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तुर्की के राष्ट्रपति ने संयुक्त राष्ट्र से कहा- इजरायल को रोका जाए

तेल अवीव  तुर्की के राष्ट्रपति तैय्यप एर्दोगन ने गाजा और लेबनान में इजरायल के हमलों को तुरंत रोकने की अपील की है। एर्दोगन ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद अगर गाजा और लेबनान में इजरायल के हमलों को रोकने में कामयाब नहीं हो रही है तो फिर इससे आगे बढ़ते हुए कदम उठाए जाएं। इजरायल नहीं रुक रहा है तो संयुक्त राष्ट्र महासभा को तुरंत 1950 में पारित प्रस्ताव के मुताबिक इजरायल के खिलाफ सेना के इस्तेमाल की सिफारिश करनी चाहिए। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार अंकारा में एक कैबिनेट बैठक के बाद एर्दोगन ने कहा, ‘अगर सुरक्षा परिषद जरूरी इच्छाशक्ति नहीं दिखाती है, तो संयुक्त राष्ट्र महासभा को बल के उपयोग की सिफारिश करने के अधिकार को तेजी से लागू करना चाहिए। एर्दोगन ने कहा कि गाजा में इजरायल ने भारी तबाही मचाई और अब वही लेबनान में शुरू हो गया है। ये सब रुकना बहुत ज्यादा जरूरी है।’ ‘दूसरे मुस्लिम देश भी बनेंगे इजरायल का निशाना’ एर्दोगन ने इस दौरान कहा कि हमारे क्षेत्र में रहने वाले सभी मुस्लिम, यहूदी और ईसाइयों के लिए हम शांति की चाह रखते हैं। हम शांति के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय और मुस्लिम दुनिया से एकजुट होने का आह्वान करते हैं। एर्दोगन ने कहा कि इजरायल का आक्रामक रवैया बढ़ता जा रहा है, अगर उसे जल्दी नहीं रोका गया तो उसके हमले दूसरे मुस्लिम देशों को भी निशाना बनाएंगे। उत्तर कोरिया के प्रतिनिधि किम सोंग ने भी इजरायल के हमलों की आलोचना की है। सोंग ने न्यूयॉर्क में यूएनजीए के 79वें सत्र में कहा कि यह कल्पना करना भी मुश्किल लगता है कि एक देश (इजरायल) गाजा में भयानक नरसंहार करने के बाद भी किसी भी तरह की निंदा और मंजूरी से अछूता है। ऐसा उसको अमेरिका के संरक्षण की वजह से है। इजरायल ने लेबनान में शुरू किया जमीनी आक्रामण इजरायली रक्षा बलों ने लेबनान में भीषण बमबारी के बाद जमीनी हमला भी शुरू कर दिया है। मंगलवार को आईडीएफ ने कहा कि उसके सैनिकों ने हिजबुल्लाह की साइटों को टारगेट करने के लिए लेबनान की सीमा पार की है। आईडीएफ का कहना है कि उसकी सैनिक दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर लक्षित जमीनी हमले कर रहे हैं। इयरायली सेना ने ऐसे संकेत दिए हैं, जिनसे लगता है कि आने वाले दिनों में हमले बढ़ सकते हैं।

अगले दो महीने तक पृथ्वी से मिनी मून देखा जा सकेगा, जाने क्या भारत में भी दिखेगा

वॉशिंगटन धरती से इस समय एक दूसरा चांद भी देखा जा सकता है, यानी दो चांद देखे जा सकते हैं। अगले दो महीने यानी नवंबर के आखिर तक ये मिनी-मून धरती की परिक्रमा करेगा। ये मिनी मून एक एस्टेरॉयड है, जिसका नाम 2024 पीटी5 है। यह एस्टेरॉयड रविवार को पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण में आ गया है। इसके दो महीने तक पृथ्वी की परिक्रमा करने की उम्मीद है, ये 25 नवंबर तक हमारे ग्रह का चक्कर लगाएगा। एस्टेरॉयड 2024 पीटी5 करीब 10 मीटर चौड़ा है और वैज्ञानिकों ने इसे पहली बार अगस्त में स्पेन में खोजा था। 2024 पीटी5 एस्टेरॉयड के एक समूह का हिस्सा है, जिसे अर्जुन क्षुद्रग्रह बेल्ट कहा जाता है, जो पृथ्वी की तरह ही सूर्य के चारों ओर यात्रा करता है। इस तरह के मिनी मून बहुत दुर्लभ भी नहीं हैं। 2020 में भी एक मिनी मून देखा गया था। क्या आप भारत से देखा जा सकेगा ये दूसरा चांद? अंतरिक्ष में इस समय एक नहीं दो चंद्रमा दिख रहे हैं लेकिन इस दूसरे चांद को कोई भी रात में नहीं देख सकता है। मिनी मून को कोई भी नंगी आंखों से नहीं देख पाएंगा। यहां तक कि नियमित दूरबीनें भी इसे नहीं खो पाएंगी। इसके आकार और धुंधली उपस्थिति के कारण केवल बड़े, पेशेवर-श्रेणी के टेलीस्कोप से ही 2024 PT5 की झलक देख सकते हैं। ऐसे में आम लोगों के लिए इसे देखना तकरीबन नामुमकिन है। आम लोगों को इसे देखने के लिए ऑब्जर्वेटरी से आने वाली तस्वीरों का इंतजार करना होगा। यह मिनी मून उस वैज्ञानिक सिद्धांत को मजबूत करता है तो कहता है कि पृथ्वी के आसपास अतंरिक्ष में बहुत सी वस्तुएं लगातार तैर रही हैं, जिनमें सो कुछ को ही देखा जा सकता है। मिनी-मून क्या होता है? मिनी-मून बेहद दुर्लभ होते हैं। ये एस्टेरॉयड आमतौर पर पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण की वजह से ग्रह की कक्षा में 10 से 20 वर्षों में एक बार ही आते हैं। हालांकि हाल के वर्षों में सामने आया है कि ये एक्सोस्फीयर में रह सकते हैं, जो पृथ्वी की सतह से लगभग 10,000 किमी ऊपर है। औसतन मिनी-मून कुछ महीनों से लेकर दो साल तक पृथ्वी की कक्षा में रहते हैं। इसके बाद ये पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण खिंचाव से अलग हो जाते हैं। वैज्ञानिक इस बात के लिए भी निश्चित नहीं हैं कि यह क्षुद्रग्रह केवल अंतरिक्ष चट्टान का एक टुकड़ा है या फिर चंद्रमा का एक टुकड़ा है, जो बहुत पहले टूट गया था। दिलचस्प बात यह है कि इस लघु चंद्रमा के 2055 में फिर से पृथ्वी के पास से गुजरने की उम्मीद है।

राजनाथ सिंह ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा- देश की सर्वश्रेष्ठ प्रतिभाओं को भारतीय सेनाओं में भर्ती होकर अपनी सेवाएं देनी चाहिए

