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ED पूर्व बीएसपी एमएलसी मोहम्मद इकबाल और उसके परिवार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की, 4440 करोड़ की जमीन जब्त

सहारनपुर उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में बीएसपी के पूर्व एमएलसी हाजी इकबाल (former MLC Mohammad Iqbal) के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है. केंद्रीय जांच एजेंसी ने पूर्व एमएलसी की 4 हजार करोड़ से ज्यादा की संपत्तियों को अटैच कर दिया है. यहां यूनीवर्सिटी की 4,440 करोड़ रुपये की कीमत की इमारत और जमीन कुर्क की गई है. एजेंसी के अनुसार, मनी लॉन्ड्रिंग केस में जांच एजेंसी ने एक अनंतिम कुर्की आदेश जारी किया था, इसके बाद 121 एकड़ जमीन और ग्लोकल यूनिवर्सिटी की इमारत को जब्त कर लिया गया है. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एक बयान में कहा कि ये संपत्तियां अब्दुल वहीद एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट के नाम पर दर्ज हैं, इन पर मोहम्मद इकबाल और उनके परिवार के सदस्यों का कंट्रोल था. मोहम्मद इकबाल, ट्रस्ट और उसके परिवार के सदस्यों के खिलाफ की गई ये कार्रवाई अवैध खनन मामले से जुड़ी है. ईडी के अनुसार, पूर्व एमएलसी फरार है. माना जा रहा है कि वह दुबई में है. मोहम्मद इकबाल के चार बेटे हैं. बेटों और भाई के खिलाफ कई मामले दर्ज हैं, जो जेल में बंद हैं. मनी लॉन्ड्रिंग का केस उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में रेत खनन, पट्टों के अवैध नवीनीकरण और कई खनन पट्टा धारकों, कुछ अधिकारियों और अज्ञात लोगों के खिलाफ दिल्ली में दर्ज सीबीआई की एफआईआर से जुड़ा है. सभी खनन फर्मों का स्वामित्व और संचालन मोहम्मद इकबाल ग्रुप के पास था. ये फर्म सहारनपुर और आसपास के इलाकों में बड़े पैमाने पर अवैध खनन में शामिल थीं. ईडी ने कहा कि आईटीआर (आयकर रिटर्न) में मामूली आय दिखाए जाने के बावजूद खनन फर्मों और मोहम्मद इकबाल के ग्रुप की कंपनियों के बीच बिना किसी व्यापारिक संबंध के करोड़ों के लेनदेन मिले हैं. यह मुकदमा सहारनपुर में खनन के पट्टों में हुई धांधली से जुड़ा था, जिसमें लीज होल्डर महमूद अली, दिलशाद, मोहम्मद इनाम, महबूब आलम (अब मृत), नसीम अहमद, अमित जैन, नरेंद्र कुमार जैन, विकास अग्रवाल, मोहम्मद इकबाल का बेटा मोहम्मद वाजिद, मुकेश जैन, नरेंद्र कुमार, पुनीत कुमार और कुछ अज्ञात सरकारी अधिकारियों को नामजद किया गया था। ईडी की जांच से पता चला कि सभी खनन फर्मों का स्वामित्व और संचालन मोहम्मद इकबाल के पास था। इकबाल और उसके करीबियों की कंपनियां और फर्में सहारनपुर और आस-पास के इलाकों में बड़े पैमाने पर अवैध खनन में शामिल थीं।  इसके जरिए मोहम्मद इकबाल के साथ करोड़ों रुपये का लेन-देन किया गया, जबकि इन कंपनियों से उसका कोई कारोबारी संबंध नहीं था। इतना ही नहीं, मोहम्मद इकबाल ने इस अवैध कमाई को आयकर विवरण में इसे छिपा लिया गया था। बाद में मोहम्मद इकबाल ने सारी धनराशि अब्दुल वहीद एजुकेशनल ट्रस्ट के बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी।  अधिकतर रकम को असुरक्षित कर्ज और दान के रूप में दिया जाना दर्शाया गया था। बाद में ट्रस्ट ने इस धनराशि का उपयोग यूनिवर्सिटी की भूमि खरीदने और भवनों के निर्माण के लिए किया। ईडी की जांच में सामने आया है कि इस तरह करीब 500 करोड़ रुपये ट्रस्ट के जरिए ग्लोकल यूनिवर्सिटी में निवेश किए गये। वर्तमान में यूनिवर्सिटी की भूमि और भवनों की बाजार कीमत 4440 करोड़ रुपये है। बता दें मोहम्मद इकबाल के चार बेटे और भाई अलग-अलग मामलों में जेल में बंद हैं।  

छत्तीसगढ़ के पूर्व उप मुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव की छह माह से कैंसर से जूझ रहीं धर्मपत्नी इंदिरा सिंहदेव ‘बेबीराज’ नहीं रहीं

अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ प्रदेश के पूर्व उप मुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव की अर्द्धांगिनी इंदिरा सिंह बेबीराज नहीं रहीं। पिछले छह माह से कैंसर से पिड़ित थीं। इनका इलाज दिल्ली एवं मुंबई के प्रमुख अस्पतालों में चल रहा था। बड़े चिकित्सा संस्थानो में भी स्वास्थ्य ठीक नहीं हुआ तो 13 जून को मुंबई से अंबिकापुर एयर एम्बुलेंस के माध्यम से लाया गया। शनिवार की सुबह आठ बजे यहां निधन हो गया। उनका अंतिम संस्कार दोपहर दो बजे स्थानीय रानी तालाब में किया जाएगा। इनका जन्म 12 अप्रैल 1950 को धरमजयगढ़ राजपरिवार में हुआ था। इनके निधन से सरगुजा राजपरिवार व सरगुजा में शोक का माहौल है। बता दें,बेबीराज मानवीय संवेदनाओं से परिपूर्ण थीं। निराश्रित, मजबूर, अशक्त, अभावग्रस्त लोगों के लिए सदैव हाथ खुला रखतीं थीं। जरूरतमंदों की दवा, चिकित्सा, पढ़ाई, शादी ब्याह, धार्मिक सामाजिक आयोजनों,मंदिर, शैक्षणिक संस्थाओं, अनाथालयों, वृद्धाश्रमों को दान, भेंट तथा जरूरतमंदों के स्वाभिमान को ठेस पहुंचाए बिना मदद करने आगे रहतीं थीं। उनके निधन पर सरगुजा कांग्रेस परिवार ने श्रद्धांजलि अर्पित की है।

छत्तीसगढ़ के नारायणपुर में सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में 8 नक्सली ढेर

