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मुख्यमंत्री की ताजपोशी के बाद नए मुख्य सचिव को लेकर चर्चाएं शुरू.

Discussions have commenced on the appointment of the new Chief Secretary following the swearing-in of the Chief Minister. अनुराग जैन, विवेक अग्रवाल व हरिरंजन राव मप्र लौटेंगे, मिलेगी बड़ी जिम्मेदारी. Anurag Jain, Vivek Agrawal, and Hariranjan Rao will return to Madhya Pradesh, taking on significant responsibilities. भोपाल। प्रदेश के नए मुख्यमंत्री के रूप में डॉ. मोहन यादव की ताजपोशी के साथ नए मुख्य सचिव को लेकर चर्चाएं प्रारंभ हो गई है। इसके साथ ही यह चचर्चा भी है कि केंद्रीय भूतल परिवहन सचिव अनुराग जैन प्रदेश लौट सकते हैं। यदि अनुराग जैन प्रदेश लौटते हैं तो श्रीमती बीरा राणा के बाद उन्हें प्रदेश का मुख्य सचिव बनाया जाएगा। अतिविश्वसनीय सूत्रों के अनुसार श्रीमती राणा का कार्यकाल पूरा होने के एक माह पूर्व यानी फरवरी 2024 के अंतिम या मार्च के प्रथम सप्ताह में राज्य सरकार किसी वरिष्ठ अधिकारी को मंत्रालय मेंओएसडी नियुका कर देगी। ओएसडी ही श्रीमती राणा की सेवानिवृत्ति पर 31 मार्च 2024 को राज्य के प्रशासनिक मुखिया का पदभार संभाल लेगा। सूत्रों का कहना है कि अनुराग जैन यदि प्रदेश नहीं लौटते तो अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य च चिकित्सा शिक्षा मोहम्मद सुलेमान, अपर मुख्य सचिव गृह डॉ. राजेश राजौरा या अपर मुख्य सचिव नर्मदा घाटी विकास एसएन मिश्रा में से किसी एक को मुख्य सचिव बनाया जा सकता है। अंतिम फैसला मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को लेना है। सूत्रों के अनुसार केंद्र सरकार में प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ अतिरिक्त सचिव वित्त विवेक अग्रवाल तथा प्रधानमंत्री कार्यालय में पदस्थ अतिरिक्त सचिव हरिरंजन राव भी प्रदेश लौट सकते हैं। यदि अग्रवाल व राव प्रदेश लौटते हैं तो उन्हें महत्त्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। दोनों मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के गृह जिले उजजैन में कलेक्टर रह चुके हैं। मुख्यमंत्री यादव जब पर्यटन विकास निगम के अध्यक्ष थे, तब हरिरंजन राव निगम के एमडी थे।

गोपाल भार्गव बने एमपी के प्रोटेम स्पीकर.

Gopal Bhargav becomes the Protem Speaker of Madhya Pradesh. राज्यपाल ने दिलाई शपथ; सबसे सीनियर और नौ बार के विधायक हैं भार्गव The Governor administered the oath; Bhargav is the most senior and a nine-time legislator. भाजपा के सबसे सीनियर व रहली से नौ बार के विधायक गोपाल भार्गव ने गुरुवार को प्रोटेम स्पीकर पद की शपथ ली। सुबह 11 बजे राजभवन में गवर्नर मंगुभाई पटेल उनको शपथ दिलाई। बाद में विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर विधायकों को शपथ प्रोटेम स्पीकर दिलाएंगे। यहां स्पीकर नरेंद्र सिंह तोमर भी शपथ लेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव गुरुवार को कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस करेंगे। इसके बाद एसीएस की बैठक लेंगे। वे इससे पहले विधानसभा स्पीकर और प्रोटेम स्पीकर के शपथ ग्रहण कार्यक्रम में शामिल हुए। सीएम ने पहली कैबिनेट बैठक में बुधवार को खुले में मांस की बिक्री और तेज आवाज में बजने वाले लाउड स्पीकर को लेकर अहम फैसले किए। पूर्व सीएम उमा भारती ने गुरुवार को इनकी तारीफ की है। ऐसी है प्रोटेम स्पीकर की व्यवस्था प्रोटेम स्पीकर का जिक्र संविधान के अनुच्छेद 180(1) में है। इसमें प्रावधान है कि जब विधानसभा अध्यक्ष या उपाध्यक्ष का पद रिक्त हो तो कार्यालय के कर्तव्यों का पालन ऐसे विधानसभा सदस्य द्वारा किया जाना चाहिए जिसे राज्यपाल नियुक्त कर सकते हैं। आमतौर पर सदन के सबसे वरिष्ठ सदस्य को प्रोटेम स्पीकर चुना जाता है। इस मामले में वरिष्ठता सदन में सदस्यता से देखी जाती है न कि सदस्य की उम्र से तय की जाती है। संवैधानिक परंपरा के अनुसार प्रोटेम स्पीकर की नियुक्ति के लिए कोई विशिष्ट संवैधानिक या वैधानिक प्रावधान नहीं है।

मंत्रिमंडल विस्तार में नहीं चलेगा पट्ठावाद, चौंकाने वाले हो सकते मंत्रियों के नाम.

