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झारखंड : कांग्रेस सांसद धीरज साहू व बौध डिस्टलरीज प्राइवेट लिमिटेड के ठिकानों से नोट, देखकर इनकम टैक्स अधिकारियों की आंखें भी चौंधिया गईं.

In Jharkhand, Congress MP Dhiraj Sahu and addresses of Baudh Distilleries Private Limited left Income Tax officials astonished upon inspection of notes. कांग्रेस सांसद के आवास के अलावा उनसे जुड़े लोगों पर भी कार्रवाई हो रही है. इसमें सबसे बड़ी सफलता बौध स्थित बौध डिस्टलरीज प्राइवेट लिमिटेड के ठिकानों से मिली है. झारखंड से कांग्रेस के राज्यसभा सांसद धीरज साहू के ठिकानों पर तीसरे दिन भी इनकम टैक्स की छापेमारी जारी है. रांची के रेडियम रोड स्थित सुशीला निकेतन में तीसरे दिन भी आयकर विभाग की टीम रेड डालने में लगी है. बता दें कि इस छापेमारी में जितनी बड़ी मात्रा में नोटों के बंडल बरामद हुए हैं उसके बारे में जानकर सभी आश्चर्यचकित हो गए हैं. यहां नोटों की गिनती करने में मशीन भी खराब हो गए. जानकारी के अनुसार रांची के अलावा लोहरदगा और उड़ीसा के संबलपुर राउरकेला बोलांगीर और बौद्ध समेत आधा दर्जन ठिकानों को आयकर विभाग खंगाल रही है. कांग्रेस सांसद के आवास के अलावा उनसे जुड़े लोगों पर भी कार्रवाई हो रही है. इसमें सबसे बड़ी सफलता बौध स्थित बौध डिस्टलरीज प्राइवेट लिमिटेड के ठिकानों से मिली है. ओडिशा और झारखंड में कंपनी के कई ठिकानों पर आईटी की रेड हुई. जहां 150 करोड़ से भी अधिक कैश बरामद हुआ है. यह कंपनी बलदेव साहू के नाम पर रजिस्टर्ड है. तमाम खबरों के बीच छानबीन जारी है. आयकर विभाग की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया गया है. तीसरी बार के सांसद हैं धीरज साहू झारखंड के लोहरदगा के रहने वाले धीरज साहू कांग्रेस के पुराने नेता हैं. 1977 में छात्र नेता के रूप में राजनीति की शुरुआत करने वाले धीरज साहू तीसरी बार के राज्यसभा सांसद हैं. इससे पहले वह 2010-2016 तक भी कांग्रेस के राज्यसभा सांसद रहे. 2018 में उन्होंने झारखंड में विपक्ष के साझा उम्मीदवार के तौर पर जीत हासिल की थी. साहू 2003-05 तक प्रदेश कांग्रेस कमिटी के सदस्य भी रहे हैं.

नवाब मलिक पर राजनीति गरमाई, शिंदे-फड़णवीस के रुख से दुविधा में अजित पवार.

Political heat rises over Nawab Malik, Ajit Pawar caught in dilemma between Shinde and Fadnavis. महाराष्ट्र ! महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर से तल्खी आ गई है. नवाब मलिक को लेकर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और डिप्टी सीएम देवेंद्र फड़णवीस ने नाराजगी जाहिर की है. देवेंद्र फड़णवीस ने उपमुख्यमंत्री अजीत पवार को एक पत्र भी लिखा है. वहीं मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी फड़णवीस के सुर में सुर मिलाया है, ऐसे में अजित पवार के सामने नया संकट खड़ा हो गया है. महाराष्ट्र में एनसीपी के सीनियर नेता नवाब मलिक के मुद्दे पर बीजेपी एक बार फिर से आक्रामक हो गई है. प्रदेश के डिप्टी सीएम देवेन्द्र फड़णवीस ने कहा है कि हम नवाब मलिक के साथ नहीं बैठ सकते. उन्होंने इसकी वजह बताते हुए कहा कि जिस नवाब मलिक पर देशद्रोह का आरोप है, उनके साथ नहीं बैठा जा सकता है. देवेंद्र फड़णवीस ने इसी बाबत राज्य के उपमुख्यमंत्री अजित पवार को भी एक चिट्ठी लिखी है. देवेंद्र फड़णवीस की इस चिट्ठी से प्रदेश की सियासत में नई हलचल मच गई है. सबसे खास बात ये कि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे भी फड़णवीस के सुर में सुर मिला चुके हैं. एकनाथ शिंदे ने कहा है कि नवाब मलिक को लेकर हम अपने पिछले रुख पर कायम हैं. नवाब मलिक पर गंभीर आरोप हैं. उन्हें अभी कोर्ट ने बरी नहीं किया है. वो फिलहाल स्वास्थ्य कारणों से जेल से बाहर हैं. उन्होंने कहा कि नवाब मलिक का सत्तारूढ़ दलों की बेंच पर बैठना ठीक नहीं है. शिंदे ने फड़णवीस का किया समर्थनमुख्यमंत्री और सहयोगी उप मुख्यमंत्री के मिलते जुलते बयान के सामने आने के बाद अजित पवार के सामने नई दुविधा आ गई है. मुख्यमंत्री शिंदे ने कहा है कि घटक दल अपनी-अपनी पार्टी कैसे चलाते हैं, ये उनका अपना मामला हो सकता है लेकिन राष्ट्रहित और जनहित का लक्ष्य हमारा एक समान होना चाहिए. इस मुद्दे पर हम एकजुट हैं. इसके साथ ही उन्होंने अजित पवार से अपील की है कि वे उचित रुख अपनाएंगे. मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने पूरे मसले पर विपक्ष की भी कड़ी आलोचना की है. उन्होंने कहा है विपक्ष को नवाब मलिक के मसले पर कुछ भी बोलने का नैतिक अधिकार नहीं है. नवाब मलिक जब जेल में थे तब महाविकास अघाड़ी की सरकार थी. नवाब मलिक ने किया पलटवारपूरे मामले में नबाव मलिक ने भी प्रतिक्रिया जाहिर की है. उन्होंने कहा कि जिस देवेंद्र फड़णवीस ने ऐसी चिट्ठी लिखी है, उनकी भूमिका दोहरी है. नवाब मलिक ने सवाल उठाया कि जम्मू-कश्मीर में बीजेपी सरकार बनाने के लिए पीडीपी और महबूबा मुफ्ती से कैसे गठबंधन कर लेती है. उन्होंने कहा कि बीजेपी अपनी सुविधा के हिसाब से नैरेटिव बनाती है. आज ही सदन में कई ऐसे नेता हैं जिन पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं, तो उनके साथ वो कैसे सरकार चला रहे हैं.

