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कलेक्टर ने किया नेहरू नगर, रंगमहल, बागसेवनिया, दानिश एवं बिट्टन मार्केट चौराहों का निरीक्षण.

Collector inspected Nehru Nagar, Rangmahal, Bagsevaniya, Danish, and Bittan markets yesterday. ट्रैफिक जाम एवं अव्यवस्था से निजात पाने इन चौराहों का होगा चौड़ीकरण एवं सौंदर्यीकरण, चौराहों के अवैध अतिक्रमण हटाये जायेंगे। फ्री लेफ्ट टर्न का चलाया जायेगा अभियान, नगर निगम एवं पीडब्ल्यूडी को प्रक्रिया पूर्ण कर कार्य शीघ्र प्रारंभ करने के दिये निर्देश. साकिब कबीरभोपाल: कलेक्टर आशीष सिंह ने मंगलवार की सुबह नेहरू नगर चौराहा, रंगमहल चौराहा, बागसेवनिया चौराहा, दानिश चौराहा एवं बिट्टन मार्केट चौराहा का निरीक्षण किया। इस दौरान नगर निगम आयुक्त फ़्रेंक नोबल ए, एडीएम श्री हरेन्द्र नारायण सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे। कलेक्टर श्री सिंह ने निरीक्षण के बाद कहा कि इन चौराहों पर आये दिन ट्रैफिक जाम की समस्या बनी रहती है जिससे उत्पन्न अव्यवस्था के चलते कई बार हादसे भी देखे गये है। इन समस्याओं से निजात पाने के लिये चौराहों का चौड़ीकरण किया जायेगा। उन्होंने कहा कि ट्रैफिक को सुव्यवस्थित करने एवं जाम की समस्या से निजात पाने के लिये यह आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इन चौराहों का सौंदर्यीकरण भी होगा। उन्होंने चौराहों के चौड़ीकरण में डिवाइडर एवं फ्री लेफ्ट टर्न को सुव्यवस्थित बनाने के निर्देश दिये जिससे ट्रैफिक का मूवमेंट व्यवस्थित रहे और जाम जैसी स्थिति उत्पन्न न हो। इसके साथ ही चौराहों पर स्थित अवैध अतिक्रमण को भी हटाया जायेगा। कलेक्टर श्री सिंह ने संबंधित विभागों नगर निगम एवं पीडब्ल्यूडी को चौराहों के चौड़ीकरण एवं सौंदर्यीकरण के लिये की जाने वाली प्रक्रिया को शीघ्र पूर्ण कर कार्य प्रारंभ करने के निर्देश दिये

सिर्फ वेबसाइट तक ही सिमटा कामकाज, शिवराज सरकार का आनंद विभाग.

Work of the Anand Department of the Shivraj government is confined only to the website. Manish Trivedi भोपाल: वर्ष 2016 में शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाली मध्य प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी सरकार ने आनंद विभाग (Ministry of Happiness) के गठन को मंजूरी दी थी. मोटे तौर पर इसका मूल मकसद राज्य की जनता में खुशहाली का स्तर मापकर उनका जीवन खुशहाल बनाने का प्रयास करना था. इसकी प्रेरणा मुख्यमंत्री चौहान को भूटान के राष्ट्रीय खुशहाली सूचकांक से मिली थी. इसलिए मध्य प्रदेश का एक ‘हैप्पीनेस इंडेक्स’ जारी करने की भी बात कही गई थी, जो राज्य की जनता में खुशहाली का स्तर बताता. मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाले उनके इस विभाग के कामकाज की गंभीरता का पता इससे भी चलता है कि संस्थान के कार्यों के निष्पादन हेतु 28 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से 13 रिक्त हैं. वहीं, वेबसाइट पर जिन 17 पदाधिकारियों का उल्लेख है, उनमें सामान्य सभा के अध्यक्ष के तौर पर मुख्यमंत्री, कार्यपालन समिति के अध्यक्ष के तौर पर राज्य के प्रमुख सचिव और सीईओ के अलावा बाकी 14 पदों में से 7 रिक्त हैं. द वायर में आनंद विभाग के ऊपर एक रिपोर्ट के अनुसार आनंद विभाग पर एक रिपोर्ट के अनुसार  संस्थान की ओर से आनंद के विषय पर शोध/अनुसंधान के लिए ‘आनंद रिसर्च फेलोशिप’ भी जारी की जाती है, लेकिन आज तक कोई शोध प्रकाशित नहीं हुआ है. लोगों के जीवन में आनंद घोलने का बजट 10 पैसा प्रति व्यक्ति है आनंद विभाग का गठन एक स्वतंत्र विभाग के रूप में हुआ था. वर्ष 2018 में सरकार बदलने पर इसका विलय अध्यात्म विभाग में कर दिया गया. वापस भाजपा की सरकार आने पर इसे फिर से स्वतंत्र कर दिया गया. वर्ष 2022-23 में इसको 5 करोड़ का बजट आवंटित हुआ था, जिसमें 2 करोड़ वेतन भुगतान, कार्यालय किराया, बिजली-पानी व्यय, प्रकाशन एवं प्रचार-प्रसार के लिए थे. 3 करोड़ का पोषण अनुदान था, जिससे विभाग को आनंद के प्रसार के कार्यक्रमों का संचालन करना था. विभाग केवल 4.22 करोड़ की राशि खर्च कर सका. वित्तीय वर्ष 2021-22 के उपलब्ध दस्तावेज बताते हैं मुख्यमंत्री के इस महत्वाकांक्षी विभाग द्वारा आनंद के प्रसार के लिए चलाए जाने वाले सभी कार्यक्रमों पर केवल 79 लाख रुपये खर्च किए गए, जो राज्य की लगभग 8 करोड़ आबादी के लिहाज से लगभग 0.10 पैसा प्रति व्यक्ति होता है. हालांकि, इस बजट को पर्याप्त मानते हैं. उनका कहना है, ‘हम वालंटियर (स्वयंसेवी) के जरिये काम करते हैं. यह एक नई अवधारणा लाने की शुरुआत है, समय तो निश्चित तौर पर लगेगा. बजट हमारे लिए पर्याप्त है, कोई समस्या नहीं है.’ ‘आनंद विभाग’ या ‘सरकारी अधिकारी/कर्मचारी आनंद विभाग?’ स्वयंसेवी आनंदकों (84 हजार से अधिक) में बड़ी संख्या में शासकीय सेवक शामिल हैं (दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के मुताबिक 40 फीसदी से अधिक), उनमें भी शिक्षा विभाग के कर्मियों की संख्या इनमें अधिक है. अशासकीय व्यक्तियों में समाजसेवी, पत्रकार जैसे ज़मीनी सक्रियता वाले पेशों के लोग शामिल हैं. वहीं, वेबसाइट पर उपलब्ध 268 आनंदम सहयोगियों की सूची में 60 फीसदी से अधिक शासकीय कर्मचारी हैं. भले ही पूरी योजना को वॉलंटियर रूप से सफल बनाने का ख्वाब देखते हों लेकिन द वायर से बातचीत में ‘अशासकीय आनंदम सहयोगी’ कहते हैं कि हम काम-धाम छोड़कर अपने मन की संतुष्टि के लिए लोगों में खुशियों बांटने के प्रयास करते हैं, तो कम से कम विभाग को हमारे पानी-पेट्रोल का खर्च तो देना ही चाहिए. विभाग के गठन के समय राज्य का हैप्पीनेस इंडेक्स जारी करने को इसका सबसे महत्वपूर्ण कार्य बताया गया था. आईआईटी खड़गपुर के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर करने के अलावा तत्कालीन अधिकारियों ने सरकारी खर्च पर भूटान के दौरे भी किए थे. लेकिन, तब से अब तक नतीजा सिफर ही रहा है. कभी कोरोना, तो कभी किसी अन्य कारण से बार-बार राज्य आनंद संस्थान की ओर से इंडेक्स जल्द ही जारी करने का आश्वासन दिया जाता है. वेबसाइट पर उपलब्ध विभागीय कामकाज की उपरोक्त जानकारी किसी को भी बेहद आकर्षक लग सकती है लेकिन ज़मीनी हक़ीक़त कुछ और है. ‘द वायर’ ने इस दौरान कई ‘आनंदम सहयोगी’ से बात की. इनमें एक डॉ. सत्य प्रकाश शर्मा भी थे. उनका नाम वेबसाइट पर ग्वालियर के ‘आनंदम सहयोगी’ के रूप में दर्ज है. द वायर से बातचीत में उन्होंने बताया, ‘जो भी दिख रहा है वो केवल कागजों में है, धरातल पर शून्य है. आपको केवल संस्थान के ईमेल मिलेंगे, वेबसाइट पर सब कुछ मिलेगा, ज़मीन पर कुछ भी नहीं है. विभाग की सक्रियता केवल फोटो खिंचवाकर अपलोड करने तक है. थोड़ी-बहुत गतिविधियां कर देते हैं, जिससे फोटो बन जाते हैं और वेबसाइट पर अपलोड हो जाते हैं. कुल मिलाकर यह केवल एक वेबसाइट के अलावा और कुछ नहीं है. डॉ. शर्मा के दावों की ज़मीनी पड़ताल की और राज्य के विभिन्न तबकों से जुड़े लोगों से बात करके जाना कि वह ‘आनंद विभाग ’ या ‘राज्य आनंद संस्थान’ के कामकाज को किस तरह देखते हैं या उसके कामकाज के बारे में कितना जानते हैं. शिवपुरी और श्योपुर ज़िलों में आदिवासी समुदाय के बीच पोषण, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार आदि समस्यों पर सक्रियता से काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता अजय यादव को तो पता ही नहीं है कि ऐसा कोई विभाग भी है जो लोगों का जीवन खुशहाल बनाने के लिए कार्य करता है. ‘मैं करीब दशकभर से वंचित तबकों के बीच काम कर रहा हूं, लेकिन मैंने आज तक आनंद विभाग या राज्य आनंद संस्थान का नाम ही नहीं सुना और न ही कभी इसके द्वारा किया गया कोई आयोजन देखा.’ सिवनी ज़िले के केवलारी खेड़ा गांव के किसान सतीश राय, जो किसान संबंधी समस्याओं पर भी मुखर रहते हैं, को भी नहीं पता कि लोगों के जीवन में आनंद का प्रसार करने के लिए भी कोई विभाग काम कर रहा है. वे आगे कहते हैं, मेरे जैसे सक्रिय किसान को भी ऐसे किसी विभाग या उसके कार्यक्रमों और आयोजनों की जानकारी नहीं है. कोई भी ग्रामीण इस विभाग की गतिविधियों के बारे में नहीं बता पाएगा कि इसके कार्यक्रम कब और कहां होते हैं.’ पूरे राज्य में पोषण, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल अधिकार और नागरिक अधिकारों पर काम करने वाली भोपाल की एनजीओ विकास संवाद के राकेश मालवीय को विभाग के गठन … Read more

