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शिक्षक भर्ती में नई व्यवस्था लागू: MP में एजुकेशन पोर्टल 3.0 से ऑनलाइन होगा डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन

भोपाल प्रदेश में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सरल और समयबद्ध बनाने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। अब शिक्षक भर्ती परीक्षा में पात्र घोषित अभ्यर्थियों के दस्तावेजों का सत्यापन ऑनलाइन किया जाएगा। इस नई व्यवस्था की शुरुआत प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षक भर्ती प्रक्रिया से की जाएगी। इसके लिए विभाग ने एजुकेशन पोर्टल-3.0 पर एक विशेष मॉड्यूल तैयार कर लिया है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार इस डिजिटल व्यवस्था के लागू होने से भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और अभ्यर्थियों को अनावश्यक भागदौड़ से राहत मिलेगी। पोर्टल पर अपलोड करने होंगे दस्तावेज नई व्यवस्था के तहत चयनित अभ्यर्थियों को अपने शैक्षणिक प्रमाणपत्र और अन्य जरूरी दस्तावेज एजुकेशन पोर्टल-3.0 पर अपलोड करने होंगे। इसके बाद संबंधित अधिकारी पोर्टल के माध्यम से ही इन दस्तावेजों का सत्यापन करेंगे। अधिकारियों का कहना है कि इससे भर्ती प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित होगी और अभ्यर्थियों को विभिन्न कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। 13 हजार पदों के लिए जारी हुई मेरिट सूची हाल ही में मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल ने प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा के लगभग 13 हजार पदों के लिए मेरिट सूची जारी की है। इसके साथ ही माध्यमिक शिक्षक भर्ती की प्रक्रिया भी शुरू होने वाली है। विभाग की योजना है कि इसी महीने से पात्र अभ्यर्थियों के दस्तावेजों का सत्यापन एजुकेशन पोर्टल-3.0 के माध्यम से शुरू कर दिया जाए। इससे उम्मीद है कि ग्रीष्मावकाश के बाद सरकारी स्कूलों को नए शिक्षक उपलब्ध हो सकेंगे। इस संबंध में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जल्द ही आधिकारिक आदेश जारी किए जाने की संभावना है।   डीईओ कार्यालय में नहीं करना पड़ेगा इंतजार अब तक शिक्षक चयन परीक्षा में मेरिट सूची में शामिल अभ्यर्थियों को दस्तावेज सत्यापन के लिए संभागीय कार्यालय या जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) कार्यालय में उपस्थित होना पड़ता था। इस प्रक्रिया में कई बार अभ्यर्थियों को घंटों तक इंतजार करना पड़ता था, जिससे उन्हें काफी असुविधा होती थी। इसके अलावा कुछ मामलों में दस्तावेज सत्यापन में गड़बड़ी की शिकायतें भी सामने आई थीं। ऑनलाइन व्यवस्था लागू होने के बाद अभ्यर्थी घर बैठे ही अपने दस्तावेज पोर्टल पर अपलोड कर सकेंगे और अधिकारियों द्वारा उनकी जांच ऑनलाइन ही की जाएगी। इस तरह पूरी होगी ऑनलाइन प्रक्रिया नई प्रणाली के तहत पात्र अभ्यर्थी एजुकेशन पोर्टल-3.0 पर लॉगिन कर निर्धारित मॉड्यूल में अपने शैक्षणिक प्रमाणपत्र, पहचान पत्र और अन्य आवश्यक दस्तावेज स्कैन कर अपलोड करेंगे। इसके बाद विभागीय अधिकारी पोर्टल के माध्यम से इन दस्तावेजों की जांच कर सत्यापन की प्रक्रिया पूरी करेंगे। यदि किसी दस्तावेज में त्रुटि पाई जाती है या अतिरिक्त जानकारी की आवश्यकता होती है, तो अभ्यर्थियों से ऑनलाइन ही सुधार या अतिरिक्त दस्तावेज जमा करने के लिए कहा जाएगा। सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद नियुक्ति आदेश भी ऑनलाइन जारी किए जाएंगे, जिससे पूरी भर्ती प्रक्रिया तेज और पारदर्शी बन सकेगी।

मेंटेनेंस के कारण मैहर शारदा मंदिर रोपवे सेवा स्थगित, 14 मार्च तक नहीं चलेगा; ऑनलाइन टिकट का पैसा लौटेगा

सतना मैहर जिला में स्थित मां शारदा देवी मंदिर में संचालित दामोदर रोपवे सेवा 5 मार्च से 14 मार्च तक मेंटेनेंस कार्य के कारण बंद कर दी गई है। रोपवे प्रबंधन ने ऑनलाइन टिकट बुक कराने वाले यात्रियों को टिकट कैंसिल कर रिफंड लेने की सुविधा दी है। मैहर स्थित मां शारदा देवी मंदिर में संचालित दामोदर रोपवे सेवा 5 मार्च से 14 मार्च तक मेंटिनेंस कार्य के चलते पूरी तरह बंद कर दी गई है। इस अवधि में रोपवे का संचालन स्थगित रखा गया है। टिकट बुकिंग पर रोक और रिफंड की मांग रोपवे बंद होने के साथ ही ऑनलाइन टिकट बुकिंग भी अस्थायी रूप से रोक दी गई थी, लेकिन इससे पहले कई श्रद्धालुओं ने लगभग एक सप्ताह पहले ही एडवांस टिकट बुक करा ली थी। इसके चलते कुछ यात्री पहले से बुक टिकट लेकर मैहर पहुंच रहे हैं और रिफंड की मांग कर रहे हैं। रोपवे प्रबंधन के अनुसार 5 मार्च से 15 मार्च के बीच कुल 18 लोगों ने 77 एडवांस टिकट बुक किए थे।   रिफंड प्रक्रिया की वर्तमान स्थिति आठ टिकट धारकों को रिफंड, 30 यात्रियों का मिलना बाकी: 5 मार्च से 15 मार्च के बीच कुल 18 लोगों की 77 एडवांस टिकट बुक हुए थे। इनमें से 8 टिकटों का रिफंड, जिसमें 33 यात्रियों की राशि शामिल है, पूरा कर दिया गया है। वहीं 5 टिकट धारकों के 30 यात्रियों का रिफंड अभी लंबित है क्योंकि उनके बैंकिंग विवरण का इंतजार किया जा रहा है। प्रबंधन ने बताया कि शेष 5 टिकट धारकों ने कॉल का जवाब नहीं दिया है।   प्रबंधन की अपील और हेल्पलाइन नंबर उन्हें दिन में दो बार संपर्क करने का प्रयास किया जा रहा है। उम्मीद जताई गई है कि मंगलवार तक सभी शेष रिफंड की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी, बशर्ते यात्रियों से बैंक खाते की जानकारी समय पर मिल जाए। प्रबंधन ने यात्रियों से अपील की है कि रोपवे सेवा शुरू होने तक यात्रा की योजना बनाने से पहले जानकारी अवश्य प्राप्त कर लें। रिफंड या टिकट से संबंधित किसी भी जानकारी के लिए यात्री हेल्पलाइन नंबर 08065130000 पर संपर्क कर सकते हैं या ईमेल कर जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

5 घंटे तक झूमेगा इंदौर: देश के सबसे बड़े रंगोत्सव में तोप-मिसाइलों से पुष्प वर्षा, लाखों लोग होंगे शामिल

