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‘बंटेंगे तो कटेंगे’ नकारात्मक नारा CM की निराशा और नाकामी का प्रतीक है- अखिलेश यादव

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में चल रहे उपचुनाव के बीच नारों की सियासत काफी गरमाई है। मुख्यमंत्री योगी के ‘बंटेंगे तो कटेंगे’ नारा को लेकर सपा मुखिया अखिलेश यादव ने निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि यह नकारात्मक नारा उनकी निराशा और नाकामी का प्रतीक है। अखिलेश यादव ने  को सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि उनका ‘नकारात्मक-नारा’ उनकी निराशा और नाकामी का प्रतीक है। इस नारे ने साबित कर दिया है कि उनके जो गिनती के 10 फीसद मतदाता बचे हैं, अब वो भी खिसकने के कगार पर हैं, इसलिए ये उनको डराकर एक करने की कोशिश में जुटे हैं, लेकिन ऐसा होने वाला नहीं। उन्होंने कहा कि ‘नकारात्मक-नारे’ का असर भी होता है। दरअसल, इस ‘निराश-नारे’ के आने के बाद उनके बचे-खुचे समर्थक ये सोचकर और भी निराश हैं कि जिन्हें हम ताकतवर समझ रहे थे, वो तो सत्ता में रहकर भी कमजोरी की ही बातें कर रहे हैं। जिस ‘आदर्श राज्य’ की कल्पना हमारे देश में की जाती है, उसके आधार में ‘अभय’ होता है, ‘भय’ नहीं। ये सच है कि ‘भयभीत’ ही ‘भय’ बेचता है, क्योंकि जिसके पास जो होगा, वो वही तो बेचेगा। अखिलेश यादव ने भाजपा पर बोला हमला सपा मुखिया ने कहा कि देश के इतिहास में ये नारा ‘निकृष्टतम-नारे’ के रूप में दर्ज होगा और उनके राजनीतिक पतन के अंतिम अध्याय के रूप में आखिरी ‘शाब्दिक कील’ साबित होगा। उन्होंने कहा कि देश और समाज के हित में उन्हें अपनी नकारात्मक नजर और नजरिये के साथ अपने सलाहकार भी बदल लेने चाहिए, ये उनके लिए भी हितकर साबित होगा। एक अच्छी सलाह ये है कि ‘पालें तो अच्छे विचार पालें’ और आस्तीनों को खुला रखें, साथ ही बांहों को भी, इसी में उनकी भलाई है। सकारात्मक समाज कहे आज का, नहीं चाहिए भाजपा। पोस्टरवार शुरू हुआ मुख्यमंत्री योगी का नारा ‘बंटेंगे तो कटेंगे’ काफी चर्चित हो रहा है। इस कारण यूपी से महाराष्ट्र तक की सियासत गरमा गई है। बीते दिनों मुंबई के कई इलाकों में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तस्वीर और ‘बंटेंगे तो कटेंगे’ संदेश वाले पोस्टर लगाए गए हैं। इन पोस्टर में ‘बंटेंगे तो कटेंगे और एक रहेंगे तो नेक रहेंगे’, सुरक्षित रहेंगे के संदेश लिखे हैं। योगी ने आगरा में दिया था नारा दरअसल, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आगरा में एक कार्यक्रम में कहा था कि आप देख रहे हैं बांग्लादेश में क्या हो रहा है? वे गलतियां यहां नहीं होनी चाहिए। ‘बटेंगे तो कटेंगे, एक रहेंगे तो नेक रहेंगे, सुरक्षित रहेंगे और समृद्धि की पराकाष्ठा पर पहुंचेंगे। इसके बाद यह नारा काफी मजबूती के साथ आगे बढ़ रहा है। सबसे पहले अखिलेश यादव के जन्मदिन से पोस्टर वार की शुरुआत हुई थी। इसके बाद से भाजपा और सपा के बीच पोस्टर वार जारी है।

विदेशी निवेशक भारत में जमकर निवेश कर रहे , अप्रैल से जून में 12.2 अरब डॉलर कमाए

नई दिल्ली  विदेशी निवेशकों के लिए भारत सोने के अंडे देने वाली मुर्गी बना गया है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों, निजी इक्विटी फर्मों और स्थानीय स्तर पर परिचालन करने वाली कंपनियों ने डिविडेंड इनकम, प्रॉफिट और रिइनवेस्टेड अर्निंग्स के रूप में अप्रैल-जून तिमाही में कुल 12.2 अरब डॉलर कमाए। यह वह राशि है जो विदेशी निवेशकों ने तीन महीने के दौरान भारत से निकाली। यह पांच साल पहले की तुलना में दोगुना से भी अधिक है जो भारतीय फाइनेंशियल एसेट्स की मजबूत आय संभावनाओं को रेखांकित करता है। आरबीआई के आंकड़ों से यह भी पता चला है कि कुल इनवेस्टमेंट इनकम आउटफ्लो जून तिमाही में दोगुना से ज्यादा बढ़ा है। 2019 की अप्रैल-जून तिमाही में यह $11 अरब था जो इस साल इसी अवधि में $21.6 अरब हो गया है। अमेरिका स्थित कंसल्टेंसी बैन एंड कंपनी की एक रिपोर्ट के अनुसार 2024 की पहली छमाही में निजी इक्विटी से निकासी छह साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। एग्जिट डील वैल्यू में साल-दर-साल 40% की वृद्धि हुई, जो कैलेंडर वर्ष 2023 की पहली छमाही में $9.5 अरब से बढ़कर 2024 की पहली छमाही में $13.3 अरब हो गई। क्या कहते हैं जानकार PwC इंडिया के पार्टनर-रिस्क कंसल्टिंग और लीडर-फाइनेंशियल सर्विसेज और ट्रेजरी रिस्क मैनेजमेंट, कुंतल सूर ने कहा, ‘पिछले कुछ वर्षों में पीई फर्मों ने अच्छा मुनाफा कमाया है। बढ़ते शेयर बाजारों ने उन्हें लिस्टेड फर्मों में उनके निवेश के लिए अच्छा मूल्यांकन दिया। इससे उन्हें निवेशकों को अच्छा रिटर्न देने का मौका मिला। इसके अलावा कई निवेशकों के लिए ब्याज दरें अधिक होने के कारण उनके देशों में पुनर्निवेश के कई अवसर रहे हैं।’ बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा भारत में किए गए निवेश से प्राप्त लाभ और लाभांश भी निवेश आय में परिलक्षित होते हैं। बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा, ‘इसके दो कारक हैं। पहला, ऐसे समय में समग्र राजस्व में वृद्धि करना जब मंदी के कारण लाभ अस्थिर हो। दूसरा, विनिर्माण के कुछ क्षेत्रों में अतिरिक्त क्षमता को देखते हुए पुनर्निवेश की कम आवश्यकता महसूस की जाती है।’ जानकारों का कहना है कि यह आउटफ्लो चालू खाते पर दबाव बढ़ा सकता है और बाहरी क्षेत्र के संकेतकों के लिए हानिकारक हो सकता है। लेकिन अर्थशास्त्रियों का कहना है कि यह अभी भी चालू खाते के आउटफ्लो का एक छोटा हिस्सा है।

CM ने खुद सड़क की मरम्मत कर अभियान शुरू किया, अब आंध्र प्रदेश की सड़के होगी बेहरतर

