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फिर 6000 करोड़ का कर्जा लेने की तैयारी मोहन सरकार, 4 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा के कर्ज तले दबा प्रदेश

भोपाल मध्य प्रदेश की मोहन सरकार ग्लोबल इन्वेस्टर समिट से ठीक पहले एक बार फिर 6000 करोड़ रुपए का नया कर्ज लेने जा रही है। यह कर्ज तीन अलग-अलग हिस्सों में 20 फरवरी को लिया जाएगा। जिसकी भरपाई 12, 15 और 23 वर्षों की अवधि में की जाएगी। इससे पहले, 1 जनवरी 2025 को सरकार ने 5,000 करोड़ रुपए का कर्ज लिया था। नए कर्ज के बाद, चालू वित्त वर्ष में सरकार द्वारा लिया गया कुल कर्ज 41,000 करोड़ रुपए तक पहुंच जाएगा।बता दें कि पिछले साल 4 महीने में चार बार लगातार सरकार ने 20 हजार करोड़ का कर्ज़ लिया था। मध्य प्रदेश सरकार पर अब तक 4 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का कर्ज़ हो चुका है। बता दें कि प्रदेश सरकार, अभी 24 और 25 फरवरी को आयोजित होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट की तैयारी कर रही है। इस समिट के आयोजन के लिए विशेष तैयारियां की हैं। इस समिट में देश-विदेश से निवेशक भाग लेंगे, जिनके लिए सरकार ने यात्रा, ठहरने और अन्य व्यवस्थाओं की योजना बनाई है। इन तैयारियों में करोड़ों रुपए खर्च होने का अनुमान है।

पीएम मोदी ने नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भगदड़ में मरने वालों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त

नई दिल्ली नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर शनिवार रात मचे भगदड़ में 18 लोगों की मौत हो गई तो दर्जनों लोग घायल हो गए। घटना में जान गंवाने वाले अधिकतर लोग बिहार के हैं। 7 साल के बच्चे से लेकर 79 साल के बुजुर्गों तक ने घटना में अपनी जान गंवाई है। मृतकों के परिजनों को 10-10 लाख रुपए मुआवजे का ऐलान किया गया है। मृतकों में 12 महिलाएं शामिल हैं तो 4 बच्चों को भी जान चली गई। भगदड़ में मारे गए बच्चों की उम्र 7 साल से लेकर 15 साल तक की है। 18 मृतकों में से 9 की पहचान बिहार निवासी के रूप में हुई है। बक्सर, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर और पटना के कई लोगों ने हादसे में अपनी जान गंवा दी। इनकी गई जान 1. आहा पत्नी पति रविंदे नाथ, निवासी बक्सर, उम्र- 79 साल 2. पिंकी पत्नी पति उपेंद्र शर्मा, निवासी संगम विहार दिल्ली, उम्र- 41 साल 3. शीला पत्नी पति उमेश गिरी, निवासी सरिता विहार दिल्ली, उम्र 50 साल 4. व्योम पुत्र धर्मवारी, निवासी बवाना दिल्ली, उम्र- 25 साल 5. पूनम देवी पत्नी मेघा नाथ, निवासी सारन बिहार, उम्र- 40 साल 6. ललिता देवी पत्नी संतोश, निवासी- पटना बिहार, उम्र- 35 साल 7. सुरुचि पुत्री मनोज शाह निवासी मुजफ्फरपुर बिहार, उम्र- 11 साल 8. कृष्णा देवी पत्नी विजय शाह, निवासी- समस्तीपुर बिहार, उम्र- 40 साल 9. विजय शाह पुत्र राम स्वरूप शाह निवासी- समस्तीपुर बिहार, उम्र- 15 साल 10. नीरज पुत्र इंद्रजीत पासवान, निवासी वैशाली बिहार, उम्र- 12 साल 11. शांति देवी पत्नी राज कुमार मांझी, निवासी- नवादा बिहार, उम्र 40 साल 12. पूजा कुमार पुत्री राज कुमार मांझी, नवादा बिहार, उम्र- 8 साल 13. संगीता मलिक पत्नी मोहित मलिक, निवासी- भिवानी हरियाणा, उम्र 34 साल 14. पूनम पत्नी वीरेंद्र सिंह, निवासी महावीर एनक्लेव उम्र 34 साल 15. ममता झा पत्नी विपिन झा, निवासी- नांगलोई दिल्ली, उम्र 40 साल 16. रिया सिंह पुत्री ओपिल सिंह, निवासी- सागरपुर दिल्ली, उम्र 7 साल 17. बेबी कुमारी पुत्री प्रभु शाह, निवासी- बिजवासन दिल्ली, उम्र- 24 साल 18. मनोज पुत्र पंजदेव कुशवाहा, निवासी नांगलोई दिल्ली, उम्र 47 साल प्रयागराज होते हुए बिहार जाने वाली स्वतंत्रता सेनानी भी थी लेट शनिवार रात महाकुंभ जाने वाले यात्रियों की रेलवे स्टेशन पर भारी भीड़ उमड़ पड़ी थी। प्लेटफॉर्म 14, 15 के बीच पुल पर भीड़ के अनियंत्रित हो जाने से सीढ़ियों पर खड़े लोग हादसे का शिकार हो गए। एक अधिकारी ने बताया कि स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस और भुवनेश्वर राजधानी एक्सप्रेस देरी से चल रही थीं और इन ट्रेन के यात्री भी प्लेटफार्म नंबर 12, 13 और 14 पर मौजूद थे। स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस प्रयागराज होते हुए बिहार जाती है। बड़ी संख्या में लोग स्वतंत्रता सेनानी में बैठना चाहते थे। कई गाड़ियों के लेट होने के बीच जब एक स्पेशल ट्रेन की घोषणा हुई तो अधिक से अधिक लोग उसकी तरफ बढ़ना चाहते थे, जिससे यह हादसा हुआ। पीड़ितों के लिए मुआवजे का ऐलान रेलवे ने नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भगदड़ में मारे गए लोगों के परिजन को 10-10 लाख रुपए मुआवजा देने घोषणा की। रेलवे ने कहा कि गंभीर रूप से घायलों को ढाई-ढाई लाख रुपये और मामूली रूप से घायल हुए लोगों को एक-एक लाख रुपए दिए जाएंगे। भगदड़ की पुलिस ने शुरू की जांच दिल्ली पुलिस ने नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर मची भगदड़ की घटना की रविवार को जांच शुरू कर दी जिसके तहत सीसीटीवी फुटेज का विश्लेषण कर यह पता लगाया जाएगा कि अफरातफरी क्यों मची। पुलिस सूत्रों ने यह जानकारी दी। नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर शनिवार देर रात भगदड़ मचने से कम से कम 18 लोगों की मौत हो गई और 12 से अधिक लोग घायल हो गए। पुलिस सूत्रों ने कहा, ‘हमारा मुख्य लक्ष्य भगदड़ के मुख्य कारण की जांच करना है। हम सीसीटीवी फुटेज और उस दौरान की गई घोषणाओं का सारा डेटा एकत्र करेंगे।’  नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर शनिवार रात मची भगदड़ में 18 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। इस हादसे में कई लोग घायल हैं, जिनका दिल्ली के एलएनजेपी अस्पताल में इलाज चल रहा है। रेलवे ने हादसे की जांच के लिए कमिटी गठित कर दी है। सूत्रों के मुताबिक, रेलवे की रिपोर्ट में सामने आया है कि स्टेशन पर इतना बड़ा हादसा कैसे हुआ। रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। घंटेभर में 1500 जनरल टिकट बेचे गए रिपोर्ट में सामने आया है कि नई दिल्ली स्टेशन पर प्रयागराज के लिए ट्रेन आने वाली थी। प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ के लिए भारी संख्या में लोग शाम से ही स्टेशन पहुंचना शुरू हो गए थे। जिन लोगों के पास ट्रेन का कंफर्म टिकट था, उनके अलावा भी हजारों की तादाद में लोग प्लेटफॉर्म पर पहुंचे। रिपोर्ट के अनुसार, नई दिल्ली स्टेशन पर एक घंटे में 1500 जनरल टिकट बेचे गए। ये संख्या बताती है कि स्टेशन पर यात्रियों की कितनी भारी भीड़ थी। अचानक कैसे मची भगदड़? जानकारी के अनुसार, भगदड़ स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 14 पर हुई। दरअसल 14 नंबर प्लेटफॉर्म पर प्रयागराज एक्सप्रेस आने वाली थी। वहीं 13 नंबर प्लेटफॉर्म पर बिहार के लिए आने वाली ट्रेन देरी से चल रही थी। इसके बाद अनाउंसमेंट हुआ कि प्लेटफॉर्म नंबर 16 से एक स्पेशल ट्रेन प्रयागराज के लिए चलेगी। घोषणा के बाद ही लोग प्लेटफॉर्म नंबर 14 से 16 की ओर बढ़ने लगे। प्लेटफॉर्म नंबर 14 पर पहले से ही ओवर क्राउड था। भीड़ सीढ़ियों की मदद से ऊपर की ओर बढ़ी, वहीं सीढ़ियों पर पहले से ही पैर रखने की जगह नहीं थी। ऐसी धक्का-मुक्की में कुछ लोग बेहोश हो गए और नीचे गिर गए। लोगों को कुचलते हुए भीड़ आगे बढ़ने लगी। प्लेटफॉर्म पर भगदड़ की स्थिति हो गई।   रेलवे अधिकारी ने बताई भगदड़ की वजह उत्तर रेलवे के CPRO हिमांशु शेखर उपाध्याय ने कहा, “कल जब यह दुखद घटना हुई, उस समय नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर 14 पर पटना की ओर जाने वाली मगध एक्सप्रेस और प्लेटफार्म नंबर 15 पर जम्मू की ओर जाने वाली उत्तर संपर्क क्रांति खड़ी थी। इसी दौरान फुट ओवर ब्रिज से प्लेटफार्म नंबर 14-15 की ओर आने वाली सीढ़ियों पर यात्रियों के फिसलकर गिरने से उनके पीछे खड़े कई यात्री इसकी चपेट … Read more