इंदौर एक बार फिर इंदौर की रंग-रंगीली रंगपंचमी का उल्लास रविवार को राजवाड़ा पर दिखाई देगा। इसमें लाखों लोग अपनेपन रंग-गुलाल में रमने के लिए शामिल होंगे। 77 वर्ष से चली आ रही संस्थाओं के बैनर तले निकलने वाली गेर परंपरा को निभाने के लिए एक के बाद एक रसिया कॉर्नर, टोरी कॉर्नर, मारल क्लब, संगम कॉर्नर की गेर और नगर-निगम, हिंदरक्षक संगठन फाग यात्रा निकलेगी। रंग-गुलाल से हर एक को भिगोते हुए जब चार किलोमीटर लंबे मार्ग से हजारों लोगों की भागीदारी वाला यह कारवां जब निकलेगा तो यह दृश्य देखते ही बनेगा। धार्मिक, सामाजिक और देशभक्ति के रंग इसमें धार्मिक-सामाजिक के साथ ही देश भक्ति के रंग नजर आएंगे। हिंद रक्षक की फाग यात्रा में महाकाल मंदिर की प्रतिकृति तो संगम कॉर्नर की गेर में महाकाल की जटा से गंगाजी के अवतरित होने का दृश्य नजर आएंगे। किसी का गीत-संगीत युवाओं को उत्साहित करने तो कहीं रंगों से बनने वाला तिरंगा देशभक्ति भक्ति की भावना को प्रबल करेगा। शहर की हृदय स्थली पर जब सुबह 10 से दोपहर 3 बजे तक टैंकरों, बोरिंग मशीन, मिसाइलों के साथ ही विभिन्न उपकरणों से लाल-गुलाबी, हरे, पीले, नीले रंग उत्साह से उड़ाकर धरती के साथ आसमान भी रंगों से सराबोर होगा।   गेर मार्ग पर दर्शकों के लिए विशेष व्यवस्था स्मार्ट सिटी कंपनी द्वारा रंगपंचमी पर इंदौर में निकलने वाली पारंपरिक गेर को निहारने के लिए तीन इमारतों की छतों पर बैठक व्यवस्था की है। इसमें गौराकुंड के पास पृथ्वीलोक होटल की दो इमारत व बालाजी टावर पर यह बैठक व्यवस्था है। यहां की छतों पर तिरपाल लगाई गई है और दर्शकों के लिए पेयजल व सुविधाघर की व्यवस्था भी रहेगी। ऑनलाइन सीट बुकिंग और एनआरआई का उत्साह बुक माय शो से यहाँ पर 150 सीटों की बुकिंग की प्रक्रिया की गई, हालांकि शनिवार शाम 6 बजे तक 50 सीटें ही बुक हुई थीं। एक सीट का शुल्क 100 रुपये लिया गया है। गौरतलब है कि पिछले वर्ष भी इसी तरह ऑनलाइन सीट बुकिंग की व्यवस्था की गई थी। इसमें 90 सीटों पर बुकिंग हुई थी। कई एनआरआई खास तौर पर गेर को देखने के लिए इंदौर आए थे और उन्होंने अपनी सीट बुक की थी।

‘राष्ट्रीय महिला आयोग आपके द्वार’ पहल: 9 मार्च को जयपुर में महिलाओं की शिकायतों पर होगी सुनवाई

जयपुर महिलाओं की समस्याओं के त्वरित समाधान और उन्हें न्याय दिलाने के उद्देश्य से राष्ट्रीय महिला आयोग आपके द्वार कार्यक्रम के तहत सोमवार, 9 मार्च को जयपुर में महिला जनसुनवाई का आयोजन किया जाएगा। इस जनसुनवाई में राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर स्वयं उपस्थित रहकर महिलाओं की शिकायतों और समस्याओं की सुनवाई करेंगी। यह महिला जनसुनवाई सोमवार, 9 मार्च को प्रातः 11 बजे से राजस्थान पुलिस अकादमी के बैठक कक्ष में आयोजित की जाएगी। कार्यक्रम के दौरान महिलाओं से संबंधित विभिन्न प्रकार की शिकायतों, पारिवारिक विवाद, घरेलू हिंसा, उत्पीड़न, संपत्ति संबंधी विवाद तथा अन्य सामाजिक मुद्दों से जुड़ी समस्याओं पर सुनवाई कर उनके समाधान के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जाएंगे। जिला कलक्टर डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी ने कार्यक्रम के सफल एवं सुचारू आयोजन के लिए संबंधित विभागों के अधिकारियों को आवश्यक जिम्मेदारियां सौंपी हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जनसुनवाई में प्राप्त होने वाली शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए सभी विभाग पूर्ण तैयारी के साथ उपस्थित रहें और महिलाओं को आवश्यक सहयोग प्रदान करें। जनसुनवाई के समन्वय एवं व्यवस्थाओं के लिए उपखण्ड अधिकारी जयपुर दक्षिण श्री अरुण कुमार को समग्र प्रभारी नियुक्त किया गया है। उनके नेतृत्व में विभिन्न विभागों के अधिकारी कार्यक्रम की व्यवस्थाओं, शिकायतों के संकलन और उनके त्वरित निस्तारण के लिए समन्वय करेंगे। जिला प्रशासन द्वारा महिलाओं से अपील की गई है कि जिन महिलाओं को किसी भी प्रकार की समस्या या शिकायत है, वे इस जनसुनवाई में उपस्थित होकर अपनी समस्या सीधे राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष के समक्ष प्रस्तुत कर सकती हैं। इस पहल का उद्देश्य महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना तथा उनकी समस्याओं का शीघ्र एवं प्रभावी समाधान सुनिश्चित करना है।

भारत के स्टार शटलर लक्ष्य सेन की शानदार सफलता, ऑल इंग्लैंड ओपन फाइनल में दूसरी बार

बर्मिंघम भारतीय बैडमिंटन के उभरते हुए सितारे लक्ष्य सेन ने बर्मिंघम में चल रहे प्रतिष्ठित ऑल इंग्लैंड ओपन बैडमिंटन चैंपियनशिप 2026 के फाइनल में जगह बनाकर इतिहास रच दिया है। एक बेहद रोमांचक और शारीरिक रूप से थका देने वाले सेमीफाइनल मुकाबले में 24 वर्षीय सेन ने कनाडा के उभरते खिलाड़ी विक्टर लाई को तीन सेटों के कड़े संघर्ष में 21-16, 18-21, 21-15 से शिकस्त दी। यह लक्ष्य सेन के करियर का दूसरा ऑल इंग्लैंड फाइनल है, इससे पहले वे 2022 में भी इस ऐतिहासिक मुकाम तक पहुंचे थे। बर्मिंघम के कोर्ट पर यह मुकाबला केवल खेल कौशल का नहीं, बल्कि सहनशक्ति और मानसिक मजबूती की परीक्षा भी था। तीसरे और निर्णायक सेट में लक्ष्य सेन पैर में ऐंठन (cramps) और मांसपेशियों में खिंचाव के कारण काफी दर्द में नजर आए। उन्हें कोर्ट पर लंगड़ाते हुए और अपने पैर को घसीटते हुए देखा गया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। मैच के दौरान एक समय पर उन्होंने 354 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से एक अविश्वसनीय विनर मारकर अपनी आक्रामकता का परिचय दिया। दूसरी ओर, उनके प्रतिद्वंद्वी विक्टर लाई भी चोटिल थे और उनकी उंगली से खून निकल रहा था, जिसके लिए उन्हें खेल के बीच में मेडिकल सहायता लेनी पड़ी। फाइनल तक का लक्ष्य सेन का सफर बेहद चुनौतीपूर्ण और प्रभावशाली रहा है। उन्होंने टूर्नामेंट के शुरुआती दौर में ही दुनिया के नंबर एक खिलाड़ी और मौजूदा चैंपियन शी यूकी को हराकर बड़ा उलटफेर किया था। इसके बाद क्वार्टर फाइनल में उन्होंने दुनिया के छठे नंबर के खिलाड़ी ली शिफेंग को सीधे सेटों में मात देकर अपना आत्मविश्वास बढ़ाया। अब लक्ष्य सेन के पास प्रकाश पादुकोण (1980) और पुलेला गोपीचंद (2001) के बाद इस प्रतिष्ठित खिताब को जीतने वाला तीसरा भारतीय पुरुष खिलाड़ी बनने का सुनहरा मौका है। खिताबी मुकाबले में अब लक्ष्य सेन का सामना चीनी ताइपे के लिन चुन-यी से होगा, जिन्होंने दूसरे सेमीफाइनल में बड़ा उलटफेर करते हुए दुनिया के नंबर दो खिलाड़ी कुलवुत वितिदसर्न को शिकस्त दी है। लक्ष्य ने अपनी फिटनेस और कोर्ट पर मूवमेंट पर संतोष व्यक्त किया है और वे फाइनल में अपना सर्वश्रेष्ठ देने के लिए तैयार हैं। पूरे भारत की नजरें अब इस महामुकाबले पर टिकी हैं कि क्या लक्ष्य 25 साल का सूखा खत्म कर भारत के लिए यह ट्रॉफी घर ला पाएंगे।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव का सांवेरवासियों ने मुख्यमंत्री निवास पहुंचकर किया आभार व्यक्त

