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अंतर्राज्यीय केन-बेतवा लिंक और पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजनाएं से तीव्र होगी विकास की रफ्तार : मुख्यमंत्री डॉ यादव

जन-कल्याण में राज्यों की सीमाएं बाधक नहीं : मुख्यमंत्री डॉ यादव प्रधानमंत्री मोदी का तीव्र विकास का संकल्प पूरा करने कोई कसर नहीं छोड़ेंगे : मुख्यमंत्री डॉ यादव अंतर्राज्यीय केन-बेतवा लिंक और पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजनाएं से तीव्र होगी विकास की रफ्तार : मुख्यमंत्री डॉ यादव रवीन्द्र सभागम में मध्यप्रदेश के 69 वें स्थापना दिवस का हुआ आयोजन पार्श्व गायक अंकित तिवारी के गीतों की हुई प्रस्तुति भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि आम नागरिकों के कल्याण में राज्यों की सीमा बाधा नहीं बनना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का भी यही संकल्प है। उन्होंने प्रधानमंत्री के संकल्प को पूरा करने के लिये महत्वपूर्ण केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना और पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना के लिए समाधान का मार्ग प्रशस्त किया। अंतर्राज्यीय केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना भारत की प्रथम नदी जोड़ो परियोजना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश और राजस्थान के मध्य 20 वर्ष से पार्वती चंबल कालीसिंध परियोजना की स्वीकृति के लंबित मामलों में अब स्वीकृति हो गई है। केंद्र सरकार द्वारा दी गई इन मंजूरियों से प्रदेश के बड़े अंचल में विकास की गति तीव्र हो जाएगी। प्रधानमंत्री मोदी के तीव्र विकास का संकल्प पूरा करने में मध्यप्रदेश सरकार कोई कसर नहीं छोड़ेंगी। केन-बेतवा परियोजना से बुंदेलखंड में सिंचाई और पानी की सुविधा व्यापक स्तर पर नागरिकों और किसानों को मिलेगी। यह परियोजना एक इतिहास रचने का कार्य करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव आज रवींद्र सभागम में मध्यप्रदेश के 69 वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्थापना वर्ष 1956 से लेकर अब तक एक लंबी यात्रा तय हुई है। इस वर्ष राज्योत्सव और दीपोत्सव एक साथ आए हैं। प्रदेश में चार दिन का स्थापना दिवस समारोह और 5 दिन का दीपोत्सव हो रहा है। मध्यप्रदेश इस मामले में सौभाग्यशाली है कि यहॉ मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम ने चित्रकूट में सर्वाधिक समय व्यतीत किया। भगवान श्रीकृष्ण ने भी मध्यप्रदेश की धरती पर उज्जैन आकर शिक्षा ग्रहण की। मध्यप्रदेश पर प्रकृति का भी वरदान है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हिमालय से गंगा के उद्गम और अन्य नदियों की जल राशि को देखें तो उससे कहीं अधिक जल राशि नर्मदा के साथ सोन, चंबल, ताप्ती आदि से प्रवाहित होती है। मध्यप्रदेश नदियों के मायके की तरह है। यह देश के लिए अजूबा और वरदान दोनों है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा प्रदेश में खनिजों की प्रचुरता है। प्रदेश में 55 जिलों की सीमाओं का पुनर्निर्धारण होगा। जिलों की सीमाओं के साथ ही संभागों की सीमा भी बदलेंगे। प्रदेश में 68 वर्ष में पुनर्गठन संबंधी कार्य इस स्तर पर नहीं हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार विकास के मामले में कोई कसर नहीं छोड़ेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में वर्ष 2005 तक 5 मेडिकल कॉलेज ही थे, जिनकी संख्या वर्तमान में 20 हो गई है। प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में प्रदेश में 3 नए मेडिकल कॉलेज लोकार्पित किए हैं। आने वाले 2 वर्ष में मेडिकल कॉलेज की संख्या 28 हो जाएगी। उन्होंने कहा कि पीपीपी मॉडल पर भी कार्य हो रहा है, जिससे प्रदेश में 40 मेडिकल कॉलेज होंगे। आने वाले समय में प्रत्येक जिले में मेडिकल कॉलेज होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उपस्थित नागरिकों को मध्यप्रदेश की स्थापना दिवस और दीपोत्सव की बधाई दी और पार्श्व गायक अंकित तिवारी, मुंबई के निर्देशन में हो रहे गीत संगीत कार्यक्रम का आनंद लेने का आह्वान किया। गायिका सुसुहासिनी जोशी ने मध्यप्रदेश गान प्रस्तुत किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पर्यटन विभाग द्वारा मध्यप्रदेश पर केंद्रित फिल्म का रिमोट से बटन दबाकर शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गायक अंकित तिवारी का शॉल और श्रीफल द्वारा सम्मान किया। प्रमुख सचिव शिव शेखर शुक्ला ने नागरिकों का अभिनंदन करते हुए कार्यक्रम में उत्साह से भागीदारी के लिए उनका आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर खेल एवं युवा कल्याण, सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री श्रीमती कृष्णा गौर, पशुपालन एवं डेयरी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) लखन पटेल, सांसद वी.डी. शर्मा, सांसद आलोक शर्मा, विधायक भगवानदास सबनानी, विधायक रामेश्वर शर्मा, विधायक विष्णु खत्री, भोपाल की महापौर श्रीमती मालती राय, पूर्व मंत्री डॉ. प्रभुराम चौधरी, सुमित पचौरी, अपर मुख्य सचिव एस.एन. मिश्रा सहित जन-प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे। पार्श्व गायक अंकित तिवारी ने गीतों से किया आनंदित स्थापना दिवस समारोह की इस विशेष शाम पर सुप्रसिद्ध पार्श्व गायक अंकित तिवारी ने मंच पर आते ही श्रोताओं का अभिवादन स्वीकार करते हुए दीपावली और मध्यप्रदेश स्थापना दिवस की शुभकामनाएं दीं। अंकित ने सबसे पहले “लगता है दिल तेरी शामत आई है….” गीत प्रस्तुत किया। इसके बाद लोकप्रिय गीत “तू जो है तो मैं हूं…. और तुम से ही….की” प्रस्तुति से सभागार में सुरीला संसार रच दिया। प्रस्तुति में आगे “सनम तेरी कसम….और जुगनी….” प्रस्तुत करते हुए श्रोताओं पर जादू सा कर दिया। इसके बाद तो अंकित और श्रोताओं के बीच सुरीला रिश्ता कायम हो गया और गीतों का सिलसिला चलता गया। बत्तमीज…., साडा हक…., खैरियत…., तू ही हकीकत…., बूंद बूंद…., तो फिर आओ…., तू है कि नहीं…. जैसे लोकप्रिय गीतों से शाम को शानदार बना दिया। अगली प्रस्तुति सबसे लोकप्रिय गीत सुन रहा है न तू…. प्रस्तुत कर स्थापना दिवस की शाम में चार चांद लगा दिए। उन्होंने इसके बाद सय्योनी…., अंखियां उडीक…., पठान…. प्रस्तुत करते हुए प्रस्तुति का समापन तेरी गलियां….गीत प्रस्तुत कर किया।  