इस्तीफा देने वाले BJP सांसदों को खाली करना होगा घर, 30 दिन की मोहलत!

BJP MPs resigning will have to vacate their homes within 30 days. दिल्ली ! विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करने के बाद लोकसभा सांसदों ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है, जिसे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने स्वीकार कर लिया है. अब खबर है कि दिल्ली में आवास समिति की ओर से इस्तीफा देने वाले सांसदों को बंगला खाली करने को कहा है. पिछले दिनों 5 राज्यों में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की ओर से 4 केंद्रीय मंत्रियों समेत 21 सांसद चुनाव मैदान में उतरे थे, जिसमें से 12 सांसदों को जीत मिली थी और इनमें से 11 सांसदों ने जीत के बाद सांसदी से इस्तीफा दे दिया था. अब सूत्रों के हवाले से खबर है कि लोकसभा आवास समिति ने विधानसभा चुनाव जीतने के बाद संसद सदस्यता से इस्तीफा देने वाले उन सभी बीजेपी सांसदों को 30 दिन में सरकारी आवास खाली करने का नोटिस दिया है. इनमें से 8 सांसदों को लोकसभा आवास समिति पूल से आवास आवंटित किया गया था. जबकि 3 सांसद केंद्रीय मंत्री हैं, इसलिए उन्हें शहरी विकास मंत्रालय से आवंटन मिलता है. सूत्रों का कहना है कि नियम सिर्फ विपक्षी सांसदों के लिए ही नहीं, सभी के लिए सामान हैं. जिन लोकसभा सांसदों को 30 दिन में घर खाली करने का नोटिस दिया गया हैं उनमें राकेश सिंह, गोमती साय, अरुण साव, रिति पाठक, बाबा बालकनाथ, राज्यवर्धन सिंह राठौड़, दिया कुमारी और उदयप्रताप सिंह शामिल हैं. राष्ट्रपति ने स्वीकार किए इस्तीफेइससे पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कल गुरुवार देर रात केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, प्रह्लाद सिंह पटेल और रेणुका सिंह का इस्तीफा स्वीकार कर लिया. इन तीनों मंत्रियों ने हाल में विधानसभा चुनावों में जीत हासिल की थी. इस्तीफा स्वीकार किए जाने के साथ ही राष्ट्रपति मुर्मू ने जनजातीय कार्य मंत्री अर्जुन मुंडा को कृषि मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया. पीएम मोदी की सलाह पर राष्ट्रपति मुर्मू ने अर्जुन मुंडा को कृषि मंत्रालय और किसान कल्याण मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा जबकि इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर को राज्य मंत्री के तौर पर जल शक्ति मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया गया है. इसी तरह केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे को खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है. जीत के बाद सांसदों ने दिया इस्तीफाइससे पहले बीजेपी ने फैसला किया था कि हाल में चुने गए उसके सभी 12 सांसद अपने पद से इस्तीफा दे देंगे. इसके बाद केंद्रीय मंत्रियों नरेंद्र सिंह तोमर, प्रह्लाद पटेल और रेणुका सिंह ने इस्तीफा दे दिया. इन इस्तीफों के बाद माना जा रहा है कि वे राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में नई सरकारों में शामिल हो सकते हैं. छत्तीसगढ़ से लोकसभा सांसद रेणुका सिंह ने भरतपुर-सोनहत सीट से जीत दर्ज की थी. अन्य सांसदों में मध्य प्रदेश से उदय प्रताप सिंह, रीति पाठक और राकेश सिंह के अलावा राजस्थान से राज्यसभा सांसद किरोड़ी लाल मीणा, राज्यवर्धन सिंह राठौड़ और दिया कुमारी के साथ-साथ छत्तीसगढ़ से गोमती साई और अरुण साव शामिल हैं. मीणा के अलावा सभी सांसद लोकसभा सांसद थे.

विधानसभा की हार पर कांग्रेस का चिंतन, समीक्षा बैठक मे होगा कारणों पर मंथन.

