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रिपोर्ट के मुताबिक देश में 6 वर्षों में ग्रामीण व शहर, दोनों जगह महिला कामगारों की संख्या में इजाफा हुआ

नई दिल्ली  देश में जॉब करने वाली महिलाओं की संख्या में तेजी आ रही है। पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) की 2023-24 की रिपोर्ट के मुताबिक लेबर फोर्स में काम करने वाले लोगों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है। रिपोर्ट बताती है कि पिछले 6 साल में यानी 2017-18 से लेकर 2023-24 तक बेरोजगारी दर में 50 फीसदी तक की कमी आई है। रिपोर्ट के मुताबिक इन 6 वर्षों में ग्रामीण हो या शहर, दोनों जगह महिला कामगारों की संख्या में इजाफा हुआ है। दोगुने से ज्यादा हुई मुस्लिम महिलाओं की संख्या जॉब करने वाली मुस्लिम महिलाओं की संख्या में भी 6 साल में दोगुने से ज्यादा बढ़ोतरी हुई है। आंकड़ों के मुताबिक साल 2017-18 में सिर्फ 9 फीसदी मुस्लिम महिलाएं नौकरी करती थीं। अब इसमें 2.3 गुना की बढ़ोतरी हुई है। यानी अब 20.7 फीसदी मुस्लिम महिलाएं जॉब करती हैं। मुस्लिम महिलाओं के बाद सिख महिलाओं के जॉब करने की संख्या में तेजी आई है। 6 वर्षों में यह 11 सिर्फ से बढ़कर 24.6 फीसदी हो गया है। इसमें 124 फीसदी की तेजी आई है। इसके बाद हिंदू महिला कामगारों की संख्या बढ़ी है। इसमें करीब 84 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इन 6 वर्षों में यह आंकड़ा 17.6 फीसदी से बढ़कर 32.3 फीसदी हो गया है। क्रिश्चियन महिलाओं की संख्या 80 फीसदी बढ़ी है। 6 साल पहले 20.2 फीसदी क्रिश्चियन महिलाएं जॉब करती थीं। अब यह आंकड़ा 36.3 फीसदी है। एसटी वर्ग की महिलाएं सबसे आगे सबसे ज्यादा जॉब अनुसूचित जनजाति महिला की महिलाएं करती हैं। आंकड़ों के मुताबिक इनकी संख्या 46 फीसदी है। अनपेड जॉब करने वाले भी कम नहीं रिपोर्ट के मुताबिक ऐसे लोगों की संख्या भी कम नहीं है जो बिना सैलरी या भत्ते के नौकरी करते हैं। रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि इन 6 वर्षों में 16 करोड़ नौकरियां पैदा हुई हैं यानी 2.8 करोड़ हर साल। इनमें से सालाना एक करोड़ ऐसी नौकरियां हैं जो परिवार के बिजनस से जुड़ी हैं। या फिर ऐसे लोग हैं जो सेल्फ एम्प्लॉइड हैं। इनमें काम करने वालों को कोई सैलरी नहीं मिलती। यानी ये अनपेड जॉब करते हैं।

दोस्त रूस ने अत्‍याधुनिक आइसब्रेकर शिप निर्माण के लिए भारत को चुना, चीन को दिया झटका

मास्‍को यूक्रेन युद्ध के बीच रूस की चीन पर निर्भरता लगातार बढ़ती जा रही है। इस बीच रूस को भारत से भी जमकर मदद मिली है। भारत ने रूस से बहुत बड़े पैमाने पर तेल खरीदा है। वह भी त‍ब जब रूस पर पश्चिमी देशों ने कई तरह के प्रतिबंध लगाए हैं। इस बीच रूस ने भारत को बड़ी खुशखबरी दी है। रूस ने अत्‍याधुनिक गैर परमाणु आइसब्रेकर शिप निर्माण के लिए भारत को चुना है। रूस ने यह फैसला ऐसे समय पर लिया है जब राष्‍ट्रपति व्‍लादिमीर पुतिन चाहते हैं कि आर्कट‍िक क्षेत्र में नादर्न सी रूट का विकास किया जाए और पश्चिमी देशों के लगाए हुए प्रतिबंधों को मात दी जाए। इस समुद्री रास्‍ते के लिए भी रूस ने भारत को ऑफर दिया है। रूस के इस ऑफर से न केवल दोनों देशों के बीच रिश्‍तों में मजबूती आएगी बल्कि इससे भारत आर्कटिक क्षेत्र में बड़ी ताकत बनकर उभरेगा। भारत सरकार दो जहाज बनाने वाली कंपनियों के साथ बातचीत कर रही है ताकि गैर परमाणु आइसब्रेकर को तैयार किया जा सके। इस पूरे सौदे की कीमत 6000 करोड़ रुपये होगी। इस पूरे सौदे को रूस की सरकारी परमाणु ऊर्जा कंपनी रोस्‍टोम का भी साथ म‍िल रहा है। रूसी कंपनी अच्‍छे माहौल वाली और क्षमता से लैस भारतीय कंपनी की तलाश कर रही है। वह भी तब जब अमेरिका ने प्रतिबंध लगा रखे हैं। नादर्न सी रूट से क्‍या होगा फायदा ? यूरेशिया टाइम्‍स की रिपोर्ट के मुताबिक नवंबर 2023 में रूस ने खुलासा किया था कि उसने भारत को गैर परमाणु आइसब्रेकर बनाने का प्रस्‍ताव दिया है। इनका संयुक्‍त उत्‍पादन किया जाना है। दरअसल, रूस चाहता है कि जहाजों के जरिए होने वाले वैश्विक व्‍यापार के लिए नादर्न सी रूट को विकसित किया जाए जो एक वैकल्पिक रास्‍ता होगा। इससे स्‍वेज नहर की तुलना में उत्‍तरी यूरोप और पूर्वी एशिया के देशों को ज्‍यादा जल्‍दी से सामान पहुंचाया जा सकेगा। रूस का लक्ष्‍य है कि इस रास्‍ते से कम से कम 15 करोड़ टन कच्‍चा तेल, एलएनजी, कोयला और अन्‍य सामान साल 2030 तक हर साल पहुंचाए जाएं। रूस चाहता है कि इसके लिए कम से कम 50 आइसब्रेकर और बर्फ में चलने वाले जहाज इस रास्‍ते में तैनात किए जाएं। साथ ही नए बंदरगाहों, टर्मिनल और आपातकालीन जहाज बनाए जाएं। आर्कटिक का समुद्री इलाका 6 महीने बर्फ में ढंका रहता है। यही वजह है कि आइसब्रेकर की आगे बहुत जरूरत पड़ेगी। पुतिन और पीएम मोदी के बीच मुलाकात में जहाजों के निर्माण को लेकर सहमति बनी थी। असल में अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह से यूरोपीय शिपयार्ड रूस के लिए जहाज नहीं बना पा रहे हैं। वहीं चीन, दक्षिण कोरिया और जापान के शिपयार्ड कम से कम साल 2028 तक के लिए बुक हैं। चीन की चाल को मात देगा भारत इसी वजह से रूस को अब विकल्‍प के रूप में भारत की मदद लेनी पड़ रही है जो उसका भरोसेमंद पार्टनर है। वहीं विश्‍लेषकों का कहना है कि रूस भारत के साथ दोस्‍ती बढ़ाकर चीन को संतुलित करने की कोशिश कर रहा है। यूक्रेन युद्ध के बाद रूस बुरी तरह से चीन पर निर्भर हो गया है। चीन चाहता है कि नादर्न सी रूट पर उसकी पकड़ बढ़े और वह रूस के साथ दोस्‍ती बढ़ा रहा है। वह इसे बीआरआई का हिस्‍सा बता रहा है। वहीं यह पूरा इलाका तेल और गैस से भरा हुआ है जिससे आने वाले समय में व्‍यापार बहुत ज्‍यादा बढ़ने की संभावना है।

भजनलाल सरकार ‘वन स्टेट वन इलेक्शन’ के तहत पंचायत राज के चुनाव कराने की बना रही योजना, छोटे जिलों के समाप्त करने के दिए संकेत