सड़क में घूमते मवेशियों से बड़ा दुर्घटना का खतरा जिम्मेदारों ने शादी चुप्पी.

The authorities remained silent on the imminent danger of accidents posed by roaming livestock on the roads Manish Trivedi – Sahara Samachaar कटनी। जिस देश में गव वंश को गौ माता का दर्जा दिया गया है आज स्थिति ऐसी है कि कोई अपने स्वयं के पालतू मवेशी बाधने को तैयार नहीं है लाभ तो सभी लेते हैं लेकिन सड़क में आवारा छोड़ देते हैं जिससे गोवंश को भी नुकसान होता है और इंसानों को भी दुर्घटना का खतरा बना रहता है शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में गोवंशों के लिए कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है गौशालाएं तो बनी हुई हैं लेकिन गोवंश के लिए समुचित व्यवस्था नहीं है फसलों को भी नुकसान हो रहा है किसानो से बात करने पर पता चला कि पहले काजी हाउस की व्यवस्था थी तो लोगों को डर था लेकिन अब वह भी नहीं है लोग मवेशी बाधने को तैयार नहीं है सहारा समाचार से बात करते हुए राहगीर ने बताया कि गोवंशों के लिए समुचित व्यवस्था होनी चाहिए जिससे फसलों को भी नुकसान ना हो दुर्घटनाएं भी ना हो इस विषय पर कड़ाई से पालन होना चाहिए.

मप्र के हारे थके भाजपा नेत और मंत्री चले तेलंगाना, करेंगे प्रचार.

Tired after the elections in Madhya Pradesh, BJP leaders and ministers have gone to Telangana to campaign. मप्र को निपटाकर अब तेलंगाना को निपटाएंगे नेता, मंत्री, तेलंगाना के चुनाव में शिवराज कैबिनेट के आधा दर्जन मंत्रियों की लगी ड्यूटी, चुनाव प्रचार में होंगे शामिल, राजस्थान में सीएम की होंगी सभाएं. अपने आपको मप्र और देश का बड़ा नेता कहने वाले कैलाश विजयवर्गीय से पार्टी ने किया किनारा. मप्र विधानसभा चुनाव के बाद कैलाश विजयवर्गीय का पार्टी ने घटाया कद घटा, बने छोटे नेता. Udit Narayanभोपाल। मध्यप्रदेश में चुनाव के बाद अब बीजेपी हाईकमान ने तेलंगाना में हो रहे चुनाव के लिए कमर कस ली है। मध्यप्रदेश भाजपा के दिग्गज नेता भी अब तेलंगाना चुनाव में मोर्चा संभालेंगे। इसके लिए एमपी भाजपा से एक दर्जन से अधिक नेताओं को जिम्मेदारी दी गई है। दिलचस्प बात यह है कि अपने आपको मप्र और देश का बड़ा नेता कहने वाले कैलाश विजयवर्गीय से फिलहाल उनसे किनारा कर लिया। पार्टी ने जिन 22 नेता और मंत्रियों की सूची बनाई, उसमें उनका नाम नहीं है। पार्टी ने उन्हें प्रचार प्रसार करने लायक नेता नहीं समझा है। एक तरह से उनके कद का छोटा आंक लिया है। अब वे छोटे कद के नेता बन गए हैं। वहीं शिवराज कैबिनेट के आधा दर्जन मंत्रियों की चुनावी प्रचार में ड्यूटी लगा दी गई है। सभी इसी वीक से तेलंगाना की अलग-अलग विधानसभाओ में डेरा डालेंगे। इनमें कई मंत्री और संगठन के जिम्मेदार पदाधिकारी भी शामिल हैं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान राजस्थान में चुनाव प्रचार करेंगे। उन्हें स्टार प्रचारक बनाया गया है। बता दें, राजस्थान में 25 और तेलंगाना में 30 नवंबर को मतदान होगा। फिलहाल, यहां भाजपा का प्रचार जारी है। 22 नेता जाएंगे तेलंगाना

कांग्रेस को जीत का यकीन, बन रही है पक्षपात करने वाले अधिकारियों की लिस्ट.

