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शिवराज सिंह चौहान का इस्तीफा विधानसभा सचिवालय ने किया मंजूर, जल्द होगा बुधनी सीट पर उपचुनाव

Opposition leader Rahul Gandhi cornered Yogi government on the murder of Dalit youth in Rae Bareli.

भोपाल मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने केंद्र में पदभार ग्रहण करने के बाद पिछले दिनों विधानसभा सदस्य पद से इस्तीफा दे दिया था. जिसके बाद विधानसभा सचिवालय की मंजूरी के बाद बुधनी विधानसभा सीट रिक्त घोषित कर दिया गया है. विधानसभा के प्रमुख सचिव एपी सिंह ने इसकी अधिसूचना जारी कर दी है. उनके इस्तीफे के बाद अब इस सीट पर उपचुनाव होना है. आपको बता दें बुधनी से शिवराज सिंह चौहान विधायक चुने गए थे. इसके बाद हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव में वे विदिशा लोकसभा सीट से सांसद चुने गए. मोदी कैबिनेट में उन्हें कृषि मंत्री की जिम्मेदारी दी गई है. दो दिन पहले ही उन्होंने विधानसभा सदस्य पद से इस्तीफा दे दिया था. इस्तीफा देने के बाद क्या बोले थे शिवराज? शिवराज सिंह चौहान ने दो दिन पहले विधानसभा से इस्तीफा देते हुए कहा था कि, ‘आज मैं बहुत भावुक हूं. मैंने मध्यप्रदेश विधानसभा की सदस्यता से त्याग-पत्र दिया है. मैं बुधनी से विधायक था. बुधनी विधानसभा क्षेत्र की जनता मेरे रोम-रोम में रमती है. मेरी हर सांस में बसती है. मैंने बुधनी से ही अपने सार्वजनिक जीवन का प्रारंभ किया था. बचपन से ही आंदोलन और फिर जनता का प्यार लगातार मिलता चला गया.’ “इसी बुधनी विधानसभा क्षेत्र से मैं छह बार विधायक रहा, सांसद के चुनाव में भी छह बार इस जनता ने भारी बहुमत से मुझे जिताया. पिछला विधानसभा का चुनाव मैंने  रिकॉर्ड 1 लाख 5 हजार वोटों से जीता था और अभी लोकसभा में इसी जनता ने मुझे 1 लाख 46 हजार वोटों से जिताया.” “बुधनी की जनता की सेवा मैंने पूरे मन से की है, क्योंकि जनता की सेवा ही मेरे लिए भगवान की पूजा है, और इस जनता ने भी मुझे भरपूर प्यार दिया है, आशीर्वाद दिया है.जनता के इस प्यार पर मेरा पूरा जीवन न्यौछावर है और अपनी संपूर्ण क्षमता के साथ मैं जनता की सेवा में लगा रहूंगा. अपने प्राणों से प्रिय जनता को बारंबार प्रणाम!” आपको बता दें कि इसके पहले छिंदवाड़ा जिले की अमरवाड़ा विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक कमलेश शाह ने लोकसभा चुनाव के समय अपने स्थान से त्यागपत्र दिया था. यहां 10 जुलाई को उपचुनाव कराया जा रहा है.

मध्यप्रदेश में प्री-मानसून खूब बरस रहा, जबलपुर समेत 22 जिलों में आज आंधी-बारिश

भोपाल मध्यप्रदेश में प्री-मानसून खूब बरस रहा है। ऐसा ही मौसम बुधवार को भी बना रहेगा। भोपाल में तड़के 5 बजे से रिमझिम पानी गिरा। जबलपुर, छिंदवाड़ा समेत 22 जिलों में आंधी-बारिश का ऑरेंज अलर्ट है। दूसरी ओर, ग्वालियर और दतिया में गर्मी का असर भी रहेगा। आज प्रदेश के 22 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट मौसम विभाग ने आज जबलपुर, छिंदवाड़ा समेत 22 जिलों में आंधी के साथ बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। वहीं दूसरी तरफ ग्वालियर और दतिया में गर्मी का असर देखने को मिलेगा। बीते दिन की बात करें तो मंगलवार को प्रदेश में सबसे ज्यादा गर्म ग्वालियर रहा। यहां का टेमप्रेचर 44.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। यहां अटका मानसून मौसम वैज्ञानिक के मुताबिक, अभी मानसून महाराष्ट्र में अटका हुआ है, जिसकी वजह से अगले 2 से 3 दिन तक ऐसा ही मौसम रहेगा। इसके बाद मानसून आगे बढ़ते हुए मध्यप्रदेश में एंटर होगा। फिलहाल, वर्तमान में वेस्टर्न डिस्टबेंस और साइक्लोनिक सर्कुलेशन बना हुआ है, जिसकी वजह से प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में आंधी-बारिश और गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है। यहां आंधी-बारिश का ऑरेंज अलर्ट आज बड़वानी, देवास, सीहोर, खरगोन, विदिशा, दमोह, नरसिंहपुर, शिवपुरी, सागर,छिंदवाड़ा, पन्ना, कटनी, पांढुर्णा, दमोह, जबलपुर, सिवनी, डिंडोरी, अनूपपुर, रीवा, बालाघाट, मऊगंज, मंडला में आंधी-बारिश का ऑरेंज अलर्ट है। यहां गरज-चमक और आंधी का यलो अलर्ट वहीं, आज इंदौर, धार, बुरहानपुर, रतलाम, झाबुआ, अलीराजपुर, खंडवा, हरदा, बैतूल, श्योपुरकलां, रायसेन, नर्मदापुरम, मुरैना, छतरपुर, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, सतना, मैहर, उमरिया, में गरज-चमक और आंधी का यलो अलर्ट है। यहां रहेगा गर्मी का असर प्रदेश के कुछ जिलों में आंधी-बारिश होगी तो वहीं ग्वालियर, दतिया में गर्मी का असर भी रहेगा। कृषि वैज्ञानिकों की किसानों को सलाह – कृषि विज्ञान ने किसानो को मानसून आने के बाद और 4 इंच बारिश होने के बाद ही बोवनी करने की सलाह दी है। – जून के आखिरी सप्ताह या जुलाई के दूसरे सप्ताह तक का ही समय बोवनी के लिए उपयुक्त है। जब 4 इंच बारिश हो जाए तो किसान बोवनी कर सकते हैं। –  किसान 23 जून तक धान की नर्सरी के लिए खेत तैयार कर लें। जैसे ही पर्याप्त बारिश होती है तो धान लगाना शुरू कर दें। – मानसून आने के बाद पर्याप्त बारिश होने के बाद ही कपास और सोयाबीन की बोवनी करें। इससे पहले बोवनी करने पर नुकसान उठाना पड़ सकता है। – ऐसे किसान जिनके पास सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है, वे हरी खाद के लिए मक्का या ढैंचा की बोवनी कर सकते हैं। अरहर की बुवाई के लिए खेत तैयार कर सकते हैं। जल्द शुरू होगी मॉनसूनी बारिश मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक मध्यप्रदेश में मॉनसून की एंट्री पहले 15 जून से पहले ही होने वाली थी. हालांकि, मॉनसून की रफ्तार में आए परिवर्तन की वजह से यह कुछ दिनों की देरी के साथ मध्यप्रदेश पहुंच रहा है. माना जा रहा है कि 21-22 जून तक मध्यप्रदेश के ज्यादातर जिलों में मॉनसूनी बारिश होने लगेगी.

