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आने वाले दिनों में मध्यप्रदेश और ज्यादा चमकेगाम, मोहन सरकार राज्य को मिनी मुंबई इंदौर का रूप देगी

भोपाल आने वाले दिनों में मध्यप्रदेश और ज्यादा चमकेगा। प्रदेश की मोहन सरकार पूरे राज्य को मिनी मुंबई इंदौर का रूप देगी। जबकि, इंदौर को दिल्ली-मुंबई तर्ज पर विकसित किया जाएगा। इतना ही नहीं, मेट्रोपॉलिटन कॉन्सेप्ट के आधार पर कई जिलों को आपस में जोड़कर और बड़ा किया जाएगा। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव अब इस योजना पर फोकस कर रहे हैं। उन्होंने राजधानी भोपाल में आयोजित वैश्विक सम्मेलन ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट-2025 में इस योजना पर चर्चा की। जीआईएस के दूसरे दिन यानी 25 फरवरी को ‘अनलॉकिंग लैंड वैल्यू इन सिटीज’ सेशन आयोजित किया गया। इस सेशन में शहरों के विकास पर मंथन किया गया। इस सेशन में हरियाणा के पूर्व सीएम और वर्तमान केंद्रीय मंत्री मनोहरलाल खट्टर एवं प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय भी मौजूद रहे। सेशन में सीएम मोहन यादव ने कहा कि हमारी सरकार बनने के बाद हमने कई सेक्टर में काम करने का संकल्प लिया। हमने रीजनल इंडस्ट्रीज कॉन्क्लेव और इंवेस्टर समिट की। इस दौरान प्रदेश में रोजगार, उद्योग और निवेश का वातावरण बनाने का प्रयास किया। यह प्रयोग बहुत अच्छा रहा। इनकी वजह से हमें कई तरह के लाभ मिले। इन्हीं सबके बीच हमें पता चला कि राज्य के छोटे से छोटे स्थान पर भी इंवेस्टर समिट हो सकती है। इससे हमारा कॉन्फिडेंस बढ़ा। हमें पता चला कि नर्मदापुरम जैसी छोटी जगह पर भी निवेश की उम्मीदें हैं। जगह छोटी पर फायदा बड़ा सीएम यादव ने कहा कि कुछ समय पहले हम रिन्यूएबल एनर्जी के उपकरण निर्माण उद्योग के भूमि पूजन के लिए नर्मदापुरम के मुहासा-बाबई गए थे। यहां जब हम औद्योगिक केंद्र का भूमि पूजन कर रहे थे, तो उस वक्त 200 एकड़ जमीन थी। हमारा कार्यक्रम चालू ही था कि 400 एकड़ और जमीन की मांग आ गई। इस तरह जमीन की 800 एकड़ हो गई। हमने जब इस मांग को पूरा किया, तो पता चला कि 800 एकड़ जमीन की और मांग आ गई। यही छोटी-छोटी जगहों पर इंवेस्टर समिट करने का फायदा है। इस तरह बसाएंगे महानगर     मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि इंदौर को दिल्ली-मुंबई की तरह बनाना है और बाकी प्रदेश को इंदौर की तरह बनाना है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट ने निवेश का और काम करने का माहौल बना दिया है।     हम मेट्रोपॉलिटन कॉन्सेप्ट के आधार पर आसपास के जिलों को जोड़ेंगे। भविष्य में इंदौर-उज्जैन-देवास-शाजापुर-पीथमपुर (धार) को जोड़कर इंडस्ट्रियल सेंटर की कल्पना की है।     इस तरह सब मिलाकर लगभग 8000 किलोमीटर का पूरा क्षेत्र मिलाने की योजना है। मेट्रोपॉलिटन की कल्पना में मामले को कानूनी पेंच में उलझाने की बजाए एक आउट लाइन तय की है।     रोड-रेलवे-बिजली-पानी-सीवर लाइन जैसी सुविधाएं मुहैया कराएंगे।     इस तरह 25 सालों में इस क्षेत्र को महानगर के रूप में विकसित करेंगे। इसी तरह भोपाल-सीहोर-विदिशा-रायसेन-नर्मदापुरम का एक हिस्सा मिलाए जाने की कल्पना है। एमपी का चहुंओर विकास होगा- मंत्री विजयवर्गीय नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि जिस तरह प्रदेश में निवेश हो रहा है उससे लग रहा है कि राज्य अग्रणी होगा। शहरीकरण देश की जरूरत है। 2047 तक हमारी जनसंख्या बढ़ेगी। चूंकि, हमें कल का प्रदेश बनाना है, इसलिए उस पर चिंतन करना जरूरी है। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में सिर्फ दो दिन में 18 नई पॉलिसियों को मंजूरी दी गई। इन पॉलिसियों से प्रदेश का चहुंओर विकास होगा।

मध्य प्रदेश में NHAI 5 वर्षों में 60,000 करोड़ का कार्य करेगा, 40,000 करोड़ के कार्य 5 वर्षों में

भोपाल  मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के बीच हाई स्पीड कॉरिडोर और एक्सप्रेस-वे के निर्बाध निर्माण को सुनिश्चित करने का उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण समझौता मोओयू हस्ताक्षर हुए हैं. यह एक लाख करोड़ का मोओयू है जो कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी हस्ताक्षर किया गया है. मध्य प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह के मुताबिक मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी में NHAI 5 वर्षों में लगभग 60,000 करोड़ का कार्य करेगा. प्रयास यह होगा कि शेष 40,000 करोड़ के कार्य भी इन 5 वर्षों में आरंभ हो जाए. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जीएसआई का जो सफल आयोजन हुआ है, उसमें NHAI और मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम के एमओयू का भी अध्याय जुड़ गया है. इस एमओयू के कारण 2037 तक होने वाले निर्माण कार्य आगामी 5 साल में ही हो जाएंगे. मध्य प्रदेश इस प्रकार के कार्य में देश का पहला राज्य बन गया है. सड़क पर दिखेगा MOU का असर लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने यह दावा किया है कि इस समझौते का असर सड़क पर दिखेगा. राष्ट्रीय राजमार्ग और एक्सप्रेस हाईवे के विकास के लिए एक लाख करोड़ का निवेश किया जाएगा, जिसमें लगभग 4010 किलोमीटर की सड़क का निर्माण होगा. इस समझौते के अंतर्गत हाई स्पीड कॉरिडोर, एक्सेस कंट्रोल, सिक्स लेन, एग्जैक्टिंग रोड के अलावा विकास के द्वार खुलेंगे. इन राज मार्गों दिखेगा असर लोक निर्माण मंत्री के मुताबिक भोपाल जबलपुर ग्रीन फील्ड हाई स्पीड कॉरिडोर, प्रयागराज- जबलपुर- नागपुर एक्सप्रेस वे, लखनादौन-रायपुर एक्सप्रेस, आगरा-ग्वालियर राष्ट्रीय राजमार्ग, उज्जैन-झालावाड़ राष्ट्रीय राजमार्ग, इंदौर रिंग रोड, जबलपुर-दमोह राष्ट्रीय राजमार्ग, सतना-चित्रकूट राष्ट्रीय राजमार्ग, रीवा-सिद्धि राष्ट्रीय राज्य मार्ग और ग्वालियर शहर के पश्चिमी छोर पर फोरलेन बाईपास सहित कई महत्वपूर्ण सड़क परियोजना का विकास किया जाएगा.