सरकार ने नई आबकारी नीति की लागू, POS मशीन के बिना शराब बेचने पर लगेगा जुर्माना

भोपाल मध्य प्रदेश में सरकार ने नई आबकारी नीति लागू की है। इस नीति के तहत 19 धार्मिक शहरों और गांवों में शराब की दुकानें बंद होंगी। POS मशीन के बिना शराब बेचने पर जुर्माना लगेगा। नई नीति 1 अप्रैल से लागू होगी। धार्मिक क्षेत्र में शराबबंदी के बाद दूसरे जगह पर दुकान खोलने का फैसला लिया गया है। बंद हो चुकी दुकानों की भरपाई के लिए शराब अब महंगी हो जाएगी। 19 पवित्र शहरों और गांव में 1 अप्रैल से शराब की दुकान बंद होगी। ई गारंटी के तहत साइबर ट्रेजरी चालान बैंक खातों में जमा होगा।   POS मशीन से होगी निगरानी बता दें कि मध्य प्रदेश में 20 साल में 37% शराब की दुकानें बढ़ चुकी हैं। रेस्टोरेंट और बार में भी जगह बढ़ाने के लिए अब अतिरिक्त शुल्क देना होगा। POS मशीन लगाने का फैसला शराब की बिक्री पर नजर रखने के लिए लिया गया है। इससे सरकार को टैक्स चोरी रोकने में मदद मिलेगी। साथ ही, यह भी पता चल सकेगा कि कौन सी दुकान कितनी शराब बेच रही है। यह पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। 1 अप्रेल से 19 क्षेत्रों में शराबबंदी मध्य प्रदेश सरकार ने 1 अप्रेल से 19 धार्मिक व पवित्र क्षेत्रों में शराबबंदी का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है. इसके तहत उज्जैन नगर निगम, ओंकारेश्वर नगर पंचायत, मंडलेश्वर नगर पंचायत, ओरछा नगर पंचायत, महेश्वर नगर पंचायत, दतिया नगर पालिका, मैहर नगर पालिका, चित्रकूट नगर पंचायत, पन्ना नगर पालिका, मुलताई नगर पालिका, मंदसौर नगर पालिका, मंडला नगर पालिका, अमरकंटक नगर पंचायत, सलकनपुर ग्राम पंचायत, बरमान कला ग्राम पंचायत, लिंगा ग्राम पंचायत, कुंडलपुर ग्राम पंचायत, बांदकपुर ग्राम पंचायत और बरमान खुर्द ग्राम पंचायत शामिल हैं. बिना पीओएस मशीन नहीं चलेगी शराब दुकान नई आबकारी नीति में यह भी कहा गया है कि बिना पीओएस यानी प्वाइंट ऑफ सेल मशीन के शराब नहीं बेची जा सकेगी. वहीं रेस्टोरेंट और बार में सिटिंग स्पेस बढ़ाने पर अतिरिक्त शुल्क भी चुकाना होगा. गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में पिछले 20 सालों में 37 प्रतिशत शराब दुकानें बढ़ चुकी हैं. शराबदुकानों और रेस्टोरेंट बार की टाइमिंग नई आबकारी नीति 2025 की गाइडलाइन के मुताबिक शराब दुकान खुलने का समय सुबह 9:30 बजे से रात 11:30 बजे तक रहेगा. वहीं रेस्टोरेंट बार, होटल, रिसॉर्ट, क्लब आदि के लिए शराब बेचे जाने की टाइमिंग सुबह 10 बजे से रात 11.30 बजे तक रहेगी. हालांकि, बार-रेस्टोरेंट, क्लब, रिसॉर्ट आदि में 12 बजे तक शराब पी जा सकेगी. बार-क्लब या रेस्टोरेंट ओनर अतिरिक्त शुल्क देकर शराब बेचने और पीने की टाइम लिमिट बढ़वा सकते हैं. गौरतलब है कि शुक्रवार को सीएम मोहन यादव की अध्यक्षता में शराब नीति के साथ कुल 4 नीतियों पर संशोधन हुआ है.

1 अप्रैल से लागू हो रही यूनिफाइड पेंशन स्‍कीम, केंद्रीय कर्मचारियों के लिए कितना बेहतर, समझें

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने राष्‍ट्रीय पेंशन सिस्‍टम (NPS) के ऑप्‍शन के तौर पर यूनिफाइड पेशन स्‍कीम (UPS) शुरू की है. 24 जनवरी को इस स्‍कीम का अधिकारिक ऐलान हुआ था. इस योजना को 1 अप्रैल 2025 से लागू किया जाएगा. UPS स‍िर्फ और सिर्फ सरकारी कमचारियों के लिए लागू होगा, जो पहले से ही NPS के तहत रजिस्‍टर्ड हैं. सरकारी कर्मचारियों के पास विकल होगा कि वे NPS या UPS में से किसी एक को चून सकते हैं. वित्त मंत्रालय ने कहा है कि एनपीएस के तहत पात्र केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के पास अब एनपीएस के तहत यूनिफाइड पेंशन योजना में स्विच करने का विकल्प है. यूपीएस योजना को तब शुरू किया गया, जब ओल्‍ड पेंशन स्‍कीम (OPS) को लेकर खूब मांग उठ रही थी. ओल्‍ड पेंशन स्‍कीम में रिटायर्ड कर्मचारियों को उनके वेतन का 50 फीसदी पेंशन के तौर दिया जाता था.   क्‍या है यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS)? यूपीएस के तहत अब केंद्रीय कर्मचारियों को एक निश्‍चित पेंशन दिया जाएगा, जो लास्‍ट 12 महीने की ऐवरेज बेसिक सैलरी का 50% होगा. कर्मचारी को यह पेंशन पाने के लिए कम से कम 25 साल तक सर्विस करनी होगी. वहीं अगर कर्मचारी की मौत हो जाती है तो परिवार को भी एक निश्चित पेंशन दिया जाएगा, जो कर्मचारी को मिलने वाले पेंशन का 60 फीसदी होगा. इसके अलावा, मिनिमम एश्‍योर्ड पेंशन भी दिया जाएगा, जिसका मतलब है कि जो लोग 10 साल तक नौकरी करते हैं तो उन्‍हें कम से कम 10 हजार रुपये की पेंशन मिलेगी. महंगाई के आधार पर बढ़ेगी पेंशन यूनिफाइड पेंशन स्कीम के तहत इंडेक्‍सेशन को भी जोड़ा गया है. इसका मतलब है कि महंगाई के हिसाब से रिटायर्ड कर्मचारियों की पेंशन बढ़ती रहेगी. यह बढ़ोतरी महंगाई राहत (Dearness Alloawance) के तौर पर पेंशन में जोड़ी जाएगी. यह ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स फॉर इंडस्ट्रियल वर्कर्स (AICPI-W) के आधार कैलकुलेट होगा. वहीं रिटायमेंट पर एकमुश्‍त रकम भी दी जाएगी. इससे करीब 23 लाख कर्मचारियों को लाभ पहुंचने वाला है. किसे मिलेगा इस योजना का लाभ? NPS के तहत कवर होने वाले केंद्रीय कर्मचारियों के लिए इस यूनिफाइड पेंशन स्कीम को शनिवार 25 जनवरी 2025 को सरकार की ओर से नोटिफाई किया गया है. यूनिफाइड पेंशन स्कीम केंद्र सरकार के ऐसे कर्मचारियों पर लागू होगी, जो कि NPS यानी नेशनल पेंशन स्कीम के तहत आते हैं और इसके तहत यूपीएस के ऑप्शन को चुनते हैं.  यूपीएस चुनने वाले लोग किसी अन्य पॉलिसी रियायत, पॉलिसी चेंज, फाइनेंशियल बेनिफिट के हकदार नहीं होंगे. सरकार कितना करेगी योगदान? केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बीते 24 अगस्त 2024 को यूपीएस का ऐलान करते हुए इससे जुड़ी तमाम जानकारियां शेयर की थीं. न्यू पेंशन स्कीम (NPS) में कर्मचारी को अपनी बेसिक सैलरी का 10 फीसदी कॉन्ट्रिब्यूट करना होता है और इसमें सरकारी कॉन्ट्रिब्यूशन 14 फीसदी होता है. वहीं 1 अप्रैल 2025 से UPS लागू होने के बाद सरकार का ये कॉन्ट्रिब्यूशन या अंशदान कर्मचारी की बेसिक सैलरी का 18.5 फीसदी होगा. इस हिसाब से सरकारी खजाने पर बढ़ने वाला अतिरिक्त बोझ पहले साल 6250 करोड़ रुपये होगा. 23 लाख से ज्यादा केंद्रीय कर्मचारियों को फायदा पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) इसके लिए जरूरी नियम जारी करेगी. यह योजना 23 लाख से ज्यादा केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए लाभकारी मानी जा रही है. इस योजना के तहत सरकार का कॉन्ट्रिब्यूशन बेसिक पे और महंगाई भत्ते (DA) की कुल राशि का 18.5 फीसदी हो जाएगा, जो पहले 14 फीसदी था. वहीं, कर्मचारी अपनी पेंशन के लिए 10 फीसदी का कॉन्ट्रिब्यूशन जारी रखेंगे. UPS के फायदे UPS प्रोग्राम की शुरुआत सरकारी कर्मचारियों की ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) को बहाल करने की लगातार मांग के जवाब में की गई है, जिसमें रिटायर्ड कर्मचारियों को उनकी अंतिम वेतन का 50 फीसदी पेंशन के रूप में मिलता था. यूपीएएस के तहत, सरकारी कर्मचारी अपनी मूल सैलरी और महंगाई भत्ते का 10 फीसदी योगदान देंगे, जबकि सरकार 18.5 फीसदी का योगदान करेगी. इसके अलावा, सरकार एक अलग पूल्ड कॉर्पस के लिए एडिशनल 8.5 फीसदी का योगदान करेगी. इस स्कीम में रिटायरमेंट के बाद कर्मचारियों को उनकी अंतिम 12 महीनों की औसत सैलरी का 50 फीसदी पेंशन के तौर पर मिलेगा. UPS के लिए एलिजिबिलिटी यूनिफाइड पेंशन स्कीम का लाभ केवल उन्हीं कर्मचारियों को मिलेगा जिन्होंने कम से कम 10 साल की सर्विस पूरी कर ली है. रिटारमेंट पर कर्मचारियों के मिलने वाले फायदे     पेंशन की गारंटी: रिटायरमेंट के बाद हर महीने आपकी पिछली 12 महीनों की औसत सैलरी का 50% पेंशन के तौर पर मिलेगा.     महंगाई के साथ बढ़ेगी पेंशन: पेंशन में समय-समय पर महंगाई के हिसाब से बढ़ोतरी होगी.     फैमिली पेंशन: अगर कर्मचारी की मौत हो जाती है, तो परिवार को पेंशन का 60 फीसदी हिस्सा मिलेगा.     रिटायरमेंट बेनिफिट्स: रिटायरमेंट के समय ग्रेच्युटी के साथ एकमुश्त रकम दी जाएगी.     मिनिमम पेंशन: कम से कम 10 साल की नौकरी करने वालों को ₹10,000 महीना पेंशन की गारंटी है.     वॉलंटरी रिटायरमेंट का विकल्प: 25 साल की नौकरी के बाद आप वॉलंटरी रिटायरमेंट ले सकते हैं. आपकी पेंशन उस उम्र से शुरू होगी, जब आप सामान्य रिटायरमेंट की उम्र में पहुंचते हैं. क्या NPS छोड़कर UPS में आ सकते हैं? जो कर्मचारी पहले से NPS में हैं, वे इस नई स्कीम में शिफ्ट हो सकते हैं. हालांकि, UPS में एक बार शिफ्ट करने के बाद आप वापस NPS में नहीं जा सकते. कैसे होगा NPS से UPS में बदलाव? यूपीएस में गारंटीड पेंशन का फायदा उठाने के लिए कर्मचारियों को अपना पूरा एनपीएस फंड यूपीएस में ट्रांसफर करना होगा. अगर आपका एनपीएस फंड यूपीएस के लिए तय न्यूनतम राशि से कम है, तो आपको अंतर की रकम खुद भरनी होगी. अगर आपका फंड तय सीमा से ज्यादा है, तो अतिरिक्त रकम आपको वापस मिल जाएगी. UPS के तहत डीए और डीआर यूपीएस में सरकार का योगदान 14 फीसदी से बढ़कर 18.5 फीसदी हो जाएगा, जबकि कर्मचारी का योगदान बेसिक वेतन और महंगाई भत्ता का 10 फीसदी ही रहेगा. महंगाई राहत (DR) की गणना उसी तरह की जाएगी जैसे वर्तमान कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ता (DA) की जाती है और यह केवल तब ही दी जाएगी जब भुगतान शुरू होंगे. रिटायरमेंट … Read more

