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सीएम पद पाने दावेदार टस से मस नहीं, एमपी-राजस्थान और छत्तीसगढ़ में फंसा पेंच.

The aspirant claiming the Chief Minister position is not making headway despite efforts; caught in a deadlock between Tussle in Madhya Pradesh, Rajasthan, and Chhattisgarh. भाजपा को सीएम चुनने में जब भी 5 दिन से ज्यादा वक्त लगा, हो गया यह खेला, भाजपा को सीएम चुनने में आ रहा पसीना उदित नारायणभोपाल। विधानसभा चुनाव परिणाम 2023 के 5 दिन बीत चुके हैं, लेकिन भारतीय जनता पार्टी मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री नहीं चुन पाई है। बड़े से लेकर छोटे नेता तक एक ही बात कह रहे हैं- सबकुछ हाईकमान तय करेंगे। हाईकमान मतलब नरेंद्र मोदी, अमित शाह और जेपी नड्डा। हालांकि, मुख्यमंत्री चुनने में हो रही देरी के गणित ने बड़े नेताओं की धड़कनें बढ़ा दी है। बीजेपी ने जब भी मुख्यमंत्री चुनने में 5 दिन से ज्यादा का वक्त लगाया, तब पार्टी ने पुराने के बदले नए चेहरे को तरजीह दी।मसलन, 2017 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री चुनने में बीजेपी ने 9 दिन का समय लगाया था। उस वक्त राजनाथ सिंह, मनोज सिन्हा जैसे बड़े नेता मुख्यमंत्री की रेस में शामिल थे, लेकिन बीजेपी ने नए चेहरे महंथ योगी आदित्यनाथ को सीएम की कुर्सी सौंपी।उसी साल उत्तराखंड के चुनाव में भी बीजेपी को जीत मिली थी। पार्टी को यहां भी मुख्यमंत्री चुनने में 8 दिन का वक्त लग गया था। पार्टी ने त्रिवेंद्र सिंह रावत को मुख्यमंत्री बनाया था, जबकि बीएस खंडूरी, रमेश पोखरियाल निशंक जैसे पुराने नेता यहां मजबूत दावेदार थे।इसी तरह सीएम सिलेक्शन के लिए हिमाचल (2017) और महाराष्ट्र (2014) में पार्टी को 7 दिन का वक्त लगा था। दोनों जगहों पर बीजेपी ने पुराने चेहरे को नकार कर नए चेहरे को कमान सौंपी थी।हिमाचल में धूमल और महाराष्ट्र में नितिन गडकरी मुख्यमंत्री पद के बड़े दावेदार थे। हरियाणा (2014) में भी बीजेपी को मुख्यमंत्री चुनने में 6 दिन का वक्त लगा था। यहां पार्टी ने नए चेहरे मनोहर लाल खट्टर को मुख्यमंत्री बनाया था। 2013 में लगे थे 3 दिन का वक्त2013 में भी भारतीय जनता पार्टी को मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में बंपर जीत मिली थी। उस समय राजनाथ सिंह बीजेपी के अध्यक्ष थे। 2013 में पार्टी को मुख्यमंत्री चुनने में 3 दिन का वक्त लगा था। 8 दिसंबर को चुनावी नतीजे आए थे और 11 दिसंबर को पार्टी ने मध्य प्रदेश में शिवराज और छत्तीसगढ़ में रमन सिंह को कमान देने की घोषणा कर दी थी। 12 दिसंबर को वसुंधरा राजे के नाम का ऐलान किया गया था। 2013 में चुनाव परिणाम आते ही बीजेपी ने इन राज्यों के लिए पर्यवेक्षक नियुक्त कर दिया था। उस वक्त मध्य प्रदेश के लिए सुषमा स्वराज, राजीव प्रताप रूडी और अनंत कुमार को पर्यवेक्षक बनाकर भेजा गया था। वेंकैया नायडू, जेपी नड्डा और धर्मेंद्र प्रधान छत्तीसगढ़ के पर्यवेक्षक थे, जबकि अरुण जेटली, अमित शाह और कप्तान सोलंकी बतौर पर्यवेक्षक बनकर राजस्थान गए थे। 5 दिन से कम का वक्त लगा यानी चेहरा रिपीट2019 में हरियाणा चुनाव के रिजल्ट के 3 दिन बाद ही बीजेपी ने मुख्यमंत्री नाम की घोषणा कर दी। पार्टी ने मनोहर लाल खट्टर को ही दूसरी बार राज्य की बागडोर संभालने की जिम्मेदारी सौंपी।गुजरात में भी 8 दिसंबर 2022 को चुनाव परिणाम आया, जिसमें बीजेपी को एकतरफा जीत मिली। पार्टी ने 3 दिन के भीतर ही मुख्यमंत्री का नाम ऐलान कर दिया। भूपेंद्र पटेल को ही पार्टी ने सीएम की जिम्मेदारी सौंपी। 2019 में महाराष्ट्र चुनाव परिणाम के 5 दिन बाद ही देवेंद्र फडणवीस को बीजेपी ने विधायक दल का नेता चुन लिया था। हालांकि, शिवसेना की वजह से फडणवीस उस वक्त सरकार नहीं बना पाए थे। शिवसेना ने पावर शेयरिंग के मुद्दे पर बीजेपी से समर्थन वापस ले लिया था। सीएम हर बार रिपीट, एक अपवाद शिवराज के लिए खतरा2014 के बाद सत्ता में रहते हुए बीजेपी ने जिस भी राज्य में चुनाव जीती है, वहां के मुख्यमंत्री नहीं बदला है। हालांकि, 2021 का असम चुनाव इसका अपवाद है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि यही डर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को सता रहा है। 2017 में गुजरात विधानसभा चुनाव में जीत के बाद विजय रुपाणी को ही फिर से मुख्यमंत्री बनाया गया था। 2019 में हरियाणा में भी यही हुआा। जीत के बाद पार्टी ने खट्टर पर ही भरोसा जताया। 2022 में यूपी, गोवा और उत्तराखंड में भी जीत के बाद बीजेपी ने मुख्यमंत्री नहीं बदला। उत्तराखंड में तो मुख्यमंत्री धामी विधानसभा का चुनाव भी हार गए थे। इसी तरह अरुणाचल में जीत के बाद पेमा खांडू और त्रिपुरा में जीत के बाद माणिक साहा की सत्ता बरकरार रही। दोनों चुनाव से पहले भी राज्य के मुख्यमंत्री थे। मुख्यमंत्री को लेकर क्यों फंसा है पेंच?पहला- राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में पिछले 20 साल में पहली बार मुख्यमंत्री चेहरे के बिना बीजेपी चुनाव मैदान में उतरी थी। तीनों ही राज्य में बीजेपी का यह प्लान काम कर गया है। इसी वजह से मुख्यमंत्री तय करने में पार्टी को मशक्कत करनी पड़ रही है।दूसरा- पिछले 2 दशक राजस्थान में वसुंधरा राजे, छत्तीसगढ़ में रमन सिंह और मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान के इर्द-गिर्द बीजेपी की राजनीति घूम रही है। कहा जा रहा है कि हाईकमान अब इसे खत्म करना चाहती है।तीसरा- राजस्थान में वसुंधरा राजे और मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान काफी मजबूत स्थिति में हैं। लोकसभा चुनाव के नजदीक होने की वजह से बीजेपी कोई भी फैसला जल्दबाजी में नहीं लेना चाहती है। कहां कितने दावेदार, एक नजर इस पर भी बीजेपी कैसे चुनती है राज्यों में मुख्यमंत्री?भारतीय जनता पार्टी में भी मुख्यमंत्री चयन की प्रक्रिया कांग्रेस की तरह ही है। चुनाव में जीत के बाद दिल्ली से पर्यवेक्षक भेजे जाते हैं। पर्यवेक्षक सभी विधायकों से राय लेते हैं और आलाकमान को बताते हैं। इसके बाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अपना फैसला सुनाते हैं, जो विधायक दल की मीटिंग में बताया जाता है। कई बार पेंच फंसने पर सभी बड़े नेताओं को दिल्ली बुलाया जाता है और उसके बाद फैसला सुनाया जाता है। इस बार बीजेपी ने राजस्थान के लिए राजनाथ सिंह, सरोज पांडे और विनोद तावड़े, मध्य प्रदेश के लिए मनोहर लाल खट्टर, के लक्ष्मण और आशा लकड़ा को पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री चयन के लिए बीजेपी ने अर्जुन … Read more

