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हरिद्वार में डीएम के आदेश पर तोड़ी गई अवैध धार्मिक संरचना, सिंचाई विभाग की जमीन पर था कब्जा

हरिद्वा हरिद्वार के रानीपुर कोतवाली में टिहरी बांध परियोजना पुनर्निवास मंडल ऋषिकेश सिंचाई विभाग की जमीन पर अवैध रूप से मजार नुमा धार्मिक संरचना बनाया गया था. जिसे शनिवार को डीएम के आदेश पर गिरा दिया गया. जिस वक्त मजार नुमा अवैध इमारत को गिराया, उस वक्त बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स तैनात थी. साथ ही मौके पर विभाग के बड़े अधिकारी भी मौजूद थे. अवैध मजार नुमा धार्मिक संरचना को गिराए जाने का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. जिसमें देखा जा सकता है कि बुलडोजर इमारत को तोड़ रहा है. जबकि आसपास पुलिस फोर्स भी तैनात है. अवैध मजार नुमा संरचना को गिराने का आदेश डीएम हरिद्वार कर्मेन्द्र सिंह की तरफ से दिया गया है. आदेश के बाद एसडीएम अजयवीर सिंह ने नेतृत्व में अवैध निर्माण पर कार्रवाई की गई है. आपको बता दें कि देश में बुलडोजर एक्शन चर्चा में है. सुप्रीम कोर्ट में इस केस की चार बार सुनवाई हो चुकी है. अब फैसला आने की बारी है. इन चार सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने काफी कुछ साफ कर दिया है और बुलडोजर एक्शन को लेकर टिप्पणियों के जरिए लकीर खींच दी है. जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने कहा, फैसला आने तक किसी दोषी या आरोपी की संपत्तियां गिराने पर रोक जारी रहेगी. यह आदेश उन मामलों में लागू नहीं होगा, जहां अनधिकृत निर्माण हटाने के लिए ऐसी ध्वस्तीकरण कार्रवाई की जरूरत है. यानी सार्वजनिक संपत्तियों पर कब्जे मामलों में बुलडोजर एक्शन जारी रहेगा. इस तरह की कार्रवाई प्रभावित नहीं होगी. सुप्रीम कोर्ट ने यह भी सुझाव दिया कि प्रभावित होने वाले व्यक्तियों की सूचना के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल होना चाहिए. साथ ही उस कार्रवाई की वीडियोग्राफी करानी चाहिए. SC ने बुलडोजर एक्शन को लेकर गाइडलाइन बनाने के भी निर्देश दिए हैं. सुप्रीम कोर्ट का साफ कहना था कि किसी केस में कोई आरोपी हो या दोषी… उसके घर या संपत्ति में तोड़फोड़ नहीं की जा सकती है. यानी आरोपी या दोषी होना बुलडोजर चलाने का आधार नहीं हो सकता है. इतना ही नहीं, अवैध निर्माण साबित होने पर भी वैकल्पिक व्यवस्था करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए. यानी तुरंत बुलडोजर लेकर पहुंचना और तोड़फोड़ करना संवैधानिक नहीं है.

प्रदेश की 1400 ग्राम पंचायतों में जल्द बनेंगे कार्यालय भवन, गांवों में सामुदायिक भवनों का भी निर्माण कराएगी सरकार

भोपाल  नगरीय निकायों की तर्ज पर अब ग्राम पंचायतों के सरपंचों के खिलाफ भी अविश्वास प्रस्ताव तीन चौथाई बहुमत से पास करने पर तीन साल बाद लाने का प्रविधान लाया जाएगा। रोजगार सहायक एवं सचिव की एसीआर लिखने का अधिकार सरपंच को दिए गए हैं। इसमें ग्राम रोजगार सहायक के मूल्यांकन प्रपत्र का स्वीकारकर्ता सरपंच को बनाया गया है। पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 की धारा 22 के अंतर्गत सरपंचों को जनपद पंचायत में रोस्टर के हिसाब से 20% प्रतिवर्ष बुलाए जाने के प्रविधान का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिये गये है। यह बात प्रदेश के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने मीडिया से चर्चा में कही। 1400 ग्राम पंचायत भवन बनेंगे मंत्री पटेल ने बताया कि भवन विहीन ग्राम पंचायतों के लिए 1400 ग्राम पंचायत भवनों की स्वीकृति प्रथम चरण में जारी की जा रही है। मंत्री ने कहा कि स्थानीय ग्रामीण समुदाय के लिए सामुदायिक भवनों का निर्माण भी चरणबद्ध रूप से किया जाएगा। महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) अंतर्गत श्रम सामग्री (60:40) का अनुपात अभी तक जिला स्तर पर संधारित किया जाता था। अब इसको जनपद स्तर पर संधारित किया जाएगा। सहायक यंत्री को तकनीकी स्वीकृति जारी करने के अधिकार की सीमा 15 लाख रुपये से बढ़कर 25 लाख की गई है। तकनीकी स्वीकृति सहायक यंत्री को अधिकृत किया जा चुका है। झूठी शिकायत करने वालों पर होगी कार्रवाई मंत्री पटेल ने यह भी कहा कि मनरेगा योजना अंतर्गत कपिलधारा की इकाई लागत राशि तथा पेयजल के लिए बनाने वाले सामुदायिक कूप की लागत राशि में अंतर है। इसको युक्तियुक्त करने का अनुरोध किया गया है, इस पर विचार किया जाएगा। पंचायत राज ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 की धारा 40 का दुरुपयोग सरपंच के विरुद्ध ना हो इस संबंध में आवश्यक निर्देश जारी किए जाएंगे। सीएम हेल्पलाइन 181 पर झूठी शिकायत दर्ज कराने वाले तथा आदतन शिकायतकर्ता के संबंध में आवश्यक कार्रवाई के लिए लोक सेवा प्रबंधन विभाग से कहा गया है। श्रमोदय आदर्श आईटीआई का श्रम मंत्री पटेल ने किया अवलोकन मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने शुक्रवार को भोपाल स्थित श्रमोदय आदर्श आइटीआइ का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने संस्थान के विभिन्न ट्रेड्स की कक्षाओं का निरीक्षण किया और छात्रों के साथ बातचीत भी की। उन्होंने कहा कि आधुनिक सुविधाएं छात्रों को उद्योग की वास्तविक चुनौतियों के लिए तैयार करती हैं और उन्हें एक प्रतिस्पर्धी माहौल में सफल होने के लिए सशक्त बनाती हैं। मंत्री पटेल ने आइटीआइ में प्रदेश के बलाघाट, छतरपुर, छिंदवाडा, बैतूल, भिंड ग्वालियर, पन्ना व अन्य जिलों से आए अध्ययनरत छात्रों से बातचीत की, जहां उन्होंने छात्रों से उनके ट्रेड्स के अध्ययन और तकनीकी प्रशिक्षण के अनुभव के बारे में विस्तार से चर्चा की। पटेल ने छात्रों से उनके विषयों से संबंधित प्रश्न भी पूछे कि उद्योग जगत में अपनी योग्यता को लेकर छात्र कितने आश्वस्त महसूस करते हैं।

3 आरोपी गिरफ्तार, छत्तीसगढ़-रायपुर अंतरराज्यीय बस स्टैंड में 8 करोड़ का सोना जब्त

