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शराब दुकानदारो का लोगों व प्रशासन के साथ धोका!

Deception with the people and administration by liquor store owners. Special Correspondent – Sahara Samachaar शराब दुकानदारो द्वारा शराब के दाम मूल्य से ज्यादा की कीमत पर बेंची जा रही है। दामों की गई बढोत्तरी से शराब का सेवन करने वालों के बीच काफी नाराजगी देखी जा रही हैं नाराज़ लोगो का कोर्ट की ओर रुख इसी नाराजगी के चलते सेवन करने वालों लोग की ओर से एक जनहित याचिका भी लगाए जाने की योजना है। मुद्दे को लेकर अधिवक्ता की ओर से कोर्ट में जाने की बात कही गई है। लोगों का कहना है मदिरा का सेवन करने वाले लोगों का आरोप है कि लायसेंसी शराब दुकान पर रैपर पर लिखे गये मूल्य से ज्यादा की कीमत वसूली जा रही है। मामले में बड़ा खुलासा होने पर कहा गया कि आबकारी पुलिस लगातार सिर्फ कच्ची शराब बनाने वालों पर कार्यवाई कर रही है। 40 रूपये की अवैध वसूली जबलपुर जिले में लायसेंसी शराब दुकानों पर मूल्य से अधिक दामों पर अंग्रेजी शराब बेची जा रही है। लायसेंसी शराब दुकान के गद्दीदार मदिरा प्रेमियों से अवैध वसूली कर रहे हैं। अंग्रेजी शराब के एक पाव के 150 रुपये की जगह 190 रुपए लिए जा रहे। दुकान संचालक एक बोतल पर करीब 40 रूपये की अवैध वसूली कर रहे हैं। यहां के लोग करेंगे शिकायत शहर के धन्वन्तरि नगर, रसल चौक, इंद्रा मार्किट, भेड़ाघाट, बरगी, कुंडम सहित जिले भर में अंग्रेजी शराब दुकान में मूल्य से अधिक दाम में शराब बेची जा रही है। मूल्य से अधिक दामों पर बेची जा रही शराब को लेकर जनहित याचिका लगाई जाएगी। शहर के वरिष्ठ अधिवक्ता नरेंद्र निखारे ने मामले को लेकर कहा है कि वह कोर्ट में जनहित याचिका लगाएंगे। अवैध तरीके से ग्राहकों से की जा रही वसूली को लेकर स्थानीय लोगों द्वारा आबकारी विभाग के पास दुकान संचालकों की शिकायत कीजायेगी। इसी के चलते शराब प्रेमियों का शराब से होता जा रहा मोह भंग. सहारा समाचार -जबलपुर.

माइनिंग विभाग की लापरवाही से अवैध उत्खनन करने वाले भू माफिया निडर, दौड़ा रहे डंपर.

Boldly running dumpers, engaged in illegal excavation due to the Mining Department’s negligence, the land mafia is fearless. अलताफ खान सिरोंज सिरोंज – आरोन रोड पर स्थित एवं इमलानी रोड पर स्थित गिट्टी क्रेशर मशीनों की आड़ में अवैध कोपरे मुरम का धड़ले से चल रहा कारोबार 24 घंटे आरोन रोड की घाटी से कोपरे मुरम से भरे हुए डंपर क्षेत्र में कॉलोनी ओर प्लांटो में बगे़र रॉयल्टी के बेझिझक डाल रहे हैं माइनिंग विभाग सिरोंज से लगभग 90 किलोमीटर दूर विदिशा जिले में बैठी हुई है लेकिन निष्क्रिय नजर आती है माइनिंग विभाग द्वारा कभी भी क्रेशर मशीनों पर जाकर चेक नहीं किया जाता कि उनके आसपास की जमीन को क्रेशर मशीनों के मालिकों ने बड़े-बड़े गढ़ों में तब्दील कर दी है कुछ जमीन राजस्व विभाग की भी है तो कुछ जमीन वन विभाग की भी है क्या कभी इन्होंने इतनी रॉयल्टी दी माइनिंग विभाग के अधिकारी कभी ऐसा नहीं करते कई बार मीडिया कर्मियों द्वारा अधिकारियों को जानकारी दी जा चुकी है फिर भी वह इस ओर ध्यान नहीं देते हां सूत्र बताते हैं कि कभी-कभी माइनिंग विभाग सिरोंज क्षेत्र में आता है तो कभी छोटा-मोटा रेता केमट्रैक्टर ट्राली को पड़कर कैस बना देते हैं और गिट्टी क्रेशर मशीनों पर घूम कर वापस आ जाते हैं जिससे मॉर्निंग विभाग की मिली भगत भी इसमें शामिल हो सकती है लगातार खबरें प्रकाशित होने के बाद भी प्रशासन इन भू माफियाओं पर कार्रवाई करने से बच रहा है इस विषय मैं जब हमारे प्रतिनिधि की बात सिरोंज अनुविभागी अधिकारी हषर्ल चौधरी से हुई तो उनका कहना है कि जैसे ही हमें भनक लगेगी के क्षेत्र में अवैध कोपरे के डंपर पर आ रहे हैं हम इन पर कार्रवाई करेंगे

अवैध उत्खनन का खेल, गरीबों के नहीं बन रहे आशयाने कंपनी हो रही मालामाल, खुलेआम शासन के राजस्व पर लूट, नियम कायदे सिर्फ कागज़ों में, अधिकारी मौन.

