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PM Kisan: पीएम किसान स्कीम की जल्द जारी होगी 17वीं किस्त, देखें तारीख को लेकर अपडेट

नईदिल्ली प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत किसानों कों सालाना 6 हजार रुपये की आर्थिक मदद दी जाती है. किसानों के खाते में हर 4 महीने के अंतराल में 3 किस्तों में दो-दो हजार रुपये करके ये राशि भेजी जाती है. फिलहाल, किसानों को 16 किस्तें दी जा चुकी हैं. 17वीं किस्त का किसान बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. इन किसानों के लिए खुशखबरी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीसरी बार प्रधानमंत्री के रूप में कार्यभार संभालने के बाद पहला काम पीएम किसान सम्मान निधि की 17वीं किस्त से जुड़ी फाइल पर हस्ताक्षर करने का किया. किसान सम्मान निधि की 17वीं किस्त की फाइल पर पीएम मोदी ने किए हस्ताक्षर पीएम मोदी ने ट्वीट कर कहा, “देशभर के अपने किसान भाई-बहनों का जीवन आसान बनाने के लिए हमारी सरकार प्रतिबद्ध है. यह मेरे लिए सौभाग्य की बात है कि लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री के रूप में कार्यभार संभालने के बाद पहला काम उनके लिए ही करने का अवसर मिला है. इसके तहत पीएम किसान सम्मान निधि की 17वीं किस्त से जुड़ी फाइल पर हस्ताक्षर किया, जिसका लाभ देश के मेरे 9 करोड़ से ज्यादा अन्नदाताओं को होगा. आने वाले समय में हम किसानों के कल्याण और कृषि क्षेत्र के उत्थान के लिए निरंतर काम करते रहेंगे.” कब आएगी पीएम किसान की 17 वीं किस्त? कृषि मंत्रालय की ट्विटर पर दी गई ताजा जानकारी के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा पीएम किसान सम्मान निधि योजना की 17वीं किस्त का हस्तांतरण जल्द ही किया जाएगा. बता दें कि 28 फरवरी 2024 को केंद्र सरकार द्वारा 16वीं किस्त जारी की गई थी जिसमें पात्र किसानों को 2-2 हजार रुपये की किस्त दी गई. डीबीटी के माध्यम से ये पैसे सीधे लाभार्थियों के बैंक खाते में हस्तांतरित किए गए. हर किस्त चार महीने के अंतराल पर आती है. ऐसे में फरवरी से अगले चार महीने का समय जून अंत में हो रहा है. हालांकि, 17वीं किस्त से जुड़ी फाइल पर हस्ताक्षर हो चुके हैं. ऐसे में जल्द ही किसानों के खातों में ये राशि आ सकती है. यहां करा सकते हैं ई-केवाईसी जिन किसानों ने अभी तक ई-केवाईसी नहीं कराई है वह पीएम किसान योजना की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर इस प्रकिया को पूरा कर सकते हैं. इसके अलावा किसान नजदीकी सीएससी सेंटर पर भी जाकर ई-केवाईसी की प्रकिया पूरी कर सकते हैं. पीएम किसान सम्मान निधि योजना का लाभ पात्र किसानों को देने के लिए केंद्र सरकार ने देशव्यापी सैचुरेशन कैंपेन भी चला रही है. यह कैंपेन 5 जून से शुरू हो गया है और 20 जून तक चलेगा. ऑफिशियल वेबसाइट से ई-केवाईसी करने का तरीका आप नीचे देख सकते हैं. >इसके लिए आपको सबसे पहले www.pmkisan.gov.in पर जाना होगा. >इसके बाद आपके सामने होम पेज खुल जाएगा. >फिर E-KYC के ऑप्शन पर जाएं. >इसके बाद आधार नंबर और कैप्चा दर्ज करें. >आधार नंबर और मोबाइल नंबर डालें. >इसके बाद आपके मोबाइल पर ओटीपी आएगा. >ओटीपी दर्ज करने के बाद आपकी e-KYC हो जाएगी. किसान यहां करें संपर्क पीएम किसान योजना संबंधी किसी भी तरह की समस्या पर किसान ईमेल आईडी pmkisan-ict@gov.in पर संपर्क कर सकते हैं. पीएम किसान योजना के हेल्पलाइन नंबर- 155261 या 1800115526 (Toll Free) या फिर 011-23381092 पर संपर्क कर सकते हैं. यहां भी आपके हर समस्या का समाधान किया जाएगा. क्या है प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक है. इस स्कीम के तहत केंद्र सरकार किसानों को 6,000 रुपये की सालाना मदद देती है. सरकार साल में तीन बार 2,000-2,000 रुपये की किस्त जारी करती है. अब तक इस योजना की 16 किस्त जारी की जा चुकी हैं और नई सरकार के गठन के बाद अब पीएम मोदी ने इस स्कीम को लेकर बड़ा कदम उठाया है.  

शिवराज के मंत्रालयों का बजट प्रदेश के लगभग बराबर, मोदी का सिंधिया पर भी भरोसा बढ़ा