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड के किसानों के हित में जमीनी स्तर पर मार्ग निर्माण को स्वीकृति और उचित मुआवजे की व्यवस्था किए जाने पर इंदौर जिले के सांवेर क्षेत्र के निवासियों ने मुख्यमंत्री निवास पहुंचकर आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को पगड़ी और बड़ी माला पहनाकर उनका अभिवादन किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मुख्यमंत्री निवास पधारे सभी लोगों को होली और रंगपचमी की बधाई दी। इस अवसर पर जल संसाधन मंत्री  तुलसी सिलावट उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि 3 हजार करोड़ रुपए की लागत से इंदौर और उज्जैन के बीच बनने वाली सड़क से इंदौर और उज्जैन का सफर सवा घंटे की जगह आधे घंटे का रह जायेगा। दोनों शहरों के बीच तेज कनेक्टिविटी से क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी। स्थानीय स्तर पर उद्योग, लॉजिस्टिक पार्क, किसानों को मण्डियों तक पहुंच और व्यापारियों तथा उद्योगों को सीधा लाभ मिलेगा। यह मार्ग, देश के व्यापार व्यवसाय के लिए भी महत्वपूर्ण है। देश के प्रमुख औद्योगिक और व्यापारिक केंद्रो के बीच इस मार्ग से यात्रा सुगम और कम समय में होगी। परिणामस्वरूप आवागमन बढ़ेगा और देश में इंदौर-उज्जैन क्षेत्र का महत्व और अधिक बढ़ेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पारम्परिक और ऐतिहासिक रूप से इंदौर और उज्जैन के बीच इस मार्ग का ही उचित उपयोग होता था। इस मार्ग से इंदौर के 20 और उज्जैन के 6 गांव लाभान्वित होंगे। सिंहस्थ के लिए भी यह मार्ग सुविधाजनक और उपयोगी होगा। इंदौर-उज्जैन क्षेत्र में विकास की दृष्टि से नए युग का सूत्रपात हो रहा है। राज्य सरकार के लिए किसान हित सर्वोपरि है। किसानों के सुझावों के अनुसार इस मार्ग का निर्माण कराना और उसके लिए उचित मुआवजे की व्यवस्था करना इस बात का परिचायक है कि सरकार जो कहती है वह करके दिखाती है। यह परियोजना किसान और सरकार के बीच विश्वास की मिसाल बनेगी। जल संसाधन मंत्री  तुलसी सिलावट ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव अन्नदाता किसान की पीड़ा और कष्ट को समझते हैं। इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड मार्ग को इस रूप में स्वीकृति मिलना उनकी संवेदनशीलता का ही परीणाम है। किसानों को इस परियोजना में अब 816 करोड़ रुपए से अधिक की मुआवजा राशि वितरित की जाएगी। मंत्री  सिलावट ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को इस पहल के लिए उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।  

