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दीपावली, छठ पूजा के दौरान रेल मंडल चलायेंगे फेस्टिवल स्पेशल ट्रेनें, मक्सी, उज्जैन, नागदा और रतलाम से गुजरेगी

रतलाम यात्रियों की मांग व सुविधा को ध्यान में रखते हुए तथा दीपावली, छठ पूजा के दौरान ट्रेनों में अतिरिक्त भीड़ को समायोजित करने के लिए रेल मंडल के विभिन्न स्टेशनों पर ठहराव के साथ उधना-कानपुर सेंट्रल तथा अहमदाबाद-ग्वालियर के बीच त्योहार स्पेशल ट्रेनों का संचालन किया जाएगा। 09069 उधना-कानपुर स्पेशल 21 अक्टूबर से 11 नवंबर तक प्रत्येक सोमवार को उधना से सुबह 5.30 बजे चलकर रतलाम (1.05/1.15), नागदा (2.10/2.12),उज्जैन (3.15/3.25) व मक्सी (4.40/4.42) होते हुए अगले दिन सुबह 6.30 बजे कानपुर सेंट्रल पहुंचेगी। इसी तरह 09070 कानपुर सेंट्रल-उधना स्पेशल 22 अक्टूबर से 12 नवंबर तक प्रत्येक मंगलवार को कानपुर सेंट्रल से 9.30 बजे चलकर मक्सी (12.35/12.37), उज्जैन (1.15/1.25), नागदा (2.00/2.02) व रतलाम (3.00/3.10) होते हुए अगले दिन सुबह 10 बजे उधना पहुंचेगी। इन रूट से होकर गुजरेगी ट्रेन यह ट्रेन दोनों दिशाओं में सूरत, भरूच, वड़ोदरा, रतलाम, नागदा, उज्जैन, मक्सी, शाजापुर, ब्यावरा राजगढ़, रुठियाई, गुना, शिवपुरी, ग्वालियर, सोनी, भिंड और ईटावा स्टेशनों पर रुकेगी। 09411 अहमदाबाद-ग्वालियर सुपरफास्ट स्पेशल 19 अक्टूबर से दो नवंबर तक प्रत्येक शनिवार को अहमदाबाद से रात 8.25 बजे चलकर रतलाम (1.20/1.30), नागदा (2.05/2.07), उज्जैन (3.00/3.10) व मक्सी (4.20/4.22) होते हुए रविवार को दोपहर एक बजे ग्वालियर पहुंचेगी। इसी तरह 09412 ग्वालियर-अहमदाबाद सुपरफास्ट स्पेशल 20 अक्टूबर से तीन नवंबर तक प्रत्येक रविवार को ग्वालियर से 4.30 बजे चलकर मक्सी (11.50/11.52), उज्जैन (12.40/12.45), नागदा (1.56/1.58) व रतलाम (2.30/2.40) होते हुए सोमवार को सुबह 9.05 बजे अहमदाबाद पहुंचेगी। यह ट्रेन दोनों दिशाओं में आणंद, छायापुरी, गोधरा, रतलाम, नागदा, उज्जैन, मक्सी, गुना एवं शिवपुरी स्टेशनों पर रुकेगी। इस ट्रेन में सेकंड एसी, थर्ड एसी स्लीपर क्लास और द्वितीय श्रेणी के सामान्य कोच रहेंगे। 09069 व 09411 की बुकिंग 16 अक्टूबर से सभी पीआरएस काउंटरों और आईआरसीटीसी वेबसाइट पर शुरू हो गई है। ट्रेनों के ठहराव के समय और संरचना के संबंध में विस्तृत जानकारी के लिए यात्री कृपया www.enquiry.indianrail.gov.in पर जाकर अवलोकन कर सकते हैं। यहां बता दें कि आगामी त्योहारों के मद्देनजर रतलाम रेल मंडल द्वारा ट्रेनों के फेरों में प्रतिदिन बदलाव किए जा रहे हैं। उधर इस दौरान पूर्वोत्तर में मेगा ब्लॉक की वजह से कुछ ट्रेनें कैंसल की गई हैं, वहीं कई ट्रेनों के रूट को भी बदला गया है।

प्रदेश में उर्वरकों की कोई कमी नहीं, सरकार ने खरीफ में किसानों को आवश्‍यक मात्रा में उर्वरक उपलब्‍ध कराया : कृषि मंत्री कंषाना

भोपाल किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री एदल सिंह कंषाना ने कहा है कि प्रदेश में उर्वरकों की कोई कमी नहीं है। राज्य सरकार ने खरीफ में किसानों को आवश्‍यक मात्रा में उर्वरक उपलब्‍ध कराया है और रबी में भी इसी प्रकार से किसानों की आवश्‍यकतानुसार उर्वरक उपलब्‍ध करायेगें। मंत्री कंषाना श्यामला हिल्स स्थित निवास पर मीडिया से चर्चा में यह बातें कही। मंत्री कंषाना ने कहा कि फसलों के लिये नाईट्रोजन, फास्‍फोरस और पोटास की आवश्यकता होती है। डीएपी से नाइट्रोजन एवं फास्फोरस की ही पूर्ति हो पाती है, जबकि एनपीके के उपयोग से नाइट्रोजन, फास्‍फोरस एवं पोटाश तीनों तत्‍वों की पूर्ति हो जाती है। इसलिये किसानों को कृषि वैज्ञानिकों द्वारा डीएपी के स्थान पर एनपीके के उपयोग की सलाह दी जा रही है। केन्‍द्र सरकार ने डीएपी उर्वरक पर सब्सिडी बढ़ा दी है जिससे कि किसानों को किसी तरह की समस्‍या न हो। एक बैग यूरिया की कीमत 2 हजार 265 रूपये है। जबकि सरकार इसे सस्ते दर पर किसानों को 266.50 रूपये में उपलब्‍ध करा रही है। इसी प्रकार डी.ए.पी की एक बैग की कीमत 2 हजार 446 रूपये है, जबकि सरकार इसे किसानों को 1 हजार 350 रूपये प्रति बैग उपलब्‍ध कराती है। मंत्री कंषाना ने कहा कि प्रदेश में किसानों को खरीफ के मौसम में दी जाने वाली सब्सिडी की गणना करें तो यह यूरिया के लिए 7 हजार 32 करोड़ रूपये एवं डीएपी के लिये 1 हजार 258 करोड़ रूपये होगी। यह सरकार की किसानों के प्रति संवेदनशीलता को दर्शाता है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष अंतर्राष्‍ट्रीय बाजारों में डीएपी की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव का कारण यूक्रेन और इजराइल संघर्ष है। इनके संघर्ष के कारण आपूर्ति में बाधाओं का सामना करना पड़ा है। फिर भी किसानों को पर्याप्‍त उर्वरक उपलब्‍ध कराने की योजना तैयार की गई है। मंत्री कंषाना ने कहा कि खरीफ 2024 में किसानों को 32.97 लाख मीट्रिक टन की मांग के विरूद्ध 33.69 लाख मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्‍ध कराया गया है, जबकि पिछले वर्ष खरीफ 2023 में 32.62 लाख मीट्रिक टन उपलब्‍ध कराया गया था। इसी प्रकार रबी 2024 में 41.10 लाख मीट्रिक.टन की मांग के विरूद्ध 01 अक्‍टूबर 2024 से अभी तक 19 लाख मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध कराया गया है। जिसमें 7.74 लाख मीट्रिक टन यूरिया, 5.21 लाख मीट्रिक टन डीएपी और 6.05 लाख मीट्रिक टन एसएसपी उपलब्‍ध करा दिया गया है। मंत्री कंषाना ने कहा कि प्रदेश में रबी 2024 के लिए भी पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध हैं। मध्यप्रदेश एकमात्र ऐसा राज्य है जो उर्वरकों का अग्रिम भंडारण करता है ताकि किसानों को उर्वरक की कोई कमी न हो। रबी सीजन की शुरुआत में राज्य ने पहले ही 6.55 लाख मीट्रिक टन अग्रिम भंडारण कर लिया था। उन्होंने कहा कि भारत सरकार से पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्‍ध कराने का आश्वासन मिला है और लगातर उर्वरक प्राप्‍त भी हो र‍हे है। किसानों को उनकी मांग के अनुसार उर्वरक उपलब्‍ध कराया जायेगा। मंत्री कंषाना ने कहा कि “नैनो यूरिया” और “नैनो डीएपी” भी किसानों को उपयोग करने की सलाह दी गई है। फूल आने से पहले स्‍प्रे करने से उपज में वृद्धि होती है। किसानों को उर्वरको की बिक्री पर अन्‍य उर्वरक टैग करने के लिये कोई दबाव नही डाला जा र‍हा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि दिए गए उर्वरक गुणवत्तापूर्ण हों। जहाँ भी घटिया गुणवत्ता के उर्वरक, बीज एवं कीटनाशक ब्रिकी की सूचना मिलेगी, उनके विरूद्ध हम सख्त कार्रवाई करेंगे। कालाबाजारी और नकली उर्वरकों के मामले में हम कानूनी कार्रवाई भी करेंगे और दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करेंगे।  