जयपुर  राजस्थान में गहलोत राज में बनाए गए नए जिले को लेकर आखिर क्या होगा? इसको लेकर प्रदेश में लगातार चर्चाएं हो रही है। इस बीच भजनलाल सरकार ‘वन स्टेट वन इलेक्शन’ को लेकर भी जुटी हुई है। अब कयास है कि भजनलाल सरकार की रिव्यू कमेटी के फैसले के बाद छोटे जिलों को समाप्त कर नए सिरे से सीमाएं निर्धारित की जाएंगी। इसके बाद सरकार ‘वन स्टेट वन इलेक्शन’ फार्मूले के तहत पंचायत राज के चुनाव कराएगी। ऐसे में माना जा रहा है कि अगले साल जनवरी महीने में होने वाले पंचायत राज के चुनाव फिलहाल टलेंगे। कयास है कि इससे पहले सरकार छोटे जिलों को समाप्त कर उनकी सीमा निर्धारित करने का काम करेगी। कानून मंत्री जिलों को समाप्त करने के दे चुके हैं संकेत गहलोत राज में बनाए गए 17 नए जिलों को लेकर हर दिन नई चर्चाएं गर्म है। सरकार यह संकेत दे चुकी है कि नए जिलों में से 5 से 7 जिलों को समाप्त किया जा सकता है। इसको लेकर सरकार में यह निर्णय फिलहाल विचाराधीन है। गत दिनों भजनलाल सरकार के कानून मंत्री जोगराम पटेल ने भी ‘वन स्टेट वन इलेक्शन’ चुनावी फार्मूले के लिए छोटे जिलों को समाप्त किए जाने की आवश्यकता बताई थी। उन्होंने संकेत दिए कि बिना जिलों पर फैसले के ‘वन स्टेट वन इलेक्शन’ के काम में प्रोग्रेस नहीं सकता। ऐसे में माना जा रहा है कि नवंबर दूसरे सप्ताह तक सरकार नए जिलों को लेकर फैसला ले सकती हैं। 7 हजार ग्राम पंचायतों के चुनाव पर लटकी तलवार राजस्थान में नए जिलों के फैसले को लेकर अभी तक असमंजस बना हुआ है। अब कौन से जिले रहेंगे और कौन से खत्म होंगे? इस बीच भजनलाल सरकार ‘वन स्टेट वन इलेक्शन’ भी करवाना चाहती है। ऐसी स्थिति में अब जनवरी 2025 में होने वाले 7 हजार ग्राम पंचायतों के चुनाव पर भी तलवार लटक गई है। सरकार के संकेत के अनुसार, अगर ‘वन स्टेट वन इलेक्शन’ का फॉर्मूला लागू हुआ, तो ग्राम पंचायतों के चुनाव टलेंगे और यहां पर सरकार प्रशासक नियुक्त करेगी। फिलहाल सरकार का पूरा ध्यान नए छोटे जिलों को समाप्त करने के फैसले पर टिका हुआ है। इसके बाद ही सरकार वन स्टेट वन इलेक्शन फॉर्मूला को लागू कर पाएगी। इस साल होने वाले नगर निकाय चुनाव भी टलेंगे हाल ही में यूडीएच मंत्री झाबर सिंह ने साफ कर दिया है कि भजनलाल सरकार ‘वन स्टेट वन इलेक्शन’ का फॉर्मूला लागू करने वाली है। इसके चलते राज्य की कई नगर निकायों में नवंबर महीने में कार्यकाल पूरा हो रहा है। मंत्री के बयान के बाद अब इन निकायों में 2025 में चुनाव होने की संभावना बन गई है। इसके चलते प्रदेश की पांच नगर निगम, 28 नगर पालिकाओं और 16 नगर परिषद में इस साल चुनाव नहीं होंगे। सरकार फाॅर्मूले के तहत 2025 में एक साथ चुनाव करवाने की तैयारी कर रही है। छोटे जिलों को समाप्त करने के लिए कमेटी भी सहमत गहलोत राज में बनाए गए 17 नए जिले को लेकर भजनलाल सरकार ने गत दिनों रिव्यू कमेटी से नए जिलों को लेकर परीक्षण रिपोर्ट बनवाई, जो अभी कमेटी के पास विचाराधीन है, जहां संयोजक मदन दिलावर की अध्यक्षता में राज्यवर्धन सिंह राठौड़, कन्हैया लाल चौधरी, हेमंत मीणा सुरेश सिंह रावत समेत कमेटी के मेंबर इस पर विचार कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि कमेटी के सभी मंत्री भी छोटे जिलों को मर्ज करने की राय में सहमत है। अब जल्द ही इस रिपोर्ट को कैबिनेट में रखा जाएगा, जहां निर्णय होने के बाद नए जिलों पर कार्रवाई शुरू होगी। यह जिले सरकार के फॉर्मूले में नहीं बैठ रहे फिट राजस्थान में 17 नए जिले बनाए गए, इनको लेकर भजनलाल सरकार सहमत नहीं है। गत दिनों सर्वे कमेटी ने नए जिलों को लेकर अपनी रिपोर्ट तैयार की। सूत्रों के अनुसार, करीब एक दर्जन जिले मापदंडों में फिट नहीं बैठ रहे हैं। इनमें नीम का थाना, कोटपूतली-बहरोड़, केकड़ी, खैरथल-तिजारा, दूदू, डीग, गंगापुर सिटी, शाहपुरा, फलोदी, सलूंबर, सांचैर और अनूपगढ़ जिले शामिल है। ऐसे में सरकार इनमें से कई जिलों को अपने पुराने जिलों में मर्ज कर सकती है।  

रतलाम : प्रसिद्ध महालक्ष्मी मंदिर में पांच दिवसीय दीपोत्सव में भक्तों से सजावट के लिए 17 अक्टूबर से सामग्री लेना शुरू की जाएगी

रतलाम  रतलाम शहर के माणकचौक स्थित प्रसिद्ध महालक्ष्मी मंदिर में पांच दिवसीय दीपोत्सव में भक्तों द्वारा सजावट के लिए दिए जाने वाले रुपये, आभूषण, मोती आदि से विशेष शृंगार की तैयारी हो गई है। 17 अक्टूबर से सामग्री लेना शुरू की जाएगी। पहले दिन धनतेरस पर ब्रह्म मुहूर्त में मंदिर के पट खोले जाएंगे। विशेष शृंगार के दर्शन भाईदूज तक लगातार किए जा सकेंगे। इसके बाद श्रद्धालुओं को सामग्री वापस देना शुरू की जाएगी। 2008 के बाद से बढ़ा शृंगार का स्वरूप इस सामग्री से होने वाले विशेष शृंगार को लेकर मंदिर देश भर में प्रसिद्ध है। पूर्व में कुछ ही लोग सामग्री देते थे, लेकिन वर्ष 2008 के बाद से सामग्री देने वाले भक्तों की संख्या बढ़ने पर शृंगार का स्परूप भी विस्तृत कर दिया गया। दी जाने वाली सामग्री को रजिस्टर में दर्ज कर श्रद्धालु को टोकन दिया जाता है। इसी टोकन से सामग्री वापस मिल जाती है। इस बार भी यही व्यवस्था रहेगी। सुरक्षा के लिए रहते हैं जरूरी इंतजाम पांच दिवसीय दीपोत्सव के दौरान सुरक्षा के लिए मंदिर समिति व पुलिस प्रशासन भी सभी जरूरी इंतजाम करता है। अतिरिक्त पुलिस बल लगाया जाता है। मंदिर में लगे सीसीटीवी कैमरे का डिस्प्ले पास में स्थित माणकचौक थाने पर रहता है। वहां से भी निगरानी होती है। मंदिर के संजय पुजारी ने बताया कि 17 से 28 अक्टूबर तक सामग्री ली जाएगी। भाई दूज के बाद रजिस्टर में दर्ज फोटो, टोकन आदि के आधार पर ही सामग्री वापस की जाएगी। रतलाम शहर के साथ यहां बाहर से भी लोग अपनी सामग्री जमा कराने के लिए मंदिर में पहुंचते हैं। महालक्ष्मी मंदिर में विशेष शृंगार पर नजर सामग्री – सोने-चांदी के आभूषण, चांदी की सिल्लियां, पांच से लेकर 500 रुपये तक के नोट, श्रीयंत्र, कछुआ, तिजोरी आदि महालक्ष्मी मंदिर में ली जाती है। सामग्री देने वाले औसतन श्रद्धालु – करीब 3000 श्रद्धालु यहां सामग्री जमा कराने के लिए पहुंचते हैं। मान्यता – महालक्ष्मी मंदिर में रखी शृंगार सामग्री वापस लेने के बाद घर की तिजोरी, पूजन स्थान पर रखने से सालभर सुख-समृद्धि बनी रहती है। व्यवस्था – धनतेरस से मंदिर में विशेष दर्शन शुरू होते हैं। दर्शन व्यवस्था में भी भक्त सहयोग करते हैं। सुरक्षा – दीपोत्सव में मंदिर में विशेष पुलिस बल के साथ ही सीसीटीवी कैमरों से भी निगरानी की जाती है।

