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शेयर बाजार से चाहतें हैं पैसा कमाना तो इन ट्रेडिंग रणनीतियों है कबीले तारीफ

मुंबई ट्रेडिंग का मतलब सिक्टोरिटीज को खरीदना और बेचना होता है। ट्रेडिंग भी कई प्रकार की होती हैं। एक दिन से लेकर सालों के लंबे अंतराल के लिए भी ट्रेडिंग की जाती है। इसके साथ ही अलग-अलग बाजारों के माहौल और वहां मौजूद जोखिम से जुड़ी विभिन्न ट्रेडिंग रणनीतियां शेयरों में कारोबार करने के समय अपनाई जाती हैं। यहां पर हम कुछ ट्रेडिंग रणनीतियों पर चर्चा कर रहे हैं जो बाकी रणनीतियों में से सबसे ज्यादा लोकप्रिय हैं। ये रणनीतियां निवेशकों को तर्कसंगत निवेश निर्णय लेने में मदद कर सकती हैं। इंट्राडे ट्रेडिंग (Intraday Trading) इंट्राडे ट्रेडिंग जिसे डे ट्रेडिंग के रूप में भी जाना जाता है। ये ऐसी ट्रेडिंग रणनीति है जिसमें निवेशक एक ही दिन में शेयरों को खरीदते और बेचते हैं। वे शेयर बाजार के बंद होने के समय से पहले ट्रेडिंग बंद कर देते हैं। एक ही दिन में वे मुनाफा और घाटा बुक करते हैं। निवेशक इन शेयरों में एक दिन में कुछ सेकंड, घंटे के लिए या इसमें दिन भर में कई बार ट्रेड ले सकते हैं। इसलिए इंट्राडे एक अत्यधिक वोलाटाइल ट्रेडिंग रणनीति मानी जाती और इसके लिए तेजी से निर्णय लेना होता है। पोजीशनल ट्रेडिंग (Positional Trading) पोजिशनल ट्रेडिंग एक ऐसी रणनीति है जहां शेयर्स को महीनों या सालों के लंबे समय तक रखा जाता है। ऐसे शेयरों में समय के साथ भाव में बड़ी बढ़त की अपेक्षा के साथ मुनाफा कमाने की उम्मीद की जाती है। निवेशक आमतौर पर फंडामेंटल एनालिसिस के साथ कंपनी का टेक्निकल ग्राउंड देखकर इस शैली को अपनाते हैं। इसलिए इस प्रकार की ट्रेडिंग रणनीति में आमतौर पर बाजार के रुझान और उतार-चढ़ाव जैसी अल्पकालिक जटिलताओं को नजरअंदाज कर दिया जाता है। स्विंग ट्रेडिंग (Swing Trading) स्विंग ट्रेडिंग आमतौर पर एक ऐसी रणनीति है जहां निवेशक शेयरों के भाव में और तेजी की उम्मीद में एक दिन से अधिक समय तक शेयरों को अपने पास रखते हैं। स्विंग ट्रेडर्स आने वाले दिनों में बाजार की गतिविधियों और रुझानों की भविष्यवाणी करने के लिए जाने जाते हैं। इंट्राडे ट्रेडर्स और स्विंग ट्रेडर्स के बीच स्टॉक को अपने पास रखने की समय सीमा में महत्वपूर्ण अंतर होता है। इसलिए कहा जाता है कि ज्यादातर टेक्निकल ट्रेडर्स स्विंग ट्रेडिंग की कैटेगरी में आते हैं। टेक्निकल ट्रे़डिंग (Technical Trading) टेक्निकल ट्रेडिंग में ऐसे निवेशक शामिल हैं जो शेयर बाजार में प्राइस चेंज की भविष्यवाणी करने के लिए अपने तकनीकी विश्लेषण ज्ञान का उपयोग करते हैं। इस ट्रेडिंग शैली में कोई विशेष समय-सीमा नहीं होती है क्योंकि यह एक दिन से लेकर महीनों तक के लिए भी हो सकती है। बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव को निर्धारित करने के लिए अधिकांश ट्रेडर्स अपने टेक्निकल एनालिसिस स्किल्स का उपयोग करते हैं। हालांकि स्टॉक की कीमतों का निर्धारण करते समय सबसे महत्वपूर्ण टेक्निकल एनालिसिस बाजार की परिस्थिति होती है। फंडामेंटल ट्रेडिंग (Fundamental Trading) फंडामेंटल ट्रेडिंग का मतलब स्टॉक में निवेश करना होता है जहां ट्रेडर्स समय के साथ भाव में तेजी की उम्मीद के साथ कंपनी के स्टॉक को खरीदता है। इस तरह की ट्रेडिंग में ‘बाय एंड होल्ड’ रणनीति में विश्वास किया जाता है। इस प्रकार की ट्रेडिंग आमतौर पर कंपनी के फोकस्ड इंवेंट्स में किया जाता है। इसके लिए फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स, नतीजों, ग्रोध और मैनेजमेंट क्वालिटी का सावधानीपूर्वक विश्लेषण किया जाता है। मिंट में छपी रिपोर्ट के मुताबिक ये ट्रेडिंग रणनीतियाँ बहुत काम की होती हैं और निवेशक को उस ट्रेडिंग शैली पर निर्णय लेने में मदद करती हैं जिसे वे अपनाना चाहते हैं। प्रत्येक प्रकार की ट्रेडिंग रणनीति से जुड़े जोखिम और लागत की गहन समझ के साथ ट्रेडर्स चाहें तो रणनीतियों के संयोजन का उपयोग करके भी शेयरों में खरीद-फरोख्त कर सकते हैं। डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना हेतु दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।

इंदौर में हवा की सेहत खराब, एयर क्वालिटी इंडेक्स 200 के पार

इंदौर इंदौर की आबोहवा लगातार खराब होती जा रही है। दिल्ली, मुंबई की तरह इंदौर भी अब वायु प्रदूषण के मामले में लगातार नए रिकार्ड बना रहा है। पिछले एक सप्ताह में इंदौर का एक्यूआई AQI यानी एयर क्वालिटी इंडेक्स 200 के पार चल रहा है। 26 अक्टूबर को तो यह 235 तक पहुंचा जो बेहतर खतरनाक स्तर है।      क्या हैं कारण इंदौर में वायु प्रदूषण के सबसे बड़े कारण हैं अधूरे प्रोजेक्ट्स, प्रदूषण और पेड़ों की कटाई। इसकी वजह से लगातार वायु प्रदूषण हो रहा है। पिछले पांच साल में इंदौर की वायु गुणवत्ता को लगातार खराब होते देखा गया है। कोविड के समय जहां इंदौर की आबोहवा अपने सबसे बेहतर स्तर पर थी वहीं अब वह अपने सबसे खराब स्तर पर है। गाड़ियों का चलना बंद होने से यह सुधार देखा गया था। अब लगातार बढ़ रही गाड़ियां शहर को प्रदूषण में धकेलती जा रही हैं। मौसम भी कर रहा परेशान इस साल इंदौर में मौसम भी लगातार परेशान कर रहा है। दीपावली तक शहर में बारिश हो रही है और बीच बीच में पड़ रही बेतहाशा गर्मी से लोगों का हाल बेहाल है। इस बार दशहरा और नवरात्रि के कार्यक्रम बारिश की वजह से बिगड़ गए। अब तेज ठंड के मौसम में तेज गर्मी और उमस से लोग परेशान हैं। पिछले एक सप्ताह से तापमान भी 35 डिग्री के आसपास चल रहा है। कैसे होगा सुधार शहर के पर्यावरण को सुधारने के लिए घटती हुई हरियाली को बचाना होगा। पेड़ों की कटाई रोकनी होगी और गाड़ियों का इस्तेमाल कम करना होगा। इसके साथ अधूरे पड़े प्रोजेक्ट्स को भी पूरा करना होगा ताकि धूल से निजात मिले