Congress party is contemplating its defeat in the legislative assembly, and a review meeting will be held to analyze the reasons.  उदित नारायण  नई दिल्ली। हाल मे सम्पन हुए 5 राज्यों के विधानसभा चुनावों मे तेलंगाना को छोड़ 4 राज्यों मे करारी हार के बाद कांग्रेस के मिशन 2024 को करारा झटका लगा है, कांग्रेस नेता राहुल गाँधी, महासचिव प्रियंका गाँधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के साथ पार्टी नेता आज से 2 दिन हार की समीक्षा करेंगे लेकिन वर्ष 2014 से लगातार चुनाव दर चुनाव हारने पर समीक्षा बैठक करने के बावजूद भी कांग्रेस अपने संगठन मे कोई मूलभूत परिवर्तन नहीं कर पाई है पार्टी मे दूसरी श्रेणी के नेताओं की भारी कमी है ऐसा नही है कि पार्टी मे अच्छे नेताओं की कमी है लेकिन पार्टी मे उनकी कोई सुनवाई नहीं होती कारण कांग्रेस नेतृत्व के आस पास मौजूद मण्डली प्रभावशाली और योग्य लोगो को नेतृत्व के पास फटकने नहीं देते ना ही उनके सुझाव पार्टी नेतृत्व तक पहुंच पाते है एक तरफ जहाँ भाजपा मे जमीनी कार्यकर्ताओं के साथ अनेक सामाजिक और आर्थिक मामलो के जानकारों को सलाहकार नियुक्त किया जाता है वही कांग्रेस मे यह योग्यता विदेश मे पढ़ा होना और कुछ खास लोगों का कृपापात्र होना मात्र है, वर्ष 2004 मे इंडिया शाइनिंग नारे के बावजूद बाजपेई सरकार से सत्ता छीनने वाली कांग्रेस कांग्रेस को लगता है कि वह आज भी मोदी सरकार से ऊबकर सत्ता उनको सौप देगी लेकिन अब वक्त बदल चुका है डिजिटल युग मे आम जनमानस तक सरकारी योजनाओं और एक प्रान्त से दूसरे प्रान्त और विश्व पटल तक की जानकारी प्राप्त कर रहा है, बिगत 10 सालों मे कांग्रेस ने चुनाव कि अपनी पिच तैयार करने मे नाकायाब रही है वह वैसे खेल रही है जैसे भाजपा उन्हें खिलाना चाह रही है, कांग्रेस को हार के मंथन मे कुछ बातों पर आत्म चिंतन कि आवश्यकता है जैसे – *बाहर से आने वालों पर मूल कैडर से ज्यादा भरोसा* दशकों से कांग्रेस पार्टी मे बाहर व दूसरी पार्टियों से आने वालों को संगठन मे बड़े पदों पर जिम्मेदारी दे दी जाती रही है जबकि मूल कैडर के कार्यकर्त्ता जस के तस रह जाते हैँ. *सालाहकारों के चयन, कार्यप्रणाली और अति निर्भरता* एक तरफ जहाँ और पार्टियों मे पार्टी के छोटे तथा जमीनी कार्यकर्त्ताओं की बातों को सुना व समझा जाता है वहीँ आज भी कांग्रेस मे विदेश से मैनेजमेंट पास आउट जमीनी हकीकत से दूर और स्वार्थी सालाहकारों की भरमार है वह नहीं चाहते कि नेतृत्व कोई ऐसा व्यक्ति पहुंचे जिससे उनकी कोई बात आलाकमान तक पहुंचे वो पार्टी से ज्यादा अपनी कुर्सी बचाने की जुगत मे लगे रहते हैँ राहुल गाँधी की अमेठी मे हार उनके प्रतिनिधियों और क्वार्डिनेटरों की कार्यशैली का ही परिणाम था. *हिंदी भाषी नेताओं की कमी* कांग्रेस मे ज्यादातर निर्णय दक्षिण भारत के नेताओं और सालाहकारों की सलाह से लिए जाते है जबकि हिंदी भाषी क्षेत्रो की राजनैतिक भूमि, परिस्थिति दक्षिण से बिलकुल अलग है दक्षिण मे जहाँ स्थानीय मुद्दे हावी रहते है मध्य, उत्तर और पूर्वी भारत मे स्थानीय के साथ साथ राष्ट्रीय मुद्दे ज्यादा प्रभावी रहते हैँ. *कमजोर संगठन* हिंदी भाषी क्षेत्रों मे कांग्रेस का संगठन बेहद कमजोर है राज्य से लेकर जिला और बूथ लेबल तक समर्पित कार्यकर्त्ता नहीं हैँ जहाँ भाजपा और स्वयंसेवक के कार्यकर्त्ता और सिमितियाँ बूथ तक मौजूद और सक्रिय है वही कांग्रेस मे पार्टी पदाधिकारी के अलावा कार्यकर्त्ता ही नहीं है कार्यकर्ताओ का सम्मान ना मिलना उनको हतोत्साहित करता रहा है. *दोहरी राजनैतिक शैली* इस दौर मे जहाँ भाजपा अपनी स्पष्ट नीति पर काम कर रही है वही कांग्रेस जनमानस तक अपनी कोई नीति पहुंचाने मे नाकायाब रहती है वजह है एजेंडा क्लियर ना होना पार्टी किसके साथ है और किसके खिलाफ जनता को यह स्थिति साफ नहीं हो पाती कांग्रेस को जरुरत है बेहतर रणनीतिकार की जो नेतृत्व और पार्टी को बिना अपना स्वार्थ देखे बेहतर रणनीति पर अग्रसर कर सके *संघर्षो मे कमी* विपक्ष मे बैठी कांग्रेस मे संघर्ष की कमी साफ झलकती है जनहित के मुद्दों पर पार्टी के कुछ नेता टेलीविज़न और संसद मे अवश्य बोलते देखे जाते है लेकिन सडक पर और जनता के बीच संघर्षो मे पीछे रहते है कारण पार्टी मे संघर्ष शील कार्यकर्त्ता कम चरणवन्दन और कुर्ताधारी नेताओं की बहुतायत होना है, *एक ही मुद्दे पर अटके रहना और स्थिति का अध्यन ना होना* कांग्रेस के ज्यादातर नेता निजी और संवेदनशील बयान और एक ही मुद्दे पर अटके रहते हैँ जमीनी स्तर पर कार्य ना करने के कारण जन भावना और जमीनी मुद्दों तथा जनता के मन की बात की बात विरोध और सहयोग की जानकारी ही नहीं रहती *संचार माध्यमो के उपयोग की कमी और ओवर कॉन्फिडेंस तथा आत्मनिर्भरता की कमी* संचार युग का आरम्भ करने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी जी के विचारों की पार्टी आज संचार माध्यम और डिजिटल मीडिया मे फिसड्डी साबित हो रही है जहाँ भाजपा मे बूथ लेबल तक के कार्यकर्त्ता डिजिटल माध्यमो से जुड़े और सक्रिय हैँ वही कांग्रेस के ज्यादातर ज़िलों मण्डलों और उनके सहयोगी संगठन के सोशल मीडिया अकाउंट तक नहीं हैँ कांग्रेस के नेता सिर्फ फेसबुक और ट्विटर पर पोस्ट डालने को डिजिटल मार्केट समझते है एक ओर जहाँ अन्य पार्टियों मे डिजिटल के प्रति आकर्षित होकर जनता से जुड़ रही है वही कांग्रेस आज भी पुराने कार्यशैली पर लगी है जहाँ भाजपा व अन्य ज्यादातर प्रचार डिजिटल एजेंसी और संचार माध्यम से कर रही हैँ वही कांग्रेस नेता हाथ पर हाथ धरे या अपने खास को काम दिला मौज मे रहते हैँ *चुनावी तैयारियों मे देरी* विना बेहतर प्रवंधन कोई लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता कठोर निर्णय लेने मे नेतृत्व सक्षम प्रतीत नहीं होता जहाँ भाजपा एक चुनाव के बाद तुरंत दूसरे चुनाव की तैयारी मे लग जाती है वही कांग्रेस नेता टिकट बितरण का इंतज़ार करते हैँ जहाँ जहाँ अन्य पार्टियों इलेक्शन मोड पर सक्रिय रहती हैँ वही कांग्रेस नेता और पार्टी रेस्ट मोड पर, ऐसे ही युवा और जुझारू नेताओं की कमी और नेतृत्व द्वारा उन्हें आगे ना बढ़ा कर पुराने और दरबारी नेताओ पर भरोसा तथा कमजोर आत्म विश्वास पार्टी को नीचे की तरफ ले जा रहा हैँ राहुल गाँधी जैसे सारीखे नेता को वयनाड जैसी … Read more