17 नवंबर को रात नाै बजकर सात मिनट पर विधिविधान बदरीनाथ धाम के कपाट साथ बंद होंगे

गोपेश्वर दशहरे के मौके पर बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने की तिथि घोषित कर दी गई है। आगामी 17 नवंबर को रात नाै बजकर सात मिनट पर विधिविधान के कपाट साथ बंद होंगे। इस यात्रा वर्ष विश्व प्रसिद्ध श्री बदरीनाथ धाम के कपाट रविवार 17 नवंबर रात्रि 9 बजकर 07 मिनट पर शीतकाल हेतु बंद हो जायेंगे। श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अध्यक्ष अजेंद्र अजय ने बताया कि कपाट बंद होने की तिथि आज विजय दशमी के अवसर पर श्री बदरीनाथ धाम मंदिर परिसर में पंचाग गणना पश्चात समारोहपूर्वक तय की गयी। उन्होंने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन तथा प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कुशल नेतृत्व में चारधाम यात्रा में बड़ी संख्या में तीर्थयात्री दर्शन को पहुंचे। सरकार एवं मंदिर समिति के प्रयासों से सभी यात्री सुविधाएं मुहैया हुई है। कुल 38 लाख तीर्थयात्री पहुंचे चारधाम अभी तक 11 लाख से अधिक तीर्थयात्री श्री बदरीनाथ धाम पहुंचे हैं। साढ़े 13 लाख से अधिक तीर्थयात्री श्री केदारनाथ धाम दर्शन को पहुंचे हैं। इस तरह साढ़े 24 लाख तीर्थयात्रियों ने श्री बदरीनाथ -केदारनाथ के दर्शन कर लिए हैं। कुल 38 लाख तीर्थयात्री चारधाम यात्रा पर पहुंचे हैं। मां नवदुर्गा तिला भराड़ी मंदिर में कन्या पूजन के साथ पूजा अर्चना की नवरात्रि के नौवे दिवस के अवसर पर बदरीनाथ मार्ग कंचनगंगा में क्षेत्र की अराध्य देवी मां नवदुर्गा तिला भराड़ी मंदिर में कन्या पूजन तथा मां सिद्धिदात्री स्वरूप की पूजा-अर्चना की गई। श्री बदरीनाथ – केदारनाथ मंदिर समिति ( बीकेटीसी) उपाध्यक्ष किशोर पंवार सपरिवार माता के मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना में शामिल हुए तथा क्षेत्र के सुख- शांति का आशीर्वाद मांगा। इस अवसर जय मां नंदा समिति अध्यक्ष राजदेव मेहता एवं पदमेंद्र भंडारी ने बीकेटीसी उपाध्यक्ष किशोर पंवार का शाल ओढ़ाकर स्वागत किया। माता के मंदिर में जय मां नन्दा समिति बामणी , पांडुकेश्वर के सौजन्य से विशाल भण्डारा का आयोजन किया गया इससे पहले मां दुर्गा की पूजा अर्चना के पश्चात कन्या पूजन तथा प्रसाद वितरण किया गया। बीकेटीसी मीडिया प्रभारी डा. हरीश गौड़ ने बताया कि विजय दशमी के दिन श्री बदरीनाथ मंदिर परिसर दुर्गा पूजा का यज्ञ हवन के साथ समापन होना है।  इस अवसर पर बीकेटीसी उपाध्यक्ष किशोर पंवार सहित अध्यक्ष राजदेव मेहता,पदमेंद्र भंडारी, अमित पंवार , सुधीर मेहता, वीरेंद्र भंडारी, रणजीत भंडारी आदि मौजूद रहे।

महाराष्ट्र में RSS के जुलूस के दौरान अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों ने कथित तौर पर नारेबाजी की, इलाके में तनाव, दो FIR दर्ज

मुंबई दशहरा से एक दिन पहले महाराष्ट्र के रत्नागिरी में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के जुलूस के दौरान तनाव पैदा हो गया। जानकारी के मुताबिक जुलूस के दौरान अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों ने कथित तौर पर नारेबाजी की। इससे इलाके का माहौल तनावपूर्ण हो गया। रत्नागिरी के एक पुलिस अधिकारी के मुताबिक शुक्रवार रात को कोंकण नगर इलाके में यह घटना हुई। इसके बाद पुलिस ने दो मामले दर्ज किए हैं। पुलिस अधिकारी ने बताया कि जब दशहरा उत्सव की पूर्व संध्या पर आरएसएस ने इलाके में पथ संचलन किया तो अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों ने कथित तौर पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले नारे लगाए। हालांकि कोई हिंसा नहीं हुई। मगर रात को लोगों की भीड़ थाने में जुट गई। लोगों ने आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की। अधिकारी ने बताया कि भारतीय न्याय संहिता के प्रासंगिक धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। अभी किसी की गिरफ्तारी नहीं पुलिस अधिकारी ने बताया कि हमने शिकायतों के आधार पर दो मामले दर्ज किए हैं। पांच आरोपियों की पहचान कर ली गई है। उन्हें नोटिस जारी कर दिए हैं। अभी तक किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया है। भागवत ने विजयादशमी पर क्या कहा? नागपुर स्थित आरएसएस मुख्यालय में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने विजयादशमी कार्यक्रम को संबोधि कियाा। उन्होंने हिंदुओं से एक होने की अपील की। भागवत ने बांग्लादेश का उदाहरण दिया और कहा कि पहली बार हिंदू एकजुट हुए और अपनी रक्षा के लिए सड़कों पर उतरे। उन्होंने कहा कि जब तक अत्याचार करने की कट्टरपंथी प्रकृति बनी रहेगी तब तक न केवल हिंदू बल्कि सभी अल्पसंख्यक खतरे में रहेंगे। कमजोरी कोई विकल्प नहीं संघ प्रमुख ने बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हो रही हिंसा की निंदा की। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में जो कुछ हो रहा है, वह भारत के हिंदुओं के लिए भी सीख है। हमारे पड़ोसी बांग्लादेश में जो कुछ हुआ? इसके कुछ तात्कालिक कारण हो सकते हैं और जो लोग चिंतित हैं, वे इस पर चर्चा करेंगे। मगर मूल मुद्दा हिंदुओं के खिलाफ बार-बार हो रहा अत्याचार है। भागवत ने आगे कहा कि अगर हम कमजोर हैं तो हम अत्याचार को आमंत्रित कर रहे हैं। हम जहां भी हैं, हमें एकजुट और सशक्त होने की जरूरत है। कमजोरी कोई विकल्प नहीं है। बांग्लादेश पर भड़के भागवत भागवत ने कहा कि बांग्लादेश में ऐसी चर्चाएं चल रही हैं कि उन्हें पाकिस्तान का साथ देना चाहिए क्योंकि उसके पास परमाणु शक्ति है और उन्हें भारत से खतरा है। उन्होंने कहा कि जिस देश को उसके निर्माण में पूरा समर्थन मिला, वह अब भारत के खिलाफ इस तरह के बयान को बढ़ावा दे रहा है।

मुनिश्री विशांत सागर घुवारा आए थे, जहा उनके शिष्य ने जैन समाज की लड़की को भगा ले गया, परिवारवालो ने मुनिश्री को पीटा

