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होर्मुज पर ट्रंप की योजना को झटका, जापान और ऑस्ट्रेलिया ने किया इंकार, साउथ कोरिया ने कहा- हम सोचेंगे

वाशिंगटन अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध (US-Iran War) में ईरानी घमकियों के मद्देनजर डोनाल्ड ट्रंप ने सहयोगी देशों से Hormuz Strait की सुरक्षा के लिए युद्धपोत भेजने की अपील की थी. दुनिया के 20% तेल की आवाजाही के लिए जरूरी इस समुद्री रूट को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति आर-पार के मूड में हैं और बड़ा बयान देते हुए कहा कि ये देखना दिलचस्प होगा कि कौन से देश हमारे अनुरोध को ठुकराते हैं और हमारी मदद के लिए युद्धपोत नहीं भेजता है. इस बीच बता दें कि जापान से लेकर ऑस्ट्रेलिया और तुर्की तक ने होर्मुज में अपने युद्धपोत भेजने से लगभग इनकार कर दिया है। ट्रंप बोले- हम 7 देशों से कर रहे बात  होर्मुज को लेकर ईरान की धमकियों (Iran Warnings On Hormuz) के बीच ट्रंप ने कई देशों से युद्धपोत भेजने का आह्वान बीते दिनों किया था. इस बीच एयर फोर्स वन में बोलते हुए Donald Trump ने कहा कि वह होर्मुज की निगरानी के लिए अन्य देशों से सहयोग के लिए बातचीत कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि उनका प्रशासन Hormuz Strait की सुरक्षा को लेकर 7 देशों से बातचीत कर रहा है. ट्रंप ने ईरान युद्ध के तीसरे हफ्ते में प्रवेश करने के साथ क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर इसके प्रभाव पर जोर दिया। ‘मदद करे तो अच्छा, न करे तो बहुता अच्छा’ Donald Trump होर्मुज स्ट्रेट को लेकर पूरी तर अब आर-पार के मूड में नजर आ रहे हैं और सहयोगी देशों से मदद की अपील में भी उनकी सख्ती साफ झलक रही है. उन्होंने कहा है कि अगर ये देश हमारी मदद करते हैं तो बहुत अच्छा है और अगर नहीं करते हैं, तो भी बहुत अच्छा है. ट्रंप ने आगे कहा कि यह देखना दिलचस्प होगा कि कौन सा देश Hormuz Strait को खुला रखने जैसे छोटे से प्रयास में हमारी मदद नहीं करेगा। इन देशों से सहयोग की आस राष्ट्रपति ने कहा कि खाड़ी देशों के तेल पर निर्भर देशों को होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा की जिम्मेदारी लेनी ही चाहिए. मैं मांग करता हूं कि ये देश आगे आएं और अपने क्षेत्र की रक्षा करें, क्योंकि यह उनका क्षेत्र है, यह वह स्रोत है जहां से उन्हें ऊर्जा मिलती है. हालांकि ट्रंप ने सभी 7 देशों का नाम नहीं लिया, लेकिन उन्होंने उम्मीद जताते हुए कहा कि कई देश होर्मुज के जरिए होने वाले तेल यातायात को सुचारू रखने के लिए युद्धपोत भेजेंगे. उन्होंने चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया और ब्रिटेन का नाम उन देशों में लिया, जिनसे उन्हें सहयोग की उम्मीद है. हालांकि, किसी भी देश ने अभी तक ट्रंप की इस अपील पर आगे आकर अपनी प्रतिक्रिया नहीं दी है और न ही युद्धपोत भेजे हैं। जापान-ऑस्ट्रेलिया से तुर्की तक का इनकार ट्रंप के युद्धपोत भेजने की अपील पर जापान का कहना है कि अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दूसरे देशों से होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा में मदद के लिए वॉरशिप भेजने को कहा था, लेकिन वह समुद्री सुरक्षा ऑपरेशन पर विचार नहीं कर रहा है. जापानी प्रधानमंत्री (Japan PM) का कहना है कि जापान को अभी तक US से होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों को एस्कॉर्ट करने के लिए अपनी नेवी भेजने का रिक्वेस्ट नहीं मिला है, इसलिए जवाब देना मुश्किल है। वहीं दूसरी ओर एएफपी की रिपोर्ट की मानें, तो ऑस्ट्रेलिया का कहना है कि ट्रंप के रिक्वेस्ट के बाद वह होर्मुज स्ट्रेट में नेवी शिप नहीं भेजेगा. नाटो में अमेरिका के पार्टनर तुर्की ने इस जंग से पहले ही पल्ला झाड़ लिया है. वहीं साउथ कोरिया इस बात पर ध्यान से विचार करने की बात कह रहा है कि होर्मुज स्ट्रेट में अपना वॉरशिप तैनात किया जाए या नहीं। फ्रांस ने भी झाड़ लिया पल्ला  न सिर्फ जापान, कोरिया, तुर्की और ऑस्ट्रेलिया, बल्कि अब फ्रांस की रक्षा मंत्री कैथरीन वॉट्रिन ने भी ट्रंप के अनुरोध पर दो टूक जबाव दिया है. उन्होंने कहा है कि जब तक युद्ध बढ़ता रहेगा, फ्रांस Hormuz Strait में अपने जंगी जहाज नहीं भेजेगा. वहीं जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वेडेफुल ने ऑपरेशन के बढ़ने की संभावना पर शक जताया और जर्मन ब्रॉडकास्टर ARD को बताया कि EU मिशन असरदार नहीं था, इसीलिए मुझे बहुत शक है कि एस्पाइड्स को होर्मुज तक बढ़ाने से ज्यादा सुरक्षा मिलेगी। ईरान की झमता लगभग खत्म! अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपनी बात को दोहराते हुए कहा कि ईरान की उत्पादन क्षमता लगभग खत्म हो चुकी है, यही कारण है कि वह कम मिसाइलें दाग रहा है. ऐसे में होर्मुज की सुरक्षा और निगरानी का यह एक छोटा प्रयास है, हमने पहले ही ईरान की उत्पादन क्षमता को पूरी तरह नष्ट कर दिया है. उसकी ओर से मिसाइलें ही नहीं, बल्कि दागे जा रहे ड्रोनों की संख्या भी बहुत कम हो गई है और ये पहले की तुलना में करीब 20% रह गए हैं। इन देशों से सहयोग की उम्मीद हालांकि ट्रंप ने सभी सात सरकारों का नाम नहीं लिया, लेकिन उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि कई देश होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरने वाले समुद्री यातायात को सुचारू रखने के लिए युद्धपोत भेजेंगे, जहां से दुनिया के 20 प्रतिशत तेल का परिवहन होता है। उन्होंने चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया और ब्रिटेन का नाम उन देशों में लिया जिनसे उन्हें सहयोग की उम्मीद है।  इतना खास क्यों है Hormuz? स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से वो देश सबसे ज्यादा प्रभावित हैं जो सीधे तौर पर इस चोक पॉइंट से जुड़े हैं और तेल आयात पर निर्भर हैं. भारत और चीन जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाएं भी सीधे तौर पर इस रास्ते पर निर्भर हैं. ऐसे में यहां रुकावट इनकी आर्थिक हालात बिगड़ने में अहम रोल निभा सकती हैं. बता दें कि होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का सबसे अहम चोक पॉइंट है, जहां से रोजाना लगभग 20 मिलियन बैरल तेल, यानी दुनिया की कुल खपत का करीब 20 प्रतिशत, गुजरता है. इसके साथ ही दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) भी इसी रास्ते से भेजी जाती है।

कान्यकुब्ज समाज की छत्तीसगढ़ के विकास में योगदान पर CM साय ने दी महत्वपूर्ण प्रतिक्रिया

