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रंगों में बसी एकता की भावना, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने होली मिलन समारोह में की शिरकत

मुख्यमंत्री युवा योजना से बदली तकदीर, लखनऊ की खुशी बनीं महिला उद्यमिता की नई पहचान ब्याज मुक्त और गारंटी मुक्त ऋण से युवाओं को मिल रहा स्वरोजगार का अवसर ‘ग्लैम हाउस’ के जरिए ब्यूटी बिजनेस में बनाई अलग पहचान   यूनिसेक्स सैलून और एकेडमी से अन्य महिलाओं को भी दे रहीं रोजगार लखनऊ ‘मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान’ के माध्यम से योगी सरकार ब्याज मुक्त और गारंटी मुक्त ऋण प्रदान कर युवाओं के स्वरोजगार के सपनों को नए पंख देने का काम कर रही है। इसी योजना का लाभ लेकर योगी सरकार के ‘आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश’ के संकल्प को लखनऊ की रहने वाली खुशी गुप्ता ने धरातल पर उतारकर उद्यमी बनने का सपना साकार किया है। उन्होंने न सिर्फ ब्यूटी बिजनेस में अपनी अलग पहचान बनाई, बल्कि वे अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणास्रोत बन चुकीं हैं। लखनऊ की खुशी बनीं महिला उद्यमिता की नई पहचान खुशी गुप्ता ने बताया कि वे लखनऊ में बीए एलएलबी की पढ़ाई कर रहीं हैं। उनकी मेकअप और ब्यूटी पार्लर में रुचि है। इसके लिए उन्होंने प्रोफेशनल कोर्स भी किया। उनको ‘मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान’ योजना के बारे में जानकारी मिली। जिसके बाद उन्होंने बैंक जाकर योजना की जानकारी ली और एक हफ्ते का उद्यमिता प्रशिक्षण भी लिया। इस योजना के तहत उनको 4.5 लाख रुपए का ऋण प्राप्त हुआ। यह पूरी तरह ब्याज मुक्त और गारंटी मुक्त था। मुख्यमंत्री युवा योजना के तहत मिली वित्तीय सहायता से उन्होंने से सैलून का इंटीरियर और वेंडर्स का भुगतान किया। लखनऊ के खुर्रम नगर इलाके में 2025 में ‘ग्लैम हाउस’ के नाम से यूनिसेक्स सैलून, स्टूडियो और एकेडमी की शुरुआत की। खुशी आज न सिर्फ हर महीने लाखों रुपए कमा रहीं है, बल्कि अन्य महिलाओं को भी रोजगार दे रहीं हैं।   ब्याज मुक्त और गारंटी मुक्त ऋण से प्रदेश के युवा बन रहे उद्यमी  योगी सरकार ‘मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान’ के तहत प्रदेश के 21 से 40 वर्ष तक के युवाओं को व्यापार जगत में मुख्यधारा से जोड़ रही है। योजना के तहत ब्याज मुक्त और गारंटी मुक्त 5 लाख रुपए तक का ऋण उपलब्ध करवाती है। आज खुशी जैसी प्रदेश की हजारों महिलाएं सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों के माध्यम से उत्तर प्रदेश की जीडीपी में अपना योगदान दे रहीं हैं। खुशी की कहानी उन सभी महिलाओं के लिए प्रेरणा है, जो अपनी पहचान बनाना चाहती हैं।

रातों-रात इंदौर में हुआ भयावह हादसा, आग में जलकर 8 की मौत; रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

इंदौर  इंदौर के तिलक थाना क्षेत्र के छोटा राजवाड़ा के पास प्रीति नगर में एक घर में भीषण आग लई। इस हादसे में मकान मालिक मनोज पुगलिया सहित 8 लोगों की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि कार में आग लगने के बाद वह फैलते हुए पूरे घर को चपेट में ले लिया। देखते ही देखते पूरा घर जलकर खाक हो गया। घर से अभी तक 8 लाशें निकाली गई हैं। एसीपी कुंदन मंडलोई ने इस हादसे में मकान मालिक सहित 8 लोगों की जानकारी दी है। इंदौर शहर के छोटा राजवाड़ा क्षेत्र स्थित प्रीति नगर में देर रात एक भीषण आगजनी की घटना ने पूरे इलाके को दहला दिया। तिलक नगर थाना क्षेत्र के अंतर्गत हुए इस हादसे में एक कार में लगी आग ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया और पूरे मकान को अपनी चपेट में ले लिया। इस दर्दनाक घटना में मकान मालिक मनोज पुगलिया सहित कुल 8 लोगों की मौत हो गई, जिससे क्षेत्र में शोक की लहर फैल गई है। आग सबसे पहले घर के बाहर खड़ी एक कार में लगी प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, आग सबसे पहले घर के बाहर खड़ी एक कार में लगी। आग लगने के कारणों का अभी तक स्पष्ट पता नहीं चल सका है। आशंका जताई जा रही है कि शॉर्ट सर्किट या तकनीकी खराबी इसकी वजह हो सकती है। कार में लगी आग तेजी से फैलती हुई पूरे घर तक पहुंच गई और कुछ ही मिनटों में मकान धू-धू कर जलने लगा। आग इतनी भीषण थी कि घर में मौजूद लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिल सका। कैसे लगी आग दरअसल, पुगलिया परिवार में यह लाशें बिछी हैं. इस परिवार ने घर के बाहर खड़ी इलेक्ट्रिक कार को चार्जिंग पर लगाया था. मंगलवार रात से ईवी की चार्जिंग चल रही थी. चार्ज में लगाकर सभी सो गए थे. अचानक बुधवार तड़के तीन-चार बजे के आसपास चार्जिंग पॉइंट में शॉर्ट सर्किट हो गया. इलेक्ट्रिक कार तुरंत आग का गोला बन गई. आग तेजी से घर की ओर फैल गई और घर के अंदर रखे गैस सिलेंडरों तक पहुंच गई. इसके बाद जो धमाके हुए, उसका शोर पूरे इंदौर शहर में सुनाई दिया। कैसे धमाकों से दहला इंदौर जी हां, ईवी चार्जिंग वाले प्वाइंट से लगी यह आग देखते ही देखते घर में रखे गैस सिलेंडरों तक पहुंच गई. इसके बाद एक के बाद एक जोरदार धमाके से फट गए. धमाके इतने तेज थे कि पूरा इलाका दहल गया. घर का एक हिस्सा ढह गया. अंदर सो रहे लोग सोते ही रह गए और किसी को संभलने का भी मौका नहीं मिला. बताया जा रहा है कि इस परिवार में कोई फंक्शन था. इसके कारण कई रिश्तेदार आए थे। 8 लोग जिंदा जलकर मरे बहरहाल, इस हादसे में अब तक 8  लोगों की जलकर मौत हो चुकी है. ये लोग जिंदा ही आग में जल गए. वहीं 3 लोगों ने किसी तरह अपनी जान बचा ली, लेकिन वे गंभीर रूप से घायल हैं. प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, आग इतनी तेजी से फैली कि लोगों को निकलने का मौका ही नहीं मिला. संकरी गलियों और तेज लपटों की वजह से फायर ब्रिगेड को भी राहत कार्य में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा. घर में लगी आग बुझाने की कोशिश जारी है। प्रशासन मौके पर मौजूद इस बीच पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंच गई है. पुलिस ने बताया कि शुरुआती जांच में शॉर्ट सर्किट और गैस सिलेंडर का विस्फोट मुख्य कारण लग रहा है. इलेक्ट्रिक कार की बैटरी में भी आग लगने की आशंका जताई जा रही है. पूरे मामले की जांच चल रही है. इंदौर के लोग इस हादसे से काफी सदमे में हैं।

