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महिला सशक्तिकरण नीति के अंतर्गत प्रतिभा सिंटेक्स में 70% से अधिक महिला कर्मचारी

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश उद्योग तथा निवेश के क्षेत्र में नई पहचान स्थापित कर रहा है। इस दिशा में लगातार भ्रमण तथा उद्योगपतियों से संवाद के प्रतिफल में एक समृद्ध औद्योगिक परिवेश प्रदेश में नजर आ रहा है। निनोरा में स्थापित नवीन औद्योगिक इकाई उक्त प्रयासों की ही एक कड़ी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रविवार को उज्जैन के समीप ग्राम निनोरा में 355 करोड़ रुपए निवेश वाली प्रतिभा सिंटेक्स औद्योगिक इकाई का शुभारंभ किया। इस औद्योगिक इकाई में वृहद स्तर पर गारमेंट निर्माण किया जाएगा, जिससे हजारों लोगों को रोजगार मिलेगा। विशेष रूप से राज्य शासन की महिला सशक्तिकरण नीति के तहत इस औद्योगिक इकाई में 70% से अधिक कर्मचारी महिलाएं हैं। कार्यक्रम में लोक निर्माण मंत्री श्री राकेश सिंह, जिले के प्रभारी मंत्री श्री गौतम टेटवाल, सांसद श्री अनिल फिरोजिया, राज्यसभा सांसद बाल योगी श्री उमेशनाथ जी महाराज, विधायक श्री अनिल जैन कालूहेड़ा, नगर निगम सभापति श्रीमती कलावती यादव, श्री बहादुर सिंह बोरमुंडला, प्रबंध निदेशक औद्योगिक विकास निगम श्री चंद्रमौली शुक्ला, प्रतिभा स्वराज प्राइवेट लिमिटेड के चेयरमैन श्री शिवकुमार चौधरी, प्रबंध निदेशक श्री श्रेष्ठ चौधरी आदि उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि निनोरा में प्रतिभा स्वराज द्वारा स्थापित नवीन औद्योगिक इकाई से जहां हजारों लोगों को रोजगार मिलेगा, वहीं आसपास की खेती समृद्ध होगी। किसानो की आय में भी वृद्धि होगी। निनोरा में स्थापित औद्योगिक इकाई के प्रथम चरण में लगभग 100 करोड़ रुपए का निवेश किया गया है, जिसमें आगे चलकर 355 करोड़ रुपए का निवेश होगा। डॉ. यादव ने उद्योग समूह द्वारा लगभग डेढ़ लाख एकड़ में की जाने वाली जैविक खेती की भी सराहना की। मुख्यमंत्री ने प्रदेश की नवीन सकारात्मक औद्योगिक नीति का जिक्र करते हुए कहा कि प्रत्येक संभाग में शासन द्वारा इंडस्ट्री कॉन्क्लेव आयोजित की जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में खेती तथा पशुपालन में उत्पादन और आय को दोगुना करने का सशक्त प्रयास किया जा रहा है। अभी प्रदेश में देश के कुल दुग्ध उत्पादन का 9% हिस्सा है, जिसे बढ़ाकर 20% तक ले जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में शासन द्वारा लागू की गई कल्याणकारी योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि अग्नि वीर एक महत्वपूर्ण योजना है, जिसके माध्यम से दूरदृष्टि के साथ प्रधानमंत्री द्वारा देश की सैन्य क्षमता में वृद्धि की गई है। प्रधानमंत्री द्वारा संतुलन की दृष्टि से अग्नि वीर योजना लागू की गई है। मुख्यमंत्री ने इस वर्ष दशहरे पर रावण दहन के साथ शस्त्र-पूजन पर कहा कि लोकमाता देवी अहिल्या बाई होल्कर से प्रेरणा लेते हुए इस वर्ष उत्साह एवं उमंग के साथ प्रदेश में शस्त्र पूजन कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने उज्जयिनी का महत्व जताते हुए कहा कि प्रत्येक काल में उज्जयिनी अवंतिका नगरी का अस्तित्व रहता आया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने फीता काटकर औद्योगिक इकाई का शुभारंभ कर मशीनों का पूजन भी किया। साथ ही यहाँ कार्यरत महिला कर्मचारियों से चर्चा कर उनके जॉब, सैलरी, कार्यस्थल पर वातावरण तथा अन्य बिंदुओं पर जानकारी प्राप्त की। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने औद्योगिक इकाई में वस्त्र निर्माण की प्रक्रिया का अवलोकन किया, जिसमें मुख्यमंत्री के चित्र को भी मुद्रित किया गया है। प्रारम्भ में प्रतिभा स्वराज प्रा.लि. के प्रबंध निदेशक श्री श्रेष्ठ चौधरी ने स्वागत उद्बोधन दिया।  

प्रदेश में अवैध नशे के कारोबार को नेस्तनाबूद करने को कटिबद्ध मध्यप्रदेश पुलिस, सतत् कार्रवाई जारी

भोपाल मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा अवैध मादक पदार्थों के व्यापार के विरुद्ध निरंतर कार्रवाई जारी है। जनवरी 2023- से आज दिनांक तक पूरे राज्य में 6161 प्रकरणों में अवैध मादक पदार्थ के व्यापार में संलिप्त 7886अपराधियों की गिरफ़्तारी की गई है। इसके अंतर्गत ऐसी गतिविधियों में शामिल अपराधियों द्वारा अवैध तरीक़े से अर्जित संपत्तियों को ज़ब्त/फ्रीज़ किए जाने हेतु NDPS एक्ट 1985 अध्याय 05 धारा68-ए के अंतर्गत पूरे प्रदेश  में 29 अपराधियों के विरूद्ध 115 करोड़ से अधिक की संपत्ति जप्त/फ्रीज़  की गई है। इस प्रावधान के अन्तर्गत सर्वाधिक कार्यवाही मंदसौर एवं नीमच में की गई, जहाँ के 23 कुख्यात अपराधियों की संपत्ती जप्त/फ्रीज़ की गई है।  इन अपराधियों में नाहरगढ़ के धनराज उर्फ धन्ना पिता ओमप्रकाश पटीदार  की 14 करोड़ से अधिक की संपत्ति, नारायणगढ़ के श्याम पिता भंवर सिंह की10 करोड़ से अधिक की संपत्ति, मनसा के पीयूष पिता पीरू बंजारा की10 करोड़ से अधिक की संपत्ति, सीतामाउ के अशोक पिता माँगीलाल पाटीदार की 8 करोड़ से अधिक की संपत्ति तथा अफ़जलपुर के ताहिर पिता शफ़ी मोहम्मद की 3 करोड़ से अधिक की संपत्ति उल्लेखनीय है। नशे के अवैध कारोबारियों को जेल  में निरुद्ध करने की कार्रवाई पीट यानी अवैध मादक पदार्थ व्यापार की रोकथाम अधिनियम 1988 (PIT NDPS अधिनियम) उन गंभीर  नशे का कारोबार करने वाले  अपराधियों पर  लगाया जाता है जो  लगातार उस अपराध में शामिल  पाए जाते हैं।इन अपराधियों को जेल में निरुद्ध किया जाना बेहद ज़रूरी हो जाता है। यह एक्ट  लगने के  बाद अपराधी को छह माह तक ज़मानत नहीं मिल पाती है।इस अधिनियम के अंतर्गत पिछले दो वर्षों में की गई कार्यवाही पूर्व में की गई कार्रवाई से कई गुनाअधिक है।  इसके अंतर्गत दिनांक 1 जनवरी 2023 से अभी तक कुल  74 अपराधियों के  विरुद्ध कार्रवाई की गई है, जिसमें इंदौर के 43 अपराधी, मंदसौर एवं उज्जैन के 5-5 अपराधी तथा नीमच एवं रतलाम के 4-4 अपराधी शामिल हैं। नशा कारोबारियों के गठजोड़ को ध्वस्त करने के आदेश अवैध मादक पदार्थों के पंजीबद्ध प्रकरणों में पुलिस महानिदेशक द्वारा निर्देशित किया गया है कि  अत्यधिक मात्रा में जप्त अवैध मादक पदार्थ के  Top to Bottom तथा कम मात्रा में ज़ब्त किए गए अवैध मादक पदार्थ के Bottom to Top की तस्करी में सम्मलित पाए गए आरोपियों के लिंक और नेटवर्क को ट्रैक कर, मूवमेंट  की जानकारी एकत्र कर उनके गठजोड़ का पता लगाकर उनको समूल नष्ट करना है। इस नेटवर्क में शामिल आरोपियों एवं उनसे जुड़े अन्य बिचौलियों की चल /अचल संपत्ति की जानकारी एकत्र कर इनके  वित्तीय लेन- देन के संबंध में डाटा का एकत्रीकरण करने का भी आदेश दिया गया है। साथ ही अवैध नशे के कारोबार में संलिप्त प्रदेश के एवं अन्य राज्यों के अपराधियों की जानकारी एकत्र कर इनके विरूद्ध कार्रवाई करने के भी  आदेश जारी किए गये हैं। डीजीपी ने एनसीओआरडी  (NCORD) पोर्टल पर गिरफ्तार किए गए सभी संदिग्ध की जानकारी अपडेट करने के लिए भी आदेश दिए  हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमने वर्ष-2025 को उद्योग वर्ष के रूप में मनाने का निर्णय लिया