मध्‍य प्रदेश में फल, सब्जी और खाद्य पदार्थ बेचने वालों का अब मुफ्त होगा पंजीयन, अर्थदंड से होगा बचाव

भोपाल  मध्य प्रदेश में फेरी लगाने वालों के लिए एक जरूरी खबर है। प्रदेश में फल, सब्जी और खाद्य पदार्थ बेचने वालों का अब मुफ्त पंजीयन होगा। एक बार में पांच वर्ष तक के लिए पंजीयन करा सकेंगे। इससे अर्थदंड से बचाव होगा। सरकार ने सब्जी-फल या खाने की अन्य सामग्री घूमकर बेचने वालों को राहत दी है। अब वह खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) में पांच वर्ष के लिए अपना पंजीयन निशुल्क करा सकेंगे। आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होने के कारण वेंडर पंजीयन कराने से बचते थे, इसलिए सरकार ने यह सुविधा दी है। एफएसएसएआई ने 30 सितंबर को इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं। अब इन लोगों से पांच वर्ष का पंजीयन शुल्क 500 रुपए नहीं लिया जाएगा। फल, सब्जी और खाद्य पदार्थ बेचने वाले एमपी ऑनलाइन के माध्यम से अपना पंजीयन करा सकेंगे। पंजीयन में फोटो, आधार कार्ड भी लगेगा। यह भी बताना होगा किस चीजों का व्यापार करते हैं। आपको बता दें कि एमपी में फल, सब्जी और खाद्य पदार्थ ठेले पर बेचने वालों की संख्या करीब 18 लाख है। पंजीयन नहीं कराने पर एडीएम पांच हजार रुपए से लेकर 20 हजार रुपए तक अर्थदंड लगा सकता है। शर्त के अनुसार स्वच्छता और अन्य निर्धारित मापदंड का पालन करना होगा। आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होने के कारण वेंडर पंजीयन कराने से बचते थे, इसलिए भारत सरकार ने यह सुविधा दी है। एफएसएसएआई ने 30 सितंबर को इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं। एमपी ऑनलाइन के माध्यम से या खुद वे अपना पंजीयन करा सकेंगे। पंजीयन में फोटो, आधार कार्ड भी लगेगा। यह भी बताना होगा किस चीजों का व्यापार करते हैं। खाद्य एवं औषधि प्रशासन के नियंत्रक मयंक अग्रवाल का कहना है कि एफएसएसएआई ने बहुत अच्छा प्रयास किया है। फेरी वाले जिन हाकर्स ने अभी तक पंजीयन नहीं कराया है वह निशुल्क पंजीयन करा सकेंगे। मप्र स्ट्रीट वेंडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष रत्नेश उपाध्याय ने बताया कि मध्य प्रदेश में खाद्य पदार्थ बेचने वाले लगभग 38 लाख हाकर्स हैं, जिनमें 16 से 18 लाख फेरी वाले होंगे। फेरी वालों को यह होगा लाभ     अभी बिना लाइसेंस पकड़े जाने पर पांच हजार से 20 हजार रुपये तक अर्थदंड लगता है, जिससे बच जाएंगे।     पंजीयन की शर्तों के अंतर्गत उन्हें यह पता रहेगा कि क्या करना और क्या नहीं करना।     खाद्य एवं औषधि प्रशासन के पास उनका ब्योरा होने से उन्हें समय-समय पर विभाग या एनजीओ के माध्यम से प्रशिक्षित किया जा सकेगा। सरकार को यह लाभ होगा पंजीयन होने से फेरी लगाकर खाद्य पदार्थ बेचने वालों का ब्योरा सरकार के पास रहेगा। पंजीयन कराने के साथ ही फेरीवालों को शपथ पत्र देना होता है कि वह शर्तों का पालन करेंगे। इस तरह वह नियम से बंध जाएंगे। पंजीयन में पता और मोबाइल नंबर भी रहेगा। फेरी वालों के विरुद्ध कोई शिकायत आती है तो नोटिस भेजना आसान हो जाएगा। खाद्य पदार्थ बनाने और बेचने में स्वच्छता का मापदंड पूरा कराना भी आसान होगा। आवश्यकता होने पर मोबाइल पर उन्हें एक साथ मैसेज भेजा जा सकेगा।  

छह माह में 8500 से अधिक सुरक्षित प्रसव, छत्तीसगढ़-बलौदा बाजार में सरकारी अस्पतालों पर बढ़ा गर्भवतियों का भरोसा

बलौदा बाजार। बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में गर्भवती महिलाओं का सरकारी व्यवस्था पर भरोसा बढ़ा है. यही वजह है कि वर्तमान छह महीनों की बात करें तो 8500 संस्थागत प्रसव हुए हैं, जिसमें ज्यादातर नार्मल तरीके से व 470 सिजेरियन ऑपरेशन हुए हैं. जिले की बात करें तो एक जिला हॉस्पिटल, एक सिविल हॉस्पिटल, पांच सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र व पच्चीस प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र हैं, जहां महिलाओं का सुरक्षित प्रसव कराया जाता है. वहीं रेयर केसों में जिला हास्पिटल में ऑपरेशन की भी सुविधा है, जहां महिला चिकित्सक और उनकी पूरी टीम तैनात रहती है. पिछले दिनों जिले के ग्राम करही बाजार प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में एक ऐसा मामला आया, जिसमें प्रसव पीड़ा से कराह रही महिला का हिम्मत बंधाते हुए नर्सों ने सुरक्षित प्रसव करवाया. शिशु का वजन चार किलोग्राम का था. इस तरह बगैर ऑपरेशन एक स्वस्थ शिशु ने यहाँ जन्म लिया. जिले में चल रही मातृत्व सुख योजना के संबंध में हमने प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र व सिविल चिकित्सालय का जायजा लेने के साथ महिलाओं व परिजनों से बातचीत भी की, जिसमें उन्होंने शासन की योजनाओं का पूर्ण लाभ मिलने तथा चिकित्सालय में डॉक्टर व नर्सो के व्यवहार को बहुत अच्छा बताया. जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेश अवस्थी ने बताया कि गांव-गांव में मितानिनों के माध्यम से गर्भवती महिलाओं को संस्थागत प्रसव के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है. इसके साथ एम्बुलेंस की सुविधा भी दी जा रही है, जिसका परिणाम है कि हम अप्रैल से अभी तक 8500 संस्थागत सुरक्षित प्रसव कराने में सफल हुए हैं. बलौदाबाजार सिविल हास्पिटल की बात करें तो छह महीनों में यहाँ 1100 प्रसव हुए हैं. इसके साथ स्वास्थ्य केन्द्र और प्राइवेट अस्पतालों में भी स्वस्थ शिशुओं का जन्म हुआ है. सुरक्षित संस्थागत प्रसव के बाद महिलाओं को 1400 रुपये भी उनके खाते में दिया जा रहा है. इसके अलावा महीने के 9 व 24 तारीख को विशेष जांच भी किया जाता है.