20 फ़रवरी से 31 मार्च तक संचालित है ‘निरोगी काया अभियान’: उप मुख्यमंत्री शुक्ल

30 वर्ष से अधिक आयु के सभी नागरिक अभियान का अवश्य लें लाभ : उप मुख्यमंत्री शुक्ल जन-प्रतिनिधियों, समाज सेवियों और आमजन से सहभागिता की अपील की : उप मुख्यमंत्री शुक्ल 20 फ़रवरी से 31 मार्च तक संचालित है ‘निरोगी काया अभियान’: उप मुख्यमंत्री शुक्ल डायबिटीज, ब्लड प्रेशर और फैटी लिवर जैसी असंक्रामक बीमारियों (एनसीडी) की हो रही है निःशुल्क जांच भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि मध्यप्रदेश में केंद्र सरकार के मार्गदर्शन और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा के नेतृत्व में 20 फरवरी से 31 मार्च 2025 तक ‘निरोगी काया अभियान’ संचालित किया जा रहा है। इस महाभियान के तहत प्रदेश में 12 हज़ार से अधिक स्वास्थ्य केंद्रों, जन आरोग्य मंदिरों, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र और मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिकों में 30 वर्ष से अधिक आयु के नागरिकों की मधुमेह (डायबिटीज), रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) और फैटी लिवर जैसी प्रमुख असंक्रामक बीमारियों (एनसीडी) की निःशुल्क जांच की जा रही है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने आमजनों, जन-प्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और स्थानीय प्रशासन से इस अभियान को सफल बनाने में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सभी लोग अपने आसपास के नागरिकों को स्वास्थ्य परीक्षण के लिए प्रेरित करें, अभियान की मॉनिटरिंग करें और जरूरतमंद लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँचाने में सहायता करें। उन्होंने सभी नागरिकों से अनुरोध किया कि वे अपने नजदीकी जन आरोग्य मंदिर, संजीवनी क्लिनिक या स्वास्थ्य केंद्र पर पहुँचकर अपनी निःशुल्क जांच अवश्य करवाएँ। स्वास्थ्य केंद्रों की सेवाएँ रविवार को छोड़कर सप्ताह में 6 दिन उपलब्ध हैं। अतः सभी नागरिकों से अनुरोध है कि अपना और अपने परिवार का स्वास्थ्य परीक्षण अवश्य कराएँ और गंभीर बीमारियों से बचाव करें। समय पर जांच से रोगों के जटिल होने से पूर्व ही सहजता से होता है पूर्ण उपचार उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि अभियान का मुख्य उद्देश्य लोगों को असंक्रामक बीमारियों की रोकथाम और समय पर पहचान के प्रति जागरूक करना है। अक्सर यह देखा गया है कि मधुमेह, उच्च रक्तचाप और फैटी लिवर जैसी बीमारियाँ आरंभिक अवस्था में लक्षणहीन होती हैं, जिससे लोग इन्हें पहचान नहीं पाते और समय पर इलाज नहीं हो पाता। यह समस्या खासकर ग्रामीण और सुदूर इलाकों में अधिक देखने को मिलती है। ऐसे में जब बीमारी बढ़ जाती है, तो मरीजों को गंभीर स्वास्थ्य जटिलताओं का सामना करना पड़ता है। इस अभियान के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि प्रदेश के हर व्यक्ति तक आवश्यक स्वास्थ्य जांच और उपचार सेवाएँ पहुंचें। अब तक 8 लाख नागरिकों की हो चुकी है निःशुल्क जांच उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि निरोगी काया अभियान के तहत अब तक 6 लाख लोगों की मधुमेह और रक्तचाप की जांच पूरी की जा चुकी है, जबकि 2 लाख लोगों की फैटी लिवर की जांच हो चुकी है। यह आँकड़े इस अभियान की सफलता को दर्शाते हैं और इस बात को प्रमाणित करते हैं कि नागरिकों में स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता तेजी से बढ़ रही है।  

निवेशकों और मेहमानों ने जोन में स्थानीय व्यंजनों का अतिथियों ने उठाया लुत्फ

भोपाल ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट-2025 में आए विदेशी और स्वदेशी निवेशकों के लिये मानव संग्रहालय परिसर में “एक जिला-एक उत्पाद” जोन बनाया गया। यह जोन एक जिला-एक उत्पाद योजना में प्रदेश के अलग-अलग जिलों से चयनित उत्पादों के परिचय और निवेश को आकर्षित करने के लिये बनाया गया। समिट में मध्यप्रदेश के एक जिला-एक उत्पाद योजना में स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बाजार उपलब्ध कराने की दृष्टि से “वन ड्रिस्ट्रिक-वन प्रोडक्ट विलेज” की वृहद प्रदर्शनी भी लगाई गई। जीआईएस में शामिल विदेशी निवेशकों और मेहमानों के लिये यह जोन विशेष आकर्षण का केन्द्र रहा। निवेशकों ने ओडीओपी जोन में अलग-अलग जिलों के चयनित उत्पादों को देखा, समझा और सराहा। ओडीओपी जोन में दिखी प्रदेश की रंग-बिरंगी लोक संस्कृति की झलक मानव संग्रहालय परिसर के स्थित ओडीओपी जोन में विदेशी निवेशकों और मेहमानों को प्रदेश की रंग-बिरंगी लोक संस्कृति की झलक दिखाई गई। बुंदेलखंड के बधाई, बैतूल के कोरकू समुदाय का गडली सुसुन नृत्य, बांसूरी की मधुर तान, ढोल और झुंझुरी की थाप ने पूरे माहौल को आनंदित कर दिया। प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए लोक कलाकारों ने रंग-बिरंगे परिधानों से सजकर लोक नृत्य की प्रस्तुतियां दी। ओडीओपी जोन देखने आए निवेशकों और मेहमानों ने लोक कलाकारों का तालियों से उत्साहवर्धन किया और सेल्फी भी खिंचवाई। आतिथियों ने स्थानीय उत्पादों को सराहा, व्यंजनों का उठाया लुत्फ ओडीओपी जोन में प्रदेश के विभिन्न जिलों के विशिष्ट उत्पाद जैसे ग्वालियर सैंड स्टोन, बुरहानपुर केले के प्रोडक्ट, बैतूल मैटल की सजावट सामग्री, शिवपुरी जैकेट, सीहोर लकड़ी के खिलौने आदि उत्पादों का अवलोकन किया। सभी ने उत्पादों की गुणवत्ता और रचनात्मकता की सराहना की। मेहमानों ने बुंदेली, मालवी और परम्परागत जनजातीय व्यंजनों का लुत्फ उठाया। ओडीओपी में शामिल है 52 जिलों के विशिष्ट उत्पाद ओडीओपी योजना के अंतर्गत किसी क्षेत्र विशेष के विशेष उत्पादों को उनके भौगोलिक, जैविकीय, प्राकृतिक या उत्पादन की विशेषताओं के कारण शामिल किया जाता है। योजना में ऐसे उत्पादों का चयन कर उनके संरक्षण और संवर्द्धन के विशेष सरकारी प्रयास किये जाते है। इस समय मध्यप्रदेश के 52 जिलों में ओडीओपी योजना संचालित है, जिनमें हरी सब्जी, मोटे अनाज, क्राफ्टकला हथकरघा, हस्तशिल्प, उपकरण आदि शामिल है। अब तक प्रदेश के 19 उत्पादों को मिला है जीआई टैग प्रदेश सरकार द्वारा स्थानीय कलाकारों और उत्पादों को विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है। प्रदेश के अलग-अलग जिलों के 19 विशिष्ट उत्पादों को अब तक जीओ-ग्राफिकल इंडीकेशन्स (जीआई) टैग प्रदान किये गये है। इसमें चंदेरी साड़ी, बाग प्रिंट, नागपुरी संतरा, रतलामी सेंव, कड़कनाथ मुर्गा, चिन्नौर चावल, बुटिक प्रिंट, स्टोन क्राफ्ट, लेदर टॉय, बेल मेटल वेअर, महेश्वरी साड़ी, महोबा देशवारी पान, मुरैना गजक, सुंदरजा आम, शरबती गेहूँ, गोंड पेंटिंग, रॉट आयरन क्राफ्ट, हेन्डमेड कारपेट, वारासिवनी की हेंडलूम साड़ी शामिल है। इनमें से 7 उत्पाद ओडीओपी योजना में भी शामिल है।  