Congress is confident of victory, and a list of officials prone to bias is being prepared. 230 प्रत्याशियों को पत्र लिख 30 नवंबर तक मंगाए भाजपा को फायदा पहुंचाने वाले अधकारियों के नाम, मध्य प्रदेश में कांग्रेस बनाने लगी अभी से सबक सिखाने वाले अफसरों की लिस्ट Udit Narayanमध्य प्रदेश में मतदान के बाद कांग्रेस पार्टी ने अपने सभी 230 उम्मीदवारों को एक लेटर लिखकर उन अधिकारियों का नाम बताने को कहा है जिन्होंने कथित तौर पर नियमों के खिलाफ भाजपा के पक्ष में काम किया। भोपाल। मध्य प्रदेश में मतदान के बाद कांग्रेस पार्टी ने अपने सभी 230 उम्मीदवारों को एक लेटर लिखकर उन अधिकारियों का नाम बताने को कहा है कि जिन्होंने कथित तौर पर नियमों के खिलाफ काम करते हुए भारतीय जनता पार्टी को फायदा पहुंचाया। मध्य प्रदेश में जीत का दावा कर रही कांग्रेस पार्टी को यदि सत्ता मिलती है तो ऐसे अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि, भाजपा ने कहा है कि इस कदम के सहारे कांग्रेस पार्टी अपनी हार के लिए बहाना तलाश रही है। भाजपा को फायदा पहुंचाने नियमों की अनदेखी कीअपने सभी उम्मीदवारों को भेजे खत में मध्य प्रदेश कांग्रेस कमिटी (एमपीसीसी) ने दावा किया कि 17 नवंबर को मतदान के दिन बनाए गए कंट्रोल रूम में ऐसे अफसरों और कर्मचारियों की शिकायतें मिली, जिन्होंने नियम के खिलाफ काम करते हुए भाजपा को फायदा पहुंचाया। एमपीसीसी उपाध्यक्ष राजीव सिंह ने लेटर में उम्मीदवारों से कहा है कि ऐसे कर्मचारियों और अधिकारियों का नाम बताए। साथ में उनका पद और तैनाती को लेकर भी जानकारी देने को कहा है। सभी प्रत्याशियों से ऐसे अफसरों की सूची 30 नवंबर तक भेजने को कहा गया है। कमलनाथ कई बार दोहरा चुके हैं बयानगौरतलब है कि चुनाव प्रचार के दौरान मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रमुख कमलनाथ ने अधिकारियों और कर्मचारियों पर कई बार आरोप लगाया कि वे बीजेपी के समर्थन में काम कर रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस की सरकार बनने पर कार्रवाई की चेतावनी दी थी। नाथ ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा पुलिस, पैसा और प्रशासन का इस्तेमाल अपने पक्ष में कर रही है। वे यह भी कई सभाओं में कहते हुए सुने गए हैं कि अधिकारी याद रखें कि कल के बाद परसों भी आएगा। उनके बयान से साफ है कि उनके तेवर सख्त हैं और और अगर कांग्रेस पार्टी की सरकार बनी तो ऐसे अधिकारियों की मुश्िकलें अवश्य बढ़ेंगी, जो भाजपा के पक्ष में काम करते हैं। भाजपा नेताओं ने इस मुद्दे पर कहा कि कांग्रेस पार्टी अपनी हार के लिए बहाना तलाश रही है। कोठारी ने कहा कि सरकारी कर्मचारी और अधिकारी लोकतंत्र के शक्तिशाली अभिभावक है और कांग्रेस ने पहले ही उन पर सवाल उठाकर अपना भरोसा खो दिया है। जिनके पास पोलिंग बूथ पर बैठने के लिए कार्यकर्ता तक नहीं हैं, वे ऐसे झूठे आरोप लगा रहे हैं। मध्य प्रदेश में सबी 230 सीटों पर 17 नवंबर को वोट डाले गए और 3 दिसंबर को नतीजे घोषित होंगे।

काउंटिंग से पहले कांग्रेस के सभी पोलिंग एजेंट और 230 प्रत्याशियों की होगी ट्रेनिंग.

Before the counting, all polling agents of the Congress and 230 candidates will undergo training 26 नवंबर को सभी उम्मीदवारों को बुलाया, ईवीएम की मानीटिरिंग और गणना का होगा प्रशिक्षण Udit Narayanभोपाल। प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2023 के लिए मतदान संपन्न हो चुका है। सभी प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला एश्ट में कैद है। आगामी 3 दिसंबर को मतों की गणना की जाएगी। वहीं मतगणना की तैयारी में सभी राजनीतिक पार्टियां जुट गई है। इसी कड़ी में मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने अपने विधानसभा प्रत्याशी को राजधानी भोपाल बुलाया है। जानकारी के अनुसार, एमपी कांग्रेस ने मध्य प्रदेश के सभी 230 विधायक प्रत्याशियों को ट्रेनिंग के लिए राजधानी भोपाल बुलाया गया है। विधायक प्रत्याशी और मतगणना एजेंट को ट्रेनिंग दी जाएगी। आपको बता दें कि, 26 नवंबर को एमपी कांग्रेस द्वारा ट्रेनिंग कैंप लगाया जा रहा है। ट्रेनिंग में प्रत्याशियों को मतगणना से संबंधित जानकारी दी जाएगी। प्रत्याशियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे खुद के साथ पोलिंग एजेंट को भी साथ में लेकर आएंगे। बता दें कि, ट्रेनिंग में मतगणना के दौरान किन-किन बातों का ध्यान रखना है। इस बात की विशेष जानकारी (टिप्स) दी जाएगी। ट्रेनिंग में ईवीएम और वीवीपैट की भी जानकारी दी जाएगी। बता दें कि, साल 2018 में हुए विधानसभा चुनाव के बाद भी कांग्रेस ने मतगणना के पहले प्रत्याशियों को इसी तरह ट्रेनिंग के लिए बुलाई थी। उसी कड़ी में इसबार भी ऐसा किया जा रहा है। इसके साथ कांग्रेस की ओर से कहा गया था कि स्ट्रांग रूम में रखी मशीनों की लाइव जानकारी हर एक प्रत्याशी को मिले। स्ट्रांग रूम में लगे कैमरे का लिंक प्रत्याशी को दिया जाए, ताकि वह अपनी सुविधा के मुताबिक स्ट्रांग रूम में रखी ईवीएम मशीनों की गणना तक उन पर नजर रख सके।

नातीराजा के खिलाफ हत्या के प्रयास का प्रकरण दर्ज, 12 अन्य कांग्रेस समर्थक भी बनाए गए आरोपी