प्रयागराज संगम में डुबकी लगाने वाले श्रद्धालुओं की संख्या ने तोड़ा रिकॉर्ड, US -रूस की जनसंख्या से ज्यादा लोगों ने लगाई डुबकी!

प्रयागराज प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ 2025 ने इतिहास रच दिया है। 13 जनवरी से शुरू हुए इस विराट समागम में अब तक 50 करोड़ से अधिक श्रद्धालु त्रिवेणी संगम में डुबकी लगाकर पुण्य लाभ प्राप्त कर चुके हैं। महाकुंभ के इस आयोजन का महत्व इस बात से भी समझा जा सकता है कि पूरी दुनिया में केवल भारत और चीन की जनसंख्या ही इस संख्या से अधिक है। वहीं, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रयासों से महाकुंभ ने अपनी दिव्यता और भव्यता से दुनिया को आकर्षित किया है। सीएम योगी ने पहले ही अनुमान जताया था कि इस बार महाकुंभ में श्रद्धालुओं की संख्या एक नया रिकॉर्ड स्थापित करेगी, जो अब सच साबित हो चुका है। शुरुआत में 45 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान था, जो 11 फरवरी को ही पूरा हो गया था। 14 फरवरी तक यह संख्या 50 करोड़ को पार कर गई है, और आगामी स्नान पर्वों के साथ यह संख्या 55 से 60 करोड़ तक जा सकती है। यूएस सेंसस ब्यूरो की एक रिपोर्ट के अनुसार, पूरी दुनिया के 200 से अधिक राष्ट्रों में जनसंख्या के दृष्टिकोण से टॉप 10 देशों में क्रमश: भारत (1,41,93,16,933), चीन (1,40,71,81,209), अमेरिका (34,20,34,432), इंडोनेशिया (28,35,87,097), पाकिस्तान (25,70,47,044), नाइजीरिया (24,27,94,751), ब्राजील (22,13,59,387), बांग्लादेश (17,01,83,916), रूस (14,01,34,279) और मैक्सिको (13,17,41,347) शामिल हैं. वहीं महाकुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या अब तक की (50 करोड़) हो चुकी है. अमेरिका, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, नाइजीरिया, ब्राजील, बांग्लादेश, रूस और मैक्सिको की जनसंख्या इससे कहीं पीछे है. सीएम योगी ने अनुमान जताया था कि इस बार कुंभ में लोगों की संख्या का नया रिकॉर्ड बनेगा. शुरुआत में ही 45 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान लगाया गया था. उनका यह आकलन बीते 11 फरवरी को ही सच साबित हो गया था. वहीं शुक्रवार 14 फरवरी को यह संख्या 50 करोड़ के ऊपर पहुंच चुकी है. अभी महाकुंभ में 12 दिन और एक महत्वपूर्ण स्नान पर्व शेष हैं. स्नान करने वालों की यह संख्या 55 से 60 करोड़ के ऊपर जा सकती है. विभिन्न स्नान पर्वों पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ अब तक के कुल श्रद्धालुओं की संख्या का विश्लेषण करें तो सर्वाधिक 8 करोड़ श्रद्धालुओं ने मौनी अमावस्या पर स्नान किया था, जबकि 3.5 करोड़ श्रद्धालुओं ने मकर संक्रांति पर अमृत स्नान किया था. एक फरवरी और 30 जनवरी को 2-2 करोड़ के पार और पौष पूर्णिमा पर 1.7 करोड़ श्रद्धालुओं ने पुण्य डुबकी लगाई थी. इसके अलावा बसंत पंचमी पर 2.57 करोड़ श्रद्धालुओं ने त्रिवेणी में आस्था की डुबकी लगाई थी. माघी पूर्णिमा के महत्वपूर्ण स्नान पर्व पर भी दो करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने संगम में पावन स्नान किया था. दुनिया के प्रमुख देशों की जनसंख्या से अधिक श्रद्धालु ने लगाई डुबकी यूएस सेंसस ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के टॉप 10 देशों की जनसंख्या में केवल भारत और चीन की जनसंख्या महाकुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या से अधिक है। भारत की जनसंख्या 1.41 अरब और चीन की 1.40 अरब है, जबकि अमेरिका (34.2 करोड़), पाकिस्तान (25.7 करोड़), नाइजीरिया (24.3 करोड़) जैसे देशों की जनसंख्या महाकुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं से काफी कम है। पर्वों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़  महाकुंभ के दौरान विभिन्न स्नान पर्वों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। सर्वाधिक 8 करोड़ श्रद्धालुओं ने मौनी अमावस्या पर स्नान किया था, जबकि 3.5 करोड़ श्रद्धालुओं ने मकर संक्रांति पर अमृत स्नान किया था। एक फरवरी और 30 जनवरी को 2-2 करोड़ श्रद्धालुओं ने पुण्य डुबकी लगाई थी, वहीं पौष पूर्णिमा पर 1.7 करोड़ श्रद्धालुओं ने त्रिवेणी संगम में स्नान किया था। बसंत पंचमी पर 2.57 करोड़ श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई और माघी पूर्णिमा पर भी दो करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने संगम में पावन स्नान किया। आने वाले दिनों में और बढ़ सकती है श्रद्धालुओं की संख्या महाकुंभ में अभी 12 दिन और एक महत्वपूर्ण स्नान पर्व शेष है, जिसमें और श्रद्धालु संगम में स्नान करने के लिए पहुंच सकते हैं। इस बार के महाकुंभ में श्रद्धालुओं की संख्या पिछले वर्षों से कहीं अधिक रही है, जो एक अभूतपूर्व रिकॉर्ड है।  

भारत से टकरा सकता है विनाशकारी एस्टेरॉयड 2024 YR4, वैज्ञानिकों ने खतरे को बढ़ाकर 2.3 प्रतिशत कर दिया

