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मध्य प्रदेश मतगणना हेतु मुख्य चुनाव आयुक्त की प्रेस वार्ता

Press conference of the Chief Election Commissioner for the Madhya Pradesh election counting. प्रेस नोट मध्यप्रदेश विधानसभा निर्वाचन 2023 में 230 विधानसभा क्षेत्रों की मतगणना 52 जिला मुख्यालयों पर दिनाक 03.12.2023 को प्रारंभ होगी। मतगणना के लिए सभी इंतेजाम किए जा चुके है। सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों एवं पुलिस आयुक्त एवं पुलिस अधीक्षकों को सुरक्षा मापदण्डो को कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए है। मतगणना के दिन शुष्क दिवस घोषित किया गया है। मतगणना स्थल पर 3 Tier सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की गई है, केवल अधिकृत पासधारी व्यक्ति ही प्रवेश कर सकेंगे। कोई भी अनाधिकृत व्यक्ति मतगणना सेंटर पर प्रवेश नहीं करेगा। मतगणना सेंटर पर प्रत्येक विधानसभा के लिए पृथक-पृथक मतगणना हॉल बनाए गये है, जहां आयोग के निर्देशानुसार टेबलों की व्यवस्था ईव्हीएम एवं पोस्टल बैलेट की मतगणना के लिए की गई है। मतगणना कर्मियों का रेण्डमाईजेशन 3 स्तर पर होगा। प्रथम स्तर का रेण्डमाईजेशन हो चुका है, द्वितीय स्तर का रेण्डमाईजेशन मतगणना के प्रारंभ से 24 घंटे पूर्व होगा तथा तृतीय रेण्डमाईजेशन मतगणना दिनांक को सुबह 5 बजे होगा। आयोग द्वारा सभी विधानसभा क्षेत्रों की मतगणना के लिए प्रेक्षक नियुक्त किए गए है, जो जिलों में पहुंच चुके हैं। द्वितीय एवं तृतीय रेण्डमाईजेशन प्रेक्षक की उपस्थिति में किया जाएगा। रिटर्निंग ऑफिसर/सहायक रिटर्निंग ऑफिसर पोस्टल बैलेट के लिए बनाए गए स्थानीय स्ट्रांग रूम से मतगणना सेंटर में बने पोस्टल बैलेट के स्ट्रॉग रूम में दिनांक 02.12.2023 को अपरान्ह 3 बजे के पश्चात् स्थानांतरित करने की कार्यवाही करेगें, जिसकी सूचना मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय राजनैतिक दलों तथा अभ्यर्थी / उनके अभिकर्ता को अनिवार्यतः दी जायेगी। पोस्ट से प्राप्त होने वाले सेवा निर्वाचकों के पोस्टल बैलेट मतगणना केन्द्र पर प्रातः 08 बजे के पूर्व तक प्राप्त हो सकते है। इसके लिए रात्रि में पोस्टल डिपार्टमेन्ट को प्राप्त होने वाले पोस्टल बैलेट की डिलेवरी प्रातः 08 बजे के पूर्व मतगणना केन्द्र पर हो जाएं, इस हेतु पोस्टल डिपार्टमेन्ट के नोडल अधिकारी / पोस्टमेन को पास जारी किए गए है। अधिकृत मीडियाकर्मी के लिए मतगणना केन्द्र पर एक पृथक कक्ष में मीडिया सेन्टर बनाया गया है जहां पर टेलिफोन कम्प्यूटर, प्रिन्टर एवं इंटरनेट आदि की सुविधा उपलब्ध रहेगी। मीडिया कर्मियों के लिए आयोग द्वारा प्राधिकार पत्र जारी किए गए है। ईव्हीएम की मतगणना टेबल पर एक काउटिंग सुपवाईजर एक काउटिंग असिस्टेंट तथा एक काउटिंग स्टॉफ तथा एक माइक्रो आर्जवर रहेगा। इसी प्रकार पोस्टल बैलेट की गणना टेबल पर एक सहायक रिटर्निंग ऑफिसर, एक काउटिंग सुपरवाईजर, दो काउटिंग असिस्टेंट तथा एक माइक्रो आर्जवर रहेगा। ईव्हीएम / पोस्टल बैलेट की टेबल पर अभ्यर्थी के काउटिंग ऐजेन्ट रहेगें, जिनके बैठने का क्रम (1) मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय राजनैतिक दल, (2) ऐसे मान्यता प्राप्त अन्य राज्यों के राज्यीय दल जिन्हें उस विधानसभा क्षेत्र के लिए चुनाव चिन्ह नियत किया गया है. (3) अमान्यता प्राप्त रजिस्ट्रीकृत दल. (4) निर्दलीय रहेगा। स्ट्रॉग रूम से मतगणना हॉल तक मशीनें पहुंचने के लिए विधानसभा क्षेत्रवार पृथक-पृथक मार्ग / रास्ता / व्यवस्था निर्धारित की गई है, जिसका सीसीटीवी कवरेज होगा। आर्जवर के अतिरिक्त किसी को भी मतगणना हॉल में मोबाईल ले जाने की अनुमति नहीं है, केवल RO/ARO /Counting Supervisor जो ईटीपीबी से जुड़े है वह केवल ईटीपीबीएमएस सिस्टम ओपन करने के लिए ओटीपी हेतु मोबाईल ले जा सकेंगे तथा उसके पश्चात मोबाईल बंद कर प्रेक्षक/RO/ARO के पास जमा कराएंगे। मतगणना जिला मुख्यालय पर प्रातः 8 बजे विधानसभा क्षेत्रवार प्रारंभ होगी। सबसे पहले पोस्टल बैलेट की मतगणना शुरू होगी। पोस्टल बैलेट की मतगणना के आधे घण्टें पश्चात् 08:30 बजे ईव्हीएम से मतगणना प्रारंभ होगी। विधानसभा के पोस्टल बैलेट की मतणना समाप्त होते ही अभ्यर्थीवार डाकमतों के परिणाम की घोषणा की जावेगी। प्रत्येक राउंड पूरा होने पर नियमानुसार उस राउंड के परिणाम की घोषणा की जावेगी तथा दूसरे राउंड की गिनती प्रारंभ होगी। मीडिया को भी इसकी जानकारी मीडिया सेन्टर में दी जावेगी, इस हेतु जिला जनसंपर्क अधिकारी समन्यय बनाएंगे। मध्यप्रदेश विधानसभा निर्वाचन 2023 में 80 वर्ष से अधिक उम्र के 51259 वरिष्ठ मतदाताओं एवं 12093 दिव्यांग मतदाताओं ने घर से मतदान किया। Essential Services के 1113 कर्मियों द्वारा मतदान किया गया। 304623 मतदान कर्मियों द्वारा पोस्टल बैलेट से मतदान किया गया। मतदान केन्द्र पर ही मतदान हेतु 21197 मतदान कर्मियों को ईडीसी जारी किए गए। मध्यप्रदेश में ईव्हीएम की गणना हेतु 4369 टेबल तथा पोस्टल की मतगणना हेतु 692 टेबल लगाएं गए है। ईव्हीएम मतगणना हेतु सबसे अधिक 26 राउंड 193-झाबुआ विधानसभा क्षेत्र में तथा सबसे कम 12 राउंड 20-सेवढ़ा विधानसभा क्षेत्र जिला दतिया में होगें। मतगणना के परिणाम के लिए जिलों में स्क्रीन आदि पर व्यवस्था की गई है। मतगणना के परिणाम भारत निर्वाचन आयोग की वेबसाइट https://results.eci.gov.in तथा मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी मध्यप्रदेश की वेबसाईट ceomadhyapradesh.nic.in पर भी प्रदर्शित होगें। इसके साथ साथ आमजनों की सुविधा के लिए वोटर हेल्पलाईन एप्प पर भी मतगणना के परिणाम उपलब्ध रहेगें, इस हेतु इस एप्प को गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड करना होगा। मतगणना उपरांत निकाले जाने वाले जुलूस, रैली आदि पर नियमानुसार अनुमति प्राप्त कर ही

भारत माता कॉन्वेंट स्कूल द्वारा, पत्रकार पर झूठी शिकायत करने का हुआ विरोध.

