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डिजिटल भविष्य की ओर कदम: भारत-फिनलैंड के बीच एआई, 6जी और क्वांटम कंप्यूटिंग में सहयोग पर सहमति, बोले पीएम मोदी

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कहा कि भारत और फिनलैंड डिजिटाइजेशन और स्थिरता में रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने पर काम कर रहे हैं, इससे दोनों देशों के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, 6जी, क्लीन एनर्जी और क्वांटम कंप्यूटिंग में सहयोग बढ़ेगा। फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब के साथ द्विपक्षीय बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने दोनों देश के बीच हाई-टेक सेक्टर्स में बढ़ रहे सहयोग का जिक्र किया और कहा कि इससे दोनों देशों के संबंधों को नई ऊर्जा मिली है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस साल की शुरुआत में भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच हुए ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) से भारत एंव फिनलैंड के बीच व्यापार निवेश और टेक्नोलॉजी में साझेदारी बढ़ेगी। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “फिनलैंड के राष्ट्रपति के रूप में अपनी पहली भारत यात्रा पर आए राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब का स्वागत करता हूं। आप जैसे अनुभवी नेता का इस वर्ष के रायसीना डायलॉग का मुख्य अतिथि बनना सम्मान और खुशी की बात है। यूक्रेन से लेकर वेस्ट एशिया तक दुनिया के कई हिस्सों में संघर्ष की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में भारत और यूरोप अपने संबंधों के सुनहरे दौर में प्रवेश कर रहे हैं।” दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बीच द्विपक्षीय बैठक हैदराबाद हाउस में हुई, जहां भारत एवं फिनलैंड के बीच द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने के लिए विभिन्न मुद्दों पर बातचीत हुई। विदेश मंत्रालय के अनुसार, वार्ता में द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने और रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने के उद्देश्य से कई मुद्दों पर चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर भी विचार-विमर्श किया और बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की। प्रधानमंत्री मोदी ने वार्ता के बाद राष्ट्रपति स्टब के सम्मान में लंच का आयोजन भी किया। इससे पहले, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने फिनलैंड के राष्ट्रपति से मुलाकात की और प्रधानमंत्री के साथ उच्च स्तरीय बैठक से पहले द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा की।विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि वे रायसीना डायलॉग में राष्ट्रपति स्टब के संबोधन का भी बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, जहां अतिथि नेता मुख्य भाषण देने वाले हैं।

डिजिटल इंडिया की ओर बड़ा कदम: Amit Shah ने पेश किए नए प्लेटफॉर्म, 2027 में पहली बार डिजिटल जनगणना

नई दिल्ली केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को नई दिल्ली में जनगणना-2027 के लिए विकसित डिजिटल टूल्स का सॉफ्ट लॉन्च किया। इस दौरान उन्होंने जनगणना के आधिकारिक शुभंकर “प्रगति” (महिला) और “विकास” (पुरुष) का भी औपचारिक अनावरण किया। सरकार की ओर से 16 जून 2025 को राजपत्र अधिसूचना जारी किए जाने के साथ ही भारत की जनगणना 2027 की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हो चुकी है। दो चरणों में होने वाली यह जनगणना दुनिया का सबसे बड़ा जनगणना अभियान मानी जा रही है। इस बार पहली बार पूरी जनगणना डिजिटल माध्यम से की जाएगी और नागरिकों को स्व-गणना का विकल्प भी दिया जाएगा। स्व-गणना के लिए एक सुरक्षित वेब-आधारित पोर्टल तैयार किया गया है, जिसके माध्यम से उत्तरदाता घर-घर सर्वेक्षण से पहले अपनी जानकारी 16 भाषाओं में ऑनलाइन दर्ज कर सकेंगे। सफल पंजीकरण के बाद उन्हें एक विशिष्ट स्व-गणना आईडी मिलेगी, जिसे प्रगणक के साथ साझा करने पर दर्ज जानकारी की पुष्टि की जा सकेगी। इस अवसर पर चार प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म भी लॉन्च किए गए, जिन्हें सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (सी-डैक) ने विकसित किया है। इनमें हाउस लिस्टिंग ब्लॉक क्रिएटर (एनएलबीसी) वेब एप्लिकेशन, एचएलओ मोबाइल एप्लिकेशन, स्व-गणना पोर्टल और जनगणना प्रबंधन एवं निगरानी प्रणाली पोर्टल शामिल हैं। ये प्लेटफॉर्म जनगणना कार्यों की योजना, डेटा संग्रह और निगरानी को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाएंगे। जनगणना-2027 के शुभंकर “प्रगति” और “विकास” को मित्रवत और सहज प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया है। ये दोनों पात्र वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में महिलाओं और पुरुषों की समान भागीदारी का संदेश भी देते हैं। इन शुभंकरों के माध्यम से जनगणना से जुड़ी जानकारी समाज के विभिन्न वर्गों तक सरल तरीके से पहुंचाई जाएगी। जनगणना-2027 का पहला चरण अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच गृह-सूचीकरण और आवास संबंधी जानकारी एकत्र करने के लिए चलाया जाएगा। दूसरा चरण फरवरी 2027 में देशभर में जनसंख्या गणना के रूप में आयोजित होगा, जिसमें प्रत्येक व्यक्ति के सामाजिक, आर्थिक और जनसांख्यिकीय विवरण दर्ज किए जाएंगे। पूरे अभियान में देशभर के लगभग 30 लाख प्रगणक, पर्यवेक्षक और अन्य अधिकारी शामिल होंगे, जो सुरक्षित मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से घर-घर जाकर डेटा एकत्र करेंगे। सरकार का उद्देश्य तकनीक के उपयोग से इस विशाल जनगणना को अधिक सटीक, सुरक्षित और व्यापक बनाना है। इस अवसर पर केन्द्रीय गृह सचिव, भारत के महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

शुजालपुर नगर पालिक के नए भवन के लिए 3 करोड़ रूपए और अन्य विकास कार्यों के लिए 2 करोड़ रूपए स्वीकृत

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि नगरपालिका परिषद का शताब्दी वर्ष शुजालपुर के हर नागरिक के सम्मान का उत्सव है। यह हमारी विरासत, उपलब्धियों और सामूहिक संकल्प का पर्व है। जटाशंकर महादेव की असीम कृपा से शुजालपुर नगरपालिका ने जन सेवा और लोक कल्याण के 100 वर्ष पूर्ण किए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शुजालपुर नगरपालिका के नए भवन के लिए 3 करोड़ रुपए और नगरपालिका क्षेत्र में सड़कों सहित अन्य विकास कार्य के लिए दो करोड़ रुपए नगरपालिका परिषद शुजालपुर को उपलब्ध कराने की घोषणा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरूवार को शुजालपुर नगरपालिका परिषद के 100 वर्ष पूर्ण होने पर शुजालपुर में आयोजित शताब्दी वर्ष समारोह को मंत्रालय भोपाल से वर्चुअली संबोधित कर रहे थे। शुजालपुर में हुए कार्यक्रम में उच्च शिक्षा मंत्री श्री इंदर सिंह सिंह परमार, नगरपालिका अध्यक्ष श्रीमती बबीता परमार उपस्थित रही। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शुजालपुर में स्वच्छता से संबंधित गतिविधियों में निरंतर प्रगति हो रही है। नगर को राष्ट्रीय रैंकिंग में और बेहतर स्थान पर लाने के लिए आगामी वर्षों में अतिरिक्त प्रयास किए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि गत 2 वर्षों में शुजालपुर में ऑडिटोरियम और सीसी रोड के लिए 5 करोड़ रुपए, कायाकल्प योजना के अंतर्गत सड़क निर्माण के लिए 6 करोड़ 60 लाख रुपए, अमृत 2 के अंतर्गत जलप्रदाय के लिए 12 करोड़ रुपए की राशि उपलब्ध कराई गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शुजालपुर वीरों की भूमि रही है। जब पेशवा बाजीराव प्रथम ने मालवा में विजय का परचम लहराया तब शुजालपुर उनकी रणनीतिक प्राथमिकता में था। इस पावन धरा पर पेशवाओं की सेना का नेतृत्व करते हुए राणो जी शिंदे ने मातृभूमि के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया। उनकी स्मृति में बना भव्य शिव मंदिर और ऐतिहासिक छतरी आज भी हमें शौर्य की प्रेरणा देते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शौर्य और संकल्प की नींव पर आज से ठीक 100 वर्ष पहले 1926 में नगरपालिका परिषद का गठन शुजालपुर में हुआ था। एक उज्जवल भविष्य का संकल्प आज वट वृक्ष बन चुका है। वर्तमान में शुजालपुर विकास का मॉडल बन रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राज्य में जारी गतिविधियों के परिणाम स्वरूप शुजालपुर क्षेत्र में सड़कों, स्वास्थ्य, शिक्षा सुविधाओं, व्यापार-व्यवसाय गतिविधियों आदि में निरंतर प्रगति हो रही है। परिषद के माध्यम से राज्य सरकार हर घर तक सड़क-बिजली और पानी पहुंचाने के संकल्प को सिद्ध कर रही है। शहर की पेयजल समस्या का समाधान काफी हद तक करने का प्रयास किया गया है। नगर में 21 करोड़ 55 लाख रुपए की लागत से जमघड़ नदी को साफ रखने की तैयारी है। यह पहल आने वाली पीढ़ियों के लिए एक उपहार के समान होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शुजालपुर को विकास के शिखर पर ले जाने के लिए जन भागीदारी को प्रोत्साहित करने का आहवान किया। उच्च शिक्षा मंत्री श्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में गत 2 वर्षों में विकास और जनकल्याण की दृष्टि से क्षेत्र का कायाकल्प हुआ है। मंत्री श्री परमार ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव से नए और बड़े बस स्टैंड के लिए भूमि आवंटित करने का अनुरोध किया। कार्यक्रम को नगरपालिका अध्यक्ष श्रीमती बबीता परमार ने भी संबोधित किया। शुजालपुर के कार्यक्रम में पूर्व मंत्री श्री विजेंद्र सिंह सिसोदिया, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री हेमराज सिंह सिसोदिया, जनप्रतिनिधि, समाजसेवी और बड़ी संख्या में स्थानीय जन उपस्थित थे।  