The game of illegal excavation is in progress, and companies are amassing wealth while the poor are unable to secure dwellings. There is blatant looting of public revenue under the guise of open governance, rules and regulations exist only on paper, and officials maintain silence. Special Correspondent, Sahara Samachaar Katni. कटनी। नियम कानून को रौदकर जिले में रेत के अवैध उत्खनन एवं परिवहन पर लगाम लगा पाने में संबंधित विभाग लगातार नाकामयाब साबित हो रहा है। कहने को विष्टा रेत कंपनी का ठेका समाप्त होने के बाद धनलक्ष्मी नामक रेत कंपनी ने जिले की सभी खदानें ले ली। स्वीकृत खदानों में से सिर्फ चार खदानें ऐसी हैं जहां पर वर्तमान में विभाग ने उत्खनन की स्वीकृति प्रदान कर रखी है। कागजों में स्वीकृत चार खदानों के अलावा कई ऐसी खदानें वर्तमान में हैं जहां से रेत का अवैध उत्खनन धड़ल्ले से हो रहा है। रेत कंपनी जिस अंदाज में बगैर अनुमति रेत का अवैध उत्खनन कर रही है उससे यह कहना गलत नहीं होगा की कंपनी को संबंधित विभाग का संरक्षण प्राप्त है। गत रात्री रेत का अवैध उत्खनन कर जा रहे एक ट्रक को ग्रामीणों ने रोक कर जब दस्तावेजों की जांच की तो जो बातें सामने आई वह बेहद चौंकाने वाली हैं। ग्रामीणों के दस्तावेज पूछने पर यह सिद्ध हुआ कि स्वीकृत खदान की टीपी लेकर गाड़ी किसी दूसरी खदान से अवैध उत्खनन कर देर रात निकल रही थी। उक्त घटना के बाद काफी देर तक गांव में हंगामे की स्थिति निर्मित रही बाद में किसी अधिकारी की मध्यस्थता के बाद ट्रक आगे की ओर रवाना हुआ। यह था मामलासूत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक हाईवा क्रमांक MP 20 ZE 5577 गत रविवार की देर रात बड़वारा थाना क्षेत्र के ग्राम लदहर से रेत लोड कर के जा रहा था। ट्रक का पीछा करते हुए ग्रामीणों ने ट्रक को ग्राम सकरीगढ़ में रोक लिया। रेत से लदे ट्रक के चालक से जब ग्रामीणों ने दस्तावेज के संबंध में पूछताछ की तो चालक ने जो दस्तावेज उन्हें दिखाएं उसमें टीपी जजागढ़ रेत खदान की मौजूद थी। जजागढ़ की टीपी के जरिए रेत कंपनी का उक्त ट्रक लदहर से रेत लोड करके जा रहा था। लदहर रेत खदान से अभी तक कंपनी को रेत उत्खनन की स्वीकृति नहीं मिली है। ग्रामीणों का कहना है कि बगैर स्वीकृति के ही उक्त खदान में धड़ल्ले से रेत के उत्खनन का खेल दिन-रात चल रहा है। बेखौफ चल रहा उत्खननरेत के अवैध उत्खनन को लेकर दो दिन पहले ही जिले के समीप वर्ती जिले शहडोल में रेत माफियाओं ने पटवारी को ट्रैक्टर से कुचलकर मौत के घाट उतार दिया था। शहडोल की ही तरह कटनी में भी रेत माफिया गहरे तक अपनी जड़े जमा चुके हैं। पिछले रिकॉर्ड को अगर याद करें तो कटनी में भी मारपीट, गोलीबारी जैसी घटनाएं रेत माफियाओं के द्वारा घटित की जा चुकी हैं। पुरानी कंपनी की तर्ज पर नई कंपनी भी रेत की अवैध उत्खनन में अपने हाथ जमाने लगी है। महज चार खदानों की स्वीकृत होने के बावजूद कंपनी कई अन्य खदानों से रेत का उत्खनन कर स्वीकृत खदान की टीपी के जरिए सप्लाई कर रही है। वर्तमान समय में रेत के दाम आसमान छू रहे हैं। अवैध रूप से निकाली जा रही रेत पर कंपनी को किसी प्रकार का टैक्स तो देना नहीं पड़ेगा, लेकिन मिली भगत करके कंपनी व संबंधित जिम्मेदार लोग मोटा मुनाफा कमाने में जुट गए हैं। रेत का अवैध उत्खनन कर कंपनी जहां एक तरफ शासन को टैक्स का चूना लगा रही है, वहीं दूसरी तरफ आम जनता की जेब पर डाका डालकर अपनी तिजोरी भर रही है जिम्मेदार कार्यवाही नहीं कर रहे यह एक सोचनीय विषय है

जिला चिकित्सालय में डॉक्टरों की लापरवाही का सिलसिला जारी, कार्यवाही के नाम पर रस्म अदायगी, प्रसूता की हुई मौत.

The saga of doctors’ negligence continues at the district hospital, with formalities being carried out in the name of disciplinary action, leading to the unfortunate death of a pregnant woman. Special Correspondent – Sahara Samachaar Katni. कटनी। जिला चिकित्सालय में व्यवस्थाएं सुधारने के बजाय बिगड़ती जा रही हैं ऐसे डॉक्टर है जो स्वयं के क्लीनिक चला रहे हैं जिला अस्पताल में दो दिन बाद फिर एक बार डॉ की लापरवाही से प्रसूता की मौत लागतार डॉक्टरों की लापरवाही से प्रस्तुओ की मौत होने का सिलसिला थम ही नही रहा है। जिम्मेदार अधिकारी सिर्फ जांच का अस्वाशन देकर परिजनों को शांत करा दिया जाता है लेकिन आज तक किसी पर ठोस कार्यबाही नही होने के कारण लापरबाही का रवैया अपनाते हुए डॉक्टर अपने प्राइवेट डिस्पेंसरी में लगे रहते है जानकारी के अनुसार बताया गया है कि विजयराघवगढ़ से आयी प्रसूता की इलाज दौरान मौत विजयराघवगढ़ से आई शालिनी तिवारी पति राजू तिवारी 28 वर्ष कारितलाई निवाशी कल विजयराघवगढ़ में कल शाम 8 बजे स्वास्थ केन्द्र में प्रसव हुआ जिसमें लड़का हुआ था महिला की हालत गम्भीर होने के कारण जिला अस्पताल कटनी रेफर किया गया था जहाँ पर महिला को किसी भी डॉक्टर ने नही देखा रात में डॉक्टर सुनीता वर्मा को अस्पताल से कॉल गया था आधे घण्टे करते करते सुबह 5 बजा दिया, फिर परिजनों को कही ओर ले जाने की सलाह स्टाफ द्वारा दी गयी। जहाँ परिजन शारदा हॉस्पिटल ले गए लेकिन से भी बोल दिया गया था कि जबलपुर ले जाओ लेकिन महिला की मौत हो गयी परिजनों द्वारा डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाया गया कि इलाज में बेपरवाही की गई जिससे प्रसूता की मौत हो गयी गौरतलब है कि अभी कुछ दिन पहले ही चौधरी परिवार की एक महिला ने जिला अस्पताल में दम तोड़ दिया था जिससे उसके परिवारजनो ने लापरवाही का आरोप लगाया था.

दुकानों पर एमआरपी से ज्यादा बेची जा रही शराब, रेट लिस्ट गायब, नियमों कायदे ताक पर, आबकारी विभाग और ठेकेदार मिलीभगत कर लगा रहे है शासन और जनता को चूना.

