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ईवी इंडस्ट्री को बढ़ावा, प्रदेश में मजबूत मैन्युफैक्चरिंग ईको सिस्टम बन रहा : सीएम डॉ. यादव

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) मैन्युफेक्चरिंग के क्षेत्र में तेजी से उभरते केंद्र के रूप में अपनी पहचान बना रहा है। प्रदेश में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को प्रोत्साहित करने के लिए मजबूत औद्योगिक आधार, उन्नत परीक्षण अधोसंरचना, ऊर्जा उपलब्धता और निवेश अनुकूल नीतियों के माध्यम से एक सशक्त ईको सिस्टम विकसित किया जा रहा है। इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी 2025 और इंडस्ट्रियल प्रमोशन पॉलिसी-2025 के माध्यम से ईवी और उससे जुड़े कम्पोनेंट मैन्युफैक्चरिंग को व्यापक प्रोत्साहन दिया जा रहा है, जिससे प्रदेश में उत्पादन, निवेश और रोजगार के नए अवसर तेजी से बढ़ रहे हैं। वैश्विक बदलाव के साथ बढ़ती ईवी की संभावनाएं वैश्विक स्तर पर ऑटोमोबाइल उद्योग तेजी से इलेक्ट्रिफिकेशन की दिशा में बढ़ रहा है और भारत भी इस परिवर्तन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन रहा है। भारत आज विश्व का तीसरा सबसे बड़ा ऑटोमोबाइल बाजार है और यह क्षेत्र राष्ट्रीय जीडीपी में लगभग 7 प्रतिशत का योगदान देता है। इलेक्ट्रिक वाहन आधारित अर्थव्यवस्था के विस्तार के साथ बैटरी तकनीक, अनुसंधान एवं विकास, सॉफ्टवेयर, मेंटेनेंस और संबंधित सेवाओं सहित कई क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर विकसित हो रहे हैं। मजबूत ऑटोमोबाइल क्लस्टर और परीक्षण अधोसंरचना मध्यप्रदेश इस परिवर्तन को अवसर के रूप में लेते हुए इलेक्ट्रिक व्हीकल और ऑटोमोबाइल कम्पोनेंट मैन्युफैक्चरिंग के लिए स्वयं को एक सशक्त औद्योगिक केंद्र के रूप में विकसित कर रहा है। राज्य में पीथमपुर देश के प्रमुख ऑटोमोबाइल क्लस्टर्स में से एक है, जहां 200 से अधिक ऑटोमोबाइल कम्पोनेंट निर्माता संचालित हैं और हजारों लोगों को रोजगार मिला है। इसके साथ ही एशिया का सबसे बड़ा ऑटोमोटिव परीक्षण ट्रैक नैट्रैक्स उद्योगों को अत्याधुनिक परीक्षण और अनुसंधान की सुविधा प्रदान कर रहा है, जिससे ऑटोमोबाइल और ईवी उद्योग के लिए मजबूत तकनीकी आधार उपलब्ध हुआ है। इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी से मैन्यूफेक्चरिंग को मिलेगा बढ़ावा राज्य सरकार द्वारा लागू की गई इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी 2025 ईवी और उससे जुड़े कम्पोनेंट के लिए संपूर्ण सप्लाई चेन विकसित करने पर केंद्रित है। इस नीति के माध्यम से बैटरी निर्माण, वाहन असेंबली से लेकर रीसाइक्लिंग तक के क्षेत्रों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। साथ ही इलेक्ट्रिक ट्रकों जैसे उभरते सेगमेंट को बढ़ावा देने के लिए मोटर व्हीकल टैक्स और पंजीयन शुल्क में छूट जैसे प्रावधान किए गए हैं, जिससे इस क्षेत्र में निवेश की संभावनाएं और मजबूत हुई हैं। औद्योगिक प्रोत्साहन और निवेश में बढ़ेंगे अवसर इंडस्ट्रियल प्रमोशन पॉलिसी-2025 के अंतर्गत उद्योगों को पूंजी अनुदान, भूमि रियायत, निर्यात परिवहन सहायता तथा हरित और अनुसंधान निवेश के लिए विशेष प्रोत्साहन प्रदान किए जा रहे हैं। इन नीतियों के माध्यम से राज्य में इलेक्ट्रिक व्हीकल और उससे जुड़े उद्योगों की स्थापना के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया गया है। मध्यप्रदेश ऊर्जा के मामले में अधिशेष राज्य है और यहां बिजली दरें देश में अपेक्षाकृत कम हैं, जिससे ईवी विनिर्माण इकाइयों और चार्जिंग अधोसंरचना के संचालन के लिए आर्थिक रूप से व्यवहारिक परिस्थितियां उपलब्ध होती हैं। भारत में ईवी की बढ़ती मांग भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग लगातार बढ़ रहा है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में दो पहिया वाहनों की बिक्री में इलेक्ट्रिक व्हीकल की हिस्सेदारी 6.1 प्रतिशत, तीन पहिया में 23.4 प्रतिशत, यात्री कारों में 2 प्रतिशत और बसों में 5.3 प्रतिशत दर्ज की गई है। इस प्रकार कुल इलेक्ट्रिक व्हीकल बाजार हिस्सेदारी 7.5 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। औद्योगिक अधोसंरचना, आधुनिक परीक्षण सुविधाएं, निवेश अनुकूल नीतियां और ऊर्जा उपलब्धता जैसे कारकों के कारण मध्यप्रदेश इलेक्ट्रिक व्हीकल विनिर्माण के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है और यह क्षेत्र राज्य के औद्योगिक विकास को नई गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। 

मुख्यमंत्री ने की व्यायाम शालाओं को प्रोत्साहन स्वरूप राशि देने की घोषणा

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के कुशल नेतृत्व में भारत विश्व पटल पर नई ऊंचाइयां को छू रहा है। देश में मध्यप्रदेश का विशेष महत्व है। विकास के इस कारवां को आगे बढ़ाते हुए राज्य सरकार समाज के हर वर्ग और प्रत्येक क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रही है। उज्जैन जिले का बड़नगर भी विकास में अग्रणी रहेगा। बड़नगर अब इंदौर-उज्जैन मेट्रोपोलिटन एरिया का भाग बनेगा। बड़नगर पर बाबा महाकाल सहित चंबल, शिप्रा और गंभीर नदियों का भी आशीर्वाद है। प्रधानमंत्री  मोदी ने धार में देश के पहले पीएम मित्र पार्क का भूमि-पूजन किया है। टेक्सटाइल सेक्टर के इस मेगा इंडस्ट्रियल पार्क का लाभ भी बड़नगरवासियों को मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बड़नगर क्षेत्र में संचालित गौशालाओं को नरवाई प्रबंधन के लिए मशीनें लेने में सहायता के उद्देश्य से स्वेच्छानुदान से अंश राशि उपलब्ध कराने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इससे नरवाई के निराकरण के साथ ही गौशालाओं को पर्याप्त भूसा उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बड़नगर क्षेत्र के व्यायाम शालाओं को प्रोत्साहन स्वरूप एक-एक लाख रूपए देने की घोषणा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव, नायीखेड़ी-नागदा-रतलाम मार्ग की स्वीकृति प्रदान करने के लिए उनका आभार प्रकट करने मुख्यमंत्री निवास पहुंचे बड़नगर विधानसभा क्षेत्र के निवासियों को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का बड़नगरवासियों ने साफा और गजमाला पहनाकर अभिनंदन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बाबा महाकाल के आशीर्वाद से उज्जैन और बड़नगर अब 3 प्रमुख मार्गों के माध्यम से रतलाम से जुड़ गया है। तीसरा नया 2 लेन रास्ता गंभीर डैम के पास से नागदा होकर निकलने वाला है। लगभग 150 करोड़ रूपए का नायीखेड़ी-नागदा-रतलाम मार्ग क्षेत्रवासियों के लिए बड़ी सौगात है। इससे रतलाम की दूरी 40 किलोमीटर कम हो जाएगी। नई सड़क से सिंहस्थ : 2028 के आयोजन में भी सुविधा होगी। उज्जैन में विमानतल भी बनाया जा रहा है, इसका लाभ भी बड़नगर को मिलेगा। आगामी वर्षों में रतलाम सहित राजस्थान और गुजरात से भी बड़नगर का संपर्क सुगम और सशक्त होगा। सड़कें विकास का आधार हैं, इन सड़कों से बड़नगर सहित सम्पूर्ण क्षेत्र के विकास के द्वार खुलेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि सिंहस्थ : 2028 को दृष्टिगत रखते हुए यह प्रस्तावित मार्ग विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। वर्तमान में रतलाम से उज्जैन आने वाले श्रद्धालु मुख्यत: बदनावर-बड़नगर मार्ग से आवागमन करते हैं, जिसकी कुल लंबाई लगभग 115 कि.मी. है। प्रस्तावित वैकल्पिक मार्ग की कुल लंबाई लगभग 74 कि.मी. है, जो वर्तमान प्रचलित मार्ग की तुलना में लगभग 40 कि.मी. कम है। इस मार्ग के विकसित होने से यात्रा की दूरी एवं समय दोनों में उल्लेखनीय कमी आएगी तथा मुख्य मार्गों पर यातायात का दबाव भी कम होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भगवान कृष्ण के जीवन से प्रेरणा लेकर हमें मित्र की सहायता करने के लिए सदैव तत्पर रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदेशवासी हमारे लिए भगवान  हनुमान की तरह हैं, जिन्हें केवल जनभागीदारी की शक्ति का भान कराना होता है। सरकार के कार्य अपने आप होते चले जाते हैं। अभिनंदन समारोह में बड़नगर विधायक  जितेंद्र पंड्या,  अंतर सिंह देवड़ा,  उमराव सिंह,  विजय चौधरी सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित थे।  