वॉशिंगटन  एस्टेरॉयड 2024 YR4 के पृथ्वी से टकराने की आशंका लगातार बढ़ती जा रही है। वैज्ञानिकों ने पहले अनुमान लगाया था कि एस्टेरॉयड 2024 YR4 के पृथ्वी से टकराने की आशंका करीब 1 प्रतिशत है। लेकिन अब खतरे को बढ़ाकर 2.3 प्रतिशत कर दिया गया है। खतरे की संभावना का लगातार बढ़ना वैज्ञानिकों को भी लगातार परेशान कर रहा है। सबसे परेशान करने वाली बात ये है कि कि इसकी स्पीड क्या है और वास्तविक आकार क्या है, इसकी जानकारी नहीं मिल पाई है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इसका आकार 200 मीटर तक हो सकता है। हालांकि नासा के वैज्ञानिकों ने एस्टेरॉयड 2024 YR4 के संभावित असर वाले क्षेत्रों की पहचान करनी शुरू कर दी है ताकि अगर वास्तव में टक्कर अवश्यंभावी हो जाए, तो पहले से ही लोगों को बचाने की कोशिशें शुरू की जा सकें। नासा के वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया है कि अगर एस्टेरॉयड 2024 YR4 पृथ्वी से टकराता है तो ये पूरे शहर को नष्ट कर सकता है। लिहाजा नासा ने एस्टेरॉयड के गिरने को लेकर जो संभावित रास्ता तैयार किया है, उसमें भारत समेत कई घनी आबादी वाले देश आते हैं। वैज्ञानिकों का ये भी मानना है कि अगर ये एस्टेरॉयड पृथ्वी पर गिरता है तो ये 500 परमाणु बमों से ज्यादा शक्तिशाली ऊर्जा का निर्माण कर सकता है। लिहाजा विनाश का स्तर क्या हो सकता है, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। एस्टेरॉयड 2024 YR4 के टकराने की आशंका बढ़ी नासा के कैटालिना स्काई सर्वे प्रोजेक्ट के इंजीनियर डेविड रैंकिन ने उत्तरी दक्षिण अमेरिका से लेकर प्रशांत महासागर, दक्षिणी एशिया, अरब सागर और उप-सहारा अफ्रीका के कुछ हिस्सों तक इस एस्टेरॉयड के गिरमे के जोखिम गलियारे की पहचान की है। इसके अलावा जिन देशों में एस्टेरॉयड के गिरने की संभावना सबसे ज्यादा जताई गई है उनमें भारत, बांग्लादेश, पाकिस्तान, इथियोपिया, सूडान, नाइजीरिया, वेनेजुएला, कोलंबिया और इक्वाडोर शामिल हैं। वैज्ञानिक रैंकिन ने कहा है कि “हालांकि प्रभाव की संभावना कम है, लेकिन अगर 2024 YR4 पृथ्वी से टकराता है, तो हम संभावित परिणामों को नजरअंदाज़ नहीं कर सकते।” एस्टेरॉयड 2024 YR4 को पिछले साल दिसंबर में खोजा गया था। जिसके बाद नासा और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) के वैज्ञानिकों के लिए ये एक प्रमुख मुद्दा बन गया है। शुरुआती अनुमानों में टकराव की संभावना 1% थी, जो अब बढ़कर 2.3 प्रतिशत हो गई है। जिसे काफी खतरनाक कैटोगिरी में रखा गया है। वैज्ञानिक मानते हैं कि इसके आकार और स्पीड के बारे में फिलहाल ज्यादा जानकारी नहीं है। सबसे ज्यादा खतरनाक कैटोगिरी में रखा गया एस्टेरॉयड 2024 YR4 से संभावित खतरे को देखते हुए इसे टोरिनो स्केल पर तीन की रेटिंग दी गई है। टोरिनो स्केल पृथ्वी के पास होने वाले जोखिम को मापता है। एस्टेरॉयड 2024 YR4 को इतिहास में उस स्तर तक पहुंचने वाले एस्टेरॉयड के साथ रखा गया है, जिसने सबसे ज्यादा जोखिम पैदा की थी। वो है कुख्यात ‘गॉड ऑफ कैओस’ एस्टेरॉयड 99942 अपोफिस। डेटा यह भी संकेत मिले हैं, कि अगर ऐस्‍टरॉयड वाकई पृथ्वी से टकराता है, तो इसके स्तर स्थानीय हो सकते हैं। इस ऐस्‍टरॉयड का व्यास उस ऐस्‍टरॉयड के बराबर है, जो साल 1908 में साइबेरिया में तुंगुस्का घटना का कारण बना था। उस वक्त जब ऐस्‍टरॉयड टकराया था, तो करीब 2 हजार वर्ग किलोमीर का जंगल नष्ट हो गया था। उस टक्कर में 80 मिलियन से ज्यादा पेड़ उखड़ गये थे। विस्फोट का बल 10-15 मेगा टन टीएनटी के बराबर होने का अनुमान लगाया गया था। अभी तक जो आंकड़े उपलब्ध हो पाएं हैं, उससे पता चलता है, कि ये ऐस्‍टरॉयड 22 दिसंबर 2032 को पृथ्वी के करीब एक लाख 6 हजार किलोमीटर की दूरी से गुजरेगा, जिसमें मार्जिन ऑफ एरर 1.6 मिलियन किलोमीटर हो सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस दूरी पर, यह पश्चिमी मध्य अमेरिका से लेकर उत्तरी दक्षिण अमेरिका, फिर मध्य अटलांटिक महासागर और अफ्रीका के कुछ हिस्सों से होते हुए भारत तक पहुंचने वाली एक संकीर्ण पट्टी में पृथ्वी से टकरा सकता है।

भारत टेक्स एक्सपो में मप्र दिखा रहा टेक्सटाइल की संभावनाएं, मप्र दुनिया का 24% तो देश का 47% आर्गेनिक कॉटन का उत्पादक

धार  मध्यप्रदेश सरकार के प्रयासों से धार जिले में स्थापित किए जा रहे पीएम मित्र पार्क को निवेशकों से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिल रही है। इस पार्क में अब तक 10,500 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं, जिससे राज्य में औद्योगिक विकास को एक नई गति मिलेगी। इसके अलावा, इस परियोजना से 41,000 युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। टेक्सटाइल निवेश के लिए मजबूत आधार PM Mitra Parks : मध्यप्रदेश देश में कपास के उत्पादन में छठवें स्थान पर है, जो इसे टेक्सटाइल उद्योग के लिए एक उपयुक्त स्थान बनाता है। सरकार ने इस क्षेत्र में निवेश को आकर्षित करने के लिए 1,300 एकड़ का लैंड बैंक विकसित किया है, जिससे निवेशकों को भूमि अधिग्रहण में किसी प्रकार की कठिनाई न हो। मप्र के प्रेजेंटेशन में जानकारी दी गई है कि प्रदेश आर्गेनिक कॉटन के उत्पादन सहित टेक्सटाइल सेक्टर में परंपरागत रूप से आगे रहा है। आयोजन में मप्र पार्टनर स्टेट के रूप में शामिल हुआ है। आयोजन का उद्घाटन केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने किया। एमपी पवेलियन में प्रदेश की टेक्सटाइल सेक्टर की ताकत को दिखाया गया है। मप्र देश भर में कपास के उत्पादन में छठे नंबर पर है और यहां पारम्परिक रूप से टेक्सटाइल उत्पादन क्षेत्र रहे हैं। पवेलियन में बताया गया है कि मप्र आर्गेनिक कॉटन के उत्पादन में देश में 47 % का तो दुनिया में 24 % का योगदान करता है। आयोजन में बताया गया है कि मप्र में टेक्सटाइल सेक्टर में एक दशक में 25 हजार करोड़ का निवेश आ चुका है। धार में 2160 एकड़ में बन रहा पीएम मित्र पार्क आयोजन में मप्र धार में 2160 एकड़ में बन रहे पीएम मित्र पार्क की संभावनाओं का भी प्रदर्शन कर रहा है। टेक्सटाइल सेक्टर को समर्पित इस प्रोजेक्ट में 1265 एकड़ इंडस्ट्रियल प्लाट तो 36 एकड़ एमएसएमई के लिए प्लाट उपलब्ध हैं। लॉजिस्टिक्स सुविधाओं के लिए 75 एकड़ तो प्लग एंड प्ले (पूर्व विकसित क्षेत्र) के लिए 67 एकड़ क्षेत्र रखा गया है। यहाँ निवेशक सीधे आकर काम शुरू कर सकते हैं। पीएम मित्र पार्क में 1 रुपए में जमीन तो 5 रु. में बिजली पीएम मित्र पार्क में सिर्फ 1 रुपए की लीज रेंट पर जमीन दी जाएगी, निवेशक को सिर्फ विकास शुल्क देना होगा। 40 % कैपिटल सब्सिडी, 50 % सीवेज ट्रीटमेंट पर सब्सिडी, हर एक कर्मचारी को नौकरी देने पर 5 हजार रुपये, एमएसएमई को 50 करोड़ तक सहायता, इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट में 40 करोड़ तक की बड़ी सहायता मिलेगी। ये बताया गया कि पार्क में 60 किमी अप्रोच रोड बन चुकी है। बिजली -पानी सप्लाई के काम जारी है। प्रोजेक्ट में इंटीग्रेटेड टाउनशिप भी बनेगी। एमपीआईडीसी को 10547 करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिल चुके हैं जिनसे 41600 से अधिक नौकरियां मिलेंगी। ग्रासिम, रेयमंड, ट्राइडेंट, इंडोरामा, कर्ल ऑन सहित बड़े समुह निवेश करेंगे। धार में पीएम मित्र पार्क: विशेष सुविधाएं  धार जिले में 2,160 एकड़ भूमि पर विकसित किया जा रहा पीएम मित्र पार्क निवेशकों को कई आकर्षक सुविधाएं प्रदान कर रहा है। इसमें मुख्य रूप से निम्नलिखित सुविधाएं शामिल हैं:     कम लागत पर भूमि: 1 रुपये प्रति वर्ग मीटर की लीज रेंट     सस्ती बिजली: 5 रुपये प्रति यूनिट की दर पर बिजली उपलब्ध     आधुनिक बुनियादी ढांचा: उद्योगों के लिए वर्ल्ड-क्लास सुविधाएं     सड़क एवं लॉजिस्टिक्स कनेक्टिविटी: सुगम परिवहन और निर्यात हेतु बेहतरीन नेटवर्क राज्य सरकार का सहयोग  मध्यप्रदेश सरकार उद्योगों को आवश्यक अनुमति एवं सुविधाएं जल्द से जल्द उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। टेक्सटाइल सेक्टर के विकास के लिए सरकार ने कई प्रोत्साहन योजनाएं भी लागू की हैं, जिससे निवेशकों को आकर्षित किया जा सके। पीएम मित्र पार्क क्या है और इसका उद्देश्य क्या है? पीएम मित्र पार्क (PM MITRA Park) एक मेगा इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल पार्क है, जिसे केंद्र सरकार और राज्य सरकार मिलकर विकसित कर रही हैं। इसका उद्देश्य भारत को वैश्विक टेक्सटाइल हब बनाना और रोजगार के अवसर पैदा करना है। पीएम मित्र पार्क में निवेश करने के क्या लाभ हैं? निवेशकों को 1 रुपये लीज रेंट पर जमीन, 5 रुपये प्रति यूनिट की दर से सस्ती बिजली, और वर्ल्ड-क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी सुविधाएं मिलेंगी। मध्यप्रदेश टेक्सटाइल उद्योग के लिए क्यों उपयुक्त है? मध्यप्रदेश कपास उत्पादन में देश में छठवें स्थान पर है, जिससे यहां टेक्सटाइल उद्योग के लिए पर्याप्त कच्चा माल उपलब्ध होता है। साथ ही, सरकार निवेशकों को सुविधाजनक नीतियों और प्रोत्साहन योजनाओं के जरिए समर्थन दे रही है। पीएम मित्र पार्क में कौन-कौन से उद्योग स्थापित किए जा सकते हैं? इस पार्क में कपड़ा निर्माण, गारमेंटिंग, प्रोसेसिंग, डाइंग, और टेक्सटाइल से जुड़े अन्य उद्योग स्थापित किए जा सकते हैं। पीएम मित्र पार्क में निवेश करने के लिए क्या प्रक्रिया है? निवेश करने के इच्छुक उद्यमी और कंपनियां राज्य सरकार की वेबसाइट या संबंधित विभाग से संपर्क कर आवश्यक प्रक्रियाओं को पूरा कर सकती हैं।  