रिफॉर्म्स का रिजल्ट! मोदी सरकार के दौर में नए उद्योगों की संख्या 27% बढ़ी

नई दिल्ली मोदी सरकार की ओर से लगातार किए जा रहे आर्थिक सुधारों का असर जमीनी स्तर पर दिखने लगा रहा है। देश में नए बिजनेस की संख्या में 27 प्रतिशत का बड़ा इजाफा देखने को मिला है। सरकार द्वारा गुरुवार को जारी फैक्टशीट के मुताबिक, भारत में चालू वित्त वर्ष (वित्त वर्ष 2025-26) के पहले 10 महीनों (3 फरवरी 2026 तक) में 1.98 लाख नए बिजनेस पंजीकृत हुए हैं, जिनकी संख्या 2020-21 में 1.55 लाख थी। आधिकारिक बयान में कहा गया कि सरकार ने केंद्रीय बजट 2026-27 में डिजिटल ट्रेड सुविधा,कर निश्चितता, अनुपालन और मुकदमेबाजी में कमी, विश्वास आधारित सीमा शुल्क प्रणाली और निवेश-अनुकूल कर व्यवस्था के जरिए व्यापार में आसानी बढ़ाने पर फोकस किया है। बयान में आगे कहा गया कि स्टार्ट-अप इंडिया, क्रेडिट गारंटी योजना, डिजिटल क्रेडिट मूल्यांकन मॉडल आदि जैसे संस्थागत सुधार एक पारदर्शी, प्रौद्योगिकी-सक्षम और निवेशक-अनुकूल वातावरण का निर्माण कर रहे हैं। इस प्रयास को जन विश्वास अधिनियम, आईबीसी, एमएटी आदि जैसे समानांतर नियामक सुधारों का समर्थन प्राप्त है, जो क्षमता निर्माण, नियामक सामंजस्य और विश्वास एवं जवाबदेही पर आधारित शासन मॉडल को प्राथमिकता दे रहे हैं। फरवरी 2026 तक 2.16 लाख से अधिक डीपीआईआईटी-मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स के साथ, भारत विश्व के सबसे बड़े स्टार्टअप इकोसिस्टम में से एक के रूप में मजबूती से खड़ा है। 2016 से शुरू किए गए स्टार्टअप्स के लिए नियामक सुधारों का उद्देश्य स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए व्यापार करने में आसानी, पूंजी जुटाने में आसानी और अनुपालन बोझ को कम करना है। स्टार्टअप इंडिया के अलावा, मोदी सरकार की कई पहलों ने तकनीकी नवाचार, ग्रामीण उद्यमिता, अकादमिक अनुसंधान और क्षेत्रीय समावेशन को बढ़ावा देकर भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम को और मजबूत किया है। ये पहलें सुनिश्चित करती हैं कि स्टार्टअप समर्थन व्यापक, विकेंद्रीकृत और राष्ट्रीय विकास प्राथमिकताओं के साथ निकटता से जुड़ा रहे। पिछले कुछ वर्षों में, भारत न केवल निवेश के लिए बल्कि कारोबार करने के लिए भी सबसे आकर्षक गंतव्यों में से एक बनकर उभरा है। देश की सुधार-आधारित विकास रणनीति उद्यमिता को मजबूत करने, वित्त तक पहुंच बढ़ाने, नियामक ढांचे का आधुनिकीकरण करने और व्यापार सुविधा को बढ़ाने पर केंद्रित है। बयान में आगे कहा गया है कि ये सभी उपाय न केवल कारोबार करने में आसानी बढ़ाते हैं बल्कि वित्तीय समावेशन को भी गहरा करते हैं, नवाचार को बढ़ावा देते हैं, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के विकास में तेजी लाते हैं और भारत को एक प्रतिस्पर्धी वैश्विक व्यापार और निवेश केंद्र के रूप में स्थापित करते हैं।

महिला सशक्तिकरण को समर्पित आयोजन, ‘अधिकार, न्याय और कार्यवाही’ बनेगी महिला दिवस की थीम

भोपाल मध्य प्रदेश में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की तैयारी शुरू हो गई है और इस बार अधिकार, न्याय और कार्यवाही महिलाओं और बालिकाओं के लिए इस थीम पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। आधिकारिक तौर पर दी गई जानकारी के अनुसार 8 मार्च अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर महिलाओं और बालिकाओं के अधिकारों, सुरक्षा और न्याय तक उनकी सुलभ पहुंच को सुगम बनाने के लिए ‘अधिकार, न्याय, कार्यवाही– महिलाओं और बालिकाओं के लिए’ थीम पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन स्वर्ण जयंती सभागार में किया जाएगा। कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं और बालिकाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना, न्याय प्राप्ति की प्रक्रिया को सरल और सुलभ बनाना तथा समाज में सुरक्षा और सम्मान का वातावरण मजबूत करना है। कार्यक्रम में विभिन्न विषयों पर संवाद और जागरूकता सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें घरेलू हिंसा कानून की जानकारी, न्याय चौपाल के माध्यम से कानूनी सहायता के मॉडल, मानसिक स्वास्थ्य और सायबर सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल रहेंगे। इस विशेष आयोजन में सामाजिक संस्थाओं द्वारा अपने अनुभव और सफल पहल साझा की जाएंगी, ताकि महिलाओं के अधिकारों की रक्षा और उनके सशक्तिकरण के लिए प्रभावी मॉडल सामने आ सकें। साथ ही घरेलू कामकाजी महिलाओं द्वारा पॉवर वॉक के माध्यम से आत्मविश्वास, स्वाभिमान और महिला शक्ति का संदेश दिया जाएगा। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के इस कार्यक्रम में सचिव राज्य महिला आयोग के सुरेश तोमर, सामुदायिक पुलिसिंग के डीआईजी विनीत कपूर, महिला सुरक्षा शाखा के स्पेशल डीजी अनिल कुमार, सेवानिवृत्त एडीजी प्रशिक्षण अनुराधा शंकर महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण के विभिन्न आयामों पर अपने विचार साझा करेंगी। इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाली महिलाओं को सम्मानित भी किया जाएगा। साथ ही सायबर वेलबीइंग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राज्य महिला आयोग और अहान फाउंडेशन के बीच एमओयू भी होगा।

ईरान वॉर के बीच भारत को रूस का सहारा, पुतिन ने 95 लाख बैरल तेल सप्लाई का दिया ऑफर

 नई दिल्‍ली मिडिल में तनाव बढ़ने के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से कच्‍चे तेल आने का रास्‍ता बंद हो चुका है, जो वैश्विक ऊर्जा व्यापार के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग है. ऐसे में रूस कच्चे तेल की खेप को भारत की ओर मोड़ने के लिए तैयार है।  रॉयटर्स की रिपोर्ट का दावा है कि इस समय भारतीय जलक्षेत्र के पास जहाजों पर लगभग 95 लाख बैरल रूसी कच्चा तेल मौजूद है और इसे कुछ ही हफ्तों में भारत पहुंचाया जा सकता है.  गौरतलब है कि यह खबर तब सामने आई है, जब मिडिल ईस्‍ट से तेल आयात करने का रास्‍ता बंद है, जहां से भारत करीब 50 फीसदी तेल आयात करता था. यह भारत के लिए एक बड़ी राहत है।  रिपोर्ट का कहना है कि आपूर्ति में रुकावट बढ़ने के बीच भारतीय रिफाइनर्स के लिए यह एक बड़ी राहत है. हालांकि सूत्र ने यह स्‍पष्‍ट नहीं किया है कि जहाजों पर रखा माल कहां जा रहा था, लेकिन यह जरूर बताया कि गैर-रूसी बेड़े के जहाजों द्वारा ले जाए गए माल को जरूरत पड़ने पर जल्दी से भारत की ओर मोड़ा जा सकता है।  ऑप्‍शन की तलाश में भारत  भारत के पास अभी सीमित तेल भंडार पड़ा हुआ है, जिस कारण वह किसी विकल्‍प की तलाश में है, जहां से उसे तेल की सप्‍लाई होती रहे. रिपोर्ट का कहना है कि भारत के पास कच्चे तेल का भंडार लगभग 25 दिनों की मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त है, जबकि डीजल, पेट्रोल और पेट्रोलियम गैस जैसे रिफाइन उत्पादों का भंडार भी कम है।  रॉयटर्स ने कहा कि भारत के सरकारी सूत्र ने बताया कि नई दिल्ली ने वैकल्पिक आपूर्ति विकल्पों की खोज शुरू कर दी है क्योंकि मध्य पूर्व संघर्ष अगले 10-15 दिनों तक जारी रह सकता है, जिससे शिपमेंट प्रभावित हो सकते हैं. भारत के लिए कच्‍चे तेल का रिस्‍क होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास अस्थिरता पैदा होने के कारण आया है।  रूस ने तेल भेजने को दिखाई तत्परता  भारत की रिफाइनरियां हर दिन लगभग 5.6 मिलियन बैरल तेल को रिफाइन करती हैं, जिसका अर्थ है कि शिपिंग मार्गों में किसी भी प्रकार की लंबी रुकावट से आपूर्ति में तेजी से कमी आ सकती है. उद्योग जगत के सूत्रों का कहना है कि अगर मध्य पूर्वी देशों से कच्चे तेल की आपूर्ति में कमी आती है तो मॉस्को इस अंतर को पाटने में मदद करने के लिए तैयार है, और संभावित रूप से भारत की कच्चे तेल की जरूरतों का 40% तक पूरा कर सकता है। 