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश तेजी से देश का एक प्रमुख औद्योगिक और निवेश स्थल बनने जा रहा है। हमारी निवेशक-अनुकूल नीतियों, विशाल औद्योगिक बुनियादी ढांचे और विभिन्न राज्यों से सम्पर्क की स्थिति से देश-विदेश के निवेशक मध्यप्रदेश में निवेश के लिये तैयार हुए हैं। राज्य सरकार की सक्रिय पहल, औद्योगिक विकास को गति देने वाली योजनाएँ और निवेशकों को आकर्षित करने सिंगल-विंडो सिस्टम जैसी सुविधाओं से प्रदेश को एक महत्वपूर्ण आर्थिक केंद्र के रूप में स्थापित करने की पहल हुई है। इस दिशा में राज्य सरकार द्वारा विशेष प्रयास कर देश के महानगरों में रोड-शो और प्रदेश में रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव की जा रही हैं। इनमें उद्योगपतियों से हो रहे निरन्तर सम्पर्क से प्रदेश में निवेश का माहौल बन चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमने वर्ष-2025 को उद्योग वर्ष के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। इसमें प्रमुख रूप से माह फरवरी 2025 में दो दिवसीय ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट भोपाल में होने जा रही है। इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम, निवेशकों के लिए अनंत संभावनाएं मध्यप्रदेश का औद्योगिक विकास सरकार की दूरदर्शी योजनाओं और नवीन बुनियादी ढांचे के विस्तार का परिणाम है। राज्य का 1.25 लाख एकड़ में फैला विशाल औद्योगिक भूमि बैंक, 112 विकसित औद्योगिक क्षेत्र और 14 नए ग्रीनफील्ड औद्योगिक क्षेत्रों के प्रस्ताव ने निवेशकों को आकर्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यहाँ टेक्सटाइल, फार्मा, खाद्य प्र-संस्करण, ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे बहु-क्षेत्रीय औद्योगिक क्लस्टर्स ने राज्य को निवेश के लिए एक समृद्ध स्थान बना दिया है। साथ ही राज्य के 7 स्मार्ट शहरों की परियोजना ने इसे डिजिटल और औद्योगिक प्रगति के मामले में और भी आकर्षक बना दिया है। प्रदेश में औद्योगीकरण के लिए आवश्यक इकोसिस्टम उपलब्ध है। उद्योगों के लिए राज्य में पर्याप्त लैंड बैंक की उपलब्धता है और औद्योगिक प्रयोजन के लिए प्रदेश में 1.25 लाख एकड़ से भी अधिक का लैंड बैंक उपलब्ध है। राज्य शासन द्वारा सेक्टर-फोकस्ड औद्योगिक क्षेत्र भी बनाये गए हैं। भोपाल एवं इंदौर में महिला उद्यमियों के लिए डेडिकेटेड पार्क स्थापित किये गए हैं। राज्य में तकनीकी, प्रबंधन एवं चिकित्सा क्षेत्र एवं स्किल डेवलपमेंट के लिये कई उत्कृष्ट कॉलेज हैं, जिसके कारण सभी क्षेत्रों के उद्योगों के लिए पर्याप्त संख्या में स्किल्ड वर्क फोर्स की उपलब्धता है। पिछले दो दशकों में राज्य में उद्योगों के माध्यम से 41 लाख नवीन रोज़गार के अवसर उत्पन्न हुए हैं एवं राज्य का अनएम्प्लॉयमेंट रेट काफी कम है। राज्य शासन द्वारा बुनियादी ढाँचे का निर्माण जैसे औद्योगिक क्षेत्र, सड़क, जल आपूर्ति, सिंचाई और 24X7 बिजली आपूर्ति इत्यादि जरूरतों पर खासा ध्यान दिया गया है। राज्य शासन द्वारा पिछले दशक के दौरान इन्फ्रास्ट्रक्चर को विश्वस्तरीय बनाने के लिये करीब 1.10 लाख करोड़ रूपये खर्च किये गये है। इसके फलस्वरूप पिछले दशक के दौरान मध्यप्रदेश में आर्थिक एवं सामाजिक विकास के रूप में सकारात्मक परिवर्तन देखा गया है। कनेक्टिविटी एवं इन्फ्रास्ट्रक्चर औद्योगिक विकास के लिये महत्वपूर्ण पैमाना है। इसको ध्यान में रखते हुये राज्य शासन अटल प्रगति पथ (चंबल प्रोग्रेस-वे) पर नवीन औद्योगिक क्षेत्र विकसित कर रहा है, जिसके लिये भूमि का चिन्हांकन किया जा चुका है। साथ ही नर्मदा एक्सप्रेस-वे क्षेत्र में भी औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने के लिये भूमि का चिन्हांकन एवं लैण्ड ट्रांसफर प्रक्रियाधीन है। राज्य में विभिन सेक्टरों की 350 से अधिक वृहद् इकाइयां एवं 26 लाख से अधिक MSME इकाइयां स्थापित हैं एवं पिछले दशक में इसमें काफी तेज़ी आई है। राज्य में 314 से अधिक इंडस्ट्रियल एरियाज हैं। इसके अतिरिक्त राज्य शासन द्वारा क्षेत्र विशिष्ट औद्योगिक क्षेत्र भी बनाये गए हैं। राज्य में 10 फूड पार्क, 5 आईटी स्पेशल इकोनॉमिक जोन, 2 स्पाइस पार्क, 2 प्लास्टिक पार्क, एक मेडिकल डिवाइस पार्क है, एक पावर इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरिंग जोन है। राज्य शासन द्वारा EV पार्क, फार्मा पार्क, टेक्सटाइल पार्क, गारमेंट यूनिट्स के लिए प्लग एंड प्ले जोन, सेमीकंडक्टर पार्क एवं नवीन आईटी पार्क स्थापित किये जा रहे हैं। राज्य में मेगा इकाइयों को कस्टमाइस्ड इंसेंटिव पैकेज की सुविधा भी दी जाती है।  

मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने दशहरा मिलन उत्सव में 658 करोड़ की 16 सड़क परियोजनाओं का भूमि-पूजन किया