छतरपुर मुनिश्री के सेवकों में शामिल एक शिष्य जैन समाज की लड़की को भगा ले गया। लड़की भागे जाने की जानकारी जैन परिवार को लगी तो परिवार के लोग शनिवार सुबह करीब पांच बजे मुनिश्री के पास पहुंचे और उनके साथ मारपीट कर दी और गाली गलाैज की गई। बाद में समाज के लोगों ने उक्त परिवार के खिलाफ थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है। थाने में करीब सात लोगों पर मारपीट सहित अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। जैन समाज के लोगों ने बताया कि घटना छतरपुर जिले के घुवार क्षेत्र की है। जहां मुनिश्री 1008 विशांत सागर महाराज चतुर्थ मास में घुवारा आए थे। उनके साथ शिष्यों में शामिल एक शिष्य का किसी लड़की से प्रेम प्रसंग चल रहा होगा। वह 10 हजार के वेतन पर था। बीते दिवस वह दोनों भाग गए। शिष्य फिरोजाबाद का रहने वाला बताया गया है। लड़की को भगाकर ले जाने के मामले में जैन परिवार के लोग एकत्रित होकर मुनिश्री के पास पहुंचे। जिन्होंने शुक्रवार को रात के समय हंगामा किया और गेट तोड़ने की कोशिश की गईं। गालियां दी तब मुनिश्री साधना में लीन थे। जब वह बाहर नहीं आए तो दूसरे दिन शनिवार को सुबह पांच बजे पहुंच गए और मुनिश्री के साथ मारपीट कर दी। बाद में समाज के सभी लोग एकत्रित हुए और थाने पहुंचे। साथ ही मुनिश्री के साथ धरने पर बैठ गए। पुलिस ने आरोपित सुरेंद्र जैन, जिनेंद्र जैन, महेंद्र जैन, नरेंद्र जैन सहित उनके लड़कों पर मामला दर्ज कर लिया है। अब जैन समाज के लोगों की बड़ी बैठक बुलाई गई है। जिसमें अन्य जिलों से करीब एक हजार लोगों के शामिल होने की उम्मीद जताई है। मामले को लेकर भगवां थाना प्रभारी रामस्वरूप उपाध्याय ने बताया कि आरोपितों के खिलाफ मामला दर्ज कर मामला जांच में ले लिया है।

PM मोदी के पास वैश्विक राजनेता बनने का मौका, Russia Ukraine War को शांत कराने में सक्षम – फरीद जकारिया

नई दिल्ली रूस-यूक्रेन युद्ध पर विदेश नीति के जानकार फरीद जकारिया ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि यूक्रेन जंग भारत के लिए बड़ा मौका है। भारत को शांतिदूत बनकर अपनी कूटनीतिक ताकत दिखानी चाहिए। जकारिया ने पीएम मोदी की वैश्विक छवि की तारीफ करते हुए कहा कि पीएम मोदी रूस-यूक्रेन युद्ध में एक महत्वपूर्ण मध्यस्थ की भूमिका निभा सकते हैं। ‘मोदी निभा सकते हैं बड़ी भूमिका’ एक न्यूज चैनल से बात करते हुए जकारिया ने कहा कि दुनिया में बहुत कम नेता ऐसे हैं जो रूस और यूक्रेन दोनों से प्रभावी ढंग से बात कर सकते हैं। उन्होंने सिर्फ दो नाम लिए, पहला तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैय्यप एर्दोगन और दूसरा प्रधानमंत्री मोदी। जकारिया ने कहा कि यूक्रेन में जंग थमी हुई है। बहुत कम लोग ऐसे हैं जिनके पास दोनों पक्षों से बात करने की विश्वसनीयता है… अगर प्रधानमंत्री मोदी खुद को मध्यस्थ के रूप में पेश करते हैं, तो मुझे लगता है कि वह बहुत रचनात्मक भूमिका निभा सकते हैं… मेरा मानना है कि एर्दोगन से भी ज्यादा मोदी इसमें भूमिका निभा सकते हैं। ‘वैश्विक राजनेता बनने का मौका’ जकारिया ने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध में मध्यस्थता करना पीएम मोदी के लिए एक वैश्विक राजनेता बनने का शानदार मौका है। उन्होंने माना कि भारत पारंपरिक रूप से विदेश नीति के मामलों में तटस्थ रहता है। लेकिन, अगर भारत चाहे तो वह एक बहुत ही व्यावहारिक और रचनात्मक भूमिका निभा सकता है। ‘भारत की छवि होगी मजबूत’ जकारिया के अनुसार, ऐसा कदम न केवल वैश्विक कूटनीति के लिए फायदेमंद होगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की छवि को भी ऊंचा उठाएगा। हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा कि इसके लिए पीएम मोदी को दोनों देशों के बीच मध्यस्थता की चुनौतीपूर्ण भूमिका निभानी होगी, जो अक्सर मुश्किलों और आलोचनाओं से भरी होती है। जकारिया ने कहा, ‘अगर मोदी चाहें तो यह उनके लिए एक वैश्विक राजनेता बनने का शानदार मौका है।’ उन्होंने शांति की तलाश में भारतीय नेता के कूटनीतिक कौशल और उनके मंच को महत्वपूर्ण बताया। रूस और यूक्रेन दोनों में अच्छी साख जकारिया के बयान से साफ है कि भारत के पास रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने में अहम भूमिका निभाने की क्षमता है। पीएम मोदी की रूस और यूक्रेन दोनों से अच्छी साख है। ऐसे में, वह शांति वार्ता शुरू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि, यह देखना होगा कि भारत इस चुनौती को स्वीकार करता है या नहीं। अगर भारत मध्यस्थता करने का फैसला करता है, तो यह एक ऐतिहासिक कदम होगा। इससे ना सिर्फ युद्ध खत्म करने में मदद मिलेगी, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की छवि भी मजबूत होगी।

खाने में थूकना, पेशाब करना यह सभ्य मानव समाज के लिए कलंक है, मुस्लिम धर्मगुरुओं को कट्टरता से इनका का विरोध करना चाहिए- योगगुरु