Case has been registered against an attempted murder of Nati Raja, with 12 other Congress supporters also accused. Udit Narayanभोपाल। छतरपुर जिले के राजनगर विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस विधायक विक्रम सिंह नातीराजा के ड्राइवर सलमान की मौत के मामले ने सियासी रंग ले लिया है। इस मामले में पुलिस ने पहले ही भाजपा प्रत्याशी अरविंद पटैरिया सहित 21 लोगों के खिलाफ हत्या एवं हत्या के प्रयास का प्रकरण दर्ज कर लिया था। अब भाजपा के दबाव में नातीराजा सिह एक दर्जँन लोगों के खिलाफ भी धारा 307 के तहत हत्या के प्रयास का प्रकरण दर्ज हो गया।घटना मतदान के पूर्व की रात की थी। जैसे ही मतदान निबटा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह राजनगर पहुंच गए और भाजपा प्रत्याशी अरविंद पटैरिया सहित अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर धरना दे दिया। पुलिस अधीक्षक छतरपुर के आश्वासन के बाद दिग्विजय ने रात पर चला अपना धरना तो समाप्त कर दिया लेकिन यह दांव नातीराजा के लिए उलटा पड़ गया। अगले ही दिन प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा सहित पूरी भाजपा सक्रिय हो गई। पुलिस महानिदेशक और निर्वाचन आयोग को शिकायत कर अरविंद पटैरिया के खिलाफ की गई कार्रवाई को पक्षपातपूर्ण बताया गया। भाजपा ने कहा कि सलमान की मौत के लिए नातीराजा ही जवाबदार हैं। नतीजा यह हुआ कि पुलिस ने नातीराजा सहित कांग्रेस के अन्य 12 समर्थकों के खिलाफ भी पुलिस ने हत्या के प्रयास का प्रकरण दर्ज कर लिया। वीडी शर्मा ने आज छतरपुर में भाजपा के तमाम नेताओं के साथ पुलिस अधीक्षक और कलेक्टर को भी ज्ञापन सौंपा और दाेषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

निर्वाचन आयोग के शांतिपूर्ण चुनाव कराने के दावों की खुली पोल.

Open scrutiny of the claims to conduct peaceful elections by the Election Commission. आचार संहिता पर उठे सवाल, चुनाव में सुरक्षा व्यवस्था हुई तार-तार, मप्र में लगभग दो दर्जन से अधिक स्थानों पर भड़की हिंसा. प्रदेश के मालवा-निमाड़ में मारपीट के साथ चली तलवारें, ग्वालियर-चंबल में जमकर फायरिंग-मारपीट, पत्थरबाजी, बुंदेलखंड में कांग्रेस प्रत्याशी के समर्थक को भाजपा समर्थकों ने उतारा मौत के घाट Udit Narayanभोपाल। मप्र विधानसभा चुनाव 2023 का चुनाव िहंसा, मारपीट, फायरिंग के नाम से जाना जाएगा। यह हिंसक घटनाएं अब चुनावी इितहास बन गई हैं। 25 दिनों तक चले चुनावी कार्यक्रम को लेकर निर्वाचन आयोग द्वारा किए गए सुरक्षा व्यवस्था के दावों का गुब्बारा 17 नवंबर को उस समय फूट गया, जब सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों के जरिए तेजी से वायरल दर्जनों हिंसक घटनाओं की खबरें सामने आई थी। बारी-बारी से आई इन घटनाओं ने दिनभर लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा। चुनाव आयोग ने खूब दावे किए कि प्रदेश की 230 विधानसभाओं में शांतिपूर्ण चुनाव कराएंगे, लेकिन 17 तारीख को मतदान के दिन इन दावों की पोल खुल गई। जबकि, मध्य प्रदेश में निर्वाचन आयोग ने शांतिपूर्ण मतदान के लिए ढाई लाख से अधिक सुरक्षाकर्मी तैनात किए थे। प्रदेश के विभिन्न अंचलों में लगभग दो दर्जन से अधिक स्थानों पर हिंसा भड़की, लात-घूसों और डंडों से मारपीट के साथ ही म्यान में बंद खून की प्यासी तलवारें भी निकलीं। जिसने कई लोगों की जान का आफत में डाल दिया। वहीं इससे भी बड़ी घटना बुंदेलखंड के छतरपुर जिले की विधानसभा राजनगर में हुई। जहां कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी के समर्थक को भाजपा प्रत्याशी के समर्थकों ने मौत के घाट उतार दिया। हालांकि किसी की जान जाने के बाद पुलिस ने डेढ़ दर्जन लोगों पर हत्या का मामला दर्ज कर लिया। इस चुनाव मतदान का 17 नवंबर 2023 वाला ‘शुक्रवार’ सैकड़ों लोगों को पांच साल नहीं, बल्िक जिंदगी भर रूलाएगा।बता दें चुनाव आयोग ने 230 विधानसभा सीटों के लिए करीब 65 हजार मतदान केंद्र बनाए। सुरक्षा के साये में शांतिपूर्ण चुनाव कराने करीब 4 लाख कर्मियों की ड‍यूटी लगाई गई थी। इनमें ढाई लाख सुरक्षाकर्मी शामिल थे, बावजूद प्रदेशभर में िहंसा ने भयानक रूप धारण कर लिया। इससे सवाल उठता है कि यह चुनाव आयोग की लापरवाही का नतीजा नहीं तो और क्या है? दरअसल, मप्र के चुनाव आयोग ने तय चुनावी रस्म अदायगी वाली तैयारियों के साथ चुनाव के कार्यक्रमों का ऐलान कर दिया। 17 नवंबर को मतदान होने के बाद 3 दिसंबर को आने वाले परिणामों की ओर लोगों की नजरें टिकी हैं । चुनाव आयोग ने 230 विधानसभा सीटों के लिए करीब 65 हजार मतदान केंद्र बनाए गए थे। इनमें 25 फीसदी संवेदनशील केंद्र चिन्िहत किए गए थे। ऐसे संवेदनशील केंद्रों पर सेंट्रल फोर्स के साथ ही प्रदेश की पुलिस लगाई गई थी। मतदान केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे, माइक्रो ऑब्जर्वर और पेट्रोलिंग कराई गई। प्रदेश के सबसे ज्यादा हथियार चलाने वाले भिंड, मुरैना जिले में अतिरिक्त पुलिस बल लगाया गया था। यहां पुलिस को सुरक्षा के सख्त निर्देश थे। प्रदेश के मुख्य चुनाव आयुक्त अनुपम राजन ने बताया कि प्रदेश में भयमुक्त और निष्पक्ष चुनाव 2 लाख लोगों पर प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की। 2 लाख 85 हजार लाइसेंसी हथियारों को थानों पर जब्त किया गया था। छतरपुर में कांग्रेस समर्थक की हत्या :छतरपुर जिले के राजनगर विधानसभा क्षेत्र में एक कांग्रेस समर्थक को भाजपा के समर्थकों ने मौत मौत के घाट उतार दिया था। भिंड के मेहगांव क्षेत्र के मनहद गांव में मतदान केंद्र के बाहर पथराव होने से भाजपा प्रत्याशी राकेश शुक्ला घायल हो गए हैं। राकेश को मामूली चोटें आई हैं। मेहगांव विधानसभा क्षेत्र में अज्ञात लोगों की गोलीबारी में भाजपा उम्मीदवार और आप समर्थक घायल हो गए हैं। इंदौर में दो गुटों में झड़प हुई। महू में मतदान के दौरान तलवारें चली, जिसमें दो लोग घायल हो गए। इसके अलावा अन्य स्थानों पर भी िहंसक घटनाएं घटित हुईं। यह सब घटनाएं पुलिस की नाकामी की ओर इशारा करती है। यह घटनाएं निर्वाचन आयोग की लापरवाही की पोल खोलने के लिए काफी है। चुनावी मैदान में उतरे थे 2533 उम्मीदवार :इस बार एमपी के चुनाव में 2,533 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं। इसमें 2,280 पुरुष और 252 महिलाएं हैं। एक प्रत्याशी थर्ड जेंडर का है। भाजपा और कांग्रेस के उम्मीदवार सभी 230 सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं। जबकि, बसपा ने 181, सपा ने 71 और आम आदमी पार्टी ने 66 उम्मीदवार उतारे हैं।

मप्र में सबसे ज्यादा वोटिंग सिवनी व सबसे कम जोबट में वोटिंग.