दिल्ली मे सरकार बनाने की गहमागहमी के बीच भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बी डी शर्मा के साथ रात भोपाल पहुंचे प्रहलाद पटेल.

Amidst intense efforts to form a government in Delhi, Pralhad Patel arrived in Bhopal with BJP State President B.D. Sharma late at night. *उदित नारायण* नई दिल्ली।तीन राज्यों मे मिली बम्पर जीत के बाद से ही भाजपा मे नई सरकार के गठन को लेकर बैठकों एवं मंथनों का दौर जारी हैँ मध्यप्रदेश राजस्थान और छत्तीसगढ़ मे मुख्यमंत्री पद के कई नाम चर्चा मे हैँ, एक तरफ जहाँ शिवराज भोपाल मे बैठकर सियासी गुणागणित लगा रहे हैँ वही देर रात प्रहलाद पटेल राज्य इकाई के प्रमुख बी डी शर्मा के साथ भोपाल पहुचे, दरअसल, मध्‍य प्रदेश की नरसिंहपुर विधानसभा सीट से निर्वाचित विधायक प्रहलाद सिंह पटेल चुनाव परिणाम आने के बाद पहली बार भोपाल पहुंचे। पटेल के साथ बीजेपी प्रदेश अध्‍यक्ष वी‍डी शर्मा भी थे, दोनों एक साथ दिल्‍ली से भोपाल आए। इसके बाद से अटकलें तेज हो गई हैं कि क्‍या प्रहलाद सिंह पटेल ही प्रदेश के अगले मुख्‍यमंत्री होंगे। प्रहलाद पटेल का नाम मुख्‍यमंत्री चहरे में सबसे आगे चल रहा है। पटले ने दिल्‍ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बीजेपी के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात की है। वहीं, भोपाल आने के पहले प्रहलाद पटेल वरिष्‍ठ नेता मुरली मनोहर जोशी का आशीर्वाद लेने भी पहुंचे थे। वही इंदौर-1 विधानसभा से नवनिर्वाचित विधायक कैलाश विजयवर्गीय ने गुरुवार को प्रदेश के अगले मुख्‍यमंत्री को लेकर कहा कि सीएम के नाम की घोषणा रविवार तक हो जाएगी, साथ ही प्रदेश में बीजेपी की बड़ी जीत के लिए श्रेय शिवराज सिंह चौहान की योजनाओं को देने से इंकार कर दिया ,*ग्‍वालियर में तोमर के समर्थन के ग्‍वालियर में तोमर के पोस्‍टर लगे *वहीं, प्रदेश के मुख्‍यमंत्री को लेकर कई तरह की अटकलें चल रही हैं। ग्‍वालियर में केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के बड़े-बड़े पोस्टर लग गए हैं, जिन पर उन्हें ‘बॉस‘ लिखा गया है।पोस्‍टर लगे* वहीं, प्रदेश के मुख्‍यमंत्री को लेकर कई तरह की अटकलें चल रही हैं। ग्‍वालियर में केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के बड़े-बड़े पोस्टर लग गए हैं, जिन पर उन्हें ‘बॉस‘ लिखा गया है।

मंत्री जी का जलवा विकास का हलवा, मानपुर विधानसभा क्षेत्र, कुशमहा गांव ,

मानपुर ! बीजेपी सरकार में पूरे मध्यप्रदेश में जिस तरीके से विकास कार्य हुए है शायद ही इसके पहले कभी हुआ हो। चाहे शहर हो या ग्रामीण चारो ओर अनेको विकास कार्य हुए है। लेकिन उमरिया जिले के मानपुर विधानसभा अंतर्गत ग्राम कुशमहा की बात करे तो यहां के ग्रामीण विकास कैसा होता है जानते ही नही.? ऐसा नही की इस क्षेत्र में कांग्रेस का विधायक रहा है। बल्कि लगातार इस क्षेत्र से 4 बार से बीजेपी की विधायक और सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रही है। विधानसभा चुनाव के दौरान ग्रामीणों के द्वारा मतदान का बहिष्कार किये जाने के बाद ग्रामीणों को समझाने कलेक्टर पहुंचे थे और आश्वाशन देकर मतदान करने का आग्रह किया था। 4 बार से विधायक और कैबिनेट मंत्री फिर भी कुशमहा गांव में विकास रहा कोसो दूर, कलेक्टर ने ली सुध दरअसल मानपुर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कुशमहा गांव बीजेपी सरकार के द्वारा किए गए अनगिनत विकास कार्यों से अछूता रहा है। जबकि ऐसा नहीं कि इस विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस पार्टी का विधायक रहा हो, बल्कि 4 बार से लगातार यहां के लोग बीजेपी की विधायक दीदी को चुनते आ रहे हैं। इस बीच दीदी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में जनजाति कार्य विभाग की कैबिनेट मंत्री भी रही है। बावजूद इसके यह गांव विकास और मूलभूत सुविधाओं से अछूता रहा है। इस बार 2023 के विधानसभा चुनाव के दरमियान कुशमहा गांव के ग्रामीणों ने मतदान करने का बहिष्कार कर दिया। यह खबर जैसे ही जिले के कलेक्टर बुद्धेश कुमार वैद्य तक पहुंची। उन्होंने तत्काल गांव पहुंचकर वहां उपस्थित ग्रामीणों से बातचीत की। ग्रामीणों ने कलेक्टर को अपनी तमाम समस्याओं से अवगत कराया, जिस पर कलेक्टर ने उनकी मांगों को मानते हुए आश्वासन दिया कि चुनाव की आचार संहिता समाप्त होते ही वह उनके गांव पुरे जिला प्रशासन की टीम को लेकर पहुंचेंगे और जरूरत के सभी कामों को कराया जाएगा। तब जाकर ग्रामीण माने और मतदान प्रारंभ कराया गया। बुधवार 6 दिसंबर को कलेक्टर और जिला प्रशासन की टीम ने जहां कुशवाहा गांव पहुंचकर ग्रामीणों के साथ चौपाल लगाई। बल्कि उनकी मांग और जरूरत के अनुसार अलग-अलग कार्यो के लिए वहां मौजूद विभाग प्रमुखों को निर्देशित किया है। निश्चित रूप से कलेक्टर बुद्धेश कुमार वैद्य के द्वारा मतदान के दिन ग्रामीणों को दिए गए आश्वासन और फिर उसे पूरा करने के लिए मौके पर जिला प्रशासन का दल बल लेकर पहुंचना फिर तत्काल ग्रामीणों की मांग और जरूरत को देखते हुए कार्य शुरू करने के निर्देश देना अपने आप में प्रशंसनीय है। ग्रामीणों ने कलेक्टर बुद्धेश कुमार वैद्य का हृदय से आभार जताया है। हालांकि मानपुर विधानसभा अंतर्गत विकास कार्यों और मूलभूत सुविधाओं से उपेक्षित कुशमहा पहला गांव नहीं है। बल्कि दर्जनों गांव यहां के विधायक की कार्यप्रणाली से उपेक्षित पड़े हैं।