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य सरकार प्रदेश को रोजगारपरक प्रदेश बनाने के साथ ही विकास के हर आयाम को तय कर रही है। प्रदेश की भौतिक सम्पदाओं का सदुपयोग कर आर्थिक रूप से सम्पन्न मध्यप्रदेश बनायेंगे। उन्होंने कहा कि उज्जैन में 350 करोड़ रुपये की लागत से प्रतिभा स्वराज इकाई का आज शुभारम्भ किया गया है, जिससे 5 हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा। उज्जैन के बेस्ट इंटरप्राइजेस और प्रतिभा स्वराज की इकाइयों से लगभग 10 हजार लोगों को रोजगार उपलब्ध होंगे। इसी प्रकार उज्जैन में अन्य औद्योगिक इकाई के माध्यम से 50 हजार बेरोजगार लोगों को प्रत्यक्ष रूप से रोजगार प्राप्त होगा। मुख्यमंत्री डॉ.यादव आज उज्जैन के कार्तिक मेला ग्राउण्ड में दशहरा मिलन उत्सव एवं 658 करोड़ की 16 सड़क परियोजनाओं के भूमि-पूजन कार्यक्रम को सम्बोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में लोक निर्माण मंत्री श्री राकेश सिंह, उज्जैन के प्रभारी मंत्री श्री गौतम टेटवाल, सांसद श्री अनिल फिरोजिया, राज्यसभा सांसद बाल योगी, श्री उमेशनाथ जी महाराज, पूर्व केन्द्रीय मंत्री डॉ. सत्यनारायण जटिया, विधायक श्री अनिल जैन कालूहेड़ा, श्री सतीश मालवीय, श्री तेजबहादुर सिंह चौहान, श्री जितेन्द्र पंड्या, महापौर श्री मुकेश टटवाल, नगर निगम सभापति श्रीमती कलावती यादव, श्री बहादुर सिंह बोरमुंडला, श्री विवेक जोशी सहित जन-प्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में जन-समुदाय उपस्थित रहा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सनातन धर्म की सभी सन्यासी परम्पराओं के सभी वैष्णव और शैव संत 12 साल में सिंहस्थ में आते हैं और भविष्य में सनातन धर्म की दिशा, आचरण, स्वरूप तय करते है। मानवता की स्थापना के लिये सर्वोच्च सिंहस्थ मेला आयोजित किया जायेगा। सिंहस्थ के माध्यम से भारत दुनिया का नेतृत्व करेगा। इसकी समुचित तैयारियां की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का संकल्प है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में विकास के मामले में मध्यप्रदेश को देश का नम्बर वन राज्य बनायेंगे। इसके लिये अधोसंरचना विकास के कार्य तेजी से किए जा रहे हैं। प्रदेश को माइनिंग सेक्टर में भी दुनिया में नम्बर वन बनायेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश हर सेक्टर में तेजी से तरक्की कर रहा है। प्रदेश में निवेशकों को लाने एवं निवेश बढ़ाने के लिये 16 अक्टूबर को हैदराबाद जाकर निवेशकों को आमंत्रित करेंगे। उज्जैन संभाग से प्रारम्भ हुई रीजनल इण्डस्ट्री कॉन्क्लेव की श्रंखला में अब 23 अक्टूबर को रीवा में कॉन्क्लेव होने वाली है। इसके बाद शहडोल, नर्मदापुरम संभाग में भी रीजनल इण्डस्ट्रीज कॉन्क्लेव आयोजित की जाएगी। आगामी वर्ष के फरवरी माह में प्रदेश में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट का आयोजन होगा, जिसमें विश्वभर से निवेशक आमंत्रित किये जायेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में भारत शक्ति-सम्पन्न एवं सामर्थ्यशाली देश बनने के साथ ही विकास के समुच्चय में सर्वोच्च स्थान भी हासिल कर रहा है। हमारी सनातन परम्परा में देवी-देवताओं और ऋषि-मुनियों ने शास्त्र एवं शस्त्र के साथ दुनिया का मार्ग प्रशस्त किया है। हमारा देश शान्तिपूर्ण देश है, पर जरूरत पड़ने पर शास्त्र के साथ ही शस्त्र उठाना भी बखूबी जानता है। थल सेना, वायु सेना एवं नौसेना को शक्ति सम्पन्न बनाते हुए सम्पूर्ण विश्व के मोर्चे पर आज प्रधानमंत्री श्री मोदी प्रभावशाली भूमिका अदा कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंहस्थ-2028 के माध्यम से उज्जैन विश्व पटल पर धार्मिक पर्यटन के प्रमुख केन्द्र के रूप में पहचाना जायेगा। आगामी सिंहस्थ को दृष्टिगत रखते हुए उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मन्दिर की पहुंच को और अधिक सुगम बनाने के लिये सदावल में हेलीपेड का निर्माण भी किया जायेगा। इसी प्रकार सोमवारिया से लेकर सिंहस्थ बायपास तक नया फोरलेन बनाया जायेगा, जिसकी टेण्डर प्रक्रिया प्रारम्भ है। केडी गेट से लेकर बीमा हॉस्पिटल के आगे तक फोरलेन निर्माण की भी मंजूरी दी गई है। उज्जैन-इन्दौर सिक्सलेन का कार्य प्रारम्भ हो गया है। तपोभूमि से हामूखेड़ी मार्ग का भी आज भूमि-पूजन किया गया है। उन्होंने कहा कि उज्जैन को जोड़ने वाले चारों तरफ के मार्गों को फोरलेन किया जायेगा, जिससे जिले के ग्रामीण क्षेत्र मुख्य मार्गों से जुड़ेंगे। विकास की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है मध्यप्रदेश : लोक निर्माण मंत्री श्री सिंह लोक निर्माण मंत्री श्री राकेश सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के मार्गदर्शन में लोक निर्माण विभाग “लोक निर्माण से लोक कल्याण’’ के ध्येय वाक्य के साथ विकास की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा हैं। विकास कार्यों से उज्जैन बेहतर सड़कों के साथ सामाजिक और आर्थिक ऊंचाइयों पर भी पहुंचेगा। विकास का ‘मोहन मॉडल’ प्रदेश की उन्नति के साथ जन-कल्याण के मार्ग भी खोल रहा हैं। प्रदेश में विकास और जन-कल्याण के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि उज्जैन धार्मिक नगरी के साथ अंतरराष्ट्रीय पर्यटन केंद्र के रूप में भी स्थापित होगा। उन्होंने बताया कि लोक निर्माण विभाग द्वारा लोकपथ एप का संचालन किया जा रहा है, जिसमें अब सड़कों के क्षतिग्रस्त होने संबंधी प्राप्त शिकायतों का 7 दिन के अंदर संबंधित क्षेत्र के विभागीय अधिकारी द्वारा निराकरण किया जाएगा। मुझे बताते हुए खुशी है कि 3 से 4 महीने के अंदर अभी तक प्राप्त शिकायतों में से 95% से अधिक का निराकरण किया जा चुका है। कार्यक्रम में विधायक श्री अनिल जैन कालूहेड़ा ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा उज्जैन को 658 करोड़ से अधिक की राशि की सौगातें आज दी गई है, जो उज्जैन के विकास में मील का पत्थर साबित होंगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा लोक निर्माण से लोक कल्याण के उद्देश्य से 658 करोड़ के विकास एवं निर्माण कार्यों का भूमि पूजन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कार्तिक मेला ग्राउंड उज्जैन में रविवार को आयोजित कार्यक्रम में लोक निर्माण से लोक कल्याण के उद्देश्य  से उज्जैन में 658 करोड़ से अधिक के विकास एवं निर्माण कार्यों का भूमि-पूजन किया। इनमें प्रमुख रूप से 225.96 करोड़ की लागत से हरीफाटक-लालपुल-मुल्लापूरा फोरलेन मार्ग शंकराचार्य चौराहा से चंदूखेड़ी, 2 नग 2 लेन आरओबी और शिप्रा पर 2 लेन ब्रिज सहित फोरलेन मार्ग, 67.69 करोड़ की लागत से उज्जैन बड़नगर बाईपास टू-लेन मार्ग निर्माण कार्य (एनएच 148 का छूटा हुआ भाग), 22.61 करोड़ की लागत से बडावदा कलसी नागदा से दोत्रु मार्ग का निर्माण, 31.88 करोड़ की लागत से नागदा गिद्धगढ़ विदखेड़ा मोकड़ी मार्ग, 35.65 करोड़ की लागत से तपोभूमि से … Read more