सिद्दीकी से भी बुरा हाल होगा’, सलमान खान को मिली धमकी, लॉरेंस बिश्नोई गैंग

मुंबई बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान से गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई की दुश्मनी बहुत पुरानी है और हाल ही में हुई घटनाओं के बाद ये मामला और भी गंभीर होता नजर आ रहा है. एनसीपी नेता बाबा सिद्दीकी की हत्या के बाद सलमान की सिक्योरिटी में इजाफा किया गया है. बाबा सिद्दिकी सलमान के दोस्त भी थे और कई बॉलीवुड सेलेब्स के साथ उनकी गहरी दोस्ती थी. इस बीच अब मुंबई ट्रैफिक पुलिस को सलमान खान के नाम का धमकी भरा मैसेज मिला है. मैसेज करने वाले ने खुद को लॉरेंस बिश्नोई गैंग का करीबी बताया है. मुंबई के ट्रैफिक पुलिस के व्हाट्सएप नंबर पर ये धमकी भरा मैसेज मिला है. इसमें एक्टर सलमान खान से लॉरेंस बिश्नोई के साथ लंबे समय से चली आ रही दुश्मनी को खत्म करने के लिए 5 करोड़ रुपये की मांग की गई है. मैसेज में ये भी लिखा है कि ‘इसको हल्के में ना लें, वरना सलमान खान का हाल बाबा सिद्दीकी से भी बुरा होगा.’ इस मामले की जांच मुंबई पुलिस से शुरू कर दी है. रची जा रही सलमान की हत्या की साजिश? इससे पहले मुंबई पुलिस ने सलमान की हत्या की साजिश रचने के मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया था. बुधवार को एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि एक आरोपी को हरियाणा के पानीपत से अरेस्ट किया गया है. शख्स का नाम सुक्खा है. वो बिश्नोई गैंग का शार्प शूटर है और उसे नवी मुंबई लाया गया है. गुरुवार को उसे कोर्ट में पेश किया जाना है. जानकारी के अनुसार, मुंबई पुलिस और हरियाणा पुलिस ने जॉइंट ऑपरेशन में लॉरेंस बिश्नोई के इस शार्प शूटर को पानीपत से गिरफ्तार किया था. सुक्खा ने साल 2022 में लॉरेंस और गोल्डी बरार के इशारे पर मुंबई में सलमान खान के पनवेल वाले फॉर्म हाउस की रेकी की थी. रेकी के बाद सलमान पर अटैक सुक्खा को ही करना था, लेकिन उसका प्लान फेल हो गया था. बिश्नोई के शूटरों ने साल 2022 में सलमान को मारने के लिए फॉर्म हाउस की कई बार रेकी की थी, लेकिन हमले का प्लान फेल हो गया था. शूटरों ने फार्म हाउस के गार्ड तक से दोस्ती कर ली थी. डरा हुआ है सलमान का परिवार वहीं इंडिया टुडे/आजतक को सलमान खान से जुड़े एक सूत्र ने बताया था कि एक्टर का परिवार और उनके दोस्त भले ही बहादुरी दिखा रहे हों लेकिन वो अंदर से काफी परेशान और डरे हुए हैं. वो ये भी उम्मीद कर रहे हैं कि सरकार और पुलिस इस मामले से जुड़े असली अपराधी को पकड़ लेगी. सलमान खान से जुड़े लोगों का मानना है कि पब्लिक को जितना बताया जा रहा है असल में मामला उससे ज्यादा बड़ा हो सकता है. बाबा सिद्दीकी की हत्या और सलमान खान को मिली धमकी पर सूत्र ने कहा था, ‘जाहिर है कि लॉरेंस ने इस सबकी जिम्मेदारी ली है. लेकिन कइयों को लग रहा है कि किसी बड़ी साजिश को छुपाने के लिए ये सब नाटक किया जा रहा है. क्या किसी के लिए जेल से ये सब करना इतना आसान है? साथ ही कोई सलमान को डराने के लिए बाबा सिद्दीकी पर हमला क्यों करेंगे, इसपर बहुत सारी सवाल उठते हैं.’ सलमान ने दिया था ये बयान इस साल की शुरुआत में सलमान ने पुलिस को दिए बयान में कहा था कि उन्हें अपने घर के बाहर हमला करने के लिए लॉरेंस बिश्नोई गैंग पर शक है और ये काम उन्हें और उनके परिवार में लोगों की हत्या के इरादे से किया गया. सलमान का बयान उस चार्जशीट का हिस्सा है जो पुलिस ने इस मामले में फाइल की है. सलमान ने बताया था कि जनवरी 2024 में दो अज्ञात लोगों ने, नकली आइडेंटिटी के जरिए पनवेल के पास उनके फार्महाउस में घुसने की कोशिश की थी.  

इजरायली बड़ा धमाका हमास प्रमुख सिनवार की मौत पर बोले बाइडेन- यह दुनिया के लिए अच्छा