नहर एवं सिंचाई विभाग दौहान नदी को पुनर्जीवित करने 20 से अधिक गांवों के गिरते भूजल के लिए किसी वरदान से कम नहीं

महेंद्रगढ़ नहर एवं सिंचाई विभाग दौहान नदी को पुनर्जीवित करने के लिए शुरू की गई दो परियोजनाएं क्षेत्र के 20 से अधिक गांवों के गिरते भूजल के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं। विभाग की ओर से 50 वर्ष से अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही 30 किलोमीटर क्षेत्र में फैली दौहान नदी को पुनर्जीवित करने के लिए 120 क्यूसिक नहरी पानी छोड़ने की परियोजना तैयार कर ली है। विभाग की ओर से इन दो परियोजनाओं पर कुल 28 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। दौहान नदी क्षेत्र में पानी पहुंचने से 20 से अधिक गांवों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। यह दो परियोजनाएं होंगी क्षेत्र के लोगों सिंचाई विभाग की ओर से जवाहरलाल नेहरू नहर (जेएलएन) के एनबी-1 झगड़ोली पंप हाउस से 60 क्यूसिक पानी की क्षमता वाली भूमिगत पाइप लाइन दबाकर गांव माजरा दौहान क्षेत्र में छोड़ा जाएगा। जुलाई माह में इस परियोजना पर काम शुरू किया गया था जो युद्ध स्तर पर जारी है। 1600 एमएम परिधि वाले सीमेंटेड पाइप की 5.2 किलोमीटर लंबी लाइन से 60 क्यूसिक पानी दौहान क्षेत्र में छोड़ा जा सकेगा। सिंचाई विभाग इस परियोजना पर 13 करोड़ रुपये खर्च करेगा। इस समय युद्ध स्तर पर इस परियोजना पर काम चल रहा है तथा अंतिम चरण में है। वहीं दूसरी परियोजना के तहत जेएलएन के एमसी-5 व एनबी-1 पंप हाउसों के बीच से गांव भगड़ाना तक कुल 4.5 किलोमीटर लंबी भूमिगत लाइन दबाकर भगड़ाना गांव के दौहान नदी क्षेत्र में 60 क्यूसिक पानी पहुंचाया जाएगा। इस परियोजना पर सिंचाई विभाग कुल 15 करोड़ रुपये खर्च करेगा। इस परियोजना के लिए विभाग की ओर से सभी प्रक्रिया पूरी कर एजेंसी को टेंडर अलॉट किया जा चुका है तथा नवंबर माह तक इस पर काम शुरू कर दिया जाएगा। अधिकारी के अनुसार 30 किलोमीटर लंबाई तक फैले दौहान नदी क्षेत्र से गांव डेरोली जाट, देवास, कुकसी, नांगल सिरोही, कौथल कलां, कौथल खुर्द, नानगवास, खातीवास, बेरी, भांडोर ऊंची, जासावास, देवनगर, चितलांग, डुलाना, माजरा खुर्द, माजरा कलां, सिसोठ, भगड़ाना, लावन, झूक, मालड़ा सराय, मालड़ा बास, पाली, जाट, भुरजट, बसई तक 20 से अधिक गांवों के भूजल स्तर में 120 क्यूसिक नहरी पानी रिचार्ज का काम करेगा। डार्क जोन में शामिल महेंद्रगढ़ क्षेत्र के इन गांवों के लिए यह दोनों परियोजनाएं किसी वरदान से कम नहीं हैं। साथ ही अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही दौहान नदी को भी नया जीवन मिल सकेगा। इस समय जेएलएन को मिलने वाला अतिरिक्त पानी देवास गांव से गुजरने वाले दौहान क्षेत्र में छोड़ा जा रहा है। जिले के लिए जीवन रेखा कही जाने वाली जेएलएन कैनाल से पानी ओवरफ्लो होकर हर साल किसानों की फसलें बर्बाद हो रही थी लेकिन अब इस पानी से क्षेत्र का भूजल स्तर सुधरेगा। – कंवर सिंह यादव, विधायक महेंद्रगढ़। सिंचाई विभाग की ओर से दोनों परियोजनाओं को जल्द पूरा करने का प्रयास किया जाएगा। एनबी-1 झगड़ोली पंप हाउस से 60 क्यूसिक पानी की क्षमता वाली परियोजना का काम अंतिम चरण में चल रहा है। नवंबर माह तक यह परियोजना पूरी हो जाएगी। इसके शीघ्र बाद ही नवंबर माह में ही भगड़ाना दौहान क्षेत्र में पानी छोड़ने के लिए 4.5 किलोमीटर लंबी 1600 एमएम परिधि की पाइप लाइन दबाने का काम शुरू कर दिया जाएगा। – दीपक कुमार, कनिष्ठ अभियंता नहर एवं सिंचाई विभाग महेंद्रगढ़

निवेश की पसंदीदा जगह बना भारत, मैन्यूफैक्चरिंग टेक्नोलाजी के क्षेत्र में विश्व में बन रहा अग्रणी