कान्यकुब्ज समाज छत्तीसगढ़ के विकास में निभा रहा महत्वपूर्ण भूमिका : मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय रायपुर  छत्तीसगढ़ में कान्यकुब्ज ब्राह्मण समाज का इतिहास गौरवशाली रहा है और यह समाज प्रदेश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर के आशीर्वाद भवन में आयोजित कान्यकुब्ज शिक्षा मंडल के होली मिलन समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज को एक सूत्र में जोड़ने के साथ-साथ नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं से जोड़ने का अवसर प्रदान करते हैं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट सेवाएं देने वाले लोगों को सम्मानित भी किया। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रदेश में गोधन संरक्षण और गौसेवा को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। इसी कड़ी में राज्य में गौधाम योजना की शुरुआत की गई है। इस योजना के तहत प्रदेश के सभी जिलों में चरणबद्ध रूप से गौधाम स्थापित किए जाएंगे, जहां बेसहारा और घुमंतू गौवंश को सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में शासकीय भूमि पर स्थापित सभी गौधाम अब “सुरभि गौधाम” के नाम से जाने जाएंगे।  इन गौधामों में पशुपालन, हरा चारा उत्पादन तथा गोबर से उपयोगी उत्पाद तैयार करने से संबंधित प्रशिक्षण कार्यक्रम भी संचालित किए जाएंगे, जिससे स्वरोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ का प्रभु राम से विशेष संबंध है। छत्तीसगढ़ माता कौशल्या का मायका और प्रभु राम का ननिहाल है। उन्होंने कहा कि  रामलला दर्शन योजना के तहत अब तक 42 हजार से अधिक रामभक्तों को अयोध्या में प्रभु राम के दर्शन कराए जा चुके हैं। वहीं मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना के अंतर्गत बुजुर्गों को विभिन्न तीर्थस्थलों का दर्शन कराया गया है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा “बिजली बिल भुगतान समाधान योजना 2026” की शुरुआत की गई है। इस योजना के तहत 28 लाख 42 हजार उपभोक्ताओं को 757 करोड़ रुपये से अधिक की राहत मिलेगी। योजना का लाभ लेने के लिए उपभोक्ता मोर बिजली ऐप के माध्यम से पंजीयन कर सकते हैं। इसके लिए राज्यभर में समाधान शिविरों का आयोजन भी किया जाएगा। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने औषधि पादप बोर्ड के उपाध्यक्ष  अंजय शुक्ला तथा कान्यकुब्ज सभा शिक्षा मंडल के पदाधिकारियों सहित सभी आयोजकों को आयोजन के लिए बधाई और शुभकामनाएं दीं।  इस अवसर पर छत्तीसगढ़ स्टेट सिविल सप्लाईज कार्पोरेशन के अध्यक्ष  संजय वास्तव, कान्यकुब्ज सभा-शिक्षा मंडल के अध्यक्ष  सुरेश मिश्रा, पत्रकार शिरीष मिश्रा, राजेश मिश्रा अरविन्द अवस्थी, मोहन तिवारी, गौरव शर्मा सहित बड़ी संख्या में कान्यकुब्ज समाज के गणमान्यजन उपस्थित थे।

काटजू अस्पताल में शुरू हुआ हाईटेक प्रिवेंटिव गायनेकोलॉजी सेंटर, मेनोपॉज और इन्फर्टिलिटी का इलाज एक ही जगह

भोपाल भोपाल के शासकीय कैलाश नाथ काटजू अस्पताल में महिलाओं के लिए एक बड़ी और आधुनिक स्वास्थ्य सुविधा शुरू होने जा रही है। यहां “स्टेट ऑफ द आर्ट सेंटर फॉर प्रिवेंटिव गायनेकोलॉजी एंड इन्फर्टिलिटी” स्थापित किया जा रहा है।  करीब तीन करोड़ रुपए की लागत से आधुनिक और हाईटेक मशीनें अस्पताल में पहुंच चुकी हैं और उनके इंस्टालेशन का काम लगभग पूरा हो गया है। अधिकारियों के अनुसार, इस सेंटर को नवरात्र के दौरान शुरू किए जाने की तैयारी है। इस सेंटर के शुरू होने से मेनोपॉज, निसंतानता, पीसीओएस, मोटापा, अनियमित मासिक धर्म और सर्वाइकल कैंसर जैसी महिलाओं से जुड़ी कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का इलाज एक ही स्थान पर उपलब्ध होगा। अभी तक इन बीमारियों के इलाज के लिए महिलाओं को अलग-अलग अस्पतालों और विशेषज्ञों के पास जाना पड़ता था, लेकिन अब जांच से लेकर उपचार तक की सभी सुविधाएं एक ही छत के नीचे मिल सकेंगी। किशोरियों से महिलाओं तक 100 से अधिक रोगों का इलाज इस नए सेंटर में किशोरियों से लेकर वयस्क महिलाओं तक की स्वास्थ्य समस्याओं के लिए विशेष व्यवस्था की जाएगी। यहां महिलाओं से जुड़े 100 से अधिक रोगों की जांच और इलाज की सुविधा उपलब्ध होगी। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, सेंटर के लिए ग्राउंड फ्लोर और ऊपरी मंजिलों में स्थान तय कर दिया गया है। यहां प्रजनन स्वास्थ्य से लेकर गर्भाशय कैंसर तक की बीमारियों के इलाज की व्यवस्था होगी। मेनोपॉज और हार्मोनल समस्याओं के लिए विशेष सुविधा काटजू अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ और सेंटर की स्टेट नोडल अधिकारी डॉ. रचना दुबे के अनुसार महिलाओं में आमतौर पर 45 से 50 वर्ष की उम्र के बीच मेनोपॉज की स्थिति शुरू होती है। इस दौरान शरीर में एस्ट्रोजेन हार्मोन का स्तर कम होने लगता है, जिससे हड्डियों से जुड़ी समस्याएं, हार्मोनल असंतुलन और कई अन्य स्वास्थ्य समस्याएं सामने आती हैं। नए सेंटर में इन सभी समस्याओं के लिए विशेष परामर्श, जांच और उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इन्फर्टिलिटी और गर्भधारण से जुड़ी समस्याओं का इलाज इस सेंटर में बांझपन यानी इन्फर्टिलिटी से जुड़ी समस्याओं के इलाज पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। यहां पीसीओएस, फाइब्रॉइड, हार्मोनल असंतुलन और अन्य स्त्री रोगों की जांच आधुनिक तकनीकों के माध्यम से की जाएगी। गर्भधारण में आ रही समस्याओं को दूर करने के लिए आईयूआई जैसी आधुनिक तकनीकों का भी उपयोग किया जाएगा। सर्वाइकल कैंसर की शुरुआती पहचान महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर की समय पर पहचान बेहद महत्वपूर्ण होती है। इस सेंटर में वीआईए तकनीक के माध्यम से कैंसर की शुरुआती जांच की जाएगी। इस तकनीक की मदद से गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर का प्रारंभिक चरण में ही पता लगाया जा सकेगा, जिससे समय रहते इलाज संभव हो सकेगा और महिलाओं की जान बचाई जा सकेगी। आधुनिक मशीनों से होगा इलाज केगेल चेयर- पेल्विक फ्लोर मांसपेशियों को मजबूत करने वाली मशीन है। जिन महिलाओं को बच्चेदानी या पेल्विक मांसपेशियों के ढीले होने की समस्या होती है, उनमें बिना सर्जरी के उपचार संभव हो सकेगा। कोलपोस्कोप- मशीन के जरिए गर्भाशय ग्रीवा, योनि और संबंधित अंगों की गहन जांच की जाएगी। लेजर मशीन- इसके माध्यम से सिस्ट, मेनोपॉज से जुड़ी समस्याएं और यूरीन लीक जैसी बीमारियों का इलाज आसान हो जाएगा। रोगों की रोकथाम पर रहेगा विशेष फोकस विशेषज्ञों के अनुसार, यह सेंटर केवल इलाज तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि महिलाओं में रोगों की रोकथाम और शुरुआती पहचान में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। खराब जीवनशैली और बदलती जीवनशैली के कारण महिलाओं में कई स्वास्थ्य समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। इसकी शुरुआत अक्सर पीसीओएस जैसी बीमारी से होती है। किशोरियों में बढ़ रही पीसीओएस की समस्या विशेषज्ञों के अनुसार, वर्तमान समय में हर चार में से एक किशोरी में पीसीओएस के लक्षण देखने को मिल रहे हैं। वहीं अस्पतालों में आने वाली महिलाओं में भी लगभग आधी महिलाएं इसी समस्या से प्रभावित होती हैं। ऐसे में इस सेंटर के माध्यम से समय पर जांच और उपचार की सुविधा मिलने से महिलाओं को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। शिक्षा कार्यक्रम भी चलेंगे सेंटर की इंचार्ज डॉ. रचना दुबे के अनुसार इस सेंटर की तैयारी पिछले कई महीनों से की जा रही है और उम्मीद है कि यह क्लीनिक जल्द ही शुरू हो जाएगा। उन्होंने बताया कि यहां केवल जांच और इलाज ही नहीं होगा, बल्कि महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता और शिक्षा कार्यक्रम भी संचालित किए जाएंगे।  

8वें वेतन आयोग के तहत 35% सैलरी वृद्धि, जनवरी से मिलेगा एरियर! केंद्रीय कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण जानकारी