रायपुर. पुलिस ने आकस्मिक चेंकिग के दौरान अंतरराज्यीय बस स्टैंड भाठागांव रायपुर में लगभग 12 किलो 800 ग्राम सोना मिला है। इसकी कीमत आठ करोड़ रुपये बताया जा रहा है। मामले में पुलिस ने तीनों तस्करों को गिरफ्तार किया है। पूरा मामला टिकरापारा थाना क्षेत्र का है। बता दें कि पुलिस ने आकस्मिक चेंकिग के दौरान बस स्टैंड भाठागांव रायपुर में तीन तस्करों से लगभग 12 किलो 800 ग्राम सोना मिला  है। इसकी कीमत आठ करोड़ रुपये बताया जा रहा है। मामले में पुलिस ने तीनों तस्करों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस बस स्टैंड भाठागांव में आकस्मिक चेकिंग किया। चेकिंग दौरान बस स्टैंड में यात्री लिंगराज नायक, हितेश तांडी और शुभम पात्रों के बैंगो की चेकिंग की। इस दौरान पुलिस को 12 किलो 800 ग्राम का सोना मिला। इस मौके पर पुलिस ने तीनों से सोने के संबंध में पूछताछ की। इस पर तीनों ने गोल-मटोल जवाब देने लगे। पुलिस ने सोने के संबंध में वैध दस्तावेज की मांग की। इस पर किसी प्रकार का कोई भी दस्तावेज उपलब्ध नहीं दिया गया। जिसके कारण बरामद सोने की सामग्री को सीललबंद कर अग्रिम कार्यवाही के लिए आयकर विभाग को सौपी गई है। पुलिस ने 12 किलो 800 ग्राम का सोना जब्त कर लिया है। इसकी कीमती आठ करोड़ रुपये आंकी गई है। गिरफ्तार आरोपी – 0- लिंगराज नायक 34 साल, निवासी थाना तेलीबांधा रायपुर 0- हितेश तांडी 27 साल, निवासी थाना तेलीबांधा रायपुर 0- शुभम पात्रों 28 साल, निवासी थाना टिकरापारा रायपुर

मुरैना में पटाखा फैक्ट्री में धमाका, फैक्ट्री हुई धराशाई, मकान गिरे, 5 मकानों में आई दरार

मुरैना  मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में शनिवार को एक बड़ा हादसा हो गया, जहां एक पटाखा फैक्ट्री में जोरदार धमाका हो गया। धमाका इतना जबरदस्त था कि फैक्ट्री पूरी तरह से धराशाई हो गई। वहीं आस-पास के 4 से 5 मकानों में भी दरारें आ गई। बताया जा रहा है कि हादसे में की लोगों के दबे होने की आशंका है। धमाके के बाद पूरे इलाके में दहशत फैल गई है। फिलहाल, राहत कार्य जारी है और मलबा हटाने का काम किया जा रहा है।जहां एक पटाखा फैक्ट्री में जोरदार धमाका हो गया। धमाका इतना जबरदस्त था कि फैक्ट्री पूरी तरह से धराशाई हो गई। वहीं आस-पास के 4 से 5 मकानों में भी दरारें आ गई। बताया जा रहा है कि हादसे में की लोगों के दबे होने की आशंका है। धमाके के बाद पूरे इलाके में दहशत फैल गई है। फिलहाल, राहत कार्य जारी है और मलबा हटाने का काम किया जा रहा है। विस्फोट में मकान के मलबे में दो लोगों के दबे होने की आशंका है। पुलिस व नगरनिगम का अमला रेस्क्यू करने में लगा हुआ है। अभी यह भी साफ नहीं हुआ है कि विस्फोट किस वजह से हुआ है। हालांकि मोहल्ले के कुछ लोगाें का कहना था सिलेण्डर में विस्फोट हुआ है। लेकिन कुछ लोगाें का कहना है कि मकान में पटाखे बनाए जाते थे और उन्हें स्टोर कर रखा हुआ था। उनमें आग लगने से विस्फोट हुआ। घटनाक्रम के मुताबिक इस्लामपुरा में रहने वाले गजराज राठौर के मकान में शनिवार सुबह करीब साढ़े दस बजे विस्फोट हो गया। जिससे मकान पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया। गजराज के बगल के दोनो घर व पीछे बना घर भी क्षतिग्रस्त हो गया। कुछ लोगाें का कहना है कि मकान गैस सिलेण्डर में आग लगने से विस्फोट हुआ है तो लोगों का यह भी कहना था कि गजराज सिंह पटाखे बनाने व स्टोर करने का काम करता था। पटाखों में आग लगने की वजह से विस्फोट हुआ। जिससे मकान क्षतिग्रस्त हो गए। महिला व एक बच्चे सहित कई लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका विस्फोट के बाद मकान के मलबे में महिला व एक बच्चे सहित और भी लोगों के दबे होने की आशंका है। पुलिस व नगरनिगम के कर्मचारी मलबे को हटाकर दबे हुए लोगों को निकालने का प्रयास कर रहे थे। हालांकि खबर लिखे जाने तक मलबे से किसी को भी निकाला नहीं जा सका था। प्रशासन ने एसडीआरएफ को भी बुलाया है जिससे रेस्क्यू आपरेशन में तेजी लाया जा सके। धमाका इतना तेज कि कांप गया मोहल्ला, मकानों में आई दरार इस्लामपुरा में मकान के धमाका इतना तेज था कि पूरा मोहल्ला कांप गया। लोगाें का कहना था कि धमाका इतना तेज था कि लगा जैसे भूकंप आ गया हो। कई मकानों में धमाके की वजह से दरारें भी आ गई हैं। पहले भी इस्लामपुरा में हो चुके हैं विस्फोट पहले भी इस्लामपुरा में आतिशबाजी में विस्फोट होने की कई घटनाएं हो चुकी है। जिसमें आतिशबाजी बनाने वाले लोग न केवल जल गए थे, बल्कि मकान के मलबे में भी दब गए थे। इसके बाद भी इस्लामपुरा में पटाखे बनाने का काम लगातार जारी रहा।

भारतीय सड़क कांग्रेस भोपाल में सड़क और पुल निर्माण की नवीन तकनीकों पर मंथन, CM मोहन यादव और नितिन गडकरी ने किया शुभारंभ

भोपाल केंद्रीय मंत्री नितिन गड़करी और सीएम मोहन यादव ने शनिवार, 19 अक्टूबर को भोपाल के विकास का विजन साझा किया। इस दौरान उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी और सुंदरलाल पटवा से जुड़ा रोचक किस्सा सुनाते हुए कहा कैसे उनके एक निर्णय से देश 6 लाख गांवों में क्रांतिकारी बदलाव आया है। भोपाल के रवींद्र भवन में सड़क और पुल निर्माण की नवीन तकनीकों पर आधारित दो दिवसीय सेमिनार आयोजित किया गया है। इसके शुभारंभ समारोह में केंद्रीय मंत्री गड़करी ने कहा, भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सड़क नेटवर्क वाला देश है। यहां 16 लाख किलोमीटर सड़कों बड़ा नेटवर्क है। सेमिनार में सड़क और पुल निर्माण की नई तकनीक, सामग्री और एग्रीमेंट प्रोसेस से जुड़े पहलुओं पर एक्सपर्ट्स अपने अनुभव और सुझाव साझा कर रहे हैं। यहां एक प्रदर्शनी भी लगाई गई है, जिसमें सड़क और पुल निर्माण में लगने वाली नई मशीनरी समेत अन्य सामग्री का प्रदर्शित की गई हैं। सेमिनार में विभिन्न तकनीकी-सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें देशभर से आए हुए विशेषज्ञ नई तकनीकों, निर्माण सामग्रियों और ईपीसी (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट, कंस्ट्रक्शन) एग्रीमेंट प्रक्रिया की चुनौतियों पर अपने विचार रखेंगे। लोक निर्माण विभाग के मंत्री राकेश सिंह ने कहा- लोक निर्माण से लोक कल्याण हमारी टैगलाइन है, जिसका उद्देश्य केवल संरचनाओं का निर्माण करना भर नहीं है बल्कि ऐसी परियोजनाओं का विकास करना है जो समाज के सतत विकास में अपना योगदान दें। इसलिए हमारा लक्ष्य है कि भविष्य की सभी परियोजनाएं, इफेक्टिव मैनेजमेंट, कम लागत और समयबद्ध कार्य की दृष्टि से आदर्श बने। मुख्यमंत्री यादव ने कहा है कि इस दो दिवसीय सेमिनार से मध्य प्रदेश के अवसंरचना विकास को नई ऊर्जा मिलेगी और यह आयोजन राज्य की निर्माण परियोजनाओं में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करने में सहायक सिद्ध होगा। सेमिनार में विभिन्न तकनीकी-सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें देशभर से आए हुए विशेषज्ञ नई तकनीकों, निर्माण सामग्रियों और ईपीसी (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट, कंस्ट्रक्शन) अनुबंध निष्पादन की चुनौतियों पर अपने विचार रखेंगे। सेमिनार में लोक निर्माणमंत्री राकेश सिंह सहित अन्य विशिष्टजन उपस्थित रहेंगे। पहले दिन प्रमुख चर्चा में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत नई तकनीकों का कार्यान्वयन, पुल निर्माण में नई मशीनरी का उपयोग और सड़क निर्माण में उपयोग होने वाली नई सामग्रियों पर फोकस रहेगा। सड़क सुरक्षा, परियोजनाओं की मॉनिटरिंग के लिए आईटी तकनीकों का उपयोग और सीमांत सामग्रियों के उपयोग पर भी गहन मंथन किया जाएगा। आखिरी दिन रविवार को ईपीसी (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट, कंस्ट्रक्शन) अनुबंधों की संरचना शेड्यूलिंग, अनुबंध निष्पादन में ठेकेदारों की भूमिका और सहायक अभियंताओं की भूमिका पर विस्तृत चर्चा होगी। इसमें अनुबंधों से जुड़े विवादों और चुनौतियों के समाधान पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा। समापन सत्र में विभिन्न विशेषज्ञ और प्रतिनिधि पैनल चर्चा के माध्यम से सड़क और पुल निर्माण में नई तकनीकों के उपयोग पर अपने विचार रखेंगे। सेमिनार का उद्देश्य प्रदेश में सड़क और पुल निर्माण की गुणवत्ता को बढ़ाने और नवीनतम तकनीकों से समयबद्ध और टिकाऊ अवसंरचना का विकास सुनिश्चित करना है।