अमरावती आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने राज्य की सड़कों को बेहरतर बनाने के लिए एक बड़ा अभियान शुरू किया। सीएम ने सड़कों को गड्ढा मुक्त करने के लिए इस अभियान की शुरुआत की। 861 करोड़ की लागत का अभियान 861 करोड़ रुपये की लागत के इस अभियान को सड़कों की समस्या को देखते हुए शुरू किया गया है। अनकापल्ली जिले के चिंतलागोर्लिवनिपालम गांव से राज्यव्यापी अभियान की शुरुआत करते हुए मुख्यमंत्री ने खुद एक गड्ढे को मोर्टार से भरकर उसकी मरम्मत की। CM ने खुद सड़क की मरम्मत की इस दौरान उनके साथ गृह मंत्री वांगलापुडी अनिता और अन्य नेता और अधिकारी भी मौजूद थे। बाद में उनकी मौजूदगी में एक बड़े गड्ढे को भी ट्रक से भरकर ठीक किया गया। नायडू ने खुद कुदाल उठाई और दक्षिणी राज्य में मरम्मत कार्यों को गति देने के लिए गड्ढे को समतल किया।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्य स्तरीय गोवर्धन पूजा समारोह को किया संबोधित, कहा- गायों की देखभाल गौ-शालाओं में होंगी

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश में गौ-पालन को बढ़ावा देकर किसानों और गौ-पालकों की आर्थिक सशक्तिकरण का कार्य किया जा रहा है। शहरों में कांजी हाऊस के स्थान पर गौ-वंश की देशभाल के लिए गौशालाएं प्रारंभ की जायेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के 51 हजार से अधिक ग्रामों में दूध का उत्पादन बढ़ाते हुए इस क्षेत्र में मध्यप्रदेश को पूरे देश में प्रथम स्थान पर लाने का प्रयास है। इसके साथ ही अगली पशुगणना में प्रदेश पहले तीसरे स्थान से पहले स्थान पर लाने के के समस्त प्रयास भी किये जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में गौ-वंश पालन पर क्रेडिट कार्ड देने की पहल की गई है। हमारे किसान भाई और पशुपालक दीपावली के बाद गोवर्धन पूजा करते हैं। प्रदेश में पहली बार शासन स्तर पर गोवर्धन पूजा के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य हमारी हजारों वर्ष पुरानी संस्कृति और गौ-माता के प्रति सम्मान की भावना को सशक्त करना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को रवींद्र भवन परिसर भोपाल में राज्य स्तरीय गोवर्धन पूजा समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उपस्थित नागरिकों को गोवर्धन पूजा की बधाई दी। प्रारंभ में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रवींद्र बहिरंग मंच पर गोवर्धन पूजा समारोह का दीप जलाकर शुभारंभ किया। दुग्ध सहकारिता क्षेत्र में लौह पुरूष सरदार पटेल के योगदान का किया स्मरण मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राष्ट्रीय डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड से अनुबंध कर प्रदेश में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने की रणनीति तैयार की गई है। लौह पुरूष सरदार वल्लभभाई पटेल ने दुग्ध सहकारिता आंदोलन को गति दी थी। आज “अमूल” के उत्पाद देश-विदेश में लोकप्रिय हैं। मध्यप्रदेश में गुजरात पैटर्न पर दुग्ध सहकारिता क्षेत्र में किसानों और पशुपालकों की सहायता के लिए ठोस कदम उठाए गए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दूध, घी और मक्खन के साथ गौ-काष्ठ का भी उपयोग हो रहा है। गोबर से खिलौने और कलाकृतियां तैयार की जा रही हैं। प्रदेश सरकार गौ-पालन को प्रोत्साहित करने के लिए गौ-शाला को प्रति गाय 20 रुपये के स्थान पर 40 रुपये के अनुदान का निर्णय ले चुकी है। जो पशुपालक 10 या उससे अधिक गायों का पालन करेंगे उन्हें भी विशेष अनुदान दिया जाएगा। प्रदेश में दुग्ध उत्पादन में वृद्धि के प्रयास किए जा रहे हैं। प्रदेश में वर्तमान में देश के कुल दुग्ध उत्पादन का 9 प्रतिशत उत्पादन हो रहा है, जिसे 20 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। सभी गाँव में दुग्ध संघ के माध्यम से गतिविधियां बढ़ाई जाएंगी। प्रारंभ में 11 हजार गाँव में दुग्ध सहकारी समितियों के माध्यम से दुग्ध उत्पादन में वृद्धि का प्रयास है। प्रदेश में इस वर्ष गौ-वंश रक्षा पर्व मनाया जा रहा है। गौ-वध के दोषी को मिलेगा 7 वर्ष का सख्त कारावास मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गौ-वंश से समृद्ध प्रदेश में गौ-माता के संरक्षण के लिये समुचित प्रावधान किये जा रहे है। गौ-वध को रोकने के लिये समुचित व्यवस्था की गई है। गौ-वध का दोषी पाये जाने पर 7 वर्ष की सख्त सजा देने का कानूनी प्रावधान है। प्रदेश है गौ-वंश में समृद्ध मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश गौ-वंश में समृद्ध है। प्रदेश में लगभग 1 करोड़ 39 लाख गायें हैं। वर्ष 2019 की पशु गणना के अनुसार मध्य प्रदेश तीसरे स्थान पर है। हम अगली पशुगणना में देश में प्रथम स्थान पर आने का प्रयास करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गौ-पालकों को प्रोत्साहन, गौ-वंश संरक्षण के सरकार के प्रयासों और योजनाओं की जानकारी दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में पशु चिकित्सा के लिये गौ-एंबुलेंस का संचालन भी किया जा रहा है। शहरों और ग्रामों में अर्थव्यवस्था में भी सहयोगी है गौ-पालन मुख्यमंत्री डॉ. ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के संकल्प को पूरा करने के लिए मध्यप्रदेश गौ-वंश संरक्षण सहित अन्य क्षेत्रों में कार्य कर रहा है। भारत विश्व में 5वीं बड़ी अर्थव्यवस्था है। शीघ्र ही भारत तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था होगा। ग्रामों में कृषि कार्य के साथ पशुपालन एवं गौ-पालन किसान की आर्थिक समृद्धि में सहयोगी है। शहरों में भी गौपालन से पशुपालक अपनी आय बढ़ा सकते हैं। मध्य प्रदेश इस क्षेत्र में निरंतर कार्य कर रहा है। पशुधन संरक्षण के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज राज्य स्तर पर गोवर्धन पूजा कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि पूरे प्रदेश में कार्यक्रमों में हिस्सा ले रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गोवर्धन पूजा हमारी संस्कृति की प्रतीक भी है, जिससे विश्व में भारत की पहचान है। मानवता का संरक्षण करती है गाय मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण और गोवर्धन पर्वत की पूजा को समर्पित इस पर्व से संबंधित यह मान्यता भी है कि भगवान श्रीकृष्ण ने वृंदावन क्षेत्र के नागरिकों को आपदाओं से बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत उठाया था। यह घटना भगवान द्वारा उन भक्तों को सुरक्षा देने का भी प्रतीक है, जो उनकी शरण में आते हैं। गोवर्धन पूजा में अन्न का पर्वत बनाया जाता है, इसे अन्नकूट कहा जाता है। भगवान श्रीकृष्ण के गायों के प्रति प्रेम से ही उनका नाम गोपाल हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विश्व के हर देश में गौपालन देखने को मिलता है। उन्होंने कहा कि हमारे प्रदेश में मालवी गाय विशिष्ट है। गाय माँ के समान है, वह सृष्टि की जननी भी मानी गई है। शास्त्रों के अनुसार ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना के बाद सर्वप्रथम गाय को ही पृथ्वी पर भेजा था। गाय माँ लक्ष्मी का भी स्वरूप है और इसे कामधेनु भी माना जाता है। गाय के दूध में जो पोषक तत्व हैं, वह अन्य दुधारू पशुओं के दूध में नहीं है। इस तरह गाय कई रूपों में मानवता का संरक्षण करती है। शहरों में प्रारंभ होंगी बड़ी गौ-शालाएं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गौपालन एवं गौ संरक्षण के कार्यों को दृष्टिगत रखते हुए इंदौर, भोपाल, उज्जैन, ग्वालियर जैसे शहरों में जहाँ हजारों की संख्या में गौ-वंश है, बड़ी गौशालाएँ प्रारंभ की जायेगी। शहरों की गौशालाओं में 5 हजार से लेकर 10 हजार तक गौवंश को रखने की व्यवस्था होगी। राज्य सरकार ने वर्ष 2024-25 में पशुधन संरक्षण और पशुपालन गतिविधियों के लिए 590 करोड़ रूपए की राशि का प्रावधान किया … Read more

