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राहुल गांधी अपने हालिया छपे लेख को लेकर निशाने पर राजपरिवार ज्योतिरादित्य सिंधिया और दीया कुमारी ने घेरा

नई दिल्ली लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं. इस बार वह अपने एक आर्टिकल के कारण चर्चा में हैं, जो एक अखबार में पब्लिश हुआ है और कहा जा रहा है, इस लेख में नेता प्रतिपक्ष ने राज परिवारों पर निशाना साधा है. इस लेख को लेकर विवाद ने तूल पकड़ लिया है और देश के राज परिवारों ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया जाहिर की है. सोशल मीडिया पर इस लेख को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है. राहुल गांधी ने क्या लिखा, जिस पर है आपत्ति? राहुल गांधी ने लेख में लिखा है कि ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत की आवाज अपनी व्यापारिक शक्ति से नहीं बल्कि अपने शिंकजे से कुचली थी. ‘ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत के राजा- महाराजाओं को डराकर-धमकाकर और उन्हें घूस देकर भारत पर राज किया. उन्होंने यह भी लिखा कि, ईस्ट इंडिया कंपनी खत्म हो गई लेकिन उसने जो डर पैदा किया था, वह फिर से दिखाई देने लगा है. एकाधिकारवादियों की एक नई पीढ़ी ने उसकी जगह ले ली है.’ कंपनी ने हमारे अधिक लचीले महाराजाओं और नवाबों के साथ साझेदारी करके, रिश्वत देकर और धमकाकर भारत का गला घोंटा. इसने हमारे बैंकिंग, नौकरशाही और सूचना नेटवर्क को नियंत्रित किया. हमने अपनी आजादी किसी अन्य राष्ट्र से नहीं खोई; हमने इसे एक एकाधिकारवादी निगम से खो दीया जिसने एक जबरदस्ती तंत्र चलाया.’ क्या बोलीं डिप्टी सीएम दिया कुमारी? राहुल गांधी के इस आर्टिकल पर विवाद खड़ा हो गया है.  राजस्थान की डिप्टी सीएम दिया कुमारी ने इस लेख की कड़ी निंदा करते हुए प्रतिक्रिया दी है और एक्स पर लिखा. ‘मैं आज एक संपादकीय में भारत के पूर्व शाही परिवारों को बदनाम करने के राहुल गांधी के प्रयास की कड़ी निंदा करती हूं. एकीकृत भारत का सपना भारत के पूर्व राजपरिवारों के सर्वोच्च बलिदान के कारण संभव हो सका है, ऐसे ऐतिहासिक तथ्यों की आधी-अधूरी व्याख्या के आधार पर लगाए गए निराधार आरोप पूरी तरह से अस्वीकार्य हैं.’ ‘छवि खराब कर रहे हैं राहुल गांधी’ राजस्थान की डिप्टी CM दिया कुमारी ने सख़्त एतराज़ जताया है. दिया कुमारी ने कहा है कि राहुल गांधी इतिहास की ग़लत व्याख्या कर देश के रजवाड़ों की छवि ख़राब कर रहे हैं. राजा-महराजाओं के योगदान के बिना अखंड भारत की कल्पना नहीं की जा सकती हैं. वह बेकार की बातें कर रहे हैं. राजा-महाराजाओं ने आज़ादी के लड़ाई में अपना अमूल्य योगदान दिया है. ग़ौरतलब है कि दीया कुमारी के पिता महाराजा भवानी सिंह कांग्रेस पार्टी के नेता थे और जयपुर से कांग्रेस पार्टी के टिकट पर लोकसभा का चुनाव भी लड़ चुके हैं. राजस्थान में अभी अलवर राजघराने के पूर्व महराज भंवर जितेंद्र सिंह कांग्रेस के महासचिव है. ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी राहुल गांधी को घेरा वहीं ग्वालियर के शाही परिवार सिंधिया राजघराने से ताल्लुक रखने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी राहुल गांधी को घेरा है. उन्होंने एक्स पर लिखा, ‘नफरत बेचने वालों को भारतीय गौरव और इतिहास पर व्याख्यान देने का कोई अधिकार नहीं है. भारत की समृद्ध विरासत के बारे में राहुल की अज्ञानता और उनकी औपनिवेशिक मानसिकता ने सभी हदें पार कर दी हैं. ‘अगर राहुल गांधी वास्तव में देश का उत्थान करना चाहते हैं, तो उन्हें भारत माता का अपमान बंद कर, असली भारतीय नायकों के बारे में जानना चाहिए. महादजी सिंधिया, युवराज बीर टिकेंद्रजीत, कित्तूर चेनम्मा, और रानी वेलु नचियार जैसे योद्धाओं ने स्वतंत्रता के लिए साहसपूर्वक संघर्ष किया था. भारत की विरासत का संबंध केवल “गांधी” नाम से नहीं है. भारतीय इतिहास का आदर करें, अन्यथा उसके बारे में बोलकर बेतुके दावे न करें.’  

मैं जम्मू- कश्मीर के गांदरबल में हुए कायरतापूर्ण आतंकवादी हमले की हम कड़ी निंदा करता हूं: खरगे

नई दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी तथा पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने जम्मू-कश्मीर के गांदरबल में हुए आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा करते हुए पीड़ित परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है। श्री खरगे ने सोमवार को कहा, ‘‘मैं जम्मू- कश्मीर के गांदरबल में हुए कायरतापूर्ण आतंकवादी हमले की हम कड़ी निंदा करता हूं जिसमे कई श्रमिक और एक डॉक्टर मारे गए हैं। लक्षित हिंसा का यह अमानवीय और घृणित कृत्य से भारत जम्मू-कश्मीर में प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के निर्माण से पीछे नहीं हटेगा। एक राष्ट्र के रूप में, हम आतंकवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई में एक साथ हैं। पीड़ितों के परिवारों के प्रति हमारी हार्दिक संवेदना। हम घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हैं।” श्री गांधी ने कहा, ‘‘गांदरबल में आतंकवादी हमले में एक डॉक्टर और प्रवासी मज़दूरों समेत कई लोगों की हत्या बहुत ही कायरतापूर्ण और अक्षम्य अपराध है। सभी शोकाकुल परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त करता हूं और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की आशा करता हूं।” उन्होंने कहा, ‘‘आतंकवादियों का यह दुस्साहस जम्मू-कश्मीर में निर्माण का क्रम और लोगों का विश्वास कभी नहीं तोड़ पाएगा। आतंकवाद के खिलाफ इस लड़ाई में पूरा देश एकजुट है।” श्रीमती वाड्रा ने कहा, ‘‘जम्मू- कश्मीर के गांदरबल में कायराना आतंकी हमले में पांच मजदूरों समेत छह नागरिकों की हत्या अत्यंत निंदनीय है। निर्दोष नागरिकों की हत्या करके आम जनता के बीच हिंसा और दहशत फैलाने जैसे कृत्य मानवता के विरुद्ध अपराध हैं। इसके खिलाफ पूरा देश एकजुट है। शोक- संतप्त परिवारों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं एवं घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना।”  

देवगुराडिया में रावण के दस सिरों के स्थान पर राहुल गांधी-प्रियंका लगाकर दहन करने पर कांग्रेस नेता भड़क गए