सीएम योगी ने सुनी फरियादियों की फरियाद, कहा- नागरिकों के जीवन में खुशहाली लाने को प्रतिबद्ध राज्य सरकार

गोरखपुर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को गोरखनाथ मंदिर में हर बार की तरह जनता दर्शन किया। उन्होंने इस जनता दर्शन में आए हुए सभी फरियादियों की समस्याएं सुनी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसी के भी साथ अन्याय न होने देने और हर नागरिक के जीवन में खुशहाली लाने को प्रतिबद्ध है। सीएम योगी ने लोगों की समस्याओं को निस्तारण के लिए अधिकारियों को जरूरी निर्देश दिए। अवैध कब्जा करने वाले बख्शे न जाएः योगी   बता दें कि जनता दर्शन में योगी ने अधिकारियों को दो टूक हिदायत दी है कि किसी की जमीन पर अवैध कब्जा करने वाले, कमजोरों को उजाड़ने वाले किसी भी सूरत में बख्शे न जाएं तथा उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि जो लोग किन्हीं कारणों से सरकार की योजनाओं के लाभ से वंचित हैं, उन्हें इसका लाभ दिलाया जाए। योगी ने रविवार सुबह गोरखनाथ मंदिर में जनता दर्शन के दौरान करीब 300 लोगों से मुलाकात की। गोरखनाथ मंदिर परिसर के महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन के सामने कुर्सियों पर बैठे लोगों तक वह खुद पहुंचे और एक-एक करके सबकी समस्याएं सुनीं। सरकार इलाज के लिए भरपूर मदद करेगीः योगी   मुख्मयंत्री योगी ने सबके प्रार्थना पत्रों को संबंधित अधिकारियों को संदर्भित करते हुए त्वरित और संतोषजनक निस्तारण का निर्देश देने के साथ लोगों को भरोसा दिलाया कि सरकार हर पीड़ित की समस्या के समाधान के लिए कृत संकल्प है। मुख्यमंत्री के समक्ष जनता दर्शन में हर बार की भांति इस बार भी कई लोग इलाज के लिए आर्थिक सहायता की गुहार लेकर पहुंचे थे। योगी ने उन्हें आश्वस्त किया कि सरकार इलाज के लिए भरपूर मदद करेगी। जनता के ऐसे प्रार्थना पत्रों को अधिकारियों को हस्तगत करते हुए मुख्यमंत्री ने इलाज से जुड़ी प्रक्रिया जल्द से जल्द पूरी करने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने राजस्व व पुलिस से जुड़े मामलों को भी पूरी पारदर्शिता एवं निष्पक्षता के साथ निस्तारित करने के निर्देश दिए।

पीएम मोदी ने ‘पीएम गति शक्ति’ के भारत की बुनियादी ढांचे और विकास पर पड़ने वाले प्रभाव का जिक्र किया

नई दिल्ली रविवार को ‘पीएम गति शक्ति’ पहल के तीन साल पूरे हो चुके हैं। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘पीएम गति शक्ति’ के भारत की बुनियादी ढांचे और विकास पर पड़ने वाले प्रभाव का जिक्र किया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर ‘माई गवर्नमेंट इंडिया’ ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा, “आज हम पीएम गति शक्ति के तीन साल पूरे होने का जश्न मना रहे हैं, जिसे पीएम मोदी ने लॉन्च किया था। यह अभूतपूर्व पहल भारत के बुनियादी ढांचे को और अधिक स्मार्ट और एकीकृत बना रही है, आर्थिक विकास को बढ़ावा दे रही है और विकास के भविष्य को आकार दे रही है।” इस पोस्ट पर पीएम मोदी ने लिखा, “गति शक्ति की बदौलत देश विकसित भारत के हमारे सपने को पूरा करने के लिए गति के साथ आगे बढ़ रहा है। यह प्रगति, उद्यमशीलता और नवाचार को प्रोत्साहित करेगा।” इसके अलावा, उन्होंने इस दूसरे पोस्ट में लिखा, “पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान भारत के बुनियादी ढांचे में क्रांति लाने के उद्देश्य से एक परिवर्तनकारी पहल के रूप में उभरा है। इसने मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाया है, जिससे सभी क्षेत्रों में तेज और अधिक कुशल विकास हुआ है। इसने लॉजिस्टिक्स को बढ़ावा दिया है, देरी कम हुई है और कई लोगों के लिए नए अवसर पैदा हुए हैं।” पीएम गति शक्ति के तीन साल पूरे होने पर केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने एक्स पर पोस्ट किया, “आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मल्टी मॉडल कनेक्टिविटी के लिए प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के शुभारंभ के 3 वर्ष पूरे हो गए हैं। लॉजिस्टिक्स को सुव्यवस्थित करके और कनेक्टिविटी को आगे बढ़ाकर, यह पथप्रदर्शक पहल तेज और अधिक कुशल परियोजना कार्यान्वयन सुनिश्चित करती है। यह एक आधुनिक, परस्पर जुड़े बुनियादी ढांचे के नेटवर्क को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जिससे विकसित भारत के निर्माण की दृष्टि को मजबूती मिलती है।”  

चार साल में रहे जातीय शोषण और जमीन विवाद के सर्वाधिक मुद्दे, अनुसूचित जाति आयोग में 47 हजार शिकायतें

नई दिल्ली. राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के आंकड़ों के अनुसार, बीते चार साल में उन्हें 47 हजार से ज्यादा शिकायतें मिली हैं। इनमें जातीय अत्याचार, भूमि विवाद और सरकारी नौकरी से संबंधित विवाद ही मुख्य मुद्दे हैं। आरटीआई के जवाब में यह जानकारी मिली है। एनसीएससी के आंकड़ों के अनुसार, साल 2020-21 में उन्हें 11,917 शिकायतें मिलीं। वहीं 2021-22 में 13,964, और 2022-23 में 12,402 और इस साल यानी 2024 में 9,550 शिकायतें मिल चुकी हैं। एनसीएससी के अध्यक्ष किशोर मकवाना ने बताया कि आयोग को मिलने वाली सबसे आम शिकायतें अनुसूचित जाति समुदाय के खिलाफ अत्याचार से संबंधित हैं, इसके बाद भूमि विवाद और सरकारी क्षेत्र में सेवाओं से संबंधित मुद्दे हैं। उन्होंने कहा, ‘शिकायतों को तेजी से दूर करने के लिए, अगले महीने से, मैं या मेरे सदस्य राज्य कार्यालयों का दौरा करेंगे और वहां लोगों के सामने आने वाली समस्याओं को देखेंगे।’ मकवाना ने कहा कि वह लोगों की समस्याओं को दूर करने के लिए सप्ताह में चार बार सुनवाई कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश से सबसे ज्यादा शिकायतें एनसीएससी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सभी राज्यों में सबसे ज्यादा शिकायतें उत्तर प्रदेश से दर्ज की गई हैं। अधिकारी ने बताया कि आयोग को हर दिन 200-300 शिकायतें मिलती हैं और उनमें से कई का कुछ ही दिनों में समाधान हो जाता है, इसलिए यहां देखा गया डेटा ज्यादातर उन शिकायतों का है जिनका समाधान होने की प्रक्रिया चल रही है। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोगों के खिलाफ अत्याचारों पर राष्ट्रीय हेल्पलाइन के आंकड़ों के अनुसार, 6,02,177 कॉल प्राप्त हुईं। इनमें से कुल शिकायतों की संख्या 5,843 थी, जिनमें से 1,784 का समाधान किया जा चुका है। उत्तर प्रदेश से आधे से अधिक कॉल यानी 3,10,623 प्राप्त हुई हैं। इस हेल्पलाइन की निगरानी सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा की जाती है। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत नवीनतम सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, अनुसूचित जाति के खिलाफ अत्याचार के अधिकांश मामले 13 राज्यों में केंद्रित थे, जहां 2022 में सभी मामलों का 97.7 प्रतिशत दर्ज किया गया। 2022 में उत्तर प्रदेश में 12,287 मामले दर्ज हुए, जो कुल मामलों का 23.78 प्रतिशत हिस्सा थे, इसके बाद राजस्थान में 8,651 (16.75 प्रतिशत) और मध्य प्रदेश में 7,732 (14.97 प्रतिशत) थे। जाति अत्याचार के महत्वपूर्ण मामलों वाले अन्य राज्य बिहार में 6,799 (13.16 प्रतिशत), ओडिशा में 3,576 (6.93 प्रतिशत) और महाराष्ट्र में 2,706 (5.24 प्रतिशत) थे। इन छह राज्यों में कुल मामलों का लगभग 81 प्रतिशत हिस्सा था।