पलक्कड़ में दर्दनाक हादसा, हादसे में ट्रेन की चपेट में आने से 4 सफाई कर्मचारियों की मौत

केरल केरल के पलक्कड़ में शनिवार को दर्दनाक हादसा हो गया। जानकारी के मुताबिक, केरल एक्सप्रेस की चपेट में आने से चार सफाई कर्मचारियों की मौत हो गई। मृतकों की पहचान वल्ली, रानी, ​​लक्ष्मण और एक अन्य अज्ञात पुरुष के रूप में हुई है, सभी तमिलनाडु के रहने वाले थे। यह घटना शनिवार शाम को भरतपुझा नदी पर बने शोरनूर रेलवे पुल पर घटी। रिपोर्ट्स के अनुसार, जब ट्रेन ने उन्हें टक्कर मारी, तब वे पुल पर चल रहे थे। एक व्यक्ति के शव को खोजने के लिए नदी में तलाश जारी है। यूपी में भी कई लोगों की मौत इससे पहले उत्तर प्रदेश के लखनऊ-गोंडा रेल मार्ग  पर बहराइच के जरवल रोड थाना क्षेत्र में शुक्रवार सुबह मालगाड़ी से कटकर दो महिलाओं की मौत हो गई। जरवल रोड थानाक्षेत्र में झुकिया गांव की शाहजहां (42) और सलमा (40) रेलवे ट्रैक पार कर खेतों में नित्य क्रिया हेतु गई थीं। वापसी में वे ट्रेन की आवाज सुनकर दूसरे ट्रैक के बीच रूक गईं और ट्रेन के निकलने का इंतजार करने लगीं। सूत्रों के मुताबिक इसी बीच, जिस ट्रैक पर दोनों खड़ी थीं, उसी पर एक अन्य ट्रेन (मालगाड़ी) आ गई। मालगाड़ी की चपेट में आने से दोनों की मौके पर ही मृत्यु हो गई। जरवल रोड थाना प्रभारी बृजराज प्रसाद ने बताया कि शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। वहीं, उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में दिल्ली हावड़ा रेल मार्ग पर इकदिल इलाके में कुरट गांव के पास रेलवे लाइन के किनारे रील बना रहे दो दोस्तों की यात्री रेलगाड़ी की चपेट में आने से दर्दनाक मौत हो गई। इटावा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह दर्दनाक हादसा आज तड़के सुबह सात बजे के आसपास तब घटित हुआ, जब दो दोस्त रेलवे लाइन के किनारे मोबाइल फोन से रील बना रहे थे तभी एक यात्री ट्रेन की चपेट में आने से दोनों की दर्दनाक मौत हो गई है।

‘कांग्रेस से दूर रहो कहते थे बाला साहेब , लेकिन उद्धव ने…’, शिंदे ने बताया क्यों किया था ‘तख्तापलट’

मुंबई महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने विधानसभा चुनाव के बीच में उद्धव ठाकरे पर शिवसेना में फूट डालने का आरोप लगाया है। एएनआई को दिए एक खास इंटरव्यू में शिवसेना में हुए विभाजन पर बोलते हुए सीएम शिंदे ने कहा कि मैं महाविकास अघाड़ी सरकार का हिस्सा था, लेकिन जो सरकार बनी। वह बाला साहेब ठाकरे के आदर्शों के खिलाफ थी। शिवसेना और बीजपी का गठबंधन ही आगे का सही रास्ता था। हालांकि उद्धव ठाकरे के निजी स्वार्थों के कारण कांग्रेस के साथ गठबंधन हुआ, जो बाला साहेब कभी नहीं चाहते थे। इसके चलते पार्टी अनुशासन का पालन करते हुए और बदलाव लाने के लिए उन्होंने बीजेपी के साथ गठबंधन किया। शिंदे ने क्याें उठाया कदम? शिंदे ने आगे कहा कि शिवसेना कार्यकर्ता होने के नाते हमने पार्टी अनुशासन का पालन किया और बदलाव की जरूरत को महसूस किया। हमने शिवसेना-बीजेपी गठबंधन सरकार बनाने का प्रयास किया लेकिन हम असफल रहे और दुर्भाग्य से हमारी पार्टी और कार्यकर्ताओं को जो नुकसान हो रहा था, हमने महाराष्ट्र के लोगों की सुनने का फैसला किया, जो शिवसेना-बीजेपी गठबंधन चाहते थे। हमारे विधायक भी थके हुए थे क्योंकि उनके क्षेत्रों में कोई काम नहीं हो रहा था। इसलिए हमने सरकार बदली और बीजेपी और शिवसेना के गठबंधन के साथ एक नई सरकार बनाई। महायुति सरकार की तारीफ महायुति सरकार की सराहना करते हुए सीएम शिंदे ने गर्व किया कि इस सरकार ने निजी लाभ से ऊपर लोगों के हितों को प्राथमिकता दी। उन्होंने कहा कि महायुति सरकार ने उन परियोजनाओं को फिर से शुरू किया जिन्हें MVA सरकार ने रोक दिया था। महायुति की उपलब्धि पर प्रकाश डालते हुए सीएम शिंदे ने कहा कि उनके शासन के दौरान महाराष्ट्र जीडीपी, एफडीआई, जीएसटी या स्वच्छता, हर क्षेत्र में शीर्ष पर रहा। उन्होंने कहा कि राज्य ने उनके शासनकाल में ही 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आकर्षित किया। दो साल के काम का बखान सीएम शिंदे ने कहा कि मुझे गर्व और खुशी है कि हमने निजी लाभ से ऊपर लोगों के हितों को प्राथमिकता दी। पिछले दो सालों में हमारी सरकार को उसके काम के लिए सराहना मिली है। पहले दिन से ही हमने किसानों, श्रमिकों, युवाओं पर ध्यान केंद्रित किया, और विकास परियोजनाएं। हमने मेट्रो, बुलेट ट्रेन और राजमार्गों जैसी रुकी हुई परियोजनाओं को फिर से शुरू किया। इससे महाराष्ट्र निवेश के अनुकूल बना। आज मैं गर्व से कहता हूं कि हमने 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आकर्षित किया है। MVA शासन के दौरान महाराष्ट्र तीसरे स्थान पर था, लेकिन जब हम आए, तो महाराष्ट्र जीडीपी, एफडीआई, जीएसटी और स्वच्छता में शीर्ष पर रहा। हमारी कल्याणकारी योजनाएं, जैसे लाडली बहना योजना आदि लड़कियों को वजीफा और मुफ्त उच्च शिक्षा प्रदान करती हैं। हमने दो सालों में बहुत कुछ हासिल किया है और मैं आभारी हूं। केंद्र की कठपुतली वाले आरोप पर क्या बोले? यह पूछे जाने पर कि विपक्ष उनकी सरकार को केंद्र सरकार की कठपुतली बता रहा है। इस पर सीएम शिंदे ने कहा कि जब से महाराष्ट्र में डबल इंजन की सरकार आई है, राज्य को केंद्र से कई लाभ मिले हैं। उन्होंने कहा कि महायुति सरकार की ‘कड़ी मेहनत’ को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने सराहा है। शिंदे ने कहा, मुझे खुशी है कि पिछले दो सालों में हमारी सरकार की कड़ी मेहनत को पीएम नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने सराहा है। एमवीए सरकार पर हमला पिछली MVA सरकार पर परोक्ष हमला करते हुए सीएम शिंदे ने कहा कि सीएम होने का मतलब लोगों की सेवा करना है, न कि केवल फेसबुक लाइव के जरिए सरकार चलाना। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी सरकार सुनती है और काम करती है, बहरी या गूंगी नहीं है। हमारी सरकार किसानों को प्राथमिकता देती है, सहायता और समर्थन प्रदान करती है। हमने किसानों के लिए 15,000 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं और विभिन्न योजनाएं लागू की हैं। यह किसानों की सरकार है।