इंदौर  इंदौर के देवगुराडिया में कांग्रेस नेता व लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी व राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के फोटो रावण के दस सिरों के स्थान पर लगाकर दहन करने पर कांग्रेस नेता भड़क गए। रावण दहन के दौरान बने वीडियो वायरल होने के बाद रविवार को बड़ी संख्या में कांग्रेसी पुलिस थाने पहुंचे। युकां जिला अध्यक्ष दौलत पटेल ने आरोप लगाया कि दशहरा उत्सव समिति में भाजपा नेता शामिल थे और उन्होंने जानबूझकर यह कृत्य किया। इंदौर ग्रामीण क्षेत्र के खुड़ैल थाना में दोपहर प्रदर्शन करते हुए कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने देवगुराडिया दशहरा समिति पर एफआइआर की मांग की है। हालांकि पुलिस ने अभी तक के दर्ज नहीं किया है। ओवैसी-ममता के चेहरे रावण के वायरल वीडियो में कांग्रेस नेताओं के साथ ही पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी एवं सांसद असदुद्दीन ओवैसी के चेहरे भी लगाए गए थे। कांग्रेस नेताओं ने पुलिस को ज्ञापन सौंपते हुए मामले की जांच कर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। इंदौर. इंदौर के देवगुराडिया में कांग्रेस नेता व लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी व राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के फोटो रावण के दस सिरों के स्थान पर लगाकर दहन करने पर कांग्रेस नेता भड़क गए। रावण दहन के दौरान बने वीडियो वायरल होने के बाद रविवार को बड़ी संख्या में कांग्रेसी पुलिस थाने पहुंचे। युकां जिला अध्यक्ष दौलत पटेल ने आरोप लगाया कि दशहरा उत्सव समिति में भाजपा नेता शामिल थे और उन्होंने जानबूझकर यह कृत्य किया। इंदौर ग्रामीण क्षेत्र के खुड़ैल थाना में दोपहर प्रदर्शन करते हुए कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने देवगुराडिया दशहरा समिति पर एफआइआर की मांग की है। हालांकि पुलिस ने अभी तक के दर्ज नहीं किया है। ओवैसी-ममता के चेहरे रावण के वायरल वीडियो में कांग्रेस नेताओं के साथ ही पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी एवं सांसद असदुद्दीन ओवैसी के चेहरे भी लगाए गए थे। कांग्रेस नेताओं ने पुलिस को ज्ञापन सौंपते हुए मामले की जांच कर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है।

राहुल गांधी के भाषणों का असर कांग्रेस को मिली जम्मू और हरियाणा में हार!

नई दिल्ली आजकल मीडिया में इस बात के बहुत चर्चे थे कि कांग्रेस नेता राहुल का मेकओवर हो गया है. राहुल गांधी की बातें देश की जनता प्रधानमंत्री से भी अधिक सुन रही है. काग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने तो बकायदा सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के राहुल गांधी और नरेंद्र मोदी हैंडल के आंकड़ों की तुलना करते हुए इसे साबित भी किया था. इसमें कोई दो राय नहीं हो सकती कि राहुल गांधी आजकल कुछ भी बोलते हैं सभी नैशनल टीवी चैनल उनको कवर करते हैं क्योंकि जनता उन्हें सुनना चाह रही है. पर जब आप बेवजह की बातें करने लगते हैं तो जनता के लिए वे बातें ओवरडोज हो जातीं हैं. क्या ऐसा ही कुछ राहुल गांधी के साथ भी हुआ है? क्योंकि जम्मू में नेशनल कॉन्फ्रेंस जैसा एक मजबूत साथी का समर्थन होने के बावजूद कांग्रेस का वहां से सफाया हो गया है.कांग्रेस को जम्मू में केवल एक मुस्लिम प्रत्याशी वाली सीट ही मिल सकी है. जबकि नेशनल कान्फ्रेंस ने जम्मू की कई सीटें हिंदू प्रत्याशी खडे़ कर भी जीत लिए हैं. यहां तक कि जम्मू कश्मीर बीजेपी प्रेसिडेंट रविंद्र रैना को भी हराने वाला नेशनल कॉन्फेंस का एक हिंदू प्रत्याशी ही है. यहां हिंदू प्रत्याशी और मुस्लिम प्रत्याशी का नाम इसलिए लिया जा रहा है ताकि यह बताया जा सके वोटों का ध्रुवीकरण कम से कम जम्मू में हिंदू मुस्लिम के नाम पर नहीं हुआ है. इसके बावजूद जम्मू में कांग्रेस की दाल नहीं गली है. 1- हरियाणा और जम्मू में नहीं चला राहुल गांधी की बातों का जोर राहुल गांधी ने इस बार के चुनावों में बीजेपी में चुनाव प्रचार के महारथी कहे जाने वाले प्रधानमंत्री मोदी से भी कहीं अधिक रैलियां , सभाएं और रोड शो किया. पर जाट बेल्ट तक में कांग्रेस की हालत खराब रही. कांग्रेस की लहर के बावजूद बीजेपी अगर हरियाणा में तीसरी बार पूरे बहुमत के साथ अगर सरकार बनाने जा रही है तो इसका मतलब है कि राहुल गांधी का करिष्मा काम नहीं किया है. उनके साथ उनकी बहन प्रियंका भी पूरी तरह लगी हुईं थीं. जम्मू में भी अब तक की सबसे बड़ी हार कांग्रेस को देखने को मिली है. कांग्रेस जम्मू कश्मीर में 32 सीटों पर चुनाव लड़ी, जिनमें से 10 सीटों पर मुस्लिम कैंडिडट उतारे और 22 हिंदुओं को टिकट दिया.पर जम्मू में कांग्रेस को एक भी सीट नहीं मिली. जबकि नेशनल कॉन्फ्रेंस को कुल 42 सीटों पर जीत मिली है जिसमें कुछ सीटें उसने जम्मू में हिंदू कैंडिडेट खडा़ कर भी जीत लिया है. पर कांग्रेस जम्मू से साफ हो गई है. कश्मीर में उसे 6 सीटें मिलीं हैं पर वो सभी मु्स्लिम कैंडिडेट वाली सीटें आईं हैं.मतलब साफ है कि कांग्रेस की स्थिति बीजेपी से तो खराब रही है नेशनल कॉन्फ्रेंस से भी खराब रहीं. इसका एक और मतलब निकलता है कि जम्मू कश्मीर में कांग्रेस को मिली सीटें भी नेशनल कॉन्फ्रेंस की बदौलत ही आईं हैं. जाहिर है कि हरियाणा और जम्मू में कांग्रेस को मिली हार से राहुल गांधी के भाषणों और मुद्दों को तो टार्गेट किया जाएगा. 2-जाति जनगणना का मुद्दा क्या उल्टा पड़ गया हरियाणा में हरियाणा में जिस तरह कांग्रेस को हार मिली है और जिस तरह बीजेपी के प्रत्य़ाशियों को जाट सीटों पर वोट मिले हैं उसका सीधा मतलब है कि जाति जनगणना का मुद्दा नहीं चला है. हरियाणा में ओबीसी वोटर्स ने बीजेपी का साथ पूरी ईमानदारी के साथ दिया है.विनेश फोगाट का मुकाबला बीजेपी के एक ओबीसी कैंडिडेट से था. बीजेपी को भी ऐसा लग रहा था कि योगेश बैरागी कहीं विनेश के सामने टिक नहीं रहे हैं. इसलिए ही शायद बीजेपी ने यहां कम ध्यान दिया. पर विनेश के मुकाबले योगेश को केवल 6 हजार वोट कम मिले हैं. ये बताता है कि विनेश को पिछड़ी जातियों के वोट नहीं मिले.मतलबा साफ है कि राहुल गांधी के सामाजिक न्याय की बातें हरियाणा की जनता को हजम नहीं हुईं. 3-जिसकी जितनी हिस्सेदारी उसकी उतनी भागीदारी कभी नहीं भाएगी कांग्रेस के कोर वोटर्स को राहुल गांधी अपने गुरु ओवरसीज कांग्रेस के अध्यक्ष सैम पित्रोदा की इच्छानुसार कई बार देश की संपत्तियों के बंटवारे की बात करते रहे हैं. इसके साथ ही जाति जनगणना के पीछे उनका इरादा है कि देश में अमीरों की संपत्ति का बंटवारा किया जा सके. वैसे तो हरियाणा में उन्होंने इस मुद्दे पर जोर नहीं दिया नहीं तो जाटों का वोट भी कांग्रेस को नहीं मिलता . क्योंकि हरियाणा में जाटों के पास सबसे अधिक जमीन है.वह कभी नहीं चाहेंगे कि उनकी जमीन का बंदरबांट हो.दरअसल राहुल गांधी की ये विचारधारा उन्हें वामपंथ के नजदीक ले जाती है. जबकि वामपंथी विचारधार अब पूरी दुनिया से खत्म हो चुकी है. 4-संविधान बचाओ- आरक्षण बचाओ नारे की हवा निकली हरियाणा में जिस तरह दलितों ने बीजेपी या अन्य को वोट दिया है उससे नहीं लगता है कि अब संविधान बचाओ-आरक्षण बचाओ का मुद्दा रह गया है. हो सकता है कि दलितों का वोट बीजेपी को नहीं मिला हो. पर यह भी तय है कि कम से कम कांग्रेस को नहीं मिला है. लोकसभा चुनावों में उत्तर प्रदेश में दलित वोटों जरूर विपक्ष को गए थे. हरियाणा के विश्वेषण से ऐसा लगता है कि दलित वोटों पर प्रभाव इस नारे का नहीं था. इसके लिए यूपी चुनावों की फिर से विश्लेषण करना होगा. 5-अडानी और अंबानी के खिलाफ एजेंडा राहुल गांधी के भाषणों में अब भी अडानी और अंबानी छाए रहते हैं. बार-बार वो याद दिलाते हैं कि राम मंदिर के उद्घाटन के समय अडानी-अंबानी और अमिताभ बच्चन दिखे. गरीब , दलित और पिछड़े नहीं दिखे. वो अपने भाषणों में साबित करते हैं कि पीएम मोदी जो भी करते हैं वो अपने दोस्तों अडानी और अंबानी के लिए करते हैं. दूसरी तरफ कांग्रेस सरकारें अडानी- अंबानी के साथ मधुर रिश्ते रखती हैं इसका जवाब वो नहीं देते. हरियाणा में चुनाव के दौरान उन्होंने एक दिन कहा कि अंबानी के घर शादी में कौन गया था. आपने देखा वहां मोदी गए थे पर मैं नहीं गया था.जाहिर है कि अडानी-अंबानी की बातें लोगों को अब ओवरडोज हो रही हैं.    

