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अमेरिका के इस कदम से चीन का आगबबूला होना तय! पारित किया नया कानून

वॉशिंगटन अमेरिकी संसद ने तिब्बत पर चीन के नियंत्रण के बारे में बीजिंग के कथन का मुकाबला करने के लिए एक द्विदलीय विधेयक को राष्ट्रपति जो बाइडन की मंजूरी के लिए भेजा है। इस विधेयक के पारित हो जाने पर अमेरिका चीनी सरकार और दलाई लामा के बीच संवाद को आधिकारिक रूप से बढ़ावा भी देगा। प्रतिनिधि सभा ने बुधवार को तिब्बत-चीन विवाद अधिनियम के समाधान को बढ़ावा देने के लिए 391-26 से मतदान किया, जिसे पिछले महीने सीनेट ने पारित किया था। इस विधेयक को ओरेगन के डेमोक्रेट सांसद जेफ मर्कले ने सीनेट में पेश किया था, जिसमें कहा गया था कि यह विधेयक तिब्बत के इतिहास, लोगों और संस्थानों के बारे में बीजिंग द्वारा फैलाई जा रही “गलत सूचना” का मुकाबला करने के लिए धन मुहैया कराएगा। माना जा रहा है कि इस कानून पर चीन सख्त प्रतिक्रिया देगा। चीन के दावे का खंडन करता है यह विधेयक यह विधेयक चीनी सरकार के इस दावे का खंडन करता है कि तिब्बत प्राचीन काल से चीन का हिस्सा रहा है, और यह अमेरिकी नीति बनाएगा कि तिब्बत की स्थिति पर विवाद अनसुलझा है। यह अमेरिकी नीति भी बनाएगा कि “तिब्बत” का तात्पर्य केवल चीनी सरकार द्वारा परिभाषित तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र से ही नहीं है, बल्कि गांसु, किंघई, सिचुआन और युन्नान प्रांतों के तिब्बती क्षेत्रों से भी है। दलाई लामा और चीन के बीच बातचीत कराने पर जोर मंगलवार को सदन में टेक्सास के रिपब्लिकन प्रतिनिधि माइकल मैककॉल ने कहा, “इस विधेयक को पारित करना अमेरिका के इस संकल्प को दर्शाता है कि तिब्बत में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की यथास्थिति स्वीकार्य नहीं है और मैं दलाई लामा और तिब्बत के लोगों के लिए इससे बड़ा कोई संदेश या उपहार नहीं सोच सकता।” तिब्बत पर वाशिंगटन की स्थिति के बारे में भाषा को सख्त करते हुए, विधेयक के समर्थकों को उम्मीद है कि वे निर्वासित तिब्बती आध्यात्मिक नेता दलाई लामा के साथ बातचीत फिर से शुरू करने के लिए बीजिंग पर दबाव डालेंगे। दोनों पक्षों ने 2010 से औपचारिक बातचीत नहीं की है। चीन का दावा- 700 साल से तिब्बत पर है अधिकार सदन ने फरवरी में सीनेट विधेयक का एक संस्करण पहले ही पारित कर दिया था। उस सदन विधेयक के प्रायोजक, मैसाचुसेट्स के डेमोक्रेट जिम मैकगवर्न ने कहा है कि बीजिंग और दलाई लामा के बीच “बिना किसी पूर्व शर्त” के वार्ता के लिए अमेरिका द्वारा की गई पिछली अपीलें विफल हो गई हैं। बीजिंग का तर्क है कि तिब्बत 700 से अधिक वर्षों से केंद्रीय चीनी शासन के अधीन रहा है, जबकि लंबे समय तक तिब्बती प्रचारकों का तर्क है कि यह क्षेत्र प्रभावी रूप से स्व-शासित था। दलाई लामा ने कहा है कि वह तिब्बत के लिए राजनीतिक स्वतंत्रता नहीं चाहते हैं, लेकिन उन्होंने तिब्बत पर बीजिंग के ऐतिहासिक दावे को मान्यता नहीं दी है। तिब्बत को लेकर बदल रही अमेरिका की स्थिति अप्रैल में, चीन के विदेश मंत्रालय ने फिर से जोर दिया कि आध्यात्मिक नेता के साथ कोई भी संपर्क या बातचीत उनके “व्यक्तिगत भविष्य” या, अधिक से अधिक, उनके करीबी सहयोगियों के बारे में होगी, न कि तिब्बती स्वायत्तता के सवाल पर। अमेरिकी विदेश विभाग स्वायत्त क्षेत्र और अन्य तिब्बती क्षेत्रों को चीन का हिस्सा मानता है, लेकिन बिल के समर्थकों का कहना है कि अमेरिकी सरकार ने कभी यह स्थिति नहीं ली है कि 1950 के दशक में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा इस क्षेत्र पर कब्जा करना अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करता है। चीन पर तिब्बत को तबाह करने का आरोप बिल के लेखकों का तर्क है कि चीनी सरकार तिब्बतियों की अपने धर्म, संस्कृति, भाषा, इतिहास, जीवन शैली और पर्यावरण को संरक्षित करने की क्षमता को “व्यवस्थित रूप से दबा रही है” और जोर देकर कहती है कि तिब्बती लोगों को “आत्मनिर्णय” का अधिकार है। 2021 में पदभार ग्रहण करने के बाद से, बाइडन ने अभी तक दलाई लामा से मुलाकात नहीं की है। 2020 में एक उम्मीदवार के रूप में, बाइडन ने डोनाल्ड ट्रम्प की आलोचना की कि वे तीन दशकों में एकमात्र अमेरिकी राष्ट्रपति हैं, जिन्होंने तिब्बती आध्यात्मिक नेता से न तो मुलाकात की और न ही उनसे बात की। तिब्बत पर बाइडन का क्या है रुख हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति ने तिब्बती मुद्दे के प्रति सहानुभूति व्यक्त की है, तिब्बत में चीन की कार्रवाइयों के बारे में राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ चिंता जताई है और तिब्बती मुद्दों के लिए विशेष समन्वयक के रूप में काम करने के लिए एक उच्च पदस्थ विदेश विभाग के अधिकारी को नियुक्त किया है। दलाई लामा ने घुटने के इलाज के लिए इस महीने अमेरिका जाने की योजना की घोषणा की है, लेकिन उनके और अमेरिकी अधिकारियों के बीच किसी भी बैठक के बारे में कोई विवरण नहीं है। बीजिंग किसी भी देश के अधिकारियों द्वारा दलाई लामा से संपर्क करने का विरोध करता है।  