RSS का प्लान सत्तारूढ़ गठबंधन के पक्ष में वोटरों की गोलबंदी करना और विपक्षी एमवीए को सत्ता में आने से रोकना

मुंबई महाराष्ट्र में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने राज्य में बड़े पैमाने पर जनसंपर्क कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बनाई है. जिस तरह हरियाणा विधानसभा चुनाव में संघ ने पर्दे के पीछे से अहम भूमिका निभाई थी, उसी तर्ज पर महाराष्ट्र में भी वोटरों को भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन के पक्ष में करने के लिए बड़े पैमाने पर यह कार्यक्रम चलाया जाएगा. आरएसएस के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, संगठन, मतदाता जागरूकता पर ध्यान केंद्रित करते हुए राज्य भर में 300,000 से अधिक छोटी बैठकें आयोजित करने वाला है. इस रणनीतिक बदलाव के तहत आरएसएस एक सुव्यवस्थित मशीनरी के रूप में काम करेगा, जो जनमत को प्रभावित करने और चुनावी परिदृश्य को आकार देने के लिए अपने विशाल नेटवर्क का लाभ उठाएगा. पिछले चुनावों में जहां आरएसएस ने मुख्य रूप से मतदाता जागरूकता पर ध्यान केंद्रित किया था वहीं इस बार इसके उलट कार्यक्रमों को रिजल्ट में तब्दील करने के लिए अधिक सक्रिय दृष्टिकोण अपना रहा है. सूत्रों ने आज को बताया कि आरएसएस अपने अभियान के हिस्से के रूप में तीन बड़े कार्यक्रम आयोजित करने जा रहा है- 1-संविधान सम्मान: कांग्रेस के ‘संविधान बचाओ’ अभियान का जवाब? राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) “संविधान सम्मान” नामक एक विशाल अभियान शुरू करने जा रहा है. इसे कांग्रेस पार्टी के “संविधान बचाओ” अभियान के जवाब के रूप में देखा जा रहा है. आरएसएस के इस अभियान का उद्देश्य यह उजागर करना है कि कैसे कांग्रेस पार्टी ने कथित तौर पर बार-बार संविधान का अपमान किया है, साथ ही समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के खिलाफ़ जाकर बाधाए भी पैदा की हैं. आरएसएस के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कांग्रेस पार्टी की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा, “जब आप संविधान के मूल के खिलाफ़ जा रहे हैं तो आप संविधान को बचाने की बात कैसे कर सकते हैं?” पदाधिकारी ने इस बात पर भी निराशा व्यक्त की कि कांग्रेस पार्टी ने अपने 70 साल के शासन के दौरान भारतीय संविधान के निर्माता बाबा साहेब अंबेडकर की शिक्षाओं का कभी सम्मान नहीं किया. पदाधिकारी ने कहा, “बाबा साहेब अंबेडकर के खिलाफ साजिश रचने वाले और उनकी शिक्षाओं के खिलाफ़ जाने वाले लोग यह दावा नहीं कर सकते कि वे भारत के संविधान का सम्मान करते हैं. बहुत से लोग नहीं जानते कि आज भी आरएसएस की सुबह की प्रार्थना में बाबा साहेब अंबेडकर का नाम होता है.” 2- लोकमत परिष्कर यह लोकतंत्र को मजबूत करने पर केंद्रित एक अभियान होगा. इसमें आरएसएस द्वारा उम्मीदवारों के अच्छे और बुरे पहलुओं को उजागर किया जाएगा और विभिन्न राजनीतिक दलों के घोषणापत्रों पर चर्चा की जाएगी. 3- सजग बनो ‘सजग बनो’ एक बैठकों की एक सीरीज है, जिसमें आरएसएस लोगों से वोट डालने से पहले सावधानी से सोचने का आग्रह करेगा, लोकतंत्र की पवित्रता बनाए रखने के महत्व पर जोर देगा. हरियाणा में अपनी सफलता को दोहराने के लिए, आरएसएस ने महाराष्ट्र में अपने स्वयंसेवकों के माध्यम से 50,000 से अधिक छोटी बैठकें और जनसंपर्क प्रयास शुरू कर दिए हैं. अभियान की सफलता आरएसएस की भाजपा के नेतृत्व वाले सत्तारूढ़ गठबंधन, महायुति के पक्ष में जनमत करने और विपक्षी महा विकास अघाड़ी (एमवीए) के सत्ता हासिल करने के प्रयासों का मुकाबला करने की क्षमता पर निर्भर करेगी.  

अडानी कंपनी का बांग्लादेश पर 846 मिलियन डॉलर का बकाया, आधी की सप्लाई!

ढाका  दिवाली के बाद बांग्लादेश की बत्ती गुल होने के आसार बन रहे हैं। दरअसल, अडानी ग्रुप की कंपनी अडानी पावर झारखंड लिमिटेड ने बांग्लादेश को बिजली की सप्लाई आधी कर दी है। सप्लाई रोकने का कारण बिजली के बकाया बिलों का पेमेंट नहीं होना है। यदि मसला हल नहीं हुआ तो हो सकता है कि आने वाले दिनों में बांग्लादेश में अंधेरा छा जाए। 846 मिलियन डॉलर का है बकाया स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अडानी पावर की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी अडानी पावर झारखंड लिमिटेड (APJL ) ने बांग्लादेश को अपनी आधी बिजली की सप्लाई रोक दी है। कंपनी का उसके ऊपर 846 मिलियन डॉलर का बकाया है। द डेली स्टार अखबार के मुताबिक पावर ग्रिड बांग्लादेश पीएलसी के आंकड़ों से पता चला है कि अडानी प्लांट ने गुरुवार रात को आपूर्ति कम कर दी। अखबार ने बताया कि बांग्लादेश ने गुरुवार और शुक्रवार की दरम्यानी रात को 1,600 मेगावाट (MW) से अधिक की कमी की सूचना दी, क्योंकि 1,496 मेगावाट का प्लांट अब एक यूनिट से 700 मेगावाट बिजली का उत्पादन कर रहा है। 30 अक्टूबर तक बकाया भरने को कहा था इससे पहले अडानी कंपनी ने ऊर्जा सचिव को पत्र लिखकर बांग्लादेश पावर डेवलपमेंट बोर्ड (PDB) से 30 अक्टूबर तक बकाया राशि का भुगतान करने को कहा था। 27 अक्टूबर को लिखे पत्र में कहा गया था कि यदि बिलों का भुगतान नहीं किया गया तो कंपनी 31 अक्टूबर को बिजली आपूर्ति बंद कर पावर परचेज एग्रीमेंट (PPA) के तहत सुधारात्मक कार्रवाई करने को बाध्य होगी। कंपनी ने कहा कि पीडीबी ने न तो बांग्लादेश कृषि बैंक से 170.03 मिलियन अमरीकी डालर की राशि के लिए लेटर ऑफ क्रेडिट (LC) उपलब्ध कराया है और न ही 846 मिलियन अमरीकी डालर की बकाया राशि का भुगतान किया है। अडानी भेज रहा है ज्यादा बिल? अखबार ने पीडीबी के एक अधिकारी के हवाले से कहा कि उन्होंने पहले पिछले बकाए का एक हिस्सा चुका दिया था, लेकिन जुलाई से अडानी पिछले महीनों की तुलना में अधिक पैसे ले रहा है। उन्होंने कहा कि पीडीबी करीब 18 मिलियन अमरीकी डालर का साप्ताहिक भुगतान कर रहा है, जबकि शुल्क 22 मिलियन डालर से अधिक है। उन्होंने कहा, “इसी कारण से बकाया भुगतान फिर से बढ़ गया है।” बकाया भुगतान का दवाब तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना के हटने के बाद जब से नोबेल पुरस्कार विजेता प्रोफेसर मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में एक अंतरिम सरकार का कार्यभार संभाला है, तभी से अडानी बकाया भुगतान करने का दबाव बना रहे हैं। अडानी समूह के अध्यक्ष गौतम अडानी ने भी मुख्य सलाहकार यूनुस को इस बारे में पत्र लिखा था।