In Madhya Pradesh, the highest voting turnout is in Sivani, and the lowest voting turnout is in Jobat. मप्र में सबसे ज्यादा वोटिंग सिवनी व सबसे कम वोटिंग जोबट में हुई, मतगणना के बाद फैसला होगा कि जीत का सेहरा किसके सिर पर बंधेंगा। सबसे कम वोटिंग में मालवा निमाड़ अंचल का जोबट जुड़ गया है। भोपाल। मप्र के विधानसभा चुनाव में इस बार मालवा निमाड़ के साथ ही महाकौशल अंचल में सबसे अधिक वोटिंग हुई। इसमें भी सबसे अधिक वोट सिवनी में पड़ा। यहां कुल वोट में से 85.68 फीसदी वोट पड़ा है। सिवनी में भाजपा से दिनेश राय मुनमुन मैदान में थे। जबकि कांग्रेस से आनंद पंजवानी चुनाव लड़ रहे थे। यहां मुनमुन की स्थिति अच्छी मानी जाती है, यहां से वे एक बार तो निर्दलीय चुनाव जीत चुके हैं। इसके बाद भाजपा में शामिल हो गए। दूसरे नंबर पर बालाघाट में 85.23 फीसदी वोट पड़े। जबकि सबसे कम वोट अलीराजपुर जिले के जोबट में महज 54.04 फीसदी रहा। बालाघाट में इस बार भाजपा के पुराने नेता गौरीशंकर बिसेन ने अपनी बेटी मौसम बिसेन काे टिकट दिलवाया था। कांग्रेस ने अनुभा मुंजारे मैदान में उतारा था। दोनों के बीच कांटे की टक्कर थी। प्रदेश में सभी 230 विधानसभा सीटों में से दूसरे नंबर पर सबसे अधिक वोट पड़े हैं। किंतु किसके पक्ष में ज्यादा वोट पड़े या फिर जीत का सेहरा किसके माथे पर बंधेगा, यह मतगणना 3 दिसंबर के बाद ही पता चलेगा। उधर, सबसे कम वोटिंग में मालवा निमाड़ अंचल का जोबट जुड़ गया है। यहां एक रिकार्ड बन गया है। इतनी कम वोटिंग इस विधानसभा क्षेत्र में पहले कभी नहीं हुई थी। जोबट से भाजपा के विशाल रावत व कांग्रेस प्रत्याशी सेना पटेल के बीच शुरू से ही कांटे का मुकाबला माना जा रहा था, हालांकि काफी कम वोट मिलने से असमंजस की स्थिति है कि आखिर में जीत का सेहरा किसके सिर पर बंधेगा।  सबसे अधिक वोट प्रतिशत वाले 10 विधानसभा क्षेत्र-सिवनी व बालाघाट के बाद तीसरे नंबर पर वोटिंग आगर मालवा में 85.03 फीसदी हुई है। इसके चौथे नंबर पर शाजापुर रहा। यहां 84.99 फीसदी वोट पड़े। पांचवें नंबर पर राजगढ़ रहा। यहां कुल 84.29 फीसदी वोट पड़े हैं। यह क्षेत्र हालांकि मध्य क्षेत्र में आता है। मध्य भारत में यह एक मात्र सीट है, जहां से बंपर वोटिंग हुई है। राजगढ़ से भाजपा ने अमर सिंह यादव को मैदान में उतारा है, जबकि कांग्रेस ने बाबू सिंह तंवर को टिकट दिया है। राजगढ़ में इतनी जबरदस्त वोटिंग होने को लेकर खुद यहां के लोग हैरान हैं। इस सीट पर भाजपा व कांग्रेस दोनों के बीच कांटे की टक्कर है। छठवें नंबर पर रतलाम 83.40 फीसदी व सांतवें पर नीमच है। यहां 83.30 फीसदी वोट पड़े। भाजपा ने दिलीप सिंह परिहार व कांग्रेस ने उमराव सिंह गुर्जर को मैदान में उतारा है। आठवें सबसे अधिक वोटिंग में मंदसौर है। यहां 83.28 फीसदी वोट पड़े हैं। भाजपा के कद्दावर नेता यशपाल सिंह सिसोदिया व कांग्रेस से विपिन जैन मैदान में हैं। नौवें पर छिंदवाड़ा में पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ मैदान मेंप्रदेश में 10 सबसे अधिक वोटिंग वाले विधानसभा क्षेत्र में नौवें नंबर पर छिंदवाड़ा का भी नाम है। यहां से कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ मैदान में हैं, जबकि भाजपा ने विवेक बंटी साहू काे टिकट दिया है। नाथ की वजह से इस सीट पर प्रदेश भर की नजरें थी। अब बंपर मतदान करके मतदाताआंे ने अपने प्रत्याशी के प्रति विश्वास जता दिया है। 10 वें नंबर पर नरसिंहपुर है। यहां से केंद्रीय मंत्री व भाजपा प्रत्याशी प्रह्लाद पटेल चुनाव मैदान में हैं। जबकि कांग्रेस ने लाखन सिंह पटेल का टिकट दिया है। इस सीट पर भी प्रदेश भर की नजरें तो थी ही साथ में देश के कई राज्यों के नेताओं की नजर थी। भाजपा के लिए यह सीट थोड़ी कठिन बन गई थी, इसलिए केंद्रीय मंत्री पटेल को चुनाव मैदान में उतारा। भोपाल के दक्षिण पश्चिम सबसे कम में तीसरे नंबर पर-सबसे कम वोटिंग वाले विधानसभा क्षेत्रों में से सबसे पहले अलीराजपुर जिले का जोबट क्षेत्र हैं। दूसरा सबसे कम ग्वालियर जिले का ग्वालियर पूर्व क्षेत्र है। यहां 57.33 फीसदी वोट पड़े। तीसरे सबसे कम का रिकार्ड इस बार भोपाल दक्षिण पश्चिम का रहा। यहां से महज 58.2 फीसदी वोटिंग हुई। इस क्षेत्र में सबसे ज्यादा आबादी सरकारी कर्मचारियों व अधिकारियों की है। लेकिन सरकारी कर्मचारी वोट देने ही नहीं निकले। इसे क्षेत्र में कांग्रेस के पूर्व मंत्री पीसी शर्मा व व भाजपा के भगवान दास सबनानी मैदान में हैं। चौथे सबसे कम में भिंड क्षेत्र रहा। यहां महज 58.57 फीसदी वोट पड़े। पांचवें सबसे कम में भी भोपाल मध्य का नाम दर्ज हो गया है। यहां से 60.1 फीसदी वोट पड़े। मध्य से भाजपा ने धु्व नारायण सिंह को मैदान में उतारा है, जबकि कांग्रेस ने आरिफ मसूद को टिकट दिया था। छठवें सबसे कम में मुरैना का अंबाह व सांतवे पर भिंड का गोहद क्षेत्र है। आंठवे पर भिंड का गोहद व नौवें पर रीवा का मेहगांव क्षेत्र रहा। 10 वें सबसे कम वोटिंग में भोपाल का गोविंदपुरा क्षेत्र है।

भारत निर्वाचन आयोग के प्रेक्षक ने इतिहासिक इमारतों का किया अवलोकन.