चाय और दूध की कीमतों में बढ़ोतरी का डर, LPG की किल्लत से महंगे हो सकते हैं दाम

नई दिल्ली ईरान-इजराइल के बीच बढ़ते तनाव के कारण भारत में एलपीजी की किल्लत देखने को मिल रही है. कई जगह लोगों को लंबी लाइनों में लगकर महंगे दाम पर गैस सिलेंडर खरीदना पड़ रहा है. एलपीजी की बढ़ती कीमतों का असर अब आम लोगों तक पहुंच गया है. चाय बेचने वालों ने भी चाय की कीमत 10 रुपये से बढ़ाकर 15 रुपये कर दी है. यह संकट सिर्फ रेस्टोरेंट और होटल तक सीमित नहीं है, बल्कि दूध के कारोबार पर भी इसका असर पड़ रहा है. भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है। पहले गल्फ देशों से 85-90 प्रतिशत एलपीजी आती थी, लेकिन अब आयात पर संकट आ गया है. जिससे घरेलू गैस के साथ-साथ इंडस्ट्रीज को भी मार पड़ रही है. रेस्टोरेंट, होटल पहले से परेशान थे और अब डेयरी वाले भी इसकी मार खा रहे हैं. डेयरी उद्योग में एलपीजी का इस्तेमाल बहुत जरूरी है. दूध को पाश्चराइजेशन (खास तापमान पर गर्म करके बैक्टीरिया मारना) के लिए बड़ी मात्रा में गैस चाहिए. बिना नियमित गैस के दूध जल्दी खराब हो सकता है. छोटे-मध्यम डेयरी प्लांट्स को यह समस्या सबसे ज्यादा झेलनी पड़ रही है. महाराष्ट्र जैसे राज्यों में कई डेयरी मालिकों ने बताया कि गैस न मिलने से प्रोसेसिंग और पैकेजिंग के काम में रुकावट आ रही है. इससे दूध की सप्लाई पर असर पड़ सकता है। मुश्किल में पड़ी दूध की पैकेजिंग इस इंडस्ट्री में सबसे बड़ी समस्या पैकेजिंग की है. दूध के प्लास्टिक पैकेट और कार्टन बनाने वाली फैक्टरियां भी एलपीजी पर निर्भर हैं. इन फैक्टरियों को पर्याप्त गैस नहीं मिल रही, इसलिए प्रोडक्शन धीमा हो गया है. नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, गोवर्धन डेयरी के फाउंडर देवेंद्र शाह ने कहा, “हमारे पास अभी सिर्फ 10 दिन का पैकेजिंग मटेरियल स्टॉक बचा है. अगर सप्लाई जल्द नॉर्मल नहीं हुई तो दूध सप्लाई करना मुश्किल हो जाएगा.” चेंबूर के सुरेश डेयरी के मैनेजर शरीब शेख ने भी चेतावनी दी, “अगले 10 दिनों में स्थिति नहीं सुधरी तो पूरी डेयरी इंडस्ट्री बड़े संकट में फंस सकती है। दूध स्टोर करने की क्षमता कम इसके अलावा मनीकंट्रोल की रिपोर्ट में बताया गया है कि बॉम्बे मिल्क प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सीके सिंह के अनुसार, हाल ही में भैंस के दूध के तीन बड़े ऑर्डर रद्द हुए. छोटी डेयरियों के पास दूध स्टोर करने की क्षमता नहीं है. इसलिए वे गाय और भैंस का दूध कम कीमतों पर बेचने को मजबूर हैं. यह संकट सिर्फ महाराष्ट्र तक सीमित नहीं है. देश के कई हिस्सों में डेयरी ऑपरेटर्स इसी तरह की शिकायतें कर रहे हैं. होटल और रेस्टोरेंट पहले से दूध के ऑर्डर कम कर रहे हैं. अगर पैकेजिंग रुक गई तो दुकानों पर दूध के पैकेट कम मिलेंगे. इससे आम लोग प्रभावित होंगे, खासकर शहरों में जहां लोग पैकेज्ड मिल्क पर निर्भर हैं. गांवों में जहां ढीला दूध बिकता है, वहां भी प्रोसेसिंग प्रभावित हो सकती है। डेयरी मालिकों की मांग क्या है? डेयरी मालिकों की मांग है कि कमर्शियल एलपीजी की सप्लाई प्राथमिकता से बढ़ाई जाए. उनका कहना है कि दूध एक जरूरी चीज है, इसे संकट में नहीं छोड़ना चाहिए. अगर 10 दिन में सुधार नहीं हुआ तो दूध की कीमतें बढ़ सकती हैं या उपलब्धता कम हो सकती है. कुछ जगहों पर किसान बायोगैस जैसे विकल्प अपना रहे हैं, लेकिन बड़े स्तर पर यह मुश्किल है। भारत अपनी जरूरत का करीब 88% कच्चा तेल, 50% प्राकृतिक गैस और 60% एलपीजी आयात करता है. पहले भारत का बड़ा हिस्सा तेल, गैस और एलपीजी सऊदी अरब और यूएई जैसे पश्चिम एशियाई देशों से आता था. लेकिन ईरान-अमेरिका-इजराइल के बीच बढ़ते तनाव और होर्मुज स्ट्रेट बंद होने की वजह से सप्लाई प्रभावित हुई है. हालांकि, भारत ने रूस जैसे देशों से तेल खरीदकर कच्चे तेल की सप्लाई कुछ हद तक संभाली है, लेकिन औद्योगिक ग्राहकों के लिए गैस की सप्लाई कम कर दी गई है और होटल-रेस्तरां जैसे कमर्शियल इस्तेमाल के लिए एलपीजी में भी कटौती की गई है। यह संकट अस्थायी है, लेकिन इसका असर आम आदमी तक पहुंच रहा है. पहले रेस्टोरेंट में एक्स्ट्रा चार्ज लगे, अब दूध पर खतरा मंडरा रहा है. सरकार को जल्द कदम उठाने होंगे ताकि दूध जैसी बेसिक चीज प्रभावित न हो।

गेहूँ खरीदी 1 अप्रैल से इंदौर, उज्जैन, भोपाल और नर्मदापुरम में, अन्य संभागों में 7 अप्रैल से शुरू होगी: खाद्य मंत्री राजपूत

इंदौर, उज्जैन, भोपाल और नर्मदापुरम संभाग में 1 अप्रैल तथा शेष संभागों में 7 अप्रैल से होगी गेहूँ खरीदी : खाद्य मंत्री  राजपूत गेहूँ उपार्जन के लिये 19 लाख से अधिक किसानों ने कराया पंजीयन भोपाल  खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री  गोविंद सिंह राजपूत ने बताया है कि समर्थन मूल्य पर गेहूँ की खरीदी इंदौर, उज्जैन, भोपाल एवं नर्मदापुरम संभाग में 1 अप्रैल से तथा शेष संभागों में 7 अप्रैल से की जाएगी। गेहूँ की खरीदी शासकीय कार्य दिवसों में सुबह 8 से रात 8 बजे तक की जाएगी। उन्होंने बताया है कि सरकार ने गेहूं खरीदी पर 40 रुपये अतिरिक्त बोनस देने का भी फैसला लिया है। अब प्रदेश में गेहूं की खरीदी 2625 रुपए प्रति क्विंटल की दर से की जाएगी। मंत्री  राजपूत ने बताया है कि रबी विपणन वर्ष 2026-27 में समर्थन मूल्य पर गेहूँ उपार्जन के लिये कुल 19 लाख 4 हजार 651 किसानों ने पंजीयन कराया है। गत् वर्ष 15 लाख 44 हजार किसानों ने पंजीयन कराया था। जिला इंदौर में 71713, झाबुआ में 7120, धार में 44466, अलीराजपुर में 476, खण्डवा में 35104, बुरहानपुर में 523, बड़वानी में 4724, खरगोन में 27557, शाजापुर में 73878, नीमच में 19445, उज्जैन में 123281, आगर-मालवा में 42446, मंदसौर में 65195, देवास में 76442, रतलाम, 45912, अशोक नगर में 16454, दतिया में 19118, शिवपुरी में 21312, ग्वालियर में 13763, गुना में 22914, भिण्ड में 12788, मुरैना में 10893, श्योपुर में 17617, डिण्डौरी में 4478, मण्डला में 19611, जबलपुर में 49642, कटनी में 52126, सिवनी में 53288, नरसिंहपुर में 38416, छिन्दवाड़ा में 29163, बालाघाट में 4383, पांढुर्णा में 863, नर्मदापुर में 71831, बैतूल में 18686, हरदा में 40273, भोपाल में 37129, रायसेन में 76264, विदिशा में 86479, सीहोर में 101793, राजगढ़ 98537, सीधी में 12813, सिंगरौली में 10970, महूगंज में 8018, सतना में 56376, मैहर में 19787, रीवा में 46923, अनुपपुर में 882, शहडोल में 9479, उमरिया में 13445, टीकमगढ़ में 15552, निवाड़ी में 4116, सागर में 75791, पन्ना में 30052, दमोह में 39938 और जिला छतपुर में 34378 किसानों ने पंजीयन कराया है।  

36 महीने में तैयार होगा न्यू एमवाय अस्पताल, इंदौर में होंगे 34 ऑपरेशन थिएटर और 320 ICU बेड्स