सनरूफ खुली कार उमाकांत शर्मा का जलवा बरकरार अपने कार्यकर्ता समर्थकों का किया आभार

जो मनाऐ मनाऐ नहीं आए डीजे की धुन पर सबसे आगे थिरक्ते दिखाई दिए अलताफ खान सिरोंज ! जीत के बाद धन्यवाद कहने निकले उमाकांत शर्मा सिरोंज लटेरी विधानसभा से दोबारा विधायक बनने के बाद प्रचंड बहुमत से जीत हासिल करने के बाद उमाकांत शर्मा सिरोंज नगर में अपने कार्यकर्ताओं समर्थकों के साथ जनता का आभार व्यक्त करने निकले बासौदा नाका बलेजा पेट्रोल पंप के पास से जुलूस की शुरुआत की भारतीय जनता पार्टी के झंडे एवं भगवा लहराते हुऐ झंडे कार्यकर्ताओं के हाथ में नजर आए कार्यकर्ताओं और समर्थकों की खुशी का इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि कार्यकर्ता डीजे की धुन पर झूमते नाचते नजर आए एवं कार्यकर्ताओं ने आतिशबाजी भी की जगह-जगह उमाकांत शर्मा के विधायक बनने के बाद हार फूल मालाओं से स्वागत किया गया मुख्य रूप से नगर पालिका सिरोंज जनपद पंचायत सिरोंज के समक्ष भव्य स्वागत किया गया विशेष तौर पर जो कार्यकरता भारतीय जनता पार्टी के चुनाव प्रचार के दौरान नहीं दिखे उन कार्यकर्ताओं का जमावड़ा भी अच्छा खासा देखने में आया है वहीं अगर हम बात करें भारतीय जनता पार्टी के उन कार्यकर्ताओं की जिनको कई बार वरिष्ठ नेतृत्व मनाने गया फिर भी वह पार्टी का काम करने नहीं आए और क्षेत्र में यह माहौल बन गया कि इस बार यह किसी भी हाल में पार्टी का काम नहीं करेंगे वह कार्यकर्ता भी डीजे की धुन पर सबसे आगे थिरक्ते हुए नजर आए कहीं ना कहीं क्षेत्र में यह भी चर्चा का विषय बना रहा सबाबहार में हुआ समापन जुलूस निकालने के बाद उमाकांत शर्मा कार्यकर्ताओं के बीच छतरी नाके पर स्थित सभागार मैं मौजूद रहकर अपने कार्यकर्ताओं को संबोधित किया एवं कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त किया कार्यकर्ताओं की जमकर तारीफ की और क्षेत्र कश जनता को विश्वास और भरोसा दिलाया कि क्षेत्र की जनता ने जिस तरह मुझ पर विश्वास भरोसा किया है मैं भी जनता से वादा करता हूं के मैं उनके विश्वास भरोसे पर खड़ा उतारूंगा हां जो गलत है या गलत करेगा उसके विरुद्ध में हमेशा खड़ा रहा हूं और खड़ा रहूंगा उमाकांत का जीवन भारतीय जनता पार्टी पर समर्पित क्षेत्रवासियों पर समर्पित