नई दिल्ली रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का कहना है कि भारतीय वायुसेना दूर देश के दुश्मनों को उनके घर में मार गिराने में सक्षम है। राजनाथ सिंह ने मंगलवार को नेशनल वार मेमोरियल में एक कार्यक्रम को संबोधित कर जोर देते हुए कहा कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ दृष्टिकोण को मूर्तरूप देने की दिशा में सरकार ने अपनी पूरी प्रतिबद्धता दिखाई है। देश की सर्वश्रेष्ठ प्रतिभाओं को भारतीय सेनाओं में भर्ती होकर अपनी सेवाएं देनी चाहिए, ताकि उनका जीवन देश की सेवा, शौर्य और गौरव से ओतप्रोत रहे। राजनाथ ने की वायुसैनिकों की तारीफ रक्षा मंत्री ने कठिन परिस्थितियों में वीरता, प्रतिबद्धता और देशभक्ति के साथ वायुसैनिकों की भारत माता की सेवाओं के लिए जोरशोर से प्रशंसा की। रक्षा मंत्रालय ने रक्षा मंत्री के हवाले से बताया कि भारतीय वायुसेना ने अपने देश और लोगों की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया है। वह दुश्मन के क्षेत्र में अंदर तक घुसकर मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम है। कार रैली को दिखाई हरी झंडी केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हम वायुसेना को अत्याधुनिक युद्धक विमानों से लैस करने को प्रतिबद्ध हैं और आत्मनिर्भर भारत अवधारणा के तहत इनके लिए और उत्पादन भी करेंगे। भारतीय वायुसेना के 92वीं वर्षगांठ से पूर्व आयोजित समारोह में रक्षा मंत्री ने ‘वायुवीर विजेता’ कार रैली को रवाना किया। सात हजार किलोमीटर लंबी रैली लद्दाख के थोइज से रवाना होकर अरुणाचल प्रदेश स्थित तवांग में समाप्त हो जाएगी। आगामी आठ अक्टूबर को दुनिया के सबसे ऊंचे वायुसेना स्टेशनों में समुद्र तल से 3,068 मीटर ऊपर यह आयोजन होगा। भारतीय वायुसेना के 92वीं वर्षगांठ मनाने के लिए यह आयोजन होगा। वायुसेना की स्थापना 8 अक्टूबर, 1932 को हुई थी। यह वायु वीर 29 अक्टूबर को तवांग पहुंचने से पहले लेह, करगिल, श्रीनगर, जम्मू, चंडीगढ़, देहरादून, आगरा, लखनऊ, गोरखपुर, दरभंगा, बागडोगरा, हसिमारा, गुवाहाटी, तेजपुर और दिरांग में रुकेंगे। इस बीच, राजनाथ ने कहा कि रक्षा क्षेत्र के 32 लाख पेंशनरों में से तीस लाख को सफलतापूर्वक ‘स्पर्श पोर्टल’ से संबद्ध कर दिया गया है।

सितंबर में GST कलेक्शन में दिखा उछाल, 1.73 लाख करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल इसी महीने में के मुकाबले 6.5 फीसदी ज्यादा है

नई दिल्ली सितंबर महीने का जीएसटी कलेक्शन का डेटा सामने आ गया है। सितंबर में वस्तु एवं सेवा कर कलेक्शन 1.73 लाख करोड़ रुपये रहा है जो पिछले साल इसी महीने में 1.63 लाख करोड़ रुपये के मुकाबले 6.5 फीसदी ज्यादा है। अगस्त में जीएसटी कलेक्शन 1.74 लाख करोड़ रुपये रहा था। जीएसटी रिफंड्स जारी करने के बाद कुल कलेक्शन सितंबर महीने में 4 फीसदी बढ़कर 1.53 लाख करोड़ रुपये रहा है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर में घरेलू कर राजस्व 5.9 प्रतिशत बढ़कर लगभग 1.27 लाख करोड़ रुपये हो गया। वहीं माल के आयात से प्राप्त राजस्व आठ प्रतिशत बढ़कर 45,390 करोड़ रुपये हो गया। आलोच्य अवधि में जीएसटी विभाग की तरफ से 20,458 करोड़ रुपये के रिफंड जारी किए गए जो एक साल पहले की समान अवधि की तुलना में 31 प्रतिशत अधिक है। रिफंड राशि को समायोजित करने के बाद सितंबर में शुद्ध जीएसटी राजस्व 1.53 लाख करोड़ रुपये रहा। यह पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 3.9 प्रतिशत अधिक है।  

हरियाणा में धान खरीद न होने से किसान लामबंद होने लगे, फैला आक्रोश, मंडी में ताला लगाने पर अड़े

कुरुक्षेत्र/करनाल हरियाणा में धान खरीद न होने से किसान लामबंद होने लगे हैं। सरकार की तरफ से धान खरीद शुरु होने का लेटर तो जारी हो गया, लेकिन हकीकत में अभी खरीद केंद्रों में ताला लटक रहा है। इसी को लेकर करनाल और कुरुक्षेत्र में किसानों ने प्रदर्शन किया। जिले के बीआर चौक पर जाम लगाकर सड़क पर बैठे किसानों ने कहा कि उन्हें बार-बार तारीख दी जा रही है, लेकिन खरीद केंद्र फसल नहीं ली जा रही है। उनका कहना है कि मंडियां भी धान के ढेर से भर चुकी हैं। कहीं ऐसा न हो फसल खराब हो जाए। वहीं करनाल में भारतीय किसान यूनियन के सैकड़ों किसानों ने सेक्टर 12 लघु सचिवालय गेट के सामने जोरदार प्रदर्शन किया। धान की खरीद न होने और कम  रेट पर धान की खरीद होने से परेशान किसानों द्वारा विरोध जताया गया। किसानों द्वारा धान की ट्राली लघु शौचालय गेट पर लाई गई और गेट के सामने ही धान  को सड़क के ऊपर गिराने  का ऐलान कर दिया। किसानों का कहना है कि सरकार द्वारा सरकारी बोली शुरू करने की बात की गई थी, परंतु आज की तारीख में भी खरीद नहीं हो रही है। किसानों ने कहा कि पहले जल्दी खरीद होने का आस्वासन दिया था। बाद दोबारा डेट आगे बढ़ा दी गई। वहीं 27 तारीख से धान की बोली करने की बात की गई थी, परंतु धान की खरीद सही दामों पर नहीं की जा रही। जिसको लेकर किसानों में रोष है, उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार राइस मिलरों के जरिए किसानों को बर्बाद करना चाहती है। राइस मिल सस्ते में धान खरीद रहे हैं जिससे उनको 500 से ₹700 का नुकसान हो रहा है। करनाल एडीसी ने किसानों के साथ मीटिंग की और कहा कि जल्दी ही बातचीत कर के बोली शुरू कर दी जाएगी। परन्तु किसानों ने धरना जारी रखने की बात की और कहा मंडियों के गेट को ताला लगाएंगे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पुणे में रामभाऊ म्हाळगी प्रबोधिनी संस्थान की राष्ट्रीय चर्चा में किया संबोधित

