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हरियाणा विधानसभा के चुनाव परिणाम के मायावती बोली अब कभी किसी भी दल के साथ बसपा गठबंधन नहीं करेगी

नई दिल्ली  बहुजन समाज पार्टी (बसपा) अध्यक्ष मायावती ने शुक्रवार को गठबंधन को लेकर बड़ा निर्णय लिया। बसपा प्रमुख ने सोशल मीडिया पर इस बात के संकेत दिए हैं कि उनकी पार्टी अब भविष्य किसी दल के साथ गठबंधन नहीं करेंगी। उन्होंने कहा कि हरियाणा विधानसभा के चुनाव परिणाम और इससे पहले पंजाब चुनाव के कड़वे अनुभव के मद्देनजर क्षेत्रीय पार्टियों से भी अब आगे गठबंधन नहीं होगा। जबकि, एनडीए और इंडिया गठबंधन से दूरी पहले की तरह ही जारी रहेगी। मायावती ने सोशल मीडिया पर एक के बाद एक कई पोस्ट कर इसकी जानकारी दी। बसपा चीफ मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ”यूपी सहित दूसरे राज्यों के चुनाव में भी बीएसपी का वोट गठबंधन की पार्टी को ट्रांसफर हो जाने, किंतु उनका वोट बीएसपी को ट्रांसफर कराने की क्षमता उनमें नहीं होने के कारण अपेक्षित चुनाव परिणाम नहीं मिलने से पार्टी कैडर को निराशा और उससे होने वाले मूवमेंट की हानि को बचाना जरूरी है। इसी संदर्भ में हरियाणा विधानसभा के चुनाव परिणाम और इससे पहले पंजाब चुनाव के कड़वे अनुभव के मद्देनजर आज हरियाणा और पंजाब की समीक्षा बैठक में क्षेत्रीय पार्टियों से भी अब आगे गठबंधन नहीं करने का निर्णय लिया गया है, जबकि भाजपा/एनडीए और कांग्रेस/इंडिया गठबंधन से दूरी पहले की तरह ही जारी रहेगी।” एक अन्य पोस्ट में उन्होंने लिखा, ”देश की एकमात्र प्रतिष्ठित अम्बेडकरवादी पार्टी बीएसपी और उसके आत्म-सम्मान एवं स्वाभिमान मूवमेंट के कारवां को हर प्रकार से कमजोर करने की चौतरफा जातिवादी कोशिशें लगातार जारी हैं, जिस क्रम में अपना उद्धार स्वयं करने योग्य व शासक वर्ग बनने की प्रक्रिया पहले की तरह ही जारी रखनी जरूरी।” आखिर में मायावती ने लिखा, ”बीएसपी विभिन्न पार्टियों/संगठनों व उनके स्वार्थी नेताओं को जोड़ने के लिए नहीं, बल्कि ’बहुजन समाज’ के विभिन्न अंगों को आपसी भाईचारा और सहयोग के बल पर संगठित होकर राजनीतिक शक्ति बनाने और उनको शासक वर्ग बनाने का आंदोलन है, जिसे अब इधर-उधर में ध्यान भटकाना अति-हानिकारक।” बता दें कि हरियाणा विधानसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने इंडियन नेशनल लोकदल (आईएनएलडी) के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ा था। जहां भाजपा 48, कांग्रेस ने 37 सीटों पर जीत दर्ज की। वहीं, बसपा अपना खाता भी नहीं खोल पाई थी। हालांकि, इनेलो ने बसपा के साथ मिलकर दो सीटों पर जीत हासिल की। बसपा को कुल 1.82 फीसदी वोट हासिल हुए हैं।    

शांति के नोबेल पुरस्कार का ऐलान, जाने क्या-क्या मिलता है, क्या काम करने पर दिया

स्टॉकहोम  साल 2024 का शांति का नोबेल जापान के संगठन निहोन हिदान्क्यो को मिला है। नॉर्वेजियन नोबेल समिति ने शुक्रवार को इसका ऐलान करते हुए कहा कि इस साल का नोबेल पीस प्राइज जापानी संगठन निहोन हिदान्क्यो को देने का फैसला लिया गया है। संगठन को ये पुरस्कार परमाणु हथियारों के खिलाफ लंबी मुहिम चलाने के लिए दिया जा रहा है। संगठन ने दुनिया को परमाणु मुक्त करने के लिए वर्षों से संघर्ष किया है। जापान के इस संगठन को उन लोगों ने बनाया है, जो दूसरे विश्व युद्ध में हिरोशिमा और नागासाकी पर हुए परमाणु हमले में जिंदा बच गए थे। इनको हिबाकुशा भी बुलाया जाता है। नॉर्वे नोबेल समिति के अध्यक्ष जॉर्गन वात्ने फ्रिदनेस ने शुक्रवार को पुरस्कार की घोषणा करते हुए कहा, दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जापान के हिरोशिमा और नागासाकी के परमाणु बम से बचे लोगों के इस जमीनी स्तर के आंदोलन को परमाणु हथियारों से मुक्त दुनिया हासिल करने के प्रयासों और गवाहों के माध्यम से यह प्रदर्शित करने के लिए शांति पुरस्कार मिल रहा है कि परमाणु हथियारों का इस्तेमाल दोबारा कभी नहीं किया जाना चाहिए। समिति ने कहा- परमाणु हथियारों के खतरे को समझना होगा नॉर्वेजियन नोबेल समिति ने कहा कि निहोन हिदान्क्यो को इस साल का नोबेल पीस प्राइज देने पर हम इस उत्साहजनक तथ्य को स्वीकार करते हैं कि बीते 80 वर्षों में किसी भी युद्ध में परमाणु हथियार का इस्तेमाल नहीं किया गया है। निहोन हिदान्क्यो और हिबाकुशा के अन्य प्रतिनिधियों के असाधारण प्रयासों ने परमाणु निषेध की स्थापना में बहुत योगदान दिया है। समिति ने संगठन के प्रयासों की इसलिए भी तारीफ की है क्योंकि आज परमाणु हथियारों की होड़ बढ़ी है। परमाणु शक्तियां अपने शस्त्रागारों को अपग्रेड रही हैं। ऐसा लगता है कि नए देश परमाणु हथियार हासिल करने की तैयारी कर रहे हैं। मानव इतिहास के इस क्षण में हमें यह याद दिलाना जरूरी है कि परमाणु हथियार दुनिया में अब तक देखे गए सबसे विनाशकारी हथियार हैं। नोबेल कमेटी ने कहा कि एक दिन परमाणु हमले को झेलने वाले लोग हमारे पास नहीं रहेंगे लेकिन जापान की नई पीढ़ी उनकी याद और अनुभवों को दुनिया के साथ साझा करती रहेगी। ये लोग दुनिया को ये बताते रहेंगे कि परमाणु हथियार कितने खतरनाक हैं और क्यों इनके खत्म हो जाने में ही सबकी भलाई है। बता दें कि नॉर्वेजियन नोबेल समिति को इस साल के नोबेल शांति पुरस्कार के लिए कुल 286 आवेदन मिले थे, जिसमें से 89 संगठन थे।