The inspector of the Election Commission of India conducted an inspection of historical buildings. निर्वाचन आयोग के प्रेक्षक माला देवी का अवलोकन करते हुए Sitaram Kushwaha. विदिशा, ग्यारसपुर में भारत निर्वाचन आयोग के प्रेक्षक के द्वारा ग्यारसपुर की ऐतिहासिक इमारतों का अवलोकन किया गया आपको बता दें की मध्य प्रदेश में विधानसभा के चुनाव संपन्न हो गए हैं चुनाव संपन्न होने के पश्चात भोपाल लौटते समय ग्यारसपुर की नवी और दसवीं सदी मैं निर्मित ऐतिहासिक इमारतें माला देवी मंदिर, हिंडोला तोरण ,आठ खम्मा, बाजारा मठ का भारत निर्वाचन आयोग के प्रेक्षक के द्वारा अवलोकन किया गया उन्होंने बताया है कि ग्यारसपुर एक ऐतिहासिक और विरासत नगरी है जहां पर आज भी 9वी और 10वीं की इमारते खड़ी हुई हैं, पुरातत्व सर्वेक्षण इंडिया को इन इमारत के संरक्षण करने की आवश्यकता है माला देवी मंदिर के पत्थर जगह-जगह से गिर रहे हैं, माला देवी की रखवाली कर रहे गार्ड से उन्होंने माला देवी के विषय में जानकारी ली वहीं उन्होंने बताया है कि 8 साल से माला देवी का मुख्य द्वार बंद है सुरक्षा कारणों के चलते पर्यटकों को अंदर प्रवेश नहीं दिया जाता । माला देवी के अंदर भगवान बुद्ध की प्रतिमा स्थापित है वहीं गलियारे में 12 फीट की भगवान महावीर की खड़ी हुई प्रतिमा स्थापित है मुख्य द्वार के ऊपर माला देवी की प्रतिमा है द्वार के दोनों तरफ गंगा और जमुना की प्रतिमा अंकित है ।

मध्य प्रदेश में 150 सीटों से अधिक आए इस लक्ष्य को लेकर हम सबने काम किया:- नरेंद्र सिंह तोमर।

We all worked towards the goal of getting more than 150 seats in Madhya Pradesh: Narendra Singh Tomar. प्रचंड बहुमत के साथ बन रही है भारतीय जनता पार्टी कि सरकार। मतदान करने पहुंचे केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने किया बड़ा दावा। सुभाष पांडेय ग्वालियर। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने आज ग्वालियर में मुरार स्थित मतदान केंद्र पर वोट डाला, इस दौरान उन्होंने कहा कि भाजपा के पक्ष में माहौल है और मैं ये दावे से कह सकता हूँ कि मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाएगी। उन्होंने कांग्रेस का दावे पर कहा कि कांग्रेस क्या कह रही है हमें नहीं पता लेकिन हम ये दावा कर रहे हैं कि मप्र में भाजपा की सर्कार बन रही है।  मतदान करने के बाद मीडिया से बात करते हुए केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा है कि मध्य प्रदेश की जनता मतदान में बढ़ चढ़कर हिस्सा ले रही है, जो रुझान मुझे दिखाई दे रहा है उस पर भारतीय जनता पार्टी का समर्थन देखने को मिल रहा है। हमें विश्वास है जो प्रदेश भर में वातावरण है उसके आधार पर प्रचंड बहुमत से भारतीय जनता पार्टी की सरकार बन रही है। मध्य प्रदेश में सरकार बनने पर चंबल से मुख्यमंत्री होने के सवाल पर केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा है भारतीय जनता पार्टी में पद की स्पर्धा नहीं है बल्कि जीतने की स्पर्धा है। मध्य प्रदेश में 150 सीटों से अधिक आए इस लक्ष्य को लेकर हम सब काम कर रहे हैं। दिमनी सहित चम्बल अंचल में हुए पथराव और फायरिंग के सवाल पर तोमर ने कहा है कि चुनाव में हिंसा का कोई स्थान नहीं है कांग्रेस के लोग भयभीत और घबराए हुए है हार की वजह से इस तरह का माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं। कहीं कांग्रेस के लोग झगडे कर रहे हैं कहीं बीएसपी के लोग लेकिन जनता सब जान रही है। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण मतदान होगा और भारतीय जनता पार्टी की विजय होगी।  राहुल गांधी के 150 सीटें जीतने के दावे पर जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री तोमर ने कहा कि कांग्रेस क्या कहती है? कौन क्या दावे कर रहा है हमें नहीं मालूम, लेकिन हम ये दावा कर रहे हैं की मप्र में भारतीय जनता पार्टी पूर्ण बहुमत की सरकार बना रही है।

शिवपुरी में मतदान के बाद देर रात दो गुटों में खूनी संघर्ष, इलाज के दौरान तीन लोगों ने दम तोड़।