छत्तीसगढ़-कोरबा में महुआ शराब पीने से महिला समेत तीन की मौत

Raksha Bandhan festival in Netaji Subhash Chandra Bose Central Jail

कोरबा. कोरबा जिले के करतला थाना क्षेत्र अंतर्गत आने वाले ग्राम कोटमेर में महुआ की शराब पीने से एक महिला समेत तीन लोगों की मौत हो गई। मृतकों की पहचना मालती बाई (50), राम सिंह (60) और वेदराम (49) के रूप मे हुई है। तीन घर में साथ बैठकर शराब पी रहे थे। जिससे उनकी मौत हो गई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया और मामले की जांच शुरू कर दी है। जानकारी के मुताबिक, वेदराम के घर में सभी बैठकर शराब पी रहे थे। वहां चखना और कच्ची महुआ शराब पड़ी हुई मिली। शराब पानी से तीनों की मौके पर ही मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही करतला पुलिस मौके पर पहुंची। इस मामले में कोरबा पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी ने बताया कि तीनों की मौत का कारण जहरीली शराब है या उन्होंने विषाक्त भोजन किया है अभी इस पर कुछ भी कहना ठीक नहीं है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही कुछ स्पष्ट हो पाएगा।  घटना मंगलवार दोपहर लगभग डेढ़ बजे की बताई जा रही है। गांव में रहने वाले बेदराम उम्र 44 वर्ष अपने घर से थोड़ी दूर पर एक मकान बना रहा था। मकान में उसके साथ रामसिंह उम्र 60 वर्ष भी काम कर रहा था। दोपहर लगभग डेढ़ बजे बेदराम, रामसिंह और पड़ोस में रहने वाली मालती बाई 50 वर्ष बेदराम के घर पहुंचे। तीनों ने एक साथ खाना खाया। इसके थोड़ी देर बाद तीनों की मौत हो गई। दोपहर लगभग 2 बजे मालती बाई का पति चैतराम घर पहुंचा तो उसकी पत्नी घर में नहीं थी। वह बेदराम के निर्माणाधीन मकान के पास गया तो उसने तीनों को मृत अवस्था में देखा। चैतराम अपनी पत्नी को उठाकर अपने घर ले आया उसे खाट पर लेटा दिया। उसने घटना की सूचना गांव के सरपंच नीलांबर राठिया को दी। पुलिस को अवगत कराया गया। गांव में तीन लोगों के मौत की सूचना मिलते ही पुलिस बिना देरी किए घटना स्थल पर पहुंची। मामले की जांच शुरू की। पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने घटना के संबंध में जानकारी ली। ग्रामीणों से कई बिंदुओं पर पूछताछ किया। जांच में मदद के लिए फोरेंसिक एक्सपर्ट की टीम भी मौके पर पहुंची। उसने घटना स्थल से कुछ नमूनों को एकत्र किया। इसकी जांच लैब में कराई जाएगी। पुलिस का कहना है कि शव को कब्जे में लिया गया है। बुधवार को पोस्टमार्टम कराया जाएगा। इसके बाद ही मृत्यु का कारण स्पष्ट हो सकेगा। गांव में तीन लोगों की मौत से सन्नाटा पसरा हुआ है। घटना कैसे हुई इससे ग्रामीण भी खुद को अनजान बता रहे हैं। घटना स्थल पर पहुंची पुलिस ने मछली, चावल, एक पॉलिथीन में रखी गई कच्ची शराब और गिलास को जब्त किया है। ग्रामीणों का कहना है कि बेदराम के घर मकान का कार्य चल रहा था। तीनों ने एक साथ खाना खाया था। उन्होंने कच्ची शराब भी पी थी, जैसा कि घटना स्थल पर दिख रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी मौत कच्ची शराब पीने से हुई है जो जहरीली होगी। वहीं पुलिस इस मसले पर ज्यादा बोलने को तैयार नहीं है। पुलिस का कहना है कि तीनों शव को जांच के लिए कब्जे में लिया गया है। बुधवार को पोस्टमार्टम कराया जाएगा और वैज्ञानिक जांच के बाद मृत्यु का कारण स्पष्ट हो सकेगा। गांव में शराबबंदी, बाहर से लेकर आए थे मदिरा ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम कोटमेर में शराबबंदी है। गांव में न तो शराब बनती है और न ही इसकी बिक्री होती है। ग्रामीणों को आशंका है कि बेदराम या रामसिंह ने किसी अन्य गांव से शराब खरीदकर लाया होगा, जिसे पीने के बाद तीनों की मौत हुई होगी। शव का वैज्ञानिक परीक्षण किया जाएगा। घटना स्थल से मछली के अलावा कुछ अन्य खाद्यान्न मिले हैं। गिलास को जब्त किया गया है। एफएसएल की टीम ने घटना स्थल का दौरा किया है। मामले की जांच की जा रही है। मृत महिला मालती के पति ने मुझे फोन पर घटना की जानकारी दी। जब मैं मौके पर पहुंचा तो तीनों की मौत हो गई थी। खाट पर बेदराम और जमीन पर रामसिंह की लाश पड़ी थी। घटना स्थल पर पॉलिथीन में शराब, चखना और मछली पड़ा हुआ था। उनकी मौत जहरीली शराब पीने से हुई होगी।

आकाशवाणी के मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ का प्रसारण 30 जून से फिर से शुरू होगा: प्रधानमंत्री मोदी

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि आकाशवाणी के मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ का प्रसारण 30 जून से फिर से शुरू होगा। उन्होंने लोगों से इसके लिए अपने विचार और सुझाव साझा करने का आग्रह किया। उन्होंने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘यह बताते हुए खुशी हो रही है कि चुनाव के कारण कुछ महीनों के अंतराल के बाद मन की बात वापस आ गया है! इस महीने का कार्यक्रम रविवार, 30 जून को होगा।”   आखिरी बार 25 फरवरी को प्रसारित किया गया उन्होंने कहा, ‘‘मैं आप सभी से इसके लिए अपने विचार और सुझाव साझा करने का आह्वान करता हूं।” प्रधानमंत्री मोदी का यह मासिक कार्यक्रम ‘मन की बात’ आखिरी बार 25 फरवरी को प्रसारित किया गया था और फिर लोकसभा चुनाव संपन्न होने तक इसके प्रसारण पर विराम लगा दिया गया था।   पहला वोट देश के नाम होना चाहिए कार्यक्रम के 110वें संस्करण में मोदी ने पहली बार मतदान करने वाले मतदाताओं से चुनाव में रिकॉर्ड संख्या में मतदान करने की अपील की थी और कहा था कि उनका पहला वोट देश के नाम होना चाहिए। निर्वाचन आयोग की आदर्श आचार संहिता (एमसीसी) के दिशानिर्देश के अनुसार सरकार की ओर से आधिकारिक कार्यक्रमों या सार्वजनिक वित्त पोषित मंचों का उपयोग किसी ऐसी चीज के लिए नहीं हो सकता है, जिससे सत्तारूढ़ पार्टी का प्रचार हो या उसे राजनीतिक लाभ मिलता दिखाई दे।

रतलाम के बाद इंदौर के शिव मंदिर में मांस के टुकड़े मिलने से सनसनी, पुलिस ने बैरिकेडिंग कर रोका ट्रैफिक