नई दिल्ली भारत को विदेशी निवेश का पसंदीदा केंद्र बनाने में हमारी तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था की अहम भूमिका है। पिछले वित्त वर्ष 2022-23 में देश की विकास दर अनुमान से अधिक 7.2 प्रतिशत रही। गत जून में देश में जीएसटी संग्रह, विनिर्माण के लिए पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआइ), यात्री वाहनों की बिक्री और यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआइ) के जरिये हुए लेनदेन में प्रभावी वृद्धि दर्ज की गई है। ऐसे उत्साहवर्द्धक आर्थिक आंकड़ों से दुनियाभर के वित्तीय संगठन और क्रेडिट रेटिंग एजेंसियां चालू वित्त वर्ष 2023-24 में भारत की विकास दर के छह से 6.5 प्रतिशत रहने की उम्मीद व्यक्त कर रही हैं। कहा जा रहा है कि भारत विश्व अर्थव्यवस्था में नई शक्ति प्राप्त कर रहा है। चार वैश्विक रुझान-जनसांख्यिकी, डिजिटलीकरण, डिकार्बोनाइजेशन और डिग्लोबलाइजेशन नए भारत के पक्ष में हैं। साथ ही देश में प्रतिभाशाली नई पीढ़ी की कौशल दक्षता, आउटसोर्सिंग और बढ़ते हुए मध्यम वर्ग की क्रयशक्ति के कारण विदेशी निवेशक भारत की ओर देखने लगे हैं। मोदी सरकार ने उद्योग-कारोबार को आसान बनाने के लिए विगत नौ वर्षों में करीब 1,500 पुराने कानूनों और 40 हजार अनावश्यक अनुपालन समाप्त किए हैं। इस दौरान आर्थिक क्षेत्र में जीएसटी और दिवालिया कानून जैसे सुधार किए गए हैं। बैंकिंग क्षेत्र में जोरदार सुधार करके मजबूत वृहद आर्थिक बुनियाद की मदद से अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाया गया है। कारपोरेट टैक्स को कम किया गया है। भारत के युवाओं ने डिजिटल और उद्यमिता के क्षेत्र में दुनिया भर में दबदबा कायम किया है और 100 से ज्यादा यूनिकार्न बनाए हैं। पिछले नौ साल में एक लाख से ज्यादा स्टार्टअप भी शुरू हुए हैं। कानून के कई प्रविधानों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने जैसे कदमों से देश में विदेशी निवेश का प्रवाह तेजी से बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है। देश के मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर को आगे बढ़ाने के लिए सरकार जिन रणनीतियों के साथ आगे बढ़ रही है, उससे देश में विदेशी निवेश बढ़ रहा है। भारत को एक वैश्विक डिजाइन और विनिर्माण केंद्र में बदलने के लिए मेक इन इंडिया 2.0, मैन्यूफैक्चरिंग इकाइयों के लिए तकनीकी समाधान को बढ़ावा देने के लिए उद्योग 4.0, स्टार्टअप संस्कृति को उत्प्रेरित करने के लिए स्टार्टअप इंडिया, मल्टीमाडल कनेक्टिविटी अवसंरचना परियोजना के लिए पीएम गतिशक्ति और उद्योगों को डिजिटल तकनीकी शक्ति प्रदान करने के लिए डिजिटल इंडिया जैसी सफल गतिविधियों के कारण भारत चौथी औद्योगिक क्रांति की दिशा में आगे बढ़ रहा है। भारतीय कंपनियां शोध एवं नवाचार में आगे बढ़ रही हैं। आटोमेशन और रोबोटिक्स जैसे क्षेत्रों पर भी उद्योग जगत की ओर से अपेक्षित ध्यान दिया जा रहा है। पिछले तीन वर्षों में सरकार ने उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआइ) स्कीम के तहत 14 उद्योगों को करीब 1.97 लाख करोड़ रुपये का आवंटन सुनिश्चित किया है। अब पीएलआइ स्कीम के सकारात्मक परिणाम आने शुरू भी हो गए है। इसकी बदौलत इस समय एशिया में अधिकांश निवेशकों को भारत से बेहतर कोई नहीं दिख रहा है। भारतीय शेयर बाजार में तेजी की यह भी एक बड़ी वजह है। प्रधानमंत्री मोदी के अमेरिका दौरे के बाद उद्योग-कारोबार से संबंधित ऐसा महत्वपूर्ण परिदृश्य उभरकर सामने आ रहा है, जिससे भारत दुनिया का नया मैन्यूफैक्चरिंग हब बनते हुए दिखाई देगा। माइक्रोन, एप्लाइड मैटेरियल्स और लैम रिसर्च जैसी कंपनियों की घोषणाओं से आने वाले दिनों में लाखों की संख्या में नई नौकरियां भी सृजित होंगी। कंप्यूटर चिप बनाने वाली अमेरिकन कंपनी माइक्रोन ने गुजरात में अपने सेमीकंडक्टर असेंबली एवं परीक्षण संयंत्र के परिचालन को वर्ष 2024 के अंत तक शुरू करने की घोषणा की है, जिस पर करीब 2.75 अरब डालर खर्च किए जाएंगे। देश में सेमीकंडक्टर के निर्माण से अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदल जाएगी, क्योंकि सेमीकंडक्टर उद्योग स्टील, गैस और रसायन की तरह आधारभूत उद्योग है, जो कई सेक्टर की जरूरतों को पूरा करता है। सेमीकंडक्टर के निर्माण से आटोमोबाइल, इलेक्ट्रानिक्स एवं रक्षा सेक्टर को काफी लाभ मिलेगा। उम्मीद करें कि भारत नई लाजिस्टिक नीति, गतिशक्ति योजना के कारगर कार्यान्वयन, नीतिगत सुधारों, कारोबार आरंभ करने के लिए सिंगल विंडो मंजूरी, इन्फ्रास्ट्रक्चर, श्रमिकों को नए दौर के अनुरूप प्रशिक्षण देने के साथ-साथ विभिन्न आर्थिक और वित्तीय सुधारों से अगले वर्ष दुनिया के शीर्ष पांच पसंदीदा एफडीआइ वाले देशों की सूची में दिखाई देगा। इसका देश की आर्थिकी को व्यापक रूप से लाभ मिलेगा। (लेखक एक्रोपोलिस इंस्टीट्यूट आफ मैनेजमेंट स्टडीज एंड रिसर्च, इंदौर के निदेशक हैं)

MP में बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने सरकारी स्कूल और छात्रवासों में कराटे ताइक्वांडो और मार्शल आर्ट्स की ट्रेनिंग दी जा रही

भोपाल  भोपाल से कुछ ही दूरी पर स्थित मुबारकपुर की रहने वालीं चांदनी कुशवाहा की उम्र 14 साल है. इस छोटी सी उम्र में वो बड़ी बात कहती हैं. वो कहती हैं- मेरी दो और छोटी बहनें हैं. मुझे और इन दोनों को पहले मेरे माता-पिता स्कूल भेजने से डरते थे. अब मैं रोज इन्हें लेकर अकेले स्कूल जाती हूं. क्योंकि हमें गुड टच और बैड टच बताया गया है. कोई हमें परेशान करेगा तो हम उनको पंच मारेंगे. हम जानते हैं बुरे लोगों को कैसे निबटाना है. चांदनी में बुरे लोगों का मुकाबला करने का आत्मविश्वास यूं ही ही नहीं आया…दरअसल मध्यप्रदेश के सरकारी स्कूल (Government Schools of Madhya Pradesh) और छात्रावासों में बच्चियों को कराटे ताइक्वांडो और मार्शल आर्ट्स की ट्रेनिंग दी जा रही है. इस योजना के तहत शासकीय विद्यालयों, 408 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (Kasturba Gandhi Girls School) और 324 नेताजी सुभाषचंद्र बोस बालिका विद्यालयों में बालिकाएं सशक्त बन रहीं है.इस योजना में कन्या शालाओं के साथ उन सभी माध्यमिक स्कूलों का चयन किया गया है, जिनमें बालिकाओं की संख्या ज़्यादा है. यहां महिला प्रशिक्षक बेटियों को शारीरिक और मानसिक तौर पर तैयार कर रही है. चांदनी जैसी लड़कियां सिर्फ भोपाल में ही नहीं है. रायसेन में रहने वाली आठवीं क्लास की महक मीना और साक्षी लोधी भी पिछले दो साल से हॉस्टल में रहकर कराटे की ट्रेनिंग ले रही हैं. वे आदिवासी इलाके से आती हैं. अब वे कराटे का हर दांवपेंच जानती है. महक कहती हैं उन्हें अब अकेले आने-जाने में डर नहीं लगता. दूसरी तरफ साक्षी का कहना है कि मैं अपने बहनों को भी आत्मरक्षा के गुण सीखा रही हूं. मैं अब बहुत सुरक्षित महसूस करती हूं. बता दें कि समग्र शिक्षा अभियान के तहत प्रदेश में संचालित 207 कस्तूरबा गाँधी विद्यालय और 324 नेताजी सुभाष चंद्र बोद बालिका छात्रावास में छात्राओं को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण दिया जा रहा है,महिला प्रशिक्षकों को ट्रेनिंग के लिए रखा गया है,जहाँ रोज़ बच्चियों को ट्रेनिंग के साथ मानसिक और शारीरिक रूप से सशक्त बनाया जा रहा है,गुड और बैड टच भी सिखाया जाता है. कराटे ट्रेनर  अलीशा बतती हैं कि लड़कियों की सुरक्षा के लिए ये बेहद ज़रूरी है. हम उनको ब्लॉक और अन्य चीज़ों की ट्रेनिंग देते हैं. यदि कोई मनचला जबरन हाथ पकड़े तो कैसे बचना है ये बताया जाता है. एक सुभाष चंद्र बोस छात्रावास केन्द्र की प्रभारी अर्चना तिवारी बताती हैं कि  हम लम्बे समय से ये सब सिखाते आ रहे हैं. लड़कियों को इसके आलावा मानसिक तौर पर भी तैयार किया जाता है. उन्होंने बताया कि एक बार एक लड़की को उसके पिता ही शोषित कर रहे थे,उसने हमें बताया , हमने उनके चंगुल से उसे छुड़ाया. दरअसल इस ट्रेनिंग में लड़कियां हर तरह के दांवपेंच सीख रही है. चाहे किसी भी दांव की बात करें,ट्रिपल पंच, मिडिल पंच, सिंगल हैंड ग्रिप, चिन पंच, फेस पंच, चेस्ट अटैक, थाई डिफेंस, नेक अटैक, एल्बो अटैक, बैक साइड डिफेंस, रिब अटैक और फारवर्ड ब्लाक जैसे दांव हमारी बेटियां सीख रही हैं. बता दें कि प्रदेश के सरकारी छात्रवासों में कुल 61 ,450 बच्चियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है , साथ ही स्कूल की 74 ,466 छात्राएं ट्रेनिंग के ज़रिये आत्मनिर्भर बन रहीं हैं. अहम ये है कि ट्रेनिंग के दौरान छात्राओं की इन विधाओं में परीक्षा भी ली जाती है. जिसके बाद उन्हें पुरुस्कृत कर सर्टिफिकेट दिए जाते हैं. इस ट्रेनिंग के माध्यम से लड़कियां टूर्नामेंट भी खेल रही हैं.