सांसद राहुल गांधी के खिलाफ दायर मानहानि के मामले में समन जारी

मुंबई  महाराष्ट्र के नासिक जिले की एक अदालत ने हिंदुत्व विचारक विनायक दामोदर सावरकर के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के खिलाफ दायर मानहानि के मामले में उन्हें समन जारी किया है। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, नासिक, दीपाली परिमल केडुस्कर ने गांधी को इस संबंध में एक नोटिस जारी किया, जिसमें कहा गया है कि ‘‘एक देशभक्त व्यक्ति के खिलाफ दिया गया बयान प्रथम दृष्टया अपमानजनक प्रतीत होता है।’’ गांधी को मामले की अगली तारीख पर व्यक्तिगत रूप से या अपने कानूनी प्रतिनिधि के माध्यम से उपस्थित होना होगा, जिस पर अभी निर्णय होना बाकी है। शिकायतकर्ता एक गैर सरकारी संगठन के निदेशक हैं। शिकायतकर्ता ने दावा किया कि उन्होंने हिंगोली में गांधी द्वारा संबोधित एक संवाददाता सम्मेलन और नवंबर 2022 में कांग्रेस नेता द्वारा दिए गए भाषण को सुना और देखा है। उन्होंने आरोप लगाया कि गांधी ने इन दोनों मौकों पर अपने भाषण और दृश्य चित्रणों से वीर सावरकर की प्रतिष्ठा को जानबूझकर नुकसान पहुंचाया और समाज में उनकी छवि को धूमिल करने की भी कोशिश की। शिकायतकर्ता के अनुसार, गांधी ने कहा कि ‘‘सावरकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जिन्न हैं’’ और यह टिप्पणी मानहानिकारक प्रतीत होती है। शिकायतकर्ता ने कहा कि गांधी ने इसके बाद आरोप लगाया कि ‘‘सावरकर ने हाथ जोड़कर रिहाई के लिए प्रार्थना की और उन्होंने ब्रिटिश सरकार के लिए काम करने का वादा भी किया।’’ अदालत ने सभी दलीलों पर गौर करने के बाद कहा, ‘‘रिकॉर्ड में प्रस्तुत साक्ष्यों पर गौर करने पर, अभियुक्त द्वारा एक देशभक्त व्यक्ति के खिलाफ दिए गए बयान प्रथम दृष्टया मानहानिकारक प्रतीत होते हैं।’’ मजिस्ट्रेट ने कहा कि मामले में कार्यवाही को आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त आधार हैं। इसके बाद अदालत ने गांधी के खिलाफ मानहानि और जानबूझकर अपमानित करने से संबंधित धाराओं के तहत नोटिस जारी किया।    

राहुल गांधी के खिलाफ रायबरेली में पोस्टर, पूछा- क्या आपको वोट देने वाला हिंदू हिंसक है