बेरुत इजराइल डिफेंस फोर्सेज ने अपने सैन्य अभियान के तहत गाजा में गुरुवार को अपने सबसे बड़े दुश्मन हमास प्रमुख याह्या सिनवार को मार गिराया। सिनवार ने पिछले साल इजराइल पर हमास के आतंकी हमले की अगुवाई की थी और वह इजराइल के हिट लिस्ट में था। सिनवार की मौत के बाद इजरायल ने अपना बदला पूरा कर लेने की बात कही लेकिन बंधकों की रिहाई तक उसकी लड़ाई जारी रहेगी। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने याह्या सिनवार की मौत पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह पूरी दुनिया के लिए एक अच्छा दिन है। उन्होंने कहा कि डीएनए परीक्षण से पुष्टि हुई है कि सिनवार मारा गया है। यह इजरायल और अमेरिका के साथ पूरी दुनिया के लिए एक अच्छा दिन है। यह इजरायली बंधकों की रिहाई के लिए एक अच्छा अवसर है। इससे एक साल से जारी गाजा युद्ध समाप्त हो जाएगा। अमेरिकी उपराष्ट्रपति और डेमोक्रेटिक उम्मीदवार कमला हैरिस ने भी कहा है कि हजारों निर्दोष लोगों की हत्या के लिए जिम्मेदार हमास नेता याह्या की मौत की वजह से अमेरिका, इजरायल और पूरी दुनिया बेहतर स्थिति में है। यह गजा में हो रहे युद्ध को खत्म करने का एक मौका है। इजराइल ने गुरुवार रात हमास प्रमुख याह्या सिनवार को मार गिराने का दावा किया था। इजरायल और अमेरिका की तरफ से दावा किया जाता रहा है कि पिछले साल 7 अक्टूबर को दक्षिणी इजरायल में हुए आतंकी हमले का नेतृत्व याह्या सिनवार ने ही किया था जिसमें 12 सौ लोग मारे गए थे और लगभग ढाई सौ लोगों को बंधक बनाया गया था। उल्लेखनीय है कि जुलाई में हमास नेता इस्माइल हनिया के तेहरान में इजरायली कार्रवाई में मारे जाने के बाद सिनवार को हमास प्रमुख बनाया गया था। सिनवार का जन्म 1962 में खान यूनिस के गाजा शहर के एक शरणार्थी शिविर में हुआ था। हमास का गठन 1987 में हुआ था और याह्या सिनवार उसके संस्थापक सदस्यों में से एक था। अपनी क्रूरता के लिए कुख्यात सिनवार ने संदेह होने पर अपने 12 सहयोगियों की हत्या कर दी थी, जिसके बाद उसे खान यूनिस का कसाई कहा जाने लगा। क्या सिनवार या हमास का कोई विकल्प भी खड़ा हो चुका है, जो खाली जगह भरेगा? इन सवालों के जवाब के लिए एक बार सिनवार की हिस्ट्री जानते चलें. अस्सी के दशक में हमास को खड़ा करने में जो शुरुआती लोग थे, उनमें से एक सिनवार भी था. उसे इजरायली सेना ने कई बार पकड़ा भी. साल 2011 में कैदियों की अदलाबदली के दौरान छूटकर वो वापस हमास की कमान संभालने लगा.  इसके बाद से वो गाजा में हमास को लगातार ताकतवर बनाता गया. बाहरी दुनिया से संवाद और फंडिंग जुटाने का काम भी इसके हिस्से था. इस नेता के बारे में कुख्यात था कि ये हर उस शख्स का गला काट देता था, जो इसे इजरायल के पक्ष में लगे, फिर चाहे वो फिलिस्तीनी जनता क्यों न हो. पिछले साल 7 अक्टूबर को इजरायल पर बड़ा नागरिक हमला हुआ. खुफिया एजेंसियों ने माना कि अटैक का मास्टरमाइंड सिनवार ही है. हमले के साथ-साथ हमास ने ढाई सौ से ज्यादा लोगों को बंधक भी बना लिया. इसके बाद से आईडीएफ सिनवार को पकड़ने या मारने की फिराक में थी. यहां तक कि उसकी सूचना देने वालों को 4 लाख डॉलर इनाम तक का वादा कर दिया. आखिरकर गुरुवार को सिनवार मारा गया, डीएनए टेस्ट के बाद जिसकी पुष्टि भी इजरायल ने कर दी. गाजा में क्यों है चुप्पी इतनी बड़ी घटना के बाद भी हमास की पैरवी करने वाले किसी मुस्लिम देश की बड़ी प्रतिक्रिया नहीं आई, जो पहले हर इजरायली वार पर हो-हल्ला किया करते थे. यहां तक कि गाजा में भी सन्नाटा है. कोई कुछ भी कहने से बच रहा है. इसके पीछे इजरायल का डर नहीं, बल्कि एक बड़ा कारण ये भी है कि गाजा पट्टी में सिनवार की लोकप्रियता लगातार गिर रही थी. आधी से ज्यादा आबादी सिनवार से परेशान पेलेस्टाइन सेंटर फॉर पॉलिसी एंड सर्वे रिसर्च ने पिछले महीने एक सर्वे के नतीजे जारी किए. इसकी मानें तो गाजा की 65 फीसदी जनता सिनवार की लीडरशिप से नाखुश थी. वे मान रहे थे कि इसी लीडरशिप के चलते गाजा पट्टी तबाह हुई. वहां चालीस हजार से ज्यादा लोग मारे गए. वहीं कथित लीडर सालभर से हमास के सघन टनल नेटवर्क में छिपा हुआ था. सिनवार का चैप्टर क्लोज हो चुका, लेकिन क्या हमास नाम की किताब भी साथ ही बंद हो जाएगी? गुरुवार को सिनवार की मौत कन्फर्म करते हुए इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने इसे ‘गाजा के लिए हमास के बाद शुरुआत’ कहा. साथ ही साथ ये भी साफ कर दिया कि उनकी सेना बंधकों को छुड़ाने तक वहीं जमी रहेगी. इसके बाद क्या- ये सवाल बार-बार उठ रहा है. हमास के बाद कौन से विकल्प बाकी फिलिस्तीनी चरमपंथी गुट हमास का गाजा में केवल हेडक्वार्टर नहीं था, बल्कि यही संगठन इस पट्टी पर शासन चला रहा था. हालांकि ये कोई चुनी हुई सरकार नहीं थी. वो साल 2007 से इस क्षेत्र पर एकतरफा शासन कर रहा था. बता दें कि साल 2006 में फिलिस्तीन (गाजा पट्टी और वेस्ट बैंक) में इलेक्शन हुए थे. इसमें हमास विपक्षियों पर भारी रहा. इसके बाद उसने फिलिस्तीनी अथॉरिटी से सत्ता छीन ली और अपना अलग राजकाज चलाने लगा. अब लगभग सारे लीडरों को खो चुका हमास अनाथ हो चुका है. ऐसे में गाजा में उसके रूल की फिलहाल तो कोई संभावना नहीं. खाली फ्रेम में कई तस्वीरें आ सकती हैं इनमें एक दावेदार है, फिलिस्तीनी अथॉरिटी. फिलहाल वेस्ट बैंक में काम कर रही अथॉरिटी को लेकर अगर अंतरराष्ट्रीय समुदाय एकमत हो जाए तो राष्ट्रपति महमूद अब्बास की सरकार गाजा को भी कंट्रोल कर सकती है. एक संभावना ये भी है कि तुरंत कोई रास्ता न निकलता देख इजरायली सेना कुछ समय के लिए वहीं रुक जाए, और अप्रत्यक्ष सैन्य कंट्रोल रखे. ये इसलिए भी हो सकता है क्योंकि इजरायल बार-बार हमास के कमर तोड़ देने की बात कह रहा है. अगर फिलहाल वो गाजा पट्टी से एकदम से हट जाए तो हो सकता है कि बचे-खुचे विद्रोही वापस अपना काम शुरू कर दें. किसी भी युद्धग्रस्त या ताजा-ताजा युद्ध से निकले … Read more

खनिज कॉन्क्लेव मध्यप्रदेश के साथ ही विकसित एवं आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में मील का पत्थर साबित होगा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल खनन कॉन्क्लेव के दूरगामी परिणाम होंगे ऐतिहासिक: मुख्यमंत्री डॉ. यादव आज कॉन्क्लेव में मुख्यमंत्री होंगे शामिल, खनन कॉन्क्लेव के परिणाम ऐतिहासिक होंगे खनिज कॉन्क्लेव मध्यप्रदेश के साथ ही विकसित एवं आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में मील का पत्थर साबित होगा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि खनन कॉन्क्लेव के परिणाम ऐतिहासिक होंगे। कॉन्क्लेव में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर होने वाली चर्चा के परिणाम भावी रणनीति के निर्माण की नींव रखेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में हो रही दो दिवसीय खनन कॉन्क्लेव के समापन सत्र में शामिल होंगे। राजधानी भोपाल में आयोजित दो दिवसीय खनिज कॉन्क्लेव में होने वाले मंथन से निकलने वाला अमृत मध्यप्रदेश के साथ ही विकसित एवं आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में मील का पत्थर साबित होगा। कॉन्क्लेव के विषयों में खनिज अन्वेषण, खनिज प्रसंस्करण, नवीन तकनीकों के उपयोग और पर्यावरण सुरक्षा शामिल है। इसमें आर्टिफिशियल इन्टेलीजेंसी और मशीन लर्निंग आधारित डिजिटलाइजेशन जैसे विषय भी चर्चा में शामिल है। खनिज क्षेत्र में जरूरी नीतिगत सुधारों को लागू करने के लिये भी कॉन्क्लेव जैसी संगोष्ठियों का होना आवश्यक है। मध्यप्रदेश प्रचुर खनिज संसाधनों से समृद्ध है। मध्यप्रदेश को देश का एक मात्र हीरा उत्पादन क्षेत्र होने का गौरव प्राप्त है। प्रदेश का मलाजखंड क्षेत्र देश का तांबा खनन का सबसे बड़ा क्षेत्र है। मध्यप्रदेश मध्य में होने से निवेशकों के लिये आवागमन की सुविधाएँ सुगम और सहज उपलब्ध होती है। इस प्रकार की कॉन्क्लेव से मध्यप्रदेश का खनन क्षेत्र तो बुस्ट-अप होगा ही, देश की समृद्धि में भी प्रदेश महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगा।  

रेलवे ने बदला ट‍िकट बुक‍िंग का न‍ियम सीटों की मारामारी से मिलेगी राहत ! 1 नवंबर से होगा लागू