इंदौर  मध्यप्रदेश का सबसे बड़ा हॉस्पिटल इंदौर में बनने जा रहा है। यह हॉस्पिटल वर्तमान एमवाय हॉस्पिटल से भी बड़ा होगा। इससे बनाने के लिए तैयारी शुरू हो गई है। इंदौर में बनने वाले प्रदेश के सबसे बड़े हॉस्पिटल का नाम न्यू एमवाय हॉस्पिटल रखा जाएगा। चिकित्सा शिक्षा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार 1610 बेड वाले अत्याधुनिक टीचिंग हॉस्पिटल का प्रोजेक्ट शुरू कर दिया गया है। इस हॉस्पिटल को तैयार करने के लिए प्रशासनिक रूप से 773.07 करोड़ रुपए की मंजूरी दी जा चुकी है। इंदौर में बनने वाले नए एमवाय हॉस्पिटल को तैयार करने में अनुमानित लागत लगभग 586.65 करोड़ रुपए आएगी। इसकी टेंडर प्रक्रिया चल रही है। जिसे जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा। विधायक गोलू शुक्ला ने बताया कि एमवाय हॉस्पिटल हमारे मालवा निमाड़ की संजीवनी बूटी है। अब हम नया हॉस्पिटल 1610 बेड का बनाने जा रहे हैं। नए हॉस्पिटल बनाने का काम अब शुरू होने वाला है। दो से चार दिन में ही इसका काम शुरू हो जाएगा। तीन साल में अस्पताल पूरी तरह बनकर तैयार हो जाएगा। ऐसा होगा नए अस्पताल का सेट अप मध्य प्रदेश भवन विकास निगम द्वारा निर्मित किए जाने वाले नए अस्पताल भवन में मेडिसिन वार्ड में कुल 330 बिस्तर, सर्जरी विभाग में 330 बिस्तर, ऑर्थोपेडिक्स विभाग में 180 बिस्तर, शिशु रोग सर्जरी विभाग में 60, शिशु रोग वार्ड में 100, न्यूरो सर्जरी में 60, नाक कान गला विभाग में कुल 30, दंत रोग विभाग में 20, त्वचा रोग विभाग में कुल 20, मातृ एवं शिशु वार्ड में 100, नेत्र वार्ड में 80 तथा इमरजेंसी मेडिसिन वार्ड में भर्ती होने वाले मरीजों के लिए 180 बिस्तरीय सुविधा उपलब्ध रहेगी. नए अस्पताल भवन में कुल 1450 बिस्तरीय वार्डों के निर्माण पर कुल 528 करोड़ रुपए व्यय होंगे. इसके अलावा 550 बिस्तरीय नर्सिंग हॉस्टल के निर्माण पर 21.37 करोड रुपए, 250 सीटर मिनी ऑडिटोरियम के निर्माण पर 1.60 करोड. रुपए व्यय किए जाएंगे. इसके अलावा सार्वजनिक पार्किंग के निर्माण पर 31.50 करोड़ रुपए, विद्युतीकरण, बाउंड्रीवॉल एवं सोलर पैनल स्थापना पर 25.53 करोड रुपए तथा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, प्लंबिंग एवं वाटर सप्लाई संबंधी कार्यों कार्य पर लगभग 10 करोड़ रुपए लागत आएगी. 81.5 एकड़ में बनकर तैयार होगा हॉस्पिटल 3D विजुअलाइजेशन में अस्पताल देखने में बिल्कुल आधुनिक लग रहा है। सोलर पैनल, हरे-भरे गार्डन, फाउंटेन, वाइड प्लाजा, एंबुलेंस एंट्री और भव्य प्रवेश द्वार। MPBDC के जरिए यह ब्राउनफील्ड प्रोजेक्ट 81.5 एकड़ में बन रहा है। डीडीएफ कंसल्टेंट्स आर्किटेक्ट हैं और आयरन ट्रायंगल लिमिटेड ने इसको बनाने का ठेका लिया है। इस हॉस्पिटल को पूरा करने के लिए सरकार ने 36 महीने की समय सीमा तय की है। न्यू एमवाय के पास में मौजूद कई पुरानी इमारतें (ओल्ड क्वार्टर्स, कुछ ब्लॉक) तोड़े जाएंगी। वहीं एमजीएम मेडिकल कॉलेज, चाचा नेहरू हॉस्पिटल, सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक, कैंसर हॉस्पिटल बरकरार रहेंगे इनका सिर्फ रिनावेशन कार्य किया जाएगा। प्रदेश का सबसे बड़ा हॉस्पिटल होगा न्यू एमवाय एमजीएम मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया ने बताया कि मध्य प्रदेश शासन का यह प्लान है कि नया एमवाय हॉस्पिटल बनाया जाए। क्योंकि वर्तमान एमवाय में चौदह सौ पचास बेड है, जो की हमेशा ओवरलोडेड रहते हैं। पेशेंट की संख्या ज्यादा होने की वजह से लोड ज्यादा होने की वजह से एक नए अस्पताल की आवश्यकता है। जिसके तहत एक नई बिल्डिंग बनाई जा रही है। वर्तमान में एमजीएम मेडिकल कॉलेज प्रदेश में सबसे ज्यादा बिस्तरों की संख्या के साथ आज भी मध्य प्रदेश में सबसे बड़ा अस्पताल है। अब यह नया एमवाय बन जाएगा तो हमारी क्षमता ओर अधिक हो जाएगी, जिससे हम दिल्ली और मुंबई के बराबर में खड़े हो जाएंगे।

यूपी में अंडों पर एक्सपायरी डेट लिखने का आदेश, नई दिशा-निर्देश जारी

लखनऊ उत्तर प्रदेश सरकार ने उपभोक्ताओं की सेहत की सुरक्षा के लिए बड़ा फैसला लिया है. अब 1 अप्रैल से राज्य में हर अंडे पर उत्पादन तिथि (लेड डेट) और एक्सपायरी डेट की मुहर लगाना जरूरी हो जाएगा. इसका मतलब है कि अब दुकानदार “ताजा अंडा” कहकर पुराने या खराब अंडे नहीं बेच सकेंगे. ग्राहक खुद डेट देखकर समझ सकते हैं कि अंडा कितना पुराना है और कब तक सुरक्षित है। यह नियम पशुपालन विभाग और खाद्य सुरक्षा विभाग के निर्देश पर लागू किया जा रहा है. मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने बताया कि अंडे सीधे इंसान के स्वास्थ्य से जुड़े होते हैं. पहले कई जगहों पर पुराने अंडे बेचे जाते थे और ग्राहकों को इसकी जानकारी नहीं होती थी. अब यह नियम लागू होने से पारदर्शिता आएगी और लोगों को सुरक्षित अंडे मिलेंगे। अंडे कितने दिन तक सुरक्षित रहते हैं? सामान्य तापमान (लगभग 30 डिग्री सेल्सियस) पर अंडे सिर्फ 2 हफ्ते तक अच्छे रहते हैं. अगर इन्हें ठंडे स्थान पर (2 से 8 डिग्री सेल्सियस) रखा जाए, तो 5 हफ्ते तक इस्तेमाल किए जा सकते हैं. लेकिन कई दुकानदार और व्यापारी ठंडे स्टोरेज का सही इस्तेमाल नहीं करते थे. अब मुहर से ग्राहक आसानी से चेक कर सकेंगे। नियम तोड़ने पर क्या होगा? अगर कोई व्यापारी या दुकानदार नियम नहीं मानता, तो उसके अंडे जब्त कर लिए जाएंगे. या तो उन्हें नष्ट कर दिया जाएगा या उन पर साफ लिख दिया जाएगा कि यह मानव उपभोग के लिए सुरक्षित नहीं है. विभाग सख्ती से जांच करेगा और कार्रवाई करेगा। कोल्ड स्टोरेज की स्थिति यूपी जैसे बड़े राज्य में अभी सिर्फ दो मुख्य कोल्ड स्टोरेज हैं. एक आगरा में और एक झांसी में. खाद्य सुरक्षा के नियमों के अनुसार, अंडों को सब्जियों के साथ एक ही कोल्ड स्टोरेज में नहीं रखा जा सकता, क्योंकि दोनों की तापमान जरूरत अलग होती है. व्यवस्था अभी सीमित है, लेकिन सरकार का कहना है कि बहाने अब नहीं चलेंगे. सभी को नियम मानने होंगे। उपभोक्ताओं के लिए फायदा पहले ग्राहक को अंदाजा लगाना पड़ता था कि अंडा कितना पुराना है. कई बार पुराने अंडे खाने से सेहत को नुकसान होता था. अब अंडा खुद अपनी “जन्म तिथि” और “एक्सपायरी” बताएगा. इससे लोग बेहतर चुनाव कर सकेंगे और सुरक्षित खाना खा सकेंगे. पशुपालन विभाग के अधिकारी कहते हैं कि यह फैसला सिर्फ एक आदेश नहीं है, बल्कि उपभोक्ता सुरक्षा की मजबूत कड़ी है। जल्द ही इस नियम का पूरे राज्य में सख्ती से पालन कराया जाएगा. दुकानदारों और उत्पादकों को पहले से तैयारी करने की सलाह दी गई है. यह कदम उत्तर प्रदेश में खाद्य सुरक्षा को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

बीजेपी को मिली 13 सीटों की बढ़त, राज्यसभा में बहुमत के लक्ष्य के करीब, जानें अगला कदम