 हरिद्वार योगगुरु स्वामी रामदेव ने मुस्लिम धर्मगुरुओं से मुस्लिम युवकों के खाने में थूकने, पेशाब आदि करने की घटनाओं का पुरजोर विरोध करने का आह्वान किया है. योगगुरु ने आश्चर्य जताते हुए कहा कि ऐसी घटनाओं पर मुस्लिम धर्मगुरु चुप्पी साधे हुए है. उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं से मुस्लिम धर्म और कुरान पाक का प्रचार नहीं होता है. मुसलमान और कुरान ऐसी घटनाओं से बदनाम हो रहे है. शनिवार को कनखल के दिव्य योग मंदिर में योगगुरु स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण ने कन्या पूजन किया. इस दौरान योगगुरु और आचार्य ने लोगों को दशहरा की शुभकामनाएं दी. हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर वायरल थूकने, पेशाब करने और गंदगी फैलाने की वीडियो पर बोलते हुए योगगुरु ने कहा कि ऐसी घटनाओं का मुस्लिम मुल्लों, मौलवियों और धर्मगुरु को आगे आकर बोलना चाहिए. स्वामी रामदेव ने कहा कि ऐसी घटनाओं से इस्लाम का प्रचार नहीं होता है. कई दफा घटनाएं हो गई है. मुस्लिम धर्मगुरु ऐसी घटनाओं पर मौन हो जाते है. ऐसी घटनाएं रोकने के लिए मुस्लिम धर्मगुरुओं को बोलना चाहिए. कट्टरता से घटनाओं का विरोध करना चाहिए. यह सभ्य मानव समाज के लिए कलंक जैसी घटनाएं है. वायरल हो रहे वीडियो गौरतलब है कि बीते कुछ दिनों में गाजियाबाद और नोएडा समेत तमाम जगहों पर खाना बनाते समय उसमें थूकने और पेशाब करने के वीडियो वायरल हो रहे हैं. ये तमाम वीडियो सोशल मीडिया पर छाए हुए हैं. हालांकि योगी सरकार ने इस वीडियो के सामने आने के बाद अधिकारियों को निर्देश दिया है. सीएम योगी आदित्यनाथ ने होटल्स और रेस्टोरेंट में जांच करने के साथ ही सीसीटीवी लगाने का निर्देश दिया है. साथ ही पुलिस और प्रशासन से ऐसी घटनाओं पर कड़ा एक्शन लेने के लिए कहा गया है. जबकि अन्य राज्यों में भी ऐसी घटनाओं पर एक्शन की मांग हो रही है.  बढ़ रहा है गैर-मुस्लिमों से दुश्मनी का भाव मुसलमान जहां हैं, वहां बस दो ही मानसिकता के साथ काम कर रहे हैं। पहली- गैर-मुस्लिमों को जैसे भी हो सके, प्रताड़ित करो, उनका धर्म भ्रष्ट करो और दूसरी- तरह-तरह के जिहाद से उनका धर्म परिवर्तन करवाओ। अब तो लगातार मिल रहे प्रमाणों से यह साबित सा हो गया है कि मुसलमान न हिंदुओं के साथ सामंजस्य चाहते हैं और ना हिंदुस्तान को अपना मानते हैं। लेकिन उनकी मांग यह है कि हिंदू समावेशी विचारों से तनिक भी नहीं भटकें, धर्मनिरपेक्षता का दामन न छोड़ें। फिर पारदर्शिता से परहेज क्यों? किसकी दुकान है, यह बताने में क्या हर्ज? क्यों बात-बात में इस्लाम को खतरे में देखने वाला मुसलमान अपने होटलों, ढाबों के नाम हिंदू देवी-देवताओं पर रखेगा? उत्तर प्रदेश और कांवड़ यात्रा के मार्ग ही नहीं, पूरे देश में अगर कोई कुछ छिपाकर कारोबार कर रहा है तो क्या वह गुनाह नहीं है? इतना दोहरपान लाते कहां से हैं, जनाब? मुसलमानों और कथित मुस्लिम हितैषी राजनीति के ठेकेदारों के दोहरेपेन की पराकाष्ठा देखें। जो आज हिंदुओं को कांवड़ यात्रा के अनुष्ठान में भी मुसलमानों के थूक, पेशाब वाली खाने-पीने की चीजें स्वीकार करने को कह रहे हैं, वही मुसलमानों की हलाल कॉस्मेटिक्स, हलाल दवाई और यहां तक कि हलाल होटल, हलाल यात्रा तक की तरफदारी करते हैं।  मुख्तार अब्बास नकवी, जावेद अख्तर, असदुद्दीन ओवैसी, एसटी हसन समेत उन तमाम मुसलमानों की गैरत कैसे मर गई जब मुसलमानों ने हलाल इकॉनमी खड़ी कर ली? इनमें से किसकी हिम्मत है जो मुसलमानों से पूछ ले कि आखिर चौबीसों घंटे, हर जगह, हर चीज में हलाल, हलाल की रट लगाने की क्या जरूरत है?  बल्कि उलटा ये हलाल के लिए मुसलमानों को उकसाएंगे, उनका साथ देंगे, हजार तरह के तर्क देंगे। लेकिन हिंदुओं को समावेशी होना चाहिए। हिंदुओं को तो मंदिरों में भी गंगाजल नहीं मुसलमानों का पेशाब पीकर जाना चाहिए। क्या ये यही चाहते हैं? इनमें है कोई माई का लाल जो दावा करे कि मुसलमान खाने-पीने के सामानों में थूक नहीं रहे, पेशाब नहीं कर रहे, उसे हर तरह से अपवित्र और गंदा नहीं कर रहे? है इनमें हिम्मत कि सोशल मीडिया और मुख्य धारा के मीडिया में आ रही थूक, पेशाब वाली खबरों और प्रमाण के रूप में पेश किए जा रहे वीडियोज को नकार दें?

देशभर के मदरसों में पढ़ रहे बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा को लेकर एनसीपीसीआर ने फंडिंग पर रोक लगाने के दिए निर्देश

नई दिल्ली राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) के चेयरपर्सन प्रियंक कानूनगो ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण पत्र जारी किया है, जिसमें उन्होंने देशभर में मदरसों में पढ़ रहे बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा को लेकर सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों और प्रशासकों को निर्देशित किया है। इस पत्र का उद्देश्य मदरसों और बच्चों के संवैधानिक अधिकारों के बीच उत्पन्न हो रहे टकराव को समाप्त करना है। पत्र की मुख्य बातें प्रियंक कानूनगो ने पत्र में उल्लेख किया है कि NCPCR, 2005 के बाल अधिकार संरक्षण अधिनियम के तहत स्थापित एक वैधानिक निकाय है, जिसका मुख्य उद्देश्य बच्चों के अधिकारों की रक्षा करना और इस संदर्भ में विभिन्न मुद्दों की निगरानी करना है। उन्होंने यह भी कहा कि आयोग को 2015 के बाल न्याय (देखभाल और संरक्षण) अधिनियम और 2009 के मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा के अधिकार (RTE) अधिनियम के सही और प्रभावी कार्यान्वयन की निगरानी करने का अधिकार प्राप्त है। पत्र में यह बताया गया है कि RTE अधिनियम का उद्देश्य बच्चों को समान शिक्षा का अवसर प्रदान करना है, लेकिन मदरसों की स्थिति के कारण बच्चों के मौलिक अधिकारों और अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकारों के बीच टकराव उत्पन्न हो गया है। धार्मिक संस्थानों को RTE अधिनियम से छूट मिलने के कारण कई बच्चे औपचारिक शिक्षा प्रणाली से बाहर हो गए हैं, जिससे उनके शिक्षा के अधिकार का उल्लंघन हो रहा है। NCPCR की रिपोर्ट का महत्व इस पत्र के साथ NCPCR ने “गार्जियंस ऑफ फेथ या ओप्रेसर्स ऑफ राइट्स: कंस्टीट्यूशनल राइट्स ऑफ चिल्ड्रन वर्सेस मदरसा” शीर्षक से एक विस्तृत रिपोर्ट भी प्रस्तुत की है। इस रिपोर्ट में कुल 11 अध्याय शामिल हैं, जो मदरसों के इतिहास, उनकी कार्यप्रणाली और बच्चों के शिक्षा अधिकारों के उल्लंघन के विभिन्न पहलुओं को छूते हैं। रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि केवल एक मदरसा बोर्ड का गठन या UDISE कोड प्राप्त करना यह सुनिश्चित नहीं करता कि मदरसे RTE अधिनियम की शर्तों का पालन कर रहे हैं। वित्तीय सहायता पर रोक NCPCR ने सभी राज्यों में मदरसों और मदरसा बोर्डों को राज्य से मिलने वाली वित्तीय सहायता को रोकने और उन्हें बंद करने की सिफारिश की है। आयोग ने यह स्पष्ट किया है कि मदरसा बोर्ड नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं, और ऐसे में इनकी गतिविधियों को नियंत्रित करना अत्यंत आवश्यक है।   बच्चों के दाखिले की दिशा में सुझाव पत्र में यह भी सुझाव दिया गया है कि सभी गैर-मुस्लिम बच्चों को मदरसों से बाहर निकालकर स्कूलों में दाखिल कराया जाए। वहीं, मुस्लिम समुदाय के बच्चों को, चाहे वे मान्यता प्राप्त हों या न हों, औपचारिक स्कूलों में दाखिल कराने की दिशा में कदम उठाने का निर्देश दिया गया है। NCPCR का यह प्रयास बच्चों को एक सुरक्षित, स्वस्थ और उत्पादक वातावरण में बढ़ने का अवसर प्रदान करना है। उनका लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी बच्चे देश के निर्माण की प्रक्रिया में प्रभावी ढंग से योगदान कर सकें। NCPCR की अपेक्षाएँ इस रिपोर्ट की एक प्रति सभी मुख्य सचिवों के लिए संलग्न की गई है, ताकि वे आवश्यक कार्रवाई कर सकें। NCPCR की इस पहल का उद्देश्य बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए मदरसों की फंडिंग पर रोक लगाना है। यह कदम न केवल बच्चों के शिक्षा अधिकारों को सशक्त करेगा, बल्कि समाज में समानता और न्याय को भी बढ़ावा देगा। इस प्रकार, NCPCR ने एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाए हैं। यह स्थिति न केवल शिक्षा के अधिकार को बढ़ावा देगी, बल्कि समाज में सामाजिक न्याय और समानता को भी स्थापित करने में सहायक होगी। आयोग की यह पहल इस बात का प्रमाण है कि बच्चों के भविष्य के लिए उचित और सख्त कदम उठाने की आवश्यकता है, ताकि सभी बच्चों को उनके अधिकारों का पूरा लाभ मिल सके और वे एक उज्ज्वल भविष्य की ओर बढ़ सकें।

दुर्गा पूजा मंडपों में कट्टरपंथियों ने किया इस्लामिक क्रांति का आह्वान, बांग्लादेश में दशहरे का माहौल बिगड़ा!