फर्जी दस्तावेज लगाकर 16 साल से नौकरी कर रहे 8 शिक्षक, 15 साल चली जांच.

Eight teachers have been working for 16 years using fake documents; investigation has been ongoing for the past 15 years. मध्य प्रदेश के शिक्षा विभाग में मचा हड़कंप, पुलिस ने दर्ज की एफआईआर Special Correspondent, Sahara Samachaar, Gwalior भोपाल। ग्वालियर में शिक्षक भर्ती परीक्षा के जरिये टीचर के रूप सोलह साल से नौकरी कर रहे, आठ शिक्षकों की जांच मे बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में पाया गया कि इन टीचरों ने शिक्षक भर्ती परीक्षा के समय फर्जी मार्कशीट और फर्जी दस्तावेज लगाए थे। पुलिस ने ऐसे आठ शिक्षकों के खिलाफ कूटरचित दस्तावेज बनाने और धोखाधड़ी की एफआईआर दर्ज कर ली है। इसकी खबर फैलने के बाद न केवल ग्वालियर बल्कि पूरे मध्यप्रदेश के शिक्षा विभाग में हड़कम्प मच गया है। 2007-08 में बने थे शिक्षक2007-08 में मध्य प्रदेश सरकार ने शिक्षक भर्ती परीक्षा आयोजित की थी। इस परीक्षा को पास करने के बाद कुछ शिक्षकों पर फर्जी दस्तावेज लगाकर नौकरी पाने का आरोप लगा था। ग्वालियर के भितरवार इलाके में फरियादी गौरी शंकर राजपूत ने इसकी शिकायत थाने में की थी। जिसमें बताया गया था कि जनपद पंचायत भितरवार में पदस्थ शिक्षा कर्मियों ने फर्जी और कूटरचित अंकसूचियों की संरचना करके शासकीय सेवा प्राप्त कर अनाधिकृत रूप से शासकीय सेवा का लाभ उठाया है। उन्होंने इस मामले में धर्मेंद्र सिंह यादव, भगवत शर्मा, कृष्णा ,पान सिंह यादव, अनिल पाठक, बृजेंद्र सिंह रावत, अरविंद सिंह राणा, सतीश कुमार रजक, केशव सिंह पर फर्जी दस्तावेज लगाकर शासकीय नौकरी पाने का आरोप लगाया था। 2008 से चल रही थी जांच, 15 साल बाद हुई एफआईआरएडिशनल एसपी ग्वालियर निरंजन शर्मा ने बताया कि इस मामले पर विभिन्न बिन्दुओं पर बारीकी से जांच पड़ताल और साक्ष्य संकलन किया गया और फरियादी द्वारा प्रस्तुत आरोप के दस्तावेज सही पाए जाने पर आठ आरोपियों के खिलाफ थाना भितरवार में धोखाधड़ी और दस्तावेजों की कूटरचना करके शासकीय नौकरी पाने की धारा में एफआईआर दर्ज कर ली गई है। जांच का दायरा बढ़ने पर बढ़ सकती है आरोपियों की संख्याअतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि अभी जांच जारी है और इस मामले में आरोपियों की संख्या बढ़ सकती है। इस एफआईआर की सूचना से पूरे प्रदेश के शिक्षा विभाग में भूचाल मच गया है। क्योंकि जांच का दायरा बढ़ा तो प्रदेश भर में ऐसे सैकड़ों मामले उजागर हो सकते हैं।