अमेरिका ने यूक्रेन का समर्थन करने से किया इनकार

न्यूयॉर्क अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को यूक्रेन युद्ध पर एक नया रुख अपनाया, जब वॉशिंगटन ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में यूक्रेन पर आक्रमण की निंदा करने वाले प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया। यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद ये पहली बार है जब अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र के अंदर कीव को समर्थन देने से इनकार कर दिया। संघर्ष के तीन साल पूरे होने पर यूरोपीय समर्थन वाले प्रस्ताव को महासभा ने 93 वोटों के साथ स्वीकार कर लिया। लेकिन अमेरिका के प्रस्ताव का विरोध करने की चर्चा सबसे ज्यादा है, जो ट्रंप के नेतृत्व में वॉशिंगटन की विदेश नीति में बड़े बदलाव को दर्शाता है। प्रस्ताव के खिलाफ 18 सदस्य देशों ने मतदान किया, जबकि 65 सदस्यों ने इसमें हिस्सा नहीं लिया। वॉशिंगटन ने मतदान के दौरान मॉस्को और रूस के सहयोगियों उत्तर कोरिया और सूडान जैसे देशों का साथ दिया। नए पारित प्रस्ताव में युद्ध में कमी लाने, शत्रुता को शीघ्र समाप्त करने और यूक्रेन के विरुद्ध युद्ध का शांतिपूर्ण समाधान करने का आह्वान किया गया है, जिसमें संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप नागरिक आबादी समेत भारी विनाश और मानवीय पीड़ा शामिल है। भारत ने लिया किसका पक्ष ? यह प्रस्ताव यूक्रेन के लिए जीत के रूप में सामने आया है, लेकिन यह कीव के कम होते समर्थन को भी दिखाता है। इसे पिछले प्रस्तावों की तुलना में बहुत कम समर्थन मिला है। वहीं, भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के मसौदा प्रस्ताव पर मतदान में हिस्सा नहीं लिया। भारत उन 65 संयुक्त राष्ट्र सदस्य देशों में शामिल था, जिन्होंने प्रस्ताव पर मतदान से परहेज किया। अमेरिका ने पेश किया अलग प्रस्ताव इस बीच अमेरिका ने भी एक प्रतिद्वंद्वी प्रस्ताव तैयार किया, जिसे संयुक्त राष्ट्र में रूसी राजदूत ने सही दिशा में एक कदम कहा था। लेकिन वॉशिंगटन के सहयोगी फ्रांस ने अमेरिकी पाठ में संशोधन पेश किया और महासभा को बताया कि पेरिस, ब्रिटेन समेत अन्य यूरोपीय देशों के साथ मौजूदा स्वरूप में इसका समर्थन नहीं कर पाएगा। अपने ही पाठ से पीछे हटा अमेरिका इन देशों ने अमेरिकी पाठ को फिर से लिखने के लिए दबाव डाला। इन परिवर्तनों ने यूक्रेन की क्षेत्रीय अखंडता के प्रति प्रतिबद्धता की भी पुष्टि की, जिसे अमेरिकी पाठ से हटा दिया गया था। अमेरिकी प्रस्ताव में इतना अधिक संशोधन किया गया कि वॉशिंगटन ने आखिरकार अपने खुद के पाठ पर मतदान से परहेज किया, जबकि सभा ने इसे पास कर दिया।

ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के दौरान कुल 30 लाख 77 हज़ार करोड़ रूपए के MOUs किए गए: अमित शाह

भोपाल केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज मध्य प्रदेश के भोपाल में दो दिवसीय ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के समापन सत्र को संबोधित किया। इस अवसर पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। अपने संबोधन में केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह जी ने कहा कि इस दो दिवसीय ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के दौरान कुल 30 लाख 77 हज़ार करोड़ रूपए के MOUs किए गए। उन्होंने कहा कि इनमें से कई MOUs ज़मीन पर उतरेंगे और एक बड़ी इंडस्ट्री के साथ-साथ सहायक उद्योगों को भी मध्य प्रदेश में स्थापित करने में राज्य सरकार को मदद करेंगे। श्री शाह ने कहा कि दो दिवसीय समिट में 200 से अधिक भारतीय कंपनियां, 200 से अधिक वैश्विक सीईओ, 20 से अधिक यूनिकॉर्न संस्थापक और 50 से अधिक देशों के प्रतिनिधि मध्य प्रदेश में निवेश करने और यहां के माहौल को देखने आए हैं। उन्होंने कहा कि इस बार मध्य प्रदेश ने एक नए प्रयोग के तहत हर क्षेत्र का अलग-अलग इन्वेस्टमेंट समिट कर पूरे मध्य प्रदेश का समविकास करने का प्रयास किया है, जो आने वाले दिनों में कई राज्यों को दिशा दिखाएगा। श्री अमित शाह ने कहा कि इस समिट में मध्य प्रदेश ने विकास के लिए अपने industrial potential, sectoral potential और global potential को भी एक्सप्लोर करने के सारे रास्ते खोलने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि इस समिट ने मध्य प्रदेश के विकास को नया आयाम देने का काम किया है। श्री शाह ने कहा कि मध्य प्रदेश हमारे देश की भव्य सांस्कृतिक विरासत से भरपूर है और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा दिए गए ‘विकास भी विरासत भी’ के सूत्र को चरितार्थ करने के लिए राज्य कई प्रयास कर रहा है। केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी ने देश के युवाओं और 130 करोड़ की जनता के सामने 2047 तक भारत को पूर्ण विकसित राष्ट्र बनाने और 2027 तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश की ये इन्वेस्टमेंट समिट इन दोनों लक्ष्यों को सिद्ध करने में न सिर्फ सहायक होगी बल्कि इनमें बहुत बड़ा योगदान भी देगी। श्री शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की टीम इंडिया की कल्पना में भारत सरकार और सभी राज्यों की टीमों को साथ मिलकर पूरे देश का विकास करने की दिशा में जान का लक्ष्य रखा गया था जिसे इस कार्यक्रम ने आगे बढ़ाया है। श्री अमित शाह ने कहा कि इस समिट में लोकल और ग्लोबल दोनों प्रकार के निवेश में वृद्धि करने के कई आयाम हासिल किए गए हैं। उन्होंने कहा कि ये समिट भारत की अमृत पीढ़ी के लिए कौशल विकास के कई द्वार भी खोलेगी। श्री शाह ने कहा कि ऑटोमेशन और जॉब क्रिएशन के बीच समन्वय बनाकर मध्य प्रदेश सरकार ने अलग अलग सेक्टर्स के लिए जो नीतियां बनाई हैं वो आगे बढ़ेंगी और ये समिट भारत को मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने में भी बहुत सहायता करेगी। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में मध्य प्रदेश में एक स्थायी औऱ मज़बूत सरकार काम कर रही है, जिससे विकास के द्वार खुल रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत के दिल जैसे मध्य प्रदेश की एक स्ट्रैटेजिक लोकेशन है और यहां बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर भी बन चुका है। इसी प्रकार, स्किल्ड वर्कफोर्स की एक बड़ी फौज यहां उपलब्ध है और प्रशासन ने बेहतरीन इकोसिस्टम भी उपलब्ध कराया है। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश से अधिक मार्केट का एक्सेस भी किसी को उपलब्ध नहीं है और डिमांड ओरिएंटेड इकोनॉमी भी अब यहां काफी तेज़ी से बढ़ रही है। श्री शाह ने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार के पारदर्शी शासन ने निवेश के लिए काफी लोगों को आकर्षित किया है। उन्होंने कहा कि यहां land भी है, labour force भी है, mines भी हैं minerals भी हैं, उद्योगों के लिए संभावनाएं और अवसर भी हैं, शिक्षित युवा भी हैं और स्किल्ड वर्कफोर्स भी है। गृह मंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश आज पूरे भारत में हर प्रकार से निवेश के लिए एक बड़ा आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है। श्री अमित शाह ने कहा कि एक जमाने में मध्य प्रदेश की गिनती बीमारू राज्यों में होती थी लेकिन हमारी सरकार के 20 साल के सतत शासन के बाद यहां 5 लाख किलोमीटर सड़क नेटवर्क बना है, आज यहां 6 हवाईअड्डे हैं, 31 गीगावॉट की ऊर्जा क्षमता है जिसमें से 30 प्रतिशत क्लीन एनर्जी है। उन्होंने कहा कि IIM, IIT, AIIMS, IITM, NIFT और NIFD जैसे कई प्रतिष्ठित संस्थान मध्य प्रदेश के युवाओं को इन मौकों के दोहन के लिए योग्य बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश देशभर में सबसे अधिक खनिज संपदा वाले राज्यें में से एक है। 