दीपावली से पहले अक्टूबर महीने की सैलरी दिए जाने की कर्मचारियों की मांग हुई मंजूर…

इंदौर मध्यप्रदेश में विभिन्न कर्मचारी संगठन दीपावली से पहले अक्टूबर महीने की सैलरी देने की मांग कर रहे हैं और इसी बीच इंदौर में बिजली कंपनी ने कर्मचारियों की इस मांग को मानते हुए दिवाली से पहले कर्मचारी-अधिकारियों को सैलरी देने का फैसला लिया है। बिजली कंपनी के इस फैसले से बिजली कंपनी के कर्मचारियों और अधिकारियों में खुशी की लहर है और अब वे अपनी दिवाली खुलकर मना पाएंगे। मप्र पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने सभी कर्मचारियों, अधिकारियों को दीपावली के त्योहार से पूर्व माह अक्टूबर का वेतन भुगतान करेगी। कंपनी के मुख्य महाप्रबंधक प्रकाश सिंह चौहान ने बताया कि प्रबंध निदेशक रजनी सिंह के निर्देशानुसार केंद्रीय कार्मिक दावा प्रकोष्ठ, मुख्य अभियंता इंदौर क्षेत्र, मुख्य अभियंता उज्जैन क्षेत्र द्वारा अक्टूबर के वेतन दीपावली त्योहार के मद्देजर जारी माह के दौरान ही देने का निर्देश दिया गया है। बिजली कंपनी के इस फैसले से कंपनी के करीब 7 हजार नियमित कर्मचारी व 17 हजार से ज्यादा आउटसोर्स कर्मचारियों में खुशी की लहर है। दीपावली से पहले मिलने वाली अक्टूबर महीने की सैलरी से अब वो दीपावली का त्यौहार खुशी-खुशी मना पाएंगे और इस फैसले के लिए कर्मचारियों ने कंपनी का धन्यवाद भी दिया है। दीपावली से पहले करें कर्मचारियों का वेतन भुगतान नवदुनिया प्रतिनिधि,भोपाल। नगर निगम भोपाल सेवा निवृत्त अधिकारी, कर्मचारी कल्याण समिति ने नगर निगम आयुक्त हरेंद्र नारायन से दीपावली से पहले वेतन और पेंशन भुगतान करने की मांग की है। समिति के सचिव राम सिंह राठौर ने बताया कि दीपावली का त्योहार सभी धर्म के लोग हर्षाेल्लास के साथ मनाते हैं। इसमें खर्च भी अधिक होता है। ऐसे में सभी पेंशनरों, कर्मचारियों को उनकी देय आगामी पेंशन, वेतन का भुगतान 28 अक्टूबर तक कर दी जाए।

राज्यपाल ने किया आयुर्वेद चिकित्सकों का सम्मान, निबंध प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कृत

आयुर्वेद को आगे बढ़ाना, भारतीय संस्कृति का प्रचार : राज्यपाल पटेल  हमारा सौभाग्य है कि प्रदेश में आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों का भरपूर भंडार है : राज्यपाल पटेल राज्यपाल ने किया आयुर्वेद चिकित्सकों का सम्मान, निबंध प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कृत पं. उद्धवदास मेहता स्मृति न्यास द्वारा मानस भवन में समारोह का आयोजन भोपाल राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि आयुर्वेद, भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग है। आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति को आगे बढ़ाना, हमारी संस्कृति का प्रचार है। । प्रदेश के जनजातीय भाई-बहनों के पास प्राकृतिक जड़ी-बूटियों और औषधीय पेड़-पौधों के ज्ञान का खजाना मौजूद हैं। उन्होंने सभी से आव्हान किया कि आयुर्वेद के फायदों के बारे में आमजनों को जागरूक करें। राज्यपाल पटेल पं. उद्धवदास मेहता स्मृति न्यास द्वारा आयोजित शीर्ष आयुर्वेद चिकित्सकों का सम्मान और अखिल भारतीय आयुर्वेद पी.जी. निबंध प्रतियोगिता के पुरस्कार समारोह को संबोधित कर रहे थे। सम्मान समारोह का आयोजन विश्व आयुर्वेद परिषद के सहयोग से मानस भवन भोपाल में किया गया। इस अवसर पर राज्यपाल पटेल ने आयुर्वेद चिकित्सकों का सम्मान किया और निबंध प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कृत किया। उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दी। न्यास की स्मारिका का लोकार्पण भी किया।       राज्यपाल पटेल ने कहा कि आयुर्वेद आरोग्य का विज्ञान है। यह मानव के सम्पूर्ण स्वास्थ्य, खान-पान और आचार-विचार पर केन्द्रित है। यह रोगों के इलाज के साथ ही स्वस्थ जीवन शैली पर भी फोकस करता है। राज्यपाल पटेल ने कहा कि आयुष के क्षेत्र में हर्बल मेडिसिन, आयुर्वेद और योग टूरिज्म की असीम संभावनाओं को अवसर में बदलने विशेष प्रयास किए जाए। उन्होंने बच्चों को समझाईश भी दी कि फास्ट फूड्स और कोल्ड ड्रिन्क्स का सेवन नहीं करे। नियमित योग और कसरत करें। पौष्टिक आहार का सेवन करे।   कोविड के बाद आयुर्वेद के हॉलिस्टिक विजन की ओर लौट रहा विश्व       राज्यपाल पटेल ने कहा कि आयुर्वेद वेलनेस को प्रमोट करता है। वह उसी व्यक्ति को स्वस्थ मानता है जिसका शरीर संतुलन में हो। जिसकी सभी क्रियाएँ संतुलित हों और मन प्रसन्न हो। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के अनुभव के बाद, सम्पूर्ण विश्व आयुर्वेदिक ज्ञान के हॉलिस्टिक विजन और जीवन दर्शन की ओर लौट रहा है। राज्यपाल पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में आयुर्वेद को विश्व भर में नई पहचान मिल रही हैं। केन्द्र सरकार ने आयुष मंत्रालय बनाने और ऑल इण्डिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद खोलने की पहल की है। जामनगर गुजरात में विश्व का पहला और इकलौता ग्लोबल सेन्टर फॉर ट्रेडिशनल मेडिसिंन विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा खोला गया है। सेन्टर फॉर इंटीग्रेटेड मेडिसिन, एम्स द्वारा योग और आयुर्वेद से जुड़ी कई महत्वपूर्ण रिसर्च हो रही है। आयुष रिसर्च पोर्टल पर 40 हजार से अधिक स्टडीज का डेटा भी उपलब्ध हो गया है।      आयुष, उच्च शिक्षा एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि आयुर्वेद एक जीवन पद्धति है। आयुर्वेद का भारतीय ज्ञान परम्परा में महत्वपूर्ण स्थान है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के माध्यम से प्रदेश में भी आयुर्वेदिक चिकित्सा के क्षेत्र में विशेष कार्य किए जा रहे है। मंत्री परमार ने कहा कि स्मृति न्यास के अंतर्गत आयुर्वेद लाईब्रेरी स्थापित की जाएगी। इस लाईब्रेरी का स्वरूप डिजिटल भी होगा ताकि विश्व भर के आयुर्वेद चिकित्सकों, छात्रों, शोधार्थियों और आमजनों को भी लाभ मिल सके। सांसद आलोक शर्मा ने आयुर्वेदिक चिकित्सा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले चिकित्सकों को बधाई दी। आयुर्वेद के प्रचार-प्रसार के विभिन्न आयोजनों के लिए स्मृति न्यास को साधुवाद दिया। भोपाल (दक्षिण-पश्चिम) विधायक भगवान दास सबनानी ने आयुर्वेद चिकित्सा के प्रचार-प्रसार में पं. उद्धवदास मेहता के योगदान को याद किया।       राज्यपाल पटेल का पुष्प-गुच्छ से स्वागत और शॉल, श्रीफल और स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया गया। पं. उद्धवदास मेहता स्मृति न्यास के अध्यक्ष उमाशंकर गुप्ता ने पं. मेहता के व्यक्तित्व और कृत्तिव पर प्रकाश डाला। उन्होंने न्यास के उद्देश्यों, कार्यों और उपलब्धियों की जानकारी दी। प्रो. गोविन्द सहाय शुक्ल ने समारोह की रूपरेखा और प्रतिभागियों की जानकारी दी। आभार समारोह के प्रायोजक झन्डु ईमामी के डॉ. आदित्य ने किया। सम्मान समारोह में झन्डु ईमामी के संजय भट्ट, वरिष्ठ आयुर्वेद चिकित्सक, विजेता प्रतिभागी, आयुर्वेद छात्र-छात्राएं, उनके परिजन, विश्व आयुर्वेद परिषद के पदाधिकारीगण उपस्थित थे।  