भोपाल  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने के बाद कैबिनेट का भी गठन हो गया. उनके मंत्रिमंडल में शिवराज सिंह चौहान, ज्योतिरादित्य सिंधिया, वीरेंद्र कुमार, दुर्गादास उईके और सावित्री ठाकुर को भी जगह मिली है. शिवराज सिंह चौहान को कृषि एवं ग्रामीण विकास, ज्योतिरादित्य सिंधिया को दूर संचार विभाग, वीरेंद्र कुमार को सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता, दुर्गादास उईके को जनजातीय और सावित्री ठाकुर को महिला एवं बाल विकास विभाग मिला है. इन सभी विभागों का बजट 5 लाख करोड़ रुपये है. इन पांच लाख करोड़ रुपये के बजट में से भी अकेले शिवराज सिंह चौहान को 3.07 लाख करोड़ रुपये का बजट मिला है. गौरतलब है कि कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्रालय पहले भी मध्य प्रदेश के पास ही था. शिवराज से पहले यह विभाग मध्य प्रदेश विधानसभा स्पीकर नरेंद्र सिंह तोमर के पास था. तोमर ने प्रदेश से पांच मंत्री बनने पर खुशी जताई है. 10 जून की रात ग्वालियर आए नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि मध्य प्रदेश को पांच महत्वपूर्ण मंत्रालय मिले हैं. पांचो मंत्रालय को मिलाकर 5 लाख करोड़ का बजट है.  यह मध्य प्रदेश के लिए अच्छी बात है. किस विभाग का कितना बजट बता दें, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को दूर संचार विभाग मिला है. उनके विभाग का बजट 1.42 लाख करोड़ रुपये है. वीरेंद्र कुमार खटीक के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग का बजट 14 हजार 225 करोड़ रुपये है. दुर्गादास उईके जनजातीय मामलों के मंत्री बनाए गए हैं. उनके विभाग का बजट 13 हजार करोड़ रुपये है. इसी तरह सावित्री ठाकुर के महिला एवं बाल विकास विभाग का बजट 26 हजार 92 करोड़ रुपये है. केंद्रीय मंत्री शिवराज ने कही ये बात मंत्रालय मिलने के बाद केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के करोड़ों गरीब परिवारों के आवास का सपना पूरा हो रहा है, जिससे वह सशक्त हो रहे हैं. आज प्रधानमंत्री मोदी के तीसरे कार्यकाल के केंद्रीय कैबिनेट की पहली बैठक में ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ के अंतर्गत 3 करोड़ अतिरिक्त आवास के निर्माण की स्वीकृति प्रदान की गई है. ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बनने वाले इन आवास में शौचालय, बिजली कनेक्शन, एलपीजी कनेक्शन और नल कनेक्शन जैसी बनियादी सुविधाएं होंगी. इस जनकल्याणकारी निर्णय हेतु प्रधानमंत्री मोदी का हार्दिक आभार एवं अभिनंदन.’ शिवराज भाजपा के टॉप 10 नेताओं में शामिल केंद्रीय मंत्री चौहान की बड़ी जीत, प्रदेश में भाजपा के क्लीन स्वीप वाले नीतीजे और शिवराज सिंह की छवि ने पार्टी में उनका कद और बढ़ा कर दिया है। पीएम मोदी और मंत्रियों के शपथ ग्रहण समारोह में शिवराज सिंह मंच पर सबसे पहली पंक्ती में नजर आए। इतना ही नहीं पीएम मोदी के बाद वे छठे नंबर की कुर्सी पर बैठे थे और इसी नंबर पर ही उन्होंने कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली थी। वे भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा के बाद बैठे थे। ऐसे में यह साफ है कि भाजपा में उनका कद काफी बड़ा हो गया है। यह तस्वीर शपथ ग्रहण समारोह की है। पहली पंक्ति की पहली कुर्सी पर नरेंद्र मोदी बैठे हुए थे, दूसरी पर राजनाथ सिंह, तीसरी पर अमित शाह, चौथी पर नितिन गड़करी, पांचवीं पर जेपी नड्डा को जगह दी थी। इसके बाद छठवें नंबर की कुर्सी पर शिवराज सिंह बैठे हैं। अन्य नेता उनके बाद बैठे हुए हैं। इसका साफ संदेश है कि शिवराज पार्टी के टॉप छह नेताओं में शामिल हो गए हैं। शिवराज को कृषि मंत्रालय मिलेगा यह पहले से तय था प्रदेश के पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान को कृषिमंत्रालय दिया जाएगा यह लगभग पहले से ही तय था। हालांकि, गठबंधन पार्टियों की ओर से भी इस मंत्रालय की मांग की थी, लेकिन भाजपा अपनी बात मनवाने में कामयाब रही। इसके अलावा एक अतरिक्त ग्रामीण विकास मंत्रालय देकर शिवराज की जिम्मेदारी और बढ़ा दी गई है। देश के किसानों का दर्द बांटेंगे मामा मप्र के मुख्यमंत्री रहते शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश में कृषि क्षेत्र और किसानों के लिए कई बढ़े काम किए हैं, जिसका उन्हें फायदा मिला है। उनके कार्यकाल में प्रदेश को सात बार कृषि कर्मण अवॉर्ड मिला है। उनकी इसी कार्यप्रणाली को ध्यान में रखते हुए मोदी सरकार में उन्हें इस अहम मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं, शिवराज के पास माजूद दूसरा मंत्रालय ग्रामीण विकास भी अहम हैं। इन दोनों विभागों का बजट करीब 3.07 लाख करोड़ है। ऐसे में यह साफ है कि मध्य प्रदेश में मामा के नाम से चर्चित शिवराज अब देश के किसानों के भाई बनकर उनका दर्द बांटेंगे और उनकी समस्याओं को हल करेंगे।  

स्वास्थ्य संस्थाओं में 46491 नये पदों के सृजन की स्वीकृति

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रिपरिषद की बैठक मंगलवार को मंत्रालय में हुई। मंत्रि-परिषद ने म.प्र. विद्युत नियामक आयोग द्वारा 06 मार्च 2024 को जारी टैरिफ आदेश से वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिये लागू विद्युत दरों में राज्य शासन की सब्सिडी देने का निर्णय लिया है। विभाग द्वारा वित्तीय वर्ष 2024-25 में विभिन्न श्रेणियों के उपभोक्ताओं को ऊर्जा विभाग के बजट से सब्सिडी दी जाएगी। मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए विद्युत दरों का निर्धारण किया है, जो 1 अप्रैल, 2024 से प्रभावशील हो गई है। सब्सिडी दिए जाने पर वर्ष 2024-25 में 24,420 करोड़ रुपए का वित्तीय भार आयेगा। चिकित्सीय विशेषज्ञों के पदों की पूर्ति की मंजूरी मंत्रि परिषद ने स्वास्थ्य संस्थाओं में 46491 नवीन पदों (नियमित/संविदा/आउटसोर्स) के सृजन की स्वीकृति दी जाकर इनमें से 18653 पदों की पूर्ति आगामी 3 वित्तीय वर्ष में करने तथा इन पदों पर राशि 343 करोड़ 29 लाख रूपये के वार्षिक आवर्ती व्यय की स्वीकृति दी। इन पदों में से शेष 27838 पदों की पूर्ति यथावत राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के माध्यम से की जायेगी। प्रदेश की स्वास्थ्य संस्थाओं में विशेषज्ञ सेवायें उपलब्ध कराये जाने तथा स्वास्थ्य सूचकांको में बेहतर प्रदर्शन के लिए चिकित्सीय विशेषज्ञों के 607 पदों की पूर्ति सीधी भर्ती से कराने की मंजूरी दी। लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत 07 विशेषज्ञताओं यथा निश्चेतना विशेषज्ञ, मेडिकल विशेषज्ञ, स्त्रीरोग विशेषज्ञ, शिशुरोग विशेषज्ञ, रेडियोलॉजिस्ट, अस्थि रोग विशेषज्ञ तथा सर्जरी विशेषज्ञ के रिक्त 1214 पर्दो में से 50 प्रतिशत अर्थात् 607 पदों की पूर्ति सीधी भर्ती से कराने की छूट एवं तद्नुसार रिक्त पदों की पूर्ति के लिये मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग के माध्यम से विज्ञापन करने की अनुमति दी गई। भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास विभाग में प्रतिनियुक्ति अथवा संविदा नियुक्ति का निर्णय मंत्रि-परिषद ने भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास विभाग में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग से प्रतिनियुक्ति अथवा विभाग के अधीन प्रशासित संविदा भर्ती नियम 2003 के अंतर्गत संविदा पर लिए जाने का निर्णय लिया गया। संविदा पर भरे जाने की स्थिति में वरिष्ठ परामर्शी (चिकित्सा महाविद्यालय के प्राध्यापक के समकक्ष), परामर्शी (चिकित्सा महाविद्यालय के सह प्राध्यापक के समकक्ष), कनिष्ठ परामर्शी/विशेषज्ञ (चिकित्सा महाविद्यालय के सहायक प्राध्यापक के समकक्ष) और चिकित्सा अधिकारी को समेकित पुनरीक्षित पारिश्रमिक (रूपये) पर नियुक्ति दी जाएगी। तीन नये विवि की स्थापना एवं शहडोल विवि के लिए वित्तीय सहायता और पदो की मंजूरी मंत्रि-परिषद ने सागर, खरगौन और गुना में नवीन विश्वविद्यालयों की स्थापना एवं शहडोल में पूर्व संचालित विश्वविद्यालय को सम्बद्धतादायी बनाए जाने पर पद-सृजन एवं वित्तीय- सहायता प्रदान करने का निर्णय लिया है। रानी अवन्तीबाई लोधी विश्वविद्यालय, सागर, क्रांतिसूर्य टंटया भील विश्वविद्यालय, खरगौन तथा क्रांतिवीर तात्याटोपे विश्वविद्यालय, गुना में नये विश्वविद्यालय की प्रारम्भिक आवश्यकता के लिए 3 करोड़ रूपए की स्वीकृति एवं प्रथम वर्ष के लिए वित्तीय वर्ष 2024-25 के पूरक बजट में राशि 10 करोड़ रूपए के प्रावधान की मंजूरी दी गई है। प्रत्येक नये विश्वविद्यालय के लिए प्रशासकीय 14 पद, शैक्षणिक 140 पद तथा गैर-शैक्षणिक 81 पद कुल 235 पदों (5 वर्षों में विस्तारित) की स्वीकृति प्रदान की गई है। शैक्षणिक पदों के विषय-निर्धारण के लिए उच्च शिक्षा विभाग को अधिकृत किया गया है। भवन निर्माण सहित पूंजीगत परियोजना के लिए प्रत्येक नये विश्वविद्यालय को 150 करोड़ रुपए की स्वीकृति दी गई है। इसके साथ ही पंडित शम्भुनाथ शुक्ला विश्वविद्यालय, शहडोल के लिए 45 करोड़ रूपये, इस प्रकार कुल राशि 495 करोड़ रूपये का भविष्य में पुनर्विलोकन की शर्त पर सिद्धान्ततः अनुमोदन दिया गया है। इस वर्ष को गौवंश रक्षा वर्ष के रूप में मनाने का अनुमोदन मंत्रि-परिषद ने गौवंश की रक्षा करने के संकल्प के साथ इस वर्ष की चैत्र की गुड़ी पड़वा से अगले वर्ष तक गौवंश रक्षा वर्ष के रूप में मनाने का अनुमोदन दिया है। मुख्यमंत्री द्वारा पूर्व में यह निर्णय लिया गया था, जिसका आज मंत्रि-परिषद ने अनुमोदन दिया। मुख्यमंत्री की घोषणा के परिपालन में मध्यप्रदेश शासन द्वारा यह साल, गौवंश रक्षा वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है, जो प्रतिपदा (गुड़ी पड़वा), चैत्र, शुक्ल पक्ष 9 अप्रैल 2024 से आगामी अमावस्या, चैत्र, कृष्ण पक्ष, 29 मार्च 2025 तक मध्यप्रदेश गौसंवर्धन बोर्ड के अंतर्गत मनाया जा रहा है। प्रदेश में संचालित गौ-शालाओं को श्रेष्ठ संचालन के लिए पुरस्कृत किया जाएगा। सड़कों पर गाय दुर्घटना का शिकार होती है। ऐसी व्यवस्था होगी कि घायल गाय को इलाज के लिए आसानी से ले जाया जा सके। हाइड्रोलिक कैटल लिफ्टिंग व्हीकल को टोल व्यवस्था के अंतर्गत प्रबंध किया जाएगा। प्रदेश की सभी गौशालाओं में गौवंश से जुड़ी 26 प्रमुख तिथियों में वर्ष भर कार्यक्रम आयोजित किए जायेंगे। गौशालाओं को समाज से जोड़ने के लिये जिलों में विभिन्न सामाजिक, मांगलिक व धार्मिक कार्यक्रमों को भी गौशालाओं में कराने का आव्हान किया गया है। इसमें नई पीढ़ी को गौवंश के प्रति संवेदनशील बनाने के लिये भी कार्यक्रम होंगे।  