 नई दिल्ली देश के 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों पर चुनाव के फाइनल नतीजे घोषित हो गए हैं, जिसमें 26 निर्विरोध चुने गए तो 11 सीटों पर मतदान के जरिए फैसला हो सका है. बीजेपी के अगुवाई वाले एनडीए को 22 सीटों पर जीत हासिल हुई है तो विपक्ष के खाते में 15 सीटें आईं है. राज्यसभा के इस चुनाव से बीजेपी की संसद के उच्च सदन में ताकत काफी बढ़ गई है, लेकिन बहुमत के आंकड़े से अभी भी वह दूर है। हालांकि, बीजेपी के अगुवाई वाला एनडीए गठबंधन बहुमत का आंकड़ा 2024 में ही हासिल कर चुका. अब राज्यों में बीजेपी की ताकत बढ़ने के बाद उसकी ताकत संसद के उच्च सदन यानि राज्यसभा में भी बढ़ी है. इसकी का नतीजा है कि 10 राज्यों की 37  राज्यसभा चुनाव में बीजेपी ही नहीं एनडीए की सीटें बढ़ गई है। राज्यसभा में सदस्यों की संख्या 245 है, जिसके लिहाज से बहुमत के लिए किसी भी दल को 123 सदस्यों की जरूरत होती है. ऐसे में सवाल यह उठता है कि 37 राज्यसभा सीटों पर चुनाव के बाद बीजेपी का नंबर कितना हो गया है और बहुमत से कितनी दूर है. इसके अलावा 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों से सदन के गणित पर क्या असर पड़ेंगे?  राज्यसभा में बीजेपी बहुमत से कितनी दूर देश के 10 राज्यों की जिन 37 राज्यसभा सीटों पर चुनाव हुए हैं, वो सीटें अप्रैल में खाली हो जाएंगी. चुनाव आयोग राज्यसभा सदस्यों के 6 साल के कार्यकाल पूरे होने से एक महीने पहले उनकी सीटों पर चुनाव करा लेता है. इसकी कड़ी में 37 राज्यसभा सीटों पर चुनाव हुए हैं.चुनाव से पूर्व बीजेपी के राज्यसभा में कुल 103 सांसद हैं, जिसमें से पार्टी के 9 सांसदों का कार्यकाल खत्म हो रहा है। 9 राज्यसभा सदस्यों के कार्यकाल खत्म होने से बीजेपी की सीटें उच्च सदन में कम होकर 94 पर हो रही है, लेकिन बीजेपी ने 37 राज्यसभा सीटों पर हुए चुनाव में  13 राज्यसभा जीतने में कामयाब रही है. इस तरह बीजेपी की सीटें बढ़कर 107 हो गई हैं. बीजेपी की राज्यसभा सीटें पहले से चार ज्यादा हो रही हैं, लेकिन उसके बाद भी बहुमत से दूर है। बीजेपी को राज्यसभा में अपने दम पर बहुमत का आंकड़ा हासिल करने के लिए 16 राज्यसभा सीट की जरूरत है. बीजेपी को 16 राज्यसभा की सीटों को जिताने के लिए 2026 के जून और नवंबर के चुनाव का ही नहीं बल्कि 2028 तक इंतजार करना पड़ सकता है, क्योंकि इसके बाद पार्टी राज्यसभा में अपनी ताकत बढ़ा सकती है। 37 राज्यसभा सीटें के चुनाव से क्या बदलेगा? देश के 10 राज्यों की कुल 37 राज्यसभा सीटों पर चुनाव हुए हैं, जिसमें सात राज्यों के 26 राज्यसभा सदस्य पहले निर्विरोध निर्वाचित चुन लिए गए थे. तीन राज्यों की 11 सीटों पर सोमवार को चुनाव हुए और उसके बाद नतीजे आए हैं.इस तरह 37 राज्यसभा सीटों के चुनाव का फाइनल नतीजे देखें तो बीजेपी के अगुवाई वाले एनडीए ने 22 सीटें जीती हैं तो विपक्ष के खाते में 15 सीटें आईं हैं। हरियाणा, बिहार और ओडिशा की 11 राज्यसभा सीटों में से एनडीए ने 9 सीटों पर जीत दर्ज की है जबकि विपक्ष को सिर्फ दो राज्यसभा सीटें ही मिल सकी है. बीजेपी ने 5 सीटें जीती हैं और उसके सहयोगियों को 4 सीट मिली है. कांग्रेस और बीजेडी एक-एक राज्यसभा सीटें ही मिल सकी हैं. राज्यसभा की जिन 26 सीटें पर पहले ही निर्विरोध सदस्य चुने गए हैं, उसमें एनडीए और विपक्ष को 13-13 सीटें मिली थी। राज्यसभा चुनाव का फाइनल नतीजे देखें तो 37 सीटों में एनडीए को 22 सीटें मिली है जबकि विपक्ष के हिस्सा में 15 सीट ही आ सकी हैं. इसमें बीजेपी को 13 सीटें मिली तो जबकि 9 सीटें उसके सहयोगी ने जीती हैं. विपक्ष को मिली 15 राज्यसभा सीटों में कांग्रेस ने 6 सीटें, टीएमसी ने 4 सीटें, डीएमके ने 3 सीटें, शरद पवार की एनसीपी को एक सीटें और एक सीट बीजेडी को मिली है। चुनाव पहले और नतीजे आने के समीकरण को देखते हैं तो एनडीए को 10 सीटों का फायदा तो विपक्ष को 10 सीटों का नुकसान हुआ. चुनाव से पहले एनडीए के पास 12 राज्यसभा सीटें थी, लेकिन अब बढ़कर 22 हो गई हैं जबकि विपक्ष के पास 25 राज्यसभा सीटें थी, जो अब घटकर के 15 रह गई हैं। राज्यसभा में एनडीए की कुल ताकत क्या है?  राज्यसभा में एनडीए की चुनाव से पहले बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए का आंकड़ा 131 सदस्यों का था, लेकिन 37 सीटों पर नतीजे के बाद अब एनडीए गठबंधन के सदस्यों की संख्या 141 हो गई है. बीजेपी के 107, AIADMK के पांच, जेडीयू के 4, एनसीपी के 4, टीडीपी के 2, UPPL के दो, शिवसेना के 2, जेडीएस के 1, आरएलडी के एक, एजीपी के 1,आरएलएसएम के एक, एनपीप के एक, PMK के एक और निर्दलीय तीन राज्यसभा सदस्य हैं. इसके अलावा 6 मनोनीत राज्यसभा सदस्यों का समर्थन भी बीजेपी को है। राज्यसभा चुनाव में विपक्ष को झटका लगा है, उसकी सीटें घट गई हैं. विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया ब्लाक’ की सीटें राज्यसभा में 74 पर पहुंच गई हैं, उसमें कांग्रेस के पास 28 सीटें, टीएमसी की 13, डीएमके की 8, सपा की 4, सीपीआई (एम) की तीन, नेशनल कॉफ्रेंस की 3, आरजेडी की 3, सीपीआई की 2, मुस्लिम लीग की 2, जेएमएम, शरद पवार की एनसीपी की एक, शिवसेना (य़ूबीटी) की एक, डीएमडीके की एक और तीन अन्य दल के सदस्य हैं.    एनडीए और इंडिया ब्लॉक से अलग रहने वाले दलों की संख्या राज्यसभा में देखें तो वह 28 है, उसमें आम आदमी पार्टी की 10, वाईएसआर कांग्रेस की 7, बीजेडी की 6, बीआरएस की 3, बसपा की एक की एमएनएफ की एक सीट है. इसके अलावा दो राज्यसभा खाली हैं. साथ ही यह भी बता दें कि राज्यसभा की 12 सीटों पर सदस्यों को राष्ट्रपति के द्वारा मनोनीत किया जाता है. ऐसे में बीजेपी के अगुवाई वाले एनडीए का नंबर उच्च सदन में बहुमत से ज्यादा है। राज्यसभा में बहुमत से क्या हासिल करेगी राज्यसभा में बहुमत से बीजेपी भले ही दूर है, लेकिन एनडीए के नंबर काफी मजबूत है. मोदी सरकार के लिए … Read more

एचपीवी टीकाकरण अभियान: मध्यप्रदेश में 14 वर्ष की एक लाख से अधिक बालिकाओं का टीकाकरण हुआ पूरा

एचपीवी टीकाकरण अभियान: मध्यप्रदेश में 14 वर्ष की एक लाख से अधिक बालिकाओं का टीकाकरण हुआ पूर्ण प्रदेश की बेटियों को सर्वाइकल कैंसर से सुरक्षित रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम: उप मुख्यमंत्री  शुक्ल भोपाल  उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने प्रदेश में 14 वर्ष आयु वर्ग की एक लाख से अधिक किशोरी बालिकाओं के सफल एचपीवी टीकाकरण पर स्वास्थ्य विभाग की टीम, जिला प्रशासन तथा सहयोगी संस्थाओं को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि प्रदेश की बेटियों को सर्वाइकल कैंसर से सुरक्षित रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने 28 फरवरी 2026 को अजमेर, राजस्थान से इस विशेष एचपीवी टीकाकरण अभियान का राष्ट्रीय शुभारंभ किया था। मध्यप्रदेश इस अभियान के अंतर्गत एक लाख से अधिक बालिकाओं का टीकाकरण कर देश में सर्वाधिक एचपीवी टीकाकरण वाला राज्य बन गया है। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि मंडला, बालाघाट, डिंडोरी, राजगढ़ और खरगोन जिलों का इस उपलब्धि में विशेष योगदान रहा है। प्रदेश में अभियान के सफल क्रियान्वयन के लिए जिला स्तर पर कलेक्टरों की अध्यक्षता में समन्वय स्थापित किया गया और स्कूल शिक्षा, महिला एवं बाल विकास, पंचायत विभाग सहित विभिन्न स्वैच्छिक संगठनों का महत्वपूर्ण सहयोग मिला। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने अभिभावकों से अपील की है कि वे अपनी 14 वर्ष आयु की बालिकाओं का एचपीवी टीकाकरण अवश्य कराएं, ताकि सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से उनकी सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रदेश का स्वास्थ्य विभाग बेटियों के सुरक्षित और स्वस्थ भविष्य के लिए पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है और शेष पात्र बालिकाओं का टीकाकरण भी शीघ्र पूर्ण किया जाएगा।  