प्रोजेक्ट चीता’ 3.O से कूनो में बढ़ेगा कुनबा, दक्षिण अफ्रीका से आएंगे 10 चीते

श्योपुर प्रोजेक्ट चीता(Project Cheetah) के तहत आगामी महीनों में दक्षिण अफ्रीका से नई खेप लाई जाएगी। हालांकि अभी यह तय नहीं है कि इस खेप में कितने चीते लाए जाएंगे, लेकिन बताया रहा है कि गांधीसागर के साथ ही इन चीतों में कुछ चीते श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क में भी लाए जाएंगे। यह 8-10 हो सकते हैं। बताया जा रहा है कि नई खेप लाने के लिए भारत और दक्षिण अफ्रीकी(South Africa) सरकारों के बीच सकारात्मक चर्चा चल रही है। देश में चीतों का पहला घर कूनो नेशनल पार्क(Kuno National Park) है। मंदसौर जिले के गांधीसागर अभयारण्य को दूसरे घर के रूप में तैयार किया जा रहा है। तैयारियां अंतिम दौर में हैं, लेकिन यहां 20 चीतों को एक साथ रखने की क्षमता अपर्याप्त है। यदि नई खेप में 15-20 चीते लाए गए तो इनमें से कुछ चीते कूनो लाए जाएंगे। यहां पहले से ही छोटे-बड़े बाड़े तैयार हैं। हर साल 10 चीते शिफ्टिंग का है अनुबंध प्रोजेक्ट चीता(Project Cheetah) के तहत दक्षिण अफ्रीका(South Africa) से 8-10 साल तक प्रति वर्ष 10 चीते लाने का अनुबंध है। 18 फरवरी 2023 को 12 चीते लाए गए थे, लेकिन 2024 में चीते नहीं आए, लिहाजा अब 2025 में चीतों की शिफ्टिंग को लेकर चर्चा चल रही है। माना जा रहा है कि 20 चीते लाए जा सकते हैं। इस संबंध में अंतिम निर्णय अभी होना बाकी है। यहां बता दें कि अभी कूनो में 26 चीते हैं। इनमें 12 वयस्क और 14 शावक हैं। दक्षिण अफ्रीका से चीतों की नई खेप के संबंध में भारत सरकार के स्तर पर चर्चा चल रही है। कितने चीते लाए जाएंगे, इसका निर्णय भी वहीं से होगा। हां, इनमें कुछ चीते कूनो में भी लाए जाएंगे। – उत्तम कुमार शर्मा, डायरेक्टर, प्रोजेक्ट चीता, कूनो नेशनल पार्क CITES की अनुमति भी बनी रोड़ा इस परियोजना में एक और रुकावट CITES (कन्वेंशन ऑन इंटरनेशनल ट्रेड इन इंडेंजर्ड स्पीशीज ऑफ वाइल्ड फौना एंड फ्लोरा) से आयात अनुमति मिलने में देरी के कारण आ रही है। CITES लुप्तप्राय जानवरों और पौधों के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर नज़र रखने वाली संस्था है। इन चीतों को श्योपुर के कूनो नेशनल पार्क और मंदसौर के गांधी सागर अभ्यारण्य में लाया जाना है। लेकिन CITES की मंजूरी में देरी से यह काम रुक गया है। 1950 के दशक के बाद से भारत में चीते नहीं देखे गए हैं। चीते CITES के ‘अपेंडिक्स I’ में शामिल हैं। इसका मतलब है कि इनके व्यापार पर कड़ी नज़र रखी जाती है ताकि इन्हें अवैध अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और अति-शोषण से बचाया जा सके। आयात अनुमति के बाद लेनी होगी निर्यात अनुमति CITES से आयात अनुमति मिलने के बाद, दक्षिण अफ्रीका के अधिकारियों को चीतों को भेजने के लिए CITES से ही निर्यात अनुमति लेनी होगी। सूत्रों के अनुसार, परियोजना की योजना बनाते समय CITES की मंजूरी की जरूरत को अनदेखा कर दिया गया था, जिससे अब और मुश्किलें पैदा हो गई हैं। दुनियाभर में बचे हैं 7000 से भी कम चीते इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (IUCN) की रेड लिस्ट में चीतों को ‘असुरक्षित’ श्रेणी में रखा गया है। दुनिया भर में 7,000 से भी कम चीते बचे हैं, जो ज्यादातर अफ्रीका के घास के मैदानों में पाए जाते हैं। दक्षिणी अफ्रीका में चीतों की संख्या अच्छी है, लेकिन उत्तर और पश्चिम अफ्रीका में इनकी संख्या बहुत कम है। ईरान में एशियाई चीतों की एक छोटी आबादी भी विलुप्त होने के खतरे का सामना कर रही है। 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने दी थी मंजूरी 2019 में, सुप्रीम कोर्ट (SC) ने नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA) के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी। इस प्रस्ताव में अफ्रीकी चीतों को भारत के राष्ट्रीय उद्यानों में फिर से लाने की बात कही गई थी। मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क को इसके लिए चुना गया था। नामीबिया के चीता कंजर्वेशन फंड ने परियोजना के लिए चीते देने का वादा किया था। इसमें सिर्फ परिवहन की लागत ही भारत को वहन करनी थी।  

इंदौर : प्राधिकरण समिट में निवेशकों के लिए आकर्षक प्रस्ताव पेश करेगा, सुपर कॉरिडोर पर 28 प्लॉट चिन्हित

इंदौर इंदौर विकास प्राधिकरण द्वारा भोपाल में आयोजित की जा रही ग्लोबल इन्वेस्टर समिट में निवेशकों के लिए 28 प्लॉट उपलब्ध कराए जाएंगे, जिन पर कुल 11,000 करोड़ रुपये के निवेश के प्रस्ताव आमंत्रित किए जाएंगे। इन प्लॉट की सूची को प्राधिकरण ने अंतिम रूप दे दिया है और इसके लिए तैयारियां जोरों पर चल रही हैं। राज्य सरकार द्वारा आयोजित इस समिट में इंदौर निवेशकों की पहली पसंद रहता है, क्योंकि यहां व्यापारिक संभावनाएं अधिक हैं। इसे ध्यान में रखते हुए एमपीआईडीसी और राज्य सरकार ने रणनीति तैयार की है, और इस बार इंदौर विकास प्राधिकरण को भी इस समिट में विशेष भागीदारी करने के निर्देश दिए गए हैं। सुपर कॉरिडोर पर 28 प्लॉट चिन्हित किए गए हैं प्राधिकरण इस समिट में निवेशकों के लिए आकर्षक प्रस्ताव पेश करेगा। इसके तहत मध्य प्रदेश के पहले अनूठे स्टार्टअप पार्क के लिए भी निवेशकों की रुचि बढ़ाने वाले प्रस्ताव तैयार किए गए हैं। इसके अलावा, सुपर कॉरिडोर पर 28 प्लॉट चिन्हित किए गए हैं, जो विभिन्न व्यावसायिक और आवासीय परियोजनाओं के लिए उपलब्ध होंगे। इन सभी प्लॉट का कुल क्षेत्रफल 49 हेक्टेयर है और इनकी न्यूनतम कीमत भी निर्धारित कर दी गई है। यदि कोई निवेशक इन प्लॉटों में निवेश करना चाहता है, तो उसके माध्यम से 11,000 करोड़ रुपये का निवेश इंदौर में आ सकता है, जिससे शहर में बड़े पैमाने पर विकास होगा। प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी राम प्रकाश अहिरवार ने कल संपदा शाखा और अन्य विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक कर इस सूची को अंतिम रूप दिया। इसके साथ ही नगरीय प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव संजय शुक्ला को भी इस योजना की पूरी जानकारी दी गई है। यह भी उल्लेखनीय है कि संजय शुक्ला की विशेष रुचि और प्रयासों के कारण इस बार प्राधिकरण इन्वेस्टर समिट के लिए इतनी व्यापक तैयारी कर रहा है।  

कुंभ के लिए स्पेशल वंदे भारत का ऐलान, नई दिल्ली से वाराणसी प्रयागराज होते हुए चलेगी, 17 फरवरी तक संचालित होगी

नई दिल्‍ली  कुंभ जाने वाले यात्रियों के लिए खुशखबरी। रेलवे ने एक स्‍पेशल वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन चलाने का फैसला किया है। कुंभ में भीड़ कम करने में भी ट्रेन मददगार होगी। यह स्‍पेशल वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन (ट्रेन नंबर 02252) नई दिल्ली से वाराणसी चलेगी। ट्रेन प्रयागराज में रुकते हुए जाएगी। यह ट्रेन 15, 16 और 17 फरवरी को चलेगी। इसका मकसद वीकेंड पर कुंभ मेले जाने वाले यात्रियों की अतिरिक्त भीड़ को संभालना है। क्‍या होगी टाइम‍िंंग? ट्रेन नई दिल्‍ली (NDLS) से सुबह 5:30 बजे छूटेगी। इसका प्रयागराज (PRYJ पहुंचने का समय दोपहर 12:00 बजे है। दोपहर 2:20 बजे यह वाराणसी (BSB) पहुंचेगी। वापसी में BSB से चलने का समय दोपहर 3:15 बजे है। प्रयागराज पहुंचने का समय शाम 5:20 बजे है। यह रात 11:50 बजे नई दिल्‍ली पहुंचेगी। कुंभ मेले के लिए यात्रियों की सुविधा के लिए स्‍पेशल वंदे भारत ट्रेन 15 फरवरी 2025 से चलेगी। इसके चलने का समय और दिन ऊपर बताए गए समय के अनुसार ही रहेंगे। लाखों लाख श्रद्धालु हर दिन कुंभ में हिस्‍सा लेने के लिए पहुंच रहे हैं। अब तक करोड़ों लोग संगम में डुबकी लगा चुके हैं। कुंभ एक विशाल और महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन है जो हर 12 साल बाद भारत के चार पवित्र स्थानों में से एक में आयोजित किया जाता है। 2025 में कुंभ मेला प्रयागराज में आयोजित हो रहा है। यह एक ऐसा अवसर होता है जब करोड़ों श्रद्धालु गंगा, यमुना और सरस्वती नदियों के संगम पर स्नान करने के लिए जुटते हैं। रेलवे की अन्य तैयारियां: कुंभ मेले को ध्यान में रखते हुए रेलवे अतिरिक्त विशेष ट्रेनों, प्लेटफॉर्म प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में जुटा है. मुख्य रेलवे स्टेशनों पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए हेल्प डेस्क, मेडिकल सुविधा और विशेष गाइडेंस केंद्र स्थापित किए गए हैं. प्रयागराज, वाराणसी और अन्य प्रमुख स्टेशनों पर भीड़ नियंत्रण के लिए अतिरिक्त रेलवे कर्मियों और आरपीएफ जवानों की तैनाती की गई है. रेलवे अधिकारियों के अनुसार, कुंभ के दौरान ट्रेन सेवाओं में किसी भी व्यवधान से बचने के लिए विशेष निगरानी रखी जाएगी. टिकट बुकिंग की बढ़ती मांग को देखते हुए अतिरिक्त कोच और विशेष ट्रेनें चलाने की योजना भी बनाई गई है. यात्रियों से रेलवे की अपील: रेलवे ने कुंभ मेले में जाने वाले श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे टिकट पहले से बुक कर लें और यात्रा के दौरान रेलवे की सुरक्षा एवं स्वच्छता निर्देशों का पालन करें. साथ ही स्टेशनों पर अनावश्यक भीड़ न बढ़ाने और सुविधाओं का सुव्यवस्थित उपयोग करने की सलाह दी गई है. उत्तर रेलवे के इस विशेष वंदे भारत ट्रेन के संचालन से कुंभ यात्रियों को तेज़, सुविधाजनक और सुरक्षित यात्रा का अनुभव मिलेगा, जिससे उनकी यात्रा और भी आसान हो जाएगी.