मध्य प्रदेश में फिर डराने लगा कोरोना, इंदौर में मरीज मिलने के बाद मचा हड़कंप

COVID in Madhya Pradesh, as a patient in Indore tests positive. Doctors advise people to stay vigilant. इंदौर। मध्य प्रदेश में एक बार फिर कोरोना ने दस्तक दे दी है। इंदौर में एक मरीज मिलने के बाद डॉक्टरों ने लोगों से सतर्क रहने की सलाह दी है। एक बुजुर्ग की कोविड रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। वह सर्दी और बुखार से पीड़ित था। निजी लैब में कोविड जांच कराई गई। रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद मरीज को होम आईसोलेशन में रखा गया है। दो साल बाद भी कोविड का भय खत्म नहीं हुआ है। 70 वर्षीय बुजुर्ग की सर्दी खांसी के जांच के बाद कोविड पॉजिविट मिला है। इसके बाद मरीज का होम आईसोलेशन कर उपचार किया गया। मरीज की हालत ठीक है।कोविड नोडल अधिकारी डॉ अमित मालाकार ने बताया कि हरदा निवासी 70 वर्षीय बुजुर्ग सर्दी खांसी और बुखार से पीड़ित था। निजी लैब में कोविड जांच कराने पर रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। जिसके बाद मरीज को आईसोलेशन में रखकर उसका उपचार किया गया। फिलहाल मरीज की हालत ठीक है। मामला 24 नवंबर का है। रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर परिवार के सभी सदस्यों की कोविड जांच की गई, लेकिन सभी की रिपोर्ट नेगेटिव है। बता दे कि मामले के 16 दिन बाद भी स्वास्थ्य विभाग ने रिपोर्ट मरीज की सांझा नहीं की है।

उत्तरप्रदेश जा रहा ट्रक रीवा से गायब, ड्राइवर मलिक के साथ मिलकर 25 लाख रुपए की लहसुन कर दिया पार.

A truck, heading to Uttar Pradesh from Rewa, has gone missing. The driver, along with the owner, reportedly vanished after collectively embezzling 25 lakh rupees. भोपाल। मध्य प्रदेश के रीवा से एक हैरान कर देने वाली करना सामने आई है। यहां बदमाशों ने एक व्यापारी को सुनसान स्थान पर छोड़कर एक ट्रक 25 लख रुपए की लहसुन गायब कर दी है। शिकायत मिलने पर पुलिस ने वाहन मालिक को गिरफ्तार कर लिया है। ट्रक सहित चोरी गया लहसुन बरामद का लिया गया है। जानकारी अनुसार शमशाद अहमद निवासी गाजीपुर उत्तर प्रदेश ने शाजापुर से एक ट्रक लहसुन 25 लाख में खरीदा था। लहसुन को नूर मोहम्मद ट्रांसपोर्ट शुजालपुर से वाहन (एमएच 18 बीजी 5235) में लोड कर ड्राइवर और कालिंजर के साथ लेकर गाज़ीपुर जा रहे थे। 4 दिसंबर को क्योंटी पुलिया के पास सुबह 10 बजे पहुंचे तो ड्राइवर ने नहाने व खाना खाने के नाम पर ट्रक को रोक दिया। दोपहर 2:30 बजे उन लोगों ने निकलने का प्रयास किया, तो ट्रक चालू नहीं हुआ। ड्राइवर ने इसकी जानकारी वाहन मालिक विजय पटेल निवासी जमुई को दी तो वह गढ़ पहुंच गया। ऊपर ट्रक मिस्त्री को ढूंढ़ने के बहाने ड्राइवर अवधेश कुमार साकेत और व्यापारी को अपने साथ लेकर चला गया। व्यापारी को उन्होंने कुछ दूर एक सुनसान स्थान पर उतार दिया और चुपके से वहां से निकलकर लहसुन लोड ट्रक को लेकर फरार हो गए। पीड़ित व्यापारी किसी तरह क्योंटी पुलिया पर पहुंचा तो वहां ट्रक नहीं था। देर समय तक ट्रक को ढूंढता रहा। इसके बाद थाना पहुंचकर पुलिस को सूचना दी। वाहन को ट्रेस कर पुलिस ने विजय पटेल को गिरफ्तार कर लिया। उसकी निशानदेही पर ट्रक बरामद हो गया। आरोपियों ने मऊगंज में किराए का एक कमरा लेकर वहां लहसुन अनलोड किया था, जहां से मंडी में बेचने वाले थे। घटना में ट्रक मालिक व ड्राइवर सहित जीप में सवार आरोपियों पर मुकदमा दर्ज कर लिया है। रीवा पुलिस अधीक्षक विवेक सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि ट्रक में लहसुन लोड कर आरोपी गाजीपुर जा रहे थे। बीच रास्ते में व्यापारी को उतार कर लहसुन लेकर गोल हो गए। शिकायत मिलने पर केस दर्ज कर ट्रक सहित लहसुन को बरामद कर लिया है। ट्रक मालिक से पूछताछ की जारी है।

केपी सिंह की हार की खुशी में बुजुर्ग ने कराया मुंडन.

In the joy of K.P. Singh’s victory, the elderly person got a head shave. –शिवपुरी के एक व्यक्ति का अनोखा प्रण कांग्रेस नेता केपी सिंह की हार के बाद बुजुर्ग ने मुंडवाया सिर संवाददाता शिवपुरी शिवपुरी! शिवपुरी जिले के पिछोर में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसमें एक व्यक्ति को कांग्रेस नेता केपी सिंह की हार का इंतजार था। 15 साल से वह इस हार का इंतजार कर रहे थे और जब कांग्रेस नेता केपी सिंह हारे तो उन्होंने अपना यह प्रण अपना सिर मुंडवाकर पूरा किया। शिवपुरी जिले के पिछोर विधानसभा के एक बुजुर्ग ने पिछोर विधायक केपी सिंह कक्काजू के हारने पर अपना सिर मुंडवा लेने का प्रढ 15 साल पहले लिया था। 15 साल पहले लिए गए इस प्रण के बाद जब केपी सिंह शिवपुरी विधानसभा क्षेत्र से मैदान में कूदे और इस विधानसभा क्षेत्र से उन्हें 40 हजार से अधिक मतों से हार मिली तो इसके बाद पिछोर के रहने वाले इस व्यक्ति ने अपना सिर मुंडवा लिया। आरोप- केपी सिंह ने मार दिया था चांटा और फाड़ दिया था आवेदन- शिवपुरी जिले के पिछोर विधानसभा क्षेत्र के जराय गांव के रहने वाले बुजुर्ग गोविन्द सिंह लोधी ने बताया कि साल 2008 की बात है जब मेरे भाई कि एक सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी और मृतक भाई की सम्पत्ति को एक औरत ने अपने नाम करवा लिया था जिसकी फरियाद लेकर मैं पिछोर विधायक केपीसिंह के पास अपनी दरख़ास लेकर डाक बंगला पर पहुंचा जहाँ विधायक ने पूछा कि कहाँ से आया है जब मैंने बताया कि गोविन्द हूँ ज़राय से तो विधायक ने मेरा आवेदन फाड़ते हुए मुझे चाँटा जड़ दिया और भगा दिया था जिसके बाद मैंने उसी दिन प्रण किया था कि विधायक केपीसिंह जिस दिन हारेगा उस दिन ही यह अति का अन्त होगा। अब 2008 से अभी तक मुझे 15 वर्ष तक इंतजार करना पड़ा जिसके बाद मेरा सपना पूरा हुआ तो मैंने अपने दाढ़ी, मूंछ सहित सिर का मुंडन करवाया है अब मेरे दिल को शांति है। छह बार से जीतते आ रहे थे केपी को इस बार मिली हार- केपी सिंह कक्काजू पिछोर विधानसभा से लगातार 6 बार से विधायक रहे हैं और इस बार वह शिवपुरी विधानसभा से चुनाव लड़े थे लेकिन सातवीं बार लड़े चुनाव में उन्हें बड़ी हार का सामना करना पड़ा। इधर एक बुजुर्ग उनकी हार का इंतज़ार कर रहा था जिसके प्रण को पूरा होने में 15 साल लग गए। शिवपुरी विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी केपी सिंह को भाजपा प्रत्याशी देवेंद्र जैन 40 हजार से अधिक मतों से हराया है।