लुलु ग्रुप ला रही है USE का इस साल का सबसे बड़े इश्यू, कंपनी खाड़ी के छह देशों में 240 से अधिक स्टोर चलाती है

नई दिल्ली  हाइपरमार्केट चेन और मॉल ऑपरेटर लुलु ग्रुप इंटरनेशनल के बहुप्रतीक्षित आईपीओ की डेट आ गई है। भारतीय मूल के उद्यमी यूसुफ अली की यह कंपनी यूएई में इस साल का सबसे बड़ा आईपीओ ला रही है और उसकी लिस्टिंग अबू धाबी में होगी। इस ग्रुप का बिजनस कई सेक्टर्स में फैला है। इनमें मैन्युफैक्चरिंग, ट्रेडिंग, हॉस्पिटैलिटी और रियल एस्टेट बिजनस शामिल है। इसका बिजनस 20 से अधिक देशों में फैला है और सालाना टर्नओवर करीब 8 अरब डॉलर है। कंपनी में 65,000 से अधिक कर्मचारी काम करते हैं। भारत में कंपनी ने 20,000 करोड़ रुपये निवेश किए हैं। साल 2025 तक उसकी भारत में 30,000 करोड़ रुपये का निवेश करने की योजना है। 2020 में अबू धाबी के शाही परिवार की निवेश कंपनी ने लुलु ग्रुप में 20 फीसदी हिस्सेदारी करीब एक अरब डॉलर में खरीदी थी। आईपीओ के तहत कंपनी अपनी 25 फीसदी हिस्सेदारी बेच रही है। कंपनी का आईपीओ 28 अक्टूबर को खुलेगा और इस पर 5 नवंबर तक बोली लगाई जा सकती है। शेयरों की लिस्टिंग 14 नवंबर को हो सकती है। माना जा रहा है कि कंपनी इससे 1.8 अरब डॉलर जुटा सकती है। हालांकि कंपनी ने इसकी वैल्यू बताने से इन्कार कर दिया। रिटेल निवेशकों को 10 फीसदी हिस्सा रखा गया है। भारत में बिजनस कंपनी की स्थापना 1974 में भारतीय मूल के यूसुफ अली ने की थी। यह कंपनी खाड़ी के छह देशों में 240 से अधिक स्टोर चलाती है। इनमें 116 हाइपरमार्केट्स, 102 एक्सप्रेस स्टोर्स और 22 मिनी मार्केट्स शामिल हैं। कंपनी के यूएई में 103 स्टोर, सऊदी अरब में 56 स्टोर और दूसर बाजारों में 81 स्टोर शामिल हैं। रिटेल इनवेस्टर्स के लिए मिनिमम सब्सक्रिप्शन 5,000 दिरहम है। गल्फ देशों के ग्रॉसरी बाजार में इस कंपनी की 13.5 फीसदी हिस्सेदारी है। भारत में कोच्चि, तिरुवनंतपुरम, बेंगलुरु, लखनऊ और कोयंबटूर कंपनी के शॉपिंग मॉल हैं।