दुर्घटना के दूसरे दिन ही मलबे के साथ मिल गए थे दो सदस्यों के पार्थिव अवशेष

नई दिल्ली अरब सागर में पिछले माह गिरकर डूबे भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) के एडवांस लाइट हेलीकॉप्टर (एएलएच) ध्रुव के लापता पायलट इन कमांड का पार्थिव शरीर पोरबंदर से लगभग 55 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में समुद्र से बरामद कर लिया गया है। दुर्घटना के दूसरे दिन ही हेलीकॉप्टर का मलबा मिलने के साथ चालक दल के दो सदस्यों के पार्थिव अवशेष समुद्र से बरामद किए गए थे। अब चालक दल के तीसरे सदस्य के पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार आईसीजी की परंपराओं और सम्मान के अनुसार किया जाएगा। गुजरात में चक्रवाती मौसम के दौरान बिगड़े हालात में मोटर टैंकर हरि लीला से गंभीर रूप से घायल चालक दल के सदस्य को निकालने के लिए आईसीजी के एडवांस लाइट हेलीकॉप्टर (एएलएच) मार्क-III ध्रुव को लगाया गया था। पिछले माह 2 सितंबर की रात लगभग 11.00 बजे मेडिकल निकासी मिशन पर निकले एएलएच हेलीकॉप्टर में दो पायलट और दो गोताखोर सवार थे। जब हेलीकॉप्टर निकासी के लिए पोत के पास पहुंच रहा था, उसी समय 11.15 बजे आपातकालीन लैंडिंग के दौरान हेलीकॉप्टर चालक दल समेत समुद्र में गिरकर डूब गया। इसके बाद चलाये गए सर्च ऑपरेशन के दौरान 03 सितम्बर को हेलीकॉप्टर का मलबा मिल गया और एक गोताखोर को जिंदा बरामद कर लिया गया। इसके बाद आईसीजी ने हेलीकॉप्टर के दोनों लापता पायलटों और एक गोताखोर की तलाश में 04 जहाजों और दो विमानों को लगाया। सर्च ऑपरेशन के दौरान दूसरे दिन ही हेलीकॉप्टर (फ्रेम संख्या सीजी 863) का मलबा बरामद होने के बाद चालक दल के दो सदस्यों कमांडेंट (जेजी) विपिन बाबू और प्रधान नाविक करण सिंह के शव मिल गए। इसके बाद आईसीजी ने अपने एएलएच ध्रुव बेड़े की सुरक्षा जांच के आदेश दिए और घटना की गहन जांच होने तक मल्टी मिशन हेलीकॉप्टरों की उड़ानों पर रोक लगा दी गई है। अधिकारियों ने बताया कि प्रारंभिक जानकारी से पता चला है कि तटरक्षक बल के पोरबंदर स्थित 835 स्क्वाड्रन का हेलीकॉप्टर समुद्र में नाक के बल (नोज ड्राइव) गिरा था। आईसीजी ने चालक दल के लापता तीसरे सदस्य की तलाश में व्यापक खोज और बचाव अभियान जारी रखा। आईसीजी के कमांडर अमित उनियाल ने बताया कि भारतीय नौसेना और अन्य हितधारकों के साथ लगातार सर्च ऑपरेशन का नतीजा रहा कि मिशन के पायलट इन कमांड कमांडेंट राकेश कुमार राणा का शव 10 अक्टूबर को पोरबंदर से लगभग 55 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में समुद्र से बरामद किया गया है। उनके पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार आईसीजी की परंपराओं और सम्मान के अनुसार किया जाएगा। गुजरात में पोरबंदर के पास अरब सागर में दो सितंबर को ‘एएलएच एमके-III’ हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो जाने के बाद से चालक दल के तीन सदस्य लापता हो गए थे। हालांकि बाद में चालक दल के दो सदस्यों के शव तो मिल गए थे, लेकिन इस मिशन के पायलट राकेश कुमार राणा की तलाश जारी थी। तटरक्षक बल की ओर से जारी की गई एक विज्ञप्ति में बताया कि राणा का शव 10 अक्टूबर को पोरबंदर से लगभग 55 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में समुद्र में पाया गया। इसमें बताया गया, ‘‘तटरक्षक बल ने भारतीय नौसेना और अन्य हितधारकों के साथ मिशन के पायलट-इन-कमांड राकेश कुमार राणा का पता लगाने के लिए अथक प्रयास जारी रखे।’’ विज्ञप्ति में बताया गया है, ‘‘सेवा परम्पराओं और सम्मान के अनुसार ही उनके पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार किया जाएगा। भारतीय तटरक्षक बल के तीन बहादुर जवानों को सलाम, जिन्होंने अपना कर्तव्य निभाते हुए अपने प्राणों की आहुति दे दी।’’ इसमें बताया गया है कि भारतीय तटरक्षक का एक उन्नत हल्का हेलीकॉप्टर दो सितंबर की रात को मोटर टैंकर ‘हरि लीला’ पर सवार चालक दल के एक घायल सदस्य को निकालने के प्रयास में अरब सागर में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इसमें चालक दल के चार सदस्य सवार थे। विज्ञप्ति में बताया गया कि हेलीकॉप्टर पर सवार चालक दल चार सदस्यों में से एक गोताखोर गौतम कुमार को तुरंत बचा लिया गया था, जबकि तीन लापता हो गए थे। एक दिन बाद पायलट विपिन बाबू और गोताखोर करण सिंह का शव खोज लिया गया, लेकिन राणा को नहीं ढूंढा जा सका था। इसके बाद बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चलाया गया।      

अगर कोई गलत धारणा है, तो उसे बदलना होगा, अगर कोई भ्रम या बेकार का अहंकार है तो उसे खत्म करना होगा- सुरेश भैयाजी

जयपुर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के द्वारा विजयादशमी के मौके पर पथ संचालन का कार्यक्रम किया जाता है। इसकी तैयारी अंतिम चरण में है। जयपुर में भी इसको लेकर तैयारी हो रही है। त्रिवेणी नगर स्थित सामुदायिक केंद्र में स्वयंसेवक इकट्ठा हुए और इसका अभ्यास किया। इस दौरान आरएसएस नेता सुरेश भैयाजी जोशी ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए जाति व्यवस्था को लेकर बड़ी बात कही है। सुरेश भैयाजी ने कहा, “जाति का निर्धारण जन्म के आधार पर होता है। क्या कोई बता सकता है कि हरिद्वार किस जाति का है? क्या 12 ज्योतिर्लिंग किसी जाति के हैं? क्या देश के अलग-अलग हिस्सों में 51 शक्तिपीठ किसी जाति के हैं? जो लोग खुद को हिंदू मानते हैं और देश के सभी हिस्सों में रहते हैं । वे इन सभी को अपना मानते हैं। फिर विभाजन कहां है?” उन्होंने आगे कहा, ”जिस तरह से राज्यों की सीमाएं हमारे बीच कोई विभाजन पैदा नहीं कर सकती हैं, उसी तरह जन्म के आधार पर मिलने वाली चीजें हमें विभाजित नहीं कर सकती हैं। अगर कोई गलत धारणा है, तो उसे बदलना होगा। अगर कोई भ्रम या बेकार का अहंकार है तो उसे खत्म करना होगा।”

कप्तान रोहित शर्मा दूसरी बार बनने वाले हैं पिता? ऑस्ट्रेलिया में नहीं खेलेंगे टेस्ट मैच!