इंडस्ट्री कॉन्क्लेव अब नीमच-मंदसौर में होगी, औषधि उद्योग पर रहेगा फोकस

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंदसौर में आयोजित कार्यक्रम में प्रदेश के 81 लाख किसानों के खातों में मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना में 1624 करोड़ रुपए की राशि सिंगल क्लिक से ट्रांसफर की। सीएम ने घोषणा की कि अगली इंडस्ट्री कॉन्क्लेव मंदसौर-नीमच में होगी यादव ने कहा कि मंदसौर, नीमच जिले औषधि की खेती के लिए जाने जाते है। यहां की जरूरतों के हिसाब से औषधि उद्योगों को यहां बढ़ावा दिया जाएगा। स्थानीय युवाओं के लिए भी औषधि उद्योग के क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा किए जाएंगे। इस दौरान सीएम ने मंदसौर को दी 167 करोड़ के 11 विकास कार्यों के लोकार्पण और भूमिपूजन भी किए। स्थानीय विधायकों की मांग पर मंदसौर, सीतामऊ, सुवासरा तक फोरलेन सड़क का निर्माण की भी घोषणा कर दी। इस अवसर पर सीएम ने मन से मंदसौर वेबसाइट भी लांच की। इस वेबसाइट से मंदसौर जिले का कोई भी जरूरतमंद व्यक्ति जुड़कर मदद ले सकता है। पतंजलि से जुड़ेगा औषधीय फसलों का कारोबार सीएम ने नीमच में आयोजित कार्यक्रम में कहा कि नीमच एशिया में औषधीय फसलों की सबसे बडी मंडी है। यहां की औषधीय फसलों को योग गुरू बाबा रामदेव के पतंजलि योग पीठ से जोड़ा जा रहा है। सीएम ने नीमच में शुरू हो रहे मेडिकल कॉलेज का नाम पूर्व सीएम वीरेंद्र कुमार सखलेचा के नाम पर रखने की भी घोषणा की। इस दौरान सीएम ने नीमच मेडिकल कॉलेज के छात्र-छात्राओं से संवाद भी किया।   मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंगलवार को कहा कि अंग्रेज भारत में गृह युद्ध कराना चाहते थे। सरदार वल्लभ भाई पटेल के जन्मदिवस के अवसर पर आयोजित ‘रन फॉर यूनिटी’ का शुभारंभ करते हुए सीएम ने कहा कि ‘अंग्रेजों ने भारत के अंदर गृह युद्ध कराने कोई कसर नहीं छोड़ी. उन्होंने तो देश की आजादी के एक दिन पहले 14 अगस्त को भारत से अलग कर पाकिस्तान बना दिया। अंग्रेजों ने देश कि रियासतों कि बीच फूट डाली, उस दौर में सरदार वल्लभ भाई पटेल ने 2 साल के अंदर देश की सारी रियासतों को एक कर दिया। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा ने कहा कि सरदार वल्लभ भाई पटेल ने अपनी कार्य कुशलता के कारण पूरे देश को एक सूत्र में पिरोया, लेकिन जम्मू कश्मीर में धारा 370 के कारण देश कि एकता अधूरी थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने धारा 370 हटाई। टीटी नगर स्टेडियम में हुए इस कार्यक्रम में खेल मंत्री विश्वास सारंग और मुख्य सचिव अनुराग जैन मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने रन फॉर यूनिटी में शामिल सभी युवाओं को एकता दिवस की शपथ भी दिलाई।  

दो विधानसभा में उपचुनाव की प्रशासनिक तैयारी जारी, नामांकन सूची से हटाए साढ़े 6 लाख मतदाताओं के नाम, 7.47 लाख मतदाताओं के नाम जोड़े

भोपाल मध्यप्रदेश में दो विधानसभा में उपचुनाव की प्रशासनिक तैयारी चल रही है। प्रदेश के बुधनी और विजयपुर विधानसभा में उपचुनाव के लिए 13 नवंबर को मतदान है। इसी बीच मध्यप्रदेश निवार्चन आयोग की ओर से प्रदेश के मतदाताओं के आंकड़े जारी किए हैं। जारी आंकड़े के अनुसार एमपी में साढ़े 6 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए और 7.47 लाख मतदाताओं के नाम जोड़े है। मतदाताओं ने नए पते अपडेट करवाए है। नए मतदाताओं को जोड़ने और जरूरत के अनुसार नाम हटाए जाने की प्रक्रिया तेज हुई है। अब दावे-आपत्तियां आमंत्रित की गईं है। 228 विधानसभा क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या 5,60,63,645 है। उपचुनाव के कारण बुधनी और विजयपुर विधानसभा क्षेत्र में पुनरीक्षण नहीं होगा। दावे आपत्ति लेने का काम शुरू हो गया है। प्रक्रिया 28 नवंबर तक चलेगी।

देश में इस साल 7.3 करोड़ लोगों ने आईटीआर फाइल किया, मार्च 2025 तक यह संख्या 9 करोड़ को पार ……

8 लाख रुपये तक की इनकम हो सकती है टैक्स फ्री, 9 करोड़ लोग भर सकते हैं आईटीआर  सरकार का 8 लाख रुपये तक की सालाना इनकम को टैक्स फ्री करने का फैसला! देश में इस साल  7.3 करोड़ लोगों ने आईटीआर फाइल किया, मार्च 2025 तक यह संख्या 9 करोड़ को पार …… नई दिल्ली हर साल इनकम टैक्स रिटर्न (आईटीआर) भरने वालों की संख्या में इजाफा हो रहा है। इस साल करीब 7.3 करोड़ लोगों ने आईटीआर फाइल किया है और मार्च 2025 तक यह संख्या 9 करोड़ को पार कर सकती है। यदि सरकार 8 लाख रुपये तक की सालाना इनकम को टैक्स फ्री करने का फैसला लेती है, तो यह आंकड़ा और भी तेजी से बढ़ सकता है। एक रिपोर्ट के अनुसार, इस छूट की मांग जोर पकड़ रही है और ऐसी संभावना है कि सरकार 60 से 80 साल के वरिष्ठ नागरिकों को यह राहत दे सकती है। 2 करोड़ ज्यादा आईटीआर फाइल होने की संभावना स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) के आर्थिक विभाग की रिसर्च रिपोर्ट में बताया गया है कि अगर सरकार असेसमेंट ईयर 2024-25 में आईटीआर की संख्या बढ़ाना चाहती है, तो उसे ऐसे कदम उठाने की जरूरत है। रिपोर्ट में कहा गया है कि वरिष्ठ नागरिकों को यह छूट दी जाती है, तो रिटर्न फाइल करने वालों की संख्या में काफी बढ़ोतरी होगी। अनुमान है कि इस साल करीब 2 करोड़ और आईटीआर फाइल होंगे, जिससे वित्तीय वर्ष के अंत तक यह संख्या 9 करोड़ को पार कर सकती है। अगले साल यह आंकड़ा 10 करोड़ के पार भी पहुंच सकता है। टीडीएस कटौती और सर्टिफिकेट में बदलाव की सिफारिश रिपोर्ट के अनुसार, असेसमेंट ईयर 2022 में कुल 7.3 करोड़ आईटीआर फाइल किए गए थे, जो असेसमेंट ईयर 2024 में बढ़कर 8.6 करोड़ हो गए। तय तारीख के बाद आईटीआर भरने वालों की संख्या में गिरावट आ रही है, जिससे यह स्पष्ट है कि लोग समय पर आईटीआर फाइल करने के अनुशासन का पालन कर रहे हैं। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने भी प्रक्रिया और फॉर्म को आसान बना दिया है, जिससे आईटीआर भरना सरल हो गया है। रिपोर्ट में यह भी सुझाव दिया गया है कि सरकार को टीडीएस कटौती के दायरे में सुधार करना चाहिए और टीडीएस सर्टिफिकेट में भी बदलाव करने चाहिए।  

आईआईसीटी निदेशक ने बताया- भारत अंतरराष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव 2024 का आयोजन गुवाहाटी में होगा

