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आप सभी अवैध खनन करों हम तुम्हारे साथ है, कृषि मंत्री ऐदल सिंह कंसाना, विडियो वायरल

All of you do illegal mining, we are with you, Agriculture Minister Aidal Singh Kansana, video goes viral MP के मंत्री कंसाना का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है और बताया जा रहा है कि चुनावी प्रचार प्रसार के दौरान एक समाज की पंचायत में ऐदल सिंह कंसाना यह कहते हुए नजर आ रहे हैं। ग्वालियर चंबल अंचल में लोकसभा चुनाव से पहले प्रदेश के कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में कृषि मंत्री ऐदल सिंह कंसाना चुनावी पंचायत में कथित तौर से लोगों से कह रहे हैं कि चुनाव के बाद न तो किसी का पत्थर का ट्रैक्टर पकड़ा जाएगा न रेत का। अगर किसी का ट्रैक्टर पकड़ा जाए तो मुझे फोन करना, मेरी जवाबदारी है। कंसाना एक वायरल वीडियो में ये सब कहते दिख रहे हैं। वीडियो नूराबाद क्षेत्र स्थित करह धाम मंदिर परिसर का बताया जा रहा है। वीडियो में वे लोगों से कह रहे हैं, ‘हमें मालूम है कि हमारे लोग धंधा करते हैं। पत्थर का, रेत का ये अपराध नहीं है। अगर इसको नहीं करेंगे तो हमारे समाज के लोग, रिश्तेदार गलत काम यानी चोरी- चपाटी में चले जाएंगे। उससे हमारे समाज की बदनामी होगी, बच्चों की जिंदगी खराब होगी।’ कंसाना का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है और बताया जा रहा है कि चुनावी प्रचार प्रसार के दौरान एक समाज की पंचायत में ऐदल सिंह कंसाना यह कहते हुए नजर आ रहे हैं। बता दें कि चंबल रेत माफियाओं के लिए पूरे प्रदेश भर में जाना जाता है। सुप्रीम कोर्ट की पाबंदी के बावजूद भी यहां पर आज तक सरकार से लेकर प्रशासन अवैध उत्खनन को नहीं रोक पाया है और जिस अधिकारी ने इन माफिया को रोकने की कोशिश की है उसे मौत के घाट उतार दिया गया है। मुरैना में लगातार बढ़ रहे अवैध उत्खनन को लेकर सबसे ज्यादा आवाज कृषि मंत्री कंसाना पर लगाते रहे हैं और विपक्ष भी लगातार इन्हीं पर आरोप लगाता रहा है। ऐसे में कृषि मंत्री कंसाना का यह वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है और विपक्ष को इस चुनाव में एक बड़ा मुद्दा मिल गया है।

टी20 विश्व कप के लिए टीम इंडिया का ऐलान

Team India announced for T20 World Cup बीसीसीआई ने टी20 वर्ल्ड कप 2024 के लिए भारतीय टीम की घोषणा कर दी है. रोहित शर्मा टीम की कप्तानी करेंगे. भारत ने टी20 विश्व कप 2024 के लिए टीम घोषित कर दी है. टीम इंडिया रोहित शर्मा की कप्तानी में खेलेगी. रोहित के साथ-साथ यशस्वी जायसवाल, विराट कोहली, सूर्यकुमार यादव, ऋषभ पंत और संजू सैमसन को टीम में जगह मिली है. शुभमन गिल को रिजर्व प्लेयर्स की लिस्ट में रखा है. बोर्ड ने शिवम दुबे पर भी भरोसा जताया है. हार्दिक पांड्या को उपकप्तान बनाया गया है. भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड की सिलेक्शन कमेटी ने मंगलवार को ही बैठक की है. टीम इंडिया ने विकेटकीपर बैटर ऋषभ पंत और संजू सैमसन को टीम में जगह दी है. सैमसन और पंत आईपीएल 2024 में शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं. ऋषभ की लंबे वक्त के बाद टीम इंडिया में वापसी हुई है. वे कार एक्सीडेंट के बाद से ही मैदान से दूर थे. लेकिन आईपीएल के जरिए मैदान पर वापसी की और अपनी फॉर्म को भी साबित किया. उन्हें इसका फायदा मिला. सैमसन की बात करें तो उन्होंने आईपीएल 2024 में 9 मैच खेले हैं और 385 रन बनाए हैं. इस दौरान 4 अर्धशतक लगाए हैं. शिवम-अक्षर पर बोर्ड ने जताया भरोसा – बीसीसीआई ने शिवम दुबे और अक्षर पटेल पर भी भरोसा जताया है. शिवम आईपीएल में चेन्नई सुपर किंग्स के लिए खेल रहे हैं. वे विस्फोटक बैटिंग करने में माहिर हैं. इसके साथ-साथ फिनिशर की भूमिका भी निभा लेते हैं. शिवम दुबे ने इस सीजन के 9 मैचों में 350 रन बनाए हैं. इस दौरान 3 अर्धशतक लगाए हैं. अक्षर की बात करें तो उन्होंने बॉलिंग के साथ-साथ बैटिंग में भी कमाल दिखाया है. शुभमन को रिजर्व प्लेयर्स की लिस्ट में मिली जगह – शुभमन गिल की जगह को लेकर काफी संशय चल रहा था. हालांकि बोर्ड ने नजरअंदाज नहीं किया. शुभमन को रिजर्व प्लेयर्स की लिस्ट में जगह मिली है. उनके साथ-साथ रिंकू सिंह, खलील अहमद और आवेश खान को भी इस लिस्ट में जगह मिली है. टी20 विश्व कप 2024 के लिए भारतीय क्रिकेट टीम – रोहित शर्मा (कप्तान), हार्दिक पांड्या (उप कप्तान), यशस्वी जयसवाल, विराट कोहली, सूर्यकुमार यादव, ऋषभ पंत (विकेटकीपर), संजू सैमसन (विकेटकीपर), शिवम दुबे, रवींद्र जडेजा, अक्षर पटेल, कुलदीप यादव, युजवेंद्र चहल , अर्शदीप सिंह, जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद सिराज रिजर्व प्लेयर्स – शुभमन गिल, रिंकू सिंह, खलील अहमद और अवेश खान