 रायबरेली  कांग्रेस नेता राहुल गांधी मंगलवार को एकदिवसीय दौरे पर रायबरेली में हैं। इस बीच, संसद में हिंदू धर्म को लेकर दिए गए उनके बयान के विरोध में यहां पोस्टर लगाए गए हैं। पोस्टर में कांग्रेस नेता से एक या दो नहीं, बल्कि कई सवाल पूछे गए हैं। पोस्टर में राहुल गांधी से पूछा गया कि आपको वोट देने वाला क्या हिन्दू मतदाता हिंसक है? आप किस धर्म के हो, स्पष्ट करो? रायबरेली का मतदाता भविष्य में आपको वोट क्या गाली खाने के लिए देगा? इन पोस्टरों पर कांग्रेस जिला अध्यक्ष पंकज तिवारी ने नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि यह ओछी मानसिकता वाले लोगों की करतूत है। दरअसल, बीते दिनों कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने लोकसभा में हिंदू धर्म पर बयान दिया था। उन्होंने कहा था, “जो अपने आपको हिंदू कहते हैं, वो 24 घंटे नफरत और हिंसा करते हैं।“ राहुल के इस बयान पर पीएम मोदी ने सदन में खड़े होकर विरोध जताते हुए कहा था, “इस तरह से नेता प्रतिपक्ष द्वारा पूरे समुदाय को हिंसक बताना उचित नहीं है।” इस पर फिर राहुल गांधी ने कहा था, “पीएम मोदी और आरएसएस हिंदू समाज नहीं है। मैं उन लोगों की बात कर रहा हूं, जो कि हिंदू धर्म के नाम पर दिन-रात राजनीति करते हैं।“ कांग्रेस नेता राहुल गांधी मंगलवार को एकदिवसीय दौरे पर रायबरेली पहुंचे हैं। उन्होंने अपने दौरे की शुरुआत पूजन-अर्चन से की। पूजा के बाद वो भूमऊ गेस्ट हाउस पहुंचे, जहां वो कार्यकर्ताओं से मुलाकात कर रहे हैं। लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज करने के बाद यह उनका दूसरा दौरा है। इससे पहले, वो कार्यकर्ता सम्मेलन में हिस्सा लेने रायबरेली पहुंचे थे। रायबरेली उनकी मां सोनिया गांधी की परंपरागत सीट रही है, लेकिन इस बार वो राजस्थान सीट से राज्यसभा पहुंच गई हैं। इसके बाद लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने यहां से राहुल गांधी को चुनावी मैदान में उतारा ।

कांग्रेस अग्निवीर ही नहीं एमएसपी जैसे कई मुद्दो्ं पर बीजेपी को बैकफुट पर डालने के लिए हथकंडे अपनाए

नई दिल्ली अग्निवीर पर राहुल गांधी और कांग्रेस ने संसद में और संसद के बाहर जो नरेटिव सेट करना चाहा फिलहाल उस पर लगाम लगती दिख रही है. सेना के क्लैरिफिकेशन के बाद शहीद अग्निवीर परिवार ने भी मान लिया है कि उसे अब तक उसे 98 लाख रुपये मिल चुके हैं और 67 लाख की रकम और मिलने वाली है. इसके अलावा पंजाब सरकार से भी एक करोड़ रुपया अतिरक्त परिवार को मिला है. सेना से मिले 98 लाख रुपये के बैंक ट्रांजेक्शन की डिटेल भी सामने आ चुकी है. शायद इन्ही सब कारणों का नतीजा है कि कांग्रेस ने शुक्रवार को इस मुद्दे पर बिल्कुल चुप्पी साध ली है. पर देर शाम तक कांग्रेस की ओर से पहले रणदीप सुरजेवाला ने पीसी करके सफाई देने की कोशिश की. फिर राहुल गांधी का भी बयान आ गया. अब कांग्रेस इंश्योरेंस की रकम मिलने की बात कहकर झेंप मिटाना चाहती है. कांग्रेस को समझना चाहिए कि इंश्योरेंश के लिए भी प्रिमियम जमा करना होता है, और सरकार सभी अस्थाई कर्मचारियों के लिए इतनी बड़ी रकम की इंश्योरेंश नहीं कराती. दरअसल कांग्रेस आज कल भारतीय जनता पार्टी के ही तरीके से आक्रामक ढंग से खेल रही है. झूठ या सच किसी भी तरीके से सामने वाली पार्टी पर हावी होना है. अग्निवीर ही नहीं एमएसपी आदि जैसे कई मुद्दो्ं पर बीजेपी को बैकफुट पर डालने के लिए इस तरह के हथकंडे अपनाए गए. पर अग्निवीर जैसे संवेदनशील मुद्दे पर विवाद खड़ा करके कांग्रेस ने भारतीय सेना को नुकसान पहुंचाया है. जिन परिवारों से सेना के सबसे निचले लेवल की भर्तियां होती हैं उन तक जो गलतफहमियां पैदा हो चुकी हैं उन्हें खत्म होने में महीनों में लग जाएंगे. झूठ बातों का नरेटिव सेट करना भारतीय राजनीति में सबसे बड़े बुराई के रूप में उभरी है. राजनीतिक फायदा उठाने के लिए इस हथकंडे का इस्तेमाल सभी पार्टियां करने लगी हैं. लेकिन अग्निवीर को लेकर जिस तरह की बातें संसद में हुई हैं, वे फिक्र बढ़ाने वाली हैं – और इस मामले में सेना की भी एंट्री होने से बात और भी सीरियस हो जाती है. इसलिए जरूरी है कि अग्निवीर ही नहीं किसी भी तरह का झूठ बोलकर जनता को गुमराह करने वाले बयानों को रोकने के लिए जल्द से जल्द कोई कदम उठाया जाना चाहिये. लोकसभा में झूठ गंभीर मुद्दा है, पर होगा कुछ नहीं लोकसभा भारतीय लोकतंत्र का मंदिर है. यहां पर सत्ता पक्ष या विपक्ष, किसी भी पक्ष के लोग झूठ बोलते हैं तो उस पर तत्काल एक्शन की व्यवस्था होनी चाहिए. पीएम नरेंद्र मोदी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से सदन में राहुल गांधी के झूठ पर झूठ बोले जाने पर कार्रवाई करने की अपील की थी. बीजेपी सांसद बांसुरी स्वराज ने भी राहुल के खिलाफ लोकसभा अध्यक्ष को नोटिस भेजा है. संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने साफ-साफ कहा है कि गांधी परिवार का सदस्य होने के नाते राहुल गांधी सदन को गुमराह करके बच नहीं सकते हैं, उन्हें नियमों के तहत कार्रवाई का सामना करना ही पड़ेगा. पर ऐसा कुछ होता नजर नहीं आता. गृहमंत्री अमित शाह ने भी राहुल गांधी के अग्निवीर योजना, हिंदुत्व, किसानों के मुद्दे पर जो भी बयान दिया, उस पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी. उन्होंने स्पीकर ओम बिरला से नेता प्रतिपक्ष के बयानों की जांच की मांग की थी. शाह ने कहा, बयानों के सत्यापन का निर्देश दिया जाए और हमें संरक्षण प्रदान किया जाए. राहुल गांधी ने भाषण के अंत में गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष की कई बातें तथ्यात्मक और सत्य नहीं है. उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से आग्रह किया कि इन बातों का सत्यापन किया जाए. जिसपर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा, सत्यापन किया जाएगा. पर एक्शन के नाम पर कुछ नहीं होने वाला है. क्योंकि झूठ का सहारा सभी लेते हैं. चुनाव प्रचार के दौरान भी लगातार झूठ बोला गया पूर्व पीएम डॉ. मनमोहन सिंह ने चुनाव प्रचार के दौरान दूषित चुनाव अभियान पर एक बयान देकर एक बहस को जन्म दे दिया था. सिंह ने कहा था कि अतीत में किसी भी प्रधान मंत्री ने समाज के एक विशिष्ट वर्ग या विपक्ष को निशाना बनाने के लिए ऐसे घृणित, असंसदीय और असभ्य शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया है. पर मनमोहन सिंह ने केवल एक चश्मे से ही वर्तमान को देखा. जबकि झूठे प्रचार से गलत नरेटिव सेट करने की कोशिशें इस बार के चुनावों इंडिया गठबंधन की ओर से ज्यादा हुईं.एक उदाहरण देखिए नरेंद्र मोदी फिर पीएम बन गए तो देश में फिर चुनाव नहीं होंगे. रूस की तरह देश में एक दलीय प्रणाली की शुरूआत होगी और पुतिन की तरह नरेंद्र मोदी स्थाई रूप से देश के शासक बन जाएंगे. संविधान खतरे में है, आरक्षण खतरे में है का नरेटिव सेट करने की कोशिश कितनी हास्यास्पद थी. इसका फायदा भी विपक्ष को मिला. पर क्या देश में अब तक संविधान संशोधन नहीं होते रहे हैं. कांग्रेस राज में कितने संविधान संशोधन हुए हैं. क्या संविधान खतरे में पड़ गया. इसी तरह आरक्षण समाप्त करने का भ्रम फैलाना देश की जनता के साथ गद्दारी से कम नहीं था. अरविंद केजरीवाल का सीएए विरोध तो इतना हास्यास्पद था कि सीधे इसके लिए केस होना चाहिए था. चुनाव प्रचार के शुरूआती दिनो में कई दिन टीवी पर वे आते और यही कहते कि इस कानून के बन जाने के बाद करोड़ों पाकिस्तानी दिल्ली में आकर बस जाएंगे. हमारी नागरिक सुविधाओं का क्या होगा. जबकि हर कोई जानता है कि इस कानून के लागू होने के बाद भी मुट्ठी भर लोग ही पाकिस्तान से भारत आकर नागरिकता ले सकते हैं. यह कानून इसलिए लाया गया है कि भारत में दशकों से जो लोग रहे हैं उन्हें देश की नागरिकता मिल सके. लगातार झुठ बोलने वाले नेताओं पर लगाम के लिए उठाने होंगे कदम अग्निवीर पर कांग्रेस का झूठ सुनियोजित लगता है. क्योंकि राहुल ने अग्निवीर के परिवार का जो विडियो जारी किया उसमें परिवार से बातचीत चुनाव प्रचार के दौरान की है. स्पष्ट है कि एक बार भी कांग्रेस की ओर से यह प्रयास नहीं किया गया कि दोबारा शहीद परिवार से बातकर के पूछें कि उसे पूरी रकम मिली की नहीं. यह … Read more