हैदराबाद भारत अंतरराष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव (आईआईएसएफ) 2024 का आयोजन असम के गुवाहाटी में किया जाएगा। सीएसआईआर-भारतीय रासायनिक प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईसीटी) के निदेशक डॉ. श्रीनिवास रेड्डी ने यह जानकारी दी। उन्होंने मंगलवार को यहां आईआईएसएफ के कर्टेन रेज़र कार्यक्रम के साथ-साथ 9वें आयुर्वेद दिवस के अवसर पर अपने स्वागत भाषण में कहा कि कर्टेन रेज़र कार्यक्रम ने 30 नवंबर से 03 दिसंबर तक आयोजित होने वाले मुख्य कार्यक्रम के लिए मंच तैयार किया है। उन्होंने कहा कि यह महोत्सव वैज्ञानिक और गैर-वैज्ञानिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को विज्ञान के साथ गहराई से जुड़ने और इसे सभी के लिए सुलभ बनाने के लिए एक साथ लाता है। उन्होंने कहा कि 2016 से, आयुर्वेद को हमारी स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली के एक अभिन्न अंग के रूप में बढ़ावा देने के लिए यह दिन पूरे देश में मनाया जाता है। इस वर्ष का थीम ‘वैश्विक स्वास्थ्य एवं नवाचार के लिए आयुर्वेद’ है। उन्होंने कहा कि अगर भारत को वैश्विक मान्यता चाहिए तो उसे आयुर्वेद पद्धतियों की क्षमता को मान्य करने के लिए साक्ष्य आधारित डेटा प्राप्त करने की दिशा में काम करना चाहिए। डॉ. श्रीनिवास ने कहा कि यह विज्ञान को आकर्षक रूप से लोगों के सामने लाने की एक कोशिश है। उन्होंने स्वस्थ जीवन जीने के लिए हमारे पूर्वजों की समग्र जीवन शैली को अपनाने पर भी बल दिया। सीएसआईआर- सेलुलर एवं आणविक जीवविज्ञान केंद्र (सीएसआईआर-सीसीएमबी) के वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक डॉ. मंदरा देशमुख ने आईआईएसएफ के संदर्भ में अपने संबोधन में आईआईएसएफ के आयोजन में शामिल विभिन्न संगठनों के बारे में बातचीत की, जबकि वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक डॉ. सैबल दास ने आईआईएसएफ और इस वर्ष के विषयगत आयोजनों का परिचय दिया। सीएसआईआर-आईआईसीटी में आयुर्वेद दिवस 2024 समारोह छात्रों के बीच आयुर्वेद को बढ़ावा देने और वैश्विक स्वास्थ्य एवं नवाचार के लिए इसे आधुनिक प्रथाओं के साथ एकीकृत करने पर ध्यान केंद्रित करने की दिशा में एक कदम है।  

हमीदिया अस्पताल में नवंबर माह पहला बोनमैरो प्रत्यारोपण भी हो सकता है, पांच लाख रुपये में हो सकेगा

भोपाल हमीदिया अस्पताल में किडनी के बाद बोनमैरो प्रत्यारोपण नवंबर माह तक शुरू करने की उम्मीद है। अगले माह तक यहां पहला बोनमैरो प्रत्यारोपण भी हो सकता है। इसके शुरू होने पर इंदौर के बाद हमीदिया प्रदेश का दूसरा सरकारी अस्पताल होगा, जहां यह सुविधा उपलब्ध मरीजों की दी जाएगी। इसके लिए बकायदा अस्पताल के एच-1 ब्लाक की चौथी मंजिल पर 12 कमरों की स्वीकृति भी मिल गई है। जिसमें मरीजों के लिए 24 बिस्तर का वार्ड तैयार किया जाएगा। यह सुविधा शुरू होने से ब्लड कैंसर और खून की कमी से होने वाली बीमारियों-थैलेसीमिया, सिकल सेल एनीमिया का स्थायी इलाज किया जा सकेगा। करीब 16 करोड़ रुपये की आएगी लागत जानकारी अनुसार इस यूनिट को जमाने के लिए प्रबंधन को करीब 16 करोड़ खर्च करने होंगे। निजी अस्पतालों में बोनमैरो प्रत्यारापेण पर करीब 24 लाख तक खर्च आता है। यहां करीब पांच लाख तक आएगा। अमेरिका के कोलंबिया विवि के बोनमैरो ट्रांसप्लांट एक्सपर्ट डा. प्रकाश सतवानी से इसके लिए एमओयू हो गया है। आठ महीने बाद फिर शुरू होगा किडनी प्रत्यारोपण वहीं हमीदिया अस्पताल में करीब आठ महीने बाद दोबारा किडनी प्रत्यारोपण करने की तैयारी भी की जा रही है। इसके लिए तैयारियां की जा रही हैं। बतादें कि हमीदिया प्रदेश का पहला सरकारी अस्पताल है, जहां सात किडनी प्रत्यारोपण हो चुके हैं। गांधी मेडिकल कालेज के यूरोलाजी विभाग के डा. अमित जैन ने बताया कि दो मरीजों के किडनी ट्रांसप्लांट होने हैं। इसके लिए अंगदान समिति ने मंजूरी दे दी है।  

महाकुंभ: मेला प्रशासन और जिला प्रशासन दोनों ने क्राउड मैनेजमेंट की तैयारी पर विशेष फोकस

प्रयागराज महाकुंभ 2025 को सभी के लिए सुगम बनाने हेतु सरकार लगातार कार्य कर रही है। इस महाआयोजन के दौरान 40 करोड़ से अधिक लोगों के प्रयागराज आने का अनुमान है। इसको लेकर मेला प्रशासन और जिला प्रशासन दोनों ने क्राउड मैनेजमेंट की तैयारी की है। खासतौर पर पीक डेज (प्रमुख स्नान) के दौरान अत्यधिक भीड़ के कारण कहीं कोई अव्यवस्था न हो, इसके लिए कार्ययोजना तैयार की गई है। आने-जाने के अलग-अलग रास्ते निर्धारित किए गए हैं, जबकि मोबिलिटी जारी रहे, इसकी भी व्यवस्था की गई है। रास्ता जाम न हो, इसके लिए भी विशेष प्रबंध किए जा रहे हैं। कुल मिलाकर जो योजना बनी है, उसके अनुसार, श्रद्धालुओं को पीक डेज में एक से 5 किमी. और सामान्य दिनों में एक किमी. से ज्यादा पैदल यात्रा नहीं करनी होगी। प्रयागराज के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत ने बताया कि इस सबसे बड़े धार्मिक आयोजन में सिर्फ प्रदेश और देश से ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया से श्रद्धालुओं का बड़ा जत्था प्रयागराज पहुंचने वाला है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निर्देश दिया है कि किसी भी श्रद्धालु को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए। ऐसे में क्राउड मैनेजमेंट को लेकर एक कार्ययोजना बनाई गई है, जिसके अनुरूप व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने बताया कि महाकुंभ के दौरान सर्वाधिक श्रृद्धालु सड़क मार्ग से प्रयागराज पहुंचेंगे। प्रशासन की ओर से सभी शहर के दिशाओं में पार्किंग की व्यवस्था की गई है, जहां वाहन खड़ा कर श्रद्धालु आगे का रास्ता तय करेंगे। मेला क्षेत्र में हमने आने और जाने के अलग-अलग रास्ते निर्धारित किए हैं। आस्था की डुबकी लगाने वाले जिस रास्ते से जाएंगे, उस रास्ते से वापस नहीं लौटेंगे। उन्हें दूसरे रास्ते से होकर जाना होगा, ताकि कहीं भी श्रद्धालु आमने-सामने नहीं आ सकें। मंडलायुक्त ने बताया कि ऐसी व्यवस्था की जा रही है कि श्रद्धालु कहीं एक साथ रुकें नहीं, वो चलते रहें। कहीं भी जाम की स्थिति नहीं बनने दी जाएगी। हमारा उद्देश्य है कि मेला क्षेत्र के साथ-साथ शहर में भी श्रद्धालुओं की मोबिलिटी को बरकरार रखा जाए, ताकि स्नान और दर्शन आदि करने के बाद वो सीधे पार्किंग स्थल पहुंचें और अपने गंतव्य की ओर प्रस्थान करें। इसी तरह, रेलवे से भी रिक्वेस्ट की गई है कि वो समय पर और अधिक स्पेशल ट्रेनें संचालित करें, ताकि श्रद्धालु अपना समय गंवाए बिना यात्रा को बरकरार रख सकें। रेलवे की ओर से पॉजिटिव रिस्पॉन्स भी मिला है और उन्होंने कई अतिरिक्त स्पेशल ट्रेनें संचालित करने की घोषणा की है। उन्होंने बताया कि यदि श्रद्धालु कुछ देर विश्राम करना चाहेंगे, तो उनके लिए कुछ होल्डिंग एरियाज भी चिह्नित किए गए हैं। महाकुंभ की शुरुआत के साथ ही प्रयागराज में श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो जाएगा। प्रमुख स्नान के दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या कई करोड़ तक होगी। अनुमान है कि मौनी अमावस्या को सर्वाधिक 4 से 5 करोड़ श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाने के लिए संगम नगरी आ सकते हैं। इसकी भी तैयारी की गई है। विजय विश्वास पंत ने बताया कि मौनी अमावस्या सबसे डेंसिटी वाला दिन होने की संभावना है। इसमें भी सुबह 3 से दोपहर 12 बजे का समय बहुत क्रिटिकल होगा, जब श्रद्धालु संगम का रुख करेंगे। वहीं 12 बजे के बाद उनका लौटना शुरू हो जाएगा। हमारी कोशिश उन्हें सुगमता से संगम क्षेत्र तक पहुंचाने और फिर पार्किंग स्थल तक वापस आने की सुविधा प्रदान करने की है। संगम में पवित्र डुबकी लगाने के बाद उन्हें तुरंत वापस भेजने की व्यवस्था की जाएगी, ताकि जाम की स्थिति न बने। उन्हें पार्किंग स्थल तक पहुंचाने के बाद गंतव्य की ओर रवाना किया जाएगा। हमारी विभिन्न ट्रैफिक स्कीम तैयार है, इससे न ही श्रद्धालुओं को अव्यवस्था का सामना करना पड़ेगा और न ही मेला और शहर क्षेत्र में ट्रैफिक पैनिक की स्थिति होगी। मंडलायुक्त ने बताया कि इस महाकुंभ को स्वच्छ कुंभ बनाने के मुख्यमंत्री के संकल्प को पूरा करने के लिए विभिन्न प्रयास किए जा रहे हैं। हमारा प्रयास है कि पूरे मेला क्षेत्र में किसी भी तरह की प्लास्टिक का उपयोग नहीं किया जाएगा। इनके रिप्लेसमेंट ऑप्शन पर विचार किया जा रहा है। खासतौर पर इंदौर की बायो फ्रेंडली थैलियों का इस्तेमाल किया जाएगा। इसको लेकर हम व्यापारियों से भी संवाद करने वाले हैं। साथ ही लोगों और अधिकारियों को प्लास्टिक की बजाय, विभिन्न प्रकार के झोलों का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।  