Bharat Mata Convent School faces opposition for filing a false complaint against a journalist. Sitaram Kushwahaविदिशा, ग्यारसपुर एसडीएम कार्यालय पहुंचकर ग्यारसपुर के प्रेस क्लब अध्यक्ष के नेतृत्व में समस्त पत्रकार साथियों के द्वारा कलेक्टर के नाम एसडीएम को ज्ञापन सौंपा बुधवार को गंजबासौदा शहर के स्थानीय शैक्षणिक संस्था भारत माता कॉन्वेंट स्कूल के खिलाफ पत्रकार पर निराधार और झूठी शिकायत करने के विरोध में , एसडीएम मनोज उपाध्याय को एक ज्ञापन सोपा ज्ञापन में कहा गया कि शहर के पत्रकार गगन दुबे पर भारत माता कॉन्वेंट स्कूल के स्थानीय शिक्षकों के माध्यम से आरोप लगाकर, शिकायती आवेदन अनुविभागीय अधिकारी के नाम सौपा था जिसमें पत्रकार पर कार्रवाई करने की बात कही गई है। स्कूल द्वारा की गई शिकायत पर पत्रकारों ने एकजुट होकर एसडीएम ज्ञापन देकर निष्पक्ष जांच करने व घटना के समय सीसी टीवी कैमरे की रिकॉर्डिंग निकलवाने की मांग की है। बता दे की कॉन्वेंट स्कूल ने जो शिकायती आवेदन पत्रकार गगन दुबे के खिलाफ दिया है उसमे बताया गया है की गगन दुबे स्कूल में आकर धमकता है धार्मिक उन्माद फैलाता है और अपशव्द बोलता है। जबकि पत्रकार गगन दुबे स्कूल में कवरेज के लिए गया हुआ था और उनका कहना है की भारत माता कॉन्वेंट स्कूल ऐसे कई विवादों से आए दिन घिरा रहता है स्कूल के ऊपर कई जांच भी चल रही हैं अब स्कूल ने पत्रकारों को निशाना बना लिया है देखना यह होगा कि प्रशासन इस पर किस प्रकार कार्रवाई करता है। ज्ञापन देने वालों में प्रेस क्लब अध्यक्ष मजीद खान, महाराज सिंह सूर्यवंशी, संजीव सोनी, देवेंद्र किरार, त्रिलोक सेन, नरेंद्र सेन, सीताराम कुशवाहा, रवि रघुवंशी, पवन सोनी, रामबाबू सोलंकी, अमित जैन ,कमल कुशवाहा, रितेंद्र अहिरवार , विवेक नामदेव, सहित क्षेत्र के समस्त पत्रकार मौजूद रहे ।

नगर पालिका अधिकारी और ठेकेदारों की मिलीभगत, वार्डों में डाले गऐ रोडों में घटिया सामग्री का किया गया इस्तेमाल.

Collusion between municipal officials and contractors, substandard materials used in the roads laid in the wards. अलताफ खान सिरोंजविदिशा, सिरोंज नगर के वार्डों में आचार संहिता के लगते ही रोड़ों के कामों का अंबार लग गया मानो जैसे आचार संहिता के बाद निर्माण कार्य की ही नहीं जाएंगे कुछ व्यक्तियों का ध्यान इस और आकर्षित हुआ तो इन्होंने इसकी शिकायत भी कई बार मौखिक नगर पालिका अधिकारियों से की नगर पालिका अधिकारी रोड निर्माण कार्य स्थान पर देख दिखावे के लिए तो आए लेकिन घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहे रोड़ों पर रोक ना लगा सके कई बार मीडिया कर्मियों द्वारा भी खबरों में प्रकाशित किया गया लेकिन नगर पालिका के वरिष्ठ अधिकारी एवं कर्मचारियों ने इस और ध्यान नहीं दिया मीडिया कर्मियों ने कई बार टिएस की कॉपी की मांग भी की नगर पालिका सीएमओ के आदेश के बाद भी कर्मचारियों ने टिएस की कॉपी नहीं दी जिससे इसका अंदाजा भी लगाया जा सकता है कि कहीं ना कहीं सीएमओ की भी मिली भगत से सिरोंज नगर के रोड का निर्माण किया गया वहीं रोडो की स्थिति आज भी देखी जाए तो अभी से ही रोड चटकने लगे आज भी अगर जांच की जाएगी तो रोड़ों में घटिया सामग्री मौजूद मिलेगी सिरोंज के रहवासी इस बात से ना खुश है कि कई वर्षों में रोड डाले वह भी घटिया सामग्री से नालियों का भी किया गया निर्माण घटिया स्तर पर अगर आज भी वार्डों में चेक किया जाए तो कई वार्ड में नालियां आव्यवस्थित तरीके से पड़ी हुई है और वार्ड वासी परेशान हो रहे हैं लेकिन इस और नगर पालिका ध्यान नहीं दे रही ठेकेदारों का मनचाहा काम और नगर पालिका की मिली भगत से सरकार के लाखों रुपयो का दुरुपयोग किया गया है और लगातार किया जा रहा है कब होगा सुधार.

मप्र को मिले 14 नए आईएफएस, इनमें 5 प्रदेश के मूल निवासी.

Madhya Pradesh has been allocated 14 new Indian Forest Service (IFS) officers, out of which 5 officers are originally from the state. राज्य के चयनित 8 नए आईएफएस को दूसरे प्रदेश का कैडर आवंटित भोपाल। केंद्रीय कार्मिक विभाग ने 2023 बैच के लिए सिलेक्टेड 140 आईएफएस में से 13 को मध्य प्रदेश के लिए आवंटित किया है। इनमें से 5 आईएफएस प्रदेश के मूल निवासी हैं। इस सूची में 14 आईएफएस अधिकारी मध्य प्रदेश से चयनित हुए हैं, जिसमें से 8 आईएफएस अफसर को दूसरे राज्य के कैडर आवंटित किए गए हैं। *प्रदेश के लिए आवंटित आईएफएस 13 आईएफएस अजय गुप्ता, प्रज्जवल चौरसिया, आकाश साहू, अलकापुरी गोस्वामी, चंचल पवार, शोभित जोशी, हर सिमरन सिंह चीमा, अपूर्व, बिहारजसवंत सिंह मीना, रमेश चंद्र मीना, राजस्थानकृष्णा प्रसाथ, विशाल कुमार, कुमार साहू, जयप्रकाश, यश ढोबले, उदयन सुबुद्धि, गौरव शर्मा, तन्मय कौशिक, अथर्व तिवारी, आकांक्षा जैन, चंद्र प्रकाश अग्रवाल, असम मेघालय और उपमा जैन.

अधिकतर चैनल्स जमीनी हकीकत से कोसों दूर हैं.