मध्यप्रदेश खनिज संसाधन और औद्योगिक समृद्धि, शिक्षा, पर्यटन और हरित क्षेत्र में अग्रणी

भोपाल भारत का हृदय मध्यप्रदेश, समृद्ध अर्थव्यवस्था, विश्वस्तरीय इन्फ्रास्ट्रक्चर, राज्य सरकार की निवेशक-अनुकूल नीतियों और विशेष प्रोत्साहन योजनाओं के साथ निवेश के असीमित अवसरों की उपलब्धता से देश-विदेश के उद्यमियों के लिए निवेश का प्रमुख स्थल बन गया है। देश-विदेश के उद्यमियों को निवेश के अवसरों से रूबरू कराने के उद्देश्य से राजधानी भोपाल में दो दिवसीय जीआईएस-2025 का आयोजन किया जा रहा है। इसका शुभांरभ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी करेंगे। इस ‘महाकुंभ’ में दुनिया भर से आने वाले निवेशकों का समागम होगा। व्यापार और उद्योग अनुकूल माहौल बनाने के लिये प्रतिबद्ध मध्यप्रदेश सभी उद्यमियों के लिए निवेश के अपार अवसर और उसके बाद दीर्घकालिक विकास सुनिश्चित करने के प्रति संकल्पित है। मध्यप्रदेश पर्यटन, फार्मास्युटिकल्स, ऑटोमोबाइल, खनन, डेयरी और खाद्य प्र-संस्करण जैसे क्षेत्रों के प्रमुख केंद्र के रूप में उभर रहा है। बेहतर कनेक्टिविटी और औद्योगिक विकास की असीमित संभावनाएं मध्यप्रदेश एक्सपोर्ट प्रिपेअर्डनेस इंडेक्स में देश के शीर्ष़-10 राज्यों में और विश्व बैंक द्वारा आयोजित ईज़-ऑफ-डूइंग बिज़नेस में चौथे स्थान पर है। दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के प्रभाव क्षेत्र में आने से मध्यप्रदेश में लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक विकास के असीम अवसर उपलब्ध हैं। मजबूत रेल और सड़क नेटवर्क के अलावा राज्य में 6 व्यावसायिक एयरपोर्ट हैं, जहां से 100 से अधिक उड़ानें संचालित होती हैं। इससे यहां राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आवागमन सुगम हुआ है। खनिज संसाधन और औद्योगिक समृद्धि मध्यप्रदेश में कोयला, हीरा, तांबा, लौह अयस्क और ग्रेफाइट जैसे महत्वपूर्ण खनिज संसाधनों का भण्डार है। प्रदेश तांबा, मैंगनीज, मोलिब्डेनम और हीरे का देश का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है। राज्य सरकार कृषि और खाद्य प्र-संस्करण, आईटी, आईटीईएस, पर्यटन, वस्त्र उद्योग, वेयरहाउसिंग एवं लॉजिस्टिक्स, ऑटोमोबाइल, दवाइयां एवं फार्मास्युटिकल्स और रक्षा एवं एयरोस्पेस सेक्टर पर प्रमुखता से ध्यान दे रही है। राज्य में 8 फूड पार्क, लगभग 15 मिलियन मीट्रिक टन की वेयरहाउसिंग क्षमता और 3 लाख 54 हजार वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्र कवर करने वाले कोल्ड-स्टोरेज के साथ मध्यप्रदेश उद्योगों के लिए एक आकर्षक निवेश स्थल बनता जा रहा है। शिक्षा, पर्यटन और हरित क्षेत्र में अग्रणी मध्यप्रदेश देश का दूसरा सबसे बड़ा राज्य है। यहां देश भर के सबसे बड़े क्षेत्र में जैविक खेती की जाती है। भारत के कुल जैविक उत्पादन का 27% मध्यप्रदेश में होता है। भारत के सबसे स्वच्छ राज्य मध्यप्रदेश का इंदौर शहर लगातार देश का सबसे स्वच्छ शहर बना हुआ है और भोपाल स्वच्छतम राजधानी। राज्य की बड़ी जनसंख्या इसे विशाल उपभोक्ता बाजार भी बनाती है। इन्फ्रास्ट्रक्चर मध्यप्रदेश में निवेशकों के लिए 1.25 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र की औद्योगिक भूमि-बैंक है। इसमें से 19,011 हेक्टेयर क्षेत्र उद्योगों के लिए पहले ही विकसित किए जा चुके हैं। राज्य में 76 विकसित, 19 विकासाधीन और 13 प्रस्तावित भूमि-बैंक हैं, जो 5 ग्रोथ सेंटर्स में फैले 79 भूखंडों में वितरित हैं। राज्य में 6 प्रमुख ड्राई इनलैंड कंटेनर डिपो हैं, इनकी वेयरहाउसिंग क्षमता 240 लाख मीट्रिक टन है। मध्यप्रदेश ऊर्जा सरप्लस राज्य है, जहां 31 गीगावाट विद्युत का उत्पादन होता है, जिसमें 20 प्रतिशत क्लीन एनर्जी है। मध्यप्रदेश किसी भी औद्योगिक क्षेत्र की मांगों को पूरा करने के लिए पर्याप्त बिजली आपूर्ति करने में सक्षम है। सड़क नेटवर्क और लॉजिस्टिक्स मध्यप्रदेश ने अपने सड़क नेटवर्क के विकास में महत्वपूर्ण प्रगति की है। राज्य में 5 लाख किलोमीटर से अधिक लंबाई का सड़क नेटवर्क है, जिसमें 46 राष्ट्रीय राजमार्ग शामिल हैं। यह देश के राष्ट्रीय राजमार्गों का 6.6% और राज्य-राजमार्गों का लगभग 6.4% है। राज्य में प्रतिदिन 550 से अधिक ट्रेनों का संचालन होता है। इसके साथ ही 2,32,344 किलोमीटर लंबी ग्रामीण सड़कों के साथ, मध्यप्रदेश 5वां सबसे बड़ा सड़क नेटवर्क वाला राज्य है। राज्य में अटल प्रोग्रेस-वे और नर्मदा एक्सप्रेस-वे के साथ ही दिल्ली-मुंबई औद्योगिक गलियारा, पीथमपुर-धार-महू, रतलाम-नागदा, शाजापुर-देवास, और नीमच-नयागांव जैसे औद्योगिक एवं निवेश क्षेत्रों का निर्माण किया गया है। औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के लिए मध्यप्रदेश में 4 निवेश गलियारों का विकास किया जा रहा है। इनमें भोपाल-इंदौर, भोपाल-बीना, जबलपुर-कटनी-सतना-सिंगरौली और मुरैना-ग्वालियर-शिवपुरी-गुना शामिल हैं। मध्यप्रदेश ईज़-ऑफ-डूइंग बिजनेस रैंकिंग में शीर्ष प्रदर्शन करने वाले राज्यों में से एक है। यहां व्यापार संचालन और निवेश के लिये माहौल को अत्यधिक अनुकूल बनाया गया है। इसके साथ ही नियामकीय प्रक्रियाओं को अत्यंत सरल किया गया है। इससे आर्थिक विकास को प्रोत्साहन मिल रहा है। प्रदेश में किये गए मुख्य सुधारों में ऑनलाइन पंजीकरण, लाइसेंसिंग और अनुमति स्वीकृति जैसी व्यावसायिक प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण और इन्वेस्ट मध्यप्रदेश विंडो प्रमुख हैं। इन्वेस्ट पोर्टल को नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम के साथ एकीकृत किया गया है। इससे निवेशकों का विश्वास बढ़ रहा है। प्रमुख सेक्टर्स और उद्योग प्रोत्साहनकारी नीतियां राज्य में विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए आकर्षक नीतियां बनाई गई हैं। इनमें संयंत्र और मशीनरी में निवेश पर 40% तक इन्वेस्टमेंट प्रोत्साहन सहायता, रोजगार सृजन पर 1.5 गुना पूंजी सब्सिडी, निर्यात पर 1.2 गुना पूंजी सब्सिडी और प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को बढ़ावा देने के लिए 1.2 गुना पूंजी सब्सिडी शामिल है। ग्रीन इंडस्ट्रियलाइजेशन असिस्टेंस जैसी अपशिष्ट प्रबंधन प्रणालियों की स्थापना के लिए सहायता, पॉवर, जल और सड़क इन्फ्रास्ट्रक्टर के निर्माण के लिए प्रति यूनिट एक रुपया की दर से टैरिफ रिबेट और पेटेंट शुल्क की प्रतिपूर्ति भी प्रमुख प्रोत्साहन नीतियों में शामिल हैं। वस्त्र एवं परिधान क्षेत्र में ब्याज सब्सिडी, रोजगार सृजन और प्रशिक्षण प्रोत्साहन दिया जा रहा है। फार्मा सेक्टर में ग्रॉस सप्लाई वेल्यू के लिए एक वर्ष का स्टॉक पीरियड और खाद्य प्र-संस्करण सेक्टर में 50% अतिरिक्त पूंजी सब्सिडी और मंडी कर (कृषि व्यापार कर) में 5 वर्षों के लिए छूट दी गई है। स्टार्टअप और एमएसएमई नीति नवाचार-आधारित उद्यमशीलता को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने मध्यप्रदेश स्टार्ट-अप नीति-2022 जारी की है। एमएसएमई इकाइयों के विस्तार और राज्य में स्व-रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना प्रारंभ की गई है। निवेश को आकर्षित करने के लिए, राज्य सरकार ने एमएसएमई विकास नीति और औद्योगिक प्रोत्साहन नीति प्रारंभ की है। डिजिटल गवर्नेंस के तहत, स्मार्ट सिटी परियोजनाओं ने इंटीग्रेटेड कमांड कंट्रोल सेंटर्स के कार्यान्वयन से नागरिक-केन्द्रित ऑनलाइन सेवाएं प्रदान करने और सूचना के एकत्रीकरण और निगरानी को सक्षम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। नवाचार, संसाधन, और अवसंरचना के मेल से मध्यप्रदेश न केवल भारत में, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी निवेशकों के लिए एक आदर्श स्थल बनकर उभर रहा … Read more

