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मोहन सरकार सरपंचों के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी में, राजनीतिक हलचल तेज

Mohan government preparing to bring no-confidence motion against sarpanches, political stir intensifies मध्य प्रदेश सरकार पंचायत राज अधिनियम में संशोधन कर सरपंचों के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का प्रावधान करने जा रही तीन चौथाई पंचों के हस्ताक्षर के साथ यह प्रस्ताव सरपंच की तीन साल की कार्यावधि पूरी होने पर लाया जा सकेगा।Ordinance against Sarpanch : मध्य प्रदेश सरकार ने एक अहम कदम उठाते हुए सरपंचों के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की योजना बनाई है। यह कदम पंचायत राज अधिनियम में संशोधन से संभव होगा। अब सरपंचों के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए तीन-चौथाई पंचों (पंचायत सदस्यों) के हस्ताक्षर की आवश्यकता होगी और यह प्रस्ताव सरपंच का तीन साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद ही लाया जा सकेगा। सरकार इस नए प्रावधान को लागू करने के लिए एक अध्यादेश का मसौदा तैयार करने की प्रक्रिया में है। जिसे अगले महीने कैबिनेट में पेश किया जाएगा। ऐसी होगी अविश्वास प्रस्ताव की नई व्यवस्था वर्तमान में, नगरीय निकायों के अध्यक्षों के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का प्रावधान है। इसी तरह का प्रावधान अब पंचायतों में भी लागू किया जाएगा। इस संशोधन में नगरीय निकायों की तरह सरपंचों के खिलाफ भी अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए तीन चौथाई पंचों का समर्थन आवश्यक होगा। साथ ही, यह प्रस्ताव केवल तब लाया जा सकेगा जब सरपंच की कार्यावधि को तीन साल पूरे हो चुके हों। चूंकि अभी विधानसभा का सत्र प्रस्तावित नहीं है, इसलिए सरकार अध्यादेश के माध्यम से यह संशोधन करेगी। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने इस संशोधन का प्रारूप तैयार कर लिया है, जिसे वरिष्ठ सचिव समिति को भेजा जाएगा। इसके बाद, विधि एवं विधायी विभाग से परिमार्जन कटाने के बाद अंतिम रूप से इसे कैबिनेट के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। लंबे समय से हो रही मांग पंचायत और ग्रामीण संगठनों की लंबे समय से यह मांग थी कि सरपंचों के खिलाफ भी नगरीय निकायों की तरह अविश्वास प्रस्ताव लाने की व्यवस्था होनी चाहिए। इस मुद्दे पर पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल (Prahlad Singh Patel) ने संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की और सहमति व्यक्त क। जिसके बाद इस दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। सरपंचों के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की नई व्यवस्था क्या है? मध्य प्रदेश सरकार ने पंचायत राज अधिनियम में संशोधन किया है। जिसके तहत सरपंचों के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए तीन-चौथाई पंचों के हस्ताक्षर आवश्यक होंगे। यह प्रस्ताव केवल तब लाया जा सकेगा जब सरपंच का तीन साल का कार्यकाल पूरा हो चुका हो। कब तक यह नया प्रावधान लागू होगा? सरकार इस नए प्रावधान को लागू करने के लिए एक अध्यादेश का मसौदा तैयार कर रही है, जिसे अगले महीने केबिनेट में पेश किया जाएगा। अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए कितने पंचों का समर्थन आवश्यक है? अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए तीन-चौथाई पंचों (पंचायत सदस्यों) का समर्थन आवश्यक होगा। यह व्यवस्था कब से मांग की जा रही थी? यह व्यवस्था पंचायत और ग्रामीण संगठनों द्वारा लवे समय से मांगी जा रही थी, ताकि सरपंचों के खिलाफ भी नगटीय निकायों के समान अविश्वास प्रस्ताव लाने का अधिकार हो। क्या यह संशोधन विधानसभा में पेश होगा? 2 वर्तमान में विधानसभा का सत्र प्रस्तावित नहीं है, इसलिए यह संशोधन अध्यादेश के माध्यम से किया जाएगा। विधि एवं विधायी विभाग के परिमार्जन के बाद इसे कैविनेट के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।

रेल्वे के मार्ग पर अब नहीं होंगी रहागीरो को आवागमन में परेशानी, पार्षद ने की रेलवे से मांग, नापा ने हटाई कटिली झाड़ी,,,

Now the residents will not face any problem while commuting on the railway route, the councilor demanded from the railway, NAPA removed the thorny bush. हरिप्रसाद गोहेआमला । रेल्वे दवाखाने से रेल्वे रेस्ट हाउस होकर भगत सिंह वार्ड क्रमांक 09 पहुंच मार्ग पर बीते लंबे समय से क्टीली झाड़ीदार वृक्ष लोगों के आवागमन में बाधा उत्पन्न कर रहे थे। इतना ही नही इन कटीले वृक्षों की वजह से लोग दुर्घटना के शिकार भी हो रहे थे जिस बात को ध्यानाकर्षण कर भगत सिंह वार्ड पार्षद ने पेड़ो की छाटीग कर कर आवागमन संचालित करने रेल विभाग से अनुमति मांगी थी अनुमति मिलते ही वार्ड पार्षद के मार्गदर्शन में नपा ने कटिली झाड़ियों की छटाई करा लोगों का आवागणा शुरू कराया । भगत सिंह वार्ड क्रमांक 9 बस स्टैंड बडाईचाल, बल्लाचाल क्षेत्र की पार्षद कुमारी खुशबू विजय अतुलकर ने बताया की कई बरसों से रेलवे रेस्ट हाउस से हॉस्पिटल मोड की मार्ग तक लगे अनचाहे कटीले पेड़ों की टहनिया सड़क पर आ रही थी जिसके कारण कई बार राहगीर चोटीले हुए इस मार्ग से दिन भर में सैकड़ो लोगों स्कूल कॉलेज के बच्चे बुजुर्ग महिलाएं एयर फोर्स बोडखी रेलवे कॉलोनी भीम नगर एवं कई ग्रामीण क्षेत्र की बड़ी संख्या में जनता आवागमन करती हैं जिनको ध्यान में रखते हूऐ मेरे द्वारा रेलवे अधिकारी एवं नगर पालिका से इन कटीली टहनियों को हटाने की मांग की थी जिस पर रेलवे अधिकारी द्वारा टहनी छटींग करने एवं छोटे कटीले पेड़ों को हटाने की अनुमति प्रदान की थी जिस पर नगर पालिका अध्यक्ष महोदय नितिन गाडरे एवं मुख्य नगर पालिका अधिकारी तिवारी जी द्वारा अपनी टीम भेज कर जनहित में कटीली झाड़ियां को हटाया गया वही पार्षद कुमारी खुशबू विजय अतुलकर ने बताया कि जनहित के इस कार्य में रेलवे कर्मचारी सुदामा सोलंकी गौतम सिंह ठाकुर एवं अन्य लोगों की विशेष भूमिका रही मैं रेलवे अधिकारी ए डी एन श्री पाटिल साहब मुख्य नगर पालिका अधिकारी श्री तिवारी जी अध्यक्ष महोदय नगर पालिका परिषद आमला श्री नितिन गाडरेजी सुदामा सोलंकी जी गौतम ठाकुर जी नगर पालिका कर्मचारी विनोद पेंद्री राजेश चांडाल का जनहित के इस कार्य के लिए नगर की जनता की ओर से हार्दिक आभार प्रकट करती हूं ।