भाजपा ने षड्यंत्र कर बम को मजबूर किया नामांकन वापस लेने पर

BJP conspired and forced Bam to withdraw his nomination. यह तीन दबाव पड़ गए बम पर भारी 1- सबसे बड़ा दबाव बम पर महिला संबंधी मामले का था। इसमें एक पुरानी शिकायत को हवा दी जा रही थी और इसमें एक गंभीर मामले में केस दर्ज कराने की तैयारी हो गई थी। इस दबाव को बम सहन नहीं कर पाए। यह सबसे बड़ी वजह बनी। 2- खजराना थाने में 17 साल पुराने मामले में हाल ही में गवाह के बयान बाद उन पर मारपीट, जान से मारने की धमकी के बाद गंभीर धारा हत्या के प्रयास 307 को बढ़ाने की प्रक्रिया शुरु हो गई थी। यह भी एक दूसरी वजह बनी। 3- एक तीसरा कारण बीजेपी ने उनके नाम घोषित होने के बाद ही कॉलेज की गड़बड़ियों में घेरना शुरु कर दिया था। यहां पर फैकल्टी की अनियमतिता है, मरे हुए प्रोफेसर को फैकल्टी बताया है। कई फैकल्टी है ही नहीं और उनके नाम कॉलेज में बताए गए हैं। इस तरह कॉलेज की मंजूरी ही खटाई में पड़ जाती।

विधायक जी ने अपनी फॉर्च्यूनर से दुल्हा-दुल्हन को पहूंचाया घर,घर वालों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।

The MLA took the bride and groom to their home in his Fortuner, the happiness of the family members knew no bounds. राघोगढ़ ! दूल्हा-दुल्हन को महंगे फॉर्च्यूनर वाहन में आता देखकर परिजन भी हैरान रह गए. कांग्रेस विधायक जयवर्द्धन सिंह ने खुद ही गाड़ी का दरवाजा खोलकर नवदंपती को घर पर उतारा. जयवर्द्धन ने दुल्हन को अपनी बहन बताया. गुना जिले के राघोगढ़ में शादी सम्मेलन के बाद दूल्हा-दुल्हन बाइक पर सवार होकर घर जा रहे थे. इसी दौरान क्षेत्र में जनसंपर्क कर रहे .कांग्रेस विधायक जयवर्द्धन सिंह ने जब नवदंपती को देखा तो उन्होंने अपने वाहन को रोका और दूल्हा-दुल्हन को फॉर्च्यूनर कार में बैठाकर उनके घर तक पहुंचाया , अब इस पूरे वाकए का वीडियो अब वायरल हो रहा है. नवल धाकड़ नवविवाहिता पत्नी को साथ लेकर पूजा-पाठ करने गया था. भीषण गर्मी में बाइक सवार नवल धाकड़ और उसकी पत्नी को जब क्षेत्रीय विधायक ने देखा तो अपने फॉर्च्यूनर वाहन को रोककर  बैठने को कहा. जयवर्द्धन के साथ विधायक पंकज उपाध्याय भी मौजूद थे. दूल्हा-दुल्हन को महंगे फॉर्च्यूनर वाहन में आता देखकर नवल के परिजन भी हैरान रह गए.  जयवर्द्धन सिंह ने खुद ही गाड़ी का दरवाजा खोलकर नवदंपती को घर पर उतारा. जयवर्द्धन ने दुल्हन को अपनी बहन बताया. दूल्हा बने नवल धाकड़ ने बताया कि जयवर्द्धन सिंह शादी सम्मेलन में भी पहुंचे थे. नवल के परिजन साफा बांधकर सम्मान करने के लिए आगे बढ़े तो जयवर्द्धन ने कहा, “मैं तो आपके परिवार का हूं. पंकज उपाध्याय का सम्मान कीजिए.” जयवर्द्धन सिंह का ये वीडियो वायरल हो रहा है. महंगे वाहन में बैठकर घर तक पहुंचे नवदंपती की खुशी का ठिकाना नहीं है.

महात्मा गांधी पर, कैलाश विजयवर्गीय ने कसा तंज

Kailash Vijayvargiya took a dig at Mahatma Gandhi इंदौर में आयोजित पत्रकारवार्ता में विजयवर्गीय ने कहा कि आज कांग्रेस एसटी, एससी और ओबीसी का आरक्षण छीनकर मुस्लिमों को दे रही है। कर्नाटक में यह ऐसा कर चुकी है। कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि यह महात्मा गांधी की कांग्रेस नहीं है। यह नक्सलियों वामपंथियों और मुस्लिम लीग के लोगों से घिरी हुई है। कांग्रेस के लोग आरोप लगाते हैं कि हमने आरक्षण छीना है जबकि यह काम खुद कांग्रेस ने किया है। जिस कांग्रेस ने कश्मीर में दलितों से आरक्षण छीना और धारा 370 लगाई वह ऐसी बात करती है। यह महात्मा गांधी की कांग्रेस नहीं है। यह नक्सलियों, वामपंथियों और मुस्लिम लीग के लोगों से घिरी हुई है। कांग्रेस के लोग आरोप लगाते हैं कि हमने आरक्षण छीना है, जबकि यह काम खुद कांग्रेस ने किया है। जिस कांग्रेस ने कश्मीर में दलितों से आरक्षण छीना और धारा 370 लगाई वह ऐसी बात करती है। यह बात कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने सोमवार को इंदौर में कही।

कांग्रेस नेता मोती सिंह पहुंचे हाईकोर्ट, कहा- मुझे पार्टी का अधिकृत प्रत्याशी घोषित किया जाए