PM Surya Bijli Scheme : 3 किलोवाट के सोलर पैनल से कुल सालाना बचत 30,240 रुपये

नईदिल्ली लोकसभा चुनाव से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने पीएम सूर्य घर फ्री बिजली योजना (PM Surya Ghar Free Bijli Scheme) का ऐलान किया था, जिसके तहत 75000 करोड़ के निवेश के साथ 300 यूनिट तक फ्री बिजली देने का लक्ष्‍य रखा गया है. इसके तहत 1 करोड़ परिवारों को लाभ देने की योजना है. साथ ही बचे हुए बिजली को बेचकर लाभ भी उठा सकते हैं. इसके अलावा, केंद्र सरकार इस स्‍कीम के तहत सब्सिडी भी प्रोवाइड कराएगी. अगर आप भी प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना (PM Surya Ghar Free Bijli Scheme) के तहत लाभ उठाना चाहते हैं तो आपको सोलर पैनल लगवाने होंगे. हालांकि सोलर पैनल लगवाने से पहले कुछ खास बातों के बारे में विस्‍तार से जान लेना चाहिए. ताकि आपको योजना का लाभ उठाने में किसी भी तरह की समस्‍या का सामना नहीं करना पड़े. आइए जानते हैं पूरी डिटेल… कितना आएगा खर्च? अगर आप सोलर पैनल लगवाने वाले हैं तो इसका खर्च अलग-अलग हो सकता है. 1 किलोवाट के लिए खर्च करीब 90 हजार रुपये, 2 किलोवाट के लिए करीब 1.5 लाख रुपये और 3 किलोवाट के लिए 2 लाख रुपये तक का खर्च आ सकता है.   किसे, कितनी मिलेगी सब्सिडी? अगर आप किसी आवासीय घर के लिए छत पर सौर पैनल लगाने की योजना बना रहे हैं, तो आप पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत सब्सिडी के लिए आवेदन कर सकते हैं. इस योजना के तहत, 1 किलोवाट के लिए 18 हजार रुपये, 2 किलोवाट तक 30,000 रुपये और 3 किलोवाट के लिए कुल सब्सिडी 78,000 रुपये दी जाएगी. सब्सिडी का लाभ उठाने के लिए 85% से अधिक का लोड नहीं होना चाहिए. 4 साल में इतना बचा लेंगे बिजली बिल छत पर सौर पैनल लगाना एक दीर्घकालिक निवेश है. 1 किलोवाट से 120 किलोवाट घंटे तक बिजली पैदा हो सकती है और 3 किलोवाट के सोलर पैनल से कुल सालाना बचत 7 रुपये प्रति यूनिट पर 30,240 रुपये किया जा सकता है. हालांकि 3 किलोवाट पर लागत 2 लाख रुपये होता है और सब्सिडी 78000 रुपये दिया जाता है तो ऐसे में 1.2 लाख रुपये का लागत पड़ता. यानी कि कुल 4 साल में 30 हजार रुपये की बिजली हर साल बचाते हुए पूरे लागत की भरपाई कर पाएंगे.  

मुख्यमंत्री साय ने विश्व रक्त दान दिवस के अवसर पर खासकर युवाओं से रक्त दान करने की अपील की

Monsoon makes a strong entry in the state: Heavy rain alert in many districts

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज विश्व रक्त दान दिवस के अवसर पर खासकर युवाओं से रक्त दान कर लोगों का जीवन बचाने की अपील की है। साय ने कहा है हर साल 14 जून को विश्व स्वास्थ्य संगठन सहित पूरी दुनिया रक्तदान को बढ़ावा देने और रक्तदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से विश्व रक्त दान दिवस मनाती है। साय ने कहा कि आपात स्थितियों, बीमारी, दुर्घटना सहित प्रसव मामलों में जीवन रक्षा के लिए रक्त अति आवश्यक होती है। कई बार आकस्मिक परिस्थितियों में लोगों को सरलता से रक्त उपलब्ध नहीं हो पाता है। साय ने कहा कि रक्तदान महादान के महत्व को जन-जन समझें। रक्त देने में किसी प्रकार का कोई नुकसान नहीं होता। रक्तदान महादान है और रक्तदाता समाज और मानवता के अनमोल सेवक हैं।  

समुद्रों में अब भी दो करोड़ टन सोना छिपा, मिल जाए तो हो जाए दुनिया का बेड़ापार

नई दिल्ली:  सोने की चमक ने हर युग में इंसान को अपनी ओर आकर्षित किया है। पुरातन काल से ही सोने का उपयोग गहनों और लेनदेन के साधन के रूप में किया जाता रहा है। मुसीबत के समय तो सोने की चमक और बढ़ जाती है। हाल में आम लोगों के साथ-साथ कई देशों के सेंट्रल बैंक्स ने जमकर सोने की खरीदारी की है। इससे सोने की कीमत रेकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। एक अनुमान के मुताबिक दुनिया में अब तक केवल 208,874 टन सोने का ही खनन किया जा सका है। लेकिन समुद्रों में अब भी करीब दो करोड़ टन सोना छिपा है। फोर्ब्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक इसकी कीमत 771 ट्रिलियन टन हो सकती है। यह दुनिया की कुल जीडीपी से करीब सात गुना है। एक अनुमान के मुताबिक वर्ल्ड इकॉनमी का साइज करीब 100 ट्रिलियन डॉलर की है। अमेरिका की नेशनल ओशन सर्विस (National Ocean Service) के मुताबिक उत्तरी प्रशांत और अटलांटिक महासागर में हर एक  100 मिलिटन मीट्रिक टन पानी में एक ग्राम सोना है। इस तरह समुद्र में करीब दो करोड़ टन सोना छिपा है। इसकी कीमत करीब 771 ट्रिलियन डॉलर है। दुनिया में अब तक केवल 208,874 टन सोने का ही खनन किया गया है। सवाल यह है कि जब समुद्र में इतना सोना छिपा है तो उसे निकाला क्यों नहीं जा रहा है? लेकिन यह काम इतना आसान नहीं है। इसकी वजह यह है कि समुद्र से सोना निकालना काफी महंगा पड़ता है। इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि एक लीटर समुद्री पानी में एक ग्राम के 13 अरबवें हिस्से के बराबर सोना होता है। अभी कोई ऐसा सस्ता तरीका उपलब्ध नहीं है जिससे समुद्री पानी से सोना निकालकर प्रॉफिट कमाया जा सके। पानी से सोना हालांकि ऐसा नहीं है कि समुद्री पानी से सोना निकालने की कोशिश नहीं हुई है। कई इनवेंटर्स और इन्वेस्टर्स ने इसका प्रयास किया। 1890 के दशक में पेस्टर Ford Jernegan ने मरकरी और इलेक्ट्रिसिटी ट्रीटमेंट के जरिए Long Island Sound से सोना निकालने की योजना बनाई। इसके लिए उन्होंने Electrolytic Marine Salts Company बनाई और 10 लाख डॉलर भी जुटा लिए थे। लेकिन जल्दी ही Jernegan सारा पैसा लेकर गायब हो गए। उसके बाद भी कई लोगों और संस्थाओं ने समुद्री जल से सोने को अलग करने का प्रयास किया। लेकिन उन्हें नाकामी ही हाथ लगी।