भ्रष्टाचार दुःख का कारण, दंड ही इसका निवारण.

Corruption is the cause of sorrow; punishment is the solution to its elimination. काटनी होगीं भ्रष्टाचार की मजबूत होती जडेमहिला असिस्टेंट इंजीनियर करोड़ों के भ्रष्टाचार में फंसी…नगर निगम का अफसर रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा …महिला सब इंस्पेक्टर का रिश्वत लेने का वीडियो वायरल…बाबू ने मांगी रिश्वत… रिश्वत लेने और भ्रष्टचार से जुड़े अनेक मामलों की ऐसी खबरें आए दिन समाचार-पत्रों की प्रमुख हेडलाइंस होती हैं। जिन्हें पढ़कर और सुनकर लगता है कि मानों आज भ्रष्ट आचरण वाले अधिकारी और कर्मचारी नियम विरुद्ध कार्य कर बनाई व्यवस्था को ध्वस्त कर तंत्र को दीमक की तरह चाट रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय भ्रष्टाचार विरोधी दिवस पर पढ़िए मौजूदा परिवेश में जड़ जमाते भ्रष्टाचार की हकीकत को दर्शाती खास रिपोर्ट। डॉ. केशव पाण्डेय अंतराष्ट्रीय भ्रष्टाचार विरोधी दिवस आज भ्रष्टाचार@भ्रष्ट+आचार : भ्रष्ट यानी बुरा या बिगड़ा हुअ…आचार का मतलब आचरण… अर्थात भ्रष्टचार का शाब्दिक अर्थ है वह आचरण जो किसी भी प्रकार से अनैतिक और अनुचित हो। जब कोई न्याय व्यवस्था के मान्य नियमों के विरुद्ध जाकर अपने स्वार्थ पूर्ति के लिए गलत आचरण करने लगता है तो वह व्यक्ति भ्रष्टाचारी कहलाता है।मौजूदा दौर में भ्रष्टाचार एक जटिल सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक समस्या है, जो सभी देशों को प्रभावित करती है। भ्रष्टाचार लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर कर आर्थिक विकास को धीमा करता है और सरकारी अस्थिरता में योगदान देता है।भ्रष्टाचार वर्तमान में एक नासूर बनकर समाज को खोखला करता जा रहा है। धर्म का नाम लेकर लोग अधर्म को बढ़ावा दे रहे हैं। दोषी व अपराधी धन के प्रभाव में स्वच्छंद घूम रहे हैं। धन-बल का प्रदर्शन, लूट-पाट, तस्करी आदि आम बात हो गई है। भ्रष्टाचार का समाज और राष्ट्र में व्यापक असर हो रहा है।भ्रष्टाचार ऐसा अनैतिक आचरण है, जिसमें व्यक्ति खुद की छोटी इच्छाओं की पूर्ति हेतु देश को संकट में डालने से परहेज नहीं करता है। देश के भ्रष्ट नेताओं द्वारा किया गया घोटाला ही भ्रष्टाचार नहीं है अपितु एक ग्वाले द्वारा दूध में पानी मिलाना भी भ्रष्टाचार का स्वरूप है।सोने की चिड़िया कहे जाने वाले देश में आज भ्रष्टाचार की जड़ें मजबूत होती जा रही हैं। दुनियाभर में पीढ़ियों के सामने भ्रष्टाचार एक सबसे बड़ी चुनौती है। यही चुनौती दुनिया भर के लोगों की समृद्धि और स्थिरता को खतरे में डाल रही है। क्योंकि आज अधिकांश लोग अवैध तरीकों से धन अर्जित करने की चाह में भ्रष्टाचार कर रहे हैं और निजी लाभ के लिए देश की संपत्ति का शोषण। यह देश की उन्नति के पथ पर सबसे बड़ा बाधक तत्व है। व्यक्ति के व्यक्तित्व में दोष निहित होने पर देश में भ्रष्टाचार की मात्रा बढ़ रही है।यही वजह है कि भ्रष्टाचार का समाज के हर पहलू पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है और यह संघर्ष और अस्थिरता के साथ गहराई से जुड़ रहा है। जो सामाजिक और आर्थिक विकास को खतरे में डालकर लोकतांत्रिक संस्थानों और कानून के शासन को कमजोर कर रहा है।भ्रष्टाचार न केवल संघर्ष का कारण बनता है, बल्कि अक्सर इसके मूल कारणों में से एक है। यह कानून के शासन को कमजोर करके, गरीबी को बदतर बनाकर, संसाधनों के अवैध उपयोग को सुविधाजनक बनाकर और सशस्त्र संघर्ष के लिए वित्तपोषण प्रदान करके संघर्ष को बढ़ावा देता है और शांति प्रक्रियाओं को रोकता है।हैरान करने वाली बात यह है कि देश का दिल कहे जाने वाला मध्य प्रदेश भ्रष्टाचार के मामले में चौथे नंबर पर है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है। एनसीआरबी की रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश में 2022 में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत 294 मामले पंजीबद्ध हुए थे।प्रदेश में रिश्वत लेने के मामले सबसे ज्यादा हैं। इनमें लोकायुक्त और ईओडब्ल्यू के पास 257 मामले आए। ट्रेप के मामले में भी प्रदेश तीसरे पायदान पर है। अनुपातहीन संपत्ति के मामले में भी पिछले वर्ष 2022 में 17 मामले दर्ज हुए थे। इस मामले में प्रदेश का पांचवा नंबर है।भ्रष्टाचार के बढ़ते संकट को दृष्टिगत रखते हुए संयुक्त राष्ट्र भ्रष्टाचार विरोधी और शांति, सुरक्षा और विकास के बीच महत्वपूर्ण संबंध को उजागर करना चाहता है। इसके मूल में यह धारणा है कि इस अपराध से निपटना हर किसी का अधिकार और जिम्मेदारी है। प्रत्येक व्यक्ति और संस्था के सहयोग और भागीदारी से ही हम इस अपराध के नकारात्मक प्रभाव पर काबू पा सकते हैं। राज्य, सरकारी अधिकारी, सिविल सेवक, कानून प्रवर्तन अधिकारी, मीडिया प्रतिनिधि, निजी क्षेत्र, नागरिक समाज, शिक्षाविद, जनता और युवा सभी को समान रूप से भ्रष्टाचार के खिलाफ दुनिया को एकजुट करने में भूमिका निभानी होगी।क्योंकि भ्रष्टाचार वह दीमक है जो अंदर ही अंदर देश को खोखला कर रहा है। यह व्यक्ति के व्यक्तित्व का आईना है जो यह दिखाता है व्यक्ति लोभ, असंतुष्टि, आदत और मनसा जैसे विकारों के वजह से कैसे मौके का फायदा उठा सकता है।भ्रष्टाचार होने का प्रमुख कारण देश का लचीला कानून है। पैसे के दम पर ज्यादातर भ्रष्टाचारी बाइज्जत बरी हो जाते हैं, अपराधी को दण्ड का भय नहीं होता है। ऐसे में जरूरी हो जाता है कि भ्रष्टाचारियों को कठोर से कठोर दंड मिले।यदि सतत विकास लक्ष्यों में निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करना है तो भ्रष्टाचार को रोकना, पारदर्शिता को बढ़ावा देना और संस्थानों को मजबूत करना महत्वपूर्ण है। कह सकते हैं कि समाज व राष्ट्र की उन्नति और लोगों की तरक्की के लिए भ्रष्टाचार की मजबूत होती जड़ों को समूल काटना होगा।