आधुनिक डिजाइन और तकनीक से हों शासकीय भवनों का निर्माण

रायपुर सड़क निर्माण में गुणवत्ता से समझौता नहीं होगा प्रदेश में सड़क निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और समयबद्धता को लेकर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि सड़क निर्माण में किसी भी प्रकार की लापरवाही या गुणवत्ताहीन कार्य को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि कहीं भी निर्माण कार्य में कमी पाई गई तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी और दोषी ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट किया जाएगा। मुख्यमंत्री  साय ने यह निर्देश आज मंत्रालय महानदी भवन में लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के कार्यों और गतिविधियों की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान दिए। बैठक में उप मुख्यमंत्री एवं लोक निर्माण मंत्री  अरुण साव  उपस्थित थे। मुख्यमंत्री  साय ने अधिकारियों से कहा कि सड़क निर्माण के बाद निरीक्षण करने के बजाय निर्माण के दौरान ही नियमित रूप से फील्ड में जाकर गुणवत्ता की निगरानी की जाए। उन्होंने कहा कि सड़कों का निर्माण केवल तकनीकी कार्य नहीं बल्कि आमजन की सुविधा से जुड़ा हुआ महत्वपूर्ण अधोसंरचनात्मक कार्य है और इससे सरकार की छवि भी बनती है। यदि सड़क बनने के कुछ वर्षों के भीतर ही खराब हो जाए तो इससे सरकार की विश्वसनीयता प्रभावित होती है। बैठक में बागबहार–कोतबा सड़क की खराब स्थिति पर मुख्यमंत्री ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि यह सड़क कुछ वर्ष पहले ही बनी थी, लेकिन उसकी स्थिति तेजी से खराब हो गई है। यदि सड़क चार वर्ष भी नहीं चले तो इसका कोई औचित्य नहीं रह जाता। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि इस सड़क के निर्माण में हुई कमियों की गंभीरता से जांच की जाए और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न हो इसके लिए निर्माण के दौरान ही गुणवत्ता की सख्त निगरानी की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में बड़े पैमाने पर सड़क निर्माण कार्य हो रहे हैं, लेकिन आमजन को इन कार्यों की जानकारी नहीं मिल पाती जिससे सकारात्मक नैरेटिव नहीं बनता। उन्होंने निर्देश दिए कि बड़ी सड़क परियोजनाओं के शिलान्यास और भूमिपूजन मुख्यमंत्री और मंत्रियों के हाथों से कराए जाएं तथा उन्हें व्यापक रूप से आमजन के सामने प्रस्तुत किया जाए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सड़क निर्माण के टेंडर जारी होने से लेकर कार्य आवंटन (अवॉर्ड) तक की पूरी प्रक्रिया के लिए स्पष्ट समय-सीमा तय की जाए। उन्होंने कहा कि कई ठेकेदार बहुत कम दर यानी बिलो रेट पर टेंडर प्राप्त कर लेते हैं, जिसके कारण कार्य समय पर और गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा नहीं हो पाता। ऐसी स्थिति में संबंधित ठेकेदार की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। यदि ठेकेदार बिलो रेट पर टेंडर लेता है तो यह उसकी जिम्मेदारी होगी कि वह कार्य को निर्धारित गुणवत्ता और समय-सीमा में पूरा करे। मुख्यमंत्री ने कहा कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट नियमावली तैयार करने की आवश्यकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अन्य राज्यों में लागू बेहतर व्यवस्थाओं का अध्ययन कर छत्तीसगढ़ में भी उपयुक्त प्रावधान लागू किए जाएं। साथ ही टेंडर और डीपीआर जैसे तकनीकी कार्यों के लिए एक अलग इकाई बनाने पर भी गंभीरता से विचार किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में लगभग 300 ऐसे गांव चिन्हित किए गए हैं, जहां बरसात के दौरान संपर्क पूरी तरह टूट जाता है। ऐसे गांवों तक पहुंचने के लिए लोगों को कई बार बीमार मरीजों को खाट में उठाकर ले जाना पड़ता है, जो अत्यंत चिंता का विषय है। खाद्य विभाग से प्राप्त सूची के आधार पर चिन्हित इन गांवों को सड़कों और पुल-पुलियों के माध्यम से जोड़ने का कार्य प्राथमिकता के साथ किया जाए। मुख्यमंत्री  साय ने लैलूंगा–कुंजारा–तोलगेपहाड़–मिलूपारा–तमनार मार्ग के निर्माण की आवश्यकता पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में बड़ी आबादी निवास करती है और यहां सड़क का निर्माण अत्यंत आवश्यक है। इस मार्ग के कुछ हिस्से में वन स्वीकृति की आवश्यकता होगी, लेकिन शेष हिस्सों में निर्माण कार्य शीघ्र प्रारंभ किया जाए। बैठक में मनेंद्रगढ़–सूरजपुर–अंबिकापुर–पत्थलगांव–कुनकुरी–जशपुर–झारखंड सीमा राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक-43 की प्रगति की भी समीक्षा की गई। लगभग 353 किलोमीटर लंबाई वाली इस सड़क परियोजना की स्थिति पर चर्चा की गई।पत्थलगांव-कुनकुरी खंड में भू-अर्जन का मुआवजा दिए जाने की जानकारी भी बैठक में साझा की गई। इसके अलावा अंबिकापुर–सेमरसोत–रामानुजगंज–गढ़वा मार्ग, गीदम–दंतेवाड़ा मार्ग, चांपा–सक्ती–रायगढ़–ओडिशा सीमा मार्ग, रायपुर–दुर्ग मार्ग तथा चिल्फी क्षेत्र की सड़कों सहित कई अन्य परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई।  बैठक में बस्तर में पुल-पुलिया निर्माण सहित 17 सड़कों के निर्माण एवं उन्नयन पर भी विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही राज्य द्रुतगामी सड़क संपर्क मार्ग की आगामी कार्ययोजना की विस्तृत रूपरेखा भी प्रस्तुत की गई। मुख्यमंत्री ने भवन निर्माण कार्यों की समीक्षा करते हुए कहा कि प्रदेश में शासकीय भवनों के डिजाइन बहुत पुराने और एक जैसे दिखाई देते हैं। अब समय आ गया है कि शासकीय भवनों का निर्माण आधुनिक डिजाइन और तकनीक के आधार पर किया जाए। उन्होंने कहा कि भवनों का डिजाइन उनकी उपयोगिता के अनुरूप होना चाहिए और भूमि के बेहतर उपयोग के लिए हॉरिजॉन्टल की जगह वर्टिकल संरचना को बढ़ावा दिया जाए। मुख्यमंत्री ने राजभवन में बन रहे गेस्ट हाउस को भी आधुनिक और गरिमामय स्वरूप में तैयार करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़कें आमजन के जीवन से सीधे जुड़ी होती हैं और लोग सड़क की गुणवत्ता को बहुत महत्व देते हैं। अन्य कई विकास कार्य भले दिखाई न दें, लेकिन सड़कें सीधे लोगों को दिखाई देती हैं और सरकार की छवि भी उसी के आधार पर बनती है। इसलिए लोक निर्माण विभाग एक अत्यंत महत्वपूर्ण विभाग है और इसमें होने वाले कार्यों को समयबद्धता और गुणवत्ता के साथ पूरा किया जाना अनिवार्य है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऐसा तंत्र विकसित किया जाए जिससे सड़कों में बनने वाले गड्ढों की जानकारी समय पर मिल सके और उन्हें तुरंत ठीक किया जा सके। बैठक में मुख्य सचिव  विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव  सुबोध कुमार सिंह, लोक निर्माण विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव  मुकेश बंसल, मुख्यमंत्री के सचिव  राहुल भगत तथा लोक निर्माण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।।  

क्या MP के पूर्व CM और दिग्गज नेता छोड़ेंगे राजनीति? सोशल पोस्ट ने सियासी गलियारों में मचाया भूचाल