अग्निपथ स्कीम खत्म होगी या बदलेगी ? बन गई समिति, सिफारिश पर तुरंत फैसला लेगी मोदी सरकार

नई दिल्ली ‘अबकी बार 400 पार’ का नारा देने वाली बीजेपी का गठबंधन 300 भी पार नहीं कर सका तो मतदाताओं की नाराजगी की वजहें ढूंढी जाने लगी हैं। भले ही कम सीटों के साथ, लेकिन एनडीए सरकार वापस आ गई है तो उसने अपनी नीतियों की समीक्षा शुरू कर दी है। जिन इलाकों से बड़ी संख्या में युवा सेना में जाते हैं, वहां भी बीजेपी को चुनावी नुकसान उठाना पड़ा है। इस कारण अग्निपथ स्कीम की पड़ताल भी शुरू हो गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 3.0 सरकार ने 10 प्रमुख मंत्रालयों के सचिवों के एक समूह को अग्निपथ योजना की समीक्षा करने और सशस्त्र बलों की भर्ती योजना को अधिक आकर्षक बनाने के तरीके सुझाने का काम सौंपा है। केंद्र सरकार चाहती है कि जितनी जल्दी हो सके अग्निपथ स्कीम की हर कमी को दूर कर लिया जाए। पीएम के सामने प्रजेंटेशन देगा सेक्रेटरी समूह मामले से जुड़े अधिकारियों ने  बताया कि प्रधानमंत्री जी-7 शिखर सम्मेलन में शामिल होकर इटली से लौट जाएंगे तब सचिवों का यह पैनल अंतिम प्रस्तुति देगा। जी-7 शिखर सम्मेलन 13 से 15 जून तक चलेगा। सूत्रों ने बताया कि सचिवों का यह समूह अग्निपथ योजना में बदलाव के तहत सैलरी बढ़ाने समेत अन्य लाभ देने का सुझाव दे सकता है। अग्निवीरों के भर्ती कार्यक्रम की समीक्षा नई सरकार के संशोधित 100 दिवसीय एजेंडे में भी शामिल है। अग्निपथ स्कीम की सेना भी कर रही है समीक्षा चर्चाओं से अवगत एक वरिष्ठ अधिकारी ने ईटी को बताया, ‘सचिवों का समूह 16 जून से पहले विवरण तैयार करेगा और प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) में एक विस्तृत प्रजेंटेशन देगा।’ उन्होंने कहा कि प्रजेंटेशन 17 या 18 जून को होने की संभावना है। राज्यों सहित अन्य हितधारकों से सिफारिशों और फीडबैक की समीक्षा करने के बाद पीएमओ योजना में बदलावों पर अंतिम फैसला लेगा। उधर, सेना भी अपने स्तर से अग्निपथ योजना की समीक्षा कर रही है। अधिकारी ने कहा, ‘सेना भी अपना आंतरिक मूल्यांकन कर रही है।’ सरकार ने भारतीय सशस्त्र बलों में कर्मियों की अल्पकालिक भर्ती के लिए जून 2022 में अग्निपथ योजना शुरू की थी। योजना की आलोचना अग्निपथ को रक्षा पेंशन बिल के बढ़ते बोझ के बीच सशस्त्र बलों में युवाओं की भर्ती को बढ़ावा देने के लिए शुरू किया गया था। चुनाव अभियान के दौरान विपक्ष ने इस योजना के खिलाफ माहौल बनाने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ा। विशेष रूप से उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में विपक्ष का यह एजेंडा चल निकला। मतदाता इस बात को लेकर नाराज हैं कि अग्निवीरों को नौकरी की सुरक्षा की गारंटी नहीं दी गई। इस पर महंगाई का मुद्दा विपक्ष के पक्ष में खूब काम आया। अग्निवीरों को क्या मिलता है, जानिए अग्निपथ योजना के तहत अग्निवीरों को चार साल के कार्यकाल के लिए भर्ती किया जाता है। इस अवधि के दौरान, उन्हें 30 हजार रुपये से शुरू होने वाला नियमित मासिक वेतन मिलता है और चौथे वर्ष में 40 हजार रुपये तक पहुंच जाता है। इसके अतिरिक्त, चार साल का कार्यकाल पूरा होने पर अग्निवीर को एकमुश्त सेवा निधि पैकेज के रूप में लगभग 12 लाख रुपये मिलेंगे। सशस्त्र बल अपनी आवश्यकताओं के आधार पर अग्निवीरों को स्थायी सेवा भी दे सकते हैं। अग्निवीर योजना से सरकार को होती है बचत ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ओआरएफ) के एक अध्ययन के अनुसार, एक अग्निवीर की लागत सरकार को पूर्णकालिक भर्ती की तुलना में हर साल 1.75 लाख रुपये कम पड़ती है। 60 हजार अग्निवीरों के एक बैच के लिए वेतन पर कुल 1,054 करोड़ रुपये की बचत होगी। इसने कहा कि मध्यम से लंबी अवधि में पेंशन बिल पर अधिक महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ेगा। पेंशन रक्षा बजट का लगभग 20-25% हिस्सा है। अंतरिम बजट में केंद्र ने रक्षा के लिए 1.41 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए। सत्तारूढ़ गठबंधन के एक प्रमुख सहयोगी जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) ने भी इस योजना की समीक्षा की मांग की है। पिछले हफ्ते जेडी(यू) के वरिष्ठ नेता और प्रवक्ता केसी त्यागी ने कहा था कि उनकी पार्टी चाहती है कि इस योजना की कमियों पर विस्तार से चर्चा की जाए।

चीन ने शौचालयों में लगा दिए हैं टाइमर, सरकार देख रही कितने समय रुके लोग

NDA and INDIA, Om Birla and K Suresh will compete for the post of Speaker.