पांच फर्जी ड्रग इंस्पेक्टर गिरफ्तार, छत्तीसगढ़-दुर्ग में नकली दवा के नाम पर मेडिकल स्टोर संचालकों से उगाही

दुर्ग। दवा दुकानों में छापेमारी कर नकली दवा के नाम पर दवाओं की सैंपलिंग लेकर दुकान संचालकों को धमकाने और उगाही करने वाले पांच फर्जी ड्रग इंस्पेक्टर पकड़े गए हैं. पुलिस ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है. धमधा थाना प्रभारी पीडी चंद्रा ने बताया कि ग्राम धुमा धमधा निवासी रघुनंदन प्रसाद वर्मा (68 वर्ष) ने शिकायत दर्ज कराई थी कि वह खेती-किसानी का काम करता है. उसके बेटे दिलेंद्र कुमार वर्मा ने तीन साल पहले लाइसेंस लेकर घर में मेडिकल दुकान खोली थी. गुरुवार दोपहर वह ग्राम सिलपट्टी में दशगात्र कार्यक्रम में शामिल होने गया था. उस दौरान दुकान में बैठे लड़के ने बताया कि एक शख्स ने कॉल कर खुद को ड्रग इंस्पेक्टर बताते हुए बिना लाइसेंस के दवा दुकान चलाने पर कार्यवाई के लिए धमकाने लगा. इसके साथ ही खैरागढ़ कलेक्टोरेट में मिलने के लिए बुलाया है. बेटे से बात खत्म होने के बाद रधुनंदन ने बहू को कॉल किया. उसने बताया कि स्कार्पियों (सीजी 17 केएच 8580) में पांच लोग सवार होकर घर आए और खुद को ड्रग इंस्पेक्टर बताकर मेडिकल दुकान में घुस गए. और बिना लाइसेंस दुकान चलाने पर जेल भेजने की धमकी लेने लगे. इसके साथ जाते समय कुछ दवाएं सैम्पल के लिए साथ ले गए. इसके बाद जब शाम को घर पहुंचा तो ग्राम खैरझिटी निवासी वैद्यराज जोहन लाल वर्मा से मुलाकात हुई. जब उन्हें घटनाक्रम बताया तो उन्होंने ने भी स्कार्पियों में सवार होकर 5 लोग आए, खुद को ड्रग इंस्पेक्टर बताए और आयुर्वेदिक दवाओं के दो डिब्बे अपने साथ ले गए. बुजुर्ग की शिकायत के बाद पुलिस ने 5 आरोपियों की पहचान पंडरिया कवर्धा निवासी मनीष जंघेल, भूषण वर्मा, तारन वर्मा, टाकेश्वर जंघेल, अतेनमणी अंचित के रूप में हुई.

गुजरात के सूरत में आयोजित “जल संचय” कार्यक्रम में शामिल होंगे सीएम डॉ मोहन

भोपाल मध्य प्रदेश के सीएम डॉ. मोहन यादव आज गुजरात के सूरत में आयोजित “जल संचय” कार्यक्रम में शामिल होंगे। सूरत के इंडोर स्टेडियम में होने वाले इस कार्यक्रम में मध्यप्रदेश सहित राजस्थान गुजरात के मुख्यमंत्री और बिहार के उप मुख्यमंत्री भी सहभागिता करेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल के मार्गदर्शन में सूरत में होने वाले “जल संचय” कार्यक्रम में भू-जल स्तर को बढ़ाने संबंधी विचार-विमर्श होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव आज इंदौर से दोपहर 1:45 बजे वायुयान से रवाना होकर 2:30 बजे सूरत पहुंचें। सीएम डॉ मोहन शाम 4:15 बजे सूरत के इंडोर स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होंगे। इस कार्यक्रम के बाद वे शाम 6:15 बजे सूरत से रवाना होकर शाम 7 बजे इंदौर आएंगे।

कुरुक्षेत्र-खजुराहो एक्सप्रेस में लगी आग, यात्रियों ने चेन पुलिंग कर रोकी ट्रेन

छतरपुर कुरुक्षेत्र से चलकर आ रही ट्रेन कुरुक्षेत्र एक्सप्रेस के डी 5 के कोच में ईशानगर स्टेशन पर आग लग गई। आग और धुआं देख यात्रियों ने चेन खींचकर ट्रेन को रोका और आग लगने की सूचना स्टेशन मास्टर को दी। रेल कर्मचारी की सूझबूझ से आग पर काबू पाया गया गया। किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई है। आग लगने के कारण एक घंटे ट्रेन खड़ी रही। बाद में ईशानगर से करीब 1घंटे की देरी से धीमी गति से छतरपुर के लिए रवाना हुई। डी 5 जनरल डब्बे में लगी थी आग घटना डी 5 जनरल डब्बा था। जिसमें अत्यधिक लोग भी यात्रा करते हैं। लेकिन हादसा रेलवे स्टेशन पर हुआ तो रेलवे स्टेशन के कर्मचारियों की सूझबूझ से आप पर काबू पाया जा सका। अगर यह हादसा रास्ते में कहीं होता तो जनरल डब्बे में बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं होता, जिससे बड़ा हादसा हो सकता था। मोटर का बेल्ट गर्म होने से लगी आग बताया गया है कि मोटर की बेल्ट गर्म होने के कारण आग लग गई थी। स्टेशन मास्टर आशीष यादव ने बताया कि जब ट्रेन चलनी शुरू हुई तो कोच पर नजर पड़ी। आग और धुआं देख ट्रेन को रोका गया। कोई जनहानि नहीं हुई है। अगर चलती ट्रेन में हादसा होता तो बड़ी घटना हो सकती थी। झांसी-कानपुर रेलवे ट्रैक पर फेंसिंग का कार्य शुरू झांसी जनपद से कानपुर के बीच बने रेलवे ट्रैक पर पशुओं की आवाजाही रोकने के लिए फेंसिंग लगाने का काम शुरू हो चुका है। लगभग 212 किलोमीटर तक पटरी के दोनों तरफ फेंसिंग होगी, ताकि कोई ट्रैक तक न पहुंच पाए। इसके लिए रेलवे प्रशासन एक अरब 89 करोड़ रुपए खर्च करने जा रहा है। पशुओं की आवाजाही की वजह से आए दिन रेलवे ट्रैक पर हादसे होते हैं। इससे पशु हानि तो होती ही है, साथ ही रेलवे को भी नुकसान उठाना पड़ता है। साथ ही ट्रेनों की रफ्तार भी प्रभावित होती है। हादसों पर रोक लगाने की कोशिश हादसों पर अंकुश लगाने के लिए रेल प्रशासन द्वारा रेलवे ट्रैक के दोनों ओर फेंसिंग लगाने की योजना बनाई गई थी। प्रथम चरण में झांसी-कानपुर रेल खंड के बीच काम शुरू कर दिया गया है। यहां एक्सप्रेस-वे की तर्ज पर डब्ल्यू बीम मेटल टाइप फेंसिंग कराई जा रही है। इसकी ऊंचाई भी इतनी भी इतनी रखी जा रही है कि जानवर कूदकर भी ट्रैक पर नहीं आ पाए।इतना ही नहीं, वाहनों के अनियंत्रित होकर रेलवे ट्रैक पर पहुंच जाने के मामलों में भी कमी आएगी। 1.89 अरब रुपये की लागत से कराई जा रही फेंसिंग डब्ल्यू बीम मेटल टाइप फेंसिंग का काम 1.89 अरब रुपए की लागत से कराया जा रहा है। इसमें झांसी से परौना के बीच 67 करोड़ और परौना से कानपुर के बीच 1.22 अरब रुपए खर्च किए जाएंगे। रेलवे की अगले साल तक इस काम को पूरा करने की योजना है। रेल ट्रैक पर ट्रेन के सामने पशु आने के हर माह 150 से अधिक मामले सामने आते रहते हैं। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि पिछले 6 माह के अंदर 1130 इस तरह के मामले सामने आ चुके हैं। नहीं थम रहा पशुओं का रेलवे ट्रैक पर आना रेल ट्रैक से सटे गांवों में रेलवे द्वारा जागरूकता अभियान चलाने के बाद भी पशुओं के रेल ट्रैक पर आने के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। अब इसकी रोकथाम के लिए रेलवे फेंसिंग कर रहा है। पीआरओ मनोज कुमार सिंह का कहना है कि ट्रेन के सामने पशुओं के आने से रेलवे को क्षति होती है, साथ ही ट्रेनों की गति भी प्रभावित होती है। इसलिए झांसी-कानपुर रेलमार्ग पर फेंसिंग कराई जा रही है।