CM: After visiting Mahakal, he participated in the Raksha Bandhan program

इंदौर    रतलाम के बाद अब इंदौर के शिव मंदिर में मवेशी के कटे अंग मिलने का मामला सामने आया है। इंदौर के आजाद इलाके में बुधवार सुबह शिव मंदिर में मवेशी के कटे अंग मिलने के बाद तनाव फैल गया। मंदिर की सफाई करवाई जा रही है। घटना बुधवार सुबह की है। इंदौर के आजाद इलाके में श‍वि मंदिर में सुबह पहुंचे लोगों को मंदिर में मवेशी के कटे अंग नजर आए। पुलिस को इसकी सूचना दी गई। इसके बाद टीआई के साथ पुलिस बल मौके पर पहुंचा। चारों तरफ से बैरिकेड्स लगाकर ट्रैफिक की आवाजाही रोक दी है। मंदिर के आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज देखे जा रहे हैं। हालांकि बाद में पुलिस ने एक वीडियो जारी कर बताया है कि मांस के टुकड़े श्‍वान लेकर आया था। इसमें किसी प्रकार की शरारत नहीं है। सीसीटीवी वीडियो में तीन संदिग्ध युवकों का एक वीडियो भी वायल हो रहा है जिसमें तीन युवक एक ही बाइक पर आए और मंदिर की तरफ कुछ फेंकते हुए दिखाई दिए हैं। टीआई नीरज का कहना है कि ये सीसीटीवी फुटेज पुराने हैं। श्‍वान वहां शव के टुकड़े लेकर आया हैं।  पुलिस मामले की जांच कर रही है। इस बीच तीन संदिग्ध युवकों का एक वीडियो वायरल हो गया था। इसमें तीन युवक एक ही बाइक पर आए और मंदिर की तरफ कुछ फेंकते हुए दिखाई दिए हैं। हालांकि, टीआई नीरज मेड़ा का कहना है कि वायरल किए जा रहे सीसीटीवी फुटेज पुराने हैं। कुत्ते ने किसी शव के टुकड़े लाकर डाले हैं। संभवत: वे कहीं और से लाकर यहां खा रहे होंगे। किसी व्यक्ति के द्वारा यह कृत्य नहीं किया गया है। शिव मंदिर के आसपास मवेशी के इस आकार में टुकड़े पड़े मिले। शिव मंदिर के आसपास मवेशी के इस आकार में टुकड़े पड़े मिले। बुधवार सुबह मंदिर में महिलाएं पहुंची तो उन्हें टुकड़े दिखाई दिए। उन्होंने आसपास के लोगों को सूचना दी। वहां के लोगों ने तत्काल पुलिस को फोन कर मौके पर बुलाया। बुधवार सुबह मंदिर में महिलाएं पहुंची तो उन्हें टुकड़े दिखाई दिए। उन्होंने आसपास के लोगों को सूचना दी। वहां के लोगों ने तत्काल पुलिस को फोन कर मौके पर बुलाया।  

अर्जेंटीना की गिनती कभी दुनिया के अमीर देशों में होती थी, 10 साल में नौ गुना बढ़ गई गरीबी, जूठन खाने को हैं मजबूर

नई दिल्ली दुनिया के ज्यादातर देशों में हाल में गरीबों की संख्या में तेजी से गिरावट आई है। लेकिन दक्षिण अमेरिका में स्थिति उल्टी है। यहां के अधिकांश देशों में 2012 से 2022 के बीच गरीबों की संख्या तेजी से बढ़ी है। इनमें अर्जेंटीना और वेनेजुएला जैसे देश भी शामिल हैं जिनकी गिनती कभी दुनिया के अमीर देशों में होती थी। अर्जेंटीना एक जमाने में दुनिया के टॉप 10 अमीर देशों में शामिल था जबकि वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है। अर्जेंटीना और वेनेजुएला के अलावा चिली और ब्राजील में भी 2012 से 22 के बीच गरीबों की आबादी बढ़ी है। वेनेजुएला में 2012 में ऐसी आबादी 29% थी जो रोजाना खर्च 5.5 डॉलर से कम पर काम चला रहे थे। लेकिन 2022 में यह आबादी 90% पहुंच गई। इस दौरान अर्जेंटीना में यह आबादी 4% से बढ़कर 36%, ब्राजील में 26% से बढ़कर 36% और चिली में 2% से बढ़कर 5% पहुंच गई। दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार वेनेजुएला में है। फिर भी यह उन देशों में शामिल है जहां महंगाई सबसे ज्यादा है। कभी यह अमीर देशों की श्रेणी में आता था लेकिन 1980 के बाद से इसका विकास एक तरह से ठहर गया है। वेनेजुएला में साल 1980 में जीडीपी प्रति व्यक्ति 8,000 डॉलर थी और आज भी यह इसी स्तर पर है। हालत यह है कि देश के लाखों लोगों को दो वक्त की रोटी नसीब नहीं है। बेहतर जिंदगी की तलाश में लाखों लोग वेनेजुएला से पलायन कर गए हैं।  खाने-पीने की चीजें इतनी महंगी हैं कि अमीर लोगों के लिए भी दो जून की रोटी जुटाना भी भारी पड़ रहा है। कई गरीब लोग तो पेट भरने के लिए कचरे में पड़ी जूठन खाने को मजबूर हैं। पिछले 43 साल में महंगाई तो चरम पर पहुंच गई लेकिन लोगों की इनकम एक ढेला भी नहीं बढ़ी है। अर्जेंटीना का हाल अर्जेंटीना की स्थिति भी वेनेजुएला जैसी ही है। दुनिया में सबसे ज्यादा महंगाई इसी देश में है। अप्रैल में अर्जेंटीना में महंगाई की सालाना दर 289% पहुंच गई। दुनिया में कोई दूसरा देश महंगाई इस मामले में उसके आसपास भी नहीं है। तुर्की 75.45% दूसरे और वेनेजुएला 64.9% के साथ तीसरे नंबर पर है। देश में महंगाई का अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि यह भारत के मुकाबले करीब 60 गुना है। प्रथम विश्व युद्ध से पहले इस दक्षिण अमेरिकी देश की गिनती दुनिया के टॉप 10 अमीर देशों में होती थी। यह देश धनधान्य से भरपूर था। लेकिन 1946 से देश में लोकलुभावन नीतियों और खर्च का ऐसा दौर शुरू हुआ कि उसकी इकॉनमी गर्त में चली गई। देश के पास कैश रिजर्व नहीं है और सरकार पर भारी कर्ज है। देश की करीब 40 फीसदी आबादी गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन कर रही है।