Alcohol is being sold in shops than the prescribed Maximum Retail Price (MRP), rate lists are missing, regulations are being violated, and there is collusion between the Excise Department and liquor vendors. Special Correspondent – Sahara Samachaar Katni. कटनी । शराब ठेकेदारों और आबकारी विभाग की मनमानी के चलते ग्राहक ठगे जा रहे हैं शराब ठेकेदारों के द्वारा खुलेआम MRP से ज्यादा दाम पर शराब बेची जा रही है लेकिन आबकारी विभाग द्वारा जानकर भी अनजान बनने की कोशिश की जा रही है. फ़ोन करने पर आबकारी विभाग के अधिकारी फ़ोन नहीं उठाते, यदि उठा भी ले तो कार्यवाही का अस्वासन दिया जाता है पर कोई कार्यवाही नहीं की जाती. इस पूरे खेल से ऐसा प्रतीत होता है की आबकारी विभाग और ठेकेदारों के साठगांठ से करोड़ों रूपए की बंदरबाट हो रही है. कटनी के अंतर्गत आने वाली गर्ग चौराहे और दुर्गा चौक शराब दुकानों में मनमाने दाम में प्रिंट रेट से ज्यादा कीमत में शराब बेची जा रही है आलम यह है की रिहायशी इलाको में शराब MRP पर ही शराब की बिक्री होती है. लेकिन यदि हम कटनी से बहार किसी भी तहसील या कस्बों में जहाँ आबकारी विभाग ने ठेके आबंटित किये है वह पर शराब को MRP से लगभग २०% से २५% पर शराब के सभी ब्रांडो की बिक्री की जा रही है. आबकारी अधिकारी और ठेकेदारों की मिली भगत से शासन एवं आम जनता को चूना लगाया जा रहा है. बिल मांगने पर ठेके पर बैठे सेल्समेन कहते है की हमारे यहाँ बिल नहीं दिया जाता। सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार एक तरफ महंगी शराब तो दूसरी तरफ सरकार के आहता बंद होने के आदेश की भी धज्जियां उड़ाते हुए शराब की दुकान के पास में एक नहीं कई आहते मिल जायेंगे जहा रोजाना जमघट मचा रहता हैं। जानकारी के मुताबिक़ कटनी शहर की हर शराब दुकान के पास आराम से बैठ के पीने खाने की व्यवस्था मिल जाती हैं वही कुछ दुकानें ऐसी भी है जो शहर के मोहल्ले गली में खोली गई है । जिनके सामने रोज भीड़ होती है जिससे लोगो को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बताया गया है कि इस मनमानी के चलते लोग परेशान हैं सुभाष चौक में शराब दुकान पर सरेआम महंगे रेट पर शराब बेची जा रही है मजे की बात तो यह है कि यहां से जिम्मेदार अधिकारी भी निकालते हैं लेकिन उनको कोई परवाह नहीं है और कुछ कदमों की दूरी पर आबकारी विभाग भी है लेकिन कार्यवाही के नाम पर नतीजा सिफर ही रहता है कई जगह तो सूचना बोर्ड भी गायब हैं जबकि रेट लिस्ट लगाना जरूरी होता है ताकि लोगों को एमआरपी का पता चल सके बताया जाता है कि ज्यादा कोई बात करता है तो शराब बेचने वाली लड़ाई झगड़े में उतारू हो जाते हैं इस वजह से उपभोक्ता नहीं बोलते हैं लेकिन बात चाहे जो हो गड़बड़ झाला हो रहा है.

रबी फसल की तैयारी पर प्राकृतिक कृषि प्रशिक्षण सम्पन्न.

Trained in natural agriculture for the preparation of Rabi crops. VSS, KVK, BRLF एवं NCNF का संयुक्त प्रयास उमरिया, जिले के अकाशकोट क्षेत्र के गांवों के प्राकृतिक कृषि पर सघन रूप से कार्य कर रहे, सामाजिक संस्था विकास संवाद द्वारा कृषि विज्ञान केंद्र उमरिया के तकनीकी सहयोग से रबी फसल की तैयारी पर एक दिवशीय प्रशिक्षण का आयोजन किया गया । प्रशिक्षण में कृषि विज्ञान केंद्र उमरिया के वैज्ञानिकों द्वारा भूमि उपचार ,बीज का चयन, बीज उपचार,फसल चक्र, अंतर्वर्ती फसल, मिश्रित फसल, बीजामृत, जीवामृत, घन जीवामृत, ब्रह्मास्त्र, अग्नियास्त्र एवं दशपर्णी अर्क तैयार करने के बारे में विस्तार से बताया गया । उक्त प्रशिक्षण में करकेली जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम अमडी, कोहका-47, डोंगरगवां, मर्दर, बिरहुलिया, खैरा, अगनहुडी एवं करौंदी के प्राकृतिक कृषि शामिल हुए । विकास संवाद संस्था एवं प्राकृतिक कृषि का राष्ट्रीय गठबंधन के प्रयाश से किसान प्राकृतिक कृषि की ओर बढ़ रहे हैं । किसान रासायनिक उर्वरक एवं कीटनाशी को छोड़, प्राकृतिक खाद एवं कीटनाशक तैयार कर अपने खेतों में उपयोग कर रहे हैं । प्रशिक्षण में 48 किसान शामिल हुए । प्रशिक्षण को कृषि वैज्ञानिक के.के. राणा, विनीता सिंह, धनंजय सिंह ने संबोधित किया। प्रशिक्षण का संचालन विकास संवाद के जिला समन्वयक भूपेन्द्र त्रिपाठी ने किया। प्रशिक्षण को संबोधित करते हुए कृषि वैज्ञानिक धनंजय सिंह ने रबी के फसलों के उन्नत किस्मो के बारे में विस्तार बताया । उन्होंने कहा 1 एकड़ में 40 से 45 kg से अधिक न बोयें । चना में उखटा रोग के नियंत्रण पर चर्चा करते हुए फसल चक्र अपनाने की बात कही । कीटो का पहचान बताते हुए विभिन्न कीटों के जीवन चक्र के बारे में विस्तार से बताया । उन्होंने प्राकृतिक रूप से कीट नियंत्रण के लिए बीज उपचार, भूमिउपचार के साथ गेंदा, धनिया जैसे फसल बोने की बात कही। श्री सिंह ने मिश्रित बोनी कीट नियंत्रण का कारगर तरीका बताया। प्रतिभगियों से चर्चा करते हुए कृषि वैज्ञानिक के.के. राणा ने बीज उपचार के महत्व को बताते हुए उन्होंने वीजामृत एवं जीवामृत के बनाने की विधि एवं उपयोग पर विस्तार से प्रकाश डाला । प्रशिक्षण को सफल बनाने में किसान राकेश बैगा, मोहन बैगा, अमर सिंह , कविता सिंह, रामप्रसाद सिंह, संतोष सिंह, समरबहादुर, प्रदीप सिंह,लवकुश सिंह , बलराम महार, सतमी बाई बैगा एवं यशोदा राय का विशेष सहयोग रहा ।

बुंदेलखंड में आईएएस व आईपीएस विलेज रैपुरा (चित्रकूट) उत्तर प्रदेश: कभी डकैतों के लिए मशहूर था, अब आईएएस आईपीएस की है फैक्ट्री, हर घर में अफसर.!