ढाका बांग्लादेश में हिंदुओं के साथ हो रहे भेदभाव के मामले रूके नहीं थे कि अब दुर्गा पूजा के दौरान भी हिंदुओं को कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। 1 अक्टूबर से देश भर में चल रहे दुर्गा पूजा समारोह से संबंधित 35 घटनाएं हुई हैं। इसमें 11 मामले दर्ज किए गए हैं और 17 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। दुर्गा पूजा मंडप से कट्ट्ररपंथियों ने इस्लामिक क्रांति का आह्वान किया है। ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, आईजीपी मोहम्मद मोइनुल इस्लाम ने कहा कि देश भर में 32,000 से ज्यादा मंडपों में दुर्गा पूजा मनाई जा रही है। 35 घटनाएं सामने आई हैं। हर एक मामले में या तो केस दर्ज किया गया है या जीडी दर्ज की गई है और उसके अनुसार कार्रवाई की गई है। पिछले 11 दिनों में 11 मामले दर्ज किए गए हैं, जबकि मामूली तोड़फोड़ और चोरी जैसी घटनाओं के लिए 24 जीडी दर्ज की गई हैं। अब तक इन घटनाओं में शामिल होने के आरोप में 17 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। मंडप से इस्लामी क्रांति का आह्नान इससे पहले गुरुवार के दिन ढाका से करीब 250 किलोमीटर की दूरी पर चटगांव के दुर्गा पूजा मंडप के मंच पर आधा दर्जन से ज्यादा लोगों ने इस्लामी क्रांति का आह्वान करते हुए एक गीत गाया। इससे लोगों में भारी गुस्सा फैल गया। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, चटगांव मेट्रोपॉलिटन पुलिस ने शुक्रवार को इस्लामी क्रांति का आह्वान करने के आरोप में दो लोगों को अरेस्ट किया है। पूजा समिति के महासचिव सजल दत्ता समेत सात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। इस मामले पर आईजीपी ने कहा, ‘हमने चटगांव में हुई घटना के सिलसिले में गुरुवार को छापेमारी के बाद दो लोगों को गिरफ्तार किया। घटना का कोई खास मकसद था या नहीं, इसकी जांच की जा रही है। कभी-कभी स्थानीय घटनाएं सूचना के तेजी से फैलने के कारण व्यापक ध्यान आकर्षित करती हैं। हमें छोटी घटनाओं को बड़ी घटनाओं में बदलने से रोकने के लिए सतर्क रहना चाहिए।’ मोहम्मद यूनुस भी मंदिर का करेंगे दौरा पांच दिन के हिंदू धार्मिक उत्सव की शुरुआत बुधवार को देवी दुर्गा के आह्वान के साथ में हुई। इस पूरे कार्यक्रम का समापन रविवार को देवी दुर्गा की मूर्तियों के विसर्जन के साथ में होगा। इसी बीच, नोबेल पुरस्कार विजेता और बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस प्रमुख शक्तिपीठों में से एक सदियों पुराने ढाकेश्वरी मंदिर का दौरा करेंगे। बांग्लादेश की आबादी में से 8 फीसदी हिंदुओं की आबादी है। यहां पर शेख हसीना के प्रधानमंत्री पद को छोड़ने के बाद में हिंदुओं को काफी नुकसान झेलना पड़ा है। अंतरिम सरकार के प्रमुख भी जाएंगे मंदिर पांच दिवसीय हिंदू धार्मिक उत्सव की शुरुआत बुधवार को देवी दुर्गा के आह्वान के साथ हुई, जिसे महा षष्ठी कहा जाता है. समारोह का समापन रविवार को देवी दुर्गा की मूर्तियों के विसर्जन के साथ होगा. इस बीच रविवार को मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस राष्ट्रीय राजधानी के मध्य में स्थित प्रमुख शक्तिपीठों में से एक, सदियों पुराने ढाकेश्वरी राष्ट्रीय मंदिर का दौरा करेंगे. बांग्लादेश की 170 मिलियन आबादी में हिंदुओं की संख्या लगभग 8 प्रतिशत हैं जिन्हें 5 अगस्त को प्रधानमंत्री शेख हसीना के निष्कासन के बाद भड़की छात्र-नेतृत्व वाली हिंसा के दौरान भारी नुकसान झेलना पड़ा. इस दौरान हिंदुओं के व्यवसायों और संपत्तियों में तोड़फोड़ की गई और और मंदिरों पर भी हमले किए गए. 17 लोग अरेस्ट अखबार ढाका ट्रिब्यून ने पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) एमडी मोइनुल इस्लाम के हवाले से बताया, “1 अक्टूबर से, देशभर में चल रहे दुर्गा पूजा समारोह के दौरान 35 अप्रिय घटनाएं हुई हैं, जिसके कारण 11 मामले दर्ज किए गए हैं, 24 सामान्य डायरी (जीडी) दर्ज की गई हैं और 17 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया है.” इस्लाम ने शुक्रवार को ढाका में एक पूजा मंडप का दौरा किया, जिसके बाद उन्होंने संवाददाताओं को बताया कि देश भर में 32,000 से अधिक मंडपों में दुर्गा पूजा मनाई जा रही है. आईजीपी इस्लाम ने आश्वासन दिया कि पुलिस के पास घटनाओं में शामिल लोगों का रिकॉर्ड है. उन्होंने कहा,  “इन घटनाओं में शामिल किसी भी व्यक्ति को न्याय के कटघरे में लाया जाएगा.अगर कोई भी दुर्गा पूजा के दौरान अराजकता फैलाने या दुर्भावनापूर्ण गतिविधियों में शामिल होने का प्रयास करता है तो हम सख्त कार्रवाई करेंगे.” चटगांव में हुए हमले के बारे में एक सवाल का जवाब देते हुए, आईजीपी ने कहा, गुरुवार को छापेमारी के बाद दो लोगों को गिरफ्तार किया गया और इसके पीछे के मकसद का पता लगाने की कोशिश की जा रही है. सोने का मुकुट हो गया था चोरी इससे पहले शुक्रवार को बांग्लादेश पुलिस ने कहा कि उन्होंने सोने के मुकुट की चोरी के सिलसिले में एक व्यक्ति की पहचान की है और इसे बरामद करने के लिए बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान शुरू किया है. एक निजी समाचार चैनल ने दिखाया कि जब मंदिर में कोई नहीं था तो सफेद टी-शर्ट और जींस पहने एक युवक मंदिर में घुसा. उसने मुकुट का सुनहरा हिस्सा निकाला और उसे जेब में रख लिया. बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद के नेता कृष्ण मुखर्जी ने कहा, “यह चोरी का एक साधारण मामला हो सकता है या यह एक सुनियोजित साजिश का मामला भी हो सकता है. हम मांग करते हैं कि मामले की उचित जांच की जाए और इसमें शामिल लोगों को न्याय के कटघरे में लाया जाए.” तीनों सेना प्रमुखों ने किया मंदिरों का दौरा इस बीच, सरकारी समाचार एजेंसी बांग्लादेश संगबाद संघ (बीएसएस) ने कहा कि तीनों सेनाओं के प्रमुख – सेना प्रमुख जनरल वाकर-उज-जमा, नौसेना प्रमुख एडमिरल एम नजमुल हसन और वायु सेना प्रमुख एयर मार्शल हसन महमूद खान – ने शुक्रवार को ढाका में रमना काली मंदिर का दौरा किया. युवा और खेल सलाहकार आसिफ महमूद सजीब भुइयां ने शुक्रवार को खुलना में गल्लामारी हरिचंद टैगोर मंदिर और बागमारा गोविंदा मंदिर में दुर्गा पूजा पूजा मंडपों में पहुंचे और हिंदू समुदाय के सदस्यों के साथ शुभकामनाएं साझा कीं.