आज के समय में नौकरी कर रहा पारिवारिक जीवन को ख़तम

आज के जमाने में बढ़ रहे काम के बोझ के साथ पारिवारिक जीवन के बीच संतुलन बनाए रखना एक चुनौती बन गई है. जहां एक तरफ बढ़ती प्रतिस्पर्धा और जरूरतें के कारण लोग अपने करियर पर सबसे ज्यादा ध्यान देने पर मजबूर हैं, तो वहीं दूसरी तरफ पारिवारिक जीवन की जरूरतें अनदेखी होती जा रही हैं. सुबह से रात तक की व्यस्त दिनचर्या, देर से घर लौटने और काम से संबंधित तनाव का असर न केवल व्यक्तिगत मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है, बल्कि यह पारिवारिक संबंधों में भी दरार पैदा कर सकता है. इस संकट का मुख्य कारण है “वर्क-लाइफ बैलेंस” का अभाव. कई लोग अपनी नौकरी को प्राथमिकता देते हुए परिवार के सदस्यों के साथ बिताने वाले समय को कम करते जा रहे हैं. यह स्थिति बच्चों के विकास, दांपत्य संबंधों और परिवार के सामूहिक खुशी पर नकारात्मक प्रभाव डाल रही है. शोध बताते हैं कि लंबे समय तक काम करने से न केवल शारीरिक स्वास्थ्य प्रभावित होता है, बल्कि यह मानसिक स्वास्थ्य को भी खतरनाक तरीके से प्रभावित कर सकता है. कैसे नौकरी कर रही है पारिवारिक जीवन, 5 प्वाइंट में समझिए 1. कार्य का तनाव और मानसिक स्वास्थ्य काम का तनाव एक सामान्य समस्या बन गई है, विशेष रूप से उन लोगों के लिए जो उच्च-प्रेशर वाले वातावरण में काम कर रहे हैं. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) के अनुसार, यह तनाव व्यक्ति की मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डालता है. तनाव के कारण व्यक्ति में चिंता, अवसाद, और थकान जैसे लक्षण विकसित हो सकते हैं. जब कोई व्यक्ति तनाव में होता है, तो उसकी मानसिक स्थिति सीधे तौर पर उसके पारिवारिक जीवन को प्रभावित करती है. तनावग्रस्त व्यक्ति अक्सर अपने भावनात्मक और मानसिक संसाधनों को काम में लगाने के कारण घर लौटने पर थका हुआ महसूस करता है. इस थकान का नकारात्मक प्रभाव परिवार के सदस्यों के साथ बातचीत पर पड़ता है. तनावग्रस्त व्यक्ति अक्सर अपने परिवार के साथ संवाद करने में संकोच करता है. वे ज्यादातर चुप रहना पसंद करते हैं या केवल जरूरत पड़ने पर ही बातें किया करते हैं, जिससे पारिवारिक बातचीत की गुणवत्ता घट जाती है.  इसके अलावा जब व्यक्ति तनाव में होता है, तो वह अपने परिवार के सदस्यों से भावनात्मक रूप से भी दूरी बना लेता है. यह स्थिति रिश्तों में दरार का कारण बन सकती है. परिवार के सदस्यों को यह अनुभव हो सकता है कि उनका प्रिय व्यक्ति उन्हें सुन नहीं रहा या उनके प्रति उदासीन है, जिससे अवसाद और नकारात्मक भावनाएं बढ़ सकती हैं. 2. समय की कमी साल 2022 में किए गए एक सर्वेक्षण में पाया गया कि लगभग 70% कामकाजी माता-पिता अपने बच्चों के साथ पर्याप्त समय नहीं बिता पा रहे हैं. यह समय की कमी परिवारों में असंतोष और संघर्ष को जन्म देती है. काम के कारण देर से घर लौटना, छुट्टियों का न लेना और परिवार के आयोजनों में भाग न लेना, सभी पारिवारिक संबंधों को प्रभावित कर सकते हैं. 3. सामाजिक जीवन का अभाव काम की व्यस्तता के कारण लोग अपने सामाजिक जीवन को भी अनदेखा करने लगते हैं. एक रिसर्च में पाया गया कि 60% लोग काम के कारण अपने दोस्तों और परिवार के साथ मिलने की योजना नहीं बना पाते. इससे व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, जिससे अकेलापन और अवसाद बढ़ सकता है. 4. बच्चों पर प्रभाव एक अन्य अध्ययन में यह स्पष्ट हुआ कि जिन माता-पिता की नौकरी अत्यधिक मांग वाली होती है, उनके बच्चों में व्यवहार संबंधी समस्याएं बढ़ने की संभावना अधिक होती है. शोध से पता चला है कि ऐसे बच्चे ज्यादा समय तक अकेले रहते हैं और यह उनके सामाजिक विकास को प्रभावित करता है. 5.रिश्तों में तनाव काम के दबाव के चलते दांपत्य संबंधों में भी तनाव बढ़ता है. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ द्वारा किए गए एक अध्ययन में यह पाया गया कि काम के कारण होने वाली समस्याएं विवाहित जोड़ों के बीच आपसी संघर्ष को बढ़ाती हैं. लगभग 50% जोड़े जो काम के तनाव का सामना कर रहे थे, उन्होंने बताया कि यह उनके रिश्ते में दरार का कारण बन रहा है. तो क्या है इसका समाधान वर्क-लाइफ बैलेंस: लचीलापन प्रदान करना- गलूप 2022 की एक अध्ययन में पाया गया कि लगभग 82% कर्मचारी लचीले काम के घंटे को प्राथमिकता देते हैं और इसे मानसिक स्वास्थ्य में सुधार का एक प्रमुख कारक माना जा रहा है. कंपनियां भी वर्क फ्रॉम होम और फ्लेक्सिबल वर्किंग आवर्स जैसी नीतियां अपनाकर अपने कर्मचारियों की उत्पादकता और संतोष बढ़ा सकती हैं. पारिवारिक अवकाश- अमेरिकन साइकोलॉजी एसोसिएशन 2021 की एक रिपोर्ट में अलग अलग शोधों के आधार पर बताया है कि पारिवारिक छुट्टियों में भाग लेने से कर्मचारियों की मानसिक स्वास्थ्य में 30% सुधार होता है. ऐसे में कंपनियां अपने कर्मचारियों को साल में या 6 महीने में इस तरह की छुट्टियां देने पर विचार कर सकती हैं जो कर्मचारियों को अपने परिवार के साथ समय बिताने की अनुमति दें. संवाद को बढ़ावा: नियमित पारिवारिक बैठक- जर्नल ऑफ फैमली साइकोलॉजी, 2020 की एक अध्ययन में पाया गया है कि जिन परिवारों में नियमित संवाद होता है, वहां तनाव और अवसाद की दर 50% तक कम हो जाती है. ऐसे में हर व्यक्ति को कोशिश करनी चाहिये कि भले ही पूरा दिन वो अपने परिवार के सदस्यों से नहीं कर पाए हों. लेकिन, सुबह का नाश्ता या रात का खाना एक साथ खाएं और इस बीच आपस में दिनभर की बातें साझा करें. फैमली रिलेशन 2019 की एक रिपोर्ट के अनुसार भावनाओं को व्यक्त करने वाले परिवारों में आपसी समझ 70% अधिक होती है, जिससे रिश्तों में तनाव कम होता है. यह परिवार के सदस्यों के बीच अधिक सहयोग और समर्थन को बढ़ावा देता है.

दिवाली पर दिल्ली में डबल मर्डर की पूरी कहानी, मिठाई लेकर आया, फिर पैर छूकर बरसा दीं गोलियां

नई दिल्ली. राजधानी दिल्ली के शाहदरा के फर्श बाजार इलाके में दो हथियारबंद लोगों ने गुरुवार शाम अपने घर के बाहर दिवाली मना रहे एक चाचा-भतीजे की गोली मारकर हत्या कर दी। वहीं, एक बच्चा घायल हो गया। इस घटना का एक सीसीटीवी फुटेज भी अब सामने आ गया है। दिल्ली पुलिस के अनुसार, आरोपी ने 17 दिन पहले ही हत्या की योजना बना ली थी। दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि घटना में आकाश शर्मा उर्फ ​​छोटू (40) और उसके भतीजे ऋषभ शर्मा (16) की मौत हो गई, जबकि कृष शर्मा (10) गोली लगने से घायल हो गया। उन्होंने बताया कि पीड़ित शाहदरा के फर्श बाजार इलाके में अपने घर के बाहर दिवाली मना रहे थे, तभी रात लगभग 8 बजे उन पर हमला हुआ। यह घटना सीसीटीवी में कैद हो गई थी। दिल्ली पुलिस ने बताया कि आरोपी ने 17 दिन पहले ही हत्या की योजना बना ली थी। हिरासत में लिए गए नाबालिग और मृतक आकाश और उसके परिवार के खिलाफ पहले भी मामले दर्ज हैं। जांच के अनुसार मृतक और आरोपी के बीच पैसों को लेकर विवाद चल रहा था। प्रारंभिक जांच में आपसी रंजिश का मामला सामने आया है। सीसीटीवी फुटेज के आधार पर एक नाबालिग को हिरासत में लिया गया, पूछताछ जारी है। मिठाई देने के बहाने आया हत्यारा मृतक आकाश की मां ने कहा, “लक्ष्य नाम का एक लड़का पिछले 3-4 दिनों से हमारी गली में चक्कर लगा रहा था। कल वह मिठाई का डिब्बा लेकर हमारे घर आया और मुझसे कहा कि मैं वो डिब्बा ले लूं। जिस समय मेरा बेटा पटाखे फोड़ने की तैयारी कर रहा था, उसी समय लक्ष्य सहित दो लोग आए और फिर मैंने गोलियां चलने की आवाज सुनी। इसके बाद मैंने देखा कि मेरे बेटे को गोली मार दी गई।” अधिकारी ने बताया, ‘‘रात लगभग साढ़े 8 बजे पीसीआर कॉल आने पर पुलिस की एक टीम भेजी गई। टीम को घटनास्थल पर खून के धब्बे मिले।’’ प्रत्यक्षदर्शियों ने पुलिस को बताया कि आरोपियों ने आकाश शर्मा पर गोली चलाने से पहले उसके पैर छुए थे। सभी पीड़ितों को अस्पताल ले जाया गया। उन्होंने बताया कि पास में खड़े आकाश शर्मा के बेटे कृष और भतीजे ऋषभ को भी गोलियां लगीं। अधिकारी ने बताया कि आकाश शर्मा और ऋषभ शर्मा को अस्पताल में डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया, जबकि कृष शर्मा का इलाज चल रहा है। सीसीटीवी वीडियो में आकाश शर्मा, अपने भतीजे ऋषभ शर्मा (16) और बेटे कृष शर्मा (10) अपने घर के बाहर पतली सी सड़क पर पटाखे फोड़ते नजर आ रहे हैं। इसके बाद एक व्यक्ति दोपहिया वाहन पर आता है और आकाश शर्मा के पैर छूता है, जबकि दूसरा वहीं खड़ा रहता है। कुछ सेकेंड बाद, दूसरा व्यक्ति आकाश पर करीब पांच राउंड गोलियां चलाता है, जिससे उसकी मौत हो जाती है और उनका बेटा घायल हो जाता है। जब आकाश का भतीजा हमलावरों के पीछे भागा, तो बदमाशों ने उसे भी गोली मार दी। पुलिस ने बताया कि प्रथमदृष्टया यह आपसी दुश्मनी का मामला लगता है। रिपोर्ट के अनुसार, आकाश की पत्नी ने कहा कि वह हमलावरों को जानती है और उनके बीच कई सालों से जमीन को लेकर विवाद चल रहा था। पुलिस ने बताया कि पीड़ित परिवार के सदस्यों के बयान दर्ज किए जाएंगे और इस संबंध में जांच जारी है।