Bundelkhand, the village of Raipura (Chitrakoot), Uttar Pradesh, was once infamous for dacoits but now boasts of IAS and IPS officers. It has transformed into a hub of factories, with every household having officers. Udit Narayanभोपाल। देश के हर गांव की अपनी एक विशेषता होती है और उसी वजह से वह अपनी पहचान बना लेता है, उत्तर प्रदेश में बुंदेलखंड अंचल के चित्रकूट का पाठा क्षेत्र कभी डकैतों का गढ़ माना जाता था । दरअसल इस इलाके में एक डकैत के खात्मे के बाद दूसरा डकैत बन जाता था, लेकिन अब इस पाठा क्षेत्र में डकैत नहीं बल्कि आईएएस और पीसीएस का जलवा है। इस छोटे से गांव के हर घर में एक सरकारी नौकर है। हम चित्रकूट जिला मुख्यालय से 20 किलोमीटर दूर रैपुरा गांव कर रहे हैं।यह गांव कभी डकैतों के लिए मशहूर था, लेकिन अब इसकी पहचान आईएएस और आईपीएस हैं। दरअसल गांव के लगभग डेढ़ दर्जन से अधिक लोग इस समय आईएएस, आईपीएस, पीसीएस जैसी विभिन्न सेवाओं में उच्चाधिकारी के पद पर कार्यरत हैं । खास आज यह है कि रैपुरा गांव में हर घर में कोई न कोई सरकारी कर्मचारी-अधिकारी है।हर घर में एक सरकारी कर्मचारी रैपुरा गांव के इंटर कॉलेज रिटायर प्रधानाचार्य महेंद्र प्रसाद सिंह ने बताया कि इस गांव में लगभग डेढ़ दर्जन से ज्यादा लोग आईएएस, पीसीएस हैं। इन सभी की स्‍कूली पढ़ाई गांव में ही हुई है । हालांकि बाहर से उच्‍च शिक्षा हासिल कर अधिकारी बने हैं। साथ ही कहा कि इस गांव में हर एक घर में कोई न कोई सरकारी नौकरी में है। सिंह ने बताया कि वह जब स्कूल के प्रिंसिपल थे, तब स्कूल में बच्चों को दूसरों के बारे में बात कर प्रोत्साहित करते थे। इसका असर बच्‍चों पर सकारात्‍मक हुआ और गांव के युवाओं में सरकारी नौकरी हासिल करने की होड़ सी लग गई। कभी डकैतों के लिए मशहूर यह गांव सरकारी अफसरों के लिए पहचान रखता है। आईएएस और पीसीएस की भरमार महेंद्र प्रसाद सिंह ने बताया कि गांव के अभिजीत सिंह, रोहित सिंह, कुलदीप कुमार और सीपी सिंह (आईएएस), यदुवेंद्र शुक्ल (आईपीएस), तेज स्वरुप, सुरेन्द्र, राजेन्द्र ,प्रकाश कुमार, सुरेश चन्द्र पाण्डेय, प्रह्लाद सिंह और सुरेश गर्ग बतौर पीसीएस कार्यरत हैं। इसके अलावा भी कई युवा अधिकारी बनकर रैपुरा गांव का नाम रौशन कर रहे हैं। साथ ही बताया कि आज भी तमाम युवा सिविल सेवा की परीक्षा की तैयारी के लिए बाहर रहकर पढ़ाई में जुटे हैं । हर साल कोई न कोई छात्र आईएएस या पीसीएस की परीक्षा में सफल जरूर रहता है. पिछली बार भी यह रिकॉर्ड कायम रहा है ।

चार महीने से आजाद होने का इंतजार कर रहे बाड़े में बंद 14 चीते.

Fourteen leopards trapped in a well in Badi have been awaiting freedom for the past four months. स्टीयरिंग कमेटी अब तक चीतों को जंगल छोड़ने नहीं ले पाई निर्णय उदित नारायणभोपाल। मध्यप्रदेश के श्योपुर जिला के कूनो नेशनल पार्क में पिछले चार महीने से बंद चीते आजाद होने का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन इसको लेकर वन अमला गंभीरता नहीं दिखा रहा है। संभावना बन रही है कि इनको अगले महीने 4 दिसंबर को जंगल में छोड़ा जा सकता है। अगले सप्ताह चीता प्रोजेक्ट की स्टीयरिंग कमेटी की बैठक होना प्रस्तावित है। इसमें चीतों को जंगल में छोड़ने को फैसला लिया जा सकता है। बता दें कि लगातार हो रही चीतों की मौत के बाद सभी चीतों को फिर से बाड़े में रखा गया था। दरअसल चार माह से बाड़ों में बंद चीतों को लेकर विशेषज्ञों ने चिंता जताई है। लंबे समय तक चीतों को बाड़े में रखने से उनकी खुले जंगल में शिकार करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। वहीं, बाड़े में बंद रहने से स्ट्रेस भी बढ़ेगा। चीता प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों ने बारिश के बाद अक्टूबर में चीतों को जंगल में छोड़ने की बात कही थी। नवंबर का पूरा माह गुजर गया है, लेकिन चीतों को जंगल में छोड़ने को लेकर फैसला नहीं हो पाया है। अब चीता प्रोजेक्ट की स्टीयरिंग कमेटी के अध्यक्ष राजेश गोपाल का कहना है कि अगले सप्ताह स्टीयरिंग कमेटी में चीतों को जंगल में छोड़ने को लेकर फैसला कर लिया जाएगा। 6 वयस्क चीते और 3 शावक की हो चुकी है मौतकूनो में पिछले साल साउथ अफ्रीका और नामीबिया से 20 चीते लाए गए थे। इनमें से 14 वयस्क चीते ही जीवित बचे हैं। इनमें से 6 चीतों की बीमारी के कारण मौत हो गई थी। इसमें से 3 चीतों की मौत जंगल में रहने के दौरान हो गई थी। इसके बाद बाकी चीतों को जंगल से पकड़कर बाड़ों में रखा गया। इसमें मौत का कारण चीतों को पहनाए रेडियो कॉलर से संक्रमण को भी बताया गया। वहीं, एक मादा चीता ने तीन शावकों को जन्म दिया था। जिसमें से तीन शावकों की मौत हो चुकी है। शिकार क्षमता हो सकती है प्रभावितवाइल्ड लाइफ विशेषज्ञों का कहना है कि चीतों को लंबे समय तक बाड़ों में नहीं रखा जा सकता। उन्होंने लंबे समय तक चीतों को बाड़ों में रखने पर उनकी शिकार क्षमता प्रभावित होने की आशंका जताई है। अधिकारी बोले- चीते अब स्वस्थवाइल्ड लाइफ पीसीसीएफ असीम श्रीवास्तव ने बताया कि सभी चीते बड़े बाड़े में बिल्कुल स्वस्थ हैं। 50 से 150 हेक्टेयर के बाड़े में खुद ही शिकार करके खाते हैं। ऐसे में उनकी शिकार क्षमता प्रभावित होने का कोई सवाल नहीं है। जहां तक चीतों को खुले जंगल में छोड़ने का सवाल है तो यह निर्णय स्टीयरिंग कमेटी को लेना है। उसकी बैठक की तारीख अभी हमें नहीं मिली है।

सरकार पर भड़कीं उमा भारती, पटवारी की हत्या शासन-प्रशासन के लिए कलंक और शर्मनाक है.

Uma Bharti has criticized the government, stating that the murder of a Patwari is a stain and shameful for the administration. पूर्व सीएम ने दोषियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की मांग की Udit Narayan भोपाल। पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने सोशल मीडिया पर लिखा कि शहडोल के ब्यौहारी में खनन माफिया द्वारा अवैध खनन रोकने के कारण एक सरकारी कर्मचारी की हत्या मध्य प्रदेश की सारी व्यवस्था समाज, शासन, प्रशासन सबके लिए कलंक एवं शर्मनाक हैं। पूर्व सीएम ने दोषियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की मांग की हैं। इससे पहले पूर्व सीएम और पीसीसी चीफ कमलनाथ ने भी घटना पर शिवराज सरकार पर निशाना साधा था। पूर्व सीएम ने कहा था कि यह पहला मौका नहीं है जब मध्य प्रदेश में रेत माफिया ने इस तरह से किसी सरकारी व्यक्ति को कुचल कर मार दिया हो। मध्य प्रदेश में शिवराज सरकार के दौरान पनपा भ्रष्टाचार और घोटालों के कारण यह स्थिति बनी हैं। बता दें शहडोल के ब्यौहारी में शनिवार रात रेत माफिया ने पटवारी प्रसन्न सिंह की ट्रैक्टर से कुलचकर हत्या कर दी। प्रसन्न सिंह सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद पटवारी बने थे। वह सोन नदी के घाटों पर रेत माफिया पर कार्रवाई कर रहे थे। शनिवार रात वह अपने तीन साथियों के साथ कार से सोन नदी के किनारे पहुंचे थे। इस बीच रेत का ट्रेक्टर आता देख उन्होंने रूकने का इशारा किया, लेकिन ट्रैक्टर चालक ने उन पर ही ट्रैक्टर चढ़ा दिया। प्रसन्न सिंह के सिर से पहिया गुजर जाने से उनकी मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस ने ट्रैक्टर चालक और उसके मालिक को गिरफ्तार कर लिया।

भितरघातियों पर फूटेगा हार का ठीकरा,3 के बाद गिरेगी गाज.