Hathras पीड़ित परिवारों से मिलकर बोले Rahul Gandhi, ‘राजनीति नहीं होनी चाहिए, प्रशासन की गलती है’

हाथरस कांग्रेस सांसद राहुल गांधी शुक्रवार सुबह हाथरस पहुंचे. यहं उन्होंने भगदड़ पीड़ित से मुलाकात की. उन्होंने इससे पहले अलीगढ़ पहुंचकर भी पीड़ितों से मुलाकात की थी.   उन्होंने हाथरस के ग्रीन पार्क में पीड़ितों से मुलाकात की. सभी पीड़ित इसी पार्क में इकट्ठा हुए थे. वह भगदड़ में जान गंवा चुकी मुन्नी देवी और आशा देवी के साथ घायल माया देवी से मिले. ये सभी हाथरस के नवीपुर खुर्द के रहने वाले हैं. राहुल गांधी इस हादसे में दम तोड़ चुकी ओमवती के परिवार के लोगों से भी मिले. बता दें कि इस हादसे में जान गंवाने वालों में हाथरस जिले के बीस और शहर के दस लोग शामिल हैं. राहुल गांधी ने क्या कहा? हाथरस पीड़ितों से मुलाकात के बाद राहुल गांधी ने कहा कि बहुत परिवारों को नुकसान हुआ है, बहुत लोगों की मौत हुई है. मैं इसको राजनीतिक प्रिज्म से नहीं कहना चाहता हूं. मगर प्रशासन की कमी तो है, गलतियां तो हुई हैं. ये पता लगाया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि लेकिन सबसे जरूरी बात ये है कि मुआवजा सही मिलना चाहिए क्योंकि ये गरीब परिवार हैं और मुश्किल का समय है इनके लिए. तो मुआवजा ज्यादा से ज्यादा मिलना चाहिए. उन्होंने कहा कि मैं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से कहना चाहता हूं कि पीड़ितों को दिल खोलकर मुआवजा देना चाहिए. ये गरीब लोग है, इनको पैसे की जरूरत है. अगर पैसा एक साल बाद देंगे तो इसका कोई फायदा नहीं होगा. वहां पुलिस की तरफ से व्यवस्था सही नहीं थी, ऐसा परिवार वालों ने बताया है. जो चिंता की बता है. राहुल गांधी शुक्रवार सुबह अलीगढ़ के पिलखना गांव पहुंचे थे, जहां उन्होंने यहां प्रेमवती के परिवार और शांति देवी के बेटे से मुलाकात की. राहुल गांधी पिलखना गांव के जिस घर पहुंचे थे, वहां हाथरस भगदड़ में घायल हो चुके दो पीड़ित परिवार के लोग भी मौजूद थे. राहुल गांधी ने पीड़ित परिवारों से क्या कहा? राहुल गांधी ने अलीगढ़ पहुंचकर पीड़ितों को आश्वासन दिया है कि वह संसद में इस मामले को उठाएंगे और उन्हें न्याय दिलाने की कोशिश करेंगे. अलीगढ़ में एक पीड़ित परिवार की सदस्य ने बताया कि राहुल गांधी ने हमें मदद का आश्वासन दिया था. उन्होंने कहा कि पार्टी के माध्यम से हमारी पूरी मदद की जाएगी. उन्होंने हमसे पूरी घटना के बारे में पूछा कि घटना कैसे हुई थी. अलीगढ़ में भगदड़ पीड़ितों ने क्या कहा? राहुल गांधी ने अलीगढ़ के पिलखना गांव पहुंचकर हाथरस की भगदड़ में दम तोड़ चुकी प्रेमवती की बहू सोनिया से मुलाकात की. इस मुलाकात के बाद सोनिया ने आज तक को बताया कि मेरी सास में अंधविश्वास भरा हुआ था. अब अंधविश्वास का पर्दा हट गया. वो भगवान होता तो क्या अपने भक्तों को नहीं बचाता? हमने अपनी सास की मौत के बाद बाबा की फोटो उठाकर फेंक दी है. हाथरस में 3 पीड़ित परिवारों से मिलेंगे राहुल गांधी राहुल अलीगढ़ से सीधे हाथरस पहुंचेंगे, जहां वह तीन पीड़ित परिवारो से मिलेंगे. वह हाथरस भगदड़ में जान गंवा चुकीं मुन्नी देवी और आशा देवी के साथ घायल माया देवी के परिवार से भी मुलाकात करेंगे. बता दें कि मुन्नी देवी और आशा देवी हाथरस के नवीपुर खुर्द की रहने वाली हैं. वह इस हादसे में जान गंवा चुकी मुन्नी देवी, आशा देवी और घायल माया देवी के परिवार से मिलेंगे. वह जिला अस्पताल में  भर्ती हैं. राहुल गांधी के इस दौरे को लेकर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है. उत्तर प्रदेश के हाथरस में इस सप्ताह की शुरुआत में एक धार्मिक आयोजन में भगदड़ मचने से 121 लोगों की मौत हो गई थी. मरने वालों में ज्यादातर महिलाएं और बच्चे शामिल हैं. इस घटना में स्वयंभू भगवान ‘भोले बाबा’ उर्फ ​​नारायण साकार हरि की ओर से एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था. आयोजन समिति से जुड़े छह लोग गिरफ्तार उत्तर प्रदेश पुलिस ने गुरुवार को कार्यक्रम की आयोजन समिति से जुड़े छह लोगों को गिरफ्तार किया है. पुलिस की आंतरिक जांच रिपोर्ट में प्रबंधन और सुरक्षा प्रोटोकॉल में गंभीर खामियों को पता चला है. मुख्य आरोपी देव प्रकाश मधुकर पर 1 लाख का इनाम हाथरस हादसे पर प्रेस कॉन्फ्रेंस में आईजी शलभ माथुर ने कहा कि मुख्य आरोपी देव प्रकाश मधुकर पर एक लाख का इनाम रखा गया है. पुलिस जल्द ही कोर्ट से उसके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी करवाएगी. आईजी ने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो भोले बाबा से पूछताछ की जाएगी. बाबा का रोल सामने आया, तो उसके खिलाफ करवाई की जाएगी. हालांकि FIR में भोले बाबा का नाम नहीं है. लेकिन भोले बाबा के अपराधिक इतिहास की जानकारी जुटाई जा रही है. उनके फॉलोअर्स हर शहर में हैं, ऐसे में कई शहरों में पुलिस की टीमें लगी हुई हैं. बाबा ने नौकरी से वीआरएस लिया था, न्यायिक आयोग इसमें प्रशासनिक लापरवाही की जांच करेगा. आईजी ने कहा कि जिन आरोपियों को पूछताछ के बाद अरेस्ट किया गया है, वह आयोजन समिति के मेंबर हैं. आरोपी घटना के बाद मौके से फरार हो गए थे. पुलिस ने जिन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, उनमें 2 महिलाएं शामिल हैं. आरोपी खुद ही क्राउड मैनेजमेंट का काम करते थे. इस काम के लिए प्रशासन का हस्तक्षेप इन्हें स्वीकार नहीं था. वहीं, जिला मजिस्ट्रेट आशीष कुमार ने कहा कि भगदड़ के बाद 21 शवों को आगरा, 28 को एटा, 34 को हाथरस और 38 को अलीगढ़ ले जाया गया. उत्तर प्रदेश सरकार ने बुधवार को हाथरस त्रासदी की जांच के लिए हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय न्यायिक आयोग का गठन किया, जो इस संभावना की भी जांच कर रहा है कि भगदड़ के पीछे कोई साजिश थी. पैनल दो महीने में अपनी रिपोर्ट सौंपेगा.  