प्रदेश में धार्मिक स्थलों में खुलेंगे वृद्धाश्रम, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बुजुर्गों संग मनाई दिवाली

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को दीपावली के पावन पर्व पर राजधानी के शिवाजी नगर में स्थित सेवा भारती आनंद धाम पहुंचकर वृद्धजनों के साथ दीपोत्सव का जश्न मनाया। सीएम ने बुजुर्गों को दीपावली की बधाई दी और उनका आशीर्वाद लिया। उन्होंने बुजुर्गों के साथ फुलझड़ी भी जलाई और उन्हें मिष्ठान एवं उपहार भेंट कर दीप-पर्व की खुशियां बांटी। इस अवसर पर अनेक बच्चों के साथ-साथ अनेक समाजसेवी भी उपस्थित थे। इस दौरान बुजुर्गों ने सुरीले भजन भी गाए। इस मौके पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कि ईश्वर के पश्चात माता-पिता का स्थान होता है। हमारी प्राचीन संस्कृति श्रवण कुमार वाली संस्कृति है। मेरे माता-पिता देवलोक गमन कर चुके हैं। लेकिन आज आनंद धाम में आकर ऐसा प्रतीत हो रहा है कि अपने माता-पिता के बीच में आया हूं। मध्य प्रदेश सरकार सबको साथ लेकर चल रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एमपी में डबल इंजन की सरकार है। बुजुर्गों को स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराएगी सरकार इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के धार्मिक महत्व के स्थान पर इस तरह के धाम और आश्रम प्रारंभ किए जाएंगे। इससे बुजुर्गजन इन कार्यक्रमों से जुड़ सकेंगे। इसके साथ ही वृद्धजन की सहायता और उपचार में मदद के लिए विशेष पहल की जाएगी। जिन बुजुर्गों के बच्चे विदेश में नौकरी कर रहे, उन्हें यहां आनंद धाम या वृद्धाश्रम में रहने पर यदि स्वास्थ्य संबंधी दिक्कत होती है तो उनके लिए व्यवस्था की जाएगी। ऐसे बुजुर्गों को अस्पताल में दाखिल करवाया जा सके, इसके लिए अस्पताल में बेड भी आरक्षित किए जाएंगे। इन जगहों पर खुलेंगे वृद्धाश्रम मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के आयुक्त को उज्जैन, ओरछा, ओंकारेश्वर एवं चित्रकूट में वृद्धजन के लिये वृद्धश्रम संचालित करने तथा उनमें वृद्धजन के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए। 80 से ज्यादा वृद्धाश्रम चला रहा विभाग यहां पर यह बता दें कि सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग द्वारा प्रदेश में 83 वृद्धाश्रमों का संचालन किया जा रहा है। इन वृद्धाश्रमों में वृद्धजन को आवास, भरण-पोषण, मनोरंजन, स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। वृद्धजन के लिये प्रदेश में 11 नवीन 50 सीटर वृद्धाश्रम भवन बैतूल, गुना, झाबुआ, मुरैना, सिंगरौली, उमरिया, सतना, जबलपुर, खरगौन, टीकमगढ़ एवं सीधी में संचालित हैं। उज्जैन के कुष्ठ धाम भी पहुंचे सीएम मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने गृहनगर उज्जैन में कुष्ठ धाममें आयोजित दीपावली उत्सव कार्यक्रम में भी हिस्सा लिया और दीपोत्सव मनाया। उन्होंने कहा कि नर सेवा ही नारायण सेवा है। वृद्धजनों की मुस्कराहट और उनके आशीर्वाद ने आज दीपोत्सव के पावन पर्व दीपावली का आनंद दोगुना कर दिया।

34 शब्दों के एक तार के बाद भोपाल बना भारत का हिस्सा, घुटने टेकने को मजबूर हुए नवाब

भोपाल  भारत की आजादी के दौरान कई रियासत ऐसी थी, जिनका पाकिस्‍तानी प्रेम उफान मार रहा था और वे भारत में शामिल नहीं होना चाहती थी। हालांकि कुछ रियासतें स्वतंत्र रहने के पक्ष में थी। भोपाल भी इनमें से ही एक ऐसी रियासत थी, जो भारत में शामिल होने के पक्ष में नहीं थी। हालांकि तत्कालीन उप प्रधानमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल के हस्तक्षेप और भोपाल के लोगों के विरोध के बाद 1 जून 1949 को भोपाल का भारत में विलय हुआ। ऐसा चला था घटनाक्रम दरअसल, भोपाल के नवाब हमीदुल्लाह खान पाकिस्तान के समर्थक थे, ऐसे में वे भारत में शामिल होने के पक्ष में नहीं थे और हैदराबाद की तरह ही भोपाल रियासत को स्वतंत्र रखना चाहते थे। हालांकि लार्ड माउंटबेटन ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया और 14 अगस्त 1947 तक इसको लेकर कोई फैसला नहीं हो पाया। नवाब जिन्‍ना और नेहरु के थे दोस्त पंडित जवाहल लाल नेहरु और जिन्‍ना नवाब के अच्‍छे दोस्‍त थे। जिन्‍ना ने नवाब को प्रस्‍ताव दिया कि वे पाकिस्‍तान आते हैं तो उन्‍हें वहां सेक्रेटरी जनरल पद दिया जाएगा। नवाब इसके लिए तैयार भी थे और इसके लिए उन्‍होंने बेटी आबिदा को भोपाल रियासत का शासक बनने के लिए कहा, लेकिन आबिदा ने इंकार कर दिया। भोपाल में भड़का विरोध मार्च 1948 में नवाब द्वारा भोपाल को स्वतंत्र रियासत घोषित करने और मई 1948 में भोपाल मंत्रिमंडल के गइन के बाद सियासत में विरोध भड़क गया। जिसे देखते हुए भोपाल मंत्रिमंडल में प्रधानमंत्री चतुरनारायाण मालवीय भी नवाब के विरोध में खड़े हो गए। दिसंबर 1948 के दौरान डा शंकरदयाल शर्मा, भाई रतन कुमार गुप्ता जैसे नेताओं के नेतृत्व में भोपाल के भारत में विलय के लिए ‘विलीनीकरण आंदोलन’ की शुरुआत हुई। जिसके बाद कई प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार कर लिया गया। वहीं जनवरी 1949 में डा शंकर दयाल शर्मा को भी जेल भेज दिया गया। सरकार पटेल के पास पहुंचा तार विरोध के बीच सकर संक्रांति के मेले में गोलीकांड हो गया जिसमें 10 लोगों की मौत हो गई। इस घटना के बाद कांग्रेस के प्रांतीय सदस्य बालकृष्ण गुप्ता ने सरदार पटेल को एक तार भेजकर हस्‍पक्षेप करने का अुनरोध किया। उन्‍होने तार में लिखा-     ‘भोपाल राज्य के बोरास घाट में संक्रांति मेले में 14 जनवरी को गोली चली। 10 की मृत्यु हुई। 250 घायल हुए। कई लापता हैं। सशस्त्र पुलिस मृतकों के शव नहीं सौंप रही है। तत्काल हस्तक्षेप किया जाए। जांच बिठाई जाए, क्योंकि यहां जीवन असुरक्षित है।’ -बालकृष्ण गुप्ता, प्रांतीय कांग्रेस सदस्य भोपाल में चल रहे प्रदर्शन और गिरफ्तारियों के साथ तार मिलने के बाद सरदार वल्लभ भाई पटेल ने सख्त रुख अपनाया और नवाब को संदेश भेजा कि भोपाल स्‍वतंत्र नहीं बन सकता और इसे मध्य भारत का हिस्सा बनना होगा। फिर भारत में मिला भोपाल इन विरोध प्रदर्शनों के बावजूद नवाब नहीं माना और 29 जनवरी 1949 को नवाब ने मंत्रिमंडल को बर्खास्त कर सारे अधिकार अपने हाथ में ले लिए। हालांकि भोपाल में हो रहे प्रदर्शन और सरदार पटेल के दबाव के बाद नवाब हमीदुल्लाह खान ने 30 अप्रैल 1949 को विलीनीकरण के पत्र पर हस्ताक्षर कर दिए और 1 जून 1949 को भोपाल भारत का अंग बन गया।