The expansion of the cabinet, here are the names of the ministers who could be surprising. हर अंचल से बनाए जाएंगे 4 से 6 तक मंत्री- खाली रखे जा सकते हैं आधा दर्जन मंत्री पद, मंत्रिमंडल में जातीय संतुलन साधने की तैयारी उदित नारायण भोपाल। जिस प्रकार मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्रियों के चयन में रसूखदार नेताओं की नहीं चली, ठीक इसी तर्ज पर मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के मंत्रिमंडल का गठन होगा। लोकसभा चुनाव की दृष्टि से इसमें क्षेत्रीय और जातीय संतुलन तो साधा जाएगा लेकिन पट्ठावाद बिल्कुल नहीं चलेगा। अर्थात रसूखदार नेताओं का समर्थक होने के कारण किसी को मंत्री नहीं बनाया जाएगा। सूत्रों के अनुसार पहले चरण में 26-27 मंत्रियों को शामिल कर शपथ दिलाई जाएगी और आधा दर्जन से ज्यादा मंत्री पद खाली रखे जाएंगे। हमेशा की तरह नेतृत्व मंत्रिमंडल के गठन में भी सभी को चौंका सकता है। मोहन-वीडी लेकर जाएंगे संभावित मंत्रियों की सूचीमंत्रिमंडल के गठन पर भी केंद्रीय नेतृत्व की मुहर लगेगी। जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री डॉ यादव और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा संभावित मंत्रियों की सूची लेकर दिल्ली जाएंगे। वहां नेतृत्व के साथ सूची पर डिस्कशन होगा। नाम जोड़े और घटाएं जाएंगे। इसके बाद फायनल सूची के अनुसार मंत्रियों को शपथ दिलाई जाएगी।वरिष्ठ और नए के बीच होगा संतुलनमंत्रिमंडल के गठन में भी मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्रियों का फार्मूला अपनाया जा सकता है। इसके तहत वरिष्ठ और नए विधायकों के बीच संतुलन साधा जा सकता है। कुछ वरिष्ठों के साथ नए मंत्री ज्यादा बनाए जा सकते हैं। जैसे 8-9 वरिष्ठ मंत्रियों के साथ 16-18 नए विधायकों को मंत्री बनाया जा सकता है। चंबल-ग्वालियर अंचल से ये बन सकते मंत्रीभाजपा सूत्रों के अुनसार अंचलों में मिली सीटों के संख्या के आधार पर मंत्रियों की संख्या तय हो सकती है। इस आधार पर चंबल- ग्वालियर, बुंदेलखंड, विंध्य और मध्य अंचल से 4-4 मंत्री बनाए जा सकते हैं। इनमें जातीय संतुलन भी साधा जाएगा। जैसे, चंबल-ग्वालियर से नेता प्रतिपक्ष को हराने वाले अंबरीश शर्मा, जनता के बीच सक्रिय प्रद्युम्न सिंह तोमर, केपी सिंह को हराने वाले देवेंद्र कुमार जैन और घनश्याम सिंह को हराने वाले प्रदीप अग्रवाल को मंत्री बनाया जा सकता है। नरेंद्र सिंह तोमर पहले ही विधानसभा अध्यक्ष घोषित किए जा चुके हैं। बुंदेलखंड, विंध्य में ये हो सकते चेहरेबुंदेलखंड और विंध्य से मंत्रिमंडल में वरिष्ठ और कनिष्ठ के बीच संतुलन के तहत चेहरे तय किए जाएंगे। बुंदेलखंड से नरयावली विधायक प्रदीप लारिया, छतरपुर की ललिता यादव और जबेरा के धर्मेंद्र लोधी को मौका मिल सकता है। इनके अलावा वरिष्ठों में गोपाल भार्गव, भूपेेंद्र सिंह, गोविंद सिंह राजपूत, जयंत मलैया और बृजेंद्र प्रताप सिंह में से 1 अथवा 2 को मौका मिल सकता है। विंध्य अंचल से सीधी की रीति पाठक, जयसिंह नगर की मनीषा सिंह, मऊगंज से प्रदीप पटेल और रामपुर बघेलान से जीते विक्रम सिंह को मौका मिल सकता है। इस अंचल के राजेंद्र शुक्ला पहले ही उप मुख्यमंत्री बन चुके हैं। महाकौशल से बनाए जा सकते हैं 5 मंत्रीमहाकौशल अंचल में भाजपा को इस बार 38 में से 21 सीटें मिली हैं। यह कमलनाथ का भी इलाका है। इसलिए यहां से 5 मंत्री बनाए जा सकते हें। इनमें बहोरीबंद के प्रणव पांडे, नरसिंहपुर के प्रहलाद पटेल और बैतूल के हेमंत खंडेलवाल को मौका मिल सकता है। इनके अलावा जबलपुर के राकेश सिंह और गाडरवारा के उदयप्रताप सिंह में से किसी एक को मौका मिल सकता है। ये दोनों पूर्व सांसद हैं। इसी प्रकार शहपुरा के ओम प्रकाश धुर्वे और मंडला की संपतिया उइके में से किसी एक को मंत्री बनाया जा सकता है। मालवा-निमाड़ से बन सकते सर्वाधिक मंत्रीमालवा- निमाड़ अंचल में सर्वाधिक 66 सीटें हैं। भाजपा ने इनमें से 48 सीटें जीती हैं। इसलिए यहां से सर्वाधिक मंत्री बनाए जा सकते हैं। इंदौर से तुलसीराम सिलावट के अलावा कैलाश विजयवर्गीय और रमेश मैंदोला में से किसी एक काे मंत्री बनाया जा सकता है। इनके अलावा सज्जन सिंह वर्मा को हराने वाले राजेश सोनकर, दीपक जोशी को हराने वाले आशीष शर्मा, हरसूद के विजय शाह, नेपानगर की मंजू राजेंद्र दादू मंत्री बन सकते हैं। भोपाल के आसपास भी कम दावेदार नहींप्रदेश के मध्य अंचल अर्थात भोपाल के आसपास मंत्री पद के दावेदारों की संख्या कम नहीं है। इस बार रामेश्वर शर्मा, विश्वास सारंग, कृष्णा गौर, विष्णु खत्री में से दो मंत्री बन सकते हैं। रायसेन जिले में प्रभुराम चौधरी और सुरेंद्र पटवा में से किसी एक को मंत्री बनाया जा सकता है। इनके अलावा सीहोर के सुदेश राय और खिलचीपुर में पूर्व मंत्री प्रियव्रत सिंह को हराने वाले हजारीलाल दांगी मंत्री बनाए जा सकते हैं। संभावित मंत्रियों की यह सूची सूत्रों पर आधारित है क्योंकि नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी क्या करेगी, कोई नहीं जानता।