भोपाल के ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में निवेश का बनेगा रिकॉर्ड: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2025 में निवेश के क्षेत्र में मध्यप्रदेश को माइनिंग के क्षेत्र में सबसे बड़ी ताकत मिलेगी। उन्होंने कहा कि माइनिंग सेक्टर में निवेश की असीमित संभावनाएँ हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव राष्ट्रीय मानव संग्रहालय भोपाल में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2025 के माइनिंग सत्र को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश एकमात्र ऐसा राज्य है, जहाँ पत्थर उठाओ तो हीरा मिलता है। उन्होंने कहा कि खनिज राजस्व में 5 गुना वृद्धि का लक्ष्य है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भोपाल के ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में निवेश का रिकॉर्ड बनेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में खनिज के अकूत भण्डार हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में हीरे के साथ लाइम स्टोन, डोलोमाइट, सीमेंट, कॉपर, मैग्नीज और रॉक फास्फेट जैसे खनिज प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में सभी विभागों के समन्वय से खनन की सरल एवं लचीली नीति बनायी गयी है। उन्होंने कहा कि इन नीतियों से निवेशकों को मध्यप्रदेश में निवेश करने में आसानी होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि निवेशकों को नीति से हटकर भी कोई सहयोग की आवश्यकता होगी, तो उसे भी पूरा किया जायेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में निवेशकों के लिये नीतियों के बलबूते माइनिंग सेक्टर में बड़ी बढ़त देखने को मिलेगी। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में हम रॉ-मटेरियल देने के साथ प्रदेश को निर्माण का केन्द्र भी बनायेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश संभावनाओं का प्रदेश है। यहाँ बसने वाले लोग बहुत ही सरल है। खनन के क्षेत्र में कार्य करने वाले निवेशकों को पूरा सहयोग मिलेगा। उन्होंने कहा कि हम भारत सरकार के माध्यम से भी खनन के क्षेत्र में पॉलिसी बनाकर कार्य कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश देश में खनिज के क्षेत्र में अहम भूमिका निभाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारे प्रदेश के भू-गर्भ में छिपे खजाने को बाहर लाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जीआईएस के बाद माइनिंग के लिये पृथक से भी समिट आयोजित की जायेगी। सचिव, खान मंत्रालय श्री बी.एल. कांताराव ने कहा कि भोपाल का ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट अभी तक का सबसे बेहतरीन आयोजन है। उन्होंने कहा कि इस बार की समिट में माइनिंग में बड़े उद्योगपतियों ने सहभागिता की है। इससे मध्यप्रदेश में खनिज में निवेश की संभावनाएँ बढ़ी हैं। केन्द्रीय सचिव, श्री कांताराव ने कहा कि केन्द्र सरकार के खनिज में 4 विभाग हैं, जिनमें कोल, एटॉमिक, पेट्रोलियम, नेचुरल रिसोर्स और मिनिस्ट्री ऑफ माइंस हैं। इन सभी मिनरल्स की मध्यप्रदेश में बहुतायत है। श्री कांताराव ने कहा कि देश में सबसे ज्यादा माइन्स मध्यप्रदेश में हैं। उन्होंने कहा कि हर 4 माइन्स में से एक माइन्स प्रदेश में है। उन्होंने कहा कि खनिज का सबसे ज्यादा ऑक्शन करने वाला राज्य मध्यप्रदेश है। उन्होंने कहा कि देश की जियो लॉजिकल सर्वे ऑफ इण्डिया कम्पनी 175 वर्ष पुरानी है, जिसने माइनिंग सेक्टर में अपार डेटा इकट्ठा किया है। उन्होंने निवेशकों से कहा कि डेटा स्टडी कर खनिज के क्षेत्र में कार्य करें। केन्द्रीय सचिव श्री कांताराव ने कहा कि माइनिंग के क्षेत्र में एक्सप्लोरेशन के लिये सरकार 100 प्रतिशत आर्थिक सहायता देगी। इसके साथ ही सरकार नई नीति के अंतर्गत एक्सप्लोरेशन कम्पनी को लागत का 50 प्रतिशत रिस्क कवर करेगी। केन्द्रीय सचिव श्री कांताराव ने कहा कि ओवर डम्प और रिसाइकिलिंग के लिये विशेष प्रावधान किये जा रहे हैं। इससे कम्पनियों को सहायता मिलेगी और निवेश मिलेगा। प्रमुख सचिव, खनिज श्री उमाकांत उमराव ने कहा कि मध्यप्रदेश में खनिज क्षेत्र में असीमित संभावनाएँ हैं। उन्होंने कहा कि कुछ ऐसे खनिज हैं, जो मध्यप्रदेश में ही पाये जाते हैं। सभी क्षेत्रों में खनिजों के अपार भण्डार हैं। इसके समुचित उपयोग के लिये प्रदेश में एक बेहतरीन ईको सिस्टम भी है। प्रमुख सचिव श्री उमराव ने निवेशकों से कहा कि प्रदेश में सड़क, बिजली, पानी, हवाई कनेक्टिविटी बहुत बेहतर है और यहाँ पर क्रिटिकल मिनरल्स भी बड़ी मात्रा में पाये जाते हैं। प्रमुख सचिव श्री उमराव ने कहा कि मध्यप्रदेश खनिज सम्पदा के क्षेत्र में अग्रणी राज्य है। खनन एवं खनिज आधारित उद्योगों के लिये अत्यधिक संभावनाएँ प्रदान करता है। मध्यप्रदेश में विविधतापूर्ण खनिज पूरे राज्य में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि राज्य का देश में कॉपर, मैंग्नीज और हीरा उत्पादन में पहला, रॉक फास्फेट के उत्पादन में दूसरा, लाइम स्टोन के उत्पादन में तीसरा और कोयला उत्पादन में चौथा स्थान है। उन्होंने कहा कि राज्य में देश के कुल भण्डारण का 36 प्रतिशत कोल बेण्ड मीथेन के उत्पादन में राज्य का देश में दूसरा स्थान है। उन्होंने कहा कि खनिजों का पता लगाने का कार्य लगातार जारी है। वर्ष 2024-25 में अब तक 73 में से 62 ब्लॉक की नीलामी की जा चुकी है। प्रमुख सचिव श्री उमराव ने कहा कि राज्य में खनिज उद्योगों को बढ़ावा देने के लिये कई नीतिगत पहल की हैं। उन्होंने निवेशकों से कहा कि मध्यप्रदेश में निवेश करने का उचित समय है। उन्होंने सभी निवेशकों को मध्यप्रदेश में निवेश के लिये प्रेरित किया।  

मोदी ने विकसित भारत वर्ष-2047 की कल्पना की, केंद्र सरकार हरसंभव मदद करेगी: मंत्री मनोहर लाल

भोपाल केंद्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल ने कहा है कि मध्य प्रदेश में नियोजित शहरी विकास के लिए केंद्र सरकार प्रदेश को हरसंभव मदद करेगी। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में चल रही दो दिवसीय ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट में पहुंचे केंद्रीय मंत्री ने नगरीय प्रशासन द्वारा आयोजित अनलॉकिंग लेंड वेल्यू विषय पर आयोजित सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विकसित भारत वर्ष-2047 की कल्पना की है। इस लक्ष्य को हासिल करने में शहरों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। मध्य प्रदेश में नियोजित शहरी विकास के लिए केंद्र सरकार प्रदेश को हरसंभव मदद करेगी। केंद्रीय शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल ने कहा कि मध्य प्रदेश में शहरों के नियोजित विकास को लेकर जो तीन पॉलिसी जारी की गई हैं, यह प्रदेश सरकार की ओर से उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है। मध्य प्रदेश में शहरों के विकास की बहुत संभावनाएं हैं। शहरों के समग्र विकास के लिए राज्य सरकार को सघन आबादी वाले शहरों पर विशेष ध्यान देना होगा। उन्होंने भोपाल, इंदौर मेट्रो लाइन की चर्चा करते हुए कहा कि मेट्रो लाइन का विस्तार इस तरह से किया जाए कि इसका फायदा समाज के प्रत्येक वर्ग को मिल सके। उन्होंने मेट्रोपॉलिटन सिटी के विकास में एक विस्तृत योजना तैयार करने पर भी जोर देते हुए बढ़ती शहरी आबादी का आकलन सही रूप में किए जाने की बात कही। शहरी क्षेत्र के परिवहन की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी के जरिए पर्यावरण संरक्षण को प्रोत्साहित कर रही है। उन्होंने कार्बन उत्सर्जन पर नियंत्रण और कार्बन क्रेडिट का फायदा देने वाली प्रोत्साहन नीति का व्यापक प्रचार-प्रसार करने की आवश्यकता बताई। इस मौके पर नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि प्रदेश में नगरीय निकायों में आय के स्रोत बढ़ाए जाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। हाल ही में जारी की गई इंटीग्रेटेड टाउनशिप पॉलिसी से शहरों का समग्र रूप से विकास हो सकेगा। आवास से जुड़ी नई नीतियों में डेवलपर्स और बिल्डर्स को कई रियायत दी गई हैं। मंत्री विजयवर्गीय ने कहा कि प्रदेश के शहरों को हरा-भरा बनाया जाएगा। कॉलोनी में ग्रीन एरिया को जगह देने वाले बिल्डर्स और डेवलपर्स को राज्य सरकार की ओर से रियायत दी जाएगी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव कार्यक्रम में वर्चुअली हुए शामिल, आष्टा में हुआ सामूहिक विवाह कार्यक्रम, सामाजिक समरसता का आदर्श