MP में 18 फरवरी से फिर बदलेगा मौसम, बढ़ेगी सर्दी, दिन-रात के तापमान में होगी गिरावट

भोपाल  मध्य प्रदेश में मौसम ने फिर करवट बदली है। शुक्रवार को भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर समेत प्रदेश के कई शहरों में दिन के तापमान में 1 से 3 डिग्री तक की बढ़ोतरी हुई। मौसम विभाग का कहना है कि 17 फरवरी से नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस पश्चिमी हिमालय की तरफ एक्टिव होने की संभावना है। इस वजह से 18 फरवरी से प्रदेश में दिन-रात के तापमान में फिर से गिरावट होने का अनुमान है, जो अगले तीन से चार दिन तक रह सकता है। मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर भारत में वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) एक्टिव था। इस वजह से प्रदेश में ठंड का असर देखने को मिला, लेकिन यह सिस्टम अब लौट गया है। इसलिए शुक्रवार से तापमान में फिर से बढ़ोतरी देखने को मिली है। इस वजह से धार, नर्मदापुरम, खंडवा, खरगोन, रतलाम, उज्जैन, दमोह, खजुराहो, मंडला में पारा 30 डिग्री के पार पहुंच गया। रतलाम में 2.2 डिग्री की बढ़ोतरी के बाद तापमान 32.2 डिग्री रहा। बड़े शहरों की बात करें तो भोपाल में 28.4 डिग्री, इंदौर में 29.1 डिग्री, ग्वालियर में 29.5 डिग्री, उज्जैन में 30.5 डिग्री और जबलपुर में तापमान 29.3 डिग्री दर्ज किया गया। 17 फरवरी से नया सिस्टम, प्रदेश में भी असर मौसम वैज्ञानिक रैकवार ने बताया कि, 17 फरवरी से नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस पश्चिमी हिमालय की तरफ एक्टिव होने की संभावना है। इस वजह से 18 फरवरी से प्रदेश में दिन-रात के तापमान में फिर से गिरावट होने का अनुमान है, जो अगले तीन से चार दिन तक रह सकता है। वहीं, अब 17 फरवरी से एक नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस पश्चिमी हिमालय की तरफ एक्टिव होने की संभावना है। इस वजह से 18 फरवरी से प्रदेश में दिन-रात के तापमान में फिर से गिरावट होने का अनुमान है, जो अगले तीन से चार दिन तक रह सकता है। आज शनिवार को दिन का तापमान 2 से 3 डिग्री तक बढ़ सकता है। रात और सुबह के समय ठंडक बनी रहेगी। 16 फरवरी को भी दिन-रात के तापमान में बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। वेस्टर्न डिस्टरबेंस सक्रिय होंगे मौसम वैज्ञानिक रैकवार ने बताया कि, फरवरी में कई वेस्टर्न डिस्टरबेंस एक्टिव होते हैं। अबकी बार भी ऐसा ही है। इस वजह से पारे में उतार-चढ़ाव की स्थिति बनी रहेगी। फिलहाल बारिश होने के आसार नहीं है। अगले 2 दिन ऐसा रहेगा मौसम 15 फरवरी: दिन के तापमान में बढ़ोतरी होगी। 2 से 3 डिग्री तक बढ़ सकता है। रात और सुबह के समय ठंडक बनी रहेगी। 16 फरवरी: दिन-रात के तापमान में बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। फरवरी में 10 साल का ट्रेंड… तीनों मौसम का असर प्रदेश में पिछले 10 साल के आंकड़ों पर नजर डालें, तो फरवरी महीने में रातें ठंडी और दिन गर्म रहते हैं। बारिश का ट्रेंड भी है। इस बार भी ऐसा ही मौसम रहने का अनुमान है। भोपाल, इंदौर और उज्जैन में दिन का अधिकतम तापमान 30 डिग्री के पार रहेगा, जबकि रात में 10 से 14 डिग्री के बीच रह सकता है। मौसम विभाग के अनुसार, फरवरी में सबसे ज्यादा ग्वालियर ठिठुरता है। पिछले साल यहां न्यूनतम तापमान 6.1 डिग्री तक पहुंचा था, लेकिन इससे पहले 5 डिग्री के नीचे ही रहा है। जबलपुर में दिन में गर्मी और रात में ठंड रहती है। इस बार 2 महीने कड़ाके की ठंड, जनवरी में मिला-जुला असर इस बार शुरुआती दो महीने यानी, नवंबर और दिसंबर में कड़ाके की ठंड पड़ी। ठंड ने कई रिकॉर्ड तोड़ दिए। नवंबर की बात करें तो भोपाल में 36 साल का रिकॉर्ड टूटा। इंदौर, उज्जैन, जबलपुर और ग्वालियर में भी पारा सामान्य से 7 डिग्री तक नीचे रहा। वहीं, दिसंबर में भी ठंड ने रिकॉर्ड तोड़ा। स्थिति यह रही कि पूरे प्रदेश में जनवरी से भी ठंडा दिसंबर रहा। भोपाल समेत कई शहरों में ठंड ने रिकॉर्ड तोड़ दिए। 9 दिन शीतलहर चली। भोपाल में दिसंबर की सर्दी ने 58 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर समेत कई जिलों में स्कूलों की टाइमिंग बदल दी गई है, जबकि भोपाल के वन विहार नेशनल पार्क में जानवरों को सर्दी से बचाने के लिए हीटर लगाए गए। भगवान को भी ठंड से बचाने के लिए जतन किए गए। अब बात जनवरी की। शुरुआत 10 से 15 दिन तक कड़ाके की ठंड का दौर रहा, लेकिन फिर तेवर ठंडे हो गए। ठंड के दो दौर आए, जबकि तीन बार मावठा गिरा। मौसम वैज्ञानिक डॉ. सिंह ने बताया, जनवरी में ठंड का असर जरूर रहा, लेकिन पिछले 10 साल के ट्रेंड के अनुसार तेज सर्दी नहीं पड़ी। पश्चिमी विक्षोभ की स्ट्रॉन्ग एक्टिविटी नहीं होने से तेज बारिश का दौर नहीं रहा। न ही ओले गिरे, जबकि जनवरी में ओला-बारिश का दौर भी रहता है।

महाकुंभ क्षेत्र नो व्हीकल जोन घोषित, 15-16 फरवरी का पास रद्द, आने से पहले जरूर पढ़ें ये खबर

प्रयागराज प्रयागराज में इन दिनों दिव्य और भव्य महाकुंभ मेला चल रहा है. इस हफ्ते शनिवार और रविवार को भारी के भीड़ आने का अनुमान जताया जा रहा है, जिसे देखते हुए मेला प्रशासन ने सभी पास को रद्द कर दिया है. पूरे मेला क्षेत्र को नो व्हीकल जोन घोषित कर दिया है. इसी के साथ-साथ प्रशासन ने प्रयागराज संगम रेलवे स्टेशन बंद करने की भी घोषणा की है. मौनी अमावस्या पर हुई भगदड़ से सीख लेते हुए प्रशासन जरूरी सावधानियां बरत रहा हैं. महाकुंभ मेला प्रशासन ने श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए मेला क्षेत्र में जाने के लिए जारी पास को रविवार और शनिवार के लिए रद्द कर दिया है. भारी भीड़ की आशंका के चलते 15 और 16 फरवरी को पूरे महाकुंभ मेला क्षेत्र को नो व्हीकल जोन भी घोषित किया गया है. इस दौरान किसी भी वाहन को प्रवेश की अनुमति नहीं होगी. गाड़ियों को नजदीकी पार्किंग में पार्क करने की अनुमति दी जाएगी, लेकिन मेला क्षेत्र में बनी पार्किंग में गाड़ियां पार्क नहीं होगीं. 16 फरवरी तक संगम स्टेशन बंद इस संदर्भ में मेला प्रशासन ने दिशा निर्देश जारी कर दिया. कुंभ मेले में सुगम व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन ने यह बड़ा फैसला लिया है. वहीं, रेलवे ने भी भारी भीड़ को देखते हुए संगम स्टेशन 16 फरवरी तक बंद करने का ऐलान किया है. भीड़ को देखते हुए प्रयागराज में रेलवे ने जीआरपी और आरपीएफ के जवानों को अलर्ट मोड पर रहने को कहा है. दरअसल, वीकेंड की वजह से महाकुंभ नगर में शुक्रवार की सुबह से काफी संख्या में लोगों की आवाजाही शुरू हो गई है. पुलिस ने कई जगह पार्किंग स्थल बनाए बता दें कि शनिवार और रविवार को छुट्टी के दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ महाकुंभ में पहुंच रही है, इस वजह से कुंभ में भीड़ और जाम की समस्या उत्पन्न हो जाती है. वहीं दूरदराज़ से आने वाले श्रद्धालु भी अपनी गाड़ियां लेकर महाकुंभ में आना चाहते हैं, जिस वजह से श्रद्धालुओं को परेशानी भी हो रही है, पुलिस ने भीड़ को देखते हुए कई जगह पार्किंग स्थल बनाए हैं. जहां उन गाड़ियों को रोका जाता है और उसके बाद श्रद्धालु पैदल या ई-रिक्शा या शटल बसों से ही महाकुंभ में आकर संगम स्नान कर सकते हैं. भीड़ के चलते संगम के आसपास के इलाके भी जाम हो गए हैं. महाकुंभ के लिए स्पेशल ट्रेन महाकुंभ मेले में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए उत्तर रेलवे 15, 16 और 17 फरवरी को नई दिल्ली और वाराणसी (प्रयागराज के रास्ते) के बीच वंदे भारत स्पेशल ट्रेन नंबर 02252/02251 चलाएगा. उत्तर रेलवे द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि वंदे भारत स्पेशल ट्रेन संख्या 02252 सुबह 5.30 बजे नई दिल्ली से रवाना होगी. वह 12.00 बजे प्रयागराज पहुंचेगी. इसके बाद 14.20 बजे वाराणसी पहुंचेगी. उत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी हिमांशु शेखर उपाध्याय ने कहा कि वापसी के लिए ट्रेन नंबर 02251 वाराणसी से 15:15 बजे चलेगी. ये ट्रेन 17.20 बजे प्रयागराज से रवाना होगी और उसी दिन 23.50 बजे नई दिल्ली पहुंचेगी. वीकेंड पर भारी भीड़ पहुंचने का अनुमान महाकुंभ स्नान के लिए संगम स्टेशन पर पहुंची रही भारी भीड़ को देखते हुए स्टेशन को बंद करने का निर्णय लिया है. यह स्टेशन संगम के सबसे नजदीक है. यहां 16 फरवरी तक सभी तरह की एंट्री और एग्जिट पर रोक लगा दी है. बता दें कि माघ पूर्णिमा से पहले उमड़ी भीड़ के चलते 9 फरवरी को ही प्रयागराज संगम रेलवे स्टेशन 14 फरवरी तक के लिए बंद किया गया था, जिसे बढ़कर अब 16 फरवरी तक कर दिया गया है.  