बुधनी में नाराजगी नहीं: भाजपा प्रत्याशी के विरोध पर VD शर्मा का बयान

No resentment in Budhni: VD Sharma’s statement on opposition to BJP candidate भोपाल। बुधनी विधानसभा उपचुनाव से पहले भाजपा प्रत्याशी रमाकांत भार्गव का विरोध होने पर बवाल मच गया। कांग्रेस इसे लेकर अब सत्ता पक्ष पर तंज कस रही है। हालांकि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने इस नाराजगी को नकार दिया है। उन्होंने कहा कि बुधनी में कोई नाराजगी नहीं हैं। बीजेपी में कभी ऐसा नहीं हुआ। शिवराज सिंह जी के नेतृत्व में बुधनी लगातार जीतते आए हैं। बुधनी के साथ विजयपुर भारी बहुमत से जीत रहे हैं। 24 को विजयपुर और 25 अक्टूबर को बुधनी का नामांकन है। बुधनी और विजयपुर के लिए हम तैयार हैं। विजय का इतिहास भारतीय जनता पार्टी बनाएगी। गरीब कल्याण की योजना और हमारे विकास का काम ये हमारी ताकत है। विधानसभा उपचुनाव को लेकर पूर्व नेता प्रतिपक्ष गोविंद सिंह ने कहा कि BJP हर जगह षड्यंत्र करने की कोशिश कर रही है। चाहे वो कुछ भी कर लें, दोनों ही सीटों पर कांग्रेस जीत रही है। कांग्रेस ईमानदारी के साथ इन सीटों पर जीत कर आएगी। जनता सब कुछ जानती है और वो उन्हें जवाब भी देगी। बुधनी में BJP की खुद की पार्टी के लोग उनका विरोध कर रहे हैं। वहां खुद अंदरूनी तौर पर षड्यंत्र चल रहा है। अपनी पीड़ा को कहना नाराज़गी नहीं होती: मंत्री राकेश शुक्ला पूर्व नेता प्रतिपक्ष गोविंद सिंह के बयान पर मंत्री राकेश शुक्ला ने पलटवार किया है। उपचुनाव पर कांग्रेस के दावों पर उन्होंने कहा कि रामनिवास नामांकन भरेंगे और मुख्यमंत्री भी जा रहे हैं। हम भी जाएंगे। यहां पर लगातार प्रवास होते रहे हैं और वरिष्ठ नेता भी रहेंगे। भारतीय जनता पार्टी विजयपुर विधानसभा से रामनिवास रावत प्रचंड बहुमत से जीतकर आ रहे हैं। वहीं बुधनी में विरोध के आरोपों पर उन्होंने कहा कि अपनी पीड़ा को कहना नाराज़गी नहीं होती। पीड़ा उन्होंने अपनी कही है। नेताओं के सामने पीड़ा कहने का अधिकार सबको है। हम सभी लोग मिलकर काम करेंगे और एक साथ मिलकर काम करेंगे तो जीतेंगे।जीतू पटवारी और कांग्रेस क्या कहती है, हमें इस पर नहीं जाना। संगठन और वरिष्ठ नेताओं के नेतृत्व में हम जीत रहे हैं।

उमंग सिंघार का ABVP पर हमला: बीजेपी को दलित-आदिवासी विरोधी बताया

Umang Singhar’s attack on ABVP: Called BJP anti-Dalit-Tribal भोपाल। कांग्रेस नेता और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भाजपा पर हमला करते हुए उसे दलित और आदिवासी विरोधी बताया है। उन्होंने इंदौर में ABVP के छात्रों के द्वारा हॉस्टल में घुसकर आदिवासी और दलित छात्रों के साथ अभद्रता को लेकर बीजेपी और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद को आड़े हाथों लिया है। नेता प्रतिपक्ष ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर ट्वीट करते हुए लिखा कि भाजपा अपने पाले हुए सड़क छाप गुंडों के जरिए दलित और आदिवासी विरोधी एजेंडा की प्रतिपूर्ति करती है। ये ABVP छात्रों का नहीं कुकृत्य करने वालों का संगठन है, जिसे भाजपा अपनी अगली पीढ़ी के लिए तैयार कर रही है। उमंग सिंघार ने ABVP संगठन पर तंज कसते हुए कहा कि ये लोग आदिवासी और दलित छात्रों को अपना निशाना बनाते रहते हैं। दो दिन पहले भाजपा की नई पीढ़ी ABVP के “गुंडे” इंदौर में आदिवासी और दलित छात्रों को उनके होस्टल कैम्पस में जाकर गालियां दी और होस्टल पर पत्थर फेंके। कानून को मजाक समझने वालों पर मौन यादव कार्रवाई करेंगे या दलित और आदिवासी अत्याचारों पर भी “मौन” रहेंगे? सिंघार ने कहा कि मुख्यमंत्री मोहन यादव जी इस मामले पर सख्त से सख्त कार्रवाई करने के आदेश दें।

जबलपुर विकास प्राधिकरण में भ्रष्टाचार: सीईओ और सहायक भू अर्जन अधिकारी कि मिली भगत से