मुंबई भारत को इसी साल नवंबर से ऑस्ट्रेल‍िया के ख‍िलाफ 5 मैचों की बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी खेलनी है, लेकिन इससे पहले भारतीय टीम को झटका लगा है. दरअसल, रोहित शर्मा इस सीरीज के शुरुआती दो मैचों में भारतीय टीम की कप्तानी करते हुए नहीं दिखेंगे. 2 टेस्ट मैच ना खेलने की वजह रोहित ने ‘व्यक्त‍िगत कारण’ बताई है, इस बारे में  BCCI (भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड) और चीफ सेलेक्टर अजीत अगरकर को ‘हिटमैन’ ने जानकारी दे दी है. खबरों के मुताब‍िक, रोहित बॉर्डर गावस्कर ट्रॉफी 2024-25 के शुरुआती दो मैचों से चूक सकते हैं. उन्होंने BCCI और चीफ सेलेक्टर को बताया कि वह कुछ व्यक्तिगत मामले को सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं और अगर यह हल नहीं हुआ तो वह पहले गेम से बाहर हो सकते हैं, लेकिन उन्होंने यह भी उल्लेख किया है कि अभी तक यह बोर्ड को सिर्फ सूचना है, उन्होंने यह नहीं कहा है कि वह उपलब्ध नहीं हैं. ऐसे में सेलेक्शन कमेटी और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड टीम की घोषणा करने से पहले रोहित की अंत‍िम पुष्ट‍ि का इंतजार करेंगे. भारतीय क्रिकेट टीम 22 नवंबर से ऑस्ट्रेलिया में पर्थ में शुरू होने वाली पांच टेस्ट मैचों की सीरीज में हिस्सा लेगी और ऐसी संभावना है कि रोहित एडिलेड (6-10 दिसंबर) में होने वाले पहले या दूसरे मैच को छोड़ सकते हैं. बीसीसीआई के एक सूत्र ने नाम ना बताने की शर्त पर समाचार एजेंसी से कहा- इस स‍िचुएशन के बारे में अभी पूरी तरह से क्ल‍ियरटी नहीं है. ऐसा माना जा रहा है कि रोहित ने बीसीसीआई को सूचित किया है कि एक जरूरी निजी मामले के कारण उन्हें सीरीज की शुरुआत में होने वाले दो टेस्ट मैचों में से एक को छोड़ना पड़ सकता है. रोहित ने बीसीसीआई को बताया है कि अगर सीरीज की शुरुआत से पहले निजी मामला सुलझ जाता है, तो वह सभी पांच टेस्ट मैच खेल सकते हैं. हमें आने वाले दिनों में इस बारे में और जानकारी मिलेगी. 37 वर्षीय रोहित ने बांग्लादेश के खिलाफ दोनों घरेलू टेस्ट मैच खेले. वहीं अब वो 16 अक्टूबर से शुरू होने वाली तीन टेस्ट मैचों की सीरीज के लिए न्यूजीलैंड के ख‍िलाफ खेलते हुए दिखेंगे. रोहित नहीं खेले तो कौन बनेगा ओपनर, कौन कप्तान?   अगर रोहित ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट मैच नहीं खेल पाते हैं तो फॉर्म में चल रहे अभिमन्यु ईश्वरन उनके कवर के तौर पर खेल सकते हैं, हालांकि शुभमन गिल और केएल राहुल भी ओपनिंग स्लॉट में काफी अनुभवी खिलाड़ी हैं.  ईश्वरन भारत ए टीम के साथ ऑस्ट्रेलिया में भी होंगे, जिसकी कमान उन्हें संभालनी है. वहीं ऑस्ट्रेल‍ियाई दौरे पर टेस्ट टीम का उप-कप्तान कौन होगा, इस बारे में कोई जानकारी नहीं है, क्योंकि बांग्लादेश के खिलाफ हाल ही में घरेलू सीरीज के दौरान रोहित के लिए कोई आधिकारिक उपकप्तान नहीं था. लेकिन देखा जाए तो भारतीय टीम में कई आईपीएल कप्तान हैं. ऐसे में शुभमन गिल, ऋषभ पंत यह कर सकते हैं. वहीं यशस्वी जायसवाल भी कैप्टंसी मैटेर‍ियल हैं. पहले भी छोड़ा था रोहित ने ऑस्ट्रेल‍िया दौरा बात 2019 की है, तब भारत की वनडे और टी20 टीम के उप-कप्तान रहे रोहित शर्मा पहली बार बेटी समायरा के प‍िता बने थे. रीतिका सजदेह ने 30 दिसंबर को बेटी को जन्म दिया था. तब रोहित ऑस्ट्रेल‍िया के दौरे पर थे, लेकिन वह अपनी पत्नी और बेटी से मिलने के लिए बीच दौरे में भारत आए थे.   ऑस्ट्रेलिया-भारत का टेस्ट शेड्यूल पहला टेस्ट: 22-26 नवंबर, पर्थ दूसरा टेस्ट: 6-10 दिसंबर, एडिलेड (डे-नाइट) तीसरा टेस्ट: 14-18 दिसंबर, ब्रिस्बेन चौथा टेस्ट: 26-30 दिसंबर, मेलबर्न पांचवां टेस्ट: 3-7 जनवरी, सिडनी

केन्द्र सरकार ने जनजातीय समुदायों के समग्र विकास और उनके जीवन स्तर को सुधारने की दिशा में बड़ा कदम उठाया

धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान जनजातीय समुदायों के समग्र विकास के लिये तेज़ी से बढ़ते कदम केन्द्र सरकार ने जनजातीय समुदायों के समग्र विकास और उनके जीवन स्तर को सुधारने की दिशा में बड़ा कदम उठाया भोपाल केन्द्र सरकार ने जनजातीय समुदायों के समग्र विकास और उनके जीवन स्तर को सुधारने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। इसी क्रम में 2 अक्टूबर 2024 से ‘धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान’ की शुरुआत की गई है। इस अभियान का उद्देश्य मध्यप्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों में जनजातीय आबादी के लिए समान अवसरों का सृजन, सामाजिक-आर्थिक स्तर का विकास, बुनियादी ढांचे के सुधार और स्वास्थ्य, शिक्षा व आजीविका के क्षेत्र में ठोस प्रगति करना है। जनजातीय कार्य, लोक परिसम्पत्ति प्रबंधन तथा भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने बताया कि प्रदेश के 51 जिलों के 267 विकासखंडों में स्थित 11 हजार 377 जनजातीय गांवों को इस अभियान का लाभ मिलेगा। यहां 43 जनजातीय समुदायों के 18 लाख 58 हजार परिवार निवास करते हैं, जिनकी कुल 93 लाख 23 हजार आबादी इस अभियान से लाभान्वित होगी। उन्होंने बताया कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर इन जनजातीय गांवों को विकास की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए समन्वित प्रयास कर रही हैं। अभियान के प्रमुख लक्ष्य अभियान में सभी जनजातीय परिवारों के जीवन स्तर में सुधार लाने के लिए कौशल विकास, उद्यमिता संवर्धन और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। सभी पात्र जनजातीय परिवारों को पक्का घर उपलब्ध कराना और उनके गांवों में सड़क, पानी, बिजली जैसी बुनियादी सेवाओं का विस्तार किया जायेगा। अधिक से अधिक मोबाइल मेडिकल यूनिट्स (एमएमयू) की स्थापना की जाएगी, ताकि स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतर पहुंच सुनिश्चित की जा सके। इसी प्रकार जनजातीय क्षेत्रों में ज्यादा से ज्यादा जनजातीय बहुउद्देशीय विपणन केंद्र (टीएमएमसी) शुरू करने के प्रयास किये जायेंगे, जिससे जनजातीय परिवारों को उनकी अपनी कला, संस्कृति, चित्रकारी, वनोपज संग्रहण, शहद, कोदो-कुटकी, ज्वार-बाजरा, महुआ से तैयार उत्पादों, जड़ी-बूटी से प्राकृतिक उपचार ज्ञान कौशल की बेहतर मार्केटिंग हो सकें और जनजातियों की उन्हीं के गांव में ही आमदनी बढ़ाई जा सके। इससे जनजातियां पलायन भी नहीं करेंगी। अभियान में 25 प्रकार की नागरिक सेवाएं/सुविधाएं जनजातीय समुदायों को प्रदान की जाएंगी, जो 18 लाइन मंत्रालयों/विभागों के द्वारा संचालित की जाएंगी। ये मंत्रालय अनुसूचित जनजातियों के लिए विभागीय विकास कार्ययोजना (DAPST) के तहत अपनी बजट राशि से पांच वित्त वर्षों (2024-25 से 2028-29) तक जनजातीय क्षेत्रों में विकासमूलक काम करेंगे। केन्द्र सरकार के ग्रामीण विकास, जल शक्ति, विद्युत, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण, महिला एवं बाल विकास, शिक्षा, कौशल विकास, कृषि, दूरसंचार और जनजातीय कार्य मंत्रालय/विभाग इस अभियान में प्रमुख रूप से शामिल होंगे। अभियान के लिय मध्यप्रदेश ने की है बड़ी तैयारी मध्यप्रदेश ने इस अभियान का अधिकतम लाभ प्राप्त करने के लिए तेजी से तैयारी की है। सितंबर माह में अभियान की रूपरेखा तैयार होते ही राज्य सरकार ने 1226 करोड़ रुपये लागत के कार्य प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेज दिये हैं। इस राशि से जनजातीय क्षेत्रों में अधोसंरचना विकास, स्वास्थ्य सुविधाएं, गांव-गांव तक पहुंच रोड और कौशल विकास प्रशिक्षण के जरिये रोजगार के अवसरों का विस्तार किया जाएगा। प्रमुख सचिव, जनजातीय कार्य विभाग डॉ. ई. रमेश कुमार ने बताया कि राज्य सरकार इस अभियान के अंतर्गत जनजातीय क्षेत्रों में अधिकाधिक मात्रा में मोबाइल मेडिकल यूनिट्स और जनजातीय बहुउद्देशीय विपणन केंद्रों की स्थापना के लिए विशेष प्रयास कर रही है। केंद्र सरकार के 18 मंत्रालय और विभागों द्वारा जनजातीय समुदायों के लिए विशेष सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा पीएम आवास योजना (ग्रामीण) के तहत पक्का घर और पीएम ग्रामीण सड़क योजना के तहत गांवों को मुख्य मार्गों से जोड़ा जाएगा। जल शक्ति मंत्रालय जल जीवन मिशन के माध्यम से पात्र गांवों में शुद्ध पेयजल की आपूर्ति करेगा, जबकि ऊर्जा मंत्रालय अविद्युतीकृत गांवों और बसाहटों में बिजली पहुंचाने का कार्य करेगा। यह अभियान केंद्र सरकार के समग्र विकास के प्रयासों का हिस्सा है, जिसमें प्राथमिकता के आधार पर जनजातीय समुदायों को सामाजिक और आर्थिक मुख्यधारा से जोड़ने की योजना बनाई गई है। इसके माध्यम से अगले पांच वर्षों में जनजातीय आबादी के समग्र विकास के लिए ठोस कार्य किए जाएंगे। अभियान के सफल क्रियान्वयन से प्रदेश की जनजातीय आबादी को बुनियादी सेवाओं का सीधा लाभ मिलेगा। इससे इन क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, और बुनियादी ढांचे में सुधार होगा, जो समग्र राष्ट्रीय विकास में अहम योगदान देगा।  