श्री महाकाल महालोक के दूसरे चरण में मंगलनाथ मंदिर का होगा निर्माण व सुंदरीकरण

उज्जैन  धर्मधानी उज्जैन में सिंहस्थ महापर्व से पहले प्रमुख मंदिरों में निर्माण व सुंदरीकरण के काम होंगे। उज्जैन विकास प्राधिकरण ने मंगलनाथ मंदिर के लिए सिंहस्थ मद से 20 करोड़ रुपये की योजना तैयार की है। इसके अलावा कालभैरव, भर्तृहरि गुफा, सिद्धवट, गढ़कालिका आदि प्रमुख मंदिरों के लिए भी योजना बनाई जा रही है। इन मंदिरों में स्मार्ट सिटी, नगर निगम तथा ग्रामीण यांत्रिकी सेवा द्वारा विकास व सुंदरीकरण के काम कराए जाएंगे। ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में श्री महाकाल महालोक का पहला चरण पूरा हो गया, वहीं दूसरे चरण के कार्य भी चल रहा है। मगर शहर के दूसरे मंदिरों के लिए बनी योजना पूरी तरह धरातल पर नहीं उतर पाई है। कई मंदिरों में काम तो शुरू हुए, लेकिन वे पूरे नहीं हो पाए हैं। लेकिन अब मंदिरों के लिए फिर से योजना बनाई जा रही है। मंगलनाथ मंदिर के लिए उज्जैन विकास प्राधिकरण ने 20 करोड़ रुपये की डीपीआर तैयार की है। इसके तहत मंदिर में विशाल पार्किंग, वेटिंग हाल, फसाड लाइटिंग सहित श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अन्य काम होंगे। कालभैरव मंदिर कालभैरव मंदिर में दर्शनार्थियों की संख्या सबसे अधिक रहती है। यहां श्रद्धालुओं की सुविधा के बिल्कुल भी इंतजाम नहीं है। मंदिर परिसर का पिछला हिस्सा उजाड़ स्थिति में है। दर्शनार्थी अगर कुछ देर बैठना भी चाहें, तो यहा स्थान उपलब्ध नहीं है। मंदिर प्रबंधक संध्या मारकण्डेय ने बताया श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए निर्माण कार्यों की शुरुआत होना है। नया फ्लोरिंग तथा वेटिंग हाल आदि का निर्माण किया जाएगा। खाकचौक स्थित गयाकोठा तीर्थ का निर्माण अधूरा पड़ा है। करीब तीन साल पहले यहां निर्माण कार्य की शुरुआत हुई थी। लेकिन फंड की कमी के चलते बीच में ही का काम ठप हो गया। मंगलनाथ के लिए 20 करोड़ की डीपीआर तैयार मंगलनाथ मंदिर में निर्माण कार्य के लिए 20 करोड़ रुपये की डीपीआर तैयार की गई है। सिंहस्थ मद से मंदिर में विशाल पार्किंग, फैसिलिटी सेंटर सहित अन्य काम होना है। – संदीप कुमार सोनी, मुख्य कार्यपालन अधिकारी, उज्जैन विकास प्राधिकरण

Sach Pass : दो महीनें से जारी था काम 16 से 17 ग्लेशियरों को काट बनाई गई सड़क

चंबा  देश का सबसे खतरनाक सड़कों में शुमार चंबा-पांगी रोड को बहाल कर दिया गया है। इस रूट में साच पास आता है जहां 12 महीने बर्फबारी होती रहती है। साच पास सिर्फ चार महीने के लिए खुलता है। क्योंकि इन चार महीनों में इतनी ज्यादा बर्फबारी नहीं होती। चंबा से पांगी जाने के लिए ये सबसे छोटा रूट है। लेकिन साच पास मार्ग के बंद होने के चलते पांगी घाटी के लोगों को वाया जम्मू या कुल्लू के जरिए करीब 750 किलोमीटर का लंबा फासला तय करके चंबा पहुंचाना पड़ता है। या चंबा से पांगी जाना पड़ता है। अब साच पास मार्ग के खुलने से अब यह फासला 172 किलोमीटर तक सिमट जाएगा। लोक निर्माण विभाग ने शनिवार को साच पास मार्ग से बर्फ हटाने के बाद इस आमजन के लिए खोल दिया है। करीब साढ़े 14 हजार फुट की ऊंचाई से गुजरने वाले चंबा-किलाड़ वाया साच पास मार्ग से मीटरों के हिसाब से जमी बर्फ को हटाकर लोक निर्माण विभाग ने करीब आठ माह के बाद छोटे वाहनों की आवाजाही के लिए खोला है। अभी साच पास मार्ग पर बड़े वाहनों की आवाजाही सुचारू होने में वक्त लगेगा। 24 कर्मचारी दिन रात डटे रहे इस मार्ग को बहाल करने क लिए लोक निर्माण विभाग के 24 कर्मचारी दिन रात डटे रहे। इस दौरान डोजर, एलएनटी मशीन और जेसीबी के सहारे मार्ग को बहाल की गई। टीम ने चुराह से साच-पास तक मार्ग बहाल कर साचपास टॉप पर मशीनें पहुंचाई। उसके बाद किलाड़ की तरफ से (भूत ग्राउंड) से ऊपर साच-पासपास टॉप तक बर्फ को हटाया। ग्लेशियरों को काट बनाया रास्तापीडब्ल्यूडी के कर्मचारियों 16 से 17 ग्लेशियरों को काटते हुए ये रास्ता बनाया है। विभाग ने 8 अप्रैल को मार्ग की बहाली का कार्य बैरागढ़ और किलाड़ से शुरू किया था। बीच-बीच में मौसम भी कर्मचारियों की खूब परीक्षा लेता रहा। ऐसे में विभाग के कर्मचारियों ने कड़ी मेहनत से 2 महीने में इस मार्ग को खोल दिया।