धोनी और 5 अन्य दिग्गजों के लिए 2026 IPL हो सकता है आखिरी सीजन

नई दिल्ली इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के 19वें सीजन की शुरुआत 28 मार्च को होने जा रही है. आईपीएल 2026 का ओपनर मुकाबला रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) और सनराइजर्स हैदराबाद (SRH) के बीच बेंगलुरु के एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम में होना है. अभी भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड (BCCI) ने शुरुआती 20 मुकाबलों का ही शेड्यूल जारी किया है. बाकी मैचों का शेड्यूल जल्द आने की संभावना है। आगामी आईपीएल सीजन कुछ दिग्गज खिलाड़ियों के लिए आखिरी साबित हो सकता है. इन खिलाड़ियों ने वर्षों तक अपनी टीमों के लिए शानदार प्रदर्शन किया है और लीग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है. लेकिन अब उम्र, फिटनेस और टीम कॉम्बिनेशन को देखते हुए ये प्लेयर्स आगामी सीजन के बाद आईपीएल से रिटायरमेंट लेने का फैसला कर सकते हैं. आइए जानते हैं ऐसे ही पांच खिलाड़ियों के बारे में… 1.महेंद्र सिंह धोनी: चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी आईपीएल के सबसे लोकप्रिय खिलाड़ियों में शामिल हैं. हालांकि उनकी उम्र और फिटनेस को देखते हुए माना जा रहा है कि 2026 सीजन उनके लिए आखिरी हो सकता है. जुलाई 2026 में धोनी 45 साल के हो जाएंगे. पिछले कुछ सीजन में घुटने की समस्या के बावजूद उन्होंने छोटी लेकिन प्रभावी इनिंग्स खेलकर टीम को जीतें दिलाईं. सीएसके के सीईओ काशी विश्वनाथन ने पुष्टि की है कि वह इस पूरे सीजन में खेलेंगे, लेकिन कई फैन्स मानते हैं कि यह उनका इमोशनल फेयरवेल सीजन हो सकता है. धोनी की ही कप्तानी में सीएसके ने अपने पांचों आईपीएल खिताब जीते हैं। 2. सुनील नरेन: कैरेबियाई बॉलिंग ऑलराउंडर कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) के सबसे भरोसेमंद खिलाड़ियों में एक रहे हैं. कोलकाता नाइट राइडर्स के लिए उन्होंने आईपीएल में 192 विकेट लिए हैं और हाल के वर्षों में विस्फोटक ओपनर के रूप में भी खुद को साबित किया है. देखा जाए तो नरेन ने बल्ले से आईपीएल में 1780 रन बनाए हैं. मई में 38 साल के होने जा रहे नरेन पहले ही इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास ले चुके हैं. अब बढ़ती उम्र और फिटनेस चुनौतियों के कारण वह आईपीएल 2026 के बाद इस लीग से बतौर प्लेयर विदा ले सकते हैं। 3. ईशांत शर्मा: भारतीय तेज गेंदबाज ईशात शर्मा ने आईपीएल में कुल 7 टीमों के लिए मुकाबले खेले हैं. ईशांत का अंतरराष्ट्रीय करियर लगभग खत्म हो चुका है और वो नवंबर 2021 के बाद से टीम इंडिया से बाहर हैं. युवा तेज गेंदबाजों की बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच आईपीएल 2026 उनके करियर का अंतिम सीजन बन सकता है. ईशांत ने भारत के लिए 105 टेस्ट मैचों में 311 विकेट लिए और टीम की यादगार जीतों का हिस्सा रहे. आईपीएल के पिछले दो-तीन सीजन में ईशांत ने सहयोगी गेंदबाज की भूमिका निभाई है. फिलहाल गुजरात टाइटन्स (GT) का हिस्सा ईशांत अब 37 साल के हो चुके हैं और जल्द ही अपने करियर को लेकर बड़ा फैसला ले सकते हैं। 4. अजिंक्य रहाणे: तकनीकी रूप से मजबूत बल्लेबाज अजिंक्य रहाणे ने आईपीएल में 5032 रन बनाए हैं और वो 6 टीमों के लिए खेल चुके हैं. 2023 के सीजन में चेन्नई सुपर किंग्स के साथ उनका शानदार पुनरुत्थान देखने को मिला था. बाद में वो कोलकाता नाइट राइडर्स से जुड़े. पिछले साल उन्होंने कोलकाता नाइट राइडर्स की कप्तानी भी की, जहां टीम 8वें स्थान पर रही. इस सीजन भी रहाणे ही कोलकाता नाइट राइडर्स की कप्तानी करते नजर आ सकते हैं. जून में 38 साल के होने जा रहे रहाणे के लिए यह सीजन आखिरी हो सकता है। 5. मिचेल स्टार्क: ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाज मिचेल स्टार्क भी उन खिलाड़ियों में शामिल हैं जिनका आईपीएल 2026 के बाद भविष्य अनिश्चित माना जा रहा है. स्टार्क दुनिया के सबसे खतरनाक बाएं हाथ के तेज गेंदबाजों में गिने जाते हैं. कोलकाता नाइट राइडर्स को 2024 में खिताब जिताने में अहम भूमिका निभाने के बाद स्टार्क दिल्ली कैपिटल्स (DC) से जुड़े. 36 साल की उम्र और इंटरनेशनल क्रिकेट के व्यस्त कार्यक्रम को देखते हुए वह अपना वर्कलोड कम कर सकते हैं, इसलिए आईपीएल में बतौर खिलाड़ी उनका ये आखिरी सीजन हो सकता है. स्टार्क पहले ही टी20 इंटरनेशनल को अलविदा कह चुके हैं और उनका फोकस टेस्ट एवं ओडीआई क्रिकेट पर है।

पश्चिम बंगाल चुनाव: TMC ने पूरी ताकत झोंकी, भवानीपुर से चुनाव लड़ेंगी ममता बनर्जी

कोलकाता पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख ममता बनर्जी भवानीपुर से विधानसभा चुनाव लड़ेंगी। ममता बनर्जी ने मंगलवार को प्रेस कांफ्रेंस के दौरान विधानसभा चुनाव के लिए सभी 294 प्रत्याशियों की लिस्ट जारी कर दी। टीएमसी द्वारा जारी इस लिस्ट में ममता बनर्जी समेत पश्चिम बंगाल के कई दिग्गज टीएमसी नेताओं के नाम शामिल हैं, जिन्हें उम्मीदवार बनाया गया है। बता दें कि सीएम ममता बनर्जी भवानीपुर विधानसभा सीट से भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी के खिलाफ चुनाव मैदान में उतरेंगी। वहीं, हाल ही में टीएमसी में शामिल हुए पवित्र कर को नंदीग्राम से टिकट दिया गया है, जहां उनका भी मुकाबला सुवेंदु अधिकारी से होगा। भाजपा ने सुवेंदु अधिकारी को नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों विधानसभा सीटों से टिकट दिया है। इसके साथ ही सुजापुर सीट से सबीना यास्मीन, जंगीपुर सीट से जाकिर हुसैन, सागरदिघी सीट से बायरन बिस्वास, दिनहाटा सीट से उदयन गुहा चुनाव लड़ेंगे। वहीं, सिलीगुड़ी सीट से गौतम देव चुनाव मैदान में उतरे हैं। खगराम सीट से आशीष मारजीत चुनाव लड़ेंगे। करीमपुर सीट से सोहम चक्रवर्ती चुनाव लड़ेंगे। कंडी सीट से अपूर्व सरकार चुनाव लड़ेंगे। सिताई सीट से संगीता रॉय बसुनिया चुनाव लड़ेंगी। कृष्णानगर उत्तर सीट से अभिनव भट्टाचार्य चुनाव लड़ेंगे। नवद्वीप सीट से पुण्डरीकाक्ष साहा चुनाव लड़ेंगे। वहीं, हरिन्घाटा सीट से राजीव विश्वास चुनाव लड़ेंगे। स्वरूपनगर सीट से बीना मंडल चुनाव लड़ेंगी। राजगंज सीट से सपना बर्मन चुनाव लड़ेंगी। हबरा सीट से ज्योतिप्रिया मल्लिक चुनाव लड़ेंगे। कृष्णानगर नगर दक्षिण सीट से उज्जवल विश्वास चुनाव लड़ेंगे। राणाघाट दक्षिण सीट से सौगत कुमार बर्मन चुनाव लड़ेंगे। कल्याणी सीट से अतींद्रनाथ मंडल चुनाव लड़ेंगे। इससे पहले, सोमवार को भाजपा ने 144 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी की थी, जिसमें सुवेंदु अधिकारी समेत कई दिग्गज नेताओं के नाम शामिल थे। वहीं, वाम दल ने भी अपनी लिस्ट जारी की थी। बता दें कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव दो चरणों में होंगे, पहले चरण के लिए 23 अप्रैल और दूसरे चरण के लिए 29 अप्रैल को मतदान होगा। वहीं, वोटों की गिनती 4 मई को होगी।

74 विद्यार्थियों को उपाधि, 107 को गोल्‍ड मेडल और 1 शोधार्थी को डी-लिट् की प्रदान की गई उपाधि