सीएम योगी का बयान: जनता का विश्वास ही यूपी की सबसे बड़ी पूंजी

आगरा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि समाज, सरकार और संस्थाएं एक साथ एक दिशा में सोचना शुरू करती हैं तो उसका परिणाम विश्वास में बदलता है। विश्वास ही हमारी सबसे बड़ी पूंजी होनी चाहिए। इसके लिए लोगों को प्रयास करना होता है। यूपी आज विश्वास का प्रतीक बना है। सीएम याेगी शनिवार को आगरा में यथार्थ हॉस्पिटल का लोकार्पण करने के बाद उपस्थित लोगों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने अपने संबोधन में 9 वर्ष में उत्तर प्रदेश में मेडिकल क्षेत्र में आए सकारात्मक बदलावों का जिक्र करते हुए कहा कि स्वास्थ्य से बढ़कर कुछ भी नहीं है। स्वास्थ्य सुविधा सही, सस्ती और विश्वसनीय होनी चाहिए। सीएम ने आशा जताई कि यथार्थ ग्रुप अवश्य परिणाम देगा और लोगों को स्वस्थ जीवन देकर पुण्य अर्जित करेगा। सरकार भी इस क्षेत्र में हर सहयोग देने को तैयार है। उन्‍होंने कहा कि हर व्यक्ति को अच्छी स्वास्थ्य सुविधा का अधिकार मिलना चाहिए और हर संप्रभु देश को अपने नागरिकों को यह सुविधा देनी चाहिए। 11 वर्ष में पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत को दुनिया में नई पहचान मिली है। हम सभी नए भारत का दर्शन कर रहे हैं। उन्‍होंने कहा कि दुनिया की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में उभरते भारत को देख रहे हैं। यहां विरासत व विकास के अद्भुत समन्वय का स्वरूप है तो समग्र विकास की सभी अवधारणाओं को भी साकार रूप से उद्घाटित होते हुए देख रहे हैं। हाईवे, एक्सप्रेसवे, मेट्रो, रेलवे की नई लाइनें और टेक्नोलॉजी के साथ ही वंदे भारत, अमृत भारत, नमो भारत में यात्रा करने का आनंद प्राप्त हो रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार अपने स्तर पर प्रयास कर रही है, लेकिन जब सरकार व समाज मिलकर कार्य करते हैं तो परिणाम कई गुना आता है। इस क्षेत्र में निजी निवेश आज की आवश्यकता है। स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के लिए आवश्यक है कि सरकार भी प्रयास करे और निजी क्षेत्र भी आगे आए। निजी क्षेत्र की तरफ से सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के लिए सरकार नई पॉलिसी लेकर आ रही है। नए मेडिकल कॉलेज के लिए भी कोई निवेश करता है तो सरकार सहयोग कर रही है। सीएम योगी ने यथार्थ ग्रुप का आह्वान किया कि किसी जनपद में मेडिकल कॉलेज बनाने के लिए आगे आएं। उन्‍होंने कहा कि मेडिकल काउंसिल ने अपनी शर्तों को सरल किया है। यह सबसे अच्छा समय है, जब नए मेडिकल संस्थान स्थापित करके नौजवानों के लिए यूपी को मेडिकल की उच्चतम शिक्षा का केंद्र बना सकते हैं। सरकार हर सहयोग के लिए तैयार है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह यथार्थ ग्रुप का आठवां हॉस्पिटल है। अष्टसिद्धि के रूप में आगरा के अंदर हॉस्पिटल की स्थापना की है। अष्टसिद्धि होती है तो नवनिधि भी प्राप्त होती है, यह हॉस्पिटल उसका प्रतीक बनेगा। पहले देश में एक एम्स था, अटल जी ने इसकी संख्या छह और पीएम मोदी ने 23 तक पहुंचा दी। आईआईटी, आईआईएम, एनआईटी, ट्रिपल आईटी की लंबी श्रृंखला खड़ी हुई। जब देश बढ़ रहा है तो सबसे बड़ी आबादी का राज्य भी पीछे नहीं है। 2017 के पहले यूपी में केवल 17 मेडिकल कॉलेज थे, आज 81 मेडिकल कॉलेजों का संचालन हो रहा है। उन्‍होंने कहा कि पहले प्रदेश में ‘वन डिस्ट्रिक्ट-वन माफिया’ हावी थे। पहले सरकारों की सोच माफिया तक सीमित थी तो उन्होंने माफिया पैदा किए, जबकि डबल इंजन सरकार ने हर जनपद को मेडिकल कॉलेज दिया। आज प्रदेश में दो एम्स (रायबरेली व गोरखपुर) संचालित हो रहे हैं। डबल इंजन सरकार ने विकास व वेलफेयर स्कीम लागू की हैं। छह करोड़ से अधिक लोग गरीबी रेखा से निकलकर सामान्य जीवन व्यतीत कर रहे हैं। सीएम ने कहा कि एक समय ऐसा था, जब कोई व्यक्ति बीमार होता था तो पूरे परिवार में कोहराम मच जाता था, सामान गिरवी रखने पर मजबूर हो जाता था। आज मोदी जी ने स्वास्थ्य बीमा के रूप में आयुष्मान भारत का कवर दिया है। यूपी में 5.60 करोड़ लोगों को गोल्डन कार्ड जारी किए गए हैं। यह संख्या बहुत जल्द 10 करोड़ तक पहुंचने वाली है। राज्य में शिक्षामित्रों, शिक्षकों, अनुदेशकों, आंगनबाड़ी व आशा वर्कर और रसोइयों की संख्या 10 लाख से अधिक है। इन्हें भी पांच लाख की कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध करा दी गई है। उन्‍होंने कहा कि स्वास्थ्य सुविधा के दृष्टिगत मुख्यमंत्री राहत कोष से 1300 करोड़ रुपए उपलब्ध कराए गए हैं। यूपी के हर जनपद में फ्री डायलिसिस, सीटी स्कैन समेत अनेक सुविधाएं मुहैया कराने के साथ ही दुनिया की नई तकनीकें लाने का कार्य भी प्रारंभ किया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मेडटेक के लिए आईआईटी कानपुर व एसजीपीजीआई लखनऊ में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बन रहे हैं। दवाएं बाहर से न आएं, बल्कि इनका प्रोडक्शन यूपी में हो, इसके लिए ललितपुर में 1500 एकड़ में फॉर्मा पार्क विकसित कर रहे हैं। मेडिकल उपकरणों की भी मैन्युफैक्चरिंग यूपी में हो, इसके लिए यमुना एक्सप्रेसवे में 350 एकड़ में मेडिकल डिवाइस पार्क की स्थापना हो रही है। प्रदेश में आज टेलीमेडिसिन की व्यवस्था की गई है। सीएम योगी ने कहा कि हर क्षेत्र में नया करने का प्रयास हुआ है। सरकार बनने के बाद सामूहिक प्रयास हुआ तो पूर्वी उत्तर प्रदेश में इंसेफेलाइटिस जैसी बीमारी समाप्त हो गई। 40 वर्ष में इससे 50 हजार से अधिक मौतें हुई थीं। डेंगू, कालाजार, मलेरिया, चिकनगुनिया को समाप्त करने की दिशा में यूपी सरकार, भारत सरकार के साथ मिलकर अपने सर्विलांस कार्यक्रम को बढ़ा रही है। कोविड के दौरान सरकार द्वारा सामूहिक प्रयास से इसे नियंत्रित किया गया।