दहशतगर्दों ने कठुआ में की फायरिंग, सुरक्षाबलों ने एक आतंकी को मार गिराया

जम्मू जम्मू-कश्मीर के में एक बार फिर आतंकियों ने कायराना हिमाकत की है। दहशतगर्दों ने जम्मू संभाग के जिला कठुआ की तहसील हीरानगर के सोहल इलाके में गोली चलाई है। फायरिंग की सूचना पर पहुंचे सुरक्षा बलों ने इलाके की घेराबंदी कर दी है। सुरक्षाबलों ने एक आतंकी को मार गिराया है। वहीं एक आम नागरिक के घायल होने की जानकारी भी सामने आ रही है। फिलहाल ऑपरेशन जारी है। मैं अंतर्राष्ट्रीय सीमा के पास हीरानगर सेक्टर के सैदा गांव में एक घर पर हुए आतंकवादी हमले के मद्देनजर डीसी कठुआ राकेश मिन्हास के साथ लगातार ऑनलाइन संपर्क में हूं। मैं एसएसपी कठुआ अनायत अली चौधरी के भी संपर्क में हूं जो मौके पर हैं। जिस घर पर हमला हुआ उसके मालिक भी मोबाइल फोन पर संपर्क में हैं। संयुक्त पुलिस और अर्धसैनिक बल का ऑपरेशन चल रहा है। अब तक एक आतंकवादी मारा गया है। मैं और मेरा कार्यालय लगातार संपर्क में हैं और घटनाक्रम पर कड़ी नज़र रख रहे हैं। घटनास्थल पर लोगों ने अपने-अपने घरों की लाइटें बंद दी हैं, ताकि आतंकी उनके घर में न घुस जाएं। स्थानीय लोगों के मुताबिक उन्होंने दो से तीन संदिग्धों को देखा है। ये सभी फायरिंग करके जंगल की ओर भाग गए। 48 घंटे पहले भी हुआ था हमला बता दें कि दो दिन पहले रविवार को ही रियासी में आतंकियों ने घात लगाकर तीर्थयात्रियों की बस को निशाना बनाया था। गोलीबारी में ड्राइवर ने नियंत्रण खो दिया जिससे बस खाई में जा गिरी। इसमें नौ लोगों की मौत हो गई थी और 41 लोग घायल हुए थे। हमले के बाद से इलाके में हाई अलर्ट सुरक्षा बलों ने जम्मू और राजोरी जिलों में हाई अलर्ट जारी कर दिया है और आतंकवादी हमले के बाद से ही तलाशी अभियान जारी है। उधमपुर-रियासी रेंज के पुलिस उप महानिरीक्षक रईस मोहम्मद भट ने कहा कि सुरक्षा बलों को कुछ सुराग मिले हैं। जांच आगे बढ़ाई जा रही है। पुलिस, सेना और सीआरपीएफ की 11 टीमें आतंकवादियों की तलाश में जुटे हुए हैं। मृतकों में दो साल का मासूम भी रविवार को हुए हमले में बस में सवार नौ लोगों की मौत हो गई। इनमें तीन उत्तर प्रदेश और चार राजस्थान के थे। बस चालक और कंडक्टर रियासी के थे। राजस्थान के सभी मृतक एक ही परिवार के थे। इनमें पूजा और उसका दो साल का बेटा टीटू साहनी थे। मृतकों में पांच के शरीर पर गोली लगने के निशान हैं। वहीं, 41 घायलों में से 10 को गोली लगी है। 10-10 लाख की मदद जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने मृतकों के परिजनों को 10-10 लाख और घायलों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक मदद देने की घोषणा की है।

24 जून से शुरू होगा संसद का विशेष सत्र, 26 जून को लोकसभा स्पीकर का चुनाव होने की संभावना

नई दिल्ली संसद का 8 दिवसीय विशेष सत्र 24 जून से शुरू होने वाला है। सूत्रों के मुताबिक 8 दिवसीय सत्र में 26 जून को लोकसभा स्पीकर का चुनाव होने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार, 24 और 25 जून को नए सांसद शपथ लेंगे। विशेष सत्र के दौरान, भाजपा के एजेंडे में एक मुख्य कार्य नए लोकसभा अध्यक्ष के लिए एनडीए की पसंद का चयन करना होगा। लोकसभा अध्यक्ष का पद लोगों के दिमाग में फिर से आ गया है क्योंकि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की दोनों पार्टियाँ, टीडीपी और जेडी (यू), इस कुर्सी पर नज़र गड़ाए हुए हैं। हाल ही में संपन्न हुए लोकसभा चुनावों में, भाजपा केवल 240 सीटें ही जीत पाई और 272 के आंकड़े से चूक गई। इससे भगवा खेमे में विद्रोह की आशंका पैदा हो गई है, जो पिछले कुछ सालों में पार्टियों को तोड़ने और सरकारें गिराने में अहम भूमिका निभाता रहा है। ऐसे में दलबदल विरोधी कानून सबसे आगे आता है और इस तरह सदन का अध्यक्ष एक महत्वपूर्ण पद बन जाता है।  