रूस में आयोजित हो रहा 16वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने पीएम मोदी 22 अक्टूबर जायेंगे

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी रूस की अध्यक्षता में कज़ान में आयोजित हो रहे 16वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए 22-23 अक्टूबर तक रूस की यात्रा पर रहेंगे। प्रधानमंत्री रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के निमंत्रण पर रूस की यात्रा पर हैं। विदेश मंत्रालय की ओर से जारी किए गए एक बयान में बताया गया कि प्रधानमंत्री मोदी रूस की अपनी यात्रा के दौरान ब्रिक्स के सदस्य देशों के अपने समकक्षों और कजान में आमंत्रित नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी कर सकते हैं। ब्रिक्स के इस साल के शिखर सम्मेलन का विषय ‘‘वैश्विक विकास और सुरक्षा के लिए बहुपक्षवाद को मजबूत करना” है। विदेश मंत्रालय ने बताया कि यह सम्मेलन नेताओं को दुनिया के प्रमुख मुद्दों पर चर्चा करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करेगा। मंत्रालय ने कहा, ‘‘इस शिखर सम्मेलन में ब्रिक्स द्वारा शुरू की गई पहलों की प्रगति का आकलन किया जाएगा तथा यह भविष्य में सहयोग के लिए संभावित क्षेत्रों की पहचान करने के वास्ते एक मूल्यवान अवसर भी प्रदान करेगा।” 

हीरे के बाद अब सोना भी निकालेगा मध्यप्रदेश : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