विदिशा जिले में प्रदेश की पहली जिला स्तरीय फिंगर प्रिंट लैब का हुआ शुभारंभ

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार किसान कल्याण के लिए समर्पित भाव से कार्य कर रही है। प्रत्येक खेत तक सिंचाई का पानी पहुंचाने के लिए राज्य सरकार संकल्पित है। केन-बेतना नदी जोड़ो परियोजना, पार्वती-कालीसिंध-चंबल (पीकेसी) परियोजना सहित आधुनिक सिंचाई परियोजनाओं से सिंचाई का रकबा तेजी से बढ़ रहा है। गत 2 वर्ष में ही प्रदेश में सिंचाई का रकबा 10 लाख हैक्टेयर बढ़ा है। अब प्रदेश की 55 लाख हैक्टेयर भूमि सिंचित हो रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश नदियों का मायका है। हम अपनी नदियों से राजस्थान और उत्तरप्रदेश को भी पानी उपलब्ध कराते हैं। बिहार और गुजरात को भी पानी मिलता है। पूर्व सरकारों ने नदियों की जलराशि का उचित प्रबंधन करने पर कभी ध्यान नहीं दिया, लेकिन अब हमारी सरकार के प्रयासों से विदिशा जिले को भी केन-बेतवा नदी परियोजना का पूरा लाभ मिलेगा। मध्यप्रदेश आज बिजली सरप्लस स्टेट है। अब किसानों को दिन में भी सिंचाई के लिए बिजली उपलब्ध करवाई जाएगी। हमारे लिए खेतों में किसान और सीमा पर जवान दोनों बराबर है। प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में देश की सीमाएं और अंदरूनी इलाके सुरक्षित हुए हैं। मुख्यमंत्री ने विदिशा में प्रदेश की पहली जिला स्तरीय फिंगर प्रिंट लैब का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शनिवार को शमशाबाद में कृषक हितग्राही सम्मेलन और विकास कार्यों के भूमि-पूजन एवं लोकर्पण कार्यक्रम में कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में किसानों को हर साल 12 हजार रुपए किसान सम्मान निधि के रूप में दिए जा रहे हैं। विदिशा जिला कृषि उत्पादन के मामले में अग्रणी है। राज्य सरकार ने भावांतर भुगतान योजना लागू कर सोयाबीन उत्पादक किसानों के खातों में लगभग 1500 करोड़ राशि अंतरित की है। अब सरसों की फसल भी भावांतर योजना के अंतर्गत खरीदी जाएगी। राज्य सरकार ने उड़द की फसल पर 600 रुपए प्रति क्विंटल बोनस देने का निर्णय लिया है। गेहूं खरीद के लिए पंजीयन कराने की तारीख भी बढ़ाई गई है। राज्य सरकार किसानों से 2625 रुपए प्रति क्विंटल गेहूं खरीदेगी। इसमें 40 रुपए प्रति क्विंटल बोनस राशि शामिल है। सरकार वर्ष 2028 तक किसानों को गेहूं की 2700 रुपए कीमत दिलवाने के लिए प्रतिबद्ध है। हितग्राहियों को किये गये हितलाभ वितरित मुख्यमंत्री डॉ. यादव का पारंपरिक साफा बांधकर एवं गजमाला से आत्मीय स्वागत किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लाड़ली लक्ष्मी योजना, मुख्यमंत्री नरवाई प्रबंधन योजना, प्रधानमंत्री जीवन बीमा, मुद्रा योजना, कृषि यंत्र, पशुधन, खाद्य प्रसंस्करण योजनाओं के हितग्राहियों को हितलाभ वितरित किए। समग्र विकास के लिये किये भूमि-पूजन और लोकार्पण मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विदिशा जिले के समग्र विकास के लिए 163 करोड़ रुपये की सौगात दी। उन्होंने लगभग 60 करोड़ लागत के 41 विकास कार्यों के लोकार्पण किए, जिसमें कुरवाई का सांदीपनि विद्यालय भी शामिल है। शनिवार 7 मार्च को 104.56 करोड़ की 56 नवीन विकास परियोजनाओं का भूमि-पूजन भी किया गया। इसमें 15 करोड़ रुपये लागत से विदिशा महाविद्यालय का उन्नयन कार्य शामिल है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य के बजट में विदिशा को 116 करोड़ की नई सड़कों की सौगात मिली है। कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम “नव्या” शुरू मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि महिला सशक्तिकरण की दिशा में विदिशा से कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम ‘नव्या’ की शुरुआत की गई है। यह योजना देश के 9 राज्यों के 27 जिलों में लागू की गई है। विदिशा प्रदेश का इकलौता जिला है, जो योजना में शामिल है। इसके माध्यम से 10वीं पास बहनों को स्वरोजगार के लिए प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। राज्य सरकार लाड़ली बहनों को हर माह 1500 रुपए की सौगात दे रही है और यह राशि धीरे-धीरे बढ़ती जाएगी। प्रदेश में भव्य सांदीपनि विद्यालय बनाए जा रहे हैं, जहां विद्यार्थियों को सर्वगुण संपन्न बनाया जाएगा। शासकीय स्कूलों के विद्यार्थियों को लैपटॉप, साइकिल, किताबें और ड्रेस उपलब्ध करवाई जा रही हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में गौमाता के संरक्षण और पशुपालन को प्रोत्साहित करने के लिए बड़ी गौशालाएं स्थापित की जा रही हैं। शमशाबाद में भी एक बड़ी आदर्श गौशाला बनाई जाएगी। राज्य सरकार ने शासकीय गौशालाओं के लिए प्रति गाय अनुदान राशि 20 रुपए से बढ़ाकर 40 रुपए कर दी है। राज्य सरकार ने डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना की शुरुआत की है, इसके अंतर्गत 25 गाय पालने पर सरकार ने 10 लाख रुपए का अनुदान प्रदान करने का प्रावधान किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शमशाबाद के लोगों के आत्मीय स्वागत से अभिभूत हूं। विदिशा जिला बुद्ध और बेतवा की धारा से समृद्ध है। यह नगरी भगवान सूर्य को समर्पित है। उज्जैन के समान ही विदिशा भी ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण है। महत्वपूर्ण घोषणाएं शमशाबाद नगर परिषद के विकास कार्यों के लिए 3 करोड़ राशि दी जाएगी। शमशाबाद में नवीन विद्युत सब स्टेशन बनाया जाएगा, जिससे कई गांवों को बिजली मिलेगी। संजय सागर और सगढ़ सिंचाई परियोजनाओं का परीक्षण कर विकास कार्य होंगे। सांसद डॉ. लता वानखेड़े ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश में विकास केवल योजनाओं की सूची नहीं है। यहां संवेदनशीलता शासन की पहचान बन चुकी है। प्रदेश प्रगति के पथ पर अग्रसर है। मध्यप्रदेश सांस्कृतिक पुनर्जागरण और विकास के नए आयाम छू रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की राज्य के प्रति प्रतिबद्धता उन्हें मध्यप्रदेश का असली जननायक बनाती है। सरकार गांव, गरीब और किसान के साथ खड़ी है। पशुपालन मंत्री एवं विदिशा जिले के प्रभारी श्री लखन पटेल ने कहा कि मध्यप्रदेश में सिंचाई का रकबा 55 लाख हैक्टेयर से 100 लाख हैक्टेयर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। विधायक श्री सूर्यप्रकाश मीणा ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के किसानों के कल्याण के लिए वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष घोषित किया है। प्रदेश में सिंचाई का रकबा निरंतर बढ़ता जा रहा है। शमशाबाद क्षेत्र में संजय सागर बांध से 12 हजार हैक्टेयर भूमि सिंचित हो रही है। कार्यक्रम में विधायक श्री हरिसिंह रघुवंशी, विधायक श्री हरिसिंह सप्रे, विधायक श्री उमाकांत शर्मा, विधायक श्री मुकेश टंडन, नगर पंचायत अध्यक्ष श्रीमती गीता कैलाश रघुवंशी, जिलाध्यक्ष श्री महाराज सिंह दांगी, प्रदेश यादव महासभा के पदाधिकारी श्री जगदीश यादव, वरिष्ठ राजनेता डॉ. मेहताब सिंह, श्री कप्तान सिंह यादव, श्री भगवान … Read more