छत्तीसगढ़-बलौदा बाजार में बवाल में अब तक 80 उपद्रवी गिरफ्तार

रायपुर. छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार में हुए हिंसक प्रदर्शन में 25 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। इधर शांति व्यवस्था बनाये रखने के मद्देनजर जिले में धारा 144 लागू कर दी गई है। इस मामले में पुलिस ने अब तक 80 लोगों को गिरफ्तार किया है। प्रदर्शनकारियों ने कहने को तो उच्चस्तरीय जांच और दोषियों पर कार्रवाई के लिए आंदोलन का आह्वान किया था, लेकिन दरअसल उनका मकसद ही आगजनी और मारपीट करना था। घटना को लेकर जो जानकारी सामने आई है, उसके मुताबिक छत्तीसगढ़ सतनामी समाज के द्वारा अमर गुफा गिरीधपुरी जैतखाम मामले में उच्चस्तरीय जांच की मांग और साथ में पूर्व में बोडसरा, कबीरधाम और अन्य जिलों में सतनामी समाज संबंधी विभिन्न मु‌द्दों को लेकर दशहरा मैदान बलौदाबाजार में धरना प्रदर्शन आयोजित किया गया था। प्रशासन को भी इसकी सूचना थी, जिसके बाद सुरक्षा प्रबंधन के लिए पर्याप्त सख्या में पुलिस बल लगाने के साथ मजिस्ट्रियल ड्यूटी भी लगाई गई थी। आयोजनकर्ता किशोर नवरंगे भीम क्रांतिवीर अध्यक्ष, दीपक घृतलहरे प्रगतिशील सतनामी समाज, मोहन बजारे प्रगतिशील सतनामी समाज युवा प्रदेश अध्यक्ष, सुशील बजारे प्रगतिशील सतनामी समाज युवा प्रकोष्ट, जितेन्द्र नौरंगे सतनाम सेवा समिती जिला अध्यक्ष, ओमप्रकाश खुटे सतनामी समाज वरिष्ठ, भुनेश्वर डहरिया, दिनेश चतुर्वेदी भीम रेजिमेंट प्रदेश अध्यक्ष आदि के नेतृत्व में शक्ति प्रदर्शन के रूप में आसपास पैदल रैली कर संयुक्त जिला कार्यालय का घेराव किये जाने योजना थी। बलौदाबजार में हुआ आगजनी की घटना पर छत्तीसगढ़ सरकार ने संज्ञान लिया है। सरकार ने इस मामले की जांच के आदेश दिए हैं। इस मामले पर डिप्टी सीएम विजय शर्मा का कहना है कि इस तरह की घटनाएं राज्य में कहीं भी बर्दाश्त नहीं की जाएंगी। उन्होंने बलौदाबजार के साथ ही प्रदेश के लोगों से सौहार्द बनाए रखने की अपील भी की है। हालांकि, इस मामले पर छत्तीसगढ़ सरकार ऐक्शन मोड में नजर आ रही है।

जेपी नड्डा मोदी कैबिनेट में शामिल होने के कारण भाजपा को नए राष्ट्रीय अध्यक्ष की तलाश

नई दिल्ली भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में मंत्री बनने के बाद पार्टी को नए राष्ट्रीय अध्यक्ष की तलाश करनी है। भाजपा में आमतौर पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया के मुताबिक, सर्वसम्मति से राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव करने की परंपरा रही है। भाजपा के संविधान की धारा-19 के अनुसार, पार्टी अध्यक्ष का चुनाव एक निर्वाचक मंडल करता है, जिसमें राष्ट्रीय और प्रदेश परिषद के सभी सदस्य शामिल होते हैं। इससे पहले पार्टी को जिला से लेकर राज्य स्तर तक चुनाव की लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। पार्टी राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव राष्ट्रीय कार्यकारिणी के निर्धारित नियमों के अनुसार ही कराया जाता है। पार्टी संविधान के अनुसार, राष्ट्रीय अध्यक्ष वही व्यक्ति हो सकेगा जो कम से कम चार अवधियों तक सक्रिय सदस्य और कम से कम 15 वर्ष तक प्राथमिक सदस्य रहा हो। निर्वाचक मंडल में से कोई भी 20 सदस्य राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के चुनाव की अर्हता रखने वाले व्यक्ति के नाम का संयुक्त रूप से प्रस्ताव कर सकेंगे। यह संयुक्त प्रस्ताव कम से कम ऐसे पांच प्रदेशों से आना जरूरी है, जहां राष्ट्रीय परिषद के चुनाव संपन्न हो चुके हों। नामांकन पत्र पर उम्मीदवार की स्वीकृति आवश्यक है। इससे पहले आम तौर पर देशभर में पार्टी सदस्यता अभियान भी चलाती है। ऐसे में इस सारी प्रक्रिया को पूरा होने में तीन से चार महीने का वक्त लगता है। यही वजह है कि निर्वाचन प्रक्रिया से गुजर कर राष्ट्रीय अध्यक्ष के चयन में लगने वाले समय को देखते हुए पार्टी स्तर पर कई विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है। सूत्रों की माने तो, भाजपा पूर्णकालिक अध्यक्ष चुने जाने तक किसी नेता को उसी तरह से पार्टी का कार्यवाहक अध्यक्ष नियुक्त कर सकती है, जैसे 2019 में तत्कालीन अध्यक्ष अमित शाह के कैबिनेट मंत्री बनने पर जेपी नड्डा को कार्यवाहक अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। कार्यवाहक राष्ट्रीय अध्यक्ष की नियुक्ति होने तक जेपी नड्डा केंद्रीय मंत्री और पार्टी राष्ट्रीय अध्यक्ष दोनों का कामकाज देखते रहेंगे। 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के गृह मंत्री बनने पर जुलाई 2019 में नड्डा को पार्टी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया था, इसके कुछ महीने बाद ही उन्हें तीन वर्षीय कार्यकाल के लिए सर्वसम्मति से पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया था। उन्होंने पार्टी के पूर्णकालिक राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर पार्टी की कमान 20 जनवरी 2020 को संभाली थी। उनका कार्यकाल जनवरी 2023 में ही समाप्त हो गया था। लेकिन, लोकसभा चुनाव के मद्देनजर जेपी नड्डा के कार्यकाल को जून 2024 तक बढ़ा दिया गया था। उनका अध्यक्षीय कार्यकाल 30 जून को खत्म हो रहा है। इसी वर्ष फरवरी 2024 में दिल्ली में हुए भाजपा के राष्ट्रीय अधिवेशन की बैठक में पार्टी संविधान में संशोधन करते हुए पार्टी के फैसले लेने वाली सर्वोच्च इकाई संसदीय बोर्ड को आपात स्थिति में पार्टी अध्यक्ष से संबंधित फैसला लेने की शक्ति दी गई। पार्टी का संसदीय बोर्ड परिस्थिति के अनुसार राष्ट्रीय अध्यक्ष के कार्यकाल को बढ़ाने या घटाने का फैसला कर सकता है। भाजपा के संविधान की धारा-21 में अध्यक्ष के कार्यकाल का जिक्र है। इसके मुताबिक, कोई व्यक्ति तीन-तीन साल के लगातार दो कार्यकाल तक ही भाजपा का अध्यक्ष रह सकता है।  

सोशल मीडिया पर हो रहा प्रेमानंद का वीडियो, प्रदीप मिश्रा को लिया आड़े हाथ

सीहोर मध्यप्रदेश में सीहोर जिले वाले पंडित यानी प्रदीप मिश्रा का कहना है कि बरसाना राधा जी का मायका नहीं है। राधा रावल गांव की थीं और उनकी शादी छाता में हुई थी। राधा के पिता जी की कचहरी थी। यानी राधा जी के पिता वहां पर कोर्ट लगाते थे। मिश्रा ने यह भी कहा, बरसाने का मतलब है कि बरस यानी साल में एक बार आना। मतबल राधा के पिता साल में एक बार यहां आते थे।   बता दें कि इस बात पर प्रेमानंद महाराज ने प्रदीप मिश्रा को आड़े हाथ ले लिया। उनका कहना है कि प्रदीप मिश्रा को कुछ अता-पता नहीं है। प्रदीप मिश्रा ने राधा को समझा ही नहीं है। प्रेमानंद इस मुद्दे पर वायरल वीडियो में प्रदीप मिश्रा के लिए खड़ी भाषा का उपयोग करते हुए सुने जा सकते हैं।   बता दें कि पंडित प्रदीप मिश्रा एक प्रसिद्ध कथावाचक गायक और आध्यात्मिक गुरु हैं। कथावचक पंडित मिश्रा की कथाओं को देश-दुनिया के लोग सुनते हैं। प्रदीप मिश्रा के ज्यादातर प्रवचन कथा शिव पुराण से संबंधित होती हैं और पंडित मिश्रा ने कथा वाचन भी शिव पुराण से ही शुरू किया था। वहीं, राधारानी के परम भक्त और वृंदावन वाले प्रेमानंद जी महाराज को भला कौन नहीं जानता है। वे आज के समय के प्रसिद्ध संत हैं। यही कारण है कि उनके भजन और सत्संग में दूर-दूर से लोग आते हैं। प्रेमांनद जी महाराज की प्रसिद्धि दूर-दूर तक फैली हुई है। कहा जाता है कि भोलेनाथ ने स्वयं प्रेमानंद जी महाराज को दर्शन दिए। इसके बाद वे घर का त्याग कर वृंदावन आ गए। प्रेमानंद जी महाराज का जन्म उत्तर प्रदेश के कानपुर में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ। प्रेमानंद जी के बचपन का नाम अनिरुद्ध कुमार पांडे है। इनके पिता का नाम शंभू पांडे और माता का नाम रामा देवी है। सबसे पहले प्रेमानंद जी के दादाजी ने संन्यास ग्रहण किया। साथ ही इनके पिताजी भी भगवान की भक्ति करते थे और इनके बड़े भाई भी प्रतिदिन भगवत का पाठ किया करते थे।