Most channels are far away from ground reality. आइए आपको उन सीटों की जानकारी देते है जहाँ मुकाबला त्रिकोणीय है या चतुष्कोणीय है,यह सीटें कोई नहीं बता सकता कि कौन जीतेगा,जहाँ प्रत्याशी की हार जीत तीसरे चौथे प्रत्याशी को मिले वोट पर निर्भर होगी,कई जगह यह गैर भाजपा गैर कांग्रेस उम्मीदवार जीतने की ताकत भी रखते हैं । *उदित नारायण* भोपाल।पहले हम बसपा की Top performing सीट्स से शुरुआत करते हैं 1-दिमनी2-मुरैना3-रेगांव4-नागौद5-सतना6-गुढ़7-सिमरिया8-राजनगर9-पथरिया10-गोहद11-लहार12-भिंड13-बारासिवनी-अजाबशास्त्री(लोधी)14-सेंवढ़ा-दामोदर यादव-भीम आर्मी आदिवासी बहुल सीटे जो GGP के असर की हैं15-परसवाड़ा-कंकर मुंजारे16-बिछिया-कमलेश टेकाम17-जबेरा-विनोद राय18-शाहपुरा-अमानसिंह पोर्ते19-मानपुर-राधेश्याम काकोड़िया20-अमरवाड़ा-देव रावेन भलावी21-लखनादौन-सन्तर भलावी22-सिवनी-रंजीत वासनिकऐसी सीटें जहाँ जयस से जुड़े युवकों ने अच्छी चुनोती देकर मुकाबला त्रिकोणीय बनाया है23-सैलाना-कमलेश्वर डोडियार24-महू-प्रदीप मावी25-रतलाम ग्रामीण-डॉ अभय ओहरी26-पेटलावद- इंजीवालूसिंह गामड़27-नेपानगर-बिल्लोरसिंह जमरा28-भगवानपुरा-मोहन किराड़े29-मनावर-लालसिंह बर्मन(आप/जयस)30-सरदारपुर-राजेन्द्र गामड़आप पार्टी जिन सीटो पर प्रभावी है31-सिंगरौली-रानी अग्रवाल32-बंडा सुधीर यादव33-चाचौड़ा-ममता मीणाइसके अलावा कुछ निर्दलीय है जिन्होंने मुकाबले को त्रिकोणीय बनाया है34-कटंगी-केसर बिसेन/प्रशांत मेश्राम35-भीकनगांव-मोहन पटेल36-पानसेमल-रमेश चौहान37-जोबट-माधोसिंह डाबर/रिंकुबाला डाबर(जयस)38-बुरहानपुर से हर्ष चौहान/AIMIM उम्मीदबार नफीस मंशा खान39-होशंगाबाद-चौरे40-सिवनी मालवा-ओम रघुवंशी/सुनील गौरहीरा अलावा के नेशनल जयस ने भी 4 प्रत्याशी उतारे है41-भैंसदेही-संदीप धुर्वे42-घोड़ाडोंगरी-स्मिता राजा धुर्वे43-टिमरनी-रमेश मर्सकोले44-बड़वाणी-संदीप नरगावे45-राजपुर सुनील सोलंकीइसके अलावा लगभग 2/3सीटों पर समाजवादी पार्टी प्रत्याशी निर्णायक वोट लाएंगे46-निवाड़ी-मीरा दीपक यादव47-टीकमगढ़ से सपा प्रत्याशी48-बहोरीबंद से शंकर महतो

बरगी अनुभाग के सीएसपी सुनील नेमा का नहीं छूट रहा थानेदारी से मोह.

Bargi subdivision CSP Sunil Nema is not relieved from the police station due to attachment. थाने के स्टाफ से करवा रहे खुलेआम वसूली, नहीं मिलने पर थाने में कर देते हैं बंद होटल संचालकों, ठेकेदारों और चरगंवा सड़क बनी उनके लिए कमाऊपूत, साहब की मनमानी से तिलवारा थाना का स्टाफ परेशान संतोष तोमर भोपाल। सीएसपी नेमा अपराध पर कंट्रोल करने की बजाय तिलवारा थाने की थानेदारी में खर्च कर रहे ज्यादा ऊर्जा भोपाल। पुलिस विभाग में जमावट से जबलपुर क्षेत्र के बरगी अनुभाग में पदस्थापना पाने में सफल रहे एक सीएसपी सुनील नेमा की मनमानी के खूब चर्चे हैं। उनका कार्यालय के नीचे तल में स्थित तिलवारा थाना से मोह नहीं छूट रहा है। इन दिनों वे थाना से पर्याप्त वसूली नहीं मिलने से वे खासे परेशान हैं। यही वजह है कि वसूली को लेकर वे पुलिस वालों पर अप्रत्यक्ष रूप से रोब झाड़ रहे हैं। दबाव में आकर कुछ पुलिस कर्मी उनके इस विशेष वसूली अभियान को अंजाम देने में लगे हैं। उनके इस कारनामे से पूरा स्टाफ परेशान होना बताया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार थानांतर्गत क्षेत्र में जब से सीएसपी पदस्थ हुए हैं, तभी से यहां उनकी तानाशाही और मनमानी के नए नए रिकॉर्ड बन रहे हैं। कहा तो ये जा रहा है कि वे क्षेत्र के कई होटल संचालकों को बुलाकर उनसे खूब शुभ-लाभ कर रहे हैं। उन्हें दक्षिणा पर ही भरोसा है। बताया जा रहा है कि बरगी क्षेत्र में लंबे समय से पदस्थ सीएसपी सुनील नेमा अपराध पर कंट्रोल और लोगों को न्याय दिलाने की अपने वे तिलवारा थाने की थानेदारी करने में ज्यादा ऊर्जा खर्च कर रहे हैं। वे अपनी कुर्सी का रोब दिखाते हुए रेत, गिट्टी और मुरूम खदान खोदने में लगे हैं। इसके अलावा ठेकेदारों को खुलेआम धमकी भी दे रहे हैं कि यदि उनका हिस्सा नहीं दिया तो ठेकेदारी निकल जाएगी। उनकी जेसीबी जब्त कर कई गुना वसूली करने में लगे हैं। सूत्रों के अनुसार, सीएसपी सुनील नेमा की हरकतों से टीआई भी ठीक तरीके से काम नहीं कर पा रहे हैं। उनकी ही जी हुजूरी में उनका दिन निकल रहा है। साहब के रोब के कारण स्टाफ में काना-फूसी चलती रहती है, हालांकि वे अपने दर्द किसी को बंया नहीं करते हैं। सबसे बड़ा कमाई का उनका अड्डा चरगंवा रोड बना हुआ है। वे कभी भी इस रोड पर ट्रकों की लाइन लगाकर चेकिंग के नाम पर वसूली करने पहुंच जाते हैं। पांच सितारा होटल में करते हैं नाश्तासीएसपी सुनील नेमा को महंगे से महंगे होटलों में खाना और नाश्ता करने का शौंक है। वे प्रतिदिन अपने बेटे के साथ पास के ही एक पांच सितारा होटल में जिम करने जाते हैं। वहीं बेटे के साथ वेज-नॉनवेज खाना का भी आनंद उठाते हैं। वहीं उनके ऑफिस के सामने एक ढाबा संचालित है। जिसको वसूली में देरी होने पर कभी भी थाने में बुलाकर बैठा िलया जाता है। बता दें, यह खबर अपुष्ट सूत्रों पर आधारित है।

30 साल से जीतते आ रहे केपी सिंह की शिवपुरी में परीक्षा, क्या रहेगा रिजल्ट.