नई दिल्ली फेस्‍ट‍िव सीजन में ट्रेन ट‍िकट की मारामारी के बीच रेलवे की तरफ से ट‍िकट बुक‍िंग के न‍ियम में बदलाव क‍िया गया है. सूत्रों से म‍िली जानकारी के अनुसार अब यात्री ट्रेन के प्रस्‍थान की तारीख से केवल 60 द‍िन पहले ही IRCTC से टिकट बुक करा सकेंगे. मौजूदा समय में एडवांस ट‍िकट बुक‍िंग की अवध‍ि 120 द‍िन की है. नए न‍ियम के तहत इसे बदलकर 60 द‍िन यानी पहले से एकदम आधा कर द‍िया गया है. यात्र‍ियों की तरफ से लंबे समय से एडवांस ट‍िकट बुक‍िंग के न‍ियम को बदलने की मांग की जा रही थी. ज‍िस पर अब रेलवे की तरफ से फैसला क‍िया गया है. पहले से बुक क‍िये गए टिकट पर क‍िसी प्रकार का असर नहीं सूत्रों का दावा है क‍ि ट‍िकट बुक‍िंग से जुड़ा नया न‍ियम 1 नवंबर 2024 से लागू क‍िया जाएगा. पहले से बुक किए गए टिकट पर क‍िसी तरह का असर नहीं होगा. आपको बता दें 1 नवंबर को द‍िवाली और 6 नवंबर को छठ पूजा के चलते रेलवे के सभी रूट पर ट‍िकट बुक‍िंग को लेकर मारामारी मची हुई है. रेलवे यात्र‍ियों की तरफ से ट‍िकट बुक‍िंग के न‍ियमों में बदलाव को लेकर लंबे समय से मांग हो रही थी. यात्र‍ियों की तरफ से आरोप लगाए जाते थे क‍ि बुक‍िंग शुरू होने के साथ ही एजेंट पहले ही सीट बुक कर देते हैं. इससे असल यात्र‍ियों को ट‍िकट म‍िलने में परेशानी होती है. अब तक की व्यवस्था के मुताबिक यात्री चार महीने पहले ही अपनी सीट रिजर्व करवा सकते हैं। तत्काल टिकट की बुकिंग यात्रा की तिथि से एक दिन पहले की जा सकती है। रोज सुबह 10 बजे के बाद 3 एसी लेकर ऊपर की श्रेणी के लिए बुकिंग शुरू हो जाती है जबकि स्लीपर तत्काल बुकिंग सुबह 11 बजे से चालू हो जाती है। हालांकि, अगर टिकट 1 नवंबर से पहले ही बुक हो चुके हैं, तो एडवांस ट्रेन टिकट बुकिंग के नए नियमों का उन बुकिंग पर कोई असर नहीं पड़ेगा। इस घटनाक्रम के बाद आईआरसीटीसी के शेयर दोपहर 14:20 बजे 2.2% की गिरावट के साथ 867.60 रुपये पर कारोबार कर रहे थे। IRCTC से हर दिन 12.38 लाख टिकट बुक होते हैं। खाने की क्‍वाल‍िटी की निगरानी के लिए एआई लैस कैमरे लगाए इस बीच भारतीय रेलवे अपने सिस्टम और प्रोसेस में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को शामिल करने की तरफ तेजी से आगे बढ़ रहा है. रेलवे ने पहले ही लिनन और खाने की क्‍वाल‍िटी की निगरानी के लिए एआई लैस कैमरे लगाए हैं. रेलवे मंत्री अश्‍व‍िनी वैष्णव ने कहा क‍ि हमने ट्रेनों की ऑक्‍यूपेंस की जांच के ल‍िए एआई मॉडल की पुष्‍ट‍ि की. इससे यह पता लगाया गया क‍ि ट्रेन में कितनी सीटें खाली हैं.

सुशासन और हिंदुत्व से रामराज्य की ओर, मोहन भागवत से मिले प्रवीण तोगड़िया ….

नागपुर प्रवीण तोगड़िया और मोहन भागवत की मुलाकात ही अपनेआप में महत्वपूर्ण है – लंबे अर्से बाद ये मीटिंग ऐसे माहौल में जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और बीजेपी नेतृत्व के बीच सबकुछ ठीक न होने की जोरदार चर्चा हो. करीब तीन दशक तक विश्व हिंदू परिषद से जुड़े रहने के बाद 2018 में प्रवीण तोगड़िया ने इस्तीफा देकर संघ से भी नाता तोड़ लिया था. नई बीजेपी के दौर में अपनी पूछ घटने से प्रवीण तोगड़िया बेहद नाराज थे, और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी नेता अमित शाह के विरोधी माने जाने लगे थे. जब कोई रास्ता नहीं सूझा तो संघ से भी नाता तोड़ कर प्रवीण तोगड़िया ने अलग राह पकड़ ली – और अंतर्राष्ट्रीय हिंदू परिषद के नाम से नया संगठन बना लिया. बीच बीच में प्रवीण तोगड़िया को लेकर कई तरह की चर्चाएं और विवाद भी हुए, लेकिन उनको सबसे ज्यादा तकलीफ तब हुई जब जनवरी, 2024 में राम मंदिर उद्घाटन के लिए उनको नहीं बुलाया गया. ध्यान रहे विश्व हिंदू परिषद ने ही अयोध्या में राम मंदिर बनाने का आंदोलन शुरू किया था. कैसे हुई तोगड़िया और भागवत की मुलाकात अंग्रेजी अखबार द हिंदू में प्रवीण तोगड़िया और संघ प्रमुख मोहन भागवत की मुलाकात को लेकर एक रिपोर्ट प्रकाशित हुई है. सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि ये मुलाकात अचानक हुई है. दशहरे के दिन दोनो नेताओं ने नागपुर के समारोह में एक दूसरे का अभिवादन किया, और अगले दिन मिलने का फैसला किया गया. विजयादशमी के दिन संघ प्रमुख ने हिंदू समाज से एकजुट होने का आह्वान किया था – और उसके 24 घंटे बाद ही प्रवीण तोगड़िया और मोहन भागवत की मुलाकात भी हो गई. पहल चाहे जिस तरफ से हुई हो, ये मुलाकात ऐसे वक्त हुई है जब संघ की तरफ से बीजेपी पर लगाम कसने की भी चर्चा चल रही है. मुलाकात के बाद प्रवीण तोगड़िया का कहना है, राम मंदिर निर्माण दशकों से बीजेपी के चुनावी वादे का हिस्सा रहा है, लेकिन पार्टी इसका चुनावी फायदा नहीं उठा सकी, और 2014 में केंद्र की सत्ता में आने के बाद से सबसे कम सीटों पर सिमट गई है. प्रवीण तोगड़िया असल में लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में बीजेपी की हार की तरफ इशारा कर रहे हैं. यूपी की हार और हरियाणा में जीत को भी संघ के असहयोग और सहयोग से जोड़ कर देखा जा रहा है. वैसे तात्कालिक चुनौती महाराष्ट्र और झारखंड विधानसभा के चुनाव भी हैं. हिंदू समाज सेवा, या मोदी-शाह विरोध रिपोर्ट के मुताबिक, प्रवीण तोगड़िया ने मोहन भागवत से मुलाकात में इस मुद्दे को जोर देकर उठाया है कि हिंदू राजनीतिक रूप से किसी पर भरोसा नहीं कर रहा है. जाहिर है, प्रवीण तोगड़िया बीजेपी नेतृत्व की तरफ ही इशारा कर रहे हैं.  बातचीत में तोगड़िया कहते हैं, ‘राम मंदिर आंदोलन के माध्यम से पूरे देश में सभी हिंदू जातियों को एक करने का मकसद हासिल कर लिया है. लेकिन, आंदोलन की पूर्णाहूति के बाद से ऐसा महसूस होने लगा है जैसे सारा किया धरा बेकार होने वाला है, और इसे हर हाल में रोकना होगा… मैं स्वयं और संघ प्रमुख दोनो एक जैसा महसूस कर रहे हैं.’ ये पूछे जाने पर कि संघ और उनका संगठन AHP हिंदुओं को एकजुट करने के लिए क्या करेंगे, तोगड़िया बताते हैं, दोनो मिलकर हिंदुओं के लिए काम कर रहे सभी छोटे बड़े संगठनों से साथ आने की अपील करेंगे. सवालिया अंदाज में प्रवीण तोगड़िया कह रहे हैं, जो समाज स्वास्थ्य, शिक्षा और महिलाओं की सुरक्षा जैसे बुनियादी सुविधाओं से जूझ रहा हो, वो भला धर्म की लड़ाई कैसे लड़ेगा, इसलिए पहले जरूरी चीजों पर फोकस करना होगा. वो आगे बताते हैं, मेरे साथ देश में 10 हजार एक्सपर्ट डॉक्टर जुड़े हैं, जो हिंदुओं को स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराएंगे. शिक्षकों के भी कुछ संगठन हैं जो हिंदुओं के बच्चों को मुफ्त पढ़ाएंगे. समान विचार वाले कुछ संगठन जो लोगों को स्ट्रेंथ ट्रेनिंग देते हैं, वे हिंदू महिलाओं को आत्मरक्षा की मुफ्त ट्रेनिंग देंगे, जिससे वो हमलावरों से खुद को बचा सकें. मणिपुर और कश्मीर की चिंता स्वाभाविक या राजनीतिक एक बार बिहार में प्रवीण तोगड़िया ने हिंदुओं के खतरे में होने की बात कही थी. उनका कहना है कि संघ प्रमुख से बातचीत में भी चर्चा के बिंदु वे ही रहे, मैंने भागवत से कहा जब शिया और सुन्नी इस्लाम की रक्षा के लिए साथ आ सकते हैं, हम छोटे और बड़े संगठन जो एक जैसे काम कर रहे हैं, हिंदुत्व को बचाने के लिए साथ क्यों नहीं आ सकते. देश से बाहर भी, भले ही वो पाकिस्तान हो, बांग्लादेश हो, अमेरिका हो, या फिर ब्रिटेन या कनाडा हिंदुओं की सुरक्षा संघ के लिए चिंता का विषय रही है, और दोनो नेताओं में इस बात पर सहमति बनी है कि विदेशों में रह रहे हिंदुओं के अधिकारों की सुरक्षा के लिए कुछ करना जरूरी हो गया है. यहां तक कि, रिपोर्ट बताती है, भारत में भी हिंदुओं की सुरक्षा संतोषजनक नहीं है. उदाहरण के लिए मणिपुर में, कश्मीर में भी. जम्मू-कश्मीर में अभी अभी जनता की चुनी हुई सरकार बनी है, और केंद्र शासित प्रदेश के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने देश के संविधान की शपथ ली है. प्रवीण तोगड़िया का सवाल है, धारा 370 को हटाये जाने के 5 साल बाद भी कश्मीरी पंडितों को फिर से वहां नहीं बसाया जा सका है. संघ प्रमुूख से मुलाकात से पहले भी प्रवीण तोगड़िया कहते रहे हैं, आज भी सुरक्षा के तमाम दांवों के बीच भी कश्मीर में कश्मीरी पंडितों की घर वापसी नहीं हो रही है… मणिपुर में बड़ी संख्या में हिंदू अब भी शरणार्थी शिविरों में रहने को मजबूर हैं… देश की बेटी नूपुर शर्मा अब भी अपने घर से बाहर नहीं निकल रही है. मणिपुर का मुद्दा केंद्र की बीजेपी की कमजोर कड़ी के रूप में महसूस किया गया है. मणिपुर में फिलहाल बीजेपी की ही सरकार है. मणिपुर पर प्रधानमंत्री मोदी की चुप्पी को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी हमलावर रहे हैं, और राम मंदिर उद्घाटन से ठीक पहले राहुल गांधी ने मणिपुर से ही अपनी न्याय यात्रा की शुरुआत की थी. लोकसभा चुनाव में बीजेपी की फजीहत के बाद संघ प्रमुख मोहन भागवत ने … Read more