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि हमारे लिए यह सुखद अहसास है कि आज आष्टा की पावन धरा पर मुख्यमंत्री कन्या विवाहा और निकाह योजना के अंतर्गत सामूहिक विवाह कार्यक्रम में एक साथ 990 बेटियां दुल्हन बनी हैं। इनमें 792 जोड़े हिंदू और 198 जोड़े मुस्लिम रीति-रिवाज से परिणय सूत्र में बंधे हैं, यह सामाजिक समरसता का आदर्श उदाहरण है। शादी के बंधन में बंधने वाले 2 जोड़े कल्याणी विवाह योजना एवं 2 जोड़े निशक्त विवाह प्रोत्साहन योजना के थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव आष्टा सीहोर में सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग द्वारा आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री निवास, भोपाल से वर्चुअली शामिल हुए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने को आष्टा में हुए सामूहिक विवाह कार्यक्रम के आयोजकों को बधाई एवं विवाहित दंपतियों को शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में देश निरंतर प्रगति कर रहा है। राज्य सरकार भी सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास के मूलमंत्र के साथ प्रदेश को समृद्ध बनाने के लिए नीतियों का क्रियान्वयन कर रही है। प्रदेश में योजना के अंतर्गत 19 हजार से अधिक कन्याओं के विवाह संपन्न कराए गए, जिस पर लगभग 115 करोड़ रुपए का व्यय किया गया। प्रदेश में गरीब, बुजुर्ग, कल्याणी एवं दिव्यांगजनों को सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना से लाभान्वित किया जा रहा है। सामाजिक पेंशन योजना के अंतर्गत प्रति माह 337 करोड़ रुपए सिंगल क्लिक के माध्यम से वितरित किए गए हैं। प्रदेश में सरकारी नौकरियों में महिलाओं के लिए 35 प्रतिशत आरक्षण दिया जा रहा है। राज्य सरकार सभी पात्र हितग्राहियों को लाडली लक्ष्मी योजना, प्रधानमंत्री मातृ वंदना और अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारतीय सनातन परंपरा में विवाह जन्म -जन्मान्तर तक चलने वाला पवित्र बंधन है। उन्होंने सामूहिक विवाह कार्यक्रम के माध्यम से गृहस्थ जीवन में प्रवेश करने वाले सभी दंपतियों को सुखमय जीवन की मंगलकामनाएं दीं। आष्टा में हुए कार्यक्रम में विधायक श्री गोपाल सिंह इंजीनियर, श्रीमती रचना मेवाड़ा जिला पंचायत अध्यक्ष सीहोर श्रीमती दीक्षा गुणवान जनपद पंचायत अध्यक्ष आष्टा तथा अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।  

Rudraksh Mahotsav : श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए रेलवे ने दी एक और सौगात, 11 जोड़ी एक्सप्रेस ट्रेनों का विशेष स्टॉपेज

  सीहोर सीहोर जिले के कुबेरेश्वर धाम में आज से सात दिवसीय शिव महापुराण कथा का शुभारंभ हो रहा है। इस आयोजन में देशभर से श्रद्धालु बड़ी संख्या में शामिल हो रहे हैं। श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए रेलवे ने भोपाल-उज्जैन मेला एक्सप्रेस ट्रेन के अलावा एक और सौगात दी है। सीहोर रेलवे स्टेशन पर 11 जोड़ी एक्सप्रेस, मेल और सुपरफास्ट ट्रेनों के लिए 25 फरवरी से 3 मार्च तक 2-2 मिनट के अस्थाई स्टॉपेज दिए गए हैं, जिससे श्रद्धालुओं को आने-जाने में सुविधा होगी। श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़ और चहल-पहल रुद्राक्ष महोत्सव के चलते सीहोर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। शहर के हर कोने में श्रद्धालुओं का सैलाब देखा जा रहा है। बाजारों में भी रौनक बढ़ गई है, और लोग बड़ी संख्या में कुबेरेश्वर धाम की ओर जाते नजर आ रहे हैं। भीड़ को व्यवस्थित करने और सुगम दर्शन की व्यवस्था के लिए पुलिस प्रशासन, जिला प्रशासन और विठलेश सेवा समिति ने पिछले एक माह से विशेष तैयारियां की हैं। इन बेहतरीन व्यवस्थाओं से श्रद्धालु भी संतुष्ट नजर आ रहे हैं। रेलवे की विशेष सौगात और सुरक्षा प्रबंध श्रद्धालुओं की सुविधा को देखते हुए रेलवे ने सीहोर रेलवे स्टेशन पर 11 जोड़ी एक्सप्रेस, मेल और सुपरफास्ट ट्रेनों के लिए 2-2 मिनट के अस्थाई ठहराव की व्यवस्था की है। यह व्यवस्था 25 फरवरी से 3 मार्च तक लागू रहेगी। इसके साथ ही, पहले से चल रही भोपाल-उज्जैन मेला एक्सप्रेस ट्रेन भी 23 फरवरी से 4 मार्च तक संचालित की जा रही है। अतिरिक्त सुरक्षा बल और बेहतर सुविधाएं महाशिवरात्रि मेला और रुद्राक्ष महोत्सव के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा के लिए रतलाम मंडल ने अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की है। ये बल श्रद्धालुओं को भीड़-भाड़ में किसी भी प्रकार की असुविधा से बचाने के लिए विशेष सतर्कता बरत रहे हैं। सीहोर रेलवे स्टेशन पर भी भीड़ को नियंत्रित करने और यात्रियों को सहायता प्रदान करने के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। श्रद्धालुओं के लिए सुविधाजनक यात्रा रेलवे की इस पहल से विभिन्न प्रदेशों से आने वाले श्रद्धालुओं को यात्रा में सहूलियत होगी। सीहोर स्टेशन पर अस्थाई स्टॉपेज से श्रद्धालु आसानी से कुबेरेश्वर धाम तक पहुंच सकेंगे। साथ ही, मेला एक्सप्रेस ट्रेन भी श्रद्धालुओं के लिए लाभकारी सिद्ध हो रही है। सीहोर रेलवे स्टेशन पर इन 11 ट्रेनों का किया स्टॉपेज     12923/12924 डॉ. अम्बेडकर नगर नागपुर सुपरफास्ट एक्सप्रेस     19301/19302 डॉ. अम्बेडकर नगर यशवंतपुर एक्सप्रेस     22911/22912 इंदौर हावड़ा क्षिप्रा एक्सप्रेस     20414/20413 इंदौर वाराणसी सुपरफास्ट एक्सप्रेस     20416/20415 इंदौर वाराणसी सुपरफास्ट एक्सप्रेस     14115/14116 डॉ. अम्बेडकर नगर प्रयागराज एक्सप्रेस     19313/19314 इंदौर पटना एक्सप्रेस     19321/19322 इंदौर पटना एक्सप्रेस     19305/19306 डॉ. अम्बेडकर नगर कामाख्या एक्सप्रेस     22645/22646 इंदौर तिरूवनंतपुरम नॉर्थ एक्सप्रेस     22191/22192 इंदौर जबलपुर सुपरफास्ट एक्सप्रेस  