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि लोकमाता अहिल्या बाई होल्कर ने सच्चे अर्थों में सनातन संस्कृति की ध्वजा को लहराने का कार्य किया। अठाहरवीं शताब्दी में लगभग 28 वर्ष के उनके शासन में प्रशासनिक कुशलता, जन-कल्याण, सुशासन के अनेक दृष्टांत प्रस्तुत किए। लोकमाता अहिल्या बाई की 300वीं जयंती पर मध्यप्रदेश में कई कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे है। आज गौरवशाली इतिहास वाले पुणे में रामभाऊ म्हाळगी प्रबोधिनी संस्था के राष्ट्रीय चर्चा कार्यक्रम में आकर पुणे नगरी को प्रणाम करते हुए यहाँ शिवाजी महाराज, लाला लाजपत राय, बाल गंगाधर तिलक की स्मृति को नमन है, जिनके कारण पुणे महानगर का स्पंदन पूरा राष्ट्र महसूस करता है। पुणे महानगर प्रकारांतर से इंदौर और उज्जैन की तरह प्रतीत होता है। राष्ट्रीय चर्चा में राजस्थान के राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागड़े भी विशेष रूप से उपस्थित थे। मुख्य वक्ता पद्मश्री सुश्री निवेदता ताई भिड़े उपाध्यक्ष स्वामी विवेकानंद केन्द्र कन्याकुमारी के अलावा श्रीमती नाथीबाई दामोदर ठाकरसी, महिला विद्यापीठ मुंबई की कुलगुरू डॉ. उज्जवला चक्रदेव, भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद और रामभाऊ म्हाळगी प्रबोधिनी संस्थान के पदाधिकारी श्री विनय सहस्त्रबुद्धे ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को पुणे के जानकी देवी बजाज इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज ऑडिटोरियम में “पुण्यश्लोक अहिल्या बाई होलकर और उनके जन कल्याणकारी सुशासन” विषय पर मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पुणे में शिवाजी महाराज की सरिता की धारा के अलग-अलग तट के हिस्से दिखाई देते हैं। इसके साथ ही सिंधिया, होलकर वंश के शासकों सहित लोक माता के कार्यों का स्मरण सहज ही हो जाता है। पेशवा बाजीराव जी और सिंधिया जी का सहयोग वर्तमान के महाकाल मंदिर उज्जैन के कायम रहने का आधार बना। हमारे शासकों ने उस दौर में महाकाल मंदिर का निर्माण किया, जब बाहरी आक्रामक विभिन्न नगरों को ध्वस्त करने के लिए तैयार बैठे थे। छत्रपति शिवाजी महाराज के साहस और लोकमाता अहिल्या देवी के लोक कल्याणकारी कार्यों का स्मरण आज पूरा राष्ट्र कर रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी में भगवान विश्वनाथ जी के देवस्थान में जाने का अवसर मिलता है तो हम उनके दर्शन से अभिभूत होते हैं। यह सुअवसर भी लोकमाता अहिल्या बाई ने दिया, यह मंदिर उनकी ही देन है। लोकमाता अहिल्या बाई ने द्वारका, सोमनाथ और कई अन्य स्थानों पर ऐसे प्रकल्प संचालित किए। वे प्रशासनिक कुशलता, युक्ति एवं बुद्धिमत्ता से कार्य करती थीं। उनके साथ सहकर्मी सेनापतियों ने भी आर्थिक लाभ के लिए छल किए, लेकिन लोकमाता समाधान का मार्ग निकालने में पीछे नहीं रहीं। उन्होंने अनेक इलाकों में सकारात्मक परिवर्तन के लिए कुंओं के निर्माण, उद्यानों के निर्माण, प्याऊ प्रारंभ करने, सड़कों के निर्माण और सुधार कार्य, अन्न क्षेत्र प्रारंभ करने, मंदिरों में विद्वानों की निुयक्ति और खेती-बाड़ी के कार्यों से लोगों को जोड़कर सम्पूर्ण समाज को बदलने का कार्य किया। वे एक माँ का प्रतिरूप थीं। अनेक दुखों को सहते हुए उन्होंने शासन के ऐसे सूत्र संचालित किए, जो सर्व कल्याण के भाव का उदाहरण है। उनके राज्य में दो तरह की धन राशि का प्रावधान था। व्यक्तिगत उपयोग के साथ ही राशि का परिवार के लिए उपयोग करने का संदेश धनगर और यादव समाज ने दिया है, जिसमें परिवार की महिला को आय का एक चौथाई हिस्सा प्रदान किया जाता है। होलकर वंश में खासगी परम्परा कहा गया। उस दौर में 18 करोड़ की राशि जिसका वर्तमान मूल्य दो हजार करोड़ से ही अधिक होगा, उसके माध्यम से अनेक प्रकल्पों का संचालन किया गया। राज्य की सुरक्षा के लिए लोकमाता ने कूटनीति और युद्ध कौशल के अनेक दृष्टांत प्रस्तुत किए। नारी होकर भी वे पुरूषार्थ का प्रतीक थीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लोकमाता अहिल्या बाई होल्कर ने वर्ष 1767 में अपनी राजधानी महेश्वर से इंदौर करने का निर्णय लिया था। महेश्वरी साड़ी के लिए महेश्वर विश्व में प्रसिद्ध है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि इंदौर को राजधानी बनाने के बाद यह शहर एक महत्वपूर्ण केन्द्र बना। इंदौर ने व्यापार, संस्कृति और कला के क्षेत्र में विकास किया। इंदौर में अनेक स्मारकों का निर्माण करवाया गया है, जिनमें से अनेक आज भी मौजूद हैं। महेश्वर के साथ ही ओंकोरश्वर में भी नर्मदा जी के किनारे भी सुविधाजनक घाट निर्मित करवाया, जो महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल बना। तीर्थयात्रियों के लिए अनेक सुविधाएं विकसित की गईं। भगवान शिव, लोकमाता अहिल्या बाई के प्रमुख आराध्य थे। देश के अनेक स्थानों पर उन्होंने शिव मंदिरों का निर्माण करवाया। महेश्वर हस्तशिल्प का महत्वपूर्ण केन्द्र हैं जो आत्म-निर्भरता का भी प्रतीक है मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महेश्वर की विशेषताएं बताते हुए कहा कि महेश्वर आज हस्तशिल्प का प्रमुख केन्द्र हैं। यह नगर आत्मनिर्भरता का संदेश देता है। हस्तशिल्प का हुनर हजारों व्यक्तियों को आत्म-निर्भर बनाकर आर्थिक उन्नति का माध्यम बना हुआ है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अहिल्या बाई की 300वीं जयंती पर मध्यप्रदेश में होने जा रहे कार्यक्रमों की भी जानकारी दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किया ‘शिव-सृष्टि’ थीम पार्क का अवलोकन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंगलवार को अम्बेगांव (पुणे) में एशिया के एकमात्र ऐतिहासिक थीम पार्क ‘शिव-सृष्टि’ का अवलोकन किया। महाराजा शिव-छत्रपति प्रतिष्ठा न्यास संस्थान द्वारा संचालित ‘शिव-सृष्टि’ थीम पार्क का उद्देश्य छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन और उनके संघर्ष को जीवंत करना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पुणे में संस्थान की गतिविधियों की प्रशंसा की। छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन और उनके योगदान से परिचित करवाने वाला ‘शिव-सृष्टि’ थीम पार्क 21 एकड़ भूमि में स्थित है। इसकी अनुमानित लागत 438 करोड़ रुपये है। अब तक इस मेगा प्रोजेक्ट के दो चरण पूरे हो चुके हैं। पहले चरण में सरकारवाड़ा के अंतर्गत महाराष्ट्र के किलों की प्रदर्शनी, छत्रपति शिवाजी महाराज के आगरा से बच निकलने की कहानी, रायगढ़ का 5-डी शो, शस्त्रों की प्रदर्शनी और शिवाजी महाराज के जीवन पर केन्द्रित अन्य इंटरैक्टिव अनुभव शामिल हैं। दूसरे चरण में रोटेशनल प्लेटफार्म पर ‘स्वराज्य स्वधर्म, स्व-भाषा’ शो विकसित किया गया है, जिसे एक बार में लगभग 100 दर्शक  देख सकते हैं। थीम पार्क के तीसरे चरण में प्रवेश द्वार (रंग मंडल), राजसभा का निर्माण, डार्क राइड, तटबंध, लैंड-स्केप और ऑडिटोरियम का निर्माण कार्य पूरा किया जा रहा है। इस थीम पार्क को ‘मेगा टूरिज्म प्रोजेक्ट’ का दर्जा … Read more