भोपाल   मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम और वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने बड़ा एलान किया है। दरअसल सोशल मीडिया प्लेटफार्म X पर दिग्विजय सिंह ने अपने रिटायरमेंट प्लान को लेकर एक वीडियो पोस्ट किया है।यह पोस्ट काफी खलबली मचा रहा है और दिग्विजय सिंह के प्लान को बता रहा है। दिग्गी ने एक्स पर किए वीडियो पोस्ट से मची हलचल पूर्व सीएम और सांसद दिग्विजय सिंह ने एक्स पर एक वीडियो को साझा करके अपने रिटायरमेंट प्लान को लेकर एलान किया है। दरअसल जो वीडियो पोस्ट दिग्गी ने शेयर किया है वो काफी अलग है और काफी कुछ बयान करता है। दिग्विजय सिंह ने एक्स पर रिटायर्ड बैंक अधिकारी शिबानंद भंजा का एक वीडियो शेयर किया है। इस पर दिग्गी ने लिखा है… My Retirement Plans? May be.  Why not? जय सिया राम। इस वीडियो में काफी गहरा संदेश छिपा है। दरअसल  इसमें शिवानंद भंजा सेवानिवृत्ति के बाद एक गाड़ी खरीदकर भारत भ्रमण के लिए निकल पड़े हैं। इसी को लेकर दिग्विजय सिंह ने लिखा है कि…माई रिटायरमेंट प्लासं ? मे बी.व्हाई नाट? इस वीडियो में  रिटायर्ड बैंक अधिकारी शिबानंद भंजा अपनी पत्नी बसबी भंजा के साथ कार में भारत की सडकों पर अपनी आजादी की कहानी बता रहे हैं। दरअसल शिबानंज भंजा की पत्नी का सपना था कि घर की जगह एक गाड़ी लेंगें और उसमें पूरा घर घूमेंगे। तो इसी वीडियो को शेयर करते हुए शिवानंद भंजा और उसकी पत्नी के सपने को दिग्विजय सिंह ने शेयर किया है। इससे यह कयास लगाए जा रहे हैं कि दिग्विजय कुछ अलग करने जा रहे हैं। वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह (Digvijaya Singh) का राज्यसभा कार्यकाल अप्रैल में पूरा होने वाला है। वर्तमान कार्यकाल 10 अप्रैल को समाप्त हो रहा है, जिसके बाद उनके भविष्य को लेकर सियासी गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं। राज्यसभा का खत्म हो रहा कार्यकाल, दिग्गी पहले ही दे चुके हैं संकेत वैसे भी पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह (Digvijaya Singh) का राज्यसभा कार्यकाल अप्रैल में पूरा होने वाला है, और  दिग्विजय सिंह पहले ही यह संकेत दे चुके हैं कि वे तीसरी बार राज्यसभा जाने के इच्छुक नहीं हैं।, जिसके बाद उनके भविष्य को लेकर सियासी गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं। क्या है दिग्विजय सिंह का अगला प्लान इस तरह के वीडियो को शेयर करके कांग्रेस संगठन और समर्थकों के बीच यह सवाल उठने लगा है कि आगे उनकी राजनीतिक भूमिका क्या होगी। राजनीति की समझ रखने वालों का मानना है कि यदि दिग्गी राज्यसभा की दौड़ से खुद को अलग रखते हैं तो यह उनके सार्वजनिक जीवन के नए चरण की शुरुआत हो सकती है , तो वहीं कुछ इसे दिग्गी के सक्रिय राजनीति से संन्यास के संकेत में भी देख रहे हैं। वैसे इस साल 10 अप्रैल के बाद दिग्विजय की अगली पारी क्या और कैसी होगी इस सबकी नजरें टिकी हुई हैं। हालांकि दिग्विजय सिंह ने वैसे तो कोई अधिकारिक तौर पर राजनीति छोड़ने का कोई ऐलान नहीं किया है । लेकिन पहले राज्यसभा नहीं जाने की बात कहकर और फिर इस वीडियो को जारी करके राजनीति भविष्य पर अटकलों और कयासों को हवा जरूर तो दे ही दी है।

बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा पर बड़ा कदम, 16 साल से कम उम्र वालों के लिए सोशल मीडिया बैन

बेंगलुरु कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने शुक्रवार को विधानसभा में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए राज्य का बजट पेश करते हुए बड़ा ऐलान किया है। मुख्यमंत्री ने ऐलान किया है कि राज्य में जल्द ही 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगा दिए जाएंगे। अपने बजट भाषण के दौरान सिद्धारमैया ने कहा है कि इस कदम का मकसद बच्चों में मोबाइल फोन के बढ़ते इस्तेमाल से होने वाले बुरे असर को रोकना है। बता दें कि कर्नाटक यह कदम उठाने वाला भारत का पहला राज्य बन गया है। इससे पहले गोवा और आंध्र प्रदेश की सरकारों ने भी इस तरह के फैसले को लागू करने की मंशा जताई थी। वहीं अन्य देशों की बात की जाए तो ऑस्ट्रेलिया की सरकार ने भी 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर पाबंदी लगाई है। वहीं फ्रांस में भी 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए प्रतिबंध लगाए गए हैं। कर्नाटक में पहले ही पेश किया गया था विचार कर्नाटक सरकार ने इससे पहले भी बच्चों के सोशल मीडिया एक्सेस को लेकर रेगुलेशन लाने के संकेत दिये थे। राज्य के IT और बायोटेक्नोलॉजी मंत्री प्रियांक खड़गे ने इस साल की शुरुआत में विधानसभा में कहा था कि सरकार किशोरों के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सोशल मीडिया का जिम्मेदारी से इस्तेमाल सुनिश्चित करने के लिए मुमकिन तरीकों पर गौर कर रही है। इकोनॉमिक सर्वे में जताई गई थी चिंता इससे पहले मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने राज्य के विश्विद्यालयों से इस बारे में राय मांगी थी कि क्या 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर रोक लगानी चाहिए। वहीं भारत के आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26 में भी युवाओं में ज्यादा स्मार्टफोन के इस्तेमाल को एक बढ़ती हुई चिंता बताया गया है। सर्वे में इसे नींद से जुड़ी दिक्कतों और तनाव जैसी परेशानियों से जोड़ा गया है।

किसानों के लिए राहत: गेहूं पर ₹40 और उड़द पर ₹600 बोनस का ऐलान

भोपाल मध्य प्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार ने राज्य के अन्नदाताओं के हित में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। प्रदेश में अब गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 2585 रुपये प्रति क्विंटल पर सरकार की ओर से 40 रुपये प्रति क्विंटल का अतिरिक्त बोनस दिया जाएगा। इस बोनस के जुड़ने के बाद अब किसानों से गेहूं की खरीदी 2,625 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर की जाएगी। पंजीयन की अंतिम तिथि बढ़ी किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सरकार ने गेहूं उपार्जन के पंजीयन की तारीख में भी वृद्धि कर दी है। मुख्यमंत्री ने घोषणा की है कि पंजीयन की अंतिम तिथि जो पहले 7 मार्च तय थी, उसे अब बढ़ाकर 10 मार्च कर दिया गया है। इससे वे किसान जो अब तक अपना पंजीयन नहीं करा पाए थे, उन्हें तीन दिन का अतिरिक्त समय मिल सकेगा। राज्य सरकार किसान कल्याण के लिए समर्पित भाव से कार्य कर रही है। आज भारतीय किसान संघ के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा में किसानों के लिए महत्वपूर्ण निर्णय किये। राज्य सरकार इस वर्ष गेहूं खरीदी पर ₹40 प्रति क्विंटल बोनस प्रदान करेगी। किसान कल्याण के लिए सरकार समर्पित- मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भारतीय किसान संघ के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा के दौरान ये निर्णय लिए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसान कल्याण के लिए समर्पित भाव से कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि गेहूं खरीदी पर बोनस प्रदान करने के साथ-साथ पंजीयन की तिथि बढ़ाना किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है। उड़द पर ₹600 का भारी बोनस मुख्यमंत्री ने गेहूं के अलावा अन्य फसलों और किसानों की सुरक्षा को लेकर भी घोषणाएं कीं। उन्होंने बताया कि उड़द की खरीदी पर ₹600 प्रति क्विंटल का बोनस देने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने किसानों को उड़द लगाने के लिए प्रोत्साहित किया ताकि उन्हें इस बोनस का लाभ मिल सके और वे अगली फसल की तैयारी समय पर कर सकें। इसके साथ ही, किसानों को रात के समय सिंचाई के दौरान होने वाले खतरों और संकटों से बचाने के लिए अब दिन में बिजली प्रदान करने का फैसला लिया गया है, ताकि किसान सुरक्षित और सुलभ तरीके से अपनी फसलों की सिंचाई कर सकें।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव 10 मार्च को भोपाल में करेंगे ‘सरस्वती अभियान’ का शुभारंभ