44 घंटे तक बाबा महाकाल को रिझा सकेंगे श्रद्धालु

उज्जैन  ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में महाशिवरात्रि के लिए मंगलवार-बुधवार की दरमियानी रात 2.30 बजे मंदिर के पट खुलेंगे। इसके साथ ही आम दर्शन का सिलसिला शुरू हो जाएगा। भक्तों को लगातार 44 घंटे भगवान महाकाल के दर्शन होंगे। भगवान महाकाल की चार प्रहर की पूजा इस दौरान गर्भ गृह में लगातार भगवान महाकाल की महापूजा का अनुक्रम चलता रहेगा। ज्योतिर्लिंग की पूजन परंपरा के अनुसार भगवान महाकाल की चार प्रहर की पूजा होगी। मंदिर प्रशासन ने भक्तों की सुविधा के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। सामान्य, वीआइपी तथा वृद्ध व दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए अलग-अलग द्वार से प्रवेश की व्यवस्था रहेगी। कब-कब आरती पूजा होगी     मंगलवार-बुधवार की मध्य रात्रि 2.30 बजे मंदिर के पट खुलने के बाद भस्म आरती होगी।     बुधवार सुबह 7.30 से 8.15 बजे तक दद्योदक (बालभोग) आरती होगी।     सुबह 10.30 से 11.15 बजे तक भोग आरती होगी।     दोपहर 12 बजे तहसील की ओर से भगवान महाकाल की शासकीय पूजा होगी।     शाम 4 बजे से होलकर व सिंधिया राजवंश की ओर से पूजा अर्चना की जाएगी।     शाम 7 बजे से रात 10 बजे तक कोटेश्वर महादेव का पूजन व सेहरा शृंगार होगा।     रात 11 बजे से गर्भगृह में महाकाल की महापूजा होगी, जो सारी रात चलेगी।     गुरुवार सुबह 6 बजे से 10 बजे तक सेहरा दर्शन होंगे।     दोपहर 12 बजे साल में एक बार दिन में भस्म आरती होगी।     दोपहर 2 बजे बालभोग व भोग आरती होगी।     रात 11 बजे शयन आरती के बाद पट बंद होंगे। यह रहेगी दर्शन व्यवस्था सामान्य दर्शनार्थी : आम भक्तों को कर्कराज पार्किंग से भील समाज की धर्मशाला, गोंड बस्ती, चारधाम मंदिर, शक्तिपथ, श्री महाकाल महालोक, मानसरोवर फैसिलिटी सेंटर, महाकाल टनल के रास्ते गणेश व कार्तिकेय मंडपम से भगवान महाकाल के दर्शन कराए जाएंगे। वीआइपी : वीआइपी तथा प्रोटोकाल के तहत आने वाले भक्तों को बेगमबाग मार्ग पर बने नीलकंठ द्वार से मंदिर में प्रवेश दिया जाएगा। वृद्ध व दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए प्रवेश की व्यवस्था भी इसी द्वार से रहेगी। दर्शन के बाद इसी मार्ग से बाहर निकलेंगे। बंद रहेगी शीघ्र दर्शन सुविधा महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति ने महाशिवरात्रि पर 250 रुपये की शीघ्र दर्शन व्यवस्था को स्थगित करने का निर्णय लिया है। भक्तों को केवल कर्कराज पार्किंग मार्ग से एक समान व्यवस्था से दर्शन कराए जाएंगे। यहां रहेगी पार्किंग इंदौर : इंदौर रोड की ओर से आने वाले वाहनों की पार्किंग रुद्राक्ष होटल के पास शनि मंदिर परिसर, प्रशांतिधाम, शासकीय इंजीनियरिंग कालेज, हरिफाटक ब्रिज के नीचे, हाट बाजार परिसर, मन्नत गार्डन में रहेगी। देवास, मक्सी, आगर : इन तीनों मार्ग से आने वाले यात्रियों के लिए इंजीनियरिंग कालेज तथा प्रशांतिधाम परिसर में रहेगी। बड़नगर व नागदा : इन शहरो से आने वाले वाहनों की पार्किंग मुल्लापुरा धान उपार्जन केंद्र परिसर, कार्तिक मेला ग्राउंड, बड़नगर रोड आदिनाथ जैन बोर्डिंग, उदासिन व निर्मोही अखाड़ा परिसर बड़नगर रोड पर रहेगी। निश्शुल्क बस सुविधा मिलेगी महाकाल मंदिर समिति द्वारा जिला प्रशासन के सहयोग से दूरस्थ पार्किंग स्थलों से भक्तों को मंदिर तक लाने ले जाने के लिए निश्शुल्क बस सेवा संचालित की जाएगी। पार्किंग स्थलों पर बसों की उपलब्धता व अन्य जानकारी के लिए काउंटर भी स्थापित किए जाएंगे। यहां से लगेंगे लड्डू प्रसाद काउंटर नृसिंह घाट तिराहा पर एक साथ लड्डू प्रसाद काउंटर स्थापित किए जाएंगे, जो दर्शन के लिए निर्धारित समय तक लगातार खुले रहेंगे। यह सुविधा नि:शुल्क मिलेगी     भील समाज धर्मशाला व झालरिया मठ पर जूता स्टैंड रहेगा।     महाकालेश्वर अन्नक्षेत्र में भक्तों के लिए फलाहारी की व्यवस्था रहेगी।     तीन किलो मीटर लंबे मार्ग पर हर 200 मीटर के बाद पेयजल का इंतजाम रहेगा।     कर्कराज, चारधाम, हरसिद्धि, त्रिवेणी संग्रहालय के स्वास्थ्य केंद्र पर उपचार होगा।  

भोपाल गैस कांड के निपटारे पर सख्त सुप्रीम कोर्ट, 27 फरवरी को होनी है अगली सुनवाई

भोपाल  सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को 1984 की भोपाल गैस त्रासदी से जुड़े यूनियन कार्बाइड के खतरनाक कचरे के निपटारे को लेकर अधिकारियों से यह बताने को कहा है कि इस प्रक्रिया में कौन-कौन से एहतियाती कदम उठाए गए हैं। यह मामला मध्य प्रदेश के धार जिले के पीथमपुर क्षेत्र में कचरे के निपटारे से जुड़ा है, जहां 377 टन जहरीले कचरे को स्थानांतरित किया गया था। अगली सुनवाई 27 फरवरी को होगी। सुप्रीम कोर्ट के अधिकारियों से सवाल सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस बी. आर. गवई और जस्टिस ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह बेंच ने अधिकारियों से जवाब मांगा है कि क्या निपटारे से जुड़े सुरक्षा उपाय पर्याप्त हैं? अदालत ने कहा कि हम इस प्रक्रिया को तभी रोकेंगे, जब हमें इस पर गंभीर आपत्ति लगे। अदालत ने अधिकारियों को स्पष्ट करने को कहा कि क्या निवासियों की स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को ध्यान में रखा गया है? लगातार दो महीने सरकार को फटकार दिसंबर 2023 और जनवरी 2024 में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकार को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद यूनियन कार्बाइड का कचरा न हटाने पर फटकार लगाई थी। हाईकोर्ट ने चार सप्ताह की समय-सीमा देते हुए सरकार को कचरे को हटाने का आदेश दिया था, अन्यथा अवमानना कार्रवाई की चेतावनी दी थी। 1 जनवरी 2024 की रात, 12 सीलबंद कंटेनर ट्रकों में यह कचरा पीथमपुर ले जाया गया। याचिकाकर्ता ने जताई आपत्ति याचिकाकर्ता की अर्जी में कहा गया है कि चार से पांच गांव पीथमपुर में कचरा निपटारे स्थल के 1 किलोमीटर के दायरे में आते हैं। गंभीर नदी इस निपटारे स्थल के पास से बहती है और यशवंत सागर बांध में मिलती है, जो इंदौर की 40% आबादी को पीने का पानी उपलब्ध कराता है। आरोप है कि अधिकारियों ने प्रभावित लोगों को खतरे से अवगत नहीं कराया और कोई स्वास्थ्य परामर्श जारी नहीं किया। हाईकोर्ट के आदेशों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट के इन आदेशों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। वरिष्ठ वकील देवदत्त कामत ने तर्क दिया कि पीथमपुर में कचरे का निपटान किए जाने से गंभीर स्वास्थ्य और पर्यावरणीय खतरे उत्पन्न होंगे। जनता को न तो कोई परामर्श दिया गया, न ही सुरक्षा उपायों पर चर्चा हुई। क्या है चुनौतियां पीथमपुर संयंत्र के पास आबादी बसी हुई है। तरापुरा गांव (105 मकान) सिर्फ 250 मीटर की दूरी पर है, लेकिन लोगों को विस्थापित करने की कोई योजना नहीं बनाई गई। भीर नदी के पास संयंत्र स्थित है, जिससे जल प्रदूषण होने का खतरा है। याचिका में मांग की गई है कि पीथमपुर में कचरे का निपटान न किया जाए। छोटे-छोटे हिस्सों में अलग-अलग जगहों पर सुरक्षित तरीके से कचरे को नष्ट किया जाए। प्रभावित नागरिकों को स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों के बारे में जानकारी दी जाए और उचित सुरक्षा उपाय किए जाएं। पीथमपुर में 1250 से अधिक उद्योग हैं और यह घनी आबादी वाला क्षेत्र है। यह इंदौर से सिर्फ 30 किमी दूर है, जिससे इंदौर के नागरिकों पर भी खतरा मंडरा रहा है। तीन ट्रायल में होगा निपटारा 18 फरवरी के आदेश में हाईकोर्ट ने कहा था कि 30 मीट्रिक टन कचरे का परीक्षण निपटारा (ट्रायल रन) किया जाएगा। पहला ट्रायल 27 फरवरी को 10 टन कचरे का होगा, जिसकी प्रक्रिया 3-4 दिन चलेगी। यदि कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं होता, तो दूसरा ट्रायल 4 मार्च और तीसरा ट्रायल 10 मार्च 2025 को होगा। परीक्षण के नतीजों के आधार पर बाकी कचरे का निपटारा किया जाएगा और एक स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की जाएगी। नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित है यह देखेगा सुप्रीम कोर्ट सुप्रीम कोर्ट अगली सुनवाई में यह देखेगा कि क्या खतरनाक कचरे के निपटारे में सुरक्षा सुनिश्चित हुई है? अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई गंभीर खतरा प्रतीत हुआ, तो कचरे के निपटारे पर रोक लगाई जा सकती है। वहीं, सरकार और प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि कचरे का निपटारा पूरी सुरक्षा और वैज्ञानिक मानकों के तहत किया जाए। भोपाल गैस त्रासदी से जुड़े 337 मीट्रिक टन जहरीले कचरे के निपटान को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती है और सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर आगे का रास्ता तय होगा।