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा- विधायक आगामी 4 वर्ष के विकास की कार्य योजना बनाकर दें प्रस्ताव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रत्येक जिले की भौगोलिक स्थिति अलग-अलग होने से आवश्यकताएं भी पृथक-पृथक होंगी। विधायक अपने-अपने क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति और आवश्यकता के अनुरूप आगामी चार-पांच वर्षों के लिए विकास कार्यों की कार्य योजना बनाकर प्रस्ताव दें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हम मध्यप्रदेश को देश का नंबर वन राज्य बनाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव, मुख्यमंत्री निवास के समत्व भवन में कांग्रेस विधायकों से चर्चा कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को नेता प्रतिपक्ष श्री उमंग सिंघार के साथ 38 कांग्रेस के विधायक एवं प्रतिनिधियों ने भेंट की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अतिवृष्टि और बाढ़ प्रभावित फसलों के सर्वे कराने के निर्देश कलेक्टरों को दिए हैं। राजस्व अधिकारियों से राजस्व क्षति का आंकलन करेंगे। रिपोर्ट के आधार पर फसल, पशु एवं जन-धन की हानि का आंकलन के बाद क्षतिपूर्ति राशि सुनिश्चित कर भुगतान किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कलेक्टर का दायित्व है कि अपने जिले की समस्याओं का निराकरण करें। दूग्ध उत्पादन में प्रदेश होगा नम्बर वन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में गौ-धन को बढ़ावा देने और दुग्ध-उत्पादकों को प्रोत्साहन राशि देने के लिए बोनस दूध योजना प्रांरभ की जाएगी। निराश्रित गायों के संरक्षण एवं सुरक्षा के लिए गौ-शालाओं की व्यवस्थाओं को और अधिक सुविधाजनक बनाने के लिए इन्दौर, उज्जैन, भोपाल और ग्वालियर नगर-निगम को वृहद गौ-शालाओं का निर्माण करने और रख-रखाव के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दुग्ध-उत्पादन एवं दूध से बने उत्पादों के व्यवसाय की दृष्टि से मध्यप्रदेश देश का नम्बर वन राज्य बनेगा। राज्य परिसीमन आयोग मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राजस्व प्रकरणों के निराकरण के लिए अभियान चलाकर लंबित प्रकरणों का निराकरण कराया गया है। आम जनता और किसानों के अधिकतर प्रकरण राजस्व संबंधी होते हैं। जिलों की संभागीय कार्यालयों से दूरी के कारण आम जनता के समय और धन दोनों का अपव्यय होता है, इसलिए मध्यप्रदेश परिसीमन आयोग बनाया गया है, जो जिलों का पुनर्गठन का कार्य करेगा। लोक सेवा केन्द्र हेल्पलाईन के रूप में बहुत अच्छा काम कर रहे हैं। जल-जीवन मिशन में हर घर में जल पहुँचाने का कार्य निरंतर जारी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सभी जन-प्रतिनिधि अपने-अपने क्षेत्र के और अधिक विकास के लिए प्रयास कर रहे हैं। हम सभी की कोशिश है कि मध्यप्रदेश सबसे समृद्ध और विकसित राज्य बनें।  

किसानों की छोटी-छोटी समस्याओं को सुलझाने से उनकी आय में 20 प्रतिशत तक की वृद्धि हो सकती है: कृषि मंत्री शिवराज

नई दिल्ली केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को कहा कि किसानों की छोटी-छोटी समस्याओं को सुलझाने से उनकी आय में 20 प्रतिशत तक की वृद्धि हो सकती है। चौहान ने 24 सितंबर को शुरू हुई अपनी ‘सीधा संवाद’ पहल के तहत भारतीय किसान संघ (स्वतंत्र) के सदस्यों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने कृषि क्षेत्र को प्रभावित करने वाली विभिन्न चुनौतियों पर चर्चा की। किसानों की सेवा को भगवान की पूजा बताते हुए चौहान ने कहा, ‘‘ये समस्याएं छोटी लग सकती हैं, लेकिन इनका समाधान करने से किसानों की आय में 10 से 20 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है।’’ एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि बैठक में भारतीय किसान संघ के प्रतिनिधियों ने कारखाने के दूषित पानी और जले हुए ट्रांसफार्मर को कम समय में बदलने पर चर्चा की। चर्चा के दौरन फसल की लागत कम करने, उचित मूल्य सुनिश्चित करने और जलभराव को रोकने पर भी बात हुई। इसके अलावा, कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग, स्वास्थ्य पर इसके प्रभाव और पीएम फसल बीमा योजना जैसी सरकारी योजनाओं तक पहुंच पर चर्चा की गई। चौहान ने विभिन्न चुनौतियों का समाधान करने के लिए हर मंगलवार को किसानों और कृषि संगठनों के प्रतिनिधियों से मिलने की प्रतिबद्धता जताई। संवाद पहल का उद्देश्य समस्या समाधान में तेजी लाने और कृषि उत्पादकता बढ़ाने के लिए मंत्रालय और कृषक समुदायों के बीच सीधा संवाद कायम करना है।

दिसंबर 2024 तक सेंसेक्स 1 लाख के आंकड़े को छू सकता है : मार्क मोबियस

मुंबई भारतीय शेयर बाजार (Indian Stock Market) के लिए साल 2024 शानदार रहा है. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स हो या फिर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी, दोनों ने नए रिकॉर्ड बनाए हैं. Sensex की बात करें, तो ये 86000 के बिल्कुल करीब पहुंच चुका है. इसकी रफ्तार को देखकर एक बार फिर से सवाल उठने लगे हैं कि क्या ये 1 लाख का स्तर पार कर लेगा? अब दिग्गज निवेशक मार्क मोबियस ने इसकी डेडलाइन बताई है और कहा है कि इस साल के अंत तक BSE Sensex एक लाख का जादुई आंकड़ा छू लेगा.   मार्क मोबियस को बाजार से ये उम्मीद दिग्गज निवेशक और मार्केट एक्सपर्ट मार्क मोबियस (Mark Mobius) ने अनुमान जाहिर करते हुए कहा है कि चाइनीज शेयरों में जारी तेजी के कारण इस साल के अंत तक सेंसेक्स 1,00,000 का स्तर छू सकता है. गौरतलब है कि मोबियस को उभरते बाजारों में निवेश के लिए इंडियाना जोन्स (Indiana Jones) भी कहा जाता है. बिजनेस टुडे के मुताबिक, उन्होंने कहा कि अगर मार्केट रेग्युलेटर सेबी (SEBI) डेरिवेटिव एक्टिविटीज को सीमित करने के लिए कड़े नियम बनाता है, तो इसका स्टॉक मार्केट पर बड़ा असर दिख सकता है. उभरते बाजार में इन्वेस्टमेंट की सलाह एक बिजनेस चैनल से बातचीत के दौरान मार्क मोबियस ने कहा कि वह उभरते बाजारों में आने वाले फंडों को ये सलाह देंगे कि वे अपना आधे से ज्यादा इन्वेस्टमेंट भारत में लगाएं. इसके साथ ही उन्होंने भारत की सेमीकंडक्टर सेक्टर में बढ़ती दिलचस्पी और इस दिशा में उठाए जा रहे कदमों को सराहनीय बताया है. इसके सात ही उन्होंने विदेशी फंडों को सलाह देते हुए कहा है कि भारत के अलावा 25 फीसदी चीन और ताइवान में, जबकि 25 फीसदी इन्वेस्टमेंट वियतनाम, तुर्की, ब्राजील, साउथ कोरिया और थाईलैंड में लगाने चाहिए. बीते Sensex ने तोड़े थे रिकॉर्ड बीता सप्ताह शेयर बाजार के दोनों इंडेक्स के लिए जबर्दस्त साबित हुआ था और BSE Sensex 86000 के बिल्कुल करीब पहुंच गया था. बता दें कि बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के 30 शेयरों वाले सेंसेक्स का ऑल टाइम हाई लेवल 85,978.25 है, जो पिछले हफ्ते ही छुआ गया था. वहीं पूरे हफ्ते की बात करें, तो बीएसई का सेंसेक्स (Sensex) इंडेक्स 1,027.54 अंक या 1.21 फीसदी की बढ़त में रहा था. सोमवार को देखी तगड़ी गिरावट हालांकि, सप्ताह के पहले दिन शेयर बाजार (Share Market) की खराब शुरुआत हुई और खुलने के बाद से सेंसेक्स-निफ्टी बुरी तरह टूट गए. मार्केट क्लोजिंग की अगर बात करें, तो सेंसेक्‍स (Sensex) 1272 अंक या 1.49 फीसदी तक टूट गया और 84,299 के लेवल पर क्लोज हुआ. इस दौरान बीएसई लार्जकैप कंपनियों में शामिल 30 में से 25 शेयर लाल निशान पर क्लोज हुआ. भारतीय शेयर बाजार 24 सितंबर को सेंसेक्स ने पहली बार 85,000 अंकों का रिकॉर्ड स्तर पार किया था। हालांकि, सोमवार को ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली के बीच इंडेक्स ने यह स्तर खो दिया। आज भारतीय बेंचमार्क सूचकांकों में गिरावट आई, जिसमें सेंसेक्स और निफ्टी 50 दोनों में एक-एक प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई। सेंसेक्स 85,208.76 पर खुला और 1.5 प्रतिशत की गिरावट के साथ दिन के निचले स्तर 84,257.14 पर आ गया। निफ्टी 50 26,000 अंक से नीचे आ गया। सूचकांक 26,061.30 पर खुला और इंट्रा-डे ट्रेड में 1.5 प्रतिशत की गिरावट के साथ 25,794.10 पर आ गया। आईपीओ बूम पर मोबियस ने कहा, “जब तक आप व्यवसाय के बारे में निश्चित न हों, तब तक आईपीओ में निवेश करना अच्छा विचार नहीं है।”