बीजिंग चीन अपने नागरिकों पर निगरानी के नए तरीके अपनाने के लिए बदनाम रहा है। इस कड़ी में अब एक और नया कदम चीनी सरकार ने उठाया है, जिसकी जद में टूरिस्ट भी हैं। चीन ने शौचालयों में टाइमर लगा दिए हैं, जिससे ये पता चले कि लोग कितना समय अंदर गुजार रहे हैं। टॉयलेट्स के बाहर लगे टाइमर के वीडियो और फोटो सोशल मीडिया पर सामने आए हैं। यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल युंगांग बौद्ध ग्रोटोज के शौचालयों से ये फोटो सामने आए हैं। चीन के युंगांग स्थित इस जगह पर 1,500 वर्ष पूर्व की 252 गुफाएं और 51,000 प्रतिमाएं मौजूद हैं। यहां साल 2023 में 30 लाख से ज्यादा टूरिस्ट आए थे। यहां जो शौचालय बने हैं, उनमें टाइमर लगे हैं। जो यह बताते हैं कि आप कितनी देर से शौचालय में हैं। हर एक टॉयलेट का अपना डिजिटल टाइमर है। द सन की रिपोर्ट के मुताबिक, जब कोई टॉयलेट खाली होता है, तो पिक्सेल वाली एलईडी स्क्रीन पर हरे रंग में ‘खाली’ लिखा दिखता है। जब कोई टॉयलेट के अंदर जाता है तो दरवाजा बंद होते ही इस पर टाइम आना शुरू हो जाता है और ये मिनट और सेकंड को दिखाता है। दरवाजा खुलने पर ये देखा जा सकता है कि किसी ने कितनी देर तक टॉयलेट का यूज किया है। सोशल मीडिया पर चर्चा में चीन का कदम टॉयलेट्स में टाइमर का वीडियो चीनी सोशल मीडिया साइट वीबो पर काफी वायरल हो रहा है। कई यूजर्स ने इसकी आलोचना की है तो बहुत से लोगों ने मजाकिया अंदाज में कहा है कि ये पर्यटकों को शौचालय में बैठकर अपने फोन स्क्रॉल करने से रोकेगा। एक यूजर ने लिखा कि पर्यटक स्थल कोई कार्यालय नहीं है कि शौचालयों की निगरानी की जाए। यह वास्तव में गैर जरूरी कदम है। टाइमर लगाने में आए खर्च को और ज्यादा शौचालय बनाने मेंखर्च करना ज्याद अच्छा होता। स्थानीय कर्मचारियों का कहना है कि हम कोई समय सीमा निर्धारित नहीं कर रहे हैं कि कोई व्यक्ति शौचालय का उपयोग कितनी देर तक कर सकता है। ये टाइमर टूरिस्ट की बढ़ती संख्या से निपटने के लिए लगाए गए थे। इसकी सबसे अच्छी बात ये है कि टाइमर होने से आपको बाहर कतार में लगने या बाथरूम का दरवाजा खटखटाने की जरूरत नहीं है। चीन के इस कदम को उसकी सामाजिक क्रेडिट प्रणाली से जोड़ा जा रहा है। चीन ने 2020 में सोशल मीडिया की आदतों का विश्लेषण करके एक सामाजिक क्रेडिट की शुरुआत की। सामाजिक क्रेडिट प्रणाली को ‘अच्छे नागरिकों’ को पुरस्कृत करने और आलसी या “असभ्य” माने जाने वालों को दंडित करने के लिए डिजाइन किया गया था। इसके तहत किसी व्यक्ति को प्रशासनिक मामलों, वाणिज्यिक गतिविधियों, न्यायिक प्रणाली और सामाजिक व्यवहार के आधार पर परखा जाता है।

अमेरिका के पश्चिमी तट वैंकूवर, सिएटल, वॉशिंगटन, ओरेगॉन और सैन फ्रांसिस्को पर 9 तीव्रता के भूकंप का खतरा: स्टडी

कैलिफोर्निया अमेरिका के पश्चिमी तट पर समंदर के अंदर एक फॉल्ट लाइन (Underwater Faultline) है. वैज्ञानिकों को आशंका है कि ये फॉल्ट लाइन किसी भी दिन भयानक भूकंप और सुनामी ला सकता है. यह फॉल्ट लाइन 600 मील यानी करीब 966 किलोमीटर लंबी है. दक्षिणी कनाडा से उत्तरी कैलिफोर्निया तक. वैज्ञानिकों ने हाल ही में इस समुद्री इलाके का नक्शा बनाया. अंडरवाटर मैपिंग की. इस इलाके को कैसकेडिया सबडक्शन जोन (Cascadia Subduction Zone) कहते हैं. आमतौर पर फॉल्ट लाइन दो हिस्सों में बंटी हुई होती है. लेकिन यह फॉल्ट लाइन चार टुकड़ों में बंट रही है. यह एक बड़े खतरे की निशानी है. अगर यहां पर टेक्टोनिक प्लेटों में जरा सी भी हलचल हुई, तो यह फॉल्ट लाइन बड़े पैमाने पर जमीन के ऊपरी सतह पर भारी तबाही मचाएगा. इससे एक भूकंप के बाद कई और तीव्र भूकंप आने की आशंका है. वैज्ञानिकों का मानना है कि कैसकेडिया सबडक्शन जोन में इतनी ताकत है कि ये 9 से ज्यादा तीव्रता का भूकंप ला सकता है. क्या होगा अगर 9 या ज्यादा तीव्रता का भूकंप आया? कैलिफोर्निया के सैन एंड्रियास फॉल्ट लाइन के पास 8.3 तीव्रता का भूकंप लाने की ताकत है. अब सवाल ये उठता है कि अगर 9 तीव्रता का भूकंप अमेरिका के पश्चिमी तट पर आता है तो इसका असर कितना होगा? कितनी तबाही होगी? अमेरिका के पश्चिमी तट पर 100 फीट या उससे ज्यादा ऊंची सुनामी लहरें उठेंगी. इसकी वजह से 10 हजार लोगों के मारे जाने की आशंका है. इसके अलावा सिर्फ ओरेगॉन और वॉशिंगटन में 80 बिलियन डॉलर्स यानी 6.68 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का नुकसान होगा. सिर्फ इतना ही नहीं इसके बाद जमा पानी की वजह से फैलने वाली बीमारियों की वजह से कई मौते होंगी. यहां-वहां फैले शवों से बीमारियां पनपेंगी. जापान में 2011 में ऐसे ही फॉल्ट लाइन ने मचाई थी तबाही साल 2011 में जापान में भयानक भूकंप और सुनामी आई थी.  इसकी वजह कैसकेडिया सबडक्शन जोन जैसा ही फॉल्ट लाइन था. इसकी वजह से 9 तीव्रता का भूकंप आया. फिर आई भयानक सुनामी. जिसकी वजह से जापान में करीब 20 हजार लोग मारे गए थे. वैज्ञानिकों को चिंता है कि कैसकेडिया सबडक्शन जोन भी ऐसा ही कुछ करेगा. आमतौर पर इस जोन में हर 500 साल में इतना बड़ा भूकंप आता है. पिछला वाला सन 1700 में आया था. यह बता पाना मुश्किल है कि अगला भूकंप कब आएगा. लेकिन जब भी आएगा… भयानक तबाही मचाएगा. क्योंकि कैसकेडिया के चार टुकड़े उसे अन्य फॉल्ट लाइन से ज्यादा खतरनाक बनाते हैं. यहां और स्टडी की जरूरत है. एक टुकड़ा ज्यादा चिकना और फ्लैट… यानी खतरा ज्यादा वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी के जियोफिजिसिस्ट हैरोल्ड टोबिन ने कहा कि हमें टाकोमा और सिएटल के पास इस फॉल्ट लाइन की और स्टडी करनी होगी. ताकि सही तबाही का अंदाजा लगाया जा सके. कैसकेडिया का यह टुकड़ा बाकी अन्य तीन टुकड़ों की तुलना में फ्लैट और चिकना है. इसकी वजह से ही भविष्य में भयानक भूकंप आ सकता है. टोबिन ने बताया कि कैसकेडिया सबडक्शन जोन की वजह से आने वाली सुनामी वॉशिंगटन के तटीय इलाके को पूरी तरह से खत्म कर देगा. असर अंदर के इलाकों तक देखने को मिलेगा. लैमोंट डोहर्टी अर्थ ऑब्जरवेटरी की मरीन जियोफिजिसिस्ट और इस स्टडी की प्रमुख शोधकर्ता सुजैन कारबोट्ट ने बताया कि ये कैसकेडिया की नई स्टडी है. नए डेटा के साथ. हमने 1980 के दशक के डेटा का पुराना और घटिया डेटा इस्तेमाल नहीं किया है.  