वाहन पंजीकरण, लाइसेंस और परमिट का दिल्ली में जल्द होगा डिजिटलीकरण

नई दिल्ली  दिल्ली में जल्द ही ड्राइविंग लाइसेंस (डीएल) और वाहनों के पंजीकरण प्रमाणपत्र (रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट) (आरसी) डिजिटल हो सकते हैं। राज्य सरकार वाहन मालिकों को सत्यापन प्रक्रिया (वेरिफिकेशन प्रोसेस) और अन्य उद्देश्यों के लिए इसे आसान बनाने के लिए डिजिटल डीएल और डिजिटल आरसी पेश करने की योजना बना रही है। इस कदम का मकसद राष्ट्रीय राजधानी में ड्राइविंग लाइसेंस और पंजीकरण प्रमाणपत्र जारी करने में होने वाली देरी को कम करना है, जहां दोनों दस्तावेज इस समय भौतिक कार्ड में जारी किए जाते हैं। डीएल और आरसी के इलेक्ट्रॉनिक वर्जन को आधार कार्ड की तरह इलेक्ट्रॉनिक रूप से स्टोर (संग्रहीत) किया जा सकता है और विभिन्न स्मार्टफोन एप के जरिए सुलभ होगा।   डिजिटल दस्तावेजों के फायदे बता दें कि डिजिटल डीएल और आरसी को आधार कार्ड की तरह इलेक्ट्रॉनिक रूप से स्टोर किया जा सकेगा और स्मार्टफोन एप्स के माध्यम से सुलभ बनाया जाएगा। इस प्रक्रिया से भौतिक कार्ड की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी, जिससे वाहन मालिकों को अतिरिक्त सुविधा मिलेगी। दिल्ली के परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत ने हाल ही में फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (FADA) और सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) के अधिकारियों के साथ बैठक में इस योजना पर चर्चा की। गहलोत ने कहा, “हम पंजीकरण प्रक्रिया को अधिक सहज और सुलभ बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। भौतिक आरसी से डिजिटल वर्जन में शिफ्ट होने से प्रशासनिक देरी कम होगी।” डीएल और आरसी पीडीएफ फॉर्मेट में डिजिटल डीएल और आरसी पीडीएफ फॉर्मेट में ऑनलाइन उपलब्ध होंगे। वाहन मालिक अपने स्मार्टफोन के माध्यम से इन्हें डाउनलोड और प्रिंट कर सकेंगे। इसके अतिरिक्त, ये दस्तावेज DigiLocker या mParivahan जैसे एप्स पर अपलोड किए जा सकेंगे। प्रत्येक डिजिटल दस्तावेज में एक विशिष्ट आईडी और क्यूआर कोड होगा, जो दिल्ली ट्रैफिक पुलिस द्वारा सत्यापन के दौरान उपयोग किया जाएगा। मौजूदा स्थिति वर्तमान में, वाहन मालिकों को भौतिक कार्ड में ड्राइविंग लाइसेंस और पंजीकरण प्रमाणपत्र प्राप्त होते हैं। मार्च 2021 में दिल्ली ने डीलरों द्वारा वाहनों का सेल्फ-रजिस्ट्रेशन शुरू किया, जिसके तहत अब तक 15 लाख से अधिक आरसी जारी किए जा चुके हैं।

उत्तराखंड में होटल और ढाबा कर्मचारियों के पुलिस वैरिफिकेशन को अनिवार्य किया, नहीं तो लगेगा 1 लाख का जुर्माना