रेल कर्मियों को बड़ी राहत, रेलवे के पैनल में शामिल हुई 13 निजी अस्पताल, होगा फ्री इलाज

बरेली रेल कर्मियों को गंभीर बीमारी होने पर इमरजेंसी की स्थिति में वह रेलवे के पैनल में शामिल निजी अस्पताल में उम्मीद कार्ड के आधार पर भर्ती हो सकेंगे। उन्हें रेलवे अस्पताल पहुंचकर रेफर कराने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। निजी अस्पताल 24 घंटे में रेलवे अस्पताल को ऑनलाइन इमरजेंसी रेफर लेटर भेजेगा। रेलवे अस्पताल की सहमति के बाद निश्शुल्क उपचार जारी रहेगा। यह सुविधा इमरजेंसी की स्थिति में ही मिलेगी। सामान्य स्थिति में रेलवे अस्पताल से चयनित निजी अस्पताल के लिए रेफर की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। एलएनएम का 13 निजी अस्पतालों के साथ करार जारी ललित नारायण मिश्र केंद्रीय रेलवे अस्पताल (एलएनएम) का 13 निजी अस्पतालों के साथ करार जारी रहेगा। एलएनएम प्रशासन ने मेदांता, द मेडिसिटी सेक्टर- 38, गुड़गांव के साथ 30 सितंबर 2025 तक कैशलेस उपचार के लिए करार कर लिया है। महाप्रबंधक सौम्या माथुर की सहमति के बाद चिकित्सा निदेशक डॉ. मो. असगर अली खान ने लखनऊ, वाराणसी, इज्जतनगर और गोंडा के मुख्य चिकित्सा अधीक्षकों को मेदांता में रेफर करने के लिए दिशा-निर्देश जारी कर दिया है।   रेलवे के पैनल में शामिल निजी अस्पतालों की लिस्ट मेंदाता, द मेडिसिटी, सेक्टर- 38, गुडगांव यशोदा हास्पिटल एंड रिसर्च सेंटर, गाजियाबाद सर्वोदय हास्पिटल एंड रिसर्च सेंटर, फरीदाबाद- हरियाणा फोर्टिस एस्कोर्ट हर्ट इंस्टीट्यूट एंड रिसर्च सेंटर- नई दिल्ली नियो हास्पिटल- सेक्टर- 50 नई दिल्ली विजिटेक आई सेंटर- नई दिल्ली बत्रा हास्पिटल एंड रिसर्च सेंटर, नई दिल्ली न्यू प्रकाश क्लीनिक, निकट कौवाबाग पुलिस चौकी, गोरखपुर श्रीराम जानकी नेत्रालय एडी चौक जुबिली रोड, गोरखपुर श्री साईं नेत्रालय दस नंबर बोरिंग सोनौली रोड, गोरखपुर फातिमा हास्पिटल, पादरी बाजार- गोरखपुर न्यू उदय हास्पिटल, गोलघर- गोरखपुर सावित्री हास्पिटल, दिलेजाकपुर- गोरखपुर बुजुर्गों की मदद को आगे आ रही बरेली पुलिस वहीं जिले की पुलिस को लेकर भी एक गर्व करने वाली बात सामने आई है। बरेली पुलिस अब बुजुर्गों की मदद को आगे आ रही है। एसएसपी के आदेश पर एसपी सिटी और एसपी नार्थ अपने-अपने क्षेत्रों में रहने वाले बुजुर्ग दंपती या एकल बुजुर्ग की लिस्ट तैयार करा रहे हैं। जिससे यदि उन्हें कोई समस्या होती है तो उनके दरवाजे तक स्वयं पुलिस मदद लेकर पहुंचे। उन्हें किसी भी तरह की कोई समस्या न हो। यहां ऐसे बहुत से बुजुर्ग हैं जो अपना बसर गुजर अकेले कर रहे हैं। उनकी देखभाल करने के लिए कोई नहीं हैं। इन्हीं लोगों की मदद को एक बार फिर से पुलिस आगे आ रही है। एसएसपी अनुराग आर्य ने बताया कि लिस्ट फाइनल होने के बाद जिन बुजुर्गों या दंपतियों की कोई देखरेख करने वाला कोई नहीं हैं। उनकी देखरेख के लिए संबंधित बीट आरक्षी की जिम्मेदारी तय की जाएगी। संबंधित थाना या चौकी का बीट सिपाही बुजुर्गों से संपर्क कर उनका नंबर लेगा और अपना नंबर उन्हें देकर आएगा। जिससे यदि उन्हें कभी कोई आवश्यकता होती है तो वह फोन कर सकें।

अगस्त के मुकाबले सितंबर महीने में खुदरा महंगाई में 1.38 फीसदी बढ़ सकती है

नई दिल्ली खाने-पीने की वस्तुओं और खासकर प्याज-टमाटर की कीमतों में तेज उछाल से खुदरा महंगाई सितंबर, 2024 में बढ़कर दो महीने बाद फिर आरबीआई के 4 फीसदी के दायरे बाहर निकलकर 5.03 फीसदी के स्तर पर पहुंच सकती है। इससे पहले जून में खुदरा महंगाई 5.08 फीसदी रही थी, जबकि जुलाई और अगस्त में यह घटकर क्रमशः 3.60 फीसदी एवं 3.65 फीसदी रही थी। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकनॉमी (सीएमआईई) की रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त के मुकाबले सितंबर में यानी एक महीने में खुदरा महंगाई में 1.38 फीसदी बढ़ सकती है। खाने-पीने की वस्तुओं की महंगाई दर भी 2.3 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 8 फीसदी के स्तर पर पहुंच सकती है। अगस्त में खाद्य महंगाई 5.7 फीसदी रही थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि दिसंबर, 2023 से जून, 2024 के बीच सब्जियों की महंगाई दर 27-30 फीसदी के दायरे में बनी हुई थी। इस साल जुलाई और अगस्त में यह घटकर क्रमशः 6.8 फीसदी और 10.7 फीसदी रह गई। इससे इन दोनों महीनों में खुदरा महंगाई में गिरावट देखने को मिली थी। सरकार 14 अक्तूबर को सितंबर के लिए खुदरा महंगाई के आंकड़े जारी कर सकती है। सितंबर के दूसरे पखवाड़े में टमाटर 10% महंगा सीएमआईई के मुताबिक, जून से लगातार बढ़ रहे प्याज के दाम सितंबर में 13.4 फीसदी और बढ़ गए हैं। इस दौरान खुदरा बाजार में प्याज की कीमत 36 रुपये से बढ़कर 51 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव पहुंच गई है। उपभोक्ता मामलों के विभाग (डीसीए) की ओर से जारी आंकड़ों का हवाला देते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि टमाटर की कीमतों में थोड़ी गिरावट देखने को मिली थी, लेकिन सितंबर के पहले पखवाड़े की तुलना में दूसरे में यह 10 फीसदी से अधिक महंगा हो गया है। सब्जियों की कीमतों में आएगी मामूली गिरावट रिपोर्ट में कहा गया है कि खुदरा महंगाई में 1.2 फीसदी का योगदान देने वाली सब्जियों की कीमतों में सितंबर में मामूली कमी आने की उम्मीद है। कुछ सब्जियों के दाम घटे हैं। आलू की खुदरा कीमत कम हुई है। बैंगन, गोभी और भिंडी जैसी सब्जियों की मंडी कीमतों में भी सात फीसदी से अधिक की गिरावट आई है। हालांकि, प्याज और टमाटर की कीमतों में तेज बढ़ोतरी से अन्य सब्जियों के दाम में गिरावट का असर कम हो सकता है। दाल-फल के घटे हैं दाम रिपोर्ट के मुताबिक, खरीफ की अच्छी फसल के कारण दालों की महंगाई घटने की उम्मीद है। इसकी महंगाई दर सितंबर में पिछले महीने के 13.6 फीसदी से घटकर 9.5 फीसदी रह सकती है। अनाज, मांस, फल, मसाले और चीनी पर महंगाई का दबाव कम हुआ है। तेल-वसा की महंगाई दर बढ़ सकती है।    