एमपी के सरकारी कर्मचारियों के लिए चिंता की खबर, वेतन कटौती मामले में मोहन सरकार SC जाएगी, 400 करोड़ भुगतान अटका

भोपाल  मध्यप्रदेश के सरकारी कर्मचारियों से जुड़ा प्रोबेशन पीरियड वेतन कटौती मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। जबलपुर स्थित मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने फरवरी 2026 में बड़ा फैसला सुनाते हुए तत्कालीन कमलनाथ सरकार के 12 दिसंबर 2019 के उस आदेश को निरस्त कर दिया था, जिसमें नए नियुक्त कर्मचारियों को परिवीक्षा अवधि के दौरान पूरा वेतन देने के बजाय 70%, 80% और 90% वेतन देने का प्रावधान किया गया था। अदालत ने इसे भेदभावपूर्ण और अवैध करार देते हुए स्पष्ट कहा था कि प्रभावित कर्मचारियों को काटी गई राशि एरियर सहित लौटाई जाए। इस निर्णय से करीब 1 लाख कर्मचारियों में उम्मीद जगी थी कि उन्हें लगभग 400 करोड़ रुपये का बकाया भुगतान मिल सकेगा। अब सर्वोच्च अदालत की शरण में जाने की तैयारी हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद मामला थमता नजर आ रहा था, लेकिन अब मोहन सरकार ने इसे चुनौती देने की तैयारी कर ली है। सूत्रों के अनुसार राज्य सरकार इस फैसले के खिलाफ देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर करने की योजना बना रही है। यदि सरकार सुप्रीम कोर्ट जाती है तो एरियर भुगतान पर फिलहाल रोक लग सकती है, जिससे कर्मचारियों की आर्थिक उम्मीदों को बड़ा झटका लगेगा। इस कदम को लेकर कर्मचारी संगठनों में नाराजगी देखी जा रही है। वेतन कटौती केस, SC जाएगी सरकार मध्यप्रदेश में सरकारी कर्मचारियों के प्रोबेशन पीरियड (परिवीक्षा अवधि) के दौरान वेतन कटौती का मामला अब देश की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट तक पहुँचने वाला है। जबलपुर हाईकोर्ट ने फरवरी 2026 में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए तत्कालीन कमलनाथ सरकार के 12 दिसंबर 2019 के उस आदेश को रद्द कर दिया था, जिसमें नए कर्मचारियों को प्रोबेशन पीरियड के दौरान शत-प्रतिशत वेतन न देकर 70%, 80% और 90% वेतन देने का प्रावधान था। हाईकोर्ट ने सरकार को आदेश दिया था कि प्रभावित कर्मचारियों को काटा गया वेतन एरियर्स समेत लौटाया जाए। हालांकि, अब मोहन सरकार इस फैसले को मानने के बजाय इसे चुनौती देने का मन बना चुकी है। एमपी हाईकोर्ट ने सुनाया फैसला  बीजेपी ने कमलनाथ सरकार की तरफ से लागू किए गए इस नियम को बदलने का वादा किया था. लेकिन, एमपी सरकार की तरफ से अब तक यह नियम नहीं बदला गया है. ऐसे में कर्मचारी संगठनों ने एमपी का हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और प्रोबेशन पीरियड 2 साल ही करने और पूरी सैलरी देने को लेकर याचिका लगाई. जहां एमपी हाईकोर्ट ने मामले में बड़ा फैसला सुनाया. जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस दीपक खोत की डिवीजन बेंच ने मामले में कहा कि सरकार का यह फैसला पूरी तरह से न केवल भेदभावपूर्ण है. बल्कि कर्मचारियों को वेतन कम देना भी नियम नहीं है. क्योंकि जब कर्मचारियों से काम पूरा लिया जा रहा है तो फिर उन्हें वेतन भी पूरा देना चाहिए. हाईकोर्ट ने इसे समानता के अधिकार का खुला उल्लंघन मानते हुए कर्मचारियों को सामान वेतन और एरियर देना का फैसला सुनाया.  सु्प्रीम कोर्ट जाएगी एमपी सरकार  अब इस मामले में एमपी सरकार सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में है. क्योंकि एमपी हाईकोर्ट ने एमपीपीएससी का हवाला दिया था. जिसमें कहा गया था कि एमपीपीएससी के तहत होने वाली नियुक्तियों में दो साल का प्रोबेशन पीरियड और सैलरी भी पूरी दी जाती है. तो फिर कर्मचारी चयन मंडल में यह अंतर क्यों हो रहा है. अब सरकार का कहना है कि एमपीपीएससी और कर्मचारी चयन मंडल की भर्ती प्रक्रियाओं में अंतर है. एमपीपीएससी में प्रारंभिक, मुख्य और साक्षात्कार होता है, जबकि कर्मचारी चयन मंडल में केवल एक परीक्षा होती है. ऐसे में दोनों की चयन प्रक्रिया अलग है.  400 करोड़ मामला अगर राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट जाती है तो इस अवधि में चयनित 1 लाख सरकारी कर्मचारियों को हाईकोर्ट के फैसले के मुताबिक एरियर के जो 400 करोड़ रुपए मिलने थे. वह फिलहाल अटक सकते हैं. क्योंकि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की तरफ से जो फैसला आएगा यह एरियर उस फैसले पर मायने रखेगा.   सरकार के वादे और कर्मचारियों का संघर्ष साल 2019 में कमलनाथ सरकार ने प्रोबेशन पीरियड को 2 साल से बढ़ाकर 4 साल कर दिया था और वेतन में कटौती लागू की थी। 2020 में सत्ता परिवर्तन के बाद शिवराज सिंह चौहान ने कई बार सार्वजनिक मंचों से इस नियम को खत्म करने का वादा किया था, लेकिन यह कभी लागू नहीं हो सका। शिवराज सरकार ने ध्यान नहीं दिया तो थक-हारकर कर्मचारियों ने न्याय के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। 2019 का आदेश और बढ़ी परिवीक्षा अवधि का प्रभाव विवाद की जड़ 2019 का वह शासनादेश है, जब तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ के नेतृत्व में सरकार ने प्रोबेशन अवधि 2 वर्ष से बढ़ाकर 4 वर्ष कर दी थी। साथ ही इस अवधि में पूर्ण वेतन के स्थान पर चरणबद्ध वेतन देने का नियम लागू किया गया था। नए कर्मचारियों को पहले वर्ष 70%, दूसरे वर्ष 80% और तीसरे वर्ष 90% वेतन दिया जाता था। चौथे वर्ष के बाद ही उन्हें नियमित वेतनमान का लाभ मिलता था। इस नीति का तर्क वित्तीय भार कम करना बताया गया था, लेकिन कर्मचारियों ने इसे अन्यायपूर्ण माना। सत्ता परिवर्तन के बाद अधूरे रहे वादे 2020 में सत्ता परिवर्तन के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कई मंचों से इस वेतन कटौती नियम को समाप्त करने का आश्वासन दिया था। कर्मचारियों को उम्मीद थी कि नई सरकार इस प्रावधान को खत्म कर देगी, लेकिन व्यवहार में कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। लंबे इंतजार और अनदेखी के बाद कर्मचारी संगठनों ने न्यायिक हस्तक्षेप का रास्ता चुना और हाईकोर्ट में याचिका दायर की। 1 लाख कर्मचारियों की उम्मीदों पर असमंजस हाईकोर्ट के फैसले के बाद कर्मचारियों को राहत की उम्मीद बंधी थी। अनुमान है कि लगभग 1 लाख कर्मचारियों को मिलाकर करीब 400 करोड़ रुपये का एरियर बनता है। यदि सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित रहता है तो भुगतान प्रक्रिया अनिश्चित काल तक टल सकती है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि यह केवल वेतन का मामला नहीं, बल्कि सम्मान और समानता का प्रश्न भी है। आगे क्या? कानूनी और राजनीतिक दोनों दांव अब यह मामला कानूनी लड़ाई के अगले चरण में प्रवेश कर सकता है। यदि सुप्रीम कोर्ट हाईकोर्ट के आदेश पर स्थगन देता है … Read more