 नारायणपुर छत्तीसगढ़ के नारायणपुर में पुलिस और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ की खबर है। जानकारी के अनुसार यहां अबूझमाड़ के जंगलों में मुठभेड़ में आठ नक्सली मारे गए हैं। मुठभेड़ में एक जवान बलिदान हो गया है और दो जवान घायल हैं। अभी मुठभेड़ जारी है। अबुझमाड़ के जंगलों में नक्सलियों के खिलाफ सुरक्षाबलों की कार्रवाई जारी है। सुरक्षाबलों ने नक्सलियों की मौजूदगी की सूचना पर सीमावर्ती जिलों के साथ मिलकर संयुक्त ऑपरेशन चलाया है। जवानों का संयुक्त ऑपरेशन अबुझमाड़ के कुतुल फरसबेड़ा कोड़तामेटा क्षेत्र में जारी है। जानकारी के मुताबिक, नारायणपुर जिले के माड़ में पिछले दो दिनों से सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ चल रही है। संयुक्त ऑपरेशन में नारायणपुर-कोंडागांव-कांकेर-दंतेवाड़ा डीआरजी, एसटीएफ और आईटीबीपी 53वीं बटालियन बल शामिल हैं। नक्सल विरोधी अभियान जारी पुलिस अधिकारियों ने बताया कि 12 जून को जिले के अबुझमाड़ क्षेत्र में स्थित कुतुल, फरसबेड़ा और कोड़तामेटा गांव के जंगल में नक्सल विरोधी अभियान शुरू किया गया था. आज सुबह से सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ जारी है. पिछले दो दिनों में भी कई बार रुक-रुककर गोलीबारी हुई जिसका जवाब जवानों ने दिया. सुरक्षाबल के तीन जवान घायल इधर, छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बस्तर क्षेत्र में विस्फोट की अलग-अलग घटनाओं में सुरक्षाबलों के तीन जवान घायल हो गए जिसकी जानकारी पुलिस की ओर से दी गई है. खबरों की मानें तो, बस्तर क्षेत्र के नारायणपुर जिले में बारूदी सुरंग में विस्फोट होने से आईटीबीपी के दो जवान घायल हो गए जबकि बीजापुर में प्रेशर बम में विस्फोट होने से सुरक्षाबल का एक जवान घायल हो गया. जानकारी के मुताबिक, जवानों को जंगल में नक्सलियों की मौजूदगी की सूचना मिली थी। इसी आधार पर 4 जिलों की संयुक्त टीम ने ऑपरेशन लॉच किया था। इस ऑपरेशन में 4 जिलों से 1 हजार से अधिक जवान सर्चिंग के लिए रवाना हुए थे। सुरक्षाबलों की संयुक्त टीम सर्चिंग करते हुए अबुझमाड़ के कुतुल, फरसबेड़ा, कोड़तामेटा पहुंची। इसी दौरान जंगल में घात लगाए बैठे नक्सलियों ने जवानों पर हमला बोल दिया। फायरिंग के बाद जवानों ने भी मोर्चा संभाला और जवाबी फायरिंग शुरू कर दी। फायरिंग से अब तक 8 नक्सलियों (Naxal Encounter) की मारे जाने की खबर मिली है। फिलहाल इलाके में सर्चिंग तेज कर दी गई है। Narayanpur Naxal Encounter: 2 दिन से चल रही मुठभेड़ यह मुठभेड़ पिछले दो दिनों से जारी है। सुरक्षाबल की टीम नक्सलियों के साथ डटकर मुकाबला कर रही है। इससे जवानों को बड़ी सफलता मिलने की संभावना जताई जा रही है। यह मुठभेड़ अभी भी जारी है। 8 नक्सलियों की मौत का यह आकंड़ा और बढ़ सकता है। बता दें कि मुठभेड़ में कोंडागांव, दंतेवाड़ा, कांकेर, नारायणपुर से डीआरजी, बस्तर फाइटर, आईटीबीपी 53वी वाहिनी जवान भी शामिल है। CG Naxal Encounter: इस वर्ष हुई बड़ी मुठभेड़     – 27 मार्च को बीजापुर के चिपुरभट्टी में 6 नक्सली ढेर किए गए     – 2 अप्रैल को बीजापुर के गंगालूर में मारे गए 13 नक्सली     – 16 अप्रैल को कांकेर के छोटेबेठिया में 29 नक्सली ढेर     – 30 अप्रैल को अबूझमाड़ के टेकमेटा में 10 नक्सली मारे गए     – 10 मई को बीजापुर जिले के पीड़िया में 12 नक्सली ढेर किए

PM मोदी ने जी7 सम्मेलन में राष्ट्रपति बाइडेन और प्रधानमंत्री ट्रूडो से अलग-अलग बातचीत की

Press Conference: BJP is anti-village and anti-farmer, took loan and indulged in corruption: Jeetu Patwari

अपुलिया जी 7 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इटली दौरे से भारत के लिए रवाना हो गए हैं. जी7 शिखर सम्मेलन के इतर इटली में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन और कनाडा के समकक्ष जस्टिन ट्रूडो से हुई उनकी मुलाकात काफी चर्चा में रही. बाइडेन के साथ मुलाकात के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि बाइडेन से मिलना हमेशा खुशी की बात होती है. भारत और अमेरिका वैश्विक भलाई को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम करते रहेंगे. मोदी ने ‘एक्स’ पर कहा, “जी7 शिखर सम्मेलन में कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो से मुलाकात की.” मुलाकात के दौरान मोदी और ट्रूडो दोनों एक-दूसरे का गर्मजोशी से अभिवादन करते देखे गए. हालांकि तुरंत यह पता नहीं चल पाया है कि मोदी और ट्रूडो के बीच क्या बातचीत हुई. विदेश सचिव का बयान विदेश सचिव विनय क्वात्रा ने बुधवार को कहा था कि कनाडा के साथ भारत का मुख्य मुद्दा कनाडा द्वारा चरमपंथ और हिंसा की वकालत करने वाले भारत विरोधी तत्वों को राजनीतिक पनाह प्रदान करना रहा है. उन्होंने कहा कि भारत लगातार कनाडा को अपनी “गहरी चिंताओं” से अवगत कराते रहा है. और नई दिल्ली को उम्मीद है कि ट्रूडो सरकार उन तत्वों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगी. दोनों देशों के रिश्तों में इस वजह से आई खटास पिछले साल सितंबर में ट्रूडो द्वारा ब्रिटिश कोलंबिया में निज्जर की हत्या में भारतीय एजेंटों की “संभावित” संलिप्तता के आरोपों के बाद दोनों देशों के बीच संबंध तनावपूर्ण हो गए थे. नई दिल्ली ने ट्रूडो के आरोपों को “बेतुका” और “प्रेरित” बताकर खारिज कर दिया था. भारत कहता रहा है कि दोनों देशों के बीच मुख्य मुद्दा यह है कि कनाडा कनाडा की धरती से संचालित खालिस्तान समर्थक तत्वों को बेखौफ जगह दे रहा है.  भारत द्वारा आतंकवादी घोषित किए गए निज्जर की पिछले साल 18 जून को ब्रिटिश कोलंबिया के सरे में एक गुरुद्वारे के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. हत्या की जांच रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (आरसीएमपी) द्वारा की जा रही है. ट्रूडो द्वारा भारत पर लगाए आरोपों के कुछ दिनों बाद, भारत ने कनाडा से देश में अपनी राजनयिक उपस्थिति को कम करने के लिए कहा ताकि समानता सुनिश्चित की जा सके. इसके बाद कनाडा ने भारत से 41 राजनयिकों और उनके परिवार के सदस्यों को वापस बुला लिया था. जेलेंस्की से भी मिले पीएम मोदी जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की से भी मुलाकात की। इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि भारत यूक्रेन संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान का समर्थन करने के लिए अपनी क्षमता के अनुसार हर संभव प्रयास करना जारी रखेगा. उन्होंने कहा कि शांति का रास्ता “बातचीत और कूटनीति” से होकर जाता है. ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में, यूक्रेन के राष्ट्रपति ने कहा कि उन्होंने और पीएम मोदी ने शांति शिखर सम्मेलन और इसके एजेंडे के मुद्दों पर चर्चा की. उन्होंने इसमें उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भेजने के लिए भारतीय प्रधानमंत्री को धन्यवाद दिया. जापान और फ्रांसीसी पीएम से भी मिले मोदी पीएम मोदी ने भारत-फ्रांस के बीच रणनीतिक साझेदारी के प्रमुख पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करते हुए फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन के साथ भी चर्चा की. इसके अलावा पीएम मोदी ने इटली के अपुलिया में जी -7 शिखर सम्मेलन के मौके पर जापानी पीएम फुमियो किशिदा के साथ द्विपक्षीय बैठक की और भारत में लक्षित पांच ट्रिलियन येन के निवेश के साथ मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल परियोजना पर चर्चा की. पीएम मोदी ने ट्वीट कर लिखा, ‘अपुलिया में जी7 शिखर सम्मेलन में बहुत ही उपयोगी दिन रहा. वैश्विक नेताओं से बातचीत की और विभिन्न विषयों पर चर्चा की. साथ मिलकर, हमारा लक्ष्य ऐसे प्रभावशाली समाधान तैयार करना है जिससे वैश्विक समुदाय को लाभ हो और भावी पीढ़ियों के लिए एक बेहतर दुनिया का निर्माण हो. मैं इटली के लोगों और सरकार को उनके गर्मजोशी भरे आतिथ्य के लिए धन्यवाद देता हूं.’