वर्किंग वुमेंन के लिए सुरक्षित आवासीय सुविधा विकसित कर रहा मध्यप्रदेश

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश में औद्योगिक विकास के साथ महिलाओं के सुरक्षित और सम्मानजनक कार्य परिवेश को सुनिश्चित करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। औद्योगिक क्षेत्रों में कार्यरत महिलाओं को सुरक्षित, सुविधाजनक और किफायती आवास उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में वर्किंग वुमेन हॉस्टल विकसित किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि राज्य औद्योगिक प्रोत्साहन नीति 2025 के अंतर्गत रोजगार सृजन को प्रोत्साहित करने के लिए प्रति कर्मचारी प्रति माह 5 हजार रुपए. की सहायता पांच वर्षों तक प्रदान की जा रही है, वहीं कौशल विकास को बढ़ावा देने के लिए पहले पांच वर्षों में नियुक्त प्रत्येक नए कर्मचारी के लिए 13 हजार रुपए की सहायता का प्रावधान किया गया है। इन पहलों का उद्देश्य महिलाओं के लिए अधिक रोजगार अवसर सृजित करना और उन्हें सुरक्षित आवासीय सुविधा उपलब्ध कराते हुए आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। औद्योगिक विकास के साथ महिला सुविधाओं पर विशेष ध्यान प्रदेश में औद्योगिक आधारभूत संरचना को सुदृढ़ करने के लिए 48 औद्योगिक पार्क विकसित किए जा रहे हैं, जिनमें आईटी पार्क, प्लग एण्ड प्ले पार्क, प्लेटेड इंडस्ट्रीज तथा कमर्शियल कॉम्प्लेक्स शामिल हैं। दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-नागपुर औद्योगिक कॉरिडोर के अंतर्गत औद्योगिक क्षेत्रों का विस्तार करते हुए प्रदेश में बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित किया जा रहा है। औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार के साथ महिला कर्मचारियों के लिए आवश्यक सुविधाओं के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिससे औद्योगिक क्षेत्रों में कार्यरत महिलाओं को बेहतर और सुरक्षित कार्य वातावरण मिल सके। औद्योगिक क्षेत्रों में विकसित होंगे आधुनिक वर्किंग वुमेन हॉस्टल कार्यशील महिलाओं को सुरक्षित और व्यवस्थित आवास उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रदेश के चार प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में वर्किंग वुमेन हॉस्टल का निर्माण किया जा रहा है। भारत सरकार की स्कीम फॉर स्पेशल असिस्टेंस 2024-25 के अंतर्गत एमपीआईडीसी क्षेत्र में चार वर्किंग वुमेन हॉस्टल स्वीकृत किए गए हैं। इन परियोजनाओं के अंतर्गत कुल 26 आवासीय ब्लॉक्स का निर्माण किया जाएगा और प्रत्येक ब्लॉक में 222 बेड्स की व्यवस्था की जाएगी। हजारों महिलाओं को मिलेगा सुरक्षित आवास इन परियोजनाओं के पूर्ण होने पर लगभग 5700 से अधिक कार्यशील महिलाओं को सुरक्षित और सुव्यवस्थित आवास सुविधा उपलब्ध होगी। इससे औद्योगिक क्षेत्रों में कार्यरत महिलाओं को रहने और आवागमन से जुड़ी कठिनाइयों से राहत मिलेगी तथा वे अधिक आत्मविश्वास और सुविधा के साथ अपने कार्यक्षेत्र में योगदान दे सकेंगी। औद्योगिक क्षेत्रों में महिलाओं के लिए सर्वसुविधायुक्त हॉस्टल वर्किंग वुमेन हॉस्टल का विकास विक्रम उद्योगपुरी (उज्जैन), पीथमपुर सेक्टर-1 एवं 2 (धार), मालनपुर-घिरींगी (भिंड) और मंडीदीप (रायसेन) में किया जा रहा है। लगभग 6.66 हेक्टेयर भूमि पर इन परियोजनाओं का निर्माण करीब 250 करोड़ रुपये की लागत से किया जा रहा है। यह सुविधाएं औद्योगिक क्षेत्रों में कार्यरत महिलाओं को सुरक्षित और अनुकूल आवासीय वातावरण प्रदान करेंगी। महिला सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल औद्योगिक क्षेत्रों में विकसित हो रहे वर्किंग वुमेन हॉस्टल महिलाओं को सुरक्षित आवास, बेहतर जीवन सुविधा और कार्यस्थल के निकट रहने की सुविधा प्रदान करेंगे। इससे महिलाओं की कार्य भागीदारी बढ़ेगी, उनके आत्मनिर्भर बनने की प्रक्रिया को बल मिलेगा और औद्योगिक विकास में महिलाओं की भागीदारी और अधिक मजबूत होगी। मध्यप्रदेश में महिला सशक्तिकरण और औद्योगिक विकास को साथ लेकर आगे बढ़ाने की दिशा में यह पहल महत्वपूर्ण होगी।  

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर रायपुर में ‘लखपति दीदी संवाद’ कार्यक्रम में लखपती दीदियों से किया आत्मीय संवाद

रायपुर लखपति दीदी अभियान से छत्तीसगढ़ की महिलाएं लिख रही समृद्धि की नई कहानी – मुख्यमंत्री  साय छत्तीसगढ़ की महिलाएं आज आत्मनिर्भरता, मेहनत और नवाचार के बल पर नई पहचान बना रही हैं और हमारी सरकार उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री  साय ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर रायपुर के इंडोर स्टेडियम में आयोजित ‘लखपति दीदी संवाद’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही। कार्यक्रम में प्रदेश भर से आई स्व-सहायता समूह की हजारों महिलाएं और लखपति दीदियां उत्साहपूर्वक शामिल हुईं। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि हमारी संस्कृति में नारी को शक्ति का स्वरूप माना गया है और जहां नारी का सम्मान होता है, वहीं देवताओं का निवास होता है। उन्होंने कहा कि पहले महिलाएं घरों तक सीमित रहती थीं, लेकिन आज प्रदेश की महिलाएं स्व सहायता समूहों के माध्यम से आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।  मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि शासन का लक्ष्य लखपति दीदियों को और अधिक सशक्त बनाकर गांव की प्रत्येक महिला को लखपति बनाना और भविष्य में लखपति ग्राम का निर्माण करना है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के आह्वान पर छत्तीसगढ़ में 10 लाख महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसमें से वर्तमान में लगभग 8 लाख महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। उन्होंने कहा कि अब प्रदेश में 10 लाख से अधिक लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार गांवों के लोगों के लिए 18 लाख प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत कर चुकी है और इनके निर्माण में बिहान की दीदियां भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं के सम्मान और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए राज्य सरकार द्वारा महतारी वंदन योजना प्रारंभ की गई है, जिसके तहत  लगभग 70 लाख माताओं-बहनों को 24 किश्तों में 15 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि दी जा चुकी है तथा इस वर्ष के बजट में इसके लिए 8,200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि लखपति दीदी योजना से प्रदेश की 5 लाख से अधिक महिलाएं आत्मनिर्भर बन चुकी हैं और अब लखपति दीदी भ्रमण योजना शुरू कर उन्हें देश-प्रदेश के व्यावसायिक केंद्रों और शक्ति पीठों का भ्रमण कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि पंचायत विभाग द्वारा 250 महतारी सदनों का निर्माण, आंगनबाड़ी संचालन और पोषण योजनाओं के लिए भी इस वर्ष के बजट में प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि बालिकाओं को आर्थिक सुरक्षा देने के लिए रानी दुर्गावती योजना शुरू की जाएगी, जिसके तहत 18 वर्ष की आयु पूरी होने पर 1.5 लाख रुपये दिए जाएंगे। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि हमारी लखपति दीदियों से पूरे प्रदेश की माताओं-बहनों को प्रेरणा मिल रही है और अब हमारा लक्ष्य लखपति दीदियों को करोड़पति दीदी बनाना है। उन्होंने कहा कि आज शुरू हुई बकरी पालन क्लस्टर परियोजना से प्रदेश में बकरी पालन को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही इन्क्यूबेशन सेंटर की स्थापना और आईआईएम रायपुर के साथ एमओयू से स्व-सहायता समूहों की आमदनी बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में माताओं-बहनों की बड़ी भूमिका होगी। आज महिलाएं गांवों में सेंट्रिंग प्लेट उपलब्ध कराने से लेकर ड्रोन उड़ाने तक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि जहां नारियों की पूजा होती है, वहां देवताओं का वास होता है। एक नारी शिक्षित होती है तो दो परिवार और पूरा समाज शिक्षित होता है। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री  साय ने लखपति दीदी आधारित कॉफी टेबल बुक तथा छत्तीसकला आधारित ब्रांड बुक का विमोचन किया और लखपति दीदी ग्राम पोर्टल का शुभारंभ किया। इस पोर्टल के माध्यम से ग्राम पंचायतों का मूल्यांकन कर उन्हें लखपति दीदी ग्राम घोषित किया जाएगा। कार्यक्रम में उत्कृष्ट कार्य करने वाली स्व-सहायता समूह की महिलाओं, कैडर्स और लखपति दीदियों को सम्मानित भी किया गया। कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ की महिलाएं आज आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि पहले लोग कहते थे कि महिलाओं को लखपति बनाना संभव नहीं है, लेकिन आज प्रदेश में 8 लाख महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में ये महिलाएं लखपति से करोड़पति दीदी बनने की दिशा में आगे बढ़ेंगी।  कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आई महिलाओं ने अपनी प्रेरक कहानियां साझा कीं। बस्तर जिले के दरभा ब्लॉक की लखपति दीदी  राजकुमारी कश्यप ने बताया कि एक समय ऐसा था जब उनके क्षेत्र में बाइक से आना-जाना भी कठिन था, लेकिन आज वह लखपति दीदी बन चुकी हैं। उन्होंने बताया कि उनका परिवार खेती पर निर्भर है और मुर्गीपालन से उन्हें सालाना 6–7 लाख रुपये की आय हो रही है। बालोद जिले की भुनेश्वरी साहू ने बताया कि उन्होंने 20 हजार रुपये का ऋण लेकर सिलाई मशीन से काम शुरू किया और बाद में उन्हें सरकार की पहल से ड्रोन पायलट की ट्रेनिंग मिली। आज वह अपने क्षेत्र में ड्रोन दीदी के नाम से जानी जाती हैं। जशपुर जिले की लखपति दीदी  अनिता साहू ने बताया कि वह ईंट निर्माण का कार्य करती हैं। उन्होंने कहा कि एक समय था जब समूह की साप्ताहिक बैठक में 10 रुपये जमा करने के लिए भी दूसरों पर निर्भर होना पड़ता था, लेकिन आज वह लखपति बन चुकी हैं। कार्यक्रम में प्रमुख सचिव  निहारिका बारीक ने बताया कि छत्तीसगढ़ में 8 लाख महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं, जिनमें से लगभग एक लाख महिलाएं नक्सल प्रभावित क्षेत्रों से हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 10 लाख 26 हजार स्व-सहायता समूहों से जुड़कर 30 लाख 85 हजार महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनी हैं। इस अवसर पर राजस्व मंत्री एवं उच्च शिक्षा मंत्री  टंकराम वर्मा, महिला एवं बाल विकास मंत्री  लक्ष्मी राजवाड़े, कौशल विकास मंत्री  गुरु खुशवंत साहेब, विधायक  सुनील सोनी, सचिव  भीम सिंह, रायपुर संभाग के आयुक्त  महादेव कावड़े, कलेक्टर  गौरव सिंह, मिशन संचालक  अश्वनी देवांगन  सहित बड़ी संख्या में लखपति दीदियां और स्व-सहायता समूह की महिलाएं उपस्थित थी।