छत्तीसगढ़ में सदस्यता अभियान में 36 लाख का आंकड़ा पार, रखा 50 लाख पार करने का लक्ष्य

रायपुर छत्तीसगढ़ में भाजपा अपने सदस्य बनाने के काम में जोर-शोर से जुटी हुई है. नतीजतन प्रदेश में अब तक 36 लाख लोगों को भाजपा का सदस्य बनाया जा चुका है. ये दावा प्रदेश संयोजक व प्रदेश प्रवक्ता अनुराग सिंहदेव ने किया है. इनका कहना है कि जल्द ही 50 लाख के आंकड़े को भी पार कर लिया जायेगा. इसके लिए योजना बनाकर जमीनी स्तर पर काम भी शुरू कर दिया गया है. ऑफलाइन सदस्य बनाने का अभियान भी भारतीय जनता पार्टी के संगठन महापर्व-सदस्यता अभियान के प्रदेश संयोजक व प्रदेश प्रवक्ता अनुराग सिंहदेव ने कहा कि  भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण देव के नेतृत्व में चल रहे सदस्यता अभियान में 36 दिनों में छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी के 36 लाख सदस्य बनाए जा चुके हैं. भाजपा के सदस्यता अभियान को प्रदेशभर में जबरदस्त रिस्पॉन्स मिल रहा है और जो लोग ऑनलाइन सदस्य नहीं बन पा रहे हैं, उनकी मांग को देखते हुए प्रदेश में अब फार्म भरकर ऑफलाइन सदस्य बनाने का अभियान भी युद्धस्तर पर चल रहा है. लक्ष्य को पार करने में लगातार जुटे हैं प्रदेश संयोजक सिंहदेव ने ये भी कहा कि छत्तीसगढ़ में सदस्यता अभियान को लेकर भाजपा ने विशेष अभियान भी चलाकर सदस्यता के लक्ष्य की प्राप्ति में बड़ी छलांग लगाई है.  जिनमें मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, प्रदेश अध्यक्ष किरण देव, उप मुख्यमंत्रीअरुण साव व विजय शर्मा समेत प्रदेश सरकार के सभी मंत्री, सांसद-विधायक, पदाधिकारी व कार्यकर्ता बूथ स्तर तक पहुंचकर सदस्यता के लक्ष्य को पार करने में लगातार जुटे हुए हैं. ये तैयारियां भी इधर सदस्यता को गति प्रदान करने प्रदेश के सभी पाँच संभागों से भारतीय जनता युवा मोर्चा की 20 रथयात्राएं शुरु हो चुकी हैं. पार्टी के सभी मोर्चा-प्रकोष्ठों को भी अभियान की सफलता के लिए लक्ष्य सौंपकर जिम्मेदारी दी गई है. सिंहदेव ने कहा कि नमो ऐप, वेब साइट की लिंक, रेफरल लिंक और मिस्ड कॉल के जरिए सदस्यता अभियान को गति देने के बाद पार्टी कार्यकर्ता पूरे समर्पण के साथ जिन क्षेत्रों में नेटवर्क नहीं है या जिन लोगों को ऑनलाइन सदस्य नहीं बनाया जा सक रहा हो, वहां घर-घर सम्पर्क करके फॉर्म भरकर ऑफलाइन सदस्यता अभियान में जुट गए हैं. ये अभियान भी होगा शुरू भाजपा सदस्यता अभियान के प्रदेश संयोजक सिंहदेव ने कहा कि इसी के साथ पार्टी के सक्रिय सदस्य बनाने का अभियान भी शुरू होने जा रहा है. प्रत्येक मंडल में 200 सक्रिय सदस्य बनाने का लक्ष्य दिया गया है. प्रदेशभर में चलने वाले सक्रिय सदस्यता अभियान के लिए भाजपा प्रदेश महामंत्री संजय श्रीवास्तव को सक्रिय सदस्यता अभियान का प्रदेश प्रभारी बनाया गया है. पार्टी के सदस्यता अभियान को लेकर सतत समीक्षा का क्रम भी प्रदेश व केंद्रीय नेतृत्व के मार्गदर्शन में चल रहा है. अभी हाल ही में भाजपा क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जम्वाल व प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय की मौजूदगी में हुई बैठक में जिला अध्यक्ष एवं जिला सदस्यता प्रभारी और महामंत्रियों से जिलेवार चर्चा करके सदस्यता के लिए लक्ष्य तय किया गया.

केंद्रीय मंत्री चौहान ने कहा आज हम संकल्प लें कि मन, वचन, कर्म से बेटियों, बहनों का सम्मान करेंगे

नवरात्रि पर बेटियों-बहनों के सम्मान का संकल्प लें : शिवराज केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आवास पर कन्या भोज का आयोजन किया केंद्रीय मंत्री  चौहान ने कहा आज हम संकल्प लें कि मन, वचन, कर्म से बेटियों, बहनों का सम्मान करेंगे भोपाल केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने भोपाल स्थित आवास पर नवरात्रि की अष्टमी-नवमी के अवसर पर कन्या भोज का आयोजन किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि आज हम संकल्प लें कि मन, वचन, कर्म से बेटियों, बहनों का सम्मान करेंगे। केंद्रीय कृषि मंत्री चौहान ने अपनी धर्मपत्नी साधना सिंह के साथ कन्याओं का पूजन किया और उन्हें भोजन कराया। संवाददाताओं से चर्चा करते हुए चौहान ने कहा, “संपूर्ण देश नौ दिन तक श्रद्धा और भक्ति के भाव में डूबा था। हमने देवी मां की पूजा की और आज मां से यही प्रार्थना है कि वह सब पर कृपा और आशीर्वाद की वर्षा सदैव करती रहें।” केंद्रीय कृषि मंत्री ने दुर्गा सप्तशती का उल्लेख करते हुए कहा, “माता कहती हैं कि समस्त बेटियां, स्त्रियां मेरा ही अंश है और इसलिए संपूर्ण देशवासियों से मेरी प्रार्थना है कि बेटी का आदर करें, सम्मान करें।” बीते कुछ दिनों में मासूम बालिकाओं से लेकर महिलाओं के साथ हुई घटनाओं पर केंद्रीय कृषि मंत्री चौहान ने कहा, “कुछ घटनाएं आहत करती हैं, मन को उद्वेलित करती हैं और पूरा समाज शर्मसार हो जाता है। आज संकल्प लेने का समय है कि हम मन, वचन और कर्म से बेटियों की पूजा करेंगे, उनका आदर करेंगे, बहनों का सम्मान करेंगे, समाज में उनका उचित स्थान देंगे।” कृषि मंत्री चौहान ने अपने आवास पर आयोजित कन्या भोज का जिक्र करते हुए कहा, “आज जब बेटियों के साथ आरती की, देवी मां की पूजा की, बेटियों की आरती उतारी, उस समय मुझे और धर्मपत्नी साधना को लग रहा था जैसे हम साक्षात देवी मां की आरती कर रहे हों और बेटियों को भोजन कराया तो लग रहा था जैसे साक्षात मां ही भोजन कर रहीं हो।”    

मुख्यमंत्री डॉ. यादव महेश्वर और इंदौर में करेंगे शस्त्र-पूजन, प्रदेशवासियों को दी विजयदशमी पर्व की बधाई