आखिरी सांस तक आपके साथ खड़ा रहूंगा.

I will stand by you until my last breath. कमलनाथ ने कांग्रेस अध्यक्ष पद के इस्तीफे को लेकर किया खुलासा छिंदवाड़ा। भले ही प्रदेश में कांग्रेस की सरकार नहीं बन पाई है, लेकिन पूर्व सीएम कमलनाथ अपने गढ़ छिंदवाड़ा में अपना किला बचाने में कामयाब रहे। लगभग 43 सालों से कमलनाथ छिंदवाड़ा की पहचान बनकर राजनीति में छाए हुए हैं। ऐसे में इस बार भी विधानसभा चुनाव में छिंदवाड़ा की सातों सीटों पर कांग्रेस को जीत मिली है। कमलनाथ अब छिंदवाड़ा दौरे पर हैं और वे हर विधानसभा क्षेत्र में जाकर आभार सभा कर रहे हैं। पांढुर्णा और सौंसर में बुधवार को कमलनाथ ने आभार सभा में बड़ा बयान दिया है। उन्होंने पांढुर्णा में कहा कि वे आखिरी सांस तक छिंदवाड़ा की जनता के बीच रहेंगे, वह रिटायरमेंट नहीं ले रहे है। नहीं लेगें रिटायरमेंट कमलनाथ का यह बयान ऐसे समय में आया है जब उनकों लेकर राजनीतिक गलियारो में यही चर्चा चल रही थी कि विधानसभा चुनाव में मिली हार के कारण उन्हें पीसीसी चीफ पद से इस्तीफा देना पड़ सकता है। हालांकि आला कमान ने नाथ को दोबारा लोकसभा चुनाव तक की जवाबदारी दी है। ऐसे में कमलनाथ ने अपने गढ़ छिंदवाड़ा से आज इसको लेकर एक बड़ा बयान देकर यह साफ कर दिया है कि वे आने वाले समय में भी पूरी सक्रियता के साथ जनता के बीच रहेंगे और रिटायरमेंट नहीं लेंगे।आखिरी सांस तक जनता के साथ उन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि वे अपनी आखिरी सांस तक जनता के साथ खड़े है। वह रिटायरमेंट नहीं ले रहे है। उन्होंने कहा कि छिंदवाड़ा की जनता का प्यार उन्हे पिछले 43 सालों से मिलता आ रहा है। आगे भी यह प्यार और स्नेह उन्हे मिलता रहेगा। उन्होंने कहा कि जिले के विकास के लिए वह कोई भी कोर कसर नहीं छोड़ेंगे। लोकसभा चुनाव का फूंका बिगुल कमलनाथ ने छिंदवाड़ा में मिली बंपर जीत के बाद अब लोकसभा चुनाव की तैयारियों का बिगुल फूंक दिया है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से छिंदवाड़ा की जनता ने विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का साथ दिया है। इसी तरह से लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस को यही प्यार और विश्वास लोकसभा चुनाव में भी मिलेगा। इस दौरान उनके साथ उनके बेटे नकुलनाथ भी मौजूद थे।