Corruption in Jabalpur Development Authority: In collusion with CEO and Assistant Land Acquisition Officer जीतेन्द्र श्रीवास्तव ( विशेष संवाददाता )जबलपुर – जबलपुर विकास प्राधिकरण (JDA) के सीईओ दीपक वैद्य और सहायक भू अर्जन अधिकारी अमित धुर्वे पर गंभीर आरोप लगे हैं कि उन्होंने खसरा नंबर 132/1, कुल रकबा 4.80 एकड़ की जमीन को भारी रिश्वत लेकर जालसाज पीयूष दूबे और भरत दूबे को बेच दिया है। यह जमीन ब्रम्हा पूरी सोसाइटी की है, जिसके मूल मालिकों के साथ धोखाधड़ी की गई है। सूत्रों के अनुसार, दोनों अधिकारियों ने इस जमीन को बेचने के लिए 5 करोड़ रुपये की रिश्वत ली। इस प्रक्रिया के दौरान एक फर्जी लीज डीड भी तैयार की गई, जिसके तहत जमीन दूबे भाइयों को अवैध रूप से सौंप दी गई। यह जमीन पहले से ही विवादास्पद थी, और इस पर 1 जनहित याचिका (PIL) और 4 वाद (WP) के फैसले भी हुए थे। बावजूद इसके, JDA द्वारा अनैतिक रूप से इस जमीन की बिक्री कर दी गई। मूल मालिकों के साथ धोखाधड़ीमूल मालिकों को जब इस फर्जीवाड़े की जानकारी मिली, तो उन्होंने कानूनी कार्यवाही का सहारा लिया और हाई कोर्ट में याचिका दायर की। इसके बावजूद, JDA और संबंधित सरकारी विभाग द्वारा इस मामले में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। यह सवाल उठता है कि इस भ्रष्टाचार में क्या और भी उच्च अधिकारी संलिप्त हैं? भ्रष्टाचार के गहरे सवालजबलपुर के विकास प्राधिकरण में ऐसा पहली बार नहीं हुआ कि किसी जमीन को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ हो। वर्ष 1985 से लेकर आज तक कई सीईओ और अध्यक्ष आए, परंतु किसी ने भी इस जमीन को लेकर ऐसा विवादास्पद निर्णय नहीं लिया। यह सवाल उठता है कि आखिर क्यों अब जाकर यह काम किया गया और वह भी नियमों के विपरीत? उच्चस्तरीय जांच की मांगइस मामले में यह भी जानने की जरूरत है कि इतनी बड़ी रकम, जो रिश्वत के तौर पर ली गई, आई कहां से? और अभी तक इस मामले में कोई कार्यवाही क्यों नहीं की गई? मूल मालिकों के साथ हुई इस धोखाधड़ी की उच्चस्तरीय जांच की मांग की जा रही है, ताकि दोषी अधिकारियों को निलंबित किया जा सके और न्याय हो सके। इस घटना ने जबलपुर विकास प्राधिकरण और उसकी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जो कि जबलपुर के विकास और जनता के हितों के खिलाफ हैं। जनता इस मामले में सच्चाई और न्याय की उम्मीद कर रही है।

ओवरब्रिज निर्माण में तेजी, बैरागढ़ की दुकानें सर्विस रोड बनने के साथ हटने की तैयारी में

Acceleration in overbridge construction, Bairagarh shops preparing to move out with construction of service road आरओबी की डिजाइन में बदलाव के बाद लोगों के लिए संत हिरदाराम नगर रेलवे स्टेशन पहुंचने में भी सुविधा होगी। इसका एक हिस्सा स्टेशन पहुंचकर समाप्त होगा। इससे स्टेशन के दूसरे छोर से बैरागढ़ तरफ आने वालों को आसानी होगी। भोपाल। संत हिरदाराम नगर (बैरागढ़) के रेलवे फाटक क्रमांक 115 को फाटक मुक्त करने के लिए लोक निर्माण विभाग यहां ओवरब्रिज का निर्माण करा रहा है। फाटक के पास के कुछ हिस्से का काम रेल प्रशासन कर रहा है। रेलवे ने अपने हिस्से का काम तेज कर दिया है। मार्च 2025 तक यहां से आवाजाही शुरू हो सकती है। यहां पर यह बता दें कि आरओबी की डिजाइन में बदलाव के बाद लोगों के लिए संत हिरदाराम नगर रेलवे स्टेशन पहुंचने में भी सुविधा होगी। इसका एक हिस्सा स्टेशन पहुंचकर समाप्त होगा। इससे स्टेशन के दूसरे छोर से बैरागढ़ तरफ आने वालों को आसानी होगी। थर्ड लेग के लिए अतिरिक्त आठ करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। क्षेत्रीय विधायक रामेश्वर शर्मा की पहल पर हो रहे इस काम को रेल प्रशासन ने भी स्वीकृति दे दी है। अब नई डिजाइन के अनुसार ही काम किया जा रहा है।स्टेशन से जोड़ने की इसलिए पड़ी जरूरतभविष्य में संत हिरदाराम नगर स्टेशन का विस्तार होगा। ट्रेनों के स्टॉपेज बढ़ेंगे। ऐसे में आरओबी को स्टेशन से जोड़ने की जरूरत महसूस की जा रही थी। रेल प्रशासन ने फरवरी 2025 तक अपने हिस्से का काम पूरा करने का लक्ष्य रखा है। फरवरी माह में ही थर्ड लेग का काम पूरा होगा।सर्विस रोड बना तो होगी तोड़फोड़ओवरब्रिज का कुछ हिस्सा दुकानों तक पहुंच रहा है। ब्रिज के नीचे दोनों तरफ सर्विस रोड बनाने का प्रस्ताव है। रोड बना तो कई दुकानों का बड़ा हिस्सा टूट सकता है। पिछले दो साल से काम चल रहा है। इस कारण यहां का बाजार सुनसान हो चुका है। कारोबार पूरी तरह ठप है। व्यापारी कारोबार को लेकर चिंतित हैं। व्यवसायी राजकुमार आसूदानी, गुरमीतसिंह आदि ने लोक निर्माण विभाग से व्यापारियों को दूसरे स्थान पर जगह आवंटित करने की गुहार की है।