CM रेड्डी की मौजूदगी में 130 नक्सलियों ने छोड़ी बंदूक, तेलंगाना में बड़ा सरेंडर

हैदराबाद तेलंगाना में माओवादी संगठन को एक बड़ा झटका लगा है. मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के सामने 31 मार्च, 2026 से पहले बड़ी संख्या में माओवादी कैडरों ने शुक्रवार आत्मसर्पण कर दिया. अलग-अलग स्तर के कुल 130 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है. इनमें संगठन के 3 स्टेट कमेटी मेंबर, 1 रीजनल कमेटी मेंबर, 10 डिवीजनल/डीवाईसीएम स्तर के कैडर, 40 एरिया कमेटी मेंबर और करीब 70 पार्टी मेंबर शामिल बताए जा रहे हैं. बस्तर मूल के कई माओवादी शामिल आत्म समर्पण में बड़ी संख्या में बस्तर मूल के माओवादी शामिल हैं. PLGA बटालियन में सक्रिय 42, तेलंगाना स्टेट कमेटी में सक्रिय 30, दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी से जुड़े 32, 2nd सीआरसी के 16 और केंद्रीय समिति सदस्य देवजी की टीम से जुड़े 10 माओवादियों ने हिंसा का रास्ता छोड़ा है. 130 माओवादियों पर 4.18 करोड़ रुपए का था इनाम इन माओवादियों के ऊपर 4 करोड़ 18 लाख 20 हजार रुपए का ईनाम घोषित है. आत्मसमर्पण के दौरान माओवादियों ने सुरक्षा एजेंसियों के सामने भारी मात्रा में हथियार और युद्ध सामग्री भी सौंप दी. बरामद हथियारों में 1 इंसास एलएमजी, 21 AK-47, 21 इंसास रायफल, 20 एसएलआर, 18 .303 रायफल, 1 नौ एमएम कार्बाइन, 2 नौ एमएम पिस्टल, 2 आठ एमएम बोल्ट-एक्शन रायफल, 18 कंट्री मेड गन और 2 बीजीएल शामिल हैं. सुरक्षा बलों के लगातार दबाव और सरकार की पुनर्वास नीति के चलते माओवादी कैडरों ने मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है. बड़ी संख्या में हुए इस सामूहिक समर्पण को सुरक्षा एजेंसियां माओवादी संगठन के लिए एक बड़ा झटका मान रही हैं. सरकार का कहना है कि जो भी उग्रवादी हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं, उनके लिए पुनर्वास और नई शुरुआत के सभी रास्ते खुले हैं.

सफल चुनाव के बाद नेपाल को Narendra Modi का संदेश, लोकतांत्रिक प्रक्रिया की तारीफ

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नेपाल को सफलतापूर्वक चुनाव कराने के लिए बधाई दी है। पीएम मोदी ने कहा कि भारत करीबी दोस्त और पड़ोसी नेपाल के साथ काम करने को तैयार है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उन्होंने नेपाल की जनता और सरकार को बधाई दी। उन्होंने लिखा, “मैं नेपाल के लोगों और सरकार को चुनावों के सफल और शांतिपूर्ण तरीके से होने पर दिल से बधाई देना चाहता हूं। अपने नेपाली भाइयों और बहनों को अपने डेमोक्रेटिक अधिकारों का इतने जोश के साथ इस्तेमाल करते देखना बहुत अच्छा लग रहा है।” उन्होंने ‘इस ऐतिहासिक कामयाबी को नेपाल की डेमोक्रेटिक यात्रा में गर्व का पल बताया।’ पीएम मोदी ने आगे लिखा, “करीबी दोस्त और पड़ोसी होने के नाते, भारत नेपाल के लोगों और उनकी नई सरकार के साथ मिलकर शांति, तरक्की और खुशहाली की नई ऊंचाइयों को हासिल करने लिए काम करने को तैयार है।” नेपाल में आम चुनाव की काउंटिंग जारी है। 165 सीटों पर रैपर और काठमांडू के मेयर रहे बालेन शाह की राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। आरएसपी ने शाम छह बजे तक 60 सीटें जीत ली हैं। यह एक ऐसी पार्टी है जो सिर्फ 4 साल पहले एक पत्रकार रहे रबि लामिछाने ने बनाई थी। देश के बड़े नेता और पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली झापा सीट पर 43 हजार मतों से पीछे चल रहे थे। उनका हारना और यहीं से बालेन शाह का जीतना लगभग तय माना जा रहा है। ओली ने झापा-5 सीट से दो बार विजय हासिल की है। एक 2017 में और दूसरी 2022 में बड़ी जीत हासिल की थी। नेपाल में बाकी 110 सीटें पार्टियों को मिले कुल वोट प्रतिशत के आधार पर तय होती हैं। इसमें वोटर किसी प्रत्याशी को नहीं बल्कि पार्टी को वोट देते हैं। पूरे देश में दल को जितने प्रतिशत वोट मिलते हैं, उसी हिसाब से उन्हें संसद में सीट मिलती है।

MP के इस जिले में BJP का संगठन विस्तार, नई मंडल कार्यकारिणी में 25 पदाधिकारी नियुक्त