विश्व के 20 देशों में 65% बच्चों को जरूरी पोषक आहार नहीं मिल पा रहा :रिपोर्ट

नई दिल्ली  फूड सिक्योरिटी के मामले में भारत दुनिया का 8वां सबसे खराब देश है. साउथ एशिया में अफगानिस्तान के बाद सबसे बदतर स्थिति भारत की ही है.  यूनिसेफ की ताजा रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है. UNICEF 2024 बाल पोषण रिपोर्ट, ‘Child Food Poverty : बचपन के शुरुआती दिनों में पोषण का अभाव’ रिपोर्ट से पता चला है कि भारत उन 20 देशों में से एक है, जहां 2018-2022 तक 65% बच्चों को जरूरी पोषक आहार नहीं मिल पा रहा है. जबकि दुनिया में हर चौथा बच्चा भूख से बिलख रहा है. जानिए क्या कहती है यूनिसेफ की रिपोर्ट और भारत में बच्चों की स्थिति कितनी गंभीर है… किस देश में चाइल्ड प्रॉवर्टी सबसे ज्यादा यूनिसेफ के आंकड़ों के अनुसार, भारत में चाइल्ड पॉवर्टी 40 प्रतिशत है, जो हाई लेवल पर है. उससे पहले सोमालिया (63%), गिनी (54%), गिनी-बिसाऊ (53%), अफगानिस्तान (49%), सिएरा लियोन (47%), इथियोपिया (46%) और लाइबेरिया (43%) है. इन आंकड़ों से पता चलता है कि भारत में बड़ी संख्या में बच्चों को खाना तक उपलब्ध नहीं हो पा रहा है. पाकिस्तान की बात करें तो वहां का आंकड़ा 38% है, जबकि चीन 10% पर है. साउथ एशिया में दूसरा सबसे खराब देश गंभीर बाल खाद्य गरीबी में 40 प्रतिशत के अलावा भारत के 36 प्रतिशत बच्चे ‘मध्यम बाल खाद्य गरीबी’ (Moderate Child Food Poverty) की चपेट में हैं. इस हिसाब से दोनों का आंकड़ा 76 प्रतिशत तक पहुंच जाता है, जो बताता है कि दक्षिण एशिया में भारत अफगानिस्तान के बाद दूसरा सबसे खराब देश है. जहां गंभीर बाल खाद्य गरीबी 49% और मध्यम बाल खाद्य गरीबी 37% है. दक्षिण एशिया में बाकी देशों की स्थिति भारत से बेहतर है. हर चौथे बच्चे को नहीं मिल रहा भरपेट खाना यूनिसेफ की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया में 5 साल से कम उम्र के करीब 18.1 करोड़ बच्चे गंभीर खाद्य गरीबी (Food Poverty) की चपेट में हैं. पूरी दुनिया में करीब 27% बच्चे ऐसे हैं, जिन्हें पोषक आहार (Nutritious Food) नसीब नहीं हो पा रहा है. इसका मतलब हर चौथा बच्चा भूख की कमी यानी कुपोषण का शिकार है, जिसका असर उसकी शारीरिक और मानसिक ग्रोथ पर पड़ रहा है. UNICEF के अनुसार गंभीर बाल खाद्य गरीबी किसे कहते हैं यूनिसेफ की तरफ से कहा गया है कि छोटे बच्चों को हर दिन 8 तरह के फूड्स में से कम से कम 5 जरूर खाने में देना चाहिए. अगर इससे कम आहार मिलते हैं तो वे गंभीर खाद्य गरीबी में आते हैं. इन फूड्स में  मां का दूध, अनाज, जड़ें (गाजर, चुकंदर, आलू, लहसुन), कंद और केले, दालें (मेवे और बीज), डेयरी प्रोडक्ट्स, मांस (मुर्गी और मछली), अंडे, विटामिन ए से भरपूर फल और सब्जियां और अन्य फल-सब्जियां शामिल हैं. खाद्य गरीबी में 44 करोड़ बच्चे यूनिसेफ की रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 100 निम्न और मध्यम आय वाले देशों में रहने वाले 5 साल से कम उम्र वाले करीब 44 करोड़ बच्चे खाद्य गरीबी से जूझ रहे हैं, यानी उन्हें रोजना 5 तरह के पोषण आहार वाले फूड्स नहीं मिल रहे हैं. इनमें से 18.1 करोड़ बच्चे गंभीर खाद्य गरीबी में हैं, जो रोजाना दो खाद्य समूहों वाला खाना ही ले पा रहे हैं. वहीं, कई देश ऐसे भी हैं जो अब भी महामारी के असर से पूरी तरह नहीं उबरे हैं। ऊपर से बढ़ते टकराव, जलवायु परिवर्तन और विषम परिस्थितियों के चलते स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। कई देशों में पोषण तो दूर की बात बच्चों को भरपेट भोजन भी नहीं मिल रहा। इसकी वजह से न केवल यह बच्चे बल्कि उनके परिवार भी गरीबी और अभावों के भंवर जाल में फंस जाते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, खाद्य निर्धनता के कुल मामलों में से करीब आधे ऐसे परिवारों में दर्ज किए गए हैं जो पहले ही गरीबी से जूझ रहे हैं। बाजारों में स्वास्थ्य के लिहाज से हानिकारक खाद्य पदार्थों का बढ़ता बोलबाला भी इसके पीछे की एक वजह है। ऊपर से खाद्य कंपनियों जिस तरह से स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने वाले खाद्य पदार्थों की मार्केटिंग कर रही हैं वो भी बच्चों को खाद्य निर्धनता के दलदल में धकेल रहा है। देखा जाए तो बढ़ते बाजारीकरण ने सबके हाथों में फास्ट-फूड तो दिया लेकिन पोषण छीन लिया।