The counterattack against the infiltrators will result in the defeat; after three, the intensity will increase. भितरघातियों की भाजपा-कांग्रेस तैयार की कुंडली, प्रत्याशियों की शिकायत को आधार मानकर होगी कार्रवाई, दोनों पार्टियों के िलए दाे दर्जन सीटों में खतरनाक साबित होंगे भितरघाती. Udit Narayanभोपाल। विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा- कांग्रेस उन बागियों के खिलाफ कार्रवाई कर चुकी है जो पार्टी से बगावत कर चुनाव लड़ रहे हैं। अब बारी भितरघातियों की है जिनकी वजह से दोनों दलों के दो दर्जन से ज्यादा प्रत्याशी खतरें में हैं। दोनों दलों में प्रत्याशियों से मिली शिकायतों के आधार पर इन भितरघातियों की कुंडली तैयार हो रही हैं। तीन दिसंबर को मतगणना के बाद इनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। मतदान के बाद आई शिकायतों की बाढ़भाजपा-कांग्रेस के प्रत्याशियों ने प्रचार अभियान के दौरान जानते हुए भी उन पार्टी नेताओं की शिकायत नहीं की, जो उनके खिलाफ काम कर रहे थे। ऐसा करने की बजाय उन्हें मनाने की कोशिश हो रही थी, क्योंकि खतरा ज्यादा नुकसान का था लेकिन मतदान समाप्त होने के बाद दोनों दलों के पास ऐसी शिकायतों की बाढ़ आ गई है। शिकायतें प्रत्याशियों द्वारा ही भेजी जा रही हैं। इन शिकायतों की सही संख्या नहीं बताई जा रही है लेकिन दो दर्जन से ज्यादा सीटों की शिकायतें गंभीर हैं। कार्रवाई से पहले पक्ष रखने का मौकाबागी होकर चुनाव लड़ने वाले नेताओं के खिलाफ जैसी कार्रवाई हुई है, भितरघातियों के खिलाफ वैसा नहीं होगा। जिनके खिलाफ शिकायतें आई हैं, उन्हें पार्टी की अनुशासन समिति के पास भेजा जाएगा। इसके बाद नोटिस देकर उन्हें पक्ष रखने का मौका दिया जाएगा। जवाब संतोषजनक न पाए जाने पर ही इनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन भितरघातियों के खिलाफ कार्रवाई तय है जिनकी वजह से प्रत्याशियों को पराजय का सामना करना पड़ेगा। तीन अंचलों से आ रहीं ज्यादा शिकायतेंप्रदेश के तीन अंचलों चंबल-ग्वालियर, बुंदेलखंड और विंध्य से भितरघात करने वालों की सबसे ज्यादा शिकायतें भाजपा और कांग्रेस के पास आ रही हैं। प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री चंद्रिका प्रसाद द्विवेदी का कहना है कि जो शिकायतें आ रही हैं, उन्हें सूचीबद्ध कर रखा जा रहा है। अभी मतगणना की तैयारी चल रही है। प्रत्याशियों, एजेंटों को प्रिशिक्षित किया जा रहा है। मतगणना के बाद इन शिकायतों पर विचार किया जाएगा। भाजपा प्रदेश कार्यालय प्रभारी महामंत्री भगवानदास सबनानी ने बताया कि पार्टी के पास काम न करने वालों की शिकायतें ज्यादा नहीं है। लेकिन जो भी शिकायतें आई हैं। संबंधित से जवाब लेने के बाद कार्रवाई की जाएगी।

कांग्रेस सरकार में मंत्री रहे पीसी शर्मा अपने बयान से एक बार फिर चर्चा में.

Former minister P.C. Sharma, who served in the Congress government, is once again in discussion due to his statement. बोले- प्रचार के दौरान कमल पटेल के क्षेत्र की जनता कहती थी भाजपा से सब कुछ मिला, लेकिन वोट कांग्रेस को देंगेदावा – कांग्रेस 114 नहीं 174 सीट जीत रही, भाजपा वाले बहुमत से सरकार बनाने की बात नहीं कर रहे. Udit Narayanभोपाल। कांग्रेस सरकार में मंत्री रहे पीसी शर्मा अपने बयान से एक बार फिर चर्चा में हैं। उन्होंने कहा कि वो मंत्री कमल पटेल के क्षेत्र में गए थे, वहां उन्होंने जब जनता से पूछा बीजेपी में कुछ मिला था क्या, तो जनता बोली मिला सब कुछ, लेकिन वोट कांग्रेस को ही करेंगे। बता दें, शर्मा अपने बयानों से हमेशा चर्चा में बने रहते हैं। इसके पहले भी उन्होंने हाल ही बयान दिया था कि भारतीय टीम ईडी के छापे के डर से क्रिकेट वर्ल्ड कप में हार गई थी। शर्मा ने ये दावा किया कि कांग्रेस 114 नहीं 174 सीट जीत रही है। कांग्रेस की लहर चल रही है। उन्होंने कहा कि बीजेपी बहुमत से सरकार बनाने की बात कहती थी पर अब नहीं कह रही है। शर्मा ने कहा कि बीजेपी के सर्वे भी बता रहे हैं कि कांग्रेस की सरकार बन रही है। बीजेपी जान गई है कि अब कांग्रेस की सरकार बन रही है। कांग्रेस के प्रशिक्षण में कमलनाथ के वर्चुअली संबोधन पर पीसी शर्मा ने कहा कि ये वक्त बदलाव का है। ईवीएम में गड़बड़ी के सवाल पर पीसी शर्मा ने कहा कि जब तक बीजेपी की सरकार है। ये गड़बड़ी करने के लिए कुछ भी कर सकते हैं। भाजपा के कई मंत्री हारेंगे – पीसी- विधानसभा चुनाव के परिणाम पर पीसी शर्मा ने कहा कि भाजपा कई मंत्री इस बार हारेंगे। वहीं बुधनी विधानसभा को लेकर उन्होंने कहा कि हनुमान जी की लीला है और हनुमान जी कुछ भी कर सकते हैं। शर्मा खुद भोपाल की दक्षिण पश्चिम विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में हैं। भाजपा ने उनके सामने भगवानदास सबनानी को उतारा है। पिछले चुनाव में शर्मा ने इसी सीट से भाजपा के पूर्व मंत्री उमा शंकर गुप्ता को पटकनी दी थी।

अपने दिग्गजों की राजनैतिक विरासत संभालने निकले ‘वंशज’ डेंजर जोन में फंसे.