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि हमारे भारतीय पर्व उमंग और उल्लास के प्रतीक होते हैं। इस वर्ष प्रदेश में दशहरा पर्व सरकार और समाज मिलकर धूमधाम के साथ मनाएंगे और शस्त्र-पूजन भी किया जायेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों को दशहरा पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि इस वर्ष का दशहरा पर्व महिला सशक्तिकरण और सुशासन की प्रतीक देवी अहिल्याबाई को समर्पित रहेगा। देवी अहिल्याबाई ने देश भर में जन-कल्याण के अनेक महती कार्य संपन्न करवाए। इन कार्यों की स्मृति और देवी अहिल्याबाई के योगदान से आज की पीढ़ी को अवगत करवाने और उनके सम्मान में दशहरा पर्व पर शस्त्र-पूजन के कार्यक्रम होंगे। मंत्री, सांसद, विधायक और जन-प्रतिनिधि भी करेंगे अपने क्षेत्रों में शस्त्र-पूजन मुख्यमंत्री डॉ.यादन ने कहा कि इस दशहरा पर्व पर भारत की प्राचीन शस्त्र-पूजन परंपरा में सरकार के मंत्रीगण सहित सांसद, विधायक और जन-प्रतिनिधि भी अपने क्षेत्र में होने वाले कार्यक्रमों में शामिल होंगे। प्रत्येक जिले में पुलिस शस्त्रागार, कोतवाली और थानों में होने वाले शस्त्र-पूजन एक विभाग तक सीमित न होकर जनता का पर्व बनेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वे स्वयं देवी अहिल्याबाई की राजधानी रही महेश्वर और उनकी छावनी रही इंदौर में शस्त्र-पूजन करेंगे। अहिल्याबाई का व्यक्तित्व, जीवन और चरित्र हम सबके लिये आदर्श मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हम अहिल्याबाई की 300वीं जयंती का वर्ष मना रहे हैं। लोकमाता देवी अहिल्याबाई का व्यक्तित्व, जीवन और चरित्र हम सबके लिये आदर्श है। वे एक तपोनिष्ठ, धर्मनिष्ठ और कर्मनिष्ठ शासक, प्रशासक रही है। उनसे हम सबको प्रेरणा लेना चाहिये। देवी अहिल्याबाई ने धर्म के भाव के साथ शासन व्यवस्था चलाने का बेहतर उदाहरण प्रस्तुत किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उनका धर्म तथा राज्य व्यवस्था में विशेष महत्व है। उनका मुख्य ध्येय था कि उनकी प्रजा कभी भी अभावग्रस्त और भूखी नहीं रहे। उनके सुशासन की यशोगाथा पूरे देश में प्रसिद्ध है। उन्होंने समाज-सेवा के लिए खुद को पूरी तरह समर्पित कर दिया था। अहिल्याबाई हमेशा अपनी प्रजा और गरीबों की भलाई के बारे में सोचती थी, साथ ही वे गरीबों और निर्धनों की हरसंभव मद्द के लिए हमेशा तत्पर रहती थी। उन्होंने समाज में विधवा महिलाओं की स्थिति पर भी खासा काम किया और उनके लिए उस वक्त बनाए गए कानून में बदलाव भी किया था।  

छत्तीसगढ़ आ रही हैं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, छह से अधिक कार्यक्रमों में होंगी शामिल

रायपुर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 25 और 26 अक्टूबर को छत्तीसगढ़ के दो दिवसीय दौरे पर रहेंगी. इस दौरान वे प्रदेश में विभिन्न शैक्षणिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में शामिल होंगी. राष्ट्रपति के दौरे का मिनट टू मिनट कार्यक्रम जारी कर दिया गया है. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का मिनट-टू-मिनट कार्यक्रम: 25 अक्टूबर 2024 (पहला दिन) सुबह 11 बजे: राष्ट्रपति का रायपुर एयरपोर्ट पर आगमन. सुबह 11:30 बजे: रायपुर एम्स के दूसरे दीक्षांत समारोह में शामिल होंगी. दोपहर 1 बजे: एम्स से रवाना होकर राजभवन पहुंचेंगी. दोपहर 3 बजे: NIT रायपुर के 14वें दीक्षांत समारोह में हिस्सा लेंगी. शाम 4:30 बजे: नवा रायपुर स्थित पुरखौती मुक्तांगन में स्थानीय आदिवासियों से मुलाकात. शाम 6 बजे: राजभवन लौटेंगी और रात्रि विश्राम करेंगी. 26 अक्टूबर 2024 (दूसरा दिन): सुबह 9 बजे: विवेकानंद सरोवर, रायपुर का दौरा. सुबह 10 बजे: रायपुर एयरपोर्ट से भिलाई के लिए प्रस्थान. सुबह 11 बजे: IIT भिलाई के चौथे दीक्षांत समारोह में शामिल होंगी. दोपहर 1:30 बजे: भिलाई से वापस रायपुर स्थित राजभवन लौटेंगी. दोपहर 3:30 बजे: पं. दीनदयाल उपाध्याय स्मृति चिकित्सा एवं आयुष विश्वविद्यालय के तीसरे दीक्षांत समारोह में हिस्सा लेंगी. शाम 5 बजे: दीक्षांत समारोह के बाद दिल्ली के लिए रायपुर एयरपोर्ट से प्रस्थान करेंगी.    

मुख्यमंत्री निवास में कन्या-पूजन में कन्याओं के पांव पखारे, मातारानी से सभी के लिए मंगलमय और सुखमय जीवन के लिये की प्रार्थना

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शारदीय नवरात्र की महानवमी पर मुख्यमंत्री निवास में कन्या-पूजन और कन्या-भोज की सनातन परंपरा का पालन किया। मातृ-शक्ति के प्रति अपनी अगाध श्रद्धा प्रदर्शित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आज नौ दुर्गा स्वरूपा कुंवारी कन्याओं के पांव पखारे और उनका विधि-विधान से पूजन किया। उन्होंने श्रद्धापूर्वक कन्याओं को चुनरी ओढ़ाई और आरती उतारी। पूजन के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कन्याओं से संवाद कर उन्हें दुलारा भी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कन्या-पूजन के बाद कन्याओं को स्वयं अपने हाथों से भोजन परोसा और उनकी रूचि के अनुरूप मिष्ठान भी खिलाये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कन्या भोज के बाद सभी कन्याओं को दक्षिणा और उपहार देकर उनका आशीर्वाद लिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मोक्षदायिनी मां सिद्धिदात्री के चरणों में शत-शत प्रणाम कर प्रदेशवासियों को शारदीय नवरात्रि की महानवमी पर हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी। उन्होंने मातारानी से सभी को संकल्प सिद्धि के असीम आशीर्वाद के साथ मंगलमय और सुखमय जीवन की प्रार्थना भी की।  

मंत्री विजयवर्गीय बोलेआने वाले 25 साल बाद हमारे बच्चों के लिए बहुत खतरा है, बंटोगे तो कटोगे