WWF की रिपोर्ट: भारतीय जिस तरीके से खाते हैं, वो धरती के लिए सबसे अच्छा आहार

नई दिल्ली वर्ल्ड वाइल्डलाइफ फंड (WWF) लिविंग प्लैनेट रिपोर्ट के अनुसार, भारत के फूड कंजप्शन पैटर्न को G20 अर्थव्यवस्थाओं में सबसे अधिक टिकाऊ माना गया है. रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि अगर ग्लोबल फूड कंजप्शन भारत के समान हो जाए, तो 2050 तक जलवायु प्रभाव काफी कम हो जाएगा. वहीं, अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया और संयुक्त राज्य अमेरिका टिकाऊ उपभोग के मामले में सबसे खराब स्थान पर हैं. उसके बाद ऑस्ट्रेलिया (6.8), यूएसए (5.5), ब्राजील (5.2), फ्रांस (5), इटली (4.6), कनाडा (4.5) और यूके (3.9) का स्थान है। बेहतर देशों में इंडोनेशिया (0.9) भारत (0.84) के बाद आता है और चीन (1.7), जापान (1.8) और सऊदी अरब (2) से आगे है. भारत का सस्टेनेबल कंजप्शन पैटर्न WWF की रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर दुनिया में हर कोई 2050 तक दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के मौजूदा खाद्य कंजप्शन पैटर्न को अपना ले, तो हम खाद्य-संबंधित ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के लिए 1.5 डिग्री सेल्सियस जलवायु लक्ष्य को 263 फीसदी तक पार कर जाएंगे और हमें सहारा देने के लिए एक से सात पृथ्वी की आवश्यकता होगी. भारत का बाजरा-केंद्रित खाना एक अपवाद के रूप में सामने आता है, जिसमें देश को स्थिरता के लिए एक मॉडल के रूप में स्थापित किया गया है. अगर सभी देश भारत के कंजप्शन मॉडल को देखें, तो रिपोर्ट में इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि फूड प्रोडक्शन को बनाए रखने के लिए 2050 तक एक पृथ्वी (0.84) से भी कम की आवश्यकता होगी. यह भोजन के लिए ग्रहीय जलवायु सीमा से बेहतर है, यह सुझाव देता है कि भारत की फूड सिस्टम ग्लोबल तापमान को 1.5 डिग्री सेल्सियस की सीमा के भीतर रख सकती है.

महाकुंभ-2025: श्री आदि शंकर विमान मंडपम् मंदिर श्रद्धालुओं के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र होगा

प्रयागराज महाकुंभ-2025 में संगम किनारे बना दक्षिण भारतीय शैली का श्री आदि शंकर विमान मंडपम् मंदिर श्रद्धालुओं के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र होगा। स्वयं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पूर्व मंदिर में विग्रहों के दर्शनों के लिए आ चुके हैं। महाकुंभ के लिए योगी सरकार मंदिर के आसपास विकास कार्य करा रही है। मंदिर की आभा ऐसी है कि वो श्रद्धालुओं को अपनी ओर खींच लेती है। मंदिर के प्रबंधक रमणी शास्त्री के अनुसार कांचिकामकोटि के 69वें पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी जयेंद्र सरस्वती ने अपने गुरु चंद्रशेखरेंद्र सरस्वती की इच्छापूर्ति के लिए श्री आदि शंकर विमान मंडपम् का निर्माण कराया। गुरु चंद्रशेखरेंद्र सरस्वती ने वर्ष 1934 में प्रयाग में चातुर्मास किया था। उन दिनों वो दारागंज के आश्रम में रुके थे। प्रतिदिन पैदल संगम स्नान को आते थे। उस दौरान बांध के पास उन्हें दो पीपल के वृक्षों के बीच खाली स्थान नजर आया। गुरु चंद्रशेखरेंद्र सरस्वती ने धर्मशास्त्रों का अध्ययन किया और स्वयं के तपोबल से यह साबित किया कि इसी स्थान पर आदि शंकराचार्य और कुमारिल भट्ट के बीच संवाद हुआ था। बाद में यहीं पर कुमारिल भट्ट ने तुषाग्नि में आत्मदाह किया था। रमणी शास्त्री ने बताया कि इसी स्थान पर गुरु चंद्रशेखरेंद्र ने मंदिर बनाने की इच्छा व्यक्त की थी, जिसे शंकराचार्य स्वामी जयेंद्र सरस्वती ने पूर्ण किया। 17 वर्ष लगे मंदिर निर्माण में श्री आदि शंकर विमान मंडपम् की नींव वर्ष 1969 में उत्तर प्रदेश के तत्कालीन राज्यपाल बी. गोपाल रेड्डी ने रखी थी। तब इंजीनियर बी. सोमो सुंदरम् और सी.एस. रामचंद्र ने मंदिर का नक्शा तैयार किया था। मंदिर प्रबंधन के साथ उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम ने भी निर्माण में सहयोग दिया था। जिन 16 पिलर्स पर मंदिर टिका है, उनका निर्माण उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम के तत्कालीन असिस्टेंट इंजीनियर कृष्ण मुरारी दुबे की देख-रेख में कराया गया था। 17 मार्च 1986 को मंदिर श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया। श्री आदि शंकर विमान मंडपम् में विग्रह और निर्माण में प्रयोग किए गए पत्थर दक्षिण भारत से लाए गए हैं। मंदिर द्रविड़ियन आर्किटेक्चर का नायाब उदाहरण है। 130 फीट ऊंचा है मंदिर 130 फीट ऊंचे इस मंदिर में श्री आदि शंकराचार्य की प्रतिमा स्थापित की गई है। देवी कामाक्षी और 51 शक्तिपीठ के अलावा तिरुपति बालाजी और सहस्र योग लिंग के साथ 108 शिवलिंग मंदिर में स्थापित हैं। गणेश जी का मंदिर भी है। मंदिर प्रातः 6 बजे से दोपहर 1 बजे और सायं 4 से रात्रि 8 बजे तक श्रद्धालुओं के लिए खुला रहता है। मंदिर के ऊपरी तलों से संगम का विहंगम दृश्य देखने को मिलता है। इन दिनों भी श्री आदि शंकर विमान मंडपम् में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु दर्शनों के लिए आते हैं। महाकुंभ के दौरान लाखों श्रद्धालु श्री आदि शंकर विमान मंडपम् में आएंगे और विग्रहों के दर्शन करेंगे।  