केंद्रीय कर्मचारियों के लिए खुशखबरी, महंगाई भत्ते में 4% का बढ़ा भुगतान

नई दिल्ली  बढ़ती महंगाई के बीच केंद्र सरकार ने आखिरकार केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को बड़ी राहत दे दी है। सरकार ने महंगाई भत्ता यानी DA और महंगाई राहत यानी DR में 4% की बढ़ोतरी का ऐलान किया है। इस फैसले से करीब 49 लाख केंद्रीय कर्मचारी और लगभग 65 लाख पेंशनभोगियों को सीधा फायदा मिलेगा। ऐसे समय में जब रोजमर्रा की चीजों के दाम लगातार बढ़ रहे हैं, यह बढ़ोतरी लाखों परिवारों के लिए राहत भरी खबर है। सरकार ने यह फैसला उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी CPI-IW के ताजा आंकड़ों के आधार पर लिया है। महंगाई के कारण कर्मचारियों की जेब पर जो असर पड़ रहा था, उसे संतुलित करने के लिए यह कदम उठाया गया है। आसान शब्दों में कहें तो यह बढ़ोतरी कर्मचारियों की क्रय शक्ति को बनाए रखने में मदद करेगी। DA और DR का महत्व: आपकी सैलरी पर सीधा असर महंगाई भत्ता सरकारी कर्मचारियों के बेसिक वेतन का एक तय प्रतिशत होता है। वहीं पेंशनभोगियों को इसी तरह की सहायता महंगाई राहत (DR) के रूप में दी जाती है। जब महंगाई बढ़ती है तो सरकार समय-समय पर DA और DR में संशोधन करती है, ताकि कर्मचारियों और पेंशनर्स की आय का वास्तविक मूल्य बना रहे। मान लीजिए किसी कर्मचारी का बेसिक वेतन 30,000 रुपये है। अगर पहले 50% DA मिल रहा था, तो उसे 15,000 रुपये महंगाई भत्ता मिलता था। अब 4% की बढ़ोतरी के बाद DA 54% हो जाएगा, यानी 16,200 रुपये। इस तरह हर महीने 1,200 रुपये की अतिरिक्त रकम सीधे सैलरी में जुड़ जाएगी। हालांकि यह सिर्फ एक उदाहरण है। असल बढ़ोतरी आपके पे-मैट्रिक्स और बेसिक पे पर निर्भर करेगी। एरियर और भुगतान की तारीख सरकार ने साफ किया है कि यह बढ़ोतरी पिछली तारीख से लागू मानी जाएगी, जो आमतौर पर 1 जनवरी से प्रभावी होती है। इसका मतलब है कि कर्मचारियों को पिछले महीनों का बकाया यानी एरियर भी मिलेगा। यह एरियर एकमुश्त उनके बैंक खाते में जमा किया जाएगा। त्योहारों या घरेलू खर्चों के समय यह अतिरिक्त राशि काफी काम आएगी। पेंशनभोगियों को भी एरियर का लाभ मिलेगा, जिससे उन्हें मेडिकल खर्च और दैनिक जरूरतों को पूरा करने में सहूलियत होगी। आमतौर पर बढ़ोतरी की घोषणा के बाद 1-2 महीनों के भीतर भुगतान की प्रक्रिया पूरी कर दी जाती है। अर्थव्यवस्था और समाज पर असर DA में बढ़ोतरी का असर सिर्फ कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका सकारात्मक प्रभाव पूरे बाजार पर पड़ता है। जब लाखों लोगों की आय बढ़ती है, तो उनकी खर्च करने की क्षमता भी बढ़ती है। इससे बाजार में मांग बढ़ती है और स्थानीय व्यापार को फायदा होता है। पेंशनभोगियों के लिए यह बढ़ोतरी खास मायने रखती है। कई बुजुर्ग पूरी तरह पेंशन पर निर्भर होते हैं। दवाइयों, इलाज और रोजमर्रा के खर्चों के बीच यह अतिरिक्त रकम उन्हें आर्थिक सहारा देती है। इसी वजह से DA और DR में संशोधन को सामाजिक सुरक्षा का अहम हिस्सा माना जाता है। क्या आगे और बढ़ सकता है DA? कर्मचारी संगठनों की मांग है कि भविष्य में DA को और बढ़ाया जाए और 8वें वेतन आयोग के गठन पर भी जल्द फैसला लिया जाए। हालांकि फिलहाल 4% की बढ़ोतरी को तात्कालिक राहत के रूप में देखा जा रहा है। महंगाई के आंकड़ों के आधार पर साल में दो बार DA की समीक्षा की जाती है, इसलिए आगे भी बदलाव संभव है। सरकार का कहना है कि वह आर्थिक संतुलन बनाए रखते हुए कर्मचारियों के हितों का ध्यान रखेगी। फिलहाल यह बढ़ोतरी लाखों परिवारों के लिए बड़ी राहत है और इससे उनकी मासिक आय में साफ फर्क दिखाई देगा। कुल मिलाकर 4% DA बढ़ोतरी का फैसला केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए खुशखबरी लेकर आया है। बढ़ती महंगाई के दौर में यह अतिरिक्त रकम घर के बजट को संभालने में मदद करेगी। एरियर के साथ मिलने वाली राशि त्योहारों और जरूरी खर्चों में सहारा बनेगी। आने वाले समय में अगर महंगाई के आंकड़े इसी तरह बढ़ते रहे, तो DA में और संशोधन की संभावना भी बनी रहेगी। फिलहाल यह घोषणा लाखों परिवारों के चेहरे पर मुस्कान लाने के लिए काफी है।

66 साल के हुए केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, जन्मदिन पर आठ विधानसभाओं में मुफ्त मोबाइल हॉस्पिटल चलाने का संकल्प

विदिशा केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान आज गुरुवार 5 मार्च को 66 साल के हो गए हैं। उनके समर्थक शिवराज के जन्मदिन को प्रेम सेवा संकल्प दिवस के रूप में मना रहे हैं।शिवराज ने अपने 66वें जन्मदिन पर भोपाल के स्मार्ट पार्क में परिवार के साथ पौधारोपण किया। यहां मीडिया से कहा कि वे आज 5 संकल्प ले रहे हैं। ये पर्यावरण, सेवा, सहायता, शिक्षा और प्रतिभा प्रोत्साहन से जुड़े हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिवराज को बधाई देते हुए X पर लिखा- केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान जी को उनके जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं। वे अपने विनम्र स्वभाव और जनता से जुड़ाव के लिए प्रशंसित हैं। वे हमारे किसानों के कल्याण और कृषि क्षेत्र के विकास के लिए अथक परिश्रम कर रहे हैं। हम उनके दीर्घायु और स्वस्थ जीवन की कामना करते हैं। विदिशा में भरवाए मामा कोचिंग के एडमिशन फॉर्म भोपाल में पौधारोपण करने के बाद शिवराज, पत्नी साधना सिंह के साथ विदिशा पहुंचे। रवींद्रनाथ टैगोर संस्कृति भवन में मामा कोचिंग क्लासेस की शुरुआत की। इस कोचिंग में कंपटीटिव एग्जाम की तैयारी कराई जाएगी। बैंकिंग, SSC, MPPSC, DRDO और फॉरेस्ट जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की मुफ्त तैयारी कराई जाएगी। कोचिंग ऑनलाइन भी होगी ताकि जो छात्र सेंटर तक नहीं आ पा रहे हैं, वे अपने घर पर रहकर इसका फायदा ले सकें। विदिशा, रायसेन और भैरूंदा में 100-100 स्टूडेंट्स का पहला बैच जल्द शुरू होगा। इसके लिए आज से ही फार्म भरे जा रहे हैं। इस मौके पर शिवराज बोले- पेड़ जीने और पेट भरने, बच्चों, कीट-पतंगों के लिए जरूरी हैं। स्वागत में माला, गुलदस्ते-गिफ्ट की जगह पौधे शिवराज ने अपने दोनों मंत्रालयों- केंद्रीय कृषि और ग्रामीण विकास मंत्रालय में यह परंपरा शुरू करा दी है कि विभागीय कार्यक्रमों में गुलदस्ते, शॉल और मोमेंटो के बजाय पौधे भेंट करके स्वागत करें। पौधे लगाने वाले लोग क्यूआर कोड के जरिए अपनी फोटो पोर्टल पर अपलोड करके शिव वृक्ष मित्र बन सकेंगे। विदिशा में केंद्रीय मंत्री शिवराज ने अपने समर्थकों और बीजेपी कार्यकर्ताओं से अपील की कि इस बार उनके जन्मदिन पर कोई भी होर्डिंग न लगाया जाए। शॉल, बुके या गिफ्ट न लाया जाए। उन्होंने आग्रह किया कि यदि कोई उन्हें शुभकामना देना चाहता है, तो वह एक पौधा अवश्य लगाए। शिवराज ने कहा- धरती माता को बचाने के इस पुण्य अभियान में मेरा साथ दें। आने वाली पीढ़ी के लिए जीवन सुरक्षित करना ही मेरा सबसे बड़ा उपहार होगा। इन मुद्दों पर ऐसे काम करेंगे शिवराज पर्यावरण संरक्षण- पेड़ केवल लकड़ी का ढांचा नहीं, करोड़ों जीवों का घर और हमारी ऑक्सीजन की फैक्ट्री हैं। धरती का तापमान कम करना है, तो हर हाल में पेड़ लगाना है। मामा कोचिंग क्लासेस- पैसे की कमी किसी बच्चे के भविष्य की बाधा नहीं बनेगी। विदिशा, रायसेन और भैरुंदा में हम बेहतरीन और मुफ्त कोचिंग शुरू कर रहे हैं ताकि गरीब का बच्चा भी अफसर बन सके। प्रतिभा सम्मान- माता-पिता की स्मृति में विदिशा संसदीय क्षेत्र के मेधावी बच्चों के लिए प्रेम-सुंदर प्रतिभा सम्मान का शुभारंभ किया जाएगा। टॉपर्स को सम्मान राशि दी जाएगी। मोटराइज्ड ट्राई साइकिल- अब हाथों से साइकिल चलाने का कष्ट नहीं होगा। बैटरी वाली मोटराइज्ड साइकिल से हमारे दिव्यांग भाई-बहन न केवल चलेंगे, बल्कि अपना रोजगार भी कर सकेंगे। मामा चलित अस्पताल- विदिशा की आठों विधानसभाओं के गांव-गांव और मजरे-टोलों तक अब खुद चलकर आएगा ‘मामा चलित अस्पताल’। आधुनिक जांच और डॉक्टरों की टीम के साथ, अब द्वार पर ही होगा हर गरीब का नि:शुल्क इलाज। माता पिता की स्मृति में प्रेम-सुंदर प्रतिभा सम्मान शिवराज ने अपने माता-पिता की स्मृति में ‘प्रेम सुंदर प्रतिभा सम्मान’ शुरू करने का निर्णय भी लिया है। विदिशा संसदीय सीट की आठों विधानसभाओं में 10वीं और 12वीं के टॉपर्स को ₹51,000, ₹31,000 और ₹21,000 की सम्मान राशि दी जाएगी। लोकसभा स्तर पर प्रथम तीन स्थान पाने वालों को विशेष बड़े पुरस्कारों से नवाजा जाएगा। बता दें कि शिवराज सिंह चौहान के पिता का नाम प्रेम सिंह और मां का नाम सुंदर बाई है। मोबाइल हॉस्पिटल चलाएंगे, गांव-गांव मिलेगा फ्री इलाज केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान विदिशा संसदीय क्षेत्र की आठों विधानसभाओं में मोबाइल हॉस्पिटल (चलित अस्पताल) भी शुरू करेंगे। इनमें आधुनिक जांच सुविधाओं के साथ योग्य डॉक्टरों की टीम तैनात रहेगी, जो गांव-गांव और मजरे-टोलों में जाकर मुफ्त इलाज देगी। मोबाइल हॉस्पिटल की व्यवस्था सांसद निधि से होगी जबकि इसे चलाने के लिए जनसहयोग लिया जाएगा। दिव्यांगों को गिफ्ट करेंगे मोटराइज्ड ट्राई साइकिल शिवराज सिंह चौहान का अगला प्रण, विदिशा में दिव्यांगजन को आत्मनिर्भर बनाने से जुड़ा है। वे अपने संसदीय क्षेत्र में जरूरतमंद दिव्यांगजन की पहचान कर उन्हें मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल दो रहे हैं ताकि वे बिना किसी पर निर्भर हुए अपने काम कर सकें। पत्नी साधना सिंह भी चलाती हैं फ्री कोचिंग संभावना शिवराज सिंह चौहान की पत्नी साधना सिंह चौहान ने साल 2021 के कोरोनाकाल में भोपाल के लिंक रोड स्थित अपने सरकारी आवास B 8/74 पर ‘संभावना’ कोचिंग की शुरुआत की थी। इस कोचिंग में आर्थिक रूप से कमजोर युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग फ्री कराई जाती है। अब तक 8 बैच में करीब 900 बच्चे कोचिंग कर चुके हैं। मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) की परीक्षा के कई टॉपर भी इस कोचिंग से पढ़कर बड़े पदों पर सिलेक्ट हुए हैं। 2021 की परीक्षा में थर्ड रैंक पाने वाली पूजा सिंह और 2023 में सेकंड रैंक लाने वाले भुवनेश सिंह चौहान भी इसी कोचिंग से पढ़े हैं। दूरस्थ इलाकों में मिलेगा इलाज शिवराज ने कहा- मेडिकल मोबाइल वैन में भी मैंने देखा कि कई बार जो इंटीरियर के इलाके हैं, वहां चिकित्सा की सुविधां मिल नहीं पाती हैं। और छोटी-छोटी बीमारी के लिए फिर भोपाल और बाकी जगह आना पड़ता है। तो अपने संसदीय क्षेत्र की 8 विधानसभाओं में 8 मोबाइल क्लिनिक, जिनमें दवाइयां रहें, जो प्रारंभिक जांचें होती हैं, ईसीजी से लेके, ब्लड से लेकर जो वहां आसानी से हो सकती हैं वो उसका सामान रहे, डॉक्टर रहे, कंपाउंडर रहे। और इंटीरियर के इलाके में हम तय करेंगे कि जहां वैन खड़ी हो जाए, तो वहां 5-7-10 गांव के लोग आ जाएं, अपना चेकअप करा लें। छोटी-मोटी बीमारियों में तत्काल इलाज हो जाए, दवाई दे दें। और कोई ऐसी चीज है कि जिसके लिए रेफर करके … Read more