मोहन कैबिनेट का फैसला, तीन वर्ष में होगी भर्ती, 343 करोड़ रुपये का वित्तीय भार आएगा

भोपाल प्रदेश में किसान और घरेलू उपभोक्ताओं को सस्ती दर पर बिजली उपलब्ध कराने के लिए सरकार वर्ष 2024-25 में 24,420 करोड़ रुपये का अनुदान देगी। यह राशि विद्युत वितरण कंपनियों को दी जाएगी। इस बार विद्युत नियामक आयोग ने बिजली की दरों में वृद्धि नहीं की है। वहीं, स्वास्थ्य संस्थाओं में वर्तमान और भविष्य की आवश्यकताओं को देखते हुए नियमित, संविदा और आउटसोर्स के 46,491 पद सृजित करके तीन वर्ष में भर्ती की जाएगी। इन दोनों प्रस्तावों को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय में हुई कैबिनेट बैठक में स्वीकृति दी गई। बैठक के निर्णयों की जानकारी देते हुए नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बताया कि घरेलू श्रेणी के उपभोक्ताओं को सस्ती बिजली देने के लिए छह हजार, सामान्य वर्ग के किसानों के लिए 13 हजार और अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के किसानों के लिए पांच हजार करोड़ रुपये का अनुदान विद्युत वितरण कंपनियों को दिया जाएगा। कई रिक्त पदों पर होगी भर्ती वहीं बड़ा निर्णय करते हुए स्वास्थ्य संस्थानों में स्वीकृत एवं भविष्य की आवश्यकताओं को देखते हुए 46,491 नए नियमित, संविदा और आउटसोर्स के पद सृजन की स्वीकृति दी गई। इनमें से 18,653 पदों की पूर्ति आगामी तीन वर्ष में की जाएगी। इस पर वार्षिक 343 करोड़ रुपये का वित्तीय भार आएगा। बाकी 27,828 पदों की पूर्ति राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के माध्यम से की जाएगी। इसी तरह निश्चेतना, मेडिकल, स्त्री रोग, शिशु रोग, रेडियोलाजिस्ट, अस्थि रोग और सर्जरी विशेषज्ञ के रिक्त के कुल स्वीकृत 12,14 पदों में से 50 प्रतिशत यानी 607 पदोन्नति के पदों भी सीधी भर्ती के माध्यम से भरा जाएगा। इस कारण नहीं हो रही थी भर्तियां उल्लेखनीय है कि प्रदेश में पदोन्नति नियम न होने और सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित होने के कारण विशेषज्ञों की भर्तियां नहीं हो पा रही हैं। भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास विभाग में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग से प्रतिनियुक्ति अथवा संविदा नियुक्ति पर लिए जा सकेंगे। अभी तक यह व्यवस्था नहीं थी। 3 विश्वविद्यालयों को सरकार देगी अनुदान अवंतीबाई लोधी विश्वविद्यालय सागर, क्रांति सूर्यकांत टंट्या भील विश्वविद्यालय खरगोन तथा क्रांतिवीर तात्या टोपे विश्वविद्यालय गुना को अनुदान देने के संबंध में भी कैबिनेट ने निर्णय लिया। प्रत्येक नए विश्वविद्यालय की प्रारंभिक आवश्यकता के लिए तीन करोड रुपये के साथ ही प्रतिवर्ष ब्लाक ग्रांट भी दी जाएगी। पहले वित्तीय वर्ष के लिए 10 करोड रुपये का प्रविधान किया जाएगा। नवीन विश्वविद्यालयों के लिए 235 पद, भवन निर्माण के लिए प्रत्येक विश्वविद्यालय को 150 करोड़ रुपये और पंडित शंभूनाथ शुक्ल विश्वविद्यालय शहडोल के लिए 45 करोड़ रुपए की स्वीकृति भी गई। 2024-25 को गोवंश रक्षा वर्ष के रूप में मनाया जाएगा कैबिनेट ने गोवंश की रक्षा के लिए वर्ष 2024-25 को गोवंश रक्षा वर्ष के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। इसके अंतर्गत प्रदेश में संचालित गौशालाओं को श्रेष्ठ संचालन के लिए पुरस्कृत किया जाएगा, साथ ही सड़कों पर घायल गाय को उपचार के लिए ले जाने हाइड्रोलिक कैटल लिफ्टिंग व्हीकल को टोल नाकों पर व्यवस्था की जाएगी। गोशालाओं को समाज से जोड़ने के लिए जिलों में विभिन्न सामाजिक, मांगलिक व धार्मिक कार्यक्रम गोशालाओं में करने के लिए प्रेरित करने के साथ नई पीढ़ी को गोवंश के प्रति संवेदनशील बनाने के लिए भी कार्यक्रम किए जाएंगे। नरेंद्र मोदी को कैबिनेट ने दी बधाई मुख्यमंत्री समेत कैबिनेट के सभी सदस्यों ने नरेंद्र मोदी के लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने पर बधाई और शुभकामनाएं दी गईं। साथ ही सभी सदस्यों ने प्रदेश की 29 लोकसभा सीटों पर आए परिणाम, पार्टी का वोट शेयर 61 प्रतिशत पहुंचने पर मुख्यमंत्री को बधाई दी।

मंत्री आतिशी ने यह जानकारी दी, बूंद-बूंद पानी को तरसती दिल्ली में अब बिजली संकट भी गहराया