‘सरस्वती अभियान’ से शिक्षा की मुख्यधारा में पुन: आएगी शाला त्यागी बालिकाएँ बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ के अंतर्गत महिला बाल विकास विभाग की नई पहल मुख्यमंत्री डॉ. यादव 10 मार्च को भोपाल में करेंगे ‘सरस्वती अभियान’ का शुभारंभ भोपाल  प्रदेश में शाला त्यागी बालिकाओं को पुनः शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग ने बेटी बचाओ–बेटी पढ़ाओ योजनांतर्गत ‘सरस्वती अभियान’ की शुरुआत की है। इस नवाचार के माध्यम से वे बालिकाएँ जो किसी सामाजिक, पारिवारिक या आर्थिक कारण से विद्यालय छोड़ चुकी हैं, उन्हें फिर से शिक्षा से जोड़कर आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने का प्रयास किया जाएगा। राज्य स्तर पर इस अभियान को नई दिशा देने के लिए 10 मार्च को भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शामिल होंगे। कार्यक्रम में शाला त्यागी बालिकाओं को पुनः शिक्षा से जोड़ने के लिए विभाग की कार्य योजना और नवाचारों की जानकारी भी दी जाएगी। अभियान में राज्य ओपन स्कूल प्रणाली के माध्यम से बालिकाओं को कक्षा 8वीं, 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं में शामिल होने का अवसर दिया जाएगा। उन्हें अध्ययन सामग्री, मार्गदर्शन, संपर्क कक्षाएँ और मेंटोरिंग की सुविधा भी प्रदान की जाएगी, ताकि वे अपनी पढ़ाई पूरी कर सकें और आगे की शिक्षा या रोजगार के अवसर प्राप्त कर सकें। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के अनुसार प्रदेश में बड़ी संख्या में बालिकाएँ कक्षा 8वीं, 10वीं या 12वीं से पहले ही विद्यालय छोड़ देती हैं। शिक्षा छूटने के बाद उन्हें पढ़ाई जारी रखने का अवसर नहीं मिल पाता, जिससे उनकी शिक्षा अधूरी रह जाती है और उनके भविष्य के अवसर सीमित हो जाते हैं। ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में यह समस्या अधिक गंभीर रूप में सामने आती है। चुनौती को ध्यान में रखते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा शुरू किए जा रहे सरस्वती अभियान के अंतर्गत शाला त्यागी बालिकाओं की पहचान के लिए सर्वेक्षण किया जाएगा, उन्हें राज्य ओपन स्कूल में नामांकित किया जाएगा। परीक्षा की तैयारी के लिए अध्ययन सामग्री और शैक्षणिक मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा। इसके साथ ही मेंटोरिंग और काउंसलिंग के माध्यम से बालिकाओं को परीक्षा में सफल होने के लिए निरंतर सहयोग दिया जाएगा। अभियान के तहत परीक्षा उत्तीर्ण करने वाली बालिकाओं को प्रमाण-पत्र प्रदान कर आगे की शिक्षा के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य न केवल बालिकाओं को शिक्षा से जोड़ना है, बल्कि उनमें आत्मविश्वास और आत्मसम्मान का विकास करना भी है। अभियान बालिका शिक्षा की दर बढ़ाने, ड्रॉप-आउट दर कम करने और महिला सशक्तिकरण को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। साथ ही बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों को रोकने में भी यह अभियान प्रभावी साबित हो सकता है। सरस्वती अभियान के माध्यम से शिक्षा से वंचित बालिकाओं को नया अवसर मिलेगा और वे न केवल अपने जीवन को बेहतर बना सकेंगी, बल्कि परिवार और समाज के विकास में भी सक्रिय भूमिका निभा सकेंगी।  

केंद्रीय कर्मचारियों को मिलेगी पुरानी पेंशन? 8वें वेतन आयोग से जुड़ी बड़ी अपडेट

नई दिल्ली केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के लिए पेंशन सुधार को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है। 8वें वेतन आयोग की प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही कर्मचारी संगठनों ने पुरानी पेंशन योजना (OPS) को पूरी तरह बहाल करने की मांग दोबारा उठाई है। कर्मचारी यूनियनों का कहना है कि नई प्रणालियों में पेंशन की निश्चितता नहीं है, इसलिए सरकार को कर्मचारियों की पुरानी व्यवस्था वापस लानी चाहिए। क्या है डिटेल कर्मचारी संगठनों केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों और श्रमिकों का परिसंघ और अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी संघ (AIDEF) ने इस संबंध में अपनी मांगें राष्ट्रीय परिषद-संयुक्त परामर्श तंत्र (NC-JCM) की स्टाफ साइड की ड्राफ्टिंग कमेटी को सौंप दी हैं। यूनियनों ने स्पष्ट रूप से कहा है कि नेंशनल पेंशन सिस्टम (NPS) और हाल ही में लाई गई यूनिफाइड पेंशन सिस्टम (UPS) दोनों को खत्म कर फिर से OPS लागू किया जाए। दरअसल, UPS को लेकर कर्मचारियों की प्रतिक्रिया उम्मीद से काफी कम रही है। सरकार ने संसद में जानकारी दी थी कि 30 नवंबर 2025 तक सिर्फ 1,22,123 केंद्रीय कर्मचारियों ने ही UPS को चुना है। इसमें नए भर्ती कर्मचारी, मौजूदा कर्मचारी और कुछ सेवानिवृत्त कर्मचारी भी शामिल हैं। जबकि कुल पात्र कर्मचारियों की संख्या लगभग 23 से 25 लाख मानी जाती है। यानी कुल कर्मचारियों में से केवल 4–5% ने ही UPS को अपनाया है। यूनियन नेताओं ने क्या कहा यूनियन नेताओं का कहना है कि यह कम संख्या इस बात का संकेत है कि कर्मचारियों को नई पेंशन व्यवस्था पर भरोसा नहीं है। उनका तर्क है कि OPS में कर्मचारी को रिटायरमेंट के बाद अंतिम वेतन का करीब 50% पेंशन और उस पर महंगाई भत्ता (DA) भी मिलता था। जबकि NPS में पेंशन बाजार के रिटर्न पर निर्भर करती है, जिससे भविष्य की आय अनिश्चित हो जाती है। हालांकि सरकार का रुख अब तक साफ रहा है। सरकार का कहना है कि OPS को दोबारा लागू करने का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है। सरकार के मुताबिक NPS लंबी अवधि में सरकारी खजाने पर पड़ने वाले पेंशन के भारी बोझ को संतुलित करने के लिए जरूरी है। इसी कारण NPS को पूरी तरह खत्म करने के बजाय सरकार ने बीच का रास्ता निकालते हुए UPS का विकल्प दिया, जिसमें न्यूनतम पेंशन का कुछ भरोसा दिया गया है। सबसे बड़ा पेंशन का मुद्दा अब जब 8वें वेतन आयोग की चर्चाएं शुरू हो चुकी हैं, तो माना जा रहा है कि पेंशन का मुद्दा सबसे बड़ा विवादित विषय बन सकता है। कर्मचारी संगठन इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाने की तैयारी में हैं, जबकि सरकार वित्तीय संतुलन का हवाला दे रही है। ऐसे में आने वाले महीनों में यह देखना अहम होगा कि वेतन आयोग की सिफारिशों में पेंशन व्यवस्था को लेकर क्या बड़ा बदलाव सामने आता है।

अनुज अग्निहोत्री बने UPSC के पहले टॉपर, राजेश्वरी दूसरे स्थान पर: जानें अनुज की सफलता की कहानी