रायपुर दक्षिण विधानसभा उपचुनाव : 13 नवंबर को होगा मतदान, मतदान सेक्टरों की संख्या 19 से बढ़ाकर की 38

रायपुर रायपुर दक्षिण विधानसभा में उपचुनाव को लेकर चुनाव आयोग ने तैयारियों को तेज कर दिया है। 13 नवंबर को होने वाले मतदान के लिए इस बार सेक्टरों की संख्या को 19 से बढ़ाकर 38 कर दिया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य मतदान प्रक्रिया को सुगम बनाना और किसी भी आपात स्थिति में त्वरित सहायता पहुंचाना है। इस निर्णय से मतदान की गति बनाए रखने और मतदाताओं को अधिक सुविधाएं प्रदान करने की उम्मीद है। सेक्टरों की संख्या बढ़ाने का कारण लोकसभा चुनाव के दौरान रायपुर दक्षिण में 19 सेक्टर बनाकर चुनाव संपन्न करवाया गया था। हालांकि, इस बार उपचुनाव में मतदाताओं को बेहतर सेवाएं देने और चुनाव प्रक्रिया को सुचारू रूप से चलाने के लिए सेक्टरों की संख्या दोगुनी कर दी गई है। इससे सेक्टर अधिकारियों और मतदान केंद्रों के बीच की दूरी कम होगी, जिससे किसी भी आपात स्थिति में त्वरित सहायता पहुंचाना संभव हो सकेगा। आपात स्थिति में होगी त्वरित सहायता सेक्टरों की संख्या बढ़ाने से आपात स्थिति में त्वरित सहायता पहुंचाना आसान होगा। चाहे कानून व्यवस्था की स्थिति को मेंटेन करना हो या किसी प्रकार की मेडिकल इमरजेंसी, सहायता की पहुंच तेज और सुगम होगी। मतदान केंद्रों और सेक्टर कार्यालयों के बीच दूरी कम होने से चुनाव प्रक्रिया भी अधिक प्रभावी और सुव्यवस्थित हो जाएगी। वहीं, ला एंड आर्डर की स्थिति बनने या फिर आपात स्थिति बनने पर त्वरित रूप से यहां सहायता उपलब्ध करवाई जा सकेगी। पूर्व में हुई बैठक के दौरान इस पर निर्णय लिया गया और कलेक्टर डॉ गौरव सिंह ने आदेश जारी किया, ताकि मतदान के दौरान किसी भी प्रकार की परेशानियों को रोका जा सके। आयोग का बढ़ेगा खर्च, बढ़ेगी कर्मचारियों की संख्या एक सेक्टर में सेक्टर अधिकारी के अलावा एक ड्राइवर रखा जाता है। वहीं, एक दल बनाया जाता है, जिसमें मेडिकल टीम, सुरक्षा गार्ड, एक अन्य कर्मचारी रहते हैं और एक पीठासीन अधिकारी रहते हैं। ऐसे में सेक्टराें की संख्या बढ़ाने से कर्मचारियों की संख्या दोगुनी होगी और आयोग का खर्च भी गाड़ियों अन्य मदों में बढ़ेगा। इस तरह की होंगी सुविधाएं – मतदान सटीक मॉनिटरिंग व रिपोर्टिंग – ला एंड आर्डर मेंटेन करने में सहूलियत – मतदान केंद्रों की सेक्टरों से दूरी घटेगी – मशीन खराब होने पर तुरंत बदला जा सकेगा – मतदान की गति नहीं थमेगी – मेडिकल टीम व सुरक्षा बल भी बढ़ेंगे

चीन में लगातार जन्म दर कम हो रही कमी, जानें भारत समेत दूसरे देशों का क्या है हाल

नईदिल्ली चीन में पिछले कुछ सालों में जन्म दर में भारी गिरावट आई है, जिसके चलते चीन में बच्चों के स्कूल माने जाने वाले कई किंडर गार्डन बंद कर दिए गए हैं. ये स्थिति सिर्फ चीन ही नहीं बल्कि कई देशों के लिए चिंता का विषय है. जहां घटती जन्म को बढ़ाने के लिए सरकार लगातार कई प्रयास कर रही है. ऐसे में चलिए जानते हैं कि आखिर भारत का जन्म दर के मामले में क्या हाल है. चीन में क्यों घट रही जन्म दर? चीन में दशकों तक चली एक-संतान नीति के कारण लोगों में एक बच्चे को जन्म देने की मानसिकता बन गई. जी हां, एक समय ऐसा था जब चीन दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश बन गया था. जिसके चलते चीन ने दो बच्चे पैदा करने पर रोक लगा दी थी. ऐसे में अब लोग एक ही बच्चे को जन्म देते हैं और उसका पालन पोषण करते हैं. इसके अलावा शहरीकरण के कारण लोगों की जीवनशैली में बदलाव आया है. करियर और जीवन स्तर को बेहतर बनाने पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है. वहीं महिलाएं अब शिक्षित और स्वतंत्र हैं. वो करियर बनाने और परिवार नियोजन के फैसले स्वयं ले रही हैं. साथ ही बच्चों की परवरिश में आने वाली लागत लगातार बढ़ रही है. इसके अलावा चीन की आबादी भी तेजी से बूढ़ी हो रही है. चीन में गिरती जन्मदर के क्या हैं प्रभाव? अब सवाल ये उठता है कि चीन अपनी घटती जनसंख्या से परेशान क्यों हो रहा है? तो बता दें कि कम जन्मदर से श्रम शक्ति कम होगी, जो आर्थिक विकास को प्रभावित करेगी. इसके अलावा बुजुर्गों की संख्या बढ़ने से सामाजिक सुरक्षा प्रणाली पर दबाव बढ़ेगा. साथ ही कम युवाओं के कारण सैन्य शक्ति कमजोर हो सकती है. भारत में जन्म दर की क्या है स्थिति? भारत में भी पिछले समय के मुकाबले जन्म दर घटी है. अब हमारे देश में दंपत्ति एक या दो बच्चों को ही जन्म देने पर जोर दे रहे हैं. हालांकि चीन के मुकाबले भारत में ये समस्या फिलहाल कम है. वहीं कई ऐसे देश हैं जहां घटती जन्म दर एक बड़ी समस्या है. बता दें जापान, दक्षिण कोरिया और कई यूरोपीय देशों में भी जन्मदर में गिरावट देखी जा रही है. जिसके लिए सरकार को आगे आकर जन्म दर को बढ़ाने के प्रयास करने पड़ रहे हैं. जी हां, इन देशों में सरकार बच्चे पैदा करने के लिए तरह-तरह के ऑफर देकर लोगों को आकर्षित कर रही है.