देहरादून उत्तराखंड सरकार ने  खाने में थूकने से जुड़ी घटनाओं को रोकने के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं. उन्होंने ऐसा करने वालों पर 1 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाने की घोषणा की है. इसके साथ ही होटल और ढाबा कर्मचारियों के पुलिस वैरिफिकेशन को अनिवार्य किया गया है और उनकी रसोई में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने का आदेश है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा ऐसी घटनाओं पर चिंता जताए जाने के कुछ दिनों बाद राज्य पुलिस और स्वास्थ्य विभाग ने अलग-अलग दिशानिर्देश जारी किए और कहा कि अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. हाल ही में मसूरी में दो लोगों को पर्यटकों को जूस परोसने से पहले गिलासों में कथित तौर पर थूकने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. इसके अलावा देहरादून से एक वीडियो भी वायरल हुआ था जिसमें एक रसोइये को रोटी के लिए आटा बनाते समय कथित तौर पर थूकते हुए देखा जा सकता है. ‘किसी भी तरह की अशुद्धता बर्दाश्त नहीं’   स्वास्थ्य मंत्री धन सिंह रावत ने कहा कि आने वाले त्योहारी सीजन के दौरान खाने की सुरक्षा और शुद्धता उनकी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है. रावत ने कहा, त्योहारों के दौरान किसी भी तरह की अशुद्धता या असामाजिक गतिविधियां बर्दाश्त नहीं की जाएंगी.पुलिस महानिदेशक अभिनव कुमार ने अपराधियों को मुख्यमंत्री की चेतावनी को ध्यान में रखते हुए जिला पुलिस प्रमुखों को दिशानिर्देश जारी किए. ‘व्यापार प्रबंधकों की रसोई में हों CCTV’ दिशानिर्देशों में कहा गया है कि होटल और ढाबों जैसे व्यापारिक प्रतिष्ठानों में काम करने वाले लोगों का 100 प्रतिशत वैरिफिकेशन किया जाना चाहिए, साथ ही व्यापार प्रबंधकों को अपनी रसोई में सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए. खूफिया यूनिट की मदद से कार्ट्स की निगरानी जिला पुलिस को जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, खोखे और पुशकार्ट जैसी खुली जगहों पर ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए वे स्थानीय खूफिया यूनिट की मदद ले सकते हैं.दिशानिर्देशों में कहा गया है कि गश्त के दौरान इस पर भी विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए. होटलों और ढाबों की होगी रैंडम चेकिंग प्रावधानों के मुताबिक पुलिस होटलों और ढाबों पर रैंडम चेकिंग के लिए स्वास्थ्य और खाद्य विभाग की मदद भी ले सकती है. डीजीपी ने कहा कि अपराधियों पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 274 (बिक्री के लिए खाद्य और पेय पदार्थों में मिलावट) और उत्तराखंड पुलिस अधिनियम की धारा 81 (सार्वजनिक उपद्रव पैदा करने, जानबूझकर अफवाह फैलाने या गलत अलार्म पैदा करने के लिए बिना वारंट के गिरफ्तारी) के तहत मामला दर्ज किया जाना चाहिए.   यदि अधिनियम का धर्म, जातियता, भाषा आदि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, तो प्रासंगिक धारा 196 (1) (बी) (धर्म, जाति, भाषा, जन्म स्थान के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देना) या बीएनएस की धारा 299 (जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कृत्य जिनका उद्देश्य भारत में नागरिकों के किसी भी वर्ग के धार्मिक विश्वासों या धर्म का अपमान करना है) के तहत भी कार्रवाई की जानी चाहिए. 1 लाख रुपये तक के जुर्माने सहित सख्त कार्रवाई दिशानिर्देशों में कहा गया है कि स्वास्थ्य और खाद्य विभाग, नगर निगम/जिला पंचायत, नगर परिषदों और स्थानीय लोगों के समन्वय से एक जन जागरूकता अभियान भी चलाया जाना चाहिए.स्वास्थ्य सचिव और खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के आयुक्त आर राजेश कुमार ने एक विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) भी जारी की, जिसमें अपराधियों के खिलाफ 25,000 रुपये से 1 लाख रुपये तक के जुर्माने सहित सख्त कार्रवाई का आदेश दिया गया है. कुमार ने कहा कि देहरादून और मसूरी में होटलों और ढाबों जैसे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में खाद्य पदार्थों में थूकने की घटनाओं के वीडियो का संज्ञान लेते हुए और मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुपालन में दिशानिर्देश जारी किए गए हैं.इधर मंगलवार को, पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार ने कहा कि वह थूकने या किसी अन्य मानव अपशिष्ट को मिलाकर भोजन को प्रदूषित करने को संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध बनाने के लिए दो अध्यादेश लाएगी.    

उज्जैन से मक्सी के बीच 36 किलोमीटर लंबा है ये रास्ता, मार्गों को चौड़ा करने के साथ 14 नए पुल भी बनाए जाएंगे

उज्जैन उज्जैन-मक्सी टू-लेन रोड 704 करोड़ रुपये से फोरलेन सड़क में तब्दील किया जाएगा। उज्जैन शहरी क्षेत्र में आइटीआई के सामने इंदौर रेल सेक्शन पर बने रेलवे ओवर ब्रिज के समानांतर एक ओर पुल बनाया जाएगा। सड़क निर्माण के लिए पांच महीने पहले मिली प्रशासकीय स्वीकृति के बाद डीपीआर और फिजिबिलिटी सर्वे का काम पूर्ण होने की कगार पर है। वर्तमान में मार्ग पर यूजर फी योजना अंतर्गत महिला स्वसहायता समूह द्वारा टोल टैक्स का संचालन हो रहा है। मालूम हो कि मध्यप्रदेश की सरकार उज्जैन में औद्योगिकी पारिस्थति तंत्र का निर्माण करने के लिए शहर के सभी पहुंच मार्गों को फोरलेन सड़क में बदल रही है। ये फोरलेन भी हैं प्रस्तावित आगर रोड, देवास रोड का निर्माण हो चुका है। गरोठ, बड़नगर-बदनावर रोड का निर्माण प्रगति पर है। इंदौर रोड़ को सिक्सलेन में बदलने को भी धरातल पर पिछले महीने काम शुरू करवा दिया गया है। अगले चरण में 36 किलोमीटर लंबा मक्सी रोड, 44 किमी लंबा उन्हेल-नागदा-जावरा रोड, 49 किलोमीटर लंबा नया इंदौर रोड फोरलेन (चिंतामन गणेश से इंदौर एयरपोर्ट तक) सड़क मार्ग बनाना प्रस्तावित है। 14 पुल भी बनाने की तैयारी ये सारा काम कराने को मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम ने योजना बनाई है जो सिंहस्थ- 2028 की कार्य योजना का हिस्सा है। कहा गया है कि उज्जैन में ट्रांसपोर्टेशन, यातायात की सुविधा सुलभ होगी तो उज्जैन तेजी से विकास करेगा। यहां उद्योग स्थापित करने को बड़े-बड़े समूह भी निवेश करेंगे। इसलिए विभिन्न मार्गों को चौड़ा करने के साथ 14 नए पुल बनाने की भी तैयारी की जा रही है। तीन पुल निर्माण के लिए ठेकेदार फर्म का चयन करने की कार्रवाई प्रक्रियाधिन है। ये पुल फ्रीगंज क्षेत्र में चामुंडा माता मंदिर चौराहे से फ्रीगंज के बीच, तीन बत्ती चौराहे से मुल्लापुरा मार्ग पर, लालपुल के समीप शिप्रा नदी पर बनाना प्रस्तावित है। सारा निर्माण कार्य 2028 में लगने वाले महाकुंभ सिंहस्थ से पहले कराने का लक्ष्य रखा गया है। इंदौर रोड सिक्सलेन के लिए मिट्टी परीक्षण का काम शुरू इदौर रोड सिक्सलेन निर्माण का निर्माण 735 करोड़ रुपये से होना है, जिसकी शुरुआत करने से पहले मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम (एमपीआरडीसी) से अनुबंधित ठेकेदार फर्म उदयपुर की रवि इन्फ्राबिल्ड ने मिट्टी परीक्षण कराना शुरू किया है। पिछले माह इंदौर क्षेत्र में ये काम किया था अब उज्जैन में किया जा रहा है। 46.475 किलोमीटर लंबे मार्ग में दो वृहद पुल, दो फ्लाई ओवर, छह अंडरपास बनाया जाना है। पुल, फ्लायओवर बनाने के लिए नींव स्तर पर कितनी खोदाई करना होगी, किस डिजाइन के कितनी लोडिंग क्षमता के बीम-काम खड़े करना होंगे, इसके लिए मिट्टी परीक्षण यानी जियो टेक्निकल सर्वेक्षण कार्य किया जा रहा है। टीम ने त्रिवेणी शनि मंदिर के समीप शिप्रा नदी पर बने पुल के समक्ष नया पुल बनाने के लिए यहां जमीनी सर्वे की शुरूआत की।

जंग की त्रासदी से जूझते गाजा में शवों को अंतिम संस्कार भी नसीब नहीं हो रहा, लाशों को कुत्ते नोच रहे