17 जून को भोपाल में भाजपा कार्यालय में मनाया जाएगा जश्न, मप्र के सभी 6 केंद्रीय मंत्री आएंगे

भोपाल राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की नरेंद्र मोदी सरकार में मध्य प्रदेश से बनाए गए 6 मंत्री रविवार को एक साथ भोपाल में भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश कार्यालय में एकत्रित होंगे, जहां संगठन की ओर से सभी केंद्रीय मंत्रियों का स्वागत किया जाएगा। पार्टी के इस कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार, दूरसंचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्यमंत्री दुर्गादास उईके, राज्य मंत्री महिला एवं बाल विकास सावित्री ठाकुर और एल मुरुगन (मप्र से राज्यसभा सदस्य) का प्रदेश भाजपा की ओर से सार्वजनिक अभिनंदन किया जाएगा। अभिनंदन कार्यक्रम कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा, प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद सहित सभी वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहेंगे। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा ने बताया कि मोदी सरकार में प्रदेश से बनाए गए सभी मंत्रियों का प्रदेश की जनता के साथ औपचारिक परिचय कराने की दृष्टि से संगठन द्वारा अभिनंदन कार्यक्रम रखा गया है। सभी केंद्रीय मंत्रियों ने दी सहमति सभी केंद्रीय मंत्रियों ने इसकी सहमति भी दे दी है। प्रदेश भाजपा कार्यालय में यह कार्यक्रम शाम छह बजे आयोजित किया जाएगा। शर्मा ने कहा कि मध्य प्रदेश एकमात्र ऐसा राज्य है जहां से दो-दो नए आदिवासी चेहरे को मोदी कैबिनेट में स्थान दिया गया है। कोर कमेटी की बैठक में संकल्प पत्र पर चर्चा भाजपा की कोर कमेटी की बैठक भी 17 जून को बुलाई गई है। इसमें भाजपा के संकल्प पत्र के मुद्दों पर भी चर्चा होगी। सत्ता- संगठन में समन्वय से लेकर मंत्रियों के कामकाज और लोकसभा चुनाव में उनके प्रदर्शन पर भी कोर ग्रुप चर्चा करेगा। इसी दिन संगठन से जुड़ी अन्य बैठकें भी होंगी।

दक्षिण अफ्रीका आईसीसी टी20 विश्व कप के ग्रुप डी मैच में आज नेपाल को हराकर चौथी जीत दर्ज करने के इरादे से उतरेगा

Aam Aadmi Party gave important responsibility to Sanjay Singh, made him the President of AAP Parliamentary Party in Rajya Sabha

किंग्सटाउन (सेंट विन्सेंट) तीन जीत के साथ सुपर आठ में पहले ही जगह बना चुका दक्षिण अफ्रीका आईसीसी टी20 विश्व कप के ग्रुप डी मैच में आज यहां नेपाल को हराकर लगातार चौथी जीत दर्ज करने के इरादे से उतरेगा। टूर्नामेंट में आठ विकेट के साथ संयुक्त रूप से दूसरे सबसे सफल गेंदबाज एनरिच नोर्किया बेहतरीन फॉर्म में हैं और नेपाल के बल्लेबाजों के लिए उनका सामना करना आसान नहीं होगा। अब तक कागिसो रबादा, मार्को यानेसन और ओटनील बार्टमैन ने तेज गेंदबाजी विभाग में नोर्किया का अच्छा साथ निभाया है जबकि स्पिनर विभाग में दारोमदार अनुभव केशव महाराज के कंधों पर रहा है। महाराज ने पिछले मैच में बांग्लादेश के खिलाफ 20वां ओवर करते हुए दक्षिण अफ्रीका को जीत दिलाई थी। दक्षिण अफ्रीका को साथ ही उम्मीद होगी कि क्विंटन डिकॉक, रीजा हैंड्रिक्स, कप्तान एडेन मार्कराम और ट्रिस्टन स्टब्स की मौजूदगी वाला उसका शीर्ष क्रम सुपर आठ चरण से पहले लय हासिल करने में सफल रहेगा। टीमें इस प्रकार हैं: नेपाल: रोहित पौडेल (कप्तान), आसिफ शेख, अनिल कुमार साह, कुशाल भुर्तेल, कुशाल मल्ला, दीपेंद्र सिंह ऐरी, ललित राजबंशी, करण केसी, गुलशन झा, सोमपाल कामी, प्रतिस जीसी, संदीप जोरा, अविनाश बोहरा, सागर ढकाल और कमल सिंह ऐरी। दक्षिण अफ्रीका: एडेन मार्कराम (कप्तान), ओटनील बार्टमैन, गेराल्ड कोएट्जी, क्विंटन डिकॉक, ब्योर्न फोर्टुइन, रीजा हैंड्रिक्स, मार्को यानसेन, हेनरिक क्लासेन, केशव महाराज, डेविड मिलर, एनरिच नोर्किया, कागिसो रबादा, रेयान रिकेल्टन, तबरेज शम्सी और ट्रिस्टन स्टब्स। समय: भारतीय समयानुसार सुबह पांच बजे से खेला जाएगा।  

16 जून को बुलाई हाई लेवल मीटिंग, जम्मू-कश्मीर में लगातार आतंकी हमलों के बाद एक्शन में अमित शाह

जम्‍मू केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकी हमलों की सुरक्षा स्थित की समीक्षा की। रियासी में तीर्थयात्रियों की बस पर हमले सहित कई आतंकी हमलों के बारे में चर्चा की। शाह ने 16 जून को बुलाई बैठक शाह ने 16 जून को एक हाई-लेवल की बैठक भी बुलाई। इस मीटिंग में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, सेना और सीआरपीएफ के शीर्ष अधिकारी और अन्य शामिल होंगे। चार स्‍थानों पर हुआ आतंकी हमला जानकारी के मुताबिक गृह मंत्री को जम्मू-कश्मीर की मौजूदा स्थिति और आतंकी घटनाओं के बाद उठाए गए कदमों के बारे में जानकारी दी गई। पिछले चार दिनों में जम्मू-कश्मीर के रियासी, कठुआ और डोडा जिलों में चार स्थानों पर आतंकवादियों ने हमला किया। इन हमलों में नौ तीर्थयात्रियों और एक सीआरपीएफ जवान की मौत हो गई और सात सुरक्षाकर्मी और कई अन्य घायल हो गए। कठुआ जिले में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में दो संदिग्ध पाकिस्तानी आतंकवादी भी मारे गए। साथ ही उनके पास से बड़ी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद किया गया।

ब्रिटेन में हिंदुओं ने भावी ब्रिटिश सरकार से सीधी डिमांड, हिंदू फॉर डेमोक्रेसी ने बनाया