Congress leader Moti Singh reached High Court, said- I should be declared the authorized candidate of the party कांग्रेस नेता मोती सिंह पटेल ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर खुद को कांग्रेस का अधिकृत प्रत्याशी घोषित करने की मांग की है। इंदौर । इंदौर में कांग्रेस पर फूटे बम से घायल होने के बाद अब कांग्रेस के नेताओं ने मोती सिंह पर दाव लगाने पर जोर तो शुरू कर दिए है। मोती सिंह ने हाईकोर्ट में मंगलवार को याचिका लगाई है और अपील की है कि उन्हें कांग्रेस का चुनाव चिन्ह आवंटित कर उम्मीदवार माना जाए। याचिका पर आज दोपहर बाद सुनवाई होने की उम्मीद है । इस मुद्दे पर गए पटेल पटेल के अधिवक्ता विवरंडेलवाल ने बताया कि मोती सिंह ने कांग्रेस के उम्मीदवार के तौर में अपना नामांकन भरा था, लेकिन अक्षय बम के होने के बाद उनका फॉर्म रिजेक्ट कर दिया गया था। नियम अनुसार यदि फार्म वाले प्रत्याशी का नामांकन वापस हो जाता है तो वह फॉर्म भी दूसरे प्रत्याशी को मिलना चाहिए इसलिए उनका अधिकार बनता है कि वह कांग्रेस के औपचारिक प्रत्याशी माना जाए। इसी आधार पर हमने याचिका लगाई थी, जिसे स्वीकार कर लिया गया है और यह दोपहर बाद बेंच में लिस्टेड होगी। 13 मई को होना है मतदान इंदौर संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़ने के लिए 26 प्रत्याशियों ने नामांकन फार्म जमा किए थे। जांच के बाद कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकाटी आशीष सिंह ने तीन उम्मीदवारों सुनील तिवारी (निर्दलीय), रविंद्र लोखंडे (निर्दलीय) तथा मोती सिंह (इंडियन नेशनल कांग्रेस) के नामांकन निरस्त कर दिए थे। इसके बाद 23 प्रत्याशी चुनावी मैदान में थे। आपको बता दें कि इंदौर में 13 मई को वोटिंग होना है। भाजपा ने षड्यंत्र कर बम को मजबूर किया नामांकन वापस लेने पर, यह तीन दबाव पड़ गए बम पर भारी 1- सबसे बड़ा दबाव बम पर महिला संबंधी मामले का था। इसमें एक पुरानी शिकायत को हवा दी जा रही थी और इसमें एक गंभीर मामले में केस दर्ज कराने की तैयारी हो गई थी। इस दबाव को बम सहन नहीं कर पाए। यह सबसे बड़ी वजह बनी। 2- खजराना थाने में 17 साल पुराने मामले में हाल ही में गवाह के बयान बाद उन पर मारपीट, जान से मारने की धमकी के बाद गंभीर धारा हत्या के प्रयास 307 को बढ़ाने की प्रक्रिया शुरु हो गई थी। यह भी एक दूसरी वजह बनी। 3- एक तीसरा कारण बीजेपी ने उनके नाम घोषित होने के बाद ही कॉलेज की गड़बड़ियों में घेरना शुरु कर दिया था। यहां पर फैकल्टी की अनियमतिता है, मरे हुए प्रोफेसर को फैकल्टी बताया है। कई फैकल्टी है ही नहीं और उनके नाम कॉलेज में बताए गए हैं। इस तरह कॉलेज की मंजूरी ही खटाई में पड़ जाती।

दलबदलू देवाशीष ने बिगाड़ा फूल सिंह का गणित, कड़े मुकाबले में फंसी संध्या

Defector Devashish spoils Phool Singh’s mathematics, Sandhya trapped in tough competition मुरैना। चंबल-ग्वालियर अंचल की मुरैना सीट की तरह भिंड में भी कांग्रेस के बागी ने चुनावी समीकरण प्रभावित कर दिए हैं। मुरैना में कांग्रेस के रमेश गर्ग बसपा के टिकट पर चुनाव मैदान में हैं तो भिंड से कांग्रेस के टिकट पर पिछला लोकसभा चुनाव लड़ चुके देवाशीष जरारिया ने बागी होकर बसपा के हाथी की सवारी की है। दलबदलू देवाशीष के बसपा का प्रत्याशी घोषित हाेने से पहले तक भिंड का चुनाव कांग्रेस के पक्ष में जाता दिख रहा था। पहली वजह भाजपा सांसद संध्या राय की निष्क्रियता से लोग नाराज थे और दूसरा वे पड़ोस के जिले मुरैना से हैं। दूसरी तरफ कांग्रेस प्रत्याशी फूल सिंह बरैया भिंड जिले से हैं। 4 माह पहले भांडेर से विधानसभा चुनाव बड़े अंतर से जीते हैं और उनकी छवि बड़े दलित नेता की है। अचानक देवाशीष की बगावत और बसपा के टिकट पर मैदान में उतरने से कांग्रेस का गणित गड़बड़ाया है। माना जा रहा है कि देवाशीष कांग्रेस का ज्यादा नुकसान करेंगे। बसपा ने प्रचार तेज भी किया है हालांकि तब भी मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच ही माना जा रहा है। भाजपा की संख्या कड़े मुकाबले में फंसी दिख रही हैं। हार के बाद भी सक्रिय रहे थे बागी देवाशीषकांग्रेस छोड़कर बसपा से चुनाव लड़ रहे देवाशीष लोकसभा का पिछला चुनाव बड़े अंतर लगभग दो लाख वोटों से हारे थे। लेकिर हार कर वे घर नहीं बैठे थे। क्षेत्र में लगातार सक्रिय रहे। वे पूर्व नेता प्रतिपक्ष डॉ गोविंद सिंह के नजदीक हैं। लेकिन इस बार पार्टी ने उनका टिकट काट दिया तो उन्होंने बगावत कर दी। गोविंद सिंह ने भी अपनी पहली प्रतिक्रिया में टिकट वितरण पर नाराजगी व्यक्त की थी। कांग्रेस में लगातार काम करने के कारण वे चुनाव में इस पार्टी को ही नुकसान पहुंचाएंगे। लोगों से बातचीत में भी वे वोट काटने वाले बताए जा रहे हैं। वे मुकाबले में नहीं रहेंगे लेकिन नुकसान कांग्रेस का करेंगे। इसलिए भी क्योंकि वे भी भिंड जिले से हैं, जहां से कांग्रेस प्रत्याशी बरैया हैं। विधानसभा क्षेत्रों में अलग-अलग स्थितिदो जिलों भिंड और दतिया की विधानसभा सीटों को मिला कर बने इस लोकसभा क्षेत्र में कहीं भाजपा मजबूत दिखती है तो कहीं कांग्रेस। दतिया जिले की तीन सीटों में भांडेर से फूल सिंह खुद विधायक हैं इसलिए यहां कांग्रेस बढ़त में दिखती है। दतिया में कांग्रेस ने नरोत्तम मिश्रा जैसे दिग्गज को हराया था, इसलिए यहां भी पार्टी कमजोर नहीं है। सेवढ़ा में मुकाबला बराबरी का बताया जाता है। भिंड जिले की पांच विधानसभा सीटों में से तीन भाजपा और दो कांग्रेस के पास हैं। लेकिन कांग्रेस के फूल सिंह और बसपा के देवाशीष यहां के रहने वाले हैं। भाजपा के अपने तीन विधायक हैं ही। ऐसी स्थिति में तीनों दलों को इस जिले में अच्छे वोट मिल सकते हैं पर मुकाबला भाजपा-कांग्रेस के बीच ही होना तय है। क्षत्रिय भाजपा से नाराज, ब्राह्मण-वैश्य का समर्थनभिंड क्षेत्र के जातीय समीकरणों पर नजर डालने से पता चलता है कि यहां दलित, पिछड़े, क्षत्रिय, ब्राह्मण और वैश्य वर्ग के मतदाताओं का बोलबाला है। दलित मतदाताओं का ज्यादा हिस्सा कांग्रेस और बसपा के साथ दिखाई पड़ता है। क्षत्रिय भाजपा से नाराज हैं। भिंड जिले में इनकी तादाद ज्यादा है। इनका झुकाव कांग्रेस की ओर है। ब्राह्मण और वैश्य के साथ पिछड़े वर्ग की ज्यादा जातियां भाजपा के साथ दिखाई पड़ती हैं। कांग्रेस के फूल सिंह बरैया पहले बसपा के प्रदेश प्रमुख हुआ करते थे। उन्होंने अपना अलग दल बनाकर भी दलितों के बीच ज्यादा काम किया है। हालांकि उनके कई बयान विवादास्पद रहे हैं। इसकी वजह से ब्राह्मण समाज बरैया को पसंद नहीं करता। चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी और हेमंत कटारे समाज का कितना वोट बरैया को दिला पाते हैं। यह देखने लायक होगा। कई नेता सक्रिय, कई का रुख साफ नहीभिंड लोकसभा सीट में कड़ी टक्कर के बीच कांग्रेस- भाजपा नेताओं की सक्रियता को लेकर भी चर्चा चलने लगी है। पूर्व नेता प्रतिपक्ष डॉ गोविंद सिंह पहले प्रत्याशी चयन को लेकर नाराज थे लेकिन अब सक्रिय नजर आ रहे हैं। फूल सिंह बरैया की नैया पार लगाने की जवाबदारी उनके कंधों पर ही है। उन्होंने ऐलान कर दिया है कि विधानसभा में हार का बदला इस चुनाव में लेंगे। चौधरी राकेश सिंह भी प्रचार में जुटे दिखते हैं। अटेर में अच्छे अंतर से जीते हेमंत कटारे भिंड की बजाय बाहर ज्यादा दिखाई पड़ते हैं। दूसरी तरफ विधानसभा चुनाव मे भाजपा से बसपा मे गए डॉ रामलखन सिंह वापस भाजपा मे आ गए हैं। भाजपा से बागी होकर बसपा से विधानसभा चुनाव लड़े रसाल सिंह ने भी बसपा छोड़ दी है। हालाकि रसाल सिंह और एक अन्य बागी मुन्ना सिंह भदौरिया का रुख अब तक साफ नही है। ये किसी का प्रचार करते नजर नहीं आ रहे हैं।