हमास leader के बेटे ने कहा ‘इजरायल का एक्शन पूरी तरह जायज’

बेरुत इजरायली सेना हमास के बाद अब लेबनान में हिजबुल्लाह आतंकियों पर मौत बन कर बरस रही है. लेबनान पर इजरायल की तरफ से लगातार हिजबुल्लाह आतंकियों को निशाना बनाकर बमबारी की जा रही है. इस बमबारी में अब तक टॉप कमांडर नसरल्लाह के अलावा हिजबुल्लाह के कई बड़े नेता मारे जा चुके हैं. इन हमलों में अबतक सैकड़ों नागरिकों की भी मौत हो चुकी है, जिसकी वजह से कई सारे देश इजरायल की आलोचना कर रहे हैं. लेकिन इन सब से उलट  मोसाब हसन यूसुफ ने इजयरायल के द्वारा किए जा रहे हमलों को सही बताया है. मोसाब हसन आतंकी संगठन हमास का को-फाउंडर रहा शेख हसन यूसुफ का बेटा है. ‘इजरायल का एक्शन पूरी तरह जायज’ मोसाब ने एक टीवी डिबेट में हिस्सा लेते हुए कहा कि, फिलिस्तीन में इजरायल सबसे वैध जातीय समूह है, जिसके पास उस भूमि से अपने संबंधों के मजबूत सबूत हैं. मुसलमान पिछले 1,400 सालों से उस जमीन से यहूदी लोगों का सफाया करने की कोशिश कर रहे हैं. मोसाब ने आगे कहा कि इजरायल को अपना बचाव करने का पूरा अधिकार है. हिजबुल्लाह और हमास के खिलाफ इजरायल का एक्शन पूरी तरह से जायज है. हसन नसरल्लाह मौत पर मोसाब ने कहा कि ये उसकी सजा है. वहीं मोसाब ने आगे कहा कि मैं फिलिस्तीन संघर्ष का गवाह रहा हूं. मोसाब ने बताया कि कैसे फिलिस्तीन में राजनीतिक और वित्तीय लाभ के लिए बच्चों की बलि दी जाती है. दुनिया भर में इजरायल की आलोचना पर मोसाब ने पूछा कि इजरायल में खून बह रहा था, तब किसी ने हिजबुल्लाह के एक्शन का विरोध क्यों नहीं किया?. अपने ही पिता के खिलाफ की जासूसी आपको जानकर हैरानी होगी कि इजरायल का इतनी मजबूती के साथ पक्ष रखने वाला मोसाब एक समय पर फिलिस्तीनी मिलिटेंट था. लेकिन 1997 में वो इजरायल चला गया और इजरायली खुफिया एजेंसी शिन बेट के लिए जासूसी करने लगा. हमास आतंकियों के द्वारा इजरायल के अंदर घूस कर हमला किया और कई सारे लोगों को बंधक बना लिया गया. उस वक्त मोसाब ने इजरायल से सभी हमास नेताओं के खात्मे की अपील की थी. मोसाब ने कहा था कि अगर सभी बंधक रिहा नहीं किए जाते हैं तो इजरायल को सभी हमास नेताओं को खत्म कर देना चाहिए. इन नेताओं में मोसाब के पिता का नाम भी शामिल था. फिलहाल लेबनान में इजरायल की सेना ने जमीनी हमला शुरू कर दिया है. इजरायल की सेना की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक सोमवार-मंगलवार की रात में आईडीएफ लेबनान के अंदर घुस गई है. आईडीएफ हिजबुल्लाह के ठिकानों के खिलाफ सीमित, स्थानीय और लक्षित जमीनी हमले कर रही है. उन्होंने कहा, ‘मैं मौजूदा घटनाक्रम पर अधिक टिप्पणी नहीं करना चाहता हूं. मैंने संघर्ष को दिया है. मैं फिलिस्तीन संघर्ष का गवाह रहा हूं. मैंने अपना आधा जीवन तथाकथित फिलिस्तीनी समाज में जिया है और आधा जीवन यहूदी समुदाय के साथ बिताया है. फिलिस्तीन की संस्कृति मौत की संस्कृति है, जो राजनीतिक और वित्तीय लाभ के लिए बच्चों की बलि देती है. जब इजरायल के साउथ में खून बह रहा था, तब किसी ने हिजबुल्लाह के एक्शन का विरोध क्यों नहीं किया? जब खेल के मैदान में 12 बच्चे मरे थे, तब हसन नसरल्लाह को किसी ने क्यों नहीं रोका? नसरल्लाह पूरी तरह से गलत था और उसे उसके किए की सजा मिली. दरअसल, मोसाब हसन यूसुफ एक पूर्व फिलिस्तीनी मिलिटेंट थे. 1997 में उन्होंने इसराइल जाने का फैसला किया. इसके बाद 2007 में अमेरिका जाने तक वे इजरायली खुफिया एजेंसी शिन बेट के लिए जासूसी करते रहे. उनके पिता शेख हसन यूसुफ हमास के संस्थापकों में से एक थे. पिछले साल उन्होंने इजरायल से सभी हमास नेताओं के खात्मे की अपील की थी. उन्होंने कहा था कि अगर सभी बंधक रिहा नहीं किए जाते हैं तो इजरायल को सभी हमास नेताओं को खत्म कर देना चाहिए. इसमें उनके पिता भी शामिल हैं. यानी मोसाब ने इजरायल से अपने पिता के खात्मे की भी अपील की थी.