The examination in Shivpuri, which has been won by K.P. Singh for the past 30 years, what will be the result? Special Correspondent- Sahara Samachaar, Shivpuri भोपाल। शिवपुरी जिले की पांच विधानसभा सीटों के लिए 3 दिसंबर को मतगणना का काम होगा। इसको लेकर सभी आवश्यक तैयारियां जिला प्रशासन के द्वारा पूरी कर ली गई हैं लेकिन इसी बीच शिवपुरी विधानसभा सीट पर सबकी निगाहें लगी हुई हैं क्योंकि यहां से कांग्रेस के नेता और पिछले 30 साल से पिछोर विधानसभा सीट से जीतते हुए आ रहे केपी सिंह चुनाव लड़ रहे हैं। इस बार कांग्रेस ने केपी सिंह को पिछोर की बजाय शिवपुरी से टिकट दिया है। पिछोर विधानसभा सीट से पिछले 30 साल से 6 बार से केपी सिंह विधायक बनते हुए आ रहे हैं लेकिन इस बार उनका टिकट बदला गया और उन्हें शिवपुरी विधानसभा में मैदान में उतारा गया है। शिवपुरी विधानसभा क्षेत्र से भाजपा ने उनके खिलाफ देवेंद्र जैन को टिकट दिया है क्योंकिभाजपा की वरिष्ठ नेता यशोधरा राजे सिंधिया अपने स्वास्थ्य कारणों के चलते चुनाव नहीं लड़ रही हैं। यशोधरा राजे सिंधिया द्वारा चुनाव नहीं लड़ने के कारण भाजपा ने भी यहां पर टिकट बदलकर उनकी जगह देवेंद्र जैन को मौका दिया है।भाजपा के गढ़ के रूप में जाना जाती है शिवपुरी सीट-शिवपुरी विधानसभा सीट को भाजपा के गढ़ के रूप में जाना जाता है क्योंकि यहां से पिछले चार बार से विधानसभा चुनाव में भाजपा जीतते हुए आ रही हैं। यशोधरा राजे सिंधिया यहां से चार बार विधायक निर्वाचित हो चुकी हैं इसलिए इस सीट को भाजपा का गढ़ कहा जाता है लेकिन इस बार कांग्रेस के केपी सिंह ने यहां से चुनाव मैदान में उतरकर भाजपा को टक्कर दी है।केपी सिंह हार गए तो टूट जाएगा रिकॉर्ड-पिछोर विधानसभा सीट से 6 बार से विधायक बनते हुए आ रहे केपी सिंह इस बार शिवपुरी में अपना भाग्य आजमा रहे हैं अगर वह यहां से चुनाव हार गए तो उनका लगातार चुनाव जीतने का रिकॉर्ड टूट जाएगा। अगर जीतते हैं तो वह इस रिकार्ड को कायम कर पाएंगे और सातवीं बार वह वह निर्वाचित होंगे। वैसे अभी तक जो अनुमान लगाया जा रहा है उसके अनुसार यहां पर भाजपा के देवेंद्र जैन केपी सिंह पर भारी पड़े क्योंकि देवेंद्र जैन यहां पर केपी सिंह की दबंगई छवि को मुद्दा बनाकर चुनाव लड़ा। इसके अलावा शिवराज सरकार की योजना और लाडली बहना योजना का असर यहां पर देखा जा रहा है। हालांकि 3 दिसंबर को परिणाम सामने आएंगे तब तक सबकी निगाहें इस परिणाम पर ही टिकी हैं।कांग्रेस में टिकट को लेकर चली माथापच्ची-शिवपुरी विधानसभा सीट की टिकट को लेकर कांग्रेस में अंतिम दौर तक माथापच्ची चली। नाम निर्देशन पत्र भरने के अंतिम दौर तक तमाम कयासों के दौर चलते रहे कि यहां से कौन चुनाव लड़ेगा। पहले ऐसा अनुमान लगाया जा रहा था कि भाजपा छोड़कर आए कोलारस विधायक वीरेंद्र रघुवंशी को कांग्रेस टिकट देगी लेकिन उनको टिकट न देकर केपी सिंह को टिकट दिया गया। केपी सिंह को पिछोर की वजह शिवपुरी मैदान में उतारा गया। इसको लेकर कमलनाथ और दिग्विजय सिंह के बीच कुछ दिनों के लिए बयानबाजी का दौर भी चला लेकिन बाद में मामला साफ हो गया कि उन्हें एक रणनीति के तहत शिवपुरी से उतारा गया है। पिछोर विधानसभा सीट पर भी कांग्रेस में टिकट को लेकर माथापच्ची चली। पूर्व में यहां से केपी सिंह की बजाय कांग्रेस ने शैलेंद्र सिंह को टिकट दिया लेकिन उनका नाम भी बदलकर फिर बाद में अरविंद लोधी को टिकट दिया गया। कांग्रेस की बार-बार टिकट बदला-बदली की रणनीति के कारण भी पार्टी की फजीयत हुई।

एग्जिट पोल भाजपा और कांग्रेस में कांटे की टक्कर.

Exit poll” indicates a tough competition between the BJP and Congress एग्जिट पोल भाजपा और कांग्रेस में कांटे की टक्कर* एमपी विधानसभा चुनाव एग्जिट पोल रिजल्ट, अब आखिरी वक्त का इंतजार उदित नारायण भोपाल-ग्वालियर। एमपी एग्जिट पोल के नतीजे आने लगे हैं। ऐसे में सबकी निगाहें ग्वालियर-चंबल क्षेत्र पर टिकी है। ग्वालियर-चंबल की वजह से ही 2020 में कमलनाथ की सरकार गिर गई थी। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने समर्थकों के साथ बीजेपी का दामन दाम लिया था। एबीपी और सी वोटर्स के एग्जिट पोल के अनुसार ग्वालियर-चंबल में बीजेपी की स्थिति ठीक नहीं है। ज्योतिरादित्य सिंधिया के गढ़ में बीजेपी को बड़ा नुकसान हो रहा है।दरअसल, मध्य प्रदेश में एबीपी और सी-वोटर्स के एग्जिट पोल के अनुसार एमपी में बीजेपी को 88-112 और कांग्रेस को 113-137 सीटें मिल रही हैं। वहीं, अन्य को 02-08 सीटें मिल रही है। बीजेपी को सबसे ज्यादा नुकसान ग्वालियर-चंबल के क्षेत्र में हो रही है। यह ज्योतिरादित्य सिंधिया के लिए असहज करने वाले नतीजे हैं।एबीपी-सी वोटर्स के अनुसार ग्वालियर चंबल की 34 में से बीजेपी को 4-8 और कांग्रेस को 25-29 सीटें मिल रही हैं। अगर यह अनुमान सही साबित हुए तो ज्योतिरादित्य सिंधिया के लिए बड़ा झटका माना जाएगा। ग्वालियर-चंबल की सीटों पर ही उनका प्रदर्शन टिका हुआ है। पार्टी में आगे की स्थिति उनकी तभी मजबूत रहेगी, जब ज्यादा से ज्यादा उनके वफादार चुनाव जीतेंगे।निकाय चुनाव में लग चुका है झटकावहीं, ज्योतिरादित्य सिंधिया के गढ़ में बीजेपी को निकाय चुनाव में झटका लगा चुका है। कई सालों बाद पार्टी ग्वालियर और मुरैना में मेयर चुनाव हार गई थी। ऐसे में इस बार ज्योतिरादित्य सिंधिया के सामने बड़ा चैलेंज है।एक्सिस माय इंडिया में बीजेपी को बढ़तइसके साथ आजतक और एक्सिस माय इंडिया के सर्वे में सिंधिया के गढ़ में कांग्रेस को झटका लग रहा है। इस सर्वे के अनुसार ग्वालियर चंबल की 34 में से 19 सीटों पर बीजेपी और कांग्रेस को 14 सीटें मिल रही है।एग्जिट पोल के नतीजे कुछ भी बता रहे है यदि कुल मिलाकर देखा जाय तो मध्यप्रदेश में बीएसपी एसपी एवं गोंडवाना पार्टी की कुल मिलाकर 32 सीटो में त्रिकोणीय मुकाबला होने से एवम लाडली बहना योजना का लाभ यदि बीजेपी को मिलता है तो मध्य प्रदेश में बीजेपी की सरकार पुनः बनने की संभावना प्रबल है कुल मिलाकर बीजेपी 118 से 122 सीट, कांग्रेस 108 से 110, बीएसपी अन्य की 5 सीटे आने की संभावना दिख रही है। बीएसपी एसपी गोंडवाना के आने ज्यादा फायदा भाजपा को मिल सकता है ।मध्य प्रदेश में इस बार भी भाजपा की सरकार बनती दिख रही है।

बालाघाट डाक मत पत्रों की शॉर्टिंग से उठा विवाद में कूदी आईएएस शैलवाला मार्टिन.