2 लाख 38 हजार मूल्य का शराब और लाहन सारंगढ़ आबकारी टीम ने किया जप्त

Sarangarh excise team seized liquor and liquor worth Rs 2 lakh 38 thousand. सारंगढ़ बिलाईगढ़ ! लोकसभा आदर्श आचरण संहिता के दौरान जिला आबकारी अधिकारी सोनल नेताम के मार्गदर्शन में 48 हजार मूल्य का शराब और 1 लाख 90 हजार मूल्य का लाहन कुल लगभग 238000 रुपए का सामग्री जप्त किया गया। आबकारी विभाग वृत्त सारंगढ़ को सूचना मिली की ग्राम शांतिनग़र चौकी कनकबीरा में भारी मात्रा में अवैध कच्ची महुआ शराब का निर्माण किया जाता है, जिसे गांव के बाहर एवम आसपास के क्षेत्रों में इसको विक्रय किया जाता है l सूचना की पुष्टि होने पर टीम के साथ बताए गए स्थान शांतिनगर के जंगल पर पहुंचे। स्थल पर सफेद रंग के पॉलीथिन तथा बालटियों में भरी क़रीब 220 लीटर कच्ची महुआ शराब तथा बड़े बड़े ड्रमों, बालटियों में महुआ शराब बनाने के लिए महुआ लाहन जिसकी कुल मात्रा लगभग 3800 किलोग्राम है, को जब्त किया गया।कच्ची महुआ शराब को आबकारी टीम द्वारा कब्जा किया गया एवम विधिवत रूप से महुआ लाहन का नष्टीकरण किया गया l अज्ञात आरोपी के विरुद्ध छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम धारा 34(1)(क) (च)34(2) का , प्रकरण कायम कर विवेचना में लिया गया है। आरोपियों की पतासाजी की जा रही है l वही दूसरे प्रकरण में शांतिनग़र चौकी कनकबीरा में आरोपी फ़ाग़ुलाल थुरिया के रिहायशी मकान तलाशी में फ़ाग़ुलाल के क़ब्ज़े से 20 लीटर कच्ची महुआ शराब बरामद हुआ, जिसे जप्त कर क़ब्ज़े आबकारी लिया। आरोपी को आबकारी अधिनियम की धारा 34(1)क34(2)59(क) का उल्लंघन करने पर विधिवत गिरिफ़्तार कर जेल दाख़िला कराया गया है। इस कार्यवाही में स.जि.आब.अधि. आनंद वर्मा,आबकारी उपनिरीक्षक हाबिल खलखो , आबकारी आरक्षक गणेश धीरज,मोहनलाल चौहान, नगर सैनिक उमा सिदार का उल्लेखनीय योगदान रहाl

अवैध क्लीनिक को मोरवा पुलिस ने किया सील, आयुर्वेदिक अधिनियम के तहत की गयी कार्यवाही