भोपाल  राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने कहा है कि आज विक्रम विश्वविद्यालय के 30वें दीक्षांत समारोह में सम्मिलित होकर अत्यधिक आनन्द का अनुभव हो रहा है। उन्होंने दीक्षान्त समारोह में उपाधियां प्राप्त करने वाले सभी छात्र-छात्राओं को बधाई देते हुए सभी के यशस्वी एवं मंगलमय भविष्य की कामना की। राज्यपाल  पटेल ने कहा कि उज्‍जैन नगरी में आते ही एक अलग प्रकार की अनुभूति होती है। सम्राट विक्रमादित्‍य विश्‍वविद्यालय में ही एक विद्यार्थी ने शिक्षा प्राप्‍त की और आज वे प्रदेश के मुख्‍यमंत्री बने। मंगलवार को राज्यपाल  पटेल की अध्यक्षता और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मुख्य आतिथ्य में उज्जैन में सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय का 30 वां दीक्षांत समारोह स्‍वर्ण जयंती सभागृह सम्पन्न हुआ। राज्‍यपाल  पटेल ने कहा कि प्रदेश का राज्‍यपाल बनने के अगले ही दिन वे भगवान  महाकालेश्‍वर के दर्शन के लिए आए और यहीं से उन्‍हें प्रदेश के सतत विकास और देश की प्रगति के लिए प्रयासरत रहने की प्रेरणा प्राप्‍त हुई। राज्‍यपाल  पटेल ने विद्यार्थियों से कहा कि आज दीक्षांत के साथ आप सभी ने समाज के उत्‍थान और देश की एकता के लिए शपथ ली है। विश्‍वविद्यालय से जो संस्‍कार आपको मिले है उन्‍हें जीवन भर स्‍मरण रखकर कार्य करें। आपके माता-पिता ने आपको शिक्षित करने के लिए बहुत कष्‍ट उठाए है इसलिए पढ़ लिखकर अपने माता-पिता की सेवा करें। आप जीवन में कुछ भी बन जाओं परंतु अपने माता-पिता और गुरु के प्रति सदैव आभारी रहना, उनकी सेवा करना। शिक्षित होने का उद्देश्‍य मात्र उपाधि अथवा प्रमाण-पत्र पाना नहीं बल्कि समाज और देश की उन्‍नति में योगदान देकर एक जिम्‍मेदार नागरिक भी बनना है। भगवान कृष्ण ने उज्जैन को बनाया अपनी शिक्षा स्थली : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि ज्ञान-विज्ञान और ध्यान के वैश्विक केन्द्र उज्जैन को भगवान कृष्ण ने अपनी शिक्षास्थली के रूप में चुना। चौसठ कलाओं और 14 विद्याओं की यह धरती शौर्य के प्रतीक सुशासन के पुरोधा, विक्रम संवत के प्रवर्तक, भारतीय सांस्कृतिक चेतना के रक्षक और न्यायप्रियता के प्रतीक सम्राट विक्रमादित्य की कर्मस्थली रही है। सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय का 30वां दीक्षांत समारोह केवल उपाधि वितरण नहीं बल्कि 7 दशकों के उस समर्पण का परिणाम है, जिसने दुनिया को कुशल मानव संसाधन और श्रेष्ठ स्कॉलर सौंपे हैं। विश्वविद्यालय से सम्राट विक्रमादित्य का नाम जुड़ने से विश्वविद्यालय और विद्यार्थियों का गौरव बढ़ा है। ऐसे विश्वविद्यालय की उपाधियों से विभूषित होना विद्यार्थियों के लिए सौभाग्य की बात है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीक्षांत समारोह में डॉक्टर ऑफ लिटरेचर (डी-लिट), गोल्ड मेडल और स्नातक उपाधियां प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों को बधाई और शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दीक्षांत समारोह शिक्षा का अंत नहीं बल्कि जीवन में सीखने की एक नई शुरुआत है, यह जीवन का महत्वपूर्ण टर्निंग पाइंट है। बेहतर जीवन के लिए विद्यार्थियों को सीखने की ललक सदैव बनाए रखना होगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि विश्वविद्यालय के विद्यार्थी देश और प्रदेश के समग्र विकास में सहभागी बनेंगे और जीवन के सभी क्षेत्रों में अपने कर्तव्य का पूर्ण निष्ठा के साथ निवर्हन करते हुए अपने परिवार, समाज और देश का गौरव बढ़ायेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विश्वविद्यालय में शिक्षा पूर्ण करने वाले विद्यार्थियों को ससम्मान उपाधियां प्रदान करने के लिए दीक्षांत समारोह की परम्परा आरंभ की गई है। यह विश्वविद्यालय प्रसिद्ध कवि  शिवमंगल सिंह सुमन और पद्म विष्णु धर वाकणकर जैसी महान विभूतियों की कर्मस्थली रहा है। नवाचार में अग्रणी यह विश्वविद्यालय, कृषि अध्ययन शाला और डेयरी टेक्नालॉजी जैसे आधुनिक विषयों को आरंभ करने के लिए पहल करने में भी प्रदेश में प्रथम रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विश्वविद्यालय को विभिन्न यंत्रों के लिए 51 लाख रुपए, 5 ड्रोन तथा अध्ययन यात्रा के लिए एक बस प्रदान करने की घोषणा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश विकास के पथ पर निरंतर अग्रसर है। पिछला वर्ष प्रदेश में निवेश और रोजगार के रूप में मनाया गया। वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। उज्जैन वर्ष 2028 में भव्य और दिव्य सिंहस्थ का साक्षी बनेगा। श्रद्धालुओं के सुगम आवागमन से लेकर उनके मां क्षिप्रा के जल से स्नान तक की व्यवस्था के लिए राज्य सरकार अभी से हर संभव तैयारी कर रही है। सिंहस्थ के आयोजन में स्वच्छता, यात्री मार्गदर्शन, डिजिटल हेल्प आदि का विशेष रूप से ध्यान रखा जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी प्रतिभागियों को नवरात्रि और गुड़ी पड़वा की मंगलकामनाएं भी दीं। नवीन कृषि अध्ययनशाला भवन और भर्तृहरि छात्रावास भवन का किया लोकार्पण राज्यपाल  पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 17 करोड़ रूपए की लागत से निर्मित नवीन कृषि अध्ययनशाला भवन का लोकार्पण एवं एमईआरयू परियोजना अंतर्गत नव श्रृंगारित भर्तृहरि छात्रावास का लोकार्पण किया। उन्होंने विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा सम्पादित पुस्तकों ईकोस एण्ड एक्सप्रेशन्स, कंटूर्स ऑफ थॉट, रागात्मिका सहित 4 पुस्तकों का विमोचन भी किया। उपाधियाँ प्रदान करने के बाद विश्‍वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. भारद्वाज ने सभी उपाधि प्राप्तकर्ता विद्यार्थियों को उपदेश देकर शपथ दिलाई। निकली अकादमिक शोभायात्रा विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह के प्रारंभ में राज्यपाल  पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यपरिषद सदस्‍यों व संकाय अध्‍यक्षों के साथ समूह चित्र खिंचवाया। इसके बाद दीक्षांत समारोह की अकादमिक शोभा यात्रा निकाली गई। कार्यक्रम में सांसद  अनिल फिरोजिया, विधायक  अनिल जैन कालूहेड़ा और नगर निगम अध्‍यक्ष  कलावती यादव शामिल रहें। सम्राट विक्रमादित्य के मूर्तिशिल्प पर अर्पित की पुष्पांजलि विश्वविद्यालय के प्रशासनिक परिसर स्थित सम्राट विक्रमादित्य के मूर्तिशिल्प पर पुष्पांजलि अर्पित की। एनसीसी कैडेट्स द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। समारोह के प्रारंभ में राष्ट्रगीत वंदेमातरम और राष्ट्रगान जन-गण-मन हुआ। अतिथियों ने माँ वाग्देवी की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया गया। हथकरघा इकाई की प्रदर्शनी का किया अवलोकन राज्यपाल  पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. यादव सहित अन्य अतिथियों ने हथकरघा इकाई की प्रदर्शनी का अवलोकन किया। आचार्य विद्यासागर पीठ एवं संस्‍था द्वारा अतिथियों को हाथ से बनी हथकरघा सामग्री भेंट की। विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. अर्पण भारद्वाज और कुल सचिव  अनिल कुमार शर्मा ने राज्यपाल  पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. यादव का पुष्प-गुच्छ, पारिजात का पौधा, शॉल, फल और स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत किया। कार्य परिषद के सदस्यों के द्वारा अन्य अतिथियों का भी सम्मान और स्वागत किया गया। … Read more

किसानों की खुशहाली से देश की तरक्की, Shivraj Singh Chouhan ने बताया सरकार का प्रमुख एजेंडा

नई दिल्ली केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लोकसभा में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार किसानों की आय और सुरक्षा बढ़ाने को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दे रही है। इसके लिए सरकार कई कदम उठा रही है, जैसे तंबाकू जैसी हानिकारक फसलों की जगह लाभदायक फसलों को बढ़ावा देना, एमएसपी पर रिकॉर्ड खरीद, फसल बीमा योजना में सुधार और सख्त निगरानी व्यवस्था लागू करना। संसद के निचले सदन में सांसदों द्वारा उठाए गए विभिन्न प्रश्नों का उत्तर देते हुए कृषि मंत्री चौहान ने कहा कि सरकार ने किसानों से तंबाकू की खेती छोड़ने की अपील की है और इसके बदले कई फायदे वाली फसलों की पहचान की है। इनमें हाइब्रिड मक्का, मिर्च, शकरकंद, कपास, आलू, चिया, फीड बीन्स, लोबिया, रागी, अरहर, गन्ना, सोयाबीन, ज्वार और मूंगफली जैसी फसलें शामिल हैं, ताकि किसानों की नकद आय सुरक्षित बनी रहे।  मंत्री ने कहा कि देश के ज्यादातर किसानों के पास छोटी जमीन होती है, इसलिए केवल एक ही फसल पर निर्भर रहना जोखिम भरा होता है। इसको देखते हुए सरकार ने इंटीग्रेटेड फार्मिंग (मिश्रित खेती) के कई मॉडल तैयार किए हैं, जिनका अलग-अलग राज्यों में प्रदर्शन भी किया जा रहा है। इन मॉडलों के तहत किसान अनाज (गेहूं और धान), सब्जियां, फल, पशुपालन, मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन, बकरी पालन और एग्रो-फॉरेस्ट्री जैसी गतिविधियों को एक साथ अपना सकते हैं। इससे उन्हें पूरे साल स्थिर और ज्यादा आय मिल सकती है। चौहान ने आगे बताया कि किसानों को उनकी उपज का सही दाम दिलाने के लिए एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) बढ़ाया गया है और इस सीजन में एमएसपी पर रिकॉर्ड खरीद की जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार ने दालों जैसे तूर, मसूर और उड़द के लिए भी व्यवस्था की है, जिसमें किसान रजिस्ट्रेशन के बाद अपनी पूरी उपज बेच सकते हैं और सरकार उसे खरीदने के लिए प्रतिबद्ध है। इससे दाल उत्पादक किसानों को बड़ा सहारा मिला है। फसल बीमा योजना को लेकर उन्होंने कहा कि पहले किसानों को मुआवजा पाने में कई महीने लग जाते थे, लेकिन अब नियमों में बदलाव कर दिया गया है, जिससे अगर किसी एक किसान की फसल भी खराब होती है तो उसे मुआवजा मिलना जरूरी होगा। उन्होंने यह भी बताया कि अगर 21 दिनों के भीतर बीमा राशि किसान के खाते में नहीं आती है, तो बीमा कंपनी और राज्य सरकार को 12 प्रतिशत ब्याज के साथ भुगतान करना होगा। इससे किसानों को देरी का नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त है और फसल बीमा या अन्य योजनाओं में किसी भी तरह की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने बताया कि कृषि रक्षक पोर्टल जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए प्राप्त शिकायतों की गंभीरता से जांच की जा रही है और जहां भी अनियमितता पाई जाती है, वहां दोषियों पर कार्रवाई की जाती है। उन्होंने यह भी कहा कि हाल के वर्षों में राजस्थान सहित कई राज्यों में फसल बीमा के तहत हजारों करोड़ रुपए सीधे किसानों के बैंक खातों में डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के जरिए भेजे गए हैं, जिससे किसानों को सीधा फायदा मिला है।