ईरान पर बड़ा साइबर हमला, सरकार और न्यूक्लियर ठिकानों से कई अहम जानकारियां चुराई

तेहरान मिडिल ईस्ट में जारी लड़ाई के बीच शनिवार को ईरान के ऊपर बड़ा साइबर अटैक हुआ है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान की सरकार और न्यूक्लियर ठिकानों पर किए गए इस साइबर अटैक में कई अहम जानकारियां चुराई गई हैं। इस हमले में सरकार के तीनों ब्रांचेज को निशाना बनाया गया है। यह साइबर अटैक कब हुआ और इसे किसने अंजाम दिया, इस बारे में कोई सूचना नहीं है। गौरतलब है कि 1 अक्टूबर को ईरान ने इजरायल पर मिसाइलों की बौछार कर दी थी। तब से ही इजरायल बौखलाया हुआ है और उसने बदला लेने की कसम खाई है। बीते दिनों इजरायली प्रधानमंत्री ने इस बारे में एक बैठक भी की थी, जिसमें ईरान के न्यूक्लियर ठिकानों को निशाना बनाने संबंधी चर्चा हुई थी। ईरान इंटरनेशनल ने ईरान के सुप्रीम काउंसिल ऑफ साइबरस्पेस के पूर्व सचिव फिरोजाबादी के हवाले से कहाकि ईरान की सरकार की सभी तीन शाखाएं-न्यायपालिका, विधायिका और एग्जीक्यूटिव ब्रांच पर बड़ा साइबर हमला हुआ है। यहां से बडे़ पैमाने पर जानकारियां चुराई गई हैं। उन्होंने बताया कि इस हमले में परमाणु ठिकानों के साथ-साथ ईंधन वितरण, नगरपालिका नेटवर्क, परिवहन नेटवर्क, बंदरगाहों और अन्य नेटवर्क को टारगेट किया गया है। ये देश भर के विभिन्न क्षेत्रों की एक लंबी सूची का हिस्सा हैं, जिन पर हमला किया गया है। यह साइबर हमले ऐसे समय में हुए हैं जब अमेरिका ने इजरायल पर कई प्रतिबंध लगाए हैं। पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल सेक्टर्स पर लगाए गए यह प्रतिबंध इजरायल पर ईरानी मिसाइल हमलों के बाद लगाए गए हैं। अमेरिका का यह कदम उस आदेश की कड़ी है जिसमें वह ईरान को मिसाइल प्रोग्राम्स के लिए सरकारी मदद मुहैया कराने से रोकता है। इससे पहले, ईरान ने कहा था कि अगर उसका कट्टर दुश्मन इजरायल हमला करता है तो वह अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है। इस्लामिक रिपब्लिक ने अपने दो करीबी सहयोगियों, हमास नेता इस्माइल हानिया और हिजबुल्ला नेता हसन नसरल्लाह के साथ-साथ एक ईरानी जनरल की हत्या के प्रतिशोध में 1 अक्टूबर को इजरायल पर मिसाइलें दागीं। सोशल मीडिया पर उनके प्रेडिक्शन को संजीदगी से लिया जा रहा है. इसकी वजह उनकी पिछली भविष्यवाणियां हैं, जो ज्यादातर सही साबित हुई हैं, जिनमें माइक्रोसॉफ्ट के ग्लोबल आउटेज, कोरोनावायरस महामारी और एलन मस्क के ट्विटर अधिग्रहण जैसी घटनाएं शामिल थीं. ईरान और इजरायल के बीच AI का बढ़ता इस्तेमाल सलोम का मानना है कि आने वाले समय में ईरान और इज़राइल, दोनों देश अपने सैन्य रणनीतियों में आर्टिफिशेयल इंटिलेजेंस का ज्यादा इस्तेमाल कर सकते हैं. साथ ही ये भी चेतावनी दी कि AI शांति बनाए रखने के लिए इस्तेमाल हो सकता है, लेकिन अगर इसका गलत इस्तेमाल हुआ, तो यह संघर्ष को और बढ़ा सकता है. यह स्थिति दुनिया को एक बड़े युद्ध के मुहाने पर खड़ा कर सकती है. EMP का बढ़ता खतरा, ‘तीन दिनों का अंधकार’? सलोम की मानें तो EMP तकनीक का बढ़ता इस्तेमाल, खासकर अमेरिका, रूस, चीन, और उत्तर कोरिया जैसे देशों में, एक बड़े खतरे की ओर इशारा कर रहा है. सलोम के अनुसार, EMP का इस्तेमाल तीसरे विश्व युद्ध में किया जा सकता है, जिससे ‘तीन दिनों का अंधकार’  जैसे हालात पैदा हो सकते हैं. इससे दुनिया भर के इलेक्ट्रॉनिक ढांचे ठप हो सकते हैं, जिससे समाज ढह सकता है और देशों में अराजकता फैल सकती है. क्या है EMP EMP एक ऐसा उपकरण है जो सूचना प्रणालियों को नष्ट करने के लिए डिजाइन किया गया है. यह मानवों या इमारतों को नुकसान नहीं पहुंचाता, लेकिन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को निष्क्रिय कर सकता है. यह आमतौर पर ऊंचाई पर हुए विस्फोटों से ट्रिगर होता है, जो पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र के साथ संपर्क में आकर इलेक्ट्रॉनिक ढांचों को बाधित कर सकता है. कोल्ड वॉर के दौरान, अमेरिका और सोवियत संघ दोनों ने इस तकनीक को दुश्मनों के बुनियादी ढांचे को निष्क्रिय करने के साधन के रूप में देखा था. अमेरिका और चीन के बीच टकराव की संभावना सलोम ने डेली मेल से एक एक्सक्लूसिव बातचीत में कहा कि अमेरिका और चीन के बीच तनाव बढ़ सकता है. उन्होंने कहा कि दक्षिण चीन सागर, जहां क्षेत्रीय और सैन्य तनाव पहले से ही मौजूद हैं, एक अस्थिर क्षेत्र बन सकता है. इसके अलावा, एक बड़े साइबर हमले से किसी देश की सुरक्षा ढांचे पर हमला किया जा सकता है, जो युद्ध की वजह बन सकता है. रूस और चीन जैसे देशों की क्या भूमिका होगी? सलोम ने यह भी चेतावनी दी है कि चीन और रूस के बीच बढ़ती साझेदारी एक बड़े वैश्विक संघर्ष को जन्म दे सकती है. उन्होंने कहा एशिया, जहां तेज आर्थिक विकास और महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक महत्व है, एक अस्थिर क्षेत्र के रूप में देखा जा रहा है. यह क्षेत्र एक अंतरराष्ट्रीय संघर्ष को भड़काने में सक्षम हो सकता है अथोस सलोम की इन भविष्यवाणियों ने दुनिया में तीसरे विश्व युद्ध को लेकर चर्चा को और तेज कर दिया है अब यह देखना होगा कि आगे क्या होता है.