असम की अर्थव्यवस्था 6 लाख करोड़ रुपए तक पहुंची, यह डबल इंजन सरकार के प्रभाव को दर्शाता है: पीएम मोदी

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को गुवाहाटी में एडवांटेज असम 2.0 निवेश और इंफ्रास्ट्रक्चर शिखर सम्मेलन 2025 का उद्घाटन किया। इस कार्यक्रम के दौरान उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि भाजपा शासन में असम की अर्थव्यवस्था दोगुनी होकर 6 लाख करोड़ रुपए हो गई है। उन्होंने कहा कि यह “डबल इंजन” सरकार के प्रभाव को दर्शाता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि पूर्वी भारत और पूर्वोत्तर की भूमि एक नए भविष्य की ओर अग्रसर है। उन्होंने एडवांटेज असम पहल को असम की क्षमता और प्रगति से दुनिया को जोड़ने का एक भव्य अभियान बताया। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक रूप से पूर्वी भारत ने भारत की समृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और अब, जब भारत विकास की ओर बढ़ रहा है, तो पूर्वोत्तर अपनी ताकत दिखाने के लिए तैयार है। विशेषज्ञ भारत के तेज़ विकास को लेकर आश्वस्त पीएम मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि भारत अपनी स्थानीय आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत कर रहा है और विभिन्न वैश्विक क्षेत्रों के साथ मुक्त व्यापार समझौते कर रहा है। उन्होंने पूर्वी एशिया के साथ बढ़ती कनेक्टिविटी और भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे के उभरने का उल्लेख किया, जो कई अवसरों को खोलता है। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद, कई विशेषज्ञ भारत के तेज़ विकास को लेकर आश्वस्त हैं। उन्होंने इस आत्मविश्वास का श्रेय भारत की युवा और तेज़ी से कौशल प्राप्त करने वाली आबादी, इसके नए मध्यम वर्ग की बढ़ती आकांक्षाओं और देश के 140 करोड़ लोगों से राजनीतिक स्थिरता और नीतिगत निरंतरता के लिए समर्थन को दिया। उन्होंने सरकार के सुधारों और स्थानीय आपूर्ति श्रृंखला को मज़बूत करने की प्रशंसा की। रेल बजट में हुई वृद्धि पर भी प्रकाश डाला उन्होंने असम के बढ़ते योगदान पर जोर देते हुए कहा कि 2018 में एडवांटेज असम का पहला संस्करण लॉन्च किया गया था, जब राज्य की अर्थव्यवस्था लगभग 2.75 लाख करोड़ रुपए थी। अब यह बढ़कर 6 लाख करोड़ रुपए हो गई है, जो भाजपा शासन के तहत छह साल में अर्थव्यवस्था को दोगुना करने का प्रदर्शन करती है, जो डबल इंजन सरकार की सफलता को दर्शाती है। प्रधानमंत्री ने असम के रेल बजट में हुई वृद्धि पर भी प्रकाश डाला, जो 2009 से 2014 के बीच औसतन 2,100 करोड़ रुपए से बढ़कर वर्तमान सरकार के तहत 10,000 करोड़ रुपए हो गया है। उन्होंने कहा कि सरकार बुनियादी ढांचे, उद्योग और नवाचार में महत्वपूर्ण निवेश कर रही है, जो भारत की प्रगति की नींव के रूप में काम करते हैं। मिशन मोड पर काम कर रहा भारत प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत “मेक इन इंडिया” पहल के तहत अपने विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए मिशन मोड पर काम कर रहा है, जिससे कम लागत वाले विनिर्माण को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि असम ने 2030 तक 143 बिलियन अमरीकी डॉलर का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) हासिल करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है, और उन्होंने राज्य के लोगों की क्षमता और राज्य सरकार की प्रतिबद्धता के कारण इस लक्ष्य को प्राप्त करने की राज्य की क्षमता पर विश्वास व्यक्त किया। उन्होंने यह कहते हुए समापन किया कि असम दक्षिण-पूर्व एशिया और भारत के बीच एक प्रमुख प्रवेश द्वार के रूप में उभर रहा है। इस क्षमता को बढ़ाने के लिए सरकार ने उत्तर-पूर्व औद्योगिकीकरण परिवर्तन योजना, ‘उन्नति’ शुरू की है। प्रधानमंत्री ने असम के चाय उद्योग को राज्य की क्षमता का एक उदाहरण बताया। 200 साल पूरे करने के बाद, असम चाय राज्य को अन्य क्षेत्रों में भी उत्कृष्टता हासिल करने के लिए प्रेरित करती है।  

मध्यप्रदेश में नियोजित शहरी विकास के लिये केन्द्र सरकार प्रदेश को हरसंभव मदद करेगी:केन्द्रीय मंत्री खट्टर