राज्यपाल के हाथों स्वर्ण पदक विजेता और उपाधि प्राप्तकर्ता हुए सम्मानित

आजीवन शिक्षा पाने का महत्वपूर्ण साधन है दूरस्थ शिक्षा पद्धति: राज्यपाल पटेल राज्यपाल ने प्रख्यात विभूतियों को प्रदान कीं मानद उपाधियां राज्यपाल के हाथों स्वर्ण पदक विजेता और उपाधि प्राप्तकर्ता हुए सम्मानित राजा भोज (मुक्त) विश्वविद्यालय का सातवॉ दीक्षांत समारोह संपन्न भोपाल राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा में दूरस्थ शिक्षा, जीविका उपार्जन के साथ आजीवन शिक्षा पाने का एक महत्वपूर्ण साधन है। समाज के अत्यंत पिछड़े, दूरस्थ क्षेत्रों, दिव्यांगजन, घरेलू, कामकाजी स्त्री-पुरुष और युवाओं तक शिक्षा पहुंचाने का यह सहज और सरल माध्यम है। राज्यपाल पटेल मंगलवार को राजा भोज (मुक्त) विश्वविद्यालय के सातवें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय सभागार, भोपाल में हुये समारोह में उच्च शिक्षा, आयुष एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार भी मौजूद थे। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े विद्यार्थियों की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति में सराहनीय पहल की है। जरूरी है कि दूरस्थ शिक्षा से वंचित वर्गों के लिए सामाजिक सेवाएं और उनके अधिकारों की रक्षा के प्रयासों में और मजबूती आये। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि दीक्षित विद्यार्थी, अपने माता-पिता और गुरुजनों के योगदान को कभी नहीं भूले। हमेशा उनके त्याग और तपस्या के प्रति कृतज्ञता का भाव रखें। उन्होंने कहा कि आज विद्यार्थियों ने दूरस्थ शिक्षा के जरिये अपने लक्ष्यों की पूर्ति और सपनों को साकार करने का पहला पड़ाव पार कर लिया है। अब इस ज्ञान और कौशल से जीवन में सफलता पाने के लिए आगे बढ़ें। राज्यपाल पटेल ने कहा कि अपनी प्रगति के मूल्यांकन एवं सुधार के साथ क्षमताओं को पहचानें। अनुशासन और समय प्रबंधन के साथ निरंतर प्रयास करें। बिना आत्म विश्वास खोये सतत् प्रयास करें, क्योंकि जीत हमेशा प्रयास करने वालों की ही होती है।     रामचरित मानस और गीता में डिप्लोमा देने की पहल सराहनीय राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा रामचरित मानस से सामाजिक विकास एवं भगवत गीता में डिप्लोमा प्रदान करना अत्यंत सराहनीय पहल है। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा सिकल सेल एनीमिया जागरूकता के लिए ग्रामीण अंचलों में किए जा रहे उन्मुखीकरण प्रयासों की सराहना की। पटेल ने कहा कि तेजी से बदलती दुनिया में उच्च मानकों के पाठ्यक्रमों के साथ विश्वविद्यालय विषय विशेषज्ञों द्वारा गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री तैयार कराये। पाठ्यक्रम की प्रासंगिकता की निरंतर समीक्षा भी की जानी चाहिए। कौशल उन्नयन और भविष्य की जरूरतों के अनुसार अपने कार्यक्रमों को डिजाइन करें। विद्यार्थियों को ज्ञान एवं कौशल के सहज आदान-प्रदान का प्लेटफार्म भी उपलब्ध करायें।     प्रख्यात विभूतियां मानद उपाधि से सम्मानित राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने दीक्षांत समारोह में डॉ. होमी जहांगीर भाभा इंस्टीट्यूट के चान्सलर पद्मविभूषण डॉ. अनिल काकोड़कर, इन्टरनेशनल सेंटर फॉर थ्योरेटिकल फिजिक्स के भौतिक विज्ञानी डॉ. आतिश श्रीपाद दाभोलकर, परमाणु ऊर्जा शिक्षा सोसायटी बीएआरसी के डॉ. जे.व्ही. याख्मी, आईआईटी चेन्नई के प्रोफेसर पद्मडॉ. अशोक झुनझुनवाला और इन्द्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल नई दिल्ली के मुख्य चिकित्सा अधिकारी  डॉ. ओमप्रकाश शर्मा को डॉक्टर ऑफ साइन्स (डी.एस.सी.) की मानद उपाधि से सम्मानित किया। इसी प्रकार शिक्षाविद् और पूर्व कुलपति (इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय) प्रो. नागेश्वर राव को डॉक्टर ऑफ डिस्टेंस एजुकेशन (डी.डी.ई.) की मानद उपाधि प्रदान की गई। राज्यपाल पटेल ने विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को राजा भोज उत्कृष्टता पदक और दीक्षित विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान कीं।       उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने अपने संबोधन में विद्वान और प्रतापी और विद्वान राजा भोज के शिक्षा प्रसार, जल संरक्षण और प्रजाहितैषी कार्यों का जिक्र किया। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे राजा भोज के व्यक्तित्व और कृतित्व से प्रेरणा लें। भारतीय दर्शन, गौरवशाली ज्ञान परम्परा और पर्यावरण संरक्षण के कार्यों में सहयोग कर विकसित भारत के निर्माण में सहभागी बनें। कार्यक्रम को डॉ. होमी जहाँगीर भाभा इंस्टीट्यूट के चान्सलर पद्मविभूषण डॉ. अनिल काकोड़कर और भौतिक विज्ञानी डॉ. आतिश श्रीपाद दाभोलकर ने भी संबोधित किया।          राज्यपाल मंगुभाई पटेल का स्वागत तुलसी का पौधा भेंट कर किया गया। शॉल, श्रीफल एवं स्मृति चिन्ह से अभिनंदन किया गया। राज्यपाल पटेल ने विश्वविद्यालय की स्मारिका का लोकार्पण किया। स्वागत उद्बोधन कुलगुरू प्रो. डॉ. संजय तिवारी ने दिया। कुलसचिव डॉ. सुशील मंडेरिया ने दीक्षांत समारोह की कार्यवाही का संचालन और आभार व्यक्त किया। दीक्षांत समारोह में वरिष्ठ अधिकारी, विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलगुरू, भोज मुक्त विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों के अध्यक्ष, दीक्षित विद्यार्थी एवं उनके अभिभावक भी मौजूद रहे।        

राजपुर में 192 करोड़ 60 लाख रुपये के विभिन्न निर्माण कार्यों का करेंगे लोकार्पण एवं भूमिपूजन

‘धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान’ का शुभारंभ बलरामपुर-रामानुजगंज के राजपुर में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय होंगे शामिल राजपुर में 192 करोड़ 60 लाख रुपये के विभिन्न निर्माण कार्यों का करेंगे लोकार्पण एवं भूमिपूजन रायपुर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी देश में जनजातीय बहुल गांवों के समग्र विकास के लिए 02 अक्टूबर को ‘धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान‘ का झारखण्ड के हजारीबाग से शुभारंभ करेंगे। इस मौके पर छत्तीसगढ़ के बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के राजपुर में राज्य स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और अन्य अतिथिगण शामिल होंगे। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी राजपुर में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में वर्चुअली शामिल हांेगे। जिला प्रशासन द्वारा प्रधानमंत्री के कार्यक्रम के सीधा प्रसारण दिखाने की व्यवस्था विकासखण्ड राजपुर के शासकीय हायर सेकेण्डरी स्कूल ग्राउंड बूढ़ा बगीचा में की जा रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय इस मौके पर वे राजपुर में एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय शिलान्यास सहित जिले में 192 करोड़ 60 लाख रूपये के 108 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन करेंगे। इस मौके पर श्री साय विभिन्न हितग्राही मूलक योजनाओं में सामग्री तथा सहायता राशि का भी वितरण करेंगे और विभिन्न विभागों द्वारा लगाई जा रही योजनाओं पर आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन करेंगे। धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान में देश में आदिवासी बहुल क्षेत्रों के 63,000 गांव शामिल किया गया है, जिससे 5 करोड़ से अधिक जनजातीय लोगों को लाभ होगा। इसमें 30 राज्यों-केंद्र शासित प्रदेशों के जनजातीय बहुल 549 जिले और 2,740 ब्लॉक के गांव शामिल होंगे। छत्तीसगढ़ में इस अभियान के क्रियान्वयन के लिए 32 जिलों के 138 विकासखण्डो के 6691 आदिवासी बहुल गांव का चयन किया गया है। चयनित गांव में बुनियादी सुविधाओं के विकास के साथ-साथ सामाजिक, आर्थिक, उन्नति के कार्य किए जाएंगे। धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान में 25 कार्यक्रम शामिल हैं। यह योजना केन्द्र और राज्य सरकार के सहयोग से क्रियान्वित की जाएगी। प्रधानमंत्री जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान का उद्देश्य भारत सरकार की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य, शिक्षा, आजीविका के क्षेत्र से जनजातीय परिवारों को जोड़कर उनके समग्र और सतत विकास को सुनिश्चित करना है।