NCPCR की मांग, मदरसों को राज्यों से मिलने वाला पैसा बंद हो, जाने कारण

नई दिल्ली राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मदरसों को मिलने वाली सरकारी फंडिंग बंद करने और मदरसा बोर्ड को बंद करने की सिफारिश की है। आयोग ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों और प्रशासकों को निर्देश जारी किया है। यह निर्देश ‘धर्म के संरक्षक या अधिकारों के उत्पीड़क बच्चों के संवैधानिक अधिकार बनाम मदरसे’ शीर्षक वाली रिपोर्ट से जुड़ा है। रिपोर्ट में मदरसों द्वारा बच्चों के शैक्षिक अधिकारों पर पड़ने वाले प्रभाव और उनकी ऐतिहासिक भूमिका पर चर्चा की गई है। मदरसा बोर्ड को बंद करने की सिफारिश इस रिपोर्ट में 11 अध्याय हैं। यह रिपोर्ट मदरसों की ऐतिहासिक भूमिका और बच्चों के शैक्षिक अधिकारों पर उनके प्रभाव पर चर्चा करती है। NCPCR ने सिफारिश की है कि सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मदरसों को मिलने वाली सरकारी फंडिंग बंद कर दी जाए। मदरसा बोर्ड को भी बंद कर देना चाहिए। आरटीआई एक्ट के महत्व पर जोर NCPCR प्रमुख, प्रियांक कानूनगो ने शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम, 2009 के तहत समावेशी शिक्षा के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा, ‘शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम, 2009, इस विश्वास पर आधारित है कि समानता, सामाजिक न्याय और लोकतंत्र जैसे मूल्यों को प्राप्त करना सभी के लिए समावेशी शिक्षा के प्रावधान के माध्यम से ही संभव है। हालांकि, बच्चों के मौलिक अधिकार और अल्पता समुदायों के अधिकार के बीच एक विरोधाभासी तस्वीर बनाई गई है।’ सभी बच्चों को मिले औपचारिक शिक्षा रिपोर्ट में कहा गया है कि आरटीआई एक्ट के तहत सभी बच्चों को औपचारिक शिक्षा मिले, यह सुनिश्चित करना राज्य का कर्तव्य है। एनसीपीसीआर ने इस बात पर जोर दिया कि केवल बोर्ड या यूडाइस कोड होने का मतलब यह नहीं है कि मदरसे आरटीआई एक्ट का पालन करते हैं। ‘सरकारी फंडिंग बंद करनी चाहिए’ एनसीपीसीआर ने सिफारिश की है कि मदरसों और मदरसा बोर्ड को मिलने वाली सरकारी फंडिंग बंद कर दी जाए। उत्तर प्रदेश के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अधीन इन बोर्डों को बंद कर देना चाहिए। आयोग ने यह भी सिफारिश की कि गैर-मुस्लिम बच्चों को मदरसों से निकालकर आरटीआई एक्ट के अनुसार औपचारिक स्कूलों में दाखिला कराया जाए। इसमें यह भी सुझाव दिया गया है कि फिलहाल मदरसों में पढ़ रहे मुस्लिम बच्चों को औपचारिक स्कूलों में दाखिला दिलाया जाए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि उन्हें निर्धारित शिक्षा और पाठ्यक्रम मिले।

प्रमुख धार्मिक स्थलों में संचालित किए जाएंगे वृद्धाश्रम : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

प्रमुख धार्मिक स्थलों में संचालित किए जाएंगे वृद्धाश्रम : मुख्यमंत्री डॉ. यादव जिन बुजुर्गों के बच्चे विदेश में हैं, उनके लिए अस्पतालों में बेड आरक्षित करेंगे मुख्यमंत्री ने आनंद धाम में बुजुर्गों के साथ मनाई दीपावली भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शिवाजी नगर भोपाल में सामाजिक न्याय और दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग द्वारा संचालित आनंद धाम आश्रम में बुजुर्गों के साथ दीपावली मनाई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैन, ओरछा, ओंकारेश्वर एवं चित्रकूट में वृद्धजन के लिये वृद्धश्रम संचालित करने तथा उनमें वृद्धजन के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करवाने के निर्देश आयुक्त सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण को दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुजुर्गों को दीपावली की बधाई दी और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुजुर्गों के साथ फुलझड़ी भी जलाई और उन्हें मिष्ठान एवं उपहार भेंट कर दीपावली मनाई। इस अवसर पर अनेक समाजसेवी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आनंद धाम की गतिविधियों की जानकारी प्राप्त की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ईश्वर के पश्चात माता-पिता का स्थान होता है। मेरे माता-पिता देवलोक गमन कर चुके हैं। लेकिन आज आनंद धाम में आकर ऐसा प्रतीत हो रहा है कि अपने माता-पिता के बीच में आया हूं। बुजुर्ग जन से भेंट और चर्चा के पश्चात मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आनंद धाम के पदाधिकारी गण से चर्चा की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के धार्मिक महत्व के स्थान पर इस तरह के धाम और आश्रम प्रारंभ किए जाएंगे। इससे बुजुर्ग जन इन कार्यक्रमों से जुड़ सकेंगे। इसके साथ ही बुजुर्ग जन की सहायता और उपचार में मदद के लिए विशेष पहल की जाएगी। जिन बुजुर्गों के बच्चे विदेश में नौकरी कर रहे, उन्हें यहां आनंद धाम या वृद्धाश्रम में रहने पर यदि स्वास्थ्य संबंधी दिक्कत होती है तो उनके लिए व्यवस्था की जाएगी। ऐसे बुजुर्गों को अस्पताल में दाखिल करवाया जा सके, इसके लिए अस्पताल में बेड भी आरक्षित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को अपने बीच पाकर बुजुर्ग महिलाएं और पुरुष काफी प्रसन्न हुए। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को आनंद धाम आने के लिए धन्यवाद देते हुए आशीर्वाद भी दिया। आनंद धाम आश्रम में बुजुर्ग जन ने बड़ी देर भई नंदलाला.. और अन्य भजन गाकर भी सुनाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा आनंद धाम में बुजुर्गजन से आशीर्वाद प्राप्त करने और उनसे आत्मीय भेंट एवं चर्चा के अवसर पर सेवा भारती संस्था के पदाधिकारी उपस्थित थे। सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग द्वारा प्रदेश में वरिष्ठजन के समग्र कल्याण एवं पुनर्वास के लिये 83 वृद्धाश्रमों का संचालन किया जा रहा है। वृद्धाश्रमों में वृद्धजन को आवास, भरण-पोषण, मनोरंजन, स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। वृद्धजन के लिये प्रदेश में 11 नवीन 50 सीटर, वृद्धाश्रम भवन बैतूल, गुना, झाबुआ, मुरैना, सिंगरौली, उमरिया, सतना, जबलपुर, खरगौन, टीकमगढ़ एवं सीधी में संचालित हैं।  