लोकसभा में बीजेपी को खुली चुनौती देने के बाद राहुल गांधी जल्द गुजरात में अपनी सक्रियता बढ़ा सकते है

अहमदाबाद  कांग्रेस नेता राहुल गांधी जल्द ही गुजरात के मोर्चे पर सक्रिय होंगे। राहुल गांधी ने लोकसभा में नेता विपक्ष के तौर पर बोलते हुए बीजेपी को गुजरात में हराने की चुनौती दी थी। इसके बाद सवाल खड़ा हुआ था कि राहुल गांधी ने बीजेपी को इतनी बड़ी चुनौती कैसे दे दी? अब राहुल गांधी के गुजरात में सक्रिय होने के संकेत मिले हैं। राज्य में हिंदू वाले बयान को लेकर जहां कांग्रेस और बीजेपी आमने-सामने हैं तो वहीं इसी बीच राहुल गांधी गुजरात का पहला दौरा सकते हैं। इसके संकेत पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शक्ति सिंह गोहिल ने दिए हैं। गोहिल ने कहा कि बीजेपी के हमले के दौरान बब्बर शेर की तहत मुकाबला करने वाले कार्यकर्ताओं से मिलने के लिए राहुल गांधी जल्द राज्य का दौरा करेंगे। गोहिल ने कहा कि कांग्रेस दफ्तर के बाहर हुई झड़प के मामले में पुलिस ने एकतरफा कार्रवाई की है। गोहिल ने 6 जुलाई को पूरे राज्य के कार्यकर्ताओं को अहमदाबाद आने की अपील की है। संभावना जताई जा रही है कि अगर अहमदाबद पुलिस बीजेपी कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई नहीं करती है तो राहुल गांधी छह जुलाई को भी अहमदाबाद पहुंच सकते हैं।अहमदाबाद में सात जुलाई को 18 किलोमीटर लंबी भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा निकलनी है। लंबे समय बाद आमना-सामना गुजरात में कांग्रेस तीन दशक से सत्ता से बाहर है, लेकिन राज्य में पिछले कई सालों में ऐसी कोई घटना नहीं हुई। जिसमें दोनों पार्टियों के कार्यकर्ताओं के बीच सीधी झड़प हुई हो। अहमदाबाद में कांग्रेस कार्यालय के बाहर पुलिस की मौजूदगी में पथराव हुआ था। 2013 तक ऐसी घटनाएं दोनों पार्टियों की युवा इकाईयों के बीच छात्र राजनीति में होती थीं। कांग्रेस का कहना है कि राहुल गांधी ने हिंदू धर्म को लेकर जो भी कहा है वह एकदम सही है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष शक्ति सिंह गोहिल को राहुल गांधी का करीबी माना जाता है। लोकसभा में बीजेपी को क्लीन स्वीप से रोकने और राजकोट अग्निकांड हादसे पर पूरे शहर के बंद करके गोहिल ने अपना कद बढ़ाया है। ऐसा माना जा रहा है कि अब राहुल गांधी सीधे तौर पर गुजरात में अपनी सक्रियता बढ़ा सकते हैं। लोकसभा चुनावों नहीं आए थे लोकसभा चुनावों में राहुल गांधी गुजरात के दौरे पर नहीं आए थे। प्रियंका गांधी ने सिर्फ वलसाड और बनासकांठा में सभाएं की थी। गोहिल के बयान को राजनीतिक हलकों में बड़ी तैयारी से जोड़कर देखा जा रहा है। संभावना है कि राहुल गांधी राज्य में पंचायत चुनावों से पहले पूरी तरह से सक्रिय हो सकते हैं। इसी के साथ कांग्रेस पार्टी के राज्य में नए सिरे से संगठन को मजबूत करने की कवायद भी शुरू हो सकती है। कांग्रेस के एक नेता ने कहा कि आने वाले दिनों में राज्य की दो विधानसभा सीटों पर उप चुनाव होना है। पार्टी दोनों सीटों पर मजबूती से लड़ेगी। माणावदर सीट को पार्टी इंडिया अलांयस के तहत आम आदमी पार्टी के लिए छोड़ सकती है। इसी महीने एंट्री संभव राहुल गांधी ने लोकसभा में बीजेपी को सीधी चुनौती फेंकते हुए कहा था कि हम आपको गुजरात में हराएंगे। उनके बयान का मतलब 2027 के चुनावों से था। गुजरात की 182 सदस्यों वाली विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 92 सीटों का है। कांग्रेस ने पिछले चुनावों में 17 सीटें जीती थीं, हालांकि 2017 के चुनावों में पार्टी ने 77 सीटें जीती थीं। तब बीजेपी पिछले दो दशक में पहली बार दो अंकों पर आ गई थी। बीजेपी को 99 सीटें मिली थी। पार्टी को उस चुनाव में 41.44 फीसदी वोट मिले थे। बीजेपी के खाते में 49.05 प्रतिशत वोट गए थे। राहुल गांधी के नेता विपक्ष बनने के बाद प्रदेश इकाई गुजरात में उनकी सक्रियता बढ़ाना चाहती है। इसकी शुरुआत इसी महीने हो सकती है। चर्चा यह भी है कि राहुल गांधी अपने दौरे में राजकोट टीआरपी गेम जोन के पीड़ितों से मिलने के लिए भी जा सकते हैं। राहुल गांधी अपने दौरों में मोरबी ब्रिज हादसे, वडोदरा हरनी नाव हादसे के पीड़ितों से भी मिलने जा सकते हैं। गुजरात प्रदेश कांग्रेस समिति पीड़ितों को न्याय दिलाने को लेकर बड़े कार्ययोजना पर काम कर रही है। सूत्रों की मानें तो पार्टी आने वाले दिनों के इसका ऐलान कर सकती है। टीम राहुल गांधी का हिस्सा जिग्नेश मेवाणी राजकोट में सक्रिय हैं।  

राहुल गांधी के यूपी में वापसी , वायनाड छोड़ रायबरेली से ही सांसद बनना क्यों चुना?