इजरायल ने जने कैसे किया लेबनान पर हमला? आर्मी चीफ ने बताई तैयारी वाली वो बात

तेल अवीव लेबनान के अंदर घुसकर हिजबुल्लाह के टॉप कमांडर सैयद हसन नसरल्लाह को इजरायल की ओर से मार गिराने की पूरी दुनिया में चर्चा हो रही है। सबसे ज्यादा हैरानी लोगों को इस तथ्य से हो रही है कि ईरान के ही एक जासूस ने इजरायल के लिए काम किया और नसरल्लाह का पता उसे बता दिया। फ्रांसीसी अखबार ले पैरिसियन की रिपोर्ट के अनुसार करीब डेढ़ घंटे पहले ईरानी दूत ने इजरायल को नसरल्लाह का पता बताया और फिर इजरायल ने उस इमारत को ही नेस्तनाबूद कर दिया, जहां वह अपने कमांडरों के साथ मीटिंग कर रहा था। कहा जा रहा है कि वह बंकर में छिपा था, लेकिन इमारत गिरने की दहशत से ही वह मारा गया। आखिर इजरायल ने कैसे इतनी मजबूत तैयारी की थी कि तेहरान में हमास कमांडर इस्माइल हानियेह को मार गिराया और फिर लेबनान में हिजबुल्लाह के लीडर को मार डाला। यह अहम सवाल है। दरअसल 2006 में जब इजरायल की हिजबुल्लाह से जंग हुई थी तो यह 34 दिनों तक चली थी। इस युद्ध में हिजबुल्लाह के आगे इजरायल की स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी। लेकिन यहीं से इजरायल ने सबक सीखा और 2006 के बाद से ही अगली जंग की प्लानिंग शुरू कर दी। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार इजरायल ने तब से ही जंग की तैयारी शुरू कर दी थी और खासतौर पर खुफिया मिशन पर उसका जोर था। लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ इजरायल का सैन्य अभियान जारी है। इजरायल ने हिजबुल्लाह नेता हसन नसरल्लाह को भी मार दिया। इसका खुलासा खुद इजरायली सेना ने किया। इस बीच भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने बताया कि इजरायल ने लेबनान में कैसे तैयारी के साथ हमला किया। उन्होंने कहा कि जो शेल कंपनी बनाई गई, वो ही इजरायल का मास्टरस्ट्रोक है। ‘इजरायल का मास्टर स्ट्रोक’ आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने हिजबुल्लाह नेता हसन नसरल्लाह के खिलाफ इजरायली सैन्य अभियान पर कहा, ‘जो शेल कंपनी बनाई गई है, वह इजरायल का मास्टरस्ट्रोक है। इसके लिए उसे सालों-साल की तैयारी की जरूरत है। इसका मतलब है कि वे इसके लिए तैयार थे और यही बात मायने रखती है। युद्ध उस तरह से शुरू नहीं होता जिस तरह से आप लड़ना शुरू करते हैं, यह उस दिन से शुरू होता है जिस दिन आप योजना बनाना शुरू करते हैं।’ ‘हमास को खत्म करने पर अड़ गया इजरायल’ आर्मी चीफ ने एक अखबार से बात करते हुए कहा कि इजरायल ने हमास को अपना पहला टारगेट बनाया और उसे जड़ से खत्म करने पर अड़ गया। जनरल द्विवेदी ने विदेश मंत्री एस जयशंकर की एक किताब का हवाला देते हुए इजरायल की रणनीति की तुलना महाभारत के एक प्रसंग से की, जहां अर्जुन, अगर चक्रव्यूह में प्रवेश करते, तो जीवित बच सकते थे और अभिमन्यु भी बच जाता। इसी तरह, इजरायल ने हमास को पहले निपटाने का फैसला किया है। खासतौर पर इजरायल ने यूनिट 8200 को तैनात किया। यह इजरायली सेना की ही एक यूनिट है, जो मोसाद के साथ मिलकर काम करती है। इसके तहत उसने साइबर वारफेयर पर काम किया। इसी एजेंसी की देन थी कि उसने हिजबुल्लाह पर पेजर और वॉकी-टॉकी ब्लास्ट के जरिए हमले कराए। इसी के तहत ईरान की इंटेलिजेंस यूनिट में घुसपैठ की गई और उसके 20 लोगों से सारी सूचना हासिल की गई। ईरान के परमाणु ठिकानों से लेकर हिजबुल्लाह, हमास के लीडर्स तक के बारे में पूरी जानकारी इजरायल को मिल गई। इजरायल के इस इंटेलिजेंस वारफेयर का पहला नतीजा 2008 में आया था। तब मोसाद ने सीआईए के साथ मिलकर हिजबुल्लाह के टॉप लीडर इमाद मुगनियाह को ढेर कर दिया था। इसके बाद 2020 में ईरानी कुद्स फोर्स के नेता कासिम सुलेमानी को अमेरिका ने मार गिराया था। सुलेमानी की लोकेशन की पूरी जानकारी इजरायली एजेंसी ने ही अमेरिका को दी थी, जिसे इराक में मारा गया था। इसी दौरान इजरायल नसरल्लाह को मार गिराने वाला था, लेकिन तब ऐसा नहीं किया। इसकी वजह थी कि इजरायल तब युद्ध नहीं चाहता था। अब इजरायल की वह 18 साल पुरानी तैयारी काम आ रही है। उसने 7 दिनों में हिजबुल्लाह के सात कमांडरों को मार गिराया है। इसके अलावा हमास के लीडर्स को भी उसने ढेर किया है।

वन्यजीवों को बचाने के लिये लोगों के मन में वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता और दया भावना का विकास आवश्यक- राज्यमंत्री अहिरवार

वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता एवं दया भावना का विकास आवश्यक है : राज्यमंत्री अहिरवार राज्यमंत्री अहिरवार ने राज्यस्तरीय वन्यप्राणी सप्ताह-2024 का शुभारंभ  वन्यजीवों को बचाने के लिये लोगों के मन में वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता और दया भावना का विकास आवश्यक- राज्यमंत्री अहिरवार भोपाल वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री दिलीप सिंह अहिरवार ने कहा है कि वन्यजीवों को बचाने के लिये लोगों के मन में वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता और दया भावना का विकास आवश्यक है। वन विभाग राष्ट्रीय उद्यान भोपाल में राज्यस्तरीय वन्यजीव सप्ताह 2024 के शुभारंभ अवसर पर उन्होंने यह बात कही। उन्होंने कहा कि आम लोगों में वन्यजीव के प्रति जागरूकता बढ़ाने और अपनत्व की भावना विकसित करने की दृष्टि से प्रतिवर्ष अक्टूबर के प्रथम सप्ताह में वन्य जीव सप्ताह मनाया जाता है। राज्यमंत्री अहिरवार ने कहा कि वन्यजीवों के संरक्षण में जनता की भागीदारी को भी यथोचित स्थान मिलना अति आवश्यक है। जन-जागरूकता का अभाव, वन्यजीवों के प्रति अज्ञानता एवं अंधविश्वास भी वन्यजीवों के संरक्षण में बाधक है। उन्होंने कहा कि विद्यालय एवं महाविद्यालय स्तर के शैक्षणिक पाठ्यक्रमों में वन्यजीव एवं पर्यावरण संरक्षण विषय को अनिवार्य किया जाना चाहिए। राज्यमंत्री अहिरवार ने कहा कि वनों एवं वन्यजीवों के संरक्षण के लिये पंचायत स्तर पर जनजागरण कार्यक्रम आयोजित कर वन्यजीव संरक्षण को काफी हद तक सफल बनाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि राज्यस्तरीय वन्यजीव सप्ताह-2024 का समारोह प्रत्येक जिले में किया जा रहा है। राज्यमंत्री अहिरवार ने कहा कि सम्राट अशोक के शासनकाल में भी वन्यजीवों के लिये अभय वन बनाये जाते थे। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय उद्यानों में सिर्फ वन्य जीवों का संरक्षण भर नहीं होता है बल्कि जैव विविधता का भी संवर्द्धन होता है। उन्होंने कहा कि वास्तव में राष्ट्रीय उद्यान ही देश के ऐसे संरक्षित वन हैं, जहां वनस्पति एवं वन्य जीव दोनों सुरक्षित है। राज्यमंत्री अहिरवार ने वन्यजीवों पर आधारित प्रदर्शनी का शुभारंभ किया और उसका अवलोकन किया। इस अवसर पर राज्यमंत्री अहिरवार ने वनों और वन्यप्राणियों के संरक्षण, संवर्धन और सुरक्षा की शपथ भी दिलाई। वन विहार राष्ट्रीय उद्यान भोपाल में राज्यस्तरीय वन्यजीव सप्ताह 2024 का आयोजन एक अक्टूबर से 7 अक्टूबर तक आयोजित किया जायेगा। आज शुभारंभ अवसर पर स्कूली बच्चों के पेंटिंग प्रतियोगिता आयोजित की गई।‍जिसमें विभिन्न स्कूलों के सैकड़ो विद्यार्थियों ने भाग लिया। वन्यजीव सप्ताह में प्रतिदिन विभिन्न प्रतियोगिताएँ आयोजित की जायेगी। कार्यक्रम में प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख असीम श्रीवास्तव, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य वन्यप्राणी अभिरक्षक व्ही एन अंबाडे, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (उत्पादन) एच. यू. खान, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (विकास) यू.के. सुबुद्धि, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (समन्वय) सुदीप सिंह, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (प्रोजेक्ट) मोहनलाल मीना, संचालक वन विहार और विभिन्न स्कूलों के शिक्षक – विद्यार्थी उपस्थित रहे।  