Bloody clash between two groups late night after voting in Shivpuri, three people died during treatment. शिवपुरी में मतदान के बाद पुरानी रंजिश के चलते हुआ पथराव, आगजनी और गोलीकांड। दोनों गुटों के 12 से ज्यादा लोग हुए घायल, एक महिला सहित तीन की इलाज के दौरान मौत। संतोष सिंह तोमर ग्वालियर / शिवपुरी। जिले के नरवर थाना क्षेत्र के चकरामपुर गांव में 17 नवंबर को मतदान के बाद दो गुटों में रंजिश को लेकर खूनी संघर्ष हो गया। पथराव, आगजनी और गोलीकांड में दोनों गुटों के 12 से ज्यादा लोग घायल हो गए। घायलों को इलाज के लिए पहले नरवर फिर ग्वालियर रेफर किया गया था, जहां इलाज के दौरान शनिवार को ग्वालियर में एक महिला और दो युवकों की मौत हो गई। हिंसा के बाद गांव में तनाव का माहौल है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने गांव को छावनी में तब्दील कर दिया है। एसपी रघुवंश सिंह भदौरिया भारी पुलिस बल के साथ गांव में मौजूद हैं। योगेंद्र उर्फ गोला पुत्र मुन्ना भदौरिया का गांव के ही दिनेश कुशवाह से दो माह पहले विवाद हो गया था। तभी से दोनों परिवारों में रंजिश चली आ रही थी। 17 नवंबर को वोटिंग के बाद रात में दोनों परिवारों के युवकों में रंजिश को लेकर विवाद हो गया। इसके कुछ देर बाद ही दोनों गुटों के लोग आमने-सामने आ गए और एक-दूसरे पर पथराव शुरू कर दिया। इसके बाद दोनों गुटों ने लाठी-डंडों से एक-दूसरे पर हमला कर दिया। इस दौरान हुई गोलीबारी में कुशवाह समाज के एक युवक को गोली लग गई। इस खूनी संघर्ष के दौरान हुई आगजनी में एक बोलेरो कार भी जलकर राख हो गई। खूनी संघर्ष में मुन्ना भदौरिया की पत्नी आशा देवी उम्र 55 वर्ष, भाई लक्ष्मण और हिमांशु सेंगर गोली लगने से गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके अतिरिक्त मुन्ना भदौरिया के दो बेटे राजेंद्र भदौरिया और भोला भदौरिया घायल हुए थे। सभी घायलों को पहले नरवर के स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया, जहां से सभी घायलों को ग्वालियर रेफर कर दिया गया था। इस झगडे़ में मुन्ना भदौरिया की पत्नी आशादेवी और आशादेवी के भतीजे हिमांशु सेंगर और लक्ष्मण भदौरिया की ग्वालियर में मौत हो चुकी है। कुशवाह परिवार के सदस्यों का उपचार भी ग्वालियर के अस्पताल में जारी है। करैरा एसडीओपी शिवनारायण मुकाती ने बताया कि पुलिस ने इस मामले में दोनों पक्षों पर बलवा सहित हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया था। एक पक्ष के तीन लोगों की मौत के बाद पुलिस ने अब हत्या की धारा बढ़ाकर मामले की जांच शुरू कर दी है।

जबलपुर में मतदान के अंतिम चरण में हिंसक वारदातें, भाजपा कांग्रेस प्रत्याशी समर्थक आपस में भिड़े।

Violent incidents in the last phase of voting in Jabalpur, supporters of BJP and Congress candidates clashed with each other. जमकर हुआ पथराव,चले गोली और बम। बमबाजी में पुलिस का एएसआई घायल। विशेष संवाददाता जबलपुर। विधानसभा चुनाव में मतदान के दौरान जिले के घमापुर क्षेत्र में भाजपा प्रत्याशी अंचल सोनकर तथा कांग्रेस प्रत्याशी लखन घनघोरिया के गुटों में टकराव हो गया। इस दौरान फायरिंग की घटना में एएसआई गोपाल सिंह को चोट आई है और उसके कान में छर्रे लगे हैं। जबलपुर में मतदान के अंतिम 15 मिनट में कई स्थानों पर हिंसक वारदात घटित हुई। पूर्व विधानसभा क्षेत्र के घमापुर में फायरिंग की घटना में एक पुलिसकर्मी घायल हो गया। इस विधानसभा क्षेत्र के भान तलैया क्षेत्र में पथराव की घटना भी हुई। स्थिति को नियंत्रित करने पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा। पुलिस अधीक्षक आदित्य प्रताप सिंह के अनुसार मतदान के अंतिम 15 मिनट में कई स्थानों में हिसंक घटना घटित हुई हैं। पूर्व विधानसभा के अंतर्गत घमापुर क्षेत्र में कांग्रेस भाजपा प्रत्याशी अंचल सोनकर तथा कांग्रेस प्रत्याशी लखन घनघोरिया के गुटों में टकराव हो गया। इस दौरान फायरिंग की घटना में एएसआई गोपाल सिंह को चोट आई है और उसके कान में छर्रे लगे हैं। हिंसा के मामले में पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है, टकराव के कारण व आरोपियों के संबंध में जांच जारी है। उन्होंने बताया कि पूर्व विधानसभा के अंतर्गत भान तलैया क्षेत्र में पथराव की घटना हुई है। केंट विधानसभा अंतर्गत गोराबाजार तथा रांझी क्षेत्र में कांग्रेस व भाजपा प्रत्याशी के समर्थक आमने-सामने आ गए थे। मध्य-उत्तर विधानसभा अंतर्गत मिलौनीगंज तथा हनुमानताल क्षेत्र में भी टकराव की स्थिति निर्मित हुई थी। प्राप्त जानकारी के अनुसार कांग्रेस प्रत्याशी समर्थक तथा पूर्व पार्षद कल्लन गुप्ता के कार्यालय के सामने हुई हिंसक वारदात के दौरान फायरिंग के साथ जमकर बम व पत्थर चले। इस हिंसक वारदात में कई व्यक्तियों को चोटें आई हैं। इसके बाद सांसद राकेश सिंह, भाजपा प्रत्याशी अंचल सोनकर सहित कई भाजपा नेता थाने पहुंच गए थे। यह हिंसक घटना पुलिस बल की मौजूदगी में हुई। पुलिस अधीक्षक ने घटनास्थल में पहुंचकर मोर्चा संभाला और स्थिति को नियंत्रित करने पुलिस को हलके बल का प्रयोग भी करना था। घटना के बाद क्षेत्र में पूरी तरह से सन्नाटा पसर गया था।