Morwa police sealed illegal clinic, action taken under Ayurvedic Act सिंगरौली। सिंगरौली पुलिस अधीक्षक श्रीमती निवेदिता गुप्ता के निर्देशानुसार जिले में जगह जगह फैले हुए झोलाछाप डॉक्टरों के विरुद्ध कार्रवाई के अनुक्रम में मोरवा पुलिस ने थाना क्षेत्र के ग्राम कतरिहार में झोलाछाप डॉक्टर पर कार्यवाही की है। उसके द्वारा बिना किसी डिग्री के ग्रामीण लोगों का अंग्रेजी दवाओं से इलाज किया जा रहा था। इतना ही नहीं डॉक्टर द्वारा अपनी क्लीनिक में लोगों को भर्ती करने से लेकर हर छोटे-बड़े मर्ज के इलाज का भरोसा जताया जाता था। मोरवा निरीक्षक अशोक सिंह परिहार को जब इसकी सूचना मिली तो उन्होंने एसडीओपी कृष्ण कुमार पांडे के मार्गदर्शन में एक टीम गठित कर ग्राम कतरिहार भेजा। क्लीनिक पर पुलिस ने देखा कि झोला छाप डॉक्टर द्वारा वहां लोगों का इलाज किया जा रहा था। उसके इस क्लीनिक से पुलिस ने कई अंग्रेजी दवाइयां समेत इंजेक्शन और इलाज के अन्य उपकरण भी बरामद किए हैं। पुलिस ने आरोपी संजय राय पिता धीरेंद्र कुमार राय उम्र 54 वर्ष निवासी ग्राम हुड्डा थाना गोपालनगर जिला 24 परगना पश्चिम बंगाल हाल मुकाम ग्राम कतरिहार के क्लीनिक को सील करते हुए उसके विरुद्ध मध्यप्रदेश आयुर्वेदिक अधिनियम की धारा 24, 25 के तहत कार्यवाही की है।

बीवी से मार खाने वाला खुशनसीब, देवी होती है पत्नी, मार खाओ : जज रोहित आर्या

One who gets beaten by his wife is lucky, wife is a goddess, get beaten: Judge Rohit Arya भारत में न्यायपालिका हो काफी महत्वपूर्ण माना जाता है. कोर्ट में भारत के हर नागरिक के साथ हुए अन्याय के लिए इंसाफ दिया जाता है. हालाँकि. भारत की न्यायपालिका अपनी लेट-लतीफी की वजह से बदनाम भी है. ऐसे कई मामले हैं, जो कई सालों से कोर्ट में अटकी पड़ी है. तारीख पर तारीख का कांसेप्ट इसी कोर्ट रुम से आया है. फैसलों में देरी की वजह से अपराधी अपराध करने से हिचकते नहीं है. कोर्ट में जज की भूमिका काफी महत्वपूर्ण होती है. किसी मामले पर वकीलों के दलील को सुनने के बाद जज साहब अपना फैसला सुनाते हैं. जज की जिम्मेदारी है कि वो मामले पर न्याय कर सके. भारत के संविधान में भी कहा गया है कि भले ही सौ बेगुनाह छूट जाए लेकिन एक मासूम को सजा नहीं मिलनी चाहिए. जज को काफी होशियारी और जिम्मेदारी से फैसले लेने होते हैं. इस बीच सोशल मीडिया पर बीते कुछ समय से मध्यप्रदेश के जज श्री रोहित आर्या के वीडियोज शेयर किये जा रहे थे. अब श्री रोहित आर्या रिटायर हो चुके हैं. पति को कही थी ऐसी बातरिटायरमेंट के दौरान श्री रोहित आर्या को काफी भावुक विदाई दी गई. जज साहब अपने बयानों के लिए जाने जाते हैं. सोशल मीडिया पर उनके एक हियरिंग का वीडियो शेयर किया गया, जो वायरल हो रहा है. इस मामले में एक पति ने अपनी पत्नी की पिटाई से तंग आकर न्यायपालिका का दरवाजा खटखटाया था. इस मामले पर जज साहब ने कहा कि बीवी से मार खाने वाला पति धन्य हो जाता है. देवी होती है बीवीक्लिप में जज साहब को और भी काफी कुछ कहते हुए देखा गया. उन्होंने आगे कहा कि पत्नी देवी होती है. उससे मार खाना गलत कहां है? हालांकि, लोगों को जज साहब का ये चुटीला अंदाज कुछ ख़ास पसंद नहीं आया. कई लोगों ने कमेंट में लिखा कि अगर यही एक पति ने किया तो उसे जेल की हवा खानी पड़ती है. कई लोगों ने इसे भारतीय न्याय व्यवस्था का पतन बताया. आपको बता दें कि श्री रोहित आर्या अपने इस तरह के फैसलों के लिए सोशल मीडिया पर छाए रहते हैं. अब उनके रिटायरमेंट के बाद कई लोगों ने इन वीडियोज को फिर से शेयर करना शुरू किया है.

इन्दौर : कांग्रेस प्रत्याशी अक्षय कांति बम ने नामांकन लिया वापस, भाजपा की ले सकते हैं सदस्यता

