन क्लीन बोल्ड होगा। हम आपको याद दिला दें की सहारा समाचार ने मतदान के पूर्व ही स्पष्ट रूप से दावा किया था कि इस बार के चुनाव में दोनों ही दलों के द्वारा मैदान में उतारे गए दिग्गज नेताओं को लेने के देने पड़ेंगे। साथ ही कई परंपरागत सीटों पर चौंकाने वाले ऐसे परिणाम सामने आएंगे जिनका किसी ने भी अनुमान नहीं लगाया होगा। दूसरे दावे के अनुसार मध्य प्रदेश में फिर से भाजपा की सरकार बनने के चांस 65% और कांग्रेस पार्टी के सत्ता में आने के चांस 35% हैं। सहारा समाचार के यह दोनों ही दावे सत्य होते नजर आ रहे हैं। चुनाव परिणाम की तस्वीर साफ हो चुकी है परिणाम भी सामने आने लगे हैं। कुछ सीटों पर हार जीत भी डीक्लियर हो चुकी है। कुछ देर की बात है बहुत जल्द पूर्ण चुनाव परिणाम सामने आ जायेंगे।

बागली, विधानसभा सीट, मध्य प्रदेश चुनाव परिणाम (2023)

Bagali, Assembly Seat, Madhya Pradesh Election Result (2023) विधानसभा क्षेत्र 174 – Bagali (मध्य प्रदेश), के सामान्य निर्वाचन: प्रवृत्तियाँ और परिणाम दिसंबर-2023 राउंड के रूप में स्थिति। बीजेपी : आगे (Maru Bhawara BJP – 56320)कांग्रेस : पीछे (Gopal Bhosle INC- 47785)

अमरपाटन, विधानसभा सीट, मध्य प्रदेश चुनाव परिणाम (2023).

Amarpatan, Assembly Seat, Madhya Pradesh Election Result (2023) विधानसभा क्षेत्र 66 – Amarpatan (मध्य प्रदेश), के सामान्य निर्वाचन: प्रवृत्तियाँ और परिणाम दिसंबर-2023 राउंड के रूप में स्थिति। बीजेपी : पीछे (Ramkhelawan Patel BJP – 21028)कांग्रेस : आगे ( Dr Rajendra Kumar Singh INC – 24999)

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