विधायक दल तय करेगा मध्य प्रदेश का अगला सीएम- वीडी. शर्मा.

The Group of legislative will decide the next Chief Minister of Madhya Pradesh – V.D. Sharma. भोपाल! मध्यप्रदेश का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा, इसका जवाब अब सोमवार (11 दिसंबर) को मिलेगा। इस दिन शाम 4 बजे भोपाल में बीजेपी विधायक दल की बैठक होगी, जिसमें सीएम का नाम तय होगा। विधायकों से रायशुमारी के लिए नियुक्त तीनों पर्यवेक्षक भी बैठक में मौजूद रहेंगे। इससे पहले शनिवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा-शिवराज सिंह चौहान ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा- ‘सभी को राम-राम…’ सीएम आज दोपहर साढ़े तीन बजे भोपाल उत्तर विधानसभा क्षेत्र में लाड़ली बहनों से संवाद करेंगे। वीडी बोले- हम कैडर बेस ऑर्गेनाइजेशन के कार्यकर्ता मप्र मुख्यमंत्री पद के सवाल पर वीडी शर्मा ने कहा कि हम कैडर बेस ऑर्गेनाइजेशन के कार्यकर्ता हैं। मुख्यमंत्री कौन होगा, उप मुख्यमंत्री कौन होंगे, होंगे, नहीं होंगे? इसका निर्णय नेतृत्व करेगा। सीएम विधायक दल ही चुनेगा। 11 दिसंबर की शाम 4 बजे विधायक दल की मीटिंग होगी। तीनों पर्यवेक्षक वन टू वन चर्चा कर सकते हैं पर्यवेक्षक बीजेपी ने मुख्यमंत्री चयन को लेकर शुक्रवार को तीन पर्यवेक्षक नियुक्त कर दिए हैं। इनमें हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर, ओबीसी मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. के. लक्ष्मण और पार्टी की राष्ट्रीय सचिव आशा लकड़ा शामिल हैं। ऐसा माना जा रहा है कि खट्टर और डॉ. के. लक्ष्मण विधायकों से वन टू वन चर्चा कर सकते हैं।

ओवरलोडिंग दो हाईवा को आरटीओ संभागीय फ्लाइग टीम ने दबोचा.

The regional flying team of the RTO (Regional Transport Office) caught two trucks engaged in overloading. विशेष संवाददाता ‘कटनी‘ कटनी। जबलपुर स्थित आरटीओ के संभागीय कार्यालय से कटनी में हो रही ओवरलोडिंग पर लगाम लगाने के लिए एक विशेष टीम को कटनी में हो रही ओवरलोडिंग पर कार्रवाई के लिए भेजा गया है। आज शनिवार 9 दिसंबर की दोपहर लगभग 12:00 बजे जबलपुर से आई फ्लाइंग टीम ने रेत से लदे दो हाईवा को पकड़ा। पहले तो रेत के हाईवा को पकड़ने के संबंध में जानकारी देने से मौजूद कर्मचारी बचते रहे, लेकिन बाद में उन्होंने कहा कि ओवरलोडिंग को लेकर कार्यालय से निर्देश जारी हुए हैं जिसके तहत कार्यवाही की जा रही है।संभागीय फ्लाइंग एस्कॉर्ट के प्रभारी आरटीओ एसआई अक्षय पटेल के नेतृत्व में आई टीम ने आज कटनी शहडोल बाईपास पर रेत से लदे हाईवा क्रमांक एमपी 20 एचबी 6367 एवं एमपी 20 एचबी 7889 को पकड़ा। बातचीत करते हुए फ्लाइंग स्क्वायड टीम के प्रभारी अक्षय पटेल ने कहा कि दोनों वाहनों को ओवरलोडिंग करते हुए पाया गया है। जिसे पड़कर कुठला थाने के सामने खड़ा कराया गया है। दस्तावेजों की जांच चल रही है। दोनों वाहनों के खिलाफ ओवर लोडिंग की चालानी कार्यवाही की जाएगी।

गेहू और बटरी का अवैध परिवहन करते दो वाहनो से 50 हजार से अधिक की मंडी शुल्क की हुई वसूली.