स्वच्छता के बाद जल संरक्षण में भी इंदौर अव्वल… राष्ट्रपति ने दिल्ली में चौथी बार किया सम्मानित

After cleanliness, Indore also tops in water conservation… President honored for the fourth time in Delhi इंदौर (water conservation in Indore)। मध्य प्रदेश के इंदौर को एक और राष्ट्रीय उपलब्धि प्राप्त हुई है। फिफ्थ नेशनल वाटर अवॉर्ड में इंदौर जिला वेस्टर्न जोन में बेस्ट डिस्ट्रिक्ट कैटेगरी में प्रथम स्थान पर रहा है। मंगलवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जिला कलेक्टर आशीष सिंह, नगर निगम आयुक्त शिवम वर्मा और जिला पंचायत सीईओ सिद्धार्थ जैन को यह पुरस्कार प्रदान किया। गौरतलब है कि इंदौर को वर्ष 2018 व 2022 में पश्चिम जोन में प्रथम स्थान का पुरस्कार मिला था। वहीं वर्ष 2023 में बेस्ट नगरीय निकाय श्रेणी में इंदौर को दूसरा स्थान मिला था। चौथा अवार्ड लेते ही पांचवें की तैयारी में जुटा इंदौरचौथी बार वाटर अवार्ड लेने के साथ ही इंदौर ने पांचवीं बार भी पुरस्कार लेने की तैयारी कर ली। जिला पंचायत के सीईओ सिद्धार्थ जैन के मुताबिक अब जिले की सभी नदियों, तालाब व कुओं की जीआईएस मैपिंग की जाएगी।इसके माध्यम से जलाशयों की सतत निगरानी कर जल संरक्षण किया जाएगा। शहरी क्षेत्र में भूजल पुनर्भरण की संख्या भी बढ़ाई जाएगी। अभी शहरी क्षेत्र में जहां एक लाख घरों में जल पुनर्भरण इकाइयां लगाई गईं, अगले एक वर्ष में दो से तीन लाख घरों में यह इकाइयां लगाई जाएंगी।इसके अलावा जिले में हरित क्षेत्र बढ़ाया जाएगा। कान्ह व सरस्वती नदियों के कैचमेंट एरिया को बढ़ाने के साथ इन नदियों के पानी को किसी नए तालाब में ले जाकर सहेजने की योजना पर भी काम किया जा रहा है।

जबलपुर में ऑर्डिनेंस फैक्ट्री में बड़ा ब्लास्ट, इमारत धराशायी, कई कर्मचारी गंभीर जख्मी

Big blast in ordinance factory in Jabalpur, building collapsed, many employees seriously injured जितेंद्र श्रीवास्तवJabalpur Ordinance Factory Blast: मध्य प्रदेश के जबलपुर में आर्डिनेंस फैक्ट्री खमरिया जबरदस्त धमाका हुआ. इस बड़े हादसे में 12 कर्मचारी हुए गंभीर रूप से घायल हो गए हैं. वहीं, एक लापता और और तीन कर्मचारी बेहद गंभीर बताए जा रहा हैं. धमाका इतना बड़ा था कि पूरी बिल्डिंग धराशायी हो गई. मलबे में कई लोगों के दबे होने की आशंका भी है. जबलपुर की फैक्ट्री में यह ब्लास्ट तब हुआ, जब बम में फिलिंग का काम चल रहा था. फिलहाल, फैक्ट्री प्रबंधन राहत और बचाव कार्य में जुटा हुआ है और घायलों को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाया जा रहा है. वहीं, मलबे में दबे लोगों को भी निकालने में टीम जुटी हुई है.

विधायक ने असमय वर्षा से प्रभावित फसलों का सर्वे एवं उचित मुआवजे के दिए निर्देश ।

The MLA gave instructions for survey of crops affected by untimely rains and proper compensation. हरिप्रसाद गोहेआमला। मानसून के अंतिम दौर में पिछले तीन चार दिनों में आमला विकासखंड समेत क्षेत्र में हुई असमय वर्षा से प्रभावित फसलों की सूचनाओं के बीच आमला सारणी विधानसभा विधायक डॉ योगेश पंडाग्रे ने राजस्व विभाग के उच्च अधिकारियों से संपूर्ण क्षेत्र में वर्षा से प्रभावित फसलों का सर्वे कर उचित मुआवजा के लिए निर्देशित किया। गौरतलब है की क्षेत्र में फसल कटाई का दौर शुरू है तो वहीं विगत तीन चार दिनों ने तेज वर्षा और आंधी तूफान के चलते सभी प्रकार की फसलें प्रभावित हुई है । आमला विधायक डॉ योगेश पंडाग्रे ने व्यक्तिगत रूप से विभिन्न क्षेत्रों में हुए नुकसान की जानकारी ले कर राजस्व विभाग को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए है । प्रतिक्रिया स्वरूप राजस्व , कृषि एव संबधित विभाग के द्वारा सर्वे दल का गठन कर वर्षा से प्रभावित फसलों के आकलन में जुट गई है। विगत दिनों क्षेत्र में हुई असमय वर्षा से क्षेत्र में विभिन्न स्थानों पर फसलों के प्रभावित होने की सूचना पर तहसीलदार आमला समेत अधिकारियों से चर्चा कर प्रभावित फसलों के सर्वे कार्य कर उचित मुआवजा राशि के लिए निर्देशित किया है :डॉ योगेश पंडाग्रे विधायक आमला सारणी विधानसभा ।

भोपाल: हमीदिया रोड पर ध्वनि प्रदूषण की बाढ़: पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की नई रिपोर्ट