इंदौर इंदौर में गुरुवार रात कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बड़ा बयान दिया है। मंत्री विजयवर्गीय ने कहा कि, योगी जी ने सही कहा है बंटोगे तो कटोगे। आने वाले 25 साल बाद हमारे बच्चों के लिए बहुत खतरा है। जिस प्रकार देश की डेमोग्राफी बदल रही है। दरअसल, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय गुरुवार रात बीजेपी प्रदेश उपाध्यक्ष जीतू जिराती द्वारा आयोजित सादगी गरबा महोत्सव में शामिल होने पहुंचे थे। इस दौरान मंत्री विजयवर्गीय ने कहा कि मैं फिर कह रहा हूं आने वाले 25 साल बाद हमारे बच्चो के लिए बहुत खतरा है। जिस प्रकार देश की डेमोग्राफी बदल रही है, और जिस प्रकार कुछ राजनीतिक दल तुष्टिकरण की नीति के कारण देश में अशांति फैलाने वाले लोगों को संरक्षण दे रहे हैं। इसलिए बहुत जरूरी है की हम सनातन धर्म के साथ चले। मंत्री विजयवर्गीय ने कहा कि, योगी जी ने सही कहा है “बंटोगे तो कटोगे” और हरियाणा की जानता ने बता दिया नहीं बाटेंगे। इसलिए आप सब से भी निवेदन हैं, गंभीरता के साथ विचार करें, चिंतन करें हमारे धर्म, हमारी परंपरा, हमारी आध्यात्मिक शक्ति, हमारे धर्म गुरु और हमारे धर्म ग्रंथ विश्व में सर्वश्रेष्ठ हैं। उन्होंने आगे कहा कि विश्व को शांति का मार्ग कोई दिखा सकता है तो वह भारत हैं। ये कट्टरवाद ने सारे दुनियां में युद्ध के माध्यम से अशांति और अराजकता फैला दी हैं। दो महीनें पहले कहा था- 30 साल बाद देश में गृहयुद्ध की स्थिति मंत्री विजयवर्गीय ने लगभग 2 महीने पहले सामाजिक समरसता कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा था की मैं कुछ दिन पहले एक मिलिट्री के रिटायर ऑफिसर के साथ बैठा था, उन्होंने कहा की 30 साल बाद देश के अंदर गृह युद्ध प्रारंभ हो जाएगा। जिस प्रकार से हमारे देश की डेमोग्राफी बदल रही है उस पर हमें विचार करना चाहिए। हिंदू शब्द कैसे मजबूत हो इसके लिए हमें काम करना होगा। होली, दीपावली, राखी, भगवान परशुराम, महाराणा प्रताप हम सब के हैं। महाराणा प्रताप ने हिंदू समाज को बचाने के लिए मुगलों के सामने संघर्ष किया। देश के त्योहार सभी धर्म के त्योहार है, हमे हमारी सोच बदलना होगी। विजयवर्गीय ने आगे कहा था कि अंग्रेजों ने एक ही काम किया है फूट डालो और राज करो। अंग्रेज चले गए लेकिन देश में कुछ लोग ऐसे है जो अंग्रेजों का प्रतिनिधित्व करते हैं और फूट डालो और राज करो की नीति पर काम करते हैं। वो भी सिर्फ कुर्सी के लिए। उनको कुर्सी चाहिए। आज के समय पर कुछ लोग समाज को जाति के आधार पर बांट रहे हैं। देश ताकतवर बने इसके लिए समाज को ताकतवर बनाना जरूरी है। समाज ताकतवर बने इसके लिए जातिवाद के बंधन से मुक्त होना पड़ेगा।

रतन टाटा के बाद नोएल बने टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन, सर्वसम्मति से लिया गया फैसला

मुंबई नोएल टाटा को टाटा ट्रस्ट्स का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है. बुधवार को रतन टाटा के निधन के बाद आज मुंबई में एक बैठक हुई थी, जिसमें रतन टाटा के सौतेले भाई नोएल टाटा (Noel Tata) को Tata Tusts का नया चेयरमैन बना दिया गया है. बैठक में ये फैसला सभी के सहमति से लिया गया. इसके तहत नोएल को टाटा समूह के दो सबसे महत्वपूर्ण धर्मार्थ संस्‍थाओं सर रतन टाटा ट्रस्ट और सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट का प्रमुख नियुक्‍त किया गया है. ये पहले इन संस्‍थाओं में ट्रस्‍टी के तौर पर शामिल थे. अब इन्‍हें टाटा ट्रस्‍ट का चेयरमैन नियुक्‍त कर दिया गया है. र‍तन टाटा ने टाटा ट्रस्‍ट को बनाने में अपनी महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाई थी. टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी TATA Sons में टाटा ट्रस्‍ट की एक बड़ी हिस्‍सेदारी है. इसमें करीब 66 फीसदी की हिस्‍सेदारी है. टाटा ट्रस्‍ट के तहत ही Tata Group संचालित है. ये ट्रस्‍ट परोपकारी पहल और शासन की देखरेख के लिए काम करता है. टाटा ग्रुप में निभाते हैं ये जिम्‍मेदारियां Ratan Tata के सौतेले भाई नोएल टाटा को टाटा ट्रस्‍ट की नई जिम्‍मेदारी दे दी गई है. नोएल टाटा ट्रस्‍ट में भी ट्रस्‍टी के तौर पर शामिल थे. वहीं पिछले कुछ सालों से वे टाटा इंटरनेशनल लिमिटेड के चेयरमैन भी हैं. इनका टाटा ग्रुप के साथ चार दशकों का लंबा इतिहास रहा है. वे ट्रेंट, वोल्टास और टाटा इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन जैसी कंपनियों के चेयरमैंन भी हैं. इतना ही नहीं टाटा स्टील और टाइटन कंपनी लिमिटेड के उपाध्यक्ष के रूप में कार्य करते हैं. इसके अलावा, टाटा इकोसिस्टम के साथ उनके गहरे संबंध भी हैं. 50 करोड़ डॉलर से 3 अरब डॉलर की बना दी कंपनी टाटा इंटरनेशनल लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्‍टर के तौर पर अपने कार्यकाल के दौरान, उन्होंने 2010 और 2021 के बीच कंपनी के राजस्व को 500 मिलियन डॉलर से 3 बिलियन डॉलर से ज़्यादा तक बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. ट्रेंट लिमिटेड कंपनी का साल 1998 में सिर्फ एक सिंगल  रिटेल स्टोर था, जो आज इनके लीडरशिप में पूरे भारत में 700 से अधिक स्टोर्स के साथ एक मजबूत नेटवर्क में बदल चुका है. नोएल टाटा पर्दे के पीछे रहकर करते थे काम जहां एक तरफ रतन टाटा ग्रुप का चेहरा थे। तो वहीं नोएल टाटा (Noel Tata) पर्दे के पीछे रहकर काम करना पसंद करते हैं। वो मीडिया से भी बहुत दूर रहते हैं। उनका फोकस ग्रुप के ग्लोबल वेंचर्स और रिटेल सेक्टर विशेष तौर पर रहता था। नोएल टाटा के पास है कई कंपनियों की कमान नोएल टाटा पिछले 40 साल से टाटा ग्रुप का हिस्सा हैं। मौजूदा समय में वो टाटा ग्रुप की कई कंपनियों के बोर्ड के सदस्य हैं। वह टाटा इंटरनेशनल लिमिटेड, वोल्टास और टाटा इनवेस्टमेंट कॉरपोरेशन के चैयरमैन हैं। साथ ही टाटा स्टील और टाइटन कंपनी लिमिटेड में बतौर वाइस चेयरमैन अपनी सर्विसेज दे रहे हैं। नोएल टाटा अगस्त 2010 से नवंबर 2021 तक ट्रेंट के मैनेजिंग डायरेक्टर रह चुके हैं। उनकी लीडरशिप में ट्रेंट का टर्नओवर 500 मिलियन डॉलर से बढ़कर 3 बिलियन डॉलर पहुंच गया। बता दें कि नोएल टाटा ने ससेक्स यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया है। माना जा रहा है कि टाटा ट्रस्ट की कमान ऐसे व्यक्ति को मिल सकती है, जिसके नाम के साथ टाटा जुड़ा हुआ है। ऐसे में नोएल टाटा ही विकल्प के तौर पर उभर कर आते हैं। मौजूदा समय में दो अन्य व्यक्ति भी टाटा ट्रस्ट के अहम सदस्य हैं। टीवीएस के वेणु श्रीनिवासन और पूर्व रक्षा सचिव विजय सिंह। साइरस मिस्त्री के चचेरे भाई भी प्रमुख दावेदार टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन के लिए टाटा संस के पूर्व चेयरमैन दिवंगत साइरस मिस्त्री के चचेरे भाई मेहली मिस्त्री भी मजबूत विकल्प के तौर पर देखे जा रहे हैं। मेहली मिस्त्री 2000 से टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन के साथ काम कर रहे थे। वो काफी सक्रिय भी थे। 2016 में साइरस मिस्त्री को टाटा संस के चेयरमैन के पद से हटाया गया था, तब शुरू हुए विवाद में उन्हें रतन टाटा का समर्थक माना जाता था। बता दें कि अक्टूबर 2022 में टाटा के 2 सबसे ट्रस्ट मे शामिल किया गया था। रतन टाटा, टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन और टाटा संस के मानद चेयरमैन पर रहने वाले आखिरी व्यक्ति थे। टाटा संस 2022 में ऑर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन में बदलाव कर दिया था। जिसकी वजह से अब कोई व्यक्ति दोनों पदों पर एक साथ नहीं रह सकता है।  

एशिया शिखर सम्मेलन एक मुक्त, खुला, समावेशी, पारदर्शी, नियम आधारित, शांतिपूर्ण, समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र को बढ़ावा देने का मंच है- PM मोदी