रूस ने शुरू कर दी न्यूक्लियर हमले की प्रैक्टिस, ऐक्शन से थर्राई दुनिया

मॉस्को बीते दो साल से भी ज्यादा वक्त से रूस-यूक्रेन मोर्चे पर हैं। रूस इस बात पर आमादा है कि वह यूक्रेन को तबाह करके ही मानेगा, वहीं यूक्रेन है कि रूस के सामने घुटने टेकने को तैयार नहीं है। अब यह युद्ध सबसे कठिन दौर में प्रवेश कर गया है क्योंकि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अपने परमाणु बलों को विशेष अभ्यास शुरू करने का आदेश दिया। यह दो हफ्तों में दूसरी बार है जब पुतिन ने ऐसा सैन्य अभ्यास शुरू किया है। पश्चिमी देशों के नेतृत्व वाली नाटो गठबंधन अब भी इस बढ़ते तनाव से निपटने के तरीकों को लेकर अनिश्चित हैं। तनाव तब और बढ़ा जब अमेरिका सहित पश्चिमी देशों ने यूक्रेन को लंबी दूरी की क्रूज मिसाइलें उपलब्ध कराने की योजना बनाई ताकि वह रूस के अंदर गहरे क्षेत्र तक निशाना बना सके। रूस ने पश्चिम को साफ तौर पर चेतावनी दी है कि अगर यूक्रेन ने पश्चिमी समर्थन के साथ इस तरह का कदम उठाया, तो वह अपनी रक्षा के लिए परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करने पर विचार करेगा। क्रेमलिन ने अपनी परमाणु नीति को अपडेट किया है, जिसमें यह स्पष्ट किया गया है कि पुतिन की स्वीकृति से यह नीति गैर-परमाणु देशों के खिलाफ भी लागू हो सकती है। परमाणु अभ्यास की शुरुआत करते हुए पुतिन ने कहा, “हम परमाणु हथियारों के उपयोग को नियंत्रित करने के लिए अधिकारियों की कार्रवाई का अभ्यास करेंगे और इसके अंतर्गत बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों का जरूरी इस्तेमाल करेगा।” उन्होंने यह भी कहा कि परमाणु हथियारों का उपयोग अत्यंत असाधारण स्थिति में ही किया जाएगा, लेकिन इन्हें हमेशा तत्परता में रखना आवश्यक है। पुतिन ने यह भी स्पष्ट किया, “हम एक नई हथियार दौड़ में शामिल नहीं होना चाहते, लेकिन हम अपनी परमाणु ताकत को उचित स्तर पर बनाए रखेंगे।” नाटो ने रूस पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिसमें उत्तर कोरिया द्वारा रूस को यूक्रेन में लड़ने के लिए सैनिक भेजने का मुद्दा शामिल है। पेंटागन ने कहा है कि उत्तर कोरिया ने रूस को कम से कम 10,000 सैनिक भेजे हैं, जबकि यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की का दावा है कि यह संख्या 12,000 से अधिक हो सकती है। पेंटागन की डिप्टी प्रेस सेक्रेटरी सबरीना सिंह ने कहा, “हमें विश्वास है कि डीपीआरके ने कुल मिलाकर लगभग 10,000 सैनिक रूस के पूर्वी क्षेत्र में प्रशिक्षण के लिए भेजे हैं। इनमें से कुछ सैनिक यूक्रेन के करीब पहुंच गए हैं और हमें चिंता है कि रूस इन सैनिकों का उपयोग यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में करेगा।” पुतिन ने अपने देश की रक्षा के मुद्दे पर स्पष्ट करते हुए कहा कि यह केवल रूस का आंतरिक मामला है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर यूक्रेन नाटो में शामिल होने का निर्णय लेता है, तो रूस भी अपनी सुरक्षा को लेकर जो जरूरी होगा, वह करेगा। रूसी सेना ने अपने हालिया अभ्यास के दौरान टीवर क्षेत्र में भी प्रशिक्षण किया, जो मास्को के उत्तर-पश्चिम में स्थित है। इस अभ्यास में यार्स इंटर-कॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) जैसे उपकरणों का भी इस्तेमाल किया गया, जो अमेरिका के हर कोने तक प्रहार करने में सक्षम हैं। रूस और अमेरिका दुनिया के कुल परमाणु हथियारों के 88% का नियंत्रण रखते हैं। पुतिन और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने पहले भी यह चेतावनी दी थी कि यदि रूस और नाटो में सीधा टकराव हुआ, तो यह तीसरे विश्व युद्ध का कारण बन सकता है। रिपब्लिकन राष्ट्रपति उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रम्प ने भी परमाणु युद्ध के जोखिम को लेकर चेतावनी दी है। पुतिन ने कहा, “बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों और नए बाहरी खतरों के बीच, हमारे पास तैयार और आधुनिक रणनीतिक बलों का होना महत्वपूर्ण है।” उन्होंने बताया कि रूस नए स्थिर और मोबाइल-आधारित मिसाइल सिस्टम की ओर बढ़ रहा है, जिनमें प्रक्षेपण की तैयारी का समय कम है और ये मिसाइल डिफेंस सिस्टम को भी मात दे सकते हैं। वहीं पेंटागन ने स्पष्ट किया है कि अगर उत्तर कोरिया रूस का समर्थन करने के लिए सैनिक भेजता है, तो अमेरिका यूक्रेन के हथियारों के उपयोग पर कोई नई सीमाएं नहीं लगाएगा।

योगी सरकार की नई योजना से होगी 8 लाख की कमाई, फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूटूबर को फायदा