39 साल बाद सेमीफाइनल भिड़ंत: भारत-इंग्लैंड, पिछली बार टीम इंडिया की जीत और कप्तान कौन था?

मुंबई  मुंबई का वानखेड़े स्टेडियम भारतीय क्रिकेट के लिए सिर्फ एक मैदान नहीं, बल्कि यादों और जज्बातों का सबसे बड़ा रंगमंच है. यही वह जगह है जहां कभी विश्व कप की सबसे बड़ी खुशी मिली, तो कभी दिल तोड़ देने वाली हार भी. अब एक बार फिर वही स्टेडियम इतिहास के नए मोड़ का गवाह बनने जा रहा है. टी20 विश्व कप 2026 के सेमीफाइनल में भारत और इंग्लैंड आमने-सामने होंगे. मुकाबला सिर्फ फाइनल की टिकट का नहीं है, बल्कि इतिहास के अधूरे हिसाब को बराबर करने का भी है। लगभग चार दशक पहले इसी वानखेड़े में इंग्लैंड ने भारत को विश्व कप से बाहर कर दिया था. अब उसी मैदान पर भारतीय टीम के पास उस पुरानी टीस को मिटाने का मौका है. अगर भारत यह मैच जीतता है तो फाइनल में उसका सामना न्यूजीलैंड से होगा। वानखेड़े: जहां जश्न भी मिला, दर्द भी भारतीय क्रिकेट के इतिहास में वानखेड़े स्टेडियम का एक अलग ही स्थान है. 2011 के वनडे विश्व कप का वह ऐतिहासिक पल आज भी हर भारतीय क्रिकेट प्रेमी के दिल में बसता है, जब महेंद्र सिंह धोनी ने छक्का लगाकर भारत को विश्व चैंपियन बनाया था और गौतम गंभीर की 97 रन की जुझारू पारी ने जीत की नींव रखी थी. लेकिन यही मैदान दर्द की कहानियों से भी भरा हुआ है. 1987 के विश्व कप सेमीफाइनल में कपिल देव की टीम यहां इंग्लैंड से हारकर टूर्नामेंट से बाहर हो गई थी. इसके बाद 2016 के टी20 विश्व कप सेमीफाइनल में भारत को वेस्टइंडीज के हाथों हार का सामना करना पड़ा. इसलिए जब भी भारत वानखेड़े में बड़ा मुकाबला खेलता है, तो यह सिर्फ क्रिकेट नहीं बल्कि भावनाओं की लड़ाई भी बन जाती है। क्‍या 2022 की हार ने बदला भारतीय टी20 क्रिकेट? भारत और इंग्लैंड की टी20 विश्व कप में भिड़ंत कोई नई बात नहीं है. लेकिन 2022 का सेमीफाइनल भारतीय क्रिकेट के लिए सबसे दर्दनाक यादों में से एक बन गया. उस मैच में भारत ने 168 रन बनाए थे, लेकिन इंग्लैंड ने बिना कोई विकेट गंवाए लक्ष्य हासिल कर लिया था. जोस बटलर और एलेक्स हेल्स की ओपनिंग जोड़ी ने भारतीय गेंदबाजी को पूरी तरह बेअसर कर दिया था. उस हार ने भारतीय टीम को झकझोर दिया. इसके बाद टीम मैनेजमेंट ने यह महसूस किया कि आधुनिक टी20 क्रिकेट में सिर्फ टिककर खेलने से काम नहीं चलेगा. खेल का तरीका बदलना पड़ेगा। क्‍या काम आएगी भारत की आक्रामक रणनीति? 2022 के बाद भारतीय टीम ने अपनी टी20 रणनीति पूरी तरह बदल दी. अब बल्लेबाज शुरुआत से ही आक्रामक खेलने लगे. रन गति बढ़ाने पर जोर दिया गया और जोखिम लेने से डरना बंद किया गया. आज 2026 में यही रणनीति भारत की पहचान बन चुकी है. सूर्यकुमार यादव की कप्तानी और गौतम गंभीर के मार्गदर्शन में भारतीय टीम ने आक्रामक और निडर क्रिकेट को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है. अगर भारत इस सेमीफाइनल में इंग्लैंड को हराता है तो यह सिर्फ जीत नहीं होगी, बल्कि उस नई सोच की भी जीत होगी जिसने भारतीय टी20 क्रिकेट को बदल दिया। भारत बनाम इंग्लैंड: क्‍या कहते हैं आंकड़े? टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में भारत और इंग्लैंड के बीच अब तक 29 मैच खेले गए हैं. इनमें भारत ने 17 मुकाबले जीते हैं जबकि इंग्लैंड ने 12 बार जीत दर्ज की है. टी20 विश्व कप की बात करें तो दोनों टीमों के बीच अब तक पांच मुकाबले हुए हैं, जिनमें भारत ने तीन बार जीत हासिल की है. वानखेड़े में भी दोनों टीमें दो बार भिड़ चुकी हैं. फरवरी 2025 में खेले गए मुकाबले में भारत ने इंग्लैंड को 150 रन से करारी शिकस्त दी थी. उस मैच में युवा बल्लेबाज अभिषेक शर्मा ने सिर्फ 54 गेंदों में 135 रन की तूफानी पारी खेली थी। कैसी है दोनों टीमों की फॉर्म? भारत ने सुपर 8 चरण में उतार-चढ़ाव भरा सफर तय किया. अहमदाबाद में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ हार के बाद टीम दबाव में आ गई थी. लेकिन इसके बाद भारत ने जिम्बाब्वे और वेस्टइंडीज को हराकर सेमीफाइनल का टिकट पक्का किया. दूसरी ओर इंग्लैंड ने सुपर 8 में शानदार प्रदर्शन किया. श्रीलंका में खेले गए मुकाबलों में उन्होंने एक भी मैच नहीं गंवाया. कप्तान हैरी ब्रूक की अगुवाई में टीम ने धीमी पिचों पर भी शानदार संतुलन दिखाया। इस बार कैसी रहेगी वानखेड़े की पिच? इस टूर्नामेंट में वानखेड़े की पिच ने थोड़ा अलग व्यवहार किया है. पारंपरिक रूप से यह पिच तेज गेंदबाजों के लिए अनुकूल मानी जाती है, लेकिन इस बार यहां बल्लेबाजों और स्पिनरों दोनों को मदद मिली है. भारत और अमेरिका के बीच खेले गए पहले मैच में भारतीय टीम को मुश्किल परिस्थितियों का सामना करना पड़ा था. शुरुआती विकेट गिरने के बाद सूर्यकुमार यादव की आक्रामक पारी की बदौलत भारत 161 रन तक पहुंच सका और 29 रन से मैच जीत लिया. मैदान की पिच पर हल्की घास भी छोड़ी गई है ताकि गेंद को अतिरिक्त उछाल मिल सके। क्या ओस बनेगी मैच का बड़ा फैक्टर? वानखेड़े में रात के मैचों में ओस हमेशा एक अहम भूमिका निभाती है. हालांकि इस टूर्नामेंट में अब तक सात मैचों में से चार में टीमों ने स्कोर का सफल बचाव किया है. लेकिन मुंबई की बढ़ती गर्मी को देखते हुए संभावना है कि सेमीफाइनल में ओस अहम भूमिका निभा सकती है. ऐसे में टॉस जीतने वाली टीम पहले गेंदबाजी का फैसला कर सकती है। कौन जीतेगा सेमीफाइनल? दोनों टीमों के पास मैच जिताने वाले खिलाड़ी हैं. इंग्लैंड की बल्लेबाजी गहरी है और उनकी रणनीति बेहद आक्रामक रहती है. लेकिन भारत के पक्ष में कई फैक्‍टर हैं – घरेलू मैदान, दर्शकों का समर्थन और आक्रामक क्रिकेट का नया आत्मविश्वास. अगर भारतीय टीम दबाव में संयम बनाए रखती है तो उसके पास फाइनल में पहुंचने का सुनहरा मौका है।