मध्यप्रदेश: चुनावी हार-जीत से जुड़े अजब-गजब कारनामे

भोपाल ! किसी ने चेहरा काला किया तो कोई दंडवत कर पहुंचा मंदिर; कोई सिर मुंडवाकर बोला-संकल्प पूरा हुआ ,किसी ने सिर मुंडवा लिया तो किसी ने चेहरे पर कालिख पोत ली , किसी ने शर्त के एक लाख रुपए जीतकर गोशाला में दान कर दिए, कोई 300 किलोमीटर बाइक से ही भोपाल के लिए निकल पड़ा, कुछ महिलाएं तो बिना चप्पल-जूते के 70 किलोमीटर दूर शनि मंदिर दर्शन करने गईं। दृश्य – 1 ग्वालियरः नेता का मुंह काला न हो, इसलिए अपना ही कर लिया दतिया के भांडेर से कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया ने चुनाव से पहले दावा किया था, ‘प्रदेश में भाजपा को 60 सीटें भी नहीं मिलेंगी। ऐसा हुआ तो मैं अपना मुंह काला करा लूंगा।’ भाजपा ने दो तिहाई बहुमत हासिल कर लिया। नतीजों के बाद इसका वीडियो फिर चर्चा में आ गया। इसके बाद बरैया को घेरने की कोशिशें भी शुरू हो गईं। ऐसे में ग्वालियर ग्रामीण किसान कांग्रेस के महामंत्री योगेश दंडोतिया बरैया के समर्थन में उतर आए। दंडोतिया ने बुधवार को ग्वालियर में बाकायदा प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई। मीडिया के सामने ही उन्होंने जेब से स्याही निकाली और अपने चेहरे पर पोत ली। उन्होंने कहा, ‘फूल सिंह बरैया को मुंह काला नहीं करने दूंगा। इसके लिए मैंने अपना मुंह काला किया है।’ यह भी बता दें कि बरैया भी गुरुवार को भोपाल पहुंचकर अपना वचन पूरा करने के लिए मुंह काला करेंगे। दृश्य – 2 रतलामः यह विधायक तो बाइक से भोपाल के लिए निकल पड़े बात रतलाम जिले की सैलाना विधानसभा सीट की है। यहां से चुनाव जीतकर भारत आदिवासी पार्टी के कमलेश डोडियार विधायक बने हैं। चुनाव जीतने के तीन दिन बाद बुधवार को सोशल मीडिया पर पोस्ट की। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, सीएम शिवराज सिंह चौहान और पुलिस को टैग किया। लिखा, ‘मैं कमलेश डोडियार, विधायक बनने के बाद बाइक से शपथ ग्रहण के पूर्व होने वाली कागजी कार्रवाई पूरी करने भोपाल के लिए निकल चुका हूं। मेरी सुरक्षा के इंतजाम किए जाएं ताकि कोई अनहोनी न हो।’ उन्होंने फेसबुक लाइव के जरिए मदद भी मांगी। कहा- ‘मैं चुनाव में जुगाड़ के सहारे चला हूं। मैं मजदूर वर्ग से आता हूं और काफी गरीब हूं। भोपाल जाने के लिए मैंने दोस्तों को फोन किया था, लेकिन सहायता न मिल पाने पर बाइक से ही भोपाल निकल गया हूं। यदि कोई शुभचिंतक मेरी मदद कर सकते हों तो फोर व्हीलर उपलब्ध करा दें, जिससे मैं समय पर विधानसभा पहुंचकर कागजी कार्रवाई पूरी कर सकूं। मैं किसी से डरता नहीं हूं, जो भी मेरी हत्या करने या नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेगा, वो बर्बाद हो जाएगा।’ सैलाना से भोपाल करीब 330 किलोमीटर है। डोडियार बाइक से भोपाल पहुंच भी गए हैं। उन्होंने 12 हजार रुपए उधार लेकर चुनाव लड़ा था। इसे चुकाने के लिए नोतरा (आदिवासी समाज में आर्थिक मदद की प्रथा) का सहारा लिया। दृश्य – 3 भिंड: नेता प्रतिपक्ष की हार पर 10 साल बाद कराया मुंडन भिंड जिले के लहार विधानसभा क्षेत्र में रहते हैं मुन्ना विश्वकर्मा। 62 साल के मुन्ना पिछले 10 साल से साधु वेश में ही थे। दाढ़ी बढ़ी हुई, सिर के बाल भी बढ़ा लिए। वे अलग-अलग मंदिरों में समय बिताते रहे। बुधवार को उन्होंने अचानक नाई की दुकान पर पहुंचकर बाल कटवाए। शेविंग भी बनवा ली। लोगों ने पूछा तो असलियत सामने आई। पता चला – कांग्रेस लीडर व नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह के चुनाव हारने की खुशी में उन्होंने ऐसा किया है। दरअसल, 10 साल पहले लहार बस स्टैंड के पास बने मुन्नालाल के मकान को नगर पालिका ने अतिक्रमण बताकर तोड़ दिया था। मुन्नालाल ने तत्कालीन विधायक डॉ. गोविंद सिंह पर बेवजह परेशान करने का आरोप लगाया था। उन्होंने संकल्प लिया था- ‘जब तक डॉ. गोविंद सिंह विधायक रहेंगे, तब तक बाल नहीं कटवाऊंगा। दाढ़ी भी नहीं बनवाऊंगा।’ दृश्य – 4 श्योपुर: कीचड़ वाली सड़क पर दंडवत कर पहुंचे मंदिर श्योपुर में मातासूला गांव के रहने वाले किसान रामराज मीणा बुधवार को एक किलोमीटर दूर स्थित हनुमान मंदिर तक दंडवत करते पहुंचे। लोगों ने जब कारण पूछा तो सुनकर हैरान रह गए। मीणा ने बताया कि श्योपुर विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक बाबूलाल जंडेल की जीत के लिए क्षेत्रपाल बाबा के मंदिर में मन्नत मांगी थी। अब इसे पूरा कर रहे हैं। बड़ी बात ये कि सड़क पर कीचड़ के बाद भी वे कहीं रुके नहीं। रामराज मीणा अब गांव से करीब 15 किलोमीटर दूर मानपुर इलाके के क्षेत्रपाल बाबा के मंदिर तक दंडवत परिक्रमा लगाएंगे। इस मौके पर मंदिर में कार्यक्रम भी किया जाएगा। दृश्य -5 सीधी: अपने नेता की जीत की खुशी में 5 साल बाद मुंडन बात 2018 विधानसभा चुनाव की है। सीधी जिले की चुरहट विधानसभा सीट से कांग्रेस नेता अजय सिंह राहुल चुनाव हार गए थे। इसके बाद उनके समर्थक संजय सिंह ने संकल्प लिया- ‘जब तक अजय सिंह राहुल चुनाव जीतकर विधानसभा नहीं पहुंच जाते, बाल नहीं कटवाऊंगा। दाढ़ी भी नहीं बनवाऊंगा।’ आखिरकार 2023 में संजय सिंह के संकल्प की जीत हुई। अजय सिंह राहुल चुनाव जीत गए। इसके बाद बुधवार को वे अपने नेता अजय सिंह राहुल के घर पहुंचे। संजय ने उनके सामने ही मुंडन करवाया और दाढ़ी भी बनवाई। दृश्य – 6 छिंदवाड़ा: शर्त जीतने पर मिले एक लाख रुपए गोशाला में दान किए 21 नवंबर की बात है। छिंदवाड़ा में व्यापारी राम मोहन साहू और कमलनाथ समर्थक प्रकाश साहू के बीच शर्त लगी कि अगर भाजपा प्रत्याशी बंटी विवेक साहू चुनाव जीतते हैं तो राम मोहन 10 लाख रुपए देंगे। अगर कमलनाथ जीतते हैं तो प्रकाश साहू एक लाख रुपए देंगे। शर्त की वजह से दोनों प्रदेशभर में चर्चा में भी रहे। दोनों ने ही अपने-अपने कैंडिडेट की जीत का दावा किया। नतीजे आए तो कमलनाथ ने जीत दर्ज की। आखिरकार, शर्त के मुताबिक मंगलवार को प्रकाश साहू ने राममोहन को एक लाख रुपए दिए। हालांकि, राम मोहन ने यह राशि गोशाला के लिए नगर निगम को दान कर दी।