लखनऊ उत्तर प्रदेश सरकार ने डिजिटल दुनिया में रोजगार के नए दरवाजे खोलते हुए एक नई सोशल मीडिया पॉलिसी की घोषणा की है। इसके तहत सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स अब राज्य की कल्याणकारी योजनाओं और अन्य पहल का प्रचार करके हर महीने 8 लाख रुपये तक कमा सकते हैं। यह पॉलिसी राज्य के युवाओं और डिजिटल क्रिएटर्स के लिए रोजगार के अवसर पैदा करेगी। इसी के साथ-साथ सरकारी योजनाओं को अधिक प्रभावी ढंग से जनता तक पहुंचाने में मदद करेगी। इस पॉलिसी में क्या है खास? दरअसल, यूपी सरकार ने एक नई सोशल मीडिया पॉलिसी की घोषणा की है। इस पॉलिसी का मकसद न केवल सरकारी योजनाओं का प्रचार-प्रसार करना है, बल्कि राज्य के युवाओं और सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स को एक मौका देना है, जिसके तहत वे सरकारी योजनाओं और पहल को प्रमोट करके हर महीने लाखों रुपये कमा सकते हैं। यह पॉलिसी फेसबुक, एक्स (ट्विटर), इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म्स पर लागू होगी, जिससे डिजिटल दुनिया में रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। इंफ्लुएंसर्स के लिए सुनहरा मौका इस पॉलिसी के तहत सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स को सरकार की योजनाओं का प्रचार-प्रसार करने के लिए पैसे मिलेंगे। खास बात यह है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को इंफ्लुएंसर्स के फॉलोअर्स और सब्सक्राइबर्स के आधार पर विभिन्न श्रेणियों में बांटा गया है, जिसके अनुसार उनकी अधिकतम कमाई तय की गई है। एक्स (ट्विटर), फेसबुक, इंस्टाग्राम – अधिकतम भुगतान: ₹5 लाख प्रति माह (X) – अधिकतम भुगतान: ₹4 लाख प्रति माह (फेसबुक) – अधिकतम भुगतान: ₹3 लाख प्रति माह (इंस्टाग्राम) – अधिकतम भुगतान: ₹2 लाख प्रति माह (कम फॉलोअर्स के लिए) यूट्यूब – अधिकतम भुगतान: ₹8 लाख प्रति माह (वीडियो, शॉर्ट्स, और पॉडकास्ट के लिए) – अन्य श्रेणियों में ₹7 लाख, ₹6 लाख और ₹4 लाख प्रति माह तक की कमाई हो सकती है। इंफ्लुएंसर्स को सरकारी योजनाओं के वीडियो, ट्वीट्स, पोस्ट्स और रील्स को सोशल मीडिया पर शेयर करना होगा, जिसे ‘V-Form’ नामक एक डिजिटल एजेंसी संभालेगी। यह एजेंसी इस पूरी प्रक्रिया को मैनेज करेगी, जिससे इंफ्लुएंसर्स को सीधे भुगतान मिलेगा। कैसे बन सकते हैं इसका हिस्सा? अगर आप एक सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर हैं और इस पॉलिसी का लाभ उठाना चाहते हैं, तो आपको इन बातों का ध्यान रखना होगा। सोशल मीडिया अकाउंट्स की श्रेणीः आपको पहले यह तय करना होगा कि आपके फॉलोअर्स या सब्सक्राइबर्स की संख्या किस कैटेगरी में आती है। एक्स, फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब के लिए अलग-अलग कैटेगरी बनाई गई हैं, जिसके आधार पर आपकी कमाई तय होगी। रजिस्ट्रेशन: इस स्कीम का हिस्सा बनने के लिए आपको सरकार द्वारा नामित एजेंसी ‘V-Form’ के माध्यम से रजिस्टर करना होगा। इसके लिए आपको अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स की जानकारी, फॉलोअर्स की संख्या और कंटेंट के नेचर को सबमिट करना होगा। कॉन्टेंट की अपलोडिंगः रजिस्ट्रेशन के बाद आपको सरकारी योजनाओं से जुड़े वीडियो, पोस्ट्स, रील्स या पॉडकास्ट को अपने प्लेटफार्म पर अपलोड करना होगा। इन पोस्ट्स के माध्यम से सरकारी योजनाओं की जानकारी और उनकी लाभकारी पहल को जनता के सामने लाना होगा। अधिकतम कमाई: जैसे-जैसे आपके फॉलोअर्स और सब्सक्राइबर्स बढ़ेंगे, वैसे-वैसे आपकी कैटेगरी भी बढ़ेगी, जिससे आप हर महीने 8 लाख रुपये तक कमा सकते हैं। यूट्यूब पर कंटेंट क्रिएटर्स के लिए यह विशेष रूप से फायदेमंद हो सकता है, जहां वीडियो, शॉर्ट्स और पॉडकास्ट के माध्यम से उन्हें सबसे अधिक कमाई का मौका मिलेगा। सिस्टम से जुड़े लोगों का मानना है कि यह पॉलिसी केवल सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स को ही नहीं, बल्कि समाज के सभी वर्गों को लाभान्वित करने वाली है। इसके माध्यम से सरकारी योजनाओं को तेजी से और प्रभावी ढंग से जनता तक पहुंचाया जा सकेगा। खासकर ग्रामीण इलाकों में जहां लोगों तक सरकारी योजनाओं की जानकारी कम पहुंच पाती है, इस पॉलिसी के जरिए उन्हें सरकारी लाभों के बारे में पता चलेगा। फर्जी खबरों पर भी लग सकेगी रोक! इस पॉलिसी का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह सोशल मीडिया पर फैलने वाली फर्जी और भ्रामक खबरों पर भी अंकुश लगाएगी। इसके तहत सरकार ने नियम बनाए हैं, जिसमें किसी भी प्रकार के आपत्तिजनक, राष्ट्र-विरोधी या समाज-विरोधी कंटेंट पोस्ट करने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। फर्जी खबरों, नफरत फैलाने वाले संदेशों और समाज को भड़काने वाले कंटेंट पर सरकार की नजर रहेगी और उचित जरूरी उठाए जाएंगे।

पराली जलाने पर SC सख्त, पराली जलाने पर CQM से मांगा जवाब

लुधियाना बीते 24 सितंबर को सर्वोच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में पराली जलाने के मुद्दे पर वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) से जवाब तलब किया कि पराली जलाना फिर से क्यों शुरू हो गया? सर्वोच्च न्यायालय ने पूछा कि ‘सीएक्यूएम एक्ट की धारा-14 के तहत जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ क्या कदम उठाया गया है।’ अदालत ने पंजाब और हरियाणा की सरकारों को भी फटकार लगाते हुए कहा कि दोनों राज्यों ने पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई नहीं की है। दरअसल, सीएक्यूएम की धारा के तहत पराली जलाने पर अधिकारियों, कर्मचारियों को सजा का भी प्रावधान है। सवाल है कि क्या अकारण सर्वोच्च न्यायालय को पराली जलाने पर एक जिम्मेदार संस्थान को फटकार लगानी पड़ी! पंजाब में पराली जलाने के मामले आठ से 93 तक पहुंच गए क्या सरकार के तमाम प्रयासों के बावजूद पराली प्रबंधन विफल हो चुका है? क्या कृषक जन-मन अब भी पूरी तरह से पराली प्रबंधन पर पुरानी परिपाटी से चल रहा है? जाहिर है, कुछ न कुछ कुप्रबंधित जरूर है। सितंबर माह के आंकड़ों के मुताबिक पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश से पराली जलाने के कुल 75 मामले उजागर हो चुके हैं। हैरत की बात है कि 15-25 सितंबर के बीच पिछले वर्ष की तुलना में हरियाणा और पंजाब में पराली जलाने की घटनाएं पांच से ग्यारह फीसद तक बढ़ी हैं। उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष इसी अवधि में जहां हरियाणा में पराली जलाने के तेरह मामले पाए गए थे, इस बार बढ़ कर 70 हो गए। इसी तरह पंजाब में पराली जलाने के मामले आठ से 93 तक पहुंच गए। हरियाणा में करनाल, कुरुक्षेत्र और यमुनानगर सर्वाधिक प्रभावित जनपद हैं। वहां कुल 70 मामलों में 31 मामले पाए गए। इसी तरह पंजाब के कुल 93 मामलों में से 58 मामले तरनातरन, गुरुदासपुर और अमृतसर में पाए गए। अनवरत पराली दहन से बिगड़ती आबोहवा का खमियाजा प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से संपूर्ण पारिस्थितिक तंत्र को भुगतना पड़ता है। सर्दियों के शुरुआती दौर में ही दम घुटने-सा लगता है। अभी बीते 24 सितंबर तक राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु गुणवत्ता सूचकांक 203 तक दर्ज किया गया। ऐसे हालात में सुप्रीम की फटकार स्वाभाविक है। पराली जलाने पर निगरानी के लिए हर वर्ष निगाह रखी जाती है ऐसा नहीं कि सरकार ने विगत वर्षों में पराली दहन को लेकर कुछ नहीं किया। पर शासन, प्रशासन, सरकारी संस्थाओं और पराली जलाने वाले किसानों के बीच संबंध में जरूर कुछ कमी रह जाती है। पिछले वर्ष सुप्रीम कोर्ट के हवाले से केंद्र सरकार ने सूबे की सरकारों को पराली जलाने के दोषी किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का लाभ न देने का सख्त निर्देश दिया है। पराली जलाने पर निगरानी के लिए हर वर्ष 15 सितंबर तक ‘कंसोर्टियम फार रिसर्च आन एग्रो इकोसिस्टम मानिटरिंग ऐंड माडलिंग फ्राम स्पेस’ (क्रीम्स) द्वारा सेटेलाइट से निगाह रखी जाती है। इससे ‘गूगल लोकेशन’ के साथ पराली जलाने का पता लग जाता है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने पराली जलाने पर दो एकड़ से कम क्षेत्र के लिए ढाई हजार रुपए, दो से पांच एकड़ क्षेत्र के लिए पांच हजार रुपए और पांच एकड़ से अधिक क्षेत्र के लिए पंद्रह हजार रुपए तक अर्थदंड का प्रावधान किया है। दुबारा पराली जलाने पर संबंधित किसान के खिलाफ कारावास और अर्थदंड का भी प्रावधान है। इसी तरह धान काटने के यंत्र कंबाइन हार्वेस्टर में ‘स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम’ (एसएमएस) अनिवार्य कर दिया गया है। बिना एसएमएस वाले कंबाइन के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान है। विगत वर्षों में विभिन्न सूबों में हजारों किसानों के विरुद्ध पराली जलाने पर एफआइआर भी दर्ज कराई गई है। पराली जलाने से मृदा में मौजूद अनेक लाभदायक सूक्ष्मजीव नष्ट हो जाते हैं। एक अध्ययन के मुताबिक एक टन पराली जलने से मृदा में मौजूद 5.5 किलो ग्राम नाइट्रोजन, 2.3 किलो ग्राम फास्फोरस, 25 किलो ग्राम पोटैशियम, 1.2 किलो ग्राम सल्फर समेत अन्य उपयोगी पोषक तत्त्व नष्ट हो जाते हैं। अंतरराष्ट्रीय खाद्य नीति अनुसंधान संस्थान की रपट के मुताबिक उत्तर भारत के राज्यों में पराली जलाने के कारण तकरीबन दो लाख करोड़ रुपए की आर्थिक हानि होती है। एक अन्य जानकारी के मुताबिक दिल्ली में पराली प्रदूषण की वजह से ‘एक्यूट रेस्पिरेटरी इंफेक्शन’ (एआरआइ) ग्रामीण क्षेत्रों के मुकाबले बच्चों और बुजुर्गों में ज्यादा होता है। प्रदूषण का स्तर उच्च होने के कारण दिल्ली वासियों की जीवन प्रत्याशा में लगभग साढ़े छह साल की कमी आई है। पराली जलने से कार्बन मोनो आक्साइड, कार्बन डाई आक्साइड, मीथेन, पाली सायक्लिक एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन जैसी विषैली गैसें उत्सर्जित होती हैं। इन प्रदूषकों के प्रसार से ‘स्माग’ का एक मोटा आवरण निर्मित होता है, जिससे ब्रोंकाइटिस, तंत्रिका और हृदय संबंधी, यहां तक कि कैंसर जैसे रोगों का खतरा बढ़ जाता है। इस समस्या का समाधान केवल सरकारी तंत्र के भरोसे नहीं किया जा सकता है। इसके लिए किसानों को जागरूक बनाना होगा। किसान कम अवधि वाली धान की प्रजातियां लगाएं, जिससे पराली जलाने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी, और अगली फसल के लिए पराली विघटन को पर्याप्त समय मिल जाए। पिछले वर्ष हरियाणा सरकार ने धान की सीधी बिजाई के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया था, जिससे 30 सितंबर तक वहां की मंडियों में आठ लाख टन धान बिकने आया था। इससे इतर, धान की कम अवधि वाली प्रजातियों, जैसे पीआर-126, पीबी 1509 आदि बोने के लिए किसानों को प्रोत्साहित करना चाहिए। ‘हैप्पी सीडर’ का प्रयोग किया जाए, जिसमें पराली का बंडल बनकर ऊपर आ जाता है, गेहूं की बुवाई हो जाती है और पराली का बंडल पलवार के रूप में खेत पर बिछ जाता है। इसके अलावा ‘पैलेटाइजेशन’ को अपनाया जा सकता है। इसमें पुआल को सुखाकर गुटिका के रूप में बदल दिया जाता है, उसे कोयले के साथ मिलाकर थर्मल पावर प्लांट और उद्योगों में ईंधन की तरह प्रयोग करते हैं। इससे एक ओर जहां कोयले की बचत होती है, वहीं दूसरी ओर कार्बन उत्सर्जन में कटौती होती है। ‘गौठान’ छत्तीसगढ़ का एक नवीन प्रयोग है। इसमें पांच एकड़ सरकारी भूमि में दान की गई पराली एकत्र कर गाय के गोबर और प्राकृतिक एंजाइम मिला कर जैविक खाद बनाई जाती है। पराली को ‘कंप्रेस्ड बायो गैस प्लांट’ (सीबीजीपी) में भेज दिया जाए तो ईंधन तैयार हो जाता है। दिल्ली के … Read more