नई दिल्ली यूपीएससी 2025 का परिणाम घोषित हो चुका है. पहले स्थान पर अनुज अग्निहोत्री हैं. इनके अलावा टॉप-20 में शामिल अभ्यर्थियों के नाम भी सामने आ चुके हैं. इस बार सफल 958 उम्मीदवारों में 317 जनरल कैटेगरी, 104 ईडब्ल्यूएस, 3306 ओबीसी, 158 एससी, 73 एसटी वर्ग के हैं.पहले नजर डालते हैं टॉप-10 में शामिल सफल अभ्यर्थियों की सूची पर  अनुज के बाद दूसरे स्थान पर  राजेश्वरी सुवे एम और तीसरे पर एकांश धुल हैं. यूपीएससी के टॉप टेन में राघव झुनझुनवाला को चौथा स्थान मिला है. वहीं इशान भटनागर पांचवे पायदान पर हैं। 1. अनुज अग्निहोत्री 2. राजेश्वरी सुवे एम 3.एकांश धुल 4. राघव झुनझुनवाला 5.इशान भटनागर 6. जिनिया अरोरा 7. एआर राजा मोहाइदीन  8. प्रकाश सेक्रेट्री 9. आस्था जैन 10. उज्जवल प्रियांक यूपीएससी सीएसई 2025 में अंतिम रूप से सफल होने वालों में छठे स्थान पर जिनिया अरोरा, 7वें पर एआर राजा मोहाइदीन, 8वें नंबर पर प्रकाश सेक्रेट्री, नौवें पायदान पर आस्था जैन और 10वें स्थान पर उज्जव प्रियांक हैं। टॉप टेन के बाद भी सफल हुए दूसरे अभ्यर्थियों के नाम आउट हो चुके हैं. यूपीएससी के 20 टॉपर्स के नाम घोषित हो चुके हैं. इनमें 11वें नंबर पर यशश्वी राजवर्धन, 12वें पायदान पर अक्षित भारद्वज, 13 नंबर पर अनन्या शर्मा, 15वें स्थान पर सिमरनदीप कौर, 16वें पर मोनिका श्रीवास्तव, 17वें स्थान पर चितवन जैन, 18वें पायदान पर श्रुति आर, 19वें स्थान पर निसार दिशांत अमृतलाल और 20वें नंबर पर रवि राज हैं.  UPSC 2025 की लिखित मुख्य परीक्षा अगस्त 2025 में हुई थी. इसमें सफल होने वाले उम्मीदवारों के लिए फरवरी 2026 इंटरव्यू का आयोजन किया गया था. इसके बाद आज अंतिम परिणाम की घोषणा हुई। अनुज अग्निहोत्रीने किया टॉप, राजस्थान के रावतभाटा से है कनेक्शन संघ लोक सेवा आयोग ( यूपीएससी ) ने आज सिविल सेवा परीक्षा (सीएसई) 2025 का अंतिम परिणाम घोषित कर दिया है. इस वर्ष अनुज अग्निहोत्री ने परीक्षा में टॉप किया है. उम्मीदवार आयोग की आधिकारिक वेबसाइटों upsc.gov.in और upsconline.nic.in पर अपने परिणाम देख सकते हैं. यह परीक्षा देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक मानी जाती है. इस परीक्षा की प्रक्रिया काफी लंबी और कठिन होती है. पहले अगस्त 2025 में लिखित परीक्षा आयोजित की गई थी. इसके बाद सफल उम्मीदवारों का फरवरी 2026 में इंटरव्यू लिया गया. इन सभी चरणों के बाद यूपीएससी ने अंतिम मेरिट लिस्ट जारी की है। UPSC टॉपर अनुज अग्निहोत्री कौन हैं? अनुज अग्निहोत्री UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 के टॉपर हैं. अनुज अग्निहोत्री राजस्थान के रावतभाटा के रहने वाले हैं. उन्होंने इस प्रतिष्ठित परीक्षा में पहला स्थान हासिल किया और पूरे देश में सबसे ज्यादा अंक प्राप्त किए. UPSC को भारत की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक माना जाता है. हर साल लाखों छात्र इस परीक्षा में बैठते हैं, लेकिन अंतिम चयन केवल कुछ सौ उम्मीदवारों का ही होता है. ऐसे में टॉप करना बहुत बड़ी उपलब्धि मानी जाती है. अनुज राजस्थान के रावतभाटा के रहने वाले हैं. इसके बाद वो ग्रेजुएशन करने के लिए जोधपुर चले गए. जहां उन्होंने एम्स से एमबीबीएस से पढ़ाई की है. उन्होंने 2023  में एमबीबीएस की पढ़ाई की थी. इसके बाद उन्होंने Danics जॉइन किया था, जो Central Civil Services (Group-B) की प्रशासनिक सेवा है। अगर बात करें भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) की, तो इस साल इसके लिए कुल 180 पद खाली हैं. इनमें अलग-अलग वर्गों के लिए आरक्षण भी तय किया गया है।     सामान्य वर्ग के लिए 74 पद     ओबीसी के लिए 47 पद     अनुसूचित जाति (SC) के लिए 28 पद     आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए 18 पद     अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए 13 पद इसी तरह भारतीय विदेश सेवा (IFS) में भी इस साल कुल 55 पद उपलब्ध हैं. इनमें भी अलग-अलग वर्गों के लिए सीटें तय की गई हैं।     सामान्य वर्ग के लिए 22 पद     ओबीसी के लिए 15 पद     अनुसूचित जाति के लिए 8 पद     ईडब्ल्यूएस के लिए 6 पद     अनुसूचित जनजाति के लिए 4 पद यूपीएससी ने साफ किया है कि सभी उम्मीदवारों की नियुक्ति सिविल सेवा परीक्षा नियम 2025 और उपलब्ध रिक्तियों के आधार पर ही अंतिम रूप से तय की जाएगी. कुल मिलाकर, इस परीक्षा में सफल हुए 958 उम्मीदवार अब देश की अलग-अलग प्रशासनिक सेवाओं में शामिल होकर शासन और प्रशासन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। UPSC परीक्षा कितने चरणों में होती है UPSC सिविल सेवा परीक्षा कुल तीन चरणों में होती है: 1. प्रारंभिक परीक्षा (Prelims)     यह पहला चरण होता है. इसमें दो पेपर होते हैं –     सामान्य अध्ययन (General Studies)     CSAT     इस परीक्षा में पास होने वाले उम्मीदवार ही अगले चरण में जाते हैं. 2. मुख्य परीक्षा (Mains)     दूसरा चरण मुख्य परीक्षा है. इसमें कई लिखित पेपर होते हैं जैसे:     निबंध (Essay)     सामान्य अध्ययन के चार पेपर     वैकल्पिक विषय (Optional Subject)     यह चरण सबसे कठिन माना जाता है. 3. इंटरव्यू (Personality Test) मेन परीक्षा पास करने के बाद उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाता है। इसमें उम्मीदवार की सोच, व्यक्तित्व, निर्णय लेने की क्षमता और देश-समाज के प्रति समझ को परखा जाता है।     कब हुआ था UPSC 2025 का एग्जाम     लिखित मुख्य परीक्षा: अगस्त 2025     इंटरव्यू: फरवरी 2026     अंतिम परिणाम: 6 मार्च 2026 इन सभी चरणों के बाद अंतिम मेरिट लिस्ट जारी की गई. UPSC पास करने के बाद क्या बनते हैं अधिकारी UPSC सिविल सेवा परीक्षा पास करने के बाद उम्मीदवारों को देश की सबसे प्रतिष्ठित सेवाओं में नौकरी मिलती है, जैसे Indian Administrative Service, Indian Police Service, Indian Foreign Service. इसके अलावा कई ग्रुप A और ग्रुप B केंद्रीय सेवाओं में भी नियुक्ति मिलती है।  

इजरायल का बड़ा खुलासा: 90 दिन पहले खामेनेई की हत्या की थी योजना

तेहरान  इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने 5 मार्च 2026 को एक टीवी इंटरव्यू में बड़ा खुलासा किया है कि देश ने पिछले साल नवंबर में ही अयातुल्ला अली खामेनेई को मारने का फैसला कर लिया था. यह फैसला प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ एक बहुत छोटी और गोपनीय बैठक में लिया गया था। शुरू में योजना थी कि यह काम छह महीने बाद यानी मध्य 2026 में किया जाएगा लेकिन बाद में हालात इतने तेजी से बदल गए. अमेरिका और इजरायल ने मिलकर फरवरी के अंत में ही हमला शुरू कर दिया. इस हमले के पहले ही घंटों में खामेनेई की मौत हो गई, जो दुनिया के इतिहास में किसी देश के सबसे बड़े नेता को हवाई हमले से मारने का पहला मामला बन गया है. अब यह संयुक्त हवाई अभियान एक हफ्ते से ज्यादा चल चुका है. पूरे क्षेत्र में युद्ध की आग फैल गई है। नवंबर 2025 में क्या हुआ और नेतन्याहू ने क्यों लिया यह फैसला रक्षा मंत्री काट्ज ने इजरायल के चैनल 12 टीवी को बताया कि नवंबर 2025 में प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने एक बहुत छोटे समूह के साथ बैठक बुलाई थी. इसमें सिर्फ चुनिंदा लोग थे. उस बैठक में नेतन्याहू ने साफ कहा कि ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई को खत्म करना हमारा लक्ष्य है।  उस समय योजना बनाई गई कि यह ऑपरेशन मध्य 2026 में किया जाएगा क्योंकि इजरायल को लगता था कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम और बैलिस्टिक मिसाइलें इजरायल के लिए अस्तित्व का खतरा बन चुकी हैं. इजरायल का मानना है कि ईरान हथियार बना रहा है जो इजरायल को पूरी तरह नष्ट कर सकता है. इसलिए इस खतरे को जड़ से खत्म करने का फैसला किया गया। जनवरी 2026 में योजना क्यों बदली गई और US को कब बताया गया काट्ज ने आगे बताया कि दिसंबर के बाद जनवरी 2026 में ईरान में बड़े-बड़े विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए. ईरान के लोग अपने नेता और सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतर आए थे. इजरायल को डर था कि यह दबाव झेल रहे शासक किसी भी समय इजरायल और अमेरिकी ठिकानों पर हमला कर सकते हैं। इसलिए योजना को तेज कर दिया गया. इजरायल ने इस पूरे प्लान को अमेरिका को बताया. दोनों देशों ने मिलकर तैयारी शुरू कर दी. रक्षा मंत्री ने कहा कि हम नहीं चाहते थे कि ईरान पहले हमला कर दे इसलिए प्लान को बदला गया। 28 फरवरी 2026 को शनिवार के दिन अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान पर बड़ा हवाई अभियान शुरू किया. पहले ही कुछ घंटों में खामेनेई को उनके घर और दफ्तर वाले इलाके में मार दिया गया. यह हमला इतना सटीक था कि ईरान के कई बड़े सैन्य नेता भी उसी में मारे गए। हमले ने पूरे क्षेत्र को युद्ध में झोंक दिया अब यह अमेरिका-इजरायल का संयुक्त हवाई हमला एक हफ्ते से ज्यादा चल रहा है. शुरू के दिनों में ही ईरान के कई बड़े नेता मारे गए जिससे ईरान का शासन हिल गया है. ईरान ने जवाब में इजरायल पर मिसाइलें दागीं गल्फ देशों और इराक में भी हमले किए। इजरायल ने ईरान के करीबी सहयोगी हिजबुल्लाह पर लेबनान में हमले तेज कर दिए हैं. पूरा मध्य पूर्व अब युद्ध की आग में जल रहा है. ईरान की सरकार ने कहा है कि वह लड़ाई जारी रखेगी. लेकिन इजरायल का कहना है कि हमारा मकसद सिर्फ खतरा खत्म करना है। इजरायल के असली लक्ष्य क्या हैं – परमाणु कार्यक्रम और शासन बदलना इजरायल ने साफ कहा है कि उसका मुख्य उद्देश्य ईरान के परमाणु हथियार कार्यक्रम और बैलिस्टिक मिसाइल प्रोजेक्ट को पूरी तरह खत्म करना है. इजरायल को लगता है कि ईरान ये हथियार बना लेगा तो इजरायल के लिए कोई सुरक्षित जगह नहीं बचेगी। इसके अलावा इजरायल चाहता है कि ईरान में शासन बदल जाए यानी वहां मौजूदा सरकार गिर जाए और एक नई सरकार आए जो शांतिप्रिय हो. रक्षा मंत्री काट्ज ने कहा कि अगर ईरान नया नेता चुनता है तो वह भी इजरायल का निशाना बनेगा क्योंकि इजरायल किसी भी ऐसे नेता को बर्दाश्त नहीं करेगा जो इजरायल को नष्ट करने की सोचे। ईरान की स्थिति और भविष्य में क्या हो सकता है ईरान ने अब तक कोई संकेत नहीं दिया है कि वह सत्ता छोड़ेगा या बातचीत करेगा. उल्टे ईरान ने इजरायल और अमेरिका पर कई जगहों पर हमले किए हैं जिससे तेल की सप्लाई प्रभावित हो रही है. गल्फ के देश डर में हैं. इजरायल और अमेरिका का कहना है कि अभियान तब तक चलेगा जब तक ईरान का परमाणु खतरा पूरी तरह खत्म न हो जाए. यह पूरा मामला दशकों पुरानी इजरायल-ईरान दुश्मनी का सबसे बड़ा मोड़ है।  