The controversy surrounding the shortlisting of postal ballots in Balaghat jumped with the entry of IAS Shailwala Martin. प्रमोटी आईएएस ने डायरेक्ट आईएएस पर साधा निशाना भोपाल। बालाघाट में समय से पहले की गई डाक मत पत्रों की शॉर्टिंग से उठा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब इस मामले में एक प्रमोटी आईएएस ने सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रमोट होकर आईएएस बनीं शैलबाला मार्टिन ने एक ट्वीट को रीट्वीट करते हुए लिखा है कि छंटनी डाक मतपत्रों को स्ट्रांग रूम में रखने के पहले की जाती है। स्ट्रांग रूम खुलने की जानकारी जिला निर्वाचन अधिकारी के संज्ञान में ना होना गंभीर विषय है जो सीधी भर्ती के आईएएस अधिकारी की कार्यप्रणाली पर प्रश्न चिन्ह लगाता है। मार्टिन के इस सवाल ने प्रमोटी और डायरेक्ट आईएएस के बीच चलने वाले कोल्डवॉर को भी हवा दे दी है। हालांकि इस पूरे मामले में चुनाव आयोग अब तक दो लोगों को निलंबित कर चुका है, लेकिन बालाघाट के स्ट्रांग रूम में हुए घटनाक्रम पर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। ये है बालाघाट का मामलाबता दें, बालाघाट के ट्रेजरी ऑफिस में बने स्ट्रांग रूम में पोस्टल बैलेट से छेड़छाड़ का मामला प्रकाश में आते ही प्रदेश की सियासत गरमा गई थी। इस पूरे मामले को लेकर कांग्रेस हमलावर हो गई थी। आयोग भी कांग्रेस के निशाने पर आ गया था। कांग्रेस बालाघाट कलेक्टर गिरीश कुमार मिश्रा को हटाने की मांग कर रही है। इस मामले में बुधवार को एसडीएम गोपाल सोनी को निलंबित कर दिया गया है। उनके स्थान पर डिप्टी कलेक्टर राहुल नायक को प्रभार सौंपा गया है। इससे पहले नोडल अधिकारी हिम्मत सिंह (तहसीलदार) को भी इसी मामले में निलंबित किया जा चुका है।

भोपाल शिक्षा अधिकारी तोमर के खिलाफ जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी.

Arrest warrant issued against Bhopal Education Officer Tomar. मानव अधिकार आयोग की अवहेलना करने का आरोप भोपाल। एक जिला शिक्षा अधिकारी को मानव अधिकार आयोग की अवहेलना करना भारी पड़ गया है। आयोग ने अधिकारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है। मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग ने वर्ष 2022 के एक मामले में अब तक जवाब न देने के कारण भोपाल जिले के जिला शिक्षा अधिकारी केपीएस तोमर को 21 दिसंबर को अनिवार्यतः आयोग में व्यक्तिगत रूप से आकर अपना स्पष्टीकरण व प्रतिवेदन देने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही आयोग ने तोमर को कारण बताओ नोटिस एवं पांच हजार रुपये का नामजद जमानती गिरफ्तारी वारंट भी जारी किया है। नोटिस एवं वारंट की तामीली अतिरिक्त पुलिस आयुक्त, (नगरीय) भोपाल, जिला भोपाल को करवाने के निर्देश दिए हैं। ये है पूरा मामलाकई पदीय एवं नामजद स्मरण पत्र देने के बावजूद भी प्रतिवेदन न देने के कारण डीईओ केपीएस तोमर को 21 दिसंबर 2023 को आयोग में स्वयं उपस्थित होने के लिए कहा गया है। आयोग के एक प्रकरण के अनुसार नानक कॉम्प्लेक्स, गोविन्दपुरा, भोपाल निवासी आवेदक अरविन्द कुमार नामदेव, सेवानिवृत्त प्रधान अध्यापक ने स्कूल शिक्षा विभाग ने उनकी सेवानिवृत्ति के सात वर्ष पश्चात् भी तृतीय समयमान वेतनमान/क्रमोन्निति वेतनमान समय पर नहीं देने के कारण उनको देय पेंशन में हो रहे आर्थिक नुकसान का भुगतान दिलाने की गुजारिश आयोग से की थी। शिकायत मिलते ही आयोग ने मामला दर्जकर जिला शिक्षा अधिकारी, भोपाल से जवाब मांगा था। भेजे गए थे कई पत्रडीईओ को कई पत्र एवं स्मरण पत्र भी भेजे गए थे, फिर भी उनकी ओर से कोई भी जवाब नहीं मिला। इस पर आयोग ने उन्हें आठ नवंबर 2023 को आयोग कार्यालय में व्यक्तिशः आकर जवाब देने को कहा था। आयोग का यह आदेश पत्र उनके कार्यालय में डिलेवर भी हो गया, तब भी तोमर आयोग के समक्ष पेश नहीं हुए। इस नियम के तहत एक्शनमध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग ने अब व्यवहार प्रक्रिया संहिता की धारा 32 ग के अंतर्गत जिला शिक्षा अधिकारी, भोपाल केपीएस तोमर को आयोग में उपस्थित न होने के कारण शो-कॉज नोटिस एवं 21 दिसंबर 2023 को तोमर की आयोग में व्यक्तिशः उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए उनके विरुद्ध पांच हजार रुपये का नामजद जमानती गिरफ्तारी वारंट भी जारी किया गया है। वारंट की तामीली अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (नगरीय) भोपाल, जिला भोपाल के जरिये कराई जाएगी।

सिंधिया स्कूल कैंपस में मंदिर दर्शन के लिए जैन मुनि को नहीं मिली इजाजत, जमकर हुआ हंगामा.

Jain monk denied permission for temple visit at Scindia School campus, uproar ensues. सिंधिया स्कूल परिसर में जैन मंदिर के दर्शन नहीं करने पर 24 घंटे तक अनशन फिर भी नहीं मिली अनुमति ग्वालियर । ग्वालियर किले पर स्थित फेमस सिंधिया स्कूल के परिसर में मौजूद एक प्राचीन भवन को भगवान महावीर स्वामी का मंदिर बताया जाता है। इसी के दर्शन करने की मांग करते हुए जैन मुनि विबुद्ध सागर महाराज ने पूरे 24 घंटे तक सिंधिया स्कूल के गेट पर अनशन किया। लेकिन स्कूल प्रबंधन ने उन्हें स्कूल के अंदर प्रवेश नहीं दिया। थक हार कर जैन मुनि ने स्कूल के बाहर से खड़े होकर दूर से ही मंदिर के दर्शन किए और वहां से रवाना हो गए। दरअसल, यह पूरा घटनाक्रम मंगलवार की सुबह शुरू हुआ था। ग्वालियर में चातुर्मास पूरा करने के बाद जैन मुनि विबुद्ध सागर महाराज ने ग्वालियर किले पर स्थित भगवान महावीर स्वामी के मंदिर के दर्शन करने की इच्छा जैन समाज के लोगों से जाहिर की। जैन समाज के कुछ लोग जैन मुनि विबुद्ध सागर महाराज को लेकर ग्वालियर किले पर पहुंचे। लेकिन यहां जैन मुनि को मंदिर में भगवान के दर्शन नहीं हो सके। क्योंकि जिस मंदिर में जैन मुनि दर्शन करना चाहते थे, वो मंदिर सिंधिया स्कूल के परिसर में मौजूद है।स्कूल प्रबंधन ने जैन मुनि को स्कूल के अंदर आने की अनुमति नहीं दी। अनुमति नहीं मिलने पर और भगवान के दर्शन नहीं होने पर जैन मुनि सिंधिया स्कूल के गेट पर ही अनशन पर बैठ गए। उनके साथ जैन समाज के कुछ लोग भी अनशन पर बैठ गए। मंगलवार सुबह से शुरू हुआ यह अनशन बुधवार की सुबह तक जारी रहा। स्कूल प्रबंधन ने किया साफ मनाइस दौरान पुलिस प्रशासन ने जैन मुनि को अनशन तोड़ने के लिए मनाने की कोशिश की लेकिन जैन मुनि ने भगवान के दर्शन करने के बाद ही अनशन तोड़ने की बात कही। बुधवार की सुबह स्कूल प्रबंधन द्वारा जैन मुनि को साफ तौर पर बता दिया गया कि उन्हें किसी भी हालत में स्कूल के अंदर प्रवेश नहीं दिया जाएगा। इस दौरान जैन समाज के लोगों में आक्रोश भी देखने को मिला। स्कूल प्रबंधन ने बनवा दी दीवारजैन समाज के लोगों ने बताया कि पहले वे इस मंदिर में दर्शन के लिए जाया करते थे। लेकिन फिर स्कूल प्रबंधन ने दीवार बनवा दी। जिसके बाद उन्हें अंदर जाने नहीं दिया जाता है। उन्हें स्कूल की दीवार के बाहर जाल से ही मंदिर के दर्शन करने पड़ते हैं। स्कूल प्रबंधन द्वारा जब जैन मुनि को स्कूल के अंदर प्रवेश देने से साफ मना कर दिया गया तो जैन समाज के लोग आक्रोशित हो गए। जाली में से मंदिर के दर्शन करने पड़ेजैन मुनि ने जब देखा की बात बनने की बजाय बिगड़ रही है तो जैन मुनि स्कूल के बाहर से ही मंदिर के दर्शन करने के लिए तैयार हो गए। जैन मुनि ने अपना अनशन तोड़कर स्कूल के बाउंड्री के बाहर खड़े होकर जाली में से मंदिर के दूर से ही दर्शन किए और इसके बाद में वहां से चले गए। हालांकि, इस मामले में जैन समाज के लोगों का कहना है कि अब वह इस मंदिर को स्कूल परिसर से मुक्त करवाने के लिए प्रयास करेंगे।