मध्य प्रदेश सियासत में अकेले खड़े होने का साहस, बिसात कहीं और है… पांसे कहीं शतरंज यहां से खेल रहे हैं सीएम शिवराज ?

*उदित नारायण* भोपाल।मध्य प्रदेश में 18 सालों की राजनीति में परिपक्वता, स्थिरता, सोच और समझ के शिखर पर जा पहुंचे सीएम शिवराज सिंह चौहान इस बार बेहद ही अनोखे अंदाज में अपनी कुर्सी पर आई चुनौती का जवाब न केवल प्रतिद्वंद्वियों को दे रहे हैं, बल्कि नेतृत्व तक भी अपनी सहजता और सामर्थ्य को पहुंचा रहे है । मध्य प्रदेश के नेतृत्व को बदलने का मन बना चुके नेतृत्व की मंशा को भांपते शिवराज ने जनमानस को अपनी मुट्ठी में कैद करने के लिए भावुकता के ऐसे-ऐसे तीर छोड़े थे कि प्रदेशभर की जनता को लगा कि उनका खैरख्वाह उन्हें छोडक़र जा रहा है । इसी भावुकता को लूटते शिवराज ने प्रदेश की जनता के भरपूर वोट बटोरकर पार्टी को ऐतिहासिक विजय दिलाते हुए नेतृत्व को भी वही संदेश और सवाल पहुंचा दिया, जो उन्होंने जनता से कहा था कि मैं नहीं रहूंगा तो क्या होगा ? मैं चला जाऊंगा तो बहुत याद आऊंगा, यह संदेश पहले जनता के लिए थे । अब नेतृत्व के लिए नजर आ रहे हैं। अपनी शतरंज का दूसरा पांसा फेंकते शिवराज ने कल फिर एक साथ दो तीर छोड़े। पहला यह कि मैं न मुख्यमंत्री पद का दावेदार था और न हूं, पार्टी का कार्यकर्त्ता हूँ और प्रधानमंत्री की 2024 की जीत की माला मे 29 कमल पुष्प लगाने हेतु कार्य करने मैं छिंदवाड़ा जाऊंगा, पिछली बार हारी लोकसभा सीट भी दिलवाऊंगा । शिवराज का यह बयान जहां मोदी के प्रति निष्ठा का संदेश है, वहीं इस बात का भी संदेश है कि मुझे नजरअंदाज करना आसान नहीं , वो भोपाल बैठकर दिल्ली मे चल रहे सियासी रंगमंच का आनंद लेते हुए उन्होंने बेफिक्री जताते हुए दो दिन पहले परिवार के साथ रेस्टोरेंट में भोजन किया और ऐलान भी किया कि मैं दिल्ली नहीं जाऊंगा और हकीकत यह है कि शिवराज दिल्ली इसलिए नहीं जा रहे हैं, क्योंकि उनकी बिसात कहीं और जमी है… गोटियां कहीं और फिट हैं और शतरंज वो यहां से खेल रहे हैं। सब कुछ एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है, सहजता का संदेश… सत्ता की अनदेखी…मोदी के प्रति आस्था की भावना का प्रदर्शन और दावेदारों से दूरी एक साथ चले गए वो मोहरे हैं, जिसमें शतरंज की बिसात में उनकी शह और विरोधियों की मात होगी ।

कमलेश्वर डोडियार ने बाइक से घूमकर लड़ा चुनाव, उसी बाइक पर विधायक लिखवाकर पहुंचे भोपाल

अब विधानसभा में सुनाई देगी आदिवासी की आवाज भारत आदिवासी पार्टी के विधायक डोडियार विधानसभा में देंगे अपनी आमद 12 लाख रुपए का कर्ज लेकर लड़ा चुनाव, भाजपा और कांग्रेस को किया चित्त भोपाल। भारत आदिवासी पार्टी ने हाल ही के विधानसभा चुनाव में अपना परचम लहराते हुए एक विधायक को विधानसभा भेजने में कामयाब हुई है। पार्टी ने कमलेश्वर डोडियार को सैलाना से टिकट दिया और वे विधायक चुने गए। सैलाना सीट मध्य प्रदेश की वह एकमात्र सीट है जिसे बीजेपी और कांग्रेस के अलावा किसी अन्य दल ने जीता हो। कमलेश्वर के विधायक बनने से आदिवासी वर्ग के लोगों को उम्मीद है कि वे आदिवासी वर्ग की समस्याओं को विधानसभा में रखेंगे। बता दें, विधायक डोडियार कांग्रेस के गढ़ में सेंध लगाकर भारत आदिवासी पार्टी से विधायक बनकर चर्चाओं में हैं। उन्होंने अपनी बाइक में बाकायदे एमएलए भी लिखवाया है। चुनाव के पहले पुलिस ने भेजा था जेल, एक सप्ताह में छूटेडोडियार चुनाव से पहले उस वक्त सुर्खियों में आए थ्ो, जब पुलिस ने उन्हें िगरफ्तार कर जेल भेज दिया था। नामांकन के एक सप्ताह पहले ही वे जेल से छूटकर बाहर आए थे और 12 लाख रुपए का कर्ज लेकर चुनाव लड़े और चुनाव जीत गए। रतलाम जिले की सैलाना सीट से जीते विधायक डोडियार ने बाइक से ही प्रचार किया था। सड़क पर बैठकर खाना खाया था और अब विधायक बनने के बाद अपने दस्तावेज जमा करने के लिए बाइक से भोपाल के लिए निकल पड़े। बाइक पर लिखवाया एमएलए, उसी से पहुंचे भोपाल विधायक डोडियार ने कहा कि आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। दोस्तों और साथियों से उधार लेकर चुनाव लड़ा हूं। अब बाइक से भोपाल भी जा रहे हैं। डोडियार का मानना है कि जल्दी ही विधायक की सैलरी से कार खरीद लेंगे, लेकिन अभी हमें बाइक से ही सफर करना होगा। पार्टी के इकलौते चर्चित विधायक कमलेश्वर डोडियार बुधवार को विधायक चुने जाने के बाद भोपाल पहुंच गए हैं। हालांकि वे अभी विधानसभा नहीं पहुंचे हैं। संभवत: गुरूवार को विधानसभा पहुंचकर अपने जीत का प्रमाणपत्र देंगे और बाकायदे अपनी आमद देने के साथ ही अपना परिचयपत्र जारी करवाएंगे।