The ‘descendants’ set out to uphold the political legacy of their stalwarts find themselves trapped in the danger zone. मैदान में अर्जुन, दिग्विजय, कैलाश, पटवा और सकलेचा के बेटे, बड़ा कारण – कांग्रेस-भाजपा ही नहीं अन्य राजनीतिक दलों व निर्दलीय लड़ा चुनाव, राजनीतिक भविष्य ईवीएम में बंद, 3 को खुलेगा तो ही चमकेगी विधायकी की तरदीर उदित नारायणभोपाल। इस बार मप्र के चुनाव में सबसे ज्यादा दिग्गज नेताओं के वारिस चुनावी मैदान में उतरे हैं। इनमें से ज्यादातर का राजनैतिक भविष्य दाव पर लगा है, हालांकि कुछ के लिए राह आसान भी दिखाई दे रही है। जब 3 दिसंबर को ईवीएम परिणाम उगलेगी तो जीत और हार के दावे की हकीकत सबके सामने आ जाएगी। विधानसभा चुनाव में कई राजनेताओं के वंशज व परिवार के सदस्य मैदान में उतरे हैं जिनका राजनीतिक भविष्य ईवीएम में बंद है। इनमें कांग्रेस सरकारों के पूर्व मुख्यमंत्रियों अर्जुनसिंह व दिग्विजय सिंह, गैर कांग्रेस सरकारों के पूर्व मुख्यमंत्रियों कैलाश जोशी, सुंदरलाल पटवा, वीरेंद्र सकलेचा, बाबूलाल गौर, उमा भारती और गोविंदनारायण सिंह के वंशज प्रमुख हैं। इनके अलावा प्रदेश सरकारों के पूर्व मंत्री, सक्रिय राजनेताओं के वंशज भी चुनाव मैदान में उतरे हैं जिन्होंने कांग्रेस-भाजपा ही नहीं अन्य राजनीतिक दलों व निर्दलीय चुनाव लड़ा है। पूर्व मुख्यमंत्रियों में अर्जुन सिंह के पुत्र अजय सिंह चुरहट और साले राजेंद्र सिंह अमरपाटन से हैं जिनकी स्थिति पिछले चुनाव से बहुत अच्छी बताई जा रही है। दिग्विजय सिंह के पुत्र मंत्री जयवर्द्धन सिंह और भाई विधायक लक्ष्मण सिंह की स्थिति पिछली बार से कमजोर है लेकिन दोनों के किसी तरह संकट से बाहर निकल जाने की परिस्थितियां दिखाई दे रही हैं। कैलाश जोशी के पुत्र दीपक के चुनाव के ठीक पहले भाजपा से मोहभंग होने तथा कांग्रेस में पहुंचने से कुछ नुकसान है तो फायदा भी मिलेगा। सुंदरलाल पटवा के भतीजे विधायक सुरेंद्र, वीरेंद्र सकलेचा के पुत्र मंत्री ओमप्रकाश और बाबूलाल गौर की बहू विधायक कृष्णा गौर की स्थिति बेहतर है लेकिन भारती के भतीजे मंत्री राहूल लोधी की सीट पर चुनौतीपूर्ण मुकाबला है। अन्य वंशजों में कुछ बेहतर तो कुछ मुकाबले में फंसेराजनेताओं के अन्य वंशजों में मुकाबले में फंसे प्रत्याशियों में नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह के भांजे कांग्रेस प्रत्याशी राहुल भदौरिया, सिंधिया परिवार की निकटतम रिश्तेदार भाजपा प्रत्याशी माया सिंह, विधानसभा अध्?क्ष गिरीश गौतम के भतीजे कांग्रेस प्रत्याशी पद्मेश, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष श्रीनिवास तिवारी के पोते भाजपा प्रत्याशी सिद्धार्थ, इंदौर की सांवेर सीट पर पूर्व सांसद प्रेमचंद गुड्डू की बेटी कांग्रेस की रीना बौरासी के भविष्य का रास्ता 3 दिसंबर को खुलेगा। पूर्व मंत्री चिटनिस, डिप्टी सीएम रहे यादव के सामने चुनौती देपालपुर में निर्भयसिंह पटेल के पुत्र भाजपा प्रत्याशी मनोज पटेल, रतलाम की जावरा सीट पर पूर्व सांसद लक्ष्मीनाराण पांडेय के पुत्र भाजपा प्रत्याशी राजेंद्र पांडेय, बुरहानपुर की नेपानगर सीट पर पूर्व विधायक राजेंद्र दादू की बेटी भाजपा प्रत्याशी मंजू दादू, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष बृजमोहन मिश्र की पुत्री पूर्व मंत्री व भाजपा प्रत्याशी अर्चना चिटनीस, पूर्व विधायक चिड़ाभाई डाबर के बेटे विधायक कांग्रेस प्रत्याशी केदार डाबर, पूर्व उप मुख्यमंत्री सुभाष यादव के पुत्र पूर्व मंत्री सचिन यादव, पूर्व विधायक सीताराम साधौ की पुत्री व पूर्व मंत्री कांग्रेस प्रत्याशी डॉ. विजयलक्ष्मी साधौ हैं। केंद्रीय मंत्री भूरिया बेटे के लिए परेशानपूर्व केंद्रीय मंत्री कांतिलाल भूरिया के पुत्र डॉ. विक्रांत भूरिया, पूर्व विधायक प्रेम सिंह दत्तीगांव के पुत्र मंत्री भाजपा प्रत्याशी राजवर्धन सिंह, पूर्व मंत्री इंद्रजीत कुमार के पुत्र पूर्व मंत्री कांग्रेस प्रत्याशी कमलेश्वर पटेल, पूर्व मंत्री बृजेंद्र सिंह राठौर के पुत्र कांग्रेस प्रत्याशी नितेंद्र सिंह, पूर्व सांसद सत्यव्रत चतुवेर्दी के भाई कांग्रेस प्रत्याशी विधायक आलोक चतुवेर्दी, पूर्व विधायक चौधरी दिलीप सिंह के पुत्र पूर्व मंत्री कांग्रेस प्रत्याशी चौधरी राकेश सिंह चतुवेर्दी, पूर्व मंत्री सत्येंद्र पाठक के पुत्र भाजपा प्रत्याशी संजय पाठक, पूर्व विधायक प्रभात पांडेय के पुत्र भाजपा प्रत्याशी प्रणय पूर्व सांसद कंकर मुंजारे की पत्नी कांग्रेस प्रत्याशी अनुभा मुंजारे, पूर्व मंत्री लिखीराम कांवरे की पुत्री पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष कांग्रेस प्रत्याशी हिना कांवरे भी शामिल है। अकील की बेटे के लिए ज्यादा चिंंतापूर्व विधायक मनमोहन शाह बट्टी की पुत्री भाजपा प्रत्याशी मोनिका, पूर्व मंत्री आरिफ अकील के बेटे कांग्रेस प्रत्याशी आतिफ अकील, पूर्व राज्यसभा सदस्य कैलाश नारायण सारंग के पुत्र मंत्री विश्वास सारंग, पूर्व मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा के भाई विधायक भाजपा प्रत्याशी उमाकांत, पूर्व विधायक केदार सिंह चौहान के पुत्र भाजपा प्रत्याशी महेंद्र सिंह चौहान, पूर्व विधायक गोविंद शर्मा के पुत्र विधायक भाजपा प्रत्याशी आशीष शर्मा, पूर्व मंत्री हजारीलाल रघुवंशी के पुत्र ओमप्रकाश रघुवंशी के नाम प्रमुख हैं। इन नेताओं की सीट में अच्छे संकेतवहीं जिन नेताओं के वंशजों के लिए चुनाव में मुकाबला आसान दिखाई दे रहा है उनमें पूर्व नेता प्रतिपक्ष जमुनादेवी के भतीजे व पूर्व मंत्री कांग्रेस प्रत्याशी उमंग सिंगार, पूर्व मंत्री सुलोचना रावत के पुत्र भाजपा प्रत्याशी विशाल रावत, पूर्व मंत्री तुकोजीराव पवार की पत्नी विधायक गायत्रीराजे, पूर्व सांसद सुखराम कुशवाह के पुत्र विधायक सिद्धार्थ कुशवाह, पूर्व नेता प्रतिपक्ष सत्यदेव कटारे के पुत्र कांग्रेस प्रत्याशी हेमंत कटारे, नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह की समधन पूर्व विधायक चंदा गौर, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष ईश्वरदास रोहाणी के पुत्र अशोक, पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह के भतीजे कांग्रेस प्रत्याशी पूर्व मंत्री प्रियव्रत सिंह शामिल हैं।