दिग्विजय सिंह ने वित्त विभाग के दो आईएएस पर लगाया 250 करोड़ के घोटाले का आरोप.

Digvijaya Singh has accused two IAS officers in the Finance Department of a scam amounting to 250 crore. ईओडब्ल्यू से की शिकायत, दोनों की वॉट्सएप चैट और आडियो सीडी भी उपलब्ध कराई भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव की मतगणना के तीन दिन पहले पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सदस्य दिग्विजय सिंह ने प्रदेश सरकार के वित्त विभाग के दो आईएएस अधिकारियों पर 250 करोड़ के भ्रष्टाचार बड़ा आरोप लगाया। उन्होंने वित्त विभाग के अधिकारी आईएएस अजीत केसरी और ज्ञानेश्वर पाटिल की ईओडब्ल्यू से शिकायत की है। इसके साथ उन्होंने दोनों की वॉट्सएप चैट और आडियो सीडी भी उपलब्ध कराई है। दिग्विजय सिंह बोले-प्राथमिकी दर्ज करेंपूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने ईओडब्ल्यू के डीजी को दी शिकायत में लिखा कि उनको दो भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की शिकायत मिली है। एमपी में वित्त विभाग के दो आईएएस अधिकारियों ने 250 करोड़ का घोटाला किया है। उन्होंने शिकायत के साथ दिए दस्तावेज और ऑडियो सीडी के आधार पर दोनों अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत केस दर्ज कर कार्रवाई करने की मांग की। यह है मामलाशिकायत के अनुसार राज्य मंत्रालय में लागू आईएफएमएस सिस्टम का काम एक चहेती फर्म को देने के लिए वित्त विभाग के अधिकारियों ने वित्त मंत्री को विश्वास में लेकर ढाई सौ करोड़ रुपये का घोटाला किया गया है। इसके लिए टेंडर में मनमानी शर्तें डालते हुए टीसीएस जैसी टाटा समूह की कंपनी को बाहर किया गया। इसके बाद टेरा टेक्नॉलाजी लिमिटेड गुडगांव को ठेका देने की कार्यवाही शुरू कर दी गई। शिकायत के अनुसार इस घोटाले में वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा के साथ-साथ अतिरिक्त मुख्य सचिव अजीत केसरी की भूमिका को भी संदिग्ध बताया गया है। इसके अलावा एक अन्य आईएएस ज्ञानेश्वर पाटिल पर कंपनी के प्रतिनिधियों से मिलीभगत कर घोटाले में शामिल होने का आरोप है। पहले यह टेंडर 200 करोड़ रुपये का था, जिसे एजेंसी तय होने के दौरान बढ़ाकर 247 करोड़ रुपये कर दिया गया। 50 करोड़ रुपये का लेन देनपूरे टेंडर घोटाले में करीब 50 करोड़ रुपये का लेन-देन का आरोप है। शिकायत में रिश्वत की रकम विभिन्न माध्यमों से संबंधित अधिकारियों और मंत्री को देने की बात कही गई है। एसीएस वित्त अजीत केसरी, ज्ञानेश्वर पाटिल, आयुक्त कोष एवं लेखा और टेरा टेक्नॉलाजी लिमिटेड गुडगांव से काम लेने वाले आंध्र प्रदेश की कंपनी पिक्सल वाइड सॉल्यूशन के डायरेक्टर प्रित्युश रेड्डी के लिए काम करने वाले ग्वालियर निवासी देवेश अग्रवाल के बीच विभिन्न अवसरों पर वाट्सएप पर हुई चेटिंग पत्र शिकायत के साथ दिए गए हैं। यह है ऑडियो में…पत्र के साथ सीडी में संलग्न ऑडियो में वित्त विभाग के शीर्ष अधिकारी हैदराबाद स्थित कंपनी के डायरेक्टर से डील पूरी करने की चर्चा कर रहे हैं। इस बातचीत में डील पूरी न होने पर टाटा कंपनी की टीसीएस को आगे काम देने की बात भी कही जा रही है। चर्चा के दौरान किसी पवन नामक व्यक्ति का नाम लेनदेन में बार-बार आ रहा था। आरोप है कि करीब पचास करोड़ रुपये का लेन देन करने के बाद वित्त विभाग के अधिकारियों ने आचार संहिता लगने के कुछ दिन पूर्व गुडगांव की कंपनी को वर्क ऑर्डर दिया गया, जो बाद में हैदराबाद की कंपनी को सौंपा गया। शर्तें कंपनी के अनुकूल बनाई शिकायत में आरोप लगाया गया है कि वित्त विभाग के अधिकारियों ने इस टेंडर प्रक्रिया की शर्तों को इस कंपनी के अनुकूल बनाया था, ताकि अन्य कंपनी टेंडर में भाग ही न ले सके। चुनावी साल में और चुनाव घोषित होने के कुछ दिन पूर्व घटित इस हाई प्रोफाइल घोटाले में आर्थिक अनियमितता, भ्रष्टाचार का प्रकरण दर्ज कर समस्त संबंधित दस्तावेज जब्त किए जाना चाहिए और आरोपी अधिकारियों और कंपनी के प्रतिनिधियों और दलालों के बीच हुई बातचीत का रिकॉर्ड मोबाइल कंपनियों से लेकर कार्रवाई की जाना चाहिए।

भाजपा से विधायकों के घेराबंदी के बचाने कांग्रेस करेगी बाड़ाबंदी.