गाजा इजरायल और हमास के बीच जंग छिड़े अब एक साल से भी ज्यादा का समय बीत चुका है। पिछले साल 7 अक्टूबर को हमास के इजरायल पर हमले के बाद से गाजा में संघर्ष जारी है। अब युद्धग्रस्त गाजा से दिल दहला देने वाली तस्वीरें सामने आई हैं। इन तस्वीरों में आवारा कुत्ते लावारिश शवों को खाते नजर आ रहे हैं। गाजा के आपातकालीन सेवाओं के प्रमुख फारेस अफाना ने बताया है कि उन्हें और उनके सहयोगियों को उत्तरी गाजा में मारे गए फिलिस्तीनियों के शव मिले हैं जिनमें से कई पर जानवरों द्वारा शवों को खाए जाने के निशान हैं। फारेस अफाना ने सीएनएन को बताया, “भूखे आवारा कुत्ते सड़क पर इन शवों को खा रहे हैं। इससे हमारे लिए शवों की पहचान करना भी मुश्किल हो रहा है।” उन्होंने उत्तरी गाजा और जबालिया क्षेत्र में हवाई और जमीनी हमलों का जिक्र करते हुए कहा कि इजरायली सेना का कहर जारी है। अब त्रासदी से जूझते गाजा में शवों को अंतिम संस्कार भी नसीब नहीं हो पा रहा है। वहीं इजरायल ने दावा किया है कि हमास के लड़ाके इन इलाकों में फिर से संगठित हो रहे हैं। ‘स्थिति बदतर होती जा रही है’ पिछले साल 7 अक्टूबर को हमास ने इजरायल पर हमला किया था। इन हमलों में 1,206 लोगों की मौत हो गई थी जिनमें से ज़्यादातर आम लोग थे। तब से इजरायल के हमले में गाजा में 42,409 लोग मारे गए हैं वहीं 99,153 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। बुधवार को गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया है कि पिछले 24 घंटों में इजरायली सैन्य हमलों में 65 फिलिस्तीनी मारे गए हैं। अफ़ाना ने बताया कि सोमवार को इजरायली सैनिकों ने फिलिस्तीन शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी (UNRWA) द्वारा संचालित एक राहत शिविर केंद्र में खाने की तलाश कर रहे भूखे लोगों पर गोलीबारी की है। उन्होंने कहा, “स्थिति बदतर होती जा रही है। उत्तरी गाजा में जो हो रहा है वह वास्तव में नरसंहार है।” गाजा में अकाल का डर इस बीच UNRWA ने गाजा में अकाल के जोखिम की चेतावनी दी है। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में UNRWA के प्रमुख फिलिप लाज़ारिनी ने कहा है कि गाजा में अकाल और तीव्र कुपोषण की संभावना बनी हुई हैं।” उन्होंने कहा कि यह एक तरह की बंजर जमीन बन गई है और यह जगह रहने लायक भी नहीं है”।

इजरायली हमले में हमास के नए राजनीतिक नेता याह्या सिनेवार के भी मारे जाने की संभावना

दुबई इजरायल-हमास युद्ध को लेकर एक और बड़ी खबर आ रही है, जहां हमास के नए राजनीतिक नेता याह्या सिनेवार के भी मारे जाने की संभावना है। इजरायली सेना ने इसकी कहा है कि वह इसकी जांच कर रही है और पूरी संभावना है कि हमास चीफ उसके हमले में मारा गया है। गौरतलब है कि कुछ दिन पहले भी याह्या सिनेवार के मारे जाने की खबरें सामने आई थीं। हालांकि, कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में इसका खंडन भी किया गया था। अब इजरायली सेना नई संभावनाओं के साथ इसकी जांच कर रही है। आतंकियों की नहीं हुई है पहचान समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक इजरायली सेना ने गाजा पट्टी में एक ऑपरेशन के बाद हमास नेता याह्या सिनवार को मार गिराने का अनुमान लगाया है। सेना ने यह भी कहा है कि उसने तीन आतंकवादियों को निशाना बनाया था। सेना ने बयान में कहा, ‘इस स्तर पर आतंकवादियों की पहचान की पुष्टि नहीं की जा सकती है।’ इसने कहा कि इस बात के कोई संकेत नहीं थे कि जिस इमारत में तीन आतंकवादी मारे गए थे, वहां बंधक मौजूद थे। गौरतलब है कि सिनवार, 7 अक्टूबर, 2023 को इजरायल पर हमले का मुख्य साजिशकर्ता था, जिसके कारण गाजा में बड़े पैमान पर युद्ध छिड़ा। उसे अगस्त में तेहरान में पूर्व नेता इस्माइल हानिये की हत्या के बाद हमास का नेता नामित किया गया था। हमास ने नहीं की कोई टिप्पणी इधर, हमास की ओर से इस पूरे मामले पर कोई तत्काल टिप्पणी नहीं की गई है। यदि सिनवार की मौत की पुष्टि की जाती है तो इजरायली सेना और प्रधान मंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के लिए यह एक बड़ी सफलता होगी, जिन्होंने हाल के महीनों में अपने दुश्मनों के प्रमुख नेताओं की हाई-प्रोफाइल हत्याओं की श्रृंखला शुरू की है। रॉयटर्स के मुताबिक सिनवार इजरायल की वांटेड लिस्ट में सबसे ऊपर है, लेकिन अब तक उसका पता नहीं लगाया जा पा रहा था। संभवतः वह पिछले दो दशकों में हमास द्वारा गाजा के नीचे बनाई गई सुरंगों के जाल में छिपा हुआ है।   हिजबुल्लाह चीफ को भी मार गिराया था इससे पहले इजरायल ने पिछले महीने बेरूत में ईरानी समर्थित हिजबुल्लाह आंदोलन के नेता हसन नसरल्लाह को भी मार डाला। साथ ही समूह की सैन्य शाखा के शीर्ष नेतृत्व को भी मार डाला। हमास के नेतृत्व वाले बंदूकधारियों ने 7 अक्टूबर, 2023 को इजरायल पर हमला किया था, जिसमें करीब 1,200 लोग मारे गए और 250 से अधिक लोगों को बंधक बना लिया गया। जवाब में इजरायल के अभियान में 42,000 से अधिक लोग मारे गए। गाजा का अधिकांश हिस्सा मलबे में तब्दील हो गया और इसकी अधिकांश आबादी विस्थापित हो गई।

डिबालोंग में लोकमान्य तिलक एक्सप्रेस के 8 डिब्बे पटरी से उतरे, किसी के हताहत होने की सूचना नहीं

नई दिल्ली असम के डिबालोंग स्टेशन के पास एक ट्रेन डिरेल हो गई है। डिबालोंग में लोकमान्य तिलक एक्सप्रेस के 8 डिब्बे पटरी से उतर गए। हालांकि, रेलवे प्रवक्ता ने बताया कि ट्रेन डिरेल की वजह से किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। यह दुर्घटना लुमडिंग डिवीजन के लुमडिंग-बदरपुर हिल सेक्शन में हुई। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने भी इस दुर्घटना की जानकारी अपने आधिकारिक सोशल हैंडल एक्स पर दी। दुर्घटना दोपहर करीब 3:55 बजे हुई रेलवे के एक प्रवक्ता ने बताया कि आज सुबह अगरतला से रवाना हुई मुंबई जाने वाली लोकमान्य तिलक एक्सप्रेस असम के डिबालोंग स्टेशन पर दोपहर करीब 3:55 बजे पटरी से उतर गई। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे जोन के सीपीआरओ ने बताया, ‘ट्रेन के पावर कार और इंजन समेत आठ डिब्बे पटरी से उतर गए। हालांकि, किसी के हताहत होने या गंभीर रूप से घायल होने की खबर नहीं है।’ इंजन सहित 8 डिब्बे पटरी से उतर सीपीआरओ, पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे ने कहा कि अगरतला से आज सुबह रवाना हुई 2520 अगरतला-लोकमान्य तिलक टर्मिनस एक्सप्रेस लुमडिंग डिवीजन के अंतर्गत डिबालोंग स्टेशन पर लुमडिंग-बदरपुर हिल सेक्शन में लगभग 15-55 बजे पटरी से उतर गई। ट्रेन के पावर कार और इंजन सहित 8 डिब्बे पटरी से उतर गए। हालांकि, किसी के हताहत होने या गंभीर रूप से घायल होने की सूचना नहीं है। बचाव और बहाली कार्यों की निगरानी दुर्घटना राहत ट्रेन और दुर्घटना राहत चिकित्सा ट्रेन बचाव और बहाली कार्यों की निगरानी के लिए डिवीजन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ लुमडिंग से घटनास्थल के लिए रवाना हो चुकी है। लुमडिंग-बदरपुर सिंगल लाइन सेक्शन पर ट्रेनों का परिचालन रोक दिया गया है। घटना स्थल पहुंची राहत टीम रेलवे अधिकारियों के अनुसार, दुर्घटना राहत ट्रेन और दुर्घटना राहत चिकित्सा ट्रेन बचाव और बहाली कार्यों की निगरानी के लिए डिवीजन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ लुमडिंग से घटनास्थल पर पहुंच चुकी है। हेल्पलाइन नंबर जारी सीपीआरओ ने बताया कि लुमडिंग-बदरपुर सिंगल लाइन सेक्शन पर ट्रेनों का परिचालन रोक दिया गया है। इसके साथ ही हेल्पलाइन नंबर 03674 263120, 03674 263126 जारी कर दिया गया है।

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