विश्व सिकल सेल दिवस कार्यक्रम में आज उप राष्ट्रपति श्री धनखड़ होंगे शामिल

भोपाल   उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ विश्व सिकल सेल दिवस-2024 19 जून 2024 को प्रातः 11.00 बजे शासकीय चन्द्रविजय महाविद्यालय डिण्डौरी में राज्य स्तरीय कार्यक्रम में शामिल होंगे। कार्यक्रम में राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल उपस्थित रहेंगे। मध्यप्रदेश में सिकलसेल उन्मूलन के प्रयास सिकलसेल एनीमिया की रोकथाम एवं उपचार के लिये 15 नवम्बर 2021 जनजातीय गौरव दिवस को ‘’राज्य हिमोग्लोबिनोपैथी मिशन’ का शुभारंभ प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया गया। मिशन में अलीराजपुर एवं झाबुआ जिलें में पायलट प्रोजेक्ट के तहत कुल 9 लाख 17 हज़ार जनसंख्या की स्क्रीनिंग की गयी। 49 लाख 17 हज़ार लोगों की हो चुकी है स्क्रीनिंग द्वितीय चरण में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा 1 जुलाई 2023 को राष्ट्रीय स्तर पर ‘सिकल सेल उन्मूलन मिशन’- 2047 का शुभांरभ शहडोल ज़िले से किया गया। ‘राष्ट्रीय सिकलसेल उन्मूलन मिशन’ में देश के 17 राज्य शामिल हैं। मिशन में मध्यप्रदेश के आदिवासी बाहुल्य जिलों के 89 विकासखण्डों में लगभग 1 करोड़ 11 लाख नागरिकों की सिकल सेल स्क्रीनिंग की जानी है। द्वितीय चरण में अब तक 49 लाख 17 हज़ार जनसँख्या की स्क्रीनिंग की जा चुकी है। जिसमे से 1 लाख 20 हज़ार 493 सिकलवाहक एवं 18 हज़ार 182 सिकल रोगी चिन्हित किये गए हैं। प्रत्येक जिला चिकित्सालय में जांच की व्यवस्था सिकलसेल रोगियों की जांच एवं उपचार सुविधाओं के सुदृढीकरण के लिये प्रत्येक जिला चिकित्सालय में एचपीएलसी मशीन द्वारा पुष्टीकरण जांच की व्यवस्था की गई है। इसके अतिरिक्त अन्य जॉचे जैसे- सी.बी.सी., टोटल आयरन, सिरम फेरीटिन आदि जांचों की व्यवस्था निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही है। सिकलसेल एनीमिया की पुष्टिकरण जांच पीओसी किट द्वारा स्क्रीनिंग स्थल पर त्वरित जांच परिणाम प्राप्त कर सिकल रोगी का प्रबंधन किया जा रहा है। 22 लाख 96 हज़ार जेनेटिक कार्ड किये जा चुके हैं वितरित आदिवासी बाहुल्य इलाकों में सिकलसेल एनीमिया की व्यापकता अधिक है एवं सिकलसेल एनीमिया आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में एक अहम स्वास्थ्य समस्या है। बीमारी के प्रसार को रोकने के लिए समुदाय स्तर पर स्क्रीनिंग द्वारा रोगी की पहचान कर जेनेटिक काउंसलिंग एवं प्रबंधन करना अत्यंत आवश्यक है। मध्यप्रदेश में अब तक 22 लाख 96 हज़ार जेनेटिक कार्ड वितरित किये जा चुके हैं। ब्लड-ट्रांसफ्यूजन के लिए प्रदेश के ब्लड सेंटरों का किया गया है सुदृढीकरण पुष्टिकरण जांच में पॉजिटिव पाये गये सिकल रोगियों का जिला स्तर पर संचालित एकीकृत उपचार केन्द्र में प्रबंधन एवं उपचार किया जा रहा है। समस्त रोगियों को हाइडॉक्सीयूरिया, फोलिकि एसिड दवाइयों का वितरण तथा आवश्यकतानुसार निःशुल्क रक्ताधान दिया जा रहा है। सिकल सेल रोगियों को सुरक्षित ब्लड-ट्रांसफ्यूजन के लिये प्रदेश के ब्लड सेंटरों का भी सुदृढीकरण किया गया है। सिकलसेल स्क्रीनिंग की रिपोर्टिंग एवं डाटा ट्रैकिंग हेतु मोबाइल एप एवं नेशनल सिकलसेल पोर्टल विकसित किया गया है। नवजात शिशुओं की जांच के लिये एम्स भोपाल में लैब नवजात शिशुओं में जन्म के 72 घंटे के अंदर विशेष जांच के लिये एम्स भोपाल में लैब स्थापित कर आदिवासी बाहुल्य जिलों से भेजे गये सैम्पलों की जांच प्रारंभ की गई है । सिकल सेल एनीमिया की स्क्रीनिंग तथा प्रबंधन के प्रशिक्षण एवं तकनीकी सहयोग आईसीएमआर एनआईआरटीएच, जबलपुर द्वारा दिया जा रहा है। इसके अंतर्गत प्रदेश के समस्त 89 आदिवासी बाहुल्य विकासखण्डों में पदस्थ प्रबंधकीय एंव चिकित्सकीय स्टाफ के साथ-साथ मैदानी कार्यकताओं को प्रशिक्षित किया गया है। सिकलसेल रोग के प्रसार को आगामी पीढ़ी में जाने से रोकने के लिए गर्भवती महिलाओं की प्रि-नेटल डायग्नोसिस ‘संकल्प इंडिया’ के सहयोग से की जा रही है। स्क्रीनिंग में चिन्हित सिकलसेल रोगियों को उपचार, औषधि एवं सम्पूर्ण प्रबंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करने एवं निरंतर निगरानी के लिये ट्रीटमेंट एवं फॉलोअप बुकलेट तैयार की गयी है।  

प्रदेश में सर्वसुविधायुक्त 369 सीएम राइज स्कूलों का संचालन आरंभ – मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य सरकार ने प्रदेश में सर्वसुविधायुक्त 369 सीएम राइज स्कूलों का संचालन आरंभ कर दिया है। इन स्कूलों में विश्व स्तरीय बिल्डिंग, स्मार्ट क्लास, डिजिटल टीचिंग, नि:शुल्क वाहन सुविधा, एक्सपोजर विजिट के साथ-साथ अन्य आधुनिक संसाधनों की सुविधा विद्यार्थियों को प्राप्त होगी। अन्य विद्यालयों में भी किसी भी प्रकार की कमी नहीं रहने देंगे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा प्रदेश के 416 विद्यालयों में पीएमयोजना के अंतर्गत उत्कृष्ट शिक्षा उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है। इन सुविधाओं का अन्य शालाओं में भी विस्तार होगा। प्रदेश के विद्यार्थी महापुरूषों से प्रेरणा लेकर अपने जीवन में उच्च लक्ष्य प्राप्त करने के पथ पर अग्रसर होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव प्रदेश में स्कूल चलें हम अभियान 2024 के शुभारंभ अवसर पर अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव नवप्रवेशी विद्यार्थियों का किया स्वागत शासकीय सुभाष उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्वलित कर शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विद्यार्थियों द्वारा बनाए गए चित्रों की प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शाला में नवप्रवेशी विद्यार्थियों को दुलार कर, तिलक लगाकर व पुस्तकें भेंट कर उनका स्वागत किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सुपर-100 योजना के अंतर्गत वर्ष 2024 में जेईई एडवासं में आईआईटी में प्रवेश लेने वाले शासकीय विद्यालयों के विद्यार्थियों ग्राम सालीचौका जिला नरसिंहपुर के पवनराय, ग्राम रक्सहाकलॉ जिला रीवा के शीतल सिंह, सतना जिले ग्राम अतरार के साहिल पाल, भोपाल के रविराज विश्वकर्मा का सम्मान भी किया। स्कूल शिक्षा स्तर पर भी राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रावधानों के क्रियान्वयन में प्रदेश अग्रणी रहेगा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शासकीय विद्यालयों को सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। यह विद्यालय शिक्षा प्रदान करने के साथ-साथ सफल जीवन जीने की प्रेरणा और अनुभव प्रदान करने के भी महत्वपूर्ण केन्द्र हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में देश की सभी व्यवस्थाओं में सुधार हो रहा है। इसी क्रम में लागू की गई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन का सकारात्मक प्रभाव हमारी वर्तमान पीढ़ी में परिलक्षित होगा। मध्यप्रदेश उच्च शिक्षा में राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू करने में देश में अग्रणी रहा है। स्कूल शिक्षा के क्षेत्र में भी राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रावधानों का क्रियान्वयन प्राथमिकता के आधार पर कर मध्यप्रदेश देश में आगे रहेगा। भगवान श्रीकृष्ण ने शाला स्तर पर ज्ञानार्जन और मित्रता का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विद्यालय संचालन के साथ-साथ विद्यालय के परिवेश के बारे में सोचना और उसे बेहतर बनाना आवश्यक है। विद्यालय विद्यार्थियों को ऐसा परिवेश और मार्गदर्शन दें, जिससे वे कठिन परिस्थितियों में भी श्रेष्ठ ज्ञान और शिक्षा प्राप्त करते हुए नैतिक मूल्यों के साथ लक्ष्य प्राप्ति की ओर अग्रसर हो सकें। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण का उदाहरण देते हुए कहा कि श्रीकृष्ण ने गुरूकुल में अपनी प्रतिभा और योग्यता के बल पर विभिन्न विद्याओं और कलाओं में दक्षता अर्जित की, साथ ही दुनिया के सामने मित्रता का भी श्रेष्ठतम उदाहरण प्रस्तुत किया। जनजातीय कार्यमंत्री कुंवर विजय शाह ने कहा कि शासकीय विद्यालयों में अध्ययनरत प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को प्रतियोगियों परीक्षाओं की तैयार के लिए मार्गदर्शन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से आरंभ की गई सुपर-100 योजना का विस्तार सभी संभागों तक किया जाना आवश्यक है। कार्यक्रम में स्कूल शिक्षा उदय प्रताप सिंह, खेल एवं युवा कल्याण सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग, पिछड़ा वर्ग एवं अल्संख्यक कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर, महापौर श्रीमती मालती राय, पूर्व प्रोटेम विधानसभा स्पीकर रामेश्वर शर्मा, विधायक भगवानदास सबनानी तथा अन्य जनप्रतिनिधि व बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित थे।