देश कैसे तय करते हैं कि युद्ध करना है या नहीं? क्या ये देश शुरू कर चुके हैं तीसरा World War?

नईदिल्ली इन दिनों इजरायल चौथरफा युद्ध लड़ रहा है वहीं रूस और यूक्रेन युद्ध भी खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है. ऐसे में कई लोग तीसरे विश्व युद्ध की संभावना जता रहे हैं, लेकिन इसे लेकर भी कई सवाल उठते हैं कि क्या सच में तीसरा विश्व युद्ध होना इतना आसान है? क्या विश्व युद्ध में कई देश आपस में लड़ते हैं तभी शुरु माना जाता है और विश्व युद्ध होने की परिस्थितियां क्या होती हैं. चलिए इन सवालों के जवाब जान लेते हैं. क्या होते हैं विश्व युद्ध के कारण? विश्व युद्ध कई कारणों से शुरू हो सकते हैं. जैसे राष्ट्रवाद यानी अपने देश के प्रति अत्यधिक लगाव और अन्य देशों के प्रति घृणा. जब राष्ट्रवाद चरम पर पहुंच जाता है तो युद्ध की स्थिति पैदा हो सकती है. या फिर एक शक्तिशाली देश दूसरे देशों पर अपना अधिकार जमाना चाहता है, तो इससे युद्ध की स्थिति पैदा हो सकती है. इसके अलावा देशों के बीच आर्थिक प्रतिस्पर्धा भी युद्ध का कारण बन सकती है. साथ ही धार्मिक मतभेद भी युद्ध का कारण बन सकते हैं और किसी देश में राजनीतिक अस्थिरता होने पर पड़ोसी देशों में भी अशांति फैल सकती है और युद्ध की स्थिति पैदा हो सकती है. क्या विश्व युद्ध में हर देश को भाग लेना होता है? नहीं, हर देश को विश्व युद्ध में भाग लेना जरूरी नहीं होता है. कई बार देश तटस्थ रहने का फैसला करते हैं, लेकिन अगर कोई देश किसी युद्ध में शामिल हो जाता है तो उसके पड़ोसी देशों पर भी युद्ध का असर पड़ सकता है. विश्व युद्ध के होते हैं ये भयानक परिणाम विश्व युद्ध के परिणाम बहुत ही विनाशकारी होते हैं. इसमें लाखों लोग अपनी जान गंवा देते हैं. युद्ध से देशों की अर्थव्यवस्था को भी नुकसान पहुंचता है. साथ ही युद्ध से समाज में अस्थिरता फैल जाती है और युद्ध के बाद देशों के राजनीतिक नक्शे में बदलाव आ सकता है.         अगर नाटो-यूक्रेन हमला करते हैं तो रूस क्या करेगा? तो रूस के पास क्या-क्या विकल्प हैं. – रूस मार्शल लॉ लगाकर अपने टारगेट्स को यूक्रेन तक पहुंचा दे. इसके बाद यूक्रेन के कई शहर गाजा की तरह दिखने लगेंगे. इसके लिए रूस टैक्टिकल न्यूक्लियर वेपन यानी परमाणु हथियारों का इस्तेमाल कर सकता है. – यमन के हूती और अन्य विद्रोही-आतंकी संगठनों को एडवांस हथियार देकर जंग में शामिल करे. इन लड़ाकों के जरिए रूस यूक्रेन और नाटो की सेना पर हमला करे. इससे यूक्रेन और नाटो के बीच Chaos पैदा होगा. – तीसरा रास्ता है रूस के ऊपर घूम रहे दुश्मन के सैटेलाइट्स को मार गिराया जाए. जिसमें अमेरिकी रईस एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स के स्टारलिंक सैटेलाइट्स भी हैं. – चौथा रास्ता है कि रूस नाटो के बाल्टिक और रोमानिया में मौजूद हथियार डिपो और लॉजिस्टिक्स पर हमला करके उसे बर्बाद कर दे. एक तरीका हो सकता है साइबरअटैक का. जिससे नाटो और यूक्रेन परेशान हो सकते हैं. परमाणु परीक्षण कर सकता है रूस ये भी सुनने में आ रहा है कि रूस इस समय एक परमाणु परीक्षण करने की तैयारी में है. ये परीक्षण उसकी अपनी जमीन पर होगा. लेकिन कहां और कब इसका खुलासा नहीं हुआ है. यह परीक्षण किसी भी समय हो सकता है. यह पश्चिमी देशों को अपनी ताकत दिखाने का एक तरीका है, ताकि जंग को रोका जा सके. अमेरिका में मौजूद रूस के एंबेसडर ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि ये दूसरा विश्व युद्ध नहीं है कि अमेरिकी पनडुब्बियां पानी के अंदर से आकर अचानक हमला कर देंगी. न उसमें छिप पाएंगी. हम हर जगह से नजर रखे हुए हैं. अगर अमेरिका या नाटो ने हमला किया तो हम परमाणु हथियारों का इस्तेमाल कर सकते हैं. रूस समंदर के अंदर खोज रहा है इंटरनेट केबल नाटो ने कहा है कि रूस इस समय समंदर के अंदर मौजूद इंटरनेट केबल्स को खोज रहा है. नाटो को लगता है कि रूस इन केबल्स पर हमला करना चाहता है. अगर रूस इन केबल्स को काटता है तो इसका असर पश्चिमी देशों समेत कई देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा.     इजरायल और ईरान के बीच बढ़ता तनाव इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष ने मध्य पूर्व में तनाव बढ़ा दिया है. ईरान शांत बैठा है लेकिन वह अपने समर्थन वाले आतंकी समूहों से इजरायल पर ताकतवर हमला करवा रहा है.  ईरान और अमेरिका के तनाव ने मध्य पूर्व में शांति को खतरे में डाल दिया है. उत्तर कोरिया की बढ़ती गतिविधियां उत्तर कोरिया लगातार अपनी मिसाइलों की ताकत बढ़ा रहा है. उनके परीक्षण कर रहा है. उसे चीन और रूस का समर्थन हासिल है. वह भी यूक्रेन को हराने में रूस का साथ दे रहा है. साथ ही यह भी कहा है कि अगर जरूरत पड़ी तो वह सीधे तौर पर रूस के साथ खड़ा होगा. रूस के दुश्मन से जंग लड़ने को तैयार है. अक्सर ही तानाशाह किम जोंग उन अमेरिका तक मार करने वाली मिसाइलों की धमकी देता रहता है. चीन ताइवान पर घुसपैठ की तैयारी में लगा चीन ताइवान से सिर्फ 350 किलोमीटर दूर एक बड़े पैमाने का एंफिबियस ऑपरेशन कर रहा है. मकसद है ताइवान पर घुसपैठ. इसमें चीन की सेना, वायुसेना और नौसेना के जवान शामिल हैं. फाइटर जेट्स, ड्रोन्स, हेलिकॉप्टर्स, जंगी जहाज, टैंक्स, बख्तरबंद गाड़ियां और सिविलियन नावें भी शामिल की गई हैं. इस मिलिट्री एक्सरसाइज की वजह से इलाके में तनाव है.