महाकुंभ में बना एक और रिकॉर्ड, प्रयागराज एयरपोर्ट देश के शीर्ष 20 हवाई अड्डों में शामिल

प्रयागराज: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में इन दिनों एक ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल रहा है। दरअसल प्रयागराज महाकुंभ मेला 2025 ने इस क्षेत्र की हवाई यात्रा को पूरी तरह से बदल दिया है। 13 जनवरी में शुरू हुआ यह महाकुंभ 26 फरवरी 2024 को शाही स्नान के साथ समाप्त होगा। इसमें श्रद्धालुओं और पर्यटकों की अभूतपूर्व भीड़ उमड़ रही है। इसके चलते प्रयागराज एयरपोर्ट अब भारत के शीर्ष 20 एयरपोर्ट्स में शामिल हो गया है। यह पटना, चंडीगढ़ और गोवा के मोपा जैसे एयरपोर्ट्स से भी आगे निकल गया है। इससे उत्तर प्रदेश के लिए नई संभावनाएं पैदा हुई हैं। मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रयागराज, अयोध्या और वाराणसी को जोड़ने वाले बढ़ते टूरिस्ट सर्किट के साथ, यह क्षेत्र साल भर पर्यटकों को आकर्षित कर सकता है। यह ओलंपिक जैसे बड़े आयोजनों के प्रबंधन के लिए एक अच्छा उदाहरण पेश कर सकता है। पहले प्रयागराज एयरपोर्ट पर यात्रियों की संख्या सामान्य रहती थी। लेकिन अब यहां रोजाना उतने ही यात्री आ-जा रहे हैं, जितने महाकुंभ शुरू होने से पहले पूरे महीने में आते थे। एयरपोर्ट के टर्मिनल और एप्रन क्षेत्र को बढ़ाया गया है। इसके चलते अब रात में भी विमानों का संचालन हो रहा है। जिससे काफी ज्यादा विमान उड़ान भर पा रहे हैं। महाकुंभ से पहले के मुकाबले अब उड़ानों की संख्या चार गुना से भी ज़्यादा हो गई है। हवाई किराए भी आसमान छूने लगे। जब सोशल मीडिया पर लोगों की शिकायतें बढ़ने लगीं तो सरकार ने इस पर ध्यान दिया। सरकार और एयरलाइंस ने मिलकर काम किया। उन्होंने विमानों की संख्या बढ़ाई। ज़्यादा लोगों को ले जाने वाले बड़े विमान लगाए। इसके बाद धीरे-धीरे किराए भी कम होने लगे। एविएशन एनालिटिक्स फर्म सिरियम के आंकड़ों के मुताबिक, प्रयागराज एयरपोर्ट कुछ दिनों में 42 से ज़्यादा विमानों की उड़ान को संभाल सकता है। यह पहले के मुकाबले चार गुना ज़्यादा है। इस बढ़ोत्तरी में स्पाइसजेट सबसे आगे है। एयरपोर्ट से चलने वाली 283 साप्ताहिक उड़ानों में से 116 स्पाइसजेट की हैं। इंडिगो 82 उड़ानों के साथ दूसरे नंबर पर है। एयर इंडिया की भी 32 साप्ताहिक उड़ानें हैं। सरकारी एयरलाइन एलायंस एयर की 28 और अकासा एयर की 25 साप्ताहिक उड़ानें हैं। स्पाइसजेट इस फायदेमंद रूट पर पूरा ध्यान दे रही है। इसका अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रयागराज के लिए स्पाइसजेट की उड़ानें उसकी कुल घरेलू उड़ानों का लगभग 13% हैं। यही नहीं कनेक्टिविटी भी बढ़ी है। प्रयागराज अब 17 अलग-अलग शहरों से जुड़ा है। दिल्ली सबसे आगे है, जहां से 87 साप्ताहिक उड़ानें हैं। मुंबई से 53 और बेंगलुरु से 36 उड़ानें हैं। सिर्फ़ प्रयागराज ही नहीं, बल्कि आस-पास के इलाके भी इस बढ़ी हुई कनेक्टिविटी का फ़ायदा उठा रहे हैं। अयोध्या और वाराणसी की यात्राएं श्रद्धालुओं में लोकप्रिय हो रही हैं। इससे मुख्य सड़कों पर भीड़ बढ़ रही है। उदाहरण के लिए, इस फरवरी में वाराणसी में पिछले साल के मुकाबले 40% ज़्यादा उड़ाने चल रही हैं। भारत के शीर्ष 10 एयरपोर्ट्स एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) के अनुसार, दिल्ली का इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट सबसे ऊपर है। मुंबई का छत्रपति शिवाजी महाराज एयरपोर्ट 20.2% की बढ़ोतरी के साथ दूसरे नंबर पर है। बेंगलुरु के केंपेगौड़ा एयरपोर्ट (BLR) ने 17.6% की वृद्धि दर्ज की है। हैदराबाद और चेन्नई में क्रमशः 19.3% और 14.2% की बढ़ोतरी हुई है। कोलकाता का नेताजी सुभाष चंद्र बोस एयरपोर्ट पूर्वी भारत का सबसे व्यस्त एयरपोर्ट बना हुआ है। अहमदाबाद और कोच्चि ने भी अच्छी प्रगति की है। पुणे में 19% की वृद्धि हुई है। गोवा के डाबोलिम एयरपोर्ट में 17.8% की गिरावट आई है क्योंकि मोपा एयरपोर्ट के शुरू होने से वहां के यात्री अब मोपा जाने लगे हैं।

भोपाल के स्कूल को IED ब्लास्ट से उड़ाने की धमकी, तेलुगु भाषा में मेल किया, स्कूल खाली कराया गया; पुलिस और ATS ने ली तलाशी

भोपाल भोपाल के पिपलानी में एक प्राइवेट स्कूल को बम से उड़ाने की धमकी मिली है। शनिवार की सुबह स्कूल के ऑफिशियल ईमेल आईडी पर तेलगू भाषा में एक धमकी भरा मेल मिला। जिसमें स्कूल की बिल्डिंग को IED ब्लास्ट से उड़ाने की धमकी मिली है। स्कूल स्टाफ में एक व्यक्ति को तेलगू भाषा की समझ है। उसने तुरंत मेल को ट्रांसलेट करके अन्य स्टाफ को जानकारी दी। धमकी मिलने के बाद से स्कूल में हड़कंप मच गया। सूचना पर पुलिस की टीम बीडी (बॉम्ब डिस्पोजल) और डॉग स्क्वायड की टीम के साथ मौके पर पहुंची और स्कूल के कोने कोने की तलाशी ली। शनिवार को छुट्टी होने के कारण बच्चे स्कूल में नहीं थे। स्कूल में पैरेंट्स टीचर मीटिंग बुलाई गई थी। उस समय स्कूल में करीब 50 लोग मौजूद थे। सभी को परिसर से बाहर निकाल दिया गया। मामला शनिवार सुबह 10.30 बजे हरमन माइनर स्कूल का है। आज स्कूल की छुट्‌टी थी, लेकिन स्टाफ के कुछ सदस्य और कुछ छात्रों के परिजन मीटिंग के लिए मौजूद थे। धमकी मिलने के बाद तुरंत ही वे बाहर निकल गए और पुलिस को सूचना दी। स्कूल के हर कोने की हुई तलाशी मौके पर पहुंची पुलिस ने बीडी (बॉम्ब डिस्पोजल) और डीएस (डॉग स्क्वायड) की टीम के साथ स्कूल की सघन तलाशी शुरू कर दी। इसके अलावा, एटीएस (एंटी टेरर स्क्वायड) की टीम भी जांच के लिए पहुंची। थाना प्रभारी (TI) अनुराग लाल ने बताया कि स्कूल के कोने-कोने की तलाशी ली गई, लेकिन कोई संदिग्ध वस्तु बरामद नहीं हुई। आईपी एड्रेस ट्रेस करने की कोशिश थाना प्रभारी अनुराग लाल ने बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस और विशेष सुरक्षा दल मौके पर पहुंचे। स्कूल के कोने कोने की तलाशी ली गई, लेकिन कोई भी संदिग्ध वस्तु नहीं मिली। पुलिस का कहना है कि मेल भेजने वाले व्यक्ति की पहचान के लिए साइबर एक्सपर्ट्स की मदद ली जा रही है। उसका आईपी एड्रेस ट्रेस कर रहे हैं। पुलिस ने स्कूल में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है। पुलिस के साथ एटीएस भी इम मामले की जांच करने में लगी हुई है। पुलिस का मानना है कि यह किसी शरारती तत्व का काम हो सकता है। लेकिन फिर भी जांच जारी है। तेलुगु भाषा में था मेल, स्टाफ ने किया ट्रांसलेट धमकी भरा मेल तेलुगु भाषा में लिखा गया था। स्कूल स्टाफ में मौजूद एक व्यक्ति को तेलुगु भाषा आती थी, उसने मेल को ट्रांसलेट कर इसकी जानकारी अन्य स्टाफ को दी। इसके बाद तुरंत स्कूल खाली कराया गया। उस समय वहां करीब 50 लोग मौजूद थे। स्कूल की सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

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