डिलीवरी वाहनों में प्रगति के कारण भारत की परमाणु तिकड़ी को मजबूती मिली

Officers/employees of Central Jail Jabalpur organized a huge tricolor rally

नई दिल्ली  भारत अगले कुछ महीनों में अपनी दूसरी SSBN (परमाणु-चालित बैलिस्टिक मिसाइलों से लैस परमाणु-चालित पनडुब्बियों के लिए नौसेना की भाषा) INS अरिघात को चालू करके न्यूक्लियर ट्रायड के अपने सबसे कमजोर हिस्से को मजबूत करने की तैयारी में है। पहला INS अरिहंत 2018 में चालू हुआ था। इसके बाद नवंबर 2022 में एस-4 का प्रक्षेपण सामरिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण था। आईएनएस अरिहंत और अरिघात के बाद यह भारत की तीसरी स्वदेशी परमाणु बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी (एसएसबीएन) रही। हाल के वर्षों में डिलीवरी वाहनों में प्रगति के कारण भारत की परमाणु तिकड़ी को मजबूती मिली है। भारतीय वैज्ञानिकों की तरफ से अग्नि-V पर काम शुरू करने के एक दशक से भी अधिक समय बाद, मिसाइल परीक्षण की प्रक्रिया से गुजरकर मैच्योर हो गई है। 15 दिसंबर 2022 को, रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने परमाणु-सक्षम बैलिस्टिक मिसाइल का नौवां परीक्षण किया था। न्यूक्लियर ट्रायड क्या है? न्यूक्लियर ट्रायड, एक तीन पक्षीय मिलिट्री फोर्स स्ट्रक्चर है। इसमें धरती से प्रक्षेपित परमाणु मिसाइलें, परमाणु मिसाइल से लैस पनडुब्बियां, और परमाणु बम और मिसाइलों से लैस सामरिक विमान शामिल हैं। दुनिया में केवल चार देशों के पास न्यूक्लियर ट्रायड है। इनमें संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस, भारत और चीन शामिल हैं। पाकिस्तान एक आंशिक परमाणु ट्रायड है। इजरायल के पास परमाणु ट्रायड होने का संदेह है, लेकिन इसकी स्थिति की पुष्टि नहीं हुई है। सिपरी की चीन पर रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता दूसरी तरफ स्वीडिश थिंक टैंक स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की चीन पर रिपोर्ट ने चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट के अनुसार चीन विश्व में किसी भी अन्य देश की तुलना में अपने न्यूक्लियर हथियार के भंडार को तेजी से बढ़ा रहा है। चीन के पास अब भारत की तुलना में तीन गुना अधिक परमाणु हथियार हैं। इसके अलावा उसने कुछ बैलिस्टिक मिसाइलों पर “हाई ऑपरेशन अलर्ट” भी तैनात किया है। वहीं, पाकिस्तान परमाणु हथियारों की संख्या के मामले में भारत के बराबर ही बना हुआ है। वहीं, रूस और अमेरिका अन्य देशों से काफी आगे हैं। इन दोनों देशों के पास कुल परमाणु हथियारों का 90% हिस्सा है।

मेगा प्रॉपर्टी सेल की तैयारी में सरकारी कंपनी एलआईसी, सात अरब डॉलर जुटाने की योजना

नई दिल्ली  देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी एलआईसी (LIC) कई शहरों में अपनी प्रॉपर्टी बेचकर 50 से 60 हजार करोड़ रुपये जुटाने की तैयारी में है। मिंट की एक रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी जल्दी ही कई शहरों में अपने प्लॉट और कमर्शियल प्रॉपर्टी बेच सकती है। इसकी शुरुआत मुंबई से हो सकती है। डिफेंस और रेलवे के बाद देश में सबसे ज्यादा जमीन एलआईसी के पास है। उसके पास कई शहरों में प्राइम लोकेशन पर प्लॉट और कमर्शियल बिल्डिंग्स हैं। इनमें दिल्ली के कनॉट प्लेस में जीवन भारती बिल्डिंग, कोलकाता के चितरंजन एवेन्यू में एलआईसी बिल्डिंग और मुंबई स्थित बिल्डिंग्स शामिल हैं। उत्तराखंड के मशहूर हिल स्टेशन मसूरी के मॉल रोड पर स्थित एसबीआई बिल्डिंग भी एलआईसी की है। एलआईसी देश का सबसे बड़ी संस्थागत निवेशक भी है। उसकी एसेट्स 51 ट्रिलियन रुपये से अधिक है। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि एलआईसी एक प्लान पर काम कर रही है। कंपनी में आंतरिक स्तर पर कई विकल्पों पर बात चल रही है। इसमें वैल्यूएशन एक्सरसाइज अहम है। रियल एस्टेट एसेट्स को मॉनिटाइज करने का सबसे बेहतर तरीका क्या होगा, उस पर अभी विचार-विमर्श चल रहा है। एसेट सेल की फॉर्मल प्रोसेस के लिए नए सिरे से कंपनी की बिल्डिंग्स का वैल्यूएशन किया जा सकता है। अंतिम वैल्यूएशन के मुताबिक एलआईसी के रियल एस्टेट एसेट्स की कीमत 50,000 से 60,000 करोड़ रुपये थी। लेकिन वास्तविक वैल्यू इससे करीब पांच गुना हो सकती है। इस बारे में एलआईसी, डिपार्टमेंट ऑफ इनवेस्टमेंट एंड पब्लिक एसेट मैनेजमेंट (DIPAM) और डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज को भेजे गए ईमेल का कोई जवाब नहीं आया। सरकारी कंपनियों के एसेट डाइवेस्टमेंट के लिए DIPAM की मंजूरी जरूरी है। क्यों आई यह नौबत फाइनेंशियल ईयर 2024 में एलआईसी का नेट प्रॉफिट 40,676 करोड़ रुपये रहा जो पिछले वित्त वर्ष में 36,397 करोड़ रुपये था। सूत्रों का कहना है कि अगर कंपनी प्रॉपर्टी बेचती है तो उसका मुनाफा बढ़ सकता है। बिक्री के बाद नए मालिक को एलआईसी की प्रॉपर्टी को रिडेवलप करने, नए सिरे से डिजाइन करने और इस्तेमाल करने की अनुमति दी जा सकती है। एलआईसी अपने रियल एस्टेट एसेट्स को होल्ड करने और उनके मॉनीटाइजेशन को मैनेज करने के लिए एक नई कंपनी बना सकती है। कंपनी के पास देश के कई शहरों में प्राइम लोकेशंस पर बिल्डिंग्स हैं। लेकिन इन्हें बेचने के लिए एलआईसी एक्ट में कुछ संशोधन करने होंगे। ऐसा नहीं है कि पहली बार एलआईसी के रियल एस्टेट को बेचने की कोशिश हो रही है। पहले भी ऐसा प्रयास किया जा चुका है लेकिन कानूनी विवादों के कारण यह योजना आगे नहीं बढ़ पाई। एलआईसी की कई इमारतें कानूनी पचड़ों में फंसी हैं। एलआईसी ऐसे वक्त में रियल एसेट मॉनीटाइजेशन की कोशिश में लगी है जब उसे देश में अपना मार्केट शेयर बचाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। फाइनेंशियल ईयर 2024 में कंपनी की टोटल प्रीमियम इनकम महज 0.22 फीसदी बढ़कर 4.75 ट्रिलियन रुपये रही। उसे निजी कंपनियों से कड़ी टक्कर मिल रही है।  