लखनऊ राहुल गांधी लोकसभा चुनाव 2024 में दो सीटों से लड़े थे। एक केरल की वायनाड सीट थी, तो दूसरी यूपी की रायबरेली सीट थी। दोनों सीटों पर राहुल गांधी को जीत मिली थी। सोमवार को राहुल गांधी ने वायनाड सीट से इस्तीफा दे दिया है। अब यहां पर उपचुनाव होगा। कांग्रेस की ओर से उप चुनाव में प्रियंका गांधी को प्रत्याशी बनाया गया है। यह उनका राजनीतिक डेब्यू है, जिसको लेकर कांग्रेस अलर्ट हो गई है। आखिर राहुल गांधी ने वायनाड सीट को छोड़कर रायबरेली को ही क्यों चुना, जबकि वायनाड सीट पर 2019 में जीत मिली थी और अमेठी में हार गए थे, तो इसके पीछे कई सियासी मायने हैं। खोई जमीन बनाने पर कांग्रेस का फोकस उत्तर प्रदेश में 2024 के लोकसभा चुनाव में इंडिया गठबंधन ने शानदार जीत दर्ज की। इस जीत के बाद न सिर्फ भारतीय जनता पार्टी को बड़ा झटका लगा, बल्कि यूपी की राजनीति में कई तरह की चर्चाओं का जन्म हुआ। यूपी में सबसे ज्यादा 80 लोकसभा सीटे हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को महज एक सीट पर संतोष करना पड़ा था, तो वहीं 2022 के विधानसभा चुनाव में काफी जद्दोजहद के बावजूद यूपी की सिर्फ दो विधानसभा सीटों पर जीत मिली थी, लेकिन इस बार के लोकसभा चुनाव में सपा के साथ चुनाव लड़कर कांग्रेस ने छह सीटें जीती हैं, जिसके बाद यूपी में अपनी खोई हुई राजनीति को मजबूत करने में कांग्रेस जुट गई है। यूपी में कांग्रेस ने बढ़ाई सक्रियता वैसे कांग्रेस पार्टी की यूपी में सक्रियता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता कि लोकसभा चुनाव में गांधी परिवार यूपी में बेहद सक्रिय नजर आया। प्रियंका गांधी, राहुल गांधी, राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के साथ सोनिया गांधी ने भी जनता से इंडिया गठबंधन के पक्ष में मतदान की अपील की। यहीं नहीं सोनिया ने अपने बेटे (राहुल गांधी) को रायबरेली की जनता को सौंपने की बात भी कही और बेटे के लिए प्रचार भी किया था। यूपी में मिली जीत के बाद से कांग्रेस ने यूपी में और सक्रियता बढ़ा दी है। जीत के बाद राहुल गांधी ने रायबरेली में आभार सभा की। 2027 का यूपी विधानसभा चुनाव भी सपा के साथ मिलकर लड़ने के संकेत दिए हैं। अगर ऐसा होता है, तो कांग्रेस को यूपी में फिर संजीवनी मिल जाएगी। वहीं, अगर सपा की ओर से विधानसभा चुनाव में बात नहीं बनी, तो कांग्रेस उसकी तैयारी अभी से कर दी है। 1952 से रायबरेली पर गांधी परिवार का कब्जा कांग्रेस पार्टी के इस फैसले के बाद कई सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। पहला ये कि राहुल गांधी ने उस सीट को चुना जहां से गांधी परिवार 1952 से जीतता आ रहा। रायबरेली से राहुल के दादा फिरोज गांधी, दादी इंदिरा गांधी और मां सोनिया गांधी पहले भी इस सीट से सांसद रह चुके हैं। इंदिरा के पति फिरोज गांधी ने 1952 में पहली बार इस सीट पर जीत दर्ज की थी। इंदिरा गांधी ने 1967 से 1977 के बीच 10 साल तक इस सीट का प्रतिनिधित्व किया। हालांकि, 1977 में इंदिरा गांधी को हार मिली थी। 2004 से सोनिया ने संभाली रायबरेली की कमान 1980 में इंदिरा गांधी ने दो सीटों रायबरेली और अविभाजित आंध्र प्रदेश में मेडक से चुनाव लड़ा। दोनों सीटों पर जीत दर्ज की। इंदिरा गांधी ने रायबरेली सीट छोड़ दी और मेडक को बरकरार रखा था। 1980 के बाद से गांधी परिवार के वफादार अरुण नेहरू, शीला कौल और कैप्टन सतीश शर्मा ने 2004 तक रायबरेली से जीत हासिल की। इनके बाद सोनिया गांधी यहां से लड़ती रहीं और 2019 तक यहीं से सांसद रहीं। इसके बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में सोनिया ने इस सीट को राहुल के जिम्मे सौंपकर यहां से प्रतिधिनित्व करने का मौका दिया, क्योंकि ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और पारिवारिक विरासत रायबरेली, गांधी परिवार के लिए हमेशा से एक मजबूत गढ़ रहा है। यूपी में बीजेपी को कड़ी चुनौती देना चाहते हैं राहुल राहुल गांधी का यह कदम न केवल उनकी व्यक्तिगत सियासी यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव है, बल्कि यह भारतीय राजनीति के लिए भी एक बड़ा संदेश है। यूपी, देश का सबसे बड़ा राज्य है और यहां की सियासत का राष्ट्रीय राजनीति पर गहरा प्रभाव है। राहुल गांधी का यूपी में रहकर राजनीति करना बीजेपी के लिए भी एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि यूपी में बीजेपी की स्थिति काफी मजबूत है और इस मजबूती को 2027 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी राहुल गांधी के जरिए तोड़ने की कोशिश करेगी। वहीं, परिवार और पार्टी के वरिष्ठ नेता भी चाह रहे थे कि राहुल रायबरेली का प्रतिनिधित्व करें। इसके अलावा रायबरेली की जीत इस लिहाज से भी बड़ी है कि परिवार ने अमेठी की खोई सीट भी हासिल कर ली। माना जा रहा कि 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर यहा फैसला लिया गया है। केरल के वायनाड के बजाय उत्तर प्रदेश की रायबरेली लोकसभा सीट से सांसद रहना क्यों चुना, हम इसके पांच कारण आपको बता रहें हैं… 1) यूपी में खोई जमीन पाने की उम्मीद 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में छह सीटें जीतीं. 2019 में उसे सिर्फ रायबरेली सीट पर जीत मिली थी. इंडिया ब्लॉक ने यूपी में 43 सीटें जीतीं, जिनमें से 37 समाजवादी पार्टी ने जीतीं. यह एनडीए के लिए एक बड़ा झटका था, जिसने 2019 में यूपी की 80 लोकसभा सीटों में से 62 सीटें जीती थीं. 2024 के चुनाव में, एनडीए सिर्फ 36 सीटें जीतने में कामयाब रही, जबकि बीजेपी को 33 सीटें हासिल हुईं. वोट शेयर के मामले में सबसे बड़ी हार मायावती के नेतृत्व वाली बहुजन समाज पार्टी (बसपा) को हुई. इसका वोट शेयर 19% से घटकर 9% र​ह गया.  ये वोट मुख्य रूप से समाजवादी पार्टी के साथ-साथ कांग्रेस को भी मिले। अगर एसपी ने बीएसपी के वोट शेयर का 6-7% हासिल किया, तो कांग्रेस को 2-3% का फायदा हुआ. कांग्रेस को उम्मीद है कि वह उत्तर प्रदेश में दलित, मुस्लिम और ब्राह्मण वोटों का फायदा उठा सकती है. राहुल गांधी द्वारा वायनाड के बजाय रायबरेली सीट चुनने का पहला कारण यही नजर आता है.  2) रणनीति बदलाव और आक्रामक रुख 2024 लोकसभा चुनाव के नतीजे से उत्साहित … Read more