दो दिवसीय माईनिंग कॉन्क्लेव खनिज कॉन्क्लेव में 20 हजार करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए : मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रदेश में खनिज क्षेत्र में निवेश को पूर्ण प्रोत्साहन,11 औद्योगिक संस्थान निवेश के लिये आगे आये  : मुख्यमंत्री डॉ. यादव हीरे के बाद अब सोना भी निकालेगा मध्यप्रदेश  : मुख्यमंत्री डॉ. यादव अयोध्या में रामलला के मंदिर में उपयोग में लाए गए मध्यप्रदेश के मंडला के पत्थर मुख्यमंत्री दो दिवसीय माईनिंग कॉन्क्लेव के समापन सत्र में हुए शामिल भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश खनिज संपदा से समृद्ध राज्य है। इस संपदा के दोहन के लिए प्रयास बढ़ाते हुए खनिज क्षेत्र में नए निवेश को पूरा प्रोत्साहन दिया जाएगा। खनन क्षेत्र के उद्यमियों को राज्य सरकार सभी आवश्यक सुविधाएं प्रदान करेगी। प्रदेश की खनिज संपदा का दोहन करते हुए उत्पाद भी प्रदेश में ही हो, ऐसे प्रयास किए जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को 2 दिवसीय माईनिंग कॉन्क्लेव के समापन सत्र को संबोधित कर रहे थे। कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में सम्पन्न कॉन्क्लेव में विभिन्न 11 औद्योगिक संस्थानों की ओर से 19,650 करोड़ रूपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में एमओआईएल (भारत सरकार का उपक्रम) और मध्यप्रदेश राज्य खनिज निगम लिमिटेड के मध्य खनिज ब्लॉक से संबंधित “संयुक्त उद्यम समझौता” हस्ताक्षरित भी हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस कॉन्क्लेव को सफल आयोजन बताते हुए कहा कि प्रदेश के खनिज राजस्व में भी 5 गुना वृद्धि का लक्ष्य आने वाले समय में प्राप्त किया जाएगा। उद्यमियों के साथ भू-गर्भ शास्त्री, वैज्ञानिक, खनिज विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, भारत सरकार के खनिज मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के अधिकारी कॉन्क्लेव में शामिल हुए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारे देश की संस्कृति विश्व में सबसे अलग है। जहां अन्य देश राष्ट्र को पिता मानते हैं, हमारे देश में हम भारत माता की जय का उद्घोष करते हैं। मातृ प्रधान व्यवस्था को प्राचीन काल से प्रश्रय मिला। हम देश को भी मातृ संस्था मानते हैं। शरीर की रचना भी ब्रम्हांड की तरह होती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहाकि इस वसुंधरा की नदियां मनुष्य के रक्त प्रवाह के समान हैं। पृथ्वी में भी प्राण होते हैं और वनस्पति में भी प्राण होते हैं, यह हमारी मान्यता अन्य देशों से काफी पुरानी हैं। प्रकृति के दोहन और शोषण के अंतर को समझने की आवश्यकता है। खनिज संपदा की दृष्ट से ईश्वर की कृपा मध्यप्रदेश पर है। माईनिंग कॉन्क्लेव में प्रमुख निवेश प्रस्ताव क्र फर्म/कम्पनी का नाम प्रोजेक्ट का विवरण स्थान 1 ल्यूगांग इंडिया, नई दिल्ली प्रदेश में माइनिंग उपकरण निर्माण इकाई स्थापना निवेश राशि 250 करोड़ – 2 इंडियन रेयर अर्थस, मुंबई रेयर मेटल्स क्लस्टर की स्थापना औद्योगिक क्षेत्र अचारपुर, जिला भोपाल 3 द कमोडिटी हब, गुरूग्राम हरियाणा कॉपर, रॉकफास्फेट तथा सिलीकॉन बेनीफिकेशन प्लांट की स्थापना, निवेश राशि 2000 करोड़ बालाघाट एवं खरगौन 4 श्री बजरंग पावर एंड इस्पात लिमिटेड, रायपुर छत्तीसगढ़ इंट्रीगेटेड स्टील प्लांट,-निवेश राशि 1000 करोड़ उमरिया 5 व्रिज आयरन एवं स्टील लिमि. जल विहार कालोनी रायपुर इंट्रीगेटेड स्टील प्लांट,-निवेश राशि 1000 करोड़ कोतमा शहडोल 6 बैर्री अलायज, कोलकाता प्रदेश में फेरो अलायज इकाई की स्थापना निवेश राशि 400 करोड़ – 7 इन्विनायर पेट्रोडाइन लिमिटेड कोल बेड मीथेन और कोल गैसीफिकेशन में निवेश राशि 5000 करोड़ बैतूल और छिंदवाड़ा 8 डालमिया सीमेंट, नई दिल्ली प्रदेश में सीमेंट प्लांट की स्थापना निवेश राशि 3000 करोड़ सतना 9 जे.के. सीमेंट पन्ना जिले में स्थापित सीमेंट प्लांट का विस्तारीकरण निवेश राशि 2500 करोड़ पन्ना सिंगरौली एवं शहडोल जिले में आवंटित कोल ब्लॉक निवेश राशि 1000 करोड़ सिंगरौली एवं शहडोल 10 अंबुजा सीमेंट अहमदाबाद, गुजरात प्रदेश में सीमेंट प्लांट की स्थापना निवेश राशि 3000 करोड़ रीवा 11 सागर स्टोन इंडस्ट्रीज, जबलपुर फोस्फोराईट से खाद विनिर्माण इकाई की स्थापना, निवेश राशि 500 करोड़ छतरपुर   कुल 19650   प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में जेट की गति से बढ़ रहा देश मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हमारा देश जेट की गति से आगे बढ़ रहा है। खनिज के क्षेत्र में प्रधानमंत्री की कल्पना के अनुसार भारत वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है। मध्यप्रदेश भी विकास के सभी क्षेत्रों में आगे बढ़ रहा है। जहां कृषि के साथ ही पशुपालन और अन्य क्षेत्रों में नए प्रकल्प आ रहे हैं, वहीं खनिज क्षेत्र में मध्यप्रदेश उल्लेखनीय उपलब्धियां अर्जित करेगा। भारत सरकार द्वारा खनिजों की नीलामी में पुरस्कृत मध्यप्रदेश विविध प्रकार की खनिज संपदा के समुचित दोहन के लिए संकल्पबद्ध है। मध्यप्रदेश सरकार खनिज क्षेत्र में निवेश को भरपूर प्रोत्साहन देगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि खनन क्षेत्र में उद्यमियों को सरकार का पूरा साथ मिलेगा। खनिज क्षेत्र मध्यप्रदेश को प्रगति के नए आयामों को छूने में सहयोगी बनेगा। हर महीने रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में हर महीने अलग-अलग क्षेत्रों में रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव हो रही हैं। इस वर्ष अब तक हुई 4 कॉन्क्लेव के फलस्वरूप लगभग 2 लाख 50 हजार करोड़ रूपए के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। आने वाली 23 अक्टूबर को रीवा में “रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव” उद्योग के विभिन्न सेक्टर्स में नए निवेश लाने में सहयोगी होगी। एक ही दिन में दो बड़े आयोजनों में भागीदारी का सौभाग्य मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में औद्योगिक प्रगति को अग्रसर रखने एवं युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिये रीजनल इंडस्ट्री कान्क्लेव की जा रही है। इसी क्रम में मध्यप्रदेश की पूरी क्षमता को विकसित करने हमने पर्यटन की भी कॉन्क्लेव की। आज मैं दो कॉन्क्लेव में शामिल हुआ। सुबह पेट्रोकेमिकल एवं फार्मा इंडिया केम मुंबई में शामिल हुआ और अभी माइनिंग कॉन्क्लेव में शामिल हुआ हूँ। विभागवार कॉन्क्लेव की श्रंखला जारी रहेगी। अगले वर्ष फरवरी में जीआईएस का आयोजन करेंगे। मध्यप्रदेश में चहुँमुंखी औद्योगिक विकास और रोजगार बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ेगे। अयोध्या के राम मंदिर तक पहुंचा मध्यप्रदेश का पत्थर, हीरे के बाद सोना भी निकालेंगे मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि निश्चित ही यह गर्व का विषय है कि गोंडवाना अंचल के मंडला जिले में खनन से प्राप्त पत्थर का उपयोग अयोध्या में श्रीरामलला मंदिर के गर्भ गृह में लगाने का सौभाग्य मध्यप्रदेश को मिला। निश्चित ही यह पत्थर गुणवत्ता की दृष्टि से इस योग्य … Read more

मंगल ग्रह पर एलियन जीवन के संकेत, सूखे बर्फ की चादर के नीचे, एक नई स्टडी में खुलासा हुआ

नई दिल्ली मंगल ग्रह के बर्फीले हिस्सों में एलियन जीवन हो सकता है. वैज्ञानिकों का अनुमान है कि मंगल ग्रह के आइसकैप यानी बर्फ की चादरों के नीचे जीवन होना चाहिए. साइंटिस्ट  ये मानते हैं कि वहां पर फोटोसिंथेसिस जैसी प्रक्रिया हो रही होगी. लेकिन सूखे बर्फ की चादर के नीचे. एक नई स्टडी में यह खुलासा हुआ है. फोटोसिंथेसिस वह प्रक्रिया है, जिसमें पौधे, एल्गी और साइनोबैक्टीरिया केमिकल एनर्जी पैदा करते हैं. इसके लिए चाहिए पानी और सूरज की रोशनी. धरती के वायुमंडल पर सबसे ज्यादा ऑक्सीजन यहीं से पैदा होता है. लेकिन एक नई स्टडी के मुताबिक मंगल ग्रह पर ध्रुवों के पास बर्फ की मोटी चादर बिछी है. जिसके नीचे जीवन हो सकता है. वैज्ञानिक ये मानते हैं कि सूरज के रेडिएशन से बचने के लिए बर्फ की चादरों के नीचे जीवन फोटोसिंथेसिस के जरिए या उसके जैसी किसी प्रक्रिया से पनप रहा होगा. जिसे रेडिएटिव हैबिटेबल जोन्स (Radiative Habitable Zones) कहते हैं. फोटोसिंथेसिस को क्या चाहिए. सटीक मात्रा में रोशनी. इससे यह नहीं पता चलता कि मंगल पर जीवन है. कई स्पेसक्राफ्ट्स के डेटा के आधार पर अनुमान मंगल पर जीवन होने की उम्मीद है. वैज्ञानिक नासा के मार्स ऑर्बिटर, परर्सिवरेंस रोवर, मार्स सैंपल रिटर्न और एक्सोमार्स जैसे स्पेसक्राफ्ट्स से आए डेटा का एनालिसिस कर रहे थे. वैज्ञानिकों की ये हाइपोथिसिस इन स्पेसक्राफ्ट्स से मिले डेटा के आधार पर बनाई गई है. इसकी पुष्टि तो मंगल ग्रह पर जाकर बर्फ के नीचे जांच करने से ही होगी. नासा जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी के शोधकर्ता औऱ फेलो आदित्य खुल्लर ने कहा कि हम ये नहीं कह रहे हैं कि हमने मंगल पर जीवन खोज लिया है. लेकिन हमारा मानना है कि मंगल ग्रह के धूल वाले सूखे बर्फीले चादरों के नीचे जीवन होने की संभावना है. भविष्य में इसकी जांच हो सकती है. धरती VS मंगल… कहां क्या है अंतर? धरती और मंगल ग्रह हैबिटेबल जोन में आता है. यानी सूरज से इनकी दूरी इतनी है कि यहां पर जीवन अच्छे से पनप सकता है. पृथ्वी इस बात का सबूत है. तापमान इतना सही रहता है कि ग्रह पर पानी भी हो सकता है. धरती पर तो है. तरल पानी का समंदर. मंगल ग्रह सूखा है. ज्यादातर हिस्सा लाल और ड्राई. मंगल ग्रह पर गए ज्यादातर स्पेसक्राफ्ट जैसे- क्यूरियोसिटी, परर्सिवरेंस रोवर ने वहां सूखी नदियों के बेसिन, झीलें, नदियों का शाखाएं देखी हैं. हो सकता है कि करोड़ों साल पहले कभी वहां पानी रहा हो. इस बात की पुष्टि तो मंगल के चारों तरफ उड़ान भरने वाले मार्स रीकॉन्सेंस ऑर्बिटर ने भी की है. लेकिन मंगल ग्रह ने अपना पानी खो दिया. मंगल ग्रह पर अल्ट्रावायलेट रेडिएशन बहुत ज्यादा है. जो कि जीवन के लिए खतरनाक है. ऐसे में वहां पर जटिल कोशिकाओं वाले जीवन की संभावना कम है. आदित्य ने बताया कि धरती की तरह मंगल ग्रह पर ओजोन जैसा कोई सुरक्षा कवच नहीं है. इसलिए वहां पर 30 फीसदी ज्यादा रेडिएशन होता है. कितनी बर्फ है मंगल ग्रह पर? मंगल ग्रह पर बर्फ की चादर बहुत है लेकिन प्रदूषित है. डेटा एनालिसिस से पता चलता है कि मंगल ग्रह पर 2 से 15 इंच तक बर्फ की चादर है. जिसमें 0.1 फीसदी धूल भी मिली है. यानी मार्शियन डस्ट. प्रदूषण मिक्स होने की वजह से बर्फ चादर की मोटाई कहीं-कहीं 7 से 10 फीट भी हो सकती है. ऐसे में इसके नीचे जीवन पनपने की संभावना बढ़ जाती है. क्योंकि यहां पर सूरज के रेडिएशन का असर कम हो जाता है.    