16 अक्टूबर को मनाई जाएगी शरद पूर्णिमा

शरद पूर्णिमा हर साल अश्विन माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है. हिंदू कैलेंडर के अनुसार, पूरे साल भर में 12 पूर्णिमा तिथियां होती हैं, जिसमें शरद पूर्णिमा को विशेष माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा को रास पूर्णिमा और कोजागर पूर्णिमा के नाम से भी जानते हैं. शरद पूर्णिमा की रात भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों के संग महारास रचाया था, इसलिए इसे रास पूर्णिमा कहते हैं. वहीं शरद पूर्णिमा की रात माता लक्ष्मी पृथ्वी पर विचरण करती हैं, जिसे कोजागर पूर्णिमा के नाम से जानते हैं. शरद पूर्णिमा की रात में खुले आसमान के नीचे खीर रखते हैं. काशी के ज्योतिषाचार्य चक्रपाणि भट्ट से जानते हैं कि इस साल शरद पूर्णिमा कब है? शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की किरणों में खीर रखने का समय क्या है? शरद पूर्णिमा 2024 तारीख वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल शरद पूर्णिमा के लिए जरूरी अश्विन शुक्ल पूर्णिमा तिथि 16 अक्टूबर बुधवार की रात 8 बजकर 40 मिनट से शुरू होगी. यह तिथि अगले दिन 17 अक्टूबर को शाम 4 बजकर 55 मिनट तक मान्य रहेगी. ऐसे में शरद पूर्णिमा का पर्व 16 अक्टूबर बुधवार को मनाया जाएगा. रवि योग में है शरद पूर्णिमा 2024 इस साल शरद पूर्णिमा को रवि योग बन रहा है. शरद पूर्णिमा को रवि योग सुबह में 6 बजकर 23 मिनट से बनेगा, जो शाम को 7 बजकर 18 मिनट तक रहेगा. उस दिन ध्रुव योग प्रात:काल से लेकर सुबह 10:10 बजे तक रहेगा. उसके बाद व्याघात योग है. शरद पूर्णिमा वाले दिन उत्तर भाद्रपद नक्षत्र शाम को 07:18 बजे तक है, उसके बाद से रेवती नक्षत्र है. हालांकि शरद पूर्णिमा पर पूरे दिन पंचक भी रहेगा. शरद पूर्णिमा 2024 खीर रखने का समय 16 अक्टूबर को शरद पूर्णिमा का चंद्रोदय शाम में 5 बजकर 5 मिनट पर होगा. शरद पूर्णिमा की रात खुले आसमान के नीचे चंद्रमा की किरणों में खीर रखते हैं. इस साल शरद पूर्णिमा पर खीर रखने का समय रात में 08 बजकर 40 मिनट से है. इस समय से शरद पूर्णिमा का चंद्रमा 16 कलाओं से युक्त होकर अपनी किरणों को पूरे संसार में फैलाएगा. शरद पूर्णिमा की रात क्यों रखते हैं खीर? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा 16 कलाओं से युक्त होता है और उस रात अमृत की वर्षा होती है. चंद्रमा की किरणें औषधीय गुणों वाली होती हैं, जो शीतलता भी प्रदान करती हैं. इस वजह से शरद पूर्णिमा की रात खीर बनाकर कुछ समय के लिए रखा जाता है, ताकि वह चंद्रमा की किरणों से औषधीय गुणों वाली हो जाए. उसे खाने से सेहत ठीक होती है.

प्रदेश में दिवाली मनाएगा संघ परिवार: प्रचारकों का ग्वालियर में होगा प्रशिक्षण वर्ग, संघ प्रमुख मोहन भागवत होंगे शामिल

ग्वालियर  मध्य प्रदेश के संघ सदस्यों के लिए इस बार दीपावली पर्व कुछ खास रहेगा।दरअसलराष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सभी सम-वैचारिक संगठनों के संगठन मंत्री और अन्य पदों की जिम्मेदारी संभाल रहे प्रचारकों का चार दिवसीय अखिल भारतीय प्रशिक्षण वर्ग इस बार ग्वालियर में आयोजित किया जा रहा है। 1 से 4 नवंबर तक यह वर्ग चलेगा। इसके लिए 30 अक्टूबर को सभी प्रचारक ग्वालियर के केदारधाम सरस्वती शिशु मंदिर में एकत्र होंगे। इसमें संघ प्रमुख डॉ  मोहन भागवत और अखिल भारतीय टोली के सभी प्रमुख सदस्य शामिल होंगे। संगठन के पदाधिकारी रहेंगे मौजूद ग्वालियर में आयोजित किए जा रहे इस कैंप में संघ के 3 दर्जन से अधिक अनुषांगिक संगठनों के नगर प्रचारक से लेकर अखिल भारतीय स्तर के पदाधिकारी भी मौजूद रहेंगे। जनवरी 2025 से शुरू होने वाले संघ के शताब्दी वर्ष के कार्यक्रम की रूपरेखा इसी कैंप के दौरान बनाई जाएगी। नए पाठ्यक्रम की बनेगी रूपरेखा संघ की स्थापना के अगले वर्ष 100 वर्ष पूरे हो रहे हैं। यही वजह है कि संघ इस वर्ग में अपने सम-वैचारिक संगठनों में भेजे गए प्रचारकों के प्रशिक्षण के पाठ्यक्रम में भी बदलाव करने जा रहा है। संघ की अखिल भारतीय टोली की मौजूदगी में ही नए पाठ्यक्रम की रूपरेखा तय की जाएगी। इसमें संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले सहित अन्य सहसरकार्यवाह भी उपस्थित रहेंगे। स्वयंसेवकों के लिए संघ शिक्षा वर्ग की तरह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने प्रचारकों के लिए भी समय-समय पर प्रशिक्षण वर्ग का आयोजन करता है। आमतौर पर हर पांच वर्ष में संघ की ओर से सभी सम-वैचारिक संगठनों के उन संगठन मंत्रियों का प्रशिक्षण वर्ग किया जाता है, जो पूर्णकालिक कार्यकर्ता के रूप में विश्व हिंदू परिषद, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, भारतीय मजदूर संघ, आरोग्य भारती, प्रज्ञा प्रवाह, चित्र भारती जैसे संगठनों में काम कर रहे हैं। इसी क्रम में ग्वालियर में संघ के सम-वैचारिक संगठनों में कार्यरत प्रचारकों को संघ चार दिवसीय प्रशिक्षण दिया जाएगा। संघ की स्थापना के अगले वर्ष 100 वर्ष पूरे हो रहे हैं। यही वजह है कि संघ इस वर्ग में अपने सम-वैचारिक संगठनों में भेजे गए प्रचारकों के प्रशिक्षण के पाठ्यक्रम में भी बदलाव करने जा रहा है। संघ की अखिल भारतीय टोली की मौजूदगी में ही नए पाठ्यक्रम की रूपरेखा तय की जाएगी। इसमें संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले सहित अन्य सहसरकार्यवाह भी उपस्थित रहेंगे। वर्ग के लिए संघ प्रमुख डा. मोहन भागवत 30 अक्टूबर को ग्वालियर पहुंचने की संभावना है। 31 अक्टूबर को अखिल भारतीय टोली की बैठक हो सकती है। इसकी तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।

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