डॉ भीमराव अंबेडकर जी का महापरिनिर्वाण दिवस मनाया गया

अजाक्स संघ के पदाधिकारी महापरिनिर्वाण मनाते हुए ग्यारसपुर में रविदास धाम पर डॉ भीमराव अंबेडकर जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धा सुमन अर्पण किए और बाबा साहब के विचारों पर प्रकाश डाला एवम उनके विचारों पर चलने का निर्णय लिया जिसमें अजाक्स अधिकारी कर्मचारी संघ के तहसील अध्यक्ष देवी सिंह अहिरवार ज्ञान सिंह अहिरवार विक्रम सिंह चिड़ार मनोज कुमार चिडार नंदकिशोर रामकृष्ण सिसोदिया मनोज कुमार प्रदीप कुमार बाबूलाल अहिरवार एवं समाज के वरिष्ठ नागरिक बंधु उपस्थित रहे।

मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान मे सरकार बनाने की कवायद तेज़, प्रहलाद पटेल, नरेंद्र सिंह तोमर सहित विधानसभा लड़े 10 सांसदों का संसद और मंत्रिमंडल से इस्तीफ़ा

दिल्ली । मध्यप्रदेश समेत सभी 3 राज्यों मे सरकार बनाने की कवायद तेज़ हो गयी है राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश मे चुनाव लड़कर विधायक बनने वाले 10 सांसदों ने संसद की सदस्यता से इस्तीफ़ा दे दिया है, इस्तीफ़ा देने वालो मे मध्यप्रदेश से केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल, नरेन्द सिंह तोमर सांसद रीति पाठक, राकेश सिंह उदयप्रताप सिंह राजस्थान से राज्यवर्धन सिंह राठौर, दिया कुमारी, किरोड़ी लाल मीणा छत्तीसगढ़ से गोमती साईं और अरुण साव अभी कुछ और इस्तीफे दिए जा सकते हैँ गौरतलब है कि चार राज्यों मे भाजपा ने अपने 21 सांसदों को विधानसभा लड़ाया था अब भाजपा आलाकमान ने चुनाव जीते हुए सांसदों से मुलाक़ात की और और उन्हें संसद की सदस्यता छोड़ने का फैसला लिया गया पार्टी अध्यक्ष जे पी नड्ढा के साथ सभी इस्तीफ़ा देने स्पीकर के पास पहुंचे,इस्तीफ़ा देने के बाद केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल से मुख्य्मंत्री बनने के सवाल पर चुप्पी साधते हुए उन्होंने मुसुकराते हुए मंत्रिमंडल से इस्तीफ़ा देने की बात कह कर चले गए, जल्द ही भाजपा की तरफ से कुछ चौकाने वाले नामों की घोषणा हो सकती है

तेलंगाना के नए मुख्यमंत्री होंगे रेवंत रेड्डी, 7 दिसंबर को लेंगे शपथ कांग्रेस आलाकमान ने लगाई नाम पर मुहर.

The new Chief Minister of Telangana will be Revanth Reddy, who will take the oath on December 7. The Congress high command has stamped approval on the name तेलंगाना । कांग्रेस के महासचिव केसी वेणुगोपाल ने बैठक में बताया कि रेवंत रेड्डी तेलंगाना के नए मुख्यमंत्री होंगे. वह अनुभवी हैं, उन्होंने सभी के साथ काम किया है और वह पहले ही तेलंगाना के लोगों को वादा कर चुके हैं कि वह उनके लिए काम करेंगे.तेलंगाना के अगले मुख्यमंत्री के लिए कांग्रेस के रेवंत रेड्डी के नाम पर मुहर लग गई है. वह राज्य के नए मुख्यमंत्री होंगे और सात दिसंबर को पद की शपथ लेंगे. कांग्रेस ने मंगलवार शाम को इसका आधिकारिक ऐलान कर दिया. कांग्रेस के महासचिव केसी वेणुगोपाल ने बैठक में बताया कि रेवंत रेड्डी तेलंगाना के नए मुख्यमंत्री होंगे. वह अनुभवी हैं, उन्होंने सभी के साथ काम किया है और वह पहले ही तेलंगाना के लोगों को वादा कर चुके हैं कि उनके लिए काम करेंगे. उन्होंने बताया कि रेवंत रेड्डी सात दिसंबर को पथ की शपथ लेंगे.तेलंगाना विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 64 सीटें जीतकर बीआरएस को सत्ता से बाहर कर दिया था. बीआरएस को 39 सीटों से ही संतोष करना पड़ा था जबकि बीजेपी को यहां आठ ही सीटें मिली थीं. तेलंगाना में जीत का सबसे ज्यादा श्रेय रेवंत रेड्डी को मिल रहा है. यही वजह है कि सीएम पद के लिए सबसे ज्यादा चर्चा रेवंत रेड्डी की है. रेवंत रेड्डी तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हैं. रेड्डी तेलंगाना में कांग्रेस के उन तीन लोकसभा सांसदों में शामिल हैं, जिन्होंने 2019 में जीत हासिल की थी. इस चुनाव में भी रेवंत तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव के सामने कामारेड्डी विधानसभा सीट से चुनाव लड़े, हालांकि, बीजेपी उम्मीदवार ने दोनों को मात दे दी.

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