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में10 हाथियों की मौत, MP से दिल्ली तक हड़कंप

भोपाल मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में 10 हाथियों की रहस्यमयी मौत से हर कोई हैरान है। एक के बाद एक हो रही मौतों ने वन विभाग की नींद उड़ा दी है। वहीं शासन ने भी इस मामले में कार्रवाई की बात कही है। लेकिन आखिर यह हत्या है या हादसा, इसकी अब तक पुष्टि नहीं हो सकी है। इस राज से पर्दा उठाने के लिए मध्य प्रदेश के साथ दिल्ली की SIT जांच कर रही है और बांधवगढ़ नेशनल टाइगर रिजर्व में डेरा डाला है। वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो (डब्ल्यूसीसीबी) ने एसआईटी गठित की है। वहीं मध्य प्रदेश में भी इस मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन हुआ है। मुख्य वन्य जीव अभिरक्षक विजय अंबाडे ने राज्य शासन के निर्देश पर 5 सदस्यीय जांच कमेटी गठित की है। पार्क में आने-जाने वालों का खंगाला जा रहा रिकॉर्ड नेशनल टाइगर कंजरवेटर अथॉरिटी (एनटीसीए) के सेंट्रल जोन के एआईजी नंदकिशोर काले टीम के साथ बांधवगढ़ में डेरा डाला है। रिसॉर्ट संचालकों पर भी संदेह जताया जा रहा है। हालांकि, अभी स्पष्ट तौर पर कोई सबूत कोई साक्ष्य नहीं मिला है। 5 कि.मी. के दायरे में जांच की जा रही है। साथ ही पार्क में आने-जाने वालों का भी रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है। गौरतलब है कि खितौली और पतौर रेंज में 13 हाथियों के झुंड में से 10 की मौत हुई है।

मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने दीपावली की मंगलकामनाओं के साथ मंत्री, जन-प्रतिनिधियों और नागरिकों से की भेंट

मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने दीपावली की मंगलकामनाओं के साथ मंत्री, जन-प्रतिनिधियों और नागरिकों से की भेंट आर्च बिशप डॉ. दुरईराज और इस्कॉन के प्रबंधक अच्युत कृष्ण दास ने की भेंट मुख्यमंत्री निवास में हुई दीपावली के पर्व पर भेंट भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दीपावली पर्व पर मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में भेंट करने पहुँचे मंत्रीगण, जन-प्रतिनिधि, समाजसेवी, अधिकारी और जन-सामान्य को मंगलकामनाएं दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव से मंत्री विश्वास सारंग, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर, विधायक रामेश्वर शर्मा, भगवान दास सबनानी, पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी, महापौर श्रीमती मालती राय, आर्च बिशप डॉ. ए.ए.एस. दुरईराज, इस्कॉन भोपाल के प्रबंधक अच्युत कृष्ण दास, राहुल कोठारी सहित जन-प्रतिनिधियों समाजसेवियों, अधिकारियों और जन-सामान्य ने मंगलकामनाओं का आदान-प्रदान किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने संदेश में प्रदेशवासियों को दीपावली के पावन पर्व की मंगलकामनाएं प्रेषित करते हुए कहा है कि भगवान श्रीगणेश और माँ लक्ष्मी का आशीर्वाद सभी के जीवन में समृद्धि और खुशियां लाए। दीपोत्सव पर नए उत्साह और उमंग के साथ हम सबके आगे बढ़ने की कामना की। एक-दूसरे का साथ देने और समानता के आधार पर जीवन जीने का संदेश देता है दीपावली पर्व मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भगवान श्रीगणेश और माँ लक्ष्मी की कृपा से गरीब से गरीब व्यक्ति के जीवन में बदलाव आए, लोगों के जीवन में आने वाली कठिनाइयों से उन्हें मुक्ति मिले, यही कामना है। दीपावली का त्यौहार एक-दूसरे का साथ देने, गरीब-अमीर की खाई पाटने, समानता के आधार पर जीवन जीने का संदेश देता है। इस शुभ पर्व पर ईश्वर से यही प्रार्थना है कि प्रत्येक व्यक्ति उत्साह के साथ हर परिस्थिति का सामना करने में समर्थ बने। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कठिनाई और चुनौती भरे समय में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत विश्व में आदर्श स्थापित कर रहा है, यह हम सबके लिए गर्व का विषय है।  

सरदार पटेल के प्रयासों से ही भारत का वर्तमान नक्शा कायम है : मुख्यमंत्री डॉ.यादव

सरदार पटेल के प्रयासों से ही भारत का वर्तमान नक्शा कायम है : मुख्यमंत्री डॉ.यादव मुख्यमंत्री ने वल्लभ भवन परिसर में लौह पुरुष सरदार पटेल की प्रतिमा पर अर्पित की पुष्पांजलि भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल के प्रयासों से ही भारत का वर्तमान नक्शा कायम है। सरदार पटेल ने 500 से अधिक रियासतों के विलय का महत्वपूर्ण कार्य किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव , गुरुवार को सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती पर वल्लभ भवन परिसर स्थित उद्यान में सरदार पटेल की प्रतिमा पर नमन कर संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सरदार पटेल को पुष्पांजलि अर्पित करते हुए कहा कि लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती पर गुजरात में हो रहे विभिन्न कार्यक्रमों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी हिस्सा ले रहे हैं। सरदार पटेल को देश की एकता और अखंडता के लिए किए गए कार्यों के लिए सदैव स्मरण किया जाएगा। सरदार पटेल ने जीवन में कई महत्वपूर्ण कार्यों के साथ आजादी के आंदोलन में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के साथ कदम से कदम मिलाकर कार्य किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरदार पटेल ने सहकारिता के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। मध्यप्रदेश सरकार सरदार वल्लभ भाई पटेल जैसे महापुरुषों के आदर्शों को अपनाकर निरन्तर आगे बढ़ रही है। इस अवसर पर सांसद विष्णु दत्त शर्मा, विधायक रामेश्वर शर्मा ,भगवान दास सबनानी सहित राहुल कोठारी, सुमित पचोरी एवं अनेक संस्थाओं के पदाधिकारी उपस्थित थे।  

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