सुसनेर भारतीय जनता पार्टी ने संगठन को मजबूत करने के उद्देश्य से सुसनेर मंडल की नई कार्यकारिणी की घोषणा कर दी है। मंडल अध्यक्ष डॉ. सौरभ जैन ने 25 पदाधिकारियों को विभिन्न जिम्मेदारियां सौंपते हुए संगठन को और सक्रिय बनाने का संदेश दिया है। घोषित कार्यकारिणी में कल्याण सिंह, अभय जैन, पीरू सिंह सारखा, जसवंत सिंह पालड़ा, मानसिंह गुराड़ी और कमल भावसार को मंडल उपाध्यक्ष बनाया गया है। वहीं लखन सेन और बनास कुंवर कालूसिंह चौहान को मंडल महामंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई है। मंडल मंत्री के रूप में गोपाल सिंह, जितेंद्र सिंह राजपूत, हेमराज जाट, कमलसिंह सेमली, सिद्धू सिंह पटपड़ा और दुर्गाबाई विक्रम चौहान को शामिल किया गया है। दिनेश कानुडिया को कोषाध्यक्ष बनाया गया है, जबकि ईश्वर सिंह पटेल और गोपाल पाटीदार को सह-कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। संगठन के संचालन के लिए अनिल जैन को कार्यालय मंत्री बनाया गया है। उनके सहयोग के लिए नारायण सिंह कलारिया और मनोज सुमन को सह कार्यालय मंत्री नियुक्त किया गया है। मीडिया और आईटी से जुड़े दायित्वों में दीपक जैन को मीडिया प्रभारी, स्नेहा युगल किशोर परमार को सह मीडिया प्रभारी बनाया गया है। वहीं यशवंत बैरागी को सोशल मीडिया प्रभारी, सिया भावसार को सह सोशल मीडिया प्रभारी तथा कार्तिक शर्मा को आईटी सेल प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। मंडल अध्यक्ष ने कहा कि नई टीम संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने और पार्टी की नीतियों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए मिलकर कार्य करेगी।

MP Health Alert: खसरे के 12 नए मरीज मिले, 4 जिलों में सतर्कता और सर्वे अभियान

भोपाल मध्य प्रदेश में एक बार फिर संक्रामक बीमारी खसरे (मीजल्स) ने पैर पसारना शुरू कर दिया है। फरवरी 2024 के बाद, अब 2026 में प्रदेश के चार जिलों- अलीराजपुर, दतिया, शिवपुरी और बुरहानपुर में खसरे के 12 नए मामले सामने आए हैं। इन क्षेत्रों में बुखार, शरीर पर दाने और खांसी के लक्षणों वाले मरीजों की पुष्टि के बाद स्वास्थ्य विभाग ने पूरे प्रदेश में अलर्ट जारी कर दिया है। गौरतलब है कि साल 2024 में मैहर में खसरे से दो बच्चों की मौत हो गई थी, जिसके बाद अब मिल रहे नए केस ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। प्रभावित जिलों की स्थिति: कहां कितने मरीज? स्वास्थ्य विभाग की रैपिड रिस्पांस टीम (RRT) ने प्रभावित गांवों का दौरा कर सैंपल लिए, जिसकी रिपोर्ट में संक्रमण की पुष्टि हुई है: बुरहानपुर (बरौली गांव): यहां स्थिति सबसे गंभीर है, जहां भेजे गए सभी 5 सैंपल पॉजिटिव पाए गए हैं। संक्रमितों की उम्र 2 से 25 वर्ष के बीच है। दतिया (आगोरा गांव): यहां 8 में से 3 मरीज पॉजिटिव मिले हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि यहां संक्रमितों की आयु सीमा 0 से 40 वर्ष तक है। शिवपुरी (गुदर गांव): खनियाधाना क्षेत्र में 5 में से 3 केस पॉजिटिव आए हैं (उम्र 4 से 15 वर्ष)।    अलीराजपुर (कांडा-चुलिया): जोबट क्षेत्र में 6 में से 1 केस पॉजिटिव मिला है। संक्रमण फैलने का मुख्य कारण ‘टीकाकरण में चूक’ खसरे के दोबारा उभरने के पीछे दो प्रमुख कारण हैं। विमुक्त और घुमक्कड़ समुदायों के लगातार स्थान बदलने के कारण बच्चों का नियमित टीकाकरण चक्र टूट जाता है।    महामारी के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं के प्रभावित होने से कई बच्चे वैक्सीन की अनिवार्य डोज से वंचित रह गए थे। बच्चों के लिए जानलेवा हो सकता है खसरा विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, खसरा न केवल श्वसन तंत्र पर हमला करता है, बल्कि बच्चों में अंधेपन (Blindness) का भी एक बड़ा कारण है। दुनिया भर में हर साल करीब 60 हजार बच्चे इसके कारण अपनी आंखों की रोशनी खो देते हैं। प्रमुख लक्षण और जटिलताएं     तेज बुखार, खांसी और शरीर पर लाल चकत्ते।     उल्टी, डायरिया और गंभीर डिहाइड्रेशन।     जटिल मामलों में निमोनिया और मस्तिष्क में सूजन (Encephalitis) बचाव और सरकारी प्रयास     नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) और स्वास्थ्य संचालनालय ने प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी और घर-घर सर्वे शुरू कर दिया है मरीजों को लक्षणों के आधार पर दवाइयां और विटामिन-ए सॉल्यूशन दिया जा रहा है। विटामिन-ए की दो डोज संक्रमण की गंभीरता को कम करने में सहायक होती हैं विशेषज्ञों का कहना है कि मीजल्स-रुबेला (MR) वैक्सीन की दोनों डोज समय पर लगवाना ही इससे बचने का एकमात्र प्रभावी तरीका है।    ग्रामीणों और शिक्षकों को सलाह दी गई है कि संक्रमित मरीज को अलग (Isolate) रखें और साफ-सफाई व पोषण का विशेष ध्यान दें।  

MP के शिक्षकों के लिए अल्टीमेटम: 2 साल में TET पास नहीं किया तो छोड़नी पड़ेगी नौकरी

जबलपुर.  प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों को निर्धारित अवधि में शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) उत्तीर्ण करना अनिवार्य होगा। यह आदेश संचालक लोक शिक्षण मध्य प्रदेश ने सभी संभागीय संयुक्त संचालकों और जिला शिक्षा अधिकारियों जारी किए हैं। आदेश में कहा गया है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 लागू होने से पहले नियुक्त हुए ऐसे शिक्षक, जिनकी सेवानिवृत्ति में पांच वर्ष से अधिक समय शेष है, उन्हें अगले दो वर्षों के भीतर टीईटी उत्तीर्ण करना होगा। निर्धारित समय में परीक्षा पास नहीं करने वाले शिक्षकों को सेवा छोड़नी पड़ सकती है या उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जा सकती है। हालांकि उन्हें नियमों के अनुसार मिलने वाले टर्मिनल लाभ प्रदान किए जाएंगे, बशर्ते उन्होंने निर्धारित सेवा अवधि पूरी की हो। विभाग के अनुसार प्राथमिक और माध्यमिक स्तर के शिक्षकों के लिए पात्रता परीक्षा का आयोजन जुलाई और अगस्त 2026 में संभावित है। सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि जो शिक्षक अभी तक टीईटी उत्तीर्ण नहीं हैं, उन्हें परीक्षा में शामिल होने की सूचना देना सुनिश्चित करें। अधूरे बजट से स्कूलों में काम ठप वित्तीय सत्र समाप्त होने के बावजूद प्राइमरी और मिडिल स्कूलों को अब तक केवल 50 प्रतिशत राशि ही मिली है। मध्य प्रदेश जागरूक अधिकारी कर्मचारी संगठन के प्रांताध्यक्ष राबर्ट मार्टिन ने आरोप लगाया है कि बजट के अभाव में स्कूलों के रखरखाव और अध्यापन कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं।  

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