10 साल में दोगुनी हुई गिद्ध आबादी, MP में अब 14 हजार पार; पन्ना में लाल सिर, वन विहार में सफेद पीठ वाले गिद्ध

भोपाल  मध्य प्रदेश में इस बार गिद्धों की संख्या 14 हजार के पार पहुंच गई है। वन विभाग द्वारा तीन दिन तक किए गए सर्वे में यह आंकड़े सामने आए हैं। अंतिम रिपोर्ट जारी होने के बाद संख्या में और बढ़ोतरी संभव है। पिछली गणना में प्रदेश में 12,981 गिद्ध दर्ज किए गए थे। पन्ना क्षेत्र में लाल सिर वाले गिद्ध और भोपाल स्थित वन विहार नेशनल पार्क में सफेद पीठ वाले गिद्ध पाए गए हैं। पिछले 10 वर्षों में प्रदेश में गिद्धों की संख्या लगभग दोगुनी हो चुकी है। मध्य प्रदेश पहले से ‘चीता, टाइगर और तेंदुआ स्टेट’ के रूप में पहचाना जाता है। अब गिद्धों की बढ़ती संख्या ने वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में राज्य की उपलब्धि को और मजबूत किया है। 20 से 22 फरवरी के बीच हुए सर्वे में करीब 7 प्रजातियों की पहचान हुई है। इनमें भारतीय गिद्ध, सिनेरियस गिद्ध, मिस्र गिद्ध (व्हाइट स्कैवेंजर) और हिमालयन ग्रिफॉन प्रमुख हैं। 23 फरवरी को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रायसेन जिले के हलाली डैम क्षेत्र में लुप्तप्राय प्रजाति के 5 गिद्धों को प्राकृतिक आवास में छोड़ा था। इन पक्षियों पर अत्याधुनिक जीपीएस ट्रैकर लगाए गए हैं, जिससे वन विभाग उनकी गतिविधियों पर लगातार नजर रख रहा है। 2016 से लगातार बढ़ रहे आंकड़े प्रदेश में गिद्धों की गणना वर्ष 2016 से शुरू हुई थी। तब 7,028 गिद्ध दर्ज किए गए थे। इसके बाद संख्या लगातार बढ़ती रही—     2019: 8,397     2021: 9,446     2024: 10,845     2025: 12,981 अब 2026 में यह आंकड़ा 14 हजार से अधिक पहुंचने की संभावना है। प्रदेश में कुल 7 प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें 4 स्थानीय और 3 प्रवासी हैं। शीत ऋतु के अंतिम चरण में गणना करना सबसे उपयुक्त माना जाता है, क्योंकि इस समय स्थानीय और प्रवासी दोनों प्रजातियां एक साथ मिल जाती हैं। इंदौर और भोपाल में भी इजाफा इंदौर वन मंडल में पिछली बार 86 गिद्ध गिने गए थे, जो इस बार बढ़कर 156 हो गए हैं। वहीं, Van Vihar National Park के गिद्ध संरक्षण केंद्र में सफेद पीठ वाले गिद्धों की संख्या में वृद्धि दर्ज की गई है। कभी विलुप्ति की कगार पर थे विशेषज्ञों के अनुसार, गिद्ध स्वभाव से संवेदनशील और कम प्रजनन दर वाले पक्षी होते हैं। एक समय प्रदेश समेत देशभर में इनकी संख्या तेजी से घट रही थी और ये विलुप्ति के कगार पर पहुंच गए थे। लेकिन संरक्षण प्रयासों के चलते अब स्थिति में सुधार हो रहा है। प्रदेश में ऐसे बढ़ी गिद्धों की संख्या जानकारी के अनुसार, प्रदेश में गिद्धों की गणना की शुरुआत वर्ष 2016 से की गई थी। प्रदेश में गिद्धों की कुल 7 प्रजातियां पाई जाती हैं। इसमें से 4 प्रजातियां स्थानीय एवं 3 प्रजाति प्रवासी हैं। गिद्धों की गणना करने के लिए शीत ऋतु का अंतिम समय सही रहता है। इस दौरान स्थानीय एवं प्रवासी गिद्धों की गणना आसानी से हो जाती है। वर्ष 2019 की गणना में गिद्धों की संख्या 8 हजार 397, वर्ष 2021 में 9 हजार 446, वर्ष 2024 में 10 हजार 845 और 2025 में 12 हजार 981 हो गई थी। इस बार हुई गणना में यह संख्या 14 हजार से ज्यादा पहुंच सकती है। इंदौर में भी बढ़ी संख्या इंदौर वन मंडल में पिछली बार 86 गिद्ध मिले थे, जो इस बार 156 काउंट किए गए हैं। वन विहार के गिद्ध संरक्षण केंद्र में सफेद पीठ वाले गिद्धों की संख्या में इजाफा हुआ है। कभी विलुप्त होने की कगार पर थे गिद्ध एक्सपर्ट के मुताबिक, गिद्ध जल्दी अपना साथी या मैटिंग पेयर नहीं बनाते हैं। यह पक्षी असल में नर्वस किस्म का जीव है। इस मामले में शर्मिला कहा जा सकता है। गिद्ध कभी विलुप्त होने की कगार पर थे। मप्र सहित देशभर में ‘धरती के सफाई दूत’ की संख्या बुरी तरह घटती जा रही थी, लेकिन अब प्रदेश में इनकी संख्या लगातार बढ़ रही है। वन विहार में 3 साल पहले हरियाणा से लाए गए थे गिद्ध भोपाल के वन विहार नेशनल पार्क में करीब तीन साल पहले हरियाणा से सफेद पीठ वाले 20 गिद्ध लाए गए थे। 1100 किलोमीटर की यात्रा करके यह भोपाल पहुंचे थे। वर्तमान में यह गिद्ध संरक्षण एवं संवर्धन केंद्र की एवरी में है। 20 व्हाइट रम वल्चर (सफेद पीठ वाले गिद्ध) में 5 नर और 5 मादा, 10 सब एडल्ट गिद्ध थे। अंडे से जीवित निकलने का सक्सेस रेट 50% गिद्ध साल में एक ही बार अंडे देते हैं। साइज में यह मुर्गी के अंडे से तीन गुना बड़े होते हैं। मई-जून से अक्टूबर के दौरान मैटिंग सीजन और अंडे देने का समय होता है। अंडे से बच्चे जीवित निकलने का सक्सेस रेट 50% माना जाता है। यही वजह है कि आधे अंडे विकसित नहीं होते हैं। अंडे से 55 दिन में बच्चा निकलता है। चार महीने बच्चा घोंसले में रहता है। फिर वह उड़ने के लिए तैयार हो जाता है। संरक्षण प्रयासों का असर भोपाल के केरवा डैम में 2014 में गिद्ध प्रजनन केंद्र की स्थापना के साथ संरक्षण अभियान शुरू हुआ। मार्च 2017 में यहां सफेद पीठ वाले गिद्ध का पहला सफल प्रजनन दर्ज किया गया। इसके अलावा पन्ना, रायसेन (हलाली डैम), शिवपुरी और गांधीसागर अभयारण्य (मंदसौर) में भी विशेष संरक्षण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। वन विभाग गिद्धों को प्राकृतिक आवास में छोड़ने से पहले उन पर जीपीएस ट्रैकर लगाता है, ताकि उनकी सुरक्षा और गतिविधियों की निरंतर निगरानी की जा सके। प्रदेश में गिद्धों की बढ़ती संख्या वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। 2014 में शुरू हुए थे संरक्षण के प्रयास भोपाल के केरवा डैम में गिद्ध प्रजनन केंद्र की स्थापना के साथ वर्ष 2014 में गिद्धों के संरक्षण के प्रयास शुरू हुए थे। मार्च 2017 में यहां पहले सफल प्रजनन के रूप में सफेद पीठ वाले गिद्ध का चूजा पैदा हुआ था। यहां सफेद पीठ वाले (Oriental White-backed) और लंबी चोंच वाले (Long-billed) गिद्धों का प्रजनन किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, गिद्धों के संरक्षण और उनके प्राकृतिक आवास के लिए पन्ना (पवई), रायसेन (हलाली डैम), शिवपुरी और गांधीसागर अभयारण्य (मंदसौर) में भी विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। 2016 में पहली बार हुई थी गणना मध्य … Read more

अमेरिका का बड़ा शक्ति प्रदर्शन: ईरान वॉर के बीच Doomsday मिसाइल टेस्ट, हिरोशिमा से भी ज्यादा विनाश का दावा; स्पेन झुका