Market fee of more than 50 thousand rupees has been collected from two vehicles illegally transporting wheat and batteri. कटनी! कृषि उपज मंडी कटनी अपडेट: गेहू और बटरी का अवैध परिवहन करते दो वाहनो से 50 हजार से अधिक की दाण्डिक मंडी शुल्क की हुई वसूली, कलेक्टर अवि प्रसाद के निर्देशन एवं मार्गदर्शन में वाहनों से गेहू , धान, बटरी आदि का जिले में बाहरी व्यापारियों द्वारा अवैध परिवहन करने वाले वाहनों पर सख्त निगरानी रखी जा रही है। इसी क्रम में अवैध परिवहन करते हुए दो वाहनों से 50 हजार रूपये से अधिक की दाण्डिक मंडी शुल्क की राशि वसूली गई। कृषि उपज मंडी के सचिव राकेश कुमार पनिका ने बताया की गेहू का अवैध परिवहन करते वाहन क्रमांक यूपी 33 एटी 9844 और बटरी का अवैध परिवहन करते हुए वाहन क्रमांक यूपी 90 एटी 0741 के विरूद्ध कार्यवाही की गई। इन दोनों वाहनों में से एक में 235 क्विंटल गेहू और 30 क्विंटल बटरी का अवैध परिवहन किया जाना पाया गया। दोनों वाहनों को मिलाकर 50 हजार 512 रूपये की दांण्डिक मंडी शुल्क वसूल कर जमा करायी गयी। इस कार्यवाही में जांच दल के रूप में सहायक उपनिरिक्षक प्रेम कुमार मांझी, राजेन्द्र कुमार चौधरी, किशोर कुमार पनिका, अमित कुमार केशरवानी और हरिमोहन कौरव शामिल रहे।

गौशालाओं में गायों की हालत दयनीय, चारे, पानी के अभाव में मवेशी कमजोर और मर रहे हैं।

The condition of cows in cow shelters is pitiable; due to the shortage of fodder and water, livestock is weak and dying. कटनी, मवेशियों को संरक्षित करने के लिए बनाई गईं गोशालाओं में व्यवस्था ध्वस्त है। हाल ये है कि चारे, पानी के अभाव में मवेशी कमजोर और मर रहे हैं। जबकि प्रति नग के हिसाब से शासन द्वारा स्व सहायता समूहों के खाते मैं राशि डाली जाती है । उसके बाबजूद भी गौशाला में भूख से मर रहे गौवंशों के शवों को कुत्ते और सियार अपना भोजन बनाते है । मामला कटनी जिले की रीठी जनपद पंचायत क्षेत्र की ग्राम पंचायत घनिया गौशाला है। जहा गौशाला ब्रजधाम में गौवंशों के स्तिथि बहुत ही बत्तर है । यहां गौ वंशो को न तो खाने के कोई व्यवस्था है न ही उनकी देख रेख में कोई रहता है ऐसे में यहां पर गौ वंशो की स्तिथि बहुत ही खराब हो रही है । यहां तक कि घनिया गौशाला में मरे पड़े गौ वंशो को कुत्ते और सियार नोच रहे है लेकिन यहां के संचालक को कोई फिकर तक नहीं है ।

क्या बच्चे के गार्जियन के क्रिमिनल रिकॉर्ड को लेने का अधिकार है या नहीं?