नई दिल्ली भारत सरकार द्वारा नवंबर 2025 में आधिकारिक तौर पर गठित 8वां केंद्रीय वेतन आयोग जल्द ही 7वें वेतन आयोग का स्थान लेगा, जो 2016 से प्रभावी है।भारत सरकार ने आधिकारिक तौर पर 8वें केंद्रीय वेतन आयोग की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जो एक बड़ा कदम है और लाखों कर्मचारियों और सेवानिवृत्तों के वेतन, पेंशन और भत्तों में व्यापक बदलाव लाएगा। वित्त मंत्रालय वर्तमान में एक ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से कर्मचारियों, पेंशनभोगियों, कर्मचारी संघों और अन्य हितधारकों से 8वें वेतन आयोग की अंतिम रिपोर्ट को तैयार करने में सहायता हेतु सुझाव आमंत्रित कर रहा है। यह सुझाव आमंत्रित करने की अंतिम तिथि 30 अप्रैल, 2026 है। नवंबर 2025 में औपचारिक अधिसूचना जारी होने के बाद से आयोग को अपनी सिफारिशों को अंतिम रूप देने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। यह समीक्षा भारत में वेतन संशोधनों के लंबे इतिहास के बाद हो रही है—हाल ही में 2016 में 7वां वेतन आयोग आया था—और हालांकि न्यूनतम वेतन बढ़ाने के लिए उच्च फिटमेंट फैक्टर को लेकर काफी अटकलें लगाई जा रही हैं, लेकिन अंतिम वित्तीय समायोजन तभी होंगे जब सरकार आयोग की अंतिम रिपोर्ट को मंजूरी देगी। 7वें वेतन आयोग के तहत, केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए न्यूनतम मूल वेतन बढ़ाकर 18,000 रुपये कर दिया गया था, जबकि अधिकतम मूल वेतन 2.5 लाख रुपये प्रति माह तय किया गया था। कर्मचारियों को बकाया कब मिलेगा? 8वें वेतन आयोग के तहत, सरकार द्वारा अंतिम सिफारिशों को मंजूरी देने में कितना भी समय लगे, 1 जनवरी, 2026 से पूर्वव्यापी बकाया मिलने की उम्मीद है। CA मनीष मिश्रा, GenZCFO के संस्थापक के अनुसार, “बकाया राशि की गणना संभवतः 1 जनवरी, 2026 से की जाएगी, जो 7वें वेतन आयोग की अंतिम तिथि निर्धारित की गई है, भले ही आयोग की सिफारिशों को मंजूरी मिलने के बाद भुगतान किया जाए।” कर्मचारियों को कितनी वेतन वृद्धि की उम्मीद हो सकती है? विशेषज्ञों का अनुमान है कि 8वें वेतन आयोग के तहत वेतन में 20-35% की संभावित वृद्धि होगी, जिसमें फिटमेंट फैक्टर 2.4 और 3.0 के बीच रहने की संभावना है। कितनी बढ़ेगी सैलरी अगर पिछली वेतन आयोगों की बात करें तो हर बार वेतन में अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिली है। 7वें वेतन आयोग के लागू होने पर केंद्रीय कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी बढ़ाकर 18,000 रुपये कर दी गई थी, जबकि अधिकतम बेसिक सैलरी 2.5 लाख रुपये प्रति माह तय की गई थी। अब 8वें वेतन आयोग को लेकर कर्मचारियों में उम्मीद है कि इस बार भी सैलरी में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। फिटमेंट फैक्टर पर चर्चा सबसे बड़ी चर्चा फिटमेंट फैक्टर को लेकर हो रही है। फिटमेंट फैक्टर वही गुणांक होता है, जिससे मौजूदा बेसिक सैलरी को गुणा करके नई सैलरी तय की जाती है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस बार फिटमेंट फैक्टर 2.4 से 3.0 के बीच हो सकता है। अगर ऐसा होता है तो कर्मचारियों की सैलरी में लगभग 20% से 35% तक बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। हालांकि अंतिम फैसला आयोग की सिफारिशों और सरकार की मंजूरी के बाद ही होगा। कर्मा मैनेजमेंट ग्लोबल के प्रतीक वैद्य के अनुसार, 8वें वेतन आयोग के अंतिम आंकड़े मुद्रास्फीति के रुझान, सरकार की वित्तीय स्थिति और 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों पर निर्भर करेंगे। इंडिया टुडे के अनुसार, उन्होंने कहा, “6वें वेतन आयोग ने लगभग 40% की औसत वृद्धि दी, जबकि 7वें वेतन आयोग का वेतन और भत्तों पर समग्र प्रभाव लगभग 23-25% के आसपास माना जाता है, जिसमें एक समान फिटमेंट फैक्टर 2.57 है।” “अंतिम आंकड़ा अगले 12-18 महीनों में मुद्रास्फीति, 16वें वित्त आयोग के बाद उपलब्ध राजकोषीय संसाधनों, करों में वृद्धि और राजनीतिक इच्छाशक्ति पर निर्भर करेगा। मेरा मानना ​​है कि सरकार भत्तों और महंगाई भत्ते में समायोजन की अधिक संतुलित संरचना के साथ एक स्पष्ट और प्रभावी वृद्धि देने का प्रयास करेगी।”

16 मार्च को दिल्ली में पीएम मोदी से मुलाकात करेंगे CM यादव, मंत्रिमंडल विस्तार और प्रशासनिक बदलाव पर फैसला

भोपाल मध्य प्रदेश की राजनीति में आगामी 16 मार्च का दिन बेहद अहम होने जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सोमवार को दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे। इस हाई-प्रोफाइल बैठक को लेकर राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज है, क्योंकि माना जा रहा है कि इस मुलाकात के बाद प्रदेश सरकार में कई बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। मंत्रिमंडल विस्तार: नए चेहरों को मिल सकती है जगह, इस दौरे का सबसे बड़ा एजेंडा मंत्रिमंडल विस्तार है। वर्तमान में कैबिनेट में चार पद रिक्त हैं। चर्चा है कि 2028 के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरणों को साधने के लिए सरकार 4 से 5 नए मंत्रियों को शपथ दिला सकती है। अमित शाह के साथ हुई पिछली ‘सीक्रेट मीटिंग’ के बाद अब पीएम मोदी के साथ इस पर अंतिम सहमति बनने की उम्मीद है। माना जा रहा है कि चैत्र नवरात्रि तक प्रदेश को नए मंत्री मिल सकते हैं। बड़े प्रशासनिक फेरबदल की तैयारी: मुलाकात के दौरान केवल राजनीतिक ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक सर्जरी पर भी चर्चा होगी। प्रदेश में आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के तबादलों की एक बड़ी सूची तैयार है। खबर है कि आईएएस रवि सिहाग मध्य प्रदेश छोड़कर केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर जा सकते हैं। इसके साथ ही प्रदेश के दो वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के भी केंद्र में इम्पैनलमेंट की चर्चा है। विकास योजनाओं के लिए केंद्र से बूस्टर डोज: मुख्यमंत्री मोहन यादव प्रधानमंत्री को प्रदेश की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं की प्रगति से अवगत कराएंगे, केन-बेतवा लिंक परियोजना और लाड़ली बहना योजना के सकारात्मक फीडबैक पर चर्चा होगी। प्रदेश में पिछले डेढ़ साल में हुए 30 लाख करोड़ रुपये के MOU और औद्योगिक गलियारों के लिए केंद्र से अतिरिक्त फंड की मांग की जा सकती है। बुनियादी ढांचा परियोजनाओं (Infrastructure Projects) के लिए विशेष बजट की मंजूरी मिलने की भी प्रबल संभावना है। 2028 का ‘रोडमैप’ और बड़े नेताओं की विदाई: बिहार चुनाव में भाजपा की जीत के बाद केंद्रीय नेतृत्व का मुख्यमंत्री मोहन यादव पर भरोसा बढ़ा है। चर्चा है कि इस बार विस्तार में मुख्यमंत्री को ‘फ्री हैंड’ मिल सकता है। ऐसे में कुछ कद्दावर मंत्रियों की छुट्टी कर उन्हें संगठन में भेजा जा सकता है, ताकि 2028 के चुनाव के लिए एक नई और ऊर्जावान टीम तैयार की जा सके। मुख्य बिंदु: तारीख: 16 मार्च (सोमवार) स्थान: दिल्ली। एजेंडा: मंत्रिमंडल विस्तार, प्रशासनिक तबादले और विकास परियोजनाएं। संकेत: चैत्र नवरात्रि तक हो सकता है बड़ा राजनीतिक बदलाव।  

कांग्रेस को डर, क्या राज्यसभा की तीसरी सीट होगी हाथ से निकाली? हॉर्स ट्रेडिंग का खतरा