Bhopal: Flood of noise pollution on Hamidia Road: New report of Pollution Control Board भोपाल: मध्य प्रदेश पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड द्वारा हाल ही में जारी की गई रिपोर्ट में राजधानी भोपाल के हमीदिया रोड को सबसे अधिक ध्वनि प्रदूषण वाला क्षेत्र घोषित किया गया है। बीते 6 महीनों (1 अप्रैल से 30 सितंबर) के आंकड़ों के अनुसार, हमीदिया रोड पर 68 डेसिबल तक का नॉइस पॉल्यूशन दर्ज किया गया है, जो शहर के अन्य क्षेत्रों की तुलना में काफी अधिक है। इस रिपोर्ट में गोविंदापुरा और बैरागढ़ में ध्वनि प्रदूषण 50 डेसिबल से कम दर्ज हुआ है, जबकि हमीदिया रोड पर इंडस्ट्रियल एरिया से भी ज्यादा शोर है। ट्रैफिक और डीजे-बैंड हैं ध्वनि प्रदूषण के मुख्य कारण विशेषज्ञों का मानना है कि हमीदिया रोड पर भारी ट्रैफिक और डीजे-बैंड जैसी गतिविधियों के कारण नॉइस पॉल्यूशन की समस्या अधिक गंभीर है। इस सड़क पर प्रतिदिन प्रति घंटा 8 से 10 हजार वाहनों का आवागमन होता है, जिससे ध्वनि प्रदूषण लगातार उच्च स्तर पर बना रहता है। इसके अलावा, धार्मिक और सामाजिक आयोजनों के दौरान डीजे और बैंड की आवाजें इस समस्या को और बढ़ा देती हैं। पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की रिपोर्ट मध्य प्रदेश पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, हमीदिया रोड पर अप्रैल से सितंबर तक का औसत ध्वनि स्तर निम्न प्रकार रहा: इसके मुकाबले, गोविंदापुरा और बैरागढ़ में ध्वनि प्रदूषण का स्तर कम पाया गया। गोविंदापुरा में अगस्त में 49 डेसिबल और बैरागढ़ में अगस्त और सितंबर में 49 से 52 डेसिबल तक का ध्वनि स्तर दर्ज किया गया। साइलेंट जोन में भी प्रदूषण रिपोर्ट के मुताबिक, भोपाल के पर्यावरण परिसर, जो साइलेंट जोन के रूप में जाना जाता है, में भी ध्वनि प्रदूषण चिंता का विषय है। यहां भी अप्रैल से सितंबर के बीच ध्वनि स्तर 53 से 58 डेसिबल के बीच रहा, जो साइलेंट जोन के लिए निर्धारित मानकों से अधिक है। तेज शोर ने ली बच्चे की जान तेज ध्वनि प्रदूषण के दुष्प्रभाव हाल ही में तब सामने आए जब 14 अक्टूबर को 13 वर्षीय समर बिल्लौरे की मौत हो गई। समर डीजे की तेज आवाज में मां दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान डांस कर रहा था, जब उसकी तबीयत बिगड़ गई। उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। परिवार ने आरोप लगाया कि डीजे की अत्यधिक आवाज उसकी मौत का कारण बनी। ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण की आवश्यकता हमीदिया रोड और अन्य क्षेत्रों में ध्वनि प्रदूषण के बढ़ते स्तर के मद्देनजर, शहर के नागरिकों और पर्यावरणविदों ने प्रशासन से इस समस्या पर तत्काल कार्रवाई की मांग की है। यह आवश्यक है कि प्रशासन नॉइस पॉल्यूशन को नियंत्रित करने के लिए सख्त कदम उठाए, ताकि इस प्रकार की दुर्घटनाओं को रोका जा सके और नागरिकों की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को कम किया जा सके।

शिक्षा माफिया पर बड़ा एक्शन: जॉय सीनियर सेकेंडरी स्कूल के मालिक और समिति सचिव गिरफ्तार

Big action on education mafia: Joy Senior Secondary School owner and committee secretary arrested जबलपुर: मध्यप्रदेश में शिक्षा माफिया के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए प्रशासन ने एक और बड़े निजी स्कूल पर शिकंजा कसा है। शहर के प्रतिष्ठित जॉय सीनियर सेकेंडरी स्कूल के मालिक और समिति सचिव को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। इस कार्रवाई को जबलपुर जिला प्रशासन और पुलिस ने मिलकर अंजाम दिया, जिसमें स्कूल द्वारा मनमानी फीस वृद्धि और अन्य अनियमितताओं का पर्दाफाश किया गया। प्रशासन की सख्त कार्रवाई जबलपुर के कलेक्टर दीपक सक्सेना ने निजी स्कूलों की मनमानी फीस वृद्धि के खिलाफ यह बड़ा कदम उठाया है। जॉय सीनियर सेकेंडरी स्कूल के खिलाफ विजय नगर थाने में एफआईआर दर्ज की गई, जिसके आधार पर जॉय एजुकेशन सोसायटी के अध्यक्ष अखिलेश मेबिन और सचिव अनुराग श्रीवास्तव को गिरफ्तार किया गया है। फीस जांच समिति का बड़ा खुलासा स्कूल फीस जांच समिति द्वारा की गई जांच में पाया गया कि 2017-18 से अब तक स्कूल ने अभिभावकों से 25 करोड़ 21 लाख रुपये से अधिक की अतिरिक्त फीस वसूली की है। यह फीस स्कूल प्रबंधन द्वारा व्यक्तिगत भोग-विलास के लिए इस्तेमाल की गई। इस अतिरिक्त आय का उपयोग लक्जरी वाहनों की खरीद और दुबई ट्रिप जैसे महंगे शौक पूरा करने में किया गया। फर्जी जानकारी और दबाव बनाने का आरोप जांच में यह भी सामने आया कि स्कूल द्वारा ऑडिट रिपोर्ट में झूठी जानकारी दी गई थी। इसके अलावा, स्कूल प्रबंधन ने जानबूझकर विद्यार्थियों के स्कूल बैग का वजन बढ़ाने के लिए अतिरिक्त पुस्तकों की खरीद का दबाव डाला। साथ ही, फर्जी ISBN नंबर वाली किताबें खरीदने के लिए अभिभावकों पर भी दबाव बनाया गया। अभिभावकों को अतिरिक्त फीस लौटाने का निर्देश प्रशासन ने स्कूल प्रबंधन को निर्देश दिया है कि वह अभिभावकों से वसूली गई अतिरिक्त फीस वापस करे। जबलपुर के जिला शिक्षा अधिकारी घनश्याम सोनी और एडिशनल एसपी आनंद कलादगी ने यह जानकारी दी। शिक्षा माफिया पर प्रशासन की मुहिम यह कार्रवाई प्रदेश में शिक्षा माफिया के खिलाफ प्रशासन की मुहिम का हिस्सा है। इससे पहले भी कई निजी स्कूलों पर प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है, जिससे शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता और जिम्मेदारी को बढ़ावा मिल सके। जबलपुर में जॉय सीनियर सेकेंडरी स्कूल पर की गई इस कार्रवाई से स्पष्ट है कि राज्य सरकार और प्रशासन शिक्षा माफिया के खिलाफ सख्त कदम उठा रहे हैं। यह कदम न केवल शिक्षा व्यवस्था को सुधारने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, बल्कि अभिभावकों के हितों की रक्षा के लिए भी एक सशक्त संदेश है।