Parliament Winter Session की तारीख का एलान, जानें कब से शुरू होगा?

नई दिल्ली संसद का शीतकालीन सत्र 25 नवंबर से शुरू होगा. यह 20 दिसंबर तक चलेगा. इस दौरान कई अहम बिलों पर चर्चा होगी. शीतकालीन सत्र के दौरान वन नेशन-वन इलेक्शन और वक्फ विधेयक बिल पर भारी हंगामा होने के आसार है. वन नेशन-वन इलेक्शन पर रिपोर्ट को कैबिनेट से मंजूरी के बाद बिल को शीतकालीन सत्र में पेश किया जाएगा. बता दें कि विपक्षी दल वन नेशन-वन इलेक्शन का विरोध कर रहे हैं और देश में एक साथ चुनाव के पक्ष में नहीं हैं. इसके अलावा वक्फ विधेयक पर गठित जेपीसी संसद के शीतकालीन सत्र में अपनी रिपोर्ट पेश कर सकती है. इस पर भी हंमामे के आसार हैं. बता दें कि हाल ही में गृहमंत्री अमित शाह ने वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024 पर बोलते हुए कहा था कि यह विधेयक संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान पारित किया जाएगा. संसद के शीतकालीन सत्र में वन नेशन वन इलेक्शन और वक्फ विधेयक पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। इन दोनों मुद्दों को लेकर सत्र के काफी हंगामेदार रहने के आसार हैं। वन नेशन वन इलेक्शन पर कैबिनेट से मंजूरी मिल चुकी है, अब इस बिल को शीतकालीन सत्र में पेश किया जाएगा। हालांकि विपक्षी दल इसका विरोध कर रहे हैं। ऐसे में सरकार के लिए यह बिल पास कराना काफी मुश्किल होगा। शीतकालीन सत्र 25 नवंबर से शुरू होगा, जिसमें विशेष संयुक्त बैठक संविधान सदन (पुरानी संसद भवन) के केंद्रीय हॉल में आयोजित होने की सकती है. इसी स्थान पर 1949 में संविधान को अंगीकृत किया गया था. संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ था।पहले, 26 नवंबर को राष्ट्रीय कानून दिवस के रूप में मनाया जाता था, लेकिन 2015 में मोदी सरकार ने इसे संविधान दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की, जिसमें डॉ. भीमराव अंबेडकर की 125वीं जयंती को याद किया गया। सूत्रों ने बताया कि संविधान के महत्व को रेखांकित करने के लिए व्यापक योजना बनाई जा रही है, जिसमें डॉक्यूमेंट्री बनाना, संविधान सभा की बहसों का लगभग दो दर्जन भाषाओं में अनुवाद करना, और सार्वजनिक मार्च का आयोजन शामिल है।एनडीए और इंडी गठबंधन दोनों ही खुद को संविधान के “रक्षक और अनुयायी” के रूप में प्रस्तुत करने की राजनीति में लगे हुए हैं। कांग्रेस के नेतृत्व वाले इंडी गठबंधन ने बीजेपी के नेतृत्व वाले गठबंधन पर संविधान और संवैधानिक मूल्यों को “नष्ट” करने का आरोप लगाया है, जबकि बीजेपी और उसके सहयोगी कांग्रेस को निशाना बना रहे हैं. इस साल जुलाई में सरकार ने आपातकाल की याद में 25 जून को ‘संविधान हत्या दिवस’ के रूप में अधिसूचित किया था।

हिंदुओं का बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस सरकार के खिलाफ फूटा गुस्सा , सड़कों पर उतरे हजारों, उठाई ये मांग