नई दिल्ली  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लाओस की यात्रा पर हैं, जहां उन्होंने पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन(EAS) को संबोधित करते हुए हिंद प्रशांत क्षेत्र और दक्षिण चीन सागर में शांति और स्थिरता पर बात की। प्रधानमंत्री मोदी ने इस मंच से हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा और शांति पर काफी जोर दिया। इससे पहले 4 नवंबर, 2019 की बात है, जब इसी अंतरराष्ट्रीय मंच से पीएम मोदी ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में उभर रहे मतभेदों पर बात की थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन एक मुक्त, खुला, समावेशी, पारदर्शी, नियम आधारित, शांतिपूर्ण, समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र को बढ़ावा देने का तार्किक मंच है, जहां संप्रभुता व क्षेत्रीय अखंडता और समुद्री कानूनों के पालन पर जोर दिया जाता है। उस वक्त पीएम ने’इंडो-पैसिफिक ओशन इनिशिएटिव (IPOI)’ का प्रस्ताव दिया था, जिससे हिंद-प्रशांत समुद्री क्षेत्र को सुरक्षित, भयमुक्त और स्थिर बनाया जा सके और इसके लिए इच्छुक राष्ट्रों के बीच सहयोगी ढांचा बनाया जा सके। जानते हैं मोदी के उसी भयमुक्त समुद्री क्षेत्र के विजन के बारे में, यह इतना जरूरी क्यों है। यह भी जानेंगे कि आखिर ये मंच किस तरह का है। समुद्री सुरक्षा को लेकर क्या हैं मोदी के 7 सूत्र राजनीतिक विश्लेषक डॉ. राजीव रंजन गिरि कहते हैं कि 4 नवंबर, 2019 को भारत ने पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में अपने प्रस्ताव में समुद्री सहयोग और सहभागिता के 7 मूल पहलुओं की पहचान की थी, जो रणनीतिक रूप से मोदी के 7 तीर भी हैं। ये हैं-समुद्री सुरक्षा, समुद् इकोसिस्टम, समुद्री रिसोर्स, क्षमता निर्माण और संसाधनों का बंटवारा, आपदा जोखिम में कमी और मेनेजमेंट, विज्ञान, प्रौद्योगिकी सहयोग और कारोबारी कनेक्टिविटी व समुद्री परिवहन। पीएम मोदी के यही सूत्र हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन को दबदबे को कम कर सकते हैं। क्या है पूर्वी एशिया-शिखर सम्मेलन पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन का गठन 2005 में किया गया था। यह हिंद प्रशांत क्षेत्र में प्रमुख राजनीतिक, सुरक्षा और आर्थिक चुनौतियों पर रणनीतिक बातचीत और सहयोग के लिए 18 देशों का एक मंच है। इस मंच का विचार सबसे पहले 1991 में तत्कालीन मलेशियाई प्रधानमंत्री महाथिर बिन मुहम्मद ने दिया था। उन्होंने उस वक्त पूर्वी एशिया समूह बनाने की बात की थी। पहला पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन 14 दिसंबर, 2005 को कुआलालंपुर, मलेशिया में आयोजित किया गया था। भारत इस मंच के फाउंडर मेंबर में शामिल भारत पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन के संस्थापक सदस्यों में शामिल है। पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों का संगठन (ASEAN) के 10 सदस्य देश शामिल हैं-ब्रुनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, म्यांमार, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड और वियतनाम के साथ ही 8 सदस्य देश ऑस्ट्रेलिया, चीन, जापान, भारत, न्यूज़ीलैंड, कोरिया गणराज्य, रूस और संयुक्त राज्य अमेरिका है। दुनिया की जीडीपी में 58 फीसदी हिस्सेदारी डॉ. राजीव रंजन गिरि के अनुसार, पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन के सदस्य विश्व की लगभग 54% आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं तथा वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद में इनकी 58% भागीदारी है। पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन एक आसियान केंद्रित मंच है। इसकी अध्यक्षता केवल एक आसियान सदस्य द्वारा की जा सकती है। पूर्वी एशिया-शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता कौन करता है ASEAN का अध्यक्ष EAS का भी अध्यक्ष होता है तथा प्रतिवर्ष 10 ASEAN सदस्य देशों के मध्य बारी-बारी से इसकी अध्यक्ष की जाती है। सहयोग के प्रमुख क्षेत्र हैं-पर्यावरण और ऊर्जा, शिक्षा, वित्त, वैश्विक स्वास्थ्य संबंधी मुद्दे, प्राकृतिक आपदा प्रबंधन, आसियान देशों के मध्य संपर्क, आर्थिक व्यापार और सहयोग, खाद्य सुरक्षा और समुद्री सहयोग। क्या यह अमेरिका-यूरोप के बाद तीसरा ध्रुव भारतीय वैश्विक परिषद में रिसर्चर रहे डॉ. टेम्जेनमरेन एओ के एक लेख ‘हिंद-प्रशांत और भू-राजनीतिक क्षेत्र में पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन की भूमिका’ में कहा गया है कि 2021 में EAS सदस्यों ने दुनिया की करीब 54% आबादी का प्रतिनिधित्व किया। इसके सदस्य देशों ने अनुमानित रूप से 57.2 ट्रिलियन डॉलर मूल्य का कारोबार किया, जो वैश्विक जीडीपी का 59.5% है। यह मज़बूत और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं वाला क्षेत्र है। इसे अमेरिका और यूरोप के बाद विश्व अर्थव्यवस्था का तीसरा ध्रुव माना जाता है। भारत, जापान, चीन और कोरिया वर्ल्ड इकोनॉमी में पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में 4 प्रमुख आर्थिक भागीदार देश जापान, चीन, भारत और कोरिया 12 उच्च रैंकिंग वाली वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हैं। EAS देशों के बीच वित्तीय और मौद्रिक सहयोग इतना ज्यादा है कि उनका संयुक्त विदेशी मुद्रा भंडार 3 ट्रिलियन डॉलर के पार जा चुका है। समंदर पर है चीन की टेढ़ी नजर, भारत से दुश्मनी भारत-जापान समेत चीन का हिंद प्रशांत क्षेत्र में तकरीबन हर देश के साथ कुछ न कुछ विवाद बना हुआ है। दरअसल, चीन के मंसूबे नापाक हैं। उसकी दक्षिण चीन सागर से लेकर हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपना प्रभुत्व बढ़ाने की टेढ़ी नजर है। इसके अलावा, इस क्षेत्र में चीन कारोबार और निवेश के क्षेत्र में भी भारत को अपना प्रतिद्वंद्वी मानता है। समुद्री सुरक्षा समेत मुक्त कारोबार पर भी जोर डॉ. टेम्जेनमरेन एओ कहते हैं कि EAS का मकसद समुद्री सुरक्षा के साथ-साथ समंदर में मुक्त कारोबारी क्षेत्र विकसित करना भी है। यही वजह है कि पीएम मोदी समंदर को भयमुक्त बनाना चाहते हैं। वह चाहते हैं कि समुद्री सुरक्षा होने से हिंद-प्रशांत देशों के बीच समुद्री कारोबार ज्यादा बढ़ेगा। दरअसल, इस इलाके में क्षेत्रीय शक्तियों के बीच सैन्य बजट में बढ़ोतरी शांति, सुरक्षा और समृद्धि के व्यापक मकसद को कमजोर करता है। भारत के लिये EAS की क्या अहमियत है? भारत के लिए EAS इसके तेजी से बढ़ते आर्थिक और राजनीतिक ताकत को मान्यता देने वाला मंच है। ASEAN और अन्य बहुपक्षीय देशों के साथ बहुआयामी संबंध बनाने और द्विपक्षीय संबंधों को मज़बूत करने के लिये भारत ने अपनी एक्ट ईस्ट पॉलिसी (Act East Policies) पर बल दिया है जिसके लिये EAS महत्त्वपूर्ण साबित होगा। मुद्री क्षेत्र में भारत बन सकता है बड़ा पॉवर दक्षिण चीन सागर में चीन की दबंगई और उसके बढ़ते निवेश की प्रकृति ने आसियन देशों में भारत को एक ऐसी संभावित शक्ति के रूप में देखने के लिये प्रेरित किया है जो चीन को संतुलित कर सकता है। भारत समुद्री क्षेत्र में बड़ा पॉवर बन सकता है। भारत की शक्ति सेवा क्षेत्र और सूचना-प्रौद्योगिकी में है, वहीं जापान के पास एक मजबूत पूंजी आधार भी है।