70 patients sick so far, serious victims sent to district hospital

लंदन फिलहाल चुनावी मौसम चल रहा है. भारत के लोकसभा चुनाव 2024 के बाद यूरोपियन पार्लियामेंट का भी चुनाव हुआ. अब ब्रिटेन की पारी है. जुलाई में होने वाले आम चुनावों से पहले वहां हिंदू मेनिफेस्टो जारी हो चुका. 32-पेज का ये दस्तावेज यूके में बसे हिंदुओं की जरूरतों पर बात करता है, इसलिए इसे हिंदू मेनिफेस्टो भी कहा जा रहा है. क्या है हिंदू फॉर डेमोक्रेसी संगठन ये एक नहीं, बल्कि 15 गुटों का समूह है, जिनमें हिंदू काउंसिल यूके, हिंदू फोरम ऑफ ब्रिटेन, हिंदू मंदिर नेटवर्क यूके, बीएपीएस स्वामीनारायण संस्था, चिन्मय मिशन, इस्कॉन यूके और नेशनल काउंसिल ऑफ हिंदू टेम्पल्स आते हैं. इसकी वेबसाइट पर हिंदू मेनिफेस्टो का भी जिक्र है. घोषणापत्र में सात मांगें हैं. इनमें ब्रिटेन में हिंदुओं पर बढ़ती हिंसा और गैर-बराबरी को रोकने के साथ-साथ यूके में मंदिरों की सुरक्षा की भी डिमांड की गई. क्यों करनी पड़ी ये मांगें बीते कुछ समय में हिंदुओं के साथ कथित तौर पर हेट क्राइम की घटनाएं बढ़ीं. कई रिपोर्ट्स भी इसपर ठप्पा लगाती हैं. खुद लीडिंग ब्रिटिश थिंक टैंक हेनरी जैक्सन सोसायटी ने पिछले साल दावा किया था कि ब्रिटेन में बसे मुस्लिम स्टूडेंट्स हिंदू धर्म को लेकर अपमानजनक टिप्पणियां करते और उन्हें कंन्वर्ट होने को कहते हैं. किनपर हुआ सर्वे इसके लिए देश के हजार से ज्यादा स्कूलों का सर्वेक्षण और लगभग इतने ही पेरेंट्स से बात की गई. वहां रहने वाले करीब 50% अभिभावकों ने माना कि मजहब के चलते उनके बच्चों को स्कूल में नफरत झेलनी पड़ी. यहां तक कि कई स्कूलों ने भी अपनी अंदरुनी रिपोर्ट में माना कि उनके कैंपस में बीते 5 सालों में हिंदू-विरोधी सोच बढ़ी है. साल 2023 में ही अमेरिकी रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन नेटवर्क कांटेजियन रिसर्च इंस्टीट्यूट (NCRI) ने दावा किया कि बीते समय में तेजी से एंटी-हिंदू नैरेटिव तैयार हुआ और हिंदुओं पर हमले में थोड़ी-बहुत नहीं, लगभग हजार गुना तेजी आई. खासकर ब्रिटेन और अमेरिका में. कितने हिंदू हैं ब्रिटेन में साल 2021 के सेंसस के अनुसार. यहां 10 लाख से ज्यादा हिंदू आबादी है. साल 2011 में ब्रिटेन की कुल जनसंख्या का डेढ़ फीसदी हिंदुओं का था. अगले 10 सालों में ये बढ़कर 1.7 फीसदी हो गया. वहां ईसाई और मुस्लिम के बाद हिंदू तीसरा सबसे बड़ा धर्म है. क्या है मेनिफेस्टो में – इसमें आने वाली सरकार से 7 मांगें की गई हैं. – हिंदू हेट-क्राइम की घटनाओं को धार्मिक नफरत की तरह पहचानना और ऐसे लोगों को सजा देना. – पूजा स्थलों को सुरक्षा देना और मंदिरों के लिए सरकारी फंडिंग. – हिंदुओं की मान्यताओं-आस्थाओं को आने वाली पीढ़ी तक ले जाने के लिए फेथ स्कूल्स तैयार करवाना. – सरकार और सार्वजनिक स्थलों पर हिंदुओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाना. – पुजारियों से जुड़े वीजा के मामलों को सुलझाना. – सामाजिक सेवाओं में हिंदुओं को शामिल करना. – धार्मिक मान्यताओं को पहचानना और उन्हें प्रोटेक्ट करना. इसमें कई और मांगें भी हैं. जैसे नए सांसद ब्रिटिश हिंदुओं से जुड़े मुद्दों पर कानून लाने से पहले हिंदू संगठनों से बातचीत करें. हिंदू दाह संस्कार की प्रोसेस में प्रशासनिक अड़चनों को दूर करने की मांग है ताकि मौत के तीन दिन के भीतर दाह संस्कार का काम हो सके. होने लगा मेनिफेस्टो का विरोध बढ़ते हेट-क्राइम की घटनाओं के बीच ब्रिटेन में रहते हिंदू इसलिए भी नाराज हैं क्योंकि सरकार में उनके मुद्दों का रिप्रेजेंटेशन उतनी अच्छी तरह से नहीं हो रहा. यही वजह है कि पहली बार कोई हिंदू मेनिफेस्टो लाया गया. हालांकि आते ही इसपर विवाद भी शुरू हो गया. घोषणापत्र रिलीज होने के साथ ही वहां के कैंपेनिंग संस्थान नेशनल सेकुलर सोसायटी ने दस्तावेजों की आलोचना करते हुए कहा कि आने वाली सरकार को इन्हें सिरे से रिजेक्ट कर देना चाहिए. सोसायटी ने यहां तक कह दिया कि अगर मेनिफेस्टो अमल में आ जाए तो फ्री स्पीच को नुकसान होगा क्योंकि हिंदुओं के खिलाफ कुछ कहा नहीं जा सकेगा.  

महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में अकेले लड़ सकती है बीजेपी