Does the guardian have the right to obtain the criminal record of a child? राज्य सूचना आयोग में आया ससुराल वालों के क्रिमिनल रिकॉर्ड की जानकारी लेने का मामला राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने कारण बताओ नोटिस किया जारी, तत्कालीन एडिशनल एसपी ग्वालियर ऋषिकेश मीणा को कारण बताओं नोटिस किया जारी. तत्कालीन एडिशनल एसपी ग्वालियर को भोपाल किया तलब, प्रकरण में अगली सुनवाई 15 जनवरी को होगी ग्वालियर में उमेश नागर ने लगाई थी आरटीआई, राजस्थान के कोटा के रहने वाले हैं उमेश नागर, ससुराल वालों के क्रिमिनल रिकॉर्ड की मांगी थी जानकारी भोपाल। क्या RTI आवेदक को अपने ससुरालवालों के क्रिमिनल रिकार्ड जानने का हक़ है? राजस्थान के एक व्यक्ति ने अपनी बेटी के नाना और उनके परिवार वालों का क्रिमिनल रिकार्ड नहीं देने पर ग्वालियर पुलिस के विरुद्ध मप्र सूचना आयोग में अपील लगाई है। इस मामले में सुनवाई करते हुए सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने स्पष्ट किया कि अपने बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी जानकारी को प्राप्त करना न केवल एक पैरंट का अधिकार है बल्कि बच्चे से जुड़ी उसकी जवाबदेही और जिम्मेदारी भी है। राजस्थान के कोटा शहर के उमेश नागर ने अपने ससुराल वालों के क्रिमिनल रिकार्ड की जानकारी के लिए ग्वालियर एसपी कार्यालय में RTI लगाई थी। पर ग्वालियर पुलिस ने क्रिमिनल रिकार्ड की जानकारी को व्यक्तिगत जानकारी बताते हुए नागर को जानकारी देने से मना कर दिया। नागर ने सुनवाई के दौरान सूचना आयोग को बताया कि यह जानकारी उनके लिए बेहद जरूरी है क्योंकि उनकी बेटी की कस्टडी उनके ससुराल वालों के पास है। दरसल कोटा निवासी नागर की शादी ग्वालियर में हुई थी। पर शादी के बाद पारिवारिक मतभेद होने पर उनकी पत्नी अपनी बेटी को लेकर ग्वालियर में अपने परिवार वालों के साथ रहने लगी। डाइवोर्स और चाइल्ड कस्टडी के लिए भी मामला अदालत में चल रहा है। आयोग ने पूछा अपराध कैसे निजी जानकारी?सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने सुनवाई के दौरान ग्वालियर पुलिस से यह पूछा किसी व्यक्ति का क्रिमिनल रिकॉर्ड व्यक्तिगत जानकारी कैसे हो सकती है? सिंह ने स्पष्ट किया कि कोई भी अपराध समाज के विरुद्ध किया जाता है और समाज में रहने वाले व्यक्तियों को जानने का अधिकार है कि अपराध किनके द्वारा किया जा रहा है ताकि वह अपने आप को सजग और सुरक्षित रख पाए। पुलिस के जानकारी रोकने पर सवाल उठाते हुए सिंह ने कहा कि अगर अपराध को निजी जानकारी की श्रेणी में रखा जाए तो हर अपराधी अपराध करने के बाद यह रहेगा कि उसके द्वारा किया गया अपराध उसका निजी विषय है और इसकी जानकारी किसी को न दी जाए। बच्चे से अलग रहे पिता को क्या जानकारी लेने अधिकार है? सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने अपने आदेश में लिखा कि ये मामला डाइवोर्स प्रकरण के चलते चाइल्ड कस्टडी और बच्चों के वेलफेयर से जुड़ा हुआ विषय है। पिता को शक है कि उनके ससुराल पक्ष के सदस्यों का क्रिमिनल रिकॉर्ड है जो कि उनके बच्चे की सुरक्षा के एवं नैसर्गिक विकास के लिए उपयुक्त नहीं है। इस जानकारी को RTI में लेकर वे अपने बच्चे के भविष्य को सुरक्षित रखना चाहते हैं। सिंह ने कहा कि इस RTI को लेकर सवाल ये उठना है कि अपने बच्चों से अलग रह रहे पिता को क्या बच्चे के गार्जियन के क्रिमिनल रिकॉर्ड को लेने का अधिकार है या नहीं? सूचना आयुक्त ने बताया बच्चों की सुरक्षा की जानकारी है अहम सिंह ने कहा कि भारतीय संविधान की व्यवस्था में बच्चों के प्रति दोनों ही पेरेंट्स की सामान जवाबदेही और जिम्मेदारी बनती है। वही इस देश का संविधान बच्चों की सुरक्षा एवं उनके नैसर्गिक विकास और उनके अधिकारों की गारंटी देता है। RTI में मांगी जानकारी को पिता के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए राहुल सिंह ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों के करीब ढाई सौ से अधिक विभिन्न कानून लागू है जो बच्चों की सुरक्षा और वेलफेयर के लिए बने हुए हैं। आयोग: बच्चों की सुरक्षा की जानकारी में पारदर्शिता जरूरी बच्चों के सुरक्षा से जुड़े मामलों की व्याख्या करते हुए सिंह ने बताया कि संवैधानिक व्यवस्था के अंतर्गत परित सूचना का अधिकार कानून जीवन और स्वतंत्रता जैसे मूलभूत अधिकारों से भी सीधे तौर से जुड़ा हुआ है।सूचना का अधिकार अधिनियम के अनुरूप अगर कोई बच्चा खतरे में है या उसकी स्वतंत्रता या जीवन को लेकर सवाल है तो इस देश का नागरिक बच्चों से जुड़ी हुई जानकारी को जानने का अधिकार रखता है ताकि संविधान के अनुरूप बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित हो पाए। आयोग के बाद 5 दिन में मिली जानकारीराज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने ग्वालियर एसपी के जानकारी रोकने के आदेश को खारिज कर दिया। आयोग से जानकारी मिलने के आदेश के बाद ग्वालियर पुलिस ने आवेदक को जानकारी प्रेषित भी कर दी है। जानकारी को अवैध तरीके से रोकने के लिए तत्कालीन एडिशनल एसपी ग्वालियर ऋषिकेश मीणा को कारण बताओं नोटिस जारी कर भोपाल तलब किया है। अब इस प्रकरण में अगली सुनवाई 15 जनवरी को होगी।

चाइना के यूरिया से भारत बनेगा आत्मानिर्भर ,जानिए पूरी कहानी.

India will become self-reliant in urea production with China’s assistance – learn the entire story. नई दिल्ली: चाइना से आया यूरिया, बोरी पे लिखा आत्मानिर्भर भारत, जानिए पूरी कहानी – यूरिया की एक बोरी की फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। यह बोरी का फोटो दुनिया की सबसे बड़ी सहकारी कंपनी इफको (इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइजर कोआपरेटिव लिमिटेड) का है। इस फोटो में यूरिया की बोरी पर एक ओर लिखा है ‘सशक्त किसान-आत्मनिर्भर भारत’ और वही दूसरी ओर इस खाद का उद्गम स्थल चाइना को बताया गया है। इसी भ्रम को लेकर इस बोरी की फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। इसी बीच इफको के एमडी डॉ. यूएस अवस्थी ने इस वायरल फोटो पर टिप्पणी की हैं। डॉ. अवस्थी ने इस वायरल की जा रही फोटो को भ्रामक बताते हुए कहा कि ऐसा करने वाले लोगो के पास समझ का अभाव हैं। वैसे आजकल एआई के समय में तकनीकी तौर पर देखा जाए तो बहुत हद तक डॉ. अवस्थी की बात सही भी हैं। भारत में 30 मिलियन टन यूरिया उत्पादन की क्षमता है, जिसमें से 90% उत्पादन क्षमता का उपयोग किया जाता है। यूरिया की बाकि जरूरतो के लिए उर्वरक कंपनियां दूसरे देशों से आयात करती हैं। ये जानना जरूरी हैं कि भारत अभी तक आत्मनिर्भर नहीं हैं लेकिन भारत सरकार 2025-26 तक य़ूरिया उत्पादन में आत्मनिर्भर होने की कोशिश कर रहा हैं। आत्मनिर्भर भारत-सशक्त किसान‘ का नाराआत्मनिर्भर भारत-सशक्त किसान’ का नारा है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने देश की आर्थिक विकास योजनाओं के लिए इस नारे का इस्तेमाल किया और इसे लोकप्रिय बनाया। ‘आत्मनिर्भर भारत’ की प्रमुख कड़ी है आत्मनिर्भर किसान। श्री नरेंद्र मोदी ने ‘सशक्त और समृद्ध किसान, आत्मनिर्भर भारत’ की पहचान बताई है। ‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत, देश के कृषि क्षेत्र को मज़बूत करने के लिए कई प्रयास किए गए हैं। इन प्रयासों से देश के किसान लाभान्वित हो रहे हैं और सशक्त भारत के निर्माण में अपना योगदान दे रहे हैं। दरअसल, भारत लंबे समय से खेती-किसानी में अपनी घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए रासायिन‍क उर्वरकों का दूसरे देशों से आयात कर रहे हैं। जिसमें यूरिया का आयात सबसे अधिक है। भारत आजादी के 75 साल बाद भी हम उर्वरकों के उत्पादन के मामले में आत्मनिर्भर नहीं हो सका हैं. लेकिन, अब उस रास्ते पर चल रहे हैं जिसमें आयात को कम करने और घरेलू उत्पादन को बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। काफी हद तक इसमें सफलता भी मिली है। सरकार कृषि क्षेत्र की मांग को पूरा करने के लिए साल दर साल मजबूरी में खाद का आयात कर रही है।

सीएम के सलाहकार और पूर्व आईएएस केसरी अडानी की कंपनी में बने एडवाइजर.