नई दिल्ली बूंद-बूंद पानी को तरसती दिल्ली में अब बिजली संकट भी गहरा गया है। दिल्ली सरकार की मंत्री आतिशी ने यह जानकारी दी है। आतिशी ने कहा कि यूपी के मंडोला में  पीजीसीआईएल के एक सब-स्टेशन में आग लगी है। इस सब-स्टेशन से दिल्ली को 1500 मेगावॉट बिजली मिलती है। आतिशी ने बताया कि मंडोला सब-स्टेशन में आग लगने की वजह से दिल्ली के कई हिस्सों में पावर कट हुआ है। यह बहुत गंभीर मुद्दा है। यह बहुत चिंता की बात है कि मौजूदा वक्त में देश का इलेक्ट्रिसिटी इफ्रास्ट्रक्चर फेल हो चुका है… कौन से इलाके प्रभावित? आतिशी ने बताया कि 2 बजकर 11 मिनट से दिल्ली के कई हिस्सों में पावर कट हुआ। इससे पूर्वी दिल्ली का काफी हिस्सा, आईटीओ का हिस्सा, दक्षिणी दिल्ली में सुखदेव विहार, आश्रम, सरिता विहार समेत कई इलाके प्रभावित हुए। हालांकि दिल्ली की बिजली कंपनियों ने तेजी से काम करते हुए अगल-अलग इलाकों में बिजली आपूर्ति बहाल करना शुरू कर दिया है। दिल्ली सरकार विकल्पों पर कर रही काम मंत्री आतिशी ने कहा कि फिलहाल दिल्ली सरकार राष्ट्रीय राजधानी की बिजली कंपनियों से इस मसले पर बात कर रही है। इसके फौरी समाधान के लिए दिल्ली के अन्य पॉवर स्रोतों (जैसे एन -1) से लिंक किया जा रहा है। बिजली मंत्री से बात करेंगी आतिशी आतिशी ने इसे बेहद गंभीर मुद्दा बताया। उन्होंने कहा- मैं आज ही केंद्र सरकार के नए बिजली मंत्री बने मनोहर लाल जी से समय मांगूंगी। देश के समूचे पॉवर ट्रांसमिशन सिस्टम को केंद्र सरकार चलाती है। पॉवर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, एनटीपीसी इनका एक पूरा नेशनल पॉवर ग्रिड है। बिजली के लिए भी दूसरे राज्यों पर निर्भर है दिल्ली आतिशी ने कहा कि आप सभी जानते हैं कि दिल्ली बहुत सीमित स्तर पर पॉवर प्रोडक्शन होता है। दिल्ली की अधिकतर बिजली बाहरी राज्यों से आती है। यह एनटीपीसी के तहत आती है। इसके बाद तीन बिजली कंपनियों के जरिए दिल्ली में इसका वितरण होता है। दिल्ली सरकार की जिम्मेदारी केवल राष्ट्रीय राजधानी में मौजूद डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम को मजबूत करना है। नेशनल ग्रिड की वजह से पॉवर कट आतिशी ने कहा कि जब दिल्ली में पीक पॉवर 800 मेगावॉट पहुंची थी तब भी दिल्ली में कोई ब्लैक आउट नहीं हुआ था। आज दिल्ली में जो पॉवर कट हुआ है वह नेशनल ग्रिड की वजह से हुआ है। दिल्ली सरकार इस पर तुरंत ऐक्शन लेगी। केंद्र सरकार पर निशाना इसके साथ ही आतिशी ने केंद्र सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यह बेहद चिंताजनक बात है कि मौजूदा वक्त में देश का पॉवर इंफ्रास्ट्रक्चर फेल हो गया है। दिल्ली देश की राजधानी है। देश की राजधानी में इस तरह का फेलियर नेशनल ग्रिड की तरफ से होता है तो इसके बेहद गंभीर परिणाम होंगे। दिल्ली सरकार ने 24 घंटे पूरे हफ्ते बिजली देने का पूरा प्रयास किया है। अलग-अलग इलाकों में वापस आ रही बिजली पॉवर कट की घटना के बाद आतिशी ने 3:49 बजे एक्स पर अपने पोस्ट में कहा- बिजली बहाली की प्रक्रिया शुरू हो गई है। अब धीरे-धीरे अलग-अलग इलाकों में बिजली वापस आ रही है। लेकिन, राष्ट्रीय पावर ग्रिड में बड़ी विफलता बेहद चिंताजनक है। मैं केंद्रीय ऊर्जा मंत्री और पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (PGCIL) के चेयरमैन से मिलने का समय मांग रही हूं, ताकि सुनिश्चित किया जा सके कि ऐसी स्थिति दोबारा ना आए।  

आरएसएस चीफ ने कहा कि चुनाव प्रचार के दौरान मर्यादा की जरूरत थी जो नहीं रखी गई

नागपुर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन  भागवत ने चुनाव के दौरान होने वाली बयानबाजी को लेकर बड़ी बात कही है। उन्होंने कहा कि हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव के दौरान राजनीतिक दलों ने मर्यादा नहीं रखी। नागपुर में हुए आरएसएस के कार्यक्र में उन्होंने कहा, असली जनसेवक वही है जो अहंकार नहीं दिखाता और सार्वजनिक जीवन में काम करते हुए भी मर्यादा बनाए रखता है। उन्होंने कहा, चुनाव संपन्न हो गए, परिणाम और सरकार भी बन गई लेकिन उसकी चर्चा अभी तक चल रही है। जो हुआ वह क्यों हुआ। उन्होंने कहा, यह अपने प्रजातांत्रिक देश में पांच वर्ष में होने वाली घटना है जो कि होती है। देश के  संचालन के लिए यह महत्वपूर्ण है। लेकिन हम यही चर्चा करते रहें इतना महत्वपूर्ण नहीं है। समाज ने अपना मत दे दिया और उसके अनुसार अब काम हो रहा है। संघ के लोग इसमें नहीं पड़ते। हम अपना कर्तव्य करते रहते हैं। संघ प्रमुख ने कहा, जो वास्तविक सेवक है उसकी एक मर्यादा रहती है। काम करते सब लोग हैं लेकिन कार्य करते समय वह मर्यादा का पालन भी करता है। जैसा तथागत ने भी बताया है कि कुशलस्य उपसंपदा। शरीर को भूखा नहीं रखना है लेकिन कौशल पूर्वक जीविका कमानी है। इससे दूसरों को धक्का नहीं लगना चाहिए। यह मर्यादा निहित है। इसी तरह की मर्यादा के साथ हम लोग काम करते हैं। काम करने वाला मर्यादा का ध्यान रखता है। जो मर्यादा का पालन करता है उसमें अहंकार नहीं आता और  वही सेवक कहलाने का अधिकारी है। भागवत ने कहा कि चुनाव में स्पर्धा रहती है इसलिए किसी को पीछा रहने का काम होता है। लेकिन इसमें भी मर्यादा है। असत्य का उपयोग नहीं करना चाहिए। संसद में बैठकर सहमित बनाकर चलाने के लिए चुनाव होते हैं। चित्त अलग-अलग होने के बाद भी साथ ही चलना है। सबका चित्त एक जैसा नहीं हो सकता इसलिए बहुमत का प्रयोग किया जाता है। सिक्के के दोनों पहलू होते हैं इसीलिए संसद में सत्ता और प्रतिपक्ष की व्यवस्था है। भागवत ने कहा, प्रचार के दौरान मर्यादा का ध्यान नहीं रखा गया। यह भी नहीं सोचा गया कि इससे समाज में मनमुटाव पैदा हो सकता है। बिना कारण संघ को भी इसमें खींचा गया। तकनीक का सहारा लेकर असत्य बातों को प्रसारित किया गया। क्या विद्या और विज्ञान का यही उपयोग है। ऐसे देश कैसे चलेगा। मैं विरोधी पक्ष नहीं प्रतिपक्ष कहता हूं। उसे विरोधी नहीं मानता।उसका भी विचार होना चाहिए। चुनाव लड़ने में मर्यादा का पालन नहीं हुआ। भागवत ने कहा, सरकार बन गई। वही सरकार फिर से आ गई। 10 सालों में बहुत कुछ अच्छा हुआ। हमारे देश में आर्थिक स्थिति अच्छी हुई। सामरिक स्थिति पहले से अधिक अच्छी है। दुनियाभर में प्रतिष्ठा बढ़ी है। कला और खेल के क्षेत्र  में हम सब लोग आगे बढ़े हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि हम चुनौतियों सो मुक्त हो गए हैं। अभी आवेश से मुक्त होकर आगे वाली बातों का विचार करना है। मणिपुर पर भी बोले मोहन भागवत मणिपुर को लेकर मोहन भागवत ने कहा कि देश में शांति की जरूरत है। एक साल से मणिपुर शांति की राह देख रहा है। उससे पहले 10 साल एकदम शांत रहा। लेकिन फिर ऐसा लगा कि पुराना जन कल्चर समाप्त हो गया। अचानक वहां उपजी या उपजाई गई कलह अब तक चल रही है। उसका ध्यान कौन देगा। प्राथमिकता देकर उसपर विचार करना चाहिए।    