भोपाल   विजयपुर विधानसभा मामले के बाद मध्य प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस को अब डर सता रहा है कि भाजपा उनसे राज्यसभा सीट छीन सकती है। दरअसल, मध्य प्रदेश में 19 जून को राज्यसभा की तीन सीटें खाली होने वाली हैं। प्रदेश में विधायकों की संख्या के हिसाब से सत्ताधारी बीजेपी को 2 सीटें और कांग्रेस को एक सीट मिलने की संभावना है। लेकिन इस तीसरी सीट पर पेंच सकता है। आरोप है कि भाजपा अभी से जोड़तोड़ की नीति से तीसरी सीट हत्थियाने की चाल रही है। कांग्रेस को अपना डर अब सच होता दिख रहा है। क्योंकि विजयपुर विधानसभा सीट से विधायक मुकेश मल्होत्रा पर विधायकी रद्द होने का खतरा मंडरा रहा है। हालांकि हाईकोर्ट से स्टे मिलने के बाद अब कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है। लेकिन इसी बीच राजनीतिक घटनाक्रम तेजी से बदल रहे हैं। ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि एमपी के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने बीजेपी पर राज्यसभा सीट के लिए जोड़तोड़ का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि राज्यसभा सीट लेने के लिए बीजेपी सबकुछ कर रही है। बीजेपी हर मामले में जोड़तोड़ का प्रयास करती है। लेकिन, उन्हें वो प्रयास करने दीजिए। इसलिए एक-एक वोट की जरुरत है.इतना ही कांग्रेस के महासचिव Rakesh Singh Yadav ने दावा किया है कि इस घटनाक्रम का असर पार्टी की राज्यसभा सीट पर भी पड़ सकता है। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व, खासकर Rahul Gandhi को इस मुद्दे पर गंभीरता से ध्यान देने की सलाह दी है। कांग्रेस नेता Rakesh Singh Yadav ने दावा किया है कि इस घटनाक्रम का असर पार्टी की राज्यसभा सीट पर भी पड़ सकता है। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व, खासकर Rahul Gandhi को इस मुद्दे पर गंभीरता से ध्यान देने की सलाह दी है। राकेश सिंह यादव ने कहा कि पार्टी को इस पूरे मामले को गंभीरता से लेना चाहिए और संगठन स्तर पर मजबूत रणनीति बनानी चाहिए। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो कांग्रेस को राज्यसभा सीट के नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। सबसे बड़ी और तीसरी वजह राजनीतिक गणित है। कांग्रेसियों के आरोपों के मुताबिक, बीजेपी की ओर से विधायकों को अगले इलेक्शन की टिकट और अन्य कुछ ऑफर दिए जा रहे हैं। यदि 6 विधायक इधर से उधर हुए तो ये सीट कांग्रेस के हाथ से जा सकती है। फिलहाल इस मामले को लेकर कांग्रेस के भीतर और बाहर दोनों ही जगह राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा मध्य प्रदेश की राजनीति में और बड़ा रूप ले सकता है।

देशभर में IAS-IPS-IFS के 2834 पद खाली, यूपी-एमपी-ओडिशा में संकट, SC-ST-OBC के अधिकारियों की संख्या जानें

नई दिल्ली देश की सबसे प्रतिष्ठित सिविल सर्विस को लेकर हैरान करने वाले आंकड़े सामने आए हैं. इसके अनुसार पूरे देश में आईएएस-आईपीएस और आईएफएस अफसरों की भारी कमी है. तीनों प्रमुख सेवाओं में कुल 2834 पद खाली पड़े हैं. उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, ओडिशा और महाराष्ट्र में बड़े अफसरों का बड़ा संकट है. इसके अलावा अन्य राज्यों में भी काफी पद खाली पड़े हैं. दरअसल, हाल ही में कार्मिक मंत्रालय में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने राज्यसभा में एक सवाल का लिखित जवाब दिया. इसमें उन्होंने अखिल भारतीय सेवाओं (IAS-IPS-IFS) में अफसरों की कमी के बारे में जानकारी दी. बताया कि देश में आईएएस के सबसे ज्यादा 1300 पद खाली पड़े हैं. इसी तरह आईपीएस में 505 जबकि आईएफएस में 1029 पद रिक्त हैं. इसके बाद फिर से यूपीएससी यानी संघ लोक सेवा आयोग (Union Public Service Commission) चर्चा में है. इसे लेकर फिर से बहस शुरू हो गई है. ये हैरान करने वाले आंकड़े उस दौरान सामने आए जब हाल ही में UPSC ने सिविल सर्विसेस परीक्षा 2026 के लिए आवेदन प्रक्रिया की शुरुआत की है. इसकी अंतिम तिथि 24 फरवरी है. साल 2025 की एक जनवरी तक इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस (IAS), इंडियन पुलिस सर्विस (IPS), इंडियन फॉरेस्ट सर्विस (IFS) के कुल स्वीकृत पद कितने हैं?, कितने पदों पर अफसर तैनात हैं?, कितने पद खाली पड़े हैं?, ईटीवी भारत की इस रिपोर्ट में इसके बारे में राज्यवार विस्तार से जानेंगे. यह भी जानेंगे कि इस कैडर पर देश में SC-ST-OBC वर्ग से कितने अफसर हैं?. एजीएमयूटी कैडर के राज्यों की स्थिति : इसके तहत अरुणाचल प्रदेश-गोवा-मिजोरम, दिल्ली, चंडीगढ़ और जम्मू-कश्मीर सहित सभी केंद्र शासित प्रदेश आते हैं. यहां आईएएस के कुल स्वीकृत पद 542 हैं. जबकि मौजूदा समय 406 अफसर तैनात हैं. कुल 136 पद खाली हैं. इसी तरह आईपीएस के 457 पद स्वीकृत हैं. इनमें से 427 पर तैनाती है. जबकि कुल 30 पद रिक्त हैं. वहीं आईएफएस के कुल 302 पद स्वीकृत हैं. 201 पर तैनाती है, जबकि 101 पद खाली हैं. आंध्र प्रदेश : आंध्र प्रदेश में IAS के 239 पद स्वीकृत हैं. इनमें से 195 पर तैनाती है. जबकि 44 पद खाली हैं. इसी तरह IPS के 174 पद स्वीकृत हैं. 140 पर तैनाती है. जबकि 34 पद रिक्त हैं. आईएफएस के 82 पद स्वीकृत हैं. 67 पर तैनाती है. 15 पद खाली हैं. असम-मेघालय : इन दोनों राज्यों में IAS के 263 पद स्वीकृत हैं. 214 पर तैनाती है. जबकि 49 पद खाली हैं. IPS के 195 पद स्वीकृत हैं. 157 पर तैनाती है. 38 पद खाली हैं. आईएफएस के 142 पद स्वीकृत हैं. 90 पर तैनाती है. 52 पद रिक्त हैं. राज्यसभा में उठा खाली पदों का मुद्दा. बिहार : बिहार में IAS के 359 पद स्वीकृत हैं. 303 पर तैनाती है. जबकि 56 पद खाली हैं. इसी तरह आईपीएस के 242 पद स्वीकृत हैं. 241 पर तैनाती है. जबकि एक पद खाली है. IFS के कुल 74 पद स्वीकृत हैं. 50 पर तैनाती है. 24 पद खाली हैं. छत्तीसगढ़ : IAS के 202 पद स्वीकृत हैं. 164 पर तैनाती है. जबकि 38 पद खाली हैं. इसी तरह आईपीएस के 142 पद स्वीकृत हैं. 135 पर तैनाती है. जबकि 7 पद खाली हैं. IFS के कुल 153 पद स्वीकृत हैं. 116 पर तैनाती है. 37 पद खाली हैं. गुजरात : IAS के कुल 313 पद हैं. 255 पर अफसरों की तैनाती है. 58 पद खाली हैं. आईपीएस के 208 पद हैं. 203 पर तैनाती है. 5 पद खाली हैं. आईएफएस के 125 पद हैं. 77 पर अफसरों की तैनाती है. 48 पद रिक्त हैं. हरियाणा : यहां आईएएस के 215 पद हैं. इसकी तुलना में 172 पदों पर तैनाती है. 43 पद खाली है. आईपीएस के 144 पद हैं. इनमें से 127 पर तैनाती है. 17 पद खाली हैं. वहीं आईएफएस के 58 पद हैं. इनमें से 44 पर तैनाती है. जबकि 14 पद खाली हैं. हिमाचल प्रदेश : हिमाचल में 153 पद आईएएस के स्वीकृत हैं. इनमें से 117 पर तैनाती है. जबकि 36 पद खाली हैं. आईपीएस के 96 पद स्वीकृत हैं. 84 पर तैनाती है. जबकि 12 पद रिक्त हैं. इसी तरह आईएफएस के 114 पद स्वीकृत हैं. 90 पर अफसरों की तैनाती है. जबकि 24 पद खाली हैं. झारखंड : यहां आईएएस के 224 पद स्वीकृत हैं. इनमें से 177 पर तैनाती है. जबकि 47 पद खाली हैं. आईपीएस के 158 पद हैं. इनमें से 143 पर तैनाती है. जबकि 15 पद खाली हैं. आईएफएस के 142 पद स्वीकृत हैं. 84 पर तैनाती है. जबकि 58 पद खाली हैं. कर्नाटक : यहां आईएएस के 314 पद स्वीकृत हैं. इनमें से 273 पर तैनाती है. जबकि 41 पद खाली है. आईपीएस के 224 पद हैं. इनमें से 203 पर तैनाती है. जबकि 21 पद खाली हैं. आईएफएस के 164 पद हैं. इनमें से 113 पर तैनाती है. जबकि 51 पद खाली हैं. केरल : यहां आईएएस के 231 पद हैं. इनमें से 157 पर तैनाती है. जबकि 74 पद खाली हैं. आईपीएस के 172 पद हैं. इनमें से 150 पर तैनाती है. जबकि 22 पद रिक्त हैं. आईएफएस के 107 पद हैं. 78 पर तैनाती है. जबकि 29 पद खाली हैं. मध्य प्रदेश : एमपी में आईएएस के 459 पद हैं. इनमें से 391 पर तैनाती है. जबकि 68 पद खाली हैं. आईपीएस के 319 पद हैं. 271 पर तैनाती है. 48 पद खाली हैं. इसी कड़ी में आईएफएस के 296 पद हैं. इनमें से 209 पर तैनाती है. जबकि 87 पद खाली हैं. महाराष्ट्र : महाराष्ट्र में IAS के 435 पद स्वीकृत हैं. इनमें 359 पर अफसरों की तैनाती है. जबकि 76 पद खाली हैं. इसी तरह आईपीएस के 329 पद हैं. इनमें से 306 पदों पर तैनाती है. जबकि 23 पद खाली हैं. इसी कड़ी में आईएफएस के 206 पद हैं. इनमें 139 पर तैनाती है. जबकि 67 पद रिक्त हैं. मणिपुर : यहां आईएएस के 115 पद खाली हैं. इनमें से 80 पर तैनाती है. जबकि 35 खाली है. आईपीएस के 91 पद हैं. 85 पर तैनाती है. जबकि 6 पद रिक्त हैं. इसी तरह आईएफएस के 58 पद स्वीकृत हैं. 25 पर तैनाती … Read more