पुलिस आरक्षक की चल रही शारीरिक दक्षता परीक्षा में ‘थियोडोलाइट’ तकनीक का सहारा, जानें क्या है ये टेक्निक

भोपाल मध्य प्रदेश की पूर्ववर्ती सरकारों पर भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी के आरोप लगते रहे हैं। ऐेसे में अब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव नहीं चाहते कि युवाओं के भविष्य से किसी प्रकार का खिलवाड़ हो। इसके कारण पुलिस भर्ती में बड़ा बदलाव किया गया है। 54 हजार अभ्यर्थी ले रहे भाग वर्तमान में पुलिस आरक्षक के 7500 पदों के लिए चल रही शारीरिक दक्षता परीक्षा में तकनीक का सहारा लिया जा रहा है, जिससे मानवीय त्रुटि की संभावना खत्म हो सके। मध्य प्रदेश पुलिस थियोडोलाइट यंत्र का उपयोग कर रही है। इसकी खास बात यह है कि इससे आंकड़े बिल्कुल सही आते हैं। आपको बता दें कि प्रदेश भर में 54 हजार अभ्यर्थी शारीरिक दक्षता परीक्षा में भाग ले रहे हैं। प्रिज्म लेयर से होगा माप पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों के अनुसार प्रदेश में शारीरिक दक्षता परीक्षा शुरू हो रही है। इसमें लंबी कूद और गोला फेंक में माप के लिए ‘थियोडोलाइट’ तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। जहां पर गोला गिरेगा वहां प्रिज्म लेजर रखकर इसके माध्यम से उसका मापन थियोडोलाइट से किया जाएगा। इस मशीन की रीडिंग अभ्यर्थी के रोल नंबर के साथ ही सीधे कंप्यूटर में रिकॉर्ड हो जाएगी। ऐसे में रीडिंग की गड़बड़ी की गुंजाइश खत्म हो जाएगी। बायोमेट्रिक से होगा वेरिफिकेशन इस भर्ती में प्रदेश के 10 जिलों में केंद्रों में 800 मीटर की दौड़, लंबी कूद और गोला फेंक की परीक्षा ली जाएगी। शारीरिक भर्ती के लिए परीक्षार्थी के सत्यापन के लिए आधार बायोमेट्रिक का उपयोग किया जाएगा। यह मेल नहीं खाता तो रेटिना मिलान की जाएगी। परीक्षा की पारदर्शिता के लिए परीक्षा की रिकार्डिंग कर मैदान में बड़ी स्क्रीन में दिखाया जाएगा। 100 नंबर का होगा फिजिकल टेस्ट शारीरिक दक्षता परीक्षा के 100 अंक रखे गए हैं। इतने ही अंकों की लिखित परीक्षा पहले हो चुकी है। दोनों को जोड़कर प्रावीण्य सूची बनाई जाएगी। आपको बता दें कि 800 मीटर दौड़ के लिए 40 नंबर, लंबी कूद के लिए 30, गोला फेंक के लिए 30 नंबर तय किये गए हैं। थियोडोलाइट तकनीक थियोडोलाइट एक ऐसी मशीन है, जिसे आमतौर पर सिविल इंजीनियरिंग में उपयोग किया जाता है। इसका उपयोग क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर कोणों को मापने के लिए किया जाता है। इससे माप में पूरी शुद्धता रहती है।

महाकुंभ 2025 : श्रद्धालुओं को कुंभ नगरी की भव्यता का दिव्य दर्शन करवाने सरकार ने भारी भरकम बजट का ऐलान किया