मुख्यमंत्री बनते ही प्रदेश में बड़ी प्रशासनिक सर्जरी के आसार।

As soon as becoming the Chief Minister, signs of significant administrative changes in the state. सचिवालय से सबसे पहले हटाए जाएंगे पीएस रस्तोगी, मुख्य सचिव के लिए तीन नाम का भेजा जाएगा डीओपीटी में पैनल – मंत्रालय स्तर पर सचिव सेक्रेट्री सहित कई अन्य विभागों के अधिकारियों के भी होंगे ट्रांसफर – प्रदेश में कानून व्यवस्था की समीक्षा के साथ कई जिलों के पुलिस अधीक्षकों के भी होंगे तबादले।  *उदित नारायण*  भोपाल। मध्य प्रदेश के नए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने वल्लभ भवन में अधिकारियों के साथ बैठक की। इस बैठक के साथ ही प्रशासनिक हमले में हड़कंप मच गया है। इसके पीछे की वजह है कि जनता से जुड़े हुए कामकाज करने वाले अधिकारियों की पूछ परख ज्यादा होगी। मुख्यमंत्री यादव ने स्पष्ट अधिकारियों को निर्देश दिया है कि बिना भ्रष्टाचार की जनता से जुड़े हुए काम किए जाएं। सीएम के फरमान के बाद जरूर जल्द ही सर्जरी होगी सबसे पहले मुख्यमंत्री सचिवालय में लंबे समय तक पदस्थ रहे मनीष रस्तोगी को किसी और विभाग में पदस्थित किया जाएगा। मुख्यमंत्री सचिवालय में अनुभवी प्रमुख सचिव की पोस्टिंग होगी। जिन्हें कई विभागों में कामकाज का अनुभव रहा है। ऐसे में कई नाम सामने आ रहे हैं। वही मार्च में 2024 मौजूदा मुख्य सचिव वीरा राणा भी रिटायर होगी। इससे पहले सरकार की कोशिश होगी कि तीन सीनियर आईएएस अधिकारियों के नाम का पैनल डीओपीटी भेजा जाएगा। जिससे मध्य प्रदेश में 2 से 3 साल तक फिक्स मुख्य सचिव की पोस्टिंग हो सके। मंत्रालय सूत्रों का कहना है कि दो से तीन विभाग में प्रमुख सचिव के पद खाली हैं अवसरों को प्रमोशन के साथ नई पोस्टिंग भी दी जाएगी मंत्रालय स्तर पर सचिव, डिप्टी सेक्रेटरी भी ट्रांसफर किए जाएंगे। कई सीनियर अधिकारियों की मीटिंग के बाद मंत्रालय में पदस्थ सक्रिय अधिकारियों को फ्रंट में लेकर आया जाएगा।  सबसे पहले नपेंगे बड़े जिले की कलेक्टर – सूत्र बताते हैं कि तत्कालीन कलेक्टर ने जनता की कई मांगों को लेकर तत्कालीन उच्च शिक्षा मंत्री और मौजूदा मुख्यमंत्री मोहन यादव को काफी परेशान किया था मोहन यादव ने इस बात की जानकारी संगठन को भी दी थी लेकिन सीनियर आईएएस अधिकारी के दबाव में कलेक्टर को नहीं हटाया गया अब सरकार के हाथ में कमान मोहन यादव के हाथ में है ऐसे में माना जा रहा है कि एक बड़े जिले के कलेक्टर को भी सबसे पहले हटाया जाएगा। सूत्र बताते हैं कि सीएम बनने के बाद कलेक्टर और सीएम सचिवालय में पदस्थ रहे मनीष रस्तोगी तक उनसे मिलने नहीं गए। हालांकि मंत्रालय आने के बाद प्रमुख सचिव औपचारिकता के तौर पर मुलाकात की।  सचिवालय में शिफ्ट होंगे उच्च शिक्षा विभाग के कई ओएसडी – उच्च शिक्षा विभाग से जुड़े हुए अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा मुख्यमंत्री पहले इसी विभाग के मंत्री थे। ऐसे में अपने भरोसेमंद और काबिल ओएसडी को सचिवालय में जगह देंगे। इसके पीछे का कारण है कि कैबिनेट की पहली बैठक में ही उच्च शिक्षा विभाग से जुड़े हुए कई फैसलों पर अमल किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शिक्षा से जुड़े हुए कार्यों को पूरा करने के लिए उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों को पदस्थ सीएम सचिवालय में किया जाएगा।

पहला आदेश पर्यावरण के हित में ,सीएम मोहन.