जनजातीय समाज ने हमें प्रकृति के संरक्षण का मार्ग दिखाया : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

भगवान बिरसा मुण्डा की स्मृति में 15 नवंबर को छत्तीसगढ़ के हर जिले में मनाया जाएगा ’जनजातीय गौरव दिवस’ : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मुख्यमंत्री ’जनजातीय समाज का गौरवशाली अतीत’ विषय पर आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला में शामिल हुए  जनजातीय समाज ने हमें प्रकृति के संरक्षण का मार्ग दिखाया  : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जनजातीय संस्कृति में छिपी है, गहरी आध्यात्मिकता देश के लिए संघर्ष करने की परम्परा जनजातीय परम्परा रही है जीवन जीने की कला जनजातीय समाज से सीखनी चाहिए रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भगवान बिरसा मुण्डा की जयंती के अवसर पर 15 नवंबर को छत्तीसगढ़ के हर जिले में ’जनजातीय गौरव दिवस’ मनाने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 15 नवंबर को भगवान बिरसा मुण्डा की स्मृति में जनजातीय गौरव दिवस मनाने का निर्णय लिया है। इस वर्ष भगवान बिरसा मुण्डा की 150वीं जयंती है। छत्तीसगढ़ में भी इसे भव्य रूप से मनाया जाएगा। मुख्यमंत्री आज राजधानी रायपुर के न्यू सर्किट हाउस में ’जनजातीय समाज का गौरवशाली अतीत, ऐतिहासिक, सामाजिक एवं आध्यात्मिक योगदान’ विषय पर आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता वन मंत्री केदार कश्यप ने की। विधायक भईयालाल राजवाड़े विशेष अतिथि के रूप में कार्यक्रम में उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय समाज का गौरवशाली इतिहास रहा है। यह सोचकर गर्व होता है कि अनेक महान स्वतंत्रता सेनानियों का जन्म जनजातीय समाज में हुआ। अपने देश के लिए संघर्ष करने की परम्परा जनजातीय समाज में प्रारंभ से रही है। शहीद वीर नारायण सिंह, गैंदसिंह, गुण्डाधूर जैसे अनेक महान नायकों ने अपना बलिदान दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पूरी दुनिया आज जलवायु परिवर्तन की गंभीर चुनौतियों से गुजर रही है। ऐसे में प्रकृति का संरक्षण बहुत आवश्यक है। जनजातीय समाज ने हमें प्रकृति के संरक्षण का मार्ग दिखाया हैै, जो आज भी अनुकरणीय है। जनजातीय समाज में प्रकृति की पूजा की जाती है। पूर्वीं छत्तीसगढ़ में साल के पेड़ में जब फूल आते है तो सरहुल पर्व मनाया जाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय संस्कृति में गहरी आध्यात्मिकता छिपी है। प्रकृति को सहेजकर, प्रकृति के अनुकूल जीवन जीना। बड़े-छोटे, स्त्री-पुरुष में किसी तरह का भेदभाव नहीं। सब बराबर हैं और प्रकृति का उपहार सबके लिए है। ये बातें हमें इस समाज से सीखने की आवश्यकता है। वास्तव में जीवन जीने की कला जनजातीय समाज से सीखनी चाहिए। जनजातीय समाज में दहेज जैसी सामाजिक बुराई का अस्तित्व नहीं है। भगवान बिरसा मुण्डा का शौर्य हमें हमेशा जीवन में साहस की राह दिखाता है। उन्होंने शोषण मुक्त समाज का सपना देखा था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उन्हीं की परिकल्पना के अनुरूप प्रधानमंत्री जनमन योजना प्रारंभ कर विशेष पिछड़ी जनजाति के लोगों के जीवन में समृद्धि लाने का प्रयास किया है। प्रधानमंत्री कल हजारीबाग से प्रधानमंत्री जनजाति उन्नत ग्राम अभियान की शुरूआत करेंगे, जिसमें जनजातीय बहुल 63 हजार गांवों के 5 करोड़ से अधिक लोग लाभान्वित होंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय लोग कभी दिखावा नहीं करते, उनकी सरलता-सहजता मन मोह लेती है। जनजातीय समाज की खानपान की शैली बीपी-शुगर जैसी लाइफ स्टाईल से जुड़ी बीमारियों से दूर रखती है। उन्होंने उच्च शिक्षा विभाग द्वारा ’जनजातीय समाज का गौरवशाली अतीत पर आयोजित यह कार्यशाला जनजातीय समाज के गौरव को पूरे समाज के सामने लाने में मील का पत्थर साबित होगी। वन मंत्री केदार कश्यप ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहा कि देश के स्वतंत्रता संग्राम में जनजातीय समाज का बहुत बड़ा योगदान रहा हैै। इस समाज में अनेक महापुरूषों ने जन्म लिया जिन्होंने 1857 क्रांति के पहले ही अंग्रेजों के विरूद्ध संघर्ष की शुरूआत की। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अंग्रेजों को बड़ा नुकसान जनजातीय क्षेत्रों में हुआ, अनेक मौकों पर उन्हें मजबूर होकर पीछे हटना पड़ा। कश्यप ने कहा कि अंग्रेजों ने जब बस्तर में रेल लाईन बिछाने का काम शुरू किया उसमें लकड़ी का उपयोग किया जाता था। जनजातीय समाज ने इसका विरोध किया और यह भाव जताया कि हमारा जंगल कोई नहीं काटेगा। सामाजिक एकजुटता के कारण बहुत कुछ संरक्षित रहा। उन्होंने कहा कि आज किए जा रहे आयोजन के माध्यम से इतिहास के पन्नों में दर्ज जनजातीय समाज के गौरव की गाथा हमारी आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने में सहायता मिलेगी। उन्होंने कहा कि बस्तर दशहरा सामाजिक समरसता का सबसे बड़ा प्रमाण है। इस समाज में 80 प्रतिशत परिवार संयुक्त परिवार है। मिलेट का उपयोग, जैविक खेती जैसी अनेक बातें जनजातीय समाज से शिक्षित समाज को सीखने की आवश्कता है। स्वागत भाषण उच्च शिक्षा विभाग के सचिव प्रसन्ना आर. ने दिया। वनवासी विकास समिति के अखिल भारतीय युवा कार्य प्रमुख वैभव सुरंगे ने स्वतंत्रता संग्राम में जनजातीय समाज के योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जनजातीय संस्कृति में अनेक प्रगतिशील परम्पराएं हैं। भगवान से ये कुछ नहीं मांगते। वनवासी विकास समिति के सचिव डॉ. अनुराग जैन ने कहा कि जनजातीय समाज के गुमनाम महानायकों के योगदान से नई पीढ़ी को परीचित कराने की जरूरत है। कार्यक्रम में वनवासी विकास समिति के प्रांताध्यक्ष उमेश कश्यप विश्व विद्यालय के कुलपति एवं प्रबुद्ध नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे। मुख्यमंत्री सहित अतिथियों ने इस अवसर पर जनजातीय समाज के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों पर केंद्रित प्रदर्शनी का अवलोकन किया।

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