विंध्य के उद्योगपतियों को मिलेगी नई सुविधाएं: CM डॉ. मोहन यादव की पहल, रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव में होंगे बड़े फैसले

Industrialists of Vindhya will get new facilities: Initiative of CM Dr. Mohan Yadav, big decisions will be taken in the Regional Industry Conclave भोपाल: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विंध्य क्षेत्र में औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए एक नई दिशा तय की है। उनकी सरकार ने उद्योगपतियों को बेहतर सुविधाएं और समर्थन प्रदान करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। हाल ही में, उन्होंने विंध्य क्षेत्र के उद्योगपतियों के लिए कंटेनर सुविधा की घोषणा की, जिससे निर्यात और व्यापार के नए अवसर सृजित होंगे। इसके साथ ही, उद्योगों के सामने आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए कलेक्टर और कमिश्नर को निर्देश दिए गए हैं। 23 अक्टूबर को रीवा में होगा रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव मुख्यमंत्री ने कहा कि 23 अक्टूबर को रीवा में आयोजित होने वाला रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव विंध्य क्षेत्र के औद्योगिक विकास के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा। इस कॉन्क्लेव में 50 बड़े उद्योगपतियों समेत 3,000 से अधिक उद्योगपति पंजीकृत हैं। कॉन्क्लेव का उद्देश्य व्यापार और औद्योगिक वातावरण को सशक्त बनाना, व्यापारिक सुगमता को बढ़ावा देना और राज्य के आर्थिक विकास को एक नई दिशा देना है। उद्योगपतियों के खाते में सीधे अनुदान राशि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की कि वर्ष 2022-23 के लिए उद्योगों के अनुदान की राशि जारी कर दी गई है, जिसे सीधे उद्योगपतियों के खाते में स्थानांतरित किया जाएगा। इस कदम का उद्देश्य है कि उद्योगपतियों को समय पर वित्तीय सहायता मिल सके और उनके व्यापार को कोई बाधा न आए। यह पहल निवेशकों को राज्य में उद्योग स्थापित करने और उसे विस्तार देने में मदद करेगी। दोहरे कराधान से मिलेगी राहत विंध्य क्षेत्र के उद्योगपतियों के लिए एक और बड़ी राहत यह है कि औद्योगिक क्षेत्रों में दोहरा कराधान नहीं लगेगा। यह निर्णय उद्योगों की वित्तीय स्थिति को मजबूत करेगा और व्यापारिक प्रक्रियाओं को सरल बनाएगा। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी सरकार व्यापारियों की समस्याओं को हल करने के लिए प्रतिबद्ध है और इसके लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं। व्यापारिक सुगमता और नए अवसर इस कॉन्क्लेव में “ईज ऑफ डूइंग बिज़नेस” को और भी सशक्त करने के लिए एमपी इंडस्ट्रियल डेव्लपमेंट कॉरपोरेशन प्रमुख भूमिका निभाएगा। एमएसएमई विभाग भी छोटे और मध्यम उद्योगों को प्रोत्साहित करने के लिए योजनाओं और समर्थन कार्यक्रमों की जानकारी देगा, जिससे उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा। निर्यात और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को मिलेगी रफ्तार निर्यात को बढ़ावा देने के लिए डायरेक्टोरेट ऑफ फॉरेन ट्रेड मार्गदर्शन प्रदान करेगा, और कस्टम विभाग आयात-निर्यात प्रक्रियाओं पर जानकारी देगा। इसके अलावा, ईसीजीसी क्रेडिट बीमा और वित्तीय सेवाओं की जानकारी देकर निर्यातकों को वैश्विक बाजार में अपनी स्थिति मजबूत करने में मदद करेगा। पर्यटन, हस्तशिल्प, और कृषि उद्योग को बढ़ावा कॉन्क्लेव में मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग द्वारा राज्य में पर्यटन स्थलों और निवेश के अवसरों की जानकारी दी जाएगी। हस्तशिल्प विकास निगम भी अपने उत्पादों को बाजार में लाने के नए तरीके साझा करेगा। इसके अलावा, कृषि और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के लिए भी सुनहरे अवसर होंगे, जिसमें कृषि उत्पादों के निर्यात के लिए विशेष जानकारी दी जाएगी। बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं का समर्थन बिजनेस और उद्योगों के वित्तीय सहयोग के लिए यूनियन बैंक और फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FICCI) द्वारा वित्तीय सेवाओं की जानकारी दी जाएगी, जिससे निवेशकों को व्यवसाय स्थापित करने में सहयोग मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल से विंध्य क्षेत्र में उद्योगपतियों को नई सुविधाएं मिलेंगी, जो राज्य के औद्योगिक और आर्थिक विकास को गति देंगी। रीवा में होने वाला रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव व्यापार, उद्योग, कृषि, और पर्यटन क्षेत्र में नए अवसर सृजित करेगा, जिससे न केवल विंध्य बल्कि पूरे मध्य प्रदेश में विकास की लहर दौड़ेगी।

शराब कारोबारियों की चिंता में जुटी मोहन सरकार, मंत्री जगदीश देवड़ा ने बुलाई अहम बैठक