The first order in the interest of the environment, CM Mohan. भोपाल। म.प्र. में धार्मिक स्थल एवं अन्य स्थानों पर म.प्र. कोलाहल नियंत्रण अधिनियम, ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम, 2000 के प्रावधानों तथा माननीय सर्वोच्च न्यायालय, माननीय उच्च न्यायालय द्वारा समय-समय पर जारी दिशा निर्देशों के अनुक्रम में राज्य शासन द्वारा निर्णय लिया गया है कि किसी भी प्रकार के धार्मिक स्थल अथवा अन्य स्थान में निर्धारित मापदण्ड के अनुरूपही ध्वनि विस्तारक यंत्रों (लाउडस्पीकर / डी.जे.) आदि का उपयोग किया जा सकेगा। ■ धार्मिक स्थल एवं अन्य स्थानों पर ध्वनि विस्तारक यंत्रों (लाउडस्पीकर / डी.जे.) को अवैधानिक रूप से और निर्धारित मापदंड से अधिक आवाज में बजाने पर लगेगा प्रतिबंध। ■ म.प्र. कोलाहल नियंत्रण अधिनियम, ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम, 2000 के प्रावधानों, माननीय सर्वोच्च न्यायालय एवं उच्च न्यायालय द्वारा जारी दिशा- निर्देशों के अनुक्रम में लिया गया निर्णय। ■ धर्म गुरुओं से संवाद और समन्वय के आधार लाउडस्पीकरों को हटाने का प्रयास किया जाएगा और ऐसे धार्मिक स्थलों की सूची बनाई जाएगी जहां उक्त नियमों/निर्देशों का अनुपालन नहीं किया जा रहा है। ■ ध्वनि प्रदूषण तथा लाउडस्पीकर आदि के अवैधानिक उपयोग की जांच के लिये सभी जिलों में उड़नदस्तों के गठन का निर्णय लिया गया है।• जिला स्तर पर साप्ताहिक समीक्षा की जाएगी एवं इस संबध में 31 दिसंबर 2023 तक पालन प्रतिवेदन गृह विभाग को उपलब्ध कराना होगा। ■ ध्वनि प्रदूषण के मामलों की सतत निगरानी के लिए अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक अपराध अनुसंधान विभाग पुलिस मुख्यालय को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।

राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के चेयरमैन डॉ. कुसमरिया ने संभाला कामकाज, अक्टूबर में हुई थी नियुक्ति.

Dr. Kusmariya assumed office as the Chairman of the State Backward Classes Commission, appointed in October. डॉ. कुसमरिया को राज्य शासन ने मध्यप्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया था. कार्यभार ग्रहण करने के बाद डॉ. कुसमरिया ने आयोग की गतिविधि के बारे में जानकारी प्राप्त की. आयोग मुख्य रूप से प्रदेश में पिछड़ा वर्ग के लिये हितप्रहरी के रूप में कार्य करता है! मध्य प्रदेश में डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया ने आज भोपाल के श्यामलाहिल्स हिल्स मध्यप्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग पहुंचकर अध्यक्ष पद का कार्यभार ग्रहण किया. इस मौके पर पिछड़ा वर्ग से जुड़े जन-प्रतिनिधि भी मौजूद थे डॉ. रामकृष्ण कुसमारिया (जन्म 30 जुलाई 1942) उनका जन्म सकोर में एक किसान परिवार में हुआ था। वह 8 फरवरी 2019 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हुए, फिर भारतीय जनता पार्टी10वीं, 11वीं के सदस्य थे। , 12वीं, 13वीं और 14वीं लोकसभा भारत की। 10वीं, 11वीं, 12वीं और 13वीं लोकसभा में उन्होंने दमोह निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया और 14वीं लोकसभा में उन्होंने खजुराहो निर्वाचन क्षेत्र मध्य प्रदेश राज्य का। 2008 में, वह मध्य प्रदेश विधानसभा के लिए पथरिया विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए। के अध्यक्ष भी हैं।। बुंदेलखंड विकास प्राधिकरण में किसान कल्याण और कृषि विकास मंत्री बने। वर्तमान में उन्हें वर्ष 2023 में राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया है!