भारत ने पापुआ न्यू गिनी को राहत सामग्री में 13 टन आपदा राहत सामग्री भेजी, की आर्थिक मदद

नई दिल्ली भारत ने पापुआ न्यू गिनी की मदद के लिए 19 टन राहत सामग्री भेजी है। पिछले महीने हुए भूस्खलन की वजह से एंगा प्रांत में भारी क्षति का सामना करना पड़ा था। इस दौरान 2000 लोगों की मौत हो गई थी। भारत ने 10 लाख डॉलर सहायता भेजी यह भारत की ओर से पापुआ न्यू गिनी के लिए घोषित 10 लाख डॉलर की सहायता के हिस्से के रूप में भेजी गई है। इसमें खाद्य पदार्थ, अस्थायी शरण स्थली और दवाएं शामिल हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने एक्स पोस्ट में कहा है कि इस संकट के समय भारत और पापुआ न्यू गिनी साथ खड़ा है। छह टन दवाएं भी भेजी गई भेजी गई राहत सामग्री में 13 टन आपदा राहत सामग्री शामिल है, जिसमें अस्थायी शरण स्थली, पानी के टैंक, स्वच्छता संबंधी किट और खाद्य सामग्री शामिल हैं। आपात स्थिति में उपयोग के लिए छह टन दवाएं भी भेजी गई हैं। इनमें डेंगू और मलेरिया का पता लगाने वाली इमरजेंसी किट भी शामिल हैं।

शिक्षा मंत्रालय ने जारी किया परामर्श, बोर्ड परीक्षाओं के दौरान मुफ्त उपलब्ध होंगे सैनिटरी पैड्स, मिलेगी ब्रेक लेने की इजाजत

Farmers' loan waived off in Telangana, Rahul Gandhi said - he did what he said

नई दिल्ली केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को स्कूलों को जारी परामर्श में कहा कि मासिक धर्म से जुड़ी जरूरतों को पूरा करने के लिए छात्राओं को 10वीं और 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाओं के दौरान आवश्यक विराम लेने की अनुमति दी जानी चाहिए तथा सभी परीक्षा केंद्रों पर मुफ्त सैनिटरी नैपकिन उपलब्ध कराए जाने चाहिए। मंत्रालय ने इस बात पर गौर किया कि लड़की के समग्र कल्याण के लिए मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन जरूरी है और यह उसके शैक्षणिक प्रदर्शन के रास्ते में नहीं आना चाहिए।  सभी केंद्रों पर मुफ्त सैनिटरी पैड उपलब्ध हो मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सभी स्कूलों, केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई), केंद्रीय विद्यालय संगठन (केवीएस) और नवोदय विद्यालय समिति (एनवीएस) के लिए परामर्श जारी किया है। मंत्रालय ने कहा, ‘‘कक्षा 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा के लिए सभी केंद्रों पर मुफ्त सैनिटरी पैड उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि आवश्यकता पड़ने पर लड़कियों को परीक्षा के दौरान आवश्यक स्वच्छता उत्पाद उपलब्ध हो सकें।” छात्राओं को सशक्त बनाने पर भी जोर शिक्षक इसने कहा, ‘‘छात्राओं को मासिक धर्म से जुड़ी जरूरतों को पूरा करने, असुविधा को कम करने और परीक्षा के दौरान ध्यान केंद्रित करने के लिए आवश्यक विराम लेने की अनुमति दी जानी चाहिए।” मंत्रालय ने कहा, ‘‘छात्राओं, शिक्षकों और कर्मचारियों के बीच मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए शैक्षणिक कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे।” मंत्रालय ने छात्राओं के साथ उनकी मासिक धर्म संबंधी जरूरतों के संबंध में सम्मान और गरिमा के साथ व्यवहार करने के महत्व पर जोर दिया है और साथ ही उन्हें परीक्षाओं में आत्मविश्वास के साथ भाग लेने और अपनी शैक्षणिक क्षमता हासिल करने के लिए सशक्त बनाने पर भी जोर दिया है। 