ढाका बांग्लादेश में लगातार हो रहे हमलों और उत्पीड़न के विरोध में एक बार फिर बड़ी संख्या में हिंदू सड़क पर उतरे। इस दौरान हिंदुओं ने बड़ी रैली निकाली। करीब 30 हजार से अधिक हिंदुओं ने चटगांव में एक चौराहे पर अधिकारों की मांग को लेकर नारेबाजी की। इस दौरान हिंदुओं ने कहा कि अंतरिम सरकार उनको सुरक्षा मुहैया नहीं करा पा रही है। बांग्लादेश हिंदू-बौद्ध-ईसाई एकता परिषद ने कहा कि चार अगस्त से हिंदुओं पर 2000 से अधिक हमले हुए हैं। हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों का कहना है कि अंतरिम सरकार ने उन्हें पर्याप्त रूप से सुरक्षा नहीं दी है। हसीना के सत्ता से हटने के बाद से कट्टरपंथी इस्लामवादी तेजी से प्रभावशाली होते जा रहे हैं। वहीं अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस का कहना है कि हमलों के आंकड़े को बढ़ा-चढ़ाकर बताया जा रहा है। बता दें कि देश की लगभग 17 करोड़ आबादी में हिंदू लगभग 8 प्रतिशत हैं, जबकि मुस्लिम लगभग 91% हैं। इससे पहले 26 अक्तूबर को  अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और अधिकारों की मांग को लेकर सनातन जागरण मंच ने चटगांव में एक विशाल रैली का आयोजन किया था। आठ प्रमुख मांगों को लेकर हिंदू अल्पसंख्यकों ने आवाज बुलंद की थी। कार्यकर्ताओं ने कहा कि जब तक बांग्लादेश की सरकार उनकी मांगों को पूरा नहीं करेगी, तब तक प्रदर्शन जारी रहेगा। हिंदुओं पर 2000 से अधिक हमले देश के प्रभावशाली अल्पसंख्यक समूह ‘बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई यूनिटी काउंसिल’ ने कहा है कि चार अगस्त के बाद से हिंदुओं पर 2,000 से अधिक हमले हुए हैं। हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों का कहना है कि अंतरिम सरकार ने उनकी पर्याप्त सुरक्षा नहीं की है और हसीना के जाने के बाद कट्टरपंथी इस्लामवादी तेजी से प्रभावशाली होते जा रहे हैं। बांग्लादेश में क्या हुआ? नौकरियों में विवादास्पद कोटा प्रणाली को लेकर सरकार के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन किया गया था, जो बाद में हिंसा में बदल गया। बढ़ती हिंसा को देखते हुए पांच अगस्त को हसीना ने इस्तीफा दे दिया था और भारत चली गई थीं। हसीना के नेतृत्व वाली सरकार को अंतरिम सरकार द्वारा प्रतिस्थापित किया गया और 84 वर्षीय नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस को इसका मुख्य सलाहकार नामित किया गया। हालांकि, अंतरिम सरकार बनने के बाद भी अल्पसंख्यकों के घरों और धर्मस्थलों को निशाना बनाया गया।   बांग्लादेश में हजारों हिंदू सड़कों पर उतरे हैं ढाका: बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के हजारों सदस्यों ने शनिवार को रैली निकालकर अंतरिम सरकार से सिलसिलेवार हमलों व उत्पीड़न से सुरक्षा देने और इस समुदाय के नेताओं के खिलाफ दर्ज राजद्रोह के मामलों को रद्द करने की मांग की। लगभग 30,000 हिंदुओं ने दक्षिण-पूर्वी शहर चटगांव के एक प्रमुख चौराहे पर रैली करते हुए नारे लगाए। देश में अन्य जगहों पर भी विरोध प्रदर्शन होने की सूचना मिली। हिंदू समूहों का कहना है कि अगस्त की शुरुआत में प्रधानमंत्री शेख हसीना की धर्मनिरपेक्ष सरकार के बेदखल होने और हसीना के देश छोड़कर चले जाने के बाद हिंदुओं के खिलाफ हजारों हमले हुए हैं। हसीना की सरकार के पतन के बाद नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार का गठन किया गया था। छात्रों का आंदोलन हिंसक होने के बाद शेख हसीना देश छोड़कर चली गई थीं। बांग्लदेश की आबादी लगभग 17 करोड़ है, जिनमें हिंदुओं की आबादी करीब आठ प्रतिशत है जबकि 91 प्रतिशत आबादी मुसलमान है। हिंदुओं पर 2000 से अधिक हमले देश के प्रभावशाली अल्पसंख्यक समूह ‘बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई यूनिटी काउंसिल’ ने कहा है कि चार अगस्त के बाद से हिंदुओं पर 2,000 से अधिक हमले हुए हैं। हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों का कहना है कि अंतरिम सरकार ने उनकी पर्याप्त सुरक्षा नहीं की है और हसीना के जाने के बाद कट्टरपंथी इस्लामवादी तेजी से प्रभावशाली होते जा रहे हैं। हिंदू नेताओं पर देशद्रोह का केस शहर में 25 अक्टूबर की रैली को लेकर प्रमुख पुजारी चंदन कुमार धर समेत 19 हिंदू नेताओं के खिलाफ बुधवार को राजद्रोह के आरोप में मामला दर्ज किया गया था। इसके खिलाफ शुक्रवार को चटगांव में विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया। दो नेताओं की गिरफ्तारी से हिंदू समुदाय के लोग नाराज हैं।  

अनंतनाग में सुरक्षाबलों के साथ हुई इस मुठभेड़ में दो आतंकवादी मारे गए, श्रीनगर में भी मुठभेड़ जारी

अनंतनाग जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले में सुरक्षाबलों और आतंकवादियों के बीच शनिवार को मठभेड़ में दो आतंकवादी मारे गए। पुलिस ने यह जानकारी दी है। अधिकारियों ने बताया कि दक्षिण कश्मीर जिले के शांगस-लारनू इलाके में हलकान गली के पास यह मुठभेड़ हुई। उन्होंने बताया कि सुरक्षाबलों के साथ हुई इस मुठभेड़ में दो आतंकवादी मारे गए हैं, जिनसें से एक स्थानीय और दूसरा विदेशी नागरिक है। अभी इस बात का पता नहीं चल पाया है कि वे किस आतंकवादी समूह के सदस्य थे। अधिकारी ने बताया कि इलाके में अब भी अभियान जारी है तथा आगे की जानकारी का इंतजार है।अधिकारियों के अनुसार, श्रीनगर के खानयार इलाके में सुरक्षाबलों और आतंकवादियों के बीच एक और मुठभेड़ जारी है, अब तक दोनों ओर से किसी के हताहत होने की कोई जानकारी नहीं है। आधिकारिक प्रवक्ता के मुताबिक आतंकवादियों की मौजूदगी की सूचना मिलने के बाद पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल ने पुराने श्रीनगर के खानयार इलाके में शुक्रवार की रात संयुक्त घेराबंदी और तलाश अभियान शुरू किया । इसी दोनों पक्षों के बीच मुठभेड़ शुरू हो गई। इसके अलावा बांदीपोरा जिले में कल रात गोलीबारी के बाद बड़े पैमाने पर तलाश अभियान जारी है।उन्होंने बताया कि बांदीपोरा के पनार इलाके में संदिग्ध गतिविधियां देखी गयी। जब आतंकवादियों को ललकारा गया तो उन्होंने अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी और जंगल में भाग गए। दिवाली के मौके पर आतंकवादी घाटी को दहलाने की साजिश कर रहे थे लेकिन खुफिया एजेंसियों और सुरक्षाबलों की सतर्कता की वजह से साजिश नाकाम हो गई। कश्मीर घाटी में सेना के अभियान की वजह से लगातार आतंकियों का सफाया किया जा रहा है। ऐसे में बौखलाए आतंकवादी अब प्रवासी मजदूरों को निशाना बना रहे हैं। शुक्रवार को आतंकियों ने यूपी के दो प्रवासी मजदूरों को गोली मार दी थी। उनका इलाज अस्पताल में चल रहा है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने श्रमिकों और सफाईकर्मियों को मिठाईयां और उपहार देकर बांटी दीपोत्सव और राज्योत्सव की खुशियां

छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस पर 11 हजार दीपों से रौशन हुआ एकात्म पथ छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस पर रंग बिरंगी आतिशबाजी से आसमान हुआ सतरंगी मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने श्रमिकों और सफाईकर्मियों को मिठाईयां और उपहार देकर बांटी दीपोत्सव और राज्योत्सव की खुशियां रायपुर छत्तीसगढ़ राज्य की 24 वीं वर्षगांठ और दीपावली के अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय नया रायपुर के एकात्म पथ पर आयोजित 11,000 दीपों के प्रज्ज्वलन कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने मंत्रोच्चार के बीच विधि विधान से दीप प्रज्ज्वलित कर प्रदेश की खुशहाली की कामना की। यह आयोजन राज्य की सांस्कृतिक धरोहर और एकता का प्रतीक है, जिससे छत्तीसगढ़ की संस्कृति को प्रदर्शित किया गया । दीपों की रौशनी से नई ऊर्जा और उत्साह का संचार हुआ, जो राज्य के गौरव को बढ़ाएगा । इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री अरूण साव, विधायक पुरंदर मिश्रा, मोतीलाल साहू, गुरु खुशवंत साहेब, इंद्र कुमार साहू, मुख्य सचिव अमिताभ जैन, मुख्यमंत्री के सचिव पी. दयानंद और बसव राजू एस.सहित अनेक जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ अधिकारी, गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। इस मौके पर एकात्मपथ में 11 हजार दीप प्रज्ज्वलित किए गए। छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस पर नया रायपुर के कार्यक्रम में दीप प्रज्ज्वलन के साथ शानदार आतिशबाजी और रंग-बिरंगी लाइटों ने सभी को रोमांचित कर दिया। इस अवसर पर मधुर संगीत की धुनों ने माहौल को और भी मनोरम बना दिया। स्थल पर आकर्षक रंगोली सजाई गई थी, और स्थापना दिवस के प्रतीक चिन्हों के साथ सेल्फी पॉइंट पर लोगों ने सेल्फी लेकर खुशी जताई। इस अवसर पर नवा रायपुर में नवनिर्मित सीबीडी रेलवे स्टेशन के पास आयोजित कार्यक्रम में और एकात्मपथ पर श्रमिकों और सफाईकर्मियों को दीपावली के उपलक्ष्य में मिठाईयां वितरित कर शुभकामनाएं दीं। छत्तीसगढ़ राज्य की स्थापना 1 नवंबर 2000 को पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेई के नेतृत्व में मध्य प्रदेश से अलग करके की गई थी, यह राज्य पुनर्गठन भारत के राजनीतिक और प्रशासनिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। छत्तीसगढ़ की स्थापना के पीछे का मुख्य उद्देश्य इस क्षेत्र में विकास की गति को तेज करने के साथ यहां की विशिष्ट सांस्कृतिक और भाषाई पहचान को मान्यता देना और लोगों को बेहतर प्रशासनिक सुविधा प्रदान करना था। आज, राज्य अपनी 24वीं स्थापना वर्षगांठ मना रहा है और अपनी समृद्ध संस्कृति और विविधता के साथ देश की विकास यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यह दिन राज्य के लोगों के लिए गर्व और उत्सव का अवसर है।  