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के अंदर प्रबंधन का जीपीएस बघीरा एप्प बना खिलौना.

The GPS Bagheera app has become a tool for management within the Bandhavgarh Tiger Reserve. भारत सरकार के कई लाखो की राशियों से खरीदा गया घटिया मोबाईल जीपीएस, प्रतिबंधित संरक्षित क्षेत्र में नियम विरुद्ध तरीके से प्रवेश वाहनों पर वाहन चालकों पर व गाइडो पर जीपीएस बघीरा एप्प लोकेशन अनुशार प्रबंधन कार्यवाही करने में हों रहा है नाकाम.बांधवगढ़ जंगल सफ़ारी में निर्धारित गति के नियमों की उड़ रही धज्जिया पर्यटको हेतु प्रतिबंधित संरक्षित क्षेत्र में भी प्रवेश कर रही है खुले आम पर्यटक वाहन फुल डे सफारी वाहन चालक व गाइड पर्यटक मिलकर वन्य जीव के रहवासी स्थल में पैदा करते हैं खलल. विश्व विख्यात पर्यटक स्थल बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व अपनी छवि का मोहताज नही है किंतु कुछ वाहन चालक गाइड वह पर्यटक अपने निजीगत लाभ प्राप्त करने के लिए विश्व विख्यात पर्यटक स्थल बांधवगढ़ की छवि धूमिल करने में पीछे नहीं है उपरोक्त मामला जब प्रकाश में आया की स्थानीय कुछ वाहन चालक व गाइडों का कहना है की प्रबंधन द्वारा दिए जा रहे गाइड च्वाइस सुविधा जिसका आदेश किसी भी राज्य पत्र व कोई ऐसी टाइगर रिजर्व की पॉलिसी में नहीं है उपरोक्त मामला पूर्व के क्षेत्र संचालक व प्रबंधन की जानकारी में लाई गई थी जिस पर क्षेत्र संचालक द्वारा मनपसंद गाइड को ले जाने पर रोक भी लगाया गया था किंतु कुछ ऐसे फोटो ग्राफर्स है जो नार्मल सफारी के वापस पार्क से आने के बाद करप्शन के रूप में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में बाघों के पास काफी नजदीक लेकर ले जाकर फोटोग्राफी करना चाहते हैं व साथ में रोड में अथवा रोड के पास में सोए हुए बाघों को जगाने का प्रयास कर फोटो ग्राफी करते हैं उपरोक्त कार्य में हर गाइड सम्मिलित होने से मना कर देता है तो फीर पर्यटक ऐशे कार्य वाले गाइड वाहन चालक को तलाशता है और उपरोक् कार्यो को अंजाम देने के लिए ऊपर के रसूख दारो से पर्यटक द्वारा दवाब वनवाया गया जिसके कारण बड़े ऐसे फोटोग्राफरों के व् रसूखदार के दबाव में आकर प्रबंधन ने यह कहते हुए की उपरोक्त मामला राजपत्र या एल ए सी में पारित करवाया जाएगा तब तक के लिए वैकल्पिक गाइड व्यवस्था चालू किया जाए किन्तु आज दिनाक तक कोई ऐशा क़ानून पारित नही किया गया जिसका खुलेआम दुरुपयोग देखने को मिल रहा है औए यह भी देखा गया की कुछ वाहन चालक व गाइड चंद पैसों के लिए सभी नियम कानून को रौंदते हुए वन्य जीव व बाघ के राहवास में खलल पैदा करते है जिस पर वन्य प्राणियों के जीवन यापन पर असर पड़ रहा है जिस पर राष्ट्रीय बाघ प्राधिकरण विभाग ने भारत सरकार राजपत्र में नियम पारित करते हुए 20 की स्पीड नियंत्रण व् वाहन से से वाहन की दूरी 50 मी किसी भी जानवर के पास 15 से 20 मिनट से अधिक न रुकने का और किसी भी वन्य प्राणी से वाहन की दूरी 20 मी पर वाहन रोकने का निर्देश जारी किया है और बाघ के मेटिंग पीरियड के दौरान व शिकार पर खाने के दौरान पूर्णतः प्रतिबंध हुआ है लेकिन बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में देखा गया कि सबसे अधिक वाहन तेज गति में उपरोक्त स्थान पर ही पहुंचाते हैं और उपरोक्त स्थान पर ही काफी देरी तक काफी नजदीक पर खड़े रहते हैं और यह सब नजारा प्रबंधन की आंखों के सामने ही होता होता है निर्धारित गति के नियमों की उड़ रही धज्जियाजहा बाघों के गढ़ की सफारी में लगे वाहन जंगलों के अंदर तय गति सीमा की धज्जियां उड़ा रहे हैं, लेकिन प्रबन्धन उदासीन रवैया अपनाए हुए हैं मध्य प्रदेश। बाघों के गढ़ की सफारी में लगे वाहन जंगलों के अंदर तय गति सीमा की धज्जियां उड़ा रहे हैं जिस पर की राज्य सरकार व भारत सरकार द्वारा पार्क में चल रहे पर्यटक वाहनों में स्पीड गति नियंत्रण हेतु जीपीएस बगीरा एप्प हेतु अभी हाल में ही कई लाख रु का बजट संचालन हेतु दिया है किंतु प्रबंधन द्वारा उपरोक्त राशि का वारा न्यारा कर दिया गया ,और प्रबन्धन उदासीन रवैया अपनाए हुए हैं। बाघ क्षेत्रों में सफारी ने न सिर्फ तय नियम और कायदों की धज्जियां उड़ाने में जुटे है, बल्कि सरकार के राजपत्र की अवमानना भी कर रहे हैं, लेकिन बाघ सहित अन्य वन्य प्राणियों के सरोकारता का दम भरने वाला बांधवगढ़ प्रबन्धन चिर निंद्रा में लीन है। बाघ सफारी के लिए सफारी हेतु जिन जिप्सियों का उपयोग किया जाता है, उन जिप्सियों की गति सीमा एनटीसी निर्धारित की गई है, जिसमें अचानक वन्यप्राणियों या बाघ के आने पर वाहन नियंत्रित हो सके, तो वहीं बाघों के फ़ोटोग्राफी और विडियोग्राफी के लिए भी दूरियां तय की गई हैं फिर भी पार प्रबंधक के आंखों के सामने सभी नियम कानूनों को जिप्सी संचालको व गाइडों द्वारा रौंदते हुए फोटोग्राफी बाघों के पास वाहन लगा कर शोरगुल कराते हुए वन्य जीव के विचरण क्षेत्र में खलल पैदा किया जा रहा है। पहले हो चुकी है घटनाबावजूद इसके नियम बीटीआर में दम तोड़ रहे हैं, खबर है कि इन सबकी जानकारी बीटीआर फील्ड डायरेक्टर व प्रबंधन के अमला को भलीभांति है, लेकिन उनके द्वारा कोई एक्शन नहीं लिया जा रहा है। विदित हो कि पूर्व में फोटोग्राफी व मोबाइल फोन के फेर में एक पर्यटक वाहन तेज गति में अपना नियंत्रण खो दिया था, जिसमें कई पर्यटक घायल हो गए थे। बावजूद इसके पार्क प्रबन्धन नियमों का पालन कराने और न ही सफारी वाहन संचालकों द्वारा नियमों का पालन कराने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं, बल्कि उदासीन रवैया घटना की पुनरावृत्ति के ताक में बैठा है। फोटोग्राफी पर लगा प्रतिबंधपार्क क्षेत्र में हुई दुर्घटनाओं को देखते हुए 29 मई 2018 के राजपत्र में पर्यटक भ्रमण के दौरान वाहन चालकों के फोटोग्राफी पर प्रतिबंध लगा दिया गया, किंतु कुछ वाहन चालक सरेआम राजपत्र की धज्जियां उड़ाते हुए खुलेआम फोटोग्राफी कर रहे हैं और तो और वन्यप्राणियों के अधिकतम पास वाहनों को सटाकर फोटोग्राफी करते और कराते हैं, जो भारत राजपत्र व एनटीसीए के नियमों के विपरीत है। पार्क प्रबंधन ने बंद की आंखेंबांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में सफ़ारी के दौरान पर्यटक वाहनों के शोरगुल के दबाव में आकर संरक्षित क्षेत्र के बाघ अपना क्षेत्र छोड़ बफर क्षेत्रों में पलायन कर जाते हैं, जिसके बाद उनकी … Read more