भारतीय टीम 20 जून को सुपर 8 के अपने पहले मुकाबले में अफगानिस्तान का सामना करने के लिए तैयार : राहुल द्रविड़

नई दिल्ली  भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच राहुल द्रविड़ ने फ्लोरिडा में भारत के आखिरी टी-20 विश्व कप लीग मैच के गीले आउटफील्ड के कारण रद्द होने के बादर कनाडा टीम की प्रशंसा की है। भारतीय खिलाड़ी बारबाडोस में 20 जून को सुपर 8 के अपने पहले मुकाबले में अफगानिस्तान का सामना करने के लिए तैयार हैं। बीसीसीआई ने  ड्रेसिंग रूम में कनाडा के खिलाड़ियों और स्टाफ सदस्यों के साथ द्रविड़ की विशेष बातचीत का एक वीडियो साझा किया है। शनिवार को द्रविड़ को कनाडा के कोच पुबुदु दासनायके से हस्ताक्षरित जर्सी मिली। भारतीय मुख्य कोच ने टूर्नामेंट में उनके प्रयासों और युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा के रूप में उभरने के लिए कनाडाई टीम की सराहना की। द्रविड़ ने बीसीसीआई द्वारा एक्स पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में कहा,, दोस्तों, बहुत-बहुत धन्यवाद। निजी तौर पर, मैं आप लोगों द्वारा इस टूर्नामेंट में दिए गए शानदार योगदान को स्वीकार करना और उसकी सराहना करना चाहता हूँ। आप लोग ईमानदारी से हम सभी के लिए एक महान प्रेरणा हैं, जिन्होंने हमें दिखाया है कि हम वास्तव में इस खेल से प्यार करते हैं। इस टूर्नामेंट को खेलने, क्वालीफाई करने, यहाँ आने और इस टूर्नामेंट को सफल बनाने के लिए आप लोग जिस तरह के त्याग करने को तैयार हैं, उसके लिए बधाई हो। आप सभी ने अच्छा काम किया। उन्होंने कहा, मैं बस इतना ही कहूंगा कि आप इसे आगे बढ़ाते रहें। आप लोग प्रेरणादायी हैं। न केवल दूसरे लोग, बल्कि मुझे यकीन है कि आप अपने देश के युवा लड़कों और लड़कियों को भी खेल खेलने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। इसलिए, ईमानदारी से कहूं तो परिणाम मायने नहीं रखते। मुझे लगता है कि आप प्रेरणास्रोत बन रहे हैं, यह बात दुनिया के लिए बहुत अच्छी है। गुरुवार को अफगानिस्तान के खिलाफ सुपर 8 मुकाबले से पहले भारतीय टीम बारबाडोस पहुंची। बारबाडोस पहुंचने के बाद, ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या काफी उत्साहित थे और उन्होंने आयोजन स्थल के व्यंजनों का आनंद लेने की इच्छा जताई। हार्दिक ने कहा, हम बारबाडोस में हैं, समुद्र तट पर जाने, अच्छी धूप का आनंद लेने और साथ ही खूबसूरत साफ नीले पानी का आनंद लेने के लिए उत्सुक हैं। एक ही समय में शानदार लोगों के साथ इतना शानदार टूर्नामेंट खेलने के लिए इससे बेहतर कोई जगह नहीं हो सकती।    

राहुल और प्रियंका गांधी आज आएंगे Raebareli, मतदाताओं का आभार जताने

 रायबरेली लोकसभा चुनाव 2024 में कांग्रेस ने एक बार बेहतर प्रदर्शन किया है. कांग्रेस ने इस बार 99 सीटें जीती हैं. इसी कड़ी में राहुल गांधी ने इस बार दो सीटों से चुनाव लड़ा था. उन्हें दोनों सीटों पर जीत हासिल हुई है. राहुल गांधी में इस बार रायबरेली और वायनाड से चुनाव लड़ा था. उन्होंने दोनों सीटों पर 3 लाख से ज्यादा वोटों पर जीत हासिल की है. इसी कड़ी में लोगों को धन्यवाद देने के लिए वो आज  11 जून को रायबरेली जाएंगे. 11 जून को जाएंगे रायबरेली जानकारी के अनुसार, राहुल, प्रियंका और सोनिया गांधी आज 11 जून को रायबरेली जाएगी. इस दौरान वो वहां के लोगों को मिलेंगी और उन्हें धन्यवाद कहेंगी. इसके अलावा 12 जून को राहुल गांधी वायनाड भी जा सकते हैं. रायबरेली और वायनाड में हासिल की बड़ी जीत राहुल गांधी पहली बार रायबरेली सीट से लोकसभा चुनाव लड़ रहे थे. उनसे पहले सोनिया गांधी यहां से सांसद थी. स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए सोनिया गांधी ने इस बार लोकसभा चुनाव में हिस्सा नहीं लिया था. उन्होंने अपनी सीट को राहुल गांधी को दे दिया था. राहुल गांधी ने यहां से 3,90,030 मतों के अंतर से जीत हासिल की थी. इस चुनाव में उन्हें  6,87,649 वोट मिले थे जबकि प्रतिद्वंद्वी भारतीय जनता पार्टी के दिनेश प्रताप सिंह को 2,97,619 वोट मिले थे. वायनाड सीट पर भी राहुल गांधी ने एक बड़ी जीत हासिल की है. उन्होंने सीपीआई की प्रत्याशी एन्नी राजा को 3,64,422 मतों से हराया है. यहां पर उन्हें कुल 6,47,445 वोट मिले थे. छोड़नी पड़ेगी एक सीट नियमों के अनुसार, उम्मीदवार सिर्फ एक ही सीट से सांसद रह सकता हैं. इसी वजह से राहुल गांधी रायबरेली या वायनाड की सीट को छोड़ना पड़ सकता है. हालांकि उम्मीद की जा रही हैं कि वो  वायनाड की सीट को छोड़ सकते हैं.

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