Mohan Sarkar is worried about liquor traders, Minister Jagdish Deora called an important meeting भोपाल ! मध्य प्रदेश की मोहन सरकार अब अपने खजाने को भरने के लिए शराब कारोबारियों की मदद पर जोर दे रही है। वित्त एवं वाणिज्यिक कर मंत्री जगदीश देवड़ा ने शराब कारोबारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है, जिसमें उनसे उनके व्यवसाय में आ रही समस्याओं पर चर्चा की जाएगी। इस बैठक का उद्देश्य नई आबकारी नीति के लिए सुझाव लेना और शराब उद्योग को और सशक्त बनाना है। शराब कारोबारियों के लिए विशेष बैठक21 अक्टूबर को भोपाल के पर्यावरण परिसर स्थित एप्को में आयोजित होने वाली इस बैठक में, शराब लाइसेंस धारकों से उनके व्यवसाय से जुड़ी समस्याओं और सुझावों पर चर्चा की जाएगी। आबकारी विभाग के उपायुक्त संदीप शर्मा ने पत्र के जरिए सभी उपायुक्तों को इस बैठक में शामिल होने का निर्देश दिया है। इसका मुख्य उद्देश्य वर्ष 2025-26 के लिए नई आबकारी नीति तैयार करने से पहले शराब कारोबारियों की राय और समस्याओं को समझना है। इस बैठक की अध्यक्षता स्वयं मंत्री जगदीश देवड़ा करेंगे। शराब कारोबारियों की समस्याओं पर फोकस, आम जनता की समस्याएं नजरअंदाज?इस बैठक में खास बात यह है कि सरकार का ध्यान सिर्फ शराब कारोबारियों की समस्याओं पर है, जबकि आम जनता पर शराब की वजह से पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों की कोई चर्चा नहीं होगी। मंत्री के एजेंडे में इस बात पर कोई विचार नहीं किया गया है कि शराब की बिक्री से समाज पर क्या असर पड़ता है और आम लोगों की इससे जुड़ी समस्याएं क्या हैं। यह सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़ा करता है, क्योंकि समाज में शराब के कारण बढ़ते अपराध, दुर्घटनाओं और स्वास्थ्य समस्याओं पर कोई चर्चा प्रस्तावित नहीं है। आबकारी नीति से सरकार का खजाना भरेगा?सरकार के इस कदम से यह साफ जाहिर होता है कि शराब कारोबार को बढ़ावा देकर राज्य का राजस्व बढ़ाने की योजना बनाई जा रही है। पिछले कुछ सालों में शराब से होने वाली आय सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण स्रोत बन गई है, और अब इसे और बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। शराब कारोबारियों की सहूलियत को प्राथमिकता देकर, यह सवाल उठता है कि क्या सरकार अपने खजाने को भरने के लिए सामाजिक और नैतिक मुद्दों की अनदेखी कर रही है? शराब की बिक्री से प्राप्त राजस्व भले ही राज्य के वित्तीय संकट को कम कर सकता है, लेकिन इससे जुड़े सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी नुकसान पर क्या ध्यान दिया जा रहा है? ड्रग माफिया से जुड़े विवादों में मंत्री देवड़ामंत्री जगदीश देवड़ा हाल ही में ड्रग माफिया से जुड़े एक विवाद में भी घिर चुके हैं। भोपाल में एमडी ड्रग के अवैध कारोबार का भंडाफोड़ हुआ था, जिसमें एक ड्रग सप्लायर के साथ देवड़ा की तस्वीर सामने आई थी। इस विवाद ने सरकार की छवि पर भी सवाल खड़े किए थे। अब शराब कारोबारियों के साथ उनकी बैठक को लेकर भी कुछ हलकों में आलोचना हो रही है, क्योंकि इसे नशे के कारोबार को अप्रत्यक्ष रूप से प्रोत्साहन देने वाला कदम माना जा रहा है।

जेडीए की मिलीभगत से भूमि अधिसूचित कर एनओसी जारी, सीएम-पीएस को शिकायत

NOC issued after notifying land with the connivance of JDA, complaint to CM-PS जितेंद्र श्रीवास्तव ( विशेष संवाददाता )जबलपुर ! जबलपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) के सीईओ दीपक वैद्य और भू-अर्जन अधिकारी अमित धुर्वे पर गंभीर आरोप लगे हैं कि वे कुछ भूमि मालिकों को अनुचित लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से ग्रीन बेल्ट की भूमि को अधिसूचित कर रहे हैं और एनओसी (अनापत्ति प्रमाण-पत्र) जारी कर रहे हैं। इस मामले की शिकायत जबलपुर निवासी जितेंद्र श्रीवास्तव ने संभागीय कमिश्नर अभय वर्मा, ईओडब्ल्यू (आर्थिक अपराध शाखा), प्रमुख सचिव आवास एवं पर्यावरण नीरज मंडलोई, जबलपुर कलेक्टर और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को भेजी है। आरोपों का मूल शिकायत के अनुसार, यह मामला तब सामने आया जब पूर्व सीईओ प्रशांत श्रीवास्तव के कार्यकाल में ग्रीन बेल्ट की भूमि का खसरा अधिसूचित कर, स्कीम नम्बर 11 फेज 2 के तहत वर्ष 2020-21 में राजपत्र में प्रकाशित किया गया था। इस अधिसूचना में खसरा नम्बर 86 और 97 को अधिसूचित भूमि के रूप में शामिल नहीं किया गया था। लेकिन वर्तमान सीईओ दीपक वैद्य पर आरोप है कि उन्होंने उक्त खसरा नम्बर 86 और 97 को अधिसूचित कर एनओसी जारी कर दी, वह भी बिना बोर्ड की स्वीकृति और अनुमोदन के। टीआईटी एक्ट के तहत अधिग्रहीत भूमि यह खसरा नम्बर 86 और 97 ग्राम लक्ष्मीपुर की भूमि जेडीए के टीआईटी एक्ट के तहत अधिग्रहीत है। अधिग्रहीत भूमि के लिए टीआईटी एक्ट के नियमों के अनुसार, भूमि मालिकों को 20 प्रतिशत मुआवजा दिया जाना चाहिए। लेकिन आरोप है कि वर्तमान सीईओ ने भूमि मालिकों से मिलीभगत कर एनओसी जारी की, जिससे प्राधिकरण को गंभीर वित्तीय नुकसान हो सकता है। अधिकारियों का विरोध इस मामले में जेडीए के अन्य अधिकारी, जैसे पटवारी, आरआई, सहायक भू-अर्जन अधिकारी, भू-अर्जन अधिकारी, इस अधिसूचना के पक्ष में नहीं हैं। उनका कहना है कि बिना उचित प्रक्रिया के इस प्रकार की अधिसूचना जारी करना अनैतिक है। शिकायत में यह भी आरोप है कि सीईओ दीपक वैद्य ने अपने अधीनस्थ कर्मचारियों पर दबाव डालकर इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाया। हालांकि, भू-अर्जन अधिकारी और ज्वाइंट कलेक्टर पूजा तिवारी ने किसी भी प्रकार के दबाव में आकर नोटशीट या फाइल पर कोई टिप्पणी नहीं की है, जिससे उनका तटस्थता का संकेत मिलता है। क्या है मामला यह मामला प्रशासनिक भ्रष्टाचार और मिलीभगत के गंभीर आरोपों का प्रतीक है, जहां सरकारी प्रक्रियाओं का दुरुपयोग कर निजी लाभ के लिए भूमि को अधिसूचित कर एनओसी जारी की जा रही है। इस प्रकरण की जांच और सख्त कार्रवाई की आवश्यकता है ताकि सरकारी तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही बनी रहे। ऐसी क्या मजबूरी है सरकार की?? जबलपुर विकास प्राधिकरण के CEO दीपक वैध को इतने सारे भ्रष्टाचार के बाद भी पद से निलंबित नहीं किया जा रहा है.ऐसा लगता है इसमे कुछ बड़े अधिकारी और नेता भी शामिल है इसलिए कार्यवाही नहीं हो रही है अब देखना होगा कि मुख्यमंत्री और अन्य उच्च अधिकारी इस मामले में क्या कार्रवाई करते हैं।