उज्जैन में 4-लेन और 2-लेन कॉरीडोर निर्माण के लिए 945 करोड़ रूपये से अधिक की स्वीकृति

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक मंगलवार को मंत्रालय में हुई। मंत्रि-परिषद द्वारा लोक निर्माण विभाग अंतर्गत प्रदेश में विभिन्न विकास कार्यों और अनुरक्षण के लिए 4 हजार 525 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी गई है। साथ ही रबी विपणन वर्ष 2026-27 में किसानों से समर्थन मूल्य पर उपार्जित गेहूं पर 40 रूपये प्रति क्विंटल के मान से बोनस दिए जाने का निर्णय लिया है। मंत्रि-परिषद ने उज्जैन शहर में चिमनगंज मंडी से इंदौर गेट तक 4-लेन एवं निकास चौराहा से इंदौर गेट तक 2-लेन ऐलिवेटेड कॉरीडोर के निर्माण के लिए 945 करोड़ 20 लाख रूपये की स्वीकृति प्रदान की गयी है। इसके साथ रीवा की पनवार माइक्रो सिंचाई परियोजना के लिए 228 करोड़ 42 लाख रूपये की स्वीकृति दी है। इसी तरह मंत्रि-परिषद ने पशुपालन विभाग का नाम गौपालन एवं पशुपालन किये जाने की भी स्वीकृति दी है। निर्णय अनुसार उपार्जित गेहूं में से भारत सरकार द्वारा स्वीकार न की जाने वाली सरप्लस मात्रा का निस्तारण मध्यप्रदेश स्टेट सिविल सप्लाईज कार्पोरेशन द्वारा खुली निविदा के माध्यम से किया जाकर इस पर होने वाला व्यय राज्य सरकार द्वारा वहन किया जायेगा। किसानों को बोनस राशि का भुगतान विभागीय मद में बजट प्रावधान कराकर तथा सरप्लस मात्रा के निस्तारण व्यय की प्रतिपूर्ति मुख्यमंत्री कृषक फसल उपार्जन सहायता योजनांतर्गत आवंटित बजट से किया जाएगा। लोक निर्माण विभाग अंतर्गत विकास कार्यों के लिए 4,525 करोड़ रूपये की स्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा लोक निर्माण विभाग अंतर्गत प्रदेश में विभिन्न विकास कार्यों और अनुरक्षण के लिए 4 हजार 525 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी गई है। स्वीकृति अनुसार उज्जैन शहर में चिमनगंज मंडी (इंद्रा नगर) चौराहा से इंदौर गेट तक 4-लेन ऐलिवेटेड कॉरिडोर एवं निकास चौराहा से इंदौर गेट तक 2 लेन ऐलिवेटेड कॉरिडोर लंबाई 5.32 कि.मी. के निर्माण कार्य को विभागीय सूचकांक से मुक्त रखते हुए लागल राशि 945 करोड़ 20 लाख रूपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई। मध्यप्रदेश रोड डेवलपमेंट प्रोग्राम की 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2028 और जन भागीदारी अंतर्गत विकास हेतु अनुदान योजना की 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक की निरंतरता के लिए 7 करोड़ 38 लाख रूपये की स्वीकृति दी गई है। एनडीबी से वित्त पोषण पुल और सड़क निर्माण की योजना की निरंतरता के लिए 50 करोड़ 10 लाख रूपये की स्वीकृति दी गई है। मध्यप्रदेश रोड डेवलपमेंट प्रोग्राम-6 की 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक की निरंतरता के लिए 1543 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी गई है। मध्यप्रदेश रोड डेवलपमेंट प्रोग्राम-7 की 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक की निरंतरता के लिए 1,476 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी गई है। शासकीय आवास गृह, विश्राम गृहों के रखरखाव और अनुरक्षण के लिये 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक की निरंतरता के लिए के लिए 200 करोड़ 35 रूपये की स्वीकृति दी गई है। कार्यालय भवनों के रखरखाव, सतपुड़ा और विंध्याचल भवन के अनुरक्षण कार्य एवं शौर्य स्मारक के संचालन और संधारण हेतु 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक की निरंतरता के लिए के लिए 300 करोड़ 70 लाख रूपये की स्वीकृति दी गई है। रीवा की पनवार माईक्रो सिंचाई परियोजना के लिए 228 करोड़ 42 लाख रूपये की स्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा रीवा की पनवार माईक्रो सिंचाई परियोजना लागत राशि 228 करोड़ 42 लाख रूपयें, सैंच्य क्षेत्र 7350 हेक्टेयर की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान किये जाने का निर्णय लिया गया है। परियोजना से रीवा जिले की जवा एवं त्योंथर तहसील के 37 ग्रामों को सिंचाई सुविधा का लाभ मिलेगा। मध्यप्रदेश कार्य (आवंटन) नियम में संशोधन की स्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा मध्यप्रदेश कार्य (आवंटन) नियम में संशोधन कर मध्यप्रदेश भण्डार क्रय तथा सेवा उपार्जन नियम को वित्त विभाग के अंतर्गत किए जाने का अनुमोदन दिया गया है। “मध्यप्रदेश भण्डार क्रय तथा सेवा उपार्जन नियम” को एमएसएमई से वित्त विभाग को आवंटित किये जाने से राज्य पर कोई वित्तीय भार नहीं आयेगा। पशुपालन विभाग का नाम गौपालन एवं पशुपालन किये जाने की मंजूरी मंत्रि-परिषद द्वारा मध्यप्रदेश कार्य (आवंटन) नियमों की अनुसूची में संशोधन की स्वीकृति दी है। स्वीकृति अनुसार पशुपालन एवं डेयरी विकास विभाग का नाम संशोधित कर गौपालन एवं पशुपालन विभाग और संचालनालय, पशुपालन एवं डेयरी का नाम परिवर्तित कर संचालनालय,गौपालन एवं पशुपालन किये जाने का अनुमोदन किया गया है।  

“भूतो न भविष्यति” अद्वितीय होगा सिहंस्थ-2028 का वैभव गीता भवन, विक्रम नगर आरओबी का हुआ भूमि-पूजन