FASTag Annual Pass के दाम बढ़े, 1 अप्रैल से नया शुल्क लागू, अब देने होंगे इतने रुपये

नई दिल्ली FASTag Annual Pass New Price: देश के हाईवे पर सफर करने वालों के लिए एक अहम खबर सामने आई है. नेशनल हाईवे पर टोल पेमेंट को आसान बनाने के लिए शुरू की गई फास्टैग एनुअल पास (FASTag Annual Pass) स्कीम अब थोड़ी महंगी होने जा रही है. सरकार ने फाइनेंशियल ईयर  2026-27 के लिए इस पास की कीमत में हल्की बढ़ोतरी करने का फैसला किया है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के मुताबिक 1 अप्रैल से निजी वाहनों के लिए FASTag एनुअल पास की कीमत बढ़ाकर 3,075 रुपये कर दी गई है. इससे पहले इसकी कीमत 3,000 रुपये थी. यह पास प्राइवेट कार, जीप और वैन जैसे नॉन-कमर्शियल वाहनों के लिए लागू होता है। FASTag Annual Pass क्या है बता दें कि, फास्टैग एनुअल पास को पिछले साल स्वतंत्रता दिवस के मौके पर शुरू किया गया था. इसका मकसद हाईवे पर बार-बार टोल भुगतान की परेशानी को कम करना और डिजिटल टोल कलेक्शन को बढ़ावा देना था. इस योजना के तहत अगर किसी प्राइवेट व्हीकल में वैलिड FASTag लगा है तो वह इस पास को ले सकता है. ये एनुअल पास एक्टिव होने के बाद वाहन एक साल तक या फिर अधिकतम 200 ट्रिप्स (जो भी पहले पूरा हो) तक के लिए वैलिड होगा। तेजी से बढ़ रहे हैं यूजर्स सड़क परिवहन राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के आंकड़ों के मुताबिक यह योजना तेजी से लोकप्रिय हो रही है. फिलहाल देशभर में 50 लाख से ज्यादा वाहन मालिक फास्टैग एनुअल पास का इस्तेमाल कर रहे हैं. दिलचस्प बात यह है कि नेशनल हाईवे पर प्राइवेट कारों से होने वाले करीब 28 प्रतिशत टोल लेन-देन अब इसी एनुअल पास के जरिए किए जा रहे हैं. इससे साफ है कि नियमित रूप से हाईवे पर सफर करने वाले लोगों के बीच यह योजना काफी पसंद की जा रही है। भारत में FASTag सिस्टम की शुरुआत 2016 में हुई थी और अब यह टोल पेमेंट का मुख्य तरीका बन चुका है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अब तक करीब 11.86 करोड़ FASTag जारी किए जा चुके हैं. इनमें से लगभग 5.9 करोड़ FASTag अभी एक्टिव हैं और देशभर के टोल प्लाजा पर इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट के लिए इस्तेमाल हो रहे हैं. मौजूदा समय में नेशनल हाईवे पर टोल से होने वाली 98 प्रतिशत से ज्यादा कमाई FASTag के जरिए ही हो रही है।

गूगल का ‘जीरो डे’ अलर्ट, 3.5 अरब लोग खतरे में, तुरंत करें यह कदम

नई दिल्ली टेक्नोलॉजी जगत की दिग्गज कंपनी Google का क्रोम ब्राउजर दुनियाभर में पॉपुलर है और भारत समेत दुनियाभर में इसके 3.5 अरब से ज्यादा यूजर हैं. अब अधिकतर यूजर्स पर एक बड़ा खतरा मंडरा रहा है, जो असल में दो कमजोरियों हैं, जिनको गूगल ने जीरो डे कैटेगरी की कमजोरियों में रखा है. हैकर्स इनका फायदा उठाकर क्रोम ब्राउजर यूजर्स को शिकार बना सकते हैं. ये जानकारी फॉर्ब्स ने अपनी रिपोर्ट में दी है। खतरे को भांपते हुए क्रोम की तरफ से इमरजेंसी सिक्योरिटी अपडेट जारी किया है और यूजर्स को तुरंत ब्राउजर को अपडेट करने की जानकारी शेयर की है. ब्राउजर को अपडेट करने के बाद यूजर्स अपने डिवाइस और डेटा को सुरक्षित कर सकते हैं। वल्नरेबिलिटी को लेकर ज्यादा डिटेल्स नहीं दी वल्नरेबिलिटी को लेकर अभी बहुत ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई है. कंपनी का मानना है कि जब तक अधिकतर यूजर्स लेटेस्ट अपडेट के साथ ब्राउजर की कमजोरियों को फिक्स नहीं कर लेते हैं तब तक इनकी डिटेल्स को सीमित रखा जाएगा, जिससे हैकर्स इनका फायदा ना उठा सकें. इन कमजोरियों को CVE-2026-3909 और CVE-2026-3910 के नाम से ट्रैक किया जा रहा है। क्यों ब्राउजर्स को निशाना बना रहे हैं हैंकर्स ?  इंटरनेट यूजर्स किसी भी इंफॉर्मेशन को सर्च करने के लिए ब्राउजर पर ही सर्चिंग करते हैं. हर एक स्मार्टफोन और पीसी यूजर्स के पास ब्राउजर होता है, जिसमें क्रोम सबसे ज्यादा मार्केट शेयर वाला ब्राउजर है. ऐसे में हैकर्स ब्राउजर को निशाना बनाते हैं ताकि वह यूजर्स कि डिटेल्स को आसानी से हैकर कर सकें। यहां एक पुरानी रिपोर्ट के बारे में बताते हैं, Omdia की 2025 की रिपोर्ट है, जो Palo Alto Networks के लिए तैयार की गई थी. रिपोर्ट के मुताबिक, एक साल में 95 परसेंट ऑर्गनाइजेसन को एक ऐसा साइबर सिक्योरिटी का सामना करना पड़ा, जिसकी शुरुआत कर्मचारियों के कंप्यूटर से हुई थी। ब्राउजर हैकिंग पर साइबर एक्सपर्ट का क्या कहना ब्राउजर हैकिंग को लेकर साइबर एक्सपर्ट का कहना है कि अब हैकर्स सीधा ब्राउजर को निशाना बनाते हैं. इसमें हैकर्स चोरी हुए टोकन के जरिए सेशन हाइजेकिंग और ऐसे एजवांस्ड एडवांस्ड फिशिंग अटैक शामिल हैं, जो लंबे समय से चले आ रहे मल्टी फैक्टर ऑथेंटिकेशन को भी बायपास कर सकते हैं।  