नक्सलवाद पर सरकार का अंतिम वार! अमित शाह ने बताई भारत को मुक्त करने की तारीख

रायपुर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भारत के 31 मार्च तक माओवादियों से मुक्त हो जाने का दावा करते हुए शुक्रवार को कहा कि सुरक्षा बल आंध्र प्रदेश के तिरुपति से नेपाल के पशुपति तक लाल गलियारा बनाने का सपना देखने वालों को पराजित करेंगे। शाह ने कटक जिले के मुंडाली में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के 57वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित एक समारोह को संबोधित करते हुए यह भी कहा कि सीआईएसएफ प्रमुख प्रतिष्ठानों को सुरक्षा प्रदान करके देश की आर्थिक वृद्धि में अहम भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा, ‘आज, मैं राष्ट्र को आश्वस्त करना चाहता हूं कि देश 31 मार्च तक माओवादियों से मुक्त हो जाएगा। हमारी सेनाएं तिरुपति से पशुपति तक लाल गलियारा बनाने का सपना देखने वालों को पराजित करेंगी।’ शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में देश से नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ फेंकना सुरक्षा बलों के लिए बड़ी उपलब्धि होगी। उन्होंने कहा, ‘हमारे सुरक्षा बल अपेक्षाओं पर खरे उतरे हैं और देश अब लाल विद्रोहियों का सफाया करने के कगार पर है।’ पांच लाख रुपये का इनामी नक्सली ढेर छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में पांच लाख रुपये का एक इनामी नक्सली मारा गया है। पुलिस अधिकारियों ने गुरुवार को यह जानकारी दी। दंतेवाड़ा जिले के पुलिस अधीक्षक गौरव राय ने बताया कि मुठभेड़ बुधवार रात गीदम पुलिस थाना इलाके के जंगल-पहाड़ी क्षेत्र में हुई, जब जिला रिजर्व गार्ड (डीआरजी) और बस्तर फाइटर्स का एक संयुक्त दल नक्सल विरोधी अभियान पर निकला था। उन्होंने बताया कि मारे गए नक्सली की पहचान बीजापुर जिले के बुरजी गांव के निवासी राजेश पुनेम के रूप में हुई है, जो माओवादियों की भैरमगढ़ एरिया कमेटी का सदस्य था। उस पर पांच लाख रुपये का इनाम घोषित था। राय ने बताया कि सुरक्षाबलों को तीन मार्च को गीदम थाना क्षेत्र के गुमलनार, गिरसापारा और नेलगोड़ा के मध्य जंगल-पहाड़ी क्षेत्र में नक्सली सामग्री और हथियार छिपाए जाने की जानकारी मिली थी। ओडिशा ने बलांगीर, बरगढ़ को नक्सल-मुक्त घोषित किया ओडिशा पुलिस ने माओवादियों के खिलाफ अभियान में बड़ी सफलता हासिल करते हुए राज्य के दो पश्चिमी जिलों बलांगीर और बरगढ़ को नक्सल प्रभाव से मुक्त घोषित किया है। पुलिस महानिदेशक वाई बी खुरानिया ने आधिकारिक रूप से इसकी घोषणा की कि बलांगीर और बरगढ़ जिले अब नक्सल-मुक्त हो गये हैं। यह घोषणा उस समय की गई जब बरगढ़ से सटे महासमुंद जिले के 15 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया। बताया गया कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली बरगढ़-बलांगीर-महासमुंद डिवीजन में सक्रिय थे। उनके मुख्यधारा में लौटने के साथ ही इन दोनों जिलों में नक्सली गतिविधियों के पूरी तरह समाप्त होने की पुष्टि की गई।

RBI का MuleHunter करेगा फर्जी बैंक खातों का सफाया, डिजिटल अरेस्ट में आएगी मुश्किलें

 नई दिल्ली भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की सहायक फर्म Reserve Bank Innovation Hub ने एक एडवांस्ड AI टूल तैयार किया है, जो साइबर क्रिमिनल्स, स्कैमर्स और डिजिटल अरेस्ट करने वालों पर नकेल कसेगा. इस AI टूल का नाम MuleHunter.AI है. यह AI टूल हर महीने लगभग 20,000 म्यूल अकाउंट्स का पता लगाकर उन्हें बंद कर रहा है। डिजिटल अरेस्ट, साइबर फ्रॉड और अन्य ऑनलाइन फर्जीवाड़ों के पीछे के एक विशाल फर्जी बैंक अकाउंट का नेटवर्क होता है, जिसे म्यूल अकाउंट भी कहते हैं। इन फर्जी अकाउंट (म्यूल अकाउंट) का यूज ठगी गई रकम ट्रांसफर को एक जगह से दूसरी जगह पर भेजने में इस्तेमाल किया जाता है. कई साल से साइबर क्रिमिनल्स म्यूल अकाउंट नेटवर्क का यूज करके भोले-भाले लोगों को शिकार बना रहे हैं। म्यूल अकाउंट को पकड़ना क्यों मुश्किल है म्यूल अकाउंट को पकड़ना इसलिए मुश्किल होता है क्योंकि ये बहुत थोड़े समय के लिए होते हैं. जैसे ही म्यूल अकाउंट को ओपन किया जाता है, उसके कुछ दिन बाद ही बंद कर दिया जाता है. ज्यादातर म्यूल अकाउंट को फर्जी डॉक्यूमेंट के आधार पर ओपन किया जाता है। अमित शाह भी कर चुके हैं तारीफ  केंद्रीय गृह मंत्री अमित ने हाल ही में बढ़ते हुए साइबर अपराधों के खिलाफ इसको एक अहम हथियार बताया है. ये टूल सिर्फ साइबर ठगी को ट्रैक नहीं करता है, बल्कि उसकी धड़कन को समझता है। म्यूल अकाउंट को कर देगा फ्रीज  साइबर ठगी के बाद जैसे ही म्यूल अकाउंट के जरिए रुपये को एक अकाउंट से दूसरे बैंक अकाउंट और फिर तीसरे बैंक अकाउंट में ट्रांसफर किया जाता है. यह सिस्टम उसको ट्रैक करता है और ट्रांजैक्शन को रोक देता है. साथ ही बैंक अकाउंट को फ्रीज कर देता है।  कई बैंकों में यूज हो रहा सिस्टम  बताते चलें कि यह टूल अभी करीब दो दर्जन बैंक सिस्टम में यूज जा रहा है. MuleHunter.AI टूल का असली मकसद साइबर ठगों के खातों की पहचान करना और उनको बंद करना है। MuleHunter.AI क्या है     इसे Reserve Bank Innovation Hub ने डेवलप किया है, जो भारतीय रिजर्व बैंक की सहायक कंपनी है.      यह एक स्पेशल सिस्टम है, जो म्यूल अकाउंट्स के नेटवर्क को खत्म करने के लिए खासतौर से तैयार किया गया है.      अन्य सिस्टम के तहत घटना के बाद धोखाधड़ी पकड़ते हैं. यह टूल गोल्डन ऑवर में ही अपराध पकड़ लेता है.  कैसे काम करता है ये सिस्टम      यह टूल संदिग्ध लेनदेन को पैसा निकलने से पहले ही फ्रीज करने की काबिलियत रखता है.      यह मशीन लर्निंग का इस्तेमाल करता है और तुरंत काम होता है.      यह बैंक खातों में होने वाले छोटे-छोटे बदलावों को डिटेक्ट करता है.      खास पैटर्न के आधार पर यह खातों के मिसयूज की तुरंत पहचान कर लेता है.  I4C ने कई लाख म्यूल अकाउंट की पहचान की  इंडियन साइबर क्राइम कॉर्डिनेशन सेंटर (I4C) के मुताबिक, 31 दिसंबर 2025 तक 26.5 लाख लेयर-1 म्यूल अकाउंट्स की पहचान की गई थी. करीब 20,000 करोड़ रुपये साइबर क्रिमिमनल्स द्वारा लूटे जाने वाले पैसे में से 8,189 करोड़ रुपये पीड़ितों को वापस मिल चुके हैं। सबसे ज्यादा म्यूल अकाउंट कहां मिले हरियाणा के नूंह में 2025 में 1,000 से ज्यादा म्यूल अकाउंट पकड़े जा चुके हैं. वहीं जामताड़ा में 350 से ज्यादा ऐसे खाते पकड़े जा चुके हैं। होम मिनिस्ट्री ने दी है डेडलाइन  होम मिनिस्ट्री ने दिसंबर 2026 तक सभी फाइनेंशियल इंस्टीट्यूट को MuleHunter प्लेटफॉर्म से कनेक्ट होने की डेडलाइन दी है. इसमें बैंक सरकारी फाइनेंशियल एजेंसियां भी हैं।