भाजपा: अचर्चित चेहरों के हाथ कमान सौंपने में जोखिम मे नि:संदेह.

BJP: Taking the risk in entrusting key responsibilities to lesser-known faces without hesitation. उदित नारायण इन अप्रत्याशित फैसलों के भीतर कई राजनीतिक संदेश छुपे हैं, जो भाजपा के स्वयंभू नेताओं के लिए तो हैं ही, उन विपक्षी नेताओं के लिए भी हैं, जो मात्र सीट बंटवारे और वोटों के कागजी गणित के भरोसे आगामी लोकसभा चुनाव में मोदी को पटखनी देने का अरमान पाले हुए हैं। भारतीय जनता पार्टी और उसके शीर्ष नेतृत्व ने हिंदी भाषी तीन राज्यों में भारी जीत के बाद जिन अचर्चित चेहरों के हाथों में सत्ता की कमान सौंपी है, उससे ‘चौंकना’ शब्द भी फीका लगने लगा है। यह कुछ वैसा ही था कि कोई जादूगर अपनी जेब में हाथ डाले और नोट किसी भीड़ में छिपे शख्स की जेब से निकले।मोदी- शाह ने मीडिया के तमाम अटकलों को बेकार साबित कर दिया है। लेकिन इन अप्रत्याशित फैसलों के भीतर कई राजनीतिक संदेश छुपे हैं, जो भाजपा के स्वयंभू नेताओं के लिए तो हैं ही, उन विपक्षी नेताओं के लिए भी हैं, जो मात्र सीट बंटवारे और वोटों के कागजी गणित के भरोसे आगामी लोकसभा चुनाव में मोदी को पटखनी देने का अरमान पाले हुए हैं। विधानसभा चुनावों में भाजपा के जीते हुए मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ राज्यों में ‘कौन बनेगा मुख्यमंत्री’ की रेस असली हार्स रेस से भी ज्यादा रोमांचक होने लगी थी। दावेदारी और राजयोग में अदृश्य मुकाबला चल रहा था। मीडिया की आंखें और राजनीतिक भविष्यवाणियां उन्हीं चंद चेहरों के आसपास मंडरा रही थीं, जिन्हें परंपरागत रूप से कुर्सी की दौड़ में प्रथम पंक्ति में माना जाता रहा था। ऐसे कुछ नाम जो सीएम या फिर वो भी नहीं तो कम से कम डिप्टी सीएम पद की शपथ लेने के लिए नए सूट सिलवा चुके थे। लेकिन हाय री किस्मत!भाजपा आलाकमान ने इन फैसलों से छह संदेश दिए हैं। पहला तो कोई खुद को पार्टी से ऊपर न समझे, दूसरा भाजपा में संघ अभी भी पूरी तरह ताकतवर है, तीसरा भाजपा में कोई साधारण कार्यकर्ता भी शीर्ष पद तक पहुंच सकता है, चौथा भाजपा ने आने वाले 15 साल तक राजनीति करने वाले नए खून की फौज तैयार कर दी है, पांचवां सोशल इंजीनियरिंग में भाजपा सभी राजनीतिक दलो से मीलों आगे है और छठा, इस बदलाव के जरिए भाजपा ने आगामी लोकसभा चुनाव की जमीन भी तैयार कर दी है और तकरीबन मुद्दे भी तय कर दिए हैं। मप्र में डा. मोहन यादव, छग में विष्णुदेव साय और राजस्थान में भजनलाल शर्मा बाकी दुनिया के लिए भले ही अचर्चित चेहरे रहे हों, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा को उनकी कार्यक्षमता पर भरोसा है। अब यह इन तीनो पर है कि मिले हुए अवसर को कामयाबी में वो कितना बदल पाते हैं। खुद को कितना साबित कर पाते हैं। हालांकि यह जोखिम तो हर उस प्रयोग में रहता है, जो राजनीति की प्रयोगशाला में पहली बार किया जाता है। मप्र में जब पहली बार शिवराज को मुख्यमंत्री पद की कमान सौंपी गई थी तब कई लोगों ने उनकी नेतृत्व क्षमता और देसी छवि पर तंज कसा था, लेकिन वक्त के साथ शिवराज ने खुद को न सिर्फ साबित किया बल्कि अपरिहार्य बन गए। उन्होंने अपनी राजनीति की नई इबारत लिखी। इमोशनल पॉलिटिक्स का नया सिलेबस तय किया और पूरे 18 साल तक सीएम पद पर जमे रहे।हालांकि, पहली पारी के सीएम शिवराज और चौथी पारी के सीएम शिवराज में काफी अंतर था । उनका अपना आभा मंडल और काकस तैयार हो गया था। इस दौरान उन्होंने अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को भी यथासंभव किनारे लगाया और शायद इसकी इंतिहा हो चुकी थी। यही स्थिति राजस्थान में वसुंधरा राजे की थी। राजे तो पहले से राज परिवार से हैं। लिहाजा कुर्सी पर विराजना उनके लिए नैसर्गिक अधिकार था। उन्होंने खुद को पार्टी और राज्य का भाग्य विधाता मान लिया था। अलबत्ता छग के 15 साल सीएम रहे और बाद में भाजपा में ही हाशिए पर डाल दिए गए डॉ रमनसिंह ने खुली बगावत के रास्ते पर जाने से खुद को बचाया और कुछ बेहतर पाने की आस जिंदा रखी।कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा में इस तरह क्षत्रप संस्कृति को समाप्त पर ‘ एक हाईकमान कल्चर’ को लागू कर भाजपा ने बहुत बड़ा जोखिम लिया है, जो भविष्य में आत्मघाती भी हो सकता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के चेहरे पर ही पार्टी का पूरी तरह आश्रित हो जाना संगठन की आंतरिक कमजोरी को दर्शाता है। यानी जब मोदी भी नहीं रहेंगे, तब क्या होगा? इसके अलावा इन तीन राज्यों में बिल्कुल ताजा चेहरों की ताजपोशी के साथ राजनीतिक और जातीय समीकरण भी साधने की कोशिश है। छग में आदिवासी चेहरे विष्णुदेव साय को सीएम बनाकर समूचे आदिवासी समुदाय को यह संदेश दिया गया है कि आदिवासी भी हिंदू ही हैं और वो हमारे लिए उतने ही महत्वपूर्ण हैं। इसी तरह मप्र में बिल्कुल अप्रत्याशित चेहरे डॉ. मोहन यादव को सीएम बनाकर यूपी और बिहार के यादवों को भी संदेश दिया गया है कि वो क्षेत्रीय पार्टियों के मोह से उबरें और भाजपा से जुड़ें। मप्र और राजस्थान में दलित डिप्टी सीएम बनाकर बहनजी मायावती और उनकी पार्टी के समर्थकों को संदेश है कि भाजपा में दलितों के लिए भी पूरी जगह है। दिलचस्प बात यह है कि विस चुनाव के दौरान तीनों राज्यों में कांग्रेस पूरे समय ओबीसी जातिजनगणना का मुद्दा उठाती रही, लेकिन जिस तेलंगाना में वह स्पष्ट बहुमत के साथ चुनाव जीती, वहां उसने किसी ओबीसी के बजाए रेवंत रेड्डी के रूप में एक अगड़े को ही मुख्यमंत्री बनाया। 26 विपक्षी दलों के इंडिया गठबंधन की आगामी बैठक 19 दिसंबर को होनी है। उसमें लोकसभा सीटों के बंटवारे के किसी फार्मूले पर बात होती है या नहीं, यह देखने की बात है। लेकिन हो भी गया तो थके चेहरों और सतही जोश से लोकसभा चुनाव की जंग कैसे जीती जाएगी, यह देखने की बात है। बहरहाल चुनाव रणविजय शास्त्र की क्लास में भाजपा से कुछ तो सबक लेने ही चाहिए।