विदेशों में निवेश की तलाश: सिंगापुर और लंदन में रोड शो, MP को सौर ऊर्जा हब बनाने की तैयारी

भोपाल मध्य प्रदेश ने 2030 तक अपनी ऊर्जा खपत के 50 प्रतिशत हिस्से की पूर्ति सौर ऊर्जा से करने की कार्य योजना बनाई है। इसके लिए प्रदेश में कई परियोजनाओं पर काम भी चल रहा है। इसे और गति देने के लिए निवेश बढ़ाने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में इस साल दिल्ली, मुंबई, सिंगापुर और लंदन में रोड शो आयोजित कर मुरैना-2 सौर सहित ऊर्जा भंडारण परियोजना का प्रस्तुतीकरण किया जाएगा। मुरैना-2 परियोजना में छह माह बिजली उत्तर प्रदेश और छह माह मध्य प्रदेश को मिलेगी। वैश्विक स्तर पर निवेशकों को लुभाने की तैयारी रोड शो में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सौर ऊर्जा से जुड़े उद्योगपतियों और निवेशकों के साथ बैठक कर प्रदेश में सौर ऊर्जा के क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं से अवगत कराएंगे। बता दें कि 24 और 25 फरवरी 2025 को भोपाल में हुई ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (जीआईएस) में नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में 5.72 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिले थे। इससे 1.4 लाख रोजगार सृजन संभावित हैं। मध्य प्रदेश अपनी आवश्यकता की 50 फीसदी विद्युत आपूर्ति सौर ऊर्जा से करेगा। वर्ष 2030 तक लगभग 40 हजार मेगावाट बिजली की आवश्यकता होगी। इसमें से आधी यानी 20 हजार मेगावाट बिजली सौर ऊर्जा से बनाई जाएगी। इसके लिए सरकार कार्ययोजना बनाकर काम कर रही है। प्रदेश में अभी 26 हजार मेगावाट बिजली की खपत है, जिसमें सात हजार मेगावाट बिजली की पूर्ति सौर ऊर्जा से हो रही है। मुरैना और अन्य जिलों में प्रस्तावित बड़ी परियोजनाएं आठ हजार मेगावाट की दो सौर ऊर्जा की परियोजनाएं मुरैना में स्थापित की जाएंगी। वहीं साढ़े सात हजार मेगावाट की सौर ऊर्जा परियोजनाएं छह जिलों (आगर, धार, अशोकनगर, भिंड, शिवपुरी और सागर) में प्रस्तावित की गई हैं। 15 हजार हेक्टेयर भूमि भी चिन्हित कर ली गई है। गांधीनगर में चौथी ग्लोबल रिन्यूएबल एनर्जी इन्वेस्टर समिट में अवाडा ग्रुप ने पांच हजार करोड़ और रिन्यू पावर ने छह हजार करोड़ रुपये निवेश करने की रुचि दिखाई। इसके अलावा जल संसाधन विभाग भी 100 मेगावाट की परियोजना पर काम कर रहा है। नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में राज्य की विशेष उपलब्धियां सांची मप्र की पहली सोलर-सिटी है। देश के सौर ऊर्जा उत्पादन में मध्य प्रदेश 8.2 प्रतिशत के योगदान के साथ चौथे स्थान पर है। ओंकारेश्वर फ्लोटिंग सोलर प्लांट भारत का सबसे बड़ा फ्लोटिंग सोलर प्लांट है। रीवा स्थित दुनिया का सबसे बड़ा सिंगल-साइट सोलर प्लांट (750 मेगावाट) दिल्ली मेट्रो को बिजली प्रदान करता है। नीमच जिले में भारत की सबसे बड़ी पंप स्टोरेज परियोजना 7,000 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को एकीकृत करती है। पावर एंड रिन्यूएबल एनर्जी इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरिंग जोन नर्मदापुरम के मोहासा बाबई में 884 एकड़ में विकसित किया जा रहा है।  

चित्तौड़गढ़ दुर्ग हमारी शौर्य परंपरा का प्रतीक: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

चित्तौड़गढ़ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को चित्तौड़गढ़ के ऐतिहासिक दुर्ग पर आयोजित ‘जौहर श्रद्धांजलि समारोह’ को संबोधित करते हुए मेवाड़ की धरा को भारत की शक्ति और भक्ति का संगम बताया। जौहर स्मृति संस्थान द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए उन्होंने कहा कि चित्तौड़ का किला केवल पत्थरों का ढांचा नहीं, बल्कि भारतीय नारी के गौरव, अस्मिता और त्याग की अमर गाथा है। नारी सम्मान और सुरक्षा की प्रेरणा योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में महारानी पद्मिनी के बलिदान को याद करते हुए कहा कि जौहर केवल सत्ता का संघर्ष नहीं था, बल्कि यह नारी गरिमा की रक्षा का श्रेष्ठतम उदाहरण था। उन्होंने जोर देकर कहा, “आज का यह कार्यक्रम इस संकल्प का प्रतीक है कि भविष्य में किसी भी बेटी को जौहर जैसे कठिन दौर से न गुजरना पड़े। हर भारतीय नारी को सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन की गारंटी मिलना उनका अधिकार है।” उन्होंने मेवाड़ को भारत की नई पहचान देने वाली वीर भूमि बताया, जहाँ से पूरे विश्व ने त्याग और बलिदान की परिभाषा सीखी। जातिवाद और सांस्कृतिक षड्यंत्र पर प्रहार मुख्यमंत्री योगी ने समाज को बांटने वाली राजनीति पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि जातिवाद की राजनीति देश की नींव को कमजोर कर रही है। उन्होंने कहा, “बांटने वाली राजनीति हमें फिर से गुलामी की ओर धकेल रही है। जो लोग राम और कृष्ण के अस्तित्व पर सवाल उठाते थे, वे आज संवैधानिक संस्थाओं को कटघरे में खड़ा कर देश में अविश्वास का संकट पैदा कर रहे हैं।” उन्होंने स्वामी विवेकानंद के शिकागो संबोधन को याद दिलाते हुए आह्वान किया कि हमें गर्व से स्वयं को हिंदू कहना चाहिए, क्योंकि हिंदू भाव सबको जोड़ता है, तोड़ता नहीं। इतिहास का सम्मान और सांस्कृतिक पुनरुद्धार समारोह की अध्यक्षता करते हुए पूर्व मेवाड़ राजपरिवार के विश्वराज सिंह मेवाड़ ने कहा कि ऐतिहासिक स्थलों को केवल मनोरंजन या पर्यटन की दृष्टि से नहीं, बल्कि इतिहास की दृष्टि से देखा जाना चाहिए। उन्होंने उदयपुर और नाथद्वारा जैसे नगरों में बढ़ते व्यावसायिकता पर चिंता जताते हुए कहा कि हमारी सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है। वहीं, केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि चित्तौड़गढ़ दुर्ग अदम्य जिजीविषा का प्रतीक है। उन्होंने घोषणा की कि दुर्ग में पर्यटकों के लिए एक ‘एक्सपीरियंस सेंटर’ स्थापित करने की पहल प्रस्तावित है, ताकि यहाँ आने वाले लोग राष्ट्रप्रेम और गौरव की अनुभूति के साथ लौटें। महत्वपूर्ण गतिविधियां पुस्तक विमोचन: कार्यक्रम के दौरान पूर्व राज्यपाल वी.पी. सिंह बदनौर द्वारा लिखित पुस्तक ‘‘जयमल वंश प्रकाश’’ का विमोचन किया गया। पूजा-अर्चना: मुख्यमंत्री योगी ने दुर्ग स्थित जौहर स्थल पर पुष्पांजलि अर्पित की, यज्ञ में आहुति दी और कालिका माता मंदिर में देश की समृद्धि के लिए प्रार्थना की। कार्यक्रम के दौरान पूर्व राज्यपाल वी.पी. सिंह बदनौर द्वारा लिखित पुस्तक ‘‘जयमल वंश प्रकाश’’ का अतिथियों ने विमोचन किया। समारोह में उत्कृष्ट उपलब्ध्यिं के लिए प्रतिभाओं को अतिथियों द्वारा सम्मानित किया गया। इस अवसर पर राजस्थान सरकार के कैबिनेट मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह, सहकारिता राज्यमंत्री गौतम दक, विधायक श्रीचन्द कृपलानी, अर्जुनलाल जीनगर, शिव विधायक रवीन्द्र सिंह भाटी, मसूदा विधायक वीरेन्द्र सिंह कानावत, नीमच विधायक दिलीप सिंह परिहार सहित कई जनप्रतिनिधियों ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम से पूर्व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पुलिस लाइन स्थित हेलीपेड पर पहुंचे, जहां राज्यमंत्री गौतम दक, सांसद सी.पी. जोशी, विधायक चन्द्रभान सिंह आक्यां, श्रीचन्द कृपलानी, अर्जुनलाल जीनगर, अशोक कोठारी, वीरेन्द्र सिंह कानावत, दिलीप सिंह परिहार सहित जिला कलक्टर आलोक रंजन और पुलिस अधीक्षक मनीष त्रिपाठी ने उनकी अगवानी की। इसके बाद मुख्यमंत्री योगी दुर्ग स्थित जौहर स्थल पहुंचे, जहां उन्होंने पुष्पांजलि अर्पित कर यज्ञ में आहुति दी। उन्होंने कालिका माता मंदिर में पूजा-अर्चना कर देश और प्रदेश की समृद्धि की कामना भी की।

वैश्विक संकट में भरोसे का नाम भारत, अपने ही नहीं विदेशियों की भी की रक्षा

नई दिल्ली दुनिया भर में युद्ध और संकटग्रस्त क्षेत्रों में फंसे नागरिकों को सुरक्षित निकालने के मामले में भारत को सबसे “प्रोएक्टिव और रिस्पॉन्सिव” देशों में से एक बताया गया है। एक रिपोर्ट के अनुसार भारत ने पिछले कुछ वर्षों में कई बड़े निकासी अभियानों के जरिए हजारों नागरिकों को संघर्ष क्षेत्रों से सुरक्षित बाहर निकाला है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने तेज कूटनीतिक प्रयास, सरकारी एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय और सैन्य लॉजिस्टिक्स के जरिए कई सफल ऑपरेशन चलाए।  इनमें प्रमुख अभियान शामिल हैं:     Operation Raahat – यमन संकट के दौरान निकासी     Operation Sankat Mochan – दक्षिण सूडान से भारतीयों की वापसी     Operation Ganga – रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान छात्रों की निकासी     Operation Kaveri – सूडान संकट में राहत अभियान     इन अभियानों के जरिए हजारों भारतीयों को सुरक्षित स्वदेश लाया गया। विदेशी नागरिकों की भी मदद रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि भारत ने केवल अपने नागरिकों को ही नहीं बल्कि संकट के समय अन्य देशों के नागरिकों को भी सुरक्षित बाहर निकालने में मदद की, जिससे भारत की मानवीय छवि मजबूत हुई। जब मध्य-पूर्व में Iran और Israel के बीच तनाव बढ़ा, तब भारतीय सरकार ने स्थिति पर लगातार नजर रखी और निकासी के लिए तैयारियां तेज कीं। विदेश मंत्रालय ने कहा कि विदेशों में रहने वाले भारतीयों की सुरक्षा सरकार की “सबसे बड़ी प्राथमिकता” है।  ‘ऑपरेशन सिंधु’ से सुरक्षित वापसी     2025 में पश्चिम एशिया के तनाव के दौरान भारत ने Operation Sindhu शुरू किया।     इस अभियान के तहत भारतीय नागरिकों को पहले Armenia पहुंचाया गया और फिर विशेष विमानों से भारत लाया गया।     रिपोर्ट के अनुसार इस प्रक्रिया को बेहद व्यवस्थित और सुरक्षित बताया गया। रूस-यूक्रेन युद्ध में सबसे बड़ा मिशन रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान भारत ने Russia–Ukraine War में फंसे नागरिकों को निकालने के लिए Operation Ganga शुरू किया। इस अभियान में  23,000 से अधिक भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला गया। 18 देशों के 147 विदेशी नागरिकों को भी मदद मिली। इन लोगों को पहले पोलैंड, रोमानिया, हंगरी, स्लोवाकिया और मोल्दोवा जैसे पड़ोसी देशों में पहुंचाया गया और फिर विशेष उड़ानों से भारत लाया गया।  

प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र धूलकोट अब बनेगा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र प्ती नदी पर बनेगा उच्च स्तरीय पुल

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि नेपानगर अद्भुत नगरी है। यह कृषि और उद्योग का बेजोड़ संगम है। बुरहानपुर जिला मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक विविधता का जीवंत उदाहरण है। हम बुरहानपुर के एग्री एक्सपोर्ट और प्रोसेसिंग का हब बनाने की ओर बढ़ रहे हैं। प्रदेश के जनजातीय वर्ग का समग्र विकास हमेशा से ही हमारी पहली प्राथमिकता रही है। जनजातीय समाज के समग्र कल्याण के लिए नए वित्त वर्ष 2026-27 के सालाना बजट में 26 प्रतिशत की वृद्धि कर 47 हजार 428 करोड़ रुपए का बजट प्रावधान रखा है, जिससे जनजातीय वर्ग के चहुंमुखी विकास और कल्याण में कोई कमी न रहे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केन्द्रीय पीएम जन-मन योजना और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के अंतर्गत कराए जा रहे कार्य प्रदेश में जनजातीय कल्याण का नया अध्याय लिख रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को बुरहानपुर जिले के जनजातीय बहुल नेपानगर विधानसभा क्षेत्र में आयोजित जनजातीय सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विधानसभा क्षेत्र को 363 करोड़ 82 लाख रुपए के 127 विकास कार्यों की सौगात दी। इसमें 191 करोड़ 62 लाख रुपए लागत के 81 विकास कार्यों का भूमिपूजन (30.59 करोड़ से सातपायरी में औद्योगिक प्रक्षेत्र के भूमिपूजन सहित) और 172 करोड़ 20 लाख रुपए लागत के 46 विकास कार्यों का लोकार्पण शामिल है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विकास तभी सार्थक है, जब इसके प्रकाश का पूरा लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज जिन विकास कार्यों की सौगात मिली है, यह इस क्षेत्र के जनजातीय बंधुओं के कल्याण में मील का पत्थर साबित होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इतिहास के पन्नों में नेपानगर दक्षिण के द्वार के रूप में अंकित है। कभी खानदेश और दक्षिण की काशी के रूप में पहचाने जाने वाले नेपानगर को हमारी सरकार महाराष्ट्र के छोर पर मध्यप्रदेश के विकास के प्रमुख द्वार के रूप में विकसित करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नेपानगर विधानसभा क्षेत्र में दो प्रमुख सिंचाई परियोजनाओं (झिरमिट्टी मध्यम सिंचाई परियोजना एवं नावथा वृहद सिंचाई परियोजना) को शासकीय मंजूरी मिलने की जानकारी देते हुए कहा कि ये सिंचाई परियोजनाएं इस क्षेत्र के 34 हजार 400 किसान परिवारों की तकदीर और तस्वीर बदल देंगी। उन्होंने बताया कि कुल 2598.97 करोड़ रुपये की इन दोनों परियोजनाओं से जनजातीय बहुल क्षेत्र में 51800 हेक्टेयर कृषि रकबे में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होगी। इन परियोजनाओं से 132 गांव लाभान्वित होंगे। मुख्यमंत्री ने क्षेत्रीय किसानों से अपील करते हुए कहा कि वे किसी के भी अनर्गल प्रलाप से कतई प्रभावित न हों। इन परियोजनाओं के निर्माण में हमारी सरकार किसी भी व्यक्ति या किसान को घर से बेघर नहीं होने देगी। हम सबके हितों का बराबर ध्यान रखेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नेपानगर पेपर मिल इस क्षेत्र की पहचान है। यह मिल हमेशा की तरह चलती रहेगी। इस चलाए रखने के लिए हम सभी व्यवस्थाएं और समुचित प्रबंधन करेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार इस मिल के कागज भी खरीदेगी और श्रमिक को उसके रोजगार से जोडे़ रखेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की प्रमुख घोषणाएँ मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बीते एक माह के दौरान ही दो कार्यक्रमों में बुरहानपुर जिले को करीब 1100 करोड़ रुपए से अधिक के विकास कार्यों की सौगातें मिली हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुरहानपुर के शासकीय महाविद्यालय में कृषि संकाय की पढ़ाई प्रारंभ कराने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि नेपानगर में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार की स्मृति में एक आकर्षक उद्यान बनाया जाएगा। धूलकोट के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रोन्नत किया जाएगा। लोखंडिया से हसीनाबाद मार्ग के चौड़ीकरण के साथ ताप्ती नदी पर वर्तमान रपटे के स्थान पर एक उच्च स्तरीय पुल बनाया जायेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस क्षेत्र की पहचान असीरगढ़ के किले को भव्य पर्यटन केन्द्र के रूप में विकसित किया जाएगा। प्रदेश के वनवासियों को दिए गए वन अधिकार पट्टों को अब राजस्व विभाग के माध्यम से संपत्ति की रजिस्ट्री के रूप में बदला जाएगा, इसकी रजिस्ट्री शुल्क का खर्चा राज्य सरकार उठाएगी। क्षेत्रीय जनजातीय बन्धुओं को वनाधिकार पट्टों का लाभ देने के लिए जल्द ही पुन: सर्वे कराया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कृषि, बागवानी और मसाला उत्पादन के लिए मशहूर निमाड़ क्षेत्र में सभी प्रकार की फसलों का बीमा कराने और इस क्षेत्र में शीघ्र ही रीजनल इन्वेस्टर्स समिट आयोजित करने की बात कही। सिंचाई क्षमता में लगातार हो रही वृद्धि : मंत्री  सिलावट जल संसाधन मंत्री एवं बुरहानपुर जिले के प्रभारी मंत्री  तुलसीराम सिलावट ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश में सिंचाई क्षमता में लगातार दिन दूनी-रात चौगुनी वृद्धि हो रही है। उन्होंने इस क्षेत्र के लिए मंजूर दो सिंचाई परियोजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि यह परियोजना जनजातीय क्षेत्र के विकास की नई इबारत लिखेंगी। उन्होंने कहा कि ताप्ती बेसिन मेगा ग्राउंड वाटर रिचार्ज परियोजना भी मंजूर हो चुकी है। इससे नेपानगर सहित बुरहानपुर जिले की सिंचाई क्षमता में भारी वृद्धि होगी। उन्होंने बताया कि वर्तमान में प्रदेश के 54 लाख हैक्टेयर कृषि क्षेत्र में सिंचाई हो रही है, जिसे वर्ष 2029 तक बढ़कर 100 लाख हेक्टेयर तक किया जाएगा। सांसद  ज्ञानेश्वर पाटिल ने कहा कि नेपानगर क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में यहां की नेपा मिल का अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. यादव से अनुरोध किया कि यह नेपा मिल किसी भी स्थिति में बंद न हो, बल्कि हमेशा की तरह संचालित होती रहे, ऐसे सभी प्रयास किए जाएं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार किसान, मजदूर, विद्यार्थी और महिला सहित समाज के सभी वर्गों की भलाई के लिए पूरी शिद्धत से काम कर रही है। विधायक बुरहानपुर एवं पूर्व मंत्री  अर्चना चिटनिस ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश लगातार विकास कर रहा है। उन्होंने वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाए जाने एवं 19 मार्च से प्रारंभ हो रहे राज्य स्तरीय जल गंगा संवर्धन अभियान का जिक्र करते हुए कहा कि यह सरकार, सामाजिक सरोकारों से जुड़ी सरकार है। सरकार के प्रयासों से प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय भी निरंतर बढ़ रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री से बुरहानपुर में “सम्राट विक्रमादित्य” महानाट्य का मंचन कराने का अनुरोध किया। नेपानगर विधानसभा क्षेत्र की … Read more

सिख परंपरा और श्रद्धा का संगम: नानकसागर के होला मोहल्ला में पहुंचे CM विष्णु देव साय

रायपुर  मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय आज महासमुंद जिले के बसना क्षेत्र स्थित ऐतिहासिक एवं पवित्र स्थल गढ़फुलझर के नानकसागर में आयोजित होला मोहल्ला कार्यक्रम में शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने यहां पवित्र गुरु ग्रंथ साहिब के समक्ष माथा टेका तथा विशेष कीर्तन समागम और अरदास में भाग लेकर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की। इस अवसर पर सिख समाज की ओर से मुख्यमंत्री को सरोफा भेंट कर आत्मीय सम्मान किया गया। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने अपने उद्बोधन में कहा कि गढ़फुलझर की पावन धरती स्थित नानकसागर अत्यंत श्रद्धा और आस्था का केंद्र है, जहां पूज्य गुरु नानक देव जी के चरण पड़े हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ संतों की तपोभूमि रही है, जहां अनेक महान संतों ने मानवता, सेवा और सद्भाव का संदेश दिया है। इस पवित्र स्थल पर आकर उन्हें अत्यंत गर्व और आत्मिक आनंद की अनुभूति हो रही है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के सभी प्रमुख तीर्थस्थलों के संरक्षण और समुचित विकास के लिए प्रतिबद्ध है। इसी दिशा में गढ़फुलझर को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की घोषणा पहले ही की जा चुकी है। इसके विकास कार्यों के लिए लगभग 2 करोड़ 50 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है और निर्माण कार्य जारी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि इन कार्यों को शीघ्र पूर्ण किया जाए तथा नानकसागर क्षेत्र में पर्यटन सुविधाओं का विस्तार किया जाए, जिससे यह स्थल प्रदेश और देश के श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बन सके। बसना विधायक  संपत अग्रवाल ने अपने संबोधन में कहा कि सिख समाज सदैव संगठन, सेवा और सामाजिक समरसता की भावना के साथ आगे बढ़ने वाला समाज रहा है।  उन्होंने कहा कि गढ़फुलझर न केवल सिख समाज की आस्था का केंद्र है, बल्कि यह सर्वधर्म समभाव और सद्भावना की जीवंत मिसाल भी है।  कार्यक्रम में कृषि मंत्री  रामविचार नेताम, बसना विधायक  संपत अग्रवाल, छत्तीसगढ़ राज्य बीज निगम के अध्यक्ष  चंद्रहास चंद्राकर, छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण के अध्यक्ष  भूपेंद्र सिंह सवन्नी, छत्तीसगढ़ राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष  अमरजीत छाबड़ा सहित सिख समाज के अनेक गणमान्यजन और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

स्टूडेंट्स के लिए अपडेट: 14 अप्रैल तक जारी हो सकता है 10वीं-12वीं का रिजल्ट, मई में दूसरी परीक्षा

भोपाल माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) भोपाल की 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा की उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन का 70 प्रतिशत काम पूरा हो गया है। 23 मार्च से मूल्यांकन के चौथे और अंतिम चरण की शुरुआत हो जाएगी। माशिमं के अधिकारियों का कहना है कि यदि मूल्यांकन कार्य की यह गति बनी रही तो अप्रैल के पहले सप्ताह तक परिणाम तैयार कर लिया जाएगा। बहुत संभव है कि 14 अप्रैल तक परीक्षा परिणाम जारी कर दिए जाएं। 16 लाख विद्यार्थियों की 90 लाख कॉपियों की जांच मध्य प्रदेश में इस वर्ष करीब 16 लाख विद्यार्थियों ने 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं दी हैं। इन परीक्षार्थियों की लगभग 90 लाख उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन किया जा रहा है। इस कार्य में लगभग 18 हजार शिक्षकों को लगाया गया है। अधिकांश जिलों में मूल्यांकन कार्य तेज गति से चल रहा है, लेकिन कुछ जिलों में इसकी रफ्तार धीमी है। आगर मालवा और नर्मदापुरम जिलों में अब तक लगभग 40 प्रतिशत उत्तरपुस्तिकाओं का ही मूल्यांकन हो पाया है। धीमी गति वाले जिलों को कड़े निर्देश वहीं मंडला, डिंडोरी, बालाघाट, अनूपपुर, शहडोल, भिंड और मुरैना जैसे जिलों में भी मूल्यांकन की गति धीमी पाई गई। मंडल ने इन जिलों में मूल्यांकन कार्य तेज करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों ने बताया कि इस बार परिणाम जल्दी घोषित करने का उद्देश्य विद्यार्थियों को दूसरी परीक्षा की तैयारी के लिए पर्याप्त समय देना है। बोर्ड की द्वितीय परीक्षा सात मई से होनी है, जबकि पिछले वर्ष यह परीक्षा जुलाई में हुई थी। दूसरी परीक्षा के लिए मिलेगा 20 दिन का समय यदि परिणाम 14-15 अप्रैल तक घोषित हो जाता है तो अनुत्तीर्ण, पूरक अथवा श्रेणी सुधार के इच्छुक विद्यार्थियों को तैयारी के लिए लगभग 20 दिन मिल जाएंगे। मूल्यांकन का 70 प्रतिशत कार्य पूरा हो गया है। अप्रैल के दूसरे सप्ताह में परिणाम घोषित कर दिया जाएगा। – बुद्धेश कुमार वैद्य, सचिव, माशिमं

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