Indore: Congress candidate Akshay Kanti Bam withdraws nomination, can take membership of BJP. इंदौर ! लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस का बड़ा झटका लगा है। कांग्रेस उम्मीदवार अक्षय कांति बम ने आज पार्टी को झटका देते हुए अपना नामांकन वापस ले लिया। इसके बाद इंदौर सीट पर अब भाजपा के लिए मैदान लगभग साफ हो गया है उसके सामने निर्दलीय और अन्य दलों के अलावा कोई प्रत्याशी नहीं बचा। लोकसभा चुनाव से पहले ही इंदौर में कांग्रेस का बड़ा झटका लगा है। कांग्रेस उम्मीदवार अक्षय कांति बम ने आज पार्टी को झटका देते हुए अपना नामांकन वापस ले लिया। इसके बाद इंदौर सीट पर अब भाजपा के लिए मैदान लगभग साफ हो गया है, उसके सामने निर्दलीय और अन्य दलों के अलावा कोई प्रत्याशी नहीं बचा। BJP की ले सकते हैं सदस्यताजानकारी के अनुसार, कांग्रेस प्रत्याशी अक्षय कांति बम भाजपा विधायक रमेश मेंदोला के साथ निर्वाचन कार्यालय पहुंचे थे, जहां उन्होंने अपना नामांकन वापस ले लिया। इसके बाद में कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और विधायक मेंदोला के साथ भाजपा कार्यालय के लिए रवाना हो गए। माना जा रहा है कि बम भाजपा की सदस्‍यता लेंगे। अक्षय कांति बोले- कांग्रेस नहीं दे रही थी साथ?नामांकन वापस लेने के बाद अक्षय कांति बम ने कहा कि जब से उन्होंने नामांकन जमा किया था, तब से ही कांग्रेस की ओर से उन्हें कोई सपोर्ट नहीं मिल रहा था। हालांकि, राजनीतिक गलियारों में यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि फॉर्म भरने के बाद से ही कांग्रेस अक्षय कांति पर दबाव बना रही थी। सूरत जैसा खेल हो सकताकांग्रेस प्रत्याशी अक्षय के नामांकन वापस लेने के बाद यहां भी सूरत जैसा खेल होने की चर्चा होने लगी है। दरअसल, इससे पहले गुजरात के सूरत में भी ऐसा ही घटनाक्रम हुआ था। वहां, कांग्रेस प्रत्याशी ने अपना नामांकन वापस ले लिया था, इसके साथ ही अन्य दलों की उम्मीदवार और निर्दलीय प्रत्याशी अपना पर्चा वापस ले चुके थे। जिसके बाद सूरत में भाजपा ने निर्विरोध चुनाव जीत लिया था।

डॉक्‍टर साहब की फितरत पर फिदा होते आमला के लोग 

People of Amla are impressed by the nature of Doctor Saheb हरिप्रसाद गोहे  आमला । आमतौर पर विधानसभा चुनाव के बाद वहां के रहवासियों को केवल विधायक और मंत्री मिल पाते है। लेकिन ये इत्‍तेफाक है कि आमला विधानसभा को आम लोगो की नब्‍ज भापनें वाला विधायक के साथ डॉक्‍टर भी मिला। सजह सरल स्‍वभाव के विधायक डॉ0 योगेश पंडागरे की फितरत जब लोगो के सामनें आती है तो लोग इस फितरत पर फिदा हो जाते। ऐसे कई वाक्‍ये आएदिन सामनें आते। जब विधायक डॉ0 पंडागरे क्षेत्र का दौरा या जनसंपंर्क करते हुए लोगो के बीच चहुचते तो लोग अपनी समस्‍याएं तो बताते जरूरत पड़नें पर अपना ईलाज और चिकित्‍सकीय परामर्श करानें से भी नही चूंकते। बड़ी बात ये है कि डॉक्‍टर भी ऐसे समय अपनी विधायकी को भूला कर मरीजो की सेवा मे तल्‍लीन नजर आते। केस 1–  अप्रैल माह मे 14 अप्रेल को आमला मे अंबेडकर अनुयायियों ने निशुल्‍क चिकित्‍सा शिविर आयोजित किया। जहां डॉ0 पंडागरे बतौर अतिथि उपस्थित थे। लेकिन एक गंभीर बीमार की हृदय रोग संबंधी सूचना मिली तो बिना किसी से कुछ कहे अतिथि की कुर्सी छोड़ मरीज संतोष पारधे के  की मोटरसाईकिल पर सवार होकर उसका ईलाज करनें एक स्‍थानीय नीजि क्‍लीनिक पहुचें और ईलाज शुरू कर दिया। गंभीर बीमार इलाज के पश्‍चात् अब स्‍वस्‍थ है। केस 2- 27 अप्रैल को विवाह समारोह मे शामिल होनें जा रहे डॉ0 पंडागरे को जब सरकारी अस्‍पताल मे एक महिला मरीज की गंभीर हालत की सूचना मिली तो वे पहले कार्यकर्ताओं के साथ अस्‍पताल पहुचे। मरीज की नब्‍ज भांपी। परिजनों और ड्यूटी पर मौजूद डॉक्‍टर को और बेहतर ईलाज का परामर्श दिया। इसके पश्‍चात् ही वे समारोह मे शामिल होनें पहुचे।

बलात्कार पीड़िता आदिवासी बच्ची के साथ दुष्कर्म करने वाले भाजपा के मंत्री के रिश्तेदार इसलिए संबंधित मंत्री का इस्तीफा लें मुख्यमंत्री : जीतू पटवारी