मुंबई 2024 लोकसभा चुनावों के बाद से महाराष्ट्र में उथल-पुथल की अटकलें लग रही है। अब सामने आया है कि लोकसभा चुनावों में करारी शिकस्त का सामना करने के बाद बीजेपी विधानसभा चुनावों में अकेले चुनाव लड़ सकती है। सूत्रों के अनुसार पार्टी ने राज्य में आगामी विधानसभा चुनाव अकेले लड़ने की संभावनाओं का आकलन करने के लिए एक आंतरिक सर्वेक्षण कर रही है। यह सर्वेक्षण लोकसभा चुनावों में अपने गठबंधन सहयोगियों के साथ मिलकर निराशाजनक प्रदर्शन के बाद हो रहा है। उत्तर प्रदेश के बाद महाराष्ट्र में लोकसभा की सीटों की संख्या सबसे ज्यादा है। उत्तर प्रदेश में 80 और महाराष्ट्र में 48 सीटें हैं। इनमें बीजेपी को सिर्फ 9 पर जीत मिली है। बीजेपी के आंतरिक सर्वे करवाने की चर्चा ऐसे वक्त पर सामने आई है जब आरएसएस से जुड़े रहे एक नेता ने अजित पवार से गठजोड़ करने पर सवाल खड़े किए हैं। क्या है बीजेपी की तैयारी? लोकसभा चुनावों में बीजेपी ने 28 सीटों पर कैंडिडेट उतारे थे। इनमें उसे सिर्फ 9 पर जीत मिली है। राज्य में इस साल अक्टूबर में विधानसभा प्रस्तावित है। ऐसे में पार्टी आगे की रणनीति बनाने में जुटी है। सूत्रों के अनुसार बीजेपी ने 2019 के विधानसभा चुनावों में राज्य की 106 विधानसभा सीटों पर जीत हासिल की थी। पार्टी ने आगे की रणनीति को तय करने के लिए इन्हीं 106 विधानसभा क्षेत्रों में एक आंतरिक सर्वेक्षण शुरू किया है। सूत्रों की मानें पार्टी ने अभी तक अजित पवार को छोड़ने पर फैसला नहीं किया है, लेकिन पार्टी मौजूदा मूड और सीटों को अकेले ही बरकरार रखने की चुनौतियों का आकलन कर रही है। अगर पार्टी विधानसभा चुनावों में अकेले जाने का फैसला करती है, तो जमीनी हकीकत का अध्ययन करने के लिए जल्द ही शेष 182 विधानसभा क्षेत्रों में भी इसी तरह के सर्वेक्षण शुरू किए जाएंगे। महाराष्ट्र में विधानसभा की कुल 288 सीटें है। सरकार बनाने के लिए 145 सीटें चाहिए। सर्वेक्षण में क्या-क्या है? बीजेपी के एक सूत्र ने कहा कि ये सर्वेक्षण यह पता लगाने के लिए शुरू किए गए हैं कि पार्टी अकेले कैसे बहुमत हासिल करेगी। इसके अलावा सर्वेक्षण में यह भी सामने आए कि एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के साथ गठबंधन में भाजपा कैसा प्रदर्शन करेगी? सर्वेक्षण यह भी पता लगाएगा कि क्या एनसीपी के साथ गठबंधन जारी रहना चाहिए या फिर नहीं। 2019 के लोकसभा चुनावों में भाजपा की सीटें 23 के मुकाबले घटकर 9 पर आ गईं, जबकि शिवसेना ने 7 और एनसीपी ने एक सीट जीती, जिससे महायुति की कुल ताकत 17 हो गई, जबकि महा विकास आघडी को 31 सीटें मिली हैं। सूत्रों कहा कहना है कि यह सर्वेक्षण आरएसएस पत्रिका द ऑर्गनाइजर द्वारा यह सुझाव दिए जाने से बहुत पहले शुरू किए गए थे कि अजीत पवार को एनडीए में शामिल करने के बीजेपी के कदम ने पार्टी के प्रदर्शन को प्रभावित किया है। द ऑर्गनाइजर में प्रकाशित एक लेख में आरएसएस के वरिष्ठ नेता रतन शारदा ने लिखा था कि महाराष्ट्र बीजेपी और एकनाथ शिंदे के पास राज्य में आराम से बहुमत था। उन्होंने लिखा था कि पार्टी ने अजित पवार को साथ लेकर अपनी ब्रैंड वैल्यू खो दी। लेख पर क्या बाेले नेता? महाराष्ट्र भाजपा प्रवक्ता केशव उपाध्याय का कहना है कि द ऑर्गेनाइजर स्वतंत्र विचारों की पत्रिका है। बीजेपी हर अखबार के संपादकीय का सम्मान करती है। बीजेपी हर जीत और हार के बाद मंथन करती है और उसके आधार पर पार्टी आगे की रणनीति तय करती है। उन्होंने विधानसभा चुनाव में बीजेपी के एनसीपी से अलग होने की संभावना पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। अजित पवार की अगुवाई वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि यह लेख भाजपा का आधिकारिक रुख नहीं है। इसके किसी भी पदाधिकारी ने कोई बयान नहीं दिया है। यह एक व्यक्तिगत विचार है। हर एक बात पर हमें स्पष्टीकरण या प्रतिक्रिया की जरूरत नहीं है। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पिछले सप्ताह पार्टी की हार की जिम्मेदारी लेते हुए सरकार से इस्तीफा देने की घोषणा की थी। तब उन्होंने कहा था कि महायुति को 43.6 प्रतिशत वोट मिले हैं, जबकि महा विकास अघाड़ी को 43.9 प्रतिशत वोट मिले हैं। बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व के हस्तक्षेप के बाद उपमुख्यमंत्री बने रहने का फैसला किया था।

महारानी मृणालिनी देवी की 2000 बीघा जमीन अब हो जाएगी सरकार

इंदौर धार राजघराने की महारानी मृणालिनी देवी की जमीन अब सरकारी हो जाएगी। महारानी मृणालिनी देवी का कोई संतान नहीं था। उनका निधन आठ साल पहले हो गया है। वह वडोदरा राजघराने की बेटी थी। इंदौर संभाग के अलग-अलग हिस्सों में उनके 2000 बीघा जमीन हैं लेकिन कोई वारिस नहीं होने की वजह से उनकी जमीन सरकारी हो जाएगी। इस दिशा में आगे की कार्रवाई करने के लिए इंदौर संभाग के कमिश्नर ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। महारानी के निधन के आठ साल बाद चार हेक्टेयर भूमि पर दावेदारी पेश की थी। उनकी चार याचिकाएं खारिज हो गई हैं। कौन थीं महारानी मृणालिनी देवी दरअसल, धार के महाराज आनंदराव पवार की वह पत्नी थी। महाराज से मृणालिनी देवी की शादी 1949 में हुई थी। मृणालिनी देवी वडोदरा की राजकुमारी थी। शादी के बाद धार आईं। उनका जन्म 25 जून 1931 को हुआ था। शादी के एक साल बाद ही महारानी मृणालिनी देवी वड़ोदरा चली गईं। 1980 में महाराज आनंदराव पवार का निधन हो गया। इसके बाद महारानी नियमित रूप से धार आने लगी थीं। 1988 में मृणालिनी देवी महाराज सयाजीराव विश्विविद्यालय की कुलाधिपति बन गईं। उस समय किसी यूनिवर्सिटी की कुलाधिपति बनने वाली वह पहली महिला थीं। 2015 में हो गया निधन वहीं, 02 जनवरी 2015 को महारानी मृणालिनी देवी का निधन हो गया। उनके निधन के आठ साल हो गए हैं। संतान नहीं होने की वजह से कोई वारिस नहीं है। ऐसे में अरबों रुपए की संपत्ति का उत्तराधिकारी कौन होगा, इसे लेकर साफ नहीं है। न ही इतने दिनों तक उनकी जमीन पर कोई हक जताने आया। आठ साल बाद आए चार लोग दरअसल, इंदौर संभाग के कई जिलों में महारानी की जमीन है। 2022-23 में चार राज्यों के चार परिवारों ने धार जिले की चार हेक्टेयर जमीन पर दावेदारी पेश की है। साथ ही नामांतरण के लिए आवेदन दिया। इसे तहसीलदार ने खारिज कर दिया। ऐसे कर इन लोगों ने कुल चार जगहों पर याचिका लगाई। इंदौर कमिश्नर के यहां से भी इनकी याचिका खारिज हो गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार संभाग में महारानी के नाम पर कुल 2000 बीघा जमीन है लेकिन एक छोटे टुकड़े पर दावेदारी सामने आई है। संभागायुक्त ने दिए निर्देश वहीं, नामांतरण की याचिका खारिज होने के बाद संभागायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। संभागायुक्त दीपक सिंह ने इंदौर और धार कलेक्टर को तुरंत इन जमीनों पर कब्जा लेने के निर्देश दिए हैं। साथ ही एक-एक साल के लिए तीन साल तक पट्टा दें। इतना करने के बावजूद अगर वारिस नहीं मिलते हैं तो इसे लवारिस घोषित कर शासन के पक्ष में करने की कार्रवाई करें। आठ साल बाद इन लोगों ने की थी अपील गौरतलब है कि महारानी मृणालिनी देवी के निधन के आठ साल बाद अलोकिका राजे, कार्तिक घोरपड़े, शिवप्रियाराजे भोगले और गायत्रीदेवी चौगुले हैं। इनलोगों का कहना था कि महारानी ने एक वारिसनामा बनाया था, जिसमें सात लोग थे। उनमें तीन का निधन हो गया है और हम चार बचे हैं। वहीं, इनके अपील में कई खामियां और सही दस्तावेज नहीं होने की वजह संभागायुक्त ने इसे खारिज कर दिया।

संघ ने लोकसभा चुनाव में कोई हस्तक्षेप नहीं किया, जो दिख रहा है बात उससे कहीं कुछ ज्यादा है?