मुख्यमंत्री व विधानसभा अध्यक्ष,मंत्री व सांसद समेत अधिकारी रहे मौजूद

३३ रायपुर आज मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में विधान सभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह के सभापतित्व में नवीन विधान सभा निर्माण संबंधी समिति की बैठक हुई। इस बैठक में नवा रायपुर (अटल नगर) में निमार्णाधीन नवीन विधानसभा भवन पर हुई चर्चा के दौरान मुख्य अभियंता द्वारा बताया गया कि नवीन विधान सभा का वर्क आर्डर अगस्त, 2022 को दिया गया था, कार्य पूर्ण होने की अवधि 24 माह, 31/08/2024 तक निर्धारित किया गया है। जिसमें लगभग 68 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है और जून 2025 तक विधानसभा परिसर का कार्य पूर्ण होने की संभावना है । विधानसभा भवन की वर्तमान स्थिति और कार्य की प्रगति को लेकर विधानसभा अध्यक्ष द्वारा विस्तृत चर्चा की गयी, जिसमें बताया गया कि छत्तीसगढ़ का नवीन विधानसभा भवन पूरे देश में अपने तरह की एक आदर्श विधानसभा होगी। इस परिसर में पर्यावरण को संरक्षित रखने के लिए वृक्षारोपण और सौर ऊर्जा को बढ़ावा देकर पूरे परिसर को सौर ऊर्जा से संचालित किया जाना सुनिश्चित किया गया है। इसके साथ ही वर्षा जल का पूर्ण उपयोग सुनिश्चित करते हुए वाटर हार्वेस्टिंग कार्य, संपूर्ण भवन के प्रत्येक कार्य में निर्माण सामग्री सहित, उपयोग में आने वाली समस्त सामग्रियों में उच्च गुणवत्तायुक्त नवीन उत्पाद व टेक्नोलॉजी का समावेश व समुचित उपयोग सुनिश्चित करते हुए ऐसा भवन विकसित किए जाने के निर्देश दिए गए हैं, जो आने वाले 100 वर्षों की जरूरत की पूर्ति करने में सक्षम हो । इसके उपरांत विधायक विश्राम गृह को लेकर समीक्षा की गई जिसमें बताया गया कि नवा रायपुर सेक्टर 25 ग्राम राखी में विधायक विश्राम गृह निर्माण हेतु 44.67 एकड़ भूमि को दिनांक 13/08/2020 को लोक निर्माण विभाग को आवंटित किया गया है। विधायक विश्राम गृह के निर्माण समेत उनकी सुविधाओं को लेकर भी इस बैठक में विस्तारपूर्वक चर्चा हुई। जिसके बाद विधान सभा के अधिकारियों/कर्मचारियों के आवास निर्माण के संबंध में चर्चा हुई। जिसमें मुख्य अभियंता द्वारा विधानसभा में दिनांक 13/02/2024 की बैठक में बताया गया था कि विधान सभा के अधिकारियों / कर्मचारियों के लिए 200 नग शासकीय आवासों के निर्माण कार्य के लिए वित्तीय वर्ष 2024-25 के मूल बजट में अनुमानित लागत 45 करोड़ का प्रावधान है । इस पूरी समीक्षा बैठक के उपरांत विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह ने मुख्य सचिव अमिताभ जैन की अध्यक्षता में प्रति माह बैठक किए जाने हेतु भी निर्देश दिए हैं। इस समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, उपमुख्यमंत्री अरूण साव, संसदीय कार्य मंत्री और रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल, वित्तमंत्री ओ.पी. चौधरी, मुख्य सचिव, छत्तीसगढ़ शासन अमिताभ जैन एवं विधान सभा के सचिव दिनेश शर्मा समेत लोक निर्माण विभाग तथा आवास एवं पर्यावरण विभाग और वित्त विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।

भाजपा की टीमें इसी हफ्ते लोकसभा क्षेत्रों में जाएंगी, पता लगाएगी 8% वोट कहाँ गए

नईदिल्ली यूपी के नतीजों से भाजपा परेशान है। लखनऊ से लेकर दिल्ली तक हड़कंप है। पार्टी का करीब आठ फीसदी वोट चोरी हो गया है। पार्टी मंथन में जुट गई है। इस चोरी का पता लगाने के लिए स्पेशल टास्क फोर्स गठित की जा रही है। फोर्स में संगठन के पदाधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधि तक सबको जगह मिलेगी। सब क्षेत्र में जाएंगे। गांव-गली, मोहल्लों में जाकर पता करेंगे कि इतनी रखवाली के बावजूद आखिर वोटों की चोरी कैसे हो गई। इसमें कौन-कौन शामिल थे। केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए की सरकार बन चुकी है। मगर यूपी को लेकर पार्टी नेतृत्व के मन में भारी टीस है। समझ नहीं आ रहा कि सुरागरशी कैसे हो ताकि देश के सबसे बड़े सूबे में पार्टी की सियासी जमीन खिसकने के कारणों का पता लग सके। यूपी की हार को लेकर दिल्ली और यूपी के अपने तर्क हैं। मगर सच्चाई यह है कि 2019 में अकेले दम पर करीब 50 फीसदी वोट लाने वाली भाजपा अबकी बार 41 फीसदी का आंकड़ा पार करते में हांफ गई। यूपी की हार से दिल्ली बेहद चिंतित है। भाजपा की टीमें इसी हफ्ते लोकसभा क्षेत्रों में भेजी जाएंगी  प्रदेश मुख्यालय में फिर प्रदेश अध्यक्ष और महामंत्री संगठन ने चर्चा की। तय किया गया है कि प्रदेश की सभी सीटों पर हार के कारणों का पता लगाने के लिए स्पेशल टीमें गठित की जाएं। इन्हें हर जिले में लोकसभा और विधानसभा स्तर तक भेजा जाए। इसके लिए 50 से 60 चेहरे चुन लिए गए हैं। इन्हें वो सारे कारण पता लगाने होंगे, जो पार्टी की हार का कारण बने। हारी सीटें जीतना तो दूर, जीती हुई सीटें तक गंवानी पड़ी। टीमें यह भी पता लगाएंगी कि आखिर पार्टी के अगड़े-पिछड़े वोट बैंक में सेंध कैसे लगी। पार्टी के पास इतना बड़ा तंत्र होने के बावजूद चूक कहां और किस स्तर पर हुई। पार्टी सूत्रों की मानें तो इसी सप्ताह टीमों को लोकसभा क्षेत्रों में भेजा जाएगा। 1962 के बाद तीसरी बार रिपीट हुई कोई सरकार “इस जनादेश के कई पहलू हैं. 1962 के बाद यह पहली बार है कि कोई सरकार अपने दो कार्यकाल पूरे करने के बाद लगातार तीसरी बार सत्ता में लौटी है…” विपक्षी दलों के गठबंधन INDIA को लेकर पीएम मोदी ने कहा, “पूरा गठबंधन सारे विरोधी मिलकर उतनी सीटें नहीं जीत पाए, जितनी बीजेपी ने जीती.” मोदी ने कहा कि NDA के तीसरे कार्यकाल में देश कई बड़े फैसलों का नया अध्याय लिखेगा.”  