Advisors to the Chief Minister and former IAS officer Kesari Adani are appointed as advisors in Adani’s company. भोपाल। मप्र के सीनियर रिटायर्ड आईएएस अधिकारी आईसीपी केशरी ने अडानी ग्रुप ज्वाइन कर लिया है। वह ग्रुप के एनर्जी सेक्टर को देखेंगे और वहां एडवाइजर की भूमिका में रहेंगे। केशरी ने ग्रुप ज्वाइन कर लिया है। केशरी का शासकीय अधिकारी के तौर पर एनर्जी सेक्टर में करीब दस साल का अनुभव रहा है और वह इस विभाग में प्रमुख सचिव, एसीएस स्तर के अधिकारी रहे हैं। केंद्र में भी उन्होंने इस सेक्टर में काम किया है। केशरी के रिटायरमेंट के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उन्हें दिसंबर 2022 में मीडिया सलाहकार के तौर पर नियुक्त किया था। करीब एक साल इस पद पर काम करने के बाद उन्होंने हाल ही में आचार संहिता लगने के पहले 30 नवंबर को यह पद त्याग दिया था और इसके बाद ग्रुप में ज्वाइनिंग की उनकी प्रक्रिया शुरू हो गई थी। केशरी 1988 बैच के अधिकारी है और एनर्जी सेक्टर में उनके काम का लंबा अनुभव रहा है। केंद्र में प्रतिनियुक्ति के दौरान करीब साढ़े पांच साल तक वह ऊर्जा मंत्रालय में ज्वाइंट सेक्रेटरी (थर्मल) रहे। ऊर्जा विभाग के प्रमुख सचिव और मप्र भवन, नई दिल्ली के आवासीय आयुक्त रहे आईसीपी केशरी बाद में मुख्य सचिव के वेतनमान पर पदोन्नत के बाद अपर मुख्य सचिव, ऊर्जा भी रहे।केशरी आईएएस एमपी के साथ मप्र, छग और केंद्र में ग्रासरूट एंड पॉलिसी लेवल का अनुभवी अधिकारी बताया है। खासकर इन्फ्रा-पॉवर, रोड, एरिगेसन सेक्टर में। साथ ही लिखा है ज्वाइन्ड एनर्जी ग्रुप।

पुलिस आरक्षक का मंदिर में रिश्वत लेने का विडियो वायरल

The viral video depicts a police constable accepting a bribe inside a temple. कटनी। मध्य प्रदेश के कटनी के न्यायालय परिसर में एक आरक्षक का खुलेआम रिश्वत लेते वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो में पुलिस वर्दी में एक आरक्षक कुछ युवकों से रुपए लेते दिख रहा है। इस दौरान किसी ने यह पूरा वाक्या मोबाइल के कैमरे में कैद कर लिया। हालांकि सहारा समाचार इस वायरल वीडियो की पुष्टि नहीं करता है। मिली जानकारी के अनुसार रिश्वत लेने वाला आरक्षक कुठला थाने में पदस्थ है। बताया जा रहा है कि आरक्षक काफी समय से कुठला थाने से चालानी पेपर लेकर न्यायालय में आ रहा हैं। हालांकि अभी ये स्पष्ट नहीं हो पाया है कि न्यायालय परिसर में आरक्षक युवकों से किस बात के रुपए ले रहा है। इधर वीडियो सामने आने के बाद इस वायरल वीडियो की जांच की भी पुलिस के द्वारा बात की जा रही है। अगर इसमें अवैध तरिके से आरक्षण पैसा लेते पाया गया तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई भी जा सकती है। फिलहाल आरक्षक का पैसे लेते वीडियो चर्चा का विषय बना हुआ है।

खनिजों के अवैध उत्खनन, परिवहन एवं भंडारण पर सख्ती से रोक, अवैध परिवहन में 4 वाहन जब्त.

Stringent measures to curb illegal mining, transportation, and storage of minerals, with the seizure of 4 vehicles involved in unauthorized transportation. विशेष संवाददाता, सहारा समाचार’ बालाघाट बालाघाट। जिला स्तरीय टास्कफोर्स समिति की 21 नवम्बर को हुई बैठक तथा कलेक्टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा द्वारा 5 दिसम्बर को जिले में खनिजों के अवैध उत्खनन, परिवहन एवं भंडारण पर सख्ती से रोक लगाये जाने के निर्देश दिये गए थे। निर्देश का पालन करते हुये खनिज अधिकारी श्री आर. के. खातरकर, खनिज निरीक्षक श्री सुरेश कुमार कुलस्ते एवं मुकेश वाडिवे द्वारा लालबर्रा क्षेत्र का 6 दिसम्बर बुधवार को औचक निरीक्षण कर बिना अभिवहन पारपत्र (ई.टी.पी.) के खनिज रेत तथा गिट्टी के अवैध परिवहन में संलिप्त 04 वाहनों डम्फर- एमएच-35एजे-3213, ओडी-23-एल-4944, एमपी-22-जेसी-3510 तथा एमपी-28-एच-4427 को जप्त कर थाना लालबर्रा परिसर में सुरक्षार्थ रखा गया है। निर्देश के उल्लंघनकर्ता सईद हनीफ खान निवासी बोरी बरघाट, सईद अब्दूल जफ्फार निवासी सिवनी, देवेंद्र लक्ष्मीप्रसाद निवासी बरघाट तथा सुंदरलाल चम्पतलाल अहाने निवासी ओमठ छपारा के विरूद्ध खनिज नियमों के तहत प्रकरण कायम किया गया है।

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