Proceedings against 11 forest officers including Devanshu in scam worth Rs 7.5 crores aborted

नागपुर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के पहिए दशकों से एक लय में एक गति से चल रहे हैं. जब नए इलाकों में पैर जमाने की बात आई तो संघ हमेशा आगे रहा. यहां RSS ने पहले जमीन तैयार की, फिर बीजेपी वहां पहुंची और राजनीतिक रूप से स्वयं को समृद्ध किया. अगर दोनों संगठनों के बीच ऐसा सहज समन्वय और सामंजस्य है तो संघ परिवार की ओर से फिर असहमति के स्वर क्यों? ये असंतोष के बुदबुदाहट क्यों? और बुदबुदाहट ही क्यों इंद्रेश कुमार ने तो अब खुली घोषणा कर दी है- अहंकारियों को प्रभु राम ने रोक दिया है.   दरअसल नागपुर में एक कार्यक्रम के दौरान आरएसएस सरसंघचालक मोहन भागवत ने राजनीतिक दलों और उनके नेताओं के खिलाफ जब टिप्पणी की तो इस फुसफुसाहट के स्वर तेज हो गए और ये राष्ट्रीय बहस का विषय बन गई. टिप्पणियों का ये सिलसिला यहीं नहीं रुका. मोहन भागवत के बाद संघ के मुखपत्र पांचजन्य में लोकसभा चुनाव में बीजेपी के परफॉर्मेंस पर एक आलोचनात्मक लेख छपी शीर्षक था- लोकसभा चुनाव-2024/NDA: सबक हैं और सफलताएं भी. ‘आर्गनाइजर’ में भी टिप्पणी की गई. इन लेखों पर चर्चा हो ही रही थी कि संघ नेता इंद्रेश कुमार ने सार्वजनिक मंच से कहा कि ‘राम सबके साथ न्याय करते हैं. 2024 के लोकसभा चुनाव को ही देख लीजिए. जिन्होंने राम की भक्ति की, लेकिन उनमें धीरे-धीरे अंहकार आ गया. उस पार्टी को सबसे बड़ी पार्टी बना दिया. लेकिन जो उसको पूर्ण हक मिलना चाहिए, जो शक्ति मिलनी चाहिए थी, वो भगवान ने अहंकार के कारण रोक दी.’ भागवत, इंद्रेश कुमार की टिप्पणियां ऐसे समय में आई है जब इस बात पर गहन चर्चा चल रही है कि क्या आरएसएस ने वास्तव में बीजेपी से दूरी बना ली है और 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान पूरे दिल से उसका समर्थन नहीं किया है. मोहन भागवत ने आम चुनाव के बाद, जहां बीजेपी बहुमत से 30 सीटें पीछे रह गई थी, अपनी पहली टिप्पणी में प्राथमिकता के आधार पर मणिपुर के संघर्ष को समाप्त करने तथा सरकार और विपक्ष के बीच आम सहमति की आवश्यकता की बात कही थी. मोहन भागवत ने कहा था, “एक सच्चा सेवक मर्यादा बनाए रखता है, वह काम करते समय मर्यादा का पालन करता है. उसमें यह अहंकार नहीं होता कि वह कहे कि ‘मैंने यह काम किया’. केवल वही व्यक्ति सच्चा सेवक कहलाता है.” कुछ लोगों ने उनकी टिप्पणी को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की आलोचना के रूप में देखा, क्योंकि प्रधानमंत्री ने कई अवसरों पर स्वयं को जनता का “प्रधान सेवक” बताया था. मोहन भागवत की हालिया टिप्पणियां, पहले की कई बार की तरह ही अस्पष्ट हैं. भागवत के बाद बोले इंद्रेश कुमार भागवत के बयान का लक्ष्य कौन है? इसका संदेश क्या है इस पर एक्सपर्ट कमेंट आ ही रहे थे कि संघ के बड़े फंक्शनरी इंद्रेश कुमार ने अपने बयान सारा धुंध साफ कर दिया. उन्होंने राजस्थान में एक बयान में स्पष्ट कहा कि अहंकारियों को प्रभु राम ने 241 पर रोक दिया है. अब ये स्पष्ट है कि संघ पब्लिक प्लेटफॉर्म पर स्पष्ट मैसेज देना चाहता है. इंद्रेश ने बिना लाग-लपेट के कहा, “जिस पार्टी ने (भगवान राम की) भक्ति की, लेकिन अहंकारी हो गई, उसे 241 पर रोक दिया गया, लेकिन उसे सबसे बड़ी पार्टी बना दिया गया…” उन्होंने आगे कहा, “लोकतंत्र में रामराज्य का विधान देखिए, जिन्होंने राम की भक्ति की लेकिन धीरे-धीरे अहंकारी हो गए, वो पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, लेकिन जो वोट और ताकत मिलनी चाहिए थी, वो भगवान ने उनके अहंकार के कारण रोक दी.” इंद्रेश कुमार के इस बयान का वजन इतना है कि बीजेपी की ओर से कोई भी बड़े नेता ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है. कांग्रेस, शिवसेना जैसे विपक्षी दल और बीजेपी की सहयोगी जेडीयू ने इस पर जरूर अपनी प्रतिक्रिया दी है. लेकिन संघ द्वारा अहंकारी बतलाये जाने के बाद बीजेपी ने अपनी रक्षा में कुछ खास तर्क नहीं दिए हैं. कैसे रहे हैं संघ और बीजेपी के रिश्ते? आरएसएस और बीजेपी के बीच संबंध और संघ किस हद तक इस राजनीतिक पार्टी पर प्रभाव डालता है, यह हमेशा से चर्चा का विषय रहा है. इतना ही नहीं, आरएसएस पर शोधकर लिखी गई किताब के लेखक ने इस मुद्दे को “पुरानी बात” कहकर खारिज कर दिया. लेकिन संघ-बीजेपी के इकोसिस्टम पर नजर रखने वाले लोग कहते हैं कि इस बार बात कुछ अलग है. वे भागवत की टिप्पणियों के समय की ओर इशारा करते हैं, जो एक ऐसे चुनाव के बाद आई है जिसमें भाजपा बहुमत के आंकड़े से पीछे रह गई और प्रधानमंत्री मोदी की बड़े और साहसिक निर्णय लेने की क्षमता को झटका लगा. उनका कहना है कि हाल के वर्षों में नागपुर और अहमदाबाद के बीच पर्सनैलिटी की खींचतान चल रही है, क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी की बढ़ती लोकप्रियता और उनके चुनावी वादों को पूरा करने के कारण सत्ता का केंद्र अहमदाबाद की ओर खिसक गया है. लेखक और वरिष्ठ पत्रकार दीप हलदर ने इंडियाटुडे.इन से बातचीत में कहते हैं, “आरएसएस यह बात खुलकर नहीं कहने जा रहा है, लेकिन हाल के वर्षों में भाजपा की प्रभावशाली भूमिका को लेकर संघ परिवार सहज नहीं है.” हालदार कहते हैं, “यह सिर्फ़ बीजेपी की सीटों की संख्या का मामला नहीं था, बल्कि राम मंदिर और अनुच्छेद 370 जैसे वादे भी थे, जिन्हें पीएम मोदी के कार्यकाल में पूरा किया गया था. खासकर 2019 में कार्यकाल की शुरुआत से ही बीजेपी नेतृत्व संघ से सलाह नहीं ले रहा था.” गौरतलब है कि नरेंद्र मोदी आरएसएस प्रचारक रहे हैं और संघ की नजरों में वे आदर्श प्रधानमंत्री माने जाते हैं. सच्चाई तो ये है कि आरएसएस ने 2014 के आम चुनाव में उनके लिए अपने सभी सहयोगी संगठनों की ताकत लगा दी थी. हालांकि, आरएसएस-भाजपा तंत्र के करीबी एक वरिष्ठ पत्रकार ने नाम न बताने की शर्त पर इंडियाटुडे.इन को बताया कि उनका व्यापक आभामंडल और उनका सत्ता का केंद्र बन जाना नागपुर में संघ के कुछ वरिष्ठ पदाधिकारियों को पसंद नहीं आया. बता दें कि आरएसएस राजनीति में सक्रिय भूमिका अदा नहीं करता है. इसका रोल राह दिखाने का है. अपने व्यापक नेटवर्क के जरिए यह भाजपा … Read more