शिवराज का रुतबा काम ना आया ,कार्तिकेय की लॉन्चिंग पर संगठन ने लगाया ब्रेक

Shivraj’s status did not work, organization put brakes on Karthikeya’s launch बुधनी उपचुनाव में बीजेपी ने रामाकांत भार्गव को टिकट दिया है। यह शिवराज सिंह चौहान के करीबी माने जाते हैं। साथ ही लोकसभा चुनाव में उन्होंने शिवराज के लिए अपनी सीट छोड़ दी थी। इस सीट से शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय सिंह चौहान का नाम चल रहा था। भोपाल: बुधनी उपचुनाव के लिए बीजेपी ने उम्मीदवार की घोषणा कर दी है। इस रेस में कई नाम थे। रेस में सबसे आगे शिवराज सिंह चौहान के बड़े बेटे कार्तिकेय सिंह चौहान का नाम चल रहा था। इसके बाद विदिशा के पूर्व सांसद रामाकांत भार्गव के नाम की चर्चा थी। दिल्ली ने रामाकांत भार्गव के नाम पर मुहर लगाई है। ऐसे में चर्चा है कि शिवराज के दबदबे वाली सीट पर रामाकांत भार्गव की लॉटरी कैसे लग गई है। कार्तिकेय सिंह चौहान के नाम की थी चर्चा दरअसल, शिवराज सिंह चौहान के विदिशा सीट से सांसद बनने के बाद बुधनी विधानसभा सीट खाली हुई थी। बुधनी में उपचुनाव की तारीख घोषित हो गई है। इसके बाद से यह चर्चा शुरू हो गई थी कि शिवराज सिंह चौहान का वारिस कौन होगा। इस रेस में सबसे आगे कार्तिकेय सिंह चौहान ही चल रहे थे। वह पिता की सीट पर लगातार मेहनत भी कर रहे थे। उनके समर्थकों की इच्छा भी थी कि बुधनी से कार्तिकेय सिंह चौहान के नाम पर ही मुहर लगे। वही प्रदेश चुनाव समिति की तरफ से पैनल में जो नाम भेजा गया था, उसमें कार्तिकेय सिंह चौहान का नाम था। दिल्ली में नहीं बनी सहमति टिकट की घोषणा से दो दिन पहले शिवराज सिंह चौहान अपने बेटों के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को शादी का न्यौता देने गए थे। इसके बाद एमपी में अटकलें शुरू हो गई थीं कि कार्तिकेय सिंह चौहान को पीएम मोदी का आशीर्वाद मिल सकता है। चुनाव समिति की बैठक के बाद नामों की सूची आई तो रामाकांत भार्गव के नाम पर मुहर लगी है। परिवारवाद से पार्टी ने बनाई दूरी कहा जा रहा है कि मध्य प्रदेश में पार्टी परिवारवाद से दूर है। विधानसभा चुनाव के दौरान भी नेता पुत्रों को पार्टी ने टिकट नहीं दिया। मध्य प्रदेश में कई बड़े नेताओं के पुत्र राजनीति में एंट्री के लिए ललायित हैं लेकिन पार्टी ने सभी की एंट्री पर ब्रेक लगा रखी है। अगर शिवराज सिंह चौहान के बेटे को टिकट देती तो गलत नैरेटिव गढ़ा जाता। शायद इससे बचने के लिए पार्टी ने यह फैसला लिया है। रामाकांत भार्गव हैं शिवराज सिंह चौहान के खास वहीं, रामाकांत भार्गव भी शिवराज सिंह चौहान के खास माने जाते हैं। शिवराज सिंह चौहान पहले विदिशा सीट से सांसद थे। पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने जब विदिशा से चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया तो शिवराज की पसंद और करीबी रहे रामाकांत भार्गव के नाम पर मुहर लगी। 2024 के लोकसभा चुनाव में रामाकांत भार्गव ने शिवराज सिंह चौहान के लिए सीट छोड़ दी। शिवराज सिंह चौहान विदिशा से सांसद बन गए हैं। वहीं, बुधनी में शिवराज की विरासत को अब रामाकांत भार्गव संभालेंगे। चुनाव प्रचार में जुट गए कार्तिकेय रामाकांत भार्गव के नाम पर मुहर लगने के बाद कार्तिकेय सिंह चौहान पहली बार मीडिया के सामने आए तो उनके चेहरे पर शिकन भी देखने को मिला है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि रामाकांत भार्गव हमारे पितातुल्य हैं। मैं उनके लिए चुनाव प्रचार की शुरुआत कर रहा हूं। साथ ही उन्होंने कहा कि मैंने चुनाव लड़ने की मंशा से कभी काम नहीं किया। यह मेरा सौभाग्य है कि कार्यकर्ताओं ने मेरा नाम पैनल तक पहुंचाया है। हम रामाकांत भार्गव के लिए दोगुनी ताकत के साथ चुनाव लड़ेंगे और जीतेंगे।

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