न्यूयॉर्क/ तेहरान मिडिल ईस्ट में जारी जंग के बीच मंगलवार रात अमेरिका ने कैलिफोर्निया तट पर एक डूम्सडे बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया. न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, सांता बारबरा के पास वैंडेनबर्ग स्पेस फोर्स बेस से रात 11 बजे ‘मिनटमैन III बैलिस्टिक मिसाइल’ लॉन्च की गई, जो हिरोशिमा पर गिराए गए परमाणु बम से 20 गुना ज्यादा ताकतवर परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है।  यूएस स्पेस फोर्स के मुताबिक, जीटी 254 के रूप में जाना जाने वाला निहत्था रॉकेट, पश्चिम-मध्य प्रशांत महासागर में मार्शल द्वीप के पास अपने टार्गेट पर जाकर गिरा. फोर्स ग्लोबल स्ट्राइक कमांड के मुताबिक, मिसाइल को ‘प्रभावशीलता, तत्परता और सटीकता को सत्यापित करने’ के लिए दागा गया था।  576वें फ्लाइट टेस्ट स्क्वाड्रन के कमांडर लेफ्टिनेंट कर्नल कैरी व्रे ने एक प्रेस रिलीज में कहा, “इससे हमें मिसाइल सिस्टम के अलग-अलग घटकों के प्रदर्शन का आकलन करने की अनुमति मिली।  जंग की ज़द में पूरा मिडिल ईस्ट पिछले दिनों अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमला किया, जिसमें देश के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की तेहरान में मौत हो गई. इसके बाद पूरा मिडिल ईस्ट जंग की चपेट में आ गया है।   खामेनेई की मौत के बाद ईरान की तरफ से लगातार इजरायल और मिडिल ईस्ट में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर हमले जारी हैं. उधर हिज्बुल्लाह के एक्टिव होने के बाद इजरायल ने लेबनान की राजधानी बेरुत में हमलों की झड़ी लगा दी है।  राष्ट्रपति ट्रंप ने बाद में ईरान पर हमले तेज करने की कसम खाई और चेतावनी देते हुए कहा कि बड़ा हमला होने वाला है.  धमकी और स्पेन आ गया लाइन पर! मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच एक नया विवाद सामने आया है. इस बार मामला केवल ईरान, इज़राइल और अमेरिका तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यूरोप का प्रमुख देश स्पेन भी इसमें खिंच आया. महज दो दिनों के भीतर स्पेन की सरकार के बयान और रुख में जो बदलाव दिखाई दिया, उसने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में आर्थिक दबाव की ताकत को फिर से सामने ला दिया।  पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज़ ने ईरान पर अमेरिका और इज़राइल की सैन्य कार्रवाई की आलोचना की. उन्होंने कहा कि मध्य पूर्व में बढ़ता युद्ध दुनिया के लिए खतरनाक साबित हो सकता है. सांचेज़ के अनुसार, इस तरह की लड़ाई लाखों लोगों की ज़िंदगी को खतरे में डाल सकती है. उन्होंने टेलीविजन पर अपने संबोधन में कहा कि स्पेन ऐसी किसी कार्रवाई का हिस्सा नहीं बनेगा जो दुनिया के लिए नुकसानदेह हो और उसके अपने मूल्यों के खिलाफ जाती हो. उनका कहना था कि केवल किसी देश के दबाव या डर से स्पेन अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं करेगा. लेकिन स्पेन का यह रुख ज्यादा देर तक बिना प्रतिक्रिया के नहीं रहा।  ट्रंप की कड़ी चेतावनी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तुरंत सख्त प्रतिक्रिया दी. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर स्पेन अपने यहां मौजूद संयुक्त सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल ईरान पर हमलों के लिए अमेरिका को नहीं करने देता, तो अमेरिका स्पेन के साथ व्यापारिक संबंध खत्म कर सकता है. ट्रंप के इस बयान को यूरोप में गंभीरता से लिया गया. वजह यह है कि ट्रंप पहले भी कई बार टैरिफ और व्यापारिक प्रतिबंधों की धमकी देकर दूसरे देशों पर दबाव बनाते रहे हैं. स्पेन ने अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के लिए अपने ठिकानों का इस्तेमाल करने से इनकार कर दिया था. यही फैसला ट्रंप को नागवार गुजरा।  सैन्य अड्डों पर शुरू हुआ विवाद स्पेन के दक्षिण में दो अहम सैन्य अड्डे हैं रोता नौसैनिक अड्डा और मोरॉन वायुसेना अड्डा.इनका इस्तेमाल अमेरिका और स्पेन दोनों करते हैं, लेकिन इन पर नियंत्रण स्पेन का ही है. ट्रंप ने इन अड्डों का जिक्र करते हुए कहा कि अगर अमेरिका चाहे तो उनका इस्तेमाल कर सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि हम वहां जाकर उनका उपयोग कर सकते हैं, कोई हमें रोक नहीं सकता।  स्पेन का साफ संदेश: युद्ध नहीं ट्रंप की धमकी के बावजूद सांचेज़ ने शुरुआत में अपना रुख बरकरार रखा. उन्होंने कहा कि स्पेन की नीति बहुत स्पष्ट है युद्ध नहीं.उनका कहना था कि अगर ईरान पर हमले बढ़ते हैं तो मध्य पूर्व एक बार फिर लंबे और महंगे युद्ध में फंस सकता है, जैसा पहले इराक और अफगानिस्तान में हुआ था.इन युद्धों ने कई सालों तक क्षेत्र की स्थिरता को प्रभावित किया था और भारी मानवीय व आर्थिक नुकसान हुआ था।  यूरोपीय संघ के नियमों के मुताबिक व्यापार से जुड़े फैसले सामूहिक रूप से किए जाते हैं. इसलिए अगर अमेरिका स्पेन पर व्यापारिक कार्रवाई करता है तो उसका असर पूरे यूरोप पर पड़ सकता है. यूरोपीय आयोग के प्रवक्ता ओलोफ गिल ने कहा कि यूरोपीय संघ अपने सदस्य देशों के साथ खड़ा है और जरूरत पड़ने पर अपने आर्थिक हितों की रक्षा करेगा।  ऐसे होता है दोनों के बीच व्यापार  आंकड़ों के अनुसार अमेरिका और स्पेन के बीच व्यापार काफी महत्वपूर्ण है, लेकिन इतना बड़ा भी नहीं कि तुरंत आर्थिक संकट पैदा हो जाए. स्पेन के केंद्रीय बैंक बैंक ऑफ स्पेन के मुताबिक अमेरिका के साथ स्पेन का कुल व्यापार उसके सकल घरेलू उत्पाद का करीब 4.4 प्रतिशत है.स्पेन से अमेरिका को होने वाला निर्यात करीब 16 अरब यूरो का है.इस हिसाब से अमेरिका स्पेन का छठा सबसे बड़ा निर्यात बाजार है. फिर भी विशेषज्ञ मानते हैं कि अमेरिका की चेतावनी का असर केवल आर्थिक नहीं बल्कि राजनीतिक भी होता है।  ट्रंप के बयान के बाद स्पेन के उद्योग और व्यापार जगत में चिंता बढ़ गई. वहां के प्रमुख कारोबारी संगठन सीईओई, सीईपीवाईएमई और एटीए ने कहा कि अमेरिका स्पेन का एक अहम आर्थिक साझेदार है और दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को प्रभावित नहीं होना चाहिए. व्यापारिक संगठनों ने उम्मीद जताई कि दोनों देश बातचीत के जरिए इस विवाद को सुलझा लेंगे।  सरकार की तरफ से संयम बरतने का संदेश स्पेन के मंत्री कार्लोस कुएर्पो ने स्थिति को शांत करने की कोशिश की. उन्होंने कहा कि ट्रंप की टिप्पणियों के अलावा अमेरिका की तरफ से कोई नया कदम नहीं उठाया गया है. उन्होंने लोगों से घबराने के बजाय शांत रहने की अपील की।  स्पेन और ट्रंप प्रशासन के बीच यह पहला विवाद नहीं है. पिछले साल स्पेन ने नाटो के उस प्रस्ताव … Read more

तत्परता और संवेदनशीलता से हो जनता की समस्याओं का समाधान: सीएम योगी

जन समस्याओं के निस्तारण में शिथिलता अक्षम्य: मुख्यमंत्री जनता दर्शन में सीएम योगी आदित्यनाथ ने सुनीं 150 लोगों की समस्याएं तत्परता और संवेदनशीलता से हो जनता की समस्याओं का समाधान: सीएम योगी गोरखपुर,  गोरखपुर में जनता के साथ बुधवार दिनभर होली की खुशियां साझा करने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार सुबह गोरखनाथ मंदिर में जनसेवा के नियमित प्रकल्प ‘जनता दर्शन’ में विभिन्न जिलों से आए लोगों से मुलाकात की। उनकी समस्याएं सुनीं और अधिकारियों को निर्देशित किया कि जन समस्याओं का समाधान तत्परता और संवेदनशील तरीके से किया जाए। इसमें किसी भी तरह की शिथिलता या लापरवाही अक्षम्य होगी। हर समस्या का निस्तारण गुणवत्तापूर्ण, पारदर्शी और संतुष्टिपरक होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि जनता की हर समस्या का समाधान सरकार की प्राथमिकता है। गोरखनाथ मंदिर परिसर के महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन के सामने आयोजित जनता दर्शन में कुर्सियों पर बैठे लोगों तक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद चलकर पहुंचे और एक-एक कर सबकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने करीब 150 लोगों से मुलाकात की और सबको आश्वस्त किया कि हर व्यक्ति को न्याय दिलाया जाएगा। सबके प्रार्थना पत्रों को संबंधित अधिकारियों को संदर्भित करते हुए त्वरित निस्तारण का निर्देश देने के साथ मुख्यमंत्री ने लोगों को भरोसा दिलाया कि सरकार हर पीड़ित की समस्या का समाधान कराने के लिए दृढ़ संकल्पित है।  सीएम ने अफसरों से कहा कि किसी के साथ भी अन्याय नहीं होना चाहिए। हर पीड़ित के साथ संवेदनशील व्यवहार अपनाते हुए उसकी सहायता की जानी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि किसी की जमीन पर अवैध कब्जा करने वाले और कमजोरों को उजाड़ने वाले किसी भी सूरत में बख्शे न जाएं। उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।  मुख्यमंत्री के समक्ष जनता दर्शन में कई लोग इलाज के लिए आर्थिक सहायता की गुहार लेकर पहुंचे थे। सीएम योगी ने उन्हें आश्वस्त किया कि सरकार इलाज के लिए भरपूर मदद करेगी। उनके प्रार्थना पत्रों को अधिकारियों को हस्तगत करते हुए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि इलाज से जुड़ी इस्टीमेट की प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूर्ण करा कर शासन में उपलब्ध कराया जाए।