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विजयादशमी पर महेश्वर के ऐतिहासिक क़िले में लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर को माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी

महेश्वर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विजयादशमी पर महेश्वर के ऐतिहासिक क़िले में लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर को माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी। उन्होंने विजयादशमी के पर्व अवसर पर महेश्वर के शस्त्रागार में शस्त्र-पूजन किया।  नर्मदा तट पर स्थित क़िले में पहुँचने पर देवी अहिल्या बाई के वंशज यशवंतराव होलकर तृतीय ने उनका परम्परागत रूप से  अभिनन्दन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शस्त्रागार में विशेष तौर पर उस तलवार का पूजन किया जो उनके शौर्य का प्रतीक है। यह तलवार लोकमाता देवी अहिल्या बाई स्वयं धारण करती थीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर कहा कि देवी अहिल्या पुण्य प्रताप और परोपकार की पर्याय हैं। आज विजयादशमी के अवसर पर  उनकी कर्मभूमि पहुँचकर नमन कर स्वयं को कृतार्थ महसूस कर रहा हूँ। इस अवसर पर खरगोन के स्थानीय जन-प्रतिनिधिगण मौजूद थे।  

मुंह में सिगरेट डाली, महिला अधिकारी से हुज्जत..! दिग्विजय सिंह के भतीजे आदित्य की दबंगई, FIR हुई दर्ज

गुना पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के भतीजे आदित्य विक्रम सिंह का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है. इस वीडियो में देखा जा सकता है कि आदित्य विक्रम सिंह महिला सीओ और टीआई के मुंह पर सिगरेट का धुआं उड़ाता हुआ नजर आ रहा है. इसके बाद बहस भी करता है और पुलिस अधिकारियों से कहता है कि बेटा मामला अब गरम हो गया है. पुलिस ने इस मामले में आदित्य विक्रम सिंह के खिलाफ सरकारी काम में बाधा डालने, पुलिस टीम से धक्का-मुक्की करने और गाली-गलौज करने का केस दर्ज किया है. राघौगढ़ में ‘मैं हूं अभिमन्यु’ अभियान चल रहा है. इस कार्यक्रम के तहत स्कूल-कॉलेज, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन सहित कई जगहों पर आम लोगों को जागरूक करने के लिए रैली और नाटक किए जा रहे हैं. शुक्रवार को केनरा बैंक तिराहे पर कॉलेज स्टूडेंट्स नुक्कड़ नाटक कर रहे थे, तभी पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह के भाई पूर्व सांसद लक्ष्मण सिंह का बेटा आदित्य विक्रम सिंह वहां आ गया. उसने कार्यक्रम को रोकने की बात कही. इसी को लेकर वहां मौजूद पुलिस से उसकी बहस हो गई. आदित्य सिंह, मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य दिग्विजय सिंह के छोटे भाई लक्ष्मण सिंह के बेटे हैं। सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ है जिसमें आदित्य सिंह एक महिला पुलिसकर्मी सहित सरकारी कर्मचारियों से बहस करते दिखाई दे रहे हैं और उनके हाथ में एक सिगरेट भी है। आदित्य, राघौगढ़ नगर पालिका के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। बीजेपी नेताओं ने ट्वीट कर निशाना साधा जैसे ही ये वीडियो सामने आया, बीजेपी नेताओं ने भी आदित्य विक्रम सिंह के बहाने दिग्विजय सिंह को आड़े हाथों ले लिया. बीजेपी मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल ने ‘X’ पर लिखा कि, “सिगरेट के ‘धुएं का छल्ला’ बनाकर महिला अधिकारियों पर ‘रंगदारी’ दिखाता दिग्विजय सिंह का भतीजा! देखिये… कांग्रेस के मुख्य परिवरों के बेटों का ‘चाल, चेहरा और चरित्र’!” “ये हैं कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के भतीजे और वरिष्ठ नेता लक्ष्मण सिंह के बेटे आदित्य विक्रम सिंह, जो पूर्व में नगर पालिका अध्यक्ष रह चुके हैं. महिला अधिकारी पर कांग्रेस के विशेष परिवार से होने का धौंस दिखाने के साथ-साथ इनकी आपत्तिजनक भाषा शैली और व्यवहार कांग्रेस के नेताओं के अपराधी और महिला विरोधी चरित्र को बता रहे हैं.” “सोचिए, अभ्रदता की सीमा पार कर चुके ये कांग्रेसी नेता, विपक्ष में होने के बाद ऐसी शर्मनाक हरकत कर रहे हैं तो सत्ता में रहकर क्या करते? मध्य प्रदेश की जनता विवेकवान है और इन्हें भलिभांति जानती है! फिलहाल दिग्विजय सिंह के भतीजे पर FIR हो चुकी है. पुत्र चाहे नेता का हो या अभिनेता का, जो भी गलत काम करेगा, भाजपा की ‘मोहन सरकार’ में नहीं बचेगा” आदित्य के ड्राइवर ने भी अधिकारियों पर जमाया रौब अभिमन्यु अभियान के नुक्कड़ नाटक में मौजूद थाना प्रभारी जुबेर खान ने जब आदित्य विक्रम को समझाने की कोशिश की तो उन्होंने टीआई को धक्का दे दिया. इसके बाद सिगरेट का धुआं उड़ाते हुए टीआई के ऊपर एश (ASH) फेंक दी. घटनास्थल पर एसडीओपी दीपा डुडवे भी पहुंच गईं. एसडीओपी और आदित्य विक्रम सिंह के बीच भी बहसबाजी हो गई. आदित्य विक्रम सिंह ने एसडीओपी से कह दिया कि आप सुप्रीम कोर्ट से बड़ी नहीं हो…आदित्य विक्रम के ड्राइवर ने भी पुलिस अधिकारियों पर रौब जमाते हुए कहा की राघौगढ़ आदित्य विक्रम का ही है. फिलहाल पुलिस ने पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष आदित्य विक्रम सिंह के खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा डालने की FIR दर्ज की है. आपको बता दें कि कुछ समय पहले विधायक जयवर्धन सिंह ने भी राघौगढ़ थाना प्रभारी के खिलाफ मोर्चा खोला था. उन्होंने पुलिस के खिलाफ नारेबाजी करते हुए जुलूस भी निकाला था.

संघ मना रहा 100वीं सालगिरह, अमित शाह ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक RSS के स्थापना दिवस पर दी बधाई

नई दिल्ली केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने शनिवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के स्थापना दिवस के अवसर पर इसके सदस्यों को बधाई दी और कहा कि अपनी स्थापना के बाद से यह संगठन भारतीय संस्कृति की रक्षा और युवाओं में देशभक्ति के विचारों को विकसित करने का उल्लेखनीय काम कर रहा है। संघ की स्थापना केशव बलिराम हेडगेवार ने 1925 में विजया दशमी के दिन नागपुर में की थी। शाह ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “अनुशासन और देशभक्ति के अद्वितीय प्रतीक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सभी स्वयंसेवकों को स्थापना दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। संघ अपनी स्थापना से ही भारतीय संस्कृति की रक्षा एवं युवाओं को संगठित कर उनमें राष्ट्रभक्ति के विचारों को सींचने का उल्लेखनीय कार्य कर रहा है।” उन्होंने कहा कि संघ समाज सेवा के कार्यों को गति देकर हर वर्ग को सशक्त बनाने के साथ ही शैक्षणिक प्रयासों से देशहित के प्रति समर्पित देशभक्तों का निर्माण कर रहा है। गृहमंत्री ने विजया दशमी के अवसर पर भी देशवासियों को बधाई दी। उन्होंने एक संदेश में कहा कि विजया दशमी अधर्म पर धर्म और असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक है। उन्होंने कहा, “अधर्म पर धर्म और असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक, विजया दशमी का यह पर्व सभी को अपने अंदर की बुराइयों को समाप्त कर धर्म और मानवता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। प्रभु श्री राम सभी का कल्याण करें। जय श्री राम।” विजया दशमी दुर्गा पूजा के समापन और असुरों के राजा रावण पर भगवान राम की विजय का प्रतीक है। एक अलग संदेश में शाह ने भाजपा नेता राजमाता विजयाराजे सिंधिया को भी उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि वह (राजमाता सिंधिया) सादगी की प्रतिमूर्ति थीं और आपातकाल के दौरान उनके साहस और संघर्ष ने लोकतंत्र की पुनर्स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा, “राजमाता सिंधिया जी की देश के प्रति निष्ठा और जनकल्याण के कार्यों को देश सदैव याद रखेगा।” ग्वालियर राजघराने से ताल्लुक रखने वाली राजमाता सिंधिया भाजपा की उपाध्यक्ष और सांसद थीं। उनका जन्म 12 अक्टूबर 1919 को हुआ था।  

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