सीएम मोहन बोले- पशुधन के प्रति कर्तव्यों की याद दिलाता है गोवर्धन पूजा पर्व

भोपाल  प्रदेश की मोहन सरकार गोवर्धन पूजा का पर्व पूरे उल्लास के साथ मना रही है। इस पर्व के मौके पर शनिवार को राजधानी के रवींद्र भवन में राज्यस्तरीय गोवर्धन पूजा कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें मुख्य अतिथि के तौर पर मुख्यमंत्री मोहन यादव शामिल हुए। सीएम ने रवींद्र भवन परिसर में वैदिक मंत्रोच्‍चार के बीच विधि-विधान पूर्वक भगवान गोवर्धन की पूजा-अर्चना की। गोवर्धन पूजा कार्यक्रम के दौरान प्रदेश के पशुपालन एवं डेयरी विकास मंत्री लखन पटेल ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को गोबर से निर्मित “राम दरबार” भेंट कर उनका अभिनंदन किया। कार्यक्रम में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा, प्रदेश सरकार के मंत्री विश्वास सारंग, कृष्णा गौर, लखन पटेल, सांसद आलोक शर्मा, विधायक रामेश्वर शर्मा, भगवान दास सबनानी, जिला अध्यक्ष सुमित पचौरी सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। कार्यक्रम में स्वामी अच्युतानंद और गोसंरक्षण के क्षेत्र में विशेष कार्य करने वाले स्वामी हरिओमानंद भी विशेष रूप से उपस्थित थे।इस दौरान मुख्यमंत्री ने गोसेवा करने वाले 10 श्रेष्ठ गोपालकों का सम्मान भी किया। गोवर्धन पूजा से शुरू होती है किसानों की दिवाली इस मौके पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम के मंच से अपने संबोधन में कहा कि गोवर्धन पूजा हमारी संस्कृति का प्रतीक है। हमारे किसानों की दीपावली तो गोवर्धन पूजा से ही प्रारंभ होती है। फसलों का उत्पादन करने के लिए तो किसानों को क्रेडिट कार्ड मिलता ही है, लेकिन अब गोवंश पालने वालों को भी क्रेडिट कार्ड दिया जाएगा, ताकि वह गोवंश के पालन के लिए धन का इंतजाम कर सकें। उन्होंने कहा कि 10 से ज्यादा गोवंश पालने वालों को विशेष अनुदान दिया जाएगा। हमने फैसला किया है कि नगर निगम क्षेत्र में 5 हजार से 10000 गोवंश के पालन के लिए जो भी खर्च आएगा, उसका प्रबंधन राज्य सरकार करेगी। दुग्ध उत्पादन बढ़ाने पर जोर सरकार ने यह भी तय किया है कि आने वाले समय में गोवंश का पालन करने और दुग्ध उत्पादन करने वालों को बोनस भी दिया जाएगा। इसके लिए सरकार ने गुजरात के अमूल संस्थान की गतिविधियों का परीक्षण कराया है और इसके साथ ही नेशनल डेयरी बोर्ड के साथ प्रदेश के सभी गांव में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने पर जोर दे रही है। पंचगव्य उत्पादों की प्रदर्शनी लगी कार्यक्रम स्थल पर गोवर्धन पर्व के सांस्कृतिक एवं आर्थिक महत्व पर केन्द्रित इस आयोजन में गोसंस्कृति, परिवेश के प्रदर्शन और स्वास्थ्य आधारित लाभों पर केन्द्रित प्रदर्शनी भी लगाई गई है। इस प्रदर्शनी में मुख्य रूप से पंचगव्य उत्पाद, गोशिल्प उत्पाद, कृषि आधारित उत्पाद और दैनिक उपयोग के उत्पाद के आर्थिक महत्व को प्रदर्शित किया गया है। सभी जिलों की किसी एक प्रमुख गोशाला में भी गोवर्धन पूजा के कार्यक्रम हो रहे हैं। सीएम ने की गोसेवा इससे पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आज सीएम हाउस में विधिवत पूजा-अर्चना कर गौमाता की सेवा की और उनके प्रति अपने श्रद्धा-भाव को व्यक्त किया। इस मौके पर उन्होंने प्रदेशवासियों को संदेश देते हुए कहा कि हमारी संस्कृति ‘उत्सव प्रधान’ संस्कृति है। हमारे वेदों में कहा गया है “गावो विश्वस्य मातरः” अर्थात् गाय संसार की माता है। प्रदेश सरकार गौवंश के संरक्षण के लिए तेज गति से कार्य कर रही है। गोवर्धन पूजा का यह पर्व हमें प्रकृति और पशुधन के प्रति हमारे कर्तव्यों की याद दिलाता है।

मुख्यमंत्री ने आगर-मालवा में 49 करोड़ से अधिक के विकास कार्यों का किया लोकार्पण/भूमि-पूजन