बॉम्बे हाई कोर्ट का बड़ा निर्णय, कहा- कहीं भी नमाज अदा करने का अधिकार नहीं, पूरा मामला जानें

मुंबई बॉम्बे हाई कोर्ट ने छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास टैक्सी और ऑटो रिक्शा चालकों को रमजान के दौरान नमाज पढ़ने की अनुमति देने से इन्कार कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि रमजान इस्लाम का महत्वपूर्ण धार्मिक महीना है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि कोई भी व्यक्ति किसी भी स्थान पर नमाज पढ़ने का अधिकार मांग सकता है। खासकर एयरपोर्ट जैसे संवेदनशील और उच्च सुरक्षा वाले क्षेत्र में सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। सुरक्षा को धर्म से ऊपर बताया     जस्टिस बी.पी. कोलाबावाला और जस्टिस फिरदौस पूनीवाला की पीठ ने गुरुवार को सुनवाई के दौरान कहा कि अदालत सुरक्षा संबंधी चिंताओं को नजरअंदाज नहीं कर सकती।     कोर्ट ने कहा कि एयरपोर्ट परिसर और उसके आसपास का क्षेत्र अत्यधिक संवेदनशील होता है, जहां किसी भी तरह की भीड़ या अस्थायी व्यवस्था सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती है। पीठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि धर्म चाहे जो भी हो, सुरक्षा सबसे पहले है और इससे कोई समझौता नहीं किया जा सकता। अस्थायी शेड हटाए जाने के बाद दाखिल हुई थी याचिका     यह मामला टैक्सी-रिक्शा ओला-उबर मेंस यूनियन द्वारा दाखिल याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि वे छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास बने एक अस्थायी शेड के नीचे नमाज अदा करते थे। हालांकि, पिछले वर्ष अधिकारियों ने उस शेड को हटा दिया था।     यूनियन ने अदालत से मांग की थी कि उन्हें उसी स्थान पर नमाज पढ़ने की अनुमति दी जाए या फिर आसपास किसी अन्य स्थान को इसके लिए निर्धारित किया जाए। एयरपोर्ट की सुरक्षा का दिया हवाला अदालत ने बार-बार एयरपोर्ट सुरक्षा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि सावधानी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। पिछली सुनवाई में अदालत ने पुलिस और एयरपोर्ट प्राधिकरण को निर्देश दिया था कि वे यह देखें कि याचिकाकर्ताओं को कहीं और स्थान दिया जा सकता है या नहीं। प्राधिकरणों ने अपनी रिपोर्ट अदालत में पेश की। सात अन्य स्थानों का सर्वे किया गया, लेकिन भीड़भाड़, सुरक्षा चिंताओं और एयरपोर्ट विकास योजना के कारण कोई भी जगह उपयुक्त नहीं पाई गई। मदरसे में जाकर अदा करें नमाज   रिपोर्ट देखने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि मामला सीधे एयरपोर्ट की सुरक्षा से जुड़ा है, इसलिए याचिकाकर्ताओं को राहत नहीं दी जा सकती। अदालत ने यह भी कहा कि संबंधित स्थान से एक किलोमीटर के भीतर एक मदरसा है, जहां नमाज अदा की जा सकती है। पीठ ने कहा कि एयरपोर्ट के आसपास प्रार्थना स्थल बनाने का सवाल ही नहीं उठता। अदालत ने टिप्पणी की कि सुरक्षा सबसे पहले आती है और इस एयरपोर्ट से हर धर्म के लोग यात्रा करते हैं। जरूरी नहीं कि किसी जगह पर नमाज पढ़ी जाए हाईकोर्ट ने कहा कि दुनिया में कहीं भी एयरपोर्ट के इतने करीब इस तरह की व्यवस्था नहीं देखी गई है। याचिकाकर्ता यह तय नहीं कर सकते कि वे किस जगह नमाज पढ़ेंगे। अदालत ने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर कोई कल यह कहे कि वह ओवल मैदान के बीच में खड़े होकर नमाज पढ़ना चाहता है, तो यह संभव नहीं हो सकता। अदालत ने कहा कि कोई भी व्यक्ति दिन में पांच बार नमाज अदा कर सकता है, लेकिन यह जरूरी नहीं कि वह किसी भी जगह पर ही की जाए। वैकल्पिक स्थानों का सर्वे, लेकिन नहीं मिली उपयुक्त जगह     इससे पहले अदालत ने पुलिस और एयरपोर्ट प्राधिकरण को निर्देश दिया था कि वे आसपास के क्षेत्रों का सर्वे कर यह देखें कि क्या नमाज के लिए कोई अन्य स्थान उपलब्ध कराया जा सकता है।     गुरुवार को अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट अदालत में पेश की। रिपोर्ट में बताया गया कि सात अलग-अलग स्थानों का सर्वे किया गया, लेकिन भीड़, सुरक्षा चिंताओं और एयरपोर्ट के विकास कार्यों के कारण कोई भी जगह उपयुक्त नहीं पाई गई। कोर्ट ने मदरसे में नमाज पढ़ने की दी सलाह     रिपोर्ट देखने के बाद अदालत ने कहा कि वह इस मामले में कोई राहत नहीं दे सकती। अदालत ने याचिकाकर्ताओं को सलाह दी कि वे आसपास मौजूद धार्मिक स्थलों का उपयोग करें।     कोर्ट ने बताया कि प्रस्तावित स्थान से करीब एक किलोमीटर के भीतर एक मदरसा मौजूद है, जहां नमाज अदा की जा सकती है। अदालत ने यह भी कहा कि भविष्य में टर्मिनल-1 के पुनर्विकास के दौरान यदि संभव हुआ तो याचिकाकर्ता अपनी मांग एयरपोर्ट प्राधिकरण के सामने रख सकते हैं। सर्वे में नमाज के लिए कोई जगह नहीं मिली कोर्ट ने पुलिस और एयरपोर्ट अधिकारियों से यह जांच करने को कहा था कि क्या याचिकाकर्ताओं को कोई वैकल्पिक जगह दी जा सकती है। गुरुवार को पेश की गई रिपोर्ट में अधिकारियों ने बताया कि सात जगहों का सर्वे किया गया, लेकिन भीड़, सुरक्षा चिंताओं और एयरपोर्ट डेवलपमेंट प्लान के कारण कोई भी जगह उपयुक्त नहीं पाई गई। रिपोर्ट देखने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि एयरपोर्ट के आसपास नमाज पढ़ने के लिए कोई जगह तय करना संभव नहीं है। कोर्ट ने कहा- धर्म हो या कुछ और सुरक्षा सबसे पहले आती है। इस एयरपोर्ट से हर धर्म के लोग यात्रा करते हैं, इसलिए सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता। कोर्ट बोला- आप नमाज की जगह तय नहीं कर सकते कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता खुद यह तय नहीं कर सकते कि वे किस जगह नमाज पढ़ेंगे। बेंच ने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि कोई किसी सार्वजनिक स्थान के बीच में नमाज पढ़ने की मांग करे तो इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से कहा कि वे किसी दूसरी जगह की तलाश करें। कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि संबंधित इलाके से करीब एक किलोमीटर की दूरी पर एक मदरसा मौजूद है, जहां नमाज पढ़ी जा सकती है।  