साल 2024 का दूसरा सूर्य ग्रहण लगने जा रहा, 2 अक्टूबर को लगेगा सूर्य ग्रहण, भारत में दिखाई नहीं देगा

नई दिल्ली सूर्य ग्रहण एक खगोलिय घटना है, जो तब होती है जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच से गुजरता है। सनातन धर्म में चंद्र और सूर्य दोनों ग्रहों का विशेष महत्व है। धार्मिक दृष्टि से ग्रहण काल को शुभ नहीं माना जाता। इस बार साल 2024 का दूसरा ग्रहण लगने जा रहा है। साल का पहला ग्रहण 8 अप्रैल को लगा था। हालांकि पहला सूर्य ग्रहण भारत में नहीं नजर आया था। तो आइए जानते हैं कि इस साल का दूसरा सूर्य ग्रहण कब लगने जा रहा है- When is the second solar eclipse in 2024 में दूसरा सूर्य ग्रहण कब है इस साल का दूसरा सूर्य ग्रहण आश्विन मास की अमावस्या तिथि यानी 2 अक्टूबर, 2024 को लगने जा रहा है। सूर्य ग्रहण रात 9 बजकर 13 मिनट से आरंभ होगा और अगले दिन यानी 3 अक्टूबर की सुबह 3 बजकर 17 मिनट तक रहेगा। दूसरे सूर्य ग्रहण की अवधि करीब 6 घंट तक की रहेगी। यह ग्रहण काफी लंबे समय तक रहेगा। कहां-कहां दिखाई देगा दूसरा सूर्य ग्रहण साल का दूसरा सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा लेकिन 2 अक्टूबर, 2024 को लगने वाला दूसरा सूर्य ग्रहण अमेरिका, अर्जेटीना, अंटार्कटिका, उरुग्वे, होनोलूलू, ब्यूनत आयर्स, आर्कटिक, प्रशांत महासागर, पेरी, चिली, और आइलैंड के उत्तरी भाग में दिखाई देगा। सूर्य ग्रहण में सूतक काल का समय शास्त्रों के अनुसार, सूर्य ग्रहण लगने से ठीक 12 घंटे पहले सूतक काल शुरू हो जाता है। 2 अक्टूबर को लगने वाला दूसरा सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। ऐसे में सूतक काल भारत में मान्य नहीं होगा। जब सूतक काल लगता है तो सभी शुभ और मांगलिक कार्यों के साथ-साथ पूजा-पाठ भी नहीं किए जाते। गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के समय विशेष सावधानी बरतनी पड़ती है। सूतक काल के दौरान मंदिरों के कपाट भी बंद कर दिए जाते हैं। ग्रहण खत्म होने के बाद मंदिर को गंगा जल से पवित्र करके कपाट खोले जाते हैं। कहां लगेगा सूर्य ग्रहण भारत में जो लोग इस सूर्य ग्रहण को देखने का इंतजार कर रहे हैं, उन्हें निराश होना पड़ेगा। भारत के हिसाब से यह सूर्य ग्रहण रात में लगेगा, इसलिए यह हमें नहीं दिखेगा। भारत में अदृश्य रहते हुए भी वलयाकार ग्रहण दुनिया के कई देशों में दिखेगा। दक्षिण अमेरिका के उत्तरी हिस्सों, आर्कटिक, अर्जेंटीना, ब्राजील, पेरू, फिजी, चिली और प्रशांत महासागर में इस खगोलीय घटना को देखा जा सकेगा। इस इलाके में मौजूद खगोल विज्ञानी उत्साह के साथ सूर्य ग्रहण का इंतजार कर रहे हैं। क्या होता है सूर्य ग्रहण हमारे सौर मंडल में सभी ग्रह सूर्य का चक्कर लगाते हैं। पृथ्वी भी उनमें से एक है। लेकिन चंद्रमा पृथ्वी का चक्कर लगाता है। नासा के मुताबिक जब चक्कर लगाते हुए चंद्रमा जब पृथ्वी और सूर्य के बीच आ जाए तो यह सूर्य ग्रहण कहलाता है। इस दौरान धरती के कुछ हिस्सों में प्रकाश नहीं पहुंच पाता है। अंतरिक्ष से अगर देखें तो एक विशाल परछाई पृथ्वी की सतह पर दिखाई देगी। वहीं जब चंद्रमा और सूर्य के बीच में पृथ्वी आ जाए तो यह चंद्र ग्रहण कहलाता है।

BJP विधायक दल की बैठक में हुआ फैसला, ओडिशा के नए मुख्यमंत्री होंगे मोहन मांझी

ओडिशा मोहन मांझी ओडिशा के नए मुख्यमंत्री होंगे। बीजेपी विधायक दल की बैठक में मोहन मांझी को नेता चुना गया। इसके साथ ही केवी देव सिंह और प्रभाती परिदा दो डिप्टी सीएम भी बनाए गए हैं। ओडिशा में नई सरकार कल शपथ लेगी। सूत्रों के मुताबिक, शपथग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजना सिंह शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्री भी शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हो सकते हैं। शपथग्रहण समारोह में ओडिशा के निवर्तमान मुख्यमंत्री नवीन पटनायक भी शामिल हो सकते हैं। बीजेपी के पांच नेताओं ने नवीन पटनायक को शपथग्रहण में शामिल होने का न्यौता दिया है। इससे पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव पर्यवेक्षक बनकर ओडिशा गए थे। भुवनेश्वर में बीजेपी विधायक दल की बैठक हुई। इस बैठक में राजनाथ सिंह और भूपेंद्र सिंह ने बतौर पर्यवेक्षक हिस्सा लिया। सूत्रों के मुताबिक, राजनाथ सिंह ने मोहन मांझी के नाम को आगे बढ़ाया और सभी विधायकों ने इस पर अपनी सहमति जता दी। इसके साथ ही दो उपमुख्यमंत्रियों के नाम का भी ऐलान हुआ। अश्विनी वैष्णव भी बैठक में मौजूद रहे। राजनाथ सिंह ने मोहन मांझी को गुलदस्ता देकर शुभकामनाएं दीं।   राजनाथ सिंह ने बताया कि केवी देव सिंह ने मोहन मांझी के नाम का प्रस्ताव रखा। इसके साथ ही विधायकों ने तालियां बजाकर मोहन मांझी के नाम का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि उपमुख्यमंत्री के रूप में केवी देव सिंह और प्रभाती परिदा को नामित किया है। मोहन मांझी के नाम का ऐलान होते ही बधाईयों का तांता लग गया है। सभी विधायक उन्हें बधाई दे रहे हैं। मोहन मांझी आदिवासी समाज से आते हैं। छत्तीसगढ़ के बाद बीजेपी ने दूसरा आदिवासी मुख्यमंत्री बनाया है। बता दें कि लोकसभा चुनाव के साथ हुए विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने 147 सीटों में से 78 सीटों पर जीत दर्ज की है। वहीं नवीन पटनायक की अगुवाई वाली बीजू जनता दल (BJD) को 51 सीटें मिली हैं। कांग्रेस को 14 और चार सीटें अन्य को मिली हैं। बीजेपी ने इस विधानसभा चुनाव में बीजेडी के 25 साल के शासन को खत्म कर सत्ता हासिल की है।

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