The Congress will undertake a blockade to save legislators from the Bharatiya Janata Party (BJP). बिकाऊ के डर से कर्नाटक शिफ्ट करने की रहेगी कोशिश, भाजपा से विधायकों के घेराबंदी के बचाने कांग्रेस करेगी बाड़ाबंदी, जीत का सर्टिफिकेट मिलने के बाद आर्ब्जवर करेंगे स्ट्रांग रूम के बाहर संपर्क, भोपाल में तैयार रहेंगे चार्टर भोपाल। साल 2020 में आपरेशन लोटस की मार से घायल कांग्रेस दोबारा भुगतान नहीं करना चाहती है। इसलिए कांग्रेस ने भाजपा के घेराबंदी से बचाने के लिए जीतने के बाद विधायकों की बाड़ाबंदी करेगी। यानी कि उन्हें आइसोलेट कर कनार्टक शिफ्ट किया जा सकता है। इसके पीछे की वजह है कि भाजपा के प्लान की बी कांग्रेस को लग चुकी है। यही कारण है कि भोपाल में कर्नाटक भेजने के लिए चार्टर प्लेन तैयार रहेंगे। हालांकि कांग्रेस ने जिला स्तर पर आर्ब्जवर और जिला अध्यक्ष को पहले ही सर्तक कर दिया है। उन्होंने ट्रेनिंग के दौरान कांग्रेस के प्रति निष्ठा रखने के लिए कहा गया था। खुद कमलनाथ ने वीसी के दौरान यह बात कही थी कि भाजपा डोरे डाल सकती है। उन्होंने कहा कि इस पूरे चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवारों को जिताने के लिए मेरा पूरा प्रयास रहा। नाथ ने कहा था कि कोई कहेगा सट़्टा बाजार ये कह रहा है। मैं किसी पर विश्वास नहीं करता। मैं मप्र के मतदाताओं पर ही विश्वास करता हूं। बीजेपी के लोग सोचते हैं हम हथकंडे अपना लेंगे। हम लोगों को खरीद लेंगे। अब इसकी जरूरत नहीं पड़ेगी। आप लोग इस ट्रेनिंग में भाग लें। जो प्रजेंटेशन दिए गए हैं। वो सब मैंने देखे हैं। हमारी टेक्निकल टीम ने तैयार किए हैं। सूत्रों ने बताया कि भाजपा के सामने चुनाव में जीत के लिए चुनौती ज्यादा है। इसलिए कांग्रेस पूरी तरह से अलर्ट मोड कर हैं। प्रत्याशियों को एजेंसियों का डर दिखाकर अपने पाले में ला सकती है। जिसकी आशंका दिग्विजय सिंह ने भी जताई थी। कारण यही है कि जिसके चलते कांग्रेस के कई संगठनों के नेताओं को भी कमलनाथ ने जिम्मेदारी सौंप रखी है। खुद सुबह से नाथ पीसीसी से रखेंगे नजर मतगणना के दिन पीसीसी अध्यक्ष खुद सुबह 9 बजे से मुख्यालय से प्रदेश भर में नजर रखेंगे। एआईसीसी के लीगल एक्सपर्ट और वार रूम के सदस्यों के साथ चुनाव परिणाम पर राउंड वार जानकारी लेंगे। इसके लिए वार रूम भी तैयार किया जा रहा है। पोलिंग के दिन भी कांग्रेस दफ्तर में मौजूद रहे थे। काउंटिंग के दिन नाथ के कई दिग्गज नेता भी वार रूम में परिणामों पर नजर रखेंगे।

एमपी में निर्दलीय, सपा-बसपा की जो मानेगा शर्तें, वही बनेगा ‘सिकंदर’ आधा दर्जन सीटों पर निर्दलीय भारी, सपा-बसपा ने भी मतदाताओं पर खूब डाले डोरे.

Madhya Pradesh, an independent candidate, along with the terms accepted by the SP-BSP alliance, will become a significant player. Heavy competition is expected on half a dozen seats with independent candidates, and the SP-BSP alliance is also actively engaging with voters. पूर्व सांसद गुड्डू, अंतर, चौहान, त्रिपाठी, केदारनाथ शुक्ला सहित आधा नेताओं ने खड़ी कर दी मुश्किल, तीसरा चहेरे ने कांग्रेस और भाजपा के प्रत्याशियों के लिए खड़ा कर दिया जीत का पहाड़, बागियों की बागवत चुनाव परिणाम में पड़ेगी भारी. उदित नारायणभोपाल। मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव के दौरान जहां कई बागियों ने बागवत की है, वहीं सपा और बसपा ने भी मतदाताओं को अपने पाले में लाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी है। इसका नतीजा है कि भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशियों के सामने बड़ी चुनौती है। तीसरे चेहरे पर भी जनता भरोसा कर सकती है। ऐसी स्थिति कई अहम सीटों पर बनी है। जो कांग्रेस और भाजपा के पास लंबे तक रिजर्व के तौर पर रही हैं। मध्य प्रदेश में वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव के जब नतीजे आए थे तो भाजपा को 109 और कांग्रेस को 114 सीटें मिली थी। एमपी में किसी भी दल को सरकार बनाने के लिए 116 सीटों की जरूरत होती है। ऐसे में किंगमेकर की भूमिका में निर्दलीय, सपा और बसपा के विधायक थे। रिजल्ट से पहले एक बार फिर 2018 वाली स्थिति को लेकर पूवार्नुमान लग रहे हैं। भाजपा और कांग्रेस समेत प्रदेश के लोगों की नजर उन निर्दलीय और छोटे दलों के उम्मीदवारों पर टिक गई है, जिनकी जीत तय मानी जा रही है। वहीं, कुछ सीटों पर उनके जीतने की संभावना है। पूरे प्रदेश में ऐसे चेहरों की संख्या सात से आठ हो सकती है। दरअसल, 3 दिसंबर को एमपी विधानसभा चुनाव के नतीजे आएंगे। भाजपा और कांग्रेस 150-150 सीटें लाने का दावा कर रही है। वहीं, वोटिंग से पहले आए ओपिनियन पोल में दोनों में से कोई दल बहुमत के आंकड़े के करीब नहीं पहुंच रहा था। एमपी में सट्टा बाजार भी इसी ओर इशारा कर रहा है। ऐसे में भाजपा और कांग्रेस इन्हें साधने की जुगत में जुट गई है। इनमें से अधिकांश चेहरे इन्हीं दलों से बागी होकर मैदान में हैं। मैहर में नारायण और फिर नारायण बीजेपी ने इस बार मैहर से नारायण त्रिपाठी को टिकट नहीं दिया था। पार्टी विरोधी गतिविधियों की वजह से उनका टिकट कटा था। इसके बाद नारायण त्रिपाठी ने विंध्य विकास पार्टी बना ली थी। अपनी ही पार्टी से नारायण त्रिपाठी मैहर से चुनाव लड़ रहे हैं। वोटिंग के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि नारायण त्रिपाठी चुनाव जीत सकते हैं। इनकी नजदीकियां भाजपा और कांग्रेस दोनों से हैं। पूर्व अध्यक्ष के बेटे शेरा और चटनिस के लिए चुनौती वहीं, बुरहानपुर विधानसभा सीट पर भी भाजपा और कांग्रेस की नजर है। इस सीट से अभी निर्दलीय सुरेंद्र सिंह शेरा विधायक हैं। हालांकि वह शुरू से कांग्रेस के साथ रहे हैं। सुरेंद्र सिंह शेरा इस बार कांग्रेस में शामिल हो गए हैं और उन्हें पार्टी ने टिकट दिया है। वहीं, बीजेपी ने अर्चना चिटनिस को यहां से उम्मीदवार बनाया है। अर्चना चिटनिस को टिकट मिलने के बाद बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष नंद कुमार सिंह चौहान के बेटे हर्ष सिंह चौहान नाराज हो गए। हर्ष सिंह चौहान बीजेपी से इस्तीफा देकर निर्दलीय चुनाव मैदान में उतर गए हैं। स्थानीय जानकारों के अनुसार हर्ष सिंह चौहान दोनों को कड़ी टक्कर दे रहे हैं। अगर चुनाव जीतते हैं तो बीजेपी इन्हें मनाने की कोशिश करेगी। कांग्रेस के साथ जाएंगे गुड्डू या फिर घर बैठेंगे कांग्रेस के पूर्व सांसद प्रेमचंद गुड्डू भी आलोट विधानसभा चुनाव से टिकट चाहते थे। पार्टी ने उन्हें उम्मीदवार नहीं बनाया तो वह निर्दलीय अलोट विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। पार्टी से इस्तीफा देने के बाद कमलनाथ और दिग्विजय सिंह पर कई आरोप लगाए थे। इन पर भाजपा और कांग्रेस दोनों की नजर है। प्रेमचंद्र गुड्डू भाजपा में भी रह चुके हैं।महू में दरबार के लगने की ज्यादा उम्मीद- महू विधानसभा सीट पर अभी भाजपा का कब्जा है। वहीं, सबसे ज्यादा चर्चा अंतर सिंह दरबार की हो रही है। अंतर सिंह दरबार कांग्रेस में रह चुके हैं। कांग्रेस ने उन्हें टिकट नहीं दिया तो वह निर्दलीय चुनाव मैदान में उतर गए हैं। कहा जा रहा है कि महू में अंतर सिंह दरबार का पलड़ा भारी दिख रहा है। कांग्रेस ने फिर से उन पर डोरे डालने शुरू कर दिए हैं। सीधी में भाजपा के लिए सीधी नहीं जीत, शुक्ला हावी वहीं, पेशाबकांड की वजह से भाजपा ने इस बार अपने सीटिंग विधायक केदारनाथ शुक्ला का टिकट काट दिया था। उनकी जगह सांसद रीति पाठक को टिकट दिया है। सीधी में केदारनाथ शुक्ला ने रीति पाठक की मुश्किलें बढ़ा दी है। हालांकि चर्चा यह भी है कि केदारनाथ शुक्ला अगर टक्कर दिए होंगे तो कांग्रेस को फायदा हो सकता है।चौधरी, राजू और रघुवंशी भी कांग्रेस के लिए कम नहीं- गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में करीब एक दर्जन विधानसभा की ऐसी सीटें हैं, जहां छोटे दल और निर्दलीय बड़े दलों का खेल खराब कर सकते हैं। इनमें गोटेगांव से कांग्रेस के बागी शेखर चौधरी निर्दलीय लड़ रहे हैं। सिरमौर में बीएसपी ने बीजेपी उम्मीदवार की चुनौती बढ़ा दी है। धार में बीजेपी के बागी राजू यादव निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं। सिवनी मालवा में ओम रघुवंशी निर्दलीय मैदान में हैं। इससे कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