छुटपुट घटनाओं के बीच ग्वालियर में शांतिपूर्ण रहा मतदान।

Voting remained peaceful in Gwalior amid minor incidents. कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के चलते नहीं हुआ कोई बड़ा झगड़ा फसाद। भाजपा और कांग्रेस के बीच ही दिखाई दे रहा है सीधा मुकाबला। संतोष सिंह तोमर ग्वालियर। मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के चलते ग्वालियर जिले के सभी 6 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों के 1659 मतदान केंद्रों और 3 सहायक मतदान केन्द्रों पर वोट डाले गये। छुटपुट घटनाओं को छोड़कर मतदान शांतिपूर्वक संपन्न हुआ। मौसम में ठंडक होने के कारण सुबह मतदान केंद्रों पर भीड़ कम ही रही, लेकिन जैसे जैसे दिन चढ़ा मतदान केन्द्रों पर लाईन भी बढ़ती चली गई। चुनाव आयोग ने भले ही तमाम वायदे वोटिंग को लेकर किये हो, लेकिन मतदान के समय भी लोग अपने वोटर कार्ड लेकर घूमते दिखे। जबकि उनका नाम वोटर लिस्ट में था ही नहीं आयोग द्वारा नियुक्त एजेंटों द्वारा इसको लेकर कहा गया कि मतदाता की पुष्टि नहीं हुई होगी, इसके कारण नाम कट गया होगा, यह कहकर पलड़ा झाड़ लिया गया। ग्वालियर ग्रामीण के 269, ग्वालियर के 303, ग्वालियर पूर्व के 319, ग्वालियर दक्षिण के 249, भितरवार के 266 और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र डबरा (अजा) के 256 मतदान केन्द्रों पर वोट डाले गये। लोकतंत्र के इस महापर्व में मतदाता रूपी जनता ने अपने मताधिकार का उपयोग कर नई सरकार चुन ली है। साथ ही अपने क्षेत्र के विधायक को भी चुन लिया। मतदान के दौरान चाक चौबंद रही कानून व्यवस्था ग्वालियर में मतदान के लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। जिले की छह विधानसभा सीटों के लिए दस हजार से ज्यादा मध्यप्रदेश पुलिस के जवानों के अलावा बीएसएफ और क्यूआरएफ फोर्स को बड़ी संख्या में तैनाती की गई थी। संवेदनशील बूथों की सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी के लिए पहली बार ड्रोन कैमरों की भी तैनाती की गई थी। कलेक्टर अक्षय कुमार सिंह एवं पुलिस अधीक्षक राजेश सिंह चन्देल पूरे समय मतदान केन्द्रों पर घूम-घूम कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेते रहे।ग्वालियर में 16 लाख 24 हजार 567 वोटर्स हैं। इनमे 7 लाख 5 हजार 871 महिला वोटर हैं। इन चुनावों में पहली बार अस्सी साल से ज्यादा वाले बुजुर्गों को घर पर ही वोट डालने का अधिकार मिला था। ऐसे वोटर्स की संख्या 17081 है। जिले में 275 बूथ संवेदनशील भी थे जिनकी सुरक्षा के खास इंतजान किए गए थे। हालांकि शहर में मतदान प्रक्रिया के दौरान दो से तीन स्थानों पर लड़ाई झगडे की खबरें भी आईं थीं लेकिन पुलिस अधिकारियों की मुस्तैदी और चाक चौबंद सुरक्षा व्यवस्था के चलते छोटे छोटे विवाद तो देखने को मिले लेकिन ये विवाद किसी बड़े झगड़े या अप्रीय घटना का कारण नहीं बन सके, कुल मिलाकर शहर में मतदान प्रक्रिया शांतिपूर्ण रही। दांव पर लगी मंत्री और पूर्व मंत्रिओं की शाख ग्वालियर में भाजपा के दो वर्तमान मंत्री ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर और भारत सिंह कुशवाहा के अलावा तीन पूर्व मंत्री माया सिंह, इमरती देवी और नारायण सिंह कुशवाह और कांग्रेस के पूर्व मंत्री लाखन सिंह यादव मैदान में हैं। इस चुनाव में इन सभी वर्तमान एवं पूर्व मंत्रिओं की शाख दांव पर लगी है। अब यह तो तीन तारीख को आने वाले चुनाव परिणाम ही बताएंगे कि किसकी शाख बचेगी और किसकी डूबेगी। जिसका इंतजार सभी को रहेगा। आपको बता दें कि सुबह निर्धारित समय पर राजनीतिक दलों द्वारा नियुक्त पोलिंग एजेंट्स की मौजूदगी में ईवीएम मशीनों का मॉक टेस्ट हुआ और फिर वैधानिक प्रक्रिया शुरू करने के बाद मतदान शुरू हुआ था। पोलिंग बूथों पर लगी रही मतदाताओं की भीड़ ग्वालियर की 6 विधानसभा सीटों पर लोकतंत्र के महापर्व को लेकर उत्साह चरम पर रहा। सुबह 7 बजे से ही पोलिंग बूथों पर वोट डालने के लिये मतदाताओं को पहुंचना शुरू हो गया था। दिन चढ़ते ही पोलिंग बूथों पर लोगों की लाइनें लगना शुरू हो गई थी। लोग अपनी बारी का इंतजार करते रहे। कई मतदान केन्द्रों पर मतदान धीमे होने की शिकायतें भी सामने आई। वहीं मतदान का समय पूर्ण होने पर भी कुछ पोलिंग बूथों पर मतदाताओं की लंबी लाइन लगीं दिखाई दीं। जिसके चलते लाइन में लगे हुए मतदाताओं को मतदान केंद्रों के अंदर कर दिया गया और कुछ अतरिक्त समय का उपयोग कर मतदान पूर्ण कराया गया। भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला ग्वालियर दक्षिण की बात करें तो यहां कांग्रेस के मौजूदा विधायक प्रवीण पाठक और पूर्व मंत्री भाजपा प्रत्याशी नारायण सिंह कुशवाह के बीच सीधी लडाई है। ग्वालियर पूर्व में कांग्रेस के मौजूदा विधायक डा. सतीश सिंह सिकरवार और पूर्व मंत्री भाजपा नेत्री माया सिंह के बीच मुकाबला है। जबकि ग्वालियर विधानसभा में मंत्री भाजपा प्रत्याशी प्रद्युम्न सिंह तोमर और कांग्रेस प्रत्याशी सुनील शर्मा के बीच कांटे का मुकाबला है। ग्रामीण विधानसभा में भाजपा नेता मंत्री भारत सिंह कुशवाह और कांग्रेस प्रत्याशी साहब सिंह गुर्जर में आमने सामने की टक्कर है। भितरवार में कांग्रेस के मौजूदा विधायक लाखन सिंह और भाजपा के मोहन सिंह राठौर के बीच मुकाबला है वहीं डबरा में पूर्व मंत्री भाजपा नेत्री इमरती देवी और कांग्रेस के मौजूदा विधायक सुरेश राजे में सीधा मुकाबला है।

मुरैना में पूर्व सरपंच को गोली मारी, हालत गंभीर।

Former Sarpanch shot in Morena, condition critical. आधा दर्जन हथियारबंद बाइक सवार बदमाशों ने चलाई गोलियां। घायल को ग्वालियर रेफर किया, चुनावी रंजिश पर हुआ हमला। संतोष सिंह तोमर ग्वालियर / मुरैना। मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में मतदान का दिन चुनावी हिंसात्मक घटनाओं से भर रहा, दिमनी विधानसभा के साथ-साथ जिले की अन्य विधानसभा में पथराव और फायरिंग की घटनाएं सामने आईं। वहीं मतदान संपन्न होने के बाद यहां घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। बताया जा रहा है कि बीती रात बाइक से आधा दर्जन बदमाशों ने भाजपा समर्थक पूर्व सरपंच को गोली मार दी। घटना कोतवाली थाना इलाके के गणेशपुरा की है। गंभीर रूप से घायल पूर्व सरपंच को जिला अस्पताल लाया गया जहां से ग्वालियर रेफर कर दिया गया है। आपको बता दें कि मतदान के दिन जिले में जमकर फायरिंग और पथराव की घटना सामने आई है। मतदान होने की साथ-साथ एक और बड़ी घटना सामने आई है। शहर की कोतवाली थाना इलाके की गणेशपुरा में रहने वाले भाजपा समर्थक और पूर्व सरपंच खेम सिंह के ऊपर दर्जन बदमाशों ने ताबड़तोड़ गोलियां चलाईं, जिसमें पूर्व सरपंच खेम सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए। जिन्हें अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए उन्हें ग्वालियर रेफर कर दिया। इस घटना का कारण आपसी चुनावी रंजिश बताई जा रही है। वहीं घायल पूर्व सरपंच के परिजनों ने आरोप लगाया है कि विधानसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी के बेटे और उनके साथियों ने गोली चलाई है फिलहाल पुलिस इस पूरे मामले की जांच कर रही है। इनका कहना है कोतवाली थाना प्रभारी सुनील खेमरिया का कहना है कि पूर्व सरपंच का कहना है कि वह अपनी सिस्टर के घर से निकलकर गांव जा रहे थे। इस दौरान आधा दर्जन युवकों ने ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। जिसमें उन्होंने बताया है कि कोई प्रत्याशी का लड़का बताया जा रहा है। फिलहाल घायल पूर्व सरपंच को इलाज के लिए ग्वालियर रेफर कर दिया है और पूरी घटना की जांच की जा रही है।

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