Chief Minister: Jitu Patwari, relatives of the BJP minister who raped the tribal girl, hence the concerned minister should resign. मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, रतलाम लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी कांतिलाल भूरिया एवं विधायक विक्रांत भूरिया ने आज अलीराजपुर के जोबट में सामूहिक दुष्कर्म पीड़िता 11 वर्षीय आदिवासी बच्ची के परिवारजनों से मुलाकात की एवं ढांढस बंधाया। पटवारी ने कहा कि दुख एवं पीड़ा के इस समय में पूरी कांग्रेस पार्टी पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है एवं हम सब इस परिवार के लिए न्याय की लड़ाई लड़ेंगे। इसके पश्चात पटवारी एवं विधायक विक्रांत भूरिया ने एक अन्यत्र स्थान पर पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि भाजपा से जुड़े बाहुबली राजनैतिक परिवार के सदस्य ने उस बेटी की अस्मत लूटी और यहां से उस बेटी को इंदौर रेफर करना पड़ा इतनी स्थिति भयावह है, क्या मुख्यमंत्री मोहन यादव में इतनी सद्बुद्धि नही की राजनैतिक प्रभाव का दुरुपयोग हो रहा है और पीड़ित परिवार से जब मैं मिलने गया तो वहां बहनों ने मुझे बताया कि उनके साथ अक्सर ऐसी वारदातों को अंजाम दिया जाता है, इसका अर्थ यह है कि भारतीय जनता पार्टी आदिवासियों की महिलाओं और बेटियों से होने वाली दुष्कर्म और छेड़छाड़ की घटनाओं को लेकर आंख-कान बंद कर चुकी है। पटवारी ने कहा कि भाजपा और उसके विचार और हमारे मुख्यमंत्री मोहन यादव बार-बार एहसास कराते हैं कि वे आदिवासियों के विरोधी हैं। कुछ दिन पहले श्री राहुल गांधी आए थे उन्होंने महुआ बीनने वाली महिलाओं से बात की, उनके दर्द को समझा तो मोहन यादव जी ने आदिवासियों का अपमान किया, अभी 4 दिन पहले मोहन यादव जब झाबुआ में आए तो उन्होंने आदिवासियों को कहा है कि आपको फोकट का अनाज हम देते हैं यह कहकर फिर से अपमान किया, मोहन यादव बार-बार आदिवासियों का अपमान कर रहे हैं। मोहन यादव जी को माफी मांगनी चाहिए। आदिवासियों के इस अपमान के लिए आदिवासी समाज उनको कभी क्षमा नहीं करेगा। पटवारी ने कहा कि मध्यप्रदेश आज आदिवासी बच्चियों-महिलाओं के खिलाफ अपराध में सर्वप्रथम है, इसका कारण बीजेपी सरकार के लगातार कई वर्षों का जंगलराज है। मध्य प्रदेश में 17 बहनों की रोज अस्मत लूटी जाती है। बलात्कार में मामलों में मध्य प्रदेश टॉप 3 राज्यों में शामिल है, 3 हजार से ज्यादा महिलाओं से बलात्कार के मामले पिछले वर्ष आए एवं इसमें हर साल बढ़ोतरी हो रही है खासकर आदिवासी बहनों के साथ, पीड़ित बेटी के पिता रोजगार के लिए बाहर थे यहां को यह बड़ी समस्या है झाबुआ अलीराजपुर में पलायन करना पड़ता है रोजगार के लिए यह भाजपा की सरकार है। 6459 बालिका एवम बुजुर्ग महिलाओं से कुल दुष्कर्म के मामले हुए ऐसे में मोहन यादव सरकार को चुल्लूभर पानी में डूब जाना चाहिए, ये आदिवासियों को मुफ्त अनाज की बात कहते हैं परंतु खुद के मुफ्त के हेलीकॉप्टर, हवाई जहाज, सरकारी आवास एवं अन्य सुविधाएं पर कुछ नहीं बोलते। पटवारी ने कहा कि मुझे पीड़ित परिवार से मिलकर उनकी वेदना का एहसास हुआ, बोलते हुए भी रोना आ रहा है, सरकार का ऐसा रवैया है कि पीड़ित परिवार से कलेक्टर, एसडीएम मिलने तक नही गए। जिस परिवार ने वारदात की उस परिवार को भाजपा की सरकार का राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है इसलिए मुख्यमंत्री को संबंधित मंत्री का इस्तीफा लेना चाहिए अन्यथा आदिवासी विरोधी भाजपा , आरक्षण विरोधी भाजपा, संविधान विरोधी भाजपा, लोकतंत्र विरोधी भाजपा, वोट के अधिकार की विरोधी से जनता बदले लेगी। आदिवासियों के अपमान का बदला लेगी, भाजपा के राज में 2 लाख आदिवासी बहने गायब हुई उसका बदले लेगी, रोजगार के लिए पलायन का बदला लेगी,बैकलॉग के पद 20 साल से नही भरे उनका बदला लेगी, आदिवासीयों के खिलाफ टिप्पणीका बदला लेगी।

रानी दुर्गावती टाईगर रिजर्व में कल से शुरू होगी गिद्ध गणना

Vulture census will start from tomorrow in Rani Durgavati Tiger Reserve, many species were found in the month of February. वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व में सेकेंड फेज के तहत सोमवार से गिद्ध गणना शुरू हो रही है। बता दें कि इसी साल फरवरी माह में गिद्ध गणना हुई थी। यह गणना विश्व व्यापी रूप में हुई थी। जिसमें गिद्धों की प्रजाति के साथ सामन्य वन और अभयारण्य में भी गणना हुई थी। दमोह : प्रदेश के सबसे बड़े वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व में सेकेंड फेज के तहत सोमवार से गिद्ध गणना शुरू हो रही है। जबकि फरवरी माह में एक गणना हो चुकी है, जिसमें पिछली गणना की अपेक्षा पांच गुना ज्यादा गिद्ध मिले थे और कल से शुरू हो रही गणना में इनकी संख्या काफी अधिक बड़ने के आसार हैं। इसी साल फरवरी माह में गिद्ध गणना हुई थी। यह गणना विश्व व्यापी रूप में हुई थी। जिसमें गिद्धों की प्रजाति के साथ सामन्य वन और अभयारण्य में भी गणना हुई थी। दोनों मंडलों में तीन दिन गणना के बाद परिणाम अच्छे निकलकर आये थे। यह गणना दो वर्ष बाद हुई थी, इससे पूर्व 2021 में हुई थी। उस समय नौरादेही में गिद्धों की संख्या 300 थी जबकि फरवरी माह में हुई गणना में यह सख्या 1500 से अधिक पहुंच गई थी जो दो साल में पांच गुनी बड़ी थी। यही आलम दमोह के सामन्य वनों में देखने मिला था। सामान्य वन में भी गिद्धों की संख्या में बढ़ोतरी हुई थी। जिस पर वन विभाग के अधिकारियों ने खुशी व्यक्त करते हुए कहा था कि भारत से विलुप्त प्रजाति गिद्ध यहां अपना आशियाना बना रही है। बलचर रेस्टोरेंट की होनी थी शुरूआतगिद्ध प्रजाति के बचाव के लिए वन विभाग अनेक तरह के उपाय खोज रहा है। लगभग दो से तीन माह पूर्व नौरादेही के डीएफओ ने एक प्रस्ताव उच्च अधिकारियों को भेजा था, जिसका उद्देश्य विलुप्त प्रजाति गिद्धों की संख्या को नौरादेही में बढ़ाने के लिए बलचर रेस्टोरेंट चालू करने का हवाला दिया गया था और यह वल्चर रेस्टोरेंट नौरादेही की दो रेंज में खोले जाने थे, जिसकी शुरूआत अप्रैल माह से होनी थी। इस वल्चर रेस्टोरेंट का उद्देश्य था कि वल्चर रेस्टोरेंट में गिद्धों को एकत्र किया जाएगा, उनके लिए भोजन दिया जाएगा। जिससे प्रजाति में वृद्धि हो सके और रहवासी गिद्ध दूसरे क्षेत्रों में ना जा सकें। यह बलचर रेस्टोरेंट डोगरगांव और मुहली रेंज में चालू होने की जानकारी मिली थी, लेकिन यह कार्य अभी चालू नहीं हो पाया है। इसलिए हो रही गणनामुहली रेंजर नीरज बिसेन ने बताया कि ग्रीष्मकालीन गणना पहली बार हो रही है। इस गणना का उदेश्य है जो रहवासी गिद्ध हैं वह गर्मियों में यही रह जाते हैं, लेकिन प्रवासी गिद्ध इन दिनों यहां से प्रवास कर जाते हैं। विभाग की यह मंशा है कि जो गिद्ध स्थाई रूप से रहने वाले हैं उनकी प्रजाति और संख्या की गणना की जाये। गिद्ध गणना लगातार तीन दिन तक जारी रहेगी और उसमें रहवासी गिद्ध और प्रवासी गिद्धों की जानकारी एकत्रित की जायेगी। उन्होंने बताया कि बल्चर रेस्टोरेंट शुरू होने थे उनके प्रस्ताव भेजे गये थे, लेकिन अभी मंजूरी नहीं आई है। जिसके कारण बल्चर रेस्टोरेंट का कार्य अभी आरंभ नहीं हुआ है। आदेश आने के बाद शुरूआत होगी।