प्रयागराज  महाकुंभ-2025 को लेकर योगी सरकार प्रयागराज के तीर्थों का कायाकल्प करने में युद्धस्तर पर जुटी है। श्रद्धालुओं को कुंभ नगरी की भव्यता और नव्यता का दिव्य दर्शन करवाने के लिए प्रदेश सरकार ने भारी भरकम बजट का ऐलान किया है। अक्षयवट का बड़ा पौराणिक महत्व है। मान्यता के अनुसार, संगम स्नान के पश्चात 300 वर्ष पुराने इस वृक्ष के दर्शन करने के बाद ही स्नान का फल मिलता है। इसलिए तीर्थराज आने वाले श्रद्धालु एवं साधु संत संगम में स्नान करने के बाद इस अक्षयवट के दर्शन करने जाते हैं। जिसके बाद ही उनकी मान्यताएं पूरी होती हैं। सरकार की महत्वाकांक्षी अक्षयवट कॉरिडोर सौंदर्यीकरण योजना का जायजा लेने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसके कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। महाकुंभ के दौरान यहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह स्थान आस्था का प्रमुख केंद्र होगा। प्रभु श्रीराम वन जाते समय संगम नगरी में भारद्वाज मुनि के आश्रम में जैसे ही पहुंचे उन्हें, मुनि ने वटवृक्ष का महत्व बताया था। मान्यता के अनुसार माता सीता ने वटवृक्ष को आशीर्वाद दिया था। तभी प्रलय के समय जब पृथ्वी डूब गई तो वट का एक वृक्ष बच गया, जिसे हम अक्षयवट के नाम से जानते हैं। महाकवि कालिदास के रघुवंश और चीनी यात्री ह्वेन त्सांग के यात्रा वृत्तांत में भी अक्षय वट का जिक्र किया गया है। कहा जाता है कि अक्षयवट के दर्शन मात्र से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। भारत में चार प्राचीन वट वृक्ष माने जाते हैं। अक्षयवट- प्रयागराज, गृद्धवट-सोरों ‘शूकरक्षेत्र’, सिद्धवट- उज्जैन एवं वंशीवट-वृंदावन शामिल हैं। यमुना तट पर अकबर के किले में अक्षयवट स्थित है। मुगलकाल में इसके दर्शन पर प्रतिबंध था। ब्रिटिश काल और आजाद भारत में भी किला सेना के आधिपत्य में रहने के कारण वृक्ष का दर्शन दुर्लभ था। योगी सरकार ने विगत 2018 में अक्षयवट का दर्शन व पूजन करने के लिए इसे आम लोगों के लिए खोल दिया था। पौराणिक महत्व के तीर्थों के लिए योगी सरकार की ओर से कई विकास परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं। यहां कॉरिडोर का भी कार्य चल रहा है। अयोध्या से प्रयागराज पहुंचे प्रसिद्ध संत और श्रीराम जानकी महल के प्रमुख स्वामी दिलीप दास त्यागी ने बताया कि अक्षयवट का अस्तित्व समाप्त करने के लिए मुगल काल में तमाम तरीके अपनाए गए। उसे काटकर दर्जनों बार जलाया गया, लेकिन ऐसा करने वाले असफल रहे। काटने और जलाने के कुछ माह बाद अक्षयवट पुन: अपने स्वरूप में आ जाता था। उन्होंने कहा कि योगी सरकार ने अक्षय वट को लेकर जो सौंदर्यीकरण और विकास कार्य शुरू किए हैं वो स्वागत योग्य हैं। महाकुंभ में संगम स्नान के बाद इसके दर्शन से श्रद्धालुओं को पुण्य प्राप्त होगा। रामायण, रघुवंश और ह्वेनत्सांग के यात्रा वृत्तांत में भी अक्षय वट का जिक्र प्रभु श्रीराम वन जाते समय संगमनगरी में भरद्वाज मुनि के आश्रम में जैसे ही पहुंचे उन्हें, मुनि ने वटवृक्ष का महत्व बताया था। मान्यता के अनुसार माता सीता ने वटवृक्ष को आशीर्वाद दिया था। तभी प्रलय के समय जब पृथ्वी डूब गई तो वट का एक वृक्ष बच गया, जिसे हम अक्षयवट के नाम से जानते हैं। महाकवि कालिदास के रघुवंश और चीनी यात्री ह्वेनत्सांग के यात्रा वृत्तांत में भी अक्षय वट का जिक्र किया गया है। कहा जाता है कि अक्षयवट के दर्शन मात्र से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। भारत मेें चार प्राचीन वट वृक्ष माने जाते हैं। अक्षयवट- प्रयागराज, गृद्धवट-सोरों ‘शूकरक्षेत्र’, सिद्धवट- उज्जैन एवं वंशीवट- वृंदावन शामिल हैं। मुगलकाल में रहा प्रतिबंध यमुना तट पर अकबर के किले में अक्षयवट स्थित है। मुगलकाल में इसके दर्शन पर प्रतिबंध था। ब्रिटिश काल और आजाद भारत में भी किला सेना के आधिपत्य में रहने के कारण वृक्ष का दर्शन दुर्लभ था। योगी सरकार ने आम लोगों के लिए खोला था दर्शन का रास्ता योगी सरकार ने विगत 2018 में अक्षयवट का दर्शन व पूजन करने के लिए इसे आम लोगों के लिए खोल दिया था। पौराणिक महत्व के तीर्थों के लिए योगी सरकार की ओर से कई विकास परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं। यहां कॉरिडोर का भी कार्य चल रहा है। काटने और जलाने के बाद भी पुन: अपने स्वरूप में आ जाता था वट वृक्ष अयोध्या से प्रयागराज पहुंचे प्रसिद्ध संत और श्री राम जानकी महल के प्रमुख स्वामी दिलीप दास त्यागी ने बताया कि अक्षय वट का अस्तित्व समाप्त करने के लिए मुगल काल में तमाम तरीके अपनाए गए। उसे काटकर दर्जनों बार जलाया गया, लेकिन ऐसा करने वाले असफल रहे। काटने व जलाने के कुछ माह बाद अक्षयवट पुन: अपने स्वरूप में आ जाता था। उन्होंने कहा कि योगी सरकार ने अक्षय वट को लेकर जो सौंदर्यीकरण और विकास कार्य शुरू किए हैं वो स्वागतयोग्य हैं। महाकुंभ में संगम स्नान के बाद इसके दर्शन से श्रद्धालुओं को पुण्य प्राप्त होगा।    

कोरियाई सैनिक रूसी उपकरण और गोला-बारूद का इस्तेमाल यूक्रेन के खिलाफ करेंगे, क्या किम जोंग उन कराएंगे तीसरा विश्वयुद्ध?

मॉस्को  रूस और यूक्रेन का युद्ध चल रहा है। इस बीच एक बड़ी खबर आई है। यूक्रेनी रक्षा खुफिया निदेशालय (GUR) के प्रमुख के मुताबिक लगभग 11,000 उत्तर कोरियाई पैदल सेना के सैनिक यूक्रेन में लड़ने के लिए पूर्वी रूस में प्रशिक्षण ले रहे हैं। द वार जोन की रिपोर्ट के मुताबिक लेफ्टिनेंट जनरल किरिलो बुडानोव ने कहा, ‘वे 1 नवंबर को यूक्रेन में लड़ने को तैयार होंगे।’ बुडानोव ने कहा कि उत्तर कोरियाई सैनिक रूसी उपकरण और गोला-बारूद का इस्तेमाल करेंगे। 2600 सैनिकों का पहला कैडर कुर्स्क क्षेत्र में भेजा जाएगा, जहां यूक्रेन ने रूस की जमीन को कब्जाया हुआ है। उन्होंने कहा कि अभी नहीं पता कि बाकी उत्तर कोरियाई सैनिक कहां जाएंगे। बुडानोव की टिप्पणी से कुछ घंटे पहले यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की ने कहा था कि लगभग 10 हजार उत्तर कोरियाई सैनिक रूस की ओर से यूक्रेन में लड़ने को तैयार हैं। न्यूज एजेंसी एपी की रिपोर्ट के मुताबिक जेलेंस्की ने चेतावनी दी कि जंग में तीसरे देश के शामिल होने से यह संघर्ष ‘विश्वयुद्ध’ में बदल जाएगा। यूक्रेनी राष्ट्रपति ने इसके आगे और जानकारी नहीं दी। मंगलवार को यूक्रेन की मीडिया ने बताया कि लगभग 3000 सैनिक यूक्रेन में लड़ने के लिए रूस की ‘स्पेशल ब्यूरैट बटालियन’ का हिस्सा बन रहे हैं। रूस और उत्तर कोरिया में बढ़ा सहयोग इस बात में संदेह नहीं है कि पिछले कुछ महीनों में रूस और उत्तर कोरिया ने अपने सहयोग के स्तर को बढ़ाया है। पिछले सप्ताह पुतिन के जन्मदिन की बधाई के लिए उत्तर कोरियाई सुप्रीम लीडर किम जोंग उन ने संदेश भेजा था। इस संदेश में उन्होंने पुतिन को अपना सबसे करीबी साथी बताया था। रूस और उत्तर कोरिया के बीच बढ़ते संबंधों का एक और संकेत देखा गया। गुरुवार को आई एक रिपोर्ट में कहा गया कि रूसी सैनिक उत्तर कोरिया की सेल्फ प्रोपेल्ड आर्टिलरी के इस्तेमाल का प्रशिक्षण ले रहे हैं। यूक्रेन को टैंक देगा इजरायल इस बीच खबर आई है कि ऑस्ट्रेलिया अपने 49 पुराने एम1ए1 अब्राम्स टैंक यूक्रेन को देगा। ऑस्ट्रेलिया के रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्लेस ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। यूक्रेन ने ये टैंक उसे दिए जाने का कुछ महीने पहले अनुरोध किया था। मार्लेस ने बताया कि ऑस्ट्रेलिया सरकार यूक्रेन को अपने अधिकतर अमेरिका निर्मित एम1ए1 टैंक दे रही है, जिनकी कीमत 24 करोड़ 50 लाख ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (16 करोड़ 30 लाख अमेरिकी डॉलर) है। ऑस्ट्रेलिया में इनका स्थान 75 अगली पीढ़ी के एम1एक2 टैंकों का बेड़ा लेगा। मार्लेस ने फरवरी में कहा था कि यूक्रेन को पुराने हो चुके टैंक देना उनकी सरकार के एजेंडे में नहीं है लेकिन बृहस्पतिवार को उन्होंने कहा कि वे इस मदद को अपनी सरकार के पिछले रुख से पीछे हटने के रूप में नहीं देखते। मार्लेस ने ‘ऑस्ट्रेलियन ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन’ से कहा, ‘हम यूक्रेन सरकार से इस मामले में लगातार बात कर रहे हैं कि हम उन्हें किस तरह से सर्वश्रेष्ठ सहायता दे सकते हैं।’

हेलेन और मिल्टन तूफानों की लागत 50 बिलियन डॉलर होने की, US के इतिहास में सबसे ज्यादा तबाही मचाने वाले तूफानों में से एक