पबलिग को झटका: 2 साल बाद बढ़ने वाला है यह चार्ज, ATM से अब पैसे निकालना पड़ेगा महंगा

नई दिल्ली अगर आप एटीएम मशीन से कैश निकालते हैं तो आपके लिए यह खबर काम की हो सकती है। अब एटीएम से तय फ्री लिमिट के बाद पैसे निकालने पर आपको ज्यादा चार्ज देने पड़ सकते हैं। दरअसल, देश के एटीएम ऑपरेटरों ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) से संपर्क किया है। एटीएम ऑपरेटर इंटरचेंज चार्ज में बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं। क्या है डिमांड इकोनॉमिक टाइम्स की खबर के मुताबिक, एटीएम उद्योग परिसंघ ( CATMI ) की मांग है कि इंटरचेंज फीस को बढ़ाकर अधिकतम 23 रुपये प्रति ट्रांजैक्शन किया जाए। इसके जरिए व्यवसाय के लिए अधिक फंडिंग सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। एटीएम मेकर एजीएस ट्रांजैक्ट टेक्नोलॉजीज के कार्यकारी निदेशक स्टेनली जॉनसन ने कहा-इंटरचेंज रेट दो साल पहले बढ़ाई गई थी। हम आरबीआई से संपर्क कर रहे हैं और ऐसा लगता है कि वे बढ़ोतरी का समर्थन करते हैं। हमने यानी CATMI ने चार्ज को 21 रुपये तक बढ़ाने का अनुरोध किया है। वहीं, कुछ अन्य एटीएम मेकर्स ने इसे 23 रुपये तक बढ़ाने की मांग की है। हालांकि, इस संबंध में आरबीआई की ओर से आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। एक एटीएम निर्माता के मुताबिक इंटरचेंज चार्ज में वृद्धि एनपीसीआई द्वारा लिया गया निर्णय है क्योंकि दर उनके द्वारा तय की जाती है। 2021 में हुई थी बढ़ोतरी बता दें कि साल 2021 में एटीएम ट्रांजैक्शन पर इंटरचेंज चार्ज 15 रुपये से बढ़ाकर 17 रुपये कर दिया गया। एटीएम इंटरचेंज वह चार्ज है जो कार्ड जारी करने वाले बैंक की तरफ से उस बैंक को दिया जाता है, जहां कार्ड का इस्तेमाल नकद निकालने के लिए किया जाता है। इंटरचेंज चार्ज ज्यादा होने के कारण लागत की भरपाई के लिए बैंक ग्राहकों से फ्री ट्रांजैक्शन के बाद लिए जाने वाले चार्ज में बढ़ोतरी कर सकेंगे। अभी ग्राहकों से ट्राजैक्शन के बाद 21 रुपये तक चार्ज लिए जा रहे हैं। वर्तमान में सेविंग अकाउंटहोल्डर के लिए एक महीने में न्यूनतम पांच ट्रांजैक्शन फ्री हैं। वहीं, कुछ ऐसे भी बैंक हैं जिनके एटीएम पर तीन लेनदेन मुफ्त हैं। इसके बाद अलग- अलग बैंक एटीएम से चार्ज भी अलग-अलग तरह के वसूले जाते हैं।

NSA अजित डोभाल का बड़ा कार्यकाल, पीएम के प्रमुख सचिव पीके मिश्रा का भी बढ़ा कार्यकाल

नई दिल्ली राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल को फिर से नियुक्ति मिल गई है। इसके अलावा पीएम नरेंद्र मोदी के प्रमुख सचिव पीके मिश्रा को भी सेवा विस्तार मिल गया है। पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने इन दोनों पद पर सेवा विस्तार को मंजूरी दी है। अब अजित डोभाल अगले 5 और सालों तक राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के पद पर बने रहेंगे। उन्हें कैबिनेट रैंक के अफसर का दर्जा मिला हुआ है, जो पहले की तरह ही बरकरार रहेगा। अजित डोभाल नई सरकार गठन के बाद अपने पहले असाइनमेंट पर पीएम नरेंद्र मोदी के साथ इटली जाने वाले हैं। यहां वह जी-7 समिट में हिस्सा लेंगे। इसके अलावा कुवैत में आग लगने से 42 भारतीयों की मौत की भी पीएम मोदी ने समीक्षा की। इस बैठक में भी डोभाल मौजूद थे। केंद्र सरकार की ओर से जारी नोटिफिकेशन में कहा गया, ‘कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने अजित डोभाल के नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। वह 10 जून, 2024 को नियुक्त हुए हैं। उनका कार्यकाल अगले आदेश तक या फिर पीएम के कार्य़काल तक बना रहेगा।’ अजित डोभाल का मोदी सरकार के दौर में अच्छा रुतबा रहा है और उन्हें कैबिनेट की रैंक मिलती रही है। अजित डोभाल आईपीएस अधिकारी रहे हैं और खुफिया अफसर के तौर पर उनके काम की खूब सराहना की जाती है। वह 2014 में ही पीएम मोदी के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के तौर पर जुड़े थे। भारत की सुरक्षा नीति पर अजित डोभाल की छाप देखी जाती है। वह जम्मू-कश्मीर में पाक प्रेरित आतंकवाद और देश एवं विदेश में खालिस्तान के उभार के संकट से निपटने में अहम रोल अदा कर रहे हैं। बता दें कि अरब देशों के साथ भारत के बेहतर रिश्तों के पीछे भी डोभाल की भूमिका मानी जाती है। मोदी सरकार के दौर में भारत ने पाकिस्तान पर सख्त नीति का पालन किया है। उड़ी पर अटैक के बाद भारत ने हमला बोला था। इसके अलावा पुलवामा अटैक के बाद भी भारत ने आक्रामक रुख अख्तियार करते हुए कार्रवाई की थी।  

22 जून को चुनाव के बाद यह काउंसिल की पहली बैठक होगी आयोजित, जुलाई लास्ट में आ सकता है बजट