जंगल के संरक्षक को चाहिए संरक्षण.

The guardian of the jungle needs protection. अंतरराष्ट्रीय जगुआर दिवस आज डॉ. केशव पाण्डेय दुनियाभर में जैव विविधता संरक्षण के लिये अनेक दिवस मनाने के साथ ही विभिन्न अभियान चलाए जा रहे हैं। एक महत्वपूर्ण प्रजाति, सतत् विकास और मध्य एवं दक्षिण अमेरिका की सदियों पुरानी सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक के रूप में अंतरराष्ट्रीय जगुआर दिवस मनाया जाता है। यह अमेरिका की सबसे बड़ी जंगली बिल्ली है। “गार्जियन ऑफ द जंगल“ कहे जाने वाले जगुआर की प्रजाति उसके संरक्षण और महत्व से जुड़ी एक खास रिपोर्ट। देश और दुनिया में प्रति वर्ष 29 नवंबर को अंतरराष्ट्रीय जगुआर दिवस मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य जगुआर के सामने दिनों-दिन बढ़ते खतरों को टालना है। साथ ही मेक्सिको से अर्जेंटीना तक इसके अस्तित्व को सुनिश्चित करने वाले महत्त्वपूर्ण संरक्षण प्रयासों के बारे में लोगों का जागरूक करना है। ताकि जंगल की इस खास प्रजाति का संरक्षण हो सके।जगुआर दिवस का मनाना कई मायनों में महत्वपूर्ण है। संयुक्त राष्ट्र के सतत् विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के व्यापक प्रयासों का ही यह परिणाम है। इसके तहत जगुआर कॉरिडोर और उनके आवासों के संरक्षण की ज़रूरत पर ध्यान आकर्षित करने के लिये राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय साझीदारों के सहयोग से अंतरराष्ट्रीय जगुआर दिवस संबंधित देशों की सामूहिक आवाज़ का प्रतिनिधित्त्व करता है। इसके महत्व को ऐसे समझा जा सकता है कि मार्च 2018 में “जगुआर 2030 फोरम“ के लिए संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में 14 रेंज देशों के प्रतिनिधि न्यूयॉर्क में एकत्रित हुए। इस फोरम के परिणामस्वरूप जगुआर 2030 स्टेटमेंट अस्तित्व में आया, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोगी जगुआर संरक्षण पहलों की एक विस्तृत श्रृंखला को रेखांकित किया।ब्राजील सहित अनेक रेंज देश राष्ट्रीय जगुआर दिवस समारोह भी मना रहे हैं। जिसने जगुआर को जैव विविधता के प्रतीक के रूप में मान्यता दी है। सबसे खास बात यह है कि जगुआर दिवस मनाने की मांग करने वालों में वैश्विक जंगली बिल्ली संरक्षण संगठन, पैंथेरा के सह संस्थापक,पूर्व सीईओ व मुख्य वैज्ञानिक डॉ. एलन रैबिनोविट्ज़ शामिल थे।जिस तरह भारत में टाइगर सहित चीतों व अन्य प्रजातियों के संरक्षण को लेकर प्रयास किए जा रहे हैं। ठीक उसी तरह दुनिया भर में विलुप्त होते जगुआर के संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 2023 में इसकी थीम “गार्जियन आफ द जंगल“ रखी गई है। मतलब जंगल का अभिभावक… ताकि लोगों को अधिक से अधिक जागरूक किया जा सके। कुदरत ने इन्हें बड़ा खूबसूरत बनाया है। हालांकि चीता और जगुआर दोनों ही पैंथर हैं, जिनके बीच बहुत अंतर है। एक के शरीर पर रोसेट (गुलाब के फूल जैसा) पैटर्न होता है। लेकिन भारत में जगुआर नहीं पाया जाता है। भारत में मेलेनिस्टिक तेंदुओं को ब्लैक पेंथर कहा जाता है। अमेरिका में मेलानिस्टिक जगुआर को ब्लैक पैंथर कहा जाता है। भारत में चार प्रजातियां पाई जाती हैं। गिर शेर, टाइगर, भारतीय तेंदुआ और हिम तेंदुआ इसके अलावा क्लाउडेड तेंदुआ भी पाया जाता है। जगुआर और चीता 1940 के दशक में विलुप्त हो गए थे। हालांकि भारत सरकार ने देश में चीता के संरक्षण के लिए 2022 में विशेष प्रयास किए और मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में इनका नया घर बनाया गया है।खासतौर पर जगुआर लैटिन अमेरिका की सबसे बड़ी मांसाहारी और एकमात्र बड़ी बिल्ली है, जो मेक्सिको से अर्जेंटीना तक 18 देशों में मौजूद है। इसका वैज्ञानिक नाम पैंथेरा ओंका है। यह दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी बिल्ली शिकारी और अमेज़ॅन वर्षावन की एक महत्वपूर्ण प्रजाति है। इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (आईयूसीएन) की खतरे वाली प्रजातियों की रेड लिस्ट में “ संकटग्रस्त प्रजाति” के रूप में जगुआर अल सल्वाडोर और उरुग्वे में विलुप्त है। शेष रेंज देशों में दबाव का सामना कर रहा है। वन्य जीवों और वनस्पतियों की लुप्तप्राय प्रजातियों में अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर कन्वेंशन सूचीः परिशिष्ट आई में आते हैं। कारण स्पष्ट है कि जगुआर को अपने प्राकृतिक आवास रेंज में 50 प्रतिशत से अधिक संकट का सामना करना पड़ा है। जगुआर अच्छे तैराक होते हैं और यहाँ तक कि पनामा नहर में तैरने के लिये भी जाने जाते हैं। जगुआर की पहचान इसकी पूरी शृंखला में एक प्रजाति के रूप में की गई है, जो प्रजातियों की आनुवंशिक विविधता के लिये इसके निवास स्थान के संबंध और संरक्षण को महत्त्वपूर्ण बनाती है। जगुआर की शक्ति का अदांजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यह कछुए का कवच हो या मगरमच्छ की खाल दोनों का शिकार कर लेता है।देश में इस दिन विभिन्न राष्ट्रीय प्राणी उद्यानों में इसे मनाने के साथ ही लोगों को इसके संरक्षण के बारे में जागरूक किया जाता है। ऐसे में आवश्यक है कि “जंगल के सरंक्षक को भी मिले मानव का संरक्षण“। तभी इस दिन को मनाने की सार्थकता सिद्ध होगी।

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