फ्लोरिडा अमेरिका में हाल में आए मिल्टन तूफान ने काफी तबाही मचाई है। यह अमेरिका के इतिहास में सबसे ज्यादा तबाही मचाने वाले तूफानों में से एक है। शुरुआती अनुमानों के मुताबिक तूफान के कारण आई बाढ़ और तेज हवाओं से करीब 34 अरब डॉलर का नुकसान हुआ है। इस तूफान के कारण फ्लोरिडा में कम से कम 24 लोगों की मौत हुई। साथ ही लोगों को घरों को काफी नुकसान पहुंचा है। समस्या यह है कि अधिकांश घर तेज हवाओं से होने वाले नुकसान के लिए इंश्योर्ड थे लेकिन उनके पास बाढ़ से हुए नुकसान के लिए कवर नहीं था। मिल्टन से दो हफ्ते पहले आए हरिकेन हेलेन से करीब $47.5 अरब डॉलर का नुकसान हुआ था। लेकिन मिल्टन अमेरिका में आए 10 सबसे विनाशक तूफानों में शामिल है। इसमें करीब 22 अरब डॉलर का नुकसान तेज हवाओं के कारण हुआ है जबकि बाढ़ के कारण छह अरब डॉलर के नुकसान की आशंका है। हेलेन ने भी फ्लोरिडा के तटीय इलाकों में तबाही मचाई थी। अभी लोग इससे उबर भी नहीं पाए थे कि मिल्टन ने दस्तक दे दी। इससे फ्लोरिडा का इंश्योरेंस मार्केट मुश्किल में आ गया है। फ्लोरिडा में प्रीमियम फ्लोरिडा में इंश्योरेंस प्रीमियम देश के बाकी राज्यों की तुलना में बहुत अधिक है। सरकार के समर्थन वाली नॉन-प्रॉफिट होम इंश्योरेंस कंपनी Citizens Property Insurance Corp के पास 13 लाख पॉलिसीज हैं। अगर यह प्राइवेट कंपनी होती तो डूब चुकी होती। लेकिन सरकारी कंपनी होने के नाते इसके पास प्रीमियम सरचार्ज लगाने का अधिकार है ताकि सभी दावों का भुगतान किया जा सके। लेकिन इससे इंश्योरर्ड लोगों पर बोझ बढ़ेगा। राक्षसी तूफान हेलेन और मिल्टन ने इतनी जटिल तबाही मचाई कि अभी भी नुकसान का आकलन किया जा रहा है, लेकिन सरकारी और निजी विशेषज्ञों का कहना है कि वे संभवतः 50 अरब डॉलर से अधिक की लागत वाले कुख्यात तूफान कैटरीना, सैंडी और हार्वे की श्रेणी में शामिल हो जाएंगे। इससे भी अधिक पीड़ादायक बात यह है कि अधिकांश क्षति – हेलेन के मामले में 95% या उससे अधिक – का बीमा नहीं किया गया था, जिससे पीड़ितों को और अधिक वित्तीय संकट का सामना करना पड़ा। तूफान से होने वाली मौतें समय के साथ कम होती जा रही हैं, हालांकि हेलेन एक अपवाद था। लेकिन मुद्रास्फीति के लिए समायोजित करने पर भी, तीव्र तूफानों से होने वाली क्षति आसमान छू रही है क्योंकि लोग नुकसानदेह तरीके से निर्माण कर रहे हैं, पुनर्निर्माण की लागत मुद्रास्फीति की तुलना में तेज़ी से बढ़ रही है, और मानव-कारण जलवायु परिवर्तन तूफानों को अधिक शक्तिशाली और गीला बना रहा है, विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने कहा। “आज के तूफान, आज की घटनाएँ कल की घटनाओं से बिलकुल अलग हैं। हम जो देख रहे हैं, उनमें से एक यह है कि ये सिस्टम जो ऊर्जा बनाए रख सकते हैं, वह पहले की तुलना में काफी अधिक है,” जॉन डिक्सन, एऑन एज इंश्योरेंस एजेंसी के अध्यक्ष, जो बाढ़ कवरेज में विशेषज्ञ हैं, ने कहा। “ऐसा लगता है कि कई मामलों में मौसम इतनी तेज़ी से आगे बढ़ रहा है कि एक समाज के रूप में हम इसके साथ तालमेल नहीं रख पा रहे हैं।” पिछले 45 वर्षों में, मुद्रास्फीति के हिसाब से समायोजित, राष्ट्रीय महासागरीय और वायुमंडलीय प्रशासन ने 396 मौसमी आपदाओं की गणना की है, जिनसे कम से कम 1 बिलियन डॉलर का नुकसान हुआ है। इनमें से 63 तूफ़ान या उष्णकटिबंधीय तूफ़ान थे।

ड्रैगन सरकार के कर्ज का रेश्यो 86% पहुंचा, ऑल-टाइम हाई पर पहुंचा चीन का लोन

नई दिल्ली  चीन की सरकार ने अपनी इकॉनमी में जान फूंकने के लिए अरबों डॉलर के स्टीम्युलस पैकेज की घोषणा की है लेकिन इससे देश का कर्ज संकट हल होता नहीं दिख रहा है। दुनिया की सबसे बड़ी इकॉनमी वाले देश चीन का डेट-टु-जीडीपी रेश्यो साल की पहली तिमाही में 366% के ऑल-टाइम हाई लेवल पर पहुंच चुका है। 2008 के वित्तीय संकट के बाद से यह रेश्यो डबल हो चुका है। नॉन-फाइनेंशियल कॉरपोरेट का रेश्यो सबसे ज्यादा 171% है। इसके बाद सरकार के कर्ज का रेश्यो 86% है। अमेरिका में सरकार का डेट-टु-जीडीपी रेश्यो 125% है। करीब तीन दशक से दुनिया की फैक्ट्री बना चीन अब कई मोर्चों पर संघर्ष कर रहा है। देश की इकॉनमी डिफ्लेशन के दौर से गुजर रही है। यह वही स्थिति है जिसमें 1990 के दशक से जापान की इकॉनमी फंसी है। अमेरिका के साथ चल रहे तनाव ने चीन की बुरी हालत कर दी है। देश में बेरोजगारी चरम पर है, रियल एस्टेट सेक्टर गहरे संकट में है और लोग पैसा खर्च करने के बजाय बचत करने में लगे हैं। चीन की हालत का असर दूसरे देशों और विदेशी कंपनियों पर भी दिख रहा है। जापान का एक्सपोर्ट कई महीनों में पहली बार गिरा है। इसकी वजह यह है कि चीन में डिमांड में गिरावट आई है। दुनिया के लिए खतरे की घंटी चीन की इकॉनमी डूबी तो इससे पूरा दुनिया की ग्रोथ प्रभावित होगी। हाल में दुनिया की सबसे बड़ी फैशन कंपनी LMVH के शेयरों में बड़ी गिरावट आई है। इसकी वजह यह रही कि चीन में कंपनी की बिक्री में गिरावट आई है। इसी तरह दुनिया की कई कंपनियों की ग्रोथ में चीन का बड़ा हाथ है। दुनियाभर के बाजार चीन के माल से पटे हैं। लेकिन जानकारों की मानें तो चीन में 2008 जैसी मंदी के लक्षण दिखने शुरू हो गए हैं। यही वजह है कि चीन में मंदी की आशंका ग्लोबल इकॉनमी के लिए खतरे की घंटी है। इस बीच तीसरी तिमाही में चीन की ग्रोथ डेढ़ साल में सबसे कम रही। नेशनल ब्यूरो को स्टैटिस्टिक्स के जारी आंकड़ों के मुताबिक सितंबर तिमाही में चीन की इकॉनमी 4.6 फीसदी की रफ्तार से बढ़ी जो पिछली तिमाही में 4.7 परसेंट थी। यह 2023 की शुरुआत से सबसे कम ग्रोथ है। हाल के दिनों में चीन की सरकार ने इकॉनमी में जान फूंकने के लिए कई तरह की घोषणाएं की हैं। इनमें ब्याज दरों में कटौती और घर खरीदने से जुड़े नियमों में ढील शामिल है। लेकिन निवेशकों में इसे लेकर ज्यादा उत्साह नहीं है।

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