रिपोर्ट : भारत के पास 172 परमाणु बम है, वहीं पाकिस्‍तान के पास 170

इस्‍लामाबाद  भारत ने 25 साल में पहली बार परमाणु हथियारों के मामले में पाकिस्‍तान को पीछे कर दिया है। स्‍वीडन की नामचीन संस्‍था सिप्री की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक भारत के पास अब 172 परमाणु बम है, वहीं पाकिस्‍तान के पास 170 हैं। सिप्री की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि चीन ने पहली बार अपने परमाणु बमों को ऑपरेशनल हाई अलर्ट पर कर दिया है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने साल 2023 में अपने परमाणु हथियारों के जखीरे को 8 की संख्‍या में बढ़ाया है। सिप्री ने कहा कि भारत और पाकिस्‍तान दोनों ने साल 2023 में नये तरीके के न्‍यूक्लियर डिल‍िवरी सिस्‍टम का विकास करना जारी रखा हुआ है। पाकिस्‍तान का सबसे ज्‍यादा फोकस भारत के परमाणु प्रत‍िरोधक क्षमता पर है। वहीं भारत चीन को निशाना बनाने के लिए लंबी दूरी तक मार करने वाले हथियारों पर काम कर रहा है। भारत अभी भले ही पाकिस्‍तान से आगे निकल गया हो लेकिन पाकिस्‍तान कंगाली के बाद भी परमाणु हथियारों को लेकर बड़ी योजना पर काम कर रहा है। आइए समझते हैं… पाकिस्‍तान ने साल 2023 में 1 अरब डॉलर केवल परमाणु हथियारों और उनके डिलिवरी सिस्‍टम को बनाने पर खर्च किया है। अमेरिका के शीर्ष परमाणु वैज्ञानिकों को मानना है कि पाकिस्‍तान के पास भले ही अभी 170 परमाणु बम ही हो लेकिन जिस तेजी से वह इसे बढ़ाने पर काम कर रहा है, साल 2025 तक वह इसे बढ़ाकर 200 तक करने की तैयारी कर रहा है। उन्‍होंने ओपन सोर्स मटीरियल, सैटलाइट तस्‍वीरों और अन्‍य स्रोतों से यह जानकारी दी है। बुलेटिन ऑफ द अटामिक साइंटिस्‍ट की साल 2023 में आई रिपोर्ट में अमेरिकी परमाणु वैज्ञानिकों ने पाकिस्‍तान को लेकर बड़ी चेतावनी दी थी। पाकिस्‍तान ने अमेरिकी अनुमान को फेल किया अमेरिकी वैज्ञानिकों ने कहा था, ‘हमारा आकलन है कि पाकिस्‍तान के पास अब 170 परमाणु बमों का जखीरा है। अमेरिका की डिफेंस इंटेल‍िजेंस एजेंसी का साल 1999 में अनुमान था कि पाकिस्‍तान के पास साल 2020 तक 60 से 80 परमाणु बम होंगे लेकिन तब से लेकर अब तक कई नई हथियार प्रणालियों को शामिल किया गया है जिससे अब परमाणु बमों का आंकड़ा अब बढ़ गया है।’ फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्‍ट ने कहा कि हमारा यह आंकलन अनिश्चितता पर आधारित है क्‍योंकि पाकिस्‍तान या अन्‍य देशों ने परमाणु हथियारों को लेकर इस सूचना को प्रकाशित नहीं किया है। दुनिया में किसके पास कितने परमाणु बम न्‍यूक्लियर नोटबुक के नाम से आई रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्‍तान परमाणु बमों को दागने के लिए कई नये डिलिवरी सिस्‍टम को बना रहा है। पाकिस्‍तान के पास 4 प्‍लूटोनियम प्रॉडक्‍शन रिएक्‍टर हैं और वह अपने यूरेनियम संवर्द्धन इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर का विस्‍तार कर रहा है। इससे आने वाले कई वर्षों तक पाकिस्‍तान का परमाणु जखीरा तेजी से बढ़ता रहेगा। वैज्ञानिकों ने कहा, ‘पाकिस्‍तान के परमाणु बमों की संख्‍या में यह बढ़ोत्‍तरी कई फैक्‍टर्स पर निर्भर करेगी। इसमें पाकिस्‍तान परमाणु बम लॉन्‍च करने वाले लांचर को तैनात करने की योजना बना रहा है, उसकी परमाणु रणनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है और भारत अपनी परमाणु ताकत को किस तरह से बढ़ाता है।’ मिराज फाइटर जेट, गौरी मिसाइल से लैस है पाकिस्‍तान अमेरिकी वैज्ञानिकों ने कहा, ‘हमारा अनुमान है कि पाकिस्‍तान का परमाणु जखीरा इसी तरह से बढ़ता रहा तो साल 2025 तक 200 तक पहुंच सकता है।’ उन्‍होंने कहा कि हमारा अनुमान है कि अभी पाकिस्‍तान इतनी परमाणु सामग्री बना रहा है जिससे हर साल 14 से 27 नए परमाणु बम बनाए जा सकते हैं। पाकिस्‍तान के पास 36 ऐसे फाइटर जेट हैं जिससे परमाणु बम गिराया जा सकता है। इसमें मिराज III/IV और जेएफ 17 फाइटर जेट शामिल हैं। इसके अलावा पाकिस्‍तान के पास अब्‍दाली, गजनवी, शाहीन, गौरी और नस्र जैसी परमाणु मिसाइले हैं। पाकिस्‍तान इससे 2700 किमी दूरी तक भारतीय ठिकानों पर परमाण हमला करने की क्षमता रखता है। पाकिस्‍तान अबाबील मिसाइल बना रहा है जो कई परमाणु बम एक साथ ले जा सकती है। भारत ने हाल ही में इस तकनीक से लैस अग्नि मिसाइल का परीक्षण किया था। पाकिस्‍तान समुद्र से लांच किए जाने वाली बाबर परमाणु मिसाइल भी बना रहा है। इन मिसाइलों और परमाणु कार्यक्रम को चलाने में पाकिस्‍तान को चीन की पूरी मदद मिल रही है।

क्या आप जानते है देश के किस इलाके में सबसे ज्यादा सजती हैं महिलाएं? कॉस्मेटिक्स की बिक्री ने खोल दिया बड़ा राज