भोपाल  राज्यपाल  मंगुभाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंगलवार को उज्जैन में 662 करोड़ रूपये से अधिक की लागत के विकास कार्यों का भूमि-पूजन किया। इसमें उज्जैन विकास प्राधिकरण द्वारा क्रियान्वित नगर विकास योजनाएँ, सिंहस्थ-2028 संबंधी कार्य एवं गीता भवन का भूमि-पूजन शामिल है। राज्यपाल  पटेल ने कहा है कि उज्जैन विकास की 662 करोड़ 46 लाख रुपये की लागत वाली विभिन्न योजनाओं का भूमि-पूजन केवल अवसंरचनाओं का निर्माण मात्र नहीं है। यह उज्जैन के गौरवशाली भविष्य और सांस्कृतिक एवं अभ्युदय का शंखनाद है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के ‘सबका साथ, सबका विकास’ के माध्यम से समर्थ, समृद्ध और सशक्त विकसित भारत के दिव्य संकल्प की सिद्धि का प्रतीक भी है। उन्होंने त्रिवेणी विहार में इंदौर और जबलपुर की तर्ज पर ‘गीता भवन’ निर्माण के निर्णय के लिए डॉ. मोहन यादव की सरकार को बधाई दी। कार्यक्रम का शुभारंभ राज्यपाल  पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर कन्या-पूजन के साथ किया। कार्यक्रम में भूमि-पूजन और विकास कार्यों का प्रेजेंटेशन किया गया। शुरूआत में राज्यपाल  पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिंहस्थ-2028 के विकास कार्यों की प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। राज्यपाल  पटेल ने कहा कि बाबा महाकाल के आशीर्वाद से बनने वाले ये निर्माण कार्य केवल कंक्रीट के ढाँचे नहीं होंगे, बल्कि उज्जैन के नये ‘स्वर्ण युग’ की आधारशिला हैं, जो दुनिया के सामने सुनियोजित विकास के प्रतीक बनेंगे। इन विशाल निर्माण कार्यों और उत्कृष्ट नगरीय सुविधाओं से धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। प्रदेश में व्यापारिक गतिविधियां बढ़ेंगी। रोजगार और अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि महाकाल महालोक के निर्माण के बाद से उज्जैन में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। लाखों लोग महाकाल दर्शन के लिए उज्जैन आ रहे हैं। राज्यपाल  पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और वैचारिक परिवर्तन का नया दौर शुरू हो गया है, अब हम सबका लक्ष्य और संकल्प विकसित भारत ही होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जल एवं विद्युत संरक्षण, स्वच्छता, पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता तथा ‘अतिथि देवो भव’ की भावना के अनुरूप श्रद्धालुओं को उच्च गुणवत्ता की सुविधाएँ और सेवाओं की उपलब्धता के द्वारा उज्जैन की आदर्श आध्यात्मिक पर्यटन गंतव्य के रूप में पहचान बनाने में उज्जैनवासियों की भूमिका महत्वपूर्ण है। राज्यपाल  पटेल ने कहा कि गीता भवन निर्माण हमारी भावी पीढ़ी में सुसंस्कारों के बीजारोपण और सनातन ज्ञान-पुंज को सम्पूर्ण विश्व में आलोकित करने का दूरदर्शी और महत्वाकांक्षी कदम है। गीता भवन युवाओं, शोधार्थियों और नागरिकों को भारतीय ज्ञान-परंपरा, दर्शन और संस्कृति से जुड़ने का अवसर प्रदान करेगा, जो समाज में भारतीय सांस्कृतिक चेतना और आध्यात्मिक मूल्यों की मजबूती और विस्तार में सहयोगी होगा। उन्होंने कहा कि गीता केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन प्रबंधन, कर्तव्य बोध और मानव कल्याण का सर्वकालिक मार्गदर्शक ग्रंथ है। फल की इच्छा किए बिना कार्य करने वाले जीवन में सफल होते है। ‘भगवद् गीता’ के दर्शन का यह ज्ञान नई पीढ़ी में नैतिकता, अनुशासन और सकारात्मक विचारों के आधार को मजबूत बनाएगा। प्रदेश में सनातन परंपरा पुनउर्त्थान के सशक्त केंद्र के रूप में गीता भवन भारतीय ज्ञान-परंपरा, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और वैचारिक संवाद को नई दिशा देने के माध्यम बनेंगे। ‍सिंहस्थ-2028 सनातन संस्कृति का होगा वैश्विक-समागम : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि ‍सिंहस्थ-2028 सनातन संस्कृति का वैश्विक-समागम है। हमारा कर्तव्य, दायित्व और जवाबदारी सिंहस्थ में आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु को गरिमापूर्वक सुविधाजनक दर्शन करने के प्रति है। सिंहस्थ-2028 में उज्जैन आने वाला प्रत्येक व्यक्ति हमारा अतिथि होगा। सिंहस्थ-2028 का वैभव इस बार “भूतो न भविष्यति” को साकार करते हुए अद्वितीय होगा। राज्य सरकार के प्रयासों को भारत सरकार का साथ मिल रहा है। हाल ही में प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय कैबिनेट ने 3 हजार 839 करोड़ की लागत से NH- 752 D के बदनावर-पेटलावद थांदला खंड को फोर लेन करने की स्वीकृति दी है। यह इस बात का प्रमाण है कि केंद्र और राज्य मिलकर सिंहस्थ-2028 को अविस्मरणीय बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह कॉरिडोर उज्जैन को दिल्ली- मुंबई एक्सप्रेस-वे से सीधे जोड़कर विकास की नई धुरी बनेगा। राज्य सरकार ने सिहंस्थ-2028 महापर्व की भव्यता और जन सुविधाओं के लिए 13 हजार 851 करोड़ रुपए के कार्यों की ऐतिहासिक स्वीकृति दी है। वर्ष 2026-27 के बजट में सिहंस्थ के लिए 3060 करोड़ रुपए का विशेष प्रावधान रखा गया है, यह उज्जैन के भविष्य को बदलने का रोडमेप है। हम उज्जैन को सुविधा और शुचिता का ऐसा मॉडल बनाएंगे जो पूरी दुनिया में आध्यात्मिक नगरी के साथ आधुनिकतापूर्वक कदम से कदम मिलाकर चलने का उदाहरण बनेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव उज्जैन में गीता भवन सहित अन्य विकास कार्यों के भूमि-पूजन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि चैत्र नवरात्रि, गुड़ी पड़वा, हिन्दू नववर्ष की पावन बेला में उज्जैन को विकास कार्यों की सौगात मिल रही है। सिंहस्थ-2028 विकास कार्यों को समर्पित है, जो तय सीमा में पूर्ण होंगे। उज्जैन को 662 करोड़ 46 लाख की लागत से विभिन्न विकास कार्यों की सौगात दी है। आज 77 करोड़ 14 लाख की लागत से गीता भवन की आधारशिला रखी गई है। इसके साथ ही 30 करोड़ 68 लाख की लागत से विक्रम नगर रेलवे ओवर ब्रिज और 11 सड़क निर्माण कार्यों का भी भूमि-पूजन हुआ है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषक कल्याण वर्ष-2026 में किसानों की आय बढ़ाने और पशुपालन के माध्यम से दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए उल्लेखनीय कार्य किए जा रहे हैं। पशुपालन विभाग ने सवा साल में श्रेष्ठ कार्य करते हुए 25 प्रतिशत दूध उत्पादन बढ़ाया है। सभी पशुपालक इसके लिए बधाई के पात्र हैं। किसानों को 5 से 8 रुपए लीटर अधिक मूल्य का लाभ मिला है। प्रदेश में सांदीपनि विद्यालय, पीएम एक्सीलेंस कॉलेज और यूनिवर्सिटी में जरूरी बदलाव किए गए हैं। स्कूली बच्चों को आने-जाने के लिए साइकिलें, ड्रेस, किताबें नि:शुल्क वितरित की जा रही हैं। टॉपर बच्चों को स्कूटी, मेधावी विद्यार्थियों को लैपटॉप की सौगात मिल रही है। अब प्रदेश के बच्चों को नवीन माता यशोदा योजना अंतर्गत स्कूलों में नि:शुल्क दूध के पैकेट मिलेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन वह नगरी है, जहां सम्राट विक्रमादित्य के गौरवशाली अतीत को जीवंत करते हुए आज 30वाँ दीक्षांत समारोह संपन्न हुआ है। उज्जैन में भगवान कृष्ण … Read more

Bengal Polls 2026: TMC का बड़ा फैसला, ममता बनर्जी नंदीग्राम से नहीं लड़ेंगी चुनाव

कोलकाता बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए विपक्षी भाजपा द्वारा पहली सूची जारी करने के अगले दिन सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने भी मंगलवार को अपने उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी। मुख्यमंत्री और टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने अपने कालीघाट स्थित आवास से दोपहर में राज्य की कुल 294 में से 291 सीटों पर अपने उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की। राज्य की कुल 294 विधानसभा सीटों में से पिछली बार की ही तरह तीन सीटें दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र की सहयोगी पार्टी (जीटीए प्रमुख अनित थापा) के लिए छोड़ी गई है, इसलिए उन पर टीएमसी ने उम्मीदवार नहीं उतारे हैं। भवानीपुर में कड़ी टक्कर उम्मीदवारों की सूची जारी करने के मौके पर तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने घोषणा की कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस बार अपनी पारंपरिक सीट कोलकाता के भवानीपुर से ही चुनाव लड़ेंगी। भवानीपुर में ममता बनर्जी का मुकाबला भाजपा नेता व विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी से होगा। भाजपा ने सुवेंदु को इस बार दो विधानसभा सीटों- नंदीग्राम के अलावा भवानीपुर से उम्मीदवार बनाया है। पार्टी ने इस बार नंदीग्राम से सुवेंदु अधिकारी के खिलाफ पवित्र कर को टिकट दिया है। बताते चलें कि ममता 2021 के पिछले विधानसभा चुनाव में भवानीपुर से नहीं लड़कर नंदीग्राम सीट से चुनाव लड़ी थीं, जहां बेहद करीबी मुकाबले में उन्हें सुवेंदु से 1956 वोटों से हार का सामना करना पड़ा था। युवा चेहरों को मिला मौका ममता ने 2021 में अपनी पारंपरिक सीट भवानीपुर से पार्टी के वरिष्ठ नेता शोभनदेव चट्टोपाध्याय को उम्मीदवार बनाया गया था। नंदीग्राम में हार के पश्चात ममता बाद में भवानीपुर से उपचुनाव में जीत दर्ज की थीं। इधर, पार्टी द्वारा जारी सूची में सामाजिक संतुलन पर जोर दिया गया है। घोषित उम्मीदवारों में इस बार 52 महिलाएं, 78 अनुसूचित जाति, 17 अनुसूचित जनजाति और 47 मुस्लिम समुदाय के उम्मीदवार शामिल हैं। टीएमसी ने इस बार कई नए और युवा चेहरों को मौका देते हुए कई मौजूदा विधायकों व कई मंत्रियों के टिकट भी काटे हैं। साथ ही कई विधायकों का सीट भी बदल दिया गया है। बताते चलें कि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस 2011 से लगातार बंगाल की सत्ता पर काबिज है। क्रिकेटर व मंत्री मनोज तिवारी का टिकट कटा है।  

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