वर्ल्ड इकॉनोमिक फोरम रिपोर्ट: भारत में एक ही काम के लिए पुरुषों को 100 तो महिलाओं को 40 रुपये मिलता

नई दिल्ली भारत समेत भारतीय उपमहाद्वीप के कई देशों में बार-बार महिलाओं को समान अधिकार और समान वेतन की बात होती है। लेकिन अभी तक यह सपना ही है। अभी देखिए ना, वर्ल्ड इकॉनोमिक फोरम (World Economic Forum) ने बीते दिनों ग्लोबल जेंडर गैप इंडेक्स (Global Gender Gap Index) के आंकड़े जारी किए। इस रिपोर्ट ने भारत के लिए एक चिंताजनक प्रवृत्ति को उजागर किया है। इस इंडेक्स में भारत दो पायदान फिसल गया है। इंडेक्स के 146 देशों की सूची में भारत को 129वां स्थान मिला है। पिछले साल भारत इस सूची में 127वें स्थान पर था। इस साल भी आइसलैंड को सूची में पहला स्थान मिला है। वह दशकों से इस स्थान पर काबिज है। बंगलादेश, नेपाल और श्रीलंका भी हमसे आगे महिलाओं को वेतन देने में भारत तो बांग्लादेश (99), नेपाल (111), श्रीलंका (125) और भूटान (124) से भी पीछे छूट गया है। हां, पाकिस्तान जरूर हमसे पीछे है। पाकस्तान का इस सूची में 145वां स्थान है जो कि सूची के सबसे अंतिम पायदान पर स्थान पाए सूडान से सिर्फ एक पायदान ऊपर है। इससे एक स्पष्ट आंकड़ा सामने आया है जो दर्शाता है कि भारतीय महिलाएं पुरुषों द्वारा अर्जित प्रत्येक 100 रुपये पर केवल 40 रुपये कमाती हैं। निम्नतम स्तर वाली अर्थव्यवस्था रिपोर्ट के अनुसार, भारत आर्थिक समानता के निम्नतम स्तर वाली अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। इसमें अनुमानित अर्जित आय में 30% से कम लैंगिक समानता दर्ज की गई है। इन देशों की सूची में बांग्लादेश, सूडान, ईरान, पाकिस्तान और मोरक्को भी शामिल हैं। इन देशों में श्रम बल भागीदारी दर में लैंगिक समानता का स्तर 50% से भी कम है। इस मामले में हुआ है सुधार WEF की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने साल 2024 में अपने लिंग अंतर gender gap को 64.1% तक कम कर लिया है। लेकिन, पिछले वर्ष के 127वें स्थान से गिरावट का कारण ‘शैक्षिक प्राप्ति’ और ‘राजनीतिक सशक्तीकरण’ मापदंडों में मामूली कमी आई है। डब्ल्यूईएफ ने कहा कि भारत का आर्थिक समता स्कोर पिछले चार वर्षों से ऊपर की ओर बढ़ रहा है। भारत माध्यमिक शिक्षा नामांकन के मामले में भी तरक्की हुई है। तभी तो यह लैंगिक समानता में पहले स्थान पर काबिज है। यह तृतीयक नामांकन (Tertiary enrolment) में 105वें, साक्षरता दर में 124वें और प्राथमिक शिक्षा नामांकन में 89वें स्थान पर है। तभी तो इससे शैक्षिक उपलब्धि उपसूचकांक (Educational attainment subindex) में 26वें से 112वें स्थान पर भारी गिरावट आई है। राजनीति में बढ़ी हैं महिला शक्ति भारत में इस समय हेड ऑफ दि स्टेट यानी राष्ट्रपति के पद पर एक महिला हैं। इसलिए, राजनीतिक सशक्तिकरण उपसूचकांक (Political empowerment subindex) में, भारत ने राज्य प्रमुख संकेतक (Head-of-state indicator) पर अच्छा प्रदर्शन किया। हालांकि, संघीय स्तर पर महिलाओं के प्रतिनिधित्व में भारत अपेक्षाकृत कम स्कोर किया है। भारत को मंत्री पदों पर केवल 6.9% और सांसद में 17.2% का स्कोर मिला है। यह महिलाओं के राजनीतिक सशक्तीकरण के मामले में 65वें स्थान पर है और पिछले 50 वर्षों में महिला/पुरुष राष्ट्राध्यक्षों की संख्या के मामले में यह 10वें स्थान पर है। आर्थिक समता में कोई बदलाव नहीं आर्थिक समता और अवसर उपसूचकांक (Economic parity and opportunity subindex) में यहां कोई बदलाव नहीं हुआ है। भारत साल 2023 के दौरान इस उपसूचकांक में 142 वें स्थान पर था। इस साला भी भारत का स्थान यही है। यह वैश्विक स्तर पर सबसे निचले में से एक है, जो कि शर्मनाम स्थिति को दिखाती है। भारत श्रम-बल भागीदारी दर पर 134वें और समान काम के लिए वेतन समानता पर 120वें स्थान पर है, जो पुरुषों और महिलाओं के बीच कमाई में पर्याप्त असमानताओं को दर्शाता है।

इस देश अबॉर्शन बिल पास हो गया तो बलात्कार के मामले में भी गर्भपात को हत्या के बराबर ही माना जाएगा

रियो डी जेनेरियो  ब्राजील में हजारों लोगों ने  कांग्रेस में बहस के लिए पेश किए गए गर्भपात से जुड़े विधेयक के खिलाफ जोरदार रैली की. यदि यह बिल पास हो गया तो बलात्कार के मामले में भी गर्भपात यानी अबॉर्शन को हत्या के बराबर ही माना जाएगा. तमाम लोग इसका विरोध कर रहे हैं. रियो डी जनेरियो में प्रदर्शनकारियों ने मोमबत्तियां जलाईं और नारे लगाए- एक लड़की मां नहीं होती (A girl is not a mother) हजारों ब्राजीलियाई लोगों ने इस विधेयक के खिलाफ रैली की क्योंकि यदि यह पास हो गया तो 22 सप्ताह के बाद गर्भावस्था को समाप्त करने यानी अबॉर्शन के लिए 20 साल तक की सजा हो सकती है. यह बात रेप के मामलों में भी लागू होती है. यानी रेप के कारण गर्भवती महिला पर भी लागू होती है. वैसे फिलहाल ब्राजीलियाई कानून बलात्कार के मामलों में गर्भपात को दंडित नहीं करता है या पीड़ित कब गर्भपात करवा सकती है, इस पर कोई सीमा फिलहाल नहीं है. जब महिला की जान खतरे में हो या भ्रूण के मस्तिष्क में कोई असामान्यता हो तो गर्भपात भी कानूनी है. इन अपवादों के अलावा गर्भपात कराने पर चार साल तक की जेल की सजा हो सकती है. दरअसल इसका विरोध इसलिए भी हो रहा है क्योंकि कई बार युवा रेप विक्टिमों को शुरू में यह पता ही नहीं चलता है कि वे गर्भवती हो गई हैं. कई बार वे इस बारे में बात करने की हिम्मत जुटाने में भी नाकाम रहते हैं और इस कारण देरी होती चली जाती है. कांग्रेस के वे सांसद जो शक्तिशाली रूढ़िवादी हैं, ने इस पर चर्चा करनी भी वाजिब नहीं समझी और इसे बुधवार को बिल को सीधे चैंबर ऑफ डेप्युटीज में भेज दिया. इसके बाद प्रगतिशील समूहों ने नाराजगी जताई. चैंबर ऑफ डेप्युटीज में मतदान के लिए अभी तक कोई तारीख फिक्स नहीं की है. बच्ची को रेप के कारण मां बनने पर विवश क्यों करना… सामाजिक कार्यकर्ता विवियन निगरी ने सांसदों पर ‘भ्रूण के अधिकार’ की कीमत पर ‘बच्चे के अधिकारों’ की रक्षा करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा- किसी बच्ची को बलात्कार के चलते गर्भधारण करने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए. विधेयक पास हुआ तो क्या है कानून में… एक खास प्रभावशाली ग्रुप इस बिल को पुश कर रहा है. वह गर्भावस्था के 22 सप्ताह के बाद किए जाने वाले किसी भी गर्भपात को होमीसाइड यानी मानव वध के रूप में परिभाषित करता है. यदि 22वें सप्ताह के बाद गर्भपात करवाया जाता है तो नए कानून में छह से 20 साल की सजा का प्रावधान है, जो बलात्कारी की सजा से दोगुनी है.

इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी से पीएम मोदी ने की मुलाकात, दोनों नेताओं ने एक-दूसरे को किया ‘नमस्ते’

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अपुलिया इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी (Giorgia Meloni) ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वागत किया। इस दौरान दोनों नेताओं ने एक दूसरे को ‘नमस्ते’ भी किया। मालूम हो कि जॉर्जिया मेलोनी के निमंत्रण पर पीएम मोदी इटली गए हैं। भारत को आउटरीच देश के रूप में जी7 शिखर सम्मेलन में आमंत्रित किया गया है। तीसरी बार लगातार प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेने के बाद पीएम मोदी की यह पहली विदेश यात्रा है। वैश्विक नेताओं से मिल रहे पीएम मोदी मालूम हो कि इटली के अपुलिया में 50वें जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी लगातार वैश्विक नेताओं से मुलाकात कर रहे हैं। इससे पहले फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से मुलाकात की थी। दोनों नेताओं ने इस दौरान रक्षा, परमाणु, अंतरिक्ष, शिक्षा सहित कई प्रमुख वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया। ऋषि सुनक से भी हुई बातचीत इसके अलावा पीएम मोदी ने ब्रिटिश प्रधानमंत्री ऋषि सुनक से भी मुलाकात की। उन्होंने एनडीए सरकार के तीसरे कार्यकाल में भारत-ब्रिटेन व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। पीएम मोदी ने कहा कि दोनों देश सेमीकंडक्टर, प्रौद्योगिकी और व्यापार जैसे क्षेत्रों में संबंधों को और मजबूत कर सकते हैं। वहीं, पीएम मोदी ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की (Volodymyr Zelenskyy) से भी मुलाकात की। प्रधानमंत्री ने यूक्रेनी राष्ट्रपति के साथ हुई बैठक को सकारात्मक बताया और कहा कि भारत यूक्रेन के साथ द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने के लिए उत्सुक है। वहीं, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि दोनों शीर्ष नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की और यूक्रेन की स्थिति पर विचारों का आदान-प्रदान किया।

सुनक से पीएम मोदी की हुई मुलाकात, दोनों नेताओं ने भारत-ब्रिटेन के बीच रणनीतिक साझेदारी होगी और मजबूत

इटली इटली के अपुलिया में जी-7 शिखर सम्मेलन से अलग पीएम नरेंद्र मोदी और ऋषि सुनक ने द्विपक्षीय बैठक की। दोनों नेताओं ने भारत-ब्रिटेन के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई। साथ ही सेमीकंडक्टर, प्रौद्योगिकी और व्यापार जैसे क्षेत्रों में भारत और ब्रिटेन के संबंधों को और बढ़ाने और रक्षा क्षेत्र में भी साझेदारी को मजबूत करने पर दोनों नेताओं के बीच चर्चा हुई। पीएम मोदी ने बैठक के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया, इटली में ब्रिटेन के पीएम ऋषि सुनक से मिलकर खुशी हुई। मैंने एनडीए सरकार के तीसरे कार्यकाल में भारत-ब्रिटेन व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। व्यापार एवं आर्थिक सहयोग, उच्च प्रौद्योगिकी क्षेत्रों तथा लोगों के बीच संपर्क गहरा करने की काफी गुंजाइश है। इसके साथ ही दोनों देशों के रक्षा संबंधों को भी मजबूत करने के बारे में बात की। पीएमओ ने कहा कि दोनों नेताओं ने रक्षा क्षेत्र में औद्योगिक सहयोग बढ़ाने, व्यापार और वाणिज्य को बढ़ावा देने और कई अन्य मुद्दों पर भी बात की। दोनों नेताओं ने 2030 के रोडमैप के कार्यान्वयन और जारी एफटीए वार्ता में हुई प्रगति पर भी चर्चा की और नियमित उच्च स्तरीय राजनीतिक परामर्श, रक्षा और सुरक्षा, व्यापार और आर्थिक सहयोग, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी क्षेत्रों सहित व्यापक रणनीतिक साझेदारी के सभी क्षेत्रों में प्रगति पर खुशी व्यक्त की। दोनों देशों के बीच मुक्त व्यापार समझौते की बातचीत में हुई प्रगति पर भी दोनों राष्ट्राध्यक्षों ने संतोष व्यक्त किया। दोनों नेताओं ने आपसी हित के क्षेत्रीय और बहुपक्षीय मामलों पर भी चर्चा की। प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रिटेन के लोगों को भी शुभकामनाएं दी क्योंकि वे अगले महीने आम चुनाव की तैयारी कर रहे हैं। एक संक्षिप्त बयान में, यूके पीएम ऑफिस की तरफ से कहा गया कि सुनक ने दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक चुनाव में तीसरा कार्यकाल हासिल करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी को बधाई दी। सुनक के कार्यालय ने कहा कि प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें खुशी है कि भारत इस सप्ताह के अंत में यूक्रेन शांति शिखर सम्मेलन में उच्च स्तरीय प्रतिनिधियों को भेजेगा। यूके के पीएम ने पिछले हफ्ते पीएम मोदी को फोन किया था, उन्हें उनकी चुनावी जीत पर बधाई दी थी और तीसरे कार्यकाल के लिए उनकी सफलता की कामना की थी। सुनक ने फोन कॉल के बाद एक्स पर लिखा था, ब्रिटेन और भारत के बीच सबसे गहरी दोस्ती है और यह दोस्ती आगे भी बढ़ती रहेगी। अपनी बातचीत के दौरान, दोनों नेताओं ने भारत-ब्रिटेन संबंधों की ताकत पर भी विचार किया और इस बात पर सहमति व्यक्त की कि यह भविष्य में भी बढ़ता रहेगा। पिछले महीने, सुनक ने ‘आर्थिक महाशक्ति’ के रूप में भारत के उभरने की सराहना करते हुए कहा था कि भारत, इंडोनेशिया और नाइजीरिया जैसी नई और तेजी से बढ़ती आर्थिक महाशक्तियां वैश्विक अर्थव्यवस्था को महत्वपूर्ण रूप से नया आकार दे रही हैं। सुनक और पीएम मोदी की पिछली मुलाकात गत वर्ष सितंबर में नई दिल्ली में जी-20 शिखर सम्मेलन में हुई थी।

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