साईबर सुरक्षा व जल संरक्षण को लेकर नगर निगम ऑडिटोरियम में आयोजित हुई कार्यशाला

साईबर सुरक्षा व जल संरक्षण के उपायों को लेकर जागरूकता व उसे अमल में लाना बेहद जरूरी-सुप्रीम कोर्ट जस्टिस प्रशांत मिश्रा साईबर अपराधों से बचाव व जल संरक्षण के लिए सजगता से करने होंगे साझे प्रयास-वित्त मंत्री ओ.पी.चौधरी साईबर सुरक्षा व जल संरक्षण को लेकर नगर निगम ऑडिटोरियम में आयोजित हुई कार्यशाला जिला विधिक सेवा प्राधिकरण तथा जिला एवं पुलिस प्रशासन के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित हुई कार्यशाला रायगढ़ साईबर जागरूकता एवं जल संरक्षण को लेकर नगर निगम ऑडिटोरियम में गुरूवार शाम 5 बजे से कार्यशाला का आयोजन किया गया। सुप्रीम कोर्ट जस्टिस प्रशांत मिश्रा कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रहे। वित्त मंत्री ओ.पी.चौधरी बतौर विशिष्ट अतिथि के रूप में कार्यक्रम में शामिल हुए। कार्यशाला में साईबर जागरूकता एवं जल संरक्षण पर प्रजेन्टेशन के माध्यम से विस्तृत जानकारी दी गई। यह कार्यशाला जिला विधिक सेवा प्राधिकरण तथा जिला एवं पुलिस प्रशासन के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित की गई। इसमें जिला एवं सत्र न्यायाधीश रायगढ़ जितेन्द्र कुमार जैन, कलेक्टर कार्तिकेया गोयल, पुलिस अधीक्षक दिव्यांग पटेल, सीईओ जिला पंचायत जितेन्द्र यादव, जिला न्यायालय से सभी न्यायाधीश, जिला व पुलिस प्रशासन के अधिकारी उपस्थित रहे।             कार्यशाला को संबोधित करते हुए जस्टिस प्रशांत मिश्रा ने कहा कि साईबर जागरूकता एवं जल संरक्षण यह दो ऐसे विषय है जो आज के समय में हम सभी के जीवन से सीधे तौर से जुड़े हुए है। साईबर अपराधों से बचाव के लिए इसके बारे में जागरूक होना सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। आज टेक्नालॉजी तेजी से विकसित हो रही है। ऐसे में स्वयं को अपडेट रखना और साईबर अपराधों से जुड़ी जानकारी व उससे बचाव के तरीकों को अमल में लाकर ऐसे अपराधों से बचा जा सकता है। उन्होंने अपने आसपास के वाकये बताते हुए कहा कि साईबर ठग लोगों को ज्यूडशरी से जुड़े लोगों के नाम पर भी ठगने का प्रयास करते है। ऐसे मामलों में सतर्कता व सुझबुझ से काम लेना जरूरी है। उन्होंने जल संरक्षण को लेकर कहा कि यह ऐसा मामला है जिसमें हर नागरिक की सहभागिता जरूरी है। जागरूकता के साथ ही जल संरक्षण के उपायों को अमल में लाकर ही हम अपने आसपास एक बेहतर वातावरण निर्मित कर सकते है। इसके लिए सभी को सकारात्मक सोच के साथ काम करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जिला एवं पुलिस प्रशासन के द्वारा लोगों को जागरूक करने के लिए एक अच्छा प्रयास किया जा रहा है। अधिक से अधिक लोगों को इसका लाभ लेकर अपने आसपास दूसरों को भी जागरूक करना चाहिए।             वित्त मंत्री ओ.पी.चौधरी ने कहा कि साईबर अपराधों का दायरा जिस तेजी से बढ़ा है, लोगों के बीच सतर्कता का स्तर उसी अनुरूप बढ़ाना आवश्यक है। आज के डिजीटल युग में अगर समझदारी से काम न लिया जाए तो एक क्लिक में आदमी अपनी सारी जमा पूंजी गंवा सकता है। उन्होंने बताया कि चोरी जैसे अपराधों के मुकाबले अब साईबर ठगी से लोगों को कही ज्यादा आर्थिक नुकसान हो रहा है। शासन-प्रशासन अपने स्तर पर ऐसे अपराधों पर लगाम लगाने व अपराधियों को सजा दिलाने के लिए कार्य कर रही है। लेकिन एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में सभी को सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। साईबर अपराधों के तरीके व इसके पीछे काम करने वाले मनोभावों की समझ बढ़ाकर तथा उससे बचाव के तरीकों के बारे में स्वयं तथा अपने परिवार वालों को जागरूक कर साईबर अपराधों से बचा जा सकता है। उन्होंने जिला प्रशासन के जल संरक्षण अभियान की सराहना करते हुए कहा कि रायगढ़ में भू-जल व पर्यावरण संरक्षण की दिशा में यह महत्वपूर्ण कार्य है। उन्होंने बताया कि शासन स्तर पर नवा रायपुर में पीपल फॉर पीपुल अभियान चलाकर व्यापक रूप से पीपल के पेड़ लगाने का काम किया जा रहा है। रायगढ़ जिले में भी व्यापक स्तर पर यह कार्य हुआ है। केलो बांध का पानी नहरों के माध्यम से किसानों तक पहुंचाने की दिशा में कार्य हो रहा है। उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति में प्रकृति पूजन का अहम स्थान रहा है। इसको दृष्टिगत रखते हुए हम सभी को जल संरक्षण की दिशा में साथ मिलकर कार्य करना होगा। उन्होंने बताया कि पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से शासन स्तर पर फ्लाईएश व ईएसपी मैनेजमेंट की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।            कार्यशाला को कलेक्टर कार्तिकेया गोयल ने संबोधित करते हुए कहा कि साईबर सुरक्षा व जल संरक्षण को लेकर जागरूकता आज समाज के प्रत्येक नागरिक के लिए बेहद जरूरी है। सभी के साझे प्रयास से ही इन समस्याओं का समाधान संभव है। पुलिस अधीक्षक दिव्यांग पटेल ने कार्यक्रम में आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इन सामाजिक उद्देश्यों की पूर्ति सभी के समन्वित प्रयास से ही संभव होगी। कार्यशाला में नगर निगम आयुक्त सुनील कुमार चंद्रवंशी, एसडीएम रायगढ़ प्रवीण तिवारी, डीएसपी साईबर अभिनव उपाध्याय व साइबर टीम के साथ हेल्पिंग हैंड्स क्लब फाउंडेशन के संरक्षक मनोज गोयल अध्यक्ष  अंकित अग्रवाल, विन्नी सलूजा, निलेश अग्रवाल, राजेश अग्रवाल, कविता बेरीवाल, अंजू बंसल, दिव्य ऊर्जा लायंस क्लब, लायंस क्लब प्राइड, रानीसति सेवा समिति, लायंस क्लब सिटी, दिव्य शक्ति सहित शहर के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। जन भागीदारी से जल भागीदारी की मुहिम होगी सफल कार्यक्रम में सीईओ जिला पंचायत जितेन्द्र यादव ने जन भागीदारी से जल भागीदारी विषय पर जिला प्रशासन द्वारा किए गए कार्यों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पूरे जिले में जल संरक्षण को लेकर विभागीय समन्वय से व्यापक स्तर पर कार्य किए जा रहे है। इसमें लोगों को जल संरक्षण के लिए जागरूक करने के साथ पानी को सहेजने के लिए किए जा रहे प्रयासों में उनकी सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की जा रही है। इस मुहिम में जिले के हर पंचायत में काम किया जा रहा है। दस हजार से अधिक हैण्डपंप के समीप सोख्ता गड्ढा बनाया गया है। 50 हजार पीपल के पेड़ लगाए गए है। नारी शक्ति से जल शक्ति के ध्येय के साथ कार्य किया जा रहा है। रायगढ़ में जल शक्ति केन्द्र की स्थापना की गई है। अमृत सरोवर योजना से तालाबों के गहरीकरण व विस्तार का काम किया जा रहा है। विभागों द्वारा विभिन्न प्रकार की जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण किया गया है। किसानों को उद्यानिकी फसलों की खेती से जोड़ा गया है। स्वच्छता ही सेवा के तहत … Read more

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