कृषि सहकारी समितियां अब प्रदेश के गांवों में जन औषधि केंद्र भी चलाएंगी

भोपाल मध्य प्रदेश की ग्राम पंचायतों में कृषि साख सहकारी समितियां (बी-पैक्स) अब मेडिकल स्टोर यानी जन औषधि केंद्र भी चलाएंगी। यहां से ग्रामीणों को बाजार के मुकाबले सस्ती दरों पर कारगर जेनेरिक दवाएं उपलब्ध हो पाएंगी। इस प्रयोग से सहकारी समितियों को आय का नया स्रोत भी मिल जाएगा। सहकारिता विभाग के अधिकारियों ने बताया कि ऐसे जन औषधि केंद्रों के संचालन के लिए प्रदेश की 275 समितियों का चयन किया गया। इनमें से 270 ने अपना औपचारिक आवेदन विभाग को कर दिया। इनमें से 55 समितियों को केंद्र संचालन का लाइसेंस जारी किया गया है। 24 समितियों में जन औषधि केंद्र शुरू भी करवा दिए गए हैं। बढ़ रहा जेनेरिक दवाओं का कारोबार मध्य प्रदेश में ऐसा प्रयोग पहली बार हो रहा है। उत्तर प्रदेश में कृषि साख सहकारी समितियां वर्ष 2023 में ही दवा कारोबार में उतर चुकी हैं। बता दें, मध्य प्रदेश में जन औषधि केंद्रों में व्यवसाय अच्छा हो रहा है। पिछले पांच वर्ष में यहां 44 करोड़ रुपये की जेनेरिक दवाएं बिकी हैं। फार्मा कंपनी से होगा अनुबंध नियमों के मुताबिक किसी दवा दुकान के संचालन के लिए फार्मासिस्ट होना अनिवार्य है। जिला उपायुक्त, सहकारिता छविकांत बाघमारे ने बताया कि कृषि साख सहकारी समितियों के जन औषधि केंद्र का संचालन करवाने के लिए फार्मा कंपनी से अनुबंध किया जाएगा। केंद्र सरकार को इसका प्रस्ताव जाना है। वर्तमान में सीहोर, धार सहित कुछ जिलों में समितियों ने स्थानीय स्तर पर फार्मासिस्ट नियुक्त कर दुकानों का संचालन शुरू किया है। किसानों को होगा सीधा फायदा कृषि साख सहकारी समितियों पर जन औषधि केंद्र खुलने का सबसे अधिक लाभ किसानों को मिलेगा। वे अपने घर के नजदीक सस्ती दवाइयां प्राप्त कर सकेंगे। वहीं समितियों के स्वावलंबी होने से भी किसानों को कर्ज और दूसरी सुविधाएं मिलने में आसानी हो जाएगी। साख समितियों को बहुउद्देशीय बनाने की कवायद सरकार बेहतर कार्य करने वाली सहकारी साख समितियों को बहु उद्देश्यीय और विविध व्यवसाय करने वाली समिति बनाने की कोशिश कर रही है। सहकारिता विभाग ने 4500 समितियों में से 2000 समितियों को इसके लिए चुना है। समितियां कर रही ये कारोबार आर्गेनिक उत्पादों का व्यवसाय करने के 1,454 समितियों ने आवेदन किया है। इन समितियों के यहां आर्गेनिक बीज तैयार करने के लिए जगह भी उपलब्ध है। इस तरह की ज्यादातर समितियां आदिवासी क्षेत्रों में किसानों के साथ मिलकर काम करेंगी। समितियों को निर्यात कारोबार से जोड़ने का भी प्रस्ताव है। इन समितियों की प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार कराई गई है। नेशनल एक्सपोर्ट कोऑपरेटिव सोसायटी की सदस्यता के लिए 1,700 समितियों से आवेदन कराया गया है। प्रदेश की कई कृषि साख सहकारी समितियों को अलग-अलग काम करने के लिए कहा गया है। अभी इन समितियों को जन औषधि केंद्र संचालित करने के लिए लाइसेंस दिए जा रहे हैं। -मनोज कुमार सरियाम, पंजीयक सहकारी संस्थाएं, मध्य प्रदेश

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