राइस मिल में सत्यापन और चैक पोस्ट की निगरानी जैसे कार्यो में जुटा अमला.

Implementation of processes such as verification at the rice mill and monitoring of check posts. Special Correspondent Sahara Samachaar, Balaghat. बालाघाट। इन दिनों जिला प्रशासन द्वारा समर्थन मूल्य पर उपार्जन कार्यो को लेकर संजीदगी से कार्य किये जा रहे है। कलेक्टर ड़ॉ. गिरीश कुमार मिश्रा द्वारा लगातार समीक्षा बैठकों में दिए गए निर्देशों का असर फील्ड में भी दिखाई देने लगा है। राजस्व अधिकारियों के अलावा सम्बंधित विभागों का अमला खरीदी केंद्रों पर आवश्यक व्यवस्थाओं का जायजा लेकर व्यवस्थाएं दुरुस्त करने में सक्रिय है। मंगलवार को कटंगी अनुभाग अंतर्गत सावंगी, नांदलेसरा, टेकारी, बोथवा, चिकमारा, मानेगांव, कटंगी केंद्रों में धान खरीदी कार्य तहसीलदार छवि पंत की निगरानी में प्रारम्भ कराया गया। वही उपार्जन के लिए दिए अन्य निर्देशों के पालन संलग्न है। कई खरीदी केंद्रों पर बड़ी संख्या में किसानों व जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में श्रीगणेश किया गया। वारासिवनी एसडीएम कामिनी ठाकुर ने अश्विन राइस मिल खैरलांजी में धान का भौतिक सत्यापन जैसी गतिविधियों के द्वारा निरीक्षण किया। वही तहसीलदार वंदना कुशराम ने धान के एफएक्यू की जानकारी प्राप्त करते हुए निरीक्षण किया। इस तरह राजस्व विभाग सहित कई विभागों के अधिकारी कर्मचारी उपार्जन कार्यो की निगरानी में सक्रिय है।