धान खरीद में छत्तीसगढ़ का डेटा-संचालित एआई मॉडल, तकनीकी नवाचार से बनी नई मिसाल

रायपुर  छत्तीसगढ़ में धान खरीद व्यवस्था को पारदर्शी, जवाबदेह और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी विपणन संघ (मार्कफेड) द्वारा अपनाई गई आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित निगरानी प्रणाली ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि तकनीक का सही दिशा में उपयोग किया जाए, तो न केवल प्रशासनिक प्रक्रियाएं सुदृढ़ होती हैं, बल्कि सरकारी खजाने को भी बड़े पैमाने पर होने वाले नुकसान से बचाया जा सकता है। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के विजन और मार्कफेड के चेयरमैन जितेंद्र कुमार शुक्ल (IAS) के नेतृत्व में इस तकनीकी पहल के माध्यम से राज्य ने बिना किसी न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में कटौती किए, सिस्टम की कमियों को दूर कर लगभग ₹2,780 करोड़ की प्रत्यक्ष बचत सुनिश्चित की है। वित्तीय वर्ष 2025–26 की धान खरीद प्रक्रिया के समापन के बाद आए आंकड़े चौंकाने वाले और सुखद हैं। इस अवधि के दौरान राज्य में कुल 141.04 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की गई, जिस पर सरकार का कुल व्यय ₹43,720 करोड़ रहा। इसके विपरीत, यदि पिछले वित्तीय वर्ष 2024–25 के आंकड़ों पर नज़र डालें, तो 149.24 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद पर लगभग ₹46,500 करोड़ खर्च हुए थे। आंकड़ों का तुलनात्मक अध्ययन करने पर पता चलता है कि इस बार खरीद की मात्रा में करीब आठ लाख मीट्रिक टन की कमी आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कमी उत्पादन घटने के कारण नहीं, बल्कि गैर-प्रामाणिक प्रविष्टियों, फर्जी पंजीकरण और अन्य सीमावर्ती राज्यों से लाये जाने वाले धान की अवैध रूप से ख़रीदारी पर कड़ाई से लगाए गए नियंत्रण का प्रत्यक्ष परिणाम है। चुनौतियां और तकनीकी समाधान: विगत वर्षों में धान खरीदी के दौरान फर्जी किसान पंजीकरण, रिकॉर्ड में हेराफेरी और भंडारण केंद्रों से धान की चोरी जैसी गंभीर चुनौतियां सामने आती रही थीं। विशेषज्ञों के विश्लेषण के अनुसार, इस विशाल प्रक्रिया में यदि मात्र एक प्रतिशत की भी लीकेज या गड़बड़ी होती है, तो सरकारी खजाने को सालाना कई सौ करोड़ की चपत लगती है। इन्हीं गंभीर चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए मार्कफेड ने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम ‘आईटीआई लिमिटेड’ के साथ हाथ मिलाया। आईटीआई लिमिटेड ने इस परियोजना के लिए आवश्यक नेटवर्क प्रबंधन, अत्याधुनिक उपकरणों की स्थापना और निरंतर तकनीकी सहायता प्रदान कर इस मॉडल को धरातल पर उतारा। ये कैमरे संदिग्ध गतिविधियों को स्वतः पहचानने में सक्षम हैं। रायपुर में एक केंद्रीय नियंत्रण कक्ष के रूप में इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) स्थापित किया गया है, जहां लाइव फीड के जरिए पूरे प्रदेश की गतिविधियों पर नजर रखी जाती है। किसी भी प्रकार की अनियमितता सामने आने पर यहीं से तत्काल आवश्यक निर्देश जारी किए जाते हैं। मार्कफेड के प्रबंध निदेशक जितेंद्र कुमार शुक्ल ने इस उपलब्धि पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि, “इस प्रणाली ने न केवल वित्तीय अनुशासन को मजबूत किया है, बल्कि वास्तविक किसानों के हक को भी सुरक्षित किया है। अब बिचौलियों के लिए व्यवस्था में सेंध लगाना लगभग मुश्किल हो गया है।” महज़ ₹48.92 करोड़ की कुल लागत से तैयार इस परियोजना ने निवेश के अनुपात में कई गुना अधिक प्रतिफल (Return on Investment) सुनिश्चित किया है। आईटीआई लिमिटेड के अनुसार, “यह परियोजना ‘मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस (Minimum government, maximum governance)’ का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। आज छत्तीसगढ़ का यह डेटा-संचालित मॉडल न केवल देश के अन्य राज्यों के लिए एक अनुकरणीय मानक बन गया है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि डिजिटल क्रांति कैसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदल सकती है।” छत्तीसगढ़ का यह मॉडल यह स्पष्ट करता है कि पारदर्शी सुशासन के लिए तकनीक का अपनाना अनिवार्य है। ₹2,780 करोड़ की यह बचत न केवल वित्तीय सफलता है, बल्कि यह उन हजारों किसानों की जीत है जिन्हें अब बिना किसी बिचौलिए या परेशानी के उनकी फसल का सही दाम मिल रहा है। यह सफलता ‘डिजिटल इंडिया’ के सपने को ग्रामीण स्तर पर हकीकत में बदल रही है।

चारधाम यात्रा के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन आज से शुरू, पंजीकरण कैसे करें जानें

नई दिल्ली चारधाम यात्रा 2026 के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन आज सुबह 7 बजे से शुरू हो गया है, जबकि 17 अप्रैल से ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन शुरू होगा. उत्तराखंड सरकार ने यात्रा से पहले रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया है. ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन उत्तराखंड सरकार की वेबसाइट registrationandtouristcare.uk.gov.in और मोबाइल ऐप टूरिस्ट केयर उत्तराखंड से कर सकते हैं. 19 अप्रैल को खुलेंगे कपाट उत्तराखंड सरकार की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, 19 अप्रैल को यमुनोत्री और गंगोत्री के कपाट खुलेंगे. 22 अप्रैल को केदारनाथ और 23 अप्रैल को बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलेंगे. श्रीहेमकुण्ड साहिब की आधिकारिक घोषणा बाद में की जाएगी. आधार कार्ड के माध्यम से पंजीकरण उत्तराखंड सरकार की ओर से बताया गया है कि चारधाम यात्रा 2026 में आने के लिए भारतीय श्रद्धालु अपना पंजीकरण आधार कार्ड के माध्यम से कर सकेंगे, जबकि विदेशी श्रद्धालुओं के लिए ई-मेल आईडी की सुविधा उपलब्ध कराई गई है. आधार कार्ड नहीं है तो ऐसे होगा रजिस्ट्रेशन जिन श्रद्धालुओं के पास आधार कार्ड उपलब्ध नहीं है, उनके लिए पिछले वर्ष की भांति इस वर्ष भी पंजीकरण काउंटरों की व्यवस्था की गई है. इन काउंटरों पर रजिस्ट्रेशन कपाट खुलने से दो दिन पूर्व, 17 अप्रैल 2026 से प्रारम्भ की जाएगी. पंजीकरण केन्द्र एवं ट्रांजिट कैंप ऋषिकेश, पंजीकरण केन्द्र ऋषिकुल ग्राउंड हरिद्वार और पंजीकरण केंद्र विकास नगर देहरादून में खुलेंगे. टोल फ्री नंबर पर मिलेगी जानकारी श्रद्धालु किसी भी प्रकार की जानकारी या असुविधा होने पर टोल फ्री नंबर 0135-1364 पर कॉल कर जानकारी प्राप्त कर सकते हैं. उत्तराखंड सरकार ने चारधाम यात्रा में आने वाले सभी श्रद्धालुओं से अनुरोध किया है कि यात्रा को सुगम एवं व्यवस्थित बनाने के लिए यात्रा से पूर्व अपना पंजीकरण अनिवार्य रूप से करवा लें. चार धाम यात्रा का महत्व धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यमुनोत्री से यात्रा शुरू करने पर चारधाम यात्रा में किसी भी प्रकार की रुकावट भक्तों को नहीं आती है.     यमुनोत्री, यमुना नदी का उद्गम स्थल है. यमुना जी यमराज की बहन हैं और उन्हें वरदान प्राप्त है कि वह अपने जल के माध्यम से सभी का दुख दूर करेंगी.     मान्यता है कि जो श्रद्धालु यमुनोत्री में स्नान करता है, उसे मृत्यु के भय से मुक्ति मिल जाती है. हर साल की तरह इस बार भी बाबा केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के दर्शन के लिए लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है.  

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