भारतीय संस्कृति गीता, गंगा, गौ-माता और गोविंद के बगैर नहीं चल सकती:मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारतीय संस्कृति के संरक्षण, संवर्धन के साथ हो रहा है जन-कल्याण :मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री ने आगर-मालवा में 49 करोड़ से अधिक के विकास कार्यों का किया लोकार्पण/भूमि-पूजन मुख्यमंत्री ने कामधेनु गौ-अभ्यारण्य सालरिया में की गोवर्धन पूजा भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भारतीय संस्कृति गीता, गंगा, गौ-माता और गोविंद के बगैर नहीं चल सकती है। धरा पर गाय और गंगा ही हैं, जो ईश्वर को अत्यंत प्रिय हैं, इनके बिना भारतवर्ष के उत्कर्ष की कल्पना नहीं की जा सकती। गौ-वंश सम्पूर्ण मानव जाति के लिए पूज्यनीय है। यह पर्व भारतीय जनमानस को अपनी जड़ों से जोड़े रखता है और प्रकृति के प्रति सम्मान की भावना को प्रदर्शित करता है। यह हमारी संस्कृति और परंपरा के संवर्धन का प्रतीक भी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार भारतीय संस्कृति का संरक्षण एवं संवर्धन कर जन-कल्याण का कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव आज शुक्रवार को कामधेनु गौ-अभ्यारण्य सालरिया जिला आगर-मालवा में एक वर्षीय वेदलक्षणा गौ-आराधना महोत्सव अन्तर्गत गोवर्धन पूजा कार्यक्रम में शामिल हुए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा शासन की जन-कल्याणकारी योजनाओं में लाभान्वित हितग्राहियों को मंच से हितलाभ का वितरण भी किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विधि-विधान, मंत्रोच्चार के साथ गोवर्धन पर्वत एवं गौ-माता का पूजन कर भगवान श्रीकृष्ण को छप्पन भोग लगाया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आगर-मालवा जिले के लिये 49 करोड़ रूपये से अधिक के विकास कार्यो का लोकार्पण तथा भूमि-पूजन किया। उन्होंने मध्यप्रदेश स्थापना दिवस की सभी को बधाई भी दी। कार्यक्रम का शुभारम्भ मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलन कर एवं कन्या-पूजन कर किया। इस अवसर पर पशु-पालन मंत्री लखनसिंह पटेल, राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार गौतम टेटवाल, सांसद सुसनेर रोडमल नागर, विधायक मधु गेहलोत, गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा के पूज्य परमहंस प्रज्ञानानंद जी महाराज,जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती मुन्नाबाई चौहान मौजूद रहे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गौ-मूत्र से कैंसर जैसी बीमारी का उपचार पूरे संसार ने देखा है, गौ-माता के दूध से संसार के 200 से अधिक देशों में पूर्ति होती है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार भी गौ-सेवा के लिए सदैव प्रतिबद्ध है, त्यौहारों को लेकर शासकीय स्तर पर लगातार आयोजन हो रहे हैं। अब हम गौ-माता की पूजा कर रहे हैं, उन्होंने कहा कि सरकार ने महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए गौ-शाला में गाय के आहार के लिए निर्धारित अनुदान को भी बढ़ाकर दोगुना कर दिया है। सभी गौ-शालाओं को संरक्षण देंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जो व्यक्ति 10 से अधिक गौ-माता का पालन करेगा, उसे भी सरकार अनुदान देकर घर-घर गौसेवा के संकल्प को पूरा करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जो गाय पाले वे सभी गोपाल, जिनके घर में गाय का कुल उनके घर गोकुल, हमें घर-घर गोकुल बनाना है, सरकार ने हर घर में गौ-वंश बढ़ाने का निर्णय लिया है। गौ-माता में हमारे 33 करोड़ देवी-देवता भी विराजमान है। शासकीय स्तर पर गौ-शालाएं खुलेगी, जिनमें बुढ़ी, निराश्रित, अशक्त गौ-वंशों को पालने की जवाबदारी सरकार की होगी और इस संकल्प को संत समाज के सहयोग से पूरा किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देश में दुग्ध उत्पादन की लगभग 9 प्रतिशत आपूर्ति मध्यप्रदेश द्वारा की जाती है। सरकार का निर्णय है कि अगले पांच साल के अंदर नेशनल डेयरी डेवलेपमेंट बोर्ड के माध्यम से गौवंश की नस्ल सुधार कर दूध उत्पादन को बढ़ाकर देश में अग्रणी बनाना है। उन्होंने कहा कि हम प्रदेश में ऐसी व्यवस्था करना चाहते है कि गायों को पालने वाले गौ-पालक बिना दूध देने वाली गौ-माता को गौ-शालाओं में छोड़ जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज मैं गौ-अभयारण्य में चल रहे इतने वृहद स्तर पर पवित्र कार्य मे गौ-अभयारण्य में गौ-संवर्धन वर्ष को चरितार्थ किया है। शासन ने गुड़ी पडवा पर गौ-संवर्धन वर्ष मनाने की घोषणा की उसे सालरिया में चरितार्थ किया है। अभयारण्य में मालवी नस्ल की गायों को इतने अच्छे से पालने पर बहुत अच्छा लगा। उन्होंने कहा कि गौ-माता के लिए जल का प्रबंध जहाँ भी आवश्यक है, वहा करेंगे। उन्होंने कहा कि गोवर्धन पूजा के अवसर पर हम सभी मिलकर पर्यावरण-संरक्षण का संकल्प लें। वर्षा के लिए प्राकृतिक संतुलन का होना बेहद आवश्यक है, प्राकृतिक संसाधनों का सदुपयोग करते हुए, अपने आसपास की हरियाली को बढ़ाने का प्रयास करें।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हाथियों की मृत्यु के संबंध में आपातकालीन बैठक ली, दोषियों के विरूद्ध होगी सख्त कार्यवाही

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हाथियों की मृत्यु की घटना पर उच्च स्तरीय दल उमरिया भेजने के दिए निर्देश वन राज्य मंत्री सहित तीन सदस्यीय दल लेगा घटना के सभी पहलुओं की जानकारी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हाथियों की मृत्यु के संबंध में आपातकालीन बैठक ली, दोषियों के विरूद्ध होगी सख्त कार्यवाही भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उमरिया जिले में हाल ही में हाथियों की मृत्यु के संबंध में गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए आज रात्रि मुख्यमंत्री निवास में आपातकालीन बैठक ली। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिए कि इस घटना के सभी पहलुओं की जानकारी लेने के लिए एक उच्च स्तरीय दल तत्काल घटना स्थल पर रवाना हो। सभी पहलुओं की जानकारी प्राप्त कर 24 घंटे में विस्तृत प्रतिवेदन दिया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस घटना में दोषी लोगों के विरूद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार वनों की रक्षा और वन्य प्राणियों की सुरक्षा के प्रति पूर्ण गंभीर है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जैसा बताया गया है कि हाथियों की मृत्यु के बाद पोस्टमार्टम में हाथियों के पेट में बड़ी मात्रा में कोदो पाए जाने की जानकारी मिली है। जो सैंपल हाथियों के पेट से लिए गए हैं, उनकी वैज्ञानिक जाँच की जायेगी। उसमें यह स्पष्ट होगा कि किसी तरह का जहरीला पदार्थ तो नहीं है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि चूंकि जाँच रिपोर्ट आने में चार दिन की अवधि संभावित है, इसके पूर्व वरिष्ठ स्तर से घटना की पूर्ण जानकारी प्राप्त की जाए। वन राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार, अपर मुख्य सचिव वन अशोक बर्णवाल और राज्य वन बल प्रमुख पीसीसीएफ असीम श्रीवास्तव दल में शामिल रहेंगे। दल के सदस्य शनिवार को उमरिया पहुंचकर घटना के बारे में समस्त विवरण प्राप्त करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस तरह की घटनाएं फिर न हो, इसके लिए वन विभाग, स्थानीय प्रशासन और सभी पक्ष सजग और संवदेनशील रहें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उमरिया में हाथियों की मृत्यु की घटना में किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने और उपचार एवं अन्य प्रबंधन में विलंब की बात सिद्ध होने पर दोषी लोगों के विरूद्ध सख्त कार्यवाही की जाएगी। बैठक में मुख्य सचिव अनुराग जैन वर्चुअल रूप से शामिल हुए। मुख्यमंत्री निवास में हुई बैठक में अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय डॉ. राजेश राजौरा, पुलिस महानिदेशक सुधीर कुमार सक्सेना, अपर मुख्य सचिव वन अशोक वर्णवाल, आयुक्त जनसंपर्क डॉ. सुदाम खाड़े एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के हाथियों की मृत्यु के संबंध में निर्देश          मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने घटना की संपूर्ण पहलुओं की जानकारी प्राप्त करने के लिए उच्चस्तरीय दल उमरिया जाए।          जांच की रिपोर्ट आने के पूर्व इस अवधि में घटना से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर जांच की जो कार्रवाई जारी है, उसमें विलंब न हो।          वन राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार और दो वरिष्ठ अधिकारी उमरिया जाएं।          उमरिया के दौरे की रिपोर्ट 24 घंटे में सौंपी जाए।          दोषी व्यक्तियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए।  

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