MP में 37°C पार, इंदौर-उज्जैन संभाग में गर्मी का कहर; होली के दिन भोपाल और ग्वालियर-जबलपुर में भी बढ़ा तापमान

भोपाल  मार्च का पहला सप्ताह खत्म होते-होते ही मध्यप्रदेश में गर्मी ने रफ्तार पकड़ ली है। होली के मौके पर अधिकतम तापमान 37 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया गया, जो सामान्य से करीब 3 डिग्री ज्यादा है। दिन के साथ-साथ रात का तापमान भी बढ़ने लगा है, जिससे मौसम में गर्मी का अहसास तेज हो गया है। सबसे ज्यादा असर इंदौर और उज्जैन संभाग में देखने को मिला। वहीं भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर में भी होली के दिन तेज धूप ने लोगों को झुलसाया। प्रदेशभर में आसमान साफ रहा और बारिश या बादलों की कोई स्थिति नहीं बनी, जिससे तापमान तेजी से ऊपर चढ़ा।  मौसम विभाग के अनुसार इंदौर और उज्जैन संभाग में सबसे ज्यादा गर्मी दर्ज की गई। वहीं भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर भी गर्म रहे। अगले चार दिनों में और बढ़ेगा तापमान भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार प्रदेश में अगले चार दिनों तक मौसम का मिजाज लगभग ऐसा ही बना रहेगा। दिन के तापमान में 2 से 4 डिग्री तक बढ़ोतरी हो सकती है। 6 मार्च से पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने की संभावना है। इसके प्रभाव से प्रदेश के कुछ हिस्सों में मौसम में हल्का बदलाव आ सकता है और बादल छाने के साथ हल्की बारिश भी हो सकती है। 40 डिग्री तक पहुंच सकता है पारा मौसम विभाग का अनुमान है कि आने वाले चार दिनों में अधिकतम तापमान में करीब 4 डिग्री तक बढ़ोतरी हो सकती है। ऐसे में संभावना है कि मार्च के पहले ही पखवाड़े में प्रदेश का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। होली पर तेज धूप से बढ़ी गर्मी होली के दिन पूरे प्रदेश में तेज धूप रही और कहीं भी बारिश या बादल नहीं दिखाई दिए। इस कारण गर्मी का असर अधिक महसूस किया गया। नर्मदापुरम में इस सीजन में पहली बार अधिकतम तापमान 37.7 डिग्री दर्ज किया गया। धार, रतलाम और सागर में भी तापमान 36 डिग्री या उससे अधिक रिकॉर्ड किया गया। इसके अलावा गुना, दमोह, खंडवा, टीकमगढ़, खजुराहो, खरगोन, श्योपुर और मंडला में तापमान 35 डिग्री से ज्यादा रहा। प्रदेश के एकमात्र हिल स्टेशन पचमढ़ी में ही तापमान 30 डिग्री से नीचे रहा। रात का तापमान भी बढ़ा प्रदेश में दिन के साथ रातें भी गर्म हो गई हैं। मंगलवार-बुधवार की रात बैतूल, गुना, नर्मदापुरम, खंडवा, रतलाम, श्योपुर, जबलपुर, नरसिंहपुर, सागर, सिवनी और टीकमगढ़ में न्यूनतम तापमान 16 डिग्री या उससे अधिक दर्ज किया गया। सबसे अधिक न्यूनतम तापमान धार में 19 डिग्री रिकॉर्ड किया गया। अप्रैल-मई में चल सकती है लू मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार मार्च में लू चलने की संभावना कम है, लेकिन अप्रैल और मई में गर्मी का असर ज्यादा रहेगा। इन महीनों में करीब 15 से 20 दिन तक लू चलने का अनुमान है। मार्च में तीनों मौसम का असर पिछले 10 वर्षों के आंकड़ों के अनुसार मध्य प्रदेश में मार्च के दौरान दिन गर्म और रातें ठंडी रहती हैं, जबकि कभी-कभी बारिश भी होती है। अनुमान है कि भोपाल, इंदौर और उज्जैन में अधिकतम तापमान 40 डिग्री से अधिक पहुंच सकता है, जबकि रात का तापमान 10 से 17 डिग्री के बीच रह सकता है। फरवरी में चार बार बदला मौसम इस साल फरवरी में प्रदेश में चार बार मौसम बदला। महीने की शुरुआत में दो बार ओले, बारिश और आंधी का दौर चला, जिससे फसलों को नुकसान हुआ। इसके बाद 18 फरवरी से तीसरी बार प्रदेश में बारिश हुई और 19, 20 और 21 फरवरी को भी इसका असर रहा। वहीं 23 और 24 फरवरी को चौथी बार ओले और बारिश दर्ज की गई।

इंदौर में बाघों की वापसी, वाइल्डलाइफ कॉरिडोर के निर्माण की शुरुआत

 इंदौर  वर्ल्ड वाइल्डलाइफ डे के मौके पर इंदौर वनमंडल से एक सकारात्मक संकेत सामने आया है। यहां के जंगल इन दिनों बाघों और तेंदुओं के लिए तेजी से अनुकूल बनते जा रहे हैं। घने वन, पर्याप्त जल स्रोत और शिकार की उपलब्धता ने चोरल-महू-मानपुर क्षेत्र को फिर से बड़े वन्यजीवों का ठिकाना बना दिया है। जनवरी से फरवरी के बीच चोरल क्षेत्र में बाघ की मौजूदगी के पुख्ता प्रमाण मिले हैं। कई स्थानों पर बाघ के पंजों के निशान और विष्ठा पाई गई है, जबकि तेंदुओं की गतिविधियां लगातार देखी जा रही हैं। उदयनगर से बड़वाह तक नया टेरीटरी विकसित कर रहे दिसंबर में हुई बाघ गणना के दौरान भी इंदौर वनमंडल के नाहरझाबुआ-भड़किया, उमठ-वेका और मलेंडी-मांगलिया क्षेत्रों में बाघ की हलचल दर्ज की गई। वन अधिकारियों के अनुसार बाघ अब उदयनगर से बड़वाह तक नया टेरीटरी विकसित कर रहे हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि खिवनी अभयारण्य से लेकर उदयनगर-बड़वाह तक का क्षेत्र एक संभावित वाइल्डलाइफ कारिडोर के रूप में उभर रहा है। देहरादून स्थित वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया भी इस क्षेत्र को महत्वपूर्ण कॉरिडोर मानता है। हालांकि, विकास परियोजनाओं के कारण जंगलों का दायरा प्रभावित हुआ है। नए सुरक्षित क्षेत्रों की ओर बढ़ रहे हैं इंदौर-खंडवा मार्ग, महू-सनावद रेल लाइन और अन्य परियोजनाओं से वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास बाधित हुआ, जिससे वे नए सुरक्षित क्षेत्रों की ओर बढ़ रहे हैं। यही कारण है कि 2022 से 2024 के बीच कई बार बाघ इन इलाकों में नजर आए हैं। चोरल, महू और इंदौर के कई क्षेत्रों में कैमरा ट्रैप लगाए वन विभाग ने बाघ और तेंदुए की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए चोरल, महू और इंदौर के कई क्षेत्रों में कैमरा ट्रैप लगाए हैं। इनसे मिली तस्वीरों का अध्ययन देहरादून स्थित संस्थान में किया जा रहा है, ताकि बाघों की संख्या और मूवमेंट का सटीक आकलन हो सके। इसलिए बढ़ रही है गतिविधि विशेषज्ञों के अनुसार क्षेत्र में सांभर, चीतल, हिरण और नीलगाय जैसे शाकाहारी वन्यजीवों की संख्या बढ़ने से बाघों को पर्याप्त शिकार मिल रहा है। वहीं जंगलों में बढ़ती मानव गतिविधियों और निर्माण कार्यों के कारण वन्यजीव नए सुरक्षित आवास की तलाश में हैं। मांचल और मोरोद जैसे क्षेत्रों में औद्योगिक और अन्य प्रस्तावित गतिविधियों से भी वनक्षेत्र पर दबाव बढ़ा है। सुरक्षा बनी बड़ी चुनौती विशेषज्ञ अभय जैन का कहना है कि यदि इस उभरते कारिडोर को संरक्षित किया जाए तो बाघों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जा सकती है। इसके लिए विकास और संरक्षण के बीच संतुलन जरूरी है।     सूचना तंत्र मजबूत किया जा रहा है और गर्मियों में आग, अतिक्रमण व अवैध कटाई को रोकने के लिए विशेष रणनीति बनाई जा रही है। इंदौर-चोरल-महू क्षेत्र में बाघों की बढ़ती मौजूदगी एक ओर जहां संरक्षण प्रयासों की सफलता का संकेत है, वहीं यह जिम्मेदारी भी बढ़ाती है कि इन जंगलों और वन्यजीवों को सुरक्षित रखा जाए।     -लाल सुधाकर सिंह, डीएफओ, इंदौर वनमंडल  

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