Horticulture Minister ended the syndicate of one family

नई दिल्ली वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में जीएसटी काउंसिल की बैठक 22 जून को होगी। जीएसटी काउंसिल सचिवालय ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा- जीएसटी काउंसिल की 53वीं बैठक 22 जून 2024 को नई दिल्ली में होगी। बैठक के एजेंडे की जानकारी अभी काउंसिल के सदस्यों को नहीं दी गई है। बता दें कि लोकसभा चुनाव के बाद यह काउंसिल की पहली बैठक होगी। इससे पहले, जीएसटी काउंसिल की 52वीं बैठक सात अक्टूबर 2023 को हुई थी, जिसमें सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वित्त मंत्री शामिल हुए थे। मई का जीएसटी कलेक्शन देश का ग्रॉस जीएसटी कलेक्शन मई में 10 प्रतिशत बढ़कर 1.73 लाख करोड़ रुपये हो गया। मई माह के कलेक्शन में सालाना आधार पर 10 प्रतिशत की वृद्धि, आयात में कमी (4.3 प्रतिशत की गिरावट) के बीच घरेलू लेनदेन से राजस्व में मजबूत वृद्धि (15.3 प्रतिशत) के कारण हुई है। जुलाई में आम बजट नई सरकार बनने के बाद अब केंद्रीय बजट 2024-25 की तैयारी शुरू हो गई है। केंद्रीय बजट जुलाई के तीसरे सप्ताह तक संसद में पेश किये जाने की संभावना है। इसका मतलब हुआ कि 21 जुलाई तक आम बजट पेश किया जाएगा। यह आम बजट निर्मला सीतारमण पेश करेंगी। बता दें कि निर्मला सीतारमण को एक बार फिर वित्त मंत्रालय की कमान सौंपी गई है। सीतारमण अगले महीने नई सरकार का पहला बजट पेश करते समय सरकार के आर्थिक एजेंडा को सामने रख सकती हैं।   क्या होगा एजेंडा नई सरकार में भी वित्त मंत्रालय संभालने जा रहीं सीतारमण के आर्थिक एजेंडा में भारत को पांच लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने और वर्ष 2047 तक देश को ‘विकसित भारत’ में बदलने के लिए सुधारों को तेज करने के कदम शामिल होंगे। नई सरकार को राजकोषीय विवेक के साथ एक मजबूत अर्थव्यवस्था विरासत में मिली है। हाल ही में सरकार को रिजर्व बैंक से वित्त वर्ष 2023-24 के लिए लाभांश के तौर पर मिले 2.11 लाख करोड़ रुपये उसकी राजकोषीय स्थिति के लिए काफी मददगार साबित हो सकते हैं।

पीएम किसान लाभार्थियों के लिए बड़ी खुशखबरी, करोड़ों किसानों के खाते में अगले सप्ताह 17वीं किस्त जारी कर दी जाएगी

नई दिल्ली  पीएम किसान लाभार्थियों के लिए बड़ी खुशखबरी है। करोड़ों किसानों के खाते में अगले सप्ताह 17वीं किस्त जारी कर दी जाएगी। दरअसल, सरकार ने पीएम किसान की 17 वीं किस्त जारी करने की तारीख फाइनल कर दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले सप्ताह 18 जून को बनारस से पीएम किसान योजना की 17वीं किस्त जारी करेंगे। इसके तहत 9.3 करोड़ किसानों को लगभग ₹20,000 करोड़ की राशि हस्तांतरित की जाएगी। क्या है योजना? बता दें कि पीएम किसान सम्मान निधि योजना दुनिया की सबसे बड़ी DBT योजना है, जिसके जरिए किसानों को सालाना ₹6000 की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती हैI योजना के तहत मिलने वाली ₹6000 की राशि का उपयोग किसान अपनी खेती संबन्धित जरूरतों जैसे खाद, बीज, कीटनाशक आदि खरीदने लिए कर सकते हैं और कृषि क्षेत्र में अपनी लागत कम कर अधिक मुनाफा प्राप्त कर सकते हैं। लगातार तीसरी बार भारत के प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के बाद नरेंद्र मोदी ने सोमवार को सबसे पहले जिस फाइल पर हस्ताक्षर किया, वह पीएम किसान निधि की 17 वीं किस्त जारी करने से संबंधित है। अधिकारियों के मुताबिक प्रधानमंत्री ने कहा कि नई सरकार का पहला फैसला किसानों के कल्याण के लिए उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है और आने वाले समय में सरकार किसानों और कृषि क्षेत्र के लिए और भी अधिक काम करते रहना चाहती है। मोदी ने रविवार शाम लगातार तीसरी बार भारत के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। पीएम किसान सम्मान निधि योजना (PM Kisan Samman Nidhi Yojana) दुनिया की सबसे बड़ी DBT योजना है जिसके माध्यम से किसानों को प्रति वर्ष 6000 रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है. 28 फरवरी 2024 को केंद्र सरकार द्वारा 16वीं किस्त जारी की गई थी जिसमें पात्र किसानों को 2-2 हजार रुपये की किस्त दी गई. पूरी करा लें KYC पीएम किसान सम्मान निधि की 17वीं किस्त पानी है, तो समय से अपनी ई-केवाईसी (eKYC) पूरी करवाएं और सम्मान निधि का लाभ उठाएं. इसके लिए किसान पीएम किसान मोबाइल ऐप द्वारा फेस ऑथेंटिकेशन (Face Authentication) के माध्यम से ई-केवाईसी करा सकते हैं. PM Kisan मोबाइल ऐप गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध है. किसान CSC (Common Service Centre) के द्वारा बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन के माध्यम से ई-केवाईसी (e-KYC) करवा सकते हैं. किसान pmkisan.gov.in की वेबसाइट पर जाकर ओटीपी के माध्यम से भी ई-केवाईसी करा सकते हैं. PM Kisan ऐप से करें e-KYC पीएम किसान ऐप के तहत किसान फेस ऑथेंटिकेशन फीचर के माध्यम से घर बैठे आसानी से ई-केवाईसी करवा सकते हैं.     गूगल प्ले स्टोर से PM Kisan ऐप डाउनलोड करें     ऐप में आधार नंबर और बेनिफिशरी आईडी डालकर लॉगिन करें     मोबाइन नंबर पर मिले OTP को दर्ज करें     फेस ऑथेंटिकेशन के जरिए अपनी e-KYC पूरा करें CSC पर भी करवा सकते हैं ई-केवाईसी किसान अपने नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) पर जाकर रजिस्ट्रेशन और ई-केवाईसी (e-KYC) दोनों करवा सकते हैं. वहां के कर्मचारी आपको इस प्रक्रिया के बारे में मार्गदर्शन देंगे और आपको पहचान जांचने की प्रक्रिया बताएंगे.

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