नई दिल्ली कॉस्मेटिक्स का देश में बड़ा कारोबार है। इसमें हर साल इजाफा देखने को मिल रहा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि पूरे देश में सबसे ज्यादा कॉस्मेटिक्स की बिक्री किस शहर में होती है। आपको जानकर हैरानी होगी कि देश में सबसे ज्यादा कॉस्मेटिक्स की खरीदारी पूर्वी भारत में होती है। हाल ही में देश की सबसे पुरानी डिपार्टमेंटल स्टोर चेन, शॉपर्स स्टॉप ने कोलकाता में अपना सबसे बड़ा ब्यूटी स्टोर खोला है। कई शहरों में पहले से ही स्टोर होने के बावजूद शॉपर्स स्टॉप ने कोलकाता को चुना है। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह कोलकाता में कॉस्मेटिक्स की सबसे ज्यादा बिक्री होना है। लिपस्टिक, नेल पॉलिश और आईलाइनर जैसी चीज़ों को मिलाकर पिछले साल यहां 18.6 करोड़ से भी ज्यादा बिक्री हुई है। हमारे सहयोगी इकोनॉमिक्स टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, कोलकाता में कॉस्मेटिक्स खूब खरीदा जाता है। ग्लोबल कंज्यूमर रिसर्च फर्म कांतार ने अपनी नवीनतम रिपोर्ट में कहा कि पिछले साल भारत के टॉप 10 शहरों में लिपस्टिक, नेल पॉलिश और आईलाइनर सहित 186 मिलियन से अधिक सौंदर्य प्रसाधनों की बिक्री हुई है। खूब होती है खरीदारी रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्वी भारत में भारत में बिकने वाले सभी सौंदर्य प्रसाधनों का एक तिहाई से अधिक हिस्सा बिकता है, जबकि देश के एक चौथाई से भी कम घरों में पूर्वी भारत की हिस्सेदारी है। जानकारों के मुताबिक, कोलकाता में ब्यूटी प्रोडक्ट्स को लेकर जागरूकता ज्यादा है। पूर्वी भारत के लोग फैशन और खूबसूरती के मामले में काफी जागरूक रहते हैं। यही वजह है कि वहां ब्यूटी स्टोर्स का अच्छा बिजनेस होता है। इस वजह से होती है सबसे ज्यादा बिक्री पूर्वी भारत में महिलाएं सबसे ज्यादा मेकअप करती हैं। यहां हर तरह के शेड्स, खासकर गहरे रंगों की भी, काफी डिमांड रहती है। रिपोर्ट के मुताबिक, दूसरे सामानों के मामले में जहां दक्षिण भारत के लोग ज्यादा खर्च करते हैं, वहीं कॉस्मेटिक्स में पूर्वी भारत सबसे आगे है। यहां हर महिला ज्यादा मेकअप प्रोडक्ट्स खरीदती है और उन्हें ज्यादा बार इस्तेमाल भी करती हैं। इसका नतीजा ये होता है कि कॉस्मेटिक कंपनियां पूर्वी भारत को काफी अहम बाजार मानती हैं और अपने सबसे बड़े स्टोर भी यहीं खोल रही हैं। सबसे ज्यादा बिकते हैं ये प्रोडक्ट्स रिपोर्ट के मुताबिक, ब्यूटी प्रोडक्ट्स में सबसे ज्यादा बिक्री होठों से जुड़े उत्पादों की होती है। इसकी सालाना 65 मिलियन यूनिट बिकती हैं, जिससे करीब 1,700 करोड़ रुपये की इनकम होती है। वास्तव में, चेहरे और होंठों के लिए बने ब्यूटी प्रोक्ट्स मिलकर करीब 2,900 करोड़ रुपये या उद्योग के मूल्य का लगभग 70% कमाते हैं। वहीं सालाना 47 मिलियन नेल कॉस्मेटिक्स खरीदे जाते हैं। इनकी अपेक्षाकृत सस्ती कीमत का मतलब है कि वे लगभग 350 करोड़ रुपये कमाते हैं। 34 मिलियन यूनिट्स की बिक्री के साथ आंखों के उत्पाद देश में सबसे छोटे कलर कॉस्मेटिक सेगमेंट हैं।  

53 हजार करोड़ का रिफंड भी जारी, डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन में भारी उछाल, सरकार का भरा खजाना

नई दिल्ली सरकार की तिजोरी लगातार बढ़ते टैक्स कलेक्शन से भर रही है। मौजूदा वित्त वर्ष यानी 2024-25 की बात करें, तो अब तक नेट डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन (Net Direct Tax Collection) 21 फीसदी बढ़कर 4.62 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने मंगलवार को बताया कि यह इजाफा एडवांस टैक्स कलेक्शन बढ़ने की वजह से हुआ है। एडवांस टैक्स को 15 जून तक भरना था। इसकी पहली किस्त में टैक्स कलेक्शन 27.34 प्रतिशत बढ़कर 1.48 लाख करोड़ रुपये हो गया। इसमें 1.14 लाख करोड़ रुपये का कॉर्पोरेशन (सीआईटी) और 34,470 करोड़ रुपये का पर्सनल इनकम टैक्स (पीआईटी) शामिल है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने एक बयान में कहा कि 4,62,664 करोड़ रुपये (17 जून, 2024 तक) के नेट डायरेक्ट कलेक्शन में 1,80,949 करोड़ रुपये का सीआईटी और 2,81,013 करोड़ रुपये का पीआईटी (सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स सहित) शामिल है। वित्त वर्ष 2024-25 में 17 जून तक 53,322 करोड़ रुपये का रिफंड भी जारी किया गया है, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि के दौरान जारी किए गए रिफंड से 34 प्रतिशत अधिक है। अप्रैल-जून 2017 के दौरान प्रत्यक्ष करों का सकल संग्रह (रिफंड समायोजन से पहले) 5.16 लाख करोड़ रुपये रहा। वहीं, पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में यह 4.23 लाख करोड़ रुपये था, जो 22.19 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।

अपनी स्थापना के 75वें वर्ष में सुप्रीम कोर्ट विशेष लोक अदालत का आयोजन कर रहा है, आम लोग भी उठा सकेंगे लाभ

नई दिल्ली अपनी स्थापना के 75वें वर्ष में सुप्रीम कोर्ट 29 जुलाई, 2024 से तीन अगस्त, 2024 तक विशेष लोक अदालत का आयोजन करेगा ताकि उपयुक्त लंबित मामलों का सौहार्दपूर्ण समाधान निकाला जा सके। देश का संविधान 26 जनवरी, 1950 को लागू हुआ था और सुप्रीम कोर्ट उसी तिथि से अस्तित्व में आया था। शीर्ष अदालत ने प्रेस को जारी के बयान में बताया, ‘लोक अदालतें इस देश की न्यायिक प्रणाली का अभिन्न अंग हैं, जो सौहार्दपूर्ण समाधान में तेजी लाने और उसे प्रोत्साहित करने के एक साधन के रूप में विवादों के वैकल्पिक समाधान को बढ़ावा देती हैं।’ इन मामलों पर होगी सुनवाई शीर्ष अदालत के बयान में आगे कहा गया है कि आगामी लोक अदालत का आयोजन समाज के सभी वर्गों को सुलभ और कुशल न्याय प्रदान करने की प्रतिबद्धता के अनुरूप है। लोक अदालत में निपटारे की संभावना वाले उन मामलों पर सुनवाई की जाएगी जो सुप्रीम कोर्ट के समक्ष लंबित हैं, ताकि उनका त्वरित निपटान सुनिश्चित किया जा सके। ऐसे मामलों में वैवाहिक और संपत्ति विवाद, मोटर दुर्घटना दावे, भूमि अधिग्रहण, मुआवजा, सेवा और श्रम से संबंधित मामले शामिल हैं।

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