कैमोर पुलिस की ओवरलोडिंग वाहनों के विरूद्ध चालानी कार्यवाही।

Camore police take action against overloaded vehicles with fines. कटनी, थाना कैमोर के द्वारा वाहन चेकिंग के दौरान 05 ओवरलोड वाहनों पर चालानी कार्यवाही कर 74,000/- रुपये समन शुल्क वसूल किया। श्री अभिजीत कुमार रंजन पुलिस अधीक्षक कटनी के निर्देशन व श्री मनोज केडिया अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, श्री के.पी. सिंह अनुविभागीय अधिकारी महोदय के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी कैमोर सुदेश कुमार समन द्वारा अपने थाना स्टाफ के साथ वाहन चेकिंग के दौरान 05 वाहनों पर चालानी कार्यवाही कर 74,000/- रुपये समन शुल्क वसूल किया । कार्यवाही का विवरण – दिनांक 12/12/2023 मेहगाँव रोड पर वाहन चेकिंग के दौरान बॉक्साइट, डस्ट व गिट्टी की ओवरलोडिंग करते 05 अलग अलग डंपरों पर ओवरलोडिंग की चालानी कार्यवाही कर कुल 74000/- रू समान शुल्क वसूल किया गया । उक्त कार्यवाही में – सुदेश कुमार निरीक्षक थाना प्रभारी कैमोर, स उ नि हुकुम सिंह, प्र.आर 206 चंद्रभान विश्वकर्मा, आर 739 विनोद, आर 740 सौरभ ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

शासकीय ज़िला चिकित्सालय के सभी डॉक्टर्स एवं नसों का स्वागत सम्मान किया गया.

All doctors and staff of the government district hospital were welcomed and honored. बुरहानपुर! जिला अस्पताल के सभी 40 डॉक्टर्स एवं 90 नर्सिंग एवं पैरा मेडिकल स्टॉफ एवं सभी डिपार्टमेंट के पदाधिकारियों का असहाबे सुफफ़ा एजुकेशनल सोसाइटी की ओर से जनप्रतिनिधियों एवं सामाजिक सेवको के हाथ से सर्टिफिकेट एवं पौधा और फूल माला से उनका सम्मान किया गया। सोसाइटी के अध्यक्ष एवं युवा समाज सेवी हाजी अब्दुल बासित ने बताया के इस आयोजन का मक़सद सभी डॉक्टर एवं मेडिकल और पैरामेडिकल स्टाफ की हौसला अफजाई करना है। इस सम्मान समारोह की आयोजन से हमारी टीम को बहुत गर्व महसूस हुआ है। तिलावत ए कुरान ए पाक से प्रारंभ हुए इस प्रोग्राम की अध्यक्षता निगम अध्यक्ष श्रीमती अनीता अमर यादव ने की एवं पूर्व प्रदेश महासचिव श्री अजय सिंह रघुवंशी, नेता प्रतिपक्ष श्री अकील औलिया, उप नेता प्रतिपक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता उबेद शेख, पार्षद फहीम हाशमी, पार्षद आसिफ खान, समाजसेवी मुशर्रफ़ खान, समाजसेवी शेख अजगर, एवं असहाबे सुफ्फा एजुकेशनल सोसाइटी के सभी पद अधिकारी मौजूद थे।

शपथ के दौरान स्टेडियम के बाहर Shivraj के चाहने वालों ने काफिला रोका, मामा मामा के नारे लगाए.

During the swearing-in ceremony, supporters of Shivraj outside the stadium stopped the procession, chanting slogans in favor of Mama (referring to Shivraj Singh Chouhan).

प्रदेश के नए उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ला, शपथ ग्रहण समारोह, मोतीलाल नेहरू स्टेडियम भोपाल.

The new Deputy Chief Minister of the state, Rajendra Shukla, will take the oath at the Motilal Nehru Stadium in Bhopal during the swearing-in ceremony.

प्रदेश के नए उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, शपथ ग्रहण समारोह, मोतीलाल नेहरू स्टेडियम भोपाल.

The new Deputy Chief Minister of the state, Jagdish Devda, will take the oath at the Motilal Nehru Stadium in Bhopal during the swearing-in ceremony.

प्रदेश के नए मुख्यमंत्री मोहन यादव लेंगे शपथ, मोतीलाल नेहरू स्टेडियम भोपाल.

The new Chief Minister of the state, Mohan Yadav, will take the oath at the Motilal Nehru Stadium in Bhopal.

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