किसानों के लिए महत्वपूर्ण खबर, अब इस महीने में आएगी PM Kisan की 16वीं किस्त! खाते में आएंगे फिर 2-2 हजार, जानें EKYC पर ताजा अपडेट.

Important news for farmers: The 16th installment of PM Kisan will be credited this month! Another 2,000 rupees will be deposited in the accounts. Get the latest update on EKYC. उदित नारायणप्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना केन्द्र सरकार की किसानों के लिए चलाई जा रही कई योजनाओं में से एक बड़ी योजना है। इस योजना के तहत किसानों को सालाना 6,000 रुपये दिए जाते है। यह राशि हर 4 माह में 3 किस्तों में 2,000-2000 रुपये करके DBT के माध्यम से दी जाती है।अबतक योजना की 15वीं किस्त जारी हो चुकी है और अब 16वीं किस्त जारी की जानी है। कब आएगी पीएम किसान योजना की 16वीं किस्तपीएम किसान योजना के नियमानुसार, पहली किस्त अप्रैल-जुलाई के बीच , दूसरी किस्त अगस्त से नवंबर के बीच और तीसरी किस्त दिसंबर से मार्च के बीच जारी की जाती है, ऐसे में संभावना है कि फरवरी से मार्च के बीच कभी भी 16वीं किस्त जारी की जा सकती है। हालांकि अगली किस्त जारी करने की कोई निश्चित तिथि अभी सामने नहीं आई है।ध्यान रहे अगली किस्त का लाभ केवल उन्हीं किसानों को मिलेगा जिन्होंने eKYC, भू सत्यापन और आधार लिंक की प्रक्रिया को पूरा कर लिया है और जिन्होंने ये तीनों काम नहीं किए है, उन्हें लाभ से वंचित किया जा सकता है।

पानी की समस्या से जूझते ग्रामीण जिम्मेदार नहीं दे रहे ध्यान.

Rural areas are not paying adequate attention to the issue of water scarcity. Special Correspondent. कटनी /उमरियापान। जिम्मेदारों एवं लोक स्वास्थ्य यात्रीकी विभाग की उदासीनता के चलते ग्रामीण पीड़ा झेल रहे हैं ढीमरखेड़ा तहसील क्षेत्र के घुघरा ग्राम पंचायत के टोपी गांव में हैंडपंपों के बंद होने से ग्रामीण परेशान हैं। दर्जनों बाद लिखित, मौखिक शिकायत करने के बाद भी हैंडपंप नहीं सुधरे है। बीते कई वर्षों से टोपी गांव में रहने वाले लोग पीने के पानी के लिए परेशान हो रहे हैं।दरअसल, यहां तीन -चार हैंडपंप है वह भी बंद हैं। इससे दिक्कत यह हो रही है लोगों को पीने का पानी नहीं मिल रहा है। यहां रहने वाले अरविंद पटेल, अभिषेक पटेल, सुरेंद्र यादव,सुमित पटेल समेत अन्य ने बताया कि एक हैंडपंप स्कूल के पास लगा है। जिसमें तनिक पानी निकलता है। दूसरा हैंडपंप वर्षों से बंद है जबकि तीसरे हैंडपंप से तो सामाग्री ही गायब हो गई है। हैंडपंप पोल के सहारे खड़ा है। समर्सियल भी नहीं पड़ा। सभी हैंडपंप शोपीस बनकर रह गए हैं।गांव के लोग खेतों में लगे बोरबोल से पानी लाते हैं।पानी को लेकर सबसे ज्यादा समस्या महिलाओं को होती है। गांव की महिलाओं ने बताया कि शिकायत तो अनेकों बार किया लेकिन फायदा नहीं मिला। यूं तो गांव में तीन से चार हैंडपंप हैं, लेकिन इनमें से तीन हैंडपंप खराब हैं। उन्होंने बताया कि एक हैंड पंप तो पिछले लंबे समय से खुला ही पड़ा है, लेकिन अभी तक ठीक नही हो सका है। जिसके चलते ग्रामीणों को दूर पानी लाकर अपनी प्यास बुझानी पड़ रही है। ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत के जिम्मेदारों सहित जनप्रतिनिधियों पर लापरवाही आरोप लगा रहे है। ग्रामीणों ने बताया कि गांव के लोग चंदा इकट्ठा करके पानी का पाइप खरीदकर लाये हैं। खेतों में बने बोरबोल से गांव तक पाइप बिछाया है। पाइप से गांव तक पानी पहुँचता है जिससे लोग पानी भरते हैं। अब देखना यह होगा की समस्या का निदान कब तक किया जाता है

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