जंगल महकमे में प्रभार का खेल: मंत्री ने नोटशीट लिख पूछा क्या है नियम…?

Game of charge in the forest department: The minister wrote a notesheet and asked what are the rules…? भोपाल। जल संसाधन, लोक निर्माण और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकीय विभाग की तरह जंगल महकमे में भी प्रभार का खेल शुरू हो गया है। वन विभाग के आला अफसरों द्वारा अधिकारियों और कर्मचारियों की कमी के आधार पर अपने चहेतों को दो-दो प्राइम पदों का प्रभार दिए जाने का खेल खूब चल रहा है। दिलचस्प पहलू यह है कि प्रभार के खेल में मंत्री को विश्वास में नहीं लिया जा रहा है। यही वजह रही कि विभागीय मंत्री नागर सिंह चौहान ने एक नोटशीट लिखकर विभाग से जानना चाहा कि प्रभार के नियम क्या है और दूसरे राज्यों में क्या व्यवस्था है..? हालांकि उनकी यह नोटशीट महीने भर से अधिक समय से प्रशासन-एक शाखा में धूल खा रही है। वन विभाग में सर्किल प्रमुख, वन संरक्षक सामाजिक वानिकी, डीएफओ और एसडीओ के पद लंबे समय से रिक्त पड़े हैं। इन पदों को नियमित रूप से भरने के लिए अपर मुख्य सचिव से लेकर वन बल प्रमुख प्रमुखता से पहल नहीं कर रहें है। इसके बदले वे अपने चहेते अफसरों को एक से अधिक पदों का प्राइम प्रभार देकर उन्हें उपकृत कर रहें हैं। यही नहीं, उन्हें बाकायदा विकास और कैम्पा मद से अधिक फंडिंग भी दे रहें है। वन मंत्री नागर सिंह चौहान को प्रभार के खेल का फंडा उनके विश्वसनीय अधिकारी ने समझाया। यही नहीं, इसके लिए वन मंत्री चौहान के थिंक टैंक अफसर ने नोट शीट लिखकर विभाग के मुखिया से प्रभार देने के नियम और दूसरे राज्यों में व्यवस्था की जानकारी मांगी है। हालांकि उनकी नोटशीट को लेकर विभाग के अफसर गंभीर नजर नहीं आ रहे हैं। यही वजह है कि एक महीने से उनकी नोटशीट धूल खा रही है। मुख्यालय में एपीसीसीएफ ग्रीन इंडिया मिशन से लेकर एपीसीसीएफ सामाजिक वानिकी जैसी महत्वपूर्ण शाखाएं प्रभार पर संचालित की जा रही है। इसके अलावा टीकमगढ़, दक्षिण सिवनी, अनूपपुर और दतिया बरमंडल प्रभाव में संचालित हो रहे हैं। एफडी बांधव टाइगर रिजर्व, बैतूल सर्किल, सामाजिक वानिकी रीवा और सामाजिक वानिकी सागर सर्किल, बालाघाट और खंडवा उत्पादन वन मंडल भी प्रभार में संचालित हो रहे हैं। मैहर के रेंजर को रीवा में दो-दो एसडीओ का प्रभारप्रभार के खेल का ताजा उदाहरण रीवा सर्किल का है। मुख्य वन संरक्षक रीवा राजेश राय ने 70 किलोमीटर दूर मैहर में पदस्थ प्रभारी एसडीओ और रेंजर यशपाल मेहरा को रीवा एसडीओ का प्रभार सौंपा है। राय यही नहीं रुके बल्कि मेहरा पर और उदारता बढ़ाते हुए उन्हें एसडीओ मऊगंज का भी प्रभार दे दिया है। जबकि रीवा में दो-दो वरिष्ठ एसडीओ कार्यरत है। रीवा में पदस्थ दोनों एसडीओ पर राय ने विश्वास नहीं जताया। सवाल यह उठता है कि 70 किलोमीटर दूर मैहर में पदस्थ प्रभारी एसडीओ मेहरा रीवा और मऊगंज का प्रभार की जिम्मेदारी कैसे संभालेंगे..? सवाल यह भी उठ रहा है कि प्रभारी एसडीओ राजसात की कार्रवाई करने में सक्षम नहीं है तो फिर यह करवाई कौन करेगा..? रेंजर मेहरा मैहर एसडीओ प्रभार के रूप में काम कर रहे हैं और उन्हें दो और प्रभारी एसडीओ का दायित्व सौंपने के पहले वन बल प्रमुख को विश्वास में नहीं लिया गया। यही वजह है कि प्रभार के आदेश की प्रतिलिपि वन बल प्रमुख को नहीं सौंपी। इसी प्रकार अनूपपुर वन मंडल में तो एक डिप्टी रेंजर को तीन-तीन रेंज के प्रभार दिए गए हैं। चर्चा है कि जंगल महकमे में ऊंचे पदों के प्रभार लेने के लिए पॉवर के साथ-साथ पैसे भी खर्च करने पड़ते हैं। इसी के दम पर वन विभाग में कई बड़े पद प्रभार में चल रहे है। मंडला, सहित आधा दर्जन से अधिक वन मण्डलों में प्रभार के खेल खूब फूल-फल रहा है।

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