भोपाल ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2025 केन्द्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विकसित भारत वर्ष-2047 की कल्पना की है। इस लक्ष्य को हासिल करने में शहरों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में नियोजित शहरी विकास के लिये केन्द्र सरकार प्रदेश को हरसंभव मदद करेगी। केन्द्रीय मंत्री खट्टर ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में मंगलवार को नगरीय प्रशासन द्वारा आयोजित अनलॉकिंग लेण्ड वेल्यू विषय पर आयोजित सत्र को संबोधित कर रहे थे। केन्द्रीय शहरी कार्य मंत्री खट्टर ने कहा कि मध्यप्रदेश में शहरों के नियोजित विकास को लेकर जो तीन पॉलिसी जारी की गई है, यह प्रदेश सरकार की ओर से उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में शहरों के विकास की बहुत संभावनाएं हैं। शहरों के समग्र विकास के लिये राज्य सरकार को सघन आबादी वाले शहरों पर विशेष ध्यान देना होगा। उन्होंने भोपाल, इन्दौर मेट्रो लाईन की चर्चा करते हुए कहा कि मेट्रो लाईन का विस्तार इस तरह से किया जाये कि इसका फायदा समाज के प्रत्येक वर्ग को मिल सके। उन्होंने मेट्रो पॉलिटन सिटी के विकास में एक विस्तृत योजना तैयार करने पर भी जोर दिया। केन्द्रीय मंत्री खट्टर ने बढ़ती शहरी आबादी का आंकलन सही रूप में किये जाने की बात कही। शहरी क्षेत्र के परिवहन की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी के जरिये पर्यावरण संरक्षण को प्रोत्साहित कर रही है। उन्होंने कार्बन उत्सर्जन पर नियंत्रण और कार्बन क्रेडिट का फायदा देने वाली प्रोत्साहन नीति का व्यापक प्रचार-प्रसार करने की आवश्यकता बताई। शहरी क्षेत्रों के विकास के लिये निवेश को किया जायेगा प्रोत्साहित नगरीय विकास एवं आवास मंत्री विजयवर्गीय ने सत्र में कहा कि प्रदेश में नगरीय निकायों में आय के स्रोत बढ़ाये जाने के लिये प्रयास किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि हाल ही में जारी की गयी इन्टीग्रेटेड टाउनशिप पॉलिसी से शहरों का समग्र रूप से विकास हो सकेगा। उन्होंने बताया कि आवास से जुड़ी नई नीतियों में डेवलपर्स और बिल्डर्स को कई रियायतें दी गयी हैं। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा हुकुमचंद मिल इंदौर की भूमि के रि-डेवलपमेंट के बारे में जानकारी दी। मंत्री विजयवर्गीय ने कहा कि प्रदेश के शहरों को हरा-भरा बनाया जायेगा। कॉलोनी में ग्रीन एरिये को जगह देने वाले बिल्डर्स और डेवलपर्स को राज्य सरकार की ओर से रियायत दी जायेगी। आज के सत्र में एमपी इंटीग्रेटेड पॉलिसी, पुनर्घनत्वीकण और मध्यप्रदेश हाउसिंग रि-डेवपमेंट पॉलिसी पर चर्चा हुई। प्रमुख सचिव नगरीय प्रशासन संजय कुमार शुक्ला ने बताया कि बिल्डर्स और डेवलपर्स के साथ अब प्रत्येक 3 माह में प्रशासनिक अधिकारी चर्चा करेंगे। उन्होंने कहा कि स्थानीय निकायों के सिंगल विण्डो सिस्टम को और पारदर्शी बनाया जायेगा। कार्यक्रम में सहकारिता मंत्री विश्वास कैलाश सारंग, नगरीय प्रशासन राज्य मंत्री श्रीमती प्रतिमा बागरी एवं भोपाल महापौर श्रीमती मालती राय विशेष रूप से रही। महापौरों से चर्चा केन्द्रीय मंत्री खट्टर और नगरीय विकास मंत्री विजयवर्गीय ने प्रदेश के नगर निगमों के महापौरों से चर्चा की। उन्होंने कहा कि आदर्श नगर निगम बनाने के लिये स्थानीय निकायों को आय बढ़ाने पर ध्यान देना होगा।  

लॉजिस्टिक्स-कनेक्टिंग एमपी टू द वर्ल्ड सेशन में विशेषज्ञों ने किए विचार व्यक्त

भोपाल ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2025 के दूसरे दिन ‘लॉजिस्टिक्स: कनेक्टिंग एमपी टू द वर्ल्ड’ सत्र में मध्यप्रदेश को लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग का वैश्विक केंद्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण विचार-विमर्श हुआ। इस अवसर पर विशेषज्ञों और अधिकारियों ने औद्योगिक कॉरिडोर, डिजिटल एकीकरण, निवेश अवसरों और लॉजिस्टिक्स इन्फ्रास्ट्रक्चर के विस्तार पर अपने विचार साझा किए। मध्यप्रदेश लॉजिस्टिक्स ईज अक्रॉस डिफरेंट स्टेट्स (एलईएडीएस) इंडेक्स में ‘फास्ट मूवर’ के रूप में उभरते हुए इस क्षेत्र में अपनी स्थिति लगातार मजबूत कर रहा है। नियमों को सरल बनाने, एमएसएमई को बढ़ावा देने और निवेशकों के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने से प्रदेश एक लॉजिस्टिक पॉवर हाउस बनाने की ओर अग्रसर है। ऊर्जा दक्षता, इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार और अत्याधुनिक तकनीकों के समावेश से मध्यप्रदेश लॉजिस्टिक्स सेक्टर में नई संभावनाएं सृजित कर रहा है। लॉजिस्टिक्स पॉवर हाउस में बदलता मध्यप्रदेश सेशन की शुरुआत में एनवीडी विभाग के सचिव, जॉन किंग्सले ने प्रदेश में लॉजिस्टिक्स सेक्टर के मौजूदा परिदृश्य और नए निवेश अवसरों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश मजबूत परिवहन नेटवर्क, मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स ईकोसिस्टम के व्यापक विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। वर्तमान में मध्यप्रदेश लॉजिस्टिक्स का पावर हाउस बनकर उभर रहा है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश देश के मध्य स्थित होने की वजह से रोड रेल और एयर कनेक्टिविटी आसान हो गई है। सीईओ एनआईसीडीसी एवं चेयरमैन एनएलडीएसएल, राजत कुमार सैनी ने लॉजिस्टिक्स इन्फ्रास्ट्रक्चर को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में औद्योगिक कॉरिडोर और डिजिटल टेक्नोलॉजी इंटीग्रेशन की भूमिका पर विशेष संबोधन दिया। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश लॉजिस्टिक्स की लागत को प्रभावी बनाने और परिवहन सुविधाओं को डिजिटल माध्यमों से अधिक सशक्त करने की दिशा में लगातार प्रयासरत है। डब्ल्यूएआईपीए के डिप्टी एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर, दुष्यंत ठाकोर ने वैश्विक निवेश परिदृश्य और मध्यप्रदेश के लॉजिस्टिक्स उद्योग में निवेश अवसरों पर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश का रणनीतिक भौगोलिक स्थान और विकसित लॉजिस्टिक्स नेटवर्क इसे वैश्विक निवेशकों के लिए आकर्षक बनाता है। द चार्टर्ड इंस्टीट्यूट ऑफ लॉजिस्टिक्स एंड ट्रांसपोर्ट इंडिया के सेक्रेटरी जनरल, संजीव गर्ग ने लॉजिस्टिक्स सेक्टर में नवाचार और आपूर्ति शृंखला की दक्षता बढ़ाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के लॉजिस्टिक्स हब बनने की प्रबल संभावनाएं हैं, जिससे विभिन्न उद्योगों को सुगम और लागत प्रभावी परिवहन सुविधाएं मिल सकेंगी। डीपी वर्ल्ड के वाइस प्रेसिडेंट-ऑपरेशंस, रेल एंड इनलैंड टर्मिनल्स, महेंद्र बिरहाडे ने और वेयरहाउसिंग सेक्टर में अत्याधुनिक तकनीकों के उपयोग और मल्टी-मॉडल परिवहन की संभावनाओं पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि प्रदेश में लॉजिस्टिक्स पार्कों और वेयरहाउसिंग सुविधाओं का विस्तार वैश्विक मानकों को ध्यान में रखकर किया जा रहा है। फ्लिपकार्ट ग्रुप के रीजनल डायरेक्टर – वेस्ट एवं साउथ, महेश पंजवानी ने ई-कॉमर्स लॉजिस्टिक्स के विकास और सप्लाई चेन मैनेजमेंट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी तकनीकों के प्रभाव पर रोशनी डाली। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स का विस्तार तेजी से हो रहा है, जिससे उद्योगों को निर्बाध आपूर्ति शृंखला सुनिश्चित हो सके। हर्ष ट्रांसपोर्ट प्रा. लि. के मैनेजिंग डायरेक्टर, डिप्पी वांकानी ने लॉजिस्टिक्स सेक्टर में निजी निवेश की संभावनाओं और सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल के प्रभावी क्रियान्वयन पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग में निजी निवेश आकर्षित करने